Wednesday, July 1, 2026
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“बचपन को बचाइए: 18 नवंबर—बाल यौन शोषण रोकथाम का वैश्विक संकल्प”

18 नवंबर का दिन पूरी दुनिया उन मासूम आवाज़ों को समर्पित है, जो अपने ही घर, मोहल्ले, स्कूल या समाज में होने वाले यौन शोषण, दुर्व्यवहार और हिंसा का दर्द चुपचाप सहते हैं। यह दिन बाल यौन शोषण, दुर्व्यवहार और हिंसा की रोकथाम और उपचार के लिए विश्व दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2024 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे पहली बार वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली, जिसका उद्देश्य है—बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना, अपराधियों को सख्त दंड दिलाना और जागरूक समाज का निर्माण करना।

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बचपन वह दौर है, जब एक बच्चे को सुरक्षा, प्यार और सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन यही उम्र अक्सर सबसे दर्दनाक घटनाओं की शिकार बन जाती है। UNICEF की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के हर क्षेत्र में बच्चे शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा के शिकार होते हैं। कई बच्चे इस भयावह घटना को बोल भी नहीं पाते और जीवन भर उस घाव के साथ जीने को मजबूर हो जाते हैं। यही कारण है कि 18 नवंबर का यह विशेष दिन हमें मजबूती से यह याद दिलाता है कि समाज के रूप में हमारी जिम्मेदारी क्या है।
क्यों जरूरी है 18 नवंबर का यह दिवस?

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क्योंकि बच्चों की ज़िंदगी किसी भी कीमत पर असुरक्षित नहीं होनी चाहिए। यौन हिंसा की घटनाएँ उनके भविष्य को ही नहीं, मानसिक विकास, आत्मविश्वास और जीवन जीने की क्षमता को भी प्रभावित करती हैं। यह दिवस बताता है कि:
बच्चे सिर्फ घर की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं।
किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक शोषण भी है।
जागरूकता और संवाद, बाल सुरक्षा का सबसे मजबूत हथियार है।
बाल यौन शोषण के रूप
यौन शोषण कई रूपों में हो सकता है—

  • अनुचित स्पर्श
  • धमकी देकर संबंध बनाना
  • पोर्नोग्राफी दिखाना या बनाना
  • ऑनलाइन ग्रूमिंग
  • मानसिक या भावनात्मक मजबूरी
    हर देश की कानूनी व्यवस्था इन अपराधों को अलग-अलग स्तर पर चिन्हित करती है, परंतु मूल संदेश एक ही है—बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
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  • कैसे पहचाने बच्चे पर होने वाला शोषण?
    हर बच्चे की तकलीफ बोलकर सामने नहीं आती।
    कुछ संकेत जिन्हें समझना बेहद ज़रूरी है—
    अचानक व्यवहार में बदलाव,डर, घुटन या चुप्पी
    किसी व्यक्ति या जगह से अनावश्यक भय ,शरीर पर निशान,नींद, पढ़ाई या खेल में ध्यान न देना
    ,मनोवैज्ञानिक तनाव,इन संकेतों को नजरअंदाज करना अपराध को बढ़ावा देना है।
    जिम्मेदारी परिवार, समाज और स्कूल—सभी की
    18 नवंबर का यह दिवस हमें याद दिलाता है कि बाल सुरक्षा कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
    परिवार
    बच्चे के साथ खुला संवाद रखें।सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बारे में समझाएँ।किसी भी घटना पर उस पर विश्वास करें।स्कूल और शिक्षक
    “सेफ चाइल्ड पॉलिसी” लागू करें,काउंसलिंग की व्यवस्था रखें।बच्चों को आत्मरक्षा और डिजिटल सुरक्षा की जानकारी दें।
    समाज
    किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें
    “शर्म” या “समाज क्या कहेगा” वाली मानसिकता छोड़ें।
    समुदाय में जागरूकता कार्यक्रम चलाएँ।
    उपचार और पुनर्वास।
    यौन हिंसा का दर्द केवल शरीर नहीं, मन पर भी गहरा घाव छोड़ता है।
    इसलिए उपचार में शामिल होते हैं—
    मेडिकल सहायता,मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग,सामाजिक सुरक्षा,सुरक्षित वातावरण,कानूनी सहायता,जब समाज मिलकर बच्चे का साथ देता है, तब उसकी खोई हुई मुस्कान भी वापस लौटती है।
    18 नवंबर का यह पहला वैश्विक दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बचपन की रक्षा का संकल्प है। हर बच्चा सुरक्षित, सम्मानित और भयमुक्त वातावरण में बड़ा होने का हक रखता है। आइए, आज संकल्प लें—
    हम बच्चों की आवाज़ बनेंगे, उनकी ढाल बनेंगे और उनके भविष्य को उजाला देंगे।
    याद रखिए, एक आवाज़ कई ज़िंदगियाँ बचा सकती है।

