Wednesday, July 1, 2026
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अवैध ट्रक संचालन पर जिला प्रशासन सख्त

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) भरौली पुल से ट्रकों के अवैध परिवहन पर सख्ती, जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश अवैध ट्रक संचालन पर जिला प्रशासन सख्त, भरौली व माझीघाट पर लगेंगे हाई-क्वालिटी कैमरेनंबर प्लेट ढककर ट्रक पार कराने वालों पर होगी कार्रवाई, भरौली पुल पर 24 घंटे निगरानी टीम तैनात रहेगीबलिया बिहार की ओर से आने-जाने वाले ट्रकों के अवैध परिवहन और राजस्व हानि की लगातार मिल रही शिकायतों पर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भरौली मार्ग से प्रतिदिन लगभग 700 ट्रक गुजरते हैं, जिनमें से कई चालक इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) से बचने के लिए नंबर प्लेट ढकने या बदलने जैसी अवैध हरकतें करते हैं। इससे प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।जिलाधिकारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि भरौली पुल पर उच्च गुणवत्ता के कैमरे लगाए जाएं और उन्हें आईएसआईपी सिस्टम से जोड़ा जाए। साथ ही माझीघाट पर भी कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश खनन अधिकारी को दिया गया। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर 24 घंटे निगरानी के लिए परिवहन विभाग, खनन विभाग, पुलिस और एक मजिस्ट्रेट की संयुक्त टीम बनाई जाए। एक टीम भरौली पुल पर और दूसरी टीम माझीघाट पर तैनात रहेगी। बैठक में यह भी बताया गया कि जिले के करीब 50 ट्रक मालिकों पर कई बार चालान काटा गया है, लेकिन उन्होंने अब तक जुर्माना जमा नहीं किया है। इस पर जिलाधिकारी ने परिवहन अधिकारी को निर्देशित किया कि ऐसे ट्रक मालिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए — वसूली सुनिश्चित की जाए, एफआईआर दर्ज कर लाइसेंस निरस्त किए जाएं ताकि अन्य लोग भी सबक लें। बैठक में पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, एडीएम अनिल कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

ओएसआर ग्राम पंचायतो के आत्म निर्भरता का माध्यम है तथा उत्तरदायित्व पूर्ण शासन को बढ़ावा देता है-विंध्याचल सिंह

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान की अंतर्गत देवरिया सदर विकासखंड में स्वयं के आय के स्रोत विषय पर सर्वाधिक आबादी वाले ग्राम पंचायतों के सचिवों तथा प्रधानों के एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सहायक विकास अधिकारी पंचायत विंध्याचल सिंह, सह प्रबंधक फैकल्टी डीपीआरसी कुशीनगर बृजेश नाथ त्रिपाठी, राज्य प्रशिक्षक अजीत तिवारी एवं वरिष्ठ प्रशिक्षक आशुतोष दुबे ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत विंध्याचल सिंह ने कहा कि ओएसआर ग्राम पंचायतो के आत्म निर्भरता का माध्यम है तथा उत्तरदायित्व पूर्ण शासन को बढ़ावा देता है ।सह प्रबंधक डीपीआरसी कुशीनगर बृजेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि ओएसआर का लाभ योजनाओं की क्रियान्वयन तथा त्वरित निर्णय और नागरिकों की सहभागिता एवं विश्वास को बढ़ाता है । प्रशिक्षक अजीत तिवारी ने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता तथा जवाब देही के साथ-साथ नवाचार और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ाने के लिए ओ एस आर सशक्त माध्यम है, जिस प्रकार राज्य सरकार है विभिन्न तरीके के करो को लगा करके अपनी आय सृजित करती है उसी प्रकार स्थानीय स्वशासन यानी हमारी ग्राम पंचायतें भी विभिन्न तरीके के कर ले करके जैसे जल,कर भूमि कर व्यापार कर आदि के माध्यम से भी अपनी आय सृजित कर सकती हैं। प्रशिक्षक आशुतोष दुबे ने कहा कि ग्राम पंचायत को 73 वें संविधान संशोधन के अंतर्गत कर लगाने का अधिकार है धारा 37 के अंतर्गत ग्राम पंचायत को कर लगाने का अधिकार है धारा 37 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्वच्छता सेवा कर सड़कों की रोशनी के लिए भी कर लगा सकती है, बाजारों पर कर तथा बधशालाओं आदि पर भी कर लगा सकती है प्रशिक्षिका प्रतिभा पांडे ने आरसी सेंटर के माध्यम से ग्राम पंचायत के आय सृजन के बिंदुओं पर चर्चा किया प्रशिक्षक अजय दुबे ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनने वाले वर्मी खाद गड्ढों से भी ग्राम पंचायत के होने वाले आय के संबंध में चर्चा किया आलोक तिवारी ने प्लास्टिक प्रबंधन केंद्र के माध्यम से होने वाले आए के संदर्भ में चर्चा किया इस अवसर पर प्रशिक्षक विनय तिवारी, हुस्नारा खातून, शिव मिश्रा, हरिपाल यादव,चेतन चौहान, सतीश शाही, त्रयम्बक मणि, दीनदयाल चौहान, चंदू पासवान, शुभम गुप्ता, विनय पाण्डेय आदि लोग उपस्थित रहे

