Saturday, July 4, 2026
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कोपागंज थाना परिसर में मनाई गईं लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती

रन फॉर यूनिटी का आयोजन , नए आपराधिक कानूनों पर भी हुआ जागरूकता कार्यक्रम

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को कोपागंज थाना परिसर में “रन फॉर यूनिटी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता, अखंडता और कानून के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके बाद उन्होंने थाना प्रभारी रविन्द्र नाथ राय, कस्बा इंचार्ज उप निरीक्षक अनिकेत सिंह, हबीब इंटर कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं को एकता की शपथ दिलाई। बारिश के कारण कार्यक्रम सुबह 7 बजे की बजाय 9 बजे शुरू हुआ, लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं रही।
शपथ ग्रहण के बाद सभी पुलिसकर्मी और विद्यार्थी तिरंगा एवं बैनर लेकर “रन फॉर यूनिटी” में शामिल हुए। यह दौड़ थाना परिसर से शुरू होकर कसारा मोड़, भातकोल मोड़, नयापुरा, जुम्मनपुरा होते हुए हबीब इंटर कॉलेज तक पहुँची। पूरे मार्ग में “भारत माता की जय”, “एकता ज़िंदाबाद” जैसे नारों से क्षेत्र गूंज उठा और देशभक्ति का माहौल बन गया।

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्राधिकारी जितेंद्र सिंह ने कहा कि “भारत की एकता और अखंडता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को सशक्त करने का यही उद्देश्य इस आयोजन का मूल है।” उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने खेड़ा और बारडोली आंदोलनों में किसानों के संघर्ष का नेतृत्व करते हुए न्याय की लड़ाई को जनांदोलन का रूप दिया था, और यही उनकी नेतृत्व क्षमता राष्ट्रीय एकता की नींव बनी।

वहीं थाना प्रभारी रविन्द्र नाथ राय ने कहा कि “इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना को सशक्त करते हैं। रन फॉर यूनिटी के माध्यम से हम सभी देश की एकता और अखंडता का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।”

इस अवसर पर नए आपराधिक कानूनों के तहत भी विद्यार्थियों और नागरिकों को जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने बताया कि हाल ही में लागू हुए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और भारतीय साक्ष्य संहिता का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नागरिक-हितैषी बनाना है।

कार्यक्रम में थाना कोपागंज के समस्त पुलिसकर्मी, हबीब इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं, अध्यापकगण और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जयकारों के साथ हुआ, जहां सभी ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई।

मंडलायुक्त कार्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई गई

अधिकारियों ने अर्पित किए पुष्प, ली राष्ट्रीय एकता की शपथ

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
मंडलायुक्त सभागार में शुक्रवार को “राष्ट्रीय एकता दिवस” के अवसर पर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मंडलायुक्त अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मंडल के सभी वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सरदार पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। मंडलायुक्त अनिल ढींगरा, अपर आयुक्त रामाश्रय, अपर आयुक्त जय प्रकाश, अपर आयुक्त अजय राय सहित मंडलायुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने सरदार पटेल के जीवन, संघर्ष और देश की एकता एवं अखंडता में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि — “सरदार पटेल ने विभिन्न रियासतों का विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया। हमें उनके आदर्शों पर चलकर देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति सदैव समर्पित रहना चाहिए।”
इसके बाद मंडलायुक्त ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया और सभी अधिकारियों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का संचालन मंडलायुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा किया गया और वातावरण देशभक्ति एवं एकता के संदेश से ओत-प्रोत रहा।

पुलिस लाइन गोरखपुर में मनाई गई लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती

पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव ने अर्पित की पुष्पांजलि दिलाई राष्ट्रीय एकता की शपथ

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन गोरखपुर में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव ने सरदार पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उपस्थित पुलिस अधिकारियों व जवानों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
एसपी जितेंद्र श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय एकता और अखंडता के प्रतीक हैं। स्वतंत्रता के बाद देश की रियासतों को एकसूत्र में पिरोकर उन्होंने सच्चे अर्थों में भारत को एक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। उनकी जीवन यात्रा हमें निष्ठा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता का संदेश देती है।”
इस अवसर पर एसपी साउथ जितेंद्र कुमार, सीओ कैंट योगेन्द्र सिंह, सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी, सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने सरदार पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल को सरदार पटेल की संगठन क्षमता और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बल दिया कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा पुलिस कर्मियों का सर्वोच्च कर्तव्य है।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् और भारत माता की जय के जयघोष के साथ हुआ, जिससे पूरा पुलिस लाइन परिसर देशभक्ति के उत्साह से गूंज उठा।

