Tuesday, June 30, 2026
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विशेष पुनरीक्षण अभियान को मिली रफ्तार, 16 बूथों के लिए मतदाता सहायता केंद्र का उद्घाटन

सिकन्दरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को गति प्रदान करने के लिए मंगलवार को नगर पंचायत सिकन्दरपुर के सहयोग से नगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 16 मतदान बूथों के लिए विशेष मतदाता सहायता केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस सहायता केंद्र का उद्घाटन उपजिलाधिकारी सिकन्दरपुर सुनील कुमार ने मंगलवार को टाउन प्राथमिक विद्यालय के सामने स्थित मैदान में विधिवत रूप से किया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम छूटने न पाए, इसके लिए प्रशासन पूरी सजगता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं आगे आकर अपने गणना प्रपत्र समय से भरकर जमा करें, ताकि उनका त्वरित और सटीक डिजिटाइजेशन किया जा सके।
मतदाता सहायता केंद्र पर बड़ी संख्या में नागरिक अपने साथ गणना फॉर्म लेकर पहुंचे और अधिकारियों के मार्गदर्शन में फार्म जमा किए। इस केंद्र पर नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम संशोधन, पता परिवर्तन तथा त्रुटि सुधार से संबंधित कार्यों को सरल बनाया गया है, जिससे आम जनता को अनावश्यक भटकाव से राहत मिल सके कार्यक्रम में अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत सिकन्दरपुर मनोज पांडेय, खंड शिक्षा अधिकारी नवानगर पंकज सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी मायाशंकर, क्षेत्र के सभी सुपरवाइजर, बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी अधिकारियों ने अभियान को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। नगर क्षेत्र के नागरिकों में इस पहल को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने प्रशासन की इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सहायता केंद्र खुलने से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान हो गई है।
प्रशासन ने नागरिकों से पुनः अपील की है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपने प्रपत्र जमा करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

ज्योति कलश यात्रा का दीप यज्ञ और पूजन के साथ जिले में स्वागत

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर के गांधी आश्रम चौक पर शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में निकली ज्योति कलश यात्रा का दीप यज्ञ और पूजन अर्चन के साथ नगर में स्वागत किया गया।
शिक्षाविद् डा. सुधांशु अणुनाभ मिश्र और प्रधानमंत्री के मन की बात के जिला संयोजक गौरव निषाद की अगुआई में नगरवासियों ने स्वागत किया।
ज्ञात हो कि शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने वर्ष 1926 में अखंड दीप प्रज्ज्वलित कर अपनी साधना आरंभ की थी। उनकी प्रेरणा से देशभर में 4000 से अधिक गायत्री शक्तिपीठ स्थापित हुए हैं और 110 देशों में साधकों को प्रेरित किया जा रहा है। यात्रा के साथ चल रहे धर्मेन्द्र गोंड ने बताया कि वर्ष 2026 में गुरुदेव की 100 वर्षों की साधना और माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी समारोह हरिद्वार में मनाया जाएगा।
इस दौरान भाजपा नेता गुड्डू वर्मा, मनीष कन्नौजिया, विनय, रवि कुमार सहित अनेक लोगो ने पूजन-अर्चन कर कलश यात्रा का स्वागत किया।

बहन की शादी में आई देवरिया की नवविवाहिता का हत्यारा गिरफ्तार

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
झंगहा थाना क्षेत्र के जंगलरसुलपुर नंबर दो, लक्ष्मीपुर गांव में चचेरी बहन की शादी में आई नवविवाहिता शिवानी की सनसनीखेज हत्या का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी विनय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वारदात के बाद आरोपी वाराणसी भाग गया था, जहां से उसे दबिश देकर पकड़ा गया।
देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के अवस्थी गांव निवासी शिवानी तीन दिन पहले ही मायके आई थी। रविवार देर रात जयमाल समारोह के बाद वह घर लौट आई थी। जब उसकी मां नोहरी देवी देर रात कार्यक्रम से वापस पहुंचीं, तो शिवानी घर पर नहीं मिली। बड़ी बेटी से जानकारी लेने के बाद घर के आसपास खोजबीन शुरू की गई।
तलाश के दौरान घर के पास बने टॉयलेट के नीचे एक हाथ दिखाई दिया। दरवाजा खोला गया तो अंदर शिवानी का खून से लथपथ शव पड़ा मिला। उसका गला धारदार हथियार से बेरहमी से रेत दिया गया था। भयावह दृश्य देखकर मां चीख पड़ीं और गांव में अफरा-तफरी मच गई।

डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम जुटाए अहम साक्ष्य

सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को बुलाकर मौके की बारीकी से जांच कराई। खोजी कुत्ता खून के धब्बे सूंघते हुए मृतका के घर के पीछे की गली तक गया, जहां आरोपी विनय का घर स्थित बताया गया है। फोरेंसिक टीम ने खून, मिट्टी, फिंगरप्रिंट सहित कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए हैं।

कॉल डिटेल और साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस

शिवानी की मां ने पहले अज्ञात के खिलाफ हत्या की तहरीर दी थी। पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ, कॉल डिटेल और जुटाए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई। इसके बाद आरोपी विनय के वाराणसी भागने की जानकारी मिली और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस लाइन वाइट सभागार में मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक उत्तरी ज्ञानेंद्र ने बताया कि मृतका शिवानी अभियुक्त विनय पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी कारण विनय ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। वारदात के खुलासे के बाद गांव में दहशत और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। पुलिस मामले की आगे की कार्रवाई में जुटी है।

दोहरे हत्या कांड का दोषी कर रहा सरकारी नौकरी! शिकायत के बाद खुला बड़ा प्रशासनिक लापरवाही का मामला

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिला पंचायत राज विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही का ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोहरे हत्या कांड का आजीवन सजायाफ्ता एक आरोपी पिछले कई वर्षों से विभाग में सफाईकर्मी के पद पर नौकरी कर रहा है, और विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं थी। मामला तब प्रकाश में आया जब ग्राम पंचायत ठाकुरदेवा निवासी अवधबिहारी पांडेय ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से जिलाधिकारी को शिकायत भेजी।

थाना सुरौली क्षेत्र के रहने वाले रामप्रभाव उर्फ चिघारू यादव दोहरे हत्या कांड के मुख्य अभियुक्त रहे हैं। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद उन्होंने कथित रूप से दस्तावेजों और साक्ष्यों को छिपाकर वर्ष 2008–09 में सफाईकर्मी की सरकारी नौकरी हासिल कर ली। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पर हत्या, हत्या का प्रयास, गुंडा एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस रिकॉर्ड में वह हिस्ट्रीशीटर भी घोषित किया जा चुका है।

