Friday, July 3, 2026
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सलेमपुर नगर में जाम की समस्या: आम जनता के लिए बन चुका अभिशाप

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद का सलेमपुर नगर इन दिनों जाम की समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है। नगर में प्रवेश करते ही घंटों तक चलने वाला जाम अब लोगों के लिए एक असहनीय समस्या बन गया है। चाहे कोई कार्यालय, तहसील, रेलवे स्टेशन या अस्पताल जाना हो — हर दिशा में जाम की वजह से लोगों को समय से पहले घर से निकलना पड़ता है, फिर भी गंतव्य तक समय से पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं।

देवरिया की तरफ से आने वाले वाहन चालकों को सलेमपुर कोतवाली से आगे बढ़ते ही जाम का सामना करना पड़ता है। स्टेट बैंक से लेकर सोहनाग मोड़, ब्रिज पार कर हरैया से मझौली मोड़ तक पहुंचने में अक्सर घंटे लग जाते हैं। इस मार्ग पर सुबह से लेकर देर शाम तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। छोटे वाहन, बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग किसी तरह रास्ता निकालने की कोशिश करते हैं, जबकि भारी वाहनों के बीच निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

गंभीर स्थिति तब और बन जाती है जब किसी आपातकालीन सेवा का वाहन, जैसे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड, इस जाम में फंस जाता है। कुछ दिन पहले ऐसी ही एक दर्दनाक घटना हुई थी जब सलेमपुर गांधी चौक के पास एक एम्बुलेंस जाम में फंस गई। एम्बुलेंस में सवार एक गंभीर रूप से बीमार युवती को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। परिजनों ने विवश होकर युवती को एम्बुलेंस से उतारा और हाथों में उठाकर सलेमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया। यह दृश्य नगरवासियों के लिए झकझोर देने वाला था।

सलेमपुर नगर की यह स्थिति उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के बिल्कुल विपरीत है, जहां सुचारू यातायात और आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। बावजूद इसके, नगर प्रशासन और स्थानीय निकाय जाम की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। नगर में ट्रैफिक व्यवस्था के लिए न तो पर्याप्त पुलिसकर्मी तैनात हैं और न ही किसी वैकल्पिक मार्ग का निर्माण हुआ है।

नगर के व्यापारी, छात्र और आम नागरिक रोजाना इस समस्या से त्रस्त हैं। तहसील जाने वाले लोगों को अपने मुकदमों की सुनवाई के लिए समय से पहले निकलना पड़ता है, फिर भी जाम के कारण अक्सर देर हो जाती है। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भी अपनी ट्रेन छूटने का डर सताता रहता है।

सलेमपुर नगर की गलियां और मुख्य मार्ग अब इतने संकरे हो चुके हैं कि फुटकर दुकानें, ठेले और अतिक्रमण के कारण वाहनों के लिए जगह ही नहीं बचती। गांधी चौक से लेकर स्टेशन रोड तक हर रोज जाम का वही दृश्य देखने को मिलता है।

नगरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है।

फिलहाल सलेमपुर की जनता “जाम” नामक इस स्थायी अभिशाप से मुक्ति की प्रतीक्षा में है। जब तक नगर प्रशासन सक्रिय कदम नहीं उठाएगा, तब तक सलेमपुर का यातायात संकट यूं ही आम जनता की परेशानियों को बढ़ाता रहेगा।

राजकीय बीज भंडार मिठौरा में मनमानी का खेल

इंचार्ज ने खुद माना, किसानों से वसूले अधिक पैसे

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मिठौरा ब्लॉक मुख्यालय स्थित राजकीय बीज भंडार में किसानों से सरकारी दर से अधिक राशि वसूले जाने का मामला सामने आया है। इंचार्ज विवेक कुमार शर्मा पर गंभीर आरोप लगा है कि उन्होंने गेहूं बीज और डाइकोडर्मा पैकेट पर निर्धारित दर से अधिक पैसे लेकर गरीब किसानों की जेब पर डाका डाला।
प्राप्त समाचार के अनुसार,सरकारी दर पर 40 किलो गेहूं बीज की एक बोरी 940/- रुपये लगभग और डाईको डर्मा की कीमत 100 रुपये लगभग तय है,यानी कुल 1040/- रुपये प्रति किसान। लेकिन किसानों से 1100 रुपये वसूले गए।


किसानों के अनुसार, बीज भंडार से अब तक करीब 1500 बोरी गेहूं बीज वितरित किया जा चुका है, जिससे लगभग 90,000 रुपये लगभग की अतिरिक्त कमाई का अंदेशा जताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बीज वितरण के दौरान फिंगर लगवाने के बाद प्रिंट बिल नहीं दिया गया, ताकि सरकारी दर का खुलासा न हो सके और वसूली की अनियमितता छिपी रहे।


इस संबंध में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब इंचार्ज विवेक कुमार शर्मा से बात की गई तो उन्होंने खुद स्वीकार किया कि हां, वसूली ज्यादा की गई है। उनकी यह बात ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में अब किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जब इस पूरे मामले में उप कृषि निदेशक संजीव कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा, जिसके पास प्रमाण है वह मेरे पास आए, जांच कराई जाएगी। लेकिन जब पत्रकार ने बताया कि इंचार्ज ने खुद स्वीकार किया है, तो अधिकारी भड़क उठे और बात बीच में ही समाप्त कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि मिठौरा ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य ब्लॉकों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। किसानों का आरोप है कि यह पूरा खेल अधिकारियों की मिली-भगत से चल रहा है।
किसानों ने शासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो। किसानों ने कहा कि यह हमारी मेहनत की कमाई पर डाका है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विद्युत विभाग की लापरवाही से हो सकता है बड़ा हादसा