बरसात से परेशान किसानों में बढ़ी चिंता, राजकीय बीज भंडार पर मिनी किट का उठान ठप

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

राजकीय बीज भंडार बेलहरी पर सरसों, मसूर, मटर, चना आदि फसलों के बीज मिनी किट के रूप में उपलब्ध हैं। जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, वे अंगूठा लगाकर निःशुल्क बीज प्राप्त कर सकते हैं। यह जानकारी बीज भंडार के कर्मचारी दिनेश कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि लगभग पांच सौ किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन चक्रवाती तूफान ‘मोथा’ से हुई बिन मौसम बरसात ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण अब बीज बोने का समय निकलता जा रहा है।किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल पहले ही बाढ़ और वर्षा की भेंट चढ़ चुकी है, अब यदि रबी की बुआई समय पर नहीं हो पाई तो स्थिति भयावह हो जाएगी। लोगों को अपने परिवार और पशुओं के भरण-पोषण की चिंता सताने लगी है। किसानों ने जिलाधिकारी बलिया से मांग की है कि बाढ़ और बरसात से प्रभावित गांवों के खेतों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाया जाए।

भारी वर्षा से सब्जियों की खेती चौपट, किसानों के सामने संकट

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सब्जियों के हब के रूप में प्रसिद्ध बैरिया तहसील क्षेत्र में हुई लगातार वर्षा से सैकड़ों एकड़ में फैली सब्जियों की फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं। खेतों में जगह-जगह जलभराव होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। स्थानीय किसानों के अनुसार, इस बार मौसम ने सब्जी उत्पादकों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। फूलगोभी, पत्तागोभी, लौकी, नेनुआ, करैला व हरी मिर्च जैसी प्रमुख सब्जियों की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में गलने लगी हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है। किसानों ने बताया कि सब्जी की खेती में भारी लागत लगाई जाती है, लेकिन अब पूरा नुकसान हो गया है।बारिश के कारण जहां सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित होगी, वहीं बाजार में इनकी कीमतों में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय बाजारों में सब्जियों की आवक घटने लगी है। कई किसानों ने बताया कि जो फसलें खेत में बची भी हैं, उन्हें निकालना अब मुश्किल हो गया है क्योंकि खेतों में कीचड़ और जलभराव है।किसानों ने शासन-प्रशासन से राहत और मुआवजे की मांग की है। वहीं कृषि विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए क्षेत्र का दौरा करने की तैयारी में हैं। सब्जियों के साथ-साथ आलू और गेहूं की बुवाई पर भी असर पड़ने के आसार बन गए हैं, क्योंकि खेतों में नमी और जलभराव के कारण बुवाई कार्य ठप हो गया है।कुल मिलाकर, इस वर्ष की बरसात किसानों के लिए बरबादी का सबब बनकर आई है।

झाड़-फूंक के बहाने महिला से अमानवीय कृत्य, वीडियो वायरल करने वाले 8 आरोपी गिरफ्तार

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद महराजगंज के पनियरा थाना क्षेत्र में अंधविश्वास और अमानवीय कृत्य का मामला सामने आया है। बीमारी ठीक करने के नाम पर एक महिला को झाड़-फूंक के दौरान निर्वस्त्र कर पूजा विधि करने और उसका वीडियो बनाकर वायरल करने वाले 8 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक सोमेंन्द्र मीना के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। थानाध्यक्ष पनियरा आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने नरकटहां अकटहवा श्मशान घाट के पास से सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।
घटना के अनुसार 18 अक्टूबर 2025 की रात लगभग 12 बजे आरोपी नन्दलाल निषाद ने महिला को बीमारी ठीक करने के बहाने श्मशान घाट बुलाया, जहां झाड़-फूंक के दौरान महिला को निर्वस्त्र कर पूजा कराई गई। इसी दौरान अन्य आरोपियों दिलीप निषाद, विशाल निषाद, दीना निषाद, दुर्गेश, सुरेश निषाद, पन्नेलाल निषाद और रामजतन चौधरी ने महिला का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया और विरोध करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने इस मामले में मु.अ.सं. 432/2025 अंतर्गत धारा 190, 191(2), 115(2), 351(3), 75, 354 बीएनएस व 67 ए आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष पनियरा आशीष कुमार सिंह, निरीक्षक श्याम निवास राय, हेड कांस्टेबल नरसिंह कुशवाहा, शैलेन्द्र कुमार, कांस्टेबल अनूप कुमार, सुशील कुमार और नरेन्द्र यादव शामिल रहे।
पुलिस अधीक्षक ने टीम की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई की सराहना की है तथा ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