सार्वजनिक शौचालय पर ताला, ग्रामीणों में आक्रोश

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

नवानगर ब्लॉक के किशोर चेतन ग्रामसभा में स्थित सार्वजनिक शौचालय पिछले लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है। ग्राम प्रधान योगेंद्र राजभर के पूरे कार्यकाल में यह शौचालय मात्र छह माह ही संचालित हो सका, उसके बाद से हमेशा ताले में जकड़ा हुआ है। सरकार की मंशा थी कि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच के लिए न जाए, इसी उद्देश्य से प्रत्येक गांव में सार्वजनिक शौचालय बनवाए गए थे, किंतु जिम्मेदारों की लापरवाही से यह योजना धरातल पर असफल साबित होती दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय केवल दिखावे के लिए बना हुआ है। छठु राजभर, भीम राजभर, रामाज्ञा राजभर, राजकुमारी, सुमन राजभर, शुका सहित अन्य ग्रामीणों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि शौचालय का ताला कभी नहीं खुलता। मजबूरन उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे स्वच्छता अभियान की मंशा पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा प्रत्येक सार्वजनिक शौचालय की देखरेख हेतु समूह को प्रति माह 6000 रुपये मजदूरी और 3000 रुपये साफ-सफाई सामग्री के लिए प्रदान किए जाते हैं। इसके बावजूद शौचालय बंद रहना भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और शौचालय को शीघ्र चालू कराया जाए, ताकि स्वच्छ भारत मिशन की भावना साकार हो सके। ए.डी.ओ. पंचायत नवानगर मनोज यादव ने बताया कि संबंधित सचिव से बात कर इस समस्या का समाधान जल्द कराया जाएगा।

“आपकी पूंजी आपका अधिकार” पहल के अंतर्गत एसबीआई का जागरूकता अभियान प्रारंभ

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की पहल “आपकी पूंजी आपका अधिकार” के तहत देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने जिले में ग्राहकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की हैआंचलिक कार्यालय, देवरिया से क्षेत्रीय प्रबंधक विशाल सिद्धार्थ ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया। यह वाहन आगामी दिनों में जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर ग्राहकों को उनके बैंकिंग अधिकारों, निष्क्रिय खातों की प्रक्रिया तथा डिपॉज़िटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) से संबंधित जानकारी प्रदान करेगा।क्षेत्रीय प्रबंधक सिद्धार्थ ने बताया कि बैंक की यह पहल उन ग्राहकों के हित में है जिनके खातों में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। ऐसे खातों की शेष राशि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिपॉज़िटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में स्थानांतरित कर दी जाती है। ग्राहक अपनी होम शाखा में जाकर केवाईसी (KYC) अद्यतन कराकर या आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इस राशि का दावा कर सकते हैं।

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उन्होंने बताया कि यदि खाता धारक का निधन हो गया हो तो उनके उत्तराधिकारी भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर उक्त राशि प्राप्त कर सकते हैं।देवरिया क्षेत्र की सभी एसबीआई शाखाएँ इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। शाखा कर्मी ग्राहकों से फोन, संदेश और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय खातों के पुनः सक्रियण, राशि दावा प्रक्रिया और उनके बैंकिंग अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। सिद्धार्थ ने कहा कि बैंक का उद्देश्य प्रत्येक ग्राहक को उसकी पूंजी के प्रति सजग करना और उसके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अपने बैंक खातों की स्थिति की जानकारी लें तथा यदि खाता निष्क्रिय है तो उसे शीघ्र सक्रिय कराएं।अभियान के दौरान बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने “आपकी पूंजी आपका अधिकार” का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

