Sunday, June 28, 2026
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अवैध खनन व ओवरलोडिंग पर खनन विभाग की बड़ी कार्रवाई

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी दीपक मीणा के निर्देश तथा अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीत कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में खनन विभाग की टीम ने जनपद में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के विरुद्ध प्रवर्तन अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। रविवार को खनन विभाग की टीम ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में चेकिंग अभियान के दौरान अवैध खनन एवं परिवहन में लिप्त कुल 7 वाहनों को पकड़कर संबंधित थानों में जमा कराया।

इनमें 2 वाहन थाना रामगढ़ताल, 3 वाहन थाना बेलीपार तथा 2 वाहन थाना चौरी-चौरा में बंद कराए गए। इसी क्रम में टीम ने जनपद में भ्रमण के दौरान ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन में संलिप्त 10 वाहनों को मौके पर रोका और ऑनलाइन माध्यम से तत्काल जुर्माना जमा कराया। इस प्रकार खनन विभाग द्वारा कुल 17 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिससे लगभग 5,50,000 की राजस्व धनराशि प्राप्त हुई।

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जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट कहा कि जनपद में अवैध खनन एवं ओवरलोडिंग किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में आगे भी इसी प्रकार की निरंतर और कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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अमरूतिया बाजार में उमड़ी आस्था की लहर, 501 कलशों के साथ श्री विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ

महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)जनपद के अमरूतिया बाजार में मंगलवार को श्री श्री विष्णु महायज्ञ का भव्य शुभारंभ 501 कलशों की विशाल एवं श्रद्धामयी कलश यात्रा के साथ किया गया। इस अलौकिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के रंग में रंग दिया। दूर-दराज के गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने और पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए।

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कलश यात्रा की शुरुआत यज्ञ स्थल से हुई और यह निर्धारित मार्गों से होते हुए पवित्र सरोवर एवं नदी घाट तक पहुंची। वहां विधि-विधान के साथ कलशों में पवित्र जल भरा गया, जिसके बाद यात्रा पुनः यज्ञ स्थल पर लौटी। सिर पर कलश धारण किए पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की कतारें और पुरुषों द्वारा किए जा रहे ‘हरि बोल’ और ‘जय श्री विष्णु’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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पूरे अमरूतिया बाजार को भगवा ध्वजों, पुष्प-मालाओं और धार्मिक प्रतीकों से भव्य रूप से सजाया गया था। जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्प-वर्षा कर कलश यात्रियों का स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच निकली यह यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

यज्ञ आयोजन समिति के अनुसार आने वाले दिनों में यहां प्रवचन, विष्णु कथा, भजन-कीर्तन और विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से संत-महात्मा एवं कथावाचक यहां पहुंचेंगे और श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति एवं सदाचार का संदेश देंगे।

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मान्यता है कि अमरूतिया बाजार श्री विष्णु महायज्ञ के आयोजन से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण का वातावरण स्थापित होगा। कलश यात्रा के साथ ही यह महायज्ञ आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया।

पुलिस लाइन व शाखाओं का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर चेतावनी

गोरखपुर (राष्ट्र की परंपरा) एडीजी ज़ोन मुथा अशोक जैन ने सोमवार को गोरखपुर पुलिस लाइन, पुलिस कार्यालय और उससे जुड़ी सभी प्रमुख शाखाओं का व्यापक औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, रख-रखाव, अनुशासन और संसाधनों की उपलब्धता की गहन समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। यह ADG Zone Inspection in Gorakhpur सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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निरीक्षण की शुरुआत पुलिस लाइन स्थित क्वार्टर गार्ड से की गई, जहां ड्यूटी पर तैनात जवानों से बातचीत कर उपस्थिति रजिस्टर, हथियारों के रख-रखाव और सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया। एडीजी जैन ने जवानों को सतर्क, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ रहने का संदेश दिया।

इसके बाद आरटीसी (रिजर्व ट्रेनिंग सेंटर) में प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा करते हुए, प्रशिक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ पुलिस बल को भी तकनीकी रूप से सक्षम होना आवश्यक है।

