Monday, July 6, 2026
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गौ रक्षक को गोली मारने का मामला: पुलिस ने 12 घंटे में 3 आरोपी किए गिरफ्तार, एक अब भी फरार

हैदराबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गौ रक्षक पर गोलीबारी के मामले में रचाकोंडा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 घंटे के भीतर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। यह मामला अवैध पशु परिवहन के विवाद से जुड़ा हुआ है। मुख्य आरोपी मोहम्मद इब्राहिम कुरैशी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है।

इस घटना को लेकर बीजेपी ने रेड्डी सरकार पर निशाना साधा है और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस गोलीकांड को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला

22 अक्टूबर की रात घटकेसर के यम्नामपेट इलाके में यह घटना हुई। पीड़ित बिड़ला प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह, जो एक सक्रिय गौ रक्षक हैं, को उनके दोस्त कुरुवा श्रीनिवास ने बुलाया था। वहां मौजूद मुख्य आरोपी इब्राहिम कुरैशी और उसके साथियों ने प्रशांत से अवैध पशु परिवहन रोकने और हुए आर्थिक नुकसान को लेकर बहस की। विवाद बढ़ने पर इब्राहिम ने पिस्तौल से प्रशांत के सीने में गोली मार दी और सभी मौके से फरार हो गए।

घायल प्रशांत को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां सर्जरी कर गोली निकाली गई। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई

रचाकोंडा पुलिस कमिश्नर जी. सुधीर बाबू के निर्देश पर गठित विशेष टीमों ने 23 अक्टूबर की सुबह शमशाबाद से तीन आरोपियों — मोहम्मद इब्राहिम कुरैशी, कुरुवा श्रीनिवास और हसन बिन मोसिन — को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने उनके पास से एक देसी पिस्तौल, एक स्विफ्ट कार, तीन मोबाइल फोन और दो खाली कारतूस बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने प्रशांत पर वसूली के आरोप लगाए थे।

एक आरोपी अब भी फरार

एक अन्य आरोपी मोहम्मद हनीफ कुरैशी अभी भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

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सऊदी अरब का ऐतिहासिक फैसला: खत्म हुआ कफाला सिस्टम, 25 लाख भारतीयों को मिलेगी राहत — जानें क्या बदला और कैसे होगा फायदा

सऊदी अरब (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सऊदी अरब सरकार ने जून 2025 में अपने इतिहास का सबसे मानवीय और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने दशकों पुरानी कफाला (प्रायोजन) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जिससे सीधे तौर पर 1.34 करोड़ विदेशी कामगारों को राहत मिलेगी। इनमें लगभग 25 लाख भारतीय प्रवासी भी शामिल हैं।

यह बड़ा कदम क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की विजन 2030 नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त करना और श्रम बाजार को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।

क्या था कफाला सिस्टम

कफाला व्यवस्था के तहत किसी भी विदेशी कामगार को काम करने के लिए स्थानीय स्पॉन्सर यानी नियोक्ता की अनुमति जरूरी होती थी। नियोक्ता कर्मचारी का वीजा, इकामा (रेजिडेंसी परमिट) और यहां तक कि देश छोड़ने का अधिकार भी नियंत्रित करता था। इससे शोषण की स्थिति पैदा होती थी — कई नियोक्ता कर्मचारियों के पासपोर्ट जब्त, वेतन रोक और काम की स्वतंत्रता छीन लेते थे।

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नया कानून क्या कहता है

नई श्रम नीति के तहत अब कर्मचारियों को बिना नियोक्ता की अनुमति के नौकरी बदलने की आजादी होगी, बशर्ते वे अपना अनुबंध पूरा कर चुके हों या उचित नोटिस दें।

अब एग्ज़िट परमिट की आवश्यकता खत्म कर दी गई है।

सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी होंगी।

पासपोर्ट जब्त करना अपराध माना जाएगा।
यह सुधार सऊदी अरब को मानवाधिकार समर्थक और निवेशक-हितैषी देश के रूप में पेश करता है।

