Sunday, June 28, 2026
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सामाजिक असमानता पर रिपोर्ट: अंधेरी रातों में आम जनता का संघर्ष, उजालों पर खास लोगों का कब्ज़ा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां सामाजिक असमानता पर रिपोर्ट लगातार गहराती जा रही है। बड़ी आबादी अंधेरी रातों में संघर्ष करती है, जबकि उजालों पर मुट्ठीभर प्रभावशाली लोगों का अधिकार कायम है। मेहनतकश वर्ग की पीड़ा, परिश्रम और प्रतीक्षा का फल अक्सर उन हाथों में चला जाता है, जिनका जमीनी संघर्ष से कोई सीधा संबंध नहीं होता।

गरीब, किसान, मजदूर, श्रमिक और निम्न-मध्यम वर्ग की रातें समस्याओं से घिरी होती हैं। कोई रोटी की तलाश में रात काटता है, कोई मौसम और फसल की चिंता में जागता है, तो कोई रोजगार के अनिश्चित भविष्य में सपनों को दबाकर सोता है। लेकिन हर सुबह उनके सामने वही अधूरी उम्मीदें और पुराने संघर्ष खड़े मिलते हैं।

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इसके विपरीत, विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग पहले से तय उजालों में जीवन व्यतीत करता है। सत्ता, संसाधन और सिफारिश उनके लिए सुरक्षा कवच बन जाते हैं। गरीबों के नाम पर योजनाएं बनती हैं, लेकिन लाभ अक्सर उसी वर्ग को मिलता है जिसकी पहुंच व्यवस्था के शक्तिशाली गलियारों तक आसानी से होती है। यह परिस्थिति केवल आर्थिक अंतर नहीं दिखाती, बल्कि यह सामाजिक और नैतिक असमानता की भी गहरी तस्वीर पेश करती है।

जब मेहनत को उसका मूल्य नहीं मिलता और पहचान के आधार पर अवसरों का बंटवारा होता है, तब व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास कमजोर पड़ने लगता है। लोकतंत्र की जड़ें वहीं हिलती हैं, जहां न्याय और बराबरी कमजोर पड़ जाती है।

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आज जरूरत इस बात की है कि उजालों का अधिकार सबके लिए समान हो। संघर्ष को सम्मान मिले और अवसर योग्यता, आवश्यकता और पारदर्शी प्रणाली के आधार पर वितरित हों। अंधेरी रातों में संघर्ष कर रहे वर्ग के जीवन में वास्तविक रोशनी तभी आएगी, जब विकास केवल कुछ लोगों का अधिकार न होकर सबका हक बने।

Atal Pension Yojana Eligibility: किस उम्र में मिलती है पेंशन का हक? जानें पूरी पात्रता और निवेश नियम

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई वित्तीय योजनाएं चला रही है, जिनमें अटल पेंशन योजना (APY) सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक है। यह योजना खासतौर पर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इस योजना में शामिल पात्र व्यक्तियों को 60 वर्ष की आयु के बाद हर महीने 1000 से 5000 रुपये तक की पेंशन प्रदान की जाती है।

Atal Pension Yojana Eligibility के अनुसार, इस योजना में शामिल होने के लिए आयु सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। योजना का लाभ केवल 18 से 40 वर्ष तक के लोग ही ले सकते हैं। योजना में कम से कम 20 वर्ष तक लगातार निवेश करना आवश्यक है, तभी व्यक्ति 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर मासिक पेंशन प्राप्त कर सकेगा।

निवेश राशि आपकी आयु के आधार पर तय होती है। जैसे यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष की उम्र में APY चुनता है और 60 वर्ष के बाद 5000 रुपये मासिक पेंशन चाहता है, तो उसे हर महीने केवल 210 रुपये का योगदान करना होता है। वहीं 30 वर्ष की उम्र में शामिल होने पर इसी पेंशन राशि के लिए 577 रुपये प्रतिमाह निवेश करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ मासिक योगदान भी बढ़ता जाता है।

