बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
राम जानकी मार्ग बनाने के कार्य मे हो रहे अवरोध को हटाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर सुब्रमण्यम के तरफ से गृहस्वामियों को दी गई चेतावनी , यदि एक दिन के अंदर पटरी से सामान नई हटाइ गयी तो होगी कार्यवाही।
राम जानकी मार्ग स्थित मोहाव गांव से लेकर रगरगंज तक पटरी पर कुछ गृहस्वामियों द्वारा समान रखा गया हैं, जिसको हटाने के लिए भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारियों ने राजेंद्र पाल सहित कई गृह स्वामियों को चेतावनी देते हुए बताया कि आप एक दिन के अंदर पटरी से अपना सामान हटा ले नहीं तो मजबूर होकर आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी, जबकि गृह स्वामी ने उनसे दो दिनों का समय माँगा है।
पुछे जाने पर प्रोजेक्ट मैनेजर सुब्रमण्यम ने बताया कि 10 दिसंबर 2024 को सभी के घरों पर जिलाधिकारी के द्वारा दिए गए नोटिस को चस्पा किया गया था, जिसमें यह कहां गया था कि आप लोग 15 दिन के अंदर रास्ते की भूमि से अवरोध हटाले, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी रास्ते के पटरी पर कहीं-कहीं अवरोध हो गया है जिसको हटाने के लिए मेरे तरफ से लोगों से अनुरोध किया गया है। उसके बाद भी यदि लोग नहीं हटाते हैं तो उनके प्रति कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
रामजानकी मार्ग पटरी से सामान हटाने के लिए गृह स्वामियों को दी चेतावनी
एआई मानवीय संवाद और सामाजिक अंतःक्रिया का स्थान नहीं ले सकती: प्रो. आनंद प्रकाश
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (एम.एम.टी.टी.सी.) और मनोविज्ञान विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग: मुद्दे, चुनौतियाँ और संभावनाएँ” विषय पर एक सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता, सीमाएँ और नैतिक पक्ष पर शिक्षकों को प्रशिक्षित और जागरूक करना है।
उद्घाटन सत्र सुबह 10 बजे आरंभ हुआ, जिसका संचालन सहसमन्वयक डॉ. गरिमा सिंह, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग ने किया। उन्होंने स्वागत वक्तव्य में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब शैक्षिक उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है और शिक्षकों के लिए इसके प्रति सक्षम तथा संवेदनशील होना आवश्यक है। इसके बाद यू.जी.सी. एम.एम.टी.टी.सी. सेंटर के निदेशक प्रो. चंद्रशेखर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तेज़ी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. अनुपभूति दुबे ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्यों और आगामी सत्रों की रूपरेखा का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को तेज़ी से अपना रहे हैं, जबकि शिक्षकों में इसके उपयोग को लेकर कई शंकाएँ अभी भी मौजूद हैं। यह कार्यक्रम उन्हीं चिंताओं को दूर करने और शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
उद्घाटन व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. आनंद प्रकाश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं, सीमाओं और मानवीय चेतना के संदर्भ में इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव चेतना केवल सूचना प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अनुभव, भावनाओं और अस्तित्वगत अनुभूतियों का सम्मिलित स्वरूप है, जिसे मशीनें कभी प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि संवेदना और बोध जैसे गुणवत्तापूर्ण अनुभव केवल मनुष्य ही कर सकता है, मशीनें नहीं। प्रो. प्रकाश ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा में शिक्षक की भूमिका को समाप्त नहीं करती बल्कि उसे और सुदृढ़ बनाती है, लेकिन उस पर अत्यधिक निर्भरता विद्यार्थियों में समीक्षात्मक सोच को कमज़ोर कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मशीनों द्वारा की गई त्रुटियाँ कई बार गंभीर और घातक सिद्ध हो सकती हैं, जबकि मनुष्य द्वारा की गई गलतियाँ सुधारी जा सकती हैं। इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में नैतिक सावधानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी भी मानवीय संवाद, सामाजिक अंतःक्रिया और प्रत्यक्ष उपस्थिति में होने वाले मानव–मानव संप्रेषण का स्थान नहीं ले सकती।
व्याख्यान के बाद कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि परिवर्तनों को स्वीकार करने में समय लगता है, किंतु आज बदलाव इतनी तेज़ी से हो रहे हैं कि उन्हें टालना संभव नहीं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी इन्हीं परिवर्तनों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग इस प्रकार करें कि उसके दुष्प्रभाव न्यूनतम हों और लाभ अधिकतम प्राप्त हो सके। उन्होंने इसके संतुलित, जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर बल दिया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दोपहर में आयोजित तकनीकी सत्रों में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता की समझ मूलभूत अवधारणाएँ” विषय पर मैनिट भोपाल के डॉ. अमित भगत ने व्याख्यान दिया। इसके बाद “नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ” विषय पर सी.आई.ई.टी. एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली के डॉ. राजेश डी. ने प्रस्तुति दी।
