Friday, July 3, 2026
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25 हजार का इनामिया अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़ा, कोपागंज पुलिस की बड़ी सफलता

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक इलामारन के आदेश पर वांछित एवं पुरस्कार घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी अभियान के तहत कोपागंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रविवार को पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर 25 हजार रुपये के इनामी अपराधी अनिल यादव पुत्र मिठ्ठू यादव निवासी तिवारी के मिल्की, थाना बैरिया, जनपद बलिया को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी अभियान अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार एवं क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह के कुशल निर्देशन में चलाया गया। इस दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र नाथ राय, उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह, हेड कांस्टेबल अवधेश यादव, कांस्टेबल प्रमोद कुमार यादव, हेड कांस्टेबल अभय राज यादव, कांस्टेबल सुधीर कुमार यादव तथा कांस्टेबल अभिषेक मिश्रा शामिल रहे।

पुलिस टीम ने आरोपी को इंदारा रेलवे स्टेशन रोड के पास सड़क किनारे से सुबह लगभग 10:52 बजे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान सर्वोच्च न्यायालय व मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का पूर्ण पालन किया गया।

गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध थाना दोहरीघाट में मु.अ.सं. 111/2025 धारा 3(1) यूपी गैंगस्टर एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 के तहत मामला दर्ज था। पुलिस ने विधिक कार्यवाही पूरी कर आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

पुलिस की इस सफलता से क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम की सराहना की है।

लेखक गाँव : शब्दों की साधना और सृजन का हिमालय

3 से 5 नवम्बर 2025 को थानो (देहरादून) में होगा “स्पर्श हिमालय महोत्सव” — जहाँ साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का संगम रचेगा नई सृजनगाथा

डॉ. सत्यवान सौरभ

उत्तराखंड की वादियों में बसा थानो गाँव आज साहित्य और संस्कृति की नई पहचान बन चुका है। यह वही भूमि है जहाँ शब्दों की साधना और सृजन की ऊर्जा एक साथ प्रवाहित हो रही है। यहाँ स्थापित देश का पहला ‘लेखक गाँव’ अब केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है — वह आंदोलन जो लेखकों, कवियों, विचारकों और कलाकारों को उनके सृजन के मूल स्रोत, अर्थात् प्रकृति और आत्मा से जोड़ता है।

🔹 शब्दों के मठ की परिकल्पना

लेखक गाँव का विचार जितना अनोखा है, उतना ही प्रेरणादायक भी। इस अवधारणा के प्रणेता हैं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, शिक्षाविद् और सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, जिन्होंने अपने जीवन में साहित्य और समाज दोनों को समान रूप से साधा है। उन्होंने यह अनुभव किया कि आज के लेखक, कवि और विचारक भागदौड़ और शोरगुल भरी दुनिया में वह सृजनात्मक एकांत नहीं पा पाते जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है।
इसी विचार से जन्म हुआ “लेखक गाँव” का — एक ऐसी जगह जहाँ शब्दों को सांस लेने की जगह मिले, विचारों को उड़ान मिले और रचनाकारों को आत्म-साक्षात्कार का अवसर।

देहरादून के समीप थानो गाँव को इस अनूठे प्रकल्प के लिए चुना गया। यह स्थान हिमालय की गोद में बसा है, जहाँ हरियाली, नदी, पर्वत और शांति की छाया है। यहाँ की प्राकृतिक सौंदर्यता लेखकों के भीतर सोई संवेदनाओं को जगाने का सामर्थ्य रखती है।

🔹 एक अद्भुत आयोजन : “स्पर्श हिमालय महोत्सव-2024”

अक्टूबर 2024 में जब स्पर्श हिमालय फाउंडेशन द्वारा “स्पर्श हिमालय महोत्सव” का आयोजन हुआ, तब थानो ने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति का विराट संगम था।
इस पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 65 से अधिक देशों के लेखक, कवि, कलाकार और विचारक शामिल हुए। उन्होंने न केवल अपनी रचनाएँ और कलाकृतियाँ साझा कीं, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी भावनाएँ भी प्रकट कीं।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि हिंदी और भारतीय संस्कृति आज भी वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र हैं। इस महोत्सव ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुनः प्रतिष्ठित किया। साथ ही, यह तय किया कि हर वर्ष इसी स्थान पर साहित्यिक मंथन और सांस्कृतिक संवाद का यह महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

🔹 3 से 5 नवम्बर 2025 : नए अध्याय की तैयारी

अब एक बार फिर साहित्य प्रेमी और रचनाकार उत्सुक हैं, क्योंकि 3 से 5 नवम्बर 2025 को लेखक गाँव, थानो में “स्पर्श हिमालय महोत्सव-2025” आयोजित होने जा रहा है।
इस बार महोत्सव का दायरा और भी व्यापक होगा — देश-विदेश से और अधिक लेखकों, कवियों, अनुवादकों, चित्रकारों, फिल्मकारों और संगीतकारों की भागीदारी होगी।
थीम तय की गई है – “शब्द से विश्व तक : संस्कृति का संवाद”। यह विषय अपने आप में साहित्य की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।

इस आयोजन में हिंदी भाषा और भारतीय साहित्य के अंतरराष्ट्रीय प्रसार पर विशेष सत्र होंगे। साथ ही युवा लेखकों और डिजिटल युग की रचनात्मकता पर भी विमर्श किया जाएगा। यह आयोजन न केवल अनुभवी लेखकों को बल्कि नई पीढ़ी के रचनाकारों को भी एक साझा मंच प्रदान करेगा।

🔹 रचनाकारों के लिए स्वर्ग समान वातावरण

लेखक गाँव की संरचना पूरी तरह साहित्यिक और सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई है। यहाँ स्थित “लेखक कुटीर” उन रचनाकारों के निवास हेतु बनाए गए हैं जो कुछ समय के लिए प्रकृति की गोद में रहकर अपने लेखन पर केंद्रित होना चाहते हैं।
हर कुटीर में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ सादगी और पहाड़ी परंपरा की झलक मिलती है। इन कुटीरों के नाम प्रसिद्ध लेखकों और कवियों के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव है — ताकि आने वाले लेखक उनसे प्रेरणा ले सकें।

