Monday, July 6, 2026
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“जब पर्दे के जादूगर चले गए: 21 अक्टूबर का दिन, जब सिनेमा के दो सितारे सदा के लिए अमर हो गए”

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 21 अक्टूबर की तारीख हमेशा एक भावनात्मक अध्याय के रूप में याद की जाती है। इस दिन दो दिग्गज कलाकार — यश चोपड़ा और अजीत — इस दुनिया से विदा हुए, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, दृष्टि और अभिनय से भारतीय फ़िल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। दोनों का योगदान न केवल पर्दे पर, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना में गहराई से अंकित है। आइए जानें इन दो महान हस्तियों के जीवन, कर्म और उनकी सिनेमा यात्रा की अमर गाथा।
यश चोपड़ा – रोमांस के राजा, संवेदना के चित्रकार (1932–2012)
27 सितंबर 1932 को लाहौर (तत्कालीन ब्रिटिश भारत, अब पाकिस्तान) में जन्मे यश राज चोपड़ा भारतीय सिनेमा के उन निर्माताओं में से थे जिन्होंने फिल्मों में प्रेम, संगीत और भावनाओं को एक नई भाषा दी। प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में प्राप्त करने के बाद, देश के विभाजन के समय उनका परिवार जालंधर, पंजाब आ गया। यहीं से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर मुंबई का रुख किया — सपनों के उस शहर का, जिसने उन्हें यशराज बनने का अवसर दिया।
अपने बड़े भाई बी.आर. चोपड़ा के निर्देशन में सहायक के रूप में करियर शुरू करने वाले यश ने 1959 में “धूल का फूल” से बतौर निर्देशक पदार्पण किया। यह फ़िल्म समाज की असमानता और मानवता की करुणा का गहरा संदेश देने वाली थी। इसके बाद “वक़्त”, “इत्तेफ़ाक़”, “दीवार”, “कभी कभी”, “सिलसिला”, “चांदनी”, “दिल तो पागल है” और “वीर-ज़ारा” जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय रोमांस का प्रतीक बना दिया।
उन्होंने यश राज फ़िल्म्स (YRF) की स्थापना कर भारतीय सिनेमा को एक मजबूत संस्थागत ढांचा दिया, जिसने न केवल व्यावसायिक दृष्टि से बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी फिल्मों की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
21 अक्टूबर 2012 को मुंबई में उनका निधन हुआ। उस दिन भारतीय सिनेमा ने एक स्वप्नद्रष्टा को खो दिया, जिसने पर्दे पर भावनाओं की भाषा को कविता बना दिया। यश चोपड़ा का नाम आज भी हर रोमांटिक फ्रेम में जीवित है।
अजीत – विलेन का शालीन चेहरा, संवाद का अंदाज़ (1922–1998):
27 जनवरी 1922 को गोलकोंडा, हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) में जन्मे हमीद अली खान, जिन्हें दुनिया “अजीत” नाम से जानती है, भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे स्टाइलिश और प्रभावशाली खलनायकों में गिने जाते हैं। प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद में हुई, और अभिनय के प्रति रुचि ने उन्हें पढ़ाई छोड़कर मुंबई की फ़िल्मी दुनिया की ओर खींच लिया।
1946 में उन्होंने “करवान” से फ़िल्मी करियर की शुरुआत की, लेकिन शुरुआती दौर में वे मुख्य नायक के रूप में ज्यादा सफल नहीं हो सके। 1960 के दशक में जब उन्होंने अपने किरदारों को नकारात्मक छवि में ढाला, तभी उनका करियर चरम पर पहुंचा। “कल राज़”, “जंजीर”, “कालीचरण”, “हमेशा खलनायक” और “नंबरदार” जैसी फिल्मों में उनके संवाद और स्टाइल दर्शकों के दिल में बस गए।
उनका प्रसिद्ध संवाद “मोना डार्लिंग” आज भी हिंदी फिल्मों का प्रतीक बन चुका है — एक ऐसा संवाद जो किसी अभिनेता को अमर कर देता है। अजीत ने न केवल खलनायक की परिभाषा बदली, बल्कि यह भी दिखाया कि विलेन का किरदार भी गरिमा और स्टाइल के साथ निभाया जा सकता है।
21 अक्टूबर 1998 को मुंबई में उनका निधन हुआ। उनके साथ एक युग समाप्त हुआ — वह दौर, जब विलेन भी दर्शकों का हीरो बन सकता था।
21 अक्टूबर — सिनेमा के दो युगों की स्मृति में एक भावनात्मक तिथि
यह दिन भारतीय सिनेमा की उस संवेदना को याद दिलाता है, जहाँ एक ओर यश चोपड़ा ने प्रेम को शुद्धता से सजाया, वहीं अजीत ने खलनायकी को एक अलग गरिमा दी। एक ने सपनों को रंगीन बनाया, तो दूसरे ने चरित्रों को गहराई दी। दोनों ही कलाकारों ने फ़िल्मों की भाषा, भाव और प्रस्तुति में ऐसा योगदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
आज भी जब सिनेमा प्रेमी किसी रोमांटिक दृश्य या दमदार विलेन को याद करते हैं, तो यश और अजीत का नाम स्वाभाविक रूप से जुबां पर आ जाता है। उनकी स्मृति हर वर्ष 21 अक्टूबर को भारतीय फ़िल्म उद्योग के लिए एक प्रेरणा दिवस बनकर लौट आती है।

🌸 “21 अक्टूबर के सितारे: जिन्होंने अपनी प्रतिभा से भारत के इतिहास में रोशनी भर दी” 🌸

भारत का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं से नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों से जीवंत होता है जिन्होंने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और कर्म से देश की दिशा तय की। 21 अक्टूबर का दिन ऐसे ही कई महान व्यक्तियों का जन्मदिन लेकर आता है—कला, राजनीति, प्रशासन और अन्वेषण के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले इन सितारों की जीवन यात्रा आज भी प्रेरणा देती है। आइए, जानें विस्तार से उन व्यक्तित्वों के बारे में जो इस दिन जन्मे और जिन्होंने भारत की पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