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योजना में कैसे जुड़ें?
Atal Pension Yojana Eligibility पूरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को अपनी बैंक शाखा में जाकर योजना से जुड़ना होता है। बैंक में KYC प्रक्रिया के बाद व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार 1,000 से 5,000 रुपये मासिक पेंशन वाला विकल्प चुन सकता है। इसके बाद बैंक खाता योजना से लिंक कर दिया जाता है और चुनी गई राशि हर महीने ऑटो-डिडक्ट होकर जमा होती रहती है।

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जो लोग सुरक्षित और स्थिर भविष्य की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए Atal Pension Yojana एक विश्वसनीय और कम लागत वाला विकल्प बनकर उभर रहा है।

Lakhpati Didi Yojana: महिलाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। केंद्र सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इन्हीं प्रयासों में शुरू की गई है Lakhpati Didi Yojana, जिसे वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

Lakhpati Didi Yojana के तहत पात्र महिलाओं को सरकार की ओर से 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त लोन प्रदान किया जाता है। यह लोन महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय की शुरुआत करने, पहले से चल रहे काम को आगे बढ़ाने या अन्य आय-उत्पादक गतिविधियों में उपयोग कर सकती हैं। बिना ब्याज वाले इस लोन ने कई महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग भी दी जाती है, ताकि वे किसी काम को प्रोफेशनल तरीके से सीखकर अपना व्यवसाय बेहतर ढंग से शुरू कर सकें। यह ट्रेनिंग महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से प्रदान की जाती है।

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इस योजना में आवेदन करने के लिए महिलाओं को किसी स्वयं सहायता समूह से जुड़ना अनिवार्य है। SHG से जुड़ने के बाद महिलाएं स्किल ट्रेनिंग प्राप्त करती हैं और उसके बाद अपना बिजनेस प्लान तैयार करती हैं। इस बिजनेस प्लान में प्रस्तावित व्यवसाय, लागत, सामान और आय के स्रोतों की जानकारी शामिल होती है।

Lakhpati Didi Yojana में आवेदन करने के लिए महिलाएं ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा SHG कार्यालय, ग्रामीण विकास विभाग, या बैंक शाखा के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन भी संभव है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और बैंक पासबुक शामिल हैं। दस्तावेजों की पूरी जानकारी होने पर आवेदन प्रक्रिया सरल और तेज हो जाती है।

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महीनेभर की वैलिडिटी वाला Airtel 349 Plan क्यों है यूजर्स की पहली पसंद?

भारतीय टेलीकॉम बाजार में एयरटेल हमेशा से अपने आकर्षक प्लान और मजबूत नेटवर्क कवरेज की वजह से लोकप्रिय रहा है। इसी कड़ी में कंपनी अपने यूजर्स के लिए ऐसा प्रीपेड प्लान लेकर आई है, जिसकी कीमत कम है लेकिन बेनिफिट्स प्रीमियम लेवल के मिलते हैं। यह प्लान खास तौर पर उन ग्राहकों के लिए बनाया गया है, जो इंटरनेट, कॉलिंग और ओटीटी का नियमित उपयोग करते हैं।

एयरटेल का ₹349 प्रीपेड प्लान

एयरटेल का यह प्लान ₹349 की कीमत में आता है और इसमें 28 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इस प्लान में मिलने वाले बेनिफिट्स इसे अपने सेगमेंट में बेहद खास बनाते हैं।

डाटा बेनिफिट – 5G यूजर्स के लिए जबरदस्त ऑफर

यदि आपके पास 5G स्मार्टफोन है और आप Airtel 5G Plus कवरेज वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो आपको इस प्लान के तहत अनलिमिटेड 5G इंटरनेट मिलता है।

4G स्मार्टफोन यूजर्स के लिए प्लान में 2GB डाटा प्रति दिन दिया जा रहा है, जो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन क्लास, गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग के लिए पर्याप्त है।

