Wednesday, July 1, 2026
Home Blog Page 470

इतिहास में अमर हुए वे चेहरे, जिनकी विरासत आज भी प्रेरणा देती है”

18 नवंबर: का इतिहास

18 नवंबर इतिहास के उन नायकों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए। अलग-अलग कालखंडों में दिवंगत हुए ये व्यक्तित्व देश, समाज और संस्कृति पर अमिट छाप छोड़ गए। उनके कार्य आज भी प्रेरणा के स्तंभ बनकर हमें मार्गदर्शन देते हैं।

ये भी पढ़ें –18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ: वो पल जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी

मृदुला सिन्हा (2020)
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता मृदुला सिन्हा न सिर्फ राजनीति, बल्कि साहित्य और सामाजिक सेवा की दुनिया में भी अत्यंत प्रतिष्ठित रहीं। गोवा की राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासन को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का प्रयास किया। संस्कृतिक विषयों पर उनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। ग्रामीण महिलाओं की शिक्षा, स्वावलंबन और संस्कृति संरक्षण के लिए उनका योगदान इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनका जीवन देश सेवा, सरलता और सामाजिक उत्थान का प्रतीक बनकर सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

ये भी पढ़ें –इतिहास की वो तारीख, जिसने भारत की आत्मा को आकार दिया

ज्योति प्रकाश निराला (2017)
अशोक चक्र से सम्मानित शहीद ज्योति प्रकाश निराला भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो दस्ते का वह नाम हैं, जिन्होंने आतंकियों से लड़ते हुए अतुलनीय साहस का परिचय दिया। ऑपरेशन के दौरान साथियों को बचाते हुए उन्होंने जिस अदम्य वीरता से दुश्मनों का सामना किया, वह सैन्य इतिहास में एक गौरवमयी अध्याय बन गया। उनका बलिदान राष्ट्र की सुरक्षा और वीरता की सर्वोच्च मिसाल है। निराला की शहादत हर भारतीय युवा को देश के प्रति समर्पण और कर्तव्य की प्रेरणा देती है।

ये भी पढ़ें –जानिए मूलांक 1 से 9 वालों के लिए कैसा रहेगा दिन?

धीरेन्द्र नाथ गांगुली (1978)
बंगाली सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता और निर्देशक धीरेन्द्र नाथ गांगुली भारतीय फिल्म उद्योग की नींव मजबूत करने वाले अग्रदूतों में शामिल थे। उन्होंने न सिर्फ अभिनय में अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि कई यादगार फिल्मों का निर्देशन कर भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। तकनीकी सुधार, रचनात्मकता और कलात्मक दृश्यों के प्रयोग में उन्होंने साहसिक कदम उठाए। गांगुली की कला भारतीय फिल्म इतिहास में सजीव स्मारक की तरह है, जो आने वाली पीढ़ियों को सृजन और संवेदना का संदेश देती है।

एस. वी. कृष्णमूर्ति राव (1968)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्पित नेता एस. वी. कृष्णमूर्ति राव ने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। सामाजिक न्याय, ग्रामीण उन्नति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उनके योगदान ने उन्हें जनता का प्रिय नेता बनाया। उन्होंने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। राव का राजनीतिक जीवन यह संदेश देता है कि प्रतिबद्धता, ईमानदारी और जनहित ही सशक्त राष्ट्र की नींव हैं।

शहीद शैतान सिंह (1962)
परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह 1962 के भारत-चीन युद्ध के अद्वितीय नायक हैं। रेजांग ला की ऊँचाइयों पर दुश्मनों के विरुद्ध उनके नेतृत्व और अद्वितीय साहस ने सैन्य इतिहास को गौरवपूर्ण अध्याय दिया। अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने साथियों के साथ अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा की। उनका बलिदान राष्ट्रभक्ति, निष्ठा और अदम्यता की परिभाषा है।

अलेक्ज़ेंडर कनिंघम (1893)
ब्रिटिश पुरातत्वविद अलेक्ज़ेंडर कनिंघम को “भारतीय पुरातत्व का पिता” कहा जाता है। उन्होंने भारत के ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन अवशेषों और सांस्कृतिक धरोहरों का गहन अध्ययन किया। उनके सर्वेक्षणों ने भारत के प्राचीन इतिहास, बौद्ध तीर्थों और स्थापत्य को विश्व पटल पर पहचान दिलाई। कनिंघम के शोध आज भी भारतीय पुरातत्व की नींव माने जाते हैं और इतिहासकारों के लिए मार्गदर्शक हैं।

कर्नल जेम्स टॉड (1835)
राजस्थान के इतिहास को विश्व तक पहुँचाने का श्रेय कर्नल जेम्स टॉड को जाता है। उन्होंने राजपूत वीरता, संस्कृति, परंपरा और भू-राजनीति का विस्तृत अध्ययन कर “एनल्स एंड एंटीक्विटीज़ ऑफ राजस्थान” जैसे अमर ग्रंथों की रचना की। उनके लेखन ने राजस्थानी समाज की वीरगाथाओं को अमर बना दिया। इतिहास का वास्तविक स्वरूप समझने में उनके कार्य आज भी आधारशिला माने जाते हैं।

इतिहास की वो तारीख, जिसने भारत की आत्मा को आकार दिया

18 नवंबर का जन्मे इतिहास

भारत के इतिहास में 18 नवंबर सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक दर्पण है—जो हमें उन लोगों के योगदान और संघर्ष की याद दिलाती है, जिन्होंने इस देश के विचार, संस्कृति, राजनीति और न्याय प्रणाली को मजबूत आधार दिया। यह दिन कई महान जन्मों की कहानियों को समेटे हुए है। आइए, जानें उन हस्तियों को जिन्होंने 18 नवंबर को भारत की दिशा और दशा बदलने में अपनी गहरी छाप छोड़ी।

18 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व

ये भी पढ़ें –रबी सीजन 2025: गेहूं, चना, सरसों और दालों की बुआई का सर्वोत्तम महीना कौन-सा?

कमलनाथ (जन्म: 1946)
भारतीय राजनीति में कमलनाथ एक ऐसा नाम है जिसे संगठन क्षमता, संसदीय अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के लिए जाना जाता है। नौ बार लोकसभा सांसद रहने का रिकॉर्ड और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल उनके नेतृत्व कौशल को दर्शाता है। उद्योग, वाणिज्य और शहरी विकास जैसे मंत्रालयों में उनकी नीतियों का व्यापक प्रभाव देखा गया। कमलनाथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की रीढ़ माने जाते हैं और देश की आर्थिक प्रगति में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

सी. एन. बालकृष्णन (जन्म: 1934)
सी. एन. बालकृष्णन केरल की राजनीति में एक सादगीपूर्ण और जनसमर्पित नेता के रूप में जाने जाते थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उनका जीवन बिलकुल साधारण रहा। उन्होंने शराबमुक्ति अभियान, वित्तीय सुधारों और सामाजिक उत्थान जैसे विषयों पर लंबे समय तक कार्य किया। केरल सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और समाज के कमजोर वर्गों की सहायता पर विशेष ध्यान दिया।

ये भी पढ़ें –जानिए मूलांक 1 से 9 वालों के लिए कैसा रहेगा दिन?

मधुकर हीरालाल कनिया (जन्म: 1927)
भारत के 23वें मुख्य न्यायाधीश एम.एच. कनिया भारतीय न्यायपालिका के उन स्तंभों में गिने जाते हैं जिन्होंने संविधान की गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया। न्यायिक सुधारों, पारदर्शिता और न्याय की गति बढ़ाने के लिए उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले दिए जिन्होंने भारत की न्यायिक संरचना को नई दिशा प्रदान की। उनकी निष्पक्षता और दृढ़ता आज भी न्यायपालिका के लिए प्रेरणा है।

बटुकेश्वर दत्त (जन्म: 1910)
क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का नाम भारत की स्वतंत्रता संग्राम की उस धारा से जुड़ा है जिसमें त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम चरम पर था। भगत सिंह के साथ दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंककर उन्होंने अंग्रेजों को संदेश दिया कि भारत अब चुप नहीं रहेगा। जेल में अमानवीय यातनाएँ झेलने के बावजूद उनका हौसला टूट नहीं पाया। उनका पूरा जीवन युवाओं के लिए अदम्य साहस की मिसाल है।

वी. शांताराम (जन्म: 1901)
भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एवं फिल्मकार वी. शांताराम ने फिल्मों को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने का माध्यम बनाया। ‘दुनिया ना माने’, ‘दो आंखें बारह हाथ’ और ‘झनक झनक पायल बाजे’ जैसी फिल्मों ने न केवल भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर पहचान दिलाई बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलाई। शांताराम का योगदान भारतीय फिल्म उद्योग के विकास में मील का पत्थर माना जाता है।

तिरुमलाई कृष्णामाचार्य (जन्म: 1888)
योग के जनक कहे जाने वाले कृष्णामाचार्य आधुनिक योग परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने पतंजलि योग, प्राणायाम, आयुर्वेद और वैदिक विद्या को जोड़कर एक नई पद्धति विकसित की। उनके शिष्यों ने योग को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्हें ‘योग का पिता’ कहा जाता है। शरीर-मन-आत्मा के संतुलन की उनकी अवधारणा आज भी विश्वभर के योग साधकों को प्रेरित करती है।

जानिए मूलांक 1 से 9 वालों के लिए कैसा रहेगा दिन?