यह अल्पकालिक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम 18 से 24 नवंबर 2025 तक चलेगा और इसके दौरान विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
पशुओं को ठंड से बचाने का उपाय करें पशुपालक-निशिकांत तिवारी
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद के विकास खंड बैतालपुर के पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने अस्थाई निराश्रित गौआश्रय स्थल बलटिकरा का निरीक्षण कर पशुओं को ठंड से बचाव हेतु समुचित व्यवस्था एवं उपाय करने का निर्देश दिया। इसके बाद पशुपालकों को विशेष जानकारी दिया कि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उचित आवास प्रबंधन, संतुलित आहार और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। पशुओं को शाम को सर्दी बढ़ने से पहले बाड़े/पशुशाला के अंदर कर दें और सुबह धूप निकलने के बाद ही बाहर निकाले। पशुशाला के दरवाजे और खिड़कियों को जूट के बोरों, टाट या तिरपाल से अच्छी तरह बंद कर दें, ताकि ठंडी हवा अंदर न आए ।फर्श पर पुआल, सूखा घास, या रबड़ की चटाई बिछाएं, ताकि पशु ठंडी जमीन से बचे रहें और शरीर की गर्मी बनी रहे। बाड़े को गर्म रखने के लिए लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन छत के नीचे उचित रोशनदान रखें ताकि धुआं बाहर निकल सके। पशुशाला का निर्माण पूर्व से पश्चिम दिशा में होना चाहिए ताकि दिन के समय धूप अंदर आ सके। ठंड से लड़ने के लिए पशुओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार दें जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा शामिल हो। हरे चारे के साथ-साथ सरसों या बिनौला खली, चोकर, दाल चूरी, खनिज लवण और नमक मिलाकर दें। गुड़ और अजवाइन देना भी फायदेमंद होता है। पशुओं को ताज़ा और गुनगुना पानी पिलाएँ। ठंडा पानी उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर बुरा असर डाल सकता है। छोटे बछड़ों और कमजोर पशुओं को जूट के बोरे या गर्म कपड़े से ढक कर रखें। पशुओं के व्यवहार और खाने-पीने की आदतों में बदलाव पर ध्यान दें। यदि वे बीमार लगते हैं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।सर्दियों में पशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। पेट के कीड़ों (डीवर्मिंग) की दवा पशु चिकित्सक की सलाह पर दें। पशुशाला को सूखा और साफ रखें ताकि बीमारियाँ न फैलें। इन उपायों को अपनाकर आप अपने पशुओं को ठंड से बचा सकते हैं और उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं।
सड़क दुर्घटना में 52 वर्षीय छेदीलाल गंभीर रूप से घायल
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)पकड़ी थाना क्षेत्र के अहिरोली गांव निवासी 52 वर्षीय छेदीलाल मंगलवार को सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। वे अपनी बाइक से नगरा थाना क्षेत्र के इनरौली गांव गए थे। वापस लौटते समय इनरौली मोड़ के पास स्थित चौराहे पर अचानक एक जेसीबी मशीन सड़क पर आ गई। अचानक हुई इस स्थिति में बाइक और जेसीबी की जोरदार टक्कर हो गई, जिससे छेदीलाल सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना होते ही आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल छेदीलाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुँचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना में उनके बायें पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनरौली मोड़ पर जेसीबी और बड़े वाहनों की अचानक आवाजाही के कारण अक्सर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। दुर्घटना की सूचना संबंधित थाने को दे दी गई है। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
धीमी प्रगति पर डीएम की नाराज़गी
जिलाधिकारी ने अनुपस्थित दो अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने के दिए आदेश
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम डैशबोर्ड एवं 5 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने योजनाओं की धीमी प्रगति तथा कम रैंकिंग पर अधिकारियों से नाराज़गी व्यक्त की और समयबद्ध ढंग से लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि योजना में जिले की रैंकिंग ‘डी’ आई है, जो बेहद असंतोषजनक है। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित किया कि जिले के 1300 कोटेदारों को हर हाल में योजना का कनेक्शन दिलाया जाए। यदि कोई कोटेदार कनेक्शन लेने से इंकार करता है तो उसकी दुकान निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी। जिला पंचायत राज अधिकारी को आदेश दिया गया कि जिले की सभी 940 ग्राम पंचायतों के प्रधान भी इस योजना से जुड़ें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस महीने कम से कम 400 नए कनेक्शन पूरे किए जाने चाहिए। खण्ड शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया कि सभी ब्लॉकों के बीईओ और संबंधित शिक्षकों को कनेक्शन अनिवार्य रूप से दिलाया जाए। साथ ही जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में तैनात सभी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी, जिनके निजी आवास बलिया में हैं, उन्हें भी योजना से जोड़ना अनिवार्य होगा। कनेक्शन न लेने पर उनका वेतन रोक दिया जाएगा।आईसीडीएस पोषण अभियान में ‘डी’ रैंकिंग आने पर जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को फटकार लगाई और जल्द से जल्द ‘ए’ रैंक लाने के निर्देश दिए। सेतु निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी रैंकिंग सुधारने का आदेश दिया गया। बैठक में अनुपस्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी/समाज कल्याण अधिकारी (विकास) के एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश भी दिए।