यहाँ निर्मित “हिमालयी पुस्तकालय” किसी मंदिर से कम नहीं। इसमें साहित्य, संस्कृति, इतिहास, भूगोल, दर्शन, राजनीति और विज्ञान से जुड़ी पुस्तकों का विशाल संग्रह है। विशेष रूप से हिमालयी राज्यों की लोककथाएँ, दुर्लभ पांडुलिपियाँ, सिक्के, मूर्तियाँ और पहाड़ी चित्रकला इस पुस्तकालय की पहचान होंगी।
यह पुस्तकालय पहाड़ी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है—जहाँ खोली, छज्जा और तिवारी जैसी पारंपरिक संरचनाएँ स्थानीय पत्थर और लकड़ी से बनी हैं।

🔹 प्रकृति, संस्कृति और आत्मा का त्रिवेणी संगम

थानो का यह लेखक गाँव केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र है। यहाँ की संजिवनी वाटिका और नक्षत्र-नवग्रह वाटिका रचनाकारों को प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ संवाद स्थापित करने की प्रेरणा देती हैं।
यह स्थान ध्यान, चिंतन और आत्मावलोकन के लिए आदर्श है। पहाड़ों की ताजी हवा, पक्षियों का मधुर कलरव और प्रकृति की नीरवता लेखक को भीतर तक झकझोर देती है, जिससे सृजन स्वतः प्रवाहित होने लगता है।

जो भी व्यक्ति यहाँ कुछ दिन बिताता है, वह स्वयं में एक नई ऊर्जा और दृष्टि लेकर लौटता है। यह स्थान मनुष्य के भीतर संवेदना, करुणा और सृजनशीलता के बीज बोता है — ठीक वैसे ही जैसे प्राचीन काल में तपोवन साधना के केंद्र हुआ करते थे।

🔹 सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

“लेखक गाँव” केवल आधुनिक साहित्यिक प्रयोगों का मंच नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का केंद्र भी है। यहाँ स्थित गंगा और हिमालय संग्रहालय में प्राचीन मूर्तियाँ, लोक कलाएँ, सिक्के, हस्तशिल्प, और दुर्लभ दस्तावेज़ प्रदर्शित किए जाएंगे।
यह संग्रहालय युवाओं को यह समझाने का माध्यम बनेगा कि हमारी संस्कृति केवल इतिहास की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान का आधार भी है।

इस स्थान का उद्देश्य है — “साहित्य के माध्यम से संस्कृति की रक्षा, और संस्कृति के माध्यम से मानवता का विकास।”

🔹 वैश्विक संदर्भ में हिंदी का विस्तार

स्पर्श हिमालय महोत्सव और लेखक गाँव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि इसने हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया है।
विदेशों से आए लेखकों ने न केवल हिंदी के साहित्य को समझा बल्कि उसे अपनी भाषा में अनुवादित करने का संकल्प भी लिया। इस प्रकार, ये लेखक अपने-अपने देशों में हिंदी के ब्रांड एम्बेसडर बन रहे हैं।
यह प्रयास भारत को सॉफ्ट पावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

🔹 भविष्य की राह

थानो का लेखक गाँव आज एक मॉडल बन चुका है। आने वाले समय में ऐसे और गाँव देश के अन्य हिस्सों में भी विकसित किए जा सकते हैं—जैसे लेखक धाम या कला ग्राम।
ये स्थान न केवल पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे।
लेखक, शोधकर्ता, विद्यार्थी और कला प्रेमी यहाँ आकर अपनी सृजनशीलता को नया आयाम दे सकेंगे।

🔹 शब्दों का हिमालय

थानो का “लेखक गाँव” वास्तव में सृजन की तपोभूमि है। यह वह स्थान है जहाँ शब्द साधना बन जाते हैं और लेखन पूजा का रूप ले लेता है।
यह गाँव हमें याद दिलाता है कि तकनीक और प्रगति के इस युग में भी साहित्य की जड़ें प्रकृति और आत्मा से जुड़ी हैं।

आने वाले 3 से 5 नवम्बर 2025 को जब एक बार फिर स्पर्श हिमालय महोत्सव का नया अध्याय आरंभ होगा, तब यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि भारत की साहित्यिक चेतना का उत्सव होगा — एक ऐसा उत्सव जो शब्दों को पर्वत की ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

“लेखक गाँव” इस बात का प्रमाण है कि जब साहित्य और संस्कृति एक साथ चलते हैं, तो समाज केवल प्रगतिशील नहीं होता — वह प्रेरणास्रोत बन जाता है।
यह गाँव आने वाले समय में निश्चय ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र बनेगा — जहाँ हर शब्द हिमालय की तरह अडिग, और हर विचार गंगा की तरह पवित्र होगा।

📖 लेखक परिचय:
डॉ. सत्यवान सौरभ
कवि, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार
आकाशवाणी और टीवी पैनलिस्ट


राजद ने कांग्रेस की कनपट्टी पर रखी कट्टा, बिहार फिर नहीं चाहता जंगलराज -मोदी

🔶 बिहार विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आरा दौरा पूरी तरह चुनावी गर्मी से लबरेज रहा। मंच पर चढ़ते ही पीएम मोदी ने भोजपुरी में जनता का अभिवादन कर माहौल को जोश से भर दिया। उन्होंने कहा— “हम मां आरण्य देवी के चरणों में प्रणाम करत बानी, वीर बांकुर बाबू वीर कुंवर सिंह के धरती पर अभिनंदन करअतनी।” इसके बाद पीएम मोदी ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार की जनता अब छल-कपट वाली राजनीति को भलीभांति पहचान चुकी है।

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🗣️आरा में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महागठबंधन को आड़े हाथों लिया और कहा कि उनका घोषणापत्र “धोखा और छल-कपट का दस्तावेज़” है। वहीं एनडीए के मेनिफेस्टो को उन्होंने ईमानदार संकल्प पत्र बताया, जिसमें कमाई, पढ़ाई और सिंचाई पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पीएम मोदी ने जनता को सचेत करते हुए कहा कि “जंगलराज वालों, यह मत भूलो कि जनता सब कुछ जानती है।”

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उन्होंने राजद और कांग्रेस के बीच मचे अंदरूनी कलह पर तंज कसते हुए कहा कि “राजद ने कांग्रेस की कनपट्टी पर कट्टा रखकर मुख्यमंत्री का पद चोरी कर लिया।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि नामांकन की अंतिम तारीख से पहले बंद कमरों में गुंडागर्दी की राजनीति खेली गई।
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि बिहार ने 2005 से पहले के सालों में जातीय दंगों और भय के माहौल को झेला था, और जनता अब दोबारा उस दौर में लौटना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि “एक तरफ एनडीए का सुशासन है और दूसरी तरफ जंगलराज का कुशासन।”
भारी भीड़ की मौजूदगी में उन्होंने एनडीए प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगा और कहा कि बिहार की जनता विकास, स्थिरता और सुशासन के साथ है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद अन्न दान से होता है अक्षय पुण्य की प्राप्ति – आचार्य अजय शुक्ल

