Tuesday, June 30, 2026
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भाजपा सरकार में हर व्यक्ति है परेशान – प्रोफेसर एच डी भारती

एसआईआर के बहाने वाज़िब मतदाताओं को किया जा रहा है परेशान

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। भाजपा सरकार के जनविरोधी नीतियों के कारण आज प्रदेश व देश का हर व्यक्ति परेशान हैं उक्त बातें नगर के सोहनाग मोड़ के समीप एक जलपान गृह में पत्रकार वार्ता करते हुए सपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रोफेसर एच डी भारती ने कहा।उन्होंने कहा कि आज नौजवान नौकरी के लिए सड़क पर ठोकर खा रहा है।किसानों को खाद व बीज के लिए लाठियां खानी पड़ रही है। प्रदेश में चल रहे एसआईआर प्रकिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिना प्रशिक्षण के ही बीएलओ की डयूटी लगा दी गई है। गरीब परिवार के पास रहने के लिए जब स्थायी मकान नही है तो वह निवास प्रमाण पत्र कहां से दे पाएगा। भाजपा सरकार इसी बहाने कुछ विशेष वर्ग व गरीबों को नाम हटाना चाहती है लेकिन समाजवादी पार्टी भी इस पर पैनी नजर रखे हुए है। बिहार चुनाव में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए जिसमें से 22 लाख मतदाता के नाम पुनः जोड़े गए जबकि बाकी बाहर हो गए।इंडिया गठबंधन के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह गठबंधन पूरी तरह से मजबूती के साथ आगामी चुनाव में उतरेगा। बिहार का चुनाव अनुकूल नहीं रहा।उत्तर प्रदेश में इस तरह की बात नहीं है।सपा के शासन में नौजवानों को भरपूर रोजगार दिया गया।यह सरकार केवल समाज को बांटने का काम कर रही है। इसका विकास से कुछ भी लेना देना नही है। पत्रकार वार्ता के समय पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सुधाकर गुप्त, गोपाल जी यादव, बीरबल यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

नगरी नगर पंचायत के पास पुलिस–बदमाश में मुठभेड़, दुष्कर्म का आरोपी घायल हालत में गिरफ्तार

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सुखपुरा थाना क्षेत्र के नगरी नगर पंचायत भवन के पास बुधवार तड़के सुबह करीब 4:10 बजे पुलिस और वांछित बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई। इस दौरान आत्मरक्षार्थ पुलिस की गोली से एक आरोपी के बाएं पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने अपना नाम राजू तुरहा पुत्र हरी तुरहा, निवासी मिढ्ढा, थाना फेफना, जनपद बलिया बताया है। पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने 25 नवंबर 2025 की रात करीब 9:30 बजे सुखपुरा थाना क्षेत्र के भरतपुरा इलाके में एक महिला को सुनसान स्थान पर अकेला पाकर पहले उसके साथ मारपीट की और उसे घायल कर दिया, तत्पश्चात उसके साथ जबरन दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस गंभीर घटना के संबंध में पीड़िता की तहरीर पर सुखपुरा थाने में आरोपी के खिलाफ धारा 64(1), 115(2), 352, 351(3) बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। पुलिस तभी से आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। बुधवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी नगरी नगर पंचायत के पास मौजूद है। पुलिस टीम जब उसे पकड़ने पहुंची तो आरोपी ने अवैध तमंचे से पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षार्थ गोली चलाई, जो आरोपी के बाएं पैर में जा लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) कृपाशंकर ने बताया कि सुखपुरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई आगे जारी है और मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है

बरवां खुर्द में आगजनी! पूरी झोपड़ी खाक, बासफोड़ परिवार बेघर — भोजन तक के लाले

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। घुघली थाना क्षेत्र के बरवा खुर्द गांव में लगभग 3दिन पहले रात में एक हृदय विदारक घटना ने पूरे गांव को दहला दिया। अब तक कारण का पता नही चलते मुकदमा दर्ज नहीं हो पाया। आंगनबाड़ी केंद्र के पास स्थित लक्ष्मी बासफोड़ की झोपड़ी में अचानक भीषण आग लग गई, जिसमें परिवार का पूरा सामान जलकर राख हो गया। आग लगने के समय पूरा परिवार झोपड़ी में सो रहा था, लेकिन समय रहते बाहर निकलने के कारण सभी की जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेज थी कि महज कुछ ही मिनटों में पूरी झोपड़ी धू–धू कर गिर गई। झोपड़ी में रखा अनाज, बच्चों की किताबें, पहनने-ओढ़ने के कपड़े, घरेलू सामान, कुछ नगदी, गहने, बाइक और छोटी-मोटी विद्युत सामग्री सब कुछ राख हो गया।पीड़ित लक्ष्मी बासफोड़ और उनके पुत्र राजेश बासफोड़ ने इस आगजनी को सोची-समझी साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि गांव के कुछ लोगों से पुरानी रंजिश चल रही है, जिनकी वजह से उन्हें पहले भी धमकाया जाता रहा है। परिवार का कहना है कि सामाजिक कारणों से उन्हें लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है और उसी क्रम में यह घटना रची गई। सबसे चिंताजनक बात है कि पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे है, घर जल चुका है, खाने तक के लाले पड़े हैं। अब सवाल यह है कि अब इस गरीब कुनबे को भोजन कौन देगा? जीवन यापन कैसे चलेगा? प्रशासन की चुप्पी ग्रामीणों में नाराजगी पैदा कर रही है।अभी तक नही पहुंची राजस्व टीम ,स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री, मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट सके।