भारतीय प्रवासियों के लिए राहत

सऊदी अरब में काम कर रहे भारतीय मजदूरों के लिए यह सुधार जीवन बदलने वाला साबित होगा। अब कोई भी कर्मचारी यदि खराब व्यवहार या अनुचित वेतन नीति का सामना करता है, तो वह बिना डर के दूसरी नौकरी खोज सकता है। यह कदम उन्हें बेहतर सुरक्षा, उचित वेतन और समान अधिकार प्रदान करेगा।

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क्यों जरूरी था यह कदम

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) लंबे समय से कफाला सिस्टम को समाप्त करने की मांग कर रहा था। यह फैसला न केवल सऊदी अरब की छवि को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों और प्रतिभाओं को भी देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद करेगा।

🔥 मुखबिर की सूचना पर कोपागंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई — अवैध चाकू के साथ एक युवक गिरफ्तार

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए मऊ पुलिस लगातार सक्रिय है। पुलिस अधीक्षक इलामारन जी के निर्देशन और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बुधवार को कोपागंज पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली।
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार और क्षेत्राधिकारी घोसी जितेन्द्र सिंह के पर्यवेक्षण में, प्रभारी निरीक्षक रविन्द्रनाथ राय के कुशल नेतृत्व तथा कस्बा इंचार्ज अनिकेत सिंह की सक्रिय भूमिका में गठित पुलिस टीम ने एक अभियुक्त को अवैध चाकू के साथ गिरफ्तार किया।

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सूत्रों के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति नाजायज चाकू लेकर काछीकला अण्डरपास के पास संदिग्ध रूप से घूम रहा है। सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एसआई अनिकेत सिंह, कांस्टेबल आशीष सिंह और कांस्टेबल रविन्द्र सरोज की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और संदिग्ध युवक को पकड़ लिया।
पूछताछ में अभियुक्त की पहचान बिरजू सोनकर पुत्र समारु सोनकर निवासी मुहल्ला दोस्तपुरा थाना कोपागंज के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक नाजायज चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध धारा 4/25 आयुध अधिनियम 1959 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

अतीक अहमद के बेटे उमर को बड़ा झटका: उमेश पाल हत्याकांड में कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज की

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद को प्रयागराज की सेशन कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उमेश पाल हत्याकांड मामले में कोर्ट ने उमर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

उमर के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना के समय उमर लखनऊ जेल में बंद था और उस पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

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24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के जयंतीपुर इलाके में हुए उमेश पाल और उनके दो गनरों की दिनदहाड़े हत्या के मामले में उमर अहमद को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उमर ने जेल के अंदर से इस हत्याकांड की साजिश रची थी।

इस मामले में कोर्ट ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है और इससे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हुआ है। इसलिए उमर अहमद को जमानत देना उचित नहीं होगा। यह फैसला स्पेशल न्यायाधीश (SC/ST) राम प्रताप सिंह राणा की कोर्ट ने सुनाया।

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छात्रों में सृजनात्मकता और साहित्यिक चेतना को मिलेगा नया आयाम

राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के तहत तरंग द्वारा कला प्रतियोगिताएँ 25-26 अक्टूबर को

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ “ तरंग ” द्वारा विविध कला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों में सृजनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति और साहित्यिक चेतना का विस्तार करना है।

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कार्यक्रम के अंतर्गत चित्रकला प्रतियोगिता 26 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे से, पोस्टर/इलस्ट्रेशन प्रतियोगिता 25 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे से, रंगोली प्रतियोगिता 25 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:00 बजे से, क्ले मॉडलिंग प्रतियोगिता 25 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे से तथा फोटोग्राफी प्रतियोगिता 26 अक्टूबर 2025 को सायं 3:00 बजे से आयोजित की जाएगी।
सभी कार्यक्रम महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में संपन्न होंगे। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्र अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करेंगे और पुस्तक संस्कृति के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करेंगे।

