Tuesday, June 30, 2026
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राहुकाल, चौघड़िया, योग और उपाय

🌅 19 नवम्बर 2025 का शुभ-अशुभ पंचांग
19 नवम्बर 2025 का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, खगोलीय परिवर्तन और महत्वपूर्ण ग्रह संयोगों के साथ एक विशेष तिथि लिए आता है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तथा अमावस्या का संगम यह दिन पूजा-पाठ, पितृ स्मरण, साधना तथा आत्मिक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह पंचांग आपको दिनभर के शुभ-अशुभ समय, यात्रा दिशाएँ, और ऐसे उपाय बताएगा जो आपकी दिनचर्या को मंगलमय बना दें।

ये भी पढ़ें – चंदन सिंह (35) की गर्दन काटकर निर्मम तरीके से हत्या

🌠 19 नवम्बर 2025 का विस्तृत पंचांग

📅 तिथि
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – प्रातः 09:43 AM तक
अमावस्या – 09:43 AM से अगले दिन 12:17 PM तक
✨ नक्षत्र
स्वाति – 07:59 AM तक
विशाखा – 07:59 AM से अगले दिन 10:58 AM तक
🕉️ योग
सौभाग्य योग – 09:00 AM तक
शोभन योग – 09:00 AM से अगले दिन 09:52 AM तक
🕢 करण
शकुनि – 09:44 AM तक
चतुष्पद – 09:44 AM से 11:00 PM तक
नाग – 11:00 PM से अगले दिन 12:17 PM तक
☀️ सूर्य व चंद्र
सूर्योदय – 06:47 AM
सूर्यास्त – 05:37 PM
चन्द्रोदय – 05:46 AM
चन्द्रास्त – 04:51 PM
सूर्य राशि – वृश्चिक
चंद्र राशि – 04:14 AM तक तुला, उपरांत वृश्चिक

ये भी पढ़ें – “रफ्तार की भूल, ज़िंदगी की भूल—सड़कों पर बढ़ते हादसों की दर्दभरी सच्चाई”

🔥 19 नवम्बर 2025 के शुभ-अशुभ समय
❗ अशुभ काल
राहुकाल – 12:12 PM से 01:33 PM
यमगण्ड – 08:08 AM से 09:29 AM
कुलिक – 10:51 AM से 12:12 PM
दुर्मूहूर्त – 11:50 AM से 12:33 PM
वर्ज्यम् – 02:17 PM से 04:05 PM
🌼 शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त – 05:11 AM से 05:59 AM
अमृत काल – 01:04 AM से 02:52 AM
अभिजीत मुहूर्त – उपलब्ध नहीं
🧭 आज किस दिशा की यात्रा शुभ/अशुभ?
शुभ दिशा यात्रा:
✔️ उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशाओं में यात्रा लाभकारी।
व्यापार, धन, शिक्षा और सम्मान को बढ़ावा मिलेगा।
अशुभ दिशा यात्रा:
❌ दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें।
इससे थकान, विघ्न या अनिश्चितता बढ़ सकती है।
🍃 आज घर से निकलते समय क्या खाएँ?
शास्त्रों में यात्रा को सफल बनाने के लिए विशेष भोजन का उल्लेख मिलता है—
दही-चीनी: मन शांत, कार्य सफल होते हैं
गुड़: विघ्न कम, सौभाग्य बढ़े
पान का पत्ता (स्वच्छता के साथ): नई शुरुआत के लिए मंगलकारी
हल्दी मिश्रित पानी का एक घूंट: नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है
सबसे श्रेष्ठ उपाय:
👉 “दही-शक्कर” खाकर यात्रा शुरू करें।
✨ आज क्या करने से बनेंगे बिगड़े काम?
✔️ 1. शिव–ध्यान और ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जप
दिन के ग्रहदोष शांत होते हैं और मानसिक स्थिरता मिलती है।
✔️ 2. तुलसी पर जल चढ़ाकर प्रणाम करें
घर और मन दोनों में सौभाग्य बढ़ता है।
✔️ 3. माता-पिता या बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर निकलें
किए गए कार्यों में बाधाएँ स्वतः दूर होती हैं।
✔️ 4. शनि एवं पितृ शांति हेतु एक दीपक पीपल के नीचे जलाएँ
अमावस्या तिथि पर यह अत्यंत प्रभावी उपाय है।
🌙 चंद्रबल (आज किस राशि वालों को चंद्र का विशेष साथ?)
20 नवंबर 04:14 AM तक:
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
उपरांत 06:48 AM तक:
वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ
🌟 ताराबल (नक्षत्र अनुसार शुभता)
07:59 AM तक:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
उपरांत 20/11/25 06:48 AM तक:
भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वाफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा, रेवती
🕰️ दिन और रात्रि के चौघड़िये
🌞 दिन का चौघड़िया
लाभ – 06:47 AM – 08:08 AM
अमृत – 08:08 AM – 09:29 AM
काल – 09:29 AM – 10:51 AM
शुभ – 10:51 AM – 12:12 PM
रोग – 12:12 PM – 01:33 PM
उद्बेग – 01:33 PM – 02:54 PM
चर – 02:54 PM – 04:15 PM
लाभ – 04:15 PM – 05:37 PM
🌙 रात्रि का चौघड़िया
उद्बेग – 05:37 PM – 07:16 PM
शुभ – 07:16 PM – 08:54 PM
अमृत – 08:54 PM – 10:33 PM
चर – 10:33 PM – 12:12 AM
रोग – 12:12 AM – 01:51 AM
काल – 01:51 AM – 03:30 AM
लाभ – 03:30 AM – 05:09 AM
उद्बेग – 05:09 AM – 06:48 AM

“रफ्तार की भूल, ज़िंदगी की भूल—सड़कों पर बढ़ते हादसों की दर्दभरी सच्चाई”

तेज़ रफ्तार की चमकती दुनिया में हम सब ऐसे दौड़ पड़े हैं जैसे मंज़िल अभी हाथ से निकल जाएगी। हाईवे चौड़े हुए, गाड़ियाँ तेज़ हुईं और समय बचाने की होड़ बढ़ती चली गई। पर इस तेज़ी की दौड़ में एक कड़वी सच्चाई छिपी है—हमने रफ्तार बढ़ाई, लेकिन ज़िंदगी की सुरक्षा को पीछे छोड़ दिया।
हर दिन सड़कें जिस तरह खून से लाल हो रही हैं, वह किसी एक व्यवस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सतही सोच और लापरवाह व्यवहार की कठोर याद दिलाती है।

रफ्तार की हड़बड़ी—जहाँ सेकंड की गलती उम्रभर की कीमत बन जाती है

हमारी सड़कों पर आधुनिकीकरण का रंग तो दिखता है, लेकिन सुरक्षा की परत आज भी उतनी ही कमजोर है। गाड़ियों की स्पीड जहाँ 100 पार कर जाती है, वहीं चालक का ध्यान 10% भी नहीं रहता। यही संतुलन बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण है।
दुर्घटनाएँ सड़क की नहीं होतीं—वे हमारी मानसिकता की देन होती हैं।