भारतीय सेना का बड़ा कदम: रुद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड की सफलता के बाद ‘कोल्ड स्ट्राइक’ सिद्धांत लागू करने की तैयारी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)हाल ही में संपन्न तीनों सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ ने भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमताओं को नए आयाम दिए हैं। इस अभ्यास में नवगठित रुद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड ने जिस दक्षता और समन्वय का प्रदर्शन किया, उसने सेना को अपने पारंपरिक ‘कोल्ड स्टार्ट’ सिद्धांत को उन्नत कर ‘कोल्ड स्ट्राइक’ मॉडल अपनाने की दिशा में निर्णायक संकेत दिया है।

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दक्षिणी कमान के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में संचालित ‘अखंड प्रहार’ के बाद स्पष्ट कहा कि रुद्र ब्रिगेड ने “पूरी तरह से ऑपरेशनल क्षमता सिद्ध कर दी है।” उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि भारतीय सेना तेजी, समेकन और बहु-आयामी प्रहार क्षमता के साथ Cold Strike जैसी उन्नत रणनीति अपनाए, जो भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप है।

क्यों आवश्यक हुई ‘कोल्ड स्ट्राइक’ रणनीति?

2001 में संसद पर हुए हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम के दौरान भारतीय सेना को सीमा तक पहुंचने में लंबा समय लगा था। इस धीमी लामबंदी के कारण सामरिक नुकसान हुआ। इसके बाद ‘कोल्ड स्टार्ट’ सिद्धांत बना, जो तेज और सीमित अभियानों पर आधारित था। लेकिन बदलते सुरक्षा परिदृश्य, आधुनिक तकनीक, नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध और ड्रोन आधारित ऑपरेशनों ने अब एक और तेज, सटीक और बहु-आयामी मॉडल — कोल्ड स्ट्राइक की आवश्यकता को जन्म दिया।

रुद्र ब्रिगेड: भविष्य की “स्वयंपूर्ण युद्ध इकाई”

भारतीय सेना 250 से अधिक पारंपरिक ब्रिगेडों को आधुनिक रुद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड में बदल रही है। इनमें पैदल सेना, मैकेनाइज़्ड यूनिट, टैंक रेजिमेंट, तोपखाना, एयर डिफेंस, इंजीनियर, सिग्नल, विशेष बल और ड्रोन स्क्वॉड्रन तक एकीकृत होंगे।
रुद्र ब्रिगेड शांति और युद्ध—दोनों ही परिस्थितियों में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम होंगी।

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वर्तमान में लद्दाख और सिक्किम में दो रुद्र ब्रिगेडें पहले ही तैनात हैं, जो चीन सीमा पर भारतीय तैयारी और सामरिक बढ़त को और मजबूत करती हैं।

त्रिशूल अभ्यास: संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान 12 ‘कोणार्क’ कोर ने रुद्र ब्रिगेड ‘ब्लैक मेस’ को जिस तरह तैनात किया, वह इंडियन आर्मी के ज्वॉइंट ऑपरेशन मॉडल की उत्कृष्ट मिसाल है।
इसमें हेलिबॉर्न मिशन, मैकेनाइज़्ड मूवमेंट, टैंक-मैनुवर, आर्टिलरी फायर, ड्रोन-आधारित लक्ष्य निर्धारण और वायुसेना के ग्राउंड-अटैक मिशनों ने सेना की नई युद्ध क्षमता को सिद्ध किया।

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रुद्र ब्रिगेडों का उभार और ‘कोल्ड स्ट्राइक’ मॉडल भारतीय सेना के विकास का निर्णायक अध्याय है। यह तेज, लचीले, सटीक और बहु-स्तरीय युद्ध अभियानों की दिशा में भारत की मजबूत रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

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भारत अब दुनिया को साफ संदेश दे रहा है— हम हर परिस्थिति में तैयार हैं, पहले से अधिक शक्ति और गति के साथ।