वॉयस कॉलिंग और एसएमएस

• अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग

• रोजाना 100 SMS

यह प्लान उन लोगों के लिए आदर्श है, जिनकी दिनभर कॉलिंग की जरूरत रहती है।

ऐड-ऑन और एक्स्ट्रा बेनिफिट्स

एयरटेल अपने ₹349 प्लान में कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी दे रहा है—

• ओटीटी बेनिफिट्स

• फ्री हेलोट्यून

• Apple Music का फ्री एक्सेस

इन एक्स्ट्रा सर्विसेज की वजह से यह प्लान अपने प्राइस पॉइंट पर बाकी प्लानों के मुकाबले ज्यादा वैल्यू ऑफर करता है।

यदि आप महीनेभर की वैलिडिटी वाले एक किफायती और पावरफुल प्लान की तलाश में हैं, तो एयरटेल का ₹349 प्लान एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

प्रतिभा, संघर्ष और सफलता की अद्भुत कहानियों का दिन

🌟 11 दिसंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व — इतिहास में अमर हुए प्रेरणा-स्तंभ

हर नए दिन की तरह 11 दिसंबर भी इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। इस दिन जन्म लेने वाले अनेक विभूतियों ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें स्मरण करती रहेंगी। चाहे खेल जगत हो, कला-संगीत, साहित्य, राजनीति, आध्यात्म या राष्ट्र निर्माण—हर दिशा में इस दिन जन्मे व्यक्तियों ने देश और दुनिया को नई दिशा देने का कार्य किया। आइए, इन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों के जीवन, जन्मस्थल और राष्ट्रहित में किए गए अप्रतिम योगदान को विस्तार से जानें।

अनिल कुमार मान (जन्म: 1980)
प्रसिद्ध भारतीय पहलवान
हरियाणा के रोहतक जिले में जन्मे अनिल कुमार मान भारतीय कुश्ती के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक रहे। भारतीय पारंपरिक जवाब–देह कुश्ती शैली में उन्होंने देश का मान बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आगे बढ़कर वे युवाओं के लिए संघर्ष, अनुशासन और लगन की मिसाल बने।

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ज्योतिर्मयी सिकदर (जन्म: 1969)
अंतरराष्ट्रीय एथलीट और स्वर्णिम धाविका
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में जन्मी ज्योतिर्मयी सिकदर भारतीय एथलेटिक्स की पहचान रहीं। 800 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में अपनी अद्भुत गति और दृढ़ संकल्प के बल पर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। खेल रत्न सम्मान से सम्मानित ज्योतिर्मयी ने खेलों में महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की।

विश्वनाथन आनंद (जन्म: 1969)
भारत के गौरव, विश्व शतरंज चैंपियन
चेन्नई, तमिलनाडु में जन्मे ‘द लाइटनिंग किड’ कहे जाने वाले विश्वनाथन आनंद ने शतरंज को भारत के घर–घर तक लोकप्रिय बनाया। पाँच बार विश्व चैंपियन बने और पहली बार भारत को वैश्विक शतरंज मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी रणनीति, गति और धैर्य ने उन्हें विश्व के महानतम ग्रैंडमास्टर्स में स्थान दिलाया।