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं को निर्बाध और सुरक्षित बिजली आपूर्ति देने के लिए लगातार प्रयासरत है। जर्जर तारों को बदलकर नई केबल लाइनें बिछाई जा रही हैं, लेकिन सिकंदरपुर क्षेत्र में विद्युत विभाग की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। क्षेत्र के कई इलाकों में ट्रांसफार्मर जमीन पर बिना बैरिकेडिंग के रखे गए हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पिछले माह मोहल्ला मिल्की में जमीन पर रखे ट्रांसफार्मर से करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। वहीं समाजवादी पार्टी के कैंप कार्यालय के सामने रखे ट्रांसफार्मर से दो बंदर झुलस गए थे। इसके बावजूद विभाग ने अब तक सुरक्षा व्यवस्था नहीं की है। चेतन किशोर क्षेत्र में पोखरी किनारे 100 केवीए का ट्रांसफार्मर बिना सुरक्षा के जमीन पर रखा गया है। वहीं सिकंदरपुर चौराहे पर भी, जो भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है, ट्रांसफार्मर खुले में पड़ा है। स्थानीय लोगों ने बार-बार विभाग को आगाह किया है कि अगर शीघ्र बैरिकेडिंग नहीं की गई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
इस संबंध में विद्युत उपकेंद्र सिकंदरपुर के एसडीओ अजय कुमार सरोज ने बताया कि जल्द ही सभी ट्रांसफार्मरों की बैरिकेडिंग कराई जाएगी। स्थानीय दुकानदार मुन्ना यादव ने कहा कि “अगर ट्रांसफार्मरों के चारों ओर सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ट्रांसफार्मर के चारों तरफ बैरिकेडिंग आवश्यक है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”
स्थानीय जनता ने विद्युत विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके।

सूर्यकुमार यादव भड़के मैदान पर! चौथे टी20 में शिवम दुबे पर फूटा गुस्सा, जानें पूरा मामला

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कैरारा ओवल/ऑस्ट्रेलिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) का अलग ही रूप देखने को मिला। शांत स्वभाव और संयमित खेल के लिए पहचाने जाने वाले ‘सूर्या’ इस बार मैदान पर गुस्से में नजर आए। टीम इंडिया ने यह मैच 48 रनों से शानदार जीत दर्ज की, लेकिन मुकाबले के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब कप्तान ने साथी खिलाड़ी शिवम दुबे (Shivam Dube) को कड़ी फटकार लगा दी।

आखिर क्यों भड़के सूर्यकुमार यादव?

दरअसल, मैच के 12वें ओवर में शिवम दुबे गेंदबाजी कर रहे थे। उन्होंने इस ओवर में पहले तो टिम डेविड का विकेट झटका और फिर नई क्रीज पर आए मार्कस स्टोइनिस को दो डॉट गेंदें फेंकी। लेकिन ओवर की आखिरी गेंद पर दुबे ने ऑफ स्टंप के बाहर एक शॉर्ट बॉल फेंकी, जिसे स्टोइनिस ने बैकवर्ड पॉइंट की दिशा में चौके में बदल दिया।
इस गेंद के बाद सूर्यकुमार यादव बेहद नाराज दिखे और मैदान पर ही दुबे को इशारों में समझाते नजर आए। कैमरे में उनकी तीखी प्रतिक्रिया साफ दिखाई दी।

मैच का हाल

भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 167 रन बनाए। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 119 रन पर ढेर हो गई।
भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया — वॉशिंगटन सुंदर ने मात्र 5 गेंदों में 3 विकेट झटके। वहीं स्पिनरों ने मिलकर 6 विकेट चटकाए।
भारत ने यह मैच 48 रनों से जीतकर 5 मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है। एक मैच बारिश के कारण रद्द हुआ था।

मैच के बाद शिवम दुबे का बयान

शिवम दुबे ने मैच के बाद कहा —

“यह मैदान बड़ा था, इसलिए 167 का स्कोर हमारे लिए पर्याप्त था। हमें अपनी गेंदबाजी पर भरोसा था और हमने उसी के अनुसार रणनीति बनाई। हमारे पास बेहतरीन गेंदबाज हैं, जो दबाव की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि टीम का फोकस केवल रणनीति पर अमल करने और हर ओवर को प्लान के मुताबिक डालने पर था।

विश्लेषण

सूर्यकुमार यादव का गुस्सा दिखाता है कि कप्तान अपने खिलाड़ियों से कितनी सटीकता और अनुशासन की उम्मीद रखते हैं। भले ही वह संयमित खिलाड़ी हों, लेकिन जब बात रणनीति और टीम के प्रदर्शन की आती है, तो वह किसी भी गलती को नज़रअंदाज़ नहीं करते।

बिहार चुनाव 2025: पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग, ‘सुशासन बनाम रोजगार’ की जंग हुई तेज — जानें 10 बड़ी अपडेट्स

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान गुरुवार (6 नवंबर) को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर करीब 64.66% वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले चुनावों के मुकाबले ज्यादा है। जनता के उत्साह ने बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान के दौरान कुछ जगहों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कतें आईं, जिन्हें तुरंत ठीक कर दिया गया।

पहले चरण में महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव, वहीं एनडीए की तरफ से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे बड़े चेहरे मैदान में थे। इसके अलावा जेडीयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और आरजेडी नेता भोला यादव भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

बिहार चुनाव 2025 की 10 बड़ी बातें

1️⃣ तकनीकी दिक्कतों में कमी: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद कुमार गुंजियाल ने बताया कि 2020 की तुलना में इस बार कम ईवीएम बदली गईं। केवल 1.21% बैलेट यूनिट्स और 1.34% कंट्रोल यूनिट्स बदली गईं, जबकि 2020 में यह संख्या क्रमशः 1.87% और 1.77% थी।

2️⃣ वीवीपैट में भी सुधार: इस बार सिर्फ 2.92% वीवीपैट मशीनें बदली गईं। पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 4.9% था। करीब 3 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 45,000 से ज्यादा बूथों पर मतदान किया।