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विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स टीम औपचारिक रूप से चयनित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स टीम का औपचारिक चयन विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित वार्षिक एथलेटिक प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। यह टीम दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में मंगलूर विश्वविद्यालय, मंगलूर में आयोजित होने वाली अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक प्रतियोगिता 2025-26 में भाग लेगी।
महिला वर्ग में रिया सिंह गौतम (विश्वविद्यालय) तथा पूनम निषाद (कल्पनाथ राय महाविद्यालय) को अस्थायी रूप से चयनित किया गया है। पुरुष वर्ग में ज्ञान सिंह यादव, ऋषभ, रुद्र नारायण, विशांत, आशुतोष, हर्ष त्यागी, अनुकरन (कल्पनाथ राय महाविद्यालय), रवि राय (एस.के. ज़ी.एन. महाविद्यालय), पिंटू कुमार (अखिल भाग्य पी.जी. कॉलेज) तथा संदीप (स्व. राम रहस्य महाविद्यालय) का अस्थायी चयन किया गया है।
विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के सचिव डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि सभी चयनित खिलाड़ी 20 नवंबर को अपराह्न 1:00 बजे विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद कार्यालय में अपने परिचय पत्र, शुल्क रसीद, आधार कार्ड एवं समस्त शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित हों।

युवाओं के लिए संस्कृति और पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की संभावनाएँ

बिछुआ/छिंदवाड़ा(राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में 17 नवंबर 2025 कोसंस्कृति और पर्यटन क्षेत्र में करियर विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृति एवं पर्यटन के क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्पों से अवगत कराना था।
मुख्य वक्ता डॉ. मदन ठाकरे ने छात्रों को इस क्षेत्र में बढ़ते अवसरों, आवश्यक योग्यताओं और उज्ज्वल संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पर्यटन उद्योग के विस्तार के साथ प्रशिक्षित युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। साथ ही सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में युवाओं की भूमिका को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट वक्ता राम प्रकाश डेहरिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह क्षेत्र न केवल रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में कौशल विकास के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम का संचालन डॉ. शाहिदा मंसूरी ने किया। आभार प्रदर्शन दुजारी ने किया। प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव के निर्देशन में कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की रूपरेखा एसवीसीजीसी प्रभारी डॉ. फरहत मंसूरी ने प्रस्तुत की।
व्याख्यान में महाविद्यालय के लगभग 60 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और करियर से संबंधित उपयोगी जानकारियाँ प्राप्त की।

सीएम डैशबोर्ड पर प्रगति की समीक्षा: जिलाधिकारी ने विभागों को दी कार्यों में तेजी लाने की चेतावनी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम डैशबोर्ड पर प्रदर्शित प्राप्तांक एवं ग्रेडिंग के आधार पर विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सीएम डैशबोर्ड की प्रगति रिपोर्ट में खराब श्रेणी वाले इंडिकेटर्स पर गंभीर नाराज़गी जताते हुए संबंधित विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं और कार्यों में गुणात्मक प्रगति सुनिश्चित करें तथा बेहतर परफॉर्मेंस बनाए रखें।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति पर वेंडर्स से जानकारी प्राप्त की और कहा कि विद्युत विभाग तथा वेंडर्स आपसी समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण कराएं। अपेक्षाकृत धीमी प्रगति पर उन्होंने सुधार लाने और आवश्यकतानुसार कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्युत उपभोक्ताओं के बिल सुधार संबंधी लंबित प्रकरणों को तत्काल निस्तारित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिशाषी अभियंता विद्युत को निर्देशित करते हुए कहा कि सरकारी भवनों, नवनिर्मित भवनों तथा पेयजल परियोजनाओं में भुगतान होने के बावजूद विद्युत कनेक्शन, ट्रांसफार्मर व शिफ्टिंग से जुड़े लंबित मामलों का तत्काल निस्तारण किया जाए। विद्यालयों में कनेक्शन/शिफ्टिंग के प्रकरणों का स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र निपटारा कराने के निर्देश भी दिए।
फैमिली आईडी बनाने की प्रगति की विकासखंडवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने समस्त एडीओ पंचायतों से कहा कि जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, उनका शत-प्रतिशत फैमिली आईडी बनवाना सुनिश्चित करें। शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों को भी प्रगति तेज करने के निर्देश दिए गए।
जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जिन राशन कार्डों में बच्चों के नाम छूटे हैं, उन्हें तत्काळ दर्ज कराया जाए। कन्या सुमंगला योजना के लंबित आवेदनों को गुणवत्तापूर्ण परीक्षण के बाद निस्तारित करने के निर्देश जिला प्रोबेशन अधिकारी को दिए गए।
जल जीवन मिशन की समीक्षा में जिलाधिकारी ने कहा कि पाइप्ड पेयजल योजना से आच्छादित सभी ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत घरों को पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए तथा ऑनलाइन फीडिंग समय से पूरी की जाए। जिन गांवों में जलापूर्ति चालू है, वहां हर घर में कनेक्शन देना सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों से फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स से संबंधित आंकड़ेवार जानकारी प्राप्त कर विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं एवं निर्माण कार्यों में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति बनाए रखें, ताकि सीएम डैशबोर्ड पर जनपद की रैंकिंग बेहतर बनी रहे।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी हरकेश यादव, डीसी मनरेगा प्रभात द्विवेदी, परियोजना निदेशक विजयंत सिंह, अर्थ एवं संख्या अधिकारी अजय श्रीवास्तव, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण आर. के. पांडेय, अधिशासी अभियंता विद्युत राजेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, जिला पूर्ति अधिकारी राजीव कुमार, खंड विकास अधिकारीगण, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