लाल किला धमाका: डीएनए रिपोर्ट ने खोला राज, डॉ. उमर नबी ही चला रहा था विस्फोटक कार

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। डीएनए रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि पुलवामा निवासी डॉ. उमर नबी ही उस कार को चला रहा था जिसमें यह भीषण विस्फोट हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उमर की मां से लिए गए डीएनए नमूनों की तुलना विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों से की गई, जिसमें पूरी समानता मिली।

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डॉ. उमर नबी उस “सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल” का हिस्सा था, जिसका पर्दाफाश हाल ही में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने किया था। यह नेटवर्क प्रतिबंधित संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा हुआ था। जांच में खुलासा हुआ है कि मॉड्यूल के सदस्यों में तीन डॉक्टर भी शामिल थे। पुलिस ने फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त की।

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सूत्रों के मुताबिक, उमर 9 नवंबर से लापता था और उसने अपने सभी फोन बंद कर दिए थे। फरीदाबाद में उसकी फोर्ड इकोस्पोर्ट कार जब्त की गई, जिसके दस्तावेजों में दिया गया दिल्ली का पता फर्जी निकला। जांच में सामने आया कि उमर और उसके साथी डॉक्टर मुज़म्मिल गनई ने तुर्की की यात्रा भी की थी, जहां उनके पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क होने की आशंका है।

दिल्ली पुलिस और एटीएस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह समूह दिवाली पर बड़े हमले की योजना बना रहा था, जो मुंबई 2008 जैसी साजिश को दोहराने की कोशिश थी।

दिल्ली धमाके के बाद पाकिस्तान पर फिर उठे सवाल, अफगानिस्तान ने लगाया बड़ा झटका – रोक दिया व्यापार और ट्रांजिट मार्ग

काबुल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली में हाल ही में हुए बम धमाके के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में है। भारत में जब भी आतंकी हमला हुआ है, उसमें पाकिस्तान की आतंकी मंडियों और हैंडलरों की भूमिका सामने आई है। दिल्ली धमाके के मामले में भी पकड़े गए आतंकियों – आदिल अहमद और मुजमिल – ने खुलासा किया है कि उनका सीधा संपर्क पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर से था। यह एक बार फिर साबित करता है कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा।

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लेकिन इस बार पाकिस्तान को करारा जवाब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दिया है। अफगान उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने बार-बार व्यापारिक मार्गों को रोका और गैर-राजनीतिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसके जवाब में अफगान सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापार और ट्रांजिट को रोकने का निर्णय लिया है।

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बरादर ने स्पष्ट कहा कि अफगान व्यापारियों को अब पाकिस्तान के बजाय अन्य देशों के मार्गों का उपयोग करना चाहिए ताकि देश की गरिमा और उद्योग की रक्षा की जा सके। वहीं, अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुताकी ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि “जो देश खुद को परमाणु संपन्न कहता है, वह अब प्याज, आलू और टमाटर पर राजनीति कर रहा है।”

यह कदम पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो पहले ही आर्थिक संकट और कूटनीतिक अलगाव का सामना कर रहा है। अफगानिस्तान का यह फैसला न केवल उसकी स्वाभिमानी नीति को दर्शाता है, बल्कि आतंकवाद के संरक्षक पाकिस्तान के खिलाफ एक ठोस संदेश भी देता है।

निर्वासित शेख हसीना का बड़ा बयान: बांग्लादेश लौटने की शर्तें रखीं, यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत में निर्वासन झेल रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनकी वापसी तभी संभव है जब बांग्लादेश में “सहभागी लोकतंत्र” की बहाली हो, उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएँ और देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराए जाएँ।

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भारत में एक अज्ञात स्थान से पीटीआई को दिए ईमेल साक्षात्कार में हसीना ने वर्तमान अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस की सरकार पर भारत-बांग्लादेश संबंधों को नुकसान पहुँचाने और चरमपंथी ताकतों को मज़बूत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के समय दोनों देशों के बीच जो “गहरे और भरोसेमंद” रिश्ते बने थे, उन्हें “यूनुस शासन की मूर्ख नीतियों” ने कमजोर कर दिया है।

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ढाका में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। हसीना के खिलाफ गुरुवार को आने वाले अहम फैसले से पहले बीते दो दिनों में देशभर में आगजनी और देसी बम धमाकों की घटनाएँ सामने आई हैं। यह हालात 2024 के उग्र छात्र आंदोलनों की याद दिला रहे हैं, जिनमें 500 से अधिक लोगों की जान गई थी।