3️⃣ महिलाओं की बढ़ी भागीदारी: चुनाव आयोग के अनुसार इस बार मतदान में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कुल 926 मतदान केंद्र पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित थे, जबकि 107 केंद्र दिव्यांग कर्मियों ने संभाले।

4️⃣ कुल उम्मीदवार: पहले चरण में 1,314 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें 1,192 पुरुष और 122 महिलाएं शामिल हैं।

5️⃣ मतदान केंद्रों की संख्या: ग्रामीण इलाकों में 36,733 और शहरी क्षेत्रों में 8,609 मतदान केंद्र बनाए गए थे।

6️⃣ कुछ जगहों पर विरोध: बक्सर, फतुहा और सूर्यगढ़ा में मतदान बहिष्कार की खबरें आईं। कुल 143 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका समाधान मौके पर किया गया।

7️⃣ हल्की झड़पें: लखीसराय में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के विरोध की खबर आई। वहीं सारण में विधायक सत्येंद्र यादव की गाड़ी पर हमला हुआ, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

8️⃣ पीएम मोदी का बयान: प्रधानमंत्री ने पहले चरण की वोटिंग के बाद कहा कि “बिहार में एनडीए को जनता का अपार समर्थन मिल रहा है और जीत तय है।”

9️⃣ अंतरराष्ट्रीय नजर: दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम, फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया और कोलंबिया से आए 16 प्रतिनिधियों ने बिहार की चुनाव प्रक्रिया का निरीक्षण किया — यह पहली बार हुआ है।

🔟 विशेष व्यवस्थाएं: दिव्यांग मतदाताओं के लिए ई-रिक्शा की सुविधा दी गई और 90 हजार से अधिक जीविका दीदियों को सुरक्षा बलों के साथ तैनात किया गया।

नतीजा क्या बताता है?

पहले चरण की वोटिंग ने साफ कर दिया है कि बिहार की जनता इस बार बदलाव और स्थिरता दोनों चाहती है। एक ओर महागठबंधन “सबको नौकरी” के वादे पर चुनाव लड़ रहा है, वहीं एनडीए “सुशासन और विकास” की नींव पर भरोसा जता रहा है।

इतिहास के आईने में 7 नवंबर – बदलाव, बलिदान और बौद्धिकता का प्रतीक दिवस

महत्वपूर्ण कार्य,जन्म से निधन तक

7 नवंबर का दिन मानव सभ्यता के इतिहास में अनेक ऐतिहासिक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म तथा प्रेरक जीवन यात्राओं से भरा हुआ है। यह तिथि विश्व और भारत दोनों के लिए परिवर्तन, संघर्ष और सृजन का प्रतीक मानी जाती है। आइए जानते हैं इस दिन घटी उन महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्मे महानो और विदा हुए प्रेरणास्रोतों के बारे में, जिन्होंने अपने कर्म से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
🌏 7 नवंबर की ऐतिहासिक घटनाएँ
1862 – मुग़ल सल्तनत का अंत:
भारत के अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र की रंगून (अब यांगून) में मृत्यु हुई। उनके निधन के साथ भारत की शाही विरासत और दिल्ली की गद्दी का इतिहास समाप्त हो गया। वह न केवल एक शासक थे बल्कि एक संवेदनशील शायर भी थे, जिन्होंने अपमान और निर्वासन में भी अपनी कलम से इंकलाब की आग जलाई।
1876 – वंदे मातरम् का जन्म:
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने बंगाल के कांतल पाड़ा गांव में वह गीत लिखा जिसने पूरे भारत को आज़ादी की प्रेरणा दी — “वंदे मातरम्”। यह केवल गीत नहीं, एक राष्ट्रीय भावना है जिसने लाखों देशवासियों में स्वाभिमान का संचार किया।
1917 – रूस में बोल्शेविक क्रांति:
लेनिन के नेतृत्व में रूस में हुई इस क्रांति ने साम्राज्यवाद के विरुद्ध जनता की ताकत को स्थापित किया। यह घटना आधुनिक विश्व राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ थी, जिसने पूरे विश्व में समाजवाद के बीज बोए।
1951 – जॉर्डन में संविधान पारित:
जॉर्डन ने आधुनिक शासन व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपना संविधान लागू किया, जिसने वहां लोकतंत्र की नींव रखी।
1968 – सोवियत संघ का परमाणु परीक्षण:
शीत युद्ध के दौर में यह परीक्षण सोवियत शक्ति का प्रतीक बना और विश्व की सामरिक राजनीति को नई दिशा दी।

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1996 – नासा का मार्स ग्लोबल सर्वेयर प्रक्षेपण:
अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में यह दिन ऐतिहासिक रहा। नासा ने मंगल ग्रह की कक्षा में “Mars Global Surveyor” भेजा, जिसने भविष्य के मंगल अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया।
1998 – भारत-पाक पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील:
अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दक्षिण एशिया में परमाणु परीक्षणों के बाद लगे प्रतिबंधों को आंशिक रूप से हटाने की घोषणा की। उसी दिन अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन, जो सबसे बुजुर्ग अंतरिक्ष यात्री बने, धरती पर सुरक्षित लौटे।
2002 – अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत:
इस दिन अमेरिका की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया, वहीं ईरान ने अमेरिकी उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाकर अपने सांस्कृतिक विरोध को प्रदर्शित किया।
2003 – जॉर्ज बुश द्वारा गर्भपात विरोधी विधेयक पर हस्ताक्षर:
यह कानून अमेरिका में सामाजिक बहस का केंद्र बना, जिसने नैतिकता और अधिकारों पर गहन विमर्श को जन्म दिया।
2006 – भारत-आसियान विज्ञान सहयोग:
भारत और आसियान देशों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को साझा रूप से विकसित करने के लिए संयुक्त फंड बनाने पर सहमति दी। यह भारत की वैज्ञानिक कूटनीति का मील का पत्थर था।
2008 – बिहार में जद (यू) सांसदों का इस्तीफा:
राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में यह घटना बिहार की राजनीति के लिए अहम रही। इसी वर्ष कश्मीर के कवि रहमान राही को साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
2012 – ग्वाटेमाला में भूकंप:
एक विनाशकारी भूकंप ने ग्वाटेमाला को झकझोर दिया, जिसमें 52 लोगों की मौत हुई। यह दिन मानवीय त्रासदी और संवेदना की याद दिलाता है।