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आनंद शंकर (जन्म: 1942)
प्रसिद्ध भारतीय गीतकार व संगीतकार
उत्तर प्रदेश में जन्मे आनंद शंकर भारतीय संगीत जगत का एक संवेदनशील और मधुर नाम रहे। उनके गीतों और धुनों ने भारतीय सिनेमा में भावनाओं को गहराई से उकेरने का काम किया। उन्होंने साहित्यिक और सामाजिक मूल्यों को संगीत के माध्यम से मजबूती दी।
प्रणब मुखर्जी (जन्म: 1935)
पूर्व राष्ट्रपति, कुशल राजनेता व अर्थशास्त्री
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में जन्मे प्रणब मुखर्जी भारत के सबसे अनुभवी राजनेताओं में गिने जाते हैं। वित्त, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व किया। 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रहित में उनकी नीति-निर्माण क्षमता और सादगी आज भी प्रेरणादायक है।
सलीम दुर्रानी (जन्म: 1934)
भारत के महान ऑलराउंडर, अफगान मूल के सितारे
कंधार (अफगानिस्तान) में जन्मे और भारत में पले-बढ़े सलीम दुर्रानी अपनी करिश्माई बल्लेबाजी और सटीक गेंदबाजी के लिए मशहूर थे। वे पहले ऐसे भारतीय खिलाड़ी थे जिन्हें दर्शक मांग पर छक्के लगाते देखने का सौभाग्य पाते थे। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अमिट है।
ओशो रजनीश (जन्म: 1931)
आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक
मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा गांव में जन्मे ओशो आधुनिक आध्यात्मिकता के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक थे। उनकी वाणी, ध्यान पद्धतियाँ और स्वतंत्र सोच ने करोड़ों लोगों को जीवन और साधना का नया दृष्टिकोण दिया। दुनिया भर में उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का अनुसरण करते हैं।
दिलीप कुमार (जन्म: 1922)
हिन्दी सिनेमा के ‘ट्रेजडी किंग’
पेशावर (अब पाकिस्तान) में जन्मे मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ़ दिलीप कुमार भारतीय फिल्म उद्योग के अमर अभिनेता थे। उनकी अभिनय की गंभीरता, संवाद-अभिनय और भावनात्मक गहराई ने सिनेमा को नई ऊँचाइयाँ दीं। पद्मविभूषण से सम्मानित दिलीप कुमार भारतीय फिल्म इतिहास की धरोहर हैं।
अयोध्या नाथ खोसला (जन्म: 1892)
इंजीनियर, शिक्षा–विद और राजनेता
सियालकोट (अब पाकिस्तान) में जन्मे खोसला जल प्रबंधन के विशेषज्ञ रहे। उन्होंने भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना जैसे बड़े राष्ट्रीय निर्माण को गति दी। बाद में वे उड़ीसा के राज्यपाल भी बने। देश की आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने में उनका योगदान असाधारण रहा।
सुब्रह्मण्य भारती (जन्म: 1882)
तमिल साहित्य के अमर कवि और राष्ट्रभक्त
तमिलनाडु के एट्टयापुरम में जन्मे ‘भारती’ आधुनिक तमिल कविता के जनक माने जाते हैं। उनकी कविताएँ स्वतंत्रता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरण का प्रतीक थीं। आज भी वे भारतीय साहित्य का गौरव हैं।
अल्फ्रेड डोमोसे (जन्म: 1810)
फ्रांस के महान कवि और लेखक
पेरिस में जन्मे अल्फ्रेड डोमोसे फ्रांसीसी साहित्य के भावुक और प्रभावशाली कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम और जीवनदर्शन पर आधारित थीं। यूरोपीय साहित्य के इतिहास में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

“भगवान विष्णु की दिव्य लीला: अधर्म का अंत और करुणा का उदय

⭐ शास्त्रोक्त कथा • भगवान विष्णु अवतार महागाथा

(धर्म की विजय और करुणा के दीप से आलोकित एक दिव्य प्रकरण)
हमने जाना कि कैसे अधर्म की जड़ें फैलने लगीं और कैसे भगवान विष्णु ने धर्म-संरक्षण हेतु अपना दिव्य अवतार धारण किया। जहाँ इस अवतार की लीला एक नए मोड़ पर पहुँचती है। यह वह समय था जब संसार अन्याय, अत्याचार और अज्ञान के अंधकार में डूबता जा रहा था, परंतु धर्म का दीप अभी भी पूरी शक्ति से जल रहा था—क्योंकि उसे स्वयं श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त था।
अध्याय आरंभ—अधर्म की छाया और भक्तों का पुकारना

समय अपनी गति से आगे बढ़ रहा था। पर जैसे-जैसे असुरों का साम्राज्य फैलने लगा, वैसे-वैसे सत्वगुण की लौ मद्धम होने लगी। यही वह क्षण था जब पृथ्वी—भूदेवी—ने पुनः भगवान विष्णु का स्मरण किया।

