Sunday, July 5, 2026
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“राशियों अनुसार सोमवार-विश्लेषण: व्यवसाय, शिक्षा, कला एवं राजनीति”

27 अक्टूबर 2025 (सोमवार) का करियर एवं कार्य-क्षेत्र राशिफल

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय प्रस्तुत

🌌 योग का संक्षिप्त परिचय

आज, चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहा है तथा दसवें भाव में शुक्र व ग्यारहवें भाव में बुध के गोचर से वसुमान योग बन रहा है। यह योग एक अत्यंत शुभ संयोजन माना गया है, जो व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से धन-संपन्नता, सुख-सुविधा तथा भाग्य-सहायता प्रदान करता है।
इस योग के प्रकाश में, नीचे सभी १२ राशियों के लिए विस्तृत करियर-राशिफल प्रस्तुत है।

नोट: यह सामान्य राशिफल है — आपकी जन्मकुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। व्यावसायिक निर्णय, निवेश या अन्य गंभीर कदम उठाने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना श्रेयस्कर है।
♈ मेष (मेष) राशि
करियर / व्यवसाय: आज का दिन आपके लिए शुभ रहेगा। लंबित कार्यों में गति आएगी, नए अवसर खुलेंगे और भाग्य का साथ मिलेगा।
शिक्षा / अध्ययन: अगर आप शिक्षा-क्षेत्र में हैं, तो पुराने प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय है।
कला-संगीत-सृजन: रचनात्मक कामों के लिए अच्छा समय; अपनी प्रतिभा दिखाने से लाभ होगा।
राजनीतिक / प्रशासनिक क्षेत्र: नेतृत्व-भूमिका में आगे बढ़ने की संभावना है।
आर्थिक दृष्टि: लाभ के मजबूत संकेत; किंतु शाम को थकावट न हो, इसलिए ऊर्जा का खयाल रखें।
शुभ रंग: हल्का लाल
शुभ अंक: 3
पूजा हेतु देवता: भगवान गणेश की पूजा करने से बाधाएं कम होंगी।
वृष (वृषभ) राशि
करियर: आज कार्यस्थल पर विरोधियों की संख्या बढ़ सकती है, रुकावटें आएंगी।
शिक्षा: समूह-कार्य में समन्वय की कमी हो सकती है; संयम आवश्यक।
कला-संगीत: अचानक व्यवधान आ सकते हैं, चुनौतियों को शांतिपूर्वक लें।
राजनीतिक/प्रशासनिक: किसी सहयोगी से मतभेद हो सकते हैं; शांत एवं संयत रहना बेहतर रहेगा।
आर्थिक: खर्च बढ़ने की संभावना; बेवजह निवेश न करें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 6
पूजा हेतु देवता: भगवान शिव की पूजा एवं जप तनाव में राहत देंगे।

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मिथुन (मिथुन) राशि
करियर: आपकी एकाग्रता दृढ़ रहेगी; नए निवेश-अवसर मिलेंगे।
शिक्षा: पुरानी योजनाओं को गति मिलेगी, शोध-कार्य आदि फलीभूत होंगे।
कला-संगीत: कला-प्रदर्शन हेतु अवसर मिल सकते हैं; स्वरचिति में प्रयास करें।
राजनीतिक/प्रशासनिक: वरिष्ठों की ओर से सराहना मिल सकती है।
आर्थिक: निवेश सोच-समझ कर करें; वाहन-संबंधी समस्या संभव है, सावधानी रखें।
शुभ रंग: हल्का नीला
शुभ अंक: 5
पूजा हेतु देवता: भगवान विष्णु की पूजा भाग्य बढ़ाएगी।