शातिर नकली नोट सप्लायर भोपाल में गिरफ्तार

दिन में सिर्फ 4 नोट चलाकर बनाता था पुलिस को चकमा, घर से 30 लाख का रॉ मटेरियल जब्त

भोपाल/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पुलिस ने नकली मुद्रा का बड़ा नेटवर्क तोड़ते हुए देवरिया के एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी विवेक यादव, जो देवरिया जिले के मईल थाना क्षेत्र के मुरारबारी इसारु गांव का रहने वाला है, लंबे समय से भोपाल और आसपास के इलाकों में नकली नोटों की सप्लाई कर रहा था।

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‘धीमी चाल, बड़ा खेल’— दिन में सिर्फ 3–4 नोट
पुलिस की पूछताछ में विवेक ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वह संदेह से बचने के लिए रोजाना केवल 3 से 4 नकली 500 रुपये के नोट ही चलाता था। उसकी रणनीति छोटे कारोबारियों—पान की दुकानों, चाय-नाश्ता केंद्रों, किराना और सड़क किनारे होटलों—को निशाना बनाने की थी, जहां नोटों की जांच कम होती है। इसी ‘स्लो एंड स्टेडी’ तरीके ने उसे महीनों तक पुलिस की नज़रों से दूर रखा।

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किराए के घर में मिली मिनी करेंसी फैक्ट्री
पिपलानी क्षेत्र में विवेक के किराए के कमरे पर छापेमारी में पुलिस दंग रह गई। यहां से ₹500 के 428 नकली नोट और 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य का उच्च गुणवत्ता वाला रॉ मटेरियल व उपकरण बरामद किया गया। पुलिस का शक है कि विवेक किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा है, क्योंकि बरामद मशीनें एडवांस लेवल की हैं।
दुकानदार की सतर्कता से खुला पूरा रैकेट
कहानी की सबसे बड़ी कड़ी एक जागरूक दुकानदार निकला जिसने नकली नोट पहचानकर पुलिस को सूचना दी। जब विवेक दोबारा उसी दुकान पर नोट चलाने पहुंचा, तो उसे मौके पर ही पकड़ लिया गया।
देवरिया पुलिस भी सक्रिय
भोपाल पुलिस ने देवरिया पुलिस को सूचना भेज दी है। अब दोनों जिलों की टीमें मिलकर इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। विवेक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पूर्व विधायक के बेटे और भाई पर हमला: दो गंभीर रूप से घायल

पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया, पूछताछ जारी

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कोतवाली क्षेत्र के मझौली चौकी अंतर्गत रौनी गंगा चक गांव में शनिवार देर रात वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। इस घटनाक्रम में पूर्व सपा विधायक मानवेन्द्र प्रसाद के बेटे मुकुट मणि प्रसाद और भाई अमीन प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद देर रात ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दोनों घायलों का सोमवार दोपहर जिला अस्पताल में पुलिस अभिरक्षा में मेडिकल परीक्षण कराया गया।
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार रौनी गंगा चक गांव में एक परिवार में वैवाहिक कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय लोग आमंत्रित थे, जिनमें पूर्व विधायक मानवेन्द्र प्रसाद का परिवार भी शामिल था। भोजन के बाद किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला बढ़ा और कहासुनी मारपीट में बदल गई। इस दौरान पूर्व विधायक के बेटे मुकुट मणि एवं भाई अमीन प्रसाद पर लाठी-डंडों से हमला किया गया, जिससे वे लहूलुहान हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर मझौली पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल भेजवाया।
पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद तीन संदिग्ध व्यक्तियों को मौके से ही हिरासत में ले लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है ताकि मारपीट के कारणों और आरोपियों की सटीक भूमिका का पता लगाया जा सके। फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति न बने, इसके लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

सेना में नौकरी का झांसा देकर 23 लाख की ठगी, नायक और हवलदार पर मुकदमा दर्ज

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में सेना में सिविल पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से 23 लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सलेमपुर कोतवाली पुलिस ने शिकायतकर्ता रंजीत कुमार गुप्ता की तहरीर पर दो सैन्यकर्मियों के विरुद्ध 16 नवंबर 2025 को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में मुख्य आरोपी नायक संतोष कुमार दूबे बताए गए हैं, जिनकी वर्तमान तैनाती पुणे के देहू रोड स्थित केंद्रीय आयुध भंडार में है। उनके साथ हवलदार चालक बीरबल यादव को भी सह–आरोपी बनाया गया है, जिसने पीड़ित युवकों को नायक दूबे से मिलवाया था।
प्रार्थीगणों के अनुसार, आरोपियों ने रक्षा मंत्रालय और आयुध भंडार में सिविल पदों पर भर्ती का लालच दिया था। नायक दूबे ने प्रति अभ्यर्थी छह लाख रुपये में से तीन लाख रुपये “सुरक्षा राशि” के नाम पर मांगे। यह पूरी रकम 21 दिसंबर 2020 से 13 जनवरी 2021 के बीच कुल तेरह किश्तों में नायक दूबे के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जमा कराई गई।

आरोपी ने रकम लेने के बाद फरवरी 2022 और मार्च 2023 में संदिग्ध और कूटरचित भर्ती परिणाम सूची भेजकर पीड़ितों को विश्वास में बनाए रखा। जब लंबे समय तक नियुक्ति न मिलने पर प्रार्थीगणों ने अपनी राशि वापस मांगी, तो आरोपी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ितों ने बताया कि इस प्रकरण में वे राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को लगभग 30 प्रार्थना–पत्र दे चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

संत विनोबा पीजी कॉलेज में बढ़ता असंतोष: छात्र नेताओं ने मुकदमे को बताया एकतरफ़ा , निष्पक्ष जांच की मांग तेज़

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के संत विनोबा पीजी कॉलेज के प्राचार्य द्वारा की गई शिकायत के आधार पर छात्र संघ अध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव, छात्र नेता बालमुकुंद मिश्रा व निर्भय उर्फ सिंटू शाही पर दर्ज मुकदमे को लेकर विवाद और गहरा गया है। शुक्रवार को कई पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों ने प्रेसवार्ता कर इस कार्रवाई को “तथ्यों से परे”, “एकतरफ़ा” और “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है।

पूर्व छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि प्राचार्य द्वारा भेजी गई शिकायत में कई बिंदु न तो स्पष्ट हैं और न ही उनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के छात्र पदाधिकारियों पर कार्रवाई ने कॉलेज परिसर में असंतोष और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।

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पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा—
“आनंद श्रीवास्तव और सिंटू शाही को बिना ठोस साक्ष्यों के आरोपित किया गया है। यह कार्रवाई छात्रों पर दबाव बनाने की कोशिश लगती है। प्रशासन को स्वतंत्र जांच कर वास्तविकता सामने लानी चाहिए।”
दूसरे पूर्व नेता ने प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा—
“कॉलेज में शिक्षा का माहौल लगातार बिगड़ रहा है। छात्रों को निशाना बनाए जाने से स्थिति और जटिल होती जा रही है। हम चाहते हैं कि पूरे मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।”

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शुल्कों की मनमानी पर गंभीर आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान एक अन्य पूर्व अध्यक्ष ने प्राचार्य पर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और छात्रों से वसूले जा रहे शुल्कों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कॉलेज द्वारा लिए जा रहे शुल्क और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं में ज़मीन–आसमान का अंतर है।