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राजधानी ढाका को किले में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की भारी तैनाती की गई है। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में हसीना और उनके सहयोगियों पर मानवता विरोधी अपराध, हत्या और साजिश जैसे गंभीर आरोपों पर फैसला सुनाया जाएगा।

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इस बीच, ग्रामीण बैंक की एक शाखा में आगजनी की खबर भी सामने आई है। यह वही बैंक है जिसकी स्थापना 1983 में मुहम्मद यूनुस ने गरीबों को लघु ऋण देने के उद्देश्य से की थी। बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता ने ढाका से लेकर गाज़ीपुर और ब्राह्मणबरिया तक जनजीवन ठप कर दिया है।

जीवित पति को ‘मृत’ दिखाकर मां-बेटियों ने उड़ाई सरकारी रकम, खुलासा होने पर मचा हड़कंप!

बरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के आंवला में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर उसकी पत्नी और दो बेटियों ने विधवा पेंशन योजना का लाभ उठाया। जिला प्रोबेशन कार्यालय की जांच में यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ है।

जानकारी के मुताबिक, मोहल्ला नई बस्ती निवासी अन्नी बेगम ने अपने जीवित पति अच्छन खां को वर्ष 2023 के सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर विधवा पेंशन लेना शुरू कर दिया। यही नहीं, उसकी विवाहित बेटी स्वालीन और अविवाहित बेटी सन्नो ने भी फर्जी दस्तावेज बनाकर खुद को अच्छन खां की “विधवा” बताते हुए योजना का लाभ ले लिया।

जांच तब शुरू हुई जब मोहल्ला गौसिया चौक निवासी हसीना ने 15 जुलाई को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि अच्छन खां जीवित हैं, लेकिन उनकी पत्नी और बेटियां पेंशन ले रही हैं।

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जिला प्रोबेशन अधिकारी की जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद तीनों की पेंशन तुरंत बंद कर दी गई है। अब अन्नी बेगम, स्वालीन और सन्नो से सरकारी धनराशि की वसूली की जाएगी।

आंवला थानाध्यक्ष कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि तीनों महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।

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ठंड ने बढ़ाई ठिठुरन, कोहरे के बीच दिन में धूप से राहत

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में सर्दी ने अब पूरी तरह से दस्तक दे दी है। सुबह और रात के समय ठंड का असर तेज़ी से बढ़ने लगा है। बिना स्वेटर या गर्म कपड़ों के बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छा रहा है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हो रही है। हालांकि दिन में खिली धूप लोगों के लिए राहत लेकर आती है।
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क बना रहेगा। 13 नवंबर को प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में मौसम साफ़ रहने की संभावना जताई गई है। इसी तरह 14 और 15 नवंबर को भी किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। विभाग का अनुमान है कि 18 नवंबर तक आसमान साफ़ रहेगा और तापमान में धीरे-धीरे गिरावट जारी रहेगी।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार बुधवार को इटावा में न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर और अयोध्या में 10 डिग्री, बरेली में 10.4 डिग्री, बुलंदशहर में 10 डिग्री जबकि राजधानी लखनऊ में न्यूनतम 12.4 और अधिकतम 28.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सुबह-शाम की ठंड और बढ़ सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक एहतियात बरतें, वहीं आमजन को भी रात के समय गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

गड्ढों में समाई उम्मीदें: सलेमपुर–चेरो मार्ग बना परेशानी की सड़क, रोजमर्रा के सफर में बढ़ी मुसीबतें

सलेमपुर/देवरिया।
जो सड़क सलेमपुर नगर को मोरवा, हिछौरा, मधवापुर, चांदपलिया, भेड़िया टोला चेरो जैसी ग्राम सभाओं से जोड़ने का मुख्य जरिया है, वह अब लोगों के लिए दर्द और परेशानी का रास्ता बन चुकी है। बभनौली मोड़ से चेरो तक जाने वाला यह मार्ग आज बड़े-बड़े गड्ढों से पटा हुआ है। यह वही सड़क है जो चेरो स्थित केंद्रीय विद्यालय जाने वाले सैकड़ों छात्रों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है।

ग्रामीणों के वर्षों के संघर्ष के बाद इस मार्ग का पुनर्निर्माण तो हुआ था, लेकिन कुछ ही सालों में यह फिर जर्जर हो गया। बरसात और रखरखाव की कमी ने इस सड़क को मौत के कुएं में बदल दिया है। अब हर दिन सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