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कर्क (कर्क) राशि
करियर: आज का दिन आपकी ऊर्जा से भरा रहेगा; नए प्रयोग लाभदायी होंगे।
शिक्षा: अतिरिक्त प्रयास लाभदायी होगा, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं में।
कला-संगीत: प्रयोगात्मक रचनाएँ आज बढ़िया परिणाम देंगी।
राजनीतिक/प्रशासनिक: वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक: भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि की संभावना है; लेकिन आलोचना से बचें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा हेतु देवता: महा लक्ष्मी को अर्पित करें।
सिंह (सिंह) राशि
करियर: आज प्रतिष्ठा बढ़ने का दिन है। भाग्य आपका साथ देगा।
शिक्षा: लीडरशिप-क्षमता दिखाने का अवसर; छात्रों को विशिष्ट काम मिलेगा।
कला-संगीत: कीमती वस्तु मिलने या अद्वितीय रचनात्मक पहचान बनने की संभावना है।
राजनीतिक/प्रशासनिक: सामाजिक संपर्क बढ़ेंगे, नए लाभदायक संबंध बनेंगे।
आर्थिक: बिक्री एवं आय बढ़ सकती है; पर शाम के बाद विश्राम आवश्यक।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजा हेतु देवता: भगवान सूर्य की उपासना आज विशेष फलदायी होगी।
♍ कन्या (कन्या) राशि
करियर: नौकरी-व्यवसाय में मान-सम्मान मिलेगा; प्रमोशन-संकेत मिल रहे हैं।
शिक्षा: सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र में प्रगति संभव।
कला-संगीत: नई डील या प्रोजेक्ट मिल सकता है; लेकिन खर्च बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक/प्रशासनिक: प्रभावशाली लोगों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं; जल्दबाजी में निर्णय न लें।
शुभ रंग: हल्का हरा
शुभ अंक: 9
पूजा हेतु देवता: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा लाभदायी है।
तुला (तुला) राशि
करियर: मेहनत का पूरा फल मिलेगा, पर स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
शिक्षा: पुराने संपर्क से लाभ होगा; सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।
कला-संगीत: टीम-वर्क लाभदायी रहेगा; व्यक्तिगत प्रयास संतुलित रखें।
राजनीतिक/प्रशासनिक: जिम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं; पर सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
आर्थिक: नए अवसर आएंगे; लेकिन संतुलन बनाए रखना जरुरी।
शुभ रंग: मटमैला गुलाबी
शुभ अंक: 4
पूजा हेतु देवता: गणेश जी की आराधना शुभ है।
वृश्चिक (वृश्चिक) राशि
करियर: मिश्रित परिणाम देंगे; आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें।
शिक्षा: फोकस में कमी हो सकती है, मानसिक अशांति संभव।
कला-संगीत: नया निवेश फिलहाल टालें; बाद में बेहतर परिणाम मिलेगा।
राजनीतिक/प्रशासनिक: कार्य-क्षेत्र में स्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं पर दोपहर के बाद राहत मिलेगी।
आर्थिक: पेट से जुड़ी तकलीफ हो सकती है; खर्चों पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: गहरा लाल
शुभ अंक: 8
पूजा हेतु देवता: भगवान हनुमान को वाक्य रखें।
धनु (धनुर) राशि
करियर: आत्म-विश्वास बढ़ेगा, नेतृत्व-क्षमता की सराहना होगी।
शिक्षा: संसाधनों की कमी से कुछ कार्य अधूरे रह सकते हैं; पुनर्विचार करें।
कला-संगीत: भाग्य के योग बन रहे हैं; अपनी कला-रुचि आगे बढ़ाएँ।
राजनीतिक/प्रशासनिक: सामाजिक मान-दण्ड बढ़ेंगे।
आर्थिक: धन के मामलों में सावधानी जरूरी; उधार-देने से बचें।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 7
पूजा हेतु देवता: देवी सरस्वती की पूजा विशेष शुभ।
मकर (मकर) राशि
करियर: निर्णय-शक्ति मजबूत होगी; पुराने विवादों में जीत संभव।
शिक्षा: विश्लेषणात्मक कार्यों में आप सफल रहेंगे।
कला-संगीत: संरचनात्मक या अनुशासित कला कार्य विशेष सफल होंगे।
राजनीतिक/प्रशासनिक: प्रमोशन-संकेत हैं, कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक: व्यावसायिक प्रस्ताव लाभदायी होंगे; कानूनी मामलों में भी सफलता संभव।
शुभ रंग: हल्का भू रेशमी
शुभ अंक: 10
पूजा हेतु देवता: भगवान यम का स्मरण शुभ।
कुंभ (कुंभ) राशि
करियर: करियर विस्तार के लिए अनुकूल दिन; भागीदारी वाले काम सफल होंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समय अनुकूल है।
कला-संगीत: मित्र-समूह से सहयोग मिलेगा और रचनात्मक आवाज मिलेगी।
राजनीतिक/प्रशासनिक: वरिष्ठों का आशीर्वाद आत्म-विश्वास बढ़ाएगा।
आर्थिक: भागीदारी एवं साझेदारी से लाभ संभव।
शुभ रंग: हल्का नीला
शुभ अंक: 11
पूजा हेतु देवता: भगवान बुद्ध को वंदन करें।
मीन (मीन) राशि
करियर: वरिष्ठों का समर्थन मिलेगा; पदोन्नति-योग बन रहे हैं।
शिक्षा: व्यापारियों को लाभ-अवसर मिलेंगे; विद्यार्थियों को शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
कला-संगीत: गल्फ दूर-दृष्टि कार्यों के लिए उपयुक्त समय है।
राजनीतिक/प्रशासनिक: कार्य-क्षेत्र में आपकी कार्यक्षमता को पहचाना जाएगा।
आर्थिक: उतार-चढ़ाव संभव; मानसिक अशांति नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: मटका हरा
शुभ अंक: 12
पूजा हेतु देवता: देवी दुर्गा की आराधना लाभदायी।

युवक के साथ मारपीट करने के मामले मे पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा )
जैतीपुर थाना क्षेत्र के गांव पिटरहाई में तीन दिन पहले दुकान पर सामान लेने गए युवक को कुछ लोगों ने रास्ते में घेर कर बेवजह गाली गलौज की। विरोध करने पर जमकर मारा पीटा।इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया है।पिटरहाई के आनंद प्रताप सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया गुरुवार की रात 8 बजे वह गांव में दुकान पर सामान लेने गया।तभी रास्ते में गांव का हनी बेवजह गालियां देने लगा, जब गाली देने से मना किया तो उसने बागेश,अनिल,पप्पू को बुला लिया। जब वह अपने घर की तरफ भागा तो सभी ने लाठी डंडों से मारा पीटा।शोर सुनकर ग्रामीण आ गए तब आरोपी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

छठ पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसएसपी के निर्देश पर एसपी उत्तरी ने किया घाटों का निरीक्षण

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
आगामी छठ पर्व को सकुशल एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन सक्रिय मोड में है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नैय्यर के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक उत्तरी जितेंद्र श्रीवास्तव ने आज थाना चौरी चौरा एवं थाना झंगहा क्षेत्रांतर्गत विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने घाटों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था तथा प्रकाश एवं साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसपी उत्तरी ने संबंधित थानाध्यक्षों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया कि छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सभी घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, महिला पुलिस कर्मियों की मौजूदगी, प्रकाश व्यवस्था और बैरीकेडिंग की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल सतर्क एवं मुस्तैद रहे, साथ ही स्थानीय लोगों से समन्वय स्थापित कर सुचारु व्यवस्था बनाकर रखी जाए।

इस दौरान सीओ चौरी चौरा अनुराग सिंह सहित संबंधित थाना प्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे।

शिखर-से-हीरक: 27 को अटल प्रतिमा बने विभूतियों का जीवन-संस्मरण”

मानस पटल पर गूंजती यादें: 27 अक्टूबर को स्वर्गवास पाने वाले महान् विभूतियों का श्रद्धांजलि-संकलन

आज हम 27 अक्टूबर के दिन (विभिन्न वर्षों में) स्वर्गवास पाने वाले छह महान् विभूतियों — उनके जीवन-संदर्भ, शिक्षा-प्रशिक्षण, योगदान एवं विरासत — को विविध एवं व्यापक रूप से स्मरण कर रहे हैं। इस लेख में प्रत्येक पर लगभग 100-150 शब्दों में प्रकाश डालते हुए, उनके जन्म-स्थान, शिक्षा-भूमि, प्रमुख उपलब्धियों आदि का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

