Tuesday, June 30, 2026
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बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शक्ति देने वाले मंत्र: मन, मस्तिष्क और ग्रहों का समन्वय

बच्चों का मन जितना कोमल होता है, उतना ही ग्रहणशील भी। इसी वजह से छोटी उम्र में सुने गए शब्द, संस्कार और ध्वनियाँ उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती हैं। प्राचीन भारतीय परंपरा में मंत्रों को ध्वनि-ऊर्जा (Sound Frequency Healing) माना गया है, जो मन, मस्तिष्क, भावनाओं और ध्यान क्षमता को संतुलित रखते हैं। आधुनिक शोध भी मानता है कि नियमित मंत्र-स्मरण बच्चों में एकाग्रता, याददाश्त, आत्मविश्वास और शांति बढ़ाता है।
निम्न मंत्र न केवल अध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास के लिए भी अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।

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  1. सूर्य मंत्र — सूर्य ग्रह प्रसन्न, ऊर्जा व तेज का संचार
    मंत्र:
    ॐ घृणि सूर्याय नमः
    oṁ ghṛṇi sūryāya namaḥ
    यह मंत्र बच्चों में आत्मविश्वास, शारीरिक ऊर्जा और मानसिक तेज को बढ़ाता है। सूर्य की ऊर्जा जीवन को दिशा देती है, इसलिए सुबह के समय यह मंत्र जपना विशेष शुभ माना गया है। पढाई में रुचि व सक्रियता बढ़ाने में यह अत्यंत प्रभावी है।
  2. ॐ नमः शिवाय — चंद्र और राहु शांत, मन को स्थिरता
    मंत्र:
    ॐ नमः शिवाय
    oṁ namaḥ śivāya
    यह पंचाक्षरी मंत्र मन को स्थिर, शांत और संतुलित करता है। जिन बच्चों में भय, बेचैनी, गुस्सा या एकाग्रता की कमी हो, उनके लिए यह मंत्र रामबाण है। इसके उच्चारण से नकारात्मकता दूर होती है और मानसिक दृढ़ता बढ़ती है।
  3. गणेश मंत्र — बुध ग्रह संतुलित, बुद्धि-विकास
    मंत्र:
    ॐ गं गणपतये नमः
    oṁ gaṁ gaṇapataye namaḥ
    श्री गणेश बुद्धि, सफलता और विघ्न-नाश के देवता हैं। यह मंत्र बच्चों में सीखने की क्षमता, स्मरण शक्ति और तेजस्विता को बढ़ाता है। पढ़ाई में आने वाली रुकावटें कम होती हैं और जटिल विषयों को समझने में सहजता आती है।
  4. गायत्री मंत्र — सभी ग्रहों का समन्वय, संपूर्ण चेतना का विकास
    पूर्ण मंत्र:
    ॐ भूर्भुवः स्वः।
    तत्सवितुर्वरेण्यं।
    भर्गो देवस्य धीमहि।
    धियो यो नः प्रचोदयात्॥
    oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ
    tat savitur vareṇyaṁ
    bhargo devasya dhīmahi
    dhiyo yo naḥ pracodayāt
    दुनिया का सबसे वैज्ञानिक मंत्र माना जाता है। गायत्री मंत्र बच्चों के ध्यान, सोचने की क्षमता, मस्तिष्क विकास, तेजस्विता और एकाग्रता को अद्भुत रूप से मजबूत करता है। यह ग्रहों के समन्वय और जीवन में उज्ज्वलता का प्रतीक है।
  5. महामृत्युंजय मंत्र — मंगल–राहु दोष शांति, संरक्षण और स्वास्थ्य
    पूर्ण मंत्र:
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
    सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्
    मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    oṁ tryambakaṁ yajāmahe
    sugandhiṁ puṣṭi-vardhanam
    urvārukam iva bandhanān
    mṛtyor mukṣīya mā’mṛtāt
    यह मंत्र बच्चों के स्वास्थ्य, भय-निवारण और सुरक्षा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मन की शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। मंगल–राहु से संबंधित परेशानियों को भी कम करता है।
  6. सरस्वती मंत्र — विद्या, बुद्धि और स्मरण शक्ति
    बीज मंत्र:
    ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
    oṁ aiṁ sarasvatyai namaḥ
    पूरे मंत्र:
    “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
    या शुभ्रवस्त्रावृता।
    या वीणावरदण्डमण्डितकरा
    या श्वेतपद्मासना॥
    या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
    सा मां पातु सरस्वती भगवती
    निःशेषजाड्यापहा॥”
    यह मंत्र बुद्धि, स्मरण शक्ति, रचनात्मक सोच, पढ़ाई में रुचि और कला के विकास के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। परीक्षा देने वाले बच्चों के लिए यह मंत्र अत्यंत लाभकारी है।
  7. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — मन की शांति और बुद्धि-शुद्धि
    मंत्र:
    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    oṁ namo bhagavate vāsudevāya
    यह मंत्र मन को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है। इससे बच्चों का मन निर्मल, भावनाएँ संतुलित और विचार सकारात्मक होते हैं। पढ़ाई में निरंतरता और दृढ़ता बढ़ती है।
    बच्चों के लिए लाभ
    ✔ एकाग्रता में वृद्धि
    ✔ अच्छे अंक और पढ़ाई में रुचि
    ✔ मस्तिष्क की क्षमता तेज
    ✔ स्मरण शक्ति और समझ मजबूत
    ✔ ग्रहदोष शांत, भावनात्मक संतुलन
    ✔ आत्मविश्वास, सकारात्मकता और मन की शुद्धि
    ✔ मानसिक तनाव में कमी
    ✔ भय, गुस्सा और बेचैनी में कमी

⭐20 नवंबर के इतिहास में दर्ज अविस्मरणीय घटनाएँ

1815 – यूरोपीय शक्तियों का ऐतिहासिक गठबंधन
यूरोप में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से रूस, प्रशिया, आस्ट्रिया और इंग्लैंड ने एक महत्त्वपूर्ण गठबंधन किया। यह समझौता महाद्वीप को स्थिरता देने और युद्धों की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हुआ।

1829 – रूसी प्रशासनिक निर्णय का असर
रूस के निकोलायेव और सेवेस्तोपोल क्षेत्र से यहूदियों को निष्कासन का आदेश दिया गया। इस घटना ने सामाजिक तनाव और उस काल के राजनीतिक वातावरण की जटिलता को उजागर किया, जिसने स्थानीय समुदायों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।

1866 – हावर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना
वॉशिंगटन डी.सी. में हावर्ड विश्वविद्यालय की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर विश्व की प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों में अपनी जगह बनाई। विशेषकर अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के लिए यह शिक्षा और समानता का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।

1917 – यूक्रेन गणराज्य का उदय
इस दिन यूक्रेन ने स्वयं को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया। यह घोषणा राष्ट्रीय पहचान, स्वशासन और स्वतंत्रता की दिशा में देश की ऐतिहासिक प्रगति का नया अध्याय बनी।

1917 – बोस अनुसंधान संस्थान की स्थापना
कोलकाता में बोस अनुसंधान संस्थान ने वैज्ञानिक खोजों की नई दिशा खोल दी। जगदीश चंद्र बोस के नाम पर बने इस संस्थान ने भारत में विज्ञान को वैश्विक पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।

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1942 – ब्रिटिश सेना का बेनगाजी पुनः कब्ज़ा
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने लीबिया की राजधानी बेनगाजी पर फिर से नियंत्रण स्थापित किया। यह सफलता उत्तर अफ्रीका में मित्र राष्ट्रों की रणनीतिक बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुई।