✨ पंडित सुधीर तिवारी द्वारा 18 नवंबर 2025 का अंक राशिफल

अंक ज्योतिष के अनुसार आपकी जन्मतिथि से निकला मूलांक आपके स्वभाव, ऊर्जा और दिन के समीकरण को दर्शाता है। 18 नवंबर 2025 का दिन कैसा बीतेगा—यहाँ पढ़िए पंडित सुधीर तिवारी द्वारा आसान शब्दों में तैयार सटीक और आकर्षक अंक राशिफल।
मूलांक 1 – नेतृत्व का दिन, सफलता के संकेत
आज आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। काम में आपकी पकड़ मजबूत दिखेगी और नया अवसर भी मिल सकता है। किसी नए काम की शुरुआत शुभ रहेगी। रिश्तों और घर में आपकी पहल माहौल को मधुर बनाएगी। सेहत भी अच्छी रहेगी, बस जल्दबाज़ी में निर्णय न लें।
मूलांक 2 – भावनात्मक दिन, पर संतुलन बनाए रखेंगे
सुबह मन थोड़ा संवेदनशील रह सकता है, पर आपकी समझदारी हालात संभाल लेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। दोपहर से कामों में तेजी आएगी। पुराने मित्र से बात हो सकती है। शरीर को हाइड्रेट रखें।
मूलांक 3 – भाग्यशाली दिन, अधूरे काम पूरे होंगे
आज सकारात्मकता और ऊर्जा दोनों आपके साथ हैं। रुके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे। घर या कार्यस्थल से सुखद समाचार मिल सकता है। अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपको लाभ दिलाएगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
मूलांक 4 – मेहनत ज्यादा, परिणाम अनुकूल
आज अधिक मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन इसका फल अच्छा मिलेगा। कार्यों में थोड़ी देरी संभव है, पर नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। परिवार में कोई जिम्मेदारी पूरी करनी पड़ सकती है। हल्की थकान या सिरदर्द हो सकता है।
मूलांक 5 – सक्रिय दिन, नए अवसर मिलेंगे
आज आप बेहद एक्टिव रहेंगे। यात्रा या बाहर जाने की योजना बन सकती है। काम में आपके आइडिया असर दिखाएंगे। बिजनेस में नया मौका मिल सकता है। रिश्तों में खुलकर बात करने से गलतफहमियाँ दूर होंगी। स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।
मूलांक 6 – शांत, सौहार्दपूर्ण और खुशियों भरा दिन
घर का माहौल आनंदपूर्ण रहेगा। प्रेम जीवन में मधुर क्षण बनेंगे। काम में जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी पर आप आसानी से निभा लेंगे। धन संबंधी स्थिति स्थिर रहेगी। मीठा कम खाएं।
मूलांक 7 – विचारों में गहराई, मन को मिलेगी स्पष्टता
आज आप कुछ समय अकेले बिताना चाहेंगे। पुराने मामलों को सुलझाने से राहत मिलेगी। ध्यान या आध्यात्मिकता में मन लगेगा। ऑफिस में आपकी शांति और धैर्य सबको प्रभावित करेगा। अधिक सोचने से बचें।
मूलांक 8 – मेहनत अधिक, पर नतीजे मजबूत
जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी। वरिष्ठ आपके काम से प्रसन्न होंगे। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें, पर चिंता न करें—धीरे-धीरे स्थिति बेहतर होगी। परिवार साथ देगा। मानसिक तनाव से बचें।
मूलांक 9 – ऊर्जा, जोश और तेजी का दिन
आज आप रुके हुए कामों को गति दे पाएंगे। नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। रिश्तों में आपका सकारात्मक व्यवहार माहौल को खुशनुमा बनाएगा। हल्का गुस्सा कम रखें। आर्थिक पक्ष सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
डिस्क्लेमर:
इस अंक राशिफल को राष्ट्र की परम्परा प्रमाणित नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली अवश्य किसी विशेषज्ञ को दिखाएँ।

रबी सीजन 2025: गेहूं, चना, सरसों और दालों की बुआई का सर्वोत्तम महीना कौन-सा?

रबी फसल की बुआई का सही समय: कब, कैसे और किन फसलों की हो समयानुसार बोआई — किसान के लिए साल की सबसे निर्णायक तैयारी भारत की कृषि व्यवस्था मौसम चक्र पर आधारित है, और इन्हीं मौसमों के बीच रबी फसलें किसान के लिए उम्मीदों का नया मौसम लेकर आती हैं। ठंडी हवाओं के बीच खेतों की कोमल मिट्टी जब ओस की नमी से भर जाती है, तब रबी की बुआई किसान के लिए सिर्फ खेती नहीं, बल्कि मेहनत, उम्मीद और भविष्य की नींव बन जाती है। “रबी फसल की बुआई का सही समय” को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि समय पर की गई बुआई न सिर्फ पैदावार बढ़ाती है, बल्कि लागत कम करके लाभ को कई गुना बढ़ा देती है।

ये भी पढ़ें – भ्रष्टाचार के साए में दम तोड़ती व्यवस्था: कब जागेगा सिस्टम और कब बदलेगा भविष्य?

इस विस्तृत लेख में जानिए—रबी फसलें कौन-कौन सी हैं, उनकी बुआई का सर्वोत्तम समय, सही तरीके, मिट्टी की तैयारी, सिंचाई और मौसम की सावधानियाँ।
🌾 रबी फसलें कौन-कौन सी होती हैं?
भारत में मुख्य रबी फसलें इस प्रकार हैं—
गेहूं,चना,मसूर,सरसो,जौ,लहसुन,प्याज,मेथी,अलसी,मटर
इन फसलों की बोआई अक्टूबर से जनवरी के बीच होती है, लेकिन हर फसल का अपना अलग अनुकूल समय होता है जिसे किसान को ध्यान में रखना चाहिए।
🌱 रबी फसल की बुआई का सही समय: किस फसल की कब बोआई करें?गेहूं (Wheat) सर्वोत्तम बुआई समय: 15 नवंबर से 25 दिसंबर,देरी का प्रभाव: जनवरी के बाद बोआई करने पर उत्पादन 20–30% घट सकता है।क्यों सही समय जरूरी: अत्यधिक ठंड में अंकुरण धीमा होता है और गर्मी जल्दी पड़ जाए तो दाना ठीक से नहीं बनता।

चना (Gram) बुआई समय: 15 अक्टूबर से 20 नवंबर,देरी का असर: फली कम लगती है, दाना छोटा रह जाता है।विशेष सुझाव: हल्की दोमट या मध्यम काली मिट्टी में यह समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

सरसों (Mustard),बुआई समय: 25 अक्टूबर से 15 नवंबर,सही समय का लाभ: तेल की मात्रा अधिक, फली झड़ने की समस्या कम।
देरी पर असर: पौधा लंबा हो जाता है और उत्पादन घटता है।

ये भी पढ़ें –18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ: वो पल जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी

मसूर (Lentil) बुआई समय: 1 नवंबर से 30 नवंबर,क्यों: समय पर बोआई से फली बनना और फूल आना संतुलित रहता है।

जौ (Barley)बुआई समय: नवंबर का पहला सप्ताह से दिसंबर मध्य तक,विशेष: बीयर उद्योग एवं पशु चारे के लिए उपयुक्त गुणवत्ता इसी समय की बोआई से मिलती है।

लहसुन (Garlic)बुआई समय: 15 अक्टूबर से 30 नवंबर,क्यों: ठंड के मौसम में कलियाँ मजबूत व बड़ी बनती हैं।

प्याज (Onion – Rabi Crop)बुआई समय: अक्टूबर के मध्य से नवंबर के अंत तक विशेष: अत्यधिक ठंड से पौधे जल सकते हैं, इसलिए समय महत्वपूर्ण।

मेथी, अलसी और मटर,बुआई का समय:
मेथी: 20 अक्टूबर से 20 नवंबर
अलसी: 1 नवंबर से 30 नवंबर
मटर: 20 अक्टूबर से 15 नवंबर
सभी दालों और तिलहनों की समय से बोआई फलियों और दानों की संख्या बढ़ाती है।
🌾 कैसे करें रबी फसल की बुआई? (प्रमाणिक और वैज्ञानिक विधि)
1️⃣ मिट्टी की सही तैयारी
खेत को दो से तीन जुताई करके भुरभुरा करें।
अंतिम जुताई में सड़ी गोबर खाद डालें।
कड़क मिट्टी या कठोर पपड़ी को पूरी तरह तोड़ना जरूरी है।
2️⃣ उन्नत बीज का चयन
प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
बीज को फफूंदनाशी से उपचारित कर ही बोएँ।
3️⃣ नमी की उपलब्धता
रबी फसलें नमी-संवेदनशील होती हैं।
पहली सिंचाई समय पर हो जाए तो उत्पादन 25–40% बढ़ जाता है।
4️⃣ बुआई की गहराई और दूरी
गेहूं: 4–5 सेमी गहराई
चना: 5–8 सेमी
सरसों: 3–4 सेमी
अत्यधिक गहराई से अंकुरण कमजोर होता है।
5️⃣ खाद एवं पोषण प्रबंधन
नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश का उचित संतुलन रखें।
जिंक व सल्फर की कमी वाली जमीन में सूक्ष्म पोषक तत्व जरूर दें।
6️⃣ मौसम पर नजर
अचानक पाला, कोहरा या ओलावृष्टि रबी फसलें गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
समय पर सिंचाई और पाला बचाव तकनीक अपनाएं।
🌾 समय पर बुआई क्यों जरूरी है?
रबी फसलें मौसम से सीधे जुड़ी होती हैं। समय से बोआई होने पर—
✔ दाना मोटा बनता है
✔ तेल वाली फसलों में तेल अधिक निकलता है
✔ रोग व कीट प्रकोप कम होता है
✔ उत्पादन 20–40% तक बढ़ जाता है
यह सिर्फ एक कृषि प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान की साल भर की मेहनत और परिवार की खुशहाली की बुनियाद होती है। यही वजह है कि “रबी फसल की बुआई का सही समय” हर किसान के लिए जीवनरेखा की तरह है।