लापरवाही—मौत की सबसे आसान राह

हर हादसे के पीछे कुछ बेहद कॉमन लापरवाहियाँ छिपी होती हैं:

हेलमेट या सीट बेल्ट को बोझ समझना

मोबाइल के कारण ध्यान भटकाना

तेज़ी का दिखावा

शराब पीकर ड्राइविंग की मूर्खता

गलत दिशा में गाड़ी

इनमें से किसी एक गलती का नतीजा सिर्फ एक्सीडेंट नहीं होता

किसी परिवार की ज़िंदगी का अंत होता है।

🕯️ पीछे छूट जाते हैं अधूरे सपने

सड़क दुर्घटनाएँ केवल आंकड़े नहीं,
वे टूटे परिवार, खाली कुर्सियाँ, अधूरी मुस्कानें और हमेशा के लिए खामोश हो चुकी आवाज़ें हैं।
हर दुर्घटना के बाद सड़क पर सिर्फ खून नहीं बहता—
किसी माँ की दुनिया, किसी बच्चे का भविष्य, या किसी पत्नी की उम्मीद बह जाती है।

📍 सुरक्षित सड़कें बनाकर नहीं, सुरक्षित व्यवहार अपनाकर बनती हैं

सरकारें सड़कें बनाती हैं,
नियम बनाती हैं,
कैमरे लगाती हैं,
लेकिन नियम मानने की ज़िम्मेदारी हमारी है।

अगर हर नागरिक केवल 5 बातों का पालन करे, तो आधी दुर्घटनाएँ उसी दिन कम हो जाएँ:

  1. तेज़ रफ्तार छोड़कर नियंत्रित गति अपनाएँ
  2. हमेशा हेलमेट व सीट बेल्ट
  3. मोबाइल का उपयोग शून्य
  4. नशे में ड्राइविंग बिल्कुल बंद
  5. ट्रैफिक संकेतों का सम्मान

ये नियम बंधन नहीं—जिंदगी की सुरक्षा कवच हैं।

💡 हमने सड़कें बदल दीं, अब सोच बदलने की ज़रूरत है

आधुनिक सड़कें तभी सार्थक हैं जब उन पर चलने वाली सोच भी आधुनिक, जिम्मेदार और संवेदनशील हो।
रफ्तार से दौड़ने से हम मंज़िल तक जल्दी पहुँच सकते हैं,
पर सुरक्षा से ही हम हर मंज़िल तक पहुँच पाएँगे।

तेज़ी से जीतना आसान है,
पर सुरक्षा के साथ जीना असली जीत है।
हर सड़क पर एक नियम याद रखें—
रफ्तार आपकी है, लेकिन ज़िंदगी आपके साथ कई जिंदगियाँ लेकर चलती है।

चंदन सिंह (35) की गर्दन काटकर निर्मम तरीके से हत्या

मनियर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

क्षेत्र के बड़सरी जागीर गांव में बुधवार की सुबह दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जब गांव के ही चंदन सिंह (35) की गर्दन काटकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। घटना नहर मार्ग पर स्थित समाधि स्थल के समीप बहारन सिंह के डेरा पर हुई। सुबह टहलने निकले ग्रामीणों ने जब चंदन का क्षत-विक्षत शव देखा तो सनसनी फैल गई। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही मनियर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की छानबीन शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हत्या के दौरान काफी संघर्ष के निशान मौजूद हैं, जिससे अंदेशा है कि हमलावरों ने बेहद नृशंस तरीके से वारदात को अंजाम दिया है। फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा सकें। ग्रामीणों के अनुसार, मृतक चंदन सिंह उर्फ बाबू सिंह पुत्र स्व. सुरेंद्र सिंह नशे का आदी था और इसी कारण वह कई बार विवादों में भी पड़ जाता था। बताया जा रहा है कि नशे की लत के चलते मनियर पुलिस उसके खिलाफ पहले भी कई बार चालान कर चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब या नशे के ही प्रभाव में किसी बात को लेकर उसका किसी से झगड़ा हुआ होगा, जिसके बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। चंदन की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो चार वर्ष पूर्व उसकी शादी हुई थी, लेकिन घरेलू कलह व विवादों के कारण उसकी पत्नी उससे अलग रह रही है। पत्नी के अलग रहने के बाद से चंदन अक्सर मानसिक रूप से परेशान रहता था और नशे का सेवन अधिक करने लगा था। ग्रामीणों के मुताबिक, उसकी जिंदगी पिछले कुछ वर्षों से तनाव और अव्यवस्था में ही गुजर रही थी। घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, मनियर पुलिस ने भी गंभीरता दिखाते हुए हत्या के विभिन्न पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही वारदात का खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा। इस बर्बर हत्या से पूरे क्षेत्र में शोक और भय का वातावरण व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई और यह अपराध क्षेत्र की शांति को झकझोरने वाला है। पुलिस इस मामले को सुलझाने के लिए संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है और हर कोण से जांच की जा रही है।

विकास की दौड़ से बरहज रेलवे स्टेशन कोशो दूर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
जहाँ रेल मंत्रालय एवं रेलवे मंडल वाराणसी प्रत्येक रेलवे स्टेशनो को आधुनिक साजो सामान से सुसजित करने मे लगा है, वही ब्रिटिश सरकार के शासन कॉल मे व्यापार व यात्रियों को लाने ले जाने के लिए बनाया गया था। लेकिन वर्तमान मे यह स्टेशन अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाने पर मजबूर है। यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशन पर न शुद्ध पिने का पानी की व्यवस्था है ना ही शौचालय, सिर्फ झाड़ फुस से जंगल का रूप धारण कर लिया है। ना जाने कितने प्रतिनिधि हुए लेकिन किसी ने इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन व रेलवे को विकसित करने की कोशिश नहीं की।
स्टेशन पर स्वछता का नामोनिशान नहीं सिर्फ चारो तरफ झाड़ फुस से जंगल बना हुआ है। बरहजिया ट्रेन से हर रोज हजारों यात्रियों का आना जाना होता है अपने अपने कामों के लिए, इस ट्रेन से विद्यार्थियों व आम यात्रियों तथा सलेमपुर से लिंक पकड़ने वाले यात्रियों का आना जाना होता है, किन्तु यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है।
कुछ वर्ष पूर्व बरहज मे एक हवा उडी थी की बरहज रेलवे स्टेशन के खाली पड़ी जमीन पर रेलवें डिपो स्थापित होगा, लोगो मे रोजगार की एक आस जगी थी लेकिन वह हवा शून्यता मे समा गया।
बरहज की लाइफ लाइन कहे जाने वाली बरहजीया ट्रेन को वर्षो पहले समाप्त करने की कोशिश की गयी थी किन्तु छोटे लोहिया के नाम से प्रसिद्ध स्व जनेश्वर मिश्रा ने इसे जनहित मे बचाकर छोटी लाईन से बड़ी लाईन मे परिवर्तित करने का सुंदर कार्य किया गया, तब से आजतक यह ट्रेन आमजनमानस के लिए प्रमुख साधन के रूप मे अपनी सेवा प्रदान कर रहा, किन्तु यात्रियों के लिए रेल प्रशासन द्वारा कोई सुविधा प्रदान नहीं किया गया, व्यवस्था को लेकर समय समय पर कुछ विपक्षी नेताओ द्वारा रेल मंत्रालय को जगाने की कोशिश की गयी किन्तु वह भी हवा के साथ उड़ गया।
व्यापारिक साधन के रूप मे अपनी पहचान बनाने वाला बरहज रेलवे स्टेशन व ट्रेन अपनी अस्मिता बचाने के लिए मजबूर है।