देश की एकता और अखंडता के लिए इंदिरा गांधी ने दे दी प्राणों की आहुति – डॉ धर्मेन्द्र पांडेय

कांग्रेसियों ने मनाई इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि व सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती

सलेमपुर, देवरिया( राष्ट्र की परम्परा)। देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री भारत रत्न इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि व प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती कांग्रेस कार्यालय पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण के बाद गोष्ठी का आयोजन कर मनाई।इस दौरान सम्बोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए इंदिरा गांधी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने देश के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए, जिनमें बैंकों का राष्ट्रीयकरण ,पाकिस्तान को दो टुकड़े कर उसकी औकात बताने,पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण कर पूरे विश्व में देश का मान सम्मान बढाने का काम किया। सरदार पटेल ने देशी रियासतों का भारत में विलय कराकर देश की सीमा का विस्तार किया।ब्लॉक अध्यक्ष मनीष रजक ने कहा कि इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति लाने का काम कर देश में गेहूं व अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि कर देश को खाद्य पदार्थों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। जिला सचिव परमानंद प्रसाद ने कहा कि इंदिरा गांधी का सम्पूर्ण जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित रहा। गोष्ठी को नगर अध्यक्ष प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, सत्यम पांडेय, सैयद फिरोज अहमद,सुनील तिवारी, सत्तन कनौजिया, आनंद उपाध्याय, जाबिर खान,विशाल मद्देशिया, राकेश कुमार, परमानन्द प्रसाद ,विजयलाल ,सुच्चन खान,दीपक यादव, अवधेश यादव, जमशेद अंसारी, डॉ याहिया अंजुम, मोहम्मद नासिर खान आदि ने सम्बोधित किया।

लौह इच्छाशक्ति से अखंड भारत गढ़ने वाले सरदार पटेल

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भारत के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने राष्ट्र की नियति को नई दिशा दी। सरदार वल्लभभाई पटेल उनमें से एक थेl एक ऐसा नाम, जिसने स्वतंत्र भारत की एकता की नींव रखी और जिसे आने वाली पीढ़ियाँ सदैव “लौह पुरुष” के रूप में याद करेंगी।
आज जब देश क्षेत्रीयता, जातीयता और संकीर्ण स्वार्थों की राजनीति से जूझ रहा है, तब पटेल का आदर्श और भी प्रासंगिक हो उठता है। उन्होंने उस दौर में, जब नवजात भारत विभाजन के घावों से कराह रहा था, अपने अदम्य साहस और प्रशासनिक कुशलता से सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरो दिया। यह कार्य असंभव प्रतीत हो रहा था l परन्तु पटेल ने उसे न केवल संभव किया, बल्कि उसे भारतीय इतिहास की सबसे महान राजनीतिक उपलब्धियों में बदल दिया।
राजाओं और नवाबों के अहंकार, अंग्रेजों की शेष चालों और विभाजन की पीड़ा के बीच पटेल ने ‘राष्ट्र पहले’ की भावना को सर्वोपरि रखा। हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसे जटिल मसलों का समाधान जिस दृढ़ता और सूझबूझ से उन्होंने किया, वह उन्हें ‘भारत का बिस्मार्क’ कहे जाने योग्य बनाता है। उनके निर्णयों में न कठोरता का घमंड था, न समझौते की कमजोरी, केवल देशहित की स्पष्ट दृष्टि थी।
गुजरात के खेड़ा और बारडोली आंदोलनों में किसानों के संघर्ष का नेतृत्व करते हुए पटेल ने न्याय की लड़ाई को जनांदोलन का रूप दिया। यही नेतृत्व क्षमता आगे चलकर राष्ट्रीय एकता का आधार बनी। वे नारे नहीं देते थे, कार्य करते थे। गांधी के सिद्धांतों पर चलते हुए भी वे निर्णयों में व्यवहारिकता के पक्षधर थे, यही संतुलन उन्हें विशिष्ट बनाता है।
आज जब दुनिया में सीमाएँ केवल नक्शों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि विचारों और मतभेदों में भी खिंच गई हैं, तब पटेल का जीवन संदेश देता है कि सच्ची राष्ट्रभक्ति केवल शब्दों में नहीं, कर्म में निहित होती है। देश की अखंडता, प्रशासनिक दृढ़ता और विकास के लिए समान सोच — यही पटेल का दर्शन था।
भारत यदि आज एक अखंड और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में खड़ा है, तो उसमें सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति का अमूल्य योगदान है। उनके आदर्श केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि शासन, राजनीति और नागरिक आचरण में मार्गदर्शक बनें — यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व की प्रतीक श्रीमती इंदिरा गांधी

