Tuesday, June 30, 2026
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एक से अधिक स्थानों पर ईएफ भरना अपराध, एक वर्ष तक की सजा संभव : जिलाधिकारी

देवरिया,(राष्ट्र की परम्परा)
जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी श्रीमती दिव्या मित्तल ने मतदाता सूची से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, तो उसे अलग-अलग स्थानों से ईपी/ईएफ प्राप्त हो सकता है, लेकिन केवल एक ही ईएफ पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एक से अधिक ईएफ पर हस्ताक्षर करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान है।

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में जिलाधिकारी ने बताया कि किसी भी मतदाता को दो स्थानों से गणना प्रपत्र भरने की अनुमति नहीं है। चाहे नाम गांव और शहर दोनों जगह दर्ज हो या दो अलग-अलग राज्यों में—गणना प्रपत्र सिर्फ एक ही स्थान से भरा जाए। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने दोहरी प्रविष्टियों की पहचान के लिए डिजिटल प्रणाली विकसित की है, जो दो स्थानों से फॉर्म भरने वालों का स्वतः पता लगा लेगी।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता जिस स्थान से मतदान करना चाहते हैं—पुश्तैनी गांव या वर्तमान निवास—उसी स्थान से गणना प्रपत्र जमा करें। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची 27 अक्टूबर को फ्रीज कर दी गई है, इसलिए वर्तमान सूची में जिसका नाम जहां दर्ज है, उसे उसी स्थान से फॉर्म भरना होगा।

इस कार्य में लगे बीएलओ और सुपरवाइजरों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का कोई व्यक्ति यदि किसी अन्य राज्य में मतदाता के रूप में पंजीकृत है, तो उसे यूपी में गणना प्रपत्र नहीं भरना चाहिए। एसआईआर का उद्देश्य मृत मतदाताओं के नाम हटाकर तथा दोहरे नाम समाप्त कर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाना है।

अंत में, जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि एनुमरेशन फॉर्म भरने में बीएलओ का सहयोग करें। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम तथा माता/पिता का नाम सीईओ उत्तर प्रदेश और ईसीआई की वेबसाइट पर ऑनलाइन खोजा जा सकता है।

दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु संशोधित समय-सारणी जारी

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए दशमोत्तर (कक्षा 11-12 को छोड़कर) छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं की संशोधित समय-सारणी जारी कर दी गई है। इसकी जानकारी जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अविनाश मणि त्रिपाठी ने दी। सभी प्रक्रियाएँ शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुसार संपादित की जाएँगी।

जारी कार्यक्रम के अनुसार शिक्षण संस्थानों द्वारा मास्टर डाटा तैयार करने की अंतिम तिथि 26 नवंबर निर्धारित है। विश्वविद्यालय/एफिलियेटिंग एजेंसी द्वारा फीस का सत्यापन 1 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा फीस सत्यापन 4 दिसंबर तक पूर्ण किया जाएगा।

छात्र-छात्राओं द्वारा रजिस्ट्रेशन एवं ऑनलाइन सत्यापन 20 से 26 नवंबर तक किया जाएगा। आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी व आवश्यक दस्तावेज 29 नवंबर तक अपने शिक्षण संस्थान में जमा करने होंगे। शिक्षण संस्थानों द्वारा ऑनलाइन अग्रसारण एवं सत्यापन 3 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाना है।

जिन छात्र-छात्राओं को गत वर्ष किसी कारणवश छात्रवृत्ति या शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल सका था, वे भी निर्धारित तिथियों के अनुसार पुनः ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने जनपद के सभी शासकीय, अर्ध-शासकीय एवं मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों और नोडल अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे छात्रों के ऑनलाइन आवेदनों का नियमानुसार मिलान कर समय पर अग्रसारित करना सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र विद्यार्थी लाभ से वंचित न रह जाए।

सिंदुरिया चौराहे पर सर्विस रोड निर्माण की मांग तेज

उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष ने डीएम से लगाई गुहार, सामुदायिक शौचालय चालू कराने की भी रखी मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सिंदुरिया निवासी एवं उद्योग व्यापार मंडल सिंदुरिया के अध्यक्ष सचिन्द्र कुमार गुप्त उर्फ गुड्डू ने मंगलवार को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा से मुलाकात कर सिंदुरिया चौराहे की जाम समस्या से निजात दिलाने हेतु सर्विस रोड निर्माण की मांग की। साथ ही उन्होंने नव निर्मित सामुदायिक शौचालय को तत्काल संचालित कराने की भी गुहार लगाई।
अध्यक्ष गुप्त द्वारा डीएम को दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि सिंदुरिया में विशेषकर बाजार के दिन जाम की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, जिससे व्यापारियों व आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। सर्विस लेन का निर्माण न केवल यातायात सुगम करेगा, बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।उन्होंने बताया कि महराजगंज– ठूठीबारी बाईपास निर्माण एवं सड़क चौड़ीकरण के दौरान दोनों ओर नई नालियों का निर्माण चल रहा है। इसके चलते चौराहे पर प्रतिदिन जाम लगता है और आवाजाही बाधित रहती है। सर्विस रोड बन जाने से अनावश्यक भीड़ नियंत्रित होगी और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए तैयार सामुदायिक शौचालय को तत्काल चालू किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें भटकना न पड़े।

कृषि यंत्रों की बुकिंग हेतु ई-लॉटरी 21 नवंबर को, विकास भवन सभागार में होगी प्रक्रिया

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)
कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसान ड्रोन एवं कस्टम हायरिंग सेंटर की लक्ष्य से अधिक हुई बुकिंग को देखते हुए कृषकों के टोकन की पुष्टि ई-लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि ई-लॉटरी 21 नवंबर 2025 को अपराह्न 1:00 बजे, विकास भवन सभागार, संजय पैलेस, आगरा में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में अनेक कृषकों ने विभागीय पोर्टल पर कृषि यंत्रों की बुकिंग की है। किसान ड्रोन और कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने के कारण कई कृषकों के टोकन कन्फर्म नहीं हो पाए हैं। ऐसे सभी कृषकों के टोकन को कन्फर्म करने के उद्देश्य से शासन ने ई-लॉटरी का प्रावधान किया है।

यह प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय समिति की उपस्थिति में सम्पन्न होगी। उप कृषि निदेशक ने कृषक बंधुओं से अपील की है कि जिन किसानों ने कृषि यंत्रों की बुकिंग की है, वे निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होकर ई-लॉटरी प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करें, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके।

घोसी विधायक सुधाकर सिंह के असामयिक निधन से शोक की लहर, क्षेत्र में छाया मातम

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मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जनपद के घोसी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं लोकप्रिय विधायक सुधाकर सिंह के असामयिक निधन की खबर ने पूरे जनपद को गहरे शोक में डुबो दिया है। उनके निधन का समाचार सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक शोक की लहर दौड़ गई। जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाने वाले, सरल स्वभाव और सहज व्यक्तित्व वाले सुधाकर सिंह को क्षेत्र में एक सशक्त जननायक के रूप में जाना जाता था।