1. हेलन (जन्म: 21 अक्टूबर 1939, बर्मा):
हेलन ऐन रिचर्डसन खान, जिन्हें पूरी दुनिया हेलन के नाम से जानती है, हिन्दी सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध नर्तकी और अदाकारा रही हैं। इनका जन्म बर्मा (अब म्यांमार) में हुआ था, और द्वितीय विश्व युद्ध के समय उनका परिवार भारत आ गया। बचपन की कठिनाइयों और आर्थिक संघर्षों के बावजूद हेलन ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने महज़ 19 वर्ष की उम्र में फ़िल्म ‘अवारा’ के गीत “मेरा नाम चिन चिन चू” से प्रसिद्धि पाई।
उनकी अदाकारी और नृत्यशैली ने 50 से 70 के दशक के सिनेमा को नई परिभाषा दी। ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘महबूबा महबूबा’, ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ जैसे गीतों में उनकी उपस्थिति ने पर्दे पर जादू बिखेरा। 1999 में उन्हें फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। हेलन का जीवन इस बात का प्रतीक है कि संघर्षों से जूझकर भी इंसान कला से अमर हो सकता है।


2. डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला (जन्म: 21 अक्टूबर 1937, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर):
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला एक प्रभावशाली नाम हैं। उनका जन्म श्रीनगर में हुआ। वे शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला के पुत्र हैं, जो जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री थे। फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने इंग्लैंड से मेडिसिन की शिक्षा ली, लेकिन राजनीति में कदम रखकर उन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया।
1982 में अपने पिता की मृत्यु के बाद वे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने और राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला और विकास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में कई सुधार किए।
उनकी छवि एक उदारवादी नेता के रूप में रही, जिन्होंने हमेशा लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की वकालत की। भारत की एकता और कश्मीर की शांति के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है।


3. शम्मी कपूर (जन्म: 21 अक्टूबर 1931, मुंबई, महाराष्ट्र):
शम्मी कपूर, हिन्दी सिनेमा के “Yahoo Star” कहे जाने वाले, उन कलाकारों में से थे जिन्होंने रोमांस और ऊर्जा को पर्दे पर एक नई पहचान दी। उनका जन्म पृथ्वीराज कपूर के परिवार में हुआ, जो भारतीय फ़िल्म जगत का सबसे प्रतिष्ठित परिवार है।
1950 के दशक में उन्होंने “तुमसा नहीं देखा” और “जंगली” जैसी फिल्मों से युवा दिलों में सनसनी मचा दी। उनकी अभिनय शैली में जो जोश और संगीत के प्रति जो लय थी, वह उन्हें अपने समकालीन अभिनेताओं से अलग बनाती थी।
‘कश्मीर की कली’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘तीसरी मंज़िल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने भारतीय सिनेमा में संगीत की अभिव्यक्ति को एक नई दिशा दी। शम्मी कपूर केवल अभिनेता नहीं, बल्कि एक युग की भावना थे, जो आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा हैं।

4. सुरजीत सिंह बरनाला (जन्म: 21 अक्टूबर 1925, अटारी, पंजाब):
पंजाब की राजनीति में ईमानदारी और संतुलन के प्रतीक सुरजीत सिंह बरनाला का जन्म अटारी (अमृतसर, पंजाब) में हुआ था। उन्होंने लाहौर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और प्रारंभ से ही सामाजिक सेवा में रुचि रखी।
1950 के दशक में वे शिरोमणि अकाली दल से जुड़े और बाद में पंजाब के मुख्यमंत्री बने। बरनाला ने अपने शासनकाल में कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए।
उनकी सादगी और शालीनता के कारण उन्हें “जन नेता” कहा जाता था। उन्होंने तमिलनाडु, उत्तराखंड, अंध्र प्रदेश और अंडमान-निकोबार जैसे राज्यों के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया। उनका जीवन भारतीय लोकतंत्र की उस परंपरा का प्रतीक है जो सेवा और समर्पण पर आधारित है।

5. अशोक लवासा (जन्म: 21 अक्टूबर 1957, हरियाणा):
अशोक लवासा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं। उनका जन्म हरियाणा में हुआ और शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की। वे अपनी सत्यनिष्ठा और नीतिगत दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने भारत के चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य करते हुए निष्पक्ष चुनावों की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पहले वे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में भी अहम पदों पर रहे।
लवासा ने विश्व बैंक समूह के उपाध्यक्ष के रूप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ उन्होंने विकासशील देशों में वित्तीय सुधारों पर काम किया। वे एक ऐसे प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने ईमानदारी को नीति बना दिया।

6. काशीनाथ नारायण दीक्षित (जन्म: 21 अक्टूबर 1889, उत्तर प्रदेश):
काशीनाथ नारायण दीक्षित भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इतिहास और संस्कृत की पढ़ाई की।
वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) से जुड़े और कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई का नेतृत्व किया। उनके योगदान से हड़प्पा सभ्यता, मौर्य कालीन मूर्तिकला और गुप्तकालीन स्थापत्य कला पर महत्वपूर्ण शोध संभव हुआ।
उनकी अनुसंधान प्रवृत्ति और भारत की प्राचीन धरोहर के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय इतिहास के अमूल्य संरक्षक के रूप में स्थापित किया। दीक्षित जी ने भारतीय संस्कृति को केवल खोजा नहीं, बल्कि उसे जनमानस तक पहुँचाने का कार्य भी किया।

7. श्रीकृष्ण सिंह (जन्म: 21 अक्टूबर 1887, नवादा, बिहार):
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें प्यार से “श्री बाबू” कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राज्य निर्माण के अग्रणी नेता थे। उनका जन्म नवादा ज़िले के उन्नाव गाँव में हुआ।
उन्होंने पटना कॉलेज से स्नातक किया और स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर जेल भी गए। 1946 में वे बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने और उन्होंने औद्योगिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास की मजबूत नींव रखी।
उनके नेतृत्व में बिहार ने नालंदा, राजगीर और पाटलिपुत्र जैसे ऐतिहासिक नगरों की पुनर्स्थापना देखी। वे गांधीजी के निकट सहयोगी रहे और सादगी के प्रतीक माने जाते हैं।
श्री बाबू का नाम आज भी “बिहार के निर्माण पुरुष” के रूप में लिया जाता है।