18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ: वो पल जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी

1727 – जयपुर नगर की स्थापना
18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ हमें बताती हैं कि इस दिन 1727 में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने वास्तुकला और नगर-योजना की दृष्टि से अद्भुत शहर जयपुर की स्थापना की। बंगाल मूल के प्रतिभावान वास्तुकार विद्याधर चक्रवर्ती ने इस नगर के वैज्ञानिक निर्माण की नींव रखी। यह वही क्षण था जिसने राजस्थान को एक योजनाबद्ध, सांस्कृतिक और कला-संपन्न राजधानी दी, जो आज भी शिल्प, रंग और परंपरा का अदम्य प्रतीक है।

  1. ये भी पढ़ें –यूपी की जहरीली हवा में सुधार नहीं: नोएडा-गाजियाबाद गैस चेंबर बने, बढ़ता AQI बिगाड़ रहा सेहत
  2. 1738 – फ्रांस एवं ऑस्ट्रिया के बीच शांति समझौता
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ यूरोपीय इतिहास का बड़ा परिवर्तन भी दर्शाती हैं। 1738 में फ्रांस और ऑस्ट्रिया ने दीर्घ संघर्षों को विराम देते हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों को स्थिरता का अवसर दिया और दोनों साम्राज्यों के कूटनीतिक संबंधों में नया मोड़ लाया। इससे यूरोप में शक्ति संतुलन स्थापित हुआ और व्यापार तथा सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  3. ये भी पढ़ें –IPL में कप्तानी के दबाव पर केएल राहुल का बड़ा खुलासा: टीम मालिकों के सवाल बनते थे सबसे बड़ी चुनौती
  4. 1772 – पेशवा नारायणराव का सिंहासन पर आरूढ़ होना
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ भारतीय राजनीति का एक संवेदनशील अध्याय भी उजागर करती हैं। 1772 में पेशवा माधवराव प्रथम के छोटे भाई नारायणराव ने शासन संभाला। उनकी युवावस्था में मिली यह सत्ता मराठा साम्राज्य के लिए कठिन दौर की शुरुआत थी। सत्ता-समर, आंतरिक कलह और राजनीतिक साज़िशों ने उनके कार्यकाल को चुनौतीपूर्ण बनाया। यह घटना मराठों के उत्थान-पतन की महत्वपूर्ण कड़ी बनकर इतिहास में दर्ज है।
  5. ये भी पढ़ें –लाल किला ब्लास्ट जांच में बड़ा खुलासा: 68 संदिग्ध मोबाइल नंबर पर पाकिस्तान और तुर्किये से आए कॉल
  6. 1833 – हॉलैंड और बेल्जियम के बीच जोनहोवेेन संधि
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ 1833 की उस संधि को भी याद करती हैं जब हॉलैंड और बेल्जियम ने वर्षों के तनाव के बाद ‘जोनहोवेेन संधि’ की। यह समझौता सीमाएँ तय करने, शासन संरचना को स्थिर करने तथा आपसी व्यापार को सुदृढ़ बनाने का आधार बना। यूरोप में आधुनिक सीमांकन व्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने में इस संधि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
  7. ये भी पढ़ें –“इंग्लिश में 95+ चाहिए? तो 2025 के ये दोहराए जाने वाले सवाल अभी तैयार कर लो!”
  8. 1909 – अमेरिका का निकारागुआ पर सैन्य आक्रमण
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ विश्व-राजनीति की कठोर सच्चाई को भी सामने लाती हैं। 1909 में अमेरिका ने निकारागुआ पर हमला किया, जिसने मध्य अमेरिका में शक्ति संघर्ष को और तीखा कर दिया। यह हस्तक्षेप राजनीतिक दबाव, शासन परिवर्तन और सैन्य प्रभुत्व की नीति का हिस्सा था। इस घटना ने क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता पैदा की और अमेरिका की विदेश नीति पर गहरी आलोचनाएँ हुईं।
  9. ये भी पढ़ें –भ्रष्टाचार के साए में दम तोड़ती व्यवस्था: कब जागेगा सिस्टम और कब बदलेगा भविष्य?
  10. 1918 – लातविया ने रूस से स्वतंत्रता की घोषणा
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ हमें स्वतंत्रता की भावना का भी अनुभव कराती हैं। 1918 में लातविया ने रूस के प्रभुत्व से निकलकर स्वतंत्र राष्ट्र बनने की घोषणा की। प्रथम विश्व युद्ध की उथल-पुथल के बीच यह घोषणा नागरिकों के आत्मबल और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बनी। बाद में लातविया ने लोकतांत्रिक ढांचे की नींव रखी और यूरोपीय देशों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।
  11. 1948 – नारायणी स्टीमर दुर्घटना, 500 लोगों की मौत
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ त्रासदी को भी याद करती हैं। 1948 में पटना के पास स्टीमर ‘नारायणी’ के पलटने से लगभग 500 लोग डूब गए। यह भारत की सबसे विनाशकारी जल-दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है। कमजोर ढांचे, अत्यधिक भीड़ और प्रशासनिक लापरवाही की वजह से यह हादसा घटा। इस घटना ने नदी परिवहन सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी।
  12. 1951 – ब्रिटिश सेना का इस्मालिया क्षेत्र पर कब्ज़ा
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ उपनिवेशवाद के दौर की कटु सच्चाई भी उजागर करती हैं। 1951 में ब्रिटेन ने मिस्र के इस्मालिया क्षेत्र पर कब्ज़ा कर राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। यह कार्रवाई स्वेज नहर पर नियंत्रण के लिए की गई थी। इस कदम ने अरब दुनिया में क्रांति की लहर पैदा की और अंततः मिस्र के स्वतंत्रता आंदोलन को और सशक्त किया।
  13. 1956 – मोरक्को को स्वतंत्रता मिली
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ अफ्रीकी महाद्वीप की आज़ादी की गूंज भी प्रस्तुत करती हैं। 1956 में मोरक्को ने लंबे संघर्षों के बाद औपनिवेशिक नियंत्रण से छुटकारा पाया। राजा मोहम्मद पंचम के नेतृत्व में यह स्वतंत्रता आंदोलन विजय तक पहुँचा। इस स्वतंत्रता ने अफ्रीका में राष्ट्रवाद और मुक्ति संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान की, जो बाद के वर्षों में कई देशों के स्वतंत्र होने का आधार बनी।
  14. 1959 – INS विराट (तब HMS Hermes) का कमीशन
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ सैन्य शक्ति के क्षेत्र को भी छूती हैं। 1959 में इस विशाल युद्धपोत को ब्रिटिश रॉयल नेवी में कमीशन किया गया। बाद में भारत की नौसेना में शामिल होकर यह INS विराट बना, जिसने समुद्री सुरक्षा और सैन्य तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके संचालन ने भारतीय नौसैनिक इतिहास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
  15. 1972 – बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की एक ऐतिहासिक पहल भी दर्शाती हैं। 1972 में बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया। इससे ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ जैसे अभियानों को मजबूती मिली। यह निर्णय जैव-विविधता बचाने, वन्यजीव संरक्षण बढ़ाने और प्रकृति के संतुलन को सुरक्षित रखने का प्रतीक साबित हुआ।
  16. 1994 – UN ने फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता दी
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय न्याय को भी दर्शाती हैं। 1994 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन की जनता को आत्मनिर्णय, स्वतंत्रता और राष्ट्र-निर्माण के अधिकार को औपचारिक मान्यता दी। इस फैसले ने वर्षों से संघर्ष झेल रहे क्षेत्र को नई उम्मीद दी और वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण दिशा प्रदान की।
  17. 2002 – UN हथियार निरीक्षकों का बगदाद पहुंचना
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ इराक निशस्त्रीकरण संकट को भी दर्ज करती हैं। हेंस ब्लिक्स के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र का पहला हथियार निरीक्षण दल बगदाद पहुँचा। यह कदम इराक के कथित हथियार कार्यक्रमों की जांच, वैश्विक सुरक्षा और युद्ध की आशंकाओं को कम करने के प्रयासों का हिस्सा था। इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
  18. 2003 – अर्नोल्ड श्वार्ज़ेनेगर का कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर बनना
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ राजनीतिक इतिहास में एक अनोखा मोड़ भी पेश करती हैं। हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड श्वार्ज़ेनेगर ने इस दिन कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर पद की शपथ ली। एक फिल्म स्टार का विश्व के सबसे प्रभावशाली राज्यों में से एक की सत्ता संभालना लोकतंत्र की व्यापकता और परिवर्तनशीलता का प्रेरक उदाहरण बन गया।
  19. 2005 – महिंदा राजपक्षे बने श्रीलंका के राष्ट्रपति
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ दक्षिण एशिया की राजनीति को भी छूती हैं। 2005 में महिंदा राजपक्षे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बने। इसी दिन इराक में बम विस्फोट में 44 लोग मारे गए और संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चिंता व्यक्त की। यह दिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति का संवेदनशील प्रतीक बना।
  20. 2008 – आर्थिक मंदी से निपटने के लिए 50,000 करोड़ का राहत पैकेज
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ भारत की आर्थिक नीति के परिवर्तन का दिन भी रेखांकित करती हैं। 2008 में वैश्विक मंदी के बीच केंद्र सरकार ने आधारभूत परियोजनाओं हेतु 50,000 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया। इसी दिन बसपा ने नटवर सिंह को पार्टी से निष्कासित किया तथा भारत–मिस्र के बीच पाँच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यह दिन राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक गतिविधियों से भरा रहा।
  21. 2013 – नासा का MAVEN मिशन मंगल के लिए प्रक्षेपित
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ विज्ञान की ऊँचाइयों को भी दर्शाती हैं। 2013 में नासा ने MAVEN अभियान को मंगल की कक्षा में भेजा। यह मिशन ग्रह के वायुमंडल, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरचना का अध्ययन करने के उद्देश्य से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इस प्रक्षेपण ने मानव सभ्यता को अंतरिक्ष अन्वेषण का एक नया अध्याय प्रदान किया।
  22. 2017 – मानुषी छिल्लर ने जीता मिस वर्ल्ड 2017 का ताज
    18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ भारत के लिए गौरव का क्षण भी प्रस्तुत करती हैं। 2017 में मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि ने युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, सौंदर्य के साथ बुद्धिमत्ता और सामाजिक ज़िम्मेदारी का संदेश दिया।