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स्थानीय लोगों ने बताया कि विधायक सुधाकर सिंह हमेशा जनता के बीच रहते थे और विकास के मुद्दों पर उनकी सक्रियता उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती थी। सामाजिक न्याय, गरीबों की सहायता और क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी प्रतिबद्धता सदैव लोगों के लिए प्रेरक रही है। उनके निधन को क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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उनसे व्यक्तिगत लगाव रखने वाले लोगों ने भावनात्मक शब्दों में कहा कि “विधायक जी का जाना व्यक्तिगत क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। उनकी सरलता, संघर्षशीलता और जनता के प्रति समर्पण को भुलाया नहीं जा सकता।”

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दिवंगत नेता के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य व शक्ति दें।

सुधाकर सिंह का जीवन जनसेवा को समर्पित रहा और उनकी स्मृतियाँ घोसी विधानसभा क्षेत्र के विकासात्मक संघर्षों में सदा जीवित रहेंगी।

डिहुलिया प्राथमिक विद्यालय का शानदार उत्थान: संसाधनों से नहीं, संकल्प से मिली सफलता

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के बघौली ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय डिहुलिया आज शिक्षा जगत में एक चमकदार उदाहरण बनकर उभरा है। दो कमरों और दो शिक्षकों के सहारे चलने वाला यह विद्यालय अपने अनुशासन, स्वच्छता, उत्कृष्ट शिक्षण और सौ फीसदी उपस्थिति के कारण चर्चाओं में है। 66 नामांकन में प्रतिदिन 66 बच्चों की उपस्थिति इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। सभी बच्चे यूनिफॉर्म में विद्यालय पहुँचते हैं, जिससे शिक्षा के प्रति उनकी गंभीरता और विद्यालय की प्रभावी व्यवस्था साफ झलकती है।
विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही स्वच्छ वातावरण, आकर्षक वाल पेंटिंग, सजे-संवरे कक्ष और अनुशासित बच्चे हर आगंतुक को प्रभावित करते हैं। प्रधानाध्यापक जय प्रकाश और सहायक शिक्षक तिलक राम के समर्पण ने इस विद्यालय की सूरत पूरी तरह बदल दी है।
कुछ वर्ष पूर्व तक यह विद्यालय उपेक्षा का शिकार था। परिसर में असामाजिक तत्वों की आवाजाही शिक्षण के माहौल को पूरी तरह प्रभावित कर चुकी थी। वर्ष 2016 में जब प्रधानाध्यापक जय प्रकाश यहां तैनात हुए, तो स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, पर उन्होंने कठिनाई को स्वीकार कर इसे बदलने का निर्णय लिया।
प्रधानाध्यापक जय प्रकाश का कहना है कि शुरुआत में हालात देखकर मन विचलित हुआ, पर फिर लगा कि यदि शिक्षक ही पीछे हट गए तो बच्चे किस पर भरोसा करेंगे। समुदाय के सहयोग से धीरे-धीरे वातावरण सुधारा गया और आज विद्यालय की 100% उपस्थिति देखकर संतोष होता है।
सहायक शिक्षक तिलक राम कहते हैं कि संसाधन भले कम हों, लेकिन बच्चों की शिक्षा और वातावरण में कोई कमी नहीं आने दी। रोज़ाना बच्चों का उत्साह और उनकी प्रगति ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आज डिहुलिया प्राथमिक विद्यालय न सिर्फ बघौली ब्लॉक बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा स्रोत बना है। स्वच्छता, एमडीएम व्यवस्था, कक्षाओं की सजावट, अनुशासन और शिक्षण की गुणवत्ता हर क्षेत्र में यह विद्यालय अपनी मिसाल खुद प्रस्तुत करता है।


डिहुलिया विद्यालय का यह परिवर्तन साबित करता है कि शिक्षा में सुधार के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प, निरंतर प्रयास और निष्ठा की आवश्यकता होती है।

वर्षों से जमे फॉरेस्टर गार्ड और बाबूओं पर सवाल, ग्रामीणों ने डीएम से की कार्रवाई की मांग

सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग महराजगंज में ट्रांसफर नीति की खुलेआम अनदेखी

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के विभिन्न वन रेंजों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे फॉरेस्ट गार्ड और दफ्तर के बाबूओं की तैनाती को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग सरकार की ट्रांसफर नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए उन्हीं कर्मचारियों को सालों-साल एक ही रेंज में बनाए रखता है, जिन पर लकड़ी तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की स्पष्ट गाइडलाइन है कि कोई भी कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक एक ही तैनाती स्थल पर नहीं रह सकता, लेकिन वन विभाग में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है। दक्षिणी चौक, उत्तरी चौक, निचलौल, मधवलियां और लक्ष्मीपुर रेंज में कई फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड छः से दस वर्षों से जमे हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इन्हें न हटाया जाता है, न ही इनके खिलाफ कार्रवाई होती है। वही लकड़ी तस्करी पर संरक्षण के आरोप लगाया जा रहा है और, केवलापुर के दो पेड़ कटने का मामला ताजा उदाहरण बन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में लक्ष्मीपुर रेंज के केवलापुर चौकी के पास दो साखू के पेड़ काटे गए थे। मामले के खुलासे पर विभाग ने दिखावे के तौर पर तत्कालीन फॉरेस्टर को हटाया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ दिनों बाद उसे उसी रेंज में पुनः बहाल कर दिया गया। ग्रामीणों ने इसे औपचारिक कार्रवाई और कोरम पूर्ति बताते हुए कहा कि यह सब उच्चाधिकारियों की मौन सहमति के बिना संभव नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जमे कर्मचारी वन माफियाओं से सांठ-गांठ कर अवैध लकड़ी कटान और तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं। बदले में इन कर्मचारियों द्वारा लाभांश विभाग के ऊपरी अफसरों तक पहुंचाया जाता है, जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई होना लगभग असंभव हो जाता है।
क्षेत्रीय ग्रामीण सुधीर मनोज, सुशील, विमला देवी, मंजू सोनी, उर्मिला, राहुल, मनोहर और संगीता सहित अनेक ग्रामीणों ने जिलाधिकारी महराजगंज को लिखित शिकायत देकर वन विभाग में वर्षों से जमे कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर करने की मांग की है। ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि शासन प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की उदासीनता के कारण क्षेत्र में लकड़ी तस्करी चरम पर है, और विभागीय संरक्षण के बिना यह संभव नहीं है।
इस संबंध में डीएफओ निरंजन सुर्वे से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे ग्रामीणों के आरोप और भी मजबूत होते दिख रहे हैं।

पराली पर सुप्रीम मॉनिटरिंग! खेत-खलिहान में उतरे अफसर, किसानों की बढ़ी टेंशन – कानून की धार और जुर्माने का डर बना सरदर्द