05 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की विस्तार से की समीक्षा जिलाधिकारी ने बड़ी परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए कहा खनवर–नगरा–रसड़ा मार्ग से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक सड़क चौड़ीकरण का काम प्रगति पर है, लेकिन सड़क पर खड़े पेड़ और बिजली के खंभे अब तक नहीं हटे हैं। उन्होंने इस लापरवाही पर नाराज़गी जताते हुए पीडब्ल्यूडी एक्सियन को निर्देश दिया कि वन विभाग की देरी की रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी जाए। उन्होंने कहा कि विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीडीओ ओजस्वी राज, डीडीओ आनंद प्रकाश, डीसी मनरेगा रिचा वर्मा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एवं जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।
भाकपा ने समस्याओं को लेकर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन डीएम को सौपा
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
मंगलवार को भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के आवाहन पर भाकपा जिला कमेटी देवरिया के कार्यकर्ताओ ने देश व प्रदेश मे दलितों, आदिवासियों, पिछडो, महिलाओ, अल्पसंख्यको के ऊपर किये जा रहे अत्याचार की घटनाओ, बलात्कार, हत्या, छेड़खानी, जातीय उत्पीड़न, धार्मिक उत्पीड़न, मावलिंचिंग, बुलडोजर संस्कृति व क़ानून व्यवस्था की दयनीय स्थिति, के खिलाफ और किसानो व मजदूरों की जटिल समस्याओ को लेकर धरना प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा।इस दौरान जिला सचिव अरविन्द कुशवाहा ने ज्ञापन सौपते हुए राष्ट्रपति से मांग किया कि अल्पसंख्यको के ऊपर हो रहे क्रूर अत्याचार, बुलडोजर द्वारा सदियों से बसे बसाए लोगो के घरो को गिराया जाना आदि घटनाओ कि न्यायिक जाँच कराकर दोषियों को तत्काल कटघरे मे लाकर, भुक्तभोगियो को सामजिक न्याय दिलाने का कार्य करे और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट कि स्थापना करके त्वरित मुकदमा चलाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के कार्य करे।धरने मे कामरेड शामदेव यादव, कामरेड आजाद अंसारी, कामरेड आनंद प्रकाश चौरसिया, कमलेश चौरसिया, राजेंद्र पाल, कलेक्टर शर्मा सहित आदि कार्यकर्त्ता शामिल रहे।
गृह विज्ञान परीक्षा: समझकर पढ़ें, आत्मविश्वास से लिखें
एजुकेशन डेस्क (राष्ट्र की परम्परा)। बोर्ड परीक्षाओं में गृह विज्ञान विषय में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थी शांत वातावरण में अध्ययन करें। विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह का समय पढ़ाई के लिए सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय मन अधिक एकाग्र रहता है। गृह विज्ञान विषय की शिक्षिका रेनू भास्कर के अनुसार परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले विद्यार्थियों को अपने नोट्स अच्छी तरह तैयार कर लेने चाहिए। इससे पूरे पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति व्यवस्थित ढंग से हो पाती है।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थी किसी भी प्रश्न को पहले ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसके उत्तर को रटने के बजाय समझकर याद करें। समझकर पढ़ने से जानकारी लंबे समय तक स्मृति में रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थी गृह विज्ञान विषय के तीन से चार साल पुराने प्रश्नपत्रों को अवश्य देखें और यूपी बोर्ड की वेबसाइट से मॉडल पेपर डाउनलोड करके अभ्यास करें। मॉडल पेपर और पुराने पेपर परीक्षा के पैटर्न को स्पष्ट करते हैं और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थी परीक्षा में सबसे पहले अधिक अंक वाले प्रश्नों को हल करें। इससे पास होने के लिए आवश्यक अंक आसानी से सुनिश्चित किए जा सकते हैं। इसके अलावा महत्वपूर्ण बिंदुओं को पहले से चिन्हित करके दोहराना भी बेहद उपयोगी होता है।
टाइम टेबल बनाकर तैयारी करें
श्रीमती भास्कर ने कहा कि परीक्षा की तैयारी के लिए समय-सारिणी बनाना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को यह तय करना चाहिए कि किस समय पढ़ाई करनी है, किस समय आराम करना है और किस समय भोजन व अन्य गतिविधियाँ करनी हैं। समय-सारिणी का पालन करने से तैयारी में निरंतरता बनी रहती है। परीक्षा के पूर्व रिविजन के लिए भी पर्याप्त समय बचाकर रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों को अपनी नींद पूरी लेनी चाहिए, ताकि तनाव से बचा जा सके।