ग्राम प्रधान चांदपलिया अंगद यादव ने बताया कि सलेमपुर से चेरो तक सड़क पर गड्ढों की भरमार है, जिससे आमजन को भारी दिक्कतें हो रही हैं। वहीं, भेड़िया निवासी दिवाकर कुशवाहा का कहना है कि रोज सलेमपुर से चेरो आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। चेरो निवासी संजय गुप्ता ने बताया कि गड्ढों में फंसकर एक बार उन्हें चोट भी लग चुकी है।

मधवापुर निवासी दीपक पांडेय ने कहा कि सड़क पहले से ही गड्ढों में तब्दील थी, लेकिन हाल ही में गैस पाइपलाइन डालने के दौरान मजदूरों ने किनारे गड्ढे खोदकर वैसे ही छोड़ दिए, जिससे मार्ग और खतरनाक हो गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क की तुरंत मरम्मत कराई जाए ताकि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को राहत मिल सके। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

धरमेर के संगम ने दिखाई ईमानदारी की मिसाल, रास्ते में मिले 25 हजार के सोने के आभूषण लौटाए – गांव में बनी चर्चा का विषय


भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)देवरिया जनपद के सलेमपुर तहसील क्षेत्र के भागलपुर ब्लॉक अंतर्गत धरमेर गांव में एक युवक ने ईमानदारी और सच्चाई की अद्भुत मिसाल पेश की है। धरमेर निवासी संगम चौरसिया अपनी मां के साथ लक्ष्मण चौराहे के रास्ते सलेमपुर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी मां को रास्ते पर सोने के तीन लॉकेट और जियुतिया मिले, जिनकी कीमत करीब 25 हजार रुपये से अधिक बताई जा रही है।

मालिक का इंतजार करने के बाद जब कोई नहीं आया, तो संगम ने मानवता का परिचय देते हुए अपने गांव के व्हाट्सएप ग्रुप ‘आदर्श ग्राम धरमेर’ में आभूषण मिलने की जानकारी साझा की। कुछ देर बाद गांव के नाटा प्रसाद की पत्नी ने संपर्क किया और प्रमाण के रूप में बचे हुए मोतियों को दिखाकर अपने गुम हुए आभूषणों की पहचान की। सत्यापन के बाद संगम ने ईमानदारी से सभी आभूषण वापस कर दिए, जिससे परिजनों के चेहरे पर खुशी झलक उठी।

संगम चौरसिया और उनकी मां की ईमानदारी की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। ग्राम प्रधान रामचंद्र गुप्ता, बलवंत मल्ल, फागु यादव, रूपेश मिश्र, मनोज चौरसिया, देवेश मिश्र, विनय मिश्र, आदित्य यादव, सत्येंद्र मिश्र, गोलू गुप्ता सहित कई ग्रामीणों ने इस नेक कार्य की जमकर सराहना की।

यह घटना न सिर्फ धरमेर गांव बल्कि पूरे देवरिया जिले के लिए प्रेरणादायक बन गई है, जो यह संदेश देती है कि आज भी समाज में ईमानदारी जिंदा है।

कवि गजानन माधव मुक्तिबोध: आधुनिक हिंदी कविता के स्वप्नद्रष्टा और यथार्थवादी चिंतक

गजानन माधव मुक्तिबोध (1917–1964) हिंदी साहित्य में वह नाम हैं जिन्होंने कविता को बौद्धिकता, आत्मसंघर्ष और सामाजिक यथार्थ के गहरे तल तक पहुँचाया। वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि चिंतक, आलोचक, कथाकार और युगद्रष्टा भी थे। मुक्तिबोध ने अपने समय की विसंगतियों, विडंबनाओं और अंतर्विरोधों को जिस तीव्र संवेदनशीलता के साथ व्यक्त किया, वह उन्हें हिंदी की प्रगतिशील और प्रयोगवादी परंपरा का अद्वितीय प्रतिनिधि बनाता है।
गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवम्बर 1917 को मध्य प्रदेश के शिवनी जिले में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा वहीं से प्राप्त कर उन्होंने नागपुर से स्नातक की पढ़ाई की। वे पेशे से शिक्षक रहे और जीवन भर आर्थिक संघर्षों से जूझते रहे। परंतु इन कठिन परिस्थितियों ने उनकी सृजनशीलता को दबाया नहीं, बल्कि और अधिक प्रखर बनाया। उनका जीवन अत्यंत साधारण था, लेकिन चिंतन असाधारण। वे कहते थे-