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। पराली संकट इस बार किसानों के लिए पहले से कहीं ज्यादा चुनौती लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि अब जिले के आला अफसर कुर्सियों से उठकर सीधा खेतों में दौड़ रहे हैं। निरीक्षण, वीडियो मॉनिटरिंग और तत्काल रिपोर्टिंग—सब कुछ युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि पराली जलाने पर अब किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ रही है। जहां एक तरफ खेती का मौसम, मजदूरों की कमी, मशीनें महंगी होने और खर्च बढ़ने से किसान पहले ही परेशान थे, वहीं अब पराली जलाने पर मुकदमे, जुर्माने और कार्रवाई का डर उनकी नींद उड़ा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में ड्रोन से निगरानी, गांव-गांव टीमों की तैनाती और लगातार फील्ड विजिट से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि पराली जलाने पर किसी भी कीमत पर रोक लगाई जाएगी। जिला प्रशासन का दावा है कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है,मशीनों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है और वैकल्पिक समाधान दिए जा रहे हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सीमित संसाधनों, कम लागत की मजबूरी और समय की कमी के चलते किसान खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई किसान कहते हैं कि पराली का निपटारा करना आसान नहीं है, और कार्रवाई का डर उनके लिए खेती से बड़ा तनाव बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों ने जहां प्रदूषण नियंत्रण को नई मजबूती दी है, वहीं गांवों में इसकी प्रतिक्रिया कड़ी और मिली-जुली दोनों नजर आ रही है। प्रशासन की सख्ती और किसानों की मुश्किलें इस बात का संकेत हैं कि पराली संकट सिर्फ कृषि समस्या नहीं, बल्कि नीति, तकनीक और समय पर समाधान की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

हर घर जल योजना में भ्रष्ट ठेकेदारों की लापरवाही: एक साल बाद भी सड़क मरम्मत अधूरी

हर घर जल योजना में लापरवाही: खोदी सड़क के मरम्मत न होने से लोग परेशान

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले की नगर पंचायत धर्मसिंहवा के वार्ड संख्या 1, 9 और 13 में हर घर जल योजना के तहत करीब एक वर्ष पहले जल निगम के ठेकेदार द्वारा आरसीसी सड़क काटकर पाइपलाइन बिछाई गई थी। लेकिन कार्य पूरा होने के बाद भी सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे स्थानीय लोगों में विभाग की उदासीनता को लेकर कड़ा रोष है।
आवागमन करने वालों का कहना है कि सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे बने हैं, जिससे पैदल चलना और दोपहिया वाहन निकालना बेहद मुश्किल हो गया है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, क्योंकि गड्ढों में पानी भरने से फिसलन और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
इसी समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। लोगों ने जल निगम और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यदि जल्द सड़क मरम्मत नहीं कराई गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। शिकायत नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग में दर्ज की गई है और अब अधिकारी स्तर पर जांच व कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

बिहार चुनाव 2025: अपराधी छवि वाले विधायकों की भारी जीत लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी

लेखक – चंद्रकांत सी पूजारी, गुजरा


बिहार विधानसभा चुनाव–2025 के नतीजों ने जहाँ एनडीए को एक बार फिर प्रचंड बहुमत का सौगात दिया है, वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र के माथे पर एक गहरी शिकन भी छोड़ दी है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि इस बार चुने गए 243 विधायकों में से 53 प्रतिशत यानी 130 विधायक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। यह आंकड़ा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंता का विषय है।
2020 की तुलना में क्या बदला?
ADR के अनुसार वर्ष 2020 में यह स्थिति और भी भयावह थी, जब 241 में से 163 यानी 68 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 53 प्रतिशत पर आई है, लेकिन अब भी यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
गंभीर मामलों में कमी, लेकिन खतरा कायम
रिपोर्ट के अनुसार 243 में से 102 विधायक गंभीर आपराधिक मामलों (हत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार, अपहरण आदि) से जुड़े हैं। 2020 में यह प्रतिशत 51 था, जो अब घटकर 42 हो गया है। इसके बावजूद आंकड़े यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि राजनीति और अपराध का गठजोड़ मजबूती से कायम है।
दिल दहलाने वाले तथ्य
6 विधायकों पर हत्या के आरोप
19 विधायकों पर हत्या के प्रयास के मामले
9 विधायकों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस का उल्लेख किया
किस पार्टी में कितने ‘दागी’ विधायक?
भाजपा: 89 में से 43
जदयू: 85 में से 23
राजद: 25 में से 14
लोजपा (रामविलास): 19 में से 10
कांग्रेस: 6 में से 3
एआईएमआईएम: 5 में से 4
अन्य दल/निर्दलीय: 50–100% तक
स्पष्ट है—कोई भी प्रमुख दल इससे अछूता नहीं है।
कैसे जीत जाते हैं अपराधी छवि वाले नेता?
यह प्रश्न हर चुनाव के बाद उठता है। इसके पीछे कई सामाजिक–राजनीतिक कारण छिपे हैं:
जातीय समीकरणों का प्रभाव
‘दबंग’ छवि वाले नेताओं की स्थानीय पकड़
पैसे और मसल पावर का वर्चस्व
साफ–सुथरे उम्मीदवारों की चुनाव में कमजोर स्थिति ,मतदाताओं में जागरूकता की कमी
कई क्षेत्रों में मतदाता अपराधी नेता को ‘रक्षक’ या ‘समस्या सुलझाने वाला’ मान बैठते हैं, जो लोकतंत्र को कमजोर करने वाली सबसे बड़ी सोच बन चुकी है।
लोकतंत्र के लिए गहरा खतरा
जब कानून का उल्लंघन करने वाले ही कानून बनाने वाली संस्था में पहुँच जाते हैं, तब—
प्रशासनिक और पुलिस तंत्र पर दबाव बढ़ता है।
निष्पक्ष न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है।
विकास कार्यों की जगह व्यक्तिगत हितों का वर्चस्व बढ़ता है।
अपराध का राजनीतिक संरक्षण मजबूत होता है।
यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को भीतर से खोखला कर देता है।
समाधान क्या है?
अपराध–राजनीति गठजोड़ को तोड़ने के लिए ठोस एवं सख्त कदम ज़रूरी हैं—
गंभीर आरोपों वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंध
राजनीतिक दलों पर दागी उम्‍मीदवार उतारने पर आर्थिक व कानूनी कार्रवाई
विशेष अदालतें बनाकर त्वरित सुनवाई
हर बूथ पर प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड की अनिवार्य जानकारी।
ईमानदार और युवा नेतृत्व को बढ़ावा।
बिहार चुनाव–2025 यह संदेश स्पष्ट रूप से देता है कि सरकारें बदलने से कुछ नहीं बदलेगा—जब तक हमारी वोट करने की मानसिकता नहीं बदलेगी।
यदि मतदाता सचेत न हुए, तो लोकतांत्रिक चेतना लगातार हारती रहेगी और अपराधी राजनीति जीतती रहेगी।
अब भी समय है—अगले चुनाव से पहले हमें एक जागरूक समाज बनना होगा, वरना कीमत पूरी पीढ़ी को चुकानी पड़ेगी।