1945 – जापान का आत्मसमर्पण और युद्ध का अंत
जापान ने पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण किया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। यह दिन मानवता की त्रासदी के अंत और शांति की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।

1949 – इज़रायल में यहूदी जनसंख्या का मील का पत्थर
इज़रायल में यहूदियों की आबादी दस लाख के आंकड़े तक पहुँची। यह पल नवस्थापित देश की जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक पुनर्गठन की दिशा में महत्वपूर्ण था।

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1955 – भारतीय क्रिकेट का ऐतिहासिक दोहरा शतक
पॉली उमरीगर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला दोहरा शतक लगाकर भारतीय टेस्ट क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया। यह रिकॉर्ड देश के खेल जगत की प्रेरक उपलब्धियों में गिना जाता है।

1968 – अमेरिका का नेवादा परमाणु परीक्षण
अमेरिका ने नेवादा में एक और परमाणु परीक्षण किया, जो उस दौर की तकनीकी प्रगति और वैश्विक शक्ति संतुलन की रणनीतियों को प्रदर्शित करता है।

1981 – बुरुंडी ने नया संविधान अपनाया
अफ्रीकी देश बुरुंडी ने आधुनिक शासन प्रणाली की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नया संविधान अंगीकार किया। यह राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक विकास के लिए अहम कदम था।

1981 – भास्कर उपग्रह का प्रक्षेपण
भारत ने भास्कर उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजकर वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष अनुसंधान में बड़ी उपलब्धि हासिल की। यह मिशन देश की तकनीकी मजबूती का प्रतीक बना।

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1985 – माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 1.0 लॉन्च
दुनिया के डिजिटल भविष्य को बदलने वाला क्षण—माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 1.0 जारी किया। यह आधुनिक कंप्यूटिंग की नींव रखने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

1994 – अंगोला में शांति समझौता
19 साल से जारी गृहयुद्ध को समाप्त करने हेतु अंगोला सरकार और यूनिटा विद्रोहियों ने लुसाका में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। यह घटना देश की स्थिरता के लिए बेहद अहम रही।

1997 – अंतरिक्ष शटल कोलम्बिया का प्रक्षेपण
नासा का शटल ‘कोलम्बिया’ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ। यह मिशन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अनुसंधान गतिविधियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

1998 – अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल
आईएसएस का पहला मॉड्यूल ‘जार्या’ लॉन्च किया गया, जिसने मानव अंतरिक्ष सहयोग की नई दुनिया का द्वार खोला।

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2002 – तेल टैंकर ‘प्रेस्टीज’ का डूबना
स्पेन के तट के पास ‘प्रेस्टीज’ टैंकर डूब गया, जिससे गंभीर समुद्री प्रदूषण पैदा हुआ। इसे समुद्री इतिहास की बड़ी पर्यावरणीय दुर्घटनाओं में गिना जाता है।

2003 – इस्तांबुल बम धमाका
तुर्की के इस्तांबुल में हुए भीषण विस्फोट में ब्रिटेन के महावाणिज्य दूत सहित 27 लोगों की मौत हुई। यह हमला अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को झकझोर देने वाला साबित हुआ।

2007 – पाकिस्तान में चुनाव कार्यक्रम घोषित
पाकिस्तान चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों के चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया, जिससे देश की राजनीतिक प्रक्रिया को नई दिशा मिली।

2008 – मालेगांव केस और समुद्री सुरक्षा
मालेगाँव विस्फोट मामले के सभी 10 आरोपियों पर मकोका लगाया गया। इसी दिन भारत ने अदन की खाड़ी में अपने व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा हेतु मिसाइल विध्वंसक जहाज़ भेजा।

2015 – माली के बमाको में हत्याकांड
बमाको में बंधक बनाकर हमला किया गया, जिसमें 19 लोग मारे गए। यह अफ्रीका में बढ़ते आतंकवाद की गंभीर चुनौती का संकेत था।

2016 – पीवी सिंधु का पहला सुपर सीरीज खिताब
पीवी सिंधु ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए चाइना ओपन सुपर सीरीज जीतकर भारत को अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में गौरवान्वित किया।

भारत की धरती पर जन्मे असाधारण व्यक्तित्व

इतिहास के स्वर्णिम अध्याय: 20 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तियों की अविस्मरणीय गाथा


20 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में अद्भुत प्रतिभाओं, संघर्ष, वीरता और साहित्यिक सौंदर्य का प्रतीक है। इस दिन जन्मे अद्भुत व्यक्तित्वों ने न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में ऊँचाइयों को छुआ, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। यह तिथि उन महान शख्सियतों की याद दिलाती है जिन्होंने भारत तथा विश्व के सामाजिक, राजनीतिक, खेल और साहित्यिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अपनी छाप छोड़ी।

1989 – बबीता फोगाट: भारतीय महिला शक्ति की प्रतीक
20 नवंबर 1989 को जन्मी बबीता फोगाट भारत की ऐसी महिला फ्रीस्टाइल पहलवान हैं जिनकी हिम्मत, लगन और संघर्ष की कहानी करोड़ों बेटियों को प्रेरित करती है। हरियाणा के द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच महावीर फोगाट की बेटी बबीता ने कठिन सामाजिक परिस्थितियों को चुनौती देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण और रजत जीतना उनकी अदम्य मेहनत का प्रमाण है। आज बबीता फोगाट महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि निश्चय अडिग हो तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

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1936 – शुरहोज़ेलि लिजित्सु: नागा राजनीति का शांतिपूर्ण चेहरा
20 नवंबर 1936 को जन्मे शुरहोज़ेलि लिजित्सु नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत की राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। ‘नागा पीपुल्स फ्रंट’ से जुड़े लिजित्सु ने क्षेत्र में विकास, संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता देने का प्रयास किया। वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, जन अधिकारों और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के लिए सक्रिय रहे। उनकी राजनीतिक शैली आक्रामकता से अधिक संवाद पर आधारित रही, जो उन्हें एक संवेदनशील और जिम्मेदार नेता के रूप में स्थापित करती है। पहाड़ी राज्यों की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों को समझना और समाधान खोजना उनका बड़ा योगदान माना जाता है।
1934 – जनरल अजय सिंह: भारतीय सैन्य परंपरा के गौरव
20 नवंबर 1934 को जन्मे जनरल अजय सिंह एक सम्मानित सैन्य अधिकारी और असम के राज्यपाल रहे। उन्होंने भारतीय सेना में अनुशासन, रणनीति और नेतृत्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युवा अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देशक बन गया। सेवाकाल में उन्होंने देश की सुरक्षा को मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बाद में राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधार और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा दिया। उनका व्यक्तित्व सैन्य शौर्य और नागरिक कर्तव्य का आदर्श मिश्रण था, जिसने उन्हें देश के सम्मानित नेताओं में स्थान दिलाया।