“मैं एक सामान्य आदमी हूँ, पर मेरे भीतर विचारों का तूफ़ान है।”

मुक्तिबोध का साहित्य इस तूफ़ान की गूँज है। जहाँ एक ओर व्यक्ति की आत्मपीड़ा है, वहीं समाज और राष्ट्र के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी। मुक्तिबोध की कविता में आत्मसंघर्ष एक केंद्रीय तत्व है। वे अपने भीतर के द्वंद्व, असुरक्षा, और असफलताओं को छिपाते नहीं, बल्कि उन्हें समाज की सामूहिक पीड़ा से जोड़ देते हैं।

उनकी प्रसिद्ध कविता ‘अँधेरे में’ इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। यह एक लंबी आत्ममंथन यात्रा है जिसमें कवि अपने भीतर उतरता है और वहाँ से समाज की सच्चाइयों को उजागर करता है।

“अँधेरे में किसी को कुछ सूझता नहीं, सिर्फ़ अपनी ही छाया दिखती है।”

यह ‘अँधेरा’ केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे समाज का अँधेरा है। जहाँ शोषण, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन व्याप्त है। मुक्तिबोध इस अँधेरे को पहचानते हैं और सवाल उठाते हैं। क्या हम सच में स्वतंत्र हैं?
मुक्तिबोध मूलतः मार्क्सवादी दृष्टिकोण से प्रेरित थे, पर उन्होंने विचारधारा को कभी जड़ता में नहीं बदला। वे मानते थे कि विचार तभी सार्थक है जब वह संवेदना से जुड़ा हो। उनकी कविताओं, कहानियों और आलोचनाओं में स्पष्ट रूप से वर्गचेतना, सामंतवाद का विरोध और जन-संघर्ष की आकांक्षा दिखती है। उनकी कविता में “मैं” हमेशा एक जागरूक, बेचैन व्यक्ति है जो व्यवस्था से असंतुष्ट है।

“कभी मैं सोचता हूँ कि क्या मैं सचमुच जीवित हूँ?”

यह प्रश्न केवल कवि का नहीं, उस समय के पूरे समाज का है। एक समाज जो आज़ादी के बाद भी असमानता, भय और अन्याय के बोझ तले दबा था।
मुक्तिबोध की भाषा जटिल होते हुए भी गहन अर्थवत्ता लिए होती है। वे प्रतीक, बिंब और रूपकों का साहसिक प्रयोग करते हैं। उनकी कविताएँ सीधे दिल पर नहीं, पहले दिमाग पर दस्तक देती हैं। फिर भीतर उतरकर आत्मा को झकझोर देती हैं। वे सहज भावुकता के कवि नहीं, बल्कि विचार और संवेदना के संगम के कवि हैं। उनकी भाषा में दर्शन, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र की झलक मिलती है। उन्होंने कविता को केवल ‘भावना का सौंदर्य’ नहीं, बल्कि ‘चिंतन का औजार’ बनाया।
मुक्तिबोध केवल कवि नहीं थे; वे एक प्रखर आलोचक भी थे। उनकी प्रसिद्ध कृति “नये साहित्य की रूपरेखा” हिंदी आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर है। उन्होंने साहित्य को समाज के परिवर्तन का उपकरण माना। उनके अनुसार—

“कला की उपयोगिता तभी है जब वह जीवन को अधिक मानवीय बनाए।”

उनकी कहानियों में भी वही बेचैनी, वही संघर्ष और वही यथार्थ है जो उनकी कविताओं में दिखाई देता है। मुक्तिबोध का निधन 11 सितम्बर 1964 को हुआ, पर उनकी विचारधारा और लेखनी हिंदी साहित्य में आज भी जीवित है। वे उन कवियों में हैं जिनकी लोकप्रियता मृत्यु के बाद बढ़ी। आज उनकी कविताएँ, उनके निबंध और आलोचनाएँ नए लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने हिंदी कविता को केवल भावनाओं का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन की चेतना में ढाला।
उनकी पंक्ति आज भी हमारे समय की सच्चाई कहती है—

“जो नहीं है, उसे होना पड़ेगा,
जो नहीं होगा, वह मर जाएगा।”

गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य के ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने विचार की गहराई, भाव की ईमानदारी और भाषा की जटिलता को एक साथ साधा। उनकी कविताएँ केवल पढ़ने के लिए नहीं, सोचने के लिए होती हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि कवि होना सिर्फ़ शब्दों का जादू नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही भी है। इस अर्थ में मुक्तिबोध हिंदी कविता के “विवेकशील आत्मा” हैं। जो अँधेरों में भी प्रकाश की तलाश करना नहीं छोड़ते।

  • नवनीत मिश्र

कैसा रहेगा आपका गुरुवार?