  1. ब्रह्मबांधव उपाध्याय (1861-1907)
    ब्रह्मबांधव उपाध्याय का जन्म 11 फरवरी 1861 को बंगाल प्रेसीडेंसी के होगली ज़िले के खनयान गाँव में हुआ था। उनके पिता देविचरण बांड्योपाध्याय ब्रिटिश शासित पुलिस व्यवस्था में पदस्थ थे, परंतु ब्रह्मबांधव बचपन में ही माँ खो बैठे और उनकी शिक्षा-परवरिश दादाजी व अन्य परिजन द्वारा हुई। उन्होंने होगली कॉलेगिएट स्कूल तथा कॉलकाता के जेनेरल असेंबली्स इंस्टिट्यूशन (अब स्कॉटिश चर्च कॉलेज) में शिक्षण ग्रहण किया। शिक्षा के दौरान ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद के सहपाठियों में स्थान पाया तथा बाद में ब्रह्मो समाज से जुड़े। उनके इन वैचारिक पृष्ठभूमियों ने भारतीय धर्म-संज्ञा व राष्ट्रीय चेतना के संगम में उनका योगदान सुनिश्चित किया। उन्होंने ‘ट्वेंटीथ सेंचुरी’ नामक मासिक पत्रिका प्रकाशित की तथा आधुनिक शिक्षा-वेदांत के आदर्शों के अनुरूप स्कूल-संस्थान स्थापित किए। 27 अक्टूबर 1907 को कालकत्ता में उनका निधन हुआ। उनकी संघर्षशील सोच, धार्मिक समन्वय-दृष्टि तथा स्वराज-चेतना आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।
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  3. दिवान रंजीत राय (1913-1947)
    दिवान रंजीत राय का जन्म 6 फरवरी 1913 को पंजाब प्रांत के गुजरानवाला (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने बिशप कॉटन स्कूल, शिमला से शिक्षा ली और बाद में भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रथम-पाठ्यक्रम में शामिल हुए। स्वतंत्र भारत के प्रथम युद्ध-परिस्थितियों में उन्होंने 1 सिख रेजिमेंट की कमान संभाली और 27 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के पतन क्षेत्र में नेतृत्व करते हुए वीरगति प्राप्त की। उन्हें भारत का पहला “महावीर चक्र” प्राप्तकर्ता माना जाता है। उनके निस्वार्थ बलिदान ने भारतीय सेना में ‘इन्फैंट्री दिवस’ की प्रासंगिकता स्थापित की है।
  4. ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह (1899-1947)
    ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह (जम्वू एवं कश्मीर राज्य सेना) का जन्म 14 जून 1899 को जम्मू जिले के बगोना (अब राजिंदरपुरा) में हुआ था। उन्होंने प्रिंस ऑफ़ वेल्स कॉलेज, जम्मू से शिक्षा प्राप्त की और 1921 में कश्मीर सेना में शामिल होकर 1947-48 के प्रथम भारत-पाक युद्ध में अपनी भूमिका निभाई। 26/27 अक्टूबर 1947 की रात को उन्होंने सीमित संसाधनों में कश्मीर घाटी के द्वारों पर घुसपैठियों को रोका एवं अन्ततः शहीद हो गए। उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। उनकी दृढ़ता, वीरता एवं सम्मान आज भी कश्मीर रक्षा-कथा के पृष्ठों में सुनहरे अक्षरों में अंकित हैं।
  5. मदन लाल खुराना (1936-2018)
    मदन लाल खुराना का जन्म 15 अक्टूबर 1936 को ब्रिटिश भारत के लाइलपुर (अब पाकिस्तान के फैसलाबाद) में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आकर दिल्ली-पाक्षिक जीवन में स्थापित हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरी माल कॉलेज से स्नातक किया। राजनीति में उन्होंने प्रवेश किया और 2 दिसंबर 1993 से 26 फरवरी 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। ‘दिल्ली का शेर’ के नाम से लोकप्रिय खुराना ने राष्ट्रीय राजधानी में बुनियादी बदलाव, शहरी विकास तथा पार्टी निर्माण-कार्य को आगे बढ़ाया। 27 अक्टूबर 2018 को उनका निधन हुआ। उनकी उद्देश्य-परक राजनीति और सामाजिक प्रतिबद्धता आज भी अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
  6. राष्ट्रीय स्वाभिमान तख्ते पर खड़े ‘महावीर चक्र’‑वीर ब्रिगेडियर्स
    (विशिष्ट नाम न मिलने के कारण इस खंड में सिर्फ संकेत रूप से अंकित)
    इस दिन के इतिहास में 27 अक्टूबर 1947 के युद्ध-घटनाओं से जुड़े अन्य वीरों की उपस्थिति प्रकट होती है, जिनमें “महावीर चक्र”-से सम्मानित सैन्य अधिकारी शामिल हैं। विशेष रूप से 1 सिख रेजिमेंट के Lt. Col. देवान् रंजीत राय तथा ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह ने इस=date को भारत-रक्षा-इतिहास में अमर कर दिया। उनकी कुर्बानी हमें ‘कर्तव्य’, ‘शौर्य’ और ‘निवेदित सेवा’ के मूल्यों की याद दिलाती है।
  7. (अन्य उल्लेखनीय व्यक्तित्व)
    (सूचीबद्ध अन्य नामों में – जैसे टी. एस. एस. राजन, प्यारे लाल, विजय मर्चेन्ट, बी. बी. लिंगदोह आदि – दुर्लभ स्रोत-साक्ष्यों के कारण विस्तृत शिक्षा-वृत्तांत एवं योगदान-विवरण के साथ प्रस्तुत करना संभव नहीं हुआ। इस लेख में प्रमुख एवं प्रमाणित स्रोतों वाले व्यक्तित्वों को प्राथमिकता दी गई है।)
    27 अक्टूबर का दिन इतिहास-पटल पर वीरता, त्याग, नेतृत्व एवं सामाजिक-राष्ट्रीय सिद्धांतों के प्रतीक-दिन के रूप में अंकित है। इन व्यक्तियों ने-– वैश्विक शिक्षा-प्रसार, राष्ट्रीय स्वतंत्रता-संग्राम, सैन्य-शौर्य, लोक-सेवा एवं राजनीतिक-निर्धारण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया। उनके जन्म-स्थान, शिक्षा-वृत्त एवं जीवन-यात्रा हमें यह सिखाती है कि व्यक्तिगत लक्ष्य-परिवर्तन, समय-प्रेरणा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से किस प्रकार समाज-परिवर्तन संभव है।
    इन महान् विभूतियों की याद हमें प्रेरित करती है कि हम अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट-प्रयास करें, जीवन-दायित्व समझें और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर समाज-निर्माण की ओर अग्रसर करें।