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1929 – मिल्खा सिंह: ‘फ्लाइंग सिख’ की अमर कहानी
20 नवंबर 1929 को जन्मे मिल्खा सिंह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास की सबसे चमकदार हस्ती हैं। विभाजन की त्रासदी देखने के बाद भी उन्होंने अपने दर्द को दौड़ की ऊर्जा में बदल दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहचान दिलाने वाले मिल्खा सिंह वह धावक थे जिनकी गति को देखकर दुनिया दंग रह जाती थी। 1960 रोम ओलंपिक में चौथे स्थान पर रह जाना उनकी सबसे बड़ी पीड़ा थी, परंतु यही घटना उन्हें और दृढ़ बनाती रही। उनकी जीवनी “फ्लाइंग सिख” पूरे विश्व में प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने साबित किया कि संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है।
1916 – अहमद नदीम क़ासमी: उर्दू साहित्य का अनमोल सितारा
20 नवंबर 1916 को जन्मे अहमद नदीम क़ासमी उर्दू भाषा के महान शायर, कवि और लेखक थे। उनके लेखन में ग्रामीण जीवन, मानवीय संबंधों और सामाजिक यथार्थ की गहरी समझ दिखाई देती है। क़ासमी साहब की कहानियाँ और कविताएँ मानवीय संवेदना का आईना हैं। उन्हें पाकिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप दोनों जगह बेहद सम्मान मिला। साहित्यिक पत्रिकाओं और आंदोलन के माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी के लेखकों को मंच दिया। उनकी रचनाएँ आज भी उर्दू साहित्य में मार्गदर्शक के रूप में पढ़ी जाती हैं।

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1750 – टीपू सुल्तान: शेर-ए-मैसूर की वीरता
20 नवंबर 1750 को जन्मे टीपू सुल्तान को ‘शेर-ए-मैसूर’ कहा जाता है। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने दक्षिण भारत में स्वतंत्रता का सबसे तेज़ स्वर उठाया। टीपू सुल्तान एक दूरदर्शी शासक, कुशल रणनीतिकार और तकनीकी नवाचारों के प्रणेता थे। रॉकेट तकनीक को युद्ध में प्रयोग करने का श्रेय भी उन्हें जाता है। उनकी नीतियाँ कृषि, सिंचाई और व्यापार के विकास पर आधारित थीं। बड़े साम्राज्यों से टकराते हुए उनका अंत हुआ, लेकिन उनका साहस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बना।

“10वीं हिंदी बोर्ड पर फोकस: पिछले 5 सालों में दोहराए गए वे प्रश्न जो इस बार भी पेपर में आ सकते हैं”

एजुकेशन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) ।
(द्वितीय पाली / प्रश्नपत्र पैटर्न को ध्यान में रखते हुए)

अपठित गद्यांश / काव्यांश

  1. गद्यांश से तथ्य आधारित 4–5 प्रश्न

शब्दार्थ / पर्यायवाची / विपरीतार्थक

मुख्य भाव स्पष्ट करना

  1. पाठ आधारित (क्षितिज + कृतिका)

क्षितिज भाग – महत्त्वपूर्ण प्रश्न

  1. ‘साखी’ (कबीर)

कबीर के साखियों में वर्णित आध्यात्मिक संदेश स्पष्ट कीजिए।

विकल्पगत प्रश्न: “कबीर किस बात पर जोर देते हैं?”

  1. ‘उपकार’ (जयशंकर प्रसाद)

कृति में ‘उपकार’ का संदेश क्या है? उदाहरण सहित बताएँ।

  1. ‘कटरा बी आज़म’ (कृष्णा सोबती)

लेखक द्वारा वर्णित परिवेश की विशेषताएँ लिखिए।

चरित्र चित्रण—मुख्य पात्र की दो प्रमुख विशेषताएँ।

  1. ‘साना-साना हाथ जोडि’

यात्रा वृत्तांत की विशेषताओं का वर्णन।

  1. ‘नेताजी का चश्मा’

हास्य और व्यंग्य के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं?

  1. ‘पंख’

बालमन की इच्छाओं और कल्पनाओं का चित्रण कीजिए।

कृतिका भाग – महत्त्वपूर्ण प्रश्न

  1. ‘बालगोबिन भगत’

बालगोबिन भगत के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ।

कहानी का मूल संदेश क्या है?

  1. ‘सुखी दंपत्ति’

कहानी का व्यंग्य पक्ष समझाइए।

लेखक ने मध्यवर्गीय समाज की किन समस्याओं को उजागर किया है?

  1. ‘बड़े भाई साहब’

प्रेमचंद ने दोनों भाइयों के स्वभाव को किन बिंदुओं पर अलग दिखाया है?

  1. व्याकरण (हर साल पूछा जाता है)

समास: दो उदाहरण सहित

वाक्य रूपांतरण: सक्रिय–निष्क्रिय, सीधा–अप्रत्यक्ष

उपसर्ग–प्रत्यय

संधि भंग / संधि के प्रकार

मुहावरे / लोकोक्तियाँ

अशुद्ध वाक्य शुद्ध कीजिए

  1. लेखन कार्य (हर साल आने वाले प्रश्न)
  2. औपचारिक पत्र – प्रधानाचार्य / नगर निगम / अधिकारी को आवेदन
  3. अनौपचारिक पत्र – मित्र/भाई को सलाह, शुभकामना आदि
  4. सूचना लेखन – विद्यालय समारोह, खोया-पाया, प्रतियोगिता
  5. अनुच्छेद लेखन / निबंध –

पर्यावरण संरक्षण

डिजिटल शिक्षा

यातायात नियम

खेल और स्वास्थ्य

नशा मुक्ति

सोशल मीडिया के प्रभाव

अमावस्या पर चार ग्रहों का दुर्लभ योग — जानें सभी 12 राशियों का प्रभाव

ग्रहस्थिति
गुरु कर्क राशि, केतु सिंह राशि, शुक्र तुला राशि में हैं। सूर्य-बुध-मंगल वृश्चिक राशि में संचार कर रहे हैं और आज चंद्रमा भी दिनभर वृश्चिक में रहेंगे। इस प्रकार आज वृश्चिक में चार ग्रहों का अद्भुत योग बन रहा है। राहु कुंभ में और शनि मीन राशि से गोचर कर रहे हैं। आज स्नान-दान की अमावस्या का पावन दिन है।
ग्रहों की यह चाल जीवन के हर क्षेत्र—धन, प्रेम, व्यापार, शिक्षा, राजनीति एवं प्रशासन पर विशेष प्रभाव डालेगी।
🔯 आज का राशिफल – 20 नवंबर 2025

♈ मेष – Aries (अ, च, ल)
कार्य/व्यवसाय: आज परिस्थितियां अनुकूल नहीं। सावधानी रखें, बड़े निर्णय टालें।
शिक्षा: पढ़ाई में एकाग्रता कम रह सकती है।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा थोड़ी कमजोर।
राजनीति: विरोधियों के कारण दबाव रहेगा।
प्रशासनिक क्षेत्र: अधिकारी निर्णय लेते समय सतर्क रहें।
स्वास्थ्य: पेट/सिर संबंधी समस्या संभव।
आर्थिक स्थिति: सामान्य, खर्च नियंत्रित रखें।
प्रेम/संतान: मध्यम, संवाद बनाए रखें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 3
पूजा: सूर्य को जल अर्पित करें।
वृषभ – Taurus (ब, व, उ)
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में जल्दबाजी से बचें। व्यवसाय सामान्य गति से आगे बढ़ेगा।
शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए औसत दिन।
कला/संगीत: अच्छा प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।
राजनीति: विरोध कम होगा, पर तनाव संभव।
प्रशासन: कार्यस्थल पर दबाव बना रहेगा।
स्वास्थ्य: स्वयं व जीवनसाथी दोनों का ध्यान रखें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, पर निवेश न करें।
प्रेम/संतान: ठीक-ठाक।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 6
पूजा: पीली वस्तु का दान करें।