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🌟 7 नवंबर को जन्मे प्रेरक व्यक्तित्व
1832 – पंडित विश्वंभर नाथ:
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस कर्मठ नेता ने समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
1858 – बिपिन चंद्र पाल:
“लाल-बाल-पाल” त्रयी के सदस्य बिपिन चंद्र पाल भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रखर वक्ता, लेखक और पत्रकार थे। उन्होंने राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ी और युवाओं को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
1888 – चंद्रशेखर वेंकट रामन:
भारत के महान वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रामन का जन्म इसी दिन हुआ। उनके “रामन प्रभाव” ने भौतिक विज्ञान में भारत का नाम विश्व पटल पर अंकित किया।
1900 – एन.जी. रंगा:
किसानों के अधिकारों के लिए संघर्षरत इस नेता ने ग्रामीण भारत की आवाज़ को संसद तक पहुंचाया। वे भारतीय लोकतंत्र में कृषक चेतना के प्रतीक बने।
1936 – चंद्रकांत देवताले:
समकालीन हिंदी कविता के संवेदनशील कवि, जिन्होंने सामाजिक विषमता, प्रेम और मानवीयता के स्वर को अपनी रचनाओं में अमर किया।
1954 – कमल हासन:
भारतीय सिनेमा के बहुमुखी अभिनेता, निर्देशक और समाजसेवी, जिनका अभिनय और कला के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय फिल्म इतिहास का “जीवित संस्थान” बनाता है।
1996 – एल्डहॉस पॉल:
भारत के युवा लंबी कूद खिलाड़ी, जिन्होंने अपने खेल प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरणा दी।
🕯️ 7 नवंबर को हुए निधन
1862 – बहादुर शाह ज़फ़र:
भारत के अंतिम बादशाह, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध 1857 के विद्रोह में नेतृत्व किया। उनका जीवन देश की आज़ादी के लिए अमर बलिदान की गाथा है।
1923 – अश्विनी कुमार दत्त:
स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षक जिन्होंने बंगाल में स्वदेशी आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया।
1972 – आर. शंकर:
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता, जिन्होंने राज्य के सामाजिक-राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1978 – जीवराज मेहता:
भारत के पहले चिकित्सक-राजनेताओं में से एक, जिन्होंने चिकित्सा और प्रशासनिक सेवा दोनों में असाधारण योगदान दिया।
1998 – जीतेंद्र अभिषेकी:
भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्वान, जिन्होंने संगीत नाट्य और गायकी दोनों में उत्कृष्टता का परिचय दिया।
1998 – जीवन सिंह उमरानंगल:
अकाली दल के वरिष्ठ नेता, जिन्होंने पंजाब की राजनीति और समाजसेवा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
2000 – सी. सुब्रह्मण्यम:
भारत में हरित क्रांति के जनक, जिनके प्रयासों से देश खाद्यान्न आत्मनिर्भर बना।
2000 – तारा चेरियन:
पद्म भूषण से सम्मानित समाजसेविका, जिन्होंने महिलाओं और गरीबों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
2015 – बप्पादित्य बंदोपाध्याय:
प्रख्यात निर्देशक और कवि, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को वैचारिक गहराई और कलात्मक ऊँचाई दी।
7 नवंबर केवल एक तारीख नहीं, यह मानव संघर्ष, सृजन और आत्मबल का प्रतीक है। इस दिन जन्मे, कार्यरत या विदा हुए सभी व्यक्तित्व हमें यह सिखाते हैं कि समय बदलता है, पर कर्म और विचार अमर रहते हैं।

मौसम अपडेट: सुबह हल्की ठंड और धुंध, दोपहर में निकलेगी चटख धूप

लखनऊ/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में मौसम के मिजाज में हल्का बदलाव देखने को मिल रहा है। सुबह के समय राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की ठंड और धुंध छाई रही, वहीं दोपहर तक मौसम साफ होने और धूप निकलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार आज अधिकतम तापमान 27°C और न्यूनतम तापमान 14°C के आसपास रह सकता है।

सुबह 7 बजे तक हल्की रहस्यमयी धुंध और ठंडी हवाएं चलेंगी, जबकि 10 बजे के बाद सूरज की रोशनी से मौसम खुशनुमा हो जाएगा। दोपहर के समय धूप तेज रहेगी और शाम होते-होते तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। रात के समय हल्की ठंड का अहसास फिर लौट आएगा।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, सुबह और देर रात धुंध बनी रह सकती है।

मौसम विभाग की सलाह:

सुबह-सुबह बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें।

दोपहर में धूप से बचने के लिए हल्के सूती कपड़ों का इस्तेमाल करें।

बुजुर्गों और बच्चों को ठंडी हवा से बचाव के उपाय करने चाहिए।

एक अद्भुत रहस्य जो सृष्टि की शुरुआत से जुड़ा है

सनातन संस्कृति में भगवान शिव केवल देव नहीं, बल्कि सृष्टि, स्थिति और संहार के मूल तत्त्व हैं। वे कालातीत, अनादि और अनंत हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की उत्पत्ति का रहस्य उतना ही गूढ़ है जितनी यह सृष्टि स्वयं। “शिव” शब्द का अर्थ ही है — कल्याणकारी, शुभ और परम चेतना। उनके अस्तित्व की शुरुआत किसी एक क्षण या घटना से नहीं हुई, बल्कि वे स्वयं ब्रह्म का अंश हैं — जो न उत्पन्न हुए, न नष्ट होंगे।