सुझाव
- गृह विज्ञान की तैयारी सुबह के शांत वातावरण में करने से अधिक लाभ मिलता है।
- तैयारी शुरू करने से पहले अपने व्यवस्थित नोट्स तैयार करें।
- नोट्स बनाते समय अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, लाभ-हानि, प्रकार, प्रभावित करने वाले कारक आदि सभी बिंदु शामिल करें।
- दीर्घ, लघु और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर लिखने का अभ्यास अवश्य करें।
- प्रश्नों के उत्तर रटने के बजाय समझकर याद करें।
- नियमित पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बनाएं और उसी के अनुसार कार्य करें।
- पढ़ाई, भोजन और नींद, तीनों का संतुलन बनाए रखें।
- परीक्षा से पहले रिविजन के लिए समय अवश्य निकालें।
- परीक्षा के दौरान मन को शांत रखें और किसी भी शंका पर सहायता लेने से न हिचकें।
यह सुझाव विद्यार्थियों को गृह विज्ञान विषय में बेहतर प्रदर्शन करने और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने में मदद करेंगे।
भारत-नेपाल सीमा से बौद्ध भिक्षु के वेश में घुसी चीनी महिला को 8 साल की सजा, 50,000 रुपये जुर्माना—अदालत का बड़ा फैसला
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत-नेपाल सीमा पर दो वर्ष पूर्व पकड़ी गई चीनी महिला ली शिनमेई को स्थानीय अदालत ने मंगलवार को आठ साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई भारत में अवैध घुसपैठ और विदेशी अधिनियम के गंभीर उल्लंघन के तहत की गई है। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना गया क्योंकि महिला कथित तौर पर बौद्ध भिक्षु के वेश में भारत में प्रवेश कर रही थी।
घटना कैसे हुई थी?
यह मामला 2 दिसंबर 2023 का है, जब सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 42वीं बटालियन के जवानों ने रुपईडीहा सीमा चौकी (भारत-नेपाल बॉर्डर) पर 45 वर्षीय ली शिनमेई को संदिग्ध परिस्थिति में रोका। जाँचकर्ताओं ने बताया कि महिला साधु के वस्त्र पहनकर नेपाल से भारत में घुसने का प्रयास कर रही थी। शुरुआती पूछताछ व दस्तावेज़ों की जाँच में पता चला कि वह बिना किसी वैध भारतीय वीज़ा के भारत में प्रवेश कर चुकी थी।
ये भी पढ़ें –ईडी की बड़ी कार्रवाई, अल-फलाह विश्वविद्यालय के 25 ठिकानों पर छापेमारी
ली शिनमेई चीन के शांदोंग प्रांत की रहने वाली है और उसके पास चीन गणराज्य का पासपोर्ट मिला। पासपोर्ट पर लगाए गए नेपाली वीज़ा की वैधता 19 नवंबर 2023 से 16 फरवरी 2024 तक थी, जो नेपाल में प्रवेश के लिए मान्य था, लेकिन भारत के लिए नहीं।
विदेशी दस्तावेज़ व इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद
महिला भाषा नहीं समझती थी, इसलिए उससे पूछताछ एक दुभाषिए के माध्यम से की गई। सुरक्षा बलों ने उससे पासपोर्ट, चीनी नागरिकता कार्ड, विभिन्न देशों के कई एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, ईयरफोन, एक मसाजर, एक स्मृति पुस्तिका और चीनी भाषा में लिखा एक धार्मिक ग्रंथ भी बरामद किया। यह सब सामान सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
ये भी पढ़ें –बिहार में नई सरकार गठन की तैयारियाँ तेज, 20 नवंबर को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह—PM मोदी होंगे शामिल
रुपईडीहा थाने में विदेशी अधिनियम की धारा 14A के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दिसंबर 2023 में इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया था।
अदालत का कड़ा रुख
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कविता निगम ने अपने फैसले में माना कि ली शिनमेई ने जानबूझकर भारत में अवैध प्रवेश किया और यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन की श्रेणी में आता है। अदालत ने उसे आठ साल की जेल और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जज ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना न भरने पर उसे अतिरिक्त छह महीने की कैद भुगतनी होगी।
यह फैसला भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और विदेशी नागरिकों की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
बिहार में नई सरकार गठन की तैयारियाँ तेज, 20 नवंबर को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह—PM मोदी होंगे शामिल
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने मंगलवार को बताया कि 20 नवंबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले बुधवार को महत्वपूर्ण भाजपा विधायक दल की बैठक होगी, जिसके तुरंत बाद एनडीए विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में सरकार गठन को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
ये भी पढ़ें –अमेरिका-सऊदी अरब रक्षा डील: इजराइल के लिए खतरे की घंटी, एफ-35 विमान बिक्री पर विवाद
दिलीप जायसवाल ने एएनआई से बातचीत में पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों के साथ पटना के गांधी मैदान में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। जायसवाल ने कहा, “हम विकसित बिहार के सपने को साकार करने की शपथ लेंगे।”
ये भी पढ़ें –मोडासा में जलती एम्बुलेंस ने छीनी चार जिंदगियाँ, दो गंभीर