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कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि “राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव केवल पुस्तकों का उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, सृजन और अभिव्यक्ति का महापर्व है। इस प्रकार की कला प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में निहित रचनात्मक क्षमता को उजागर करती हैं और उन्हें साहित्य एवं संस्कृति से गहराई से जोड़ती हैं।”

वीजा के नाम पर ठगी, दो पर मुकदमा दर्ज

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के पुलिस चौकी मगहर अंतर्गत वीजा दिलाने के नाम पर 55 हजार रुपये की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में पीड़ित की तहरीर पर कोर्ट के आदेश पर खलीलाबाद कोतवाली पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
मिली जानकारी के अनुसार नगर पंचायत मगहर के मोहल्ला चूड़ीफरोश वार्ड नं. 02, निवासी जमाल अहमद ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि अहमद उर्फ अहमदुल्लाह निवासी तवारी टोला, मगहर और उसके साथी मोहम्मद खालिद निवासी जनपद सिद्धार्थनगर ने उन्हें विदेश भेजने के नाम पर कुल 55,000 रुपये ऑनलाइन अपने खाते में ले लिए। आरोप है कि वीजा न दिलवाने और पैसे वापस मांगने पर दोनों आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

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पीड़ित ने बताया कि उसने घटना की सूचना पहले खलीलाबाद पुलिस को दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई, तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अंततः माननीय न्यायालय की शरण ली। तब माननीय न्यायालय के आदेश पर थाना खलीलाबाद में एफआईआर दर्ज की गई।
आरोपियों पर पुलिस ने धारा 504, 506, 420 और 406 भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच उपनिरीक्षक मनीष कुमार जायसवाल को सौंपी गई है।

पुलिस ट्रक पर भीड़ का हमला, छह पुलिसकर्मी घायल, महिला सिपाही लहूलुहान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गोरखपुर के गीडा इलाके में हनुमान चौहान की मौत के बाद मंगलवार शाम नौसड़ चौराहे पर हालात बेकाबू हो गए। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। जब पुलिस ने शव हटाने की कोशिश की, तो भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।

पथराव के दौरान सड़क किनारे खड़े मिनी पुलिस ट्रक में कई पुलिसकर्मी घुस गए और दरवाजा बंद कर अंदर छिप गए। गुस्साई भीड़ ने ट्रक को चारों तरफ से घेरकर पत्थरों और लाठी-डंडों से हमला किया। ट्रक का शीशा टूट गया और चालक ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा। करीब तीन घंटे तक नौसड़ चौराहे से जवाहर चक तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए देर रात तक गीडा, गगहा, बांसगांव और तिवारीपुर थानों की पुलिस फोर्स तैनात रही।

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भीड़ के पथराव में छह पुलिसकर्मी घायल
पथराव के दौरान छह पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी का सिर फूट गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस पर हमले के वीडियो पर राजनीतिक दलों और यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

भड़काने वाले की तलाश में पुलिस जुटी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हनुमान की मौत के बाद भीड़ को किसने उकसाया। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर कई लोगों की पहचान की जा रही है। पत्थर चलाने वाले पुरुषों और महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है।

घटना का असर आम जनजीवन पर
हंगामे के चलते हाईवे पर लंबा जाम लग गया। दूध और ब्रेड की सप्लाई बाधित हो गई, जिससे शहर के लोग परेशान रहे। देर रात स्थिति सामान्य होने के बाद यातायात बहाल किया जा सका।

किराना दुकानदार थे हनुमान चौहान
हनुमान चौहान घर पर किराना दुकान चलाते थे। वे दो बच्चों के पिता थे। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी लक्ष्मीना से की थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपी रोशन और उसके साथियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण यह घटना हुई।

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पुलिस कार्रवाई
घटना के बाद नौसड़ चौकी प्रभारी की तहरीर पर पांच नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में और गिरफ्तारियां की जाएंगी।

दिवाली के बाद यूपी की हवा में घुला जहर: मेरठ, हापुड़ और लखनऊ में प्रदूषण बढ़ा, AQI 300 के पार पहुंचा

उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दीपावली के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों की हवा जहरीली हो गई है। दो दिन तक चली आतिशबाजी ने प्रदूषण स्तर को काफी बढ़ा दिया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अनुसार, मेरठ में हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित पाई गई, जहां एक्यूआई 332 दर्ज किया गया। वहीं, हापुड़ में 244, बुलंदशहर में 214 और लखनऊ में 211 तक पहुंच गया।

राजधानी लखनऊ की हवा खराब श्रेणी में है जबकि एनसीआर से सटे जिलों में “बहुत खराब” श्रेणी का प्रदूषण दर्ज किया गया है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं हो रही हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों का AQI

शहरAQI
मेरठ332
मुजफ्फरनगर277
हापुड़244
बुलंदशहर214
लखनऊ211
मुरादाबाद185
कानपुर183
प्रयागराज175
आगरा173
बरेली153

AQI मानक के अनुसार:

अच्छा: 0-50

संतोषजनक: 51-100

मध्यम प्रदूषित: 101-200

खराब: 201-300

बहुत खराब: 301-400

गंभीर: 401-500

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने और बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है।

5001 दीपों से सजेगा राप्ती घाट, पत्रकारों ने संभाली सांस्कृतिक विरासत की जिम्मेदारी

🌸 5001 दीपों से जगमगाएगी मां राप्ती की आरती — गोरखपुर में देव दीपावली का भव्य संगम, पत्रकारों का अनूठा पहल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर की पावन धरती इस बार एक अद्भुत दृश्य की साक्षी बनेगी — जब देवउठनी एकादशी के शुभ अवसर पर राप्ती नदी का तट हजारों दीपों की ज्योति से आलोकित होगा।
गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के तत्वावधान में आगामी 1 नवंबर को आयोजित होने जा रहा देव दीपावली महोत्सव भक्ति, संस्कृति और एकता का अनुपम संगम होगा। इस अवसर पर 5001 दीपों से पूरा घाट रोशन होगा और मां राप्ती की आरती गूंजते वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न होगी।

एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने बताया कि “देव दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और श्रद्धा का प्रतीक है। पत्रकार समाज के मार्गदर्शक होते हैं, और हम इस आयोजन के माध्यम से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।”

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इस कार्यक्रम में समाजसेवी चंद कुमार स्वर्णकार एवं उनका परिवार हर वर्ष की तरह इस बार भी पूर्ण समर्पण के साथ योगदान दे रहा है। उनकी पहल से यह आयोजन और भी भव्य व श्रद्धापूर्ण रूप ले रहा है।

आरती के दौरान पांच वेदपाठी ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे। वातावरण में “जय मां राप्ती” और “मां तुम्हारी कृपा बनी रहे” के स्वर गूंजेंगे, जिससे पूरा घाट आस्था, भक्ति और दिव्यता से ओतप्रोत हो उठेगा।

गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने इस अवसर पर पत्रकारों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे देव दीपावली पर मां राप्ती के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें और श्रद्धा का दीप जलाएं।

अध्यक्ष सिंह ने कहा — “हमारा उद्देश्य पत्रकारिता के साथ-साथ समाज और संस्कृति के संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभाना है। मां राप्ती की आरती का यह आयोजन उसी दिशा में एक प्रेरक कदम है, जो गोरखपुर की पहचान को और उज्जवल बनाएगा।”


दिल्ली एनकाउंटर: बिहार के तीन कुख्यात अपराधी ढेर, ‘सिग्मा एंड कंपनी’ गैंग का अंत

. बिहार चुनाव से पहले पुलिस की बड़ी सफलता, सीतामढ़ी के अपराधियों की साजिश नाकाम

पटना/दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच पुलिस को मिली बड़ी सफलता ने अपराध जगत में हड़कंप मचा दिया है। दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बुधवार देर रात राजधानी दिल्ली में चार कुख्यात अपराधी एनकाउंटर में मारे गए। मारे गए अपराधियों में से तीन का सीधा संबंध बिहार के सीतामढ़ी जिले से था, जो राज्य में आगामी चुनावों से पहले हिंसा और अशांति फैलाने की साजिश रच रहे थे।