भारत के राजनीतिक इतिहास में इंदिरा गांधी का नाम एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने दृढ़ निश्चय, राजनीतिक सूझबूझ और अडिग नेतृत्व से देश को निर्णायक मोड़ों पर दिशा दी। वह केवल एक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि भारतीय नारी शक्ति की प्रतीक थीं—जिन्होंने यह सिद्ध किया कि संकट की घड़ी में भी साहस और विवेक से राष्ट्र को संभाला जा सकता है।

इंदिरा गांधी ने एक ऐसे दौर में देश की बागडोर संभाली जब भारत आंतरिक अस्थिरता और बाहरी चुनौतियों से जूझ रहा था। गरीबी, बेरोजगारी, विदेशी निर्भरता और सीमाई तनावों के बीच उन्होंने “गरीबी हटाओ” का नारा देकर राजनीति को जनभावनाओं से जोड़ा। उन्होंने जनहित की नीतियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बीज बोया। बैंकों के राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स की समाप्ति जैसे निर्णयों ने सत्ता को जनसाधारण के करीब लाने का कार्य किया।

1971 का भारत-पाक युद्ध इंदिरा गांधी के नेतृत्व का स्वर्ण अध्याय रहा। उनके दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी कूटनीति से बांग्लादेश का उदय हुआ और भारत की सैन्य क्षमता विश्व मंच पर सम्मानित हुई। यही वह क्षण था जब विश्व ने पहली बार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और उसकी आत्मविश्वास भरी आवाज़ को पहचाना।

हालाँकि इंदिरा गांधी का कार्यकाल विवादों से भी अछूता नहीं रहा। आपातकाल का निर्णय उनकी राजनीतिक यात्रा का सबसे विवादास्पद अध्याय बना, जिसने लोकतंत्र की मर्यादाओं पर प्रश्नचिह्न लगाए। प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश, राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी और नागरिक अधिकारों का हनन, उनके नेतृत्व की छवि पर गहरी छाया छोड़ गया। परंतु यही घटनाएँ लोकतंत्र की मजबूती का भी कारण बनीं—क्योंकि जनता ने बाद में मतदान के माध्यम से स्पष्ट कर दिया कि भारत का जनमानस तानाशाही नहीं, जनतंत्र में विश्वास रखता है।

इंदिरा गांधी का जीवन विरोधाभासों से भरा था—कभी ‘लौह महिला’ तो कभी ‘तानाशाह’ कहकर आलोचना का पात्र बनीं। परंतु उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी, निर्णय लेने का साहस। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी निर्णय से मुंह नहीं मोड़ा। यही गुण उन्हें भारत की राजनीति में अद्वितीय बनाता है।

आज जब विश्व राजनीति अनिश्चितता के दौर में है, तब इंदिरा गांधी की दृढ़ता, राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना और आत्मनिर्भर भारत का विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। उन्होंने सिखाया कि नेतृत्व केवल सत्ता चलाने का नाम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को दिशा देने की प्रक्रिया है।

इंदिरा गांधी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि विचारों की स्पष्टता और निर्णय की दृढ़ता ही किसी भी राष्ट्र को महान बनाती है। वे चली गईं, पर भारत की नीतियों, उसकी सोच और उसकी आत्मनिर्भरता की यात्रा में उनका प्रभाव आज भी गहराई से महसूस किया जा सकता हैl

असमय बारिश से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, सैकड़ों एकड़ धान की फसल चौपट