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एमईएस शाखा में भवनों की स्थिति, मरम्मत कार्य और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया गया। वहीं एमटी शाखा में पुलिस वाहनों की स्थिति, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया गया। एडीजी ने स्पष्ट किया कि गश्त व आपात सेवाओं में लगे वाहन हर समय फिट और तैयार रहने चाहिए।

कैंटीन निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री गुणवत्ता, मूल्य सूची और पारदर्शिता की जांच की गई। उन्होंने जवानों के लिए उचित, स्वच्छ और मानक-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस लाइन परिसर में स्वच्छता व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए, जल्द सुधार के आदेश दिए।

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निरीक्षण के उपरांत एसएसपी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें लंबित प्रकरणों, फाइलों के निस्तारण, रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने सभी शाखाओं को समयसीमा का अनिवार्य रूप से पालन करने की चेतावनी दी।

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इस दौरान एसएसपी राजकरन नय्यर, एसपी सिटी अभिनव त्यागी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एडीजी जैन ने कहा कि पुलिस की साख जनता के विश्वास से जुड़ी होती है, इसलिए हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

लार बाजार में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ी पहल, सीएचसी के नामकरण की उठी मांग

लार, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।ग्रामीण अंचल में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के नामकरण की मांग को लेकर सोमवार को लार बाजार स्थित सीएचसी परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा वर्षों से लंबित मांगों को प्रशासन के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत करना था।

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राष्ट्रीय समानता दल, राष्ट्रीय महिला बहुजन संगठन व विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। बैठक में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिक मुद्दा बनाया गया। वक्ताओं ने बताया कि क्षेत्र में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकों का भारी अभाव है, जिससे मरीजों को दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

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प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय दीप कुशवाहा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। वहीं मुख्य महासचिव अगमस्वरूप कुशवाहा ने स्टाफ की गंभीर कमी पर चिंता जताई।

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बैठक में यह भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सीएचसी लार बाजार का नाम बदलकर “सेनानी रामनरेश कुशवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र” किया जाए, क्योंकि उनका क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है।

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बैठक के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। इससे पहले वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

बी०एस०एस० परशुराम सेना युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने शिवानन्द

दोहरीघाट/मऊ(राष्ट्र की परम्परा)ब्राम्हण स्वयंसेवक संघ (बी०एस०एस०) परशुराम सेना ने संगठन विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मऊ जनपद की जिला कार्यकारिणी में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद पर शिवानन्द उपाध्याय को मनोनीत किया है। इस संबंध में संगठन की ओर से आधिकारिक मनोनयन-पत्र जारी किया गया।

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मनोनयन-पत्र प्रदेश अध्यक्ष पण्डित अजीत कुमार पाण्डेय द्वारा सोमवार को जारी किया गया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि ब्राम्हण समाज की उत्थान एवं संगठन विस्तार के उद्देश्य से यह जिम्मेदारी शिवानन्द उपाध्याय को प्रदान की गई है।

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नेतृत्व कर रहे वंदनीय ब्राम्हण शिरोमणि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनाथ पाण्डेय तथा प्रदेश अध्यक्ष पण्डित अजीत कुमार पाण्डेय ने विश्वास जताया कि शिवानन्द उपाध्याय संगठन की विचारधारा के अनुरूप पूर्ण निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए परशुराम सेना को मजबूती प्रदान करेंगे।

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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवमनोनीत जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा मऊ ब्राम्हण समाज के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों के लिए सदैव अग्रणी भूमिका निभाएंगे तथा संगठन विस्तार हेतु दिन-रात प्रयासरत रहेंगे।

ग्राम पंचायतों को अपनी स्वयं की आय के स्रोत बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना है-श्रवण कुमार चौरसिया

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)देवरिया सदर विकास खण्ड में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के तहत ग्राम पंचायत के स्वयं के आय का स्रोत विषयक प्रत्येक विकास खण्ड से 5 ग्राम प्रधानों और ग्राम सचिवों के का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन एडीपीआरओ श्रवण कुमार चौरसिया ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