जानिए किस दिशा में यात्रा शुभ और क्या करें सफलता के लिए

🌞 “27 अक्टूबर 2025 का विस्तृत पंचांग – छठ पूजा का शुभ दिन, जानिए आज का शुभ मुहूर्त, दिशा और उपाय” 🌞


🌸 आज का दिन – 27 अक्टूबर 2025 (सोमवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी)
संवत्सर: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) | शक संवत 1947 (विश्वावसु)
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत एवं अमांत दोनों अनुसार)
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: षष्ठी – 27 अक्टूबर 06:05 AM से 28 अक्टूबर 08:00 AM तक
वार: सोमवार (शिव एवं सूर्य उपासना का दिन)
ऋतु: हेमंत (द्रिक) | शरद (वैदिक)
अयन: दक्षिणायन

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🌞 सूर्य व चंद्र से जुड़ी जानकारी
विवरण समय / राशि
सूर्योदय 6:33 AM
सूर्यास्त 5:48 PM
चन्द्रोदय 11:26 AM
चन्द्रास्त 10:03 PM
सूर्य राशि तुला
चन्द्र राशि धनु (पूरा दिन-रात)
🌕 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: मूल – Oct 26, 10:46 AM से Oct 27, 01:27 PM तक
पूर्वाषाढ़ा – Oct 27, 01:27 PM से Oct 28, 03:45 PM तक
योग:अतिगण्ड – Oct 26, 06:45 AM से Oct 27, 07:26 AM तक
सुकर्मा – Oct 27, 07:26 AM से Oct 28, 07:50 AM तक
करण: कौलव – 06:05 AM से 07:06 PM तक
तैतिल – 07:06 PM से 08:00 AM (28 अक्टूबर)

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🌅 आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त
🌼 शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:33 PM
अमृत काल: 06:24 AM – 08:11 AM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:57 AM – 05:45 AM
⚠️ अशुभ काल
राहु काल: 07:57 AM – 09:22 AM
यम गण्ड: 10:46 AM – 12:10 PM
कुलिक काल: 01:35 PM – 02:59 PM
दुर्मुहूर्त: 12:33 PM – 01:18 PM, 02:48 PM – 03:33 PM
🚩 त्यौहार और व्रत
छठ पूजा (षष्ठी व्रत)
सोमवार व्रत (भगवान शिव की आराधना हेतु शुभ)

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🧭 यात्रा के लिए शुभ-अशुभ दिशा
आज की यात्रा के लिए शुभ दिशा: उत्तर एवं पूर्व दिशा
अशुभ दिशा: पश्चिम दिशा में यात्रा टालें
(यदि आवश्यक हो तो जौ खाकर या दूध पीकर निकलें — माना जाता है कि इससे राहु-दोष का प्रभाव कम होता है।)
🌿 आज क्या खाकर निकले घर से
👉 सोमवार को घर से निकलते समय दूध या दही, या श्वेत वस्त्र धारण कर शिव का स्मरण कर यात्रा प्रारंभ करें।
इससे कार्यों में स्थिरता आती है और धन-संबंधी रुकावटें दूर होती हैं।

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🔮 आज के विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग: 26 अक्टूबर 10:46 AM – 27 अक्टूबर 06:33 AM तक (मूल नक्षत्र व रविवार के योग से)
आनन्दादि योग: लुम्ब (01:27 PM तक), तत्पश्चात उत्पात
चन्द्रबल: मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन राशि के जातकों के लिए अत्यंत शुभ
ताराबल: भरणी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा आदि नक्षत्र वालों के लिए अनुकूल
🌕 दिन का चौघड़िया काल समय फल
अमृत 06:33 – 07:57 अत्यंत शुभ
काल 07:57 – 09:22 अशुभ
शुभ 09:22 – 10:46 कार्य प्रारंभ हेतु श्रेष्ठ
रोग 10:46 – 12:10 विवाद से बचें
उद्बेग 12:10 – 01:35 अस्थिरता
चर 01:35 – 02:59 यात्रा हेतु शुभ
लाभ 02:59 – 04:23 लाभप्रद
अमृत 04:23 – 05:47 सर्वश्रेष्ठ
🌙 रात्रि का चौघड़िया काल समय फल
चर 05:48 – 07:23 यात्रा सफल
रोग 07:23 – 08:59 स्वास्थ्य का ध्यान रखें
काल 08:59 – 10:35 हानि योग
लाभ 10:35 – 12:11 लाभदायक समय
उद्बेग 12:11 – 01:46 अस्थिरता
शुभ 01:46 – 03:22 विवाह, पूजन हेतु श्रेष्ठ
अमृत 03:22 – 04:58 अत्यंत शुभ
चर 04:58 – 06:33 सामान्य शुभ
🌞 क्या करने से बनेंगे बिगड़े काम

शिवलिंग पर दूध अर्पित करें – कार्यों में सफलता मिलेगी।

सूर्य को अर्घ्य दें – धन व स्वास्थ्य में उन्नति होगी।

  1. छठी माता की पूजा – परिवार में सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति।
  2. गाय को गुड़ खिलाएं – शुभ समाचार की प्राप्ति।
    🌺 संक्षेप में – दिन सार
    दिन: सोमवार
    तिथि: षष्ठी
    मुख्य पर्व: छठ पूजा
    शुभ दिशा: उत्तर, पूर्व
    अशुभ दिशा: पश्चिम
    यात्रा से पूर्व खाएं: दूध या दही
    विशेष उपाय: सूर्य को अर्घ्य अर्पण एवं शिव पूजन

प्रतिभा का पर्व : जब दुनिया ने पाया अपने क्षेत्र के नायक

🌸27 अक्टूबर : इतिहास के पन्नों में जन्मे वे व्यक्तित्व जिन्होंने अपने कर्म से अमिट छाप छोड़ी🌸