शिकायतकर्ता अवधबिहारी पांडेय का आरोप है कि प्रशासन की गंभीर लापरवाही के कारण सजायाफ्ता व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिल गई, जबकि योग्य और जरूरतमंद युवा बेरोज़गार घूमने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की है कि फर्जी तरीके से प्राप्त नौकरी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और आरोपी से अब तक का वेतन भू-राजस्व की तरह वसूल किया जाए।

मामले में सरकार से कार्रवाई की मांग

पांडेय ने प्रदेश सरकार को भेजे पत्र में लिखा है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विफलता का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने अनुरोध किया है कि जिस प्रकार अवैध संपत्तियों पर बुलडोज़र चल रहा है, उसी तरह इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर विभागीय जांच, दोषी सफाईकर्मी की तत्काल बर्खास्तगी और शासन को धोखा देने के अपराध में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की है।

अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए आख्या में दावा किया गया कि शिकायतकर्ता से दूरभाष पर वार्ता हुई, जबकि पांडेय ने इसे पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि उनसे किसी अधिकारी ने कोई संपर्क नहीं किया, जिससे शक और गहरा हो गया है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर हिस्ट्रीशीटर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि एक हत्या का दोषी सरकारी सिस्टम में नौकरी पा सकता है, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
इस मामले में जानकारी करने के लिय जिलापंचायत राज अधिकारी से 9415284971 पर फोन किया गया तो फोन नहीं उठा।

नारी शक्ति का सम्मान: अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस का संकल्प

पुनीत मिश्र


अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस केवल एक स्मरण-दिवस नहीं, बल्कि वह चेतना है जो हमें यह सोचने पर विवश करती है कि विकसित कहलाने वाला समाज अभी भी महिलाओं के प्रति हिंसा, अन्याय और असमानता से पूर्णतः मुक्त क्यों नहीं हो पाया। यह दिन हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि हम किस प्रकार एक ऐसी सामाजिक संरचना तैयार कर सकते हैं जहाँ किसी भी महिला को भय, अपमान या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
भारतीय संस्कृति का मूलाधार नारी-सम्मान रहा है। इसी धरती पर शक्ति की उपासना दुर्गा के रूप में, ज्ञान की सरस्वती के रूप में और समृद्धि की लक्ष्मी के रूप में की जाती है। यह तथ्य हमारे समाज की उस आध्यात्मिक दृष्टि को दर्शाता है जिसमें नारी केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि सृजन, ऊर्जा और प्रतिभा की अखंड धारा के रूप में देखी जाती है।
लेकिन विडंबना यह है कि पूजनीय नारी का सम्मान वास्तविक जीवन में हमेशा सुरक्षित नहीं दिखता। इस विरोधाभास को समाप्त करना आज की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता है।
महिला हिंसा केवल शारीरिक अत्याचार तक सीमित नहीं है; यह मानसिक, आर्थिक, ऑनलाइन उत्पीड़न, कार्यस्थल पर भेदभाव और सामाजिक उपेक्षा जैसी अनेक रूपों में विद्यमान है। ऐसे में समाज के हर वर्ग, परिवार, शैक्षणिक संस्थान, मीडिया, प्रशासन और न्याय प्रणाली पर यह जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा, सम्मान और समान अवसरों की गारंटी सुनिश्चित करें।
इस दिवस का सबसे बड़ा संदेश यही है कि हिंसा-मुक्त समाज केवल कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना से बनता है।
हर पुरुष का संवेदनशील दृष्टिकोण, हर महिला की आत्मनिर्भरता, हर परिवार में मूल्य-आधारित संस्कार, और हर नागरिक की जागरूकता मिलकर ही वह वातावरण तैयार कर सकते हैं जहाँ नारी का अस्तित्व सुरक्षित हो, उसका सम्मान सुनिश्चित हो और उसका व्यक्तित्व उन्मुक्त हो सके।
आइए, संकल्प लें कि
हम नारी के किसी भी स्वरूप पर हिंसा, अपमान या असमानता को स्वीकार नहीं करेंगे।
हम हर उस आवाज़ के साथ खड़े होंगे जो न्याय की अपेक्षा करती है।
हम ऐसी संस्कृति स्थापित करेंगे जिसमें नारी शक्ति सिर्फ पूजनीय ही नहीं, बल्कि अधिकारों से परिपूर्ण और स्वतंत्र रूप से समर्थ हो।
एक संवेदनशील, समान और सुरक्षित समाज, यही इस दिवस का वास्तविक उद्देश्य है और यही हमारा सामूहिक संकल्प होना चाहिए।

वो दिन, जब देश ने खोए अपने कई रत्न

25 नवंबर: इतिहास में खोए हुए सितारों की अमिट विरासत

25 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में उन महान विभूतियों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। राजनीति, कला, संगीत, नृत्य और सैन्य सेवा — हर क्षेत्र से जुड़ी ये हस्तियाँ आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं। आइए, इस तिथि पर दिवंगत हुए महापुरुषों को संक्षेप में नमन करें।

  1. अहमद पटेल (2020)
    गुजरात के भरूच जिले के पिरामन गाँव में जन्मे अहमद पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के रणनीतिक मस्तिष्क माने जाते थे। अपनी सरलता, शांत स्वभाव और राजनीतिक कौशल से उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत किया। संसद में तीन दशक से अधिक सक्रिय रहकर उन्होंने राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  2. सितारा देवी (2014)
    कोलकाता में जन्मीं सितारा देवी कथक नृत्य की जीवित ‘देवी’ कही जाती थीं। उन्होंने परंपरागत कथक में नवता जोड़कर भारतीय नृत्य को वैश्विक पहचान दिलाई। कला के प्रति समर्पण, तेज़ लय और मनमोहक भाव-भंगिमाएँ उन्हें विश्वभर के दर्शकों के बीच विशेष बनाती थीं।
    • आर. वी. एस. पेरी शास्त्री (1990)
      तमिलनाडु में जन्मे पेरी शास्त्री भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे और चुनाव प्रणाली को पारदर्शी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। प्रशासन में उनकी दृढ़ता, ईमानदारी और सुधारवादी सोच ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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  3. चन्दूलाल शाह (1975)
    गुजरात के उंबरगाँव में जन्मे चन्दूलाल शाह हिंदी सिनेमा के अग्रणी निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक थे। प्राचीन विषयों पर आधारित उनकी फ़िल्में भारतीय फ़िल्म इतिहास की क्लासिक धरोहर हैं। उन्होंने स्टूडियो सिस्टम को मजबूत कर उद्योग को नई दिशा प्रदान की।
  4. यू. थांट (1974)
    बर्मा (अब म्यांमार) के पांतानाव में जन्मे यू. थांट संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासचिव रहे। शिक्षा, कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति उनके प्रयासों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दी। शांति स्थापना के लिए उनका योगदान विश्व इतिहास में दर्ज है।
  5. आर. सी. बोराल (1981)
    कोलकाता में जन्मे आर. सी. बोराल भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर के अनमोल संगीतकार रहे। उन्होंने पौराणिक और सामाजिक फिल्मों में संगीत के स्वरूप को नई ऊँचाइयाँ दीं। उनकी धुनों ने भारतीय फिल्म संगीत की नींव को मजबूत किया।
  6. यशवंतराव चव्हाण (1984)
    महाराष्ट्र के सटारा जिले में जन्मे यशवंतराव चव्हाण राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री और भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। स्वतंत्रता के बाद महाराष्ट्र निर्माण, कृषि सुधार और प्रशासन को नई दिशा देने में उनका योगदान अद्वितीय माना जाता है।
  7. मेजर रामास्वामी परमेस्वरन (1987)
    तमिलनाडु में जन्मे मेजर परमेस्वरन भारतीय सेना के वीर योद्धा थे जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। ऑपरेशन पवन के दौरान उनका बलिदान राष्ट्र के लिए अमर प्रेरणा है।