कटाई से पहले खेतों में जल-भराव, किसानों की बढ़ी चिंता

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जिले के मिठौरा क्षेत्र में हुई असमय और लगातार बारिश ने किसानों की कई महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पककर तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं और झमाझम बारिश की चपेट में आकर पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। कई गांवों के खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसलें सड़ने लगी हैं और किसानों के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही है।
क्षेत्र के बागापार नदुआं ,बसन्तपुर राजा, परसा राजा, दरहंटा, गौनरियां राजा,बरवा राजा ,करौता, सेखुई , हरपुर कला ,चौक बाजार,पड़री खुर्द, पिपरा सोनाडी़, मधुबनी, मिठौरा, देउरवा बसवार, मिश्रौलिया सहित आस-पास के गांवों में खेतों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। जहां तक नजर जाती है, वहां झुकी हुई धान की बालियां और पानी से लबालब खेत दिखाई देते हैं।
किसान बतातें हैं कि वे धान की कटाई की तैयारी में जुटे थे, तभी अचानक मौसम ने करवट बदल ली। तेज बारिश और हवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसानों का कहना है कि खेतों में जल-भराव होने के कारण कम्बाईन मशीनें चल नहीं पा रहीं, और जहां किसी तरह चल भी रही हैं, वहां धान का भारी नुकसान हो रहा है। गिरे हुए पौधों के कारण न तो कटाई सुचारू रूप से हो पा रही है। इससे किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है क्षेत्र के प्रमुख किसानों मनीष दीक्षित, सुनील कुमार गुप्ता, दीपक द्विवेदी, सुरेंद्र, नागेंद्र प्रसाद, बिभूती दीक्षित, प्रद्युम्न पाण्डेय, मंतोष, आशीष कुमार शुक्ला, जगरनाथ चौधरी, राहुल कुमार विश्वकर्मा और समाजसेवी अविनाश कुमार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम की मार ने सब कुछ खत्म कर दिया।किसानों ने सरकार और प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराने और मुआवजे की मांग की है।

होटल और रेस्टोरेंट: स्वाद के नाम पर लापरवाही! देवरिया में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल, कब जागेगा विभाग?

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। विकास की राह पर बढ़ते इस जनपद में हर गली, हर चौराहे पर कोई नया होटल, कैफ़े या फूड पॉइंट नजर आने लगा है। बाहर से यह तस्वीर “प्रगति” की झलक देती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सवाल उठता है — स्वाद के नाम पर आखिर कब तक होगी लापरवाही, और जिम्मेदारी कौन लेगा?

🍴 बढ़ते होटल, घटती गुणवत्ता

देवरिया में बीते कुछ वर्षों में रेस्टोरेंट और होटल उद्योग तेजी से बढ़ा है, परंतु अधिकांश जगहों पर स्वच्छता, सुरक्षा और सेवा के मानक दम तोड़ते दिखाई देते हैं। ग्राहकों के बैठने की असुविधा, गंदे वॉशरूम, देर से मिलने वाला खाना और खाद्य गुणवत्ता में गिरावट अब आम शिकायत बन चुकी है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “होटल तो रोज़ खुल रहे हैं, लेकिन निरीक्षण शायद ही कभी होता हो।” यही कारण है कि कई संस्थान बिना आवश्यक सुविधाओं के ग्राहकों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं।

⚠️ एक घटना ने खोली पोल

हाल ही में कोतवाली रोड स्थित एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में भोजन के दौरान ग्राहकों को अस्वच्छ माहौल, ठंडे और बेस्वाद व्यंजन, तथा बेहद खराब सेवा का सामना करना पड़ा। रसगुल्ले तक बासी और ठंडे परोसे गए। यह केवल एक ग्राहक का अनुभव नहीं, बल्कि पूरे शहर की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही का आईना है।

🧾 विभाग की निष्क्रियता पर सवाल

खाद्य सुरक्षा विभाग का दायित्व केवल लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि नियमित जांच और नमूना परीक्षण करना भी है। दुर्भाग्यवश, वर्षों से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जिलाधिकारी स्वयं जांच अभियान चलाएं, और जो रेस्टोरेंट मानक पर खरे नहीं उतरते, उन पर कार्रवाई हो।

🙏 नागरिकों और व्यापारियों दोनों की जिम्मेदारी

नागरिकों से अपील है कि वे होटल चुनते समय साफ-सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान दें तथा शिकायत होने पर विभाग को सूचित करें। वहीं, रेस्टोरेंट मालिकों को भी यह याद रखना चाहिए कि —

“सच्चा स्वाद वही है जिसमें जिम्मेदारी की मिठास हो।”

देवरिया का चौराहा केवल आवाज़ों से नहीं, स्वस्थ और जिम्मेदार स्वाद की खुशबू से महके, यही उम्मीद जनता की है।

 