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🌺 सृष्टि की आरंभिक स्थिति
शिव पुराण के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था — न दिन था, न रात, न जल, न आकाश, केवल एक असीम, अंधकारमय ऊर्जा थी — तब उसी अदृश्य ऊर्जा से परम तत्त्व शिव प्रकट हुए। उन्हें “सदाशिव” कहा गया।
सदाशिव ने अपने स्वरूप से शक्ति (माता पार्वती का आदि रूप) को उत्पन्न किया। यही शक्ति और शिव मिलकर सृष्टि की नींव बने। इस युगल ऊर्जा से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) की अवधारणा जन्मी।
🔱 शिव का अनादि रूप : लिंग स्वरूप का रहस्य
शिव पुराण में वर्णित है कि जब ब्रह्मा और विष्णु ने अपने-अपने अस्तित्व को श्रेष्ठ बताने की होड़ मचाई, तब आकाश से एक अनंत ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ। वह न आरंभ में पाया जा सका, न अंत में — वह था शिवलिंग।
यह वही दिव्य प्रतीक है जो दर्शाता है कि शिव न तो आरंभ हैं न अंत — वे केवल अस्तित्व हैं। ब्रह्मा और विष्णु ने उस ज्योति में अपना सिर झुकाया और समझ लिया कि यह परम तत्त्व ही सृष्टि का कारण है। तभी से शिवलिंग पूजन की परंपरा आरंभ हुई।

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🌌 शिव : ब्रह्मांड के चिर संतुलनकर्ता
शिव पुराण यह भी कहता है कि जब सृष्टि असंतुलन की ओर बढ़ती है, जब अधर्म बढ़ता है और सत्य क्षीण होता है, तब भगवान शिव रुद्र रूप में प्रकट होकर संहार करते हैं। लेकिन उनका संहार भी सृजन की प्रक्रिया है — विनाश के बाद पुनः सृजन की शुरुआत होती है। यही कारण है कि शिव को संहारकर्ता नहीं, पुनर्जन्मदाता कहा गया है।
🕉️ शिव का दार्शनिक अर्थ
शिव का अस्तित्व केवल एक देवता का नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का है। वे ध्यान, मौन और संयम के प्रतीक हैं। उनका नीला कंठ विष का प्रतीक है, जो यह सिखाता है कि जीवन के विष को धैर्य और करुणा से धारण करना ही सच्चा “शिवत्व” है।
🌺शिव ही अनंत हैं
शिव पुराण के इस प्रथम अध्याय में यह स्पष्ट होता है कि भगवान शिव न केवल ब्रह्मांड के मूल स्रोत हैं, बल्कि प्रत्येक जीव के भीतर स्थित चेतना हैं। जो व्यक्ति अपने भीतर के शिव को पहचान लेता है, वही मुक्ति का अधिकारी बनता है।
इस प्रकार, शिव की उत्पत्ति सृष्टि की उत्पत्ति है, और जब तक यह सृष्टि रहेगी, शिव का अस्तित्व अमर रहेगा।

🔱 “आज का शुभ दिन: यात्रा, दान और आराधना से कैसे बनेंगे बिगड़े काम”

🌞07 नवम्बर 2025: सुख, सिद्धि और सौभाग्य का अद्भुत संगम — आज का शुभ पंचांग व जीवन मार्गदर्शक 🌙

🗓 दिन: शुक्रवार
तिथि: मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वितीया (02:31 PM तक) उपरांत तृतीया
📍 संवत्सर: विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
🌤 अयन: दक्षिणायन | ऋतु: हेमंत
🌅 सूर्योदय: 6:39 AM
🌇 सूर्यास्त: 5:41 PM
🌕 चन्द्रोदय: 7:16 PM
🌘 चन्द्रास्त: 9:38 AM
🌙 चंद्र राशि: वृषभ
☀ सूर्य राशि: तुला
🔯 तिथि, नक्षत्र और योग
तिथि: द्वितीया 02:31 PM तक, उपरांत तृतीया
नक्षत्र: कृतिका नक्षत्र सुबह 6.57 तक, उपरांत मृगशीर्षा नक्षत्र
योग: परिघ 10:27 PM तक, उसके बाद शिव योग
करण: गर 11:05 AM तक, वणिज 09:16 PM तक, फिर विष्टि
💫 आज के विशेष व्रत एवं पर्व
🌸 रोहिणी व्रत – सौभाग्य और समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ।
आज शिव योग की रात्रि में भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी होगी।
माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना से आर्थिक समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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🕉 शुभ और अशुभ समय
🔆 अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:32 PM (कार्यारंभ हेतु अत्यंत शुभ)
🌼 ब्रह्म मुहूर्त: 05:04 AM – 05:52 AM (साधना व मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ समय)
🌙 अमृत काल: 10:20 PM – 11:45 PM
🚫 राहुकाल: 10:47 AM – 12:10 PM
⚠ यमगंड: 2:55 PM – 4:18 PM
🌀 कुलिक काल: 8:02 AM – 9:25 AM
दुर्मुहूर्त: 08:52 AM – 09:36 AM, 12:32 PM – 01:16 PM

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🧭 आज की यात्रा दिशा व शुभ संकेत
🚩शुभ यात्रा दिशा: पश्चिम व उत्तर दिशा की यात्रा शुभ रहेगी।
❌अशुभ दिशा: दक्षिण दिशा की यात्रा से यथासंभव परहेज करें।
🍯 यात्रा से पूर्व क्या खाएं:
घी और मिश्री, अथवा दही-शक्कर का सेवन कर घर से निकलें — कार्य सिद्धि के योग बनेंगे।
घर से निकलते समय शुभ दिशा में तीन कदम बढ़कर “ॐ गणपतये नमः” का उच्चारण करें, विघ्न दूर होंगे।