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मिथुन – Gemini (क, छ, घ)
कार्य/व्यवसाय: शत्रुओं पर विजय, व्यापार में बढ़ोतरी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा में लाभ।
कला/संगीत: नई पहचान मिलेगी।
राजनीति: सम्मान बढ़ेगा।
प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।
स्वास्थ्य: सामान्य, पर थकान रहेगी।
आर्थिक स्थिति: बेहतर।
प्रेम/संतान: शुभ, घर में प्रसन्नता।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 7
पूजा: काली माता को प्रणाम करें।
कर्क – Cancer (ह, ड)
कार्य/व्यवसाय: कारोबार स्थिर, नए कार्य टालें।
शिक्षा: छात्रों को ध्यान टिकाना होगा।
कला/संगीत: मनमुटाव के कारण रुकावटें।
राजनीति: विरोधी सक्रिय।
प्रशासन: निर्णय लेते समय संयम रखें।
स्वास्थ्य: बच्चों की सेहत चिंता देगी।
आर्थिक स्थिति: मध्यम।
प्रेम/संतान: विवाद से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 2
पूजा: लाल वस्तु साथ रखें।

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सिंह – Leo (म, ट, त)
कार्य/व्यवसाय: व्यापार अच्छा चलेगा।
शिक्षा: छात्रों को सफलता के योग।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा चरम पर।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा, पर घरेलू तनाव मन अस्थिर करेगा।
प्रशासन: पद-प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी।
स्वास्थ्य: सामान्य।
आर्थिक स्थिति: ठीक-ठाक।
प्रेम/संतान: शुभ।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 1
पूजा: पीली वस्तु पास रखें।
कन्या – Virgo (प, ठ, ण)
कार्य/व्यवसाय: उतार-चढ़ाव। सावधानी रखनी होगी।
शिक्षा: पढ़ाई का परिणाम अच्छा।
कला/संगीत: प्रदर्शन बेहतर, अवसर मिलेंगे।
राजनीति: थोड़ा दबावपूर्ण दिन।
प्रशासन: सतर्कता आवश्यक।
स्वास्थ्य: स्वयं और परिवार दोनों को ध्यान दें।
आर्थिक स्थिति: मध्यम।
प्रेम/संतान: अच्छा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 5
पूजा: लाल वस्तु का दान करें।
तुला – Libra (र, त)
कार्य/व्यवसाय: व्यापार अच्छा पर निवेश वर्जित।
शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए अनुकूल।
कला/संगीत: तरक्की के योग।
राजनीति: नई योजनाएं सफल।
प्रशासन: लाभकारी स्थितियां।
स्वास्थ्य: ठीक-ठाक।
आर्थिक स्थिति: धन हानि से सावधान।
प्रेम/संतान: अच्छा समय।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजा: लाल वस्तु का दान करें।

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वृश्चिक – Scorpio (न, य)
कार्य/व्यवसाय: व्यापार सामान्य।
शिक्षा: अच्छा प्रदर्शन।
कला/संगीत: ऊर्जा कम होने से काम प्रभावित।
राजनीति: औसत दिन।
प्रशासन: कार्यभार अधिक रहेगा।
स्वास्थ्य: थकान, कमजोरी।
आर्थिक स्थिति: मध्यम।
प्रेम/संतान: शुभ।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4
पूजा: पीली वस्तु पास रखें।
धनु – Sagittarius (ध, भ, फ)
कार्य/व्यवसाय: मध्यम, पार्टनरशिप में समस्या।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला/संगीत: प्रेरणा की कमी।
राजनीति: विरोधी सक्रिय।
प्रशासन: संयम रखें।
स्वास्थ्य: सिर दर्द, नेत्र पीड़ा।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेंगे।
प्रेम/संतान: मध्यम।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 8
पूजा: लाल वस्तु साथ रखें।
मकर – Capricorn (ख, ज)
कार्य/व्यवसाय: लाभ-हानि का उतार-चढ़ाव।
शिक्षा: छात्रों के लिए सामान्य।
कला/संगीत: नए अवसर।
राजनीति: भ्रम की स्थिति।
प्रशासन: यात्रा कष्टदायक हो सकती है।
स्वास्थ्य: मध्यम।
आर्थिक स्थिति: उतार-चढ़ाव भरी।
प्रेम/संतान: सामान्य।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 3
पूजा: लाल वस्तु का दान करें।
कुंभ – Aquarius (ग, स, श)
कार्य/व्यवसाय: व्यापार ठीक, कोर्ट-कचहरी से दूरी रखें।
शिक्षा: अच्छा दिन।
कला/संगीत: मान-सम्मान में वृद्धि।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा।
प्रशासन: कार्य सफलता देगा।
स्वास्थ्य: प्रभावित, सावधानी जरूरी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
प्रेम/संतान: शुभ।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 6
पूजा: हरी वस्तु रखें।
मीन – Pisces (द, च, थ)
कार्य/व्यवसाय: मध्यम। अपमान की स्थिति से बचें।
शिक्षा: संतोषजनक।
कला/संगीत: मन पर बोझ, ऊर्जा कमजोर।
राजनीति: यात्रा में बाधा।
प्रशासन: दबावपूर्ण दिन।
स्वास्थ्य: सामान्य।
आर्थिक स्थिति: मध्यम।
प्रेम/संतान: थोड़ा कमजोर।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 7
पूजा: शिवजी का जलाभिषेक करें।

SDM ने SIR फॉर्म में लापरवाही पर लगाई फटकार, BLO पर FIR के निर्देश

विकास विभाग के कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी सवाल

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सदर SDM शत्रुघ्न पाठक और एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान ने बुधवार को डारीडीहा बूथ पर SIR प्रपत्र कलेक्शन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं मिलीं, जिसके बाद SDM ने मौके पर मौजूद BLO उत्तम गिरी को कड़ी फटकार लगाई।
SDM ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लेखपाल को तुरंत तहरीर तैयार कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया।

निरीक्षण में भद्रेश्वरनाथ और डारीडीहा बूथों पर तैनात अन्य BLO की लापरवाही सामने आने पर एडीएम ने गहरी नाराजगी जताई।
SDM ने विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “विकास विभाग के कुछ लोग काम नहीं करते और मुफ्त का पैसा लेते हैं।”

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अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अभियान को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई होगी। अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

प्रशासन ने कहा है कि दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और अभियान की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।

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“किताबों का बोझ नहीं, बच्चों का मन समझिए — परीक्षा दबाव में खोते बचपन की सच्ची तस्वीर”

सोमनाथ मिश्र की रिपोर्ट

आज शिक्षा का लक्ष्य बच्चों को समझदार, संवेदनशील और सक्षम बनाना होना चाहिए, लेकिन मौजूदा परीक्षा व्यवस्था ने इस उद्देश्य को कहीं न कहीं धुंधला कर दिया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, उच्च अंक लाने का दबाव और हर विषय में ‘टॉप’ करने की होड़ बच्चों के मन पर अदृश्य बोझ बनकर लटक रही है। परिणामस्वरूप, बच्चा पढ़ाई से अधिक डर, तनाव और चिंता से जूझने लगता है।

स्कूल—कोचिंग—होमवर्क की तीनतरफ़ा दौड़ ने विद्यार्थियों के रोज़मर्रा के जीवन को मशीनों की तरह कर दिया है। सुबह की नींद त्याग कर क्लास, दिनभर पढ़ाई और रात में असाइनमेंट… इस दौड़ में उनका बचपन पीछे छूटता जा रहा है। खेल-कूद, रचनात्मक गतिविधियाँ और परिवार के साथ बिताया समय अब पिछली सीट पर बैठ गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या हम बच्चों को ‘शिक्षित’ बना रहे हैं या सिर्फ़ ‘प्रतियोगी’?