दक्षिण कोरिया बुसान ट्रंप- ज़िनपिंग मुलाक़ात -दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है,कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है, जिसमें विश्वास और समानता की भावना हो, ज़ो नहीं दिखा-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ की निगाहें आज दक्षिण कोरिया के बुसान शहर पर टिकी थीं, जहाँ लगभग छह वर्षों केअंतराल के बाद अमेरिकी राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही फ्रेम में नजर आए। यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से जितना साधारण दिखा,उतना ही भू-राजनीतिक दृष्टि से गूढ़ था। दोनों नेता विश्व राजनीति की दो ऐसी ध्रुवीय शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक आर्थिक, सैन्य और वैचारिक प्रतिस्पर्धा में लिप्त हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि  यद्यपि मंच साझा करने का दृश्य शांति और संवाद का संदेश देता है, किंतु दोनों के बीच उपस्थित कूटनीतिक दूरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। यह दूरी मात्र शारीरिक नहीं, बल्कि नीतिगत, विचारधारात्मक और शक्ति-प्रदर्शन की गहराइयों में निहित है।साउथ कोरिया के बुसान में हुई यह बैठक औपचारिक रूप से एशिया- पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित थी। लेकिन इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य था,वैश्विक शक्ति समीकरणों को पुनः परिभाषित करना। ट्रंप, जो दोबारा अमेरिकी राजनीति के केंद्र में लौट आए हैं, अपनी पूर्ववर्ती नीतियों के समान ही इस बार भी “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा लेकर आए हैं। दूसरी ओर, शी जिनपिंग, जो अपनी तीसरी कार्यावधि में चीन को एक आर्थिक और सैन्य सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं, इस बैठक को एक मंच के रूप में देख रहे थे,जहाँ चीन अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन कर सके। हालांकि, इन दोनों के बीच हुए संवाद की प्रकृति में ठंडापन झलक रहा था।ऐसा प्रतीत हुआ मानो दोनों नेता एक औपचारिक कूटनीतिक आवश्यकता के तहत एक साथ बैठे हों, न कि आपसी विश्वास या सामरिक साझेदारी के उद्देश्य से बैठक की।

साथियों बात अगर हम दक्षिण कोरिया बुसान बैठक चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन और अमेरिकी मौन को समझने की करें तो, वर्तमान वैश्विक ऊर्जा समीकरण में चीन और रूस के बीच का गठबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद, जब पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब चीन ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की।आज चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है।लेकिन बुसान की बैठक में, जहाँ ट्रंप ने भारत पर रुस से तेल खरीदने पर 50 पर्सेंट टैरिफ लगाने जैसे कठोर आर्थिक कदमों की घोषणा की थीं, वहीं उन्होंने चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन के मुद्दे पर आश्चर्यजनक मौन बनाए रखा। ताइवान चीन संबंधों पर भी यह मौन तथा 10 पर्सेंट टैरिफ कम करना अमेरिका की रणनीतिक विवशता को दर्शाता है,क्योंकि ट्रंप भली-भांति जानते हैं कि रूस के तेल व्यापार में चीन की भागीदारी पर सीधा प्रश्न उठाना एक व्यापक जियो- इकोनॉमिक टकराव को जन्म दे सकता है।दूसरी ओर, ट्रंप भारत के उभरते व्यापारिक प्रभाव और डॉलर-मुक्त ऊर्जा सौदों से असहज हैं। इसलिए उन्होंने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई ,यह चीन के बजाय एक सॉफ्ट टारगेट पॉलिसी की झलक है।अमेरिका और चीन की प्रतिद्वंद्विता अब केवल आर्थिक नहीं रही,यह अब सॉफ्ट पावर बनाम हार्ड पॉलिटिक्स की लड़ाई बन चुकी है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव,टेक्नोलॉजी हब्स और डिजिटल युआन के माध्यम से एक वैकल्पिक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तैयार कर रहा है। वहीं अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों जापान, दक्षिण कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और भारत (क्वाड के ज़रिए) के साथ सामरिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।बुसान बैठक इस व्यापक संघर्ष का एक कूटनीतिक मंच बनकर उभरी। ट्रंप और शी जिनपिंग दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश की,परंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अभी बहुत दूर दिख रही है।

साथियों बात अगर हम ट्रंप की गर्मजोशी और शी जिनपिंग की भावहीनता-दो व्यक्तित्व, दो रणनीतियाँ मंत्र को समझने की करें तो,जब बैठक की शुरुआत हुई, ट्रंप पूरे उत्साह और आत्मविश्वास में दिखाई दिए। उन्होंने शी जिनपिंग की ओर बढ़ते हुए अत्यंत गर्मजोशी से हाथ मिलाया। यह वही ट्रंप हैं,जिन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान “ट्रेड वॉर” के जरिए चीन की अर्थव्यवस्था को चुनौती दी थी,लेकिन साथ ही समय- समय पर व्यक्तिगत संबंधों की राजनीति का भी प्रयोग किया। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट,आत्मीयता और कैमरों की ओर देखने का आत्मविश्वास था,यह ट्रंप की विशिष्ट शैली है, जो वे अक्सर कूटनीतिक मंचों पर दिखाते हैं।इसके विपरीत,शी जिनपिंग का चेहरा लगभग भावहीन था, न मुस्कुराहट,न तनाव,न ही कोई प्रतिक्रिया। यह चीन की कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है,जहाँ “संयम”और “भावनाओं का नियंत्रण” नेतृत्व की परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार उनकी शांति एक गहरी असहमति या असंतोष का संकेत भी दे रही थी। यह संकेत उस अविश्वास का था,जो अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में और गहराता गया है,विशेषकर ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स, साउथ चाइना सी विवाद, और ताइवान के मुद्दों के कारण।