8. नैन सिंह रावत (जन्म: 21 अक्टूबर 1830, मुनस्यारी, उत्तराखंड):
नैन सिंह रावत भारत के पहले खोजी सर्वेक्षक (Explorer) थे, जिन्होंने ब्रिटिश काल में हिमालय और तिब्बत के दुर्गम क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया। उनका जन्म मुनस्यारी (उत्तराखंड) के मिलम गाँव में हुआ था।
उन्होंने ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GTSI) के तहत तिब्बत, कैलाश मानसरोवर और ल्हासा तक के मार्गों की खोज की। बिना आधुनिक उपकरणों के, नैन सिंह ने नक्शों, ऊँचाई और भौगोलिक निर्देशांकों को अद्भुत सटीकता से दर्ज किया।
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें Companion of the Indian Empire (CIE) की उपाधि दी, और रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी ने उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया।
उनका जीवन साहस, विज्ञान और देशभक्ति का अद्वितीय संगम है — जो आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
21 अक्टूबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि प्रतिभा, संघर्ष और योगदान का प्रतीक है। इन महान विभूतियों ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी पहचान बनाई, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। राजनीति से लेकर कला, प्रशासन से लेकर पुरातत्व और विज्ञान तक — इस दिन जन्मे इन भारतीय नायकों ने यह साबित किया कि जन्मभूमि चाहे कोई भी हो, कर्मभूमि ही पहचान बनाती है।

21 अक्टूबर: इतिहास के आईने में बदलते युग की कहानियाँ — जब इंसानियत, सत्ता और संघर्ष ने दिशा बदली

21 अक्टूबर का दिन विश्व इतिहास में अनेक निर्णायक घटनाओं का साक्षी रहा है। यह तिथि केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास, संघर्ष और आदर्शों की गाथा है। इस दिन कभी साम्राज्य बदले, कभी स्वतंत्रता के बीज बोए गए, और कभी मानवता ने अपने नए आयाम गढ़े। आइए, 21 अक्टूबर की ऐतिहासिक घटनाओं पर विस्तृत दृष्टि डालते हैं, जो हमें यह सिखाती हैं कि समय कभी रुकता नहीं — वह सृजन, संघर्ष और परिवर्तन की सतत धारा है।

  1. 1296 – अलाउद्दीन ख़िलजी का दिल्ली की गद्दी पर आसीन होना
    दिल्ली सल्तनत का इतिहास 21 अक्टूबर 1296 को नया मोड़ लेता है, जब अलाउद्दीन ख़िलजी ने सत्ता संभाली। उसकी नीतियों ने भारत के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया। उसने तुर्की आक्रांताओं की शक्ति को चुनौती दी और व्यापारिक नियंत्रण से लेकर बाज़ार व्यवस्था तक कई सुधार किए। यही वह काल था जब दिल्ली की दीवारों से लेकर दक्कन तक उसकी सत्ता गूंज उठी।
  2. 1555 – इंग्लैंड की संसद ने फिलिप को स्पेन का राजा मानने से इंकार किया
    इस निर्णय ने इंग्लैंड के राजनीतिक इतिहास को प्रभावित किया। संसद का यह रुख ब्रिटिश संप्रभुता के संरक्षण का प्रतीक था। फिलिप और मैरी की शादी के बावजूद इंग्लैंड ने स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्र का शासन किसी बाहरी सत्ता के अधीन नहीं होगा। यह घटना ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।
  3. 1727 – रूस और चीन के बीच सीमाई समझौता
    दो एशियाई महाशक्तियों के बीच यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण था। उस समय सीमा विवादों ने कई संघर्षों को जन्म दिया था, परंतु इस समझौते ने व्यापार और राजनयिक संबंधों में नई शुरुआत की। इस घटना ने पूर्वी एशिया के भविष्य के भू-राजनीतिक समीकरणों को भी आकार दिया।
  4. 1854 – फ्लोरेंस नाइटिंगेल का क्रिमिया युद्ध में योगदान
    ‘लेडी विद द लैंप’ कहलाई जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल 38 नर्सों के दल के साथ क्रिमिया युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा हेतु रवाना हुईं। उनका यह साहसिक कदम आधुनिक नर्सिंग की नींव बन गया। नाइटिंगेल की करुणा और अनुशासन ने चिकित्सा जगत को मानवीय संवेदना की दिशा दी।
  5. 1871 – अमेरिका में पहला आउटडोर एथलेटिक खेल
    न्यूयॉर्क में हुए पहले गैर-व्यावसायिक आउटडोर एथलेटिक खेल ने आधुनिक खेल संस्कृति की शुरुआत की। इस आयोजन ने युवाओं में स्वास्थ्य, अनुशासन और खेल भावना को बढ़ावा दिया। आज के ओलंपिक और विश्वस्तरीय खेलों की नींव ऐसे ही आयोजनों से पड़ी।
  6. 1918 – मार्गरेट ओवन की टाइपिंग का विश्व रिकॉर्ड
    मार्गरेट ओवन ने एक मिनट में 170 शब्द टाइप करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दक्षता का उदाहरण थी, बल्कि उस युग में महिलाओं की कार्यक्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक भी बनी। उनका यह रिकॉर्ड महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बना।
  7. 1934 – जयप्रकाश नारायण और कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना
    स्वतंत्रता संग्राम के दौर में जयप्रकाश नारायण ने समाजवाद के विचारों को भारत में संगठित रूप दिया। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने भारतीय राजनीति में विचारधारात्मक जागृति लाई। इसने युवा वर्ग को राष्ट्रीय चेतना के साथ सामाजिक न्याय के लिए एकजुट किया।
  8. 1934 – नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना
    सिंगापुर में इस दिन सुभाषचंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन किया, जिसने “जय हिन्द” का नारा दिया। यह भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में सशस्त्र संघर्ष की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। नेताजी की यह पहल भारतीय युवाओं में देशभक्ति की ज्वाला बनकर फूटी।
  9. 1945 – फ्रांस में महिलाओं को मताधिकार मिला
    इस दिन फ्रांस की महिलाओं ने अपने नागरिक अधिकारों की सबसे बड़ी जीत हासिल की। यह पश्चिमी लोकतंत्रों में लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। फ्रांस में महिला मताधिकार ने विश्वभर की महिलाओं के अधिकार आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
  10. 1948 – संयुक्त राष्ट्र ने रूस के आणविक निरस्त्रीकरण प्रस्ताव को ठुकराया
    यह घटना शीत युद्ध की शुरुआत का संकेत थी। संयुक्त राष्ट्र का यह निर्णय परमाणु शक्ति संतुलन की नई राजनीति को जन्म देता है। उस दौर में हथियारों की होड़ ने विश्व को भय और असुरक्षा के दौर में झोंक दिया।
  11. 1950 – बेल्जियम में मृत्युदंड की समाप्ति
    मानवाधिकारों की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम था। बेल्जियम ने अपने कानून से मौत की सजा को हटाकर न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय बनाया। यह निर्णय आधुनिक समाज में दंड की अवधारणा को पुनः परिभाषित करता है।
  12. 1951 – भारतीय जनसंघ की स्थापना
    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ ने भारतीय राजनीति में वैकल्पिक राष्ट्रवाद का स्वर दिया। इसी संगठन ने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रूप लिया, जिसने देश की लोकतांत्रिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  13. 1954 – फ्रांस-भारत समझौता: पुदुचेरी, करैकल और माहे का विलय
    भारत और फ्रांस के बीच हुए इस समझौते से भारतीय गणराज्य में तीन फ्रांसीसी उपनिवेशों का समावेश हुआ। यह घटना औपनिवेशिक विरासत के अंत और भारत की सांस्कृतिक एकता के विस्तार का प्रतीक बनी।
  14. 1970 – नारमन ई. बोरलॉग को नोबेल शांति पुरस्कार
    ‘हरित क्रांति के जनक’ नारमन बोरलॉग को कृषि क्षेत्र में योगदान हेतु नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। उनके प्रयासों से खाद्य उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई और करोड़ों लोगों को भूख से मुक्ति मिली। यह वैज्ञानिक मानवता की जीत का प्रतीक था।
  15. 1999 – सुकर्णो पुत्री मेघावती का इंडोनेशिया की उपराष्ट्रपति बनना
    मेघावती सुकर्णोपुत्री का चयन इंडोनेशिया की राजनीति में महिलाओं के सशक्त उभार का प्रतीक बना। वह देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक सुकर्णो की विरासत को नए युग में ले जाने वाली नेता साबित हुईं।
  16. 2003 – चीन-पाकिस्तान नौसैनिक अभ्यास
    21 अक्टूबर 2003 को दोनों देशों ने सामरिक सहयोग को गहराने हेतु संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। इसी दिन चीन ने 4-बी कैरियर रॉकेट से दो उपग्रह प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी स्थिति को और मजबूत किया।
  17. 2005 – मुख्तारन माई ‘वूमन ऑफ द ईयर’ चुनी गईं
    पाकिस्तान की मुख्तारन माई ने सामूहिक बलात्कार जैसी भीषण त्रासदी के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और न्याय के लिए आंदोलन छेड़ा। विश्व ने उनके साहस को सलाम करते हुए उन्हें “वूमन ऑफ द ईयर” का सम्मान दिया।
  18. 2007 – बॉबी जिंदल लुसियाना के गवर्नर बने
    भारतीय मूल के अमेरिकी नेता बॉबी जिंदल का गवर्नर बनना प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नागरिकों की नई पहचान स्थापित की, यह उपलब्धि विविधता और लोकतंत्र के संगम का प्रतीक बनी।
  19. 2008 – भारत-पाकिस्तान के बीच 61 साल बाद व्यापारिक कारवां शुरू
    कारवाँ-ए-तिजारत के नाम से शुरू हुई यह पहल दोनों देशों के बीच संवाद और व्यापारिक सहयोग की नई उम्मीद लाई। यह घटना सीमाओं से परे विश्वास की बहाली का प्रतीक थी, जिसने उपमहाद्वीप में शांति की एक किरण जगाई।
  20. 2012 – सायना नेहवाल का डेनमार्क ओपन विजय
    भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने इस दिन डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज़ का खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनकी जीत भारतीय खेलों में महिलाओं के नेतृत्व और संघर्ष की प्रेरक मिसाल बनी।
  21. 2013 – मलाला यूसुफजई को कनाडा की नागरिकता
    तालिबान के खिलाफ शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली मलाला को कनाडा की मानद नागरिकता प्रदान की गई। यह कदम वैश्विक स्तर पर बालिका शिक्षा और साहस के प्रतीक के रूप में उनकी पहचान को और सशक्त करता है।
  22. 2014 – आस्कर पिस्टोरियस को हत्या के लिए सजा
    प्रसिद्ध पैरालंपिक धावक पिस्टोरियस को अपनी प्रेमिका रीवा स्टीनकैंप की हत्या के लिए पाँच वर्ष की सजा सुनाई गई। यह घटना खेल जगत में नैतिकता, कानून और जिम्मेदारी की गूढ़ बहस को जन्म देती है।
    21 अक्टूबर का हर अध्याय इतिहास की गहराई में छिपे संघर्ष, आदर्श और परिवर्तन की कहानी कहता है। यह तिथि बताती है कि मानवता कभी स्थिर नहीं — वह समय के साथ सीखती, गिरती और फिर उठ खड़ी होती है। चाहे सत्ता का संघर्ष हो या सेवा का प्रतीक, यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर छोटा कदम इतिहास रच सकता है।