जनता के साथ किया गया छलावा

समाजसेवी श्रीप्रकाश पाल ने रेलवे स्टेशन व ट्रेन की दशा पर अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि, अंग्रेजी हुकूमत के समय बरहज बाजार एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप मे जाना जाता था, और व्यापार के लिए पानी के जहाज व रेल प्रमुख साधन थे किन्तु वर्तमान मे अपनी अस्मिता खो चूका है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा बरहज रेलवे स्टेशन व ट्रेन के ऐतिहासिक पहलु को विकास से कोशो दूर कर जनता के साथ छलावा किया गया है। कभी भी इस ट्रेन को किसी ने आगे बढ़ाने कि कोशिश नहीं की।

बरहज रेलवें की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन

भाकपा जिला सचिव अरविन्द कुशवाहा ने बरहज रेलवे स्टेशन व ट्रेन की दुर्दशा के लिए प्रतिनिधियों को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि, एक समय था बरहजीया ट्रेन से यात्रीगण दूर तक कि यात्रा करते थे किन्तु अब इसे भटनी से सलेमपुर से बरहज तक सिमित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद तक बरहज रेलवे स्टेशन सुविधाओं से परिपूर्ण था, यहाँ कर्मचारी आवास, यात्रियों के ठहरने के लिए सराय खाना व सामान रखने के लिए माल गोदाम था जो अब खंडहर मे तब्दील हो गया है चारो तरफ केवल झाड़ फुस से जंगल बना गया है, वही बरहजीया ट्रेन को किसी ने आगे बढ़ाने कि जुर्रत नहीं की सभी प्रतिनिधियों ने जनता के साथ छलावा कर बरहज के ऐतिहासिक पहलू को आधुनिकता की दौड़ से कर दिया गया है।

बरहज रेलवे की दुर्दशा को दूर कर इसको आधुनिक बनाया जाय

बरहजीया ट्रेन को आगे बढ़ाने व रेलवे स्टेशन को सुविधाओं से सुसजित करने लिए रेल मंत्रालय से मांग करते हुए भलुअनी ब्लाक प्रमुख छट्ठू यादव ने कहाँ कि, अंग्रेजी सरकार के समय से स्थित बरहज रेलवे स्टेशन कायाकल्प कर आधुनिक बनाया जाय ताकि किसी भी यात्री को कोई दिक्कत न होने पाए। उन्होंने मांग करते हुए कहाँ कि बरहजीया ट्रेन को बरहज से दोहरीघाट या बरहज से गोरखपुर सहजनवा तक संचालित किया जाय ताकि लाखो यात्रियों को को इसका लाभ मील सके।ब्लाक प्रमुख छट्ठू यादव ने कहाँ कि बरहज बाजार के ऐतिहासिक व्यापरीक पहलू को जिन्दा कर आधुनिकता कि ओर अग्रसर किया जाय।

“प्रदूषण की कीमत: क्या भारत को चाहिए एक व्यापक ‘प्रदूषण कर’?

पर्यावरणीय आपातकाल और सीमित राजस्व—क्या आर्थिक दंड ही हरित भविष्य का मार्ग बना सकता है?**

भारत विश्व के उन देशों में है जहाँ वायु, जल और मिट्टी का प्रदूषण तीव्र स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी सबसे प्रदूषित नगरों की सूची में भारत के अनेक नगर शामिल हैं। जल-प्रदूषण से प्रतिवर्ष लाखों लोग रोगग्रस्त होते हैं। दूसरी ओर, स्वच्छ ऊर्जा, हरित अवसंरचना और प्रदूषण नियंत्रण हेतु सरकार के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं। ऐसे समय में “प्रदूषण कर”—अर्थात् प्रदूषण फैलाने पर आर्थिक दंड—को एक समुचित समाधान के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे प्रदूषण में कमी और पर्यावरण-रक्षा के लिए स्थायी राजस्व दोनों प्राप्त हो सकते हैं।
भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ तेज आर्थिक विकास और बिगड़ते पर्यावरण के संकट के बीच संतुलन बनाना अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है। शहरों की हवा दिन–प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है, नदियाँ औद्योगिक कचरे से भर रही हैं, भूमिगत जल स्तर घट रहा है, ठोस कचरे के पहाड़ महानगरों की पहचान बनते जा रहे हैं, वहीं जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या अब भारत को प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रत्यक्ष आर्थिक दंड लगाने—अर्थात् विस्तृत “प्रदूषण कर” लागू करने—की आवश्यकता है?

प्रदूषण कर का विचार नया नहीं, परन्तु इसकी आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि जब कोई उद्योग, वाहन या गतिविधि प्रदूषण फैलाती है तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है, न कि केवल उसे जो प्रदूषण फैला रहा है। यह बाज़ार व्यवस्था की वह गंभीर विफलता है जिसे “बाह्य लागत” कहा जाता है—अर्थात् नुकसान तो समाज को होता है, पर उसका मूल्य न तो वस्तु की कीमत में जुड़ता है, न ही प्रदूषण फैलाने वाला उसे भरता है। ऐसे में “प्रदूषण कर” इसी असंतुलन को सुधारने का प्रयास करता है, जहाँ जो जितना अधिक प्रदूषण फैलाए, वह उतनी अधिक आर्थिक कीमत चुकाए।

भारत में कोयले पर लगाया गया “स्वच्छ ऊर्जा उपकर” इसका एक प्रारंभिक स्वरूप था, परंतु आज देश में वायु, जल, ध्वनि, ठोस कचरा और औद्योगिक उत्सर्जन का ऐसा मिश्रित संकट है कि केवल किसी एक क्षेत्र पर कर लगाना पर्याप्त नहीं। आवश्यकता एक सर्वसमावेशी और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार प्रदूषण कर की है, जो प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने में सहायक हो।

प्रदूषण कर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रदूषण को महँगा बनाता है और स्वच्छता को सस्ता। जब किसी उद्योग को प्रति इकाई उत्सर्जन पर कर देना पड़ेगा, तो वह स्वाभाविक रूप से ऐसी तकनीक अपनाने की ओर अग्रसर होगा जो कम प्रदूषण करे। यूरोप जैसे क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है जहाँ कार्बन-आधारित दंड के बाद ऊर्जा-संरक्षण और हरित तकनीक का उपयोग अत्यधिक बढ़ा। भारत में भी यह परिवर्तन संभव है, बशर्ते नीति दीर्घकालिक, पारदर्शी और लक्ष्य-उन्मुख हो।