भ्रष्टाचार के साए में दम तोड़ती व्यवस्था: कब जागेगा सिस्टम और कब बदलेगा भविष्य?

सोमनाथ मिश्र की प्रस्तुति

भारत की व्यवस्था की सबसे बड़ी बुनियादी बीमारी यदि किसी एक शब्द में समझानी हो तो वह है—भ्रष्टाचार। आज यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामान्य व्यवहार की तरह समाज में फैल चुका है। दफ्तरों में फाइलें तभी आगे बढ़ती हैं जब “गति शुल्क” दिया जाए। योजनाएँ कागज पर चमकती हैं, लेकिन ज़मीन पर आधी-अधूरी दिखाई देती हैं। करोड़ों का बजट जारी होता है, मगर जनता को मिलता है सिर्फ बहानों का ढेर।
भ्रष्टाचार का अर्थ सिर्फ पैसों की चोरी नहीं—यह विश्वास की हत्या है, आम आदमी के सपनों को कुचलने वाली ताकत है। सबसे गंभीर बात यह है कि लोग इसे “सिस्टम का हिस्सा” मानकर स्वीकार करने लगे हैं। जब अनैतिकता सामान्य बन जाए, तो समझिए समाज की नींव हिलने लगी है।
सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार के 10 आसानी से समझ आने वाले उदाहरण

  1. फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत – कई दफ्तरों में काम तभी होता है जब ‘चाय-पानी’ की मांग पूरी हो जाए।
  2. सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थी – गरीबों के लिए बनी योजनाओं में नकली नाम जोड़कर फंड की बंदरबांट।
  3. सड़क निर्माण में घटिया सामग्री – मोटा बजट आता है लेकिन सड़क 6 महीने में ही टूटने लगती है।
  4. स्कूलों में फर्जी उपस्थिति – शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन है, पर कई जगह कागजों में ही पूरी कर दी जाती है।
  5. अस्पतालों में दलाली – सरकारी अस्पताल में मुफ्त सुविधाएँ होते हुए भी एजेंट मरीजों को निजी अस्पताल भेज देते हैं।
  6. पंचायत स्तर पर कमीशनखोरी – मनरेगा, आवास या शौचालय योजनाओं में 10–20% कमीशन की खुली मांग।
  7. पुलिस वसूली – ट्रक चेकिंग, लाइसेंस, या छोटे विवादों में अनावश्यक “समझौता राशि” का चलन।
  8. रेवन्यू विभाग में फाइलें अटकाना – खसरा-खतौनी में नाम जोड़ने या सुधार के लिए महीनों तक दौड़ लगानी पड़ती है।
  9. नगरपालिका में ठेके का खेल – सफाई, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति के काम कागज पर पूरा दिखा दिया जाता है।
  10. परीक्षाओं में नकल व पेपर लीक – शिक्षा जैसी पवित्र व्यवस्था पर भी घोटालों का साया, भविष्य अंधेरे में।
    ये उदाहरण बताते हैं कि समस्या केवल पैसों की नहीं—सोच और सिस्टम दोनों की खराबी है।
    क्या समाधान असंभव है? बिल्कुल नहीं। ये 4 कदम बदलाव की ताकत बन सकते हैं
  11. डिजिटलाइजेशन और ई-गवर्नेंस
    जहाँ भी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन हुईं, वहाँ भ्रष्टाचार अपने-आप कम हुआ। ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-टेंडरिंग… इनसे बिचौलियों की भूमिका घटती है।
  12. पारदर्शिता बढ़ाना
    हर योजना का बजट, उपयोग, लाभार्थी सूची और कार्य स्थिति सार्वजनिक होना चाहिए। आम नागरिक आसानी से जांच सके कि पैसा कहाँ गया।
  13. कड़े दंड और तेज कार्रवाई
    भ्रष्ट अधिकारी पर त्वरित कार्रवाई, सेवा से बर्खास्तगी और कानूनी दंड—ये संदेश देते हैं कि भ्रष्टाचार “जोख़िम” वाला काम है।
  14. जनता की जागरूकता
    जब लोग रिश्वत देने से इनकार करेंगे, शिकायत दर्ज कराने से नहीं डरेंगे, और “सिस्टम ऐसी ही चलता है” वाली सोच छोड़ देंगे, तभी बदलाव स्थायी होगा।
    भ्रष्टाचार से लड़ाई किसकी जिम्मेदारी?
    सिर्फ सरकार की नहीं, सिर्फ नागरिकों की नहीं—यह संयुक्त जिम्मेदारी है।
    सिस्टम तभी सुधरेगा जब:
    आम लोग “ना” कहना सीखें
    अधिकारी “दंड” देना सीखें
    तकनीक “पारदर्शिता” लाए
    और समाज “ईमानदारी” को सम्मान दे
    जब यह चारों बातें साथ आएंगी, तभी ईमानदारी का सूरज उगेगा, और व्यवस्था भ्रष्टाचार के साए से बाहर आएगी।

“इंग्लिश में 95+ चाहिए? तो 2025 के ये दोहराए जाने वाले सवाल अभी तैयार कर लो!”

कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। छात्र सबसे अधिक जिस प्रश्न की तलाश करते हैं, वह है—कौन से Most Expected Questions इस साल इंग्लिश पेपर में दोहराए जा सकते हैं?
इंग्लिश ऐसा विषय है जिसमें सही रणनीति और पैटर्न समझकर बहुत आसानी से अच्छे अंक हासिल किए जा सकते हैं। पिछले पाँच वर्षों के प्रश्नपत्रों के गहन विश्लेषण के आधार पर हमने आपके लिए तैयार किया है—Class 10 English Exam 2025 का सबसे भरोसेमंद और स्कोर-बूस्टर प्रश्न बैंक।


⭐ 1. Prose (First Flight) – पिछले वर्षों के सबसे अहम प्रश्न
पिछले पाँच सालों के प्रश्नों में कुछ चैप्टर लगातार पूछे जाते रहे हैं। इनमें न केवल कहानी का भाव, बल्कि पात्रों का मनोविज्ञान भी मुख्य हिस्सा रहा है।
बार-बार पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न

A Letter to God:
Lencho की ईश्वर में अटूट आस्था का वर्णन करें।
Nelson Mandela: Long Walk to Freedom:
Mandela किन आदर्शों के लिए संघर्ष करते हैं?
Two Stories About Flying – The Young Seagull:
Seagull के उड़ान भरने के संघर्ष का विश्लेषण करें।
From the Diary of Anne Frank:
Anne Frank की लेखनी में संवेदनशीलता और हास्य का वर्णन करें।
The Hundred Dresses:
Wanda की कहानी हमें bullying और empathy के बारे में क्या सिखाती है?
इस वर्ष 2025 में आने की उच्च संभावना वाले प्रश्न
Anne Frank की diary entries किशोरावस्था के मनोभाव को कैसे दर्शाती हैं?
Seagull की कहानी छात्र जीवन में प्रयास और आत्मविश्वास से कैसे जुड़ती है?
2. Poetry (First Flight) – महत्वपूर्ण कविताएँ और अपेक्षित प्रश्न
Poetry सेक्शन में theme, symbols और imagery से जुड़े प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
Repeated Questions
Dust of Snow:
कवि के mood change का महत्व समझाइए।Fire and Ice:
विनाश के दो प्रतीकों का विश्लेषण करें।
A Tiger in the Zoo:
पिंजरे और जंगल का विरोधाभास वर्णन करें।
Amanda!
Amanda की आज़ादी की चाह पर टिप्पणी करें।
The Ball Poem:
गेंद खोने से बच्चा कौन-सा life lesson सीखता है?
Most Expected 2025
Fire and Ice कविता की थीम आधुनिक समाज से कैसे जुड़ती है?
Amanda कविता बच्चों की स्वतंत्रता की भावना को कैसे दर्शाती है?
⭐ 3. Footprints Without Feet – Supplementary Reader
यह सेक्शन moral lessons और character development पर आधारित प्रश्नों के लिए जाना जाता है।
Repeated Important Questions
A Triumph of Surgery:
Tricki की हालत के लिए Mrs. Pumphrey की लापरवाही कैसे ज़िम्मेदार थी?
The Thief’s Story:
Hari Singh को Anil से क्या सीख मिलती है?
Footprints Without Feet:
अदृश्य व्यक्ति के व्यवहार और परिणामों पर टिप्पणी करें।
The Necklace:
Matilda की लालच उसके जीवन को कैसे प्रभावित करती है?
Bholi:
Bholi का आत्मविश्वास कैसे बदलता है?
Most Expected 2025
Bholi का चरित्र-विकास समाज के लिए क्या संदेश देता है?
The Thief’s Story में Trust की भूमिका समझाइए।
⭐ 4. Grammar – सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले टॉपिक
पिछले पाँच वर्षों में यह pattern बिल्कुल स्थिर रहा है:
Repeated Topics