🌟 जानें 1 से 9 तक के मूलांक वालों के लिए कैसा रहेगा 13 नवंबर, गुरुवार का दिन – अंकशास्त्र के अनुसार पंडित सुधीर तिवारी की भविष्यवाणी


13 नवंबर अंक राशिफल 2025:
आज गुरुवार, 13 नवंबर 2025 है। अगर हम तारीख के सभी अंकों को जोड़ते हैं (1+3+1+1+2+0+2+5=15 → 1+5=6), तो आज का योग मूलांक 6 का है, जिसका स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है। यह दिन आकर्षण, प्रेम, कला और सामंजस्य का प्रतीक रहेगा। पंडित सुधीर तिवारी के अनुसार आज का दिन प्रत्येक मूलांक के लिए नए अवसर, भावनाओं और संतुलन की परीक्षा लेकर आएगा। आइए जानते हैं आपका दिन क्या संकेत देता है —

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🌞 मूलांक 1 (MULANK 1)
आज आत्मविश्वास और नेतृत्व का दिन रहेगा। नए अवसर और जिम्मेदारियाँ मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठों से प्रशंसा मिलेगी। परिवार में सम्मान बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी, लेकिन खर्च पर नियंत्रण रखें। प्रेम जीवन में ईमानदारी और सम्मान बनाए रखें।
शुभ अंक: 1  शुभ रंग: सुनहरा पीला

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🌙 मूलांक 2 (MULANK 2)
आपका दिन भावनाओं से भरा रहेगा। पुरानी यादें ताजा होंगी और किसी रिश्ते में सुधार की संभावना बनेगी। कार्यस्थल पर विचारों की सराहना होगी, आत्मविश्वास बनाए रखें। प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा और अविवाहित जातकों को आकर्षण का अनुभव होगा।
शुभ अंक: 2  शुभ रंग: हल्का नीला

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🔱 मूलांक 3 (MULANK 3)
आज का दिन योजनाओं को पूरा करने और सम्मान पाने का रहेगा। विद्यार्थियों के लिए यह दिन शुभ है। आर्थिक लाभ की संभावना है और किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न रहेगा। ध्यान रखें, ज्यादा बोलने से रिश्तों में दूरी न आए।
शुभ अंक: 3  शुभ रंग: पीला

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मूलांक 4 (MULANK 4)
आज चुनौतियाँ मिलेंगी लेकिन आप उनसे निपट लेंगे। धैर्य और समझदारी बनाए रखें। कार्यक्षेत्र में जल्दबाज़ी से बचें। आर्थिक स्थिति थोड़ी उलझी रहेगी लेकिन परिवार का सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों में खुलापन रखें, संदेह से बचें।
शुभ अंक: 4  शुभ रंग: नीला या ग्रे

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🌿 मूलांक 5 (MULANK 5)
आज आपकी वाणी और संवाद कौशल आपकी ताकत बनेगी। व्यापार में लाभ और नए संपर्क बनेंगे। प्रेम जीवन में हंसी-खुशी रहेगी। सेहत में ऊर्जा बनी रहेगी, पर अत्यधिक थकान से बचें।
शुभ अंक: 5  शुभ रंग: हरा
💖 मूलांक 6 (MULANK 6)
आज आपका दिन विशेष रहेगा क्योंकि आज का योग भी 6 का है। शुक्र का प्रभाव आकर्षण, प्रेम और सफलता लाएगा। कला, मीडिया, फैशन या संगीत से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति सशक्त होगी। प्रेम जीवन और परिवार में खुशियाँ बढ़ेंगी।
शुभ अंक: 6  शुभ रंग: गुलाबी या क्रीम
🕊️ मूलांक 7 (MULANK 7)
आपका मन आध्यात्मिक और रचनात्मक दिशा में अग्रसर रहेगा। कार्यस्थल पर ध्यान केंद्रित रखें। आर्थिक मामलों में संयम बरतें और बड़े निवेश से बचें। प्रेम जीवन में संवाद ही संतुलन बनाएगा।
शुभ अंक: 7  शुभ रंग: आसमानी
⚙️ मूलांक 8 (MULANK 8)
आज का दिन मेहनत का फल देने वाला है। कार्यस्थल पर पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के योग हैं। वित्तीय स्थिति सुधरेगी, पर पुराने खर्च सामने आ सकते हैं। रिश्तों में धैर्य और समझ जरूरी है। स्वास्थ्य के लिए नियमित दिनचर्या अपनाएँ।
शुभ अंक: 8  शुभ रंग: काला या नेवी ब्लू
🔥 मूलांक 9 (MULANK 9)
आज आप ऊर्जावान और जोशीले रहेंगे। अधूरे काम पूरे करने का अवसर मिलेगा। कार्यक्षेत्र में सराहना और आर्थिक लाभ दोनों मिल सकते हैं। प्रेम जीवन में जोश के साथ संयम भी रखें।
शुभ अंक: 9  शुभ रंग: लाल
🕉️यह अंक ज्योतिष केवल सामान्य मार्गदर्शन हेतु है। यह राष्ट्र की पारंपरिक प्रमाणिक प्रणाली नहीं है। अपनी जन्मकुंडली और जीवन निर्णय हेतु किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लें।
— पंडित सुधीर तिवारी