सीएम के आगमन से जागा प्रशासन: शिकारपुर चौराहा चमका, लेकिन सवाल—अब तक सो क्यों रहा था अमला

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन से ठीक पहले जिला प्रशासन अचानक सक्रिय हो उठा है। शिकारपुर चौराहे पर बुधवार को बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया गया। कूड़ा हटाया गया, सड़क के किनारे जमा गंदगी साफ कराई गई और कर्मचारियों की ड्यूटी रजिस्टर पर बाकायदा सफाई रोस्टर भी चस्पा कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय से चौराहा गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रहा था, लेकिन किसी अधिकारी की नजर पड़ ही नहीं रही थी। हर दिन बढ़ती भीड़, धूल और कूड़े के बीच लोग परेशानी झेलते रहे, मगर प्रशासनिक अमले की कुर्सी सुरक्षा ने जमीनी कामकाज को पीछे धकेल दिया।अब जबकि मुख्यमंत्री का दौरा तय हुआ है, अचानक से सफाई अभियान तेज कर दिया गया है। कर्मचारी सुबह से शाम तक चौराहे को चमकाने में जुटे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिले की व्यवस्था सिर्फ वीआईपी मूवमेंट के लिए ही सुधरती है? आम दिनों में सफाई व्यवस्था क्यों लचर रहती है?
जनता का तर्क है कि अगर रोजाना इसी तरह सफाई होती रहे तो क्षेत्र पूरी तरह स्वच्छ और व्यवस्थित दिख सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि प्रशासनिक अधिकारी अक्सर बैठक और औपचारिकताओं में व्यस्त रहते हैं, वहीं मैदानी अमला अपनी जिम्मेदारियों से बचता दिखता है।फिलहाल, सीएम दौरे की भनक ने शिकारपुर चौराहे के हालात तो दुरुस्त कर दिए, पर यह सवाल अभी भी बरकरार है—क्या यह चमक स्थायी होगी या सीएम के हेलिकॉप्टर के उठते ही हालात फिर पहले जैसे हो जाएंगे?

सरकार के श्रम विभाग के लिस्ट में भट्ठा मजदूर राजमिस्त्री अति कुशल श्रेणी में

जबकि नर्स लैब टेक्नीशियन पैरामेडिकल स्टाफ की कोई श्रेणी नहीं- प्रतुल शाह देव

रांची(राष्ट्र की परम्परा)
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि इस अजब सरकार की गजब कहानी की दास्तान समाप्त होने का नाम नहीं लेती। प्रतुल ने कहा कि 11 मार्च 2024 को झारखंड के श्रम नियोजन प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित गजट के 11 नंबर पृष्ठ पर अति कुशल श्रेणी का जिक्र किया गया है। इसमें राजमिस्त्री,ईंट पारने वाले और बावर्ची तक सम्मिलित है। लेकिन दूसरी ओर इसी अति कुशल श्रेणी के लिस्ट में कई वर्ष की पढ़ाई करके आने वाले स्टाफ नर्स ,एक्स-रे टेक्नीशियन, लैब फार्मासिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल कोर्स किए लोगों का कोई जिक्र नहीं है। प्रतुल ने कहा यह युवाओं के साथ क्रूर मजाक है। 3 वर्ष की पढ़ाई करके लाखों रुपए खर्च करके जो लोग आते हैं उसे झारखंड सरकार ने अति कुशल या कुशल श्रेणी में भी जिक्र करना जरूरी नहीं समझा। अब विभिन्न विभागों और अस्पतालों या आउटसोर्सिंग एजेंसी के रहमों करम पर यह लोग आ जाते हैं। कहीं इन्हें सामान्य वर्ग का पेमेंट मिलता है तो कहीं इन्हें कुशल श्रेणी का।अति कुशल श्रेणी में इन्हें कोई जगह नहीं दी जाती।

समानता सिक्योरिटी पर राज्य सरकार की इतनी मेहरबानी क्यों?

प्रतुल ने कहा कि रांची के सदर अस्पताल में वर्षों से आउटसोर्सिंग का काम सामानता सिक्योरिटी एजेंसी कर रही है। 600 से ज्यादा लोग इस आउटसोर्सिंग एजेंसी ने संविदा पर सदर अस्पताल रांची में रखा है।सरकारी फाइलों में पारा मेडिकल स्टाफ का मानदेय 805 रुपए प्रतिदिन है।जबकि इनका 514 रुपया प्रतिदिन एजेंसी के द्वारा भुगतान किया जाता है। यहां भी इन पैरामेडिकल स्टाफ को कुशल श्रेणी के नाम पर भुगतान किया जाता है।जबकि तकनीकी रूप से इन्हें अति कुशल श्रेणी में आना चाहिए। सरकार के द्वारा एजेंसी को पूरे महीने का 18138 रुपए का भुगतान किया जाता है। जबकि एजेंसी इन संविदा कर्मियों को 26 दिन का वेतन 14704 रुपया मात्र ही देती है। सिविल सर्जन का ऑफिस पूरे महीने का पेमेंट करता है ।जबकि एजेंसी सिर्फ 26 दिन का पेमेंट संविदा कर्मियों को करती है ।प्रतुल ने कहा सरकार संविदा कर्मियों के लिए 18% अलग से जीएसटी की व्यवस्था करती है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आउटसोर्सिंग एजेंसी संविदा कर्मियों की तनख़ाह से ही अतिरिक्त 18% जीएसटी काटती है ।प्रतुल ने कहा कि ईपीएफ का नियम है कि 12% संविदा कर्मी ,12% एजेंसी मिलकर लगभग 25% काटा जाता है।लेकिन यहां इन संविदा कर्मियों से पूरा 25% उनके तन्खाह से काटा जाता है और एजेंसी का इसमें कोई योगदान नहीं रहता।प्रतुल ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में करोड रुपए के महीने का घोटाला हो रहा है।भारतीय जनता पार्टी संविदा कर्मियों के मुद्दे पर बहुत संवेदनशील है और सरकार अगर हठधर्मिता पर लगी रही तो भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक ले जाने में सक्षम है।