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🪔 क्या करने से बने बिगड़े काम बनेंगे

सुबह शिवलिंग पर जल अर्पण करें — मानसिक शांति व सफलता का वरदान मिलेगा।

  1. माता लक्ष्मी को कमल पुष्प अर्पित करें — आर्थिक लाभ के योग बनेंगे।
  2. गाय को गुड़ व रोटी खिलाएं — कार्य में आ रही रुकावटें दूर होंगी।
  3. संध्या के समय दीपदान करें — घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ेगा।
  4. मंत्र जाप: “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः” — सौभाग्य वृद्धि हेतु विशेष फलदायी।
    🌟 चंद्र बल व तारा बल
    चंद्र बल प्राप्त राशियाँ: वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन।
    तारा बल लाभकारी नक्षत्र: अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुष्य, मघा, स्वाति, अनुराधा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा।
    🌄 चौघड़िया (दिन)
    समय चौघड़िया फल
    06:39–08:02 चर कार्य आरंभ हेतु शुभ
    08:02–09:25 लाभ व्यापार में सफलता
    09:25–10:47 अमृत अत्यंत मंगलकारी
    10:47–12:10 काल अशुभ समय
    12:10–13:33 शुभ नया कार्य प्रारंभ करें
    13:33–14:55 रोग वाद-विवाद से बचें
    14:55–16:18 उद्वेग यात्राओं से परहेज
    16:18–17:41 चर परिवर्तन या सौदा हेतु शुभ
    🌙 रात्रि चौघड़िया
    समय चौघड़िया फल
    17:41–19:18 रोग सावधानी आवश्यक
    19:18–20:56 काल निर्णय स्थगित करें
    20:56–22:33 लाभ धन प्राप्ति योग
    22:33–00:10 उद्वेग विवाद से बचें
    00:10–01:48 शुभ कार्य सिद्धि योग
    01:48–03:25 अमृत तीव्र सफलता
    03:25–05:02 चर यात्रा हेतु शुभ
    05:02–06:40 रोग संयम आवश्यक
    🪶7 नवम्बर 2025 का दिन शिव योग और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से सिद्धि और सौभाग्य का दिन है। आज का शुक्रवार प्रेम, कला और समृद्धि का प्रतीक है। ईश्वर का ध्यान, माता लक्ष्मी की आराधना और दान से दिन मंगलमय बनेगा। जो आज के दिन शुभ मुहूर्त में आरंभ करेंगे, वह दीर्घकालीन सफलता का कारण बनेगा।

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ताजनगरी में चमकेगा फुटवियर उद्योग का भविष्य: ‘17वां मीट एट आगरा’ कल से आगरा ट्रेड सेंटर में होगा आग़ाज़

आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। ताज की नगरी एक बार फिर चमड़े और जूतों की खुशबू से महकने को तैयार है। 7 से 9 नवंबर तक आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (AFMEC) द्वारा आयोजित होने जा रहा 17वां इंटरनेशनल फुटवियर इंडस्ट्री ट्रेड फेयर — “मीट एट आगरा 2025” उद्योग जगत में नई ऊर्जा का संचार करने जा रहा है।
तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन का शुभारंभ 7 नवंबर (शुक्रवार) को प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी करेंगे। इस दौरान देश-दुनिया की फुटवियर इंडस्ट्री के अग्रणी ब्रांड्स और निर्माता एक ही छत के नीचे नजर आएंगे।

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🎯 भविष्य की दिशा तय करेगा यह फेयर
आगरा ट्रेड सेंटर के 7,200 वर्ग मीटर के विशाल परिसर में लगने वाले इस फेयर में 250 से अधिक प्रदर्शक, 8,000 ट्रेड विजिटर्स और 25,000 से अधिक कुल विजिटर्स के आने की संभावना है।
यह आयोजन न केवल मेक इन इंडिया अभियान को नई गति देगा, बल्कि भारत की फुटवियर इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी दिलाएगा।

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एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि इस मेले में जूता निर्माण की नवीनतम मशीनरी, कंपोनेंट्स और अत्याधुनिक तकनीकें प्रदर्शित होंगी, जो उद्योग को नई दिशा देंगी।
💡 भारत की फुटवियर इंडस्ट्री का बढ़ता कदम
भारत का फुटवियर सेक्टर आज 95,000 करोड़ रुपये के घरेलू बाजार तक पहुँच चुका है और FY 2024-25 में 5.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ 25% की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह क्षेत्र आज 1.5 मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है — और “मीट एट आगरा” जैसे आयोजन इस विकास यात्रा में नई रफ़्तार जोड़ रहे हैं।

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🧩 फेयर की विशेष झलकियाँ,स्थान: आगरा ट्रेड सेंटर, सींगना,तारीख: 7, 8 और 9 नवंबर 2025,समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक ,फुटफॉल: 25,000+ विजिटर्स प्रदर्शक: 250+ ट्रेड विजिटर्स: 8,000+ एक्सीलेंस अवार्ड्स: 5 श्रेष्ठ समूहों को सम्मानित किया जाएगा।

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🔥 हर दिन होगा विशेष आकर्षण
फेयर के पहले दिन उद्घाटन समारोह के बाद तीनों दिनों में सेमिनार, तकनीकी सत्र और पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी।
9 नवंबर को “जूता इंडस्ट्री के वर्तमान परिदृश्य” पर विशेष पैनल डिस्कशन होगा, जिसका संचालन ज़ी बिज़नेस के वरिष्ठ टीवी एंकर सौरभ मनचंदा करेंगे।अंतिम दिन मीडिया ब्रीफिंग के साथ बेस्ट एग्जीबिटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