बढ़ती रिपोर्ट बताते हैं कि परीक्षा तनाव के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास में कमी, सामाजिक दूरी और कई बार अवसाद जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं। यह सिर्फ़ एक शैक्षणिक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट है, जिसे समय रहते समझना जरूरी है।

माता-पिता की उम्मीदें, जो कभी बच्चों के समर्थन का आधार बनती थीं, अब कई बार दबाव का कारण बन चुकी हैं। हर बच्चा अलग है, हर बच्चे की क्षमता अलग है—लेकिन यह सच्चाई अक्सर अंकतालिका के नीचे दब जाती है। बच्चों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करना ज़रूरी है, लेकिन “टॉप करना ही ज़िंदगी का लक्ष्य है” जैसी सोच उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ देती है।

दूसरी ओर, शिक्षा प्रणाली भी बदलाव की मांग कर रही है। परीक्षाएँ ज्ञान का मूल्यांकन करें, न कि बच्चों की योग्यता को सीमित करें। निरंतर आकलन, प्रैक्टिकल लर्निंग, स्किल-बेस्ड एजुकेशन और मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट सिस्टम अब समय की जरूरत है। कई देशों में यह मॉडल सफल भी रहा है और भारत के स्कूल भी धीरे-धीरे इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

सच्चाई यही है—अंक भविष्य तय नहीं करते, लेकिन स्वस्थ मन पूरा भविष्य बना सकता है।
इसलिए अब वक्त है कि स्कूल, माता-पिता और समाज मिलकर बच्चों के लिए तनाव-मुक्त, संवेदनशील और समर्थ शिक्षा माहौल तैयार करें, जहाँ सीखना बोझ नहीं बल्कि खुशी बने।

संस्कारों की विरासत को संभाले कौन? समाज के सामने बड़ा सवाल

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।संस्कार किसी भी समाज की पहचान होते हैं — वह धरोहर जिसमें हमारा अतीत भी बसा होता है और भविष्य का रास्ता भी छिपा होता है। लेकिन आज जब जीवन की रफ्तार बदल रही है, परिवार के ढाँचे में परिवर्तन आ रहा है और आधुनिकता हर कदम पर अपनी जगह बना रही है, ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा है— इन संस्कारों की विरासत को आखिर संभाले कौन?
आज का समाज दो स्पष्ट हिस्सों में बंटता जा रहा है—एक तरफ वह पीढ़ी है जिसने संस्कारों को जीवन का आधार माना, और दूसरी तरफ वह नई पीढ़ी है जिसे परंपराएं अक्सर बोझ और पुरातनता की तरह दिखने लगी हैं। यह विभाजन केवल विचारों का नहीं, बल्कि चरित्र, संबंधों और जिम्मेदारियों का भी है।
संयुक्त परिवार कभी संस्कारों की पाठशाला हुआ करते थे। दादी- नानी की कहानियां, बड़ों का आशीर्वाद, छोटी गलतियों पर सीख, और हर त्योहार का सामूहिक उत्साह… यही वह तंतु थे जिनसे संस्कृति बुनी जाती थी।
लेकिन बदलते समय में यह ढांचा सिकुड़ता चला गया।छोटे परिवारों में अब समय है, लेकिन संगति नहीं, साधन हैं, लेकिन संवाद नहीं। ऐसे में संस्कारों के हस्तांतरण की प्रक्रिया स्वतः कमजोर पड़ गई।
टेक्नोलॉजी ने दी सुविधा, लेकिन छीन लिया मानवीय स्पर्श,
मोबाइल,सोशल मीडिया और इंटरनेट ने ज्ञान के द्वार खोले, पर साथ ही मनुष्य से मनुष्य का संबंध भी कम कर दिया।बच्चे अब गुरु से नहीं, गूगल से सीखते हैं,अनुभव से नहीं, एल्गोरिदम से प्रभावित होते हैं।
यही कारण है कि मर्यादा, विनम्रता, बड़ा– छोटा, आदर–सम्मान जैसी मूलभूत शिक्षाएं डिजिटल चमक में धुंधली पड़ रही हैं।
विद्यालय शिक्षा में नैतिकता की कमी,
स्कूलों में विज्ञान,गणित, अंग्रेज़ी सब पढ़ाया जाता है,लेकिन नैतिकता, मूल्य शिक्षा और सांस्कृतिक बोध धीरे-धीरे पाठ्यक्रम से गायब हो गए। जब शिक्षा सिर्फ रोजगार का साधन बन जाए, तब चरित्र निर्माण पीछे छूट जाता है। और जब चरित्र कमज़ोर हो, तो समाज भी अनमना और दिशाहीन हो जाता है। बदलाव जरूरी है, पर जड़ काटकर आधुनिकता नहीं टिकती,आधुनिकता का स्वागत होना चाहिए, लेकिन उसके साथ संस्कारों की नींव भी सुरक्षित रहनी चाहिए।
जिस पेड़ की जड़ें मजबूत हों, वह आंधी में भी खड़ा रहता है समाज भी तभी स्थिर और सुरक्षित रहेगा जब उसकी जड़ें—यानी संस्कार, नैतिकता, सदाचार, सम्मान, सद्भाव—मजबूत बने रहें।तो आखिर विरासत को संभाले कौन परिवार को फिर से ‘पहली पाठशाला’ का दायित्व निभाना होगा माता- पिता को बच्चों को सुविधाएं ही नहीं, मूल्य भी देने होंगे।विद्यालय को किताबों के साथ जीवन—शिक्षा को फिर केंद्र में लाना होगा। समाज को आदर्शों, मर्यादाओं और आचरण के लिए स्वयं उदाहरण बनना होगा और नई पीढ़ी को समझना होगा कि तकनीक जीवन आसान करती है, पर संस्कार जीवन महान करते हैं।
अंत मे जब समाज अपने संस्कार खो देता है, तो उसकी प्रगति भी खोखली हो जाती है। आज जरूरत केवल सवाल पूछने की नहीं, बल्कि जवाब देने की है कि हम संस्कारों की इस विरासत को सिर्फ कहानी बनाकर छोड़ेंगे, या आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवंत और उपयोगी बनाए रखेंगे?यही प्रश्न आज के समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।

अमावस्या, अनुराधा नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, योग, यात्रा दिशा और दिन भर का ज्योतिषीय प्रभाव

20 नवंबर 2025 पंचांग

20 नवंबर 2025, गुरुवार का दिन पंचांग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है, जो दोपहर 12:17 PM तक रहेगी। इसके बाद माह के शुभारंभ की तिथि शुक्ल पक्ष प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी। चंद्रमा आज वृश्चिक राशि में संचार करेगा, जबकि सूर्य भी वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। इस कारण दिन भर में जल तत्व की प्रधानता, भावनात्मक संवेदनशीलता और मन में परिवर्तनशीलता बनी रह सकती है।