‘सिग्मा एंड कंपनी’ गैंग का अंत

मारे गए अपराधियों की पहचान रंजन पाठक (25), बिमलेश महतो (25), और मनीष पाठक (33) के रूप में हुई है। ये तीनों सीतामढ़ी के रहने वाले थे और लंबे समय से पुलिस के निशाने पर थे। बताया जाता है कि ये लोग ‘सिग्मा एंड कंपनी’ नामक एक संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन कर रहे थे, जिसका नेटवर्क बिहार से लेकर नेपाल तक फैला हुआ था। इस गिरोह ने पिछले दो वर्षों में कई हत्याओं, रंगदारी और हथियार तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम दिया था।

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गैंग के चौथे सदस्य अमन ठाकुर, जो दिल्ली का रहने वाला था, एनकाउंटर में ढेर हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये अपराधी बिहार लौटकर चुनावी माहौल में हिंसा और अशांति फैलाने की योजना बना रहे थे।

दिल्ली में देर रात हुई मुठभेड़

संयुक्त टीम को बुधवार रात गुप्त सूचना मिली कि ये अपराधी दिल्ली के बहादुर शाह मार्ग इलाके में किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं। रात करीब 2:20 बजे पुलिस ने इलाके को घेर लिया। बदमाशों ने सरेंडर करने से इनकार करते हुए पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सभी चार अपराधी मौके पर ही मारे गए।

दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे एक “बड़ी सामरिक सफलता” बताया है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से बिहार में चुनाव से पहले अपराधियों की एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई है।

पुलिस को मिले अहम सुराग

एनकाउंटर के बाद मौके से एके-47 राइफल, पिस्टल, और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों और फाइनेंसरों की तलाश में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, गैंग का लिंक बिहार-नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय हथियार तस्करों से भी जुड़ा हुआ था।
🧾 दिल्ली में बिहार पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त मुठभेड़
चार अपराधी ढेर, तीन सीतामढ़ी के निवासी,सिग्मा एंड कंपनी’ गैंग का नेटवर्क बिहार से नेपाल तक ,चुनाव से पहले हिंसा फैलाने की थी साजिश,मौके से भारी मात्रा में हथियार बरामद।

सीमांचल से मगध तक गूंजेगा चुनावी संघर्ष

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और राजद के बीच 51 सीटों पर सीधी टक्कर ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इन सीटों में तेजस्वी यादव की राघोपुर और सम्राट चौधरी की तारापुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटें शामिल हैं, जहां दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। उत्तर बिहार से लेकर सीमांचल और मगध तक फैले इन क्षेत्रों में अब हर दिन राजनीतिक समीकरण नए रंग ले रहे हैं।
बिहार की राजनीति में इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। भाजपा जहां 101 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है, वहीं राजद 143 सीटों पर ताल ठोक रही है। इनमें से 51 सीटों पर भाजपा और राजद के बीच सीधा आमना-सामना है।

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2020 के चुनाव में दोनों दलों का प्रदर्शन लगभग बराबर रहा था — राजद ने 75 और भाजपा ने 74 सीटें जीती थीं। यही वजह है कि इस बार इन 51 सीटों के नतीजे पूरे राज्य की सत्ता समीकरण तय करेंगे।
राघोपुर सीट पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और तारापुर में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आमने-सामने हैं। इसके अलावा भाजपा के पूर्व सांसद रामकृपाल यादव (दानापुर) और सुनील कुमार पिंटू (सीतामढ़ी) भी विधानसभा की जंग में उतर चुके हैं, जहां उनकी भिड़ंत राजद प्रत्याशियों से होगी।

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ये 51 सीटें सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों की भी परीक्षा हैं — मधुबन, मोतिहारी, सीवान, हाजीपुर, छपरा, तारापुर, राघोपुर, मुंगेर, जमुई जैसी सीटों पर मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होगी।
राज्य के हर इलाके में फैली ये सीटें बताती हैं कि इस बार मुकाबला सिर्फ नेताओं का नहीं बल्कि पूरे बिहार की दिशा तय करने वाला है।