अंबेडकर प्रेरणा द्वार को लेकर ग्राम सभा में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)ग्राम पंचायत सिवान कला में स्थापित “बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रेरणा द्वार” को लेकर बुधवार को गांव में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्राम सभा के कुछ लोग अचानक ग्राम प्रधान तारिक अजीज के दरवाजे पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और जमकर हंगामा शुरू हो गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान तारिक अजीज ने तत्काल थानाध्यक्ष सिकंदरपुर को मामले से अवगत कराया। सूचना पाकर थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी से गांव में कुछ हद तक शांति बहाल हुई, हालांकि माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।इसी दौरान आरोप है कि कुछ लोग ग्राम प्रधान के दरवाजे से होकर उस स्थान तक पहुंचे, जहां अंबेडकर प्रेरणा द्वार का निर्माण किया गया था, और प्रवेश द्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि प्रवेश द्वार को गिरा दिया गया, जिससे वह बुरी तरह खंडित हो गया। इस घटना के बाद गांव में आक्रोश और बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी की स्थिति बन गई। घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रेरणा द्वार ग्राम पंचायत की पहचान और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, ऐसे में उसका क्षतिग्रस्त किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि निर्माण को लेकर पहले से मतभेद चल रहे थे, जो अब खुलकर सामने आ गए हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष ने उच्चाधिकारियों को पूरे प्रकरण की सूचना दी। पुलिस प्रशासन ने मौके पर अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। गांव में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।प्रशासन की ओर से बताया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी व्यक्ति कानून व्यवस्था भंग करने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं। ग्रामीणों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।

खाद–बीज की काला-बाजारी से किसान ठगे जा रहे, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के शिकारपुर, नारायनपुर,
भिटौली, परतावल, धरमपुर, पुरैना सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में खाद और बीज की मनमानी बिक्री ने किसानों की कमर तोड़ दी है। निजी दुकानों पर निर्धारित-दरों से कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से परेशान किसान खुलकर अपनी बात कहने से भी कतरा रहे हैं। महंगाई, दोहरी मार और खेती लागत बढ़ने के बीच यह मनमानी बिक्री सीधे-सीधे किसान हित पर चोट कर रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि जैसे- जैसे रबी सीजन नजदीक आ रहा है, खाद और बीज की मांग बढ़ी है। इसी मांग का फायदा उठाकर कई दुकानदार मनमानी दरें तय कर रहे है।शिकायतों के बावजूद न तो कोई कार्रवाई हो रही है और न ही प्रशासनिक टीम की तरफ से निरीक्षण। इससे बिचौलियों और मनमाने विक्रेताओं के हौसले और मजबूत हो रहे हैं।
बताया जाता है कि खाद की एक बोरी पर 50 से 150 रुपये तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। वहीं कुछ प्राइवेट दुकानों पर बीज के दाम सरकारी निर्धारित मूल्य से काफी ऊपर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी प्रशासन या कृषि विभाग से शिकायत की जाती है, जवाब मिलता है कि जांच की जाएगी, लेकिन जमीन पर कार्रवाई होती कहीं दिखाई नहीं देती।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस काला-बाजारी पर रोक नहीं लगाई तो आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी।उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उन्हें लूटने वालों पर कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है।
इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की चुप्पी अब बड़ा सवाल बन चुकी है—क्या जिम्मेंदार विभाग हालात बिगड़ने का इंतजार कर रहा है या फिर मनमानी पर नियंत्रण की मंशा ही नहीं है?किसानों ने मांग की है कि तत्काल छापेमारी अभियान चलाकर खाद–बीज विक्रेताओं की रेट-लिस्ट और स्टॉक की जांच की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और बाजार में पारदर्शिता लौट सके।

महराजगंज में हादसों का हॉटस्पॉट बना हर मार्ग — बढ़ती दुर्घटनाओं ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता क्रम अब चिंता की गंभीर रेखा खींच रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगभग हर मार्ग हादसों का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। तेज रफ्तार, लापरवाहीऔर कमजोर ट्रैफिक प्रणाली मिलकर आम जनता की सुरक्षा पर सीधा खतरा बन चुके हैं।
हाल के दिनों में जिले में हुई लगातार दुर्घटनाओं ने न केवल कई निर्दोष लोगों की जान ली है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। सड़क सुरक्षा के दावों के बीच जर्जर सड़कों, टूटी पुलियों, अंधेरे मार्गों और बेबस ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत बार-बार उजागर हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात विभाग की अनदेखी और हाइवे पर निगरानी की कमी हादसों का मुख्य कारण है। कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर न होने, सड़क किनारे अवैध पार्किंग और बिना संकेतक वाले मोड़ हर दिन दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनपद में पिछले कुछ महीनों में दुर्घटनाओं का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है, जिसमें मोटरसाईकिल और चारपहिया वाहनों की टक्कर सबसे अधिक पाई गई है। कई हादसों में दोषी वाहन चालक मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी होती है।
ग्रामीण सड़कों की बदहाली भी हादसों का बड़ा कारण है। कई मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, कटे किनारे और पानी भराव की समस्या यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा रही है। रात में स्ट्रीट लाइट न होने से अंधेरे में दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
जिले में बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सड़कों के सुधार की मांग तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अब भी सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।फिलहाल जनता यह सवाल कर रही है कि क्या ट्रैफिक नियमों का पालन और सड़क सुधार योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? महराजगंज में बढ़ते हादसे अब चेतावनी दे रहे हैं।सड़क पर लापरवाही नहीं, सजगता जरूरी; वरना हर मोड़ बन सकता है मौत का द्वार।