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत को आने वाले वर्षों में पर्यावरण-रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा पर बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। नदियों की सफाई, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा हरित भवनों के विकास पर अत्यधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। ऐसे में प्रदूषण कर एक स्थायी और अनुमानित राजस्व स्रोत बन सकता है, जिसे एक स्वतंत्र “हरित निधि” के माध्यम से केवल पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी प्रदूषण कर का महत्व बढ़ रहा है। कई विकसित देश अब उन आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहे हैं जो अधिक प्रदूषणकारी स्रोतों से बनती हैं। यदि भारत घरेलू स्तर पर प्रदूषण पर उचित कर लागू करता है, तो भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाज़ारों में अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है। इस प्रकार प्रदूषण कर केवल पर्यावरण-हित में नहीं, बल्कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा की रक्षा में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।

परंतु इन सबके बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रदूषण कर गरीबों पर भारी पड़ सकता है? यह चिंता बिल्कुल वास्तविक है। यदि ईंधन और बिजली की लागत बढ़ेगी, तो उसके साथ ही परिवहन, खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसका सीधा प्रभाव निम्न-आय वर्ग पर पड़ता है, जिनके पास विकल्प सीमित होते हैं। इसलिए प्रदूषण कर को न्यायपूर्ण बनाने के लिए यह अनिवार्य होगा कि निम्न-आय वाले परिवारों को प्रत्यक्ष नकद सहायता, ऊर्जा सब्सिडी और रसोई गैस जैसी आवश्यकताओं पर राहत दी जाए।

उद्योग जगत की चिंताएँ भी कम नहीं। विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग ऊर्जा-प्रधान होते हैं और किसी भी अतिरिक्त कर का प्रभाव उनकी लागत पर पड़ता है। अतः प्रदूषण कर को चरणबद्ध ढंग से लागू करना होगा—पहले बड़े उद्योगों पर, फिर धीरे-धीरे छोटे उद्योगों को तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ इस दायरे में लाना होगा। हरित मशीनरी पर अनुदान, ब्याज रहित ऋण, और तकनीकी उन्नयन के लिए मार्गदर्शन इस परिवर्तन को सुगम बना सकते हैं।

भारत की प्रशासनिक क्षमता भी एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रदूषण का सटीक मापन, डेटा की विश्वसनीयता और निगरानी तंत्र की पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक होगी। छोटे उद्योगों और गैर-प्रमाणित स्रोतों की निगरानी आज भी चुनौतीपूर्ण है। यदि उत्सर्जन मापन ही विश्वसनीय न हो, तो कर प्रणाली पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसलिए भारत को आधुनिक सेंसर-तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, डिजिटल उत्सर्जन-पंजीकरण तथा रियल-टाइम निगरानी प्रणाली को मजबूत करना होगा।

इसके अतिरिक्त, प्रदूषण कर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सरकार इसके राजस्व का उपयोग कहाँ करती है। यदि यह धन सामान्य बजट में विलीन हो गया, तो जनता में अविश्वास बढ़ेगा और नीति का उद्देश्य कमजोर पड़ेगा। इसके लिए एक स्वतंत्र “हरित कोष” का गठन आवश्यक है, जो केवल प्रदूषण नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा, हरित परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों पर व्यय हो तथा जिसकी वार्षिक लेखा-परीक्षा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।

राजनीतिक दृष्टि से यह एक साहसिक कदम होगा। किसी भी प्रकार की मूल्य-वृद्धि जनता के बीच असंतोष उत्पन्न कर सकती है। परंतु यह भी सत्य है कि पर्यावरणीय संकट अब इतना गंभीर हो चुका है कि उससे निपटने के लिए कठोर, दीर्घकालिक और दूरदर्शी आर्थिक सुधार आवश्यक हैं। भारत की युवा पीढ़ी सुरक्षित जल, स्वच्छ वायु और स्वस्थ जीवन की मांग कर रही है। इस मांग को नज़रअंदाज़ करना अब संभव नहीं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि प्रदूषण कर भारत के लिए केवल राजस्व-संग्रह का साधन नहीं, बल्कि एक व्यापक हरित परिवर्तन की दिशा में आवश्यक कदम है। इसे न्यायपूर्ण, पारदर्शी, चरणबद्ध और वैज्ञानिक आधार पर लागू करने से भारत न केवल प्रदूषण कम कर पाएगा, बल्कि अपने विकास मॉडल को भी टिकाऊ, स्वस्थ और पर्यावरण-सम्मत बना सकेगा।

यदि इसे सही नीतिगत ढंग से लागू किया गया, तो यह भारत के इतिहास में वह मोड़ साबित हो सकता है जहाँ देश ने आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी सिद्ध किया।

डॉ सत्यवान सौरभ -हिसार

📚 कक्षा 10 गणित 2025: पिछले 5 वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

एग्जाम पैटर्न आधारित विशेष चयन — हर साल दोहराए जाने वाले सवालों की स्मार्ट लिस्ट

एजुकेशन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
⭐ 1. वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)

लगातार पूछा जाता है:

Euclid Division Lemma का उपयोग करते हुए HCF निकालना

दो संख्याओं को के रूप में व्यक्त करने वाला प्रश्न

√2, √3 इत्यादि का अपरिमेय सिद्ध करना

उदाहरण:

  1. Euclid Division Lemma का उपयोग करके 135 और 225 का HCF निकालिए।
  2. सिद्ध कीजिए कि √7 एक अपरिमेय संख्या है।

⭐ 2. बहुपद (Polynomials)

हर साल पूछा जाने वाला:

शेषांक प्रमेय (Remainder theorem)

गुणनखंड प्रमेय (Factor theorem)

शून्यों के योग व गुणनफल

उदाहरण:

  1. यदि किसी बहुपद के शून्य 2 और 3 हैं, तो उसका बहुपद लिखिए।
  2. को किसी रैखिक बहुपद से भाग देकर शेष निकालिए।

⭐ 3. रैखिक समीकरणों का युग्म

लगातार आने वाला पैटर्न:

Substitution

Elimination

Cross-multiplication

ग्राफ से हल निकालना

उदाहरण:

  1. निम्नलिखित समीकरणों को elimination विधि से हल कीजिए:

3x + 2y = 5,\quad 4x – 3y = 7

⭐ 4. द्विघात समीकरण (Quadratic Equations)

Discriminant आधारित प्रश्न

गुणनखंड द्वारा हल

वास्तविक तथा समिश्र मूल

उदाहरण:

  1. को हल कीजिए।
  2. D के आधार पर मूलों की प्रकृति बताइए।

⭐ 5. अंकगणितीय प्रगति (AP)

हर साल 3–4 नंबर का प्रश्न:

nth term

sum of n terms

दिए गए terms का पता लगाना

उदाहरण:

  1. यदि AP का प्रथम पद 4 हो और अंतर 3 हो, तो 20वाँ पद ज्ञात कीजिए।
  2. पहले 15 पदों का योग निकालिए।

⭐ 6. त्रिकोणमिति

सबसे ज़्यादा पूछा जाता है:

तिकोणमितीय पहचानों का प्रयोग

ऊँचाई-दूरी के प्रश्न

उदाहरण:

  1. सिद्ध कीजिए:

\sin^2\theta + \cos^2\theta = 1

⭐ 7. त्रिभुज (Similarity)

Basic proportionality theorem (BPT)

Pythagoras theorem

Area ratio

उदाहरण:

  1. सिद्ध कीजिए कि यदि एक त्रिभुज के दो कोण बराबर हों तो उसकी भुजाएँ अनुपात में होती हैं।
  2. Pythagoras theorem सिद्ध कीजिए।

⭐ 8. वृत्त (Circles)

त्रिज्या पर लंब स्पर्शरेखा

स्पर्श बिंदु पर कोण

उदाहरण:

  1. सिद्ध कीजिए कि किसी वृत्त की स्पर्शरेखा त्रिज्या पर लंब होती है।

⭐ 9. निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry)

दूरी सूत्र

विभाजन सूत्र

त्रिभुज का क्षेत्रफल

उदाहरण:

  1. बिंदुओं (2,3) और (6,9) के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
  2. (1,2), (3,5) और (6,7) से बने त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

⭐ 10. परिमाप व क्षेत्रफल (Mensuration)

Sector

Frustum

Cylinder, Cone, Sphere

उदाहरण:

  1. एक बेलन का आयतन निकालिए।
  2. फ्रस्ट्रम का पृष्ठीय क्षेत्रफल निकालिए।

⭐ 11. सांख्यिकी व प्रायिकता

लगातार पूछे जाने वाले:

Mean, Median, Mode

Probability of an event

उदाहरण:

  1. दिए गए डेटा से माध्य निकालिए।
  2. एक सिक्का उछाला जाता है। हेड आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।

फोटो और क्यूआर कोड वाला आधार कार्ड जारी करने पर विचार, UIDAI का बड़ा कदम; फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार कार्ड को और अधिक सुरक्षित बनाने की तैयारी में है। प्राधिकरण उन नए आधार कार्ड जारी करने पर विचार कर रहा है जिनमें केवल धारक की फोटो और एक क्यूआर कोड होगा। इस नए फॉर्मेट का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना और आधार डेटा के गलत उपयोग को रोकना है।

UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार ने हाल ही में आधार के लिए नए ऐप पर आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में बताया कि दिसंबर में नया नियम लाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे होटल, इवेंट आयोजकों और अन्य संस्थानों द्वारा की जाने वाली ऑफ़लाइन वेरिफिकेशन प्रक्रिया को हतोत्साहित किया जा सके।

ऑफलाइन आधार सत्यापन पर सख्ती

कुमार ने कहा कि आधार अधिनियम ऑफलाइन सत्यापन के लिए आधार नंबर या बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, उपयोग या भंडारण पर रोक लगाता है। इसके बावजूद कई संस्थाएं आधार की फोटोकॉपी मांगकर उसे स्टोर करती रहती हैं, जो कानून का उल्लंघन है।

UIDAI अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आधार का उपयोग केवल आधार संख्या या क्यूआर कोड से ही सत्यापित किया जाए।

सिर्फ फोटो और क्यूआर कोड वाला कार्ड क्यों?

भुवनेश कुमार ने कहा,
“हम सोच रहे हैं कि कार्ड पर अनावश्यक विवरण क्यों होना चाहिए? केवल फोटो और क्यूआर कोड पर्याप्त हैं। अधिक जानकारी छपने से इसका दुरुपयोग बढ़ता है और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में आसानी होती है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार को कभी भी एक सामान्य दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

बैंकों, होटलों और फिनटेक कंपनियों के साथ बैठक

UIDAI ने कई हितधारकों—जैसे बैंक, होटल और फिनटेक कंपनियों—के साथ बैठक की है और उन्हें आधार सत्यापन से जुड़े नए ऐप और नियमों की जानकारी दी है। नए ऐप को जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।

UIDAI का यह कदम आधार की सुरक्षा बढ़ाने और डेटा दुरुपयोग की घटनाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नया आधार कार्ड अधिक सुरक्षित, आधुनिक और प्राइवेसी-केंद्रित होगा।

बलिया में रेलवे ट्रैक के किनारे मिली सिर कटी महिला की लाश, शरीर पर था सिर्फ एक कपड़ा—क्षेत्र में दहशत, पुलिस कर रही हर एंगल से जांच

बलिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। मांझी–बकुल्हा रेलखंड के बीच रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों में लगभग 30 वर्षीय अज्ञात महिला का सिर कटा शव नग्न अवस्था में मिला। घटना की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई।

सूचना मिलते ही एसपी ओमवीर सिंह, एएसपी कृपाशंकर और सीओ फहीम कुरैशी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। महिला की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि फोरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।

महिला का सिर अलग, शरीर पर सामान्‍य चोट के निशान नहीं—पुलिस को हत्या का शक

ग्रामीणों ने बताया कि शव झाड़ियों में फेंका गया था और महिला के शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था।

शरीर से गर्दन अलग थी। शरीर पर अन्य गंभीर चोटों के निशान नहीं मिले।पैरों में पायल, और दोनों पैरों व कमर में काला धागा बंधा था। थोड़ी दूरी पर तलाश करने पर महिला का कटे सिर का हिस्सा भी बरामद किया गया।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई होगी। बाद में पहचान छिपाने के लिए शव को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया गया, ताकि इसे हादसा साबित किया जा सके।

पुलिस की पहली प्रतिक्रिया—दुर्घटना बताया, पर ग्रामीणों ने पेश किए सवाल

मौके पर मौजूद थाना प्रभारी विपिन सिंह ने प्रारंभिक जांच में इसे ट्रेन से कटकर मौत बताया।
लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि—

अगर ट्रेन से कटती तो कपड़े शरीर पर होते।

शरीर पर कहीं चोट या घिसटने के निशान नहीं थे।

घटनास्थल देखकर लग रहा था कि शव बाहर से लाकर फेंका गया है।

इस पर पुलिस ने अब हत्या, दुष्कर्म और शव फेंकने की दिशा में भी जांच शुरू कर दी है।

पहचान में जुटी पुलिस—पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बढ़ेगी जांच की दिशा

एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
साथ ही शव की शिनाख्त के लिए आसपास के थानों और लापता महिलाओं की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

राजधानी में 24 नवंबर से 53 दिनों तक लागू रहेगी धारा 163, भीड़ इकट्ठा करने और ड्रोन उड़ाने पर कड़े प्रतिबंध—जानें किन गतिविधियों पर रहेगी रोक

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कमिश्नरेट पुलिस 24 नवंबर से 15 जनवरी 2026 तक धारा 163 लागू करेगी। यह प्रावधान कुल 53 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में पांच से अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर रोक रहेगी।

जेसीपी (एलओ) बबलू कुमार ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जयंती, काला दिवस, क्रिसमस, नववर्ष और मकर संक्रांति जैसे महत्वपूर्ण अवसरों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि शहर में शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

धारा 163 के तहत मुख्य प्रतिबंध

  1. पांच से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं हो सकेगी।
  2. निर्धारित धरना स्थल को छोड़कर दूसरे स्थानों पर प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
  3. सरकारी दफ्तरों और विधानभवन के आसपास 1 किमी क्षेत्र में ड्रोन से शूटिंग पर रोक रहेगी।
  4. किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या जुलूस के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