Gap Filling: Modals (should, could, must), Tenses

यदि छात्र इन Most Expected Questions के आधार पर तैयारी करें, तो Class 10 English Exam 2025 में उच्च अंक प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। हर टॉपिक को संक्षिप्त नोट्स, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और नियमित प्रैक्टिस के साथ तैयार करें—सफलता निश्चित है।
राष्ट्र की परम्परा इसकी पुष्टि नहीं कहता की यह प्रश्न पत्र हो सकता हैं संभावित है। आप तैयारी करे अच्छे शिक्षक के मार्ग दर्शन में।

लाल किला ब्लास्ट जांच में बड़ा खुलासा: 68 संदिग्ध मोबाइल नंबर पर पाकिस्तान और तुर्किये से आए कॉल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। लाल किला के पास हुए बम धमाके की जांच में पुलिस को कई चौंकाने वाले तकनीकी सुराग मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि सुनहरी बाग पार्किंग और ब्लास्ट साइट पर कुल 68 संदिग्ध मोबाइल नंबर एक ही समय पर सक्रिय थे। इन सभी नंबरों पर पाकिस्तान और तुर्किये से कॉल आने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद जांच और तेज कर दी गई है।

विदेशी कॉल और सर्वर से जुड़ी गतिविधियों पर बढ़ी निगरानी

सूत्र बताते हैं कि इन संदिग्ध मोबाइल नंबरों के माध्यम से पाकिस्तान और तुर्किये से कॉल, इंटरनेट रूटिंग और विदेशी सर्वर कनेक्शन की गतिविधियां दर्ज हुई हैं।
धमाके के बाद पुलिस ने लाल किला और सुनहरी बाग इलाके के मोबाइल टावरों से डंप डेटा इकट्ठा किया, जिससे डिजिटल मूवमेंट और कॉल पैटर्न से जुड़े कई तकनीकी तथ्य सामने आए हैं।

डॉ. उमर की कार के पास 187 फोन मिले सक्रिय

जांच में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी मोबाइल फोन-मैपिंग से मिली।

डॉ. उमर की कार सुनहरी बाग पार्किंग में 3 घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही

इस दौरान 30 मीटर के दायरे में 187 मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए

ब्लास्ट टाइम पर 912 फोन मिले सक्रिय

धमाके वाली जगह पर घटनास्थल से:

5 मिनट पहले और

5 मिनट बाद

कुल 912 फोन सक्रिय मिले। दोनों स्थानों के डिजिटल लोकेशन डेटा को मिलाने पर 68 मोबाइल नंबर ऐसे पाए गए जो दोनों लोकेशन पर एक ही समय सक्रिय थे। यही नंबर अब जांच का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

एक ही विदेशी सर्वर और IP-स्विचिंग बढ़ा रही शंका

सूत्रों के अनुसार, कई संदिग्ध नंबर एक ही विदेशी सर्वर से जुड़े पाए गए हैं। यह सर्वर पाकिस्तान और तुर्किये के IP-क्लस्टर के बीच लगातार स्विच ओवर कर रहा था।
एजेंसियों को आशंका है कि गतिविधियों को छुपाने के लिए प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल किया गया।

दो फोन में मिली ‘स्पूफिंग’ की निशानियां

शुरुआती जांच में घटनास्थल पर दो ऐसे फोन मिले हैं जिनमें:

लोकेशन हर मिनट बदल रही थी

यह संकेत करता है कि फोन को स्पूफ किया गया था (यानी कृत्रिम रूप से नेटवर्क लोकेशन बदलकर दिखाया गया)

जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि विस्फोट से कुछ मिनट पहले ये फोन किस विदेशी IP से जुड़े थे और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।

IPL में कप्तानी के दबाव पर केएल राहुल का बड़ा खुलासा: टीम मालिकों के सवाल बनते थे सबसे बड़ी चुनौती

0

IPL 2026: भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज केएल राहुल ने पहली बार खुलकर बताया है कि इंडियन प्रीमियर लीग में कप्तानी करना कितना मुश्किल होता है। पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी कर चुके राहुल ने एक इंटरव्यू में कहा कि IPL में कप्तानी का दबाव इंटरनेशनल क्रिकेट से कई गुना ज्यादा होता है।

IPL में कप्तानी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं: राहुल का बयान

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे से बातचीत के दौरान राहुल ने बताया कि IPL कप्तान का रोल ग्राउंड पर फैसले लेने से कहीं आगे जाता है।
कप्तान को—

  1. टीम मैनेजमेंट से लगातार मीटिंग्स
  2. डेटा एनालिटिक्स की ब्रीफिंग
  3. नेट सेशन की निगरानी
  4. मैच से पहले और बाद की रणनीतिक बैठकों

और इन सबकी रिपोर्ट टीम मालिकों को देने तक
—सब कुछ संभालना पड़ता है।

राहुल ने स्वीकार किया कि इतनी जिम्मेदारियों के बीच कई बार उन्हें लगता था कि उनका स्वयं का खेल पीछे छूट रहा है।

“IPL खत्म होते-होते इंटरनेशनल क्रिकेट से ज्यादा थकान होती है”

केएल राहुल ने माना कि IPL का मानसिक दबाव इतना अधिक होता है कि टूर्नामेंट समाप्त होते-होते वह पूरे इंटरनेशनल सीजन से ज्यादा थकान महसूस करते थे।
लगातार प्लानिंग, टीम बैलेंस बनाना, खिलाड़ियों की फॉर्म को मैनेज करना—ये सभी चीजें कप्तानी को बेहद चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।

टीम मालिकों के अजीब सवाल बढ़ा देते थे तनाव

राहुल ने टीम मालिकों से जुड़े एक बड़े सच का खुलासा किया।
उनके मुताबिक कई टीम मालिकों को क्रिकेट की गहरी समझ नहीं होती, लेकिन वे ऐसे सवाल पूछते हैं जो कप्तान और कोच पर अतिरिक्त दबाव डाल देते हैं, जैसे—

“वह खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में क्यों है?”

“विरोधी टीम ने 200 कैसे बना दिए और हम 120 क्यों नहीं बना पाए?”

“उनके स्पिनर हमसे बेहतर गेंदबाजी क्यों कर गए?”

राहुल के अनुसार ये ‘अनजान सवाल’ कप्तानी की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक थे।

कप्तानी छोड़ने के बाद KL राहुल ने पाई मानसिक राहत

2022 से 2024 तक लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान रहने के बाद राहुल ने 2025 में कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। अब वे दिल्ली कैपिटल्स के लिए एक नियमित खिलाड़ी के रूप में खेल रहे हैं।
राहुल का कहना है कि कप्तानी छोड़ने के बाद अब वे अपने खेल पर ज्यादा फोकस कर पा रहे हैं और मानसिक रूप से भी काफी हल्के महसूस करते हैं।

यूपी की जहरीली हवा में सुधार नहीं: नोएडा-गाजियाबाद गैस चेंबर बने, बढ़ता AQI बिगाड़ रहा सेहत

उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में बढ़ती सर्दी के साथ हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। पिछले दो दिनों से शीतलहर के बढ़ने के कारण सुबह और शाम के समय घना कोहरा और स्मॉग छाया हुआ है। धुएं और धुंध की वजह से आसमान में प्रदूषण की मोटी परत बन गई है, जिससे हवा अत्यधिक जहरीली हो गई है। राज्य के कई जिलों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से 450 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है और सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है।

दिल्ली से सटे नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, मेरठ, हापुड़ और बागपत में प्रदूषण खतरनाक स्तर पार कर चुका है। वहीं मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर की हवा भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

गाजियाबाद में AQI 450 के पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, गाजियाबाद की स्थिति सबसे गंभीर है।

लोनी में AQI 452, वसुंधरा में 413, संजय नगर में 410, इंदिरापुरम में 395

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हालात चिंताजनक हैं। ग्रेटर नोएडा, नॉलेज पार्क-5: AQI 449, नोएडा सेक्टर 116: 403, सेक्टर 125: 375