डोनाल्ड ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान भू-राजनीतिक साझेदारी

गोंदिया-वैश्विक स्तरपर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के बीच दिनांक 19 नवंबर 2025 को चल रही गलबहियां पूरी दुनियाँ ने देखी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सऊदी को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी बता दिया है और एफ़-35, परमाणु डील समेत कई महान समझौते किए हैं मध्य -पूर्व की राजनीति में खलबली मचा देने वाले इन दो देशों ने 1945 में भी एक महान समझौता किया था,जब एक युद्धपोत पर राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट और आधुनिक सऊदी किंग अब्दुलअजीज इब्न सऊद की मुलाकात हुई थी,इसी मुलाकात के बाद क्विंसी समझौते की नींव रखी गई थी।वैश्विक राजनीति सदियों से राष्ट्रीय स्वार्थ और रणनीतिक लाभ के सिद्धांत पर संचालित होती रही है।चाहे वह साम्राज्य वाद के दौर कीविस्तारवादी नीतियाँ हों, शीतयुद्ध काल के दो ध्रुवीय गठबंधन, या 21वीं सदी की आर्थिक-रणनीतिक कूटनीति, हर युग में महाशक्तियों ने अपनी प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखा। अभी हाल ही में एक दिन पूर्व डोनाल्ड ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौतों निवेश के वायदों को भी इसी रूप में देखा जा सकता है। इन दोनों के बीच एक दिन पूरा वाइट हाउसमें जो हुआ वह सिद्धांत को पुष्ट करती हैं कि राजनीति में स्थायी कुछ नहीं होता, केवल राष्ट्रीय हित स्थायी होते हैं।यह लेख इन दोनों नेताओं के हालिया व्हाइट हाउस संवाद,उससे जुड़े रणनीतिक व्यापारिक और सैन्य समझौतों तथा वैश्विक शक्ति समीकरणों पर पड़े प्रभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि राजनीति में स्वार्थ की अवधारणा नई नहीं है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों केयथार्थवादी सिद्धांत के अनुसार, हर देश का सर्वोच्च उद्देश्य अपनी सुरक्षा, शक्ति और हितों की रक्षा करना होता है। यह सिद्धांत बताता है कि कोई भी राष्ट्र,चाहे वह अमेरिका हो, सऊदी अरब हो या भारत,वैश्विक मंच पर उन्हीं निर्णयों को प्राथमिकता देता है,जिनसे उसका सामरिक, आर्थिक या राजनीतिक हित सुरक्षित रहेडोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका फर्स्ट और एमबीएस का विज़न 2030 इसी स्वार्थ- प्रधान रणनीति के दो उदाहरण हैं। दोनों नेता इस धारणा पर चलते हैं कि बड़े फैसलेभावनाओं या सामूहिक नैतिकता के आधार पर नहीं,बल्कि कच्ची वास्तविकताओं, पैसा, सुरक्षा, निवेश, तेल, हथियार और वैश्विक प्रभाव के आधार पर लिए जाते हैं। 

साथियों बात अगर हम ट्रंप और एमबीएस:-दो आक्रामक नेताओं की समान नीति-शैली कोसमझने की करें तो डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक राजनीति में अपनी लेन-देन आधारित कूटनीति (ट्रांसक्शनल डिप्लोमासी) के लिए जाने जाते हैं। उनके शासनकाल में वैश्विक समझौते लाभ-हानि के कठोर आकलन पर आधारित थे। वे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर पुनर्विचार करने,नाटो देशों से अधिक धन मांगने,चीन पर टैरिफ लगाने और पुराने समझौतों को रद्द करने में संकोच नहीं करते थे।इसी प्रकार मोहम्मद बिनसलमान अपने देश को आधुनिक आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए उग्र सुधारवादी नीति अपनाते हैं। सऊदी की तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था को विविध बनाने, बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश लाने और मध्य-पूर्व की शक्ति-संतुलन में वर्चस्व बनाए रखने के लिए वे साहसिक कदम उठाते रहे हैं। उनके शासनकाल में सऊदी अरब ने क्षेत्रीय राजनीति में आक्रामक सैन्य और आर्थिक हस्तक्षेपों के माध्यम से खुद को एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।दोनों नेताओं में तीन महत्वपूर्ण समानताएँदिखाई देती हैं(1)राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत (2) आक्रामक कूटनीति(3)बड़े आर्थिक और रक्षा सौदों पर जोर

साथियों बात अगर हम ट्रंप- एमबीएस व्हाइट हाउस बैठक: भू-राजनीतिक हलचल का केंद्र इसको समझने की करें तो, 2018 के बाद पहली बार एमबीएस का अमेरिका आगमन और व्हाइट हाउस में ट्रंप द्वारा किया गया ऐतिहासिक स्वागत वैश्विक मीडिया का केंद्र बन गया यह केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरणों को पुनर्परिभाषित करने वाला क्षण था।इस मुलाकात के कई अर्थ थे- (1)सऊदी अरब और अमेरिका के रिश्तों में आई ठंडक अब समाप्त हो रही है।(2) बाइडेन प्रशासन के तहत मौजूद तनाव और अविश्वास अब इतिहास बनता दिख रहा है।(3) मध्य-पूर्व में अमेरिका अपनी प्रासंगिकता पुनः स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।(4) एमबीएस की अंतरराष्ट्रीय छवि, जो खशोगी प्रकरण से धूमिल हुई थी, ट्रंप ने उसे पुनः वैधता प्रदान कर दी।ट्रंप के इस कदम को विश्लेषक व्यवहारिक कूटनीति कहते हैं,जहाँ मानवीय अधिकारों का मुद्दा पीछे छूट जाता है और व्यापार, हथियार सौदे तथा रणनीतिक प्रभाव प्राथमिकता बन जाते हैं। 

साथियों बातें कर हम सऊदी को मेजर नॉन-नाटो एली का दर्जा और अभूतपूर्व रक्षा सौदे इसको समझने की करें तो इस बैठक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय था सऊदी अरब को मेजर नॉन-नाटो एली का दर्जा देना।यह दर्जा सामान्यत: उन देशों को मिलता है जो अमेरिका के दीर्घकालिक रक्षा-सहयोगी होते हैं। इससे सऊदी को अमेरिकी तकनीक, हथियार, रक्षा सहयोग, खुफिया सूचना और सुरक्षा साझेदारी के विशेष अधिकार प्राप्त होंगे।यह कदम मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।इसके साथ ही दो बड़े रक्षा समझौते घोषित हुए(1) 48 एफ़-35 स्टील्थ फाइटर जेट की बिक्री-एफ़ -35 दुनिया का सबसे खतरनाक और अत्याधुनिक स्टील्थ विमान है।सऊदी के लिए यह एक “गेम-चेंजर” सिद्ध होगा।यह इज़रायल, ईरान और तुर्किये जैसे देशों के सैन्य समीकरणों पर गहरा असर डालेगा। (2) 300 अब्राम्स टैंक की बिक्री-अब्राम्स एम 1ए 2 टैंक दुनिया की सबसे उन्नत स्थलीय युद्ध मशीनों में गिना जाता है।इससे सऊदी की थलसेना का सामरिक शक्ति- संतुलन कई गुना बढ़ जाएगा।इन दोनों सौदों के पीछे ट्रंप का साफ संदेश है-बिजनेस इज़ बिजनेस, और अमेरिका का हित सर्वोपरि है। 