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उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अपनी स्वयं की आय के स्रोत बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना है। पंचायत स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर नवाचार अपनाएं, जिससे विकास के नए आयाम स्थापित हो सकें।
डीपीआरसी सहप्रबंधक ब्रजेश नाथ तिवारी ने बताया कि कार्यशाला का केंद्रीय विषय ग्राम पंचायतों की आय में वृद्धि कैसे की जाए, इस पर मंथन करना था। इसमें सभी प्रतिभागियों से ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने हेतु कई अच्छे सुझाव प्राप्त हुए।
मुख्य प्रशिक्षक अजीत कुमार तिवारी ने कहा कि पंचायतों की आय के लिए कर लगाने के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की, जो पंचायतों को वित्तीय रूप से सशक्त बना सकते हैं।

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सहायक विकास अधिकारी पंचायत विंध्याचल सिंह ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षणो के आयोजन से जनजागरूकता फैलती है।
प्रशिक्षक आशुतोष दूबे ने पंचायतों के लिए गैर-कर आय के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया। इनमें बाजार और तालाबों का पट्टा, पार्कों में ओपन जिम स्थापित करना और पुस्तकालय कर जैसे उपाय शामिल थे।
अजय दूबे ने जन सेवा केंद्र से शुल्क या फीस और टूरिस्ट टैक्स के माध्यम से आय बढ़ाने का सुझाव दिया।

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प्रशिक्षक अर्पिता द्विवेदी ने कूड़ा कचरा प्रबंधन पर सुविधा शुल्क लगाने की बात कही और सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन और शुल्क अधिरोपण से आय अर्जित करने के तरीके बताए।
प्रशिक्षक प्रतिभा ने गौशाला के उत्पादों से आय जैसे अन्य उपायों पर भी चर्चा की।जिससे पंचायतें अपनी आय बढ़ा सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

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उक्त अवसर पर दीनानाथ प्रजापति लिए, शशिभूषण मिश्रा, अविनाश पासवान, यशपाल सिंह, चंदू पासवान, रुपेश यादव, शुभम गुप्ता, हरिपाल यादव, आनन्द मणि,देवेश उपाध्याय, रविन्द्र राजभर आदि मौजूद रहे।

पथरा गांव में जहरीला लड्डू बना मौत का कारण? दो मासूमों की दर्दनाक मौत

औरंगाबाद के पथरा गांव में संदिग्ध लड्डू खाने से मासूम भाई-बहन की मौत, जांच में जुटी पुलिस

औरंगाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिले के ओबरा प्रखंड के खुदवा थाना क्षेत्र स्थित पथरा गांव में रविवार रात हुई एक दर्दनाक और रहस्यमयी घटना से पूरा इलाका दहशत में है। संदिग्ध परिस्थितियों में एक छह वर्षीय बच्चे और उसकी आठ माह की मासूम बहन की मौत ने गांव में शोक और भय का माहौल पैदा कर दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिवार सदमे में है और गांव में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

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मृतकों की पहचान गांव निवासी रवि भारती के पुत्र दिव्यांशु कुमार (6 वर्ष) और पुत्री अंशिका कुमारी (8 माह) के रूप में की गई है। परिजनों के अनुसार, रविवार की देर शाम किसी अज्ञात व्यक्ति ने दिव्यांशु को एक लड्डू दिया था, जिसे उसने खाया और उसमें से अपनी छोटी बहन को भी खिला दिया। कुछ समय बाद अंशिका की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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घर में कोहराम मच ही रहा था कि थोड़ी देर बाद दिव्यांशु की तबीयत भी बिगड़ने लगी। उसे तत्काल दाउदनगर के एक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन आधी रात के बाद उसकी भी मौत हो गई। मासूम भाई-बहन की इस तरह मौत होने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई है।

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घटना की सूचना मिलते ही खुदवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस संदिग्ध लड्डू देने वाले व्यक्ति की तलाश कर रही है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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दाउदनगर के एसडीपीओ ने भी गांव पहुंचकर परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। यह मामला न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

150वीं वर्षगांठ पर वंदे मातरम् की गूंज: स्वदेशी आंदोलन से आज तक की कहानी

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में गूंजा राष्ट्रप्रेम, मोदी बोले – यह गीत नहीं, स्वतंत्रता की चेतना है