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🧠 ज्ञान और व्यापार का संगम
फेयर में मशीनरी, सोल, एडहेसिव, लेदर कंपोनेंट्स और अत्याधुनिक उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
साथ ही, फायर फाइटिंग सिस्टम, सोलर एनर्जी सॉल्यूशंस और फाइनेंस व एचआर पर उपयोगी सेमिनार आयोजित होंगे।
पूर्व अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा, “यह आयोजन व्यापारिक अवसरों के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए भी सीखने का मंच है।”
संस्थापक अध्यक्ष दलजीत सिंह ने जोड़ा, “यह फेयर केवल एक ट्रेड शो नहीं, बल्कि उद्योग के सभी हिस्सों को जोड़ने वाला प्रेरक प्लेटफॉर्म है।”

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🌍 वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता आगरा
एफमेक महासचिव प्रदीप वासन और उपाध्यक्ष राजेश सहगल ने कहा कि “मीट एट आगरा” अब विश्व फुटवियर उद्योग का बहुप्रतीक्षित इवेंट बन चुका है।
हर साल बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन स्थानीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नई दिशा दे रहा है।

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💬 उद्योग से संदेश
“हमारा उद्देश्य है — भारतीय फुटवियर उद्योग को नई तकनीक, प्रशिक्षण और साझेदारी के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की दिशा में ले जाना।”
— गोपाल गुप्ता, अध्यक्ष, AFMEC

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🏆 “मीट एट आगरा 2025” – नवाचार, नेटवर्किंग और अवसरों का महाकुंभ
यह आयोजन न केवल व्यापारिक मंच है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, आत्मनिर्भरता और निर्यात वृद्धि का प्रतीक भी है।
फुटवियर इंडस्ट्री से जुड़े सभी निर्माता, व्यापारी और विद्यार्थी इस आयोजन में शामिल होकर अपनी क्षमताओं को नए आयाम दे सकते हैं।

बिहार चुनाव 2025: पहले चरण की ऐतिहासिक वोटिंग, जनता बोली—”इस बार बदलाव जरूरी है”

🗳️ बिहार में लोकतंत्र का उत्सव: पहले चरण की वोटिंग ने तोड़े 25 साल के रिकॉर्ड, 60% से अधिक मतदान दर्ज

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग ने इस बार लोकतंत्र के उत्सव को नई ऊंचाई दी है। राज्य के 18 जिलों की 121 सीटों पर शाम 5 बजे तक 60.13% मतदान दर्ज किया गया — यह पिछले 25 वर्षों में पहली बार है जब वोटिंग प्रतिशत 60 के पार गया है। इससे पहले 1990, 1995 और 2000 के चुनाव में ही ऐसा आंकड़ा देखा गया था।

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पिछले विधानसभा चुनाव 2020 की तुलना में इस बार मतदान में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। उस समय 57.29% वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार शाम पांच बजे तक ही लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, बेगूसराय ने इस बार सबसे ज्यादा वोटिंग का रिकॉर्ड बनाया है — 67.32% मतदान, वहीं शेखपुरा में सबसे कम 52% वोटिंग हुई है।

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दोपहर 3 बजे तक ही 3.75 करोड़ मतदाताओं में से 53.8% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया था। यह ट्रेंड बताता है कि बिहार की जनता में लोकतंत्र के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता आई है।

राजधानी पटना में मतदान प्रतिशत 48.69% दर्ज किया गया, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह देखने को मिला। चुनाव आयोग के अनुसार, दोपहर एक बजे तक ही मतदान पिछले चुनाव की तुलना में 9.2% ज्यादा हो गया था, जो वोटरों के जोश का स्पष्ट संकेत है।

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राज्यभर में पीएम नरेंद्र मोदी, तेजस्वी यादव, और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं की वोटिंग अपील का असर भी देखने को मिला। भीषण ठंड और स्थानीय समस्याओं के बावजूद मतदाता घरों से निकलकर मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों में नजर आए।

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राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बढ़ी हुई वोटिंग इस बार मुकाबले को और रोमांचक बना सकती है। 2020 में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर के बाद नीतीश कुमार सरकार बनी थी, लेकिन इस बार ज्यादा मतदान का अर्थ है कि जनता परिवर्तन और विकास के नए संकेत दे रही है।

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📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान संपन्न 60.13% मतदान — 25 वर्षों में सबसे अधिक,बेगूसराय में सर्वाधिक 67.32%, शेखपुरा में न्यूनतम 52% वोटिंग 2020 के मुकाबले 3% अधिक मतदानदोपहर तक ही 9.2% बढ़त, लोगों में लोकतंत्र के प्रति उत्साह

जिलाधिकारी ने ददरी मेला का किया निरीक्षण, दिए साफ-सफाई और सुरक्षा के निर्देश

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी मंगल प्रसाद सिंह ने गुरुवार को ऐतिहासिक ददरी मेला स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मेले की तैयारियों का बारीकी से जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और व्यापारियों की सुविधा सर्वोपरि है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रमुख चौराहों और मार्गों पर हाई मास्ट लाइट लगाई जाए, ताकि रात्रि में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था बनी रहे। साथ ही उन्होंने शौचालयों की संख्या बढ़ाने और उनकी नियमित सफाई के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मी लगाने को कहा। उन्होंने मेले के मार्गों की समतलता सुनिश्चित करने तथा बिजली के खंभों के पास दुकानें न लगाने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी दुर्घटना या आगजनी की आशंका को टाला जा सके। जिलाधिकारी ने मेले में अग्निशमन दल की विशेष तैनाती करने और आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी त्रिभुवन, अधिशासी अधिकारी सुभाष कुमार सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

भारत में हॉकी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर सीनियर पुरुष-महिला हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन आज