भक्तों की वेदनाएँ आकाश तक जा पहुँचीं।
निष्पापों के आँसू, पीड़ितों की व्यथा, और धर्मात्माओं की आहें—सब मिलकर एक दिव्य पुकार बन गई थीं।

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इसी पुकार ने वैकुण्ठ लोक के शांत वातावरण को भी आंदोलित कर दिया। शंख बज उठा, चक्र चमका, और भगवान बोले—

“जब-जब धर्म की क्षीणता होती है, मैं स्वयं अवतरित होता हूँ।”

यह मात्र घोषणा नहीं थी बल्कि युगों-युगों से चली आ रही दिव्य प्रतिज्ञा का पुनः स्मरण था।

दिव्य अवतार की नई लीला—शस्त्र नहीं, शांति का प्रकाश

इस अवतार की विशेषता असाधारण थी।
यह अवतार केवल युद्ध का प्रतीक नहीं था—यह करुणा, धर्म, क्षमा, न्याय और समत्व का मूर्त रूप था।
जहाँ शस्त्र आवश्यक था, वहाँ शस्त्र का प्रयोग हुआ;पर जहाँ मन परिवर्तन संभव था, वहाँ भगवान ने अपना सबसे शक्तिशाली अस्त्र जगाया।
“धर्म का प्रकाश।”
यह प्रकाश किसी आग, किसी वज्र, किसी शस्त्र जैसा नहीं था।
यह वह तेज था जो अज्ञान को जलाता था, क्रोध को पिघलाता था, और पाप को विवेक में बदल देता था।

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अहंकार का महासागर और विष्णु की करुणा
असुरों का स्वामी, जिसने अपने भीतर अहंकार का अथाह समुद्र बना लिया था, अब स्वयं को अजेय समझने लगा था।
उसके किले सोने के थे, सेना असंख्य थी, पर हृदय अंधकार से भरा था।
भगवान विष्णु उसके सामने प्रकट हुए।
परंतु उनका रूप युद्ध के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान के उद्घाटन के लिए था।

असुर चकित था—
“मैं हथियारों से लड़ा हूँ, पर यह दिव्य तेज क्या है? यह शांति, यह स्थिरता, यह करुणा—ये किस प्रकार की शक्ति है?”
विष्णु मुस्कुराए—
“सबसे बड़ी विजय शत्रु को पराजित करने में नहीं, उसे सत्य का मार्ग दिखाने में है।”
उनकी वाणी ने असुर के हृदय में हलचल पैदा की। कुछ पलों के लिए वह शक्ति-विभ्रम भूल गया और अपनी वास्तविक स्थिति को देख सका।
धर्म का क्षण—जहाँ शत्रु भी शिष्य बन सकता है
विष्णु ने कहा—
“अधर्म का विनाश केवल युद्ध से नहीं होता—अभिमान का त्याग ही अधर्म के अंत का प्रारंभ है।”
ये दिव्य शब्द असुर के कानों में नहीं, उसके अंतर में गूंजे।
पहली बार उसे अपनी सीमाओं का अनुभव हुआ।

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वह बोला—
“प्रभु, यदि मैं भूल गया, तो क्या मेरी क्षमा संभव है?”
भगवान का उत्तर वही था जिससे युग-युगांत तक भक्तों का मन संबल पाता है—
“जिस क्षण तुम सत्य की ओर मुड़ते हो, उसी क्षण ईश्वर तुम्हें स्वीकार कर लेते हैं।”
इस एक वचन से उसके भीतर का अंधकार टूट गया।
जो असुर कभी भय का प्रतीक था, वह क्षणभर में पश्चाताप का, और फिर परिवर्तन का प्रतीक बन गया।
लोककल्याण की दिशा—विष्णु का धर्मपथ
असुरों के पश्चाताप और परिवर्तन के बाद भगवान विष्णु ने पूरे लोक में आस्था का दीप पुनः प्रज्वलित किया।