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए इसे केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् वह शक्ति थी जिसने गुलामी के अंधकार में भी देशवासियों के भीतर स्वतंत्रता की लौ जलाए रखी और उन्हें एक साझा लक्ष्य के लिए संगठित किया।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1905 में जब अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था, तब पूरा देश स्वदेशी आंदोलन की आग में तप रहा था। उस समय वंदे मातरम् एक नारे से कहीं ज्यादा बन चुका था — यह जन-जन की प्रेरणा था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस भावगीत ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। यही कारण था कि ब्रिटिश सरकार ने न केवल इस गीत के गाने और छापने पर प्रतिबंध लगाया, बल्कि इसके उच्चारण तक पर सख्त सजा का प्रावधान कर दिया था।

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मोदी ने कहा कि अंग्रेजों ने “बांटो और राज करो” की नीति के तहत बंगाल को निशाना बनाया, क्योंकि वह जानते थे कि बंगाल उस समय भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैचारिक शक्ति का केंद्र था। उनका मानना था कि यदि बंगाल टूट गया तो देश भी कमजोर हो जाएगा। लेकिन वंदे मातरम् एक चट्टान की तरह उस साजिश के सामने खड़ा रहा और लोगों को एकजुट करता रहा।

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प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब बापू ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के रूप में देखा था। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब इसकी भावना इतनी महान और पवित्र थी, तब बीते समय में इसके साथ अन्याय और विवाद क्यों जोड़े गए? आखिर कौन सी ताकत थी जिसने राष्ट्रीय चेतना के इस प्रतीक को राजनीतिक बहसों में उलझा दिया?

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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दुनिया के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा काव्य हो, जो सदियों तक करोड़ों लोगों को एक ही लक्ष्य के लिए प्रेरित करता रहा हो। यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है।”

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वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर दिया गया यह संदेश केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति, एकता और आत्मसम्मान का प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।

थाईलैंड कम्बोडिया संघर्ष: ट्रम्प की शांति योजना फिर से विफल

थाईलैंड ()पिछले हफ्तों में तनावग्रस्त Thailand–Cambodia सीमा पर फिर से युद्धविराम योजना असफल साबित हुई है। सोमवार की सुबह थाई वायु सैन्य जवानों ने कम्बोडियाई ठिकानों पर हवाई हमले किए — जिससे दोनों देशों के बीच विवाद और उग्र हो गया।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, कम्बोडियाई बलों ने सुबह करीब 7 बजे नाम युआन जिले के चोंग बोक क्षेत्र में थाई सैन्य और नागरिक इलाकों पर रॉकेट और तोपों से हमला किया। इस हमले में एक थाई जवान शहीद हो गया और चार अन्य घायल हुए। जब थाई सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, तो लड़ाकू विमानों के जरिए कम्बोडिया के हथियार स्टॉक और मोर्टार रेंज पर निशाना साधा गया। थाई जनरल Winthai Suwari ने कहा कि यह हमला उन ठिकानों पर हुआ जो पहले ही अनूपोंग स्ट्रांगपॉइंट तक चल रही गोलाबारी में इस्तेमाल किए गए थे।

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कंबोडिया की ओर से आरोप है कि थाई सेनाओं ने सुबह 5:04 बजे प्रीह विहियर प्रांत में पहला हमला किया — और यह हमला सितंबर में हुए शांति समझौते का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने इसे अमानवीय तथा провोकैटिव कदम बताया।

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यह झड़प उस समय हुई है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मध्यस्थता में 26 अक्टूबर 2025 को कुआलालंपुर में हस्ताक्षरित शांति समझौते को थाईलैंड ने निलंबित कर दिया था। कम्बोडिया में विस्फोट में थाई सैनिकों की घायल हालत के बाद नवंबर में दोनों पक्षों के बीच मसौदा बार-बार रद्द हुआ था। तब से संघर्ष जारी है, और ट्रम्प की 10 महीनों में 8 युद्ध समाप्त करने की घोषणा इस बार भी सफल नहीं हो सकी।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं, हर्ष फायरिंग ने ली युवक की जान

बरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद अंतर्गत सिराउली थाना क्षेत्र के शिवपुरी गांव में एक शादी समारोह उस समय मातम में बदल गया, जब बारात के दौरान हर्ष फायरिंग की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि रविवार रात करीब नौ बजे बारात जैसे ही पास के एक बैंक्वेट हॉल के समीप पहुंची, तभी कुछ लोगों ने कथित तौर पर जश्न मनाते हुए हवा में गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

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इसी दौरान बारात में शामिल 23 वर्षीय युवक रिजवान के माथे पर एक गोली लग गई। गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और समारोह स्थल पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। सिराउली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घायल युवक को गंभीर हालत में इलाज के लिए बरेली जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार देर रात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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थाना प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला हर्ष फायरिंग से बाराती की मौत का प्रतीत हो रहा है। आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अभियान चला रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गोली किसने चलाई और घटना के समय मौके पर कौन-कौन मौजूद था।

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गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शादी, त्योहारों और अन्य आयोजनों में हर्ष फायरिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। इस दुखद हादसे के बाद भी भारी मन से शादी की अन्य रस्में पूरी की गईं।

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पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे कानून का पालन करें और किसी भी प्रकार की फायरिंग से दूर रहें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

बिहार राजनीति में नया विवाद, वायरल वीडियो से तेज प्रताप यादव फिर चर्चा में

तेज प्रताप यादव पर सहयोगी से मारपीट और आपत्तिजनक वीडियो बनाने का गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा राजनीतिक भूचाल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की राजनीति से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव पर उनके ही एक करीबी सहयोगी सौरभ उर्फ अविनाश ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में सौरभ यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि तेज प्रताप यादव के पटना स्थित आवास पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।

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सौरभ के मुताबिक, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब वह “खान सर के भाई” की रिसेप्शन पार्टी में तेज प्रताप यादव के साथ शामिल हुए थे। पार्टी के दौरान उनका मोबाइल फोन कथित तौर पर जब्त कर लिया गया। बाद में उन्हें फोन लेने के बहाने तेज प्रताप यादव के आवास पर बुलाया गया, जहां कथित रूप से उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई।

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सौरभ का कहना है कि तेज प्रताप यादव ने उन पर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारपीट के बाद उनका आपत्तिजनक वीडियो बनाया गया और उसे जानबूझकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे उनकी सामाजिक छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।

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यह मामला अब सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है। वीडियो वायरल होते ही तेज प्रताप यादव एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अब तक तेज प्रताप यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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फिलहाल यह मामला संवेदनशील होने के कारण जांच के दायरे में आ सकता है और पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे, इस प्रकरण पर स्थिति और स्पष्ट होती जाएगी।

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यह घटना बिहार की राजनीति, सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

दो नाबालिग लड़कियाँ और तीन युवक—आख़िर कैसी थी वो यात्रा जो हादसे में बदल गई?

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लुधियाना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लुधियाना के लाडोवाल क्षेत्र के पास रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहाँ एक तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर डिवाइडर से जा टकराई। दुर्घटना में कार सवार दो नाबालिग लड़कियों सहित कुल पाँच लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी में बताया जा रहा है कि सभी लोग जगरांव इलाके के रहने वाले थे। घटनास्थल पर पहुंची थाना लाडोवाल पुलिस ने पाँचों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

अमृतसर की ओर जा रही थी कार

जानकारी के मुताबिक, कार में तीन लड़के और दो नाबालिग लड़कियाँ सवार थीं। यह सभी जगरांव से अमृतसर की दिशा में जा रहे थे। बताया जा रहा है कि कार तेज रफ्तार में थी और अचानक बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई, जिससे मौके पर ही सभी की मौत हो गई।

हादसे के बाद आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार को सीज़ कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतकों के परिवारों का पता लगाने के लिए भी टीम को लगाया गया है।

संस्कृति का संघर्ष: प्राचीन विरासत और आधुनिक चमक के बीच समाज किस दिशा में बढ़ रहा है?