इससे पहले जायसवाल ने जानकारी दी थी कि भाजपा 18 नवंबर को अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेगी। उन्होंने आश्वस्त किया था कि 21 नवंबर तक सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। सोमवार को उन्होंने बताया कि भाजपा विधायक दल की बैठक अटल सभागार में सुबह 10 बजे होगी, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे। उसके बाद एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के गठन पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी।
ये भी पढ़ें –ईडी की बड़ी कार्रवाई, अल-फलाह विश्वविद्यालय के 25 ठिकानों पर छापेमारी
विधानसभा भंग करने की सिफारिश, नई सरकार का रास्ता साफ
इधर, जद(यू) नेता विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बिहार मंत्रिमंडल ने वर्तमान विधानसभा को 19 नवंबर से भंग करने की औपचारिक सिफारिश कर दी है। यह सिफारिश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को सौंप दी गई। नीतीश कुमार की यह मुलाकात नई सरकार के गठन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए को 202 सीटों का रिकॉर्ड बहुमत मिला है। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। एलजेपी (आरवी) को 19, एचएएम(एस) को 5 और आरएलएम को 4 सीटें मिलीं।
बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 20 नवंबर का शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।
ईडी की बड़ी कार्रवाई, अल-फलाह विश्वविद्यालय के 25 ठिकानों पर छापेमारी
लाल किला कार विस्फोट केस में चली कार्यवाही
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट मामले की जांच में मंगलवार को बड़ा मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आतंकी साजिश से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच के लिए दिल्ली, फरीदाबाद और आसपास के 25 ठिकानों पर तड़के छापेमारी शुरू की। ईडी की इस कार्रवाई में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय का ओखला कार्यालय भी शामिल है, जो अब जांच के दायरे में आ गया है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब विस्फोट मामले में पहले ही कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमले में 15 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को अत्यंत गंभीर माना है। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन-नबी, जो कश्मीर का निवासी था और अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ा था, अब जांच के केंद्र में है।
ये भी पढ़ें –मोडासा में जलती एम्बुलेंस ने छीनी चार जिंदगियाँ, दो गंभीर
विश्वविद्यालय पर जालसाजी के आरोप भी बढ़े
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद से पूछताछ करेगी। विश्वविद्यालय पर दो एफआईआर दर्ज हैं—एक में आरोप है कि विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर यूजीसी 12बी स्टेटस का झूठा दावा किया, जबकि दूसरी एफआईआर 2018 में एनएएसी मान्यता समाप्त होने के बावजूद प्रवेश जारी रखने से संबंधित है।
एनआईए की गिरफ्तारी से बड़ा सुराग
सोमवार को एनआईए ने इस केस में बड़ी सफलता हासिल करते हुए जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार, उसने ड्रोन में बदलाव कर आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता दी और रॉकेट बनाने की कोशिश की, जिससे विस्फोट की योजना को अंजाम देने में मदद मिली।
सुरक्षा एजेंसियों ने पता लगाया है कि डॉ. उमर ने तीन महीने पहले एक एन्क्रिप्टेड सिग्नल ग्रुप बनाया था, जिसमें अदील, मुज़म्मिल, मुज़फ्फर और इरफान शामिल थे। इस ग्रुप को आतंकी नेटवर्क के भीतर समन्वय के लिए इस्तेमाल किया गया था। मामले के एक संदिग्ध डॉ. शाहीन की कार से क्रिनकोव राइफल और पिस्तौल मिलने के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी है।
ईडी की वर्तमान छापेमारी से यह स्पष्ट है कि जांच अब आतंकी नेटवर्क की फंडिंग और संस्थागत समर्थन को उजागर करने की दिशा में बढ़ रही है।
मोडासा में जलती एम्बुलेंस ने छीनी चार जिंदगियाँ, दो गंभीर
गुजरात के अरावली जिले में दर्दनाक हादसा
गुजरात के अरावली जिले में मोडासा के राणा सैयद इलाके के पास एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहाँ एक निजी अस्पताल की एम्बुलेंस में अचानक आग लग गई। इस हादसे में एक नवजात बच्चे समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और हैरानी का माहौल है।
ये भी पढ़ें –“नवदृष्टि का समय: बदलाव की राह अपने बच्चों से”
सूत्रों के अनुसार, मोडासा के एक निजी अस्पताल से नवजात शिशु को उन्नत उपचार के लिए अहमदाबाद ले जाया जा रहा था। इसी दौरान, चलते वाहन में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि डॉक्टर, नर्स, बच्चे और उसके पिता को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। एम्बुलेंस चालक ने वाहन रोकने की कोशिश की, लेकिन आग ने कुछ ही पलों में एम्बुलेंस को अपनी चपेट में ले लिया।
ये भी पढ़ें –अमेरिका-सऊदी अरब रक्षा डील: इजराइल के लिए खतरे की घंटी, एफ-35 विमान बिक्री पर विवाद