साथियों बात अगर हम सऊदी का अमेरिका में ऐतिहासिक निवेश,एक ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य इसको समझने की करें तो,एमबीएस ने अमेरिका में सऊदी अरब के निवेश को बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा करके वैश्विकआर्थिक जगत में हलचल मचा दी। यह रकम पहले से घोषित 600 अरब डॉलर के निवेश से कहीं अधिक है। उन्होंने अमेरिका को दुनिया का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बताया, जो स्पष्ट करता है कि सऊदी आर्थिक रूप से अमेरिका पर भरोसा बढ़ा रहा है। यह निवेश केवल आर्थिक नहीं, बल्कि 3 बड़े रणनीतिक उद्देश्यों को साधता है (1) अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सऊदी की निर्णायक भागीदारी(2)द्विपक्षीय संबंधों को वित्तीय आधार पर मजबूती (3) ट्रंप प्रशासन को समर्थन और सुरक्षा गारंटी प्राप्त करना,एफ़ -35 और 300 अब्राम्स टैंकों के अतिरिक्त सऊदी द्वारा 88 लाख करोड़ (अरबों डॉलर) की डील अमेरिकी उद्योग के लिए बड़ी आर्थिक संजीवनी है।ट्रंप के लिए यह बैठक केवल एक कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि आर्थिक उपलब्धि भी थी,जो एनपीएस (नेशनल परोसपेरिटी सम्मिट) और आगामी चुनावों में उनकी छवि मजबूत करेगी। 

साथियों बात अगर हम जमाल खशोगी हत्या मामला: ट्रंप की ‘क्लीन चिट’ और विश्व राजनीति में नैतिकता बनाम हितों का संघर्ष इसको समझने की करें तो,2018 में तुर्किये में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या ने विश्व समुदाय में सऊदी अरब की छवि को गंभीर क्षति पहुंचाई थी। सीआईए ने अपने निष्कर्षों में स्पष्ट रूप से कहा था कि इस हत्या के पीछे सऊदी शासन और एमबीएस की मंजूरी का संदेह है।बाइडेन प्रशासन इसी आधार पर एमबीएस से दूरी बनाए हुए था।परन्तु ट्रंप ने इस बैठक में एमबीएस को क्लीन चिट प्रदान करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है।यह बयानरणनीतिक और आर्थिक हितों के अनुसार था, राजनीतिक नैतिकता के नहीं।यह कदम यह सिद्ध करता है कि (1) राजनीति में मानवीय अधिकारों से बड़ा राष्ट्रीय हित होता है (2) हथियार, निवेश और भू- रणनीतिक सहयोग नैतिकता से अधिक शक्तिशाली हैं (3) अमेरिका -सऊदी संबंध व्यवहारिकता पर आधारित हैं, न कि आदर्शवाद पर ट्रंप का यह निर्णय आलोचकों की दृष्टि में विवादास्पद है, परन्तु समर्थकों के अनुसार यह “राष्ट्रहित आधारित वास्तविक कूटनीति” है। 

साथियों बात अगर हम इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव:-यहसाझेदारी वैश्विक भू-राजनीति को कैसे बदलेगी? इसको समझने की करें तो ट्रंप,एमबीएस बैठक का वैश्विक परिदृश्य पर प्रभाव अत्यन्त व्यापक है,(1)मध्य-पूर्व का शक्ति-संतुलन बदल जाएगा-एफ़ -35 और अब्राम्स टैंक सऊदी को क्षेत्रीय सुपर- पावर बना देंगे।ईरान के लिए यह गंभीर चुनौती होगी।(2)चीन और रूस पर अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ेगा- सऊदी का अमेरिका की ओर झुकाव ऊर्जा और निवेश उद्योग में दोनों देशों के लिए झटका है (3) इज़रायल -सऊदी संबंधों में नई संभावनाएँ-अमेरिका की मध्यस्थता से अब्राहम समझौते 2.0′ की राह खुल सकती है।(4)भारत सहित एशिया में कच्चे तेल की राजनीति प्रभावित होगी-सऊदी,अमेरिका गठजोड़ तेल मूल्यों और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डालेगा। (5) अमेरिका मध्य-पूर्व में अपनी सैन्यमौजूदगी दोबारा मजबूत करेगा,यह चीन की बेल्ट एंड रोड रणनीति पर भी प्रभाव डालेगा। 

अतः अगर हम उपयोग पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि स्वार्थ, रणनीति और शक्ति,21वीं सदी की नई कूटनीति,ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान की मुलाकात केवल एक राजनयिक घटना नहीं थी, बल्कि 21वीं सदी की नई भू-राजनीति का स्पष्ट संदेश थी,राष्ट्रहित सर्वोपरि है।इस साझेदारी में अर्थव्यवस्था है,हथियार हैं,निवेश है,रणनीतिक दबाव है,क्षेत्रीय वर्चस्व है,और सबसे महत्वपूर्ण,एक ऐसा गठबंधन है जो आने वाले दशक में विश्व की शक्ति-संरचना को नया स्वरूप दे सकता है।नैतिकता मानवाधिकार, लोकतंत्र जैसे आदर्शों का स्थान यथार्थवादी शक्ति- राजनीति ने फिर से ले लिया है। स्वार्थ-प्रधान राजनीति आज भी वही है,केवल उसके स्वरूप और साधन बदल गए हैं।डोनाल्ड ट्रंप और एमबीएस इस नई विश्व-व्यवस्था के प्रतिनिधि हैं, जहाँ कूटनीति अब केवल संवाद नहीं, बल्कि शक्ति, धन और राष्ट्रीय हितों की प्रतिस्पर्धा है।

-संकलनकर्ता लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

“समय की सांझ में बुझते दीप: 20 नवंबर को विदा हुए महान व्यक्तित्वों का स्मरण”

भारत का इतिहास केवल वीरगाथाओं, उपलब्धियों और महत्त्वपूर्ण घटनाओं से ही नहीं बनता, बल्कि उन असाधारण व्यक्तित्वों से भी आकार लेता है, जिन्होंने अपने जीवनकाल में समाज, संस्कृति, राजनीति, साहित्य और कला को नई दिशा दी। 20 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन कई महान आत्माएँ संसार से विदा होकर इतिहास के अमर अध्यायों में दर्ज हो गईं। आइए, इन दिग्गजों के जीवन, योगदान और समाज पर उनके प्रभाव को भावपूर्ण ढंग से याद करें।