5 नवम्बर को होगा कार्तिक पूर्णिमा का स्नान

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्म व संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है।इस दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना होती है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्री हरि की उपासना करने से साधक को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि इस बार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 5 नवम्बर को प्राप्त हो रही है। इस दिन ही व्रत व स्नान दान किया जाएगा। ज्योतिष पंचांग के अनुसार कार्तिक मास पूर्णिमा तिथि 4 नवम्बर को प्रातः काल 10 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 नवम्बर को सायंकाल 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।ऐसे में उदया तिथि के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का पवित्र पर्व 5 नवम्बर को मनाया जाएगा।इस दिन गंगा या अन्य नदियों सरोवरों में स्नानादि के पश्चात दान विशेष रूप से अन्न दान का विशेष महत्व होता है।इस दिन स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक है।इस दिन देव दीपावली का पर्व भी मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।जिसके कारण इस तिथि का महत्त्व और बढ़ गया है।इसी दिन हंस राजयोग भी बन रहा है।जिसका विशेष महत्व होता है।

📰 पलटूराम की राजनीति का अंत! — बिहार की जनता ने तय किया बदलाव का फैसला

(विश्लेषणात्मक आलेख : संजय पराते)

🔹बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। सत्ता की बाज़ी पलटने वाले ‘पलटूराम’ नीतीश कुमार की अवसरवादी राजनीति अब अपने अंत की ओर बढ़ती दिख रही है। महागठबंधन की एकजुटता और तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री पद के ऐलान ने विपक्षी खेमे में नई जान फूंक दी है, वहीं भाजपा-जद(यू) गठबंधन में असमंजस और अविश्वास की स्थिति गहराती जा रही है। बिहार की जनता अब बदलाव के मूड में है — जो सुशासन के वादों के बजाय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के वास्तविक मुद्दों पर फैसला सुनाने को तैयार है।

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🔹 नीतीश की ‘पलटी राजनीति’ पर जनता का मोहभंग
कभी सुशासन बाबू कहलाने वाले नीतीश कुमार अब जनता की नज़रों में ‘पलटूराम’ बन चुके हैं। भाजपा और आरएसएस के साथ उनके गठबंधन ने उन्हें उस फंदे में फंसा दिया है, जिससे बाहर निकलना लगभग असंभव है। भाजपा ने चुनाव बाद मुख्यमंत्री तय करने की घोषणा कर दी है, यानी नीतीश अब केवल मुखौटा बनकर रह गए हैं। चुनाव के बाद यदि वे पलटी मारने की कोशिश भी करेंगे, तो उनकी ही पार्टी उन्हें किनारे लगा देगी।
महागठबंधन के ऐलान ने उनकी राजनीतिक जमीन और कमजोर कर दी है। जनता अब स्पष्ट रूप से तय कर चुकी है — बिहार ‘अवसरवाद की राजनीति’ से मुक्त होगा।
🔹 भाजपा की खोती साख और धांधली पर जनता की नजर
पिछले विधानसभा चुनावों में महागठबंधन और एनडीए के बीच महज 12-13 हजार वोटों का फर्क था, लेकिन प्रशासनिक गड़बड़ियों ने भाजपा को 15 सीटों का फायदा दिला दिया। अब मतदाता सूची में हुई धांधलियों की पोल खुलने के बाद भाजपा का भरोसा और साख दोनों कमजोर हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट और जनता की निगरानी के बाद इस बार चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली की संभावना कम है — जिसका सीधा नुकसान भाजपा-जद(यू) को होगा।

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भाजपा की गिरती लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि गंगा किनारे बसे 12 जिलों — बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगुसराय, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, भागलपुर और लखीसराय — में एनडीए की हालत बेहद खराब है।
🔹 महागठबंधन का आत्मविश्वास और वामपंथ की भूमिका
महागठबंधन का नया घोषणापत्र वामपंथी दृष्टिकोण से प्रभावित है। भूमि सुधार, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दे उसके केंद्र में हैं। वाम दलों की इस बार एकजुट और मजबूत उपस्थिति महागठबंधन की जीत को निर्णायक बना सकती है।
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर लड़कर केवल 19 जीती थीं, जबकि वाम दलों की सफलता दर दुगुनी थी। इस बार कांग्रेस अगर अपने अहं को त्यागकर सहयोगी दलों को सम्मानजनक हिस्सेदारी देगी, तो परिणाम ऐतिहासिक हो सकते हैं।
🔹 वोटर अधिकार और जनहित मुद्दे केंद्र में लाने की जरूरत
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आधार से जुड़े मतदाता विवाद अस्थायी रूप से थमे हैं, लेकिन ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का संदेश अभी भी प्रासंगिक है। भाजपा द्वारा कमजोर वर्गों के मताधिकार को सीमित करने की कोशिशों का विरोध अब महागठबंधन के एजेंडे में शामिल होना चाहिए।
बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और खेती जैसे असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर ही विपक्ष सत्ता पक्ष की ओछी बयानबाज़ी से बच सकता है।
🔹 बिहार की जमीनी सच्चाई: आंकड़े बोलते हैं
भाजपा के ‘विकास’ के दावे आंकड़ों के बोझ तले दब गए हैं। नीति आयोग (2021) की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में 6.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में जी रहे हैं। 6.58 करोड़ लोग कुपोषित हैं — जिनमें 43.9% बच्चे और 60% महिलाएं शामिल हैं। मानव विकास सूचकांक (HDI) में बिहार 29वें स्थान पर है।
महिलाओं की स्थिति भी दयनीय है — 41% की शादी 18 वर्ष से पहले हो जाती है। शिक्षा में ड्रॉपआउट दर 20% से अधिक है, जबकि कॉलेज में दाखिले का अनुपात मात्र 17% है। स्वास्थ्य बीमा का लाभ पाने वाले परिवार केवल 14.6% हैं।
ये आंकड़े भाजपा-जद(यू) सरकार की “सुशासन” की सच्चाई उजागर करते हैं।
🔹 महागठबंधन का घोषणा पत्र: जमीन से जुड़ा एजेंडा
महागठबंधन ने अपने घोषणा पत्र में भूमिहीनों को अतिरिक्त जमीन देने, शिक्षा में सुधार, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और कृषि सुधार जैसे ठोस वादे किए हैं। यदि ये नीतियां लागू होती हैं, तो बिहार को ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी से निकालने की क्षमता इन्हीं में है।
भूमि सुधार न केवल सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगा — जिससे उपभोग, बाजार और रोजगार, तीनों में नई ऊर्जा आएगी।
🔹 इंडिया ब्लॉक के लिए बिहार बना नई उम्मीद की धरती
लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्पष्ट बहुमत न मिलना और अब बिहार में एनडीए की गिरती स्थिति, यह संकेत है कि देश की राजनीति एक नए मोड़ पर है। इंडिया ब्लॉक के लिए बिहार अब वह मंच बन सकता है, जो 2024 के बाद के भारत की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
नीतीश कुमार का भविष्य मोदी तय कर चुके हैं — लेकिन इंडिया ब्लॉक का भविष्य बिहार की जनता तय करेगी।
🟢 अब फैसला बिहार के मतदाताओं के हाथ में है। जनता समझ चुकी है कि धर्म और जाति की राजनीति ने राज्य को पिछड़ेपन की खाई में धकेला है। आने वाले चुनाव सिर्फ़ सरकार नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कार बदलने का चुनाव होंगे। बिहार बदलाव के लिए तैयार है — और ‘पलटूराम की राजनीति’ का अंत अब तय है।
📞 लेखक — संजय पराते, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ किसान सभा (अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध)
📱 संपर्क: 94242-31650