भगवानदास की विरासत: धर्म, नीतियों और एकता का प्रतीक दिवस

🌹 13 नवंबर का इतिहास: विदा हुए वो महान आत्माएं जिन्होंने भारत की पहचान गढ़ी

13 नवंबर भारतीय इतिहास का एक ऐसा दिन है, जो न केवल उपलब्धियों के लिए, बल्कि कुछ अमर विभूतियों के निधन की स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन ऐसे तीन महान व्यक्तित्वों ने संसार से विदाई ली, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। ये व्यक्तित्व हैं — भारतीय सिनेमा के सशक्त निर्माता डी. वी. एस. राजू, पुरातत्त्व विज्ञान के धुरंधर गुलाम याज़दानी, और मुगल काल के प्रख्यात दरबारी राजपुरुष भगवानदास।

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डी. वी. एस. राजू (2010): भारतीय सिनेमा के मार्गदर्शक निर्माता
13 नवंबर 2010 को भारतीय फिल्म जगत ने एक अनमोल रत्न खो दिया। डी. वी. एस. राजू न केवल फिल्म निर्माता थे, बल्कि भारतीय सिनेमा के विकास में उनकी भूमिका अत्यंत प्रेरणादायक रही। उन्होंने तेलुगु सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई और कई सामाजिक संदेशों वाली फ़िल्में बनाईं। फ़िल्म निर्माण में गुणवत्ता, कला और जनभावनाओं के संगम की उनकी समझ ने उन्हें एक दूरदर्शी निर्माता बना दिया। सिनेमा के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया। उनकी मृत्यु ने भारतीय फिल्म उद्योग को गहरा आघात पहुँचाया।

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गुलाम याज़दानी (1962): भारतीय पुरातत्त्व के अमर शोधकर्ता
13 नवंबर 1962 को भारतीय पुरातत्त्व विज्ञान ने अपना एक नायाब सितारा खो दिया। गुलाम याज़दानी, जिन्होंने हैदराबाद और दक्षिण भारत के कई ऐतिहासिक स्थलों पर अमूल्य कार्य किया, उन्हें भारतीय पुरातत्त्व का सच्चा संरक्षक कहा जाता है। उन्होंने अजंता, एलोरा और बीजापुर जैसे प्राचीन स्थलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। याज़दानी ने न केवल भारतीय इतिहास को जीवित रखा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक धरोहर का बोध कराया। उनकी शोध दृष्टि और समर्पण आज भी पुरातत्त्व के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं।

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भगवानदास (1589): मुगल दरबार के नीतिज्ञ और धर्मनिष्ठ राजपुरुष
13 नवंबर 1589 को लाहौर में भगवानदास का निधन हुआ। वे अकबर के दरबार में प्रमुख राजपुरुषों में से एक थे और अपनी नीतियों, कूटनीति और धर्मनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। भगवानदास न केवल अकबर के विश्वसनीय सलाहकार थे, बल्कि राजपूत-मुगल संबंधों की एक मजबूत कड़ी भी बने। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। उनके कार्यों ने भारतीय इतिहास को एकता और सह-अस्तित्व की दिशा दी।

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इन तीनों विभूतियों ने अपने जीवन में ऐसे मूल्य स्थापित किए जो आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं। 13 नवंबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक स्मरण दिवस है, जो हमें याद दिलाता है कि महानता केवल जीवित रहते हुए नहीं, बल्कि अपने कर्मों के माध्यम से अमर होती है।