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पुस्तकालय शुल्क:
छात्रों से पुस्तकालय शुल्क वसूला जाता है, लेकिन पुस्तकालय में मुख्य पाठ्यक्रम की किताबें पर्याप्त उपलब्ध नहीं हैं।
आईडी कार्ड शुल्क:
आईडी कार्ड के नाम पर शुल्क लिए जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों से छात्रों को आईडी कार्ड जारी नहीं किए गए, जिससे कई छात्र MST फार्म भरने में भी असमर्थ हैं।

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यूनियन शुल्क:
कॉलेज में छात्र संघ चुनाव प्रक्रिया नहीं होती, फिर भी छात्रों से यूनियन शुल्क वसूला जाता है। पूर्व नेताओं ने इसे अनुचित बताते हुए शुल्क बंद करने की मांग की।
खेलकूद शुल्क:
खेलकूद के नाम पर शुल्क तो लिया जाता है, लेकिन छात्रों को कोई खेल सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती और न ही प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं। इसलिए इस शुल्क को भी बंद किए जाने की मांग उठी।

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आंदोलन की चेतावनी
पूर्व अध्यक्षों ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो वे छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की ताकि कॉलेज का शैक्षणिक वातावरण शांतिपूर्ण, सुरक्षित और पारदर्शी रह सके।

बांग्लादेश ने भारत से शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की, नई दिल्ली की प्रतिक्रिया सतर्क

ढाका (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ढाका सरकार ने भारत से अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को तुरंत सौंपने की औपचारिक मांग कर दी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह अनुरोध दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत किया गया है, जिसे उन्होंने “स्पष्ट और अनिवार्य दायित्व” बताया है।

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यह मांग उस समय सामने आई जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पिछले वर्ष देशव्यापी छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में कथित भूमिका के लिए शेख़ हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मृत्युदंड सुनाया। माना जाता है कि जुलाई 2024 की घटनाओं के बाद उत्पात के दौरान हसीना ढाका छोड़कर भाग गई थीं और तब से अगस्त 2024 से भारत में शरण लिए हुए हैं।

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ढाका के बयान में यह भी कहा गया कि किसी भी देश द्वारा हसीना को पनाह देने का प्रयास “न्याय और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर अनादर” माना जाएगा। बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण के फैसले को देखते हुए भारत को अपने कानूनी दायित्वों का सम्मान करते हुए तत्काल प्रत्यर्पण सुनिश्चित करना चाहिए।

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उसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी अनुपस्थिति में न्यायालय में सुनवाई के बाद मृत्युदंड दिया गया है। ढाका ने यह भी मांग दोहराई कि कमाल को भी बिना किसी विलंब के बांग्लादेश भेजा जाए ताकि वह न्याय का सामना कर सकें।

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बांग्लादेश की इस कड़ी मांग के कुछ घंटों बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई दिल्ली ने फैसले का संज्ञान ले लिया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत, एक करीबी पड़ोसी होने के नाते, बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत बांग्लादेश के सभी हितधारकों से रचनात्मक संवाद जारी रखेगा। हालांकि बयान में प्रत्यर्पण की मांग का सीधा उल्लेख नहीं किया गया।

विशेषज्ञ इसे दक्षिण एशिया की राजनीति में नए तनाव की शुरुआत मान रहे हैं। एक ओर ढाका न्यायिक प्रक्रिया को लागू करने की कोशिश में कठोर रुख अपना रहा है, वहीं भारत क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए सतर्क रणनीति पर चलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों और दक्षिण एशियाई कूटनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

जागृति यात्रा 2025 देवरिया पहुँची: आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ युवाओं में उद्यमशीलता की नई ऊर्जा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)विश्व स्तर पर युवा उद्यमियों की सबसे प्रतिष्ठित यात्राओं में शामिल जागृति यात्रा 2025 आज अपने मूल उद्देश्यों के साथ देवरिया पहुँची। यात्रा के संस्थापक एवं देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की थीम पर आधारित यह 18वां संस्करण पूर्वांचल के युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

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उन्होंने बताया कि जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल अब गोरक्ष प्रांत के देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, बस्ती, आज़मगढ़, मऊ, बलिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर सहित 10 जिलों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय है।