पुराण: भारतीय ज्ञान-संस्कृति का शाश्वत आधार

नवनीत मिश्र

भारतीय ज्ञान–परंपरा का यदि कोई ऐसा साहित्यिक आधार है जिसने सहस्राब्दियों तक हमारी संस्कृति, सोच, आस्था और सामाजिक जीवन को जीवित रखा है, तो वह है, पुराण। ये केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि वह सांस्कृतिक स्मृति-कोष हैं जिनमें भारत का इतिहास, दर्शन, लोकविश्वास और जीवन-मूल्य एक साथ प्रवाहित होते हैं। वेद जहाँ ज्ञान का मूल स्वरूप हैं, वहीं पुराण उस ज्ञान को सरल, सहज और जनमानस की भाषा में विस्तार देते हैं।
पुराण शब्द का मूल अर्थ है: पुरातन ज्ञान, परंतु इसकी सार्थकता केवल अतीत में सीमित नहीं। यह वह परंपरा है जो आज भी मानव जीवन को दिशा और मर्यादा प्रदान करती है। महर्षि वेदव्यास द्वारा पुराणों का संकलन इस उद्देश्य से किया गया कि जटिल वेदांत और दार्शनिक चिंतन साधारण व्यक्ति तक भी आसानी से पहुँचे और वह अपने दैनिक जीवन में धर्म, नीति और आचरण को समझ सके।
पुराणों की संरचना पाँच मूल तत्वों पर आधारित है- सृष्टि, पुनः सृष्टि, वंशक्रम, मन्वंतर और वंश–चरित। इन पाँच आयामों के माध्यम से पुराण संसार की उत्पत्ति से लेकर मानव समाज के विकास, देव और ऋषि परंपराओं, राजवंशों और युगचक्र तक की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि पुराण केवल धार्मिक उपदेशों का संग्रह नहीं, बल्कि प्राचीन भारत का सांस्कृतिक विश्वकोश भी हैं।
अठारह महापुराण इस विशाल साहित्य परंपरा के मुख्य स्तंभ हैं, ब्रह्मपुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण, शिवपुराण, भागवतपुराण, नारदपुराण, मार्कंडेयपुराण, गरुड़पुराण, स्कंदपुराण आदि। प्रत्येक पुराण का अपना विशिष्ट स्वरूप और उद्देश्य है। कोई भक्ति को केंद्र में रखता है, कोई ज्ञान को, कोई धर्मनीति का मार्ग बताता है, तो कोई समाज और राज्य व्यवस्था का विवेचन करता है। उदाहरणार्थ, भागवत पुराण भक्ति-भाव का सर्वोच्च स्वरूप प्रस्तुत करता है, जबकि विष्णु पुराण में नीति, शासन और धर्म के व्यवहारिक स्वरूप को समझाया गया है।
पुराणों की भाषा सरल, सुबोध और कहानियों से भरी है। यह शैली इन्हें आम जन से जोड़ती है। पुराणों की कथाएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं बल्कि जीवन के गहरे संदेश भी देती हैंl सत्य की विजय, अहंकार का पतन, करुणा और धर्म का महत्व, और मानवता का वास्तविक स्वरूप। यही वजह है कि पुराण कथाएँ आज भी लोकगीतों, नाटकों, भक्ति-संगीत और लोक-संस्कृति में जीवित हैं।
इतिहास और भूगोल के संदर्भ में भी पुराण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें राजवंशों के वंशक्रम, विभिन्न जनजातियों, प्राचीन नगरों, नदियों, पर्वतों, द्वीपों और संस्कृतियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। पुराण इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की सभ्यता केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत विकसित थी।
समकालीन समय में भी पुराणों का महत्व कम नहीं हुआ है। जब समाज भौतिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है और जीवन मूल्य क्षीण हो रहे हैं, तब पुराण हमें संतुलन, करुणा, कर्तव्य और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं। वे बताते हैं कि धर्म आचरण में है, अनुष्ठान में नहीं; मनुष्य की महानता उसके कर्मों में है, पद या प्रतिष्ठा में नहीं।
अंततः पुराण हमें यह समझाते हैं कि मानव जीवन केवल सुख-सुविधाओं का खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा यात्रा-पथ है जहाँ मूल्य, आस्था, नैतिकता और जिम्मेदारी, इन सबका संतुलन आवश्यक है।
इस अर्थ में, पुराण केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान का मार्गदर्शन और भविष्य के लिए प्रकाश-स्तंभ हैं।

कुरीतियों की जकड़न में समाज: जागरूकता की लौ कब जल उठेगी?