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उन्होंने धर्म के पाँच स्तंभों की स्थापना की—

  1. सत्य – विचार, व्यवहार और निर्णय में स्पष्टता।
  2. धर्म – कर्तव्य पालन, न्याय और सह-अस्तित्व।
  3. करुणा – अहंकार की जगह करुणाभाव।
  4. क्षमा – परिवर्तन का द्वार।
  5. समता – सभी जीवों में एक ही ब्रह्म तत्व का दर्शन।
    इन पाँचों स्तंभों पर आधारित समाज ही स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्ध होता है।
    भक्तों के लिए संदेश—आस्था ही साकार रूप देती है
    भगवान विष्णु ने जाते-जाते यही कहा—
    “जहाँ आस्था होती है, वहाँ मार्ग स्वयं बनते हैं; जहाँ सत्य होता है, वहां विजय सुनिश्चित होती है।”
    इस अवतार की कथा यह सिद्ध करती है कि—
    ईश्वर हमारे बीच हैं।

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जब हम सत्य के साथ खड़े होते हैं, तब समस्त ब्रह्मांड हमारे लिए मार्ग प्रशस्त कर देता है।
धर्म कभी पराजित नहीं होता, चाहे अंधकार कितना भी विशाल क्यों न हो।
एपिसोड–6 इस दिव्य बोध के साथ समाप्त होता है, परंतु आगे की लीलाएँ और भी अद्भुत हैं।
अगले एपिसोड में जानेंगे—
धर्म की स्थापना के बाद लोककल्याण की दिव्य योजनाएँ।

आपकी किस्मत क्या कहती है

🌟 11 दिसंबर 2025 का दैनिक राशिफल

पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा विस्तृत भविष्यफल

मेष (Aries) ♈ | नामाक्षर: अ, च, ल
कार्य/व्यवसाय: नई ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत होगी। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत रहेगी।
राजनीति/प्रशासन: आपके सुझावों को गंभीरता से सुना जाएगा। कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में फोकस बढ़ेगा।
कला/संगीत: नए अवसर मिलने की प्रबल संभावना।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के अवसर सामने आएँगे।
प्रेम/परिवार: किसी नए व्यक्ति से मुलाकात फायदेमंद रहेगी।
स्वास्थ्य: सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
उपाय: हनुमानजी को लाल चोला अर्पित करें।

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वृषभ (Taurus) ♉ | नामाक्षर: ब, व, उ
कार्य/व्यवसाय: रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा। आय के नए स्रोत खुलेंगे।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान मिलेगा।
शिक्षा: परीक्षार्थियों के लिए सफलता के संकेत।
कला: रचनात्मकता चरम पर रहेगी।
आर्थिक स्थिति: धन प्राप्ति के साथ आर्थिक मजबूती।
प्रेम/परिवार: रिश्तों में मिठास।
स्वास्थ्य: अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
उपाय: माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएँ।

मिथुन (Gemini) ♊ | नामाक्षर: क, छ, घ
कार्य/व्यवसाय: चुनौतियाँ रहेंगी लेकिन शाम तक स्थितियाँ सुधरेंगी।
राजनीति/प्रशासन: विरोधियों से सावधानी आवश्यक।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, पुनः फोकस की जरूरत।
कला: नए प्रयोग लाभ देंगे।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक रह सकता है।
प्रेम: शाम के बाद संबंधों में सुधार।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
उपाय: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएँ।

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कर्क (Cancer) ♋ | नामाक्षर: ड, ह
कार्य/व्यवसाय: व्यापार में लाभ एवं नए अवसर।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा।
शिक्षा: छात्रों के लिए उत्कृष्ट दिन।
कला: प्रतिभा निखरेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभ की स्थिति।
प्रेम/परिवार: घर में खुशियों का माहौल।
स्वास्थ्य: सुधार।
शुभ रंग: सफ़ेद/क्रीम
शुभ अंक: 2
उपाय: शिवजी को दूध अर्पित करें।