DDU में शीघ्र शुरू होगा एचयूआरएल–एनएसडीसी स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम

400 विद्यार्थियों को मिलेगा उद्योग आधारित प्रशिक्षण, ₹32 लाख का स्टाइपेंड वितरित होगा

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के रोजगारोन्मुख विकास और कौशल संवर्धन की दिशा में एक नई पहल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय में एच.यू.आर.एल.–एन.एस.डी.सी. स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शीघ्र प्रारम्भ होने जा रहा है, जिसके अंतर्गत लगभग 400 विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को ₹8,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाएगी, जिसके माध्यम से कुल ₹32 लाख का स्टाइपेंड वितरित होगा।
यह कार्यक्रम हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के संयुक्त तत्वावधान में मैपिंग स्किल्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. द्वारा संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ 70 प्रतिशत से अधिक प्लेसमेंट सहायता भी दी जाएगी।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह प्रशिक्षण पहल छात्रों के लिए “सीखने से रोजगार तक” की दिशा में एक ठोस और प्रभावी कदम है।
निदेशक, गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि बहुत शीघ्र परिसर में क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे, जिनके माध्यम से इच्छुक विद्यार्थी स्वयं को इस प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत कर सकेंगे। आवेदन प्राप्त होने के बाद चयन प्रक्रिया पूर्ण कर पात्र विद्यार्थियों को प्रशिक्षण में सम्मिलित किया जाएगा।
कुलपति के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के तीन विभाग — कॉमर्स, एम.बी.ए. तथा इलेक्ट्रॉनिक्स, को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चयनित किया गया है, जिनमें क्रमशः अकाउंट असिस्टेंट, रिटेल सेल्स एक्जीक्यूटिव तथा एफटीसीएपी (कंप्यूटिंग एवं परिधीय उपकरण तकनीशियन) के प्रशिक्षण संचालित होंगे।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एचयूआरएल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनएसडीसी के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के करियर अवसरों में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु कंपनी की ओर से बसु अग्रहरि को समन्वयक (SPOC) नियुक्त किया गया है, जो प्रशिक्षण गतिविधियों की निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित करेंगे।
यह पहल विश्वविद्यालय को कौशल विकास, उद्योग–शिक्षा सहयोग और छात्र रोजगार सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करेगी।