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।सदियों पुरानी कुरीतियां आज भी हमारे समाज की रगों में ऐसे धंसी हुई हैं कि आधुनिक समय की सारी चमक‐दमक भी उन्हें पूरी तरह मिटा नहीं पाई है। विज्ञान के युग में कदम रख चुके हम अब भी अंधविश्वास, भेदभाव, दहेज, बालविवाह और छुआछूत जैसी बुराइयों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। सवाल यह नहीं कि समाज कितना आगे बढ़ा, बल्कि यह सोच कब बदलेगी?
कुरीतियां किसी एक वर्ग की समस्या नहीं हैं, ये पूरे समाज की जड़ें खोखली करती हैं। दहेज की आग में झुलसती बेटियां, अंधविश्वास के नाम पर होने वाली झाड़‐फूँक, भेदभाव से टूटते रिश्ते—ये सब मिलकर हमें याद दिलाते हैं कि बदलाव केवल विकास की बातों से नहीं आएगा, सोच के स्तर पर क्रांति करनी होगी।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कुरीतियों को आज भी परंपरा का नाम देकर बचाया जाता है। समाज का एक हिस्सा इन्हें संस्कृति की रक्षा का माध्यम मान लेता है,जबकि वास्तविकता यह है कि संस्कृति मानवता और समानता पर टिकी होती है, न कि अंधभक्ति और भेदभाव पर। कुरीतियां न केवल प्रगति रोकती हैं, बल्कि नई पीढ़ी का आत्मविश्वास भी तोड़ती हैं।
बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होती है—सोच को रोशन करने वाली शिक्षा से परिवारों में संवाद, स्कूलों में जागरूकता और समाज में साहसिक पहल, यही इन बुराइयों के खिलाफ सबसे बड़े हथियार हैं। कानून बने, अभियान चलें, लेकिन जब तक समाज स्वयं आगे आकर इन कुरीतियों को अस्वीकार नहीं करेगा, तब तक कोई भी बदलाव स्थायी नहीं हो सकता। समय आ गया है कि हम स्वयं से पूछें—क्या हम आधुनिक समाज हैं या कुरीतियों के कैदी? जागरूकता की लौ तभी जलेगी, जब हर व्यक्ति अपनी भूमिका समझे और कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करे। समाज तभी वास्तव में आगे बढ़ेगा, जब हम बुराइयों की विरासत छोड़कर न्याय, समानता और मानवता की राह चुनेंगे।

संविधान दिवस: लोकतांत्रिक मर्यादाओं को फिर से याद करने का दिन

भारत का संविधान मात्र एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि इस राष्ट्र की आत्मा, आकांक्षाओं और सामूहिक चेतना का जीवंत घोषणापत्र है। 26 नवंबर का दिन हमें सिर्फ संविधान के अंगीकार की ऐतिहासिक स्मृति ही नहीं कराता, बल्कि यह एक अवसर देता है। यह सोचने का कि हमने इन मूल्यों को अपने व्यवहार, प्रशासन और सामाजिक जीवन में कितना आत्मसात किया है।
हमारा संविधान विविधता में एकता के दर्शन से उपजा है। सदियों की दार्शनिक परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम की तपस्या और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अडिग आस्था ने मिलकर इस महान ग्रंथ को जन्म दिया। इसमें न केवल नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की गई, बल्कि कर्तव्यों की अनुशासन-रेखा भी खींची गई, क्योंकि सभ्यता अधिकारों और कर्तव्यों के संतुलन से ही आगे बढ़ती है।
आज, संविधान दिवस केवल समारोहों का दिवस नहीं है; यह सामाजिक और राजनीतिक दायित्वों को पुनः स्मरण करने का क्षण है। हमें स्वयं से पूछना होगा। क्या हम संविधान द्वारा दिए गए समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय के आदर्शों को अपने आचरण में उतार पाए हैं? क्या समाज में फैली असमानताएं, भेदभाव, हिंसा और विघटनकारी प्रवृत्तियाँ उन मूल्यों का उपहास नहीं करतीं, जिन्हें हमारे संविधान निर्माताओं ने सर्वोच्च माना था?
लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि जागरूक नागरिकों, उत्तरदायी प्रशासन, संवेदनशील न्याय व्यवस्था और विवेकवान राजनीतिक नेतृत्व से सशक्त होता है। संविधान दिवस हमें याद दिलाता है कि आलोचना करना आसान है, पर लोकतंत्र को मजबूत बनाना हर नागरिक का साझा दायित्व है। यह दायित्व हमें विचार, वाणी और कर्म, तीनों स्तरों पर निभाना होता है।
संविधान जीवंत तभी रहता है जब नागरिक जागरूक हों और संस्थाएं निष्पक्ष। हमें समझना होगा कि संविधान का पालन केवल अदालतों, संसद या सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं; यह हर नागरिक की जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। चाहे वह सड़क पर ट्रैफिक नियम मानना हो, किसी के अधिकारों का सम्मान करना हो, या सामाजिक सद्भाव बनाए रखना हो।
इस संविधान दिवस पर आवश्यकता है कि हम केवल प्रावधान न पढ़ें, बल्कि उसके मूल में बसे मूल्यों को महसूस करें। स्वतंत्रता की रक्षा तभी संभव है जब हम जिम्मेदार बनें; समानता का अर्थ तभी फलित होता है जब हम भेदभाव से ऊपर उठें; और न्याय सुनिश्चित तभी होता है जब हम सत्य और साहस के मार्ग पर चलें।
संविधान भारत के भविष्य का नक्शा है। एक ऐसा भविष्य जिसमें नागरिक गौरव से जी सकें, संस्थाएं मजबूती से खड़ी रहें और लोकतंत्र निरंतर परिपक्व होता रहे। आज का दिन हमसे आह्वान करता है कि हम अपने राष्ट्रधर्म, यानी संविधान-पालन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
संविधान दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प है, एक बेहतर, न्यायपूर्ण, समतामूलक और सहिष्णु भारत के निर्माण का संकल्प।

राष्ट्रीय स्तर पर परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने का संकल्प

  • “बॉर्न टू विन” मल्टी-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट 11 से 14 दिसंबर तक जयपुर में