सिंह (Leo) ♌ | नामाक्षर: म, ट
कार्य/व्यवसाय: नया प्रोजेक्ट सफलता देगा।
राजनीति/प्रशासन: सम्मान, पदोन्नति के संकेत।
शिक्षा: पढ़ाई में प्रगति।
कला: लोकप्रियता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ।
प्रेम: रोमांटिक दिन।
स्वास्थ्य: उत्तम।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
उपाय: सूर्य देव को जल चढ़ाएँ।

कन्या (Virgo) ♍ | नामाक्षर: प, ठ, ट
कार्य/व्यवसाय: दिन व्यस्त रहेगा पर प्रयास सफल होंगे।
राजनीति/प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: पढ़ाई में उतार-चढ़ाव।
कला: प्रतिभा दिखेगी, पर आलोचना भी मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर पर खर्च नियंत्रित रखें।
प्रेम: बहस संभव।
स्वास्थ्य: पेट संबंधी समस्या।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 7
उपाय: माता दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाएँ।

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तुला (Libra) ♎ | नामाक्षर: र, त
कार्य/व्यवसाय: नई डील या अवसर।
राजनीति/प्रशासन: आपकी वाणी प्रभाव छोड़ेगी।
शिक्षा: रिजल्ट अनुकूल।
कला: रचनात्मकता से लोग प्रभावित होंगे।
आर्थिक स्थिति: स्थिर एवं लाभदायक।
प्रेम: रिश्तों में मिठास।
स्वास्थ्य: अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 3
उपाय: गाय को रोटी खिलाएँ।

वृश्चिक (Scorpio) ♏ | नामाक्षर: न, य
कार्य/व्यवसाय: गुप्त योजनाएँ सफल।
राजनीति/प्रशासन: महत्वपूर्ण उपलब्धि संभावित।
शिक्षा: मनचाहा परिणाम।
कला: नई पहचान मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: बेहतर।
प्रेम: रोमांस का दिन।
स्वास्थ्य: ठीक रहेगा।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 9
उपाय: काल भैरव का दर्शन करें।

धनु (Sagittarius) ♐ | नामाक्षर: भ, ध, फ, ढ
कार्य/व्यवसाय: यात्रा शुभ एवं लाभदायक।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों से मार्गदर्शन।
शिक्षा: नए कोर्स या अध्ययन का अवसर।
कला: नया अनुभव।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
प्रेम: पार्टनर का सहयोग।
स्वास्थ्य: उत्तम।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4
उपाय: गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें।

मकर (Capricorn) ♑ | नामाक्षर: ख, ज
कार्य/व्यवसाय: बड़ा निर्णय सफलता देगा।
राजनीति/प्रशासन: पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि।
शिक्षा: मेहनत का फल।
कला: नए अवसर।
आर्थिक स्थिति: आय बढ़ेगी।
प्रेम: अनुकूल।
स्वास्थ्य: सुधार।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
उपाय: शनि देव को तिल का तेल चढ़ाएँ।

कुंभ (Aquarius) ♒ | नामाक्षर: ग, स
कार्य/व्यवसाय: निर्णय बुद्धिमानी से लें।
राजनीति/प्रशासन: सहकर्मियों से तालमेल जरूरी।
शिक्षा: प्रोजेक्ट व असाइनमेंट समय पर पूरे होंगे।
कला: नई दिशा मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: बचत बढ़ेगी।
प्रेम: हल्की नोकझोंक के बाद सब सामान्य।
स्वास्थ्य: सामान्य।
शुभ रंग: फ़िरोज़ी
शुभ अंक: 22
उपाय: जल में काले तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।

मीन (Pisces) ♓ | नामाक्षर: द, च, थ
कार्य/व्यवसाय: एकाग्रता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: आपसे सलाह ली जाएगी।
शिक्षा: अच्छे परिणाम।
कला: आध्यात्मिक कला में रुचि बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ।
प्रेम: मजबूत रिश्ता।
स्वास्थ्य: अच्छा।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 3
उपाय: विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ लाभदायक।