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यात्रा में देशभर के 525 युवा उद्यमी, जिनमें 190 महिलाएँ शामिल हैं, लगभग 8,500 किमी का सफर तय करते हुए देवरिया–कुशीनगर पहुँच रहे हैं। यह युवा देश के 28 राज्यों से आए हैं और बरगद के संदेश से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान का संकल्प ले रहे हैं।

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इस बार यात्रा मुंबई, हुबली, कोच्चि, मदुरै, श्रीहरिकोटा, विशाखापत्तनम, बहरामपुर और नालंदा से होते हुए देवरिया पहुँची है। कल सभी यात्री पहली बार संसद भवन का अवलोकन करेंगे तथा आगे जयपुर और साबरमती आश्रम के पड़ाव पार करते हुए 22 नवंबर को मुंबई में समापन करेंगे।

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जागृति मूवमेंट के संस्थापक शशांक मणि ने कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के अनुरूप यात्रा को इस वर्ष अभियान से जोड़ दिया गया है। यह यात्रा युवाओं को स्वावलंबन, नवाचार और आर्थिक नेतृत्व की दिशा में प्रेरित कर रही है।

जागृति के सीईओ आशुतोष कुमार ने बताया कि इस वर्ष यात्रा के लिए 68,000 आवेदनों में से 525 युवाओं का चयन किया गया है। प्रत्येक पड़ाव पर यात्री देश के प्रमुख रोल मॉडल उद्यमों और जमीनी नवाचारों से परिचित होंगे।

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देवरिया को उन्होंने जागृति आंदोलन की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि यहीं से “हम ही भारत, हम ही बदलाव” की सोच को आकार मिला था।

पिछले 18 संस्करणों में जागृति यात्रा ने 26 देशों के 9,000 से अधिक युवाओं को जोड़ा है, जिनमें से 60% गैर-शहरी पृष्ठभूमि और 45% महिलाएँ हैं। लगभग 28% पूर्व यात्रियों ने हेल्थकेयर, शिक्षा, एग्रीटेक, फिनटेक और सस्टेनेबिलिटी में सफल उद्यम खड़े किए हैं।

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एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, महाराष्ट्र स्टेट इनोवेशन सोसाइटी, टैली सॉल्यूशंस, कैंपा, बैंक ऑफ इंडिया, EDII, और HP इस यात्रा के प्रमुख सहयोगी संस्थान हैं।

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ददरी मेला में फुटबॉल प्रतियोगिता संपन्न


बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
ददरी मेला के अंतर्गत आयोजित खेल कार्यक्रम में आज फुटबॉल महिला वर्ग और पुरुष वर्ग की प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि विधानसभा सदस्य श्री रविशंकर सिंह उर्फ पप्पू की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि द्वारा मैच का शुभारंभ किया गया।
महिला फुटबॉल प्रतियोगिता के परिणाम महिला वर्ग में आयोजित रोमांचक मुकाबले में स्टेडियम बलिया की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। सोनडीह टीम, बलिया उपविजेता रही। स्टेडियम टीम की ओर से एशियन गेम्स फुटबॉलर प्रिय सिंह ने भी हिस्सा लिया, जिससे प्रतियोगिता में उत्साह और बढ़ गया।
पुरुष फुटबॉल प्रतियोगिता
पुरुष वर्ग की फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला कल खेला जाएगा, जिसे लेकर खिलाड़ियों और दर्शकों में उत्साह देखा जा रहा है। ददरी मेला के इस खेल आयोजन ने प्रतिभा और खेल भावना दोनों को मंच प्रदान किया तथा स्थानीय खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी।

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के अवसर पर सर्व सेवा संस्थान रसडी नवरत्नपुर के द्वारा अमरनाथ आदर्श इंटर कॉलेज, खेजुरी, बलिया में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों को मिर्गी (Epilepsy) के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना था। कार्यक्रम में प्राचार्य उदय नारायण ने मिर्गी के कारण, लक्षण, उपचार और इससे जुड़े विभिन्न मिथकों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिर्गी कोई असाध्य रोग नहीं है, बल्कि नियमित उपचार, दवा और सावधानियों के जरिए इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि समाज में इस रोग को लेकर फैली गलत धारणाओं को दूर करने में सभी अपनी भूमिका निभाएँ। सर्व सेवा संस्थान की टीम ने छात्रों को मिर्गी के दौरान दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार (First Aid) के महत्वपूर्ण तरीकों की जानकारी भी दी, ताकि दौरा पड़ने की स्थिति में तुरंत और सही सहायता प्रदान की जा सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएँ, शिक्षकगण और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