जयपुर(राष्ट्र की परम्परा)। युवा खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने तथा परंपरागत भारतीय खेलों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से “बॉर्न टू विन–नेशनल लेवल मल्टी-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट” का आयोजन आगामी 11 से 14 दिसंबर 2025 तक सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में किया जाएगा।
जय जननी संस्थान, कम ऑन डू इट एवं शक्ति सूत्र फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव युवाओं को मोबाइल स्क्रीन से दूर कर मैदान की ओर प्रेरित करने के संदेश “स्क्रीन से हटो, मैदान में आओ” के साथ आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम की आयोजक भारत तिब्बत समन्वय संघ क्रीड़ा प्रभाग, उत्तर पश्चिम क्षेत्र की क्षेत्रीय सलाहकार शिवानी सिंह बैस बताती हैं कि इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में कबड्डी, खो-खो, रस्साकशी, हॉकी, हाथ कुश्ती, लूडो, एक टांग दौड़, सितोलिया, शतरंज, कैरम सहित अनेक पारंपरिक खेलों के साथ क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, स्केट्स, टेबल टेनिस, निशानेबाज़ी, कराटे, ताइक्वांडो और वुशु जैसी आधुनिक स्पर्धाएँ भी शामिल की गई हैं।
श्रीमती बैस के अनुसार प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा तथा प्रत्येक खिलाड़ी को टी-शर्ट, पदक एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कुल 10 लाख रुपये तक के पुरस्कार घोषित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि यह महोत्सव “भारत की मिट्टी, भारत की जीत” की भावना को सशक्त करेगा और देशभर के खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर देगा।
राष्ट्र भर के इच्छुक प्रतिभागी मोबाइल नंबर 9782650101 तथा 8209596335 पर संपर्क कर पंजीकरण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आज का ज्योतिषीय विश्लेषण: नक्षत्र, योग और यात्रा दिशा का महत्व

26 नवंबर 2025 का विस्तृत पंचांग

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से आरंभ होने वाला 26 नवंबर 2025 का पंचांग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय-चन्द्रास्त, नक्षत्र परिवर्तन, योग, करण, राहुकाल, चौघड़िया समेत सभी आवश्यक शुभ-अशुभ मुहूर्त में यह दिन विशेष महत्व रखता है।
🕉️ आज का दिन व महत्वपूर्ण विवरण
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चंद्र मास: मार्गशीर्ष
ऋतु: हेमंत
वार: बुधवार
चंद्र राशि: मकर (पूरा दिन-रात)
सूर्य राशि: वृश्चिक

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🌞 सूर्य – चंद्र ग्रहणीय समय
सूर्योदय: 6:52 AM
सूर्यास्त: 5:36 PM
चन्द्रोदय: 11:36 AM
चन्द्रास्त: 10:47 PM
📿 तिथि, नक्षत्र, योग, करण
तिथि
षष्ठी तिथि: 25 Nov 10:57 PM – 27 Nov 12:02 AM
उपरांत सप्तमी तिथि: 27 Nov 12:02 AM – 28 Nov 12:30 AM
नक्षत्र
श्रवण: 25 Nov 11:57 PM – 27 Nov 01:32 AM
धनिष्ठा: 27 Nov 01:32 AM – 28 Nov 02:32 AM
करण
कौलव: 25 Nov 10:57 PM – 26 Nov 11:34 AM
तैतिल: 26 Nov 11:34 AM – 27 Nov 12:02 AM
गर: 27 Nov 12:02 AM – 27 Nov 12:21 PM
योग
वृद्धि योग: 25 Nov 12:49 PM – 26 Nov 12:42 PM
ध्रुव योग: 26 Nov 12:42 PM – 27 Nov 12:09 PM
⏳ अशुभ काल – Rahukal, Yamagand, Kulik, Durmuhurat
राहुकाल: 12:14 PM – 1:34 PM
यमगण्ड: 8:12 AM – 9:33 AM
कुलिक काल: 10:53 AM – 12:14 PM
दुर्मुहूर्त: 11:52 AM – 12:35 PM
वर्ज्यम्: 05:42 AM – 07:22 AM

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🌼 शुभ काल – Amrit Kaal, Brahma Muhurat
ब्रह्म मुहूर्त: 05:16 AM – 06:04 AM
अमृत काल: 02:26 PM – 04:09 PM
अभिजीत मुहूर्त: NIL
🕰️ दिन व रात्रि के चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
लाभ — 06:52 AM – 08:12 AM
अमृत — 08:12 AM – 09:33 AM
काल — 09:33 AM – 10:53 AM
शुभ — 10:53 AM – 12:14 PM
रोग — 12:14 PM – 01:34 PM
उद्बेग — 01:34 PM – 02:55 PM
चर — 02:55 PM – 04:15 PM
लाभ — 04:15 PM – 05:36 PM
रात का चौघड़िया
उद्बेग — 05:36 PM – 07:15 PM
शुभ — 07:15 PM – 08:55 PM
अमृत — 08:55 PM – 10:34 PM
चर — 10:34 PM – 00:14 AM
रोग — 00:14 AM – 01:54 AM
काल — 01:54 AM – 03:33 AM
लाभ — 03:33 AM – 05:13 AM
उद्बेग — 05:13 AM – 06:52 AM

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🌙 Chandrabalam (चंद्र बल)
27 Nov 06:52 AM तक
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन
✨ Tarabalam (ताराबल)
01:32 AM तक नक्षत्र शुभ:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, आद्रा, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा
उपरांत 06:52 AM तक शुभ:
भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
🚩 आज का व्रत–त्योहार
षष्ठी व्रत