मृतकों की पहचान,जिग्नेश मोची (38) – नवजात शिशु के पिता,नवजात शिशु (1 दिन),राजकरण रेतिया (30) – डॉक्टर,भूरीबेन मनात (23) – नर्स,गंभीर रूप से घायल,अंकितभाई रामाभाई ठाकोर (24) – चालक,गौरांगकुमार महेशभाई मोची (40)
गीताबेन उर्फ जयश्रीबेन महेशभाई मोची (60)
हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पेट्रोल पंप के पास अचानक एम्बुलेंस में आग लगते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। मोडासा टाउन पुलिस ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, शॉर्ट सर्किट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
यह हादसा राज्य में एम्बुलेंस सुरक्षा मानकों पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
अमेरिका-सऊदी अरब रक्षा डील: इजराइल के लिए खतरे की घंटी, एफ-35 विमान बिक्री पर विवाद
वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री की घोषणा की, जो वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़ा कदम है। हालांकि, यह निर्णय इजराइल के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इस डील के चलते इजराइल की सैन्य ताकत और क्षेत्रीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप के इस कदम के बारे में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी चिंता जाहिर की है, क्योंकि सऊदी अरब को अत्याधुनिक अमेरिकी F-35 विमान की बिक्री से इजराइल का सैन्य प्रभुत्व प्रभावित हो सकता है। इजराइल लंबे समय से मध्य-पूर्व क्षेत्र में अपने सैन्य सामर्थ्य को लेकर अग्रणी है, और ऐसे में किसी तीसरे देश को इस तरह के उन्नत विमान की बिक्री एक धोखे की तरह महसूस हो रही है।
ये भी पढ़ें –इतिहास में अमर हुए वे चेहरे, जिनकी विरासत आज भी प्रेरणा देती है”
ट्रंप प्रशासन की चिंता यह भी है कि F-35 विमानों की बिक्री से चीन को अमेरिकी रक्षा तकनीकी जानकारी का लाभ मिल सकता है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ चीन के करीबी संबंधों को देखते हुए, अमेरिकी तकनीक की चोरी या हस्तांतरण का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि सऊदी अरब अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, और दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मज़बूत करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
ये भी पढ़ें –जीवन की असली अमीरी: तिजोरियों में नहीं, इंसान के भीतर छिपी होती है
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अमेरिका यात्रा के दौरान इस सौदे पर चर्चा की गई। यह यात्रा सात साल बाद हो रही है, और इसके दौरान उम्मीद जताई जा रही है कि सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य सहायता के विस्तार और एफ-35 विमान खरीदने के लिए ट्रंप से औपचारिक आश्वासन प्राप्त करेगा।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के भीतर कुछ अधिकारी इस बिक्री को लेकर संकोच कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें चिंता है कि इससे इजराइल के सैन्य बलों की क्षेत्रीय बढ़त प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप सऊदी अरब को एफ-35 विमान तभी देंगे, जब वह इजराइल के साथ अपने रिश्तों को सामान्य करने पर सहमत हो जाएगा।
ये भी पढ़ें –“नवदृष्टि का समय: बदलाव की राह अपने बच्चों से”
अमेरिका और सऊदी अरब के संबंधों में सुधार
ट्रंप ने यह भी कहा कि सऊदी अरब अमेरिका का एक अहम सहयोगी है, और इस सौदे से दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब को लेकर अपनी नीति में बदलाव किया है और अब वह मध्य-पूर्व में अपनी रणनीति को लेकर क्राउन प्रिंस को एक अहम साझेदार मानते हैं।
इस तरह के भू-राजनीतिक घटनाक्रम से इजराइल और सऊदी अरब के रिश्तों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ट्रंप दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए दबाव डालने का प्रयास कर रहे हैं।
“नवदृष्टि का समय: बदलाव की राह अपने बच्चों से”
समाज को बदलने की शुरुआत: बच्चों को नई दृष्टि देने का संकल्प
“समाज बदलने की पहली शर्त यही है कि हम अपने बच्चों को दुनिया को देखने की नई दृष्टि दें—
दृष्टि जो केवल देखना न सिखाए, बल्कि समझना, परखना और सुधारना भी सिखाए।”
समाज परिवर्तन की सबसे कठिन, सबसे लंबी और सबसे महत्त्वपूर्ण यात्रा हमेशा अपने मूल में उन छोटे-छोटे बीजों से शुरू होती है, जिन्हें हम बच्चे कहते हैं। दुनिया की कोई भी क्रांति—विचारों की हो, नैतिकता की हो, तकनीक की हो या इंसानी मूल्यों की—तब तक स्थायी नहीं हो सकती जब तक वह अगली पीढ़ियों के जीवन-दर्शन में अपनी जड़ें न जमा ले। यही कारण है कि बुद्ध, विवेकानंद, गांधी, टैगोर, नेल्सन मंडेला जैसे विचारकों ने मानव सभ्यता में किसी स्थायी परिवर्तन के लिए शिक्षा, संस्कार और बाल मानस की संवर्धन को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना। आज जब समाज अनेक स्तरों पर मूल्य-संकट, हिंसा, असहिष्णुता, उपभोक्तावाद, कट्टरता और सामाजिक विघटन की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब यह प्रश्न और भी तीखा हो उठता है—क्या हम अपने बच्चों को वह दृष्टि दे पा रहे हैं, जिसके आधार पर वे वर्तमान से बेहतर भविष्य बना सकें?