🚀 तमकुहीराज से अंतरिक्ष तक: ‘अमृत प्रयास’ से गूंजेगा देवरिया-कुशीनगर, देशभर के युवा वैज्ञानिक करेंगे रॉकेट लॉन्च

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया लोकसभा क्षेत्र अब अंतरिक्ष विज्ञान की नई पहचान बनने जा रहा है। सांसद शशांक मणि की पहल ‘अमृत प्रयास’ के तहत IN-SPACe, इसरो और ASI के सहयोग से होने वाली राष्ट्रीय इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन 2025 की तैयारियां तमकुहीराज में तेज़ी से चल रही हैं।


27 से 30 अक्टूबर तक चलने वाली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए नारायणी मॉडल रॉकेट्री प्रक्षेपण धाम में देशभर से 600 युवा वैज्ञानिक और 120 वरिष्ठ वैज्ञानिक पहुंच रहे हैं।

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लॉन्च पैड से लगभग 1 किलोमीटर दूर कमांड सेंटर तैयार किया जा रहा है, जहाँ पाँच विशाल जर्मन हैंगर टेंट लगाए जा रहे हैं ताकि मौसम का कोई असर कार्यक्रम पर न पड़े। 500 वर्गफुट के ऑब्ज़र्वेशन प्वाइंट से इसरो की जूरी टीम प्रतियोगिता की हर गतिविधि पर नज़र रखेगी।

मुख्य स्थल पर 13 हजार वर्गफुट में विज़िटर गैलरी बन रही है, जिसमें स्टेज और वीआईपी ठहराव की व्यवस्था है। छात्रों के लिए अलग वर्किंग और हैविटेट एरिया तैयार हो रहा है, जबकि छात्र-छात्राओं के ठहराव की व्यवस्था द प्रेसिडेंट स्कूल दनियारी और जगदीश पब्लिक स्कूल गौरी श्रीराम में की गई है।

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इस आयोजन में केवल रॉकेट लॉन्चिंग ही नहीं, बल्कि एक “आर्ट एंड स्पेस गैलरी” भी तैयार हो रही है, जो एक मिनी साइंस म्यूज़ियम की तरह होगी। यहाँ छात्र अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास और भारत की तकनीकी यात्रा को करीब से समझ सकेंगे।

सांसद शशांक मणि ने कहा—“अमृत प्रयास से देवरिया-कुशीनगर के युवाओं में वैज्ञानिक चेतना जागेगी। यह आयोजन उन्हें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यावहारिक अनुभव देगा और भारत के ‘विज्ञानमय भविष्य’ की दिशा तय करेगा।”

🔴अब सब भ्रम दूर होंगे, बिहार में एकजुट होकर उतरेंगे मैदान में -अशोक गहलोत

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में चल रही खींचतान अब खत्म होती दिख रही है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पटना पहुंचकर राबड़ी देवी आवास में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात में महागठबंधन के भीतर की गलतफहमियां दूर हुईं और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर सहमति बन गई।

गहलोत ने मुलाकात के बाद कहा, “थोड़ा भ्रम पैदा कर दिया गया था, अब सब कुछ साफ हो जाएगा। बिहार में सभी दल एकजुट होकर एनडीए की नीतियों के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि 5-7 सीटों पर स्थानीय स्तर की ‘फ्रेंडली फाइट’ कोई बड़ी बात नहीं है, मकसद स्पष्ट है — जनता के लिए जनादेश बदलना।

सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस गुरुवार को पटना में होगी, जहां साझा घोषणा पत्र और चुनावी रणनीति का ऐलान किया जाएगा। इस घोषणा पत्र में “आर्थिक न्याय” को केंद्र में रखकर रोजगार, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी।