इतिहास का प्रत्येक दिन कुछ न कुछ प्रेरक गाथाएँ समेटे होता है। 27 अक्टूबर का दिन भी ऐसी ही विभूतियों का स्मरण कराता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। चाहे क्रिकेट के मैदान पर गेंद और बल्ले से जादू बिखेरने वाले इरफ़ान पठान हों या वैष्णव परंपरा के गूढ़ ज्ञाता श्री श्रीवत्स गोस्वामी — सभी ने मानवता, समर्पण और प्रतिभा का उदाहरण प्रस्तुत किया। आइए जानते हैं उन महान विभूतियों के बारे में, जिनका जन्म 27 अक्टूबर को हुआ और जिन्होंने अपने कार्यों से इतिहास के पन्नों को सुवासित किया।
🏏 इरफ़ान पठान (जन्म: 27 अक्टूबर 1984, वडोदरा, गुजरात)
इरफ़ान पठान भारत के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। गुजरात के वडोदरा में जन्मे इरफ़ान ने बहुत कम उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई। बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ और मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में उन्होंने कई बार टीम को जीत दिलाई। पाकिस्तान के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ताज़ा है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ कोचिंग और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। आज वे न केवल एक उत्कृष्ट खिलाड़ी बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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♟️ दिब्येन्दु बरुआ (जन्म: 27 अक्टूबर 1966, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
पश्चिम बंगाल की धरती से निकलने वाले दिब्येन्दु बरुआ भारत के दूसरे ग्रैंडमास्टर हैं। उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी। 1982 में विश्वनाथन आनंद के बाद भारत को दूसरा ग्रैंडमास्टर देने का श्रेय इन्हें जाता है। शतरंज की बारीकियों पर उनकी गहरी पकड़ और अद्भुत एकाग्रता ने उन्हें विश्व स्तर पर प्रसिद्ध किया। वे आज भी युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने और भारत में शतरंज के प्रसार में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

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📿 श्री श्रीवत्स गोस्वामी (जन्म: 27 अक्टूबर 1950, वृंदावन, उत्तर प्रदेश)
वैष्णव परंपरा के विद्वान और श्री चैतन्य प्रेम संस्थान, वृंदावन के निदेशक श्री श्रीवत्स गोस्वामी एक आध्यात्मिक प्रकाश स्तंभ हैं। उन्होंने संस्कृत और धर्मशास्त्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त की। वृंदावन की भक्ति परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करने में उनका विशेष योगदान है। गोस्वामी जी का जीवन सादगी, सेवा और सांस्कृतिक संवाद से परिपूर्ण है। वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति के प्रवक्ता के रूप में भी सम्मानित हैं।
🇧🇷 लुइज़ इंसियो लूला दा सिल्वा (जन्म: 27 अक्टूबर 1945, पर्नाम्बुको, ब्राज़ील)
गरीबी से संघर्ष करते हुए ब्राज़ील के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने वाले लूला दा सिल्वा संघर्ष और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं। उन्होंने मजदूर आंदोलनों से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और ब्राज़ील को आर्थिक स्थिरता की ओर अग्रसर किया। उनके शासनकाल में गरीबी घटाने और शिक्षा को सुलभ बनाने के कई सफल प्रयास हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने दक्षिणी गोलार्ध के देशों के हितों की आवाज़ बुलंद की।
🏏 दत्ताजी राव गायकवाड़ (जन्म: 27 अक्टूबर 1928, बड़ौदा, गुजरात)
भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम युग के प्रतिनिधि दत्ताजी राव गायकवाड़ का जन्म बड़ौदा में हुआ था। वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। गायकवाड़ अपने सधी हुई बल्लेबाजी और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भारत में क्रिकेट को संगठित रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उनके योगदान ने भारतीय क्रिकेट की नींव को मज़बूत किया।

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🇮🇳 के. आर. नारायणन (जन्म: 27 अक्टूबर 1920, केरला, भारत)
भारत के दसवें राष्ट्रपति के. आर. नारायणन लोकतंत्र और समानता के प्रतीक थे। केरला के एक साधारण परिवार में जन्मे नारायणन जी ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातकोत्तर किया और भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश पाया। बाद में वे राजनीति में आए और अपनी विद्वता, सादगी तथा संवेदनशील नेतृत्व से जनसेवा का नया आदर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने संविधान की मर्यादा को सर्वोच्च स्थान दिया।
🇮🇳 जतीन्द्रनाथ दास (जन्म: 27 अक्टूबर 1904, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जतीन्द्रनाथ दास का नाम अमर है। कोलकाता में जन्मे जतीन्द्रनाथ ने युवावस्था में ही क्रांतिकारी दल में प्रवेश किया। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के साथ उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लाहौर जेल में राजनीतिक कैदियों के अधिकारों के लिए उन्होंने 63 दिन का ऐतिहासिक भूख हड़ताल की और शहीद हो गए। उनका बलिदान स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बन गया।

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⚙️ आइजैक मेरिट सिंगर (जन्म: 27 अक्टूबर 1811, न्यूयॉर्क, अमेरिका)
सिलाई मशीन के आविष्कारक आइजैक मेरिट सिंगर ने औद्योगिक क्रांति को आम जनजीवन से जोड़ा। अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मे सिंगर ने यांत्रिक उपकरणों में सुधार कर सिलाई मशीन को आधुनिक रूप दिया। उनके आविष्कार ने वस्त्र उद्योग को गति दी और घर-घर में रोजगार का अवसर बढ़ाया। सिंगर कंपनी ने वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादन में क्रांति ला दी। उनका जीवन सृजनशीलता और नवाचार का अद्भुत उदाहरण है।
✨27 अक्टूबर का दिन हमें यह सिखाता है कि प्रतिभा, समर्पण और संघर्ष के मार्ग पर चलकर कोई भी व्यक्ति इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है। इन विभूतियों ने समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

जब बदल गई दुनिया की दिशा, हर मोड़ पर लिखी गई नई कहानी

🌏 27 अक्टूबर का इतिहास

इतिहास के पन्नों में 27 अक्टूबर का दिन कई दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। यह दिन केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए ऐसे निर्णायक क्षणों का साक्षी बना, जिनसे राजनीतिक, सामाजिक और वैश्विक समीकरणों में बड़ा परिवर्तन आया। युद्ध, समझौते, प्राकृतिक आपदाएं और राजनैतिक निर्णय — हर घटना ने मानव सभ्यता की दिशा को नई राह दिखाई। आइए, जानते हैं इस दिन की वे ऐतिहासिक घटनाएँ जिन्होंने विश्व और भारत के भविष्य पर गहरी छाप छोड़ी।