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🧭 किस दिशा में यात्रा शुभ?
शुभ दिशा – उत्तर, पश्चिम
अशुभ दिशा – दक्षिण (इस दिशा की यात्रा आज वर्जित मानी गई)
यदि दक्षिण दिशा में यात्रा अनिवार्य हो:
घर से दही या गुड़ खाकर निकलें—दोष निवृत्ति मानी गई है।
🍀 आज क्या खाकर निकलें?
✔ दही–चीनी,
✔ गुड़,
✔ पान के पत्ते पर इलायची,
✔ गंगा जल का स्पर्श — यात्रा मंगलकारी बनती है।

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🔔 कौन-सा मंत्र जपें ताकि कार्य सिद्ध हों?
“ॐ गं गणपतये नमः”
(व्यवसाय, यात्रा, नए कार्य को सफलता देने वाला)
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
(मन की शांति, बाधा नाश, सकारात्मकता)
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”
(धन-लाभ व कार्य सिद्धि हेतु)
🔮 अमृत सिद्धि योग / सर्वार्थसिद्धि योग
आज अमृत काल 02:26 PM – 04:09 PM कार्य-सिद्धि हेतु अत्यंत शुभ
सर्वार्थसिद्धि योग: सामान्यफलदायी (विशेष योग उपलब्ध नहीं)

कनाडा में डॉक्टर कैसे बनें? भारतीय छात्रों के लिए पूरी प्रक्रिया, योग्यता और जरूरी परीक्षाएं जानें

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भारत में हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा देकर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। कई छात्र विदेशों में मेडिकल पढ़ाई के लिए भी आवेदन करते हैं, जहां बेहतर वेतन, उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और बेहतर वर्क-लाइफ़ बैलेंस मिलता है।
ऐसे देशों में कनाडा सबसे पसंदीदा विकल्पों में से एक है, लेकिन यहां NEET स्कोर पर सीधे एडमिशन नहीं मिलता। इसके बावजूद कनाडा में डॉक्टर बनने का करियर बेहद सम्मानजनक और लाभदायक माना जाता है।

कनाडा में डॉक्टर बनने के लिए MD डिग्री अनिवार्य

भारत में जहां MBBS की अवधि लगभग 5.5 साल होती है, वहीं कनाडा में MD प्रोग्राम 3–4 साल का होता है।
कनाडाई डॉक्टरों को बेहतर सैलरी, कम कार्यभार और विश्वस्तरीय मेडिकल सुविधाओं में काम करने का मौका मिलता है।

12वीं के बाद सीधे एडमिशन नहीं: बैचलर्स डिग्री जरूरी

कनाडा में भारतीय छात्रों को 12वीं के बाद सीधे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलता।
सबसे पहले उन्हें 4 साल की बैचलर्स डिग्री (BSc या विज्ञान संबंधित कोर्स) पूरी करनी होती है।
इसमें ये विषय प्राथमिकता वाले होते हैं:

• फिजिक्स

• केमिस्ट्री

• बायोलॉजी

• मैथ्स

बैचलर्स पूरा करने के बाद ही छात्र MCAT परीक्षा देने के लिए पात्र होते हैं।

MCAT—कनाडा का NEET, सबसे अहम परीक्षा

MCAT (Medical College Admission Test) कनाडाई मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का मुख्य आधार है।
एग्जाम में इन विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं:

• ऑर्गेनिक केमिस्ट्री

• जनरल केमिस्ट्री

• फिजिक्स

• बायोलॉजी

• राइटिंग और वर्बल रीजनिंग

जितना बेहतर MCAT स्कोर, उतनी अधिक टॉप मेडिकल स्कूल में एडमिशन की संभावना।

मेडिकल कॉलेज में एडमिशन प्रक्रिया

MCAT में अच्छा स्कोर आने पर छात्र कनाडा के मेडिकल कॉलेजों में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज:

• MCAT स्कोर

• IELTS/TOEFL स्कोर

• बैचलर्स डिग्री मार्क्स

• आवेदन निबंध और सिफारिश पत्र (कुछ कॉलेजों में)

MD प्रोग्राम में 4 साल की पढ़ाई होती है:
पहले 2 साल — थ्योरी,
अगले 2 साल — क्लिनिकल प्रैक्टिस।

MCCEE लाइसेंसिंग एग्जाम

MD पूरा करने के बाद छात्र को MCCEE (Medical Council of Canada Evaluating Examination) पास करना होता है।
यह परीक्षा MCAT से अधिक कठिन मानी जाती है और मेडिकल प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य है।

रेजिडेंसी प्रोग्राम—3 से 7 साल का क्लिनिकल अनुभव

कई छात्र CaRMS (Canadian Resident Matching Service) के जरिए रेजिडेंसी के लिए आवेदन करते हैं।
इसके लिए अक्सर कनाडाई नागरिकता या PR की आवश्यकता होती है।

रेजिडेंसी 3–7 साल की होती है, जिसमें छात्र विभिन्न अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग लेते हैं।

रेजिडेंसी के बाद दो परीक्षाएँ पास करनी होती हैं:

• MCCQE Part I

• MCCQE Part II

इनके बाद Medical Council of Canada (LMCC) लाइसेंस मिलता है और छात्र कनाडा में स्वतंत्र रूप से डॉक्टर बनकर काम कर सकते हैं।

भारत से कनाडा में डॉक्टर बनने का रास्ता लंबा पर बेहद फायदेमंद

उच्च वेतन, सम्मान, आधुनिक तकनीक और बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस के कारण कनाडा में डॉक्टर बनने का सफर लंबा जरूर है, लेकिन करियर के लिहाज से अत्यधिक मूल्यवान है।