यूपी एसआईआर अपडेट: 50% मतदाताओं की मैपिंग पूरी

प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत अब तक 50% मतदाताओं की वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग की जा चुकी है। इसका अर्थ है कि इन मतदाताओं को अब वोटर बनने के लिए कोई नया दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना होगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया:

प्रथम चरण का SIR 4 दिसंबर तक चलेगा। 15.44 करोड़ मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं। मतदाता सूची का ड्राफ्ट 9 दिसंबर को प्रकाशित होगा।

अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या की पहचान को लेकर महापौर की बड़ी कार्रवाई

राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए मंगलवार सुबह महापौर सुषमा खर्कवाल ने गोमतीनगर क्षेत्र में लखनऊ स्वच्छता अभियान (रामकी) के कर्मचारियों के पहचान पत्र जांचे।

निरीक्षण में—

किसी भी कर्मचारी में बांग्लादेशी होने की पुष्टि नहीं हुई।

विशेष ध्यान उन कर्मचारियों पर दिया गया जिन्होंने खुद को असम निवासी बताया था।

महापौर ने निर्देश दिए कि बिना पहचान पत्र और पूर्ण दस्तावेजों की जांच किए किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति न की जाए।

निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट हेड अभय रंजन, भाजपा पार्षद संजय सिंह राठौर, अरुण राय, पृथ्वी गुप्ता, तथा जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी भी मौजूद रहे।

कानपुर एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक बस हादसा: नशेबाजी या चालक की झपकी बनी वजह, 50 मीटर तक घिसटती चली बस—तीन की मौत, 25 से अधिक यात्री घायल

कानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कानपुर के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार भोर लगभग 3:20 बजे एक निजी स्लीपर बस के पलटने से बड़ा हादसा हो गया। तेज रफ्तार बस डिवाइडर से टकराई और करीब 50 मीटर तक घिसटती चली गई। हादसे के तुरंत बाद बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की चीख-पुकार मच गई।

यात्रियों का आरोप: चालक ने शराब पी रखी थी, बस को लहरा-लहराकर चला रहा था

हादसे के घायलों और बचे यात्रियों ने पुलिस को बताया कि चालक ने आगरा स्थित ढाबे पर शराब पी रखी थी। कुछ यात्रियों ने उसे मोबाइल पर वीडियो बनाते हुए टोका भी, लेकिन वह नहीं माना और तेज रफ्तार में बस को लहराते हुए चलाता रहा। कई यात्रियों का कहना है कि हादसा चालक की झपकी के कारण भी हो सकता है।

हैलट में भर्ती घायल सतेंद्र, मृतक अनुराग के पिता अजय समेत कई यात्रियों ने बताया कि लंबी दूरी की बसों में दो ड्राइवर होते हैं, लेकिन शराबखोरी और मनमानी के कारण यात्रियों की जान जोखिम में डाल दी जाती है।

चालक-परिचालक मौके से फरार, यात्रियों का सामान थाने में सुरक्षित

अरौल थानाध्यक्ष जनार्दन सिंह यादव ने बताया कि पुलिस मौके पर कुछ ही मिनटों में पहुंच गई, लेकिन चालक और परिचालक वहां नहीं मिले। बस में 55-56 यात्री होने का अनुमान है। कई यात्रियों का सामान थाने में जमा है, जबकि कुछ यात्री दूसरे वाहनों से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए।

पहले भी कई बसें हो चुकी हैं दुर्घटनाग्रस्त—झपकी, ओवरटेक और तेज रफ्तार बनते कारण

ठठिया से अरौल तक के क्षेत्र में बीते वर्षों में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं।

27 मई 2025 को दो बसें ओवरटेक करते समय टकरा गई थीं—30 लोग घायल।

2 जुलाई 2023 को एक बस डिवाइडर तोड़कर खेतों में जा गिरी थी—16 यात्री घायल।

चालकों की जल्दबाजी और तेज रफ्तार बन रही बड़ी समस्या

अरौल थानाध्यक्ष के अनुसार दिल्ली–लखनऊ रूट पर चलने वाली नॉन-स्टॉप बसों के चालक आराम किए बिना बस भगाते हैं। रात के समय नींद का झोंका इन हादसों की सबसे आम वजह है।

ऐसे हुआ हादसा

दिल्ली के आनंद विहार व आईएसबीटी से बिहार के लिए निकली बस (BR 23 P 9389) आगरा से निकलने के बाद लखनऊ की ओर बढ़ रही थी। भोर में अरौल थाना क्षेत्र के मकनपुर के पास बस बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई और पलट गई।

मौके पर 3 यात्रियों की मौत, 25 से अधिक घायल यूपीडा और स्वास्थ्य विभाग की 15 एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और घायलों को सीएचसी बिल्हौर व बाद में हैलट अस्पताल भेजा गया।

मृतकों के नाम

  1. अनुराग (5), पुत्र—अजय चौधरी, बिहार
  2. नसीम आलम (30), चंपारण (पूर्व), बिहार
  3. शशि गिरी (26), सिवान, बिहार

40 मिनट तक बाधित रहा यातायात

हादसे के बाद करीब 40 मिनट तक यातायात बाधित रहा। पुलिस ने क्रेन बुलाकर बस को हटवाया और हाईवे को साफ कराया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि बस नालंदा RTO में 2018 में पंजीकृत है और मालिक का नाम प्रवीण अग्रवाल है।

एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस का तीखा हमला, खरगे बोले—चुनाव आयोग साबित करे कि वह भाजपा के दबाव में नहीं

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कांग्रेस ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर एक बार फिर बड़े आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि वोट चोरी के बढ़ते आरोपों के बीच एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग का रवैया “बेहद निराशाजनक” रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आयोग को तुरंत यह साबित करना चाहिए कि वह भाजपा की छाया में काम नहीं कर रहा है।

खरगे मंगलवार को उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे, जहां एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रदेश अध्यक्ष और विधायक मौजूद रहे।

मतदाता सूची की अखंडता पर कांग्रेस का जोर

बैठक के बाद खरगे ने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूचियों की अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा पहले से कमजोर है, ऐसे में आयोग का आचरण और भी चिंताजनक है।
खरगे ने कहा, “चुनाव आयोग को याद रखना होगा कि उसकी निष्ठा भारत की जनता और संविधान के प्रति है, किसी राजनीतिक दल के प्रति नहीं।”

राहुल गांधी बोले—बूथ स्तर पर संगठन मजबूत किए बिना वोट चोरी नहीं रुकेगी

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस तभी वोट चोरी को रोक सकती है जब उसका बूथ स्तर पर संगठन मजबूत होगा। उन्होंने जोर दिया कि बूथ एजेंटों को बीएलओ की तरह घर-घर जाकर अपने समर्थकों के नाम सूची में दर्ज करवाने होंगे।
राहुल ने प्रशिक्षण और सतर्कता पर विशेष फोकस देने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि “बिहार चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले हैं, चुनाव शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था।”