✍️ डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। समाज आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसकी जड़ें प्राचीन विरासत में हैं, जबकि नजरें आधुनिक भविष्य पर टिकी हैं। इस दोराहे पर संस्कृति का संघर्ष गहराता जा रहा है—एक ओर परंपराओं की गहराई और सदियों पुरानी सीख, तो दूसरी ओर आधुनिकता की तेज़ चमक, स्वतंत्रता और तेजी से बदलती जीवनशैली।

प्राचीन विरासत का महत्व

हमारी सांस्कृतिक विरासत ने समाज को संस्कार, रिश्तों की मर्यादा और सामूहिक जीवन का मजबूत आधार दिया है। यही हमारी पहचान और सामाजिक आत्मा का स्रोत रही है।
लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकता ने नई सुविधाएँ, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रगति के अवसर प्रदान किए, संतुलन धीरे-धीरे बदलने लगा।

परिवारिक ढांचे पर गहरा असर

संयुक्त परिवारों का टूटना, बुजुर्गों की उपेक्षा और रिश्तों में बढ़ती दूरी इस सांस्कृतिक संघर्ष का प्रत्यक्ष परिणाम है।
जहाँ पहले अनुभव, परंपरा और मूल्य जीवन का मार्गदर्शन करते थे, अब तात्कालिक लाभ, दिखावा और आधुनिक सोच प्राथमिकता बनते जा रहे हैं।

तकनीक ने तेज़ की रफ़्तार, घटाई गहराई

मोबाइल और सोशल मीडिया ने जीवन को तेज़ तो बनाया, लेकिन संवाद की आत्मीयता कम कर दी।
पर्व-त्योहार, सामाजिक समारोह और पारंपरिक आयोजन अब औपचारिकता तक सीमित होते दिख रहे हैं। संस्कृति, जिसे कभी जीवन का हिस्सा माना जाता था, अब प्रदर्शन की वस्तु बनती जा रही है।

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नैतिक मूल्यों में गिरावट का खतरा

जब आधुनिकता केवल बाहरी चमक रह जाए और विरासत को “पुरानी सोच” समझकर छोड़ दिया जाए, तब समाज दिशाहीन हो जाता है।
मूल्यहीन विकास अंततः असंतोष और सामाजिक असंतुलन को जन्म देता है।

समाधान: समन्वय से बनेगी नई राह

संस्कृति के इस संघर्ष का हल किसी एक पक्ष की जीत में नहीं, बल्कि दोनों के संतुलित मेल में है—

• विरासत से संस्कार, संवेदनशीलता और संतुलन लें

• आधुनिकता से विज्ञान, समानता और विवेक

यही संगम समाज को न केवल प्रगति की राह पर लेकर जाएगा, बल्कि उसकी सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रखेगा।

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रिवाज बनाम रफ़्तार: बदलते दौर में समाज किस दिशा में जा रहा है?

✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का समाज एक अनोखी रेस का हिस्सा बन चुका है—एक ओर सदियों से चली आ रही परंपराएँ और रिवाज, तो दूसरी ओर तेज़ रफ्तार वाली आधुनिकता। सवाल यह है कि इस दौड़ में जीत आखिर किसकी होगी, या क्या समाज इन दोनों के बीच कोई नया संतुलन खोज पाएगा?

परंपराएँ समाज को पहचान और जड़ें देती हैं। पीढ़ियों से चले आ रहे रिवाज जीवन में अनुशासन, संस्कार और सामूहिकता की सीख देते रहे हैं। परिवार व्यवस्था, सामाजिक मर्यादाएँ और सांस्कृतिक मूल्य इन रिवाजों से ही बनते हैं।

दूसरी ओर, तेज़ रफ्तार वाली जीवनशैली आधुनिक दौर की पहचान बन चुकी है—जहाँ समय बचाना, आगे बढ़ना और व्यक्तिगत सफलता सर्वोच्च मानी जाती है। समस्या तब उभरती है जब यही रफ्तार रिश्तों और संवेदनाओं को पीछे छोड़ देती है।