बच्चों के भीतर समाज को देखने का दृष्टिकोण केवल पाठ्यपुस्तकों से नहीं बनता, बल्कि परिवार, परिवेश, विचारों, संवाद, उदाहरणों और सबसे अधिक—व्यस्कों के व्यवहार से बनता है। बच्चा, दरअसल, समाज का सबसे संवेदनशील दर्पण होता है। जिस प्रकार की भाषा, सोच, सह-अस्तित्व, सामाजिक व्यवहार, संवेदनशीलता और दृष्टि वह अपने आस-पास देखता है, वही धीरे-धीरे उसके भीतर किसी अनलिखी किताब की तरह अंकित हो जाती है। यही कारण है कि यदि हम समाज को बदलना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने व्यवहार, अपने पारिवारिक वातावरण और अपने सामाजिक आचरण को बदलना होगा—क्योंकि बच्चा वही बनता है, जो वह देखता है; वही नहीं बनता, जिसे वह सुनता है।
आज के समय में बच्चों के सामने समाज को समझने के दो बड़े स्रोत मौजूद हैं—एक परिवार, दूसरा डिजिटल दुनिया। दुर्भाग्य यह है कि दोनों में से किसी में भी वह स्पष्ट और संतुलित दृष्टि नहीं मिल पाती, जिसकी उसे आवश्यकता है। परिवारों में संवाद कम हो गया है, समय घट गया है और साथ बैठने की संस्कृति लगभग लुप्त होती जा रही है। वहीं डिजिटल दुनिया बच्चों को सूचना का असीमित सागर तो देती है, परंतु विवेक और दिशा का दीपक नहीं देती। ऐसे में बच्चे जानकारी तो बहुत पा लेते हैं, परंतु समझ की कमी के कारण वह जानकारी उनके भीतर भ्रम, असुरक्षा और अव्यवस्थित दृष्टिकोण पैदा कर देती है।
इसीलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों को समाज को देखने के लिए एक ऐसी दृष्टि दें जो संवेदनशील हो, विवेकपूर्ण हो, वैज्ञानिक हो, नैतिक हो और सबसे अधिक—मानवतावादी हो। बच्चा यदि सीख जाए कि समाज केवल भीड़ नहीं, बल्कि व्यक्तित्वों का एक जीवंत तानाबाना है; कि हर व्यक्ति की अपनी संघर्ष-कथा है; कि हर निर्णय का कोई संदर्भ होता है; और कि सहानुभूति किसी भी सभ्यता का सबसे बड़ा आधार है—तो वह न केवल एक बेहतर नागरिक बनेगा, बल्कि समाज को भी बेहतर दिशा देगा।
समाज परिवर्तन का यह बीज तभी पनप सकता है जब हम अपने बच्चों को प्रश्न पूछना सिखाएं। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में बच्चों को प्रश्न पूछने से अधिक उत्तर रटने की आदत डाली जाती है। जबकि सच्चा ज्ञान, सच्चा चिंतन और सच्ची प्रगति वहीं से जन्म लेती है जहाँ प्रश्नों की स्वतंत्रता होती है। यदि बच्चा अपने घर, स्कूल और समाज में यह महसूस करे कि वह निडर होकर प्रश्न कर सकता है, विचार व्यक्त कर सकता है, असहमति जता सकता है, और गलतियों से सीख सकता है—तो उसके भीतर रचनात्मकता और मौलिकता विकसित होती है। यही रचनात्मकता समाज को आगे ले जाती है।
समाज को देखने का नया दृष्टिकोण बच्चों को तभी मिलेगा जब हम उन्हें विविधता को स्वीकार करना सिखाएँ। आज के समय में विभाजन, ध्रुवीकरण और एकांगी सोच के कारण समाज के भीतर खाईयाँ बढ़ रही हैं। बच्चे स्कूलों में साथ पढ़ते हैं, खेलते-कूदते हैं, लेकिन बड़े होने पर अक्सर उन दीवारों को अपना लेते हैं जो समाज ने खड़ी की होती हैं। इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम बच्चों को यह समझाएँ कि विविधता समाज की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि वह यह समझ जाए कि हर संस्कृति, हर भाषा, हर परंपरा, हर विचार और हर व्यक्ति समाज की सामूहिक पहचान का हिस्सा है—तो वह न केवल एक बेहतर नागरिक बनेगा, बल्कि वह उन दीवारों को भी तोड़ पाएगा जो नफरत और संकीर्णता खड़ी करती हैं।