25 नवंबर के उजाले: इतिहास में जन्मे वे व्यक्तित्व

25 नवंबर के उजाले: इतिहास में जन्मे वे व्यक्तित्व जिन्होंने भारत की दिशा बदली


भारत के इतिहास में 25 नवंबर ऐसा दिन है जब विविध क्षेत्रों—खेल, साहित्य, न्यायपालिका, राजनीति, कला और समाजसेवा—के अद्वितीय रत्न जन्मे। इन हस्तियों ने अपनी प्रतिभा, संघर्ष और सेवा से देश की चेतना को नया आकार दिया। आइए, इस तिथि पर जन्मे उन महानायकों को जानें जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।
25 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व

  1. झूलन गोस्वामी (1982)
    पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले में जन्मीं झूलन गोस्वामी ने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर विश्व क्रिकेट में तेज गेंदबाजी का नया अध्याय लिखा। उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई। देश को नेतृत्व, अनुशासन और अद्वितीय खेल कौशल का उदाहरण दिया।
  2. सुनीति कुमार चटर्जी (1890)
    कोलकाता में जन्मे विख्यात भाषाविद सुनीति कुमार चटर्जी ने भाषाशास्त्र और साहित्यिक अनुसंधान को नई दिशा दी। उन्होंने भारतीय भाषाओं की संरचना, विकास और व्याकरण पर गहन शोध कर शिक्षा-जगत को समृद्ध किया। विश्व स्तर पर भारतीय भाषाओं की पहचान मजबूत करने में उनका योगदान अमूल्य है।
  3. देवकी बोस (1898)
    बर्धमान, बंगाल में जन्मे देवकी बोस भारतीय सिनेमा में ध्वनि और संगीत तकनीक के अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कलात्मक प्रयोगों से फिल्मों को नए आयाम दिए। उनकी कृतियों ने भारतीय चलचित्रों को सांस्कृतिक संवेदनाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
  4. बिप्लब कुमार देब (1971)
    गोमती जिले के एक साधारण परिवार से उठे बिप्लब कुमार देब ने राजनीति में सक्रिय होकर संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया। त्रिपुरा की राजनीति में उन्होंने विकास, प्रशासनिक सुधार और जनसंपर्क आधारित कार्यशैली से पहचान बनाई। उनकी राजनीतिक यात्रा अनुशासन और नेतृत्व का प्रतीक है।
  5. अरविन्द कुमार शर्मा (1963)
    उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में जन्मे अरविन्द शर्मा ने शिक्षा पूरी करने के बाद सामाजिक और राजनीतिक जीवन में कदम रखा। वे 11वीं और 15वीं लोकसभा के सदस्य रहे। अपने क्षेत्र में विकास, ग्रामीण ढांचे और सार्वजनिक कल्याण कार्यों के लिए वे पहचाने जाते हैं।
  6. बिप्लब कुमार देब (1969)
    त्रिपुरा में जन्मे बिप्लब देब, राज्य के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में उल्लेखनीय रहे। उन्होंने प्रशासनिक सुधार, खेल प्रोत्साहन और आधारभूत संरचना के विकास को गति दी। दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है।
  7. राधाकृष्ण माथुर (1953)
    कर्नाटक में जन्मे राधाकृष्ण माथुर भारतीय प्रशासनिक सेवा के उत्कृष्ट अधिकारी रहे। लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज़ विकास, स्थिर शासन और रणनीतिक योजनाओं को दिशा दी। उनकी कार्यशैली प्रभावी निर्णय और प्रशासनिक पारदर्शिता का उदाहरण है।
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  9. वीरेंद्र हेगड़े (1948)
    कर्नाटक के धर्मस्थल में जन्मे वीरेंद्र हेगड़े एक प्रतिष्ठित परोपकारी और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थानों के संरक्षक हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उन्होंने अनेक योजनाएँ चला मानव सेवा को नयी परिभाषा दी। समाज सुधार में उनका योगदान प्रेरक है।
  10. रंगनाथ मिश्र (1926)
    ओडिशा में जन्मे रंगनाथ मिश्र भारत के 21वें मुख्य न्यायाधीश रहे। उन्होंने न्यायपालिका में पारदर्शिता, मानवाधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी न्यायिक दृष्टि संतुलन और संवेदनशीलता का प्रतीक है।
  11. रघुनंदन स्वरूप पाठक (1924)
    इलाहाबाद में जन्मे R.S. पाठक देश के 18वें मुख्य न्यायाधीश बने। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर उन्होंने न्यायिक विश्लेषण और वैधानिक कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण दिया। उनका योगदान वैश्विक न्यायिक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला रहा।
  12. दीप नारायण सिंह (1894)
    बिहार के नालंदा में जन्मे दीप नारायण सिंह राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने। प्रशासनिक ईमानदारी, ग्रामीण उन्नति और सामाजिक न्याय की उनकी नीतियों ने बिहार के प्रशासनिक ढांचे में सकारात्मक परिवर्तन लाए। वे सादगी और जनहितकारी निर्णयों के लिए प्रसिद्ध रहे।
  13. राधेश्याम कथावाचक (1890)
    मथुरा में जन्मे राधेश्याम कथावाचक हिंदी रंगमंच के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। पारसी थिएटर शैली को हिंदी कथानकों से जोड़कर उन्होंने नाटक-साहित्य में नया रंग भरा। उनकी रचनाएँ जनभावनाओं, संस्कृति और मनोरंजन का अद्भुत संगम हैं।
  14. टी. एल. वासवानी (1879)
    हैदराबाद सिंध में जन्मे टेहलूमल वासवानी प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और अध्यापक रहे। भारतीय संस्कृति, शांति और मानवसेवा के संदेश को उन्होंने वैश्विक मंच पर फैलाया। उनकी लेखनी और शिक्षाएं आत्मिक उन्नति और नैतिक चेतना का मार्ग दिखाती हैं।
  15. कृष्णजी प्रभाकर खाडिलकर (1872)
    रत्नागिरी, महाराष्ट्र में जन्मे खाडिलकर मराठी साहित्य और नाटक विधा के प्रमुख हस्ताक्षर थे। उन्होंने सामाजिक मुद्दों को नाटकों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी लेखनी में लोकभावना, परिवर्तन और राष्ट्रचेतना की गहरी अनुभूति मिलती है।