बिहार में 43 नेताओं को नोटिस जारी

इधर, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर कांग्रेस ने 43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इनमें प्रमुख नाम— पूर्व मंत्री वीणा शाही, कांग्रेस नेता मधुरेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व महासचिव कैसर खान, पूर्व विधायक सुधीर कुमार,

और विधान परिषद के पूर्व सदस्य अजय कुमार सिंह शामिल हैं।

आठ पहर चौसठ घड़ी, लगा रहे अनुराग: प्रेम और समर्पण की अनंत भावना

● नवनीत मिश्र

भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में प्रेम, भक्ति और समर्पण को व्यक्त करने के लिए अनेक गूढ़ और काव्यमय प्रतीक मिलते हैं। इन्हीं में से एक सुन्दर भाव है “आठ पहर चौसठ घड़ी, लगा रहे अनुराग।” यह वाक्य केवल समय का संकेत नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बसे प्रेम की उस निरंतरता का चित्रण है जो क्षण-क्षण अपने प्रियतम, अपने आराध्य या अपने लक्ष्य से जुड़ा रहता है।
अनुराग सामान्य प्रेम का नाम नहीं है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति अपने प्रिय के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाता है। चाहे वह ईश्वर हो, मनुष्य हो, कर्तव्य हो या कोई विचार, यह अनुराग जीवन के हर क्षण को पावन बना देता है। इसीलिए कहा गया है कि यदि प्रेम सच्चा हो तो उसके लिए रात-दिन का कोई बंधन नहीं रहा करता।
पुरानी भारतीय समय-गणना में एक दिन-रात में आठ पहर और चौसठ घड़ी मानी जाती थीं।
यहाँ इनका उपयोग समय की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि निरंतरता के प्रतीक के रूप में हुआ है। अर्थ यह कि सभी पहर, सभी घड़ियाँ, सभी क्षण, हर पल मन अनुराग से भरा रहे। यह एक ऐसा समर्पण है जो रुकता नहीं, थमता नहीं और किसी परिस्थिति पर निर्भर नहीं।
संत साहित्य से लेकर भक्तिकाल की कविताओं तक, अनुराग सर्वोच्च अनुभव माना गया है।
मीरा बाई कहती हैं “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।” तो वहीँ संत कबीर ने कहा “प्रेम न बाड़ी उपजे, प्रेम न हाट बिकाय।”
इन सबमें वही भाव है कि जब हृदय में प्रेम की ज्योति जलती है, तो वह हर क्षण जलती रहती है।
यह कथन केवल भक्ति का नहीं, मानवीय प्रेम और संवेदना का भी सूचक है।
जब किसी के प्रति सच्चा अनुराग होता है, तो उसकी चिंता, उसकी खुशी, उसका अस्तित्व, सब अपने जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। प्रेम समय का मोहताज नहीं रहता; वह आठ पहर, चौसठ घड़ी, अटूट रूप से धड़कता है।
आज की व्यस्तता और तेज रफ्तार दुनिया में प्रेम और समर्पण अक्सर क्षणिक या औपचारिक हो जाते हैं।
ऐसे समय में यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि जीवन में यदि किसी चीज को सार्थक बनाना हैI चाहे वह संबंध हो, कार्य हो या आत्म-उन्नति, तो उसके प्रति निरंतर अनुराग आवश्यक है।
“आठ पहर चौसठ घड़ी, लगा रहे अनुराग”, यह केवल एक काव्य-पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का मंत्र है।
यह हमें सिखाती है कि प्रेम, भक्ति, लगन और समर्पण तभी फलदायी होते हैं, जब वे हर क्षण हमारे भीतर जीवित रहें।
अनुराग का यह प्रवाह ही जीवन को सुंदर, सार्थक और दिव्य बनाता है।

मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी…: रानी लक्ष्मीबाई

मनु से रानी लक्ष्मीबाई तक की अदम्य साहस की अमर गाथा प्रस्तुत कर रहे हैं पुनीत मिश्र

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई वीरांगनाओं ने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य इच्छाशक्ति से देशवासियों को प्रेरित किया, परंतु इन सबमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, जिन्हें बचपन में “मनु” कहा जाता था—का स्थान सर्वोपरि है। उनकी जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि स्त्री-शक्ति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संकल्प का उज्ज्वल प्रतीक है।
19 नवंबर 1828 को वाराणसी में जन्मी मनु (मणिकर्णिका) बचपन से ही तेजस्वी, निर्भीक और अत्यंत कुशल थीं। उन्होंने तलवारबाज़ी, घुड़सवारी और शस्त्र चलाने की शिक्षा उसी सहजता से ग्रहण की, जैसे अन्य बच्चे खेल-कूद सीखते हैं। मनु का उदात्त स्वभाव और तेज बुद्धि आगे चलकर उन्हें असाधारण नेतृत्व प्रदान करने वाली बनी।
झाँसी के महाराजा गंगाधर राव से विवाह के बाद मनु “लक्ष्मीबाई” बनीं। अल्प आयु में ही उन पर राज्य की जिम्मेदारियाँ आ गईं, परंतु उन्होंने हर चुनौती का सामना अदम्य साहस से किया। दत्तक पुत्र दामोदर राव के उत्तराधिकार को नकारने वाले अंग्रेजों के डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स ने संघर्ष की चिंगारी को ज्वाला बना दिया।
1857 का स्वतंत्रता संग्राम जब पूरे देश में फैला, तब झाँसी में उसकी आत्मा स्वयं रानी लक्ष्मीबाई थीं। अंग्रेज़ी हुकूमत ने जब झाँसी को हड़पने की कोशिश की, तब रानी ने दृढ़ स्वर में कहा,
“मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी…”
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि गुलामी के विरुद्ध समूचे देश का संकल्प बन गया।
रानी हर मोर्चे पर स्वयं नेतृत्व करती थींl रणभूमि में वे तलवारों की जोड़ी से जिस कौशल से लड़ती थीं, वह आज भी अद्भुत उदाहरण है। उनके नेतृत्व में झाँसी ने अंग्रेज़ों के खिलाफ ऐसा प्रतिरोध दिखाया, जिसकी मिसाल कम ही मिलती है।
ग्वालियर के पास 1858 में लड़ते हुए लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। किंतु वे पराजित नहीं हुईंl क्योंकि पराजय उन लोगों की होती है जिनका लक्ष्य व्यक्तिगत हो। रानी का ध्येय राष्ट्र की स्वतंत्रता था, और उसी उद्देश्य के लिए उन्होंने प्राण न्योछावर कर दिए।
उनकी शहादत ने स्वतंत्रता आंदोलन में नई ऊर्जा, नया विश्वास और अदम्य प्रेरणा भर दी। आज भी भारतीयों के हृदय में रानी लक्ष्मीबाई साहस, स्वाभिमान और अटूट देशप्रेम की प्रतीक बनकर जीवित हैं।
रानी लक्ष्मीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि मन में दृढ़ संकल्प और सत्य का साथ हो, तो कोई भी शक्ति हमें रोक नहीं सकती। उनकी गाथा हर बेटी को यह विश्वास देती है कि वह केवल परिवार या समाज ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के नेतृत्व में भी अग्रणी हो सकती है।
मनु की जयंती पर हम उनकी अदम्य वीरता को नमन करते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी: संकल्प, साहस और नेतृत्व की अद्वितीय प्रतीक