बांग्लादेश राजनीति संकट: शेख हसीना को फांसी की सजा से क्षेत्रीय अस्थिरता गहरी, भारत कठिन दुविधा में

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल से गुजर रही है। ढाका के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को “मानवता के खिलाफ अपराध” के आरोप में दी गई फांसी की सजा ने देश में नई अस्थिरता को जन्म दे दिया है। हसीना की अनुपस्थिति में चलाए गए इस मुकदमे ने न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचक इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बताते हुए अदालत की विश्वसनीयता पर भी निष्पक्षता की कमी का आरोप लगा रहे हैं।

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शेख हसीना, जो बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली नेता रही हैं, देश में व्यापक जनाधार रखती हैं। ऐसे में उनकी सजा के बाद बांग्लादेश में हिंसा और तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। फैसले से पहले ही देश में कई स्थानों पर विस्फोट, हिंसा और पुलिस की खुली फायरिंग की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। प्रशासन ने हालात काबू में रखने के लिए ‘देखते ही गोली मारने’ के आदेश तक जारी किए हैं।

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इस बीच, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार जनता के विश्वास संकट से जूझ रही है। विपक्ष से टकराव, कानून-व्यवस्था की विफलता और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते संघर्ष ने उसकी विश्वसनीयता को और कमजोर किया है। ऐसे माहौल में शेख हसीना को फांसी की सजा को कई विशेषज्ञ राजनीतिक छवि सुधारने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

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सबसे कठिन स्थिति भारत के सामने है, क्योंकि शेख हसीना फिलहाल भारत में रह रही हैं। ढाका की अंतरिम सरकार उनकी वापसी की मांग कर चुकी है। यदि भारत उन्हें सौंपता है तो यह राजनीतिक प्रतिशोध को वैधता देने जैसा होगा। वहीं यदि भारत उन्हें शरण देता है तो द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।

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स्पष्ट है कि यह फैसला केवल न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा समीकरण का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय बढ़ाने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

डीपीआरसी श्रावस्ती में प्रत्येक विकासखंड से पाँच ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव हुए शामिल

श्रावस्ती।(राष्ट्र की परम्परा)
पंचायत राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय विकसित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डीपीआरसी, श्रावस्ती में प्रारम्भ हुआ। प्रशिक्षण में जनपद के प्रत्येक विकासखंड से चयनित पाँच ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान एवं सचिव शामिल हुए।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ फैकल्टी बृजेश कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागियों को ग्राम पंचायतों में आय वृद्धि के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1,500 से कम आबादी वाली ग्राम पंचायतें जितनी स्वयं की आय अर्जित करेंगी, सरकार उसके पाँच गुने की धनराशि प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि पंचायतें खाली जमीन पर नर्सरी विकसित कर, तालाबों का पट्टा देकर, तालाब किनारे सामुदायिक गतिविधियाँ संचालित कर, गौशाला के गोबर से जैविक खाद बनाकर, ग्राम पंचायत में दुकानें बनवाकर तथा आधार सेवा केंद्र/सीएससी स्थापित कर अच्छी आय अर्जित कर सकती हैं।

मास्टर ट्रेनर अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि कर एवं गैर-कर लागू करने से पहले ग्रामीणों को जागरूक करना जरूरी है। पंचायतें परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर कर निर्धारित करें तथा कर वसूली के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी रखें।
मास्टर ट्रेनर इन्दु ने बताया कि सेवा शुल्क लेने के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करना आवश्यक है। पंचायत भवन में संचालित सीएससी केंद्र भी आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।

प्रशिक्षण के दौरान सचिव विकास कुमार मौर्य, राकेश कुमार वर्मा, मोनू रस्तोगी, शबनम यादव, मोईन सिद्दीकी, राम दर्शन, कृष्ण कुमार भारतीय तथा ग्राम प्रधान रज्जब अली, इन्दु सिंह, हेम राज वर्मा, छांगूर प्रसाद, रोहित कुमार गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण की व्यवस्थाएँ इंटको कंपनी द्वारा की गईं, जिसमे कंपनी के जिला समन्वयक सौरभ श्रीवास्तव मौजूद रहे।