“मिशन स्टॉप क्राइम” का जनजागरण संकल्प—रायगढ़ में सिटीजन संस्था ने उठाया साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा कदम

रायगढ़ जिले में हुई बैठक में तय हुआ — हर गांव–हर नागरिक तक पहुंचेगा “साइबर जागरूकता अभियान”, डिजिटल अपराधों से सुरक्षा के लिए सिटीजन संस्था ने लिया ठोस संकल्प

रायगढ़, महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा) सिटीजन संस्था की टीम “मिशन स्टॉप क्राइम – टीम अगेंस्ट ऑनलाइन डिजिटल ऑल फ्रॉड” ने रायगढ़ जिले के आदई गांव, नवीन पनवेल में एक विशेष बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य था—आम नागरिकों को बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए जागरूक बनाना और समाज में डिजिटल सुरक्षा का माहौल तैयार करना।

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बैठक की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मासूम अली ने की। इस अवसर पर उन्होंने संगठन को और मजबूत करते हुए प्रकाश कांबले को रायगढ़ जिला अध्यक्ष तथा संतोष मनोरे को पनवेल तालुका अध्यक्ष नियुक्त किया। साथ ही, समाजसेवी सुधा माने को मिशन स्टॉप क्राइम की सदस्यता प्रदान की गई।
बैठक में नितिन कांबले, योगेश कांबले, सचिन लाडी, विजय खंडारे, अजय शिंदे और महिपाल घाटे सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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सभी सदस्यों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि “रायगढ़ जिले के हर नागरिक तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन फ्रॉड या ठगी का शिकार न बने।”
संस्था द्वारा जल्द ही स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम सभाओं में साइबर जागरूकता शिविर आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जिससे लोगों को डिजिटल लेन-देन में सतर्क रहने के व्यावहारिक उपाय सिखाए जा सकें।
💬 “डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है — मिशन स्टॉप क्राइम का लक्ष्य है, सुरक्षित भारत, सजग नागरिक।”

कछुए-नेवले की तस्करी से दहला महाराजगंज: नेपाल–चीन तक फैला गिरोह, प्रशासन मौन

🌿 सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में शिकारियों का आतंक: कछुआ–नेवला समेत दुर्लभ जीव तस्करी के निशाने पर — वन विभाग मौन!

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में इस समय वन्यजीवों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। कभी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध यह इलाका अब शिकारियों और वन्यजीव तस्करों का अड्डा बनता जा रहा है। पकड़ी वन रेंज के जगपुर बीट, बागापार, बेलहिया और सड़कहियां जैसे इलाके इन दिनों अवैध शिकार की घटनाओं से दहले हुए हैं।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक संगठित तस्कर गिरोह ग्रामीण इलाकों में सक्रिय है जो कछुआ, नेवला और अन्य संरक्षित प्रजातियों के जीवों का शिकार कर उन्हें नेपाल के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तस्करी करवा रहा है। यह नेटवर्क इतना मजबूत है कि हर स्तर पर इसके कनेक्शन फैले हैं — स्थानीय दलालों से लेकर विदेशी खरीदारों तक।
रात के अंधेरे में ये शिकारी नदियों और जंगलों के किनारे जाल बिछाकर कछुए और नेवले जैसे संरक्षित जीवों को पकड़ लेते हैं। पकड़े गए जीवों को तस्करी चैनल के माध्यम से नेपाल और चीन तक भेजा जाता है। जानकार बताते हैं कि कछुए के कवच, मांस और नेवले की खाल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है, जिससे तस्कर हर महीने लाखों रुपये कमा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह नदारद दिख रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी इन गतिविधियों से या तो अनजान बने हुए हैं या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कछुआ और नेवला दोनों संरक्षित प्रजातियों में शामिल हैं और इनके शिकार या व्यापार पर सख्त प्रतिबंध है। बावजूद इसके, जिले में यह अवैध कारोबार खुलेआम जारी है।
पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों ने वन विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सोहगीबरवां प्रभाग से दुर्लभ वन्यजीवों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
वहीं, जब पकड़ी वन रेंज के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इंकार कर दिया।
अब बड़ा सवाल यही है — आखिर वन विभाग इन संगठित तस्करों पर कार्रवाई कब करेगा? क्या तब, जब जंगलों से जीवन की अंतिम आवाज भी खो जाएगी?

जाम से त्रस्त सलेमपुर: बीमार युवती को परिजन हाथों से उठाकर ले गए अस्पताल, वीडियो वायरल

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।नगर के गांधी चौक से रेलवे स्टेशन व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने वाले मार्ग पर रविवार सुबह एक बार फिर भीषण जाम लग गया। जाम के कारण एक बीमार युवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाने में परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, युवती की हालत गंभीर थी और एंबुलेंस या वाहन के माध्यम से उसे अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था। मजबूर होकर परिजनों ने युवती को हाथों से उठाकर अस्पताल तक पहुंचाने का प्रयास किया। यह दृश्य देखकर मौजूद लोगों में आक्रोश और संवेदना दोनों झलकने लगी।इस घटना का वीडियो मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधी चौक से लेकर अस्पताल तक हर सुबह जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे आम जनता, मरीज और स्कूली बच्चों को भी भारी दिक्कत होती है।हालांकि नगर पंचायत और तहसील प्रशासन द्वारा कई बार इस समस्या के समाधान के प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। नागरिकों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।

पूरी दुनियां में गूंजा,धन गुरु नानक सारा जग तारिया – प्रकाशोत्सव की पावन बेला से जग पवित्र हुआ

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर पूरी दुनियां में सतगुरु नानक प्रगटिया मिट्टी धुंध जग चानण होआ, हुकमे अंदर सभ क़ो,बाहर हुकम ना कोए,सिमर सिमर सुख पावहुँ सिमरन कर मन मेरे, सबना ज़ियादा इक दाता, सो मैं विसर ना जाई, वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह-श्रद्धा भाव से आंखें बिछाए भक्तगण केनयन तृप्त हुए,नानक नाम चढ़दी कला तेरे भाणे सरबत दा भला के संदेश के साथ पूरे विश्व में स्थित सभी गुरुद्वारे सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक श्री गुरुनानक देव जी महाराज का 556 वाँ प्रकाशोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।उनका जन्म पंजाब के तलवंडी (ननकाना साहिब) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था, जो 2025 में 5 नवंबर को पड़ रहा है। यह दिन “गुरु नानक प्रकाश उत्सव” के नाम से मनाया जाता है, जब सिख और अन्य धर्मावलंबी गुरु नानक की शिक्षाओं को स्मरण करते हुए नाम जप, कीर्तन, लंगर और सेवा करते हैं।इस पावन मौके पर सिख, सिंधी समुदाय के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी माथा टेकने गुरुद्वारा पहुंच रहे है। गुरु नानक देव जी (1469-1539) केवल सिख धर्म के प्रथम गुरु ही नहीं थे, बल्कि समूची मानवता के लिए एक विश्वगुरु, एक आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता थे।हालांकि प्रकाशपर्व को लेकर अनेक दिनों से चल रहे प्रभातफेरी उपरांत जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारे लगाते हुए गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में हर नगर कीर्तन की तरह प्रभात फेरी निकाली गई है। सिखों के पहले पातशाह श्री गुरु नानक देव जी महाराज, जिनका नाम लेने मात्र से मानो आत्मिक शांति का अहसास होने लगता है। श्री गुरु नानक देव जी सिखों के ही नहीं, अपितु समस्त मानव जाति के लिए आदर्श हैं। उनकी शिक्षाएं, उनके विचार और उनके कर्म आज हर मनुष्य को प्रकाश के मार्ग पर ले जाते हैं। गुरु साहब ने अपना पूरा जीवन लोक भलाई के लिए समर्पित कर दिया। चूंकि दिनांक 5 नवंबर 2025 को हम वैश्विक स्तरपर बाबा गुरु नानक देवजी का प्रकाशोत्सव मना रहे हैं, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, पूरी दुनियाँ में गूंजा धन गुरु नानक सारा जग तारिया – सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ,पावन बेला से जग पवित्र हुआ।

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साथियों बात कर हम बाबा गुरु नानक देव के पावन जन्म की करें तो, बाबाजी का जन्म एक खत्रीकुल में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव (अभी पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त में जिसका नाम आगे चलकर ननकाना पड़ गया) में कार्तिकी पूर्णिमा को हुआ था।कुछ विद्वान इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल 1469 मानते हैं, किंतु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है, जो अक्टूबर-नवंबर में दीवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था, जबकि बहन बेबे नानकी थीं।गुरु साहिब बचपन से ही प्रखर बुद्धि के स्वामी थे। लड़कपन से वे सांसारिक मोहमाया के प्रति काफी उदासीन रहा करते थे। पढ़ने-लिखने में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी, लेकिन उनका सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत होता था। उनके बाल्यकाल में कई ऐसी चमत्कारी घटनाएं हुई, जिसके बाद लोग उन्हे दिव्य शख्सियत मानने लगे।
साथियों बात अगर हम बाबा गुरु नानक देव के बाल्यापन से युवापन की करें तो, बाबाजी का मन पढ़ने में नही लगता था, हालाँकि वे तेज बुद्धि के थे। उन्होंने 7-8 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था। उनका ध्यान शुरुआत से ही आध्यात्म की तरफ था,तत्पश्चात् सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। आगे चलकर इनका विवाह सोलह वर्ष की आयु में गुरदासपुर जिले में लाखौकी नामक स्थान की कन्या सुलक्खनी से हुआ था। 32 वर्ष की अवस्था में इनके प्रथम पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ था और चार वर्ष पश्चात् दूसरे पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ था। नानक का मन गृहस्थी में नही लगा इसलिए उन्होंने 1507 में अपने दोनों पुत्रों और पत्नी को अपने श्वसुर के घर छोड़ दिया और अपने चार साथियों रामदास,मरदाना, लहना, बाला के साथ तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े।
साथियों बात अगर हम बाबा गुरु नानक देव के दर्शन आधारशिला की करें तो, नानक देव जी के दर्शन की आधारशिला यह है कि वे सर्वेश्वरवादी थे।जिसका मतलब होता है कि ईश्वर सब जगह है अर्थात संसार के सभी तत्त्वों, पदार्थों और प्राणियों में ईश्वर विद्यमान है एवं ईश्वर ही सब कुछ है।नानक जी मूर्ती पूजा के विरोधी थे इसके अलावा उन्होंने हिंदू धर्म में फैली कुरीतिओं का सदैव विरोध किया था। उन्होंने एक परमात्मा की उपासना के मार्ग को बताया था, यही कारण है कि उनके विचारों को हिंदु और मुसलमान दोनों धर्मों के लोगों ने पसंद किया जाता है।संत साहित्य में नानक उन संतों की श्रेणी में हैं। हिंदी साहित्य में गुरुनानक भक्तिकाल के अतंर्गत आते हैं और वे भक्तिकाल में निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा से संबंध रखते हैं।
साथियों बात अगर हम सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध की करें तो, सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया, कलतारण गुरु नानक आया, ज्यों कर सूरज निकलया तारे छपे अंधेरपोलावा। गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर यह शबद गुरुद्वारों में गूंजायमान हो रहे हैं। कथा वाचक अपनी वाणी व रागी ढाडी जत्थे अपने कीर्तन से गुरु की महिमा का जो बखान कर रहे हैं, उसे गुरु घर में पहुंची संगत आस्था के समंदर में गोते लगा रही है। पूरे विश्व के गुरुद्वारों में जहां हजारों की तादाद में संगत माथा टेकने को उमड़ रही है। संगत ने जोड़ा घर, लंगर व बर्तन की सेवा कर रही है। पवित्र सरोवर के पानी से खुद को पवित्र कर रही है। बता दें श्री गुरुनानक देव जी का जीवन सदैव समाज के उत्थान में बीता। उस समय का समाज अंध विश्वासों और कर्मकांडों के मकड़जाल में फंसा हुआ था।ऐसे जटिल दौर में गुरुनानक देवजी ने प्रकट होकर समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का जो काम किया, उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। श्री गुरुनानक देव जी ने अपने उपदेशों में निरंकार पर जोर दिया। उन्होंने कहा धार्मिक ग्रंथ का ज्ञान ऐसी नैया है, जो अंधविश्वास के भवसागर से पार उतारती है। ये ज्ञान हमें निरंकार के देश की तरफ लेकर जाता है, जिसके समक्ष सिख आज भी नतमस्तक होते हैं।सिखमत का आगाज़ ही एक से होता है। सिखों के धर्म ग्रंथ में एक की ही व्याख्या है। एक को निरंकार, पारब्रह्म आदि नामों से जाना जाता है। निरंकार का स्वरूप श्रीगुरुग्रंथ साहिब की शुरुआत में बताया है जिसे आम भाषा में गुरु साहिब के उपदेशों का मूल मन्त्र भी कहते हैं। यह ग्रंथ पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि में है। इसमें मुख्यत:कबीर, रैदास और मलूकदास जैसे भक्त कवियों की वाणियाँ सम्मिलित हैं।
साथियों बात अगर हम बाबा जी की चार उदासियों की करें तो, गुरु साहिब चारों दिशाओं में घूम-घूम कर लोगों को उपदेश देने लगे। 1521 ईस्वी तक उन्होंने चार यात्रा चक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य स्थान शामिल थे। इन यात्राओं को पंजाबी में उदासियाँ के नाम से जाना जाता है। गुरु नानक देव जी मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं रखते थे। नानक जी के अनुसार ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर ही है। उन्होंने हमेशा ही रुढ़ियों और कुरीतियों का विरोध किया। उनके विचारों से नाराज तत्कालीन शासक इब्राहिम लोदी ने उन्हें कैद तक कर लिया था। पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी हार गया और राज्य बाबर के हाथों में आ गया, तो उन्हें कैद से मुक्ति मिली।
साथियों बात अगर हम बाबा जी के जीवन की आखिरी सांस तक लोग भलाई के काम करने की करेंतो,जीवन के अंतिम दिनों में गुरु साहिब के लोकहित में किए गए कामों की प्रसिद्धि हवा में घुलती फूलों की महक की तरह हर तरफ फैल चुकी थी। अपने परिवार के साथ मिलकर वे मानवता की सेवा में पूरा समय व्यतीत करने लगे। उन्होंने करतारपुर नाम से एक नगर बसाया, जो अब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है।अपनी चार उदासियों के बाद गुरुनानक देव जी 1522 में करतारपुर साहिब में बस गए। उनके माता-पिता का परलोक गमन भी इसी जगह पर हुआ था।करतारपुर साहिब में ही गुरुनानक साहिब ने सिख धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने रावी नदी के किनारे सिखों के लिए एक नगर बसाया और यहां खेती कर नाम जपो, किरत करो और वंड छको का उपदेश दिया। करतारपुर साहिब में उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 17 साल बिताए। यहीं पर 22 सितंबर 1539 ईस्वी को उन्होंने समाधि ले ली। ज्योति ज्योत समाने से पहले गुरु साहिब ने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जो बाद में गुरु अंगद देव जी के नाम से जाने गए।
साथियों बात अगर हम बाबा जी के चार मित्रों की करें तो, सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी के चार शिष्य थे। यह चारों ही हमेशा बाबाजी के साथ रहा करते थे। बाबाजी ने अपनी लगभग सभी उदासियां अपने इन चार साथियों के साथ पूरी की थी। इन चारों के नाम हैं-मरदाना लहणा , बाला और रामदास के साथ पुरी की थी।कहते हैं कि 1499 में उनकी सुल्तानपुर में मुस्लिम कवि मरदाना के साथ मित्रता हो गई। मरदाना तलवंड से आकर यहीं गुरु नानक का सेवक बन गया था और अन्त तक उनके साथ रहा। गुरु नानक देव अपने पद गाते थे और मरदाना रवाब बजाताथा,मरदाना ने गुरुजीकी चार प्रमुख उदासियों में उनके साथ यात्रा की। मरदाना ने गुरुजी के साथ 28 साल में लगभग दो उपमहाद्वीपों की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने तकरीबन 60 से ज्यादा प्रमुख शहरों का भ्रमण किया। जब गुरुजी मक्का की यात्रा पर थे तब मरदाना उनके साथ थे।गुरुजी के दो और शिष्य थेजिसका नाम बाला और रामदास था। मरदाना, बाला और रामदास तीनों ने ही गुरुजी की उदासियों में उनका साथ दिया और वे हरदम उनकी सेवा में लगे रहे।लहना नाम के भी गुरुजी के एक प्रसिद्ध शिष्य थे। कहते हैं कि लहना जी माता रानी ज्वालादेवी के परमभक्त थे। एक दिन उन्होंने गुरुनानक के एक अनुयायी भाई जोधा सिंह खडूर निवासी से उन्होंने गुरुनानक के शबद सुने और वे उससे बहुत ही प्रभावित हुए और वे बाबाजी से मिलने जा पहुंचे। भाई मरदाना वो मुस्लिम घर में पैदा हुए थे बाबा नानक जहां भी कहीं बाहर यात्राओं पर गए, भाई मरदाना हमेशा उनके साथ रहे। गुरबाणी के संगीत में उनकी गहरी छाप है। कहा जाता है कि जब तक भारत का बंटवारा नहीं हुआ था, तब तक पाकिस्तान के ननकाना साहिब और करतारपुर के गुरु ग्रंथ दरबार साहिब गुरुद्वारे में गुरबाणी पर संगीत की थाप उनके वंशज ही करते थे। नानक और मरदाना एक ही गांव में पैदा हुए। ये तलवंडी में हुआ, जो अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब में है। तब गांवों में आमतौर पर हिंदू-मुसलमानों के बीच कोई खाई नहीं थी। सब मिलजुलकर रहते थे करीब 300 -400 साल पहले हमारी सामाजिक संरचना यूं भी खासी अलग और भाईचारे वाली होती थी।नानक और मरदाना दोनों बचपन के दोस्त थे। हालांकि मरदाना बड़े थे। ऐसे भी बचपन की दोस्ती ना तो धर्म की दीवारों को मानती है और ना ही ऊंच-नीच को नानक बड़े और अमीर खानदान से वास्ता रखते थे तो मरदाना उस मुस्लिम मरासी परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो गरीब थे और जिनका ताल्लुक संगीत के साजों से था।राम दी चिड़िया, राम दा खेत चुग लो चिड़ियो, भर-भर पेट।। यह लिखी गयी दो लाइन्स गुरुनानक जी की जिंदगी भर की फिलोसोफी को बयां कर देतीं हैं।
अतः अगर हम पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि गुरु नानक जयंती महोत्सव 5 नवंबर 2025
पर विशेष-सतगुरु नानकप्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ।वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह-श्रद्धा भाव से आंखेंबिछाए भक्तगण के नयन तृप्त हुए.पूरी दुनियां में गूंजा,धन गुरु नानक सारा जग तारिया – प्रकाशोत्सव की पावन बेला से जग पवित्र हुआ।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

छोटे सरकार’ अनंत सिंह गिरफ्तार, दुलारचंद यादव मर्डर केस ने मचाया सियासी भूचाल

पटना/मोकामा ( राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार की राजनीति में फिर से उबाल आ गया है। मोकामा के बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में शनिवार की देर रात जदयू प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

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🔸 आधी रात करगिल आवास से हुई गिरफ्तारी
पटना पुलिस ने एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम बनाकर अनंत सिंह को उनके करगिल आवास से गिरफ्तार किया। इस दौरान उनके दो करीबी सहयोगी — मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम उर्फ दिमागी को भी हिरासत में लिया गया।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटना डीएम डॉ. त्यागराजन एम.एस. और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने पुष्टि की कि तीनों को दुलारचंद यादव हत्या प्रकरण में मुख्य आरोपी बनाया गया है।
🔸 तीन एफआईआर, 80 गिरफ्तारियां और चुनावी तनाव
अब तक इस मामले में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं—

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  1. पहली प्राथमिकी मृतक के पोते द्वारा अनंत सिंह समेत 4 लोगों के खिलाफ।
  2. दूसरी जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी द्वारा 6 लोगों पर।
  3. तीसरी पुलिस जांच के आधार पर स्वयं दर्ज की गई एफआईआर।
    इस केस में अब तक 80 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस ने बताया कि हिंसा के दौरान पथराव और पुलिस पर हमले की भी जांच चल रही है।
    🔸 पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा
    दुलारचंद यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें टखने के पास गोली लगी थी, परंतु उनकी मृत्यु हृदय और फेफड़ों में लगी चोट से हुए सदमे (कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर) के कारण हुई।
    रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोली का घाव घातक नहीं था, जिससे घटना की प्रकृति को लेकर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं।
  4. ये भी पढ़ें – चंद लोगों के हाथ की कठपुतली बनी है बिहार की राजनीति जो हमारे देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे है।
  5. 🔸 चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन
    निर्वाचन आयोग ने मोकामा हिंसा पर कड़ा रुख अपनाते हुए पटना के एसपी (ग्रामीण) विक्रम सिहाग का तबादला कर दिया है। साथ ही, बाढ़ के एसडीओ, मोकामा विधानसभा सीट के पीठासीन अधिकारी, और दो एसडीपीओ (बाढ़-1 और बाढ़-2) को हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
    🔸 मोकामा बना सियासी रणभूमि
    इस घटना ने बिहार चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले माहौल को गरमा दिया है।
    जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी, जो मृतक दुलारचंद के भतीजे हैं, अनंत सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।
    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केस अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता की परीक्षा बन गया है।
    🔸 मतदान और मतगणना कार्यक्रम
    बिहार विधानसभा की दो चरणों में मतदान प्रक्रिया होगी —
    पहला चरण: 6 नवंबर 2025
    दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025
    मतगणना: 14 नवंबर 2025
    🟩 मोकामा हत्याकांड ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी से चुनावी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट में क्या नया मोड़ आता है और क्या ‘छोटे सरकार’ एक बार फिर कानूनी शिकंजे से बाहर निकल पाएंगे या नहीं।

क्या भारत वाकई चाहता है कि पाकिस्तान दो मोर्चों पर फंसा रहे? PAK रक्षा मंत्री के दावे से मचा हड़कंप

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इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने शनिवार (1 नवंबर, 2025) को एक बार फिर बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति का सामना कर सकता है। आसिफ ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान भारत के प्रॉक्सी के रूप में काम कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है।

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध चला रहा है और इसका आरंभ पूर्व अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के शासनकाल से हुआ था। उन्होंने पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज से बातचीत में कहा कि “भारत चाहता है कि पाकिस्तान अपनी पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर एक साथ उलझा रहे। हमारे पास इस बात के ठोस सबूत हैं और जरूरत पड़ी तो हम उन्हें सामने रखेंगे।”

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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने संघर्ष विराम पर सहमति जताई है। पिछले महीने दोनों देशों की सीमा पर हिंसक झड़पों के बाद तुर्किए और कतर की मध्यस्थता में इस्तांबुल में शांति वार्ता आयोजित की गई थी। इस वार्ता के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

आसिफ ने कहा कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीद है, लेकिन भारत के हस्तक्षेप से हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।

उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया था, जब तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी अपनी भारत यात्रा पर थे।

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‘हिंदू धर्म में ये इच्छा नहीं की जाती…’, जेडी वेंस की टिप्पणी पर भड़का हिंदू संगठन, दिया बड़ा बयान

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अमेरिकी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की हालिया टिप्पणी को लेकर अमेरिका के हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने वेंस से आग्रह किया है कि वे हिंदू धर्म से भी जुड़ने की पहल करें और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का सम्मान करें।

दरअसल, मिसिसिपी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘टर्निंग प्वाइंट यूएसए (TPUSA)’ कार्यक्रम के दौरान वेंस ने अपनी पत्नी उषा, जो एक हिंदू परिवार से हैं, के साथ अपने अंतरधार्मिक विवाह पर चर्चा की थी। वेंस ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी भी “चर्च से उसी तरह प्रभावित होंगी” जैसे वे स्वयं हुए हैं।

इस बयान के बाद वेंस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने ही उन्हें ईसाई धर्म से दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन उनका धर्म परिवर्तन का कोई इरादा नहीं है।

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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए HAF ने कहा कि “हिंदू धर्म में यह इच्छा नहीं की जाती कि जीवनसाथी धर्म को वैसा ही देखे जैसा दूसरा देखता है।” संगठन ने वेंस को सलाह दी कि वे हिंदू धर्म की सकारात्मकता को स्वीकार करें और हिंदुओं के अपने धर्म के पालन के अधिकार को मान्यता दें।

संगठन ने यह भी कहा कि कुछ वेंस समर्थक धार्मिक स्वतंत्रता की मूल अवधारणा को हिंदुओं तक विस्तार देने में विश्वास नहीं रखते, जो अमेरिका के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।

वहीं, वेंस ने साफ किया कि उनकी पत्नी का धर्म परिवर्तन का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वे उनके साथ विश्वास और जीवन पर चर्चा करते रहेंगे।

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ग्राम भरथापुर का सांसद व विधायक ने किया भ्रमण

ग्रामवासियों को वितरित किया खाद्यान्न कीट पीड़ित परिवारों से भेंट कर बंधाया ढ़ाढस

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। सांसद बहराइच डाॅ. आनन्द कुमार गोंड ने विधायक बलहा सरोज सोनकर, क्षेत्र पंचायत प्रमुख मिहींपुरवा सौरभ वर्मा व अन्य गणमान्य व संभ्रान्तजन के साथ तहसील मिहींपुरवा अन्तर्गत ग्राम भरथापुर पहुंचकर नाव दुर्घटना में प्रभावित हुए परिवारों से भेंट कर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा अनुमन्य हर संभव सहायता प्रदान की जायेगी। सांसद व विधायक ने हृदय विदारक नाव दुर्घटना में लापता हुए लोगों के रेस्क्यू के लिए संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। सांसद डाॅ गोंड ने तहसील प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा अनुमन्य हर संभव सहायता प्रदान की जाये। ग्राम के भ्रमण के दौरान सांसद ने विधायक व क्षेत्र पंचायत प्रमुख ने उप जिलाधिकारी राम दयाल के साथ ग्रामवासियों को खाद्यान्न किट का वितरण भी किया।

पुलिस अधीक्षक ने हरी झंडी दिखाकर यातायात माह का किया शुभारम्भ

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस महानिदेशक एवं राज्य पुलिस प्रमुख उत्तर प्रदेश के आदेश के अनुक्रम में प्रदेश में घटित होने वाली सड़क दुर्घटनाओं एवं उनमें होने वाली मृत्यु में कमी लाये जाने हेतु सम्बन्धित विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए माह नवम्बर 2025 को यातायात माह के रुप में मनाये जाने के क्रम में यातायात माह शुभारंभ कार्यक्रम के अन्तर्गत यातायात कार्यालय, रिजर्व पुलिस लाइन बहराइच से वाहन रैली का आयोजन किया गया, पुलिस अधीक्षक तथा अपर पुलिस अधीक्षक नगर यातायात द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। उक्त जागरुकता रैली पुलिस लाइन से प्रस्थान कर पानी टंकी चौराहा, डी एम चौराहा, तिकोनीबाग चौराहा, रोडवेज बस स्टेशन, पीपल तिराहा, छावनी चौराहा, डिगिहा तिराहा, गुरूनानक चौक होकर वापस यातायात कार्यालय पर आकर समाप्त हुई।

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इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्राधिकारी नगर पहुँप सिंह, क्षेत्राधिकारी पयागपुर राज सिंह यादव, क्षेत्राधिकारी महसी डी के श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी प्रशिक्षु नरायणदत्त मिश्रा, प्रतिसार निरीक्षक भुवनेश्वर सिंह, निरीक्षक यातायात रामप्रकाश, निरीक्षक यातायात दिलीप शुक्ला सहित अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। यातायात माह एक अक्टूबर से तीस अक्टूबर तक मनाया जायेगा।

इस दौरान यातायात पुलिस तथा स्थानीय थाना पुलिस द्वारा पूरे माह विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन कर आम जनमानस तथा वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक किया जायेगा। यातायात नियमों के उल्लंघन पर विशेष अभियान चलाते हुए प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाही की जायेगा।

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किसानों को नहीं मिल पा रहा गेहूं का बीज किसान परेशान

शाहजहांपुर ( राष्ट्र की परम्परा) जैतीपुर कृषि रक्षा इकाई केंद्र पर किसानों को अनुदानित गेहूं का बीज वितरण शुरू नहीं हो पाया है। केंद्र पर भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण दूर-दराज से आए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान घंटों इंतजार के बाद भी बीज नहीं ले पा रहे हैं।किसानों का आरोप है कि वितरण प्रक्रिया में मनमानी की जा रही है और व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण से पहले किसानों की जमीन के अभिलेखों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि योजना का लाभ सही और जरूरतमंद किसानों तक पहुंच सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
गांव पिटरहाई के बुजुर्ग श्यामवीर सिंह ने बताया कि वे सुबह से गोदाम पर आए थे, लेकिन दोपहर में जब अंगूठा लगवाने का नंबर आया तो कर्मचारियों ने जमीन के अभिलेख न आने की बात कहकर उन्हें वापस भेज दिया। बाखरपुर के दृगपाल सिंह और अभिषेक यादव ने भी शिकायत की कि वे सुबह से बैठे हैं, लेकिन अभी तक उनका नंबर नहीं आया है और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं।
किसानों ने यह भी बताया कि कृषि रक्षा इकाई केंद्र पर उनके लिए कोई मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्हें पानी पीने के लिए भी दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
इस संबंध में जब गोदाम प्रभारी अमन कुमार गुप्ता से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।