भारत के राजनीतिक इतिहास में इंदिरा गांधी वह नाम है जिसने अपने दृढ़ संकल्प, तेज निर्णय क्षमता और अदम्य नेतृत्व से देश की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। 1917 में अलाहाबाद में जन्मी इंदिरा गांधी बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन के वातावरण में पली-बढ़ीं। पिता जवाहरलाल नेहरू के साथ देश के राजनीतिक परिवेश को निकट से देखने का अवसर मिला, जिसने उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक संवेदना और नेतृत्व क्षमता को गहराई से विकसित किया।
इंदिरा गांधी का राजनीतिक जीवन किसी साधारण यात्रा की तरह नहीं था, बल्कि वह संघर्षों और चुनौतियों से भरी एक ऐसी कथा है जिसने उन्हें “आयरन लेडी” का स्वरूप दिया। 1966 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका नेतृत्व किसी औपचारिकता का परिणाम नहीं, बल्कि जन-विश्वास और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने देश के लिए कई दूरदर्शी निर्णय लिए—हरित क्रांति को बढ़ावा देकर भारत को खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल एक निर्णायक युद्ध जीता, बल्कि दक्षिण एशिया के राजनीतिक मानचित्र को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका यह साहसिक नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को नई ऊँचाइयों पर ले गया।
इंदिरा गांधी का जीवन संघर्ष और सेवा का अनवरत प्रवाह था। उन्होंने देश को नीतिगत दृढ़ता, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में अटूट साहस का संदेश दिया। वे विपक्ष, आलोचनाओं और कठिन निर्णयों के बीच भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुईं।
उनकी राजनीतिक यात्रा में विवाद भी थे, परंतु इन्हीं के साथ उन्होंने यह सिद्ध किया कि कोई भी नेता अपने समय की परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच ही अपना ऐतिहासिक स्थान प्राप्त करता है।
31 अक्टूबर 1984 को उनकी शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया। लेकिन इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व, राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा और उनके अदम्य साहस की गूँज आज भी भारतीय राजनीतिक जीवन में सुनाई देती है।
इंदिरा गांधी केवल एक नेता नहीं थीं, वह एक युग थीं, जिसने यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, देशभक्ति और सही निर्णय क्षमता किसी भी व्यक्ति को इतिहास में अमर कर सकती है।

भावनाओं को छूती स्मृति-रेखा: 19 नवंबर को विदा हुए अमर व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि


19 नवंबर का दिन इतिहास में केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि उन अमर व्यक्तित्वों की याद का दिन है, जिन्होंने अपने जीवन से समाज, साहित्य, कला, प्रशासन और शिक्षा की दिशा बदल दी। यह दिन भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, न्यायिक मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों को नई ऊँचाइयाँ देने वाले महान लोगों के योगदान को स्मरण करने का अवसर है। निम्नलिखित लेख में, इस दिवस को विशेष बनाने वाले इन विभूतियों के जीवन, कार्य और विरासत पर प्रकाश डाला गया है।

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दिगम्बर हांसदा (2020) — संथाली भाषा और आदिवासी अस्मिता के प्रहरी
पद्मश्री दिगम्बर हांसदा का जीवन संथाली भाषा, संस्कृति और साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए समर्पित रहा। एक शिक्षाविद के रूप में उन्होंने आदिवासी युवाओं को अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया तथा पाठ्यक्रमों में संथाली साहित्य को शामिल कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके शोध कार्यों, लेखन और सामाजिक सक्रियता के कारण संथाली भाषा साहित्यिक मंचों पर सशक्त रूप से स्थापित हो सकी। 2020 में उनका निधन भारतीय भाषाई विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति था।

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आर. के. त्रिवेदी (2015) — भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के सुदृढ़ स्तंभ
भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त आर. के. त्रिवेदी ने निर्वाचन प्रक्रिया को और पारदर्शी, विश्वसनीय एवं तकनीक-संपन्न बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अपने कठोर अनुशासन, निष्पक्षता और शांत नेतृत्व शैली के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल में चुनाव सुधारों पर विशेष बल दिया गया, जिससे भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली और मजबूत हुई। 2015 में उनके निधन ने देश को एक दूरदर्शी प्रशासक से वंचित कर दिया।
आर. के. बीजापुरे (2010) — शास्त्रीय संगीत की अनूठी स्वर-साधना
आर. के. बीजापुरे भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध वादक थे, जिन्होंने हारमोनियम वादन को नई प्रतिष्ठा और अभिव्यक्ति प्रदान की। उनकी रचनाएँ और प्रस्तुतियाँ संगीत प्रेमियों के हृदय में गहरी छाप छोड़ जाती थीं। वे गुरु-शिष्य परंपरा के संवाहक थे और उनके विद्यार्थियों ने भी संगीत जगत में अपनी पहचान बनाई। 2010 में उनका निधन भारतीय संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति साबित हुआ।
रमेश भाई (2008) — समाज सुधार और मानवसेवा के प्रतीक
सर्वोदय आश्रम टडियांवा के संस्थापक रमेश भाई सत्य, सेवा और समर्पण की जीवंत प्रतिमूर्ति थे। वे विनोबा भावे और गाँधीवादी विचारधारा से प्रभावित होकर ग्रामीण upliftment, शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकता के लिए अखंड प्रयासरत रहे। उनका जीवन गरीबों, वंचितों और ग्रामीण समुदायों के उत्थान की प्रेरणा है। 2008 में उनकी मृत्यु एक महान समाजसेवी की विदाई थी, जिसने हजारों जीवनों को छुआ।
एम. हमीदुल्ला बेग (1988) — न्यायपालिका के मर्यादा-पुरुष
भारत के 15वें मुख्य न्यायाधीश एम. हमीदुल्ला बेग न्यायिक निष्पक्षता, मानवीय दृष्टिकोण और संविधानिक मूल्यों के अप्रतिम संरक्षक थे। उन्होंने न्याय को सरल, सुगम और आम नागरिक के हित में लाने पर जोर दिया। उनके निर्णय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होते थे। 1988 में उनका निधन भारतीय न्यायपालिका के लिए अपूरणीय क्षति था।
वाचस्पति पाठक (1980) — साहित्य के शांत किन्तु शक्तिशाली स्वर
प्रसिद्ध उपन्यासकार वाचस्पति पाठक ने भारतीय साहित्य को अनेक उत्कृष्ट रचनाएँ दीं। उनकी लेखनी सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और जीवन-संघर्षों का अद्भुत मिश्रण थी। वे उन लेखकों में से थे जो कम बोलते थे, लेकिन अपनी कहानियों से गहरी छाप छोड़ जाते थे। 1980 में उनके निधन ने साहित्य जगत को एक संवेदनशील और गंभीर लेखक से वंचित कर दिया।