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धर्मशास्त्रों के अनुसार अमावस्या का दिन पितृ तर्पण, देवी–उपासना, दान-पुण्य और गौरी तपो व्रत के पालन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
आज का विस्तृत पंचांग – 20 नवंबर 2025 (गुरुवार)
विक्रम संवत: 2082 कालयुक्त
शक संवत: 1947 विश्वावसु संवत्सर
चन्द्र मास (अमांत): कार्तिक
चन्द्र मास (पूर्णिमांत): मार्गशीर्ष
ऋतु: द्रिक – हेमंत | वैदिक – शरद
अयन: दक्षिणायन
तिथि,अमावस्या तिथि
19 नवंबर 09:43 AM से 20 नवंबर 12:17 PM तक
शुक्ल प्रतिपदा
20 नवंबर 12:17 PM से 21 नवंबर 02:47 PM तक
नक्षत्र,विशाखा नक्षत्र
19 नवंबर 07:59 AM – 20 नवंबर 10:58 AM तक
अनुराधा नक्षत्र
20 नवंबर 10:58 AM – 21 नवंबर 01:55 PM तक

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➡ अनुराधा गुरुवार को पड़ने से सर्वार्थ सिद्धि योग बनता है।
करण

  1. नाग – 19 नवंबर 11:00 PM – 20 नवंबर 12:17 PM
  2. किस्तुघ्न – 20 नवंबर 12:17 PM – 21 नवंबर 01:33 AM
  3. बव – 21 नवंबर 01:33 AM – 02:47 PM
    योग
  4. शोभन योग – 19 नवंबर 09:00 AM – 20 नवंबर 09:52 AM
  5. अतिगंड योग – 20 नवंबर 09:52 AM – 21 नवंबर 10:43 AM
    सूर्य और चंद्र का समय
    सूर्योदय: 6:48 AM
    सूर्यास्त: 5:36 PM
    चंद्रोदय: 6:40 AM
    चन्द्रास्त: 5:31 PM
    आज का अशुभ काल
  6. राहुकाल – 1:33 PM – 2:54 PM
  7. यमगण्ड – 6:48 AM – 8:09 AM
  8. कुलिक – 9:30 AM – 10:51 AM
  9. दुर्मुहूर्त – 10:24 AM – 11:07 AM, 02:43 PM – 03:27 PM
  10. वर्ज्य – 03:28 PM – 05:16 PM
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  12. इन समयों में कोई नया कार्य या यात्रा प्रारंभ करने से बचें।
    आज का शुभ काल
  13. अभिजीत मुहूर्त – 11:50 AM – 12:34 PM
  14. अमृतकाल – 02:14 AM – 04:02 AM
  15. ब्रह्म मुहूर्त – 05:12 AM – 06:00 AM
    आनन्दादि योग
  16. वर्धमान – 10:58 AM तक
  17. आनन्द – उसके बाद
    सर्वार्थ सिद्धि योग
    20 नवंबर 10:58 AM – 21 नवंबर 01:55 PM (अनुराधा + गुरुवार)
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  19. यह योग व्यापार, कार्यारंभ, निवेश और यात्रा के लिए अत्यंत शुभ है।
    चंद्रबल (21 नवंबर 06:48 AM तक)
    जिन राशियों के लिए आज चंद्रबल अच्छा रहेगा।वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर और कुंभ
    यात्रा दिशा क्या रखें?
    शुभ दिशा – पश्चिम
    आज पश्चिम दिशा में यात्रा करना शुभ फल देने वाला है। कार्यसिद्धि, सौभाग्य एवं सफलता प्राप्त होती है।
    अशुभ दिशा – दक्षिण
    दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें। यदि जाना अत्यंत आवश्यक हो—
    ✔ पहले दही–शक्कर या गुड़ खाकर निकलें
    ✔ या घर से निकलते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें
    आज घर से निकलते समय क्या खाकर जाएं?
    यात्रा, कार्य और शुभ परिणामों हेतु—
  20. दही + चीनी
    या
  21. गुड़ + पानी
    या
  22. तुलसी का पत्ता + जल
    खाकर निकलने से दिनभर सफलता और सकारात्मकता बनी रहती है।
    आज का शुभ मंत्र (सभी राशियों के लिए)
    “ॐ नमः शिवाय”
    108 बार या कम से कम 11 बार जप करें।
    अमावस्या पर यह मंत्र नकारात्मकता को दूर कर मन को शांति प्रदान करता है।
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  24. दिन का चौघड़िया (दिवस) – 20 नवंबर
    शुभ: 06:48 – 08:09 AM
    रोग: 08:09 – 09:30 AM
    उद्वेग: 09:30 – 10:51 AM
    चर: 10:51 – 12:12 PM
    लाभ: 12:12 – 01:33 PM
    अमृत: 01:33 – 02:54 PM
    काल: 02:54 – 04:15 PM
    शुभ: 04:15 – 05:36 PM
    रात्रि का चौघड़िया
    (रात 6 बजे से गणना अनुसार)
    उद्वेग
    चर
    लाभ
    अमृत
    काल
    शुभ
    रोग
    उद्वेग
    आज के पर्व और व्रत
  25. गौरी तपो व्रत
  26. अमावस्या
    ➡ पितरों की शांति, देवी उपासना और तर्पण का विशेष महत्व।

जब पृथ्वी हुई व्याकुल: विष्णु भगवान की दिव्य प्रतिज्ञा और ब्रह्मा का निवेदन

🕉️ जब धर्म डगमगाने लगे: देवताओं की पीड़ा और पृथ्वी की पुकार
समय का पहिया युगों की गति से घूमता रहा, परंतु एक काल ऐसा आया जब असुरों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया।
पृथ्वी देवी (भूमि) पीड़ा से व्याकुल हो उठीं।

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असुरी शक्तियों के अत्याचार से –
वन नष्ट हो रहे थे।नदियाँ रक्तरंजित हो रही थीं।
देवता तक अपनी शक्ति खोते प्रतीत हो रहे थे।
तभी पृथ्वी देवी ब्रह्मा जी के पास पहुँचकर करुण स्वर में बोलीं—
“प्रजापति! मेरे गर्भ में पाप और अत्याचारों का बोझ बढ़ता जा रहा है। मेरी संतुलित गति बाधित हो रही है। कृपा कर कोई मार्ग दिखाएँ।”
ब्रह्मा जी चिंतित हुए। वे स्वयं प्रजापति होकर भी समाधान ढूंढने में असमर्थ थे।

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तब एक ही मार्ग था—क्षीरसागर की ओर प्रस्थान, जहाँ शेषनाग के शैय्या पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में स्थित थे।
🕉️ क्षीरसागर का दिव्य दर्शन और ब्रह्मा का निवेदन।
ब्रह्मा, देवताओं और पृथ्वी देवी के साथ क्षीरसागर पहुँचे।
सागर लहरों में दिव्यता छलक रही थी।
श्वेत जल की झिलमिलाहट मानो सृष्टि की हर धड़कन को व्यक्त कर रही थी।

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देवताओं ने स्तुति की—
“नारायण! जगतपालक! अब आपकी ही शरण है। धर्म रक्षण के बिना लोकों की व्यथा समाप्त नहीं होगी।”
इसके बाद क्षीरसागर में तरंगों के मध्य एक दिव्य प्रकाश उदित हुआ।
भगवान विष्णु प्रकट हुए।
उनके चार भुजाओं से प्रकट तेज ने देवताओं के मन को शांत कर दिया।

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विष्णु भगवान मुस्कुराए और कहा—
“देवताओं, घबराओ नहीं। सृष्टि जब-जब असंतुलित होती है, मैं अवतार लेकर संतुलन स्थापित करता हूँ। यह मेरा संकल्प है, सनातन प्रतिज्ञा है।”