वृद्धाश्रम में बुजुर्गों संग दीपोत्सव की खुशियां साझा की डीएम ने

बुजुर्गों को दिए उपहार, जाना हालचाल

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। दीपावली के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सियरासांथा स्थित वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां आवासित 77 बुजुर्गों के साथ दीपोत्सव की खुशियां साझा कीं। उन्होंने सभी वृद्धजनों को ऊनी साल और मिष्ठान भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने बुजुर्गों से आत्मीय वार्ता करते हुए उनके स्वास्थ्य, देखभाल और वृद्धाश्रम में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं, उनकी सेवा और सम्मान करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की और प्रबंधक को निर्देश दिया कि भोजन, नाश्ता, चिकित्सा सुविधा तथा रहने की व्यवस्था पूरी तरह सुव्यवस्थित रखी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आश्रम के प्रत्येक निवासी को परिवार जैसा वातावरण मिले, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

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इस अवसर पर जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, वृद्धाश्रम प्रबंधक अम्बिकेश्वर मणि तिवारी सहित आश्रम परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने सभी वृद्धजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ, सुखी व दीर्घायु जीवन की कामना की।

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कोपागंज थाना प्रभारी की दीपावली पहल, गरीब जरूरतमंदों को बांटी मिठाइयां व पटाखे

थानाध्यक्ष द्वारा मिठाइयां व पटाखे पाकर खिले गरीबों के चेहरे

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। दीपावली के त्यौहार को लेकर जनपद के कोपागंज थाना प्रभारी रविंद्रनाथ राय ने कस्बा इंचार्ज अनिकेत सिंह और अपने हमराहियों के साथ पूरे कस्बे का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से मुलाकात कर त्योहार को सुरक्षित और शांति-पूर्ण ढंग से मनाने की अपील करने के साथ ही गरीब जरूरतमंदों में मिठाइयां व पटाखे वितरीत किए। थानाध्यक्ष की इस कार्य प्रणाली से गरीबों के चेहरे खिल उठे।

जनपद के कोपागंज थानाध्यक्ष द्वारा एक जमाने के बाद की गई इस दीपावली के त्योहार को लेकर की गई इस पहल से कोपागंज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच मिठाइयाँ, पटाखे और मोमबत्तियाँ लेकर पहुंचे समस्त पुलिस कर्मियों को देख उनके चेहरे खिल उठे । यह थानाध्यक्ष द्वारा वितरण का कार्य भातकोल मोड़, कसार मोड़, मार्केट चौक और अन्य जगहों पर किया गया। खासतौर पर जगह जगह बच्चों को पटाखे दिए गए, जिन्हें पाकर वे बेहद खुश नजर आए और त्योहार की खुशियों में चार चाँद लग गए।

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साथ ही महिला पुलिस कर्मियों द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। महिलाओं को हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई और उन्हें हर परिस्थिति में निडर होकर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर पुलिस टीम में एसआई दुर्गेश चौरसिया, एसआई उमाशंकर सिंह, राजकुमार पाल, आशीष कुमार सिंह, धनंजय कुमार पांडेय, एसआई प्रियंका सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस सामाजिक और सुरक्षा पहल को सफल बनाया।

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तेजस्वी की रणनीति में महिलाओं और युवाओं को मिली मजबूत जगह

“महागठबंधन में मतभेद की आहट, तीन सीटों पर राजद-कांग्रेस आमने-सामने”


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार की सियासत में अब चुनावी बिगुल पूरी तरह बज चुका है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में राज्यभर के 143 प्रत्याशी शामिल हैं, जिनमें 24 महिला चेहरे भी मैदान में हैं। राजद ने यह सूची नामांकन के दूसरे चरण के अंतिम दिन जारी कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

राजद की इस घोषणा के साथ ही महागठबंधन का समीकरण भी लगभग साफ हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, राजद को 143 सीटें, कांग्रेस को 61 सीटें, भाकपा (माले) को 20 सीटें, जबकि शेष सीटें मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी के खाते में जाने की संभावना है। हालांकि गठबंधन की औपचारिक घोषणा अब भी लंबित है, इसलिए यह भी संभव है कि अंतिम समय में कुछ उम्मीदवार अपना नाम वापस लें।

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🗳️ प्रमुख उम्मीदवारों की सूची:
राजद नेता तेजस्वी यादव ने एक बार फिर राघोपुर सीट से मैदान संभाला है। वहीं,ललित यादव दरभंगा ग्रामीण से,दिलीप सिंह बरौली से, रामविलास पासवान पीरपैंती (सुरक्षित) से, सावित्री देवी चकाई से,रेनू कुशवाहा बिहारीगंज से,अनिता देवी महतो वारसलीगंज से,माला पुष्पम हसनपुर से,संध्या रानी कुशवाहा मधुबन से,रितु प्रिया चौधरी इमामगंज (एससी) से,तनुश्री मांझी बाराचट्टी (एससी) से,चांदनी देवी सिंह बनियापुर से,अरविंद सहनी सरायरंजन से,प्रेमा चौधरी पातेपुर (एससी) से,शंभू नाथ ब्रह्मपुर से और,मुकेश यादव बाजपट्टी से चुनावी मैदान में हैं।इन नामों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राजद ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का बारीकी से ध्यान रखते हुए टिकट वितरण किया है।

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गठबंधन के भीतर ही ‘तीन सीटों पर तकरार’
हालाँकि, महागठबंधन में तालमेल के बावजूद तीन विधानसभा सीटों पर राजद और कांग्रेस में आमने-सामने की स्थिति बन गई है।
नरकटियागंज में राजद के दीपक यादव का मुकाबला कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडे से,
कहलगांव में राजद के रजनीश भारती का सामना कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा से,और सिकंदरा (एससी) में राजद के उदय नारायण चौधरी के खिलाफ कांग्रेस ने विनोद चौधरी को मैदान में उतारा है।
सूत्रों का कहना है कि दोनों दलों के शीर्ष नेता आपसी सहमति से किसी एक उम्मीदवार को वापस लेने का रास्ता निकाल सकते हैं, ताकि महागठबंधन में मतों का विभाजन न हो।