🔹 प्रियरंजन दासमुंशी (2017)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियरंजन दासमुंशी भारतीय राजनीति में दूरदर्शिता और मजबूत नेतृत्व के प्रतीक थे। बतौर पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री उन्होंने मीडिया क्षेत्र में कई नीतिगत सुधार किए। साथ ही ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन (AIFF) के अध्यक्ष रहते हुए भारतीय फ़ुटबॉल को नई पहचान दिलाने का श्रेय उन्हें जाता है। उनकी संगठन क्षमता और राष्ट्रहित के प्रति निष्ठा हमेशा आदर्श के रूप में याद की जाएगी।

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🔹 निर्मला ठाकुर (2014)

भारतीय साहित्य जगत की सशक्त आवाज़ कवियित्री निर्मला ठाकुर ने अपनी रचनाओं में महिला मन, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उकेरा। उनकी कविताएँ न केवल हृदय को छूती हैं बल्कि समाज को भी आईना दिखाती हैं। साहित्य में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक मार्ग बना रहेगा।

🔹 श्याम बहादुर वर्मा (2009)

बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्याम बहादुर वर्मा एक ऐसे विचारक थे, जिन्होंने दर्शन, साहित्य, इतिहास और समाज विज्ञान जैसे अनेक विषयों पर गहन अध्ययन किया। उनके लेखन में वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक चेतना की झलक स्पष्ट मिलती है। वे उन विरल बुद्धिजीवियों में शामिल रहे जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता का परिचय दिया।

🔹 हीराबाई बरोदेकर (1989)

किराना घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हीराबाई बरोदेकर हिंदुस्तानी संगीत की जगमगाती ध्रुवतारा थीं। उनकी आवाज़ में ऐसी मधुरता और गहराई थी कि श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाती थी। उन्होंने खयाल गायन को नई ऊँचाइयाँ दीं और भारतीय संगीत परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

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🔹 फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1984)

विश्वप्रसिद्ध शायर, इंकलाबी और रूमानी अदब के स्तंभ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्में आज भी दिलों में उम्मीद की लौ जलाती हैं। “गुलों में रंग भरे”, “मुझसे पहली सी मुहब्बत”, और “हम देखेंगे” जैसी अनगिनत रचनाएँ उन्हें सदैव जीवित बनाए रखती हैं। उनकी शायरी प्रेम, प्रतिरोध और इंसानियत की अद्भुत मिसाल है।

🔹 एम. एन. कौल (1984)

भारतीय संसदीय कार्यप्रणाली में असाधारण प्रभाव छोड़ने वाले एम. एन. कौल तीसरी लोकसभा के महासचिव रहे। संसद संचालन, परंपराओं और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाने में उनका योगदान अतुलनीय है। वे राष्ट्र की लोकतांत्रिक संस्था को सशक्त बनाने वाले प्रमुख स्तंभों में शामिल थे।

🔹 वायलेट अल्वा (1969)

भारत की पहली महिला उपसभापति और अग्रणी अधिवक्ता वायलेट अल्वा महिला सशक्तिकरण की मिसाल थीं। पत्रकारिता और राजनीति दोनों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए मज़बूती से आवाज़ उठाई। उनकी प्रतिबद्धता और साहस आज भी प्रेरणा देता है।

🔹 लॉर्ड एलगिन प्रथम (1863)

भारत के वायसराय के रूप में लॉर्ड एलगिन प्रथम ब्रिटिश भारत के प्रशासनिक इतिहास का हिस्सा रहे। लॉर्ड कैनिंग के बाद सत्ता संभालते हुए उन्होंने औपनिवेशिक शासन को स्थिर रखने की कोशिशें कीं। भले ही उनका शासनकाल अल्प रहा, परंतु वे ब्रिटिश प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शक्ति देने वाले मंत्र: मन, मस्तिष्क और ग्रहों का समन्वय

बच्चों का मन जितना कोमल होता है, उतना ही ग्रहणशील भी। इसी वजह से छोटी उम्र में सुने गए शब्द, संस्कार और ध्वनियाँ उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती हैं। प्राचीन भारतीय परंपरा में मंत्रों को ध्वनि-ऊर्जा (Sound Frequency Healing) माना गया है, जो मन, मस्तिष्क, भावनाओं और ध्यान क्षमता को संतुलित रखते हैं। आधुनिक शोध भी मानता है कि नियमित मंत्र-स्मरण बच्चों में एकाग्रता, याददाश्त, आत्मविश्वास और शांति बढ़ाता है।
निम्न मंत्र न केवल अध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास के लिए भी अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।