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🕉️ अवतार का संकेत: त्रेतायुग का द्वार खुला
पृथ्वी देवी ने अपने कष्टों का वर्णन किया।
विष्णु भगवान ने ध्यानपूर्वक सुना और बोले—
“असुरों का अभ्युदय काल समाप्त होने वाला है। अधर्म पर प्रहार करने के लिए मैं स्वयं मनुष्य रूप लेकर पृथ्वी पर अवतरित होऊँगा। देवता अपने अंश अवतार लेकर मेरा सहयोग करेंगे।”
देवताओं को भविष्य के संकेत मिल चुके थे, परन्तु यह स्पष्ट न था कि भगवान किस रूप में अवतार लेंगे।
क्षितिज पर नई आशा जग चुकी थी।

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यही वह दिव्य क्षण था जब त्रेतायुग में भगवान विष्णु के राम अवतार की लीला का बीज अंकुरित हुआ।
कथा का यह प्रसंग केवल अवतार का संकेत नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि—
सृष्टि में अन्याय कितना भी बढ़ जाए अधर्म कितना भी प्रबल हो जाए।परंतु भगवान का संरक्षण निश्चय ही मानवता को प्रकाश की ओर ले जाता है
🕉️ देवताओं का आश्वासन और ब्रह्मांड में नई ऊर्जा का संचार
विष्णु भगवान की वाणी सुनकर देवताओं के मन से बोझ उतर गया।
पृथ्वी देवी प्रसन्न हुईं।
क्षीरसागर की लहरों में मानो नए युग के आगमन का संगीत बह रहा था।
देवताओं ने प्रणाम कर कहा—
“नारायण! आपके अवतरण मात्र से अनिष्ट शक्तियाँ कंपकंपाने लगती हैं। हम आपके मार्गदर्शन में धर्म के पथ पर अग्रसर रहेंगे।”
उधर, असुरों के महलों तक यह आभास पहुँच चुका था कि देवताओं को कोई अदृश्य शक्ति प्राप्त हो रही है।
लेकिन यह दिव्य योजना ऐसी थी जिसे कोई असुर जान भी ले, तो रोक नहीं सकता था।
🕉️ कथा का संदेश: हर संकट का अंत होता है
यह प्रसंग हमें यह सीख देता है कि—
कठिन समय में भी आशा का दीप बुझने नहीं देना चाहिए,सृष्टि में संतुलन सदैव पुनः स्थापित होता है।जब अन्याय और अत्याचार चरम पर पहुँच जाते हैं, तब ईश्वरीय शक्ति स्वयं मार्ग प्रशस्त करती है।
विष्णु भगवान की यह शास्त्रोक्त कथा केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर धैर्य, विश्वास और कर्म का पथ दिखाती है।

सर्दियों में गीजर का इस्तेमाल बढ़ता खतरा! इन बातों का रखें खास ध्यान, रहें पूरी तरह सुरक्षित

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सर्दियों में लगभग हर घर में गीजर का इस्तेमाल बढ़ जाता है, लेकिन इसी दौरान गीजर से जुड़े हादसों में भी तेजी आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गीजर से होने वाली 70% दुर्घटनाएं गलत इस्तेमाल, खराब इंस्टॉलेशन और लापरवाही की वजह से होती हैं। मामूली गलतियां कभी-कभी बड़े हादसों में बदल सकती हैं। ऐसे में गीजर उपयोग करते समय कुछ सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

नहाते समय गीजर ऑन रखना बेहद खतरनाक

बहुत से लोग नहाते समय गीजर को चालू रखते हैं, जबकि यह सबसे गंभीर गलती है।
इससे—

बिजली के उतार-चढ़ाव पर करंट लगने का खतरा, ओवरहीटिंग से पाइप फटने का डर, और टैंक प्रेशर बढ़ने पर गीजर ब्लास्ट तक हो सकता है।सुरक्षा के लिए नहाने से पहले गीजर बंद कर दें।

सस्ते गीजर में बढ़ा खतरा

कम कीमत के चक्कर में कई लोग ऐसे गीजर खरीद लेते हैं, जिनमें जरूरी सुरक्षा फीचर्स नहीं होते।
इनमें—

• प्रेशर रिलीज वाल्व ठीक से काम नहीं करता,

• थर्मोस्टैट फेल हो सकता है,

• हीटिंग एलिमेंट जल्दी खराब होता है।

हमेशा विश्वसनीय ब्रांड और ISI मार्क वाला गीजर ही चुनें।

45–50°C ही रखें तापमान

कई लोग गीजर का तापमान 70–80°C तक बढ़ा देते हैं, जिसकी वजह से अचानक नल से बेहद गर्म पानी आ सकता है और जलने की दुर्घटना हो सकती है।
सुरक्षा के लिए गीजर का तापमान 45–50°C के बीच रखें।

केवल प्रशिक्षित टेक्नीशियन से करवाएं इंस्टॉलेशन

गीजर पानी भरने पर 25–30 किलो तक भारी हो जाता है।
गलत इंस्टॉलेशन, कमजोर दीवार या खराब फिटिंग से गीजर दीवार से गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।
इसलिए इंस्टॉलेशन हमेशा ट्रेंड टेक्नीशियन से ही करवाएं।

समय-समय पर सर्विसिंग बेहद जरूरी

गीजर के टैंक में महीनों के इस्तेमाल से मिनरल डिपॉजिट जमा हो जाते हैं, जो—

• ओवरहीटिंग का कारण बनते हैं

• और टैंक की लाइफ कम करते हैं।

सर्दियों की शुरुआत में गीजर की कम से कम एक बार सर्विसिंग जरूर कराएं।

वेंटिलेशन की कमी और गैस गीजर का खतरा

अगर किसी दिन अचानक गीजर से धुआं, जलने की गंध या पानी टपकने लगे तो तुरंत—

  1. मुख्य पावर स्विच बंद करें
  2. पानी की सप्लाई रोकें
  3. टेक्नीशियन को बुलाएं

विशेष रूप से गैस गीजर में वेंटिलेशन की कमी कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी जहरीली गैस का खतरा बढ़ाती है, जो जानलेवा हो सकती है।

ट्रंप ने सऊदी को ‘मेजर नॉन-NATO एलाय’ घोषित किया, ऐतिहासिक रक्षा समझौते और 1 ट्रिलियन डॉलर निवेश का बड़ा ऐलान

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यूएस–सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को आधिकारिक रूप से ‘मेजर नॉन-NATO एलाय’ घोषित कर दिया। ट्रंप ने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे, गहरी रणनीतिक साझेदारी और बदलते वैश्विक समीकरणों का प्रतीक बताया।

ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर

ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका और सऊदी अरब ने एक महत्वपूर्ण सामरिक रक्षा समझौता साइन किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी को—

लगभग 300 उन्नत अमेरिकी टैंक, आधुनिक फाइटर जेट, और हाई-टेक सैन्य उपकरण बेचेगा।

ट्रंप ने कहा, “अमेरिका दुनिया के सबसे बेहतरीन सैन्य उपकरण बनाता है और सऊदी अरब अब बड़ी मात्रा में इन्हें खरीद रहा है। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा संतुलन तय करेगी।”

1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश, 270 अरब डॉलर के नए सौदे

फोरम में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका में 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान कर बड़ा आर्थिक संदेश दिया। इसके अलावा—