परिवारिक ढांचे पर गहरा असर

संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ रहा है। संवाद की जगह संदेशों ने ले ली है और साथ की जगह व्यस्तता ने। बुजुर्ग अपने अनुभवों के साथ अकेले होते जा रहे हैं, जबकि युवा उपलब्धियों की दौड़ में मानसिक थकान झेल रहे हैं।

रिवाज कई बार स्थिर और धीमे लगते हैं, जबकि आधुनिकता की रफ्तार विचारों को सतही और क्षणिक बना देती है।

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तकनीक ने बदल दी जीवन की दिशा

मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने रफ्तार को नई ऊंचाइयाँ दी हैं। दुनिया अब हाथों में है, लेकिन रिश्ते दूर होते जा रहे हैं। त्योहार अब संस्कृति से अधिक ‘कंटेंट’ बनकर रह गए हैं—दिखावा बढ़ रहा है और भावनाएँ कम होती जा रही हैं।

जड़ों से कटने का खतरा

सबसे बड़ा डर यह है कि कहीं समाज अपनी जड़ों से पूरी तरह न कट जाए।

• रिवाज बिना आधुनिक सोच के बोझ बन जाते हैं।

• रफ्तार बिना संस्कारों के दिशाहीन हो जाती है।

इस रेस में जीत किसी एक की नहीं, बल्कि संतुलन की होगी। जब परंपराएँ समय के साथ बदलें और आधुनिकता संस्कारों का सम्मान करे, तभी समाज सही दिशा में आगे बढ़ सकता है। अन्यथा, मुद्दा सिर्फ जीत का नहीं रहेगा, बल्कि पहचान बचाने का भी होगा।

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गंडक नदी पर जल्द शुरू होगा पक्का पुल निर्माण, 649 करोड़ की परियोजना को मिली गति

खड्डा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गंडक नदी के भैसहा घाट पर बनने वाले बहुप्रतीक्षित पक्के पुल के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। रविवार को विधायक विवेकानंद पांडेय की अगुआई में लोकनिर्माण विभाग, सेतु निगम और बाढ़ खंड के शीर्ष अभियंताओं ने संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान पुल के अंतिम डिजाइन और तकनीकी मानकों पर विस्तृत चर्चा की गई।

स्थलीय निरीक्षण के बाद डिजाइन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज

अभियंताओं की संयुक्त टीम ने नदी के भौगोलिक बदलाव, जलधारा, बाढ़ के जोखिम और तटबंध की स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया। टीम ने सुनिश्चित किया कि प्रस्तावित पुल आने वाले वर्षों में भी सुरक्षित और टिकाऊ रहे। इसके बाद खड्डा स्थित IPL चीनी मिल के अतिथिशाला में संभावित डिजाइन और नक्शे प्रस्तुत कर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

सीएम योगी की घोषणा के बाद परियोजना को मिली रफ्तार

वर्ष 2024 में बाढ़ निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुर्कहा की जनसभा में भैसहा घाट पर पक्का पुल निर्माण की घोषणा की थी। यह मांग स्थानीय सांसद विजय कुमार दुबे और विधायक विवेकानंद पांडेय ने रखी थी।
यह पुल गंडक नदी के पार बसे लगभग 50 हजार लोगों को सीधे सड़क मार्ग से जोड़ेगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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649 करोड़ की लागत से बनेगा 4.5 किलोमीटर लंबा पुल

विशेषज्ञ टीम ने सर्वेक्षण के बाद अनुमान लगाया कि प्रस्तावित पुल लगभग 4.5 किलोमीटर (कुल लंबाई सहित) होगा और इसके निर्माण पर 649 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

• पुल छितौनी तटबंध के किलोमीटर 8.800 के पास से शुरू होगा।

• दाहिने तरफ 1500 मीटर लंबा एप्रोच, जो खड्डा–भैसहा मार्ग से जुड़ेगा।

• बाईं ओर मरचहवा की दिशा में 2 किलोमीटर से अधिक लंबा एप्रोच रोड बनेगा।

स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत

इस पुल के निर्माण से क्षेत्र के लाखों लोगों की वर्षों पुरानीपुरानी मांग पूरी होगी। नदी पार आने-जाने में होने वाली दिक्कतें कम होंगी और स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार व आवागमन में तेजी आएगी।

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