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🔹 कांग्रेस की सूची और उम्मीदवार
कांग्रेस ने भी शनिवार को अपनी दूसरी सूची जारी की, जिसमें नरकटियागंज से शाश्वत केदार पाण्डेय,किशनगंज से कमरुल होदा,कस्बा से इरफान आलम,पूर्णिया से जितेंद्र यादव,गया टाउन से मोहन श्रीवास्तव,और सुपौल से मिन्नत रहमानी को टिकट दिया गया है।
इससे पहले 17 अक्टूबर को कांग्रेस ने 48 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी, जिसके साथ पार्टी की कुल घोषित सीटें अब 54 हो गई हैं।

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🗓️ चुनावी कैलेंडर तय
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान दो चरणों में — 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि गिनती 14 नवंबर को की जाएगी।
राज्य की राजनीति एक बार फिर लालू परिवार बनाम भाजपा गठबंधन के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है।
राजद की इस घोषणा से स्पष्ट है कि पार्टी ने ‘बदलाव की नई उम्मीद’ के नारे के साथ तेजस्वी यादव को एक बार फिर मुख्य चेहरा बनाकर जनता के बीच जाने की रणनीति तैयार कर ली है।

🌍 “ट्रम्प की धमकी या दबाव? भारत बोला – हमारी ऊर्जा नीति किसी के दबाव में नहीं, हमारे हित सर्वोपरि”

⚖️ “अमेरिका-रूस के बीच संतुलन साधता भारत: ऊर्जा नीति पर दिखी कूटनीतिक परिपक्वता”

वाशिंगटन/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक बार फिर से हलचल मच गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर “भारी टैरिफ़ (Heavy Tariff)” लगाने की चेतावनी दी है। ट्रम्प का यह बयान न केवल भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों में नई दरार का संकेत देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिका किस तरह अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए दूसरे देशों की ऊर्जा नीतियों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहा है।

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ट्रम्प ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालाँकि, भारत सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह भारतीय उपभोक्ताओं के हितों और राष्ट्रीय आवश्यकताओं पर आधारित है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत की प्राथमिकता “स्थिर ऊर्जा कीमतें बनाए रखना और विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना” है। उन्होंने दो टूक कहा — “भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के अनुरूप तय होती है।”
भारत का स्पष्ट रुख — आत्मनिर्भर और व्यावहारिक नीति
भारत की ऊर्जा रणनीति लंबे समय से ‘विविधता’ (Diversification) के सिद्धांत पर टिकी है। देश सऊदी अरब, अमेरिका, इराक और रूस जैसे कई देशों से तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति स्थिर रहती है।
रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने से भारत ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रखने और महंगाई पर अंकुश लगाने में सफलता पाई है।

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अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल व्यापार जारी रखना यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय मदद देता है। लेकिन भारत का कहना है कि हर देश को अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था के हित में निर्णय लेने का अधिकार है।
ट्रम्प की राजनीति और चुनावी रणनीति का पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान घरेलू अमेरिकी राजनीति से प्रेरित है। “अमेरिका फर्स्ट” के नारे के तहत ट्रम्प अमेरिकी मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे वैश्विक मंच पर अमेरिका की ताक़त पुनः स्थापित कर रहे हैं।

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भारत पर दबाव बनाना, ट्रम्प के लिए अपने मतदाताओं के बीच “मजबूत नेता” की छवि पेश करने का साधन हो सकता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिश्ते चुनावी रणनीतियों से कहीं अधिक गंभीर, दीर्घकालिक और संतुलनपूर्ण होते हैं।
भारत की कूटनीतिक मजबूती — संतुलन की राह
भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखा है। न तो रूस पर पूरी तरह निर्भर, न ही अमेरिका के प्रभाव में झुकना — यही भारत की कूटनीतिक शक्ति है।
भारत के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य है —
🔹 ऊर्जा सुरक्षा
🔹 स्थिर आपूर्ति
🔹 उचित कीमतें
🔹 राष्ट्रीय हित की रक्षा
भारत ने संकेत दिया है कि वह संवाद के दरवाजे खुले रखेगा, लेकिन किसी दबाव में आकर नीति नहीं बदलेगा।

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आत्मनिर्भरता ही कूटनीतिक शक्ति यह विवाद केवल तेल व्यापार का नहीं, बल्कि कूटनीतिक आत्मनिर्भरता की परीक्षा है। भारत यदि अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए अमेरिका और रूस दोनों से समान दूरी बनाए रखता है, तो यही उसकी परिपक्वता और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण होगा।
भारत के लिए यह समय है संयम, दृढ़ता और संवाद — तीनों को संतुलित रखने का। क्योंकि वैश्विक राजनीति में आत्मनिर्भर नीति ही असली स्वतंत्रता है।

दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025: 7565 पदों पर आवेदन का कल आखिरी मौका, 12वीं पास उम्मीदवार जल्द करें आवेदन

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025 के लिए आवेदन करने का कल आखिरी मौका (21 अक्टूबर 2025) है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाकर उम्मीदवार रात 11 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के तहत कुल 7,565 पदों पर कांस्टेबल (Executive) पुरुष, महिला और पूर्व सैनिक श्रेणियों में भर्तियां की जाएंगी।

आवेदन की अंतिम तिथियां

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 21 अक्टूबर 2025 (रात 11 बजे तक)

फीस भुगतान की अंतिम तिथि: 22 अक्टूबर 2025

एप्लिकेशन करेक्शन विंडो: 29 से 31 अक्टूबर 2025

परीक्षा तिथि: दिसंबर 2025 या जनवरी 2026

शैक्षणिक योग्यता

उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा पास होना आवश्यक है।
विशेष पदों जैसे बैंड्समैन, बुगलर, माउंटेड कांस्टेबल, ड्राइवर और डिस्पैच राइडर तथा दिल्ली पुलिसकर्मियों के पुत्रों के लिए 11वीं पास भी मान्य है।

आयु सीमा

1 जुलाई 2025 तक उम्मीदवार की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।

ड्राइविंग लाइसेंस

पुरुष उम्मीदवारों के लिए LMV (मोटरसाइकिल या कार) का वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य है।

