Friday, July 3, 2026
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यूपी सरकार का सख्त आदेश: बाहर की दवा लिखने पर डॉक्टर होंगे सस्पेंड, ओपीडी से गायब रहने पर सीएमएस भी होंगे जिम्मेदार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मनमानी करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है. अब यदि कोई डॉक्टर सादी पर्ची पर बाहर की ब्रांडेड दवा लिखता पाया गया, तो उसके खिलाफ निलंबन (Suspension) तक की कार्रवाई होगी.

बाहर की दवा लिखी तो तुरंत होगी कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी जिलों के सीएमओ और सीएमएस को निर्देश दिया है कि अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाओं और जन औषधि केंद्र की जेनेरिक दवाओं को ही मरीजों को दिया जाए.
फिर भी कई डॉक्टर सरकारी पर्चे में कुछ दवाएं लिखकर बाकी सादी पर्ची पर महंगी ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं. अब ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित डॉक्टर को निलंबित किया जाएगा.

ओपीडी में मौजूद न रहने पर सीएमएस और अधीक्षक भी जिम्मेदार

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी अस्पताल में डॉक्टर निर्धारित समय पर ओपीडी कक्ष में मौजूद नहीं मिला, तो उस डॉक्टर के साथ-साथ चिकित्सा अधीक्षक (CMS) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (Superintendent) भी जिम्मेदार होंगे.
15 नवंबर के बाद शासन की टीमें अचानक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेंगी. अस्पतालों को सुबह से दोपहर 2 बजे तक तीन बार पूरा राउंड करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो.

मरीज भी कर सकते हैं शिकायत

अगर किसी मरीज को सादी पर्ची पर बाहर की दवा लिखी जाती है, तो वह संबंधित अस्पताल के अधीक्षक या उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत दे सकता है.
यदि वहां सुनवाई नहीं होती, तो मरीज महानिदेशक स्वास्थ्य (DG Health) को भी शिकायत भेज सकते हैं.

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सरकारी अस्पतालों में 200 से अधिक दवाएं उपलब्ध

उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन (UPMSC) के माध्यम से सभी सरकारी अस्पतालों में लगभग 200 से ज्यादा आवश्यक दवाएं पहले से उपलब्ध हैं. ऐसे में बाहर की दवाएं लिखने का कोई औचित्य नहीं बनता.

यूपी सरकार का संदेश साफ:

सरकार ने दो टूक कहा है —

“सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाएं ही मरीजों को दी जाएं. बाहर की दवा लिखना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

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गॉलब्लैडर में बनने लगा स्टोन! ये 4 लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं, 99% लोग कर देते हैं इग्नोर

Gallbladder Stone Symptoms: अगर आपके पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक तेज दर्द उठता है, जो कुछ देर में ठीक होकर फिर बार-बार लौट आता है, तो सावधान हो जाइए. यह गॉलब्लैडर स्टोन (Gallstone) यानी पित्त की पथरी का शुरुआती संकेत हो सकता है. समस्या यह है कि 99 प्रतिशत लोग इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे बीमारी बढ़ जाती है.

क्या है गॉलब्लैडर स्टोन?

गॉलस्टोन या पित्त की पथरी गॉलब्लैडर में बनने वाले छोटे ठोस कण होते हैं. ये कोलेस्ट्रॉल और बाइल से मिलकर बनते हैं. जब यह पित्त के रास्ते को ब्लॉक कर देते हैं, तो पेट में तेज दर्द होता है जो अक्सर पीठ या कंधे तक फैल सकता है.

ये 4 लक्षण नजर आते ही हो जाएं अलर्ट

  1. बार-बार पेट में दर्द: खासकर ऊपरी दाएं हिस्से में तेज़ और अचानक दर्द उठना.
  2. खाने के बाद बेचैनी: खासकर तैलीय या मसालेदार भोजन के बाद भारीपन या मिचली महसूस होना.
  3. मतली और उल्टी: पाचन गड़बड़ी के साथ बार-बार उल्टी आना.
  4. पीठ या कंधे तक दर्द फैलना: यह गॉलस्टोन का क्लासिक संकेत है.

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

महिलाओं में गॉलस्टोन का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है.

40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग.

मोटापा या तेजी से वजन घटाने वाले व्यक्ति.

बार-बार गर्भधारण करने वाली महिलाएं.

कब बन जाती है स्थिति गंभीर?

जब गॉलस्टोन पूरी तरह बाइल डक्ट को ब्लॉक कर देता है, तब यह एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस (Acute Cholecystitis) का रूप ले लेता है. इसमें तेज़ बुखार, ठंड लगना, उल्टी और अत्यधिक दर्द के लक्षण दिखते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

इलाज और बचाव के उपाय

अगर दर्द हल्का है, तो दवाइयों और डाइट कंट्रोल से राहत मिल सकती है.
लेकिन बार-बार दर्द होने पर डॉक्टर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से गॉलब्लैडर निकालने की सलाह देते हैं.

बचाव के उपाय:

तली-भुनी चीजों से परहेज़ करें.

वजन धीरे-धीरे घटाएं.

रोज़ाना हल्का व्यायाम करें.

पर्याप्त पानी पिएं ताकि पित्त का संतुलन बना रहे.

साल में एक बार एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड करवाएं ताकि समय रहते पता चल सके.

नेपाल के बाद पाकिस्तान में Gen-Z का गुस्सा फूटा, जानें कौन-कौन से देश इस नई पीढ़ी से डरें

Pakistan Protests Gen-Z Movement: नेपाल के बाद अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है. गुरुवार को बड़ी संख्या में जेन-जी (Gen-Z) सड़कों पर उतर आई और शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि यह आंदोलन मुजफ्फराबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुआ था, जहां छात्रों ने बढ़ी हुई फीस और सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठाई. धीरे-धीरे यह विरोध पूरे क्षेत्र में फैल गया और नई पीढ़ी सरकार के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आई.

कौन हैं Gen-Z?

Gen-Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी वह पीढ़ी जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में पली-बढ़ी है. यह युवा वर्ग पारंपरिक राजनीति में नहीं बल्कि बदलाव की राजनीति में विश्वास रखता है. यही वजह है कि अब यह पीढ़ी पुराने सिस्टम को चुनौती देने लगी है. पाकिस्तान में इनका आक्रोश सिर्फ सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसने वर्षों से युवाओं की आवाज को दबाए रखा है.

नेपाल, श्रीलंका से लेकर अमेरिका तक फैला आंदोलन

Gen-Z का यह उभार केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है. नेपाल में इसी पीढ़ी ने भ्रष्टाचार और राजनीतिक अक्षमता के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था. श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान सबसे पहले सड़कों पर उतरने वाले भी यही युवा थे. वहीं अमेरिका, फ्रांस और ईरान में भी जेन-जी सोशल मीडिया और संसद दोनों जगह अपनी आवाज बुलंद कर रही है.

अब किन देशों को डरना चाहिए Gen-Z से?

  1. इंडोनेशिया और म्यांमार:
    इन देशों में जेन-जी सैन्य और धार्मिक नियंत्रण से असहज है. म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली को लेकर युवा पहले ही सशस्त्र विरोध कर चुके हैं, जबकि इंडोनेशिया में इंटरनेट सेंसरशिप के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है.
  2. नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका:
    अफ्रीकी देशों में भी जेन-जी सबसे मुखर है. नाइजीरिया के #EndSARS आंदोलन ने साबित कर दिया कि यह पीढ़ी अब जवाब चाहती है. दक्षिण अफ्रीका में गरीबी और असमानता के खिलाफ युवा एकजुट हो रहे हैं.
  3. ब्रिटेन और जर्मनी:
    यूरोप के ये देश भी इससे अछूते नहीं हैं. यहां Gen-Z जलवायु परिवर्तन, सामाजिक न्याय और रोजगार जैसे मुद्दों पर सड़कों पर उतर रही है. आने वाले वर्षों में यह राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है.
  4. तुर्किए, ब्राजील और मेक्सिको:
    तुर्किए में आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर युवाओं में गुस्सा बढ़ रहा है. ब्राजील और मेक्सिको में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के कारण भी जेन-जी के आंदोलन की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
  5. अमेरिका और यूरोप:
    हालांकि यहां लोकतंत्र मजबूत है, लेकिन नस्लीय असमानता, शिक्षा, पर्यावरण और बेरोजगारी जैसे मुद्दे नई जनरेशन को सड़कों पर लाने की क्षमता रखते हैं.

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नतीजा

Gen-Z अब सिर्फ सोशल मीडिया की आवाज नहीं रही, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. नेपाल से पाकिस्तान तक, यह पीढ़ी सत्ता के ढांचे को हिला रही है और आने वाले समय में कई देशों में इसका असर और गहरा दिख सकता है.

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यातायात माह का शुभारंभ, एडीजी जोन अशोक जैन ने दिखाई हरी झंडी

जनजागरूकता से सुधरेगी ट्रैफिक व्यवस्था, नियमों का पालन ही सुरक्षा की गारंटी : एडीजी जोन

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
पुलिस लाइन परिसर में शुक्रवार को यातायात माह (नवंबर-2025) का शुभारंभ अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) जोन गोरखपुर मुथा अशोक जैन और पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एस. चनप्पा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर कार्यवाहक एसएसपी/एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी ट्रैफिक राजकुमार पांडेय, सीओ ट्रैफिक विवेक तिवारी, सीओ कैंट योगेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर ट्रैफिक मनोज राय और आरआई हरिशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी एवं ट्रैफिक जवान मौजूद रहे।
एडीजी जोन ने पुलिस लाइन से ट्रैफिक जवानों की मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली का उद्देश्य आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाना और सड़क सुरक्षा के महत्व को बताना था।
इस मौके पर एडीजी अशोक जैन ने कहा कि सड़कें सभी की सुविधा के लिए बनी हैं, इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह ट्रैफिक नियमों का पालन करे और अनुशासनपूर्वक सड़क पर चले। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में सड़कें अब चौड़ी हो चुकी हैं, लेकिन किनारों पर ठेले-खोमचे लगाने से यातायात बाधित होता है। ठेला संचालकों से अपील की गई कि वे अपने ठेले निर्धारित स्थानों पर लगाएं और मुख्य सड़क को बाधित न करें।
एडीजी ने बताया कि ट्रैफिक व्यवस्था पुलिस और नागरिकों के सहयोग से ही बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि मार्ग दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक हैं, इसलिए ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां चेतावनी संकेत लगाए जा रहे हैं ताकि वाहन चालक सतर्क रहकर वाहन चलाएं। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम को संयुक्त कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में धुंध (कोहरा) के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, लेकिन इसका मुख्य कारण लापरवाही है। उन्होंने सभी वाहन चालकों से अपील की कि अपने वाहनों पर रिफ्लेक्टर और कोहरा रोधी लाइट अवश्य लगाएं ताकि दृश्यता बनी रहे और सामने से आने वाले वाहन स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
एडीजी ने कहा कि तेज गति से वाहन चलाना, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के सफर करना दुर्घटनाओं की मुख्य वजह है। अगर नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
शहर में चल रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां भी सड़क या निर्माण कार्य कराया जा रहा हो, वहां पूर्व सूचना देकर और सुरक्षा इंतज़ाम सुनिश्चित कर ही कार्य कराया जाए ताकि आमजन को असुविधा न हो।
अंत में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यातायात माह केवल एक अभियान नहीं बल्कि लोगों में स्थायी जागरूकता पैदा करने का अवसर है। नियमों का पालन करने वाले नागरिक ही न केवल स्वयं सुरक्षित रहते हैं बल्कि दूसरों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

ट्रक की ठोकर लगने से महिला हुई घायल

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
शुक्रवार की सुबह लगभग 11:00 एक महिला को पचौहा बाईपास पर ट्रक ने ठोकर मार दिया, जिससे महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल अवस्था में स्थानीय व परिजन उपचार के लिए सीएचसी पहुंचाया जहां पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार कर महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया।
थाना क्षेत्र के मईलौटा निवासिनी संगीता देवी 40, पत्नी रमेश प्रजापति अपने घर से थोड़ी दूर पर बाईपास पर पहुंची हुई थी कि पीछे से आ रही ट्रक ने ठोकर मार दिया जिससे वह जमीन पर गिर पड़ी उनके सिर और पैर में गंभीर चोट आइ है। स्थानीय लोगों एवं परिजनों ने इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां पर डाक्टरों ने प्राथमिक इलाज कर उन्हें मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया। महिला की हालत चिंता जनक बताई जा रही है।
इस संबंध मे पूछे जाने पर थानाध्यक्ष दिनेश मौर्य ने बताया कि मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक और चालक को कब्जे मे ले लिया है। वही पीड़िता के परिजनों के तरफ से कोई तहरीर नहीं मिली है, तहरीर मिलने पर कार्यवाही कि जाएगी।

सिकंदरपुर में शॉर्ट सर्किट से दुकान में आग, हजारों का नुकसान

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर के बस स्टेशन चौराहा पर शुक्रवार की सुबह करीब पाँच बजे एक कोल्ड ड्रिंक की दुकान में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। आग लगने से दुकान में रखा दो रेफ्रिजरेटर, एक अलमारी, कोल्ड ड्रिंक का स्टॉक तथा नगदी जलकर राख हो गए।दुकान के स्वामी अंकित चौरसिया पुत्र सुरेंद्र चौरसिया ने बताया कि घटना के समय दुकान बंद थी। सुबह जब आसपास के लोगों ने दुकान से धुआँ उठते देखा तो उन्होंने तुरंत विद्युत विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही विभाग द्वारा बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। स्थानीय लोगों ने पानी डालकर और बालू फेंककर आग पर किसी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक दुकान में रखा हजारों रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय व्यापारी भी मौके पर पहुँच गए। लोगों ने बताया कि यदि समय रहते बिजली बंद न की जाती तो आसपास की कई दुकानें आग की चपेट में आ सकती थीं। घटना से क्षेत्र के व्यापारियों में चिंता का माहौल है।

अक्सर बहुत से लिबास देखे हैं

जिस समय इंसान पत्थर रगड़कर,
अग्नि प्रज्वलित करता रहा होगा,
इंसान इंसान की मदद करता होगा,
आपसी भाईचारा रखता रहा होगा।

अब तो जानवर इंसान से बेहतर हैं,
अब आग खोजना ज़रूरत ही नहीं है,
क्योंकि इंसान स्वयं इंसान को आग
लगाने में बिलकुल हिचकता नहीं है।

और एक अजीब बात इंसान की है,
बहुत लोगों के पास लिबास नहीं होता,
परन्तु अक्सर बहुत से लिबास देखे हैं,
जिनके अंदर इंसान बिलकुल नहीं होता।

कोई इंसान सादा काग़ज़ पढ़ लेता है,
तो कोई पूरी किताब नहीं पढ़ पाता है,
अपनी अपनी समझ है कोई हालात,
तो कोई जज़्बात भी नहीं पढ़ पाता है।

इंसान का सच कि घाव व लगाव
दोनो मिलने के बाद नहीं भूलते हैं,
आदित्य इसलिये रिश्ते में भी उचित
दूरी इंसान इंसान से बनाये रखते हैं।

  • डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
    ‘आदित्य’

शादी के लिए रखा सारा सामान चोरो ने खंगाला

छत के रास्ते घर मे घुस कर चोरो ने चोरी को दिया अंजाम

बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
गुरुवार की देर रात चोरों ने एक घर को निशाना बनाया छत के रास्ते घर में घुस कर बेटी के शादी लिए रखा सारा सामान लेकर कर चोर फरार हो गये। जब सुबह घर वालों की नींद खुली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गयी, देखा कि घर का सारा सामान बिखरा हुआ था घर मे रखा बड़ा बक्सा खुला मिला उसमे से शादी के लिए सारा सामान चोर लेकर फरार हो गए।
बरहज थानाक्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवापार निवासी बाबूलाल चौहान पुत्र सूर्यभान चौहान ठंड के चलते सभी लोग घर की बरामदे में सो रहे थे, की गुरुवार की देर रात चोरों ने छत के रास्ते घर में घुसकर बिटिया की शादी के लिए रखा सारा सामान लेकर चोर फरार हो गए। मिली जानकारी के अनुसार घर मे शादी की तैयारी चल रही थी, शादी 28नवंबर 2025 को होनी है , शादी होने से पहले ही चोरो ने घर का सारा सामान उड़ा दिया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चोरो ने देर रात सभी परिवारी जन को सोया देख छत के रास्ते घर मे घुसकर सारा सामान और घर मे रखा बड़ा बॉक्स को तोड़ कर चोरों ने बॉक्स में रखा रुपया और जेवरात कपड़े आदि निकालकर भागने मे कामयाब हो गए।जब सुबह घर वालों की नीद खुली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और चीख पुकार मच गया चीख पुकार सुनकर दरवाजे पर लोग इकट्ठा हो गए इसी बीच चोरी की घटना की सूचना किसी ने पुलिस को दी, सुचना मिलते ही घटना स्थल पर पहुंची पुलिस एवं फोरेनसिक टीम एवं डॉग स्क्वाड द्वारा जांच व चोरों की पहचान मे जुट गयी है।
पूछे जाने पर थाना अध्यक्ष दिनेश मौर्य ने बताया कि एक घर में चोरी की सूचना मिली है चोरो की पहचान करने का प्रयास तेजी से जारी है।

कांग्रेस का पलटवार–“ट्रंप के 59 दावे, मोदी की चुप्पी क्यों?”

भारत-पाक युद्ध पर ट्रंप का नया दावा: “आठ विमान गिराए गए”, कांग्रेस ने कसा तंज – ‘हाउडी मोदी अब क्या कहेंगे?’


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अक्सर विवादित बयानों से सुर्खियों में रहने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। फ्लोरिडा के मियामी में आयोजित ‘अमेरिका बिजनेस फोरम’ में ट्रंप ने कहा कि मई में भारत-पाक युद्ध के दौरान आठ विमान मार गिराए गए, जबकि अब तक वह सात विमानों की बात करते रहे थे। ट्रंप ने यह भी कहा कि संघर्ष के दौरान आठवां विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये विमान किस देश के थे।

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ट्रंप ने अपने भाषण में कहा, “मैं भारत और पाकिस्तान दोनों से व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा था, तभी सुना कि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। सात विमान गिराए गए और आठवां क्षतिग्रस्त — कुल आठ विमान।”

इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी ने ट्रंप के दावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “ट्रंप ने अब तक भारत-पाक मध्यस्थता का दावा 59 बार किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी हद तक बंद कर दिया है और मोदी चाहते हैं कि वह भारत दौरे पर आएं। अब ‘हाउडी मोदी’ इस पर क्या कहेंगे?”

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ज्ञात हो कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था। वहीं भारत का स्पष्ट कहना है कि मई में डीजीएमओ स्तर पर हुई बातचीत के बाद ही सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय हुआ था, न कि किसी बाहरी दबाव से।

“वंदे मातरम – भारत की आत्मा की अनुगूंज, जो पीढ़ियों को जोड़ती रही”

“वंदे मातरम के 150 वर्ष: प्रधानमंत्री मोदी ने भव्य स्मरणोत्सव की शुरुआत की, कहा – यह राष्ट्र की आत्मा का स्वर है”

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार तड़के देश के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का भव्य शुभारंभ किया। राजधानी के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट और विशेष स्मारक सिक्का भी जारी किया।

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अपने भावनात्मक संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वंदे मातरम शब्द हमारे भीतर असीम आत्मविश्वास और साहस भर देता है। यह हमें बताता है कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।” उन्होंने इसे भारत की एकता, लचीलेपन और अटूट राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताया।

ये भी पढ़ें –मुंधवा की जमीन डील में बड़ा घोटाला – 500 रुपये में रजिस्टर हुई करोड़ों की संपत्ति!

प्रधानमंत्री ने इस गीत की रचना करने वाले बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, यह भारत मां के प्रति समर्पण का संकल्प है।” उन्होंने कहा कि यह स्मरणोत्सव देशवासियों में नई ऊर्जा और नव-प्रेरणा का संचार करेगा।

कार्यक्रम के दौरान “वंदे मातरम नाद एकम रूपम अनेका” शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति हुई, जिसमें देश के प्रख्यात कलाकारों ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक ध्वनि और विविधता में एकता की भावना को जीवंत कर दिया।

इस अवसर ने न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को फिर से प्रज्वलित किया, बल्कि वंदे मातरम के अमर संदेश को भी पुनः जीवंत किया — “एक ध्वनि, अनेक रूप, पर एक ही मातृभूमि।”

मुंधवा की जमीन डील में बड़ा घोटाला – 500 रुपये में रजिस्टर हुई करोड़ों की संपत्ति!

👉 महाराष्ट्र में बड़ा भूमि घोटाला! उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी ₹1800 करोड़ की डील पर उच्च-स्तरीय जांच शुरू

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचाते हुए राज्य सरकार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कथित ₹1800 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं। पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) की अंतरिम रिपोर्ट में पुणे के मुंधवा इलाके में हुई जमीन की बिक्री और पंजीकरण में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

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रिपोर्ट के अनुसार, सरकार से जुड़ी इस जमीन के सौदे का घोषित मूल्य ₹300 करोड़ रुपये था, जबकि कर सहित कुल देय स्टांप शुल्क लगभग ₹21 करोड़ रुपये होना चाहिए था। हैरानी की बात यह है कि संपत्ति का पंजीकरण मात्र ₹500 के सांकेतिक स्टांप शुल्क पर कर दिया गया, जिससे राज्य के खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

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अंतरिम रिपोर्ट में तत्कालीन संयुक्त उप-पंजीयक रवींद्र तारू को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। जांच में पाया गया कि उन्होंने बिना सरकारी अनुमति या एनओसी की पुष्टि के विक्रय विलेख पंजीकृत किया था। अब 5.99 करोड़ रुपये के बकाया स्टांप शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है।

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हालाँकि, अमीडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी के माध्यम से पार्थ पवार का नाम इस सौदे से जोड़ा गया है, परंतु उनका नाम एफआईआर में दर्ज नहीं है।
इस बीच, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा—“मेरा इस मामले से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। महाराष्ट्र के लोग मुझे 35 वर्षों से जानते हैं। मैंने खुद इस पूरे मामले की जानकारी लेने का फैसला किया है।”

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सरकार ने आठ दिनों में अंतिम रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है, जिससे अब महाराष्ट्र की सियासत में इस प्रकरण पर नए खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।

महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस: सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की विश्व-स्तरीय ऐतिहासिक घटना

महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस 7 नवम्बर को उन ऐतिहासिक परिवर्तनों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने बीसवीं शताब्दी की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था की दिशा को गहराई से प्रभावित किया। वर्ष 1917 में रूस में हुए इस परिवर्तन ने न केवल ज़ारशाही शासन का अंत किया, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की स्थापना की, जिसने समानता, श्रम और सामाजिक न्याय के नए सिद्धांतों को विश्व मंच पर स्थापित किया। यह क्रांति उस युग के सामाजिक संघर्षों, युद्धकालीन कठिनाइयों और व्यापक आर्थिक विषमता के विरुद्ध जनता की संगठित आकांक्षा का परिणाम थी।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की स्थिति अत्यंत विषम हो गई थी। आम जनता महँगाई, भुखमरी और युद्ध के दुष्प्रभावों से जूझ रही थी। सैनिक मनोबल टूट चुका था और उद्योग-धंधे ठप हो गए थे। ऐसे समय में लेनिन और बोल्शेविक पार्टी ने जनता के सामने एक वैकल्पिक व्यवस्था की कल्पना रखी— ऐसी व्यवस्था जिसमें सत्ता का केंद्र शासक कुल नहीं, बल्कि श्रमिक वर्ग और किसान समाज हो। 7 नवम्बर 1917 को पेट्रोग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में विंटर पैलेस पर नियंत्रण के साथ क्रांति ने निर्णायक रूप ले लिया और पूरे रूस में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई।

महान् अक्टूबर क्रांति का महत्व केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं था। इसने सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया। भूमि का पुनर्वितरण, उद्योगों का राज्य नियंत्रण, श्रमिकों को अधिकार, महिलाओं को मतदान व राजनीतिक सहभागिता का अवसर— ये सभी कदम क्रांति की वैचारिक दिशा को स्पष्ट करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और श्रम नीतियों को नए रूप में परिभाषित किया गया, जिससे आम लोगों के जीवन में सुरक्षा और अवसर की भावना विकसित हुई। इस क्रांति ने यह संदेश दिया कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्ग विकास की प्रक्रिया में समान भागीदारी प्राप्त करें।

विश्व राजनीति पर इस क्रांति का प्रभाव अत्यंत व्यापक रहा। पूँजीवादी और समाजवादी विचारधाराओं के बीच वैचारिक संघर्ष तीव्र हुआ और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नए संतुलन की ओर बढ़ी। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के आंदोलनों को भी इससे प्रेरणा मिली। कई देशों में सामाजिक न्याय, श्रमिक अधिकार और समान वितरण के सिद्धांतों पर आधारित नीतियों की रूपरेखा तैयार होने लगी। इस प्रकार महान अक्टूबर क्रांति वैश्विक विचारधारा की दिशा बदलने वाली घटना सिद्ध हुई।

आज महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम इतिहास के उस अध्याय से सीखें जिसने सामाजिक विषमता, शोषण और अन्याय के विरुद्ध सामूहिक संघर्ष की शक्ति को सिद्ध किया। यह दिवस यह भी स्मरण कराता है कि किसी भी व्यवस्था का स्थायित्व तभी संभव है, जब वह आम जनता की आवश्यकताओं, अधिकारों और अपेक्षाओं के अनुरूप हो। इतिहास चाहे जिस दिशा में आगे बढ़ गया हो, अक्टूबर क्रांति की मूल भावना— सामाजिक न्याय, समानता और जनभागीदारी— आज भी सामाजिक विमर्श और लोकतांत्रिक संवेदनशीलता के प्रमुख आधार बने हुए हैं।

महान अक्टूबर क्रांति दिवस इस ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान का अवसर है और उस विचार की पुनर्पुष्टि भी कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसकी नींव समान अवसर, मानवीय मूल्यों और सार्वजनिक कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित हो।

विद्युत विभाग की लापरवाही से मंडरा रहा खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

📰 रिपोर्ट –देवरिया संवाददाता

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर की गलियों से लेकर गाँवों के रास्तों तक, बिजली के झूलते तार अब मौत का जाल बन चुके हैं। बरसात के मौसम में गीले खंभे और खुले तार आम जनता की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। अफसोस की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद भी विद्युत विभाग की अनदेखी और सुस्ती जारी है।

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जहाँ एक ओर सरकार “सुरक्षित भारत” की बात करती है, वहीं जमीनी हकीकत में बिजली व्यवस्था का जाल खुद ही खतरे का सबब बनता जा रहा है। छोटे बच्चे स्कूल जाते समय इन तारों से डरते हैं, तो बुजुर्ग राह बदलकर निकलने को मजबूर हैं।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारीयों को शिकायत दी गई, परंतु “फाइलों की धूल” में समस्याएँ दबी रह गईं। कहीं तार पेड़ों से उलझे हैं, तो कहीं खंभों की जड़ें जमीन से हिल चुकी हैं। थोड़ी सी आंधी या बरसात भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

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समाज का सबसे दुखद पहलू यह है कि जब तक कोई हादसा नहीं होता, तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती। यह लापरवाही सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता की भी कहानी है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह आवाज उठाए, अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी दिखाए।

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आज जरूरत है “बिजली सुधार” की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी सुधार की — क्योंकि एक चिंगारी सिर्फ तार नहीं जलाती, कई घरों के सपने भी राख कर देती है।

शिशु सुरक्षा दिवस : बाल संरक्षण के प्रति समाज की संवेदनशीलता का दायित्व

शिशु सुरक्षा दिवस उस सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके माध्यम से समाज, परिवार और शासन बच्चों के जीवन, अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराते हैं। यह दिवस स्मरण कराता है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी सार्थक है, जब उसके बच्चे सुरक्षित, स्वस्थ और भयमुक्त वातावरण में पल-बढ़ सकें। शिशु सुरक्षा कोई औपचारिक अवधारणा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है जो प्रत्येक नागरिक से अपेक्षा करता है कि वह बच्चे के हित को सर्वोपरि माने।

आज के दौर में तकनीकी विकास और सामाजिक परिवर्तन ने जहाँ बच्चों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं, वहीं जोखिमों के स्वरूप को भी जटिल बनाया है। कुपोषण, घरेलू हिंसा, बाल श्रम, तस्करी, दुरुपयोग, ऑनलाइन शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसी समस्याएँ अभी भी बच्चों के सुरक्षित भविष्य को चुनौती देती हैं। इसी पृष्ठभूमि में शिशु सुरक्षा दिवस हमें याद दिलाता है कि बाल अधिकारों की रक्षा सतत प्रयासों और सामूहिक जागरूकता से ही संभव है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार संधि ने यह स्पष्ट किया है कि हर बच्चे का जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और सहभागिता पर पूर्ण अधिकार है। भारत ने इस संधि को स्वीकार करते हुए कानूनों और संस्थागत ढाँचे को मजबूत किया है— किशोर न्याय अधिनियम, बाल संरक्षण इकाइयाँ, चाइल्डलाइन सेवाएँ और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम इसी दिशा में किए गए महत्त्वपूर्ण कदम हैं। इन तंत्रों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा उपेक्षा, हिंसा या शोषण का शिकार न बने।

बाल अधिकार कार्यकर्ता नवनीत मिश्र कहते हैं कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी सभ्य समाज की प्राथमिक शर्त है। उनका मानना है कि परिवार, विद्यालय और शासन— तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करें जहाँ वे भय और उपेक्षा से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ विकसित हो सकें। वे यह भी बताते हैं कि बच्चों की शिकायतों और भावनाओं को गंभीरता से सुनना ही वास्तविक बाल संरक्षण की आधारशिला है।

वास्तविक सुरक्षा केवल कानूनों से नहीं आती; यह परिवार और समुदाय की सतर्कता व संवेदनशीलता से उत्पन्न होती है। माता-पिता द्वारा बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना, विद्यालयों में बाल-अनुकूल नीतियाँ अपनाना, और समाज में संदिग्ध गतिविधियों पर जागरूक दृष्टि रखना— ये सभी पहलू बच्चों की सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाते हैं। शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे बच्चों की स्थिति को नजदीक से समझते हैं और समय रहते हस्तक्षेप कर सकते हैं।

डिजिटल युग के आगमन ने शिशु सुरक्षा को एक नए रूप में प्रस्तुत किया है। इंटरनेट पर मिली स्वतंत्रता बच्चों के लिए ज्ञान का साधन है, परंतु साइबर बुलिंग, फेक पहचान, अनुचित सामग्री और ऑनलाइन शोषण जैसी चुनौतियाँ भी उतनी ही गंभीर हैं। ऐसे में आवश्यक है कि परिवार और शिक्षण संस्थान बच्चों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाएँ— व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, संदिग्ध लिंक से सतर्कता, और किसी भी असहज स्थिति की तत्काल सूचना देना।

शिशु सुरक्षा दिवस हमें इस व्यापक सोच से जोड़ता है कि प्रत्येक बच्चा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की हिंसा या उपेक्षा को सामान्य नहीं माना जा सकता। बच्चों की आवाज़ कमजोर अवश्य होती है, परंतु समाज का कर्तव्य है कि उसकी रक्षा में अपनी आवाज़ मजबूत करे। यह दिवस हमें प्रेरित करता है कि हम संवेदनशीलता, सतर्कता और सहयोग की भावना के साथ बाल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि सुरक्षित बचपन ही मजबूत और प्रगतिशील समाज की नींव है।

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस : मानवता और सेवा की वैश्विक परंपरा

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मई को मनाया जाता है। यह दिवस मानवता, करुणा और निस्वार्थ सेवा की उस वैश्विक परंपरा को समर्पित है, जिसने पिछले डेढ़ सौ वर्षों में लाखों पीड़ितों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई है। इस अवसर पर विश्वप्रसिद्ध मानवतावादी हेनरी ड्यूनां की जयंती भी मनाई जाती है, जिनकी दूरदर्शिता ने आधुनिक मानवीय सहायता की नींव रखी।

1859 में सोलफेरिनो के युद्ध में घायल सैनिकों की दयनीय स्थिति देखकर ड्यूनां के मन में मानवता के लिए गहरी करुणा उपजी। स्थानीय लोगों की सहायता से उन्होंने घायलों को राहत पहुंचाई और बाद में इस अनुभव को अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ए मेमोरी ऑफ सोलफेरिनो’ में दर्ज किया। यही पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय सहायता के लिए एक सुनियोजित संगठन की आवश्यकता का आधार बनी और 1863 में जिनेवा में अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास समिति की स्थापना हुई।

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि एक दायित्व हैl वह दायित्व जो जीवन, गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराता है। यह दिवस संदेश देता है कि किसी भी परिस्थिति में मानव पीड़ा को कम करना ही सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए। यह राजनीति, धर्म, रंग या राष्ट्रीयता से परे जाकर निष्पक्ष और तटस्थ सेवा की भावना को आगे बढ़ाता है।
विश्वभर में रेड क्रास और रेड क्रीसेंट आंदोलन आपात स्थितियों में राहत, प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं, युद्धबंदियों के संरक्षण, विस्थापितों की सहायता और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपदाओं की घड़ी में इसकी टीमें सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचती हैं। रक्तदान अभियानों, जीवनरक्षक प्रशिक्षणों और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से यह समाज की जड़ों तक अपनी पहुंच बनाता है।
भारत में 1920 में स्थापित भारतीय रेड क्रास सोसाइटी ने भी आपदा प्रबंधन, रक्तदान सेवाओं, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों और सामुदायिक सहायता कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कोविड-19 महामारी के दौरान संगठन द्वारा की गई व्यवस्थाओं— क्वारंटीन केंद्र, ऑक्सीजन बैंक, राहत वितरण और मोबाइल मेडिकल सहायता, ने इसकी उपयोगिता को और सशक्त रूप से स्थापित किया।
आज जब विश्व जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, आर्थिक असमानता और महामारी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, उस समय रेड क्रास दिवस हमें मानवता की मूल भावना को याद करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को समाज में और मजबूत बनाएं। सेवाभाव किसी बड़े संसाधन का मोहताज नहीं है; यह मात्र एक संकल्प है— किसी जरूरतमंद के लिए हाथ बढ़ाने का, किसी संकट में फंसे व्यक्ति को सहारा देने का, और मानवता को सर्वोपरि रखने का।
अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस मानव सेवा की उसी शाश्वत परंपरा के प्रति सम्मान का अवसर है। यह हमसे अपेक्षा करता है कि हम हेनरी ड्यूनां के सपने को आगे बढ़ाते हुए समाज में मानवता, करुणा और सहयोग का वातावरण सशक्त बनाएं। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है और यही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति भी।