साथियों बात अगर हम ट्रंप का “अकेले चलना”,शक्ति प्रदर्शन या संदेश? कुछ समझने की करें तो,बैठक के समापन पर जब सभी नेता अपने-अपने मार्ग की ओर बढ़े, तो ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ कुछ औपचारिक शब्दों का आदान-प्रदान करने के बाद उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ा फिर वहां से अकेले प्रस्थान किया। यह दृश्य मीडिया के कैमरों में कैद हुआ और तुरंत अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बन गया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का “अकेले चलना” किसी अनायास घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सामरिक संकेत था,यह दिखाने के लिए कि अमेरिका किसी पर निर्भर नहीं है और वह विश्व मंच पर एकाकी नेतृत्व करने में सक्षम है। इसके विपरीत, शी जिनपिंग ने इस दृश्य को पूरी तरह नज़र अंदाज़ किया। उनका शांत और संयमित व्यवहार यह दर्शा रहा था कि चीन भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से ऊपर उठकर रणनीतिक स्तर पर सोच रहा है। यह उनके “सॉफ्ट पॉवर” और “कूटनीतिक मौन”की नीति का प्रतीक है,जहाँ प्रतिक्रियाएँ शब्दों से नहीं, बल्कि नीतियों से दी जाती हैं। 

साथियों बात अगर हम ट्रंप की मीडिया रणनीति और “10 में से 12” अंक देने को समझने की करें तो,मीटिंग के बाद अमेरिकी मीडिया में ट्रंप ने बयान दिया कि वे इस बैठक को “सफल” मानते हैं और उसे 10 में से 12 अंक देते हैं। यह बयान उनके विशिष्ट अंदाज़ का हिस्सा था अतिशयोक्ति पूर्ण, आत्मविश्वासी और मीडिया आकर्षण केंद्रित। ट्रंप जानते हैं कि उनकी राजनीतिक पहचान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नैरेटिव कंट्रोल से बनती है।उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे एक ऐसे नेता हैं,जो हरपरिस्थिति में विजयी दिखाई देते हैं।यह अमेरिकी मतदाताओं के लिए एक मनोवैज्ञानिक संकेत था कि ट्रंप वैश्विक कूटनीति में फिर से सक्रिय हैं और “अमेरिका की प्रतिष्ठा” को पुनः स्थापित कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीयविश्लेषकों का मत इससे भिन्न है। उनका कहना है कि ट्रंप की यह सफलता घोषणा अधिकतर प्रचारात्मक थी, क्योंकि बैठक में किसी ठोस नीति या समझौते की घोषणा नहीं हुई।

साथियों बातअगर हम ट्रंप व ज़िनपिंग क़ी बुसान बैठक के भू-राजनीतिक निहितार्थ को समझने की करें तो, बुसान की बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी,यह आने वाले दशक की अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत थी। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब भू-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल प्रभुत्व और कूटनीतिक गठबंधनों में परिलक्षित होगी।ट्रंप और शी जिनपिंग के चेहरे के भाव, उनकी शारीरिक भाषा, और उनके मौन तक ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि यह शीत युद्ध का नया संस्करण शुरू हो चुका है,एक ऐसा युद्ध, जिसमें हथियार नहीं बल्कि टैरिफ, टेक्नोलॉजी और ट्रेड ब्लॉक इस्तेमाल किए जा रहे हैं। 