25 नवंबर: के दिनों में दर्ज विश्व और भारत की ऐतिहासिक धरोहर

“इतिहास की गवाही—25 नवंबर की घटनाएँ जो समय की धारा पर अमिट छाप छोड़ गईं”


25 नवंबर का दिन विश्व इतिहास के पन्नों पर कई महत्वपूर्ण प्रसंगों, खोजों, स्थापनों और संघर्षों का प्रतीक बनकर दर्ज है। यह तारीख केवल घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के उतार–चढ़ाव, उपलब्धियों और संघर्षों का दर्पण भी है। आइए, इस दिन से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर विस्तृत नज़र डालते हैं, और साथ ही 26 नवंबर के राष्ट्रीय महत्व पर भी रोशनी डालते हैं।
25 नवंबर: इतिहास में दर्ज महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत विवरण
1667 – सेमाखा, रूस में विनाशकारी भूकंप
रूस के उत्तरी कॉकसस क्षेत्र सेमाखा में आए भूकंप ने लगभग 80,000 लोगों की जान ले ली। यह घटना इतिहास के सबसे जानलेवा भूकंपों में से एक मानी जाती है, जिसने पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक संरचना बदल दी।
1744 – पराग्वे के यहूदियों पर अत्याचार
ऑस्ट्रिया की सेना ने पराग्वे में यहूदी समुदाय पर जानलेवा हमले और लूटपाट की। यह घटना यूरोप और लैटिन अमेरिका में सदियों से चले आ रहे यहूदी उत्पीड़न की एक कड़वी मिसाल है।
1758 – ब्रिटेन का ड्यूक्वीसन किले पर कब्ज़ा
ब्रिटेन और फ्रांस के बीच चल रहे उपनिवेशीय संघर्ष के दौरान ब्रिटिश सेना ने फ्रांस के ड्यूक्वीसन किले पर नियंत्रण प्राप्त किया, जिसने उनकी सामरिक स्थिति को और मजबूत किया।

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1866 – इलाहाबाद हाईकोर्ट का उद्घाटन
भारत की न्यायिक संरचना को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय आज भी भारतीय न्यायपालिका का एक प्रमुख स्तंभ है।
1867 – अल्फ्रेड नोबेल ने डायनामाइट का पेटेंट कराया
इस आविष्कार ने आधुनिक दुनिया के निर्माण और विनाश—दोनों में गहरा प्रभाव डाला। नोबेल के इसी आविष्कार से आगे चलकर नोबेल पुरस्कारों की नींव पड़ी।
1930 – जापान में एक दिन में 690 भूकंप झटके
जापान की भूकंपीय संवेदनशीलता एक बार फिर सामने आई जब एक दिन में 690 झटके दर्ज किए गए। यह विज्ञान जगत के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बना।
1936 – जर्मनी-जापान कोमिंटन विरोधी समझौता
द्वितीय विश्व युद्ध की तैयारी का संकेत देने वाली यह संधि दुनिया की राजनीतिक दिशा बदलने वाली रही।

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1937 – पेरिस विश्व मेले का समापन
यह मेला सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक नवाचारों का केंद्र रहा, जहाँ विज्ञान, कला और उद्योग की झलक दुनिया ने देखी।
1948 – राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की स्थापना
भारतीय युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति व नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से NCC की स्थापना हुई, जो आज राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
1949 – भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर
संवैधानिक समिति के अध्यक्ष द्वारा संविधान पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह तत्काल प्रभाव से लागू हुआ। यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक है।
1951 – अलबामा ट्रेन दुर्घटना
अमेरिका के अलबामा में हुए रेल हादसे में 17 लोग मारे गए, जिसने परिवहन सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए।
1960 – भारत में पहली बार STD कॉल सेवा प्रारंभ
लखनऊ और कानपुर के बीच पहली STD कॉल ने भारत में संचार क्रांति की नींव रखी।
1974 – पूर्व UN महासचिव ऊ थांट का निधन
ऊ थांट शांति और सहयोग के अंतरराष्ट्रीय संदेश को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे।
1998 – पाकिस्तान का ‘भक्तर-शिकन’ मिसाइल परीक्षण
रक्षा क्षमता बढ़ाने की दिशा में पाकिस्तानी सेना ने अंधेरे में भी निशाना लगाने वाले टैंक-भेदी मिसाइल का परीक्षण किया।
2001 से 2013:
भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया और इराक में राजनीतिक गतिविधियों, सुरक्षा घटनाओं एवं आतंकी हमलों की श्रृंखला के कारण ये वर्ष वैश्विक तनाव और संघर्ष के गवाह रहे।
26 नवंबर: संविधान दिवस — लोकतंत्र का पावन उत्सव
26 नवंबर भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज दिन है।
इसी दिन 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया था। यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा और देश के नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और स्वतंत्रता का संरक्षक है।
भारत में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन:
नागरिकों को संविधान के महत्व से अवगत कराया जाता है।
विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में प्री–एम्बल (प्रस्तावना) का वाचन किया जाता है।
संविधान निर्माताओं के योगदान को याद किया जाता है।
26 नवंबर न केवल एक तिथि है, बल्कि यह हमें अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का बोध कराता है।

धन, करियर, शिक्षा, प्रेम और स्वास्थ्य का विश्लेषण

25 नवंबर 2025 का राशिफल — Pandit Satya Prakash Pandey

🌙 सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल – 25 नवंबर 2025
ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर आज का दिन कई राशियों के लिए शुभ, कुछ के लिए सामान्य और कुछ के लिए थोड़ा चुनौतियों भरा रहेगा। नीचे 12 राशियों का विस्तृत विश्लेषण—