बैठक में कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, राजद नेता मंगनीलाल मंडल, सुनील सिंह और संजय यादव भी मौजूद रहे। तेजस्वी यादव ने फेसबुक पर लिखा कि “बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और गुरुवार को सभी मुद्दों पर स्पष्ट घोषणा होगी।”

यह बैठक न केवल गठबंधन में नई ऊर्जा का संचार करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि लालू-तेजस्वी की जोड़ी इस बार निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

सुबह की पहली किरण के साथ पुलिस बनी जनविश्वास की प्रहरी, अपराधियों पर कड़ी नजर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ब्यूरो) जनता का भरोसा जीतने और अपराध पर नियंत्रण के उद्देश्य से देवरिया पुलिस ने गुरुवार सुबह “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया। पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में सुबह 5 से 8 बजे तक जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में यह विशेष अभियान संचालित हुआ। इस पहल का मकसद आमजन में सुरक्षा की भावना को सशक्त करना और पुलिस-जनता के बीच विश्वास की डोर को और मजबूत बनाना रहा।

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अभियान के दौरान सभी थाना प्रभारी और थानाध्यक्षों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सुबह टहलने निकले लोगों से सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की कड़ी जांच की। पुलिस टीमों ने चोरी की गाड़ियों, मोडिफाइड साइलेंसर, तीन सवारी और नाबालिग चालकों पर विशेष नजर रखते हुए कई चालान और कार्रवाई की।

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देवरिया पुलिस ने बताया कि अभियान के तहत 23 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 488 व्यक्तियों और 306 वाहनों की जांच की गई। पुलिस ने अवैध असलहा, मादक पदार्थों और असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण के लिए भी अभियान को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया।

जनता ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि “सुबह टहलते समय पुलिस की मौजूदगी ने हमें सुरक्षा का गहरा अहसास कराया।” पुलिस विभाग ने आश्वासन दिया कि ऐसे जनहितकारी अभियानों को नियमित रूप से जारी रखा जाएगा, ताकि जिले में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ बनी रहे।

“जाति बनाम विकास: बिहार के मतदाताओं के मन में क्या चल रहा है?”

बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। एक ऐसा राज्य जिसकी राजनीति केवल सत्ता की कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि समाज के हर तबके की भावनाओं का संगम है। विधानसभा चुनाव 2025 का रण अब निर्णायक मोड़ पर है। हवा में चुनावी शोर है, सड़कों पर नारों की गूंज है, और सोशल मीडिया पर बहसों का बवंडर। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल जो हर बिहारवासी के मन में है—इस बार कौन जीतेगा? कौन हारेगा? और क्या सच में बदलेगा बिहार?
इस बार का चुनाव महज़ एक सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक चेतना बनाम जातीय समीकरणों की जंग है। नेताओं के भाषणों में “विकास” की बातें जरूर हैं, मगर धरातल पर बेरोज़गारी, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य की जमीनी हकीकत अब भी वोटरों के मन में सवाल बनकर गूंज रही है।


🔸 नेताओं के वादे: भाषणों में भविष्य, ज़मीनी हकीकत में संघर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और अन्य राष्ट्रीय नेता चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। रैलियों में जोश है, लेकिन जनता अब भाषणों की लहरों में बहने वाली नहीं।
महागठबंधन भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है — तेजस्वी यादव बेरोज़गारी और युवाओं के हक की बात कर रहे हैं। वहीं एनडीए “विकास” और “स्थिरता” का मुद्दा उठाकर जनता को रिझाने में जुटा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार बिहार का मतदाता ‘चेहरे’ से ज़्यादा ‘चरित्र’ देखेगा। जातीय राजनीति की पकड़ अभी भी मजबूत है, लेकिन नई पीढ़ी रोजगार, शिक्षा और डिजिटल सुविधा जैसी व्यावहारिक चीज़ों पर वोट डालने की सोच रखती है।