गणेश जी की महिमा: जब विनम्रता ने खोले दिव्यता के द्वार

गणेश जी का जीवन केवल पौराणिक प्रसंगों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन की जटिलताओं को सरल बनाने वाला आध्यात्मिक संदेश है। उनके प्रत्येक प्रसंग में एक ऐसी सीख छिपी है, जो मनुष्य को संघर्षों से निकालकर प्रकाश की ओर ले चलती है। यह श्रृंखला की तीसरी कड़ी, एपिसोड 3, उन घटनाओं पर प्रकाश डालती है, जो दर्शाती हैं कि कैसे गणेश जी की वास्तविक शक्ति केवल उनके स्वरूप में नहीं, बल्कि उनकी सरलता, नम्रता और असीम ज्ञान में निहित है।

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जब संसार बना शक्ति-परीक्षा का मंच
कथा के अनुसार, एक समय देवताओं के बीच यह चर्चा उठी कि जगत में किस देवता की बुद्धि सर्वोच्च है। सभी अपनी-अपनी शक्तियों पर गर्व कर रहे थे। तभी भगवान शिव ने शांत भाव से कहा—
“बुद्धि केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता से मापी जाती है।”

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देवताओं में जिज्ञासा जागी और एक परीक्षा की योजना बनी। शर्त यह थी कि जो तीनों लोकों का परिक्रमा कर सबसे पहले लौट आएगा, वही सर्वश्रेष्ठ बुद्धि और विवेक का देवता कहलाएगा।
कार्तिकेय तुरंत अपने दिव्य वाहन पर सवार होकर ब्रह्मांड की यात्रा पर निकल पड़े। सभी देवता उनकी गति, साहस और शक्ति के प्रशंसक थे। पर वहीं गणेश जी अपने छोटे से मूषक वाहन पर शांत बैठे मुस्कुरा रहे थे। उनकी मुस्कान देवताओं को और भी उलझा रही थी।

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विनम्रता की परिक्रमा—जब संसार माता-पिता में सिमट गया
गणेश जी ने कोई जल्दी नहीं दिखाई। उन्होंने शांत भाव से उठकर अपने माता-पिता, शिव और पार्वती, के पास जाकर कहा—
“तीनों लोकों का सार वही हैं, जिनसे यह संसार उत्पन्न हुआ। मेरे लिए मेरे माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं।”
और उन्होंने उनके चारों ओर परिक्रमा कर ली।
यह दृश्य वहां उपस्थित सभी देवताओं को स्तब्ध कर गया। गणेश जी की यह परिक्रमा न केवल शास्त्रसम्मत थी, बल्कि ज्ञान और विनम्रता का सर्वोत्तम उदाहरण भी बन गई। यही वह क्षण था, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि बुद्धि का वास्तविक अर्थ बाहरी तेज नहीं, बल्कि आंतरिक समझ और विनय है।

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कार्तिकेय का लौटना और सत्य का उद्घाटन
बहुत समय बाद, कार्तिकेय अपनी लंबी यात्रा पूर्ण कर विजयी भाव से लौटे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि गणेश जी पहले से ही विजेता घोषित किए जा चुके हैं, तो उन्हें आश्चर्य हुआ। शिव जी ने उन्हें पूरी बात समझाई।

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कार्तिकेय ने गणेश जी की ओर देखा—
“तुमने मूषक पर रहते हुए भी वह कर दिखाया, जिसे मैं अपनी शक्ति के बावजूद नहीं समझ पाया।”
गणेश जी मुस्कुराए और बोले—
“भैया, वेग से बड़ी बुद्धि होती है। यात्रा से बड़ा भाव होता है।”
यह संवाद केवल देवताओं को ही नहीं, बल्कि समस्त जगत को एक अनमोल सीख दे गया—
ज्ञान बिना अहंकार, और शक्ति बिना विनम्रता—यही सच्ची दिव्यता है।
विघ्नहर्ता की शक्ति का जन्म — जब संसार ने गणेश की बुद्धि को स्वीकारा
इसी परीक्षा के बाद, देवताओं ने सर्वसम्मति से गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’, ‘प्रथम पूज्य’ और ‘बुद्धि-प्रधान देव’ के रूप में मान्यता दी।
शास्त्रों में कहा गया है—
“यत्र यत्र स्थिता विद्या, तत्र तत्र गणाधिपः।”
अर्थात जहाँ भी बुद्धि का प्रकाश है, वहाँ गणेश जी की उपस्थिति अनिवार्य है।

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मानव जीवन के लिए गहरी सीख
गणेश जी की यह शास्त्रोक्त कथा हमें बताती है कि—
✔ विनम्रता हर सफलता की आधारशिला है।
✔ कठिनाइयाँ गति से नहीं, बुद्धि से जीती जाती हैं।
✔ परिवार और संस्कार ही जीवन का वास्तविक ब्रह्मांड हैं।
✔ संकटों से पार पाने के लिए श्रद्धा और धैर्य अनिवार्य हैं।
जब हम इन गुणों को आत्मसात करते हैं, तभी “विघ्नहर्ता गणेश” हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर नई राह दिखाते हैं।
समापन — गणेश जी की कथा केवल कथा नहीं, मार्गदर्शन है
गणेश जी की शास्त्रोक्त गाथाएँ युगों से हमें यह सिखाती आई हैं कि सरलता में ही महानता का वास है। जीवन की हर परिस्थिति में जब मनुष्य प्रेम, सम्मान और धैर्य का दामन थामे रहता है, तभी उसके जीवन की परिक्रमा पूर्ण होती है।
एपिसोड 3 यही स्मरण दिलाता है कि—
गणेश जी की कृपा पाने का मार्ग बाहरी पूजा में नहीं, बल्कि आंतरिक विनम्रता में है।