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मेष (Aries ♈) – अ, च, ल
आज आपका आत्मविश्वास ऊँचा रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस में आपकी राय को महत्व मिलेगा। प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए दिन अनुकूल।
कला–संगीत: रचनात्मक लोगों को सराहना।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा, नई मीटिंग्स सफल होंगी।
प्रशासन: निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, पर किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 3
पूजा: हनुमान जी

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वृषभ (Taurus ♉) – ब, व, उ
दिन धीरे-धीरे बेहतर होता जाएगा।
कार्य/व्यवसाय: पुराने संपर्क से लाभ।
शिक्षा: मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी।
कला–संगीत: नई प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति: शांत रहकर निर्णय लें।
प्रशासन: कार्यस्थल पर संतुलन आवश्यक।
आर्थिक स्थिति: छोटी खरीदारी संभव।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूजा: माता लक्ष्मी

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मिथुन (Gemini ♊) – क, छ, घ
एक्टिव दिन, नए अवसर मिलेंगे।
कार्य/व्यवसाय: आपकी योजनाओं को समर्थन।
शिक्षा: इंटरव्यू/परीक्षा में सफलता।
कला–संगीत: नए प्रयोग सफल।
राजनीति: नए संपर्क बनेंगे।
प्रशासन: उच्च अधिकारियों की प्रशंसा मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: सुधार पर अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु

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कर्क (Cancer ♋) – ह, भ, ड
भावुक रहेंगे पर लाभ मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का अच्छा परिणाम।
शिक्षा: पढ़ाई में ध्यान बना रहेगा।
कला–संगीत: मन को सुकून देने वाला दिन।
राजनीति: पुराने विवाद का अंत।
प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: ठीक, जल्दबाजी में निर्णय न लें।
शुभ रंग: क्रीम
शुभ अंक: 2
पूजा: शिव जी

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सिंह (Leo ♌) – म, ट, टा
आज आपका प्रभाव सबसे अलग दिखेगा।
कार्य/व्यवसाय: बड़े लोगों का सहयोग।
शिक्षा: परिणाम मजबूत।
कला–संगीत: क्रिएटिव लोगों के लिए बेहतरीन दिन।
राजनीति: प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
प्रशासन: नेतृत्व क्षमता चमकेगी।
आर्थिक स्थिति: अच्छी, दिखावा खर्च से बचें।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव

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कन्या (Virgo ♍) – प, ठ, ण
धीमी पर स्थिर प्रगति।
कार्य/व्यवसाय: पहल करने से लाभ।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
कला–संगीत: गहरी समझ विकसित होगी।
राजनीति: धैर्य रखें, सफलता मिलेगी।
प्रशासन: छोटी उपलब्धियां मन प्रसन्न करेंगी।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: हल्का हरा
शुभ अंक: 7
पूजा: गणेश जी

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तुला (Libra ♎) – र, त, रो
काम का दबाव रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: रिपोर्ट/फाइल में सावधानी।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है—कंट्रोल रखें।
कला–संगीत: नई प्रेरणा धीरे मिलेगी।
राजनीति: आज संयम ज़रूरी।
प्रशासन: निर्णय लेने में सतर्क रहें।
आर्थिक स्थिति: बचत बढ़ाने पर ध्यान दें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: दुर्गा माता

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वृश्चिक (Scorpio ♏) – न, य, ति
पॉजिटिव दिन।
कार्य/व्यवसाय: रुके काम आगे बढ़ेंगे।
शिक्षा: पढ़ाई में आत्मविश्वास।
कला–संगीत: पुराने कार्य को नया रूप देंगे।
राजनीति: आपकी छवि मजबूत होगी।
प्रशासन: योगदान सराहा जाएगा।
आर्थिक स्थिति: नई योजनाओं पर सोच-विचार।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 9
पूजा: कार्तिकेय
धनु (Sagittarius ♐) – भ, ध, फ
तीनों क्षेत्रों में संतुलन जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: नया अवसर मिलेगा।
शिक्षा: पढ़ाई में लगातार प्रगति।
कला–संगीत: नई प्रेरणा उत्पन्न होगी।
राजनीति: सलाहकार की भूमिका मजबूत।
प्रशासन: आपकी राय महत्वपूर्ण होगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 8
पूजा: विष्णु भगवान
मकर (Capricorn ♑) – ख, ज, जी
शानदार दिन।
कार्य/व्यवसाय: बड़ी सफलता के संकेत।
शिक्षा: लक्ष्य प्राप्ति।
कला–संगीत: कोई उपलब्धि मिलेगी।
राजनीति: नई ऊर्जा व पहचान।
प्रशासन: गुप्त शत्रु पराजित होंगे।
आर्थिक स्थिति: लाभ ही लाभ।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 10
पूजा: शनिदेव
कुंभ (Aquarius ♒) – ग, स, श
भाग्य का साथ मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन/नई नौकरी योग।
शिक्षा: कठिन विषयों में सफलता।
कला–संगीत: नई दिशा मिलेगी।
राजनीति: बड़े नेताओं का संपर्क होगा।
प्रशासन: नई जिम्मेदारी।
आर्थिक स्थिति: बढ़ोतरी।
शुभ रंग: सिल्वर
शुभ अंक: 11
पूजा: कृष्ण भगवान
मीन (Pisces ♓) – द, च, झ
भावनाएँ गहरी होंगी पर काम अच्छा।
कार्य/व्यवसाय: परिवर्तन के योग।
शिक्षा: पढ़ाई में सुधार।
कला–संगीत: भावनात्मक रचनाएँ बनेंगी।
राजनीति: रिश्तों में मजबूती।
प्रशासन: सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: अच्छी।
शुभ रंग: समुद्री हरा
शुभ अंक: 12
पूजा: भगवान शिव
डिस्क्लेमर: यह राशिफल पारंपरिक वैदिक ज्योतिष के आधार पर सामान्य अनुमान है। यह राष्ट्र की प्रमाणित परंपरा नहीं। अपनी जन्मकुंडली व निर्णयों हेतु किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।

अंक ज्योतिषीय मार्गदर्शन: कौन पाएगा सफलता, किसे मिलेगी सीख

अंक राशिफल 25 नवंबर 2025 : पंडित सुधीर तिवारी द्वारा दिनभर के शुभ संकेत और सावधान

25 नवंबर 2025, मंगलवार—अंक ज्योतिष के अनुसार यह दिन कई मूलांकों के लिए नई ऊर्जा, संतुलन और संभावनाओं से भरा रहेगा। अपने जन्मांक से जानें आज आपके दिन की दिशा कौन-सी होगी और किन बातों का ध्यान रखना लाभकारी रहेगा।

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मूलांक 1
आज आपके भीतर नई ऊर्जा और साफ सोच जागृत होगी। क्रिएटिव आइडिया, नए अवसर और मित्रता में सामंजस्य बढ़ेगा। सीखने और आगे बढ़ने के मौके स्वतः मिलेंगे। अपने निर्णयों में आत्मविश्वास रखें।