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारत में हॉकी के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में खेल निदेशालय, उत्तर प्रदेश, खेल भवन लखनऊ के निर्देश पर जनपद देवरिया में सीनियर पुरुष एवं महिला वर्ग की हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 07 नवम्बर 2025, शुक्रवार को प्रातः 8:00 बजे से रविन्द्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम, देवरिया में प्रारंभ होगी।

यह आयोजन हॉकी संघ देवरिया एवं जिला खेल कार्यालय देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को अपने साथ आधार कार्ड की छायाप्रति लाना अनिवार्य किया गया है।

जिला खेल अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य हॉकी के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए नई पीढ़ी में खेल के प्रति उत्साह और प्रेरणा जगाना है। उन्होंने जनपद के समस्त विद्यालयों एवं कॉलेजों के प्रधानाचार्यों से अनुरोध किया है कि वे अपने संस्थान की टीम को निर्धारित समय पर स्टेडियम भेजकर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करें।

इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं संस्थानों को सूचित किया गया है, जिनमें जिलाधिकारी देवरिया, खेल निदेशक लखनऊ, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी गोरखपुर, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा जिला सूचना अधिकारी सहित सभी प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के संपादक शामिल हैं।

प्रतियोगिता की सफलता हेतु जिला हॉकी संघ के सचिव एवं मानदेय प्रशिक्षक शकील अहमद को भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया है।

सिंदूर का पौधा लगाकर कुलपति ने किया मियावाकी वन का शुभारंभ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने वन विभाग के सहयोग से दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति पर आधारित घने वन का विकास किया है। इस “मियावाकी वन” का उद्घाटन कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सिंदूर का पौधा लगाकर किया।
यह वन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, राज्यपाल की प्रेरणा से विकसित किया गया है। मियावाकी तकनीक जापानी वन वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है, जिसमें सीमित स्थान पर देशी प्रजातियों के पौधों का सघन रोपण किया जाता है। इस पद्धति में पौधे तेजी से विकसित होते हैं और कुछ ही वर्षों में प्राकृतिक जंगल जैसा स्वरूप ले लेते हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में तैयार इस वन में 50 से अधिक स्थानीय प्रजातियों के लगभग 7000 पौधे लगाए गए हैं। इनमें बेल, सीताफल, कचनार, सिंदूर, पलाश, अमलतास, नीम, आम, जामुन, अर्जुन और इमली जैसे वृक्ष शामिल हैं। इसके साथ ही चमेली, कनेर, गुड़हल, मोगरा जैसे फूलदार पौधों तथा ब्राह्मी, तुलसी, शतावरी, मुलेठी और खस जैसे औषधीय पौधों का भी रोपण किया गया है।
उद्घाटन के अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है। यह मियावाकी वन न केवल परिसर की हरियाली बढ़ाएगा, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन और अनुसंधान की एक जीवंत प्रयोगशाला साबित होगा। साथ ही यह स्थानीय समुदाय को पर्यावरण संवर्द्धन की दिशा में प्रेरित भी करेगा। उन्होंने कहा कि यह वन आने वाली पीढ़ियों के लिए*हरित विरासत सिद्ध होगा और विश्वविद्यालय के सौंदर्य में भी वृद्धि करेगा।
कार्यक्रम में जिला वन अधिकारी विकास यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में विकसित यह परियोजना एक आदर्श उदाहरण है। निकट भविष्य में वन विभाग और विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से अन्य हरित परियोजनाओं को भी गति दी जाएगी, जिससे परिसर अधिक हरित और पर्यावरणीय रूप से समृद्ध होगा।
कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. अनुभूति दुबे एवं सह-समन्वयक डॉ. अमित उपाध्याय ने किया। अवसर पर प्रो. दिव्या रानी सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. टी. एन. मिश्रा, डॉ. ओमप्रकाश सिंह, डॉ. मनीष पाण्डेय, डॉ. आशीष शुक्ला, डॉ. हरिशचंद्र पाण्डेय, डॉ. वंदना सिंह सहित कई शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

विवाद का सबसे सरल समाधान है मध्यस्थता: अपर जिला जज

पक्षकारों के बीच सार्थक बातचीत करने के दिए निर्देश

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा के निर्देशन में अपर जनपद न्यायाधीश देवेन्द्र नाथ गोस्वामी द्वारा मध्यस्थता एवं सुलह समझौता केंद्र में कार्यरत एडवोकेट मीडिएटर्स के साथ संगोष्ठी आयोजित की गई।
अपर जिला जज देवेन्द्र नाथ गोस्वामी ने मध्यस्थता प्रक्रिया को विवाद समाधान का सबसे सरल, त्वरित और प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउन्स, वाणिज्यिक विवाद, सेवा विवाद, शमनीय आपराधिक मामले, ऋण वसूली, उपभोक्ता विवाद, संपत्ति बंटवारा, बेदखली तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को प्राथमिकता के साथ मध्यस्थता के माध्यम से निपटाया जाए।
अपर जिला जज ने सभी मध्यस्थगण को निर्देशित किया कि केंद्र में आने वाले प्रत्येक मामले में पक्षकारों को समय पर सूचित किया जाए तथा नोटिस, फोन कॉल या अन्य माध्यमों से उन्हें उपस्थित होने हेतु प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि पक्षकारों के बीच सार्थक बातचीत कराना ही मध्यस्थता का मुख्य उद्देश्य है, जिससे विवाद सौहार्दपूर्वक समाप्त हो सके।
संगोष्ठी में एडवोकेट मीडिएटर सरोज बाला पांडेय, राम अनुज राय, अरुण कुमार श्रीवास्तव, संजीव कुमार, मुनीर अहमद, अनिल कुमार दुबे, परसुराम यादव, सरफ़राज़ नवाज़ आलम, अभय कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य मध्यस्थ उपस्थित रहे।