🔚 नोट इस भविष्यफल को प्रमाणित राष्ट्र की परम्परा नहीं करती। अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली अवश्य जाँचें।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत चला विशेष जागरूकता अभियान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री की मंशा एवं महिला कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देशों के क्रम में, जिला प्रोबेशन अधिकारी के नेतृत्व में हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वूमेन और वन स्टॉप सेंटर की संयुक्त टीम द्वारा राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बघौली एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बघौली में “बाल विवाह मुक्त भारत के 100 दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थी-विद्यार्थिनियों को बाल विवाह से होने वाली शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया गया। टीम ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गैर कानूनी कृत्य है, जिसके लिए सरकार ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू किया है। इस अधिनियम के तहत बाल विवाह करवाने, कराने या इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए दंड का प्रावधान है।
बच्चों को यह भी बताया गया कि संविधान के अनुसार विवाह की न्यूनतम आयु लड़की के लिए 18 वर्ष और लड़के के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। यदि उनके आसपास कहीं भी बाल विवाह की घटना देखने या सुनने को मिले तो वे तत्काल 1098, 1090 या 181 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है। बच्चों को प्रेरित किया गया कि उनका एक छोटा सा प्रयास किसी बालिका या बालक के भविष्य को अंधकारमय होने से बचा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई।

गरिमामय जीवन और मानवता का धर्म: मानवाधिकारों का इतिहास और वर्तमान संदर्भ

विश्व मानवाधिकार दिवस का संदेश स्पष्ट है कि प्रत्येक मनुष्य को मर्यादापूर्वक एवं गौरवपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। यह अधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का मूल स्वभाव है। हमारी सांस्कृतिक परंपरा सदैव यह बताती आई है कि मानवता हमारे संस्कारों में है, यही हमारा मूल धर्म है और इसी सत्य को स्थापित करने में मानव सभ्यता ने लंबी यात्रा तय की है।
मानवाधिकारों की अवधारणा का इतिहास बहुत प्राचीन है। वैदिक वाङ्मय “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का उच्च आदर्श प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रत्येक मनुष्य के कल्याण की कामना की गई है। मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख मानवता, दया, समानता और अहिंसा की व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं। यूनानी, रोमन, चीनी और मध्य-पूर्वी सभ्यताओं ने भी मनुष्य की गरिमा को मान्यता दी।
आधुनिक मानवाधिकारों की औपचारिक आधारशिला 1215 में इंग्लैंड के मैग्ना कार्टा से रखी गई, जिसने शासन की निरंकुशता पर रोक लगाई। इसके बाद 1689 की इंग्लिश बिल ऑफ राइट्स, 1776 की अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा और 1789 की फ्रांसीसी मानवाधिकार घोषणा ने मानव गरिमा को विश्वव्यापी विमर्श का केंद्र बना दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध के अत्याचारों ने पूरी मानवता को हिला दिया। परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र (UDHR) स्वीकार किया, जो मानवाधिकारों का वैश्विक संविधान माना जाता है। इसमें जीवन, स्वतंत्रता, समानता, शिक्षा, अभिव्यक्ति, सुरक्षा और सम्मान जैसे अधिकारों को सार्वभौमिक स्वरूप मिला।
आज का विश्व तकनीकी रूप से उन्नत है, लेकिन मानवाधिकारों के लिए चुनौतियाँ अब भी जटिल हैं। सामाजिक असमानता, हिंसा, भेदभाव, युद्ध, आर्थिक विषमता, दुष्प्रचार, साइबर अपराध, निजता का हनन और धार्मिक-सामाजिक कट्टरता ये मुद्दे मनुष्य की गरिमा और स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ी आवश्यकता है संवेदनशीलता की। केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं; समाज का चरित्र भी मानवोचित होना चाहिए। यदि हम यह समझ लें