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मूलांक 2
आज संतुलन आपका सबसे बड़ा सहारा बनेगा। बातचीत, संबंधों और वित्त के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम संभव हैं। धैर्य बनाए रखें और हर कदम सोच-समझकर बढ़ाएँ।

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मूलांक 3
सच्चाई और स्पष्टता आज आपके दिन को सरल बनाएगी। रिश्तों और कामकाज के क्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बस योजनाबद्ध ढंग से कार्य करें।

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मूलांक 4
आज परिवर्तन का दिन है—कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं। समझदारी से निर्णय लें और खुद पर भरोसा रखें। जीवन के हर क्षेत्र में धैर्य व योजना लाभ दिलाएगी।

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मूलांक 5
आज ज्ञान, अनुभव और रचनात्मकता का मेल आपको प्रगति देगा। नई सीख, आत्मविश्वास और सकारात्मक संबंध सफलता की राह खोलेंगे। खुलकर बात करना लाभकारी रहेगा।

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मूलांक 6
जिम्मेदारियों को संतुलित करते हुए आगे बढ़ें। उत्साह ठीक है, पर योजनाबद्ध कदम आवश्यक हैं। समय-समय पर छोटे ब्रेक लें। तनाव से दूर रहें, आज का दिन सहज रहेगा।
मूलांक 7
आज स्वास्थ्यमय दिन के लिए हेल्दी रूटीन अपनाएँ। संगीत, कला या किसी रचनात्मक गतिविधि से मानसिक शांति मिलेगी। नई दोस्ती, रचनात्मक सोच और सीख जीवन में सकारात्मकता भरेंगे।

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मूलांक 8
आज आप यात्रा, सीखने या सामाजिक जुड़ाव की ओर आकर्षित हो सकते हैं। बातचीत में सहजता मिलेगी और नए अवसरों के द्वार खुल सकते हैं। सकारात्मक सोच बनाए रखें।

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मूलांक 9
आज भावनाओं और रचनात्मकता का खास संगम रहेगा। समस्याओं को सरलता से हल कर पाएँगे। दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा। निर्णय लेते समय अपनी अंतर्मन की आवाज़ पर विश्वास करें।

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डिस्क्लेमर:अंक ज्योतिष राष्ट्र की परंपरा द्वारा प्रमाणित विज्ञान नहीं है। किसी भी गहन निर्णय हेतु अपनी जन्मकुंडली अनुभवी विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएँ।

धान खरीद की रफ्तार धीमी, किसानों की बढ़ी चिंता—24 दिन में केवल 1033 क्विंटल खरीद

तरकुलवा/बरियारपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। क्षेत्र में धान खरीद प्रक्रिया अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है, जिसके चलते किसान भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। पांचों क्रय केंद्रों पर मिलाकर अब तक सिर्फ 33 किसानों से 1033.20 क्विंटल धान की खरीद हुई है। कोन्हवलिया स्थित पीसीएफ केंद्र पर तो खरीद शुरू ही नहीं हो पाई है।

इस वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीद 1 नवंबर से शुरू हुई थी, लेकिन 24 दिन बीतने के बाद भी खरीद अत्यंत सीमित है। खरीद का पूरा भार फिलहाल दो मंडी समिति और दो खाद्य विभाग के केंद्रों पर ही टिका हुआ है।

बारिश और नमी से बाधित कटाई-मड़ाई
क्रय केंद्र प्रभारी जितेंद्र मद्धेशिया ने बताया कि बारिश से खेतों में पानी भर गया था, जिससे धान की फसल जमीन पर गिर गई। कटाई-मड़ाई में देरी हुई और जिन किसानों ने कटाई कर ली, उनके धान में नमी अधिक है। इसी वजह से खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पा रही।
खाद्य विभाग के एसएमआई धनंजय मिश्रा के अनुसार—“खरीद शुरू है और उम्मीद है कि अगले महीने से गति बढ़ेगी।”

क्रय केंद्रों पर अव्यवस्था—ताले, बोरे की कमी, सत्यापन बाधित
बरियारपुर क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है। किसानों ने बताया कि कई क्रय केंद्र दिनभर बंद रहते हैं। कहीं बोरा उपलब्ध नहीं, तो कहीं सत्यापन कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते। छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि पोर्टल पर उनकी हिस्सेदारी के अनुसार धान की मात्रा बेहद कम दिखाई दे रही है।

महुआबारी और डिहा बसंत के किसानों का कहना है कि—

धान घरों में पड़ा-पड़ा बारिश से खराब होने की कगार पर है

सत्यापन अटका हुआ है

ऑनलाइन पंजीकरण करने वाले कई बटाईदार किसानों के आवेदन बिना कारण निरस्त कर दिए गए

अधिकारी पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों को ही वजह बता रहे हैं

अधिकारियों का दावा—धीरे-धीरे सुधरेगी प्रक्रिया
डिप्टी आरएमओ शुलभ आनंद ने कहा—
“कुछ जगहों पर धान में नमी समस्या है और कहीं पोर्टल की दिक्कत। अक्टूबर की बारिश से इस बार कटाई-मड़ाई में देरी हुई है। अब केंद्रों पर धान आना शुरू हो गया है। बटाईदार किसान भी पंजीकरण कर फसल बेच सकते हैं।”

सामाजिक ताने-बाने में बढ़ती दरारें — दोषी कौन? जवाबदेही का समय अब!