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  1. सूर्य मंत्र — सूर्य ग्रह प्रसन्न, ऊर्जा व तेज का संचार
    मंत्र:
    ॐ घृणि सूर्याय नमः
    oṁ ghṛṇi sūryāya namaḥ
    यह मंत्र बच्चों में आत्मविश्वास, शारीरिक ऊर्जा और मानसिक तेज को बढ़ाता है। सूर्य की ऊर्जा जीवन को दिशा देती है, इसलिए सुबह के समय यह मंत्र जपना विशेष शुभ माना गया है। पढाई में रुचि व सक्रियता बढ़ाने में यह अत्यंत प्रभावी है।
  2. ॐ नमः शिवाय — चंद्र और राहु शांत, मन को स्थिरता
    मंत्र:
    ॐ नमः शिवाय
    oṁ namaḥ śivāya
    यह पंचाक्षरी मंत्र मन को स्थिर, शांत और संतुलित करता है। जिन बच्चों में भय, बेचैनी, गुस्सा या एकाग्रता की कमी हो, उनके लिए यह मंत्र रामबाण है। इसके उच्चारण से नकारात्मकता दूर होती है और मानसिक दृढ़ता बढ़ती है।
  3. गणेश मंत्र — बुध ग्रह संतुलित, बुद्धि-विकास
    मंत्र:
    ॐ गं गणपतये नमः
    oṁ gaṁ gaṇapataye namaḥ
    श्री गणेश बुद्धि, सफलता और विघ्न-नाश के देवता हैं। यह मंत्र बच्चों में सीखने की क्षमता, स्मरण शक्ति और तेजस्विता को बढ़ाता है। पढ़ाई में आने वाली रुकावटें कम होती हैं और जटिल विषयों को समझने में सहजता आती है।
  4. गायत्री मंत्र — सभी ग्रहों का समन्वय, संपूर्ण चेतना का विकास
    पूर्ण मंत्र:
    ॐ भूर्भुवः स्वः।
    तत्सवितुर्वरेण्यं।
    भर्गो देवस्य धीमहि।
    धियो यो नः प्रचोदयात्॥
    oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ
    tat savitur vareṇyaṁ
    bhargo devasya dhīmahi
    dhiyo yo naḥ pracodayāt
    दुनिया का सबसे वैज्ञानिक मंत्र माना जाता है। गायत्री मंत्र बच्चों के ध्यान, सोचने की क्षमता, मस्तिष्क विकास, तेजस्विता और एकाग्रता को अद्भुत रूप से मजबूत करता है। यह ग्रहों के समन्वय और जीवन में उज्ज्वलता का प्रतीक है।
  5. महामृत्युंजय मंत्र — मंगल–राहु दोष शांति, संरक्षण और स्वास्थ्य
    पूर्ण मंत्र:
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
    सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्
    मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    oṁ tryambakaṁ yajāmahe
    sugandhiṁ puṣṭi-vardhanam
    urvārukam iva bandhanān
    mṛtyor mukṣīya mā’mṛtāt
    यह मंत्र बच्चों के स्वास्थ्य, भय-निवारण और सुरक्षा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मन की शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। मंगल–राहु से संबंधित परेशानियों को भी कम करता है।
  6. सरस्वती मंत्र — विद्या, बुद्धि और स्मरण शक्ति
    बीज मंत्र:
    ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
    oṁ aiṁ sarasvatyai namaḥ
    पूरे मंत्र:
    “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
    या शुभ्रवस्त्रावृता।
    या वीणावरदण्डमण्डितकरा
    या श्वेतपद्मासना॥
    या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
    सा मां पातु सरस्वती भगवती
    निःशेषजाड्यापहा॥”
    यह मंत्र बुद्धि, स्मरण शक्ति, रचनात्मक सोच, पढ़ाई में रुचि और कला के विकास के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। परीक्षा देने वाले बच्चों के लिए यह मंत्र अत्यंत लाभकारी है।
  7. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — मन की शांति और बुद्धि-शुद्धि
    मंत्र:
    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    oṁ namo bhagavate vāsudevāya
    यह मंत्र मन को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है। इससे बच्चों का मन निर्मल, भावनाएँ संतुलित और विचार सकारात्मक होते हैं। पढ़ाई में निरंतरता और दृढ़ता बढ़ती है।
    बच्चों के लिए लाभ
    ✔ एकाग्रता में वृद्धि
    ✔ अच्छे अंक और पढ़ाई में रुचि
    ✔ मस्तिष्क की क्षमता तेज
    ✔ स्मरण शक्ति और समझ मजबूत
    ✔ ग्रहदोष शांत, भावनात्मक संतुलन
    ✔ आत्मविश्वास, सकारात्मकता और मन की शुद्धि
    ✔ मानसिक तनाव में कमी
    ✔ भय, गुस्सा और बेचैनी में कमी

⭐20 नवंबर के इतिहास में दर्ज अविस्मरणीय घटनाएँ

1815 – यूरोपीय शक्तियों का ऐतिहासिक गठबंधन
यूरोप में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से रूस, प्रशिया, आस्ट्रिया और इंग्लैंड ने एक महत्त्वपूर्ण गठबंधन किया। यह समझौता महाद्वीप को स्थिरता देने और युद्धों की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हुआ।

1829 – रूसी प्रशासनिक निर्णय का असर
रूस के निकोलायेव और सेवेस्तोपोल क्षेत्र से यहूदियों को निष्कासन का आदेश दिया गया। इस घटना ने सामाजिक तनाव और उस काल के राजनीतिक वातावरण की जटिलता को उजागर किया, जिसने स्थानीय समुदायों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।

1866 – हावर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना
वॉशिंगटन डी.सी. में हावर्ड विश्वविद्यालय की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर विश्व की प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों में अपनी जगह बनाई। विशेषकर अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के लिए यह शिक्षा और समानता का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।

1917 – यूक्रेन गणराज्य का उदय
इस दिन यूक्रेन ने स्वयं को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया। यह घोषणा राष्ट्रीय पहचान, स्वशासन और स्वतंत्रता की दिशा में देश की ऐतिहासिक प्रगति का नया अध्याय बनी।

1917 – बोस अनुसंधान संस्थान की स्थापना
कोलकाता में बोस अनुसंधान संस्थान ने वैज्ञानिक खोजों की नई दिशा खोल दी। जगदीश चंद्र बोस के नाम पर बने इस संस्थान ने भारत में विज्ञान को वैश्विक पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।

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1942 – ब्रिटिश सेना का बेनगाजी पुनः कब्ज़ा
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने लीबिया की राजधानी बेनगाजी पर फिर से नियंत्रण स्थापित किया। यह सफलता उत्तर अफ्रीका में मित्र राष्ट्रों की रणनीतिक बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुई।

1945 – जापान का आत्मसमर्पण और युद्ध का अंत
जापान ने पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण किया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। यह दिन मानवता की त्रासदी के अंत और शांति की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।

1949 – इज़रायल में यहूदी जनसंख्या का मील का पत्थर
इज़रायल में यहूदियों की आबादी दस लाख के आंकड़े तक पहुँची। यह पल नवस्थापित देश की जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक पुनर्गठन की दिशा में महत्वपूर्ण था।

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1955 – भारतीय क्रिकेट का ऐतिहासिक दोहरा शतक
पॉली उमरीगर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला दोहरा शतक लगाकर भारतीय टेस्ट क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया। यह रिकॉर्ड देश के खेल जगत की प्रेरक उपलब्धियों में गिना जाता है।

1968 – अमेरिका का नेवादा परमाणु परीक्षण
अमेरिका ने नेवादा में एक और परमाणु परीक्षण किया, जो उस दौर की तकनीकी प्रगति और वैश्विक शक्ति संतुलन की रणनीतियों को प्रदर्शित करता है।

1981 – बुरुंडी ने नया संविधान अपनाया
अफ्रीकी देश बुरुंडी ने आधुनिक शासन प्रणाली की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नया संविधान अंगीकार किया। यह राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक विकास के लिए अहम कदम था।

1981 – भास्कर उपग्रह का प्रक्षेपण
भारत ने भास्कर उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजकर वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष अनुसंधान में बड़ी उपलब्धि हासिल की। यह मिशन देश की तकनीकी मजबूती का प्रतीक बना।

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1985 – माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 1.0 लॉन्च
दुनिया के डिजिटल भविष्य को बदलने वाला क्षण—माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 1.0 जारी किया। यह आधुनिक कंप्यूटिंग की नींव रखने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

1994 – अंगोला में शांति समझौता
19 साल से जारी गृहयुद्ध को समाप्त करने हेतु अंगोला सरकार और यूनिटा विद्रोहियों ने लुसाका में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। यह घटना देश की स्थिरता के लिए बेहद अहम रही।

1997 – अंतरिक्ष शटल कोलम्बिया का प्रक्षेपण
नासा का शटल ‘कोलम्बिया’ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ। यह मिशन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अनुसंधान गतिविधियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