समाज बदलने की इस प्रक्रिया में शिक्षा प्रणाली की भूमिका निर्णायक है। शिक्षा केवल परीक्षा पास कराने का साधन नहीं हो सकती; वह बच्चों को जीवन और समाज को समझने की कला भी सिखाए। उन्हें यह बताया जाए कि सफलता केवल अंकों से नहीं, बल्कि इंसानियत, सत्यनिष्ठा, सहयोग, साहस और संवेदनशीलता से भी मापी जाती है। यह भी समझाया जाए कि समाज केवल लिए जाने की चीज़ नहीं, बल्कि कुछ देने की जिम्मेदारी भी है। जब बच्चा अपने जीवन में ‘कर्तव्य’ का भाव समझता है, तभी वह समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेता है।
बच्चों को नई दृष्टि देने के लिए पहला कदम है—उन्हें सही आदर्श देना। आदर्श का मतलब सिर्फ बड़े-बड़े व्यक्तित्व नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में ऐसे छोटे-छोटे उदाहरण भी हैं, जो उनके व्यवहार पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जैसे—किसी भूखे को भोजन देना, किसी बुज़ुर्ग की सहायता करना, प्रकृति की रक्षा करना, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता रखना, सत्य बोलना, स्त्री-पुरुष समानता मानना, जाति-भेद समाप्त करना और कानून का सम्मान करना। जब बच्चा यह सब अपने घर और समाज में जीवन्त रूप में देखता है, तब उसमें भी वैसा ही चरित्र-विकास होता है।
बच्चों में यह दृष्टि विकसित करने के लिए सबसे आवश्यक है—उन्हें स्वयं सोचने देना, स्वयं अनुभव करने देना, स्वयं सीखने देना। बच्चों पर अपनी सोच थोप देना समाज परिवर्तन का मार्ग नहीं, बल्कि समाज को जड़ता में बाध्य करने का तरीका है। यदि बच्चा स्वयं यह अनुभव करे कि समाज में समस्याएँ हैं और उन्हें बदलना संभव है, तो उसके भीतर यथार्थ की समझ और परिवर्तन का साहस जन्म लेता है।
बच्चों को नया दृष्टिकोण देना मतलब यह नहीं कि हम उन्हें आदर्शवादी कल्पनाओं में जीने दें। बल्कि उन्हें यह समझाना है कि समाज जटिल है, समस्याएँ वास्तविक हैं, लेकिन समाधान भी संभव हैं। उन्हें चुनौतियों को स्वीकार करना सिखाना है। उन्हें यह बताना है कि प्रगति के रास्ते संघर्ष से होकर गुजरते हैं, और यह कि उनके छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकते हैं।
यदि हम आने वाली पीढ़ियों को यह समझा पाएं कि समाज कोई बाहरी व्यवस्था नहीं, बल्कि ‘हम सभी’ की सामूहिक चेतना है—तो समाज को बदलने की यह यात्रा सशक्त और सफल हो सकती है। बच्चे वही समाज बनाएँगे, जो हम आज उनके भीतर बोएँगे। आज यदि हम उनके भीतर सत्य, न्याय, संवेदना, समानता, विज्ञान, विवेक और मानवीय मूल्यों के बीज बोते हैं, तो कल वे उसी समाज की फसल काटेंगे।
अंततः बात फिर उसी सिद्धांत पर आकर खड़ी होती है—समाज को बदलने के लिए सर्वप्रथम हमें अपने बच्चों को समाज को देखने का नया दृष्टिकोण प्रदान करना होगा। यह दृष्टिकोण न केवल उनके भविष्य को उजाला देगा, बल्कि हमारे समाज की सामूहिक चेतना को भी नए क्षितिजों तक ले जाएगा। क्योंकि बच्चा केवल परिवार की आशा या राष्ट्र का भविष्य ही नहीं होता—वह वह दीपक है, जिसकी रोशनी से आने वाले समय का मार्ग प्रकाशित होता है।
डॉ प्रियंका सौरभ -हिसार