डॉ.सतीश पाण्डेय

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। समाज का ताना-बाना तभी मजबूत रहता है जब लोगों के बीच भरोसा, संवाद और सहयोग बना रहे। लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति चिंताजनक रूप से बदलती दिख रही है। रिश्तों में खटास, समुदायों में अविश्वास, बढ़ता तनाव और छोटी-छोटी बातों पर भड़कती घटनाएं—ये सब इस बात का संकेत हैं कि समाज की बुनियाद कहीं न कहीं कमजोर पड़ रही है।
गांव से लेकर कस्बों और शहरों तक—हर जगह आपसी मनमुटाव, सामाजिक दूरी और असहिष्णुता की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पड़ोसी पड़ोसी से कटे हुए, मोहल्ले में संवाद खत्म, परिवारों में विवाद और युवा पीढ़ी अकेलेपन का शिकार।
सवाल बड़ा है—आखिर इस दरार के लिए जिम्मेदार कौन?
विशेषज्ञ मानते हैं कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी,तकनीक की बढ़ती पकड़ और सामाजिक मूल्यों में गिरावट ने लोगों के बीच के प्राकृतिक संबंध कमजोर किए हैं। सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने से ज़्यादा दूर किया है—जहां संवाद कम और टकराव ज्यादा दिखाई देता है।
वहीं, प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। समाज में बढ़ती समस्याओं को समय रहते पहचाना नहीं गया, न समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास हुए। शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों का क्षरण, बढ़ती आर्थिक असमानता और स्थानीय स्तर पर संवाद मंचों की कमी स्थिति को और बिगाड़ रही है।
स्थानीय घटनाओं की भीड़, छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते विवाद और कानून-व्यवस्था की चुनौती इस दरार को और चौड़ा कर रही है। आम जनता मायूस है—ना समझ पाती है कि किस पर भरोसा करे, ना यह कि समस्या कहां से शुरू हुई। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न है—दोष तय कौन करेगा? जब तक समाज के हर स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होगी—परिवार, शिक्षा, प्रशासन, समुदाय और नागरिक—तब तक हालात सुधरना मुश्किल हैं।समाज को जोड़ने के प्रयास तभी प्रभावी होंगे जब संवाद को बढ़ाया जाए, सामूहिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन मिले और विभागीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
समाज टूटे नहीं, इसके लिए ज़रूरी है कि हम अपने रिश्तों, व्यवहार और जिम्मेदारियों की ओर फिर से लौटें। क्योंकि अगर तानाबाना एक बार बिखर गया, तो उसकी मरम्मत मुश्किल नहीं—नामुमकिन हो जाती है।

वेद: मानव सभ्यता का शाश्वत प्रकाश

✒️नवनीत मिश्र

वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की वह प्रथम ज्योति हैं, जिनसे मानव सभ्यता ने अपने विकास का मार्ग पहचाना। वेदों को केवल धार्मिक ग्रंथ मानना उनकी महत्ता को सीमित करना होगा, क्योंकि वेद मूलतः ज्ञान का महास्रोत हैंl प्रकृति, विज्ञान, समाज, दर्शन और आध्यात्म—हर क्षेत्र का विस्तृत एवं व्यवस्थित विवेचन उनमें निहित है। यही कारण है कि इन्हें अपौरुषेय कहा गया, अर्थात् ऐसा ज्ञान जो मनुष्य-रचित न होकर ऋषियों की अंतर्दृष्टि से प्रकट हुआ।
वेदों की परंपरा लिखित नहीं, बल्कि श्रुति आधारित थी। ऋषि तप, ध्यान और साधना के माध्यम से जो ज्ञान प्राप्त करते, वही गुरु-शिष्य परंपरा से आगे बढ़ता। हजारों वर्षों तक बिना लिखे वेदों का संरक्षित रहना मानव इतिहास का अद्भुत चमत्कार माना जाता है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद, ये चारों मिलकर एक ऐसी ज्ञान-व्यवस्था निर्मित करते हैं, जो जीवन के व्यवहारिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों को गहराई से संबोधित करती है।
वेदों में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सूर्य, अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश मात्र देवत्व के प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन के वैज्ञानिक आधार हैं। पृथ्वी के संसाधनों के संतुलन, जल की शुद्धता, वायु के महत्व और पर्यावरणीय संरक्षण का जो भाव वेदों में मिलता है, वह आधुनिक विज्ञान के कई सिद्धांतों से कहीं पहले का है। प्रकृति और मनुष्य के सह-अस्तित्व को वेद अनिवार्य बताते हैं और इस संतुलन के बिगड़ने को विनाश का कारण समझते हैं।
वेदों की वैज्ञानिक दृष्टि भी अत्यंत व्यापक है। मंत्रों की ध्वनि शक्ति, औषधियों के गुण, ग्रह-नक्षत्रों की गति, ऋतु चक्र, संख्याओं और अनंत के विचार, ये सब वेदों में विस्तार से मिलते हैं। यज्ञ को भी वेद केवल आस्था नहीं, बल्कि ऊर्जा-विनिमय और पर्यावरणीय शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। ध्वनि, प्रकाश और ब्रह्मांड की संरचना पर जो संकेत वेदों में मिलते हैं, वे आधुनिक वैज्ञानिक शोधों को भी चकित कर देते हैं।
सामाजिक जीवन के लिए वेद अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। परिवार, विवाह, शिक्षा, नैतिकता, सहयोग, अनुशासन और लोककल्याण जैसे विषयों पर स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण वेदों में वर्णित मिलता है। स्त्री को सम्मान, समाज को न्याय, और मानव को सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश वेद निरंतर देते हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संतुलन ही वेदों के अनुसार जीवन की पूर्णता है।
आध्यात्मिक स्तर पर वेद मनुष्य को आत्मा और ब्रह्म के रहस्य से परिचित कराते हैं। उपनिषद् इसी वैदिक ज्ञान का सार हैं, जो बताते हैं कि सत्य एक है, बस उसकी अनुभूति और अभिव्यक्ति अनेक रूपों में हो सकती है। यह विचार न केवल दर्शन है, बल्कि वैश्विक एकता का संदेश भी है।
आज के समय में भी वेद उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सहस्राब्दियों पहले थे। पर्यावरण संरक्षण, मानसिक संतुलन, नैतिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण, ये सब वेदों का ही उपहार हैं। आधुनिक जीवन की तेजी और तनाव के बीच वेदों का संदेश मनुष्य को संतुलन, गहराई और स्थिरता प्रदान करता है।
वेद मानवता को यह सिखाते हैं कि ज्ञान का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि समग्र कल्याण है। वेदों का अध्ययन केवल अतीत का पुनरावलोकन नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी हैl एक ऐसा भविष्य जिसमें मनुष्य प्रकृति, समाज और स्वयं से सामंजस्य स्थापित कर सके। इसी कारण वेद मानव ज्ञान की आदि धारा और अनंत प्रेरणा स्रोत माने जाते हैं।