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1676 – वारसा की संधि: यूरोप में सत्ता संतुलन की नई परिभाषा
27 अक्टूबर 1676 को पोलैंड और तुर्की के बीच वारसा की संधि पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने का प्रतीक था, बल्कि इसने यूरोप के राजनैतिक समीकरणों को भी नई दिशा दी। उस दौर में यूरोप में लगातार चल रहे युद्धों से आम जनता त्रस्त थी, और इस संधि ने उन्हें थोड़ी राहत दी। यह घटना दर्शाती है कि कैसे बातचीत और कूटनीति से युद्ध की आग को शांत किया जा सकता है।

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1795 – सैन लोरेंजो संधि: अमेरिका और स्पेन के बीच मैत्री का सूत्रपात
27 अक्टूबर 1795 को अमेरिका और स्पेन के बीच सैन लोरेंजो की संधि हुई, जिसे पिंकनी संधि भी कहा जाता है। इस समझौते के माध्यम से मिसिसिपी नदी पर अमेरिका को नौवहन के अधिकार मिले। यह घटना अमेरिका की आर्थिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक स्थिति को मजबूत करने वाली साबित हुई। इतिहासकार इसे अमेरिका की कूटनीतिक परिपक्वता का पहला बड़ा उदाहरण मानते हैं।

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1806 – बर्लिन में फ्रांसीसी सेना का प्रवेश
नेपोलियन बोनापार्ट के नेतृत्व में 27 अक्टूबर 1806 को फ्रांस की सेना ने बर्लिन में प्रवेश किया। यह घटना यूरोप में फ्रांसीसी शक्ति की चरम सीमा को दर्शाती है। नेपोलियन के इस कदम ने प्रशा (Prussia) की ताकत को कमजोर किया और यूरोपीय राजनीति को पुनर्गठित कर दिया। इस विजय के बाद फ्रांस ने बर्लिन डिक्री जारी की, जिसने ब्रिटेन के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी का मार्ग प्रशस्त किया।
1947 – जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय: अखंड भारत की ओर ऐतिहासिक कदम
27 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय की स्वीकृति दी। यह भारतीय इतिहास का एक निर्णायक क्षण था। पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बीच यह निर्णय भारत की संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक बना। उसी दिन भारतीय सेना ने श्रीनगर हवाईअड्डे पर उतरकर कश्मीर की रक्षा की। इस घटना ने भारत के राजनीतिक भूगोल को सदा के लिए बदल दिया और “भारत माता” के मानचित्र को अधिक संपूर्ण बनाया।

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1959 – मेक्सिको में चक्रवाती तूफान: मानवता की त्रासदी
27 अक्टूबर 1959 को पश्चिमी मेक्सिको में आए भीषण चक्रवाती तूफान ने तबाही मचा दी। इस तूफान में लगभग 2000 लोगों की जान चली गई। यह घटना दर्शाती है कि प्रकृति जब रौद्र रूप दिखाती है, तो मानव सभ्यता कितनी असहाय हो जाती है। इस हादसे के बाद मेक्सिको सरकार ने तटीय सुरक्षा और मौसम चेतावनी तंत्र को मजबूत करने के कदम उठाए।
1968 – मेक्सिको सिटी ओलंपिक का समापन: खेल भावना की विजय
27 अक्टूबर 1968 को 19वें ओलंपिक खेलों का समापन हुआ। इन खेलों को याद किया जाता है अफ्रीकी-अमेरिकी खिलाड़ियों टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस की “ब्लैक पावर सलामी” के लिए, जिसने नस्लीय समानता की लड़ाई को वैश्विक मंच दिया। यह ओलंपिक केवल खेलों का उत्सव नहीं था, बल्कि मानवाधिकारों के प्रति एक मजबूत आवाज भी बना।

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1978 – नोबेल शांति पुरस्कार: मिस्र और इजरायल के बीच नई शुरुआत
27 अक्टूबर 1978 को मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात और इजरायल के प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान कैम्प डेविड समझौते के माध्यम से मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों का परिणाम था। इस कदम ने अरब देशों और इजरायल के बीच संवाद की नई राह खोली। यह पुरस्कार केवल दो नेताओं का नहीं, बल्कि शांति के आदर्शों का सम्मान था।
1995 – चेरनोबिल संयंत्र का बंद होना: मानव त्रुटि से सबक
27 अक्टूबर 1995 को यूक्रेन के कीव स्थित चेरनोबिल परमाणु संयंत्र को सुरक्षा कारणों से पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया। 1986 की भयावह परमाणु दुर्घटना के बाद यह कदम वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने वाला साबित हुआ। यह निर्णय इस बात की चेतावनी है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ सुरक्षा और नैतिकता का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
1997 – एडिनबर्ग राष्ट्रकुल सम्मेलन: साझा विकास की भावना
27 अक्टूबर 1997 को एडिनबर्ग (स्कॉटलैंड) में राष्ट्रकुल देशों का शिखर सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में शिक्षा, पर्यावरण और गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर वैश्विक रणनीतियाँ बनीं। यह सम्मेलन इस बात का उदाहरण है कि जब राष्ट्र मिलकर विचार करते हैं, तो वैश्विक समस्याओं के समाधान के रास्ते खुलते हैं।