मेरठ के जयभीम नगर में एक्यूआई 414 और पल्लवपुरम में 404 दर्ज किया गया।

यूपी के अन्य जिलों में भी हवा ‘बेहद खराब’

बागपत: 416, हापुड़: 411, बुलंदशहर: 346, मुजफ्फरनगर: 320

राजधानी लखनऊ में हालात थोड़े बेहतर हैं, जहां अधिकांश स्टेशनों पर AQI ‘मॉडरेट’ है। केवल लालबाग स्टेशन पर हवा ‘खराब’ श्रेणी में मापी गई।

बढ़ते प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रभाव

जहरीली हवा का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिख रहा है। अस्पतालों में सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। लोगों को सिरदर्द, आंखों में जलन, खांसी और सांस की दिक्कत डॉक्टरों ने सुबह की सैर करने से परहेज करने की सलाह दी है

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है परेशानी

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यूपी में शीतलहर का दौर जारी रहेगा। तापमान में और गिरावट के साथ प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।

जानें किस राशि की खुलेगी किस्मत,करियर, धन और प्रेम का ज्योतिषीय विश्लेषण

18 नवंबर 2025 का राशिफल — पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय
आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक जानें किसे मिलेगा लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी

आज 18 नवंबर 2025, मंगलवार का दिन हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आ रही है। करियर, शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, आर्थिक स्थिति तथा कला-संगीत के क्षेत्र में आज किस राशि का दिन कैसा रहेगा—आइए जानते हैं विस्तार से।

ये भी पढ़ें – हनुमान जी का पम्पापुर आगमन: जन्म से लेकर किष्किंधा यात्रा तक की अद्भुत दिव्य कथा

मेष (Aries) — “अ”
आज का फल
आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। करियर में नए मौके मिलेंगे। प्रेम जीवन मधुर रहेगा।
कार्य/व्यवसाय
नई शुरुआत के लिए अनुकूल समय। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन के संकेत।
शिक्षा
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के संकेत।
कला/संगीत
रचनात्मकता चरम पर रहेगी।
राजनीति
समर्थन बढ़ेगा, उच्च स्तर पर चर्चा का अवसर।
प्रशासनिक क्षेत्र
जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी, सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति
मजबूत, धन लाभ की संभावना।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

ये भी पढ़ें – आज क्या करे, कहा जाए,जाने आज के पंचाग से कब तक है शुभ मुहूर्त, कब अशुभ समय

वृषभ (Taurus) — “ब, व”
आज का फल
दिन प्रोडक्टिव रहेगा। मेहनत का फल मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय
नए संपर्क लाभदायक होंगे।
शिक्षा
स्टूडेंट्स के लिए सीखने का सुनहरा दिन।
कला/संगीत
नई परियोजना शुरू करने का समय।
राजनीति
संगठन में आपकी पहचान मजबूत होगी।
प्रशासन
निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।
आर्थिक स्थिति
स्थिर, बचत बढ़ेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
उपाय: माता लक्ष्मी की उपासना करें।

ये भी पढ़ें – “बचपन को बचाइए: 18 नवंबर—बाल यौन शोषण रोकथाम का वैश्विक संकल्प”

मिथुन (Gemini) — “क, छ, घ”
आज का फल
आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी, स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
कार्य/व्यवसाय
पुराना अटका काम पूरा होगा।
शिक्षा
किसी विषय को गहराई से समझने का समय।
कला/संगीत
रचनात्मकता में सुधार।
राजनीति
बयानबाज़ी से बचें।
प्रशासन
नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
आर्थिक स्थिति
संयमित खर्च की सलाह।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 5
उपाय: विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
कर्क (Cancer) — “ड, ह”
आज का फल
रिश्तों में धैर्य रखें, आर्थिक मामलों में सावधानी।
कार्य/व्यवसाय
नया निवेश टालें।
शिक्षा
ध्यान में कमी हो सकती है।
कला/संगीत
मूड स्विंग के बावजूद कार्य सफल होगा।
राजनीति
विरोध का सामना करना पड़ेगा।
प्रशासन
फैसले सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति
लोभ से दूर रहें।
शुभ रंग: क्रीम
शुभ अंक: 2
उपाय: शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।
सिंह (Leo) — “म, ट”
आज का फल
करियर में तरक्की के संकेत, उत्साह बना रहेगा।
कार्य/व्यवसाय
लाभदायक निर्णय लेंगे।
शिक्षा
उच्च शिक्षा के लिए शुभ।
कला/संगीत
प्रशंसा और अवसर दोनों मिलेंगे।
राजनीति
महत्वपूर्ण पद की प्राप्ति।
प्रशासन
प्रमोशन की संभावना।
आर्थिक स्थिति
आय में वृद्धि।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
उपाय: सूर्य देव को जल चढ़ाएँ।
कन्या (Virgo) — “प, ठ”
आज का फल
तनाव दूर होगा। योजनाओं में सफलता।
कार्य/व्यवसाय
ऑफिस में आपकी प्लानिंग की तारीफ होगी।
शिक्षा
ध्यान केंद्रित रहेगा।
कला/संगीत
नई शुरुआत लाभदायक।
राजनीति
सपोर्ट बढ़ेगा।
प्रशासन
फाइलवर्क तेजी से निपटेगा।
आर्थिक स्थिति
बचत बढ़ेगी।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 7
उपाय: श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
तुला (Libra) — “र, त”
आज का फल
निर्णय लेने में गट फीलिंग सही साबित होगी।
कार्य/व्यवसाय
टीम आपका साथ देगी।
शिक्षा
नई सीखने की इच्छा बढ़ेगी।
कला/संगीत
प्रोजेक्ट को पहचान मिलेगी।
राजनीति
जनसमर्थन बढ़ेगा।
प्रशासन
नई रणनीति सफल होगी।
आर्थिक स्थिति
संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 3
उपाय: माता दुर्गा को लाल फूल चढ़ाएँ।
वृश्चिक (Scorpio) — “न, य”
आज का फल
आत्मविश्वास बढ़ेगा, प्रगति के संकेत।
कार्य/व्यवसाय
नई डील हाथ लग सकती है।
शिक्षा
फोकस में वृद्धि।
कला/संगीत
रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति
जनसभा में सफलता।
प्रशासन
नई जिम्मेदारियाँ।
आर्थिक स्थिति
सकारात्मक बदलाव।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 8
उपाय: मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएँ।
धनु (Sagittarius) — “भ, ध”
आज का फल
मन शांत रहेगा। रिश्तों में सुधार।
कार्य/व्यवसाय
पुराने प्रयास रंग लाएँगे।
शिक्षा
विदेश शिक्षा के लिए शुभ।
कला/संगीत
नई पहचान बन सकती है।
राजनीति
समर्थन मजबूत।
प्रशासन
उच्च अधिकारियों की प्रशंसा मिलेगी।
आर्थिक स्थिति
मजबूत व स्थिर।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 4
उपाय: गाय को रोटी खिलाएँ।
मकर (Capricorn) — “ख, ज”
आज का फल
धन वृद्धि के योग। भावनात्मक संतुलन अच्छा रहेगा।
कार्य/व्यवसाय
निवेश से लाभ।
शिक्षा
आज पढ़ाई तेजी से होगी।
कला/संगीत
सृजनात्मकता जागेगी।
राजनीति
वरिष्ठों का आशीर्वाद।
प्रशासन
निर्णय क्षमता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति
नई आय मिलेगी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 8
उपाय: शनि देव को तिल अर्पित करें।
कुंभ (Aquarius) — “ग, स, श”
आज का फल
जीवन में सकारात्मक बदलाव।
कार्य/व्यवसाय
पुराना तनाव खत्म।
शिक्षा
नई सीखने की इच्छा बढ़ेगी।
कला/संगीत
क्रिएटिव आउटपुट शानदार।
राजनीति
पुरानी बाधा दूर होगी।
प्रशासन
नई उपलब्धियां।
आर्थिक स्थिति
खर्च नियंत्रण में।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 11
उपाय: रूद्राभिषेक करें।
मीन (Pisces) — “द, च, थ”
आज का फल
फिटनेस पर फोकस करें, दिन शांतिपूर्ण।
कार्य/व्यवसाय
काम समय पर पूरा होगा।
शिक्षा
एकाग्रता मजबूत।
कला/संगीत
इमोशनल प्रोजेक्ट सफल।
राजनीति
नई शुरुआत का संकेत।
प्रशासन
कार्य गति सही रहेगी।
आर्थिक स्थिति
मध्यम, लाभ संभव।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 7
उपाय: विष्णु मंदिर जाएँ।
डिस्क्लेमर:
इस राशिफल में दी गई जानकारियाँ प्राचीन वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करता। अपनी व्यक्तिगत कुंडली और भविष्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए किसी अधिकृत ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श लें।

हनुमान जी का पम्पापुर आगमन: जन्म से लेकर किष्किंधा यात्रा तक की अद्भुत दिव्य कथा

हनुमान जी की अद्भुत यात्रा – पम्पापुर आगमन से पहले की दिव्य पौराणिक कथा

हनुमान जी का चरित्र भारतीय सनातन साहित्य का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसमें शक्ति, भक्ति, ज्ञान और त्याग—चारों का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। रामायण की कथा में उनका प्रवेश ही नहीं, बल्कि उनके बाल्यकाल से लेकर पम्पापुर पहुँचने तक का हर प्रसंग दिव्यता और प्रेरणा से भरपूर है। आज के इस एपिसोड–3 में हम प्रस्तुत कर रहे हैं—हनुमान जी के पम्पापुर पहुँचने से पहले का पवित्र, शास्त्रोक्त और पौराणिक वर्णन, जिसे पढ़कर मन भाव-विभोर हो उठता है।

ये भी पढ़ें – 🌺 हनुमान जी: अडिग भक्ति और अद्भुत शक्ति का अद्वितीय प्रतीक

🌿 देवताओं का वरदान और बाल हनुमान की अद्भुत शक्तियाँ
वायु के अंशावतार हनुमान जी का जन्म त्रेता युग में केसरी और अंजना के घर हुआ। शास्त्रों में उल्लेख है कि जन्म लेते ही उनके कण-कण में अपार तेज और अलौकिक शक्ति समाहित थी। बाल्यावस्था में ही सूर्यदेव को फल समझकर निगल जाने की घटना ने देवताओं को चकित कर दिया। इंद्र का वज्र लगने के बाद वायु नाराज होकर ब्रह्मांड से प्राणवायू को रोक देते हैं, और संसार संकट में पड़ जाता है।
तब ब्रह्माजी, इंद्र, वरुण, कुबेर, सूर्य, यम—सभी देवता प्रकट होकर बाल हनुमान को विशेष वरदान देते हैं। उन्हें अमरत्व, बुद्धि, गति, अपराजेयता और दिव्य तेज का वरदान प्राप्त होता है। यही वरदान आगे चलकर उनके जीवन की दिशा और धर्म-यात्रा तय करते हैं।

ये भी पढ़ें – चंद्रमा की उत्पत्ति—दैवी लीला या ब्रह्मांडीय टक्कर का अनकहा रहस्य?

🌿 शिक्षा का आरंभ—सूर्यदेव का गुरु बनना
हनुमान जी गुरु के प्रति आदर्श भक्ति का उदाहरण हैं। वे स्वयं सूर्यदेव के रथ के संग चलते हुए शिक्षा प्राप्त करते हैं—यह अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत प्रसंग है।
सूर्यदेव ने उन्हें वेद, व्याकरण, चिकित्सा, नीति, योग और समस्त विद्या सिखाई। बदले में गुरु-दक्षिणा स्वरूप हनुमान जी ने अपने पुत्र सुग्रीव की सेवा का वचन दिया। यही वचन आगे चलकर राम–सुग्रीव मैत्री का मार्ग प्रशस्त करता है।

ये भी पढ़ें – “ऋषि अत्रि के पुत्र से लेकर नासा के शोध तक — चंद्रमा की रहस्यमयी यात्रा”

🌿 ऋषि-मुनियों की सेवा और तपस्थली की शोभा
हनुमान जी का जीवन केवल शक्ति का नहीं, बल्कि सेवा, संयम और ज्ञान की दीक्षा का भी विस्तार है। बाल्यावस्था से ही वे अनेक आश्रमों में जाकर ऋषियों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
उनके पवित्र चरित्र का यह पक्ष आज भी कम लोगों को ज्ञात है कि—
उन्होंने तपोवनों की रक्षा की,साधुओं के यज्ञ–हवनों में विघ्न न हो इसके लिए पहरा दिया,
वन्य जीवों और प्रकृति के संतुलन की रक्षा की।
यही कारण है कि हनुमान जी को “ऋषि-वर्य प्रिय” और “वनपालक” का भी विशेष सम्मान प्राप्त है।

ये भी पढ़ें – 🌅 कैसे हुआ सूर्य का जन्म – जानिए 4.57 अरब साल पुरानी यह अद्भुत कहानी

🌿 पम्पापुर की ओर यात्रा—महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत
शास्त्रों में वर्णन है कि ज्ञान ग्रहण करने के बाद हनुमान जी अपने गुरु सूर्यदेव की आज्ञा लेकर किष्किंधा की यात्रा पर निकलते हैं। रास्ते में पर्वत, नदियाँ, वन और तपोभूमियों से होकर वे अपने जीवन के अगले अध्याय की ओर बढ़ते हैं।

ये भी पढ़ें – “कर्म के न्यायाधीश शनि-देव: जन्म-वृतांत एवं रहस्यमयी शुरुआत”

🚩 पम्पापुर—जहाँ भाग्य बदलता है।पम्पापुर, जिसे पंपा सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, हनुमान जी के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था।
पम्पापुर पहुँचने से पहले हनुमान जी—वनर समाज में एक प्रतिष्ठित योद्धा बन चुके थे।उनकी बुद्धि, कूटनीति और नेतृत्वगुण प्रखर हो चुके थे
धर्म और न्याय के पक्षधर बनकर वे संकटमोचक की भूमिका में तैयार थे।पम्पापुर पहुँचने के पीछे उद्देश्य था—सुग्रीव की सेवा, जिसे गुरु-दक्षिणा का अंग माना गया था। यहीं से हनुमान जी का वह ऐतिहासिक भविष्य लिखा जाने वाला था, जिसमें वे भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त बनते हैं।

ये भी पढ़ें – श्रीहरि विष्णु की कथा: जब-जब धरती पर बढ़ा अधर्म, तब-तब हुआ उनका अवतार

🌿 हनुमान–सुग्रीव मिलन: भविष्य के धर्म–युद्ध की नींव ,किष्किंधा में पहुँचने पर हनुमान जी पहली बार सुग्रीव के साथी–सलाहकार के रूप में कार्य करने लगते हैं। सुग्रीव, जो अपने भाई बाली के अत्याचारों से व्याकुल थे, हनुमान जी में एक दिव्य संरक्षक देखते हैं।
यही वह समय था जो पम्पापुर से पूर्व हनुमान जी को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपता है—सुग्रीव का राजसहयोग और सुरक्षा।

ये भी पढ़ें – प्रेम, तप और त्याग की शास्त्र सम्मत दिव्य गाथा

🌿 पम्पापुर से पहले की घटनाएँ—आगामी भक्ति–युग की भूमिका
शास्त्रों में कहा गया है—”जिसकी देह में विनय, मन में निर्मलता और हृदय में सेवा हो, उसे स्वयं धर्म मार्ग बुलाता है।”
हनुमान जी का पम्पापुर पहुँचना केवल यात्रा नहीं थी; यह भविष्य के उस अटूट संबंध की प्रस्तावना थी, जो बाद में—श्रीराम से मिलन,भक्ति–युग का आरंभ,सीता खोज,लंका विजय,और रामराज्य की स्थापना,जैसे दिव्य अध्यायों का कारण बनी।
उनका यह चरण हमें बताता है कि जीवन में तैयारी, तपस्या और साधना हमारे बड़े कार्यों की नींव होती है।
🌿 हनुमान जी की कथा पम्पापुर पहुँचने से पहले ही इतनी व्यापक, दिव्य और प्रेरणादायक है कि यह प्रत्येक भक्त को सदाचार, वीरता, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करती है। यह अध्याय हमें यह संदेश देता है कि—

“भक्ति केवल श्रीराम से नहीं, बल्कि कर्तव्य और कर्मनिष्ठा से आरंभ होती है।”

आज क्या करे, कहा जाए,जाने आज के पंचाग से कब तक है शुभ मुहूर्त, कब अशुभ समय

आज का पंचांग 18 नवंबर 2025 | Aaj Ka Panchang 18 November 2025

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, कालयुक्त विक्रम संवत 2082 तथा शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर) के अनुसार आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
त्रयोदशी तिथि प्रातः 07:12 AM तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी।
नक्षत्र – स्वाति, योग – आयुष्मान, बाद में सौभाग्य योग प्रभावी रहेगा।
चन्द्रमा तुला राशि में संचार करेगा।
🕉️ आज का विस्तृत पंचांग – 18 नवंबर 2025
पक्ष – कृष्ण
मास (अमांत) – कार्तिक
मास (पूर्णिमांत) – मार्गशीर्ष
वार – मंगलवार
अयन – दक्षिणायन
द्रिक ऋतु – हेमंत
🌞 सूर्योदय–सूर्यास्त | 🌜 चंद्रोदय–चन्द्रास्त
सूर्योदय – 6:46 AM
सूर्यास्त – 5:37 PM
चन्द्रोदय – 4:54 AM
चन्द्रास्त – 4:16 PM

ये भी पढ़ें – भारतीय सेना का बड़ा कदम: रुद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड की सफलता के बाद ‘कोल्ड स्ट्राइक’ सिद्धांत लागू करने की तैयारी

🗓 तिथि

  1. कृष्ण पक्ष त्रयोदशी – 17 Nov, 04:47 AM से 18 Nov, 07:12 AM तक
  2. कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – 18 Nov, 07:12 AM से 19 Nov, 09:43 AM तक
    ✨ नक्षत्र
    स्वाति नक्षत्र – 18 Nov, 05:01 AM से 19 Nov, 07:59 AM तक
    🕉 योग
  3. आयुष्मान योग – 17 Nov, 07:22 AM से 18 Nov, 08:08 AM तक
  4. सौभाग्य योग – 18 Nov, 08:08 AM से 19 Nov, 09:00 AM तक
  5. ये भी पढ़ें – सरदार भगत सिंह के साथ अंग्रेज़ी सत्ता को चुनौती देने वाले अमर क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त