परिवर्तन की राह लंबी, पर प्रयास आधे-अधूरे — आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। परिवर्तन की बातें हर मंच पर गूंजती हैं—चाहे सरकार की योजनाएं हों, जनप्रतिनिधियों के दावे हों या फिर विभागों की मीटिंगों में लिए जाने वाले तथाकथित फैसले। लेकिन सवाल यहीं खड़ा है कि जमीन पर बदलाव क्यों दिखाई नहीं देता? आखिर कौन है जो इस प्रक्रिया को आधे-अधूरे प्रयासों तक सीमित कर देता है?
स्थानीय स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक हालात वही हैं—सड़कें टूटी, सफाई व्यवस्था ढीली, अस्पतालों में संसाधनों की कमी और कानून-व्यवस्था में सुधार के बजाय बढ़ती चुनौती। हर समस्या पर विभाग अपना पक्ष रखता है, लेकिन काम की गति सवालों के घेरे में है। योजनाएं बनती हैं, बजट पास होता है, फोटो सेशन होता है, पर जमीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं लेती।
जनता सवाल पूछती है—जब योजनाएं हर साल आती हैं, तो समस्याएं क्यों जस की तस रहती हैं?
जिम्मेदार विभाग खुद भी मानते हैं कि कई कामों में तकनीकी कारण , अप्राप्त अनुमोदन और बजट की कमी जैसी बातें रोड़ा बनती हैं, लेकिन इन बहानों के बीच आम आदमी रोजाना मुश्किलें झेलता रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार के लिए सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और सख्त जवाबदेही की आवश्यकता है। जब तक अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक समस्याओं को नहीं समझेंगे, और काम पूरा होने तक जिम्मेदार ठहराए नहीं जाएंगे, तब तक परिवर्तन की राह लंबी ही रहेगी। जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि विभागों के ये आधे- अधूरे प्रयास किसी दिन पूर्ण होंगे। लेकिन उस दिन का इंतज़ार लंबा न हो, इसके लिए ज़रूरी है कि जिम्मेदार जागें और वादों को वास्तविकता में बदलें। क्योंकि परिवर्तन केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए—और यही समय की मांग है।

डिग्री नहीं, कौशल है भारत की असली ताकत – युवाओं के भविष्य को बदल रही है ‘स्किल क्रांति’

भारत में तेजी से बढ़ती बेरोज़गारी के बीच यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या केवल डिग्री नौकरी दिला सकती है या अब कौशल ही रोजगार की सबसे अहम कुंजी बन चुका है? पढ़िए Skill vs Degree पर विस्तृत विश्लेषण और जानिए क्यों भारत के लिए स्किल-आधारित शिक्षा सबसे बड़ा समाधान है।
🌟 शिक्षा बनाम कौशल: भारत में शुरू हुई नई बहस
भारत 2025 में सबसे युवा आबादी वाला देश है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है—युवा बेरोज़गारी। हर साल लाखों छात्र ग्रेजुएट बनते हैं, पर जब इंटरव्यू में उनसे पूछा जाता है—
“डिग्री ठीक है… पर आपको आता क्या है?”
तो यहीं से शुरू होती है वह वास्तविकता, जो देश की शिक्षा प्रणाली और रोजगार मॉडल दोनों को कटघरे में खड़ा कर देती है।
🔎 डिग्री है… फिर भी नौकरी क्यों नहीं मिल रही?
भारत में डिग्रीधारी युवाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इंडस्ट्री की मांग उससे बिल्कुल अलग दिशा में जा चुकी है। रिपोर्टें बताती हैं कि:
हर साल करोड़ों छात्र स्नातक बनते हैं
लेकिन इंडस्ट्री-रेडी छात्र मात्र एक छोटा प्रतिशत ही होते हैं
सबसे अधिक कमी इन कौशलों में देखी जाती है।प्रैक्टिकल नॉलेज।
डिजिटल लिटरेसी।
टेक्निकल स्किल।
कम्युनिकेशन।
इंडस्ट्री-आधारित ट्रेनिंग।
यही कारण है कि डिग्री वाले बेरोज़गार बढ़ रहे हैं, और स्किल्ड वर्कर्स की कमी भी बढ़ रही है।
📉 सिर्फ डिग्री पर निर्भर रहना क्यों नुकसानदेह?
भारत की शिक्षा प्रणाली अभी भी थ्योरी-प्रधान है, जबकि नौकरी बाजार पूरी तरह कौशल-आधारित हो चुका है। कंपनियों को ऐसे युवा चाहिए जो तुरंत काम शुरू कर सकें।
लेकिन—
कॉलेज छात्रों को ट्रेनिंग देने में कंपनियों का समय व पैसा बढ़ जाता है
डिग्री और रोजगार के बीच 10–12 साल का गैप स्पष्ट दिखता है।
इंटरव्यू में “कौशल” ही निर्णायक भूमिका निभाता है।
HR विशेषज्ञ तक कहने लगे हैं—
“डिग्री अच्छी है… लेकिन स्किल अनिवार्य है।”
📈 स्किल: भविष्य की सबसे बड़ी ‘नई करेंसी’
डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती नौकरियों ने कौशल को केंद्र बिंदु बना दिया है। खासतौर पर इन स्किल्स की मांग सबसे अधिक है:
Coding, Robotics, AI
Data Analysis
Cyber Security
Electrical/Mechanical Trades
Digital Marketing
Spoken English
EV Technology
Healthcare Skills
Entrepreneurship & Business Skills
आज कंपनियों का नजरिया बदल चुका है—
“आपने क्या पढ़ा है?” नहीं… “आप क्या कर सकते हैं?” मायने रखता है।
🌍 विकसित देशों का मॉडल: स्किल-फर्स्ट शिक्षा
अमेरिका, जर्मनी, जापान जैसे देशों में स्कूल स्तर से ही स्किल ट्रेनिंग अनिवार्य है। इससे—
✔ उद्योगों को नौकरी-तैयार युवा मिलते हैं
✔ स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ती है
✔ उत्पादकता और नवाचार के स्तर में उछाल आता है
भारत भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है, लेकिन गति अभी अपर्याप्त है।
🇮🇳 भारत के लिए जरूरी: ‘स्किल इंडिया 2.0’ मॉडल
भारत को वैश्विक शक्ति बनना है तो स्किल-आधारित शिक्षा अनिवार्य है। इसके लिए1️⃣ स्कूलों में Coding, AI, Communication, Finance जैसे स्किल मॉड्यूल शामिल हों
2️⃣ ITI और Polytechnic को मॉडर्न टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाए
3️⃣ ग्रामीण युवाओं को फ्री डिजिटल स्किल ट्रेनिंग दी जाए
4️⃣ कॉलेजों में इंटर्नशिप अनिवार्य की जाए
5️⃣ हर छात्र को प्रोफेशनल करियर गाइडेंस उपलब्ध हो
💬 युवाओं की बात: “डिग्री सम्मान देती है, स्किल भविष्य देता है”
युवा अब समझ चुके हैं कि नौकरी और करियर का रास्ता कौशल से होकर गुजरता है।
एक छात्र के शब्दों में—
“डिग्री बताती है मैंने क्या पढ़ा… स्किल बताता है मैं क्या कर सकता हूं।”
डिग्री जरूरी है, लेकिन नौकरी और करियर की सफलता 100% कौशल पर निर्भर है। यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है तो शिक्षा प्रणाली को स्किल-आधारित मॉडल में बदलना ही होगा। यही आने वाले भारत की सबसे बड़ी ताकत और असली क्रांति होगी।