ऐसे करें आवेदन

  1. आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं।
  2. नाम, ईमेल, मोबाइल नंबर और पहचान विवरण दर्ज करें।
  3. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें और सही जानकारी दर्ज करें।
  4. पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षिक प्रमाणपत्र अपलोड करें।
  5. निर्धारित फीस ऑनलाइन माध्यम से जमा करें।
  6. फॉर्म सबमिट कर प्रिंट आउट जरूर लें।

दिल्ली पुलिस में नौकरी का सपना देखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह बेहतरीन मौका है। आवेदन करने से पहले उम्मीदवार विज्ञापन को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और योग्यता मानदंड की जांच कर लें।

“चमकते दीप, भीगते अरमान: बारिश के बीच भी तमिलनाडु में नहीं थमेगी दिवाली की रौनक”

🌧️ “बरसती दिवाली: तमिलनाडु में रोशनी संग बरसे बादल, खुशियों के बीच मौसम ने दी चेतावनी”

चेन्नई/मदुरै (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।तमिलनाडु में सोमवार को आसमान से झरती बूंदों और दीपों की चमक ने एक अनोखा संगम रचा। भारी बारिश के बावजूद पूरे राज्य में दीपावली का त्योहार उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही लोगों ने नए वस्त्र धारण किए, पारंपरिक तेल स्नान किया और शुभ मुहूर्त में पटाखों से खुशियों की झड़ी लगा दी।

राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे 2018 में उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें — यानी सुबह 6 से 7 बजे और शाम 7 से 8 बजे के बीच ही पटाखे जलाएं। सरकार ने विशेष रूप से चेताया है कि अस्पतालों, झुग्गी बस्तियों या आग पकड़ने वाले क्षेत्रों के पास पटाखे न जलाएं।

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राज्यपाल आर. एन. रवि और एआईएडीएमके महासचिव के. पलानीस्वामी ने भी प्रदेशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और लोगों से सुरक्षित व पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने की अपील की।

🌩️ मौसम विभाग का अलर्ट: दो चक्रवाती सिस्टम से बढ़ी चिंता

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दीपावली के दिन ही तमिलनाडु के 18 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों ओर से चक्रवाती तंत्र विकसित हो रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

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अरब सागर के ऊपर बना गहरा दबाव क्षेत्र एक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है, जबकि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में भी एक नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो रहा है। इन परिस्थितियों ने राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है।

🌧️ किन जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

आईएमडी के ताज़ा पूर्वानुमान के मुताबिक, नीलगिरी, कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड, थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, विरुधुनगर, रामनाथपुरम, शिवगंगा, पुदुक्कोट्टई, कुड्डालोर, मयिलादुथुराई, नागपट्टिनम, तिरुवरूर, तंजावुर, चेंगलपट्टू और विल्लुपुरम जिलों में आज भारी बारिश की संभावना है।

मंगलवार को भी चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर, विल्लुपुरम, कुड्डालोर, मयिलादुथुराई, नागपट्टिनम और पुडुचेरी में भारी वर्षा का दौर जारी रहेगा। वहीं, 23 और 24 अक्टूबर को चेन्नई, वेल्लोर, कृष्णागिरि, तिरुपत्तूर, कांचीपुरम और आसपास के जिलों में मौसम के और बिगड़ने की संभावना है।

⚠️ प्रशासन सतर्क, नागरिकों से सावधानी की अपील

राज्य सरकार ने राहत और बचाव दलों को तैनात कर दिया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, बिजली के खंभों या जलभराव वाले इलाकों में न जाएं और घरों में सुरक्षित रहें।

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दूसरी ओर, त्योहार की उमंग में कोई कमी नहीं देखी गई। बारिश की रिमझिम फुहारों में लोग घरों की छतों और गलियों को दीपों की कतारों से सजा रहे हैं — मानो प्रकृति और आस्था ने मिलकर इस बार “बरसती दिवाली” का उत्सव रचा हो।

डेढ़-डेढ़ लाख में दो मौसेरे भाइयों को ‘लुटेरी दुल्हन’: सुहागरात के बाद गहने-नकदी लेकर फरार

​आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आगरा के रकाबगंज थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेकर शादी करने वाली दो लुटेरी दुल्हनों ने मौसेरे भाइयों को ठग लिया। शादी के कुछ दिन बाद ही एक दुल्हन गहने और नकदी लेकर फरार हो गई, जबकि दूसरी को भागने से पहले ही परिजनों ने पकड़ लिया। इस घटना से पीड़ित दूल्हे और उनका परिवार सदमे में है।

क्या है पूरा मामला?

नेताजी नगर, नामनेर निवासी अमन जैन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनके मौसेरे भाई रानू ने रिश्तेदार शेरू जैन और उसके साथियों मुकेश और रिया के माध्यम से शादी की बात तय की। आरोपियों ने गरीब परिवार की लड़कियों से शादी कराने के नाम पर दोनों भाइयों से 3 लाख रुपये (डेढ़-डेढ़ लाख प्रति भाई) लिए थे।

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शादी और फरार होने की कहानी

  • रानू की शादी: रविदास नगर, भदोही निवासी अंजली उर्फ पूजा यादव से हुई।
  • अमन की शादी: हरियाणा के प्रेमनगर, सिरसा निवासी अंतिमा जैन से 15 अक्टूबर को हुई।

​शिकायत के अनुसार, 18 अक्टूबर की सुबह रानू की पत्नी अंजली घर से नकदी और गहने लेकर फरार हो गई। वहीं, अमन की पत्नी अंतिमा भी भागने की फिराक में थी, लेकिन उसे परिजनों ने पकड़ लिया।

समझौते की कोशिश, फिर FIR

घटना के बाद बिचौलिया रिया घर आई और समझौता कराने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष ने अपने पैसे वापस मांगे। शनिवार देर रात तक थाने में भी दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश चलती रही, लेकिन बात नहीं बनी। पीड़ित ने पुलिस को रुपयों के लेन-देन का एक वीडियो भी सौंपा, जिसमें आरोपी पैसे गिनते नजर आ रहे हैं।

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​पुलिस ने पीड़ित अमन जैन की तहरीर पर दोनों दुल्हनों (अंजली और अंतिमा) समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। एक दुल्हन को जेल भेज दिया गया है, जबकि एक महिला बिचौलिया को थाने से जमानत मिल गई है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

“अयोध्या से उठी उजियारे की लौ, मोदी-योगी-मोहन यादव ने दिया सद्भाव और समृद्धि का संदेश”

🌟 “अंधकार से आलोक की ओर: दीपावली पर प्रधानमंत्री मोदी, योगी और मोहन यादव ने दी राष्ट्र को प्रकाश, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की शुभकामनाएं” 🌟