साथियों बात अगर हम  भारत की भूमिका, संतुलनकारी शक्ति को समझने की करें तो,इस पूरी परिदृश्य में भारत की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाँ ट्रंप भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बना रहे हैं, वहीं भारत अब वैश्विक मंचों पर रणनीतिक आत्मनिर्भरता और मल्टी- अलाइनमेंट की नीति अपना रहा है। भारत न तो अमेरिका की कठपुतली है,न चीन का समर्थक ,बल्कि वह दोनों के बीच एक तटस्थ शक्ति संतुलनकारी देश के रूप में उभर रहा है। ट्रंप का भारत पर टैरिफ लगाना यह भी दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को केवल सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में देखने लगा है। वहीं चीन भारत को एशिया में अमेरिका की कूटनीति का विस्तार मानता है। इस जटिल त्रिकोणीय संबंध में, भारत का हर कदम अब वैश्विक शक्ति समीकरणों को प्रभावित करता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एक फ्रेम में दो विपरीत ध्रुव,छह वर्षों बाद एक ही मंच पर दिखाई दिए ट्रंप और शी जिनपिंग,परंतु उनके बीच की मानसिक दूरी शायद पहले से भी अधिक बढ़ चुकी है। ट्रंप की राजनीति “सीधे टकराव और मीडिया प्रभुत्व” पर आधारित है, जबकि शी जिनपिंग “रणनीतिक संयम और दीर्घकालिक योजनाओं” के प्रतीक हैं।यह मुलाकात दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है, कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है,लेकिन संवाद तभी फलदायी होता है जब उसमें विश्वास और समानता की भावना हो। बुसान की यह मुलाकात फिलहाल विश्वास नहीं,बल्कि अविश्वास का संकेत बनकर उभरी है।ट्रंप और शी जिनपिंग भले ही एक फ्रेम में कैद हुए हों,लेकिन उनके बीच की विचारधारात्मक और नीतिगत दूरी आज भी उतनी ही गहरी है,जितनी प्रशांत महासागर के दोनों किनारों के बीच की दूरी।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) का पंचांग

तिथि-वार आदि

तिथि: कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष, नवमी (10:03 AM तक)

वार: शुक्रवार

विक्रम संवत्: 2082 (कालायुक्त)

शक संवत्: 1947 (विश्वावसु)

नक्षत्र-करण-योग आदि

नक्षत्र: धनिष्ठा – 06:51 PM तक, उसके बाद शतभिषा

करण: कौलव μέχρι 10:04 AM, बाद तैतिल रात 9:44 PM तक, उसके बाद गर

योग: वृद्धि योग सुबह 04:31 AM तक, बाद में ध्रुव योग

☀️ ग्रह-स्थिति व सूर्योदय-सूर्यास्त

सूर्योदय: लगभग 06:32 AM

सूर्यास्त: लगभग 05:37 PM

चन्द्रमा मकर राशि में सुबह 06:48 AM तक, उसके बाद कुंभ राशि में संचार करेगा

ऋतु: हेमन्त ऋतु

शुभ-अशुभ काल

राहुकाल: लगभग 10:46 AM – 12:10 PM
यमगण्ड: लगभग 02:57 PM – 04:21 PM
गुलिक: लगभग 07:59 AM – 09:23 AM

अभिजीत मुहूर्त: लगभग 11:48 AM – 12:32 PM

विशेषताएँ

इस दिन को अक्षय नवमी के रूप में भी माना गया है।
साथ ही इस तिथि से- ज्योतिष में चोर पंचक आरंभ हो गया है, जो कि शुभ कार्यों के लिए कुछ अशुभ माना जाता है।

चुनावी दौर में बढ़ती हिंसा पर विपक्ष ने जताई चिंता,क्यों बटन के जगह ट्रिगर ने लिया

मोकामा में चुनावी हिंसा: जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या, तेजस्वी यादव ने कहा– “लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं”


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के मोकामा में चुनावी माहौल के बीच गुरुवार को हुई गोलीबारी ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि लोकतंत्र में बढ़ती हिंसा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, वहीं विपक्ष ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

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जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब दो राजनीतिक दलों के काफिले मोकामा इलाके में आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों में तीखी बहस झगड़े में बदल गई और गोलियां चलने लगीं। इस दौरान जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव को गोली लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

बाढ़-2 के एसडीपीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि दोनों दलों के समर्थकों के बीच कहासुनी के बाद गोलीबारी हुई। उन्होंने कहा, “पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। एफएसएल को बुला लिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

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इस घटना पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, “आचार संहिता के दौरान भी अगर लोग हथियार लेकर घूम रहे हैं, तो यह प्रशासन की नाकामी है। लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, गोलियों की नहीं।”

तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार पर हमला करते हुए कहा, “मोकामा में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या हुई, सब-इंस्पेक्टर की हत्या हुई — यह बताता है कि बिहार फिर से अपराध की गिरफ्त में है। सत्ता में बैठे लोग अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं। जनता इसका जवाब जरूर देगी।”

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।