  6. 🔱 करण
  7. वणिज – 17 Nov, 05:59 PM से 18 Nov, 07:12 AM तक
  8. विष्ठि – 18 Nov, 07:12 AM से 08:27 PM तक
  9. शकुनि – 18 Nov, 08:27 PM से 19 Nov, 09:44 AM तक
    🙏 आज के व्रत और त्योहार
    मासिक शिवरात्रि व्रत
  10. ये भी पढ़ें – परम वीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह : 1962 के रण में अमर शौर्य का प्रतीक
  11. 🌑 अशुभ काल (Auspicious Time Avoid)
    राहु काल – 2:54 PM से 4:15 PM
    यमगण्ड – 9:29 AM से 10:50 AM
    कुलिक काल – 12:12 PM से 1:33 PM
    दुर्मुहूर्त – 08:56 AM–09:40 AM, 10:53 PM–11:46 PM
    वर्ज्य – 11:18 AM से 01:06 PM
    🌟 शुभ काल (Auspicious Time)
    अभिजीत मुहूर्त – 11:50 AM से 12:33 PM
    अमृत काल – 10:05 PM से 11:53 PM
    ब्रह्म मुहूर्त – 05:11 AM से 05:59 AM
    🕉 आनंदादि योग
    ध्वजा (केतु)
    ☀️ सूर्य राशि
    सूर्य वृश्चिक राशि में
    🌙 चंद्र राशि
    चन्द्रमा तुला राशि में पूरे दिन–रात
    🌙 चंद्र बल (Moon Strength) – 19 Nov, 06:47 AM तक
    मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु और मकर राशि वालों को चंद्रबल लाभकारी।
  12. ये भी पढ़ें – सोम प्रदोष व्रत 17 नवंबर 2025: पूजा मुहूर्त और महत्व

  13. 🛣️ यात्रा दिशा — आज किस दिशा की यात्रा शुभ?
    शुभ यात्रा दिशा – उत्तर व पूर्व
    अशुभ/वर्जित दिशा – दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)
    यदि इस दिशा में जाना आवश्यक हो तो पहले गुड़ + घी खाकर निकलें।
    🍀 आज घर से निकलते समय क्या खाएं?
    गुड़ + पानी या दही + शक्कर
    से दिन शुभ एवं कार्य सिद्धि की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
    🕉 कौन-सा मंत्र करें ताकि बिगड़े काम बनें?
    “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ गं गणपतये नमः”
    इन मंत्रों का 11 बार जाप दिन को मंगलमय बनाता है।
    📿 दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)
    रोग – 06:46 AM – 08:08 AM
    उद्वेग – (वार वेला) 08:08 AM – 09:29 AM
    चर – 09:29 AM – 10:50 AM
    लाभ – 10:50 AM – 12:12 PM
    अमृत – 12:12 PM – 01:33 PM
    काल – (काल वेला) 01:33 PM – 02:54 PM
    शुभ – 02:54 PM – 04:15 PM
    रोग – 04:15 PM – 05:37 PM
    राष्ट्र की परम्परा इस पंचाग को प्रमाणित नहीं करता, किसी ज्ञानी विद्वान से मुहूर्त जरुर दिखाए

परम वीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह : 1962 के रण में अमर शौर्य का प्रतीक

—नवनीत मिश्र
भारत के सैन्य इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनका स्मरण मात्र ही साहस, समर्पण और मातृभूमि के प्रति अदम्य निष्ठा का भाव जगाता है। उन अमर योद्धाओं में सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं मेजर शैतान सिंह भाटी, जिनकी शहादत ने 1962 के भारत–चीन युद्ध में वीरता का वह स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसे पीढ़ियाँ आदर के साथ पढ़ती रहेंगी। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम न केवल उनके पराक्रम को नमन करें, बल्कि उस अद्वितीय युद्ध भावना को भी याद करें जिसने उन्हें अमर बना दिया।
18,000 फीट की ऊँचाई, असहनीय ठंड, हर दिशा में दुश्मन की घेराबंदी, सीमित हथियार और गोला-बारूद, और मात्र 120 वीर, यह दृश्य था रेज़ांग ला का, जहां 18 नवंबर 1962 को भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजिमेंट की 13 कुमाऊँ कंपनी ने इतिहास की सबसे वीर लड़ाइयों में से एक लड़ी। मेजर शैतान सिंह अपने सैनिकों की प्रथम पंक्ति में डटकर नेतृत्व कर रहे थे। दुश्मन संख्या में कहीं अधिक था, लेकिन भारतीय सैनिकों के हौसले उससे भी ऊँचे।
युद्ध के दौरान मेजर शैतान सिंह कई बार गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उनका संकल्प और नेतृत्व इतना दृढ़ था कि वे एक पोज़िशन से दूसरी पोज़िशन तक रेंगते हुए अपने जवानों का मनोबल बढ़ाते रहे। उन्होंने अपने सैनिकों को साफ निर्देश दिया कि “अपनी पोज़िशन नहीं छोड़नी है।” अंततः जब उनकी चोटें बहुत गंभीर हो गईं, तो साथियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहा, पर उन्होंने अपनी अंतिम सांसों में भी कहा कि मैं अपना कर्तव्य निभा चुका हूँ, तुम लोग अपना निभाओ।” रणभूमि में ही उन्होंने वीरगति प्राप्त की, लेकिन उनके नेतृत्व में लड़ी गई लड़ाई ने दुश्मन को भारी क्षति पहुँचाई।
उनकी अतुलनीय शौर्यगाथा के लिए उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक पदक नहीं, बल्कि उस आदर्श भावना की पहचान है जिसमें राष्ट्र सर्वोपरि होता है।
मेजर शैतान सिंह की कहानी केवल एक युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, नेतृत्व और देशभक्ति की उज्ज्वल मिसाल है। उनका बलिदान यह सिखाता है कि कठिनतम परिस्थितियाँ भी उस योद्धा को परास्त नहीं कर सकतीं जिसके भीतर देश के लिए जीवन हो और बलिदान का साहस भी।
उनकी पुण्यतिथि पर हम इस वीर सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ऐसे अमर वीरों की वजह से ही भारत आज भी सुरक्षित और गौरवान्वित खड़ा है।

सरदार भगत सिंह के साथ अंग्रेज़ी सत्ता को चुनौती देने वाले अमर क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त

पुनीत मिश्र

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास में कई ऐसे वीर क्रांतिकारी हुए, जिनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होते हुए भी अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहा। ऐसे ही महान राष्ट्रभक्त, अदम्य साहस और त्याग के प्रतीक थेl क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त। सरदार भगत सिंह के साथ मिलकर केंद्रीय विधान सभा में बम धमाका कर अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला देने वाले इस वीर सपूत की जयंती पर उनका अविस्मरणीय योगदान स्मरण करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
बटुकेश्वर दत्त का जन्म 18 नवंबर 1910 को बंगाल प्रेसीडेंसी के ओड़िया गाँव में हुआ। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की ज्वाला धधकती रही। युवावस्था में पहुँचते-पहुँचते उन्होंने यह समझ लिया कि अंग्रेज़ी शासन से भारत को आज़ाद कराने के लिए केवल शांतिपूर्ण विरोध पर्याप्त नहीं हैl इसके लिए त्याग, बलिदान और संघर्ष की राह अपनानी पड़ेगी। इसी सोच ने उन्हें हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारी दल से जोड़ दिया।
उनके जीवन का सर्वाधिक ऐतिहासिक क्षण 8 अप्रैल 1929 को आया, जब भगत सिंह के साथ उन्होंने केंद्रीय विधान सभा में बम फेंककर अंग्रेज़ी सत्ता की जड़ें हिला दीं। यह घटना किसी को क्षति पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि ‘बहरी सरकार को सुनाने’ के लिए थी। दोनों क्रांतिकारियों ने पूरा साहस दिखाया, भागे नहीं स्वयं को गिरफ्तार कराया और अदालत में ब्रिटिश शासन की क्रूर नीतियों का पर्दाफाश किया। इस साहसिक कृत्य ने समूचे विश्व का ध्यान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ओर आकर्षित कर दिया।
भगत सिंह को जहाँ फाँसी की सज़ा सुनाई गई, वहीं बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास मिला। जेलों की यातनाओं के बीच भी उनका हौसला कभी नहीं टूटा। वे लगातार लिखते, विचार देते और क्रांतिकारी आंदोलन के लिए प्रेरणा बनते रहे। उनका धैर्य, अनुशासन और अटूट राष्ट्रभक्ति हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
स्वतंत्रता मिलने के बाद भी बटुकेश्वर दत्त को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे पूर्णतः पात्र थे। जीवन के अंतिम दिनों में वे आर्थिक कठिनाइयों और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे, लेकिन देशभक्ति का उनका जज्बा अक्षुण्ण रहा। 20 जुलाई 1965 को उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन अपने पीछे ऐसा गौरवपूर्ण इतिहास छोड़ गए जो भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष को सदैव प्राणवान बनाए रखेगा।
आज उनकी जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उन क्रांतिकारियों के त्याग को केवल स्मरण ही न करें, बल्कि उनके आदर्शों न्याय, स्वतंत्रता और समानता को भी अपने जीवन का मार्गदर्शन बनाएँ।
बटुकेश्वर दत्त केवल इतिहास का एक नाम नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो हमें स्वतंत्रता की कीमत और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी का एहसास कराती है।