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दीपों का पर्व दीपावली देशभर में उल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि “प्रकाश का यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौहार्द लेकर आए।” प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर संदेश साझा करते हुए कहा कि दीपावली केवल दीयों का त्योहार नहीं, बल्कि यह आत्मा के भीतर के अंधकार को मिटाकर सत्य, धर्म और मानवता के उजाले को फैलाने का अवसर है।

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इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव में शिरकत करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “यह त्योहार हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर और वैर-भाव से सौहार्द की ओर ले जाने का संदेश देता है।”

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अयोध्या में इस वर्ष दीपोत्सव ने फिर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया — 56 घाटों पर 26 लाख से अधिक दीयों की रोशनी से रामनगरी जगमगा उठी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का उज्ज्वल प्रतीक भी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से सुरक्षित, स्वच्छ और सद्भावपूर्ण तरीके से दीपावली मनाने की अपील की।
वहीं, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को दीपावली की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों से ‘स्वदेशी अपनाने’ का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “इस दीपावली पर विदेशी वस्तुओं की जगह देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता दें। स्वदेशी खरीदारी से न केवल स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाएगा।”

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उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सांसदों, विधायकों, कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों से संवाद कर राज्यभर में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को देशभर में दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है। यह पाँच दिवसीय महोत्सव धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। दीपावली न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है बल्कि एकता, प्रेम और उम्मीद के उजाले का उत्सव भी है।

इस वर्ष की दीपावली पर जब सम्पूर्ण भारत जगमगा रहा है, तो राष्ट्र की यह सामूहिक भावना — “हर घर दीप, हर दिल प्रकाश” — सच्चे अर्थों में भारत की आत्मा को आलोकित कर रही है।

महुआ प्रशासन ने दर्ज की FIR, MCC उल्लंघन का मामला

महुआ में तेज प्रताप पर आचार संहिता उल्लंघन का केस: लाल बत्ती वाली गाड़ी से नामांकन, अब बढ़ी कानूनी मुश्किलें

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की सियासत में एक बार फिर लालू परिवार सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) प्रमुख तेज प्रताप यादव पर चुनाव आचार संहिता (MCC) उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।
महुआ विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल करने के दौरान तेज प्रताप की एसयूवी पर पुलिस का लोगो और लाल-नीली बत्ती लगी होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जांच में वीडियो की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है।
बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है और इसी बीच वैशाली जिले की महुआ सीट से नामांकन दाखिल करते समय तेज प्रताप यादव एक नई विवाद में घिर गए हैं।

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जिला पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि महुआ सर्किल ऑफिसर ने पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया कि 16 अक्टूबर को नामांकन के दौरान तेज प्रताप यादव एक ऐसी SUV से पहुंचे थे जिस पर “पुलिस” का लोगो और लाल-नीली बत्ती लगी थी, जबकि वह निजी वाहन था।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच की गई, और प्रशासन ने इसे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में पाया। इसके बाद FIR दर्ज कर ली गई।
तेज प्रताप यादव ने हाल ही में राजद से अलग होकर जनशक्ति जनता दल (JJD) का गठन किया था। दरअसल, 25 मई को उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने उन्हें राजद से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

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कारण बताया गया था — तेज प्रताप द्वारा सोशल मीडिया पर एक महिला से रिश्ते की बात स्वीकार करना। हालांकि बाद में उन्होंने दावा किया कि “मेरा फेसबुक पेज हैक हो गया था”, और विवादित पोस्ट हटा दी।
निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने लगातार बयानों के ज़रिए राजद नेतृत्व पर नाराज़गी जताई, यहाँ तक कि उन्होंने कहा—“मेरे और तेजस्वी के बीच फूट डालने की साजिश रची जा रही है।”
उन्होंने ‘जयचंद’ जैसे शब्दों का उपयोग कर आंतरिक राजनीतिक षड्यंत्र की ओर इशारा भी किया था।

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अब नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुआ यह नया विवाद तेज प्रताप की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

ट्रेन हादसे में सूरत से घर लौट रहे युवक की मौत

बरियारपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। त्योहार मनाने गुजरात के सूरत से अपने घर लौट रहे एक युवक की रविवार को ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा अहिल्यापुर रेलवे स्टेशन के पास हुआ, जहां युवक ट्रेन से गिर गया और उसकी जान चली गई।

​मृतक की पहचान अमरजीत चौहान (25), निवासी बसदेवा, थाना भोरे, जिला गोपालगंज (बिहार) के रूप में हुई है। अमरजीत सूरत में एक निजी कंपनी में कार्यरत था और दीपावली/छठ के लिए घर वापस आ रहा था।

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​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अहिल्यापुर स्टेशन के पास वह चलती ट्रेन से गिर गया और तुरंत ही ट्रेन की चपेट में आ गया। इस हादसे में उसका दाहिना पैर कट गया और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

​हादसे की सूचना मिलते ही जीआरपी भटनी, पीआरबी टीम और बरियारपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को युवक के पास उसका मोबाइल फोन मिला, जिससे उसकी पहचान सुनिश्चित की गई।

​अमरजीत अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसके निधन की खबर सुनते ही बसदेवा गांव में मातम पसर गया। मां जिलेबिया देवी और भाइयों नागेंद्र व सत्येन्द्र चौहान का रो-रोकर बुरा हाल है।

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​थानाध्यक्ष दीपक सिंह ने बताया कि शव की पहचान कराकर परिजनों को सूचना दे दी गई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

सनसनीखेज हत्या: दीपावली पर बेटे ने मां का गला काटा; मानसिक रूप से परेशान था आरोपी

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​चंडीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। चंडीगढ़ के सेक्टर 40 में दीपावली की सुबह एक सनसनीखेज हत्या की वारदात सामने आई है। त्योहार के माहौल में इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। एक युवक ने अपनी मां का गला काटकर हत्या कर दी।

​मृतका की पहचान सुशीला नेगी के रूप में हुई है। आरोपी मृतका का छोटा बेटा रवींद्र उर्फ रवि है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रवि यूनिवर्सिटी में काम करता है और मानसिक तौर पर परेशान बताया जा रहा है।

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​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मामले की गंभीरता से छानबीन कर रही है और हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

​मृतक परिवार मूल रूप से गढ़वाल का रहने वाला है। त्योहार के दिन हुई इस वारदात ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।

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