270 अरब डॉलर के व्यावसायिक समझौते विभिन्न अमेरिकी और सऊदी कंपनियों के बीच साइन हुए।

ट्रंप ने कहा कि इस निवेश से हजारों नई अमेरिकी नौकरियां पैदा होंगी।

AI, परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में भी साझेदारी

फोरम में दोनों देशों ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत किया:

• सिविल न्यूक्लियर एनर्जी

• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

• क्रिटिकल मिनरल्स

• और उन्नत टेक्नोलॉजी

ट्रंप ने कहा कि ये समझौते अमेरिका–सऊदी साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे और वैश्विक तकनीकी व रक्षा शक्ति संतुलन को नया आकार देंगे।

ईरान पर बड़ा बयान: “काला बादल हट गया”

ट्रंप ने ईरान की परमाणु क्षमता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा मध्य पूर्व पर “काला बादल” थी, जिसे अमेरिका ने तेजी से खत्म किया।
उन्होंने दावा किया कि ईरान अब खुद समझौते के लिए तैयार है।

सूडान में अमेरिकी हस्तक्षेप की तैयारी

सऊदी क्राउन प्रिंस की अपील के बाद ट्रंप ने सूडान में चल रहे गृहयुद्ध पर सीधा हस्तक्षेप करने के संकेत दिए।
उन्होंने कहा, “यह मुद्दा पहले मेरे एजेंडा में नहीं था, लेकिन क्राउन प्रिंस की मांग पर मैं सूडान में शांति के लिए मजबूत कदम उठाने के लिए तैयार हूं।”

सूडान: दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट

• 40,000 से अधिक मौतें

• 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित

• RSF और सूडानी सेना के बीच हिंसक संघर्ष

• एल-फशर में RSF का कब्जा और बढ़ती हत्याएं

• 90,000 से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन

संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बताया है।

रूस से कच्चे तेल के आयात में बड़ी कमी; क्या भारत से 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाएगा अमेरिका?

भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में दो-तिहाई से अधिक कटौती के बाद अब अमेरिका पर दबाव बढ़ गया है कि वह भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ शुल्क को वापस ले। इस संबंध में ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने एक अहम बयान जारी करते हुए कहा है कि अब इस अतिरिक्त शुल्क का कोई औचित्य नहीं बचता।

GTRI ने क्या कहा?

GTRI के अनुसार, भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी कमी की है। ऐसे में अमेरिका द्वारा लगाया गया अतिरिक्त शुल्क न केवल अनुचित है बल्कि यह दोनों देशों के बीच संभावित ट्रेड डील को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
संस्थान ने अमेरिकी प्रशासन, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, से बिना किसी देरी के इस 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की अपील की है।

टैरिफ क्यों लगाया गया था?

अमेरिका ने यह शुल्क इसलिए लगाया था क्योंकि उसके अनुसार भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर वैश्विक बाजार में अमेरिकी सप्लाई को प्रभावित कर रहा था।
हालांकि ट्रंप पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय कमी की है।

अतिरिक्त शुल्क हटाने से क्या होगा लाभ?

GTRI का मानना है कि समय पर शुल्क हटने से—

  1. अमेरिका की प्रतिबद्धता मजबूत होगी
  2. भारत-अमेरिका ट्रेड संबंधों में भरोसा बढ़ेगा
  3. चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की प्रतिस्पर्धा में समानता आएगी
  4. भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी

अमेरिका से आयात में बढ़ोतरी

सितंबर के बाद से अमेरिका से भारत का कच्चा तेल आयात 66.9% बढ़कर 5.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अमेरिका को यह भी चिंता थी कि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी सप्लाई शृंखला को प्रभावित कर रहा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े इस चिंता को कम करते हैं।

GTRI की सिफारिशों के बाद अब नज़रें अमेरिकी प्रशासन पर हैं कि क्या वह भारत पर लगे अतिरिक्त टैरिफ को हटाकर दोनों देशों के बीच ट्रेड संबंधों को और मजबूत करेगा।

ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव का ओएसआर पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने पर हुआ विस्तृत मार्गदर्शन

बहराइच(राष्ट्र की परम्परा)l पंचायत राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय (OSR) विकसित करने के उद्देश्य से ग्राम प्रधानों एवं पंचायत सचिवों का दो दिवसीय प्रशिक्षण होटल शेहरान, निकट सुमैया माल, बहराइच में सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण का शुभारंभ जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्रभान सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ फैकल्टी, डीपीआरसी भिनगा-श्रावस्ती बृजेश कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागियों को आय के विभिन्न स्रोतों की जानकारी देते हुए कहा कि 1500 से कम आबादी वाली ग्राम पंचायत जितनी स्वयं की आय अर्जित करेगी, उसका पाँच गुना अनुदान सरकार प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सरकार परिवार की फैमिली आईडी बनाने पर जोर दे रही है, जिससे योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक आसानी से पहुँच सके। यह 12 अंकों की डिजिटल आईडी होगी, जिसमें पूरे परिवार का डेटा शामिल रहेगा, जिससे डुप्लीकेसी और धोखाधड़ी रुक सकेगी।

मास्टर ट्रेनर सतीश कुमार बाजपेई ने ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पंचायतें खाली पड़ी भूमि पर नर्सरी स्थापित कर, तालाबों का पट्टा देकर, तालाब किनारे सामुदायिक गतिविधियाँ संचालित कर, गौशाला से प्राप्त गोबर से जैविक खाद तैयार कर तथा पंचायत में सीएससी/आधार सेवा केंद्र की सुविधा उपलब्ध कराकर आय अर्जित कर सकती हैं। पंचायत क्षेत्र में दुकानों की स्थापना भी आय का अच्छा स्रोत बन सकती है।

मास्टर ट्रेनर आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पंचायत में कर एवं गैर-कर लागू करने से पहले आमजन को जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंचायत को परिवारों की आर्थिक स्थिति के आधार पर ही कर निर्धारण करना चाहिए। सेवा शुल्क लेते समय पारदर्शिता बनाए रखना तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पंचायत भवनों पर संचालित सीएससी केंद्र भी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की समुचित व्यवस्था इंटको कंपनी द्वारा की गई। कंपनी के जिला समन्वयक पंकज मौर्या सहित अन्य प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे।

मोहन छपरा निवासी दो सगे भाइयों की ट्रक की चपेट में आने से मौत

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)lबहर थाना क्षेत्र के मोहन छपरा शिवरामपुर निवासी दो सगे भाइयों की बक्सर से वापस लौटते समय भरौली के पास ट्रक की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। बुधवार की सुबह कृष्ण यादव (23) और अंकित यादव (18) पुत्र गोधन यादव किसी कार्य से बक्सर गए थे। वापस घर लौटते समय भरौली के निकट तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही राहगीरों की मदद से दोनों को जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कृष्ण यादव अपने माता-पिता के साथ पशुपालन और खेती में सहयोग करते थे। उनका विवाह वर्ष 2022 में हुआ था और उनकी पत्नी घर-परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाती है। वहीं छोटा भाई अंकित इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तैयारी कर रहा था। उसकी शादी अभी नहीं हुई थी। दुर्घटना की खबर मिलते ही पिता गोधन यादव अस्पताल पहुंचे, जबकि गांव स्थित घर में कोहराम मच गया। मां, पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर की कुआरी बहन का भी रो-रोकर स्थिति खराब है। दोनों युवकों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।