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🔸 बिहार की जमीनी नब्ज़: गांवों से शहरों तक उम्मीद और उदासी का संगम
ग्रामीण इलाकों में किसान आज भी सिंचाई, बिजली और उचित दामों के अभाव से जूझ रहे हैं। शहरों में बेरोज़गारी की दर बढ़ी है और उद्योगों का विकास अभी भी अधूरा सपना है।
लोग कहते हैं—“बोलने वाले बहुत हैं, करने वाले कम।”
यह वही भावना है जो चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।
बिहार की राजनीति हमेशा से भावनाओं, जातियों और आकांक्षाओं का संगम रही है। जहां एक ओर कुछ दल अपनी जड़ों को जातिगत समीकरणों में तलाशते हैं, वहीं कुछ युवा दल अब इन बंधनों को तोड़कर “नए बिहार” की परिकल्पना कर रहे हैं।
चुनावी समीकरण: कौन आगे, कौन पीछे?
एनडीए में बीजेपी और जदयू का गठबंधन फिलहाल संगठित दिख रहा है, पर अंदरूनी असंतोष और स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार चयन की खींचतान से समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
महागठबंधन में राजद-कांग्रेस का गठजोड़ अभी भी बड़ा वोट बैंक रखता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
तीसरे मोर्चे के रूप में वाम दल और छोटे दल भी कुछ क्षेत्रों में प्रभाव डाल सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार “मुद्दों पर आधारित मतदान” और “स्थानीय उम्मीदवार की लोकप्रियता” दोनों ही परिणाम को निर्णायक बनाएंगे।

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🔸सोशल मीडिया की ताकत: डिजिटल बिहार का नया रणक्षेत्र
पहले चुनावी प्रचार गांवों में पोस्टर-बैनर तक सीमित रहता था, अब इंस्टाग्राम रील्स और व्हाट्सएप फॉरवर्ड ने उसे डिजिटल क्रांति में बदल दिया है।
हर पार्टी अपने आईटी सेल के ज़रिए मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाने में लगी है।
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि डिजिटल प्रचार से ज़्यादा असर अब भी जमीनी जुड़ाव का होता है।
एक गांव के बुजुर्ग ने कहा, “मोबाइल पर जो दिखता है वो सपना है, असली बात तो तब है जब नेता हमारे गांव में आकर हमारी समस्या सुने।”
🔸जनता की सोच में बदलाव: अब बात विकास की
पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने सड़कों, शिक्षा और बिजली के क्षेत्र में सुधार देखा है। परंतु रोजगार और स्वास्थ्य का संकट अब भी गहरा है।
इसलिए 2025 का यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि विश्वास के पुनर्निर्माण का चुनाव है।
युवाओं की पीढ़ी सोशल मीडिया पर सक्रिय है, लेकिन वोट डालने की मानसिकता धीरे-धीरे जिम्मेदारी में बदल रही है।
वे कहते हैं — “हम विकास चाहते हैं, जात-पात नहीं।”
यह संकेत है कि बिहार की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।
जन सुराज भी तेजी से पैर फैला बिगाड़ रहा खेल या हो सकता है रेफरी अब तय होगी सूरत 14 नवम्बर को।
🔸 14 नवंबर का इंतज़ार: जब बिहार बोलेगा फैसला
वोटिंग की तारीखें तय हो चुकी हैं और अब सभी की निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब नतीजे आएंगे।
क्या जनता एक बार फिर पुराने चेहरों पर भरोसा जताएगी या नए नेतृत्व को मौका देगी — यह वही दिन तय करेगा।
किसी के लिए यह सत्ता में वापसी का अवसर है, तो किसी के लिए राजनीतिक अस्तित्व की आखिरी लड़ाई।

बिहार की जनता तय करेगी असली “परिवर्तन”
बिहार के चुनावों की कहानी सदैव संघर्ष और उम्मीद की रही है।
यहां राजनीति सिर्फ वोट की नहीं, अस्तित्व की बात होती है।
इस बार का चुनाव बतलाएगा कि क्या जनता झूठे वादों और जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और ईमानदारी के आधार पर फैसला करेगी या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा।
बिहार की गलियों में अब वही पुराना सवाल गूंज रहा है —
“इस बार का बिहार किस करवट बैठेगा?”