1998 – अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल
आईएसएस का पहला मॉड्यूल ‘जार्या’ लॉन्च किया गया, जिसने मानव अंतरिक्ष सहयोग की नई दुनिया का द्वार खोला।

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2002 – तेल टैंकर ‘प्रेस्टीज’ का डूबना
स्पेन के तट के पास ‘प्रेस्टीज’ टैंकर डूब गया, जिससे गंभीर समुद्री प्रदूषण पैदा हुआ। इसे समुद्री इतिहास की बड़ी पर्यावरणीय दुर्घटनाओं में गिना जाता है।

2003 – इस्तांबुल बम धमाका
तुर्की के इस्तांबुल में हुए भीषण विस्फोट में ब्रिटेन के महावाणिज्य दूत सहित 27 लोगों की मौत हुई। यह हमला अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को झकझोर देने वाला साबित हुआ।

2007 – पाकिस्तान में चुनाव कार्यक्रम घोषित
पाकिस्तान चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों के चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया, जिससे देश की राजनीतिक प्रक्रिया को नई दिशा मिली।

2008 – मालेगांव केस और समुद्री सुरक्षा
मालेगाँव विस्फोट मामले के सभी 10 आरोपियों पर मकोका लगाया गया। इसी दिन भारत ने अदन की खाड़ी में अपने व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा हेतु मिसाइल विध्वंसक जहाज़ भेजा।

2015 – माली के बमाको में हत्याकांड
बमाको में बंधक बनाकर हमला किया गया, जिसमें 19 लोग मारे गए। यह अफ्रीका में बढ़ते आतंकवाद की गंभीर चुनौती का संकेत था।

2016 – पीवी सिंधु का पहला सुपर सीरीज खिताब
पीवी सिंधु ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए चाइना ओपन सुपर सीरीज जीतकर भारत को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में गौरवान्वित किया।

भारत की धरती पर जन्मे असाधारण व्यक्तित्व

इतिहास के स्वर्णिम अध्याय: 20 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तियों की अविस्मरणीय गाथा


20 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में अद्भुत प्रतिभाओं, संघर्ष, वीरता और साहित्यिक सौंदर्य का प्रतीक है। इस दिन जन्मे अद्भुत व्यक्तित्वों ने न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में ऊँचाइयों को छुआ, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। यह तिथि उन महान शख्सियतों की याद दिलाती है जिन्होंने भारत तथा विश्व के सामाजिक, राजनीतिक, खेल और साहित्यिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अपनी छाप छोड़ी।

1989 – बबीता फोगाट: भारतीय महिला शक्ति की प्रतीक
20 नवंबर 1989 को जन्मी बबीता फोगाट भारत की ऐसी महिला फ्रीस्टाइल पहलवान हैं जिनकी हिम्मत, लगन और संघर्ष की कहानी करोड़ों बेटियों को प्रेरित करती है। हरियाणा के द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच महावीर फोगाट की बेटी बबीता ने कठिन सामाजिक परिस्थितियों को चुनौती देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण और रजत जीतना उनकी अदम्य मेहनत का प्रमाण है। आज बबीता फोगाट महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि निश्चय अडिग हो तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

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1936 – शुरहोज़ेलि लिजित्सु: नागा राजनीति का शांतिपूर्ण चेहरा
20 नवंबर 1936 को जन्मे शुरहोज़ेलि लिजित्सु नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत की राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। ‘नागा पीपुल्स फ्रंट’ से जुड़े लिजित्सु ने क्षेत्र में विकास, संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता देने का प्रयास किया। वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, जन अधिकारों और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के लिए सक्रिय रहे। उनकी राजनीतिक शैली आक्रामकता से अधिक संवाद पर आधारित रही, जो उन्हें एक संवेदनशील और जिम्मेदार नेता के रूप में स्थापित करती है। पहाड़ी राज्यों की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों को समझना और समाधान खोजना उनका बड़ा योगदान माना जाता है।
1934 – जनरल अजय सिंह: भारतीय सैन्य परंपरा के गौरव
20 नवंबर 1934 को जन्मे जनरल अजय सिंह एक सम्मानित सैन्य अधिकारी और असम के राज्यपाल रहे। उन्होंने भारतीय सेना में अनुशासन, रणनीति और नेतृत्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युवा अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देशक बन गया। सेवाकाल में उन्होंने देश की सुरक्षा को मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बाद में राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधार और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा दिया। उनका व्यक्तित्व सैन्य शौर्य और नागरिक कर्तव्य का आदर्श मिश्रण था, जिसने उन्हें देश के सम्मानित नेताओं में स्थान दिलाया।

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1929 – मिल्खा सिंह: ‘फ्लाइंग सिख’ की अमर कहानी
20 नवंबर 1929 को जन्मे मिल्खा सिंह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास की सबसे चमकदार हस्ती हैं। विभाजन की त्रासदी देखने के बाद भी उन्होंने अपने दर्द को दौड़ की ऊर्जा में बदल दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहचान दिलाने वाले मिल्खा सिंह वह धावक थे जिनकी गति को देखकर दुनिया दंग रह जाती थी। 1960 रोम ओलंपिक में चौथे स्थान पर रह जाना उनकी सबसे बड़ी पीड़ा थी, परंतु यही घटना उन्हें और दृढ़ बनाती रही। उनकी जीवनी “फ्लाइंग सिख” पूरे विश्व में प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने साबित किया कि संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है।
1916 – अहमद नदीम क़ासमी: उर्दू साहित्य का अनमोल सितारा
20 नवंबर 1916 को जन्मे अहमद नदीम क़ासमी उर्दू भाषा के महान शायर, कवि और लेखक थे। उनके लेखन में ग्रामीण जीवन, मानवीय संबंधों और सामाजिक यथार्थ की गहरी समझ दिखाई देती है। क़ासमी साहब की कहानियाँ और कविताएँ मानवीय संवेदना का आईना हैं। उन्हें पाकिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप दोनों जगह बेहद सम्मान मिला। साहित्यिक पत्रिकाओं और आंदोलन के माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी के लेखकों को मंच दिया। उनकी रचनाएँ आज भी उर्दू साहित्य में मार्गदर्शक के रूप में पढ़ी जाती हैं।

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1750 – टीपू सुल्तान: शेर-ए-मैसूर की वीरता
20 नवंबर 1750 को जन्मे टीपू सुल्तान को ‘शेर-ए-मैसूर’ कहा जाता है। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने दक्षिण भारत में स्वतंत्रता का सबसे तेज़ स्वर उठाया। टीपू सुल्तान एक दूरदर्शी शासक, कुशल रणनीतिकार और तकनीकी नवाचारों के प्रणेता थे। रॉकेट तकनीक को युद्ध में प्रयोग करने का श्रेय भी उन्हें जाता है। उनकी नीतियाँ कृषि, सिंचाई और व्यापार के विकास पर आधारित थीं। बड़े साम्राज्यों से टकराते हुए उनका अंत हुआ, लेकिन उनका साहस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बना।