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2003 – चीन में भूकंप और बगदाद में बम विस्फोट
27 अक्टूबर 2003 का दिन मानवता के लिए दोहरी पीड़ा लेकर आया। चीन में आए विनाशकारी भूकंप से 50,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए, जबकि बगदाद में हुए भीषण बम विस्फोटों में 40 निर्दोष लोगों की मृत्यु हुई। ये घटनाएँ याद दिलाती हैं कि चाहे प्रकृति की मार हो या मानव निर्मित हिंसा — दोनों ही जीवन के संतुलन को हिला देती हैं।
2004 – चीन की विशालकाय क्रेन और फ्रांस-भारत कूटनीति
27 अक्टूबर 2004 को चीन ने विश्व की सबसे बड़ी क्रेन मशीन का निर्माण कर अपनी तकनीकी क्षमता का परिचय दिया। इसी दिन फ्रांस के विदेश मंत्री माइकल वार्नियर भारत के दौरे पर पहुँचे, जिसने दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती दी। यह दिन विज्ञान और कूटनीति — दोनों के संगम का प्रतीक माना जाता है।
2008 – पत्रकारों को अंतरिम राहत: लोकतंत्र की आवाज़ को सम्मान
27 अक्टूबर 2008 को भारत सरकार ने अखबार उद्योग के पत्रकारों और गैर-पत्रकारों को अंतरिम राहत देने की अधिसूचना जारी की। यह निर्णय मीडिया कर्मियों की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। इसने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जनभावनाओं की आत्मा है।
27 अक्टूबर का संदेश: इतिहास के आईने में वर्तमान
27 अक्टूबर के पन्ने हमें यह सिखाते हैं कि समय भले बदल जाए, लेकिन मानवता की चुनौतियाँ और उसके समाधान सदैव एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। कभी युद्ध और शांति की बातें, तो कभी विज्ञान और आपदा के सबक — यह दिन हमें सिखाता है कि सभ्यता की प्रगति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना पर भी निर्भर करती है।
इतिहास केवल तारीखों का संग्रह नहीं, बल्कि यह उन भावनाओं और निर्णयों का दस्तावेज़ है जिन्होंने मानव जीवन की दिशा तय की। 27 अक्टूबर का दिन हमें यह याद दिलाता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, हर युग में इंसान ने शांति, प्रगति और न्याय के लिए संघर्ष किया है।

फरेंदा में आरक्षी आलोक सिंह की मानवीय पहल से बची महिला की जान, बनी संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। थाना फरेंदा क्षेत्र में तैनात पुलिस पीआरवी आरक्षी आलोक सिंह ने अपनी तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता से एक महिला की जान बचाकर पुलिस सेवा की सच्ची भावना को जीवंत कर दिया।

जानकारी के अनुसार, कटलहवा मथुरानगर की एक महिला अपने पति से विवाद के बाद मानसिक रूप से व्यथित होकर धानी ढाला के पास रेलवे ट्रैक की ओर पहुंच गई थी और आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश कर रही थी।
सूचना मिलते ही आरक्षी आलोक सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए शांतिपूर्वक महिला से बातचीत की। उनकी संवेदनशीलता और समझदारी के कारण महिला ने आत्महत्या का विचार त्याग दिया।

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इसके बाद पुलिस ने महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
आरक्षी आलोक सिंह की यह त्वरित कार्रवाई न केवल एक अनमोल जीवन की रक्षा का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस कानून व्यवस्था की रखवाली के साथ-साथ मानवता की सेवा में भी अग्रणी है।

यह घटना जनपद महराजगंज पुलिस की उस छवि को और मजबूत करती है जिसमें पुलिस सिर्फ रक्षक नहीं, बल्कि समाज की जीवन रक्षक शक्ति बनकर उभर रही है।

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राजा भाऊ सोनटक्के का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया, लोगों ने दी शतायु होने की शुभकामनाएं

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। चेंबूर के जाने-माने युवा समाजसेवक और हिन्दू राष्ट्र सेवा संगठन महाराष्ट्र के अध्यक्ष राजा भाऊ सोनटक्के का जन्मदिन रविवार को बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, प्रशासनिक अधिकारियों और व्यापारी वर्ग के लोगों ने भाग लेकर उन्हें शतायु होने की शुभकामनाएं दीं।

मृदुभाषी, मिलनसार और समाज के सभी वर्गों में लोकप्रिय राजा भाऊ सोनटक्के छात्र जीवन से ही गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों की मदद में सक्रिय रहे हैं। उनकी सामाजिक सेवाओं के चलते ही उनके जन्मदिन पर लोगों ने पूरे सम्मान और स्नेह के साथ शुभकामनाएं दीं।

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बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारी द्विवेदी जी, मुंबई कांग्रेस रोजगार स्वयं रोजगार विभाग के महासचिव डॉ. सत्तार खान, वरिष्ठ पत्रकार हरीशचंद्र पाठक, त्रिलोक विवेचना के संपादक संदीप त्रिलोकीनाथ शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार राकेश शुक्ला, सुभाष गिरी, संजय गिरी, अजय उपाध्याय, तथा लंदन स्थित इंजीनियर ए. के. पाठक शामिल रहे। इसके अलावा चेंबूर के व्यापारिक और बुद्धिजीवी वर्ग से भी बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

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निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर का आयोजन, सैकड़ों मरीजों ने कराया इलाज

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार को बाबा गया दास टेक्निकल इंटर कॉलेज, बरहज के प्रांगण में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में सैकड़ों लोगों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया और मुफ्त दवाइयाँ प्राप्त कीं।

यह स्वास्थ्य शिविर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल सोंदा, देवरिया के तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राम भुवन यादव, चेयरमैन लालमती हॉस्पिटल, और सुशील यादव, प्रबंधक बाबा गया दास टेक्निकल इंटर कॉलेज, ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।

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शिविर के संयोजक डॉ. नागेंद्र यादव (लेप्रोस्कोपी सर्जन) ने बताया कि लालमती सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल का उद्देश्य देवरिया जिले के हर घर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।
शिविर में मरीजों की जांच के साथ रक्तचाप, शुगर, नेत्र, हड्डी, एवं महिला रोगों की जांच की गई और जरूरतमंदों को मुफ्त दवाएं दी गईं।

अंत में लालमती हॉस्पिटल के डायरेक्टर सत्येंद्र यादव ने सभी अतिथियों और मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया और कहा कि भविष्य में भी इस तरह के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन जारी रहेगा।

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बिजली विभाग की अपील — समय पर करें बिल का भुगतान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बिजली विभाग उपभोक्ताओं से लगातार अपील कर रहा है कि वे अपने बिजली बिल का भुगतान समय पर करें। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय पर बिल जमा करने से उपभोक्ताओं की सुविधा बनी रहती है और किसी प्रकार की असुविधा या विद्युत आपूर्ति बाधित होने की संभावना कम हो जाती है।


विभागीय कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ताओं को फोन कॉल के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है कि वे निर्धारित तिथि से पहले अपना बिल जमा करें। समय पर भुगतान से विभाग को विद्युत रखरखाव, ट्रांसफार्मर सुधार, लाइन दुरुस्ती और अन्य आवश्यक कार्यों में सुगमता होती है। अधिकारियों ने बताया कि उपभोक्ताओं का सहयोग ही क्षेत्र में निर्बाध और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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इसलिए सभी उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे नियमित रूप से बिल जमा कर जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें। इसकी जानकारी एसडीओ अजय कुमार सरोज ने दी!

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मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को किया गया जागरूक

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार को पुलिस अधीक्षक बलिया के निर्देशन में मिशन शक्ति फेज-5.0 अभियान के तहत थाना चितबड़ागांव पुलिस टीम द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उपनिरीक्षक नागेंद्र सिंह, महिला कॉन्स्टेबल सरिता पटेल, कॉन्स्टेबल सुनील कुमार, पीआरडी सुनीता व देवती देवी ने पानी टंकी बाजार चितबड़ागांव क्षेत्र में महिलाओं से संवाद स्थापित किया।

टीम ने महिलाओं को नए कानूनों, उनके अधिकारों, और सरकार द्वारा संचालित महिला सुरक्षा एवं कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा हेतु जारी हेल्पलाइन नंबर 1090, 112, 1076, 102, 108 तथा साइबर अपराध शिकायत हेतु हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में विस्तार से बताया गया।


पुलिस टीम ने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी आपात स्थिति या उत्पीड़न की स्थिति में इन हेल्पलाइन नंबरों का प्रयोग करें और निडर होकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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शौरभ राय बने आरएलडी के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष, कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया के चेतन किशोर गांव में रविवार को राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अजीत राय ने की, जबकि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम आशीष राय मौजूद रहे।

बैठक के दौरान सर्वसम्मति से शौरभ राय को आरएलडी का कार्यवाहक जिला अध्यक्ष घोषित किया गया। पदभार संभालने के बाद कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया और शुभकामनाएं दीं।

अपने संबोधन में शौरभ राय ने कहा कि संगठन द्वारा दी गई जिम्मेदारी को वे पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे तथा पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने का हर संभव प्रयास करेंगे।

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इस अवसर पर पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, पूर्व विधायक भगवान पाठक, भोला सिंह, हरिभगवान चौबे, रजनीश राय, सुरेश सिंह, अजय राय, ओमप्रकाश राय, अरविंद राय और विमलेश राय सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम आशीष राय ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार पुनः बनेगी। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की रणनीति भी एनडीए के समर्थन की दिशा में स्पष्ट संकेत दे रही है।
डॉ. राय ने बताया कि चौधरी चरण सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच सदैव आत्मीय संबंध रहे हैं, और पार्टी उन्हीं विचारों पर आगे बढ़ रही है।

बैठक का समापन कार्यवाहक जिलाध्यक्ष शौरभ राय ने प्रदेश और जिला नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए किया।

त्योहारों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर डीआईजी एस. चनप्पा की उच्चस्तरीय बैठक, दिए कड़े निर्देश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी छठ पर्व सहित अन्य त्योहारों के मद्देनज़र जनपद में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर रविवार को पुलिस लाइन स्थित ह्वाइट हाउस सभागार में डीआईजी रेंज गोरखपुर डॉ. एस. चनप्पा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नैय्यर सहित जनपद के सभी राजपत्रित अधिकारी, एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी उत्तरी जितेंद्र श्रीवास्तव, एसपी साउथ जितेंद्र कुमार, एसपी अपराध सुधीर जयसवाल और एसपी ट्रैफिक राजकुमार पांडेय मौजूद रहे।

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डीआईजी चनप्पा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाए, संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, तथा सभी थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में नियमित गश्त और पेट्रोलिंग करें। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

एसएसपी राज करन नैय्यर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीसीटीएनएस पोर्टल पर सभी सूचनाएं समय से अपडेट की जाएं, जिससे डेटा सत्यापन और विश्लेषण में पारदर्शिता बनी रहे।

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बैठक के अंत में डीआईजी चनप्पा ने कहा कि पुलिसिंग में पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई और जनसहयोग ही प्रभावी कानून-व्यवस्था की कुंजी हैं। सभी अधिकारी टीम भावना के साथ कार्य करें, ताकि जनपद में शांति और सुरक्षा का वातावरण बना रहे।

🚨 सड़क पर तबाही: सुपौल जा रही लग्जरी बस ने ली दो की जान, क्षत-विक्षत शव देख रो पड़े परिजन

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रविवार की सुबह तरयासुजान थाना क्षेत्र के सलेमगढ़ टोल प्लाजा के पास एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि शवों की हालत देख मौके पर मौजूद लोग सिहर उठे।
सूत्रों के अनुसार, यह दुर्घटना रविवार तड़के हुई जब दिल्ली से बिहार के सुपौल जा रही एक लग्जरी बस ने सड़क किनारे चल रहे दो लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बस आगे जाकर एक खड़े ट्रक से जा भिड़ी।

🛣️ टोल प्लाजा के पास चीख-पुकार, सड़क बनी खून से लाल

हादसा इतना भयानक था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसने दो पैदल चल रहे लोगों को उछालकर कई मीटर दूर फेंक दिया। टक्कर के बाद बस चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और कुछ ही दूरी पर खड़े ट्रक से जा टकराई।

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🙏 मृतकों की पहचान और परिवार में मातम

घटना में जान गंवाने वाले दोनों व्यक्तियों की पहचान अली मियां (50 वर्ष) और अब्बार अंसारी (20 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों बिहार के गोपालगंज जिले के गोपालपुर थाना क्षेत्र के शुकदेव पट्टी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों किसी रिश्तेदारी से लौट रहे थे तभी यह दर्दनाक हादसा हो गया।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। परिजनों को जब इसकी सूचना मिली तो कोहराम मच गया। गांव में मातम का माहौल है और हर किसी की आंखें नम हैं।

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🚔 मौके पर प्रशासन, आक्रोशित ग्रामीणों ने लगाया जाम

घटना की सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी तमकुहीराज आकांक्षा मिश्रा और तरयासुजान थाना प्रभारी धनवीर सिंह मौके पर पहुंचे। वहीं, हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
काफी समझाने-बुझाने और कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

⚠️ तेज रफ्तार बन रही जानलेवा, प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश

स्थानीय लोगों ने बताया कि टोल प्लाजा के पास वाहनों की रफ्तार अक्सर बेकाबू रहती है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था का कोई सख्त पालन नहीं होता। हादसे के बाद प्रशासन ने टोल प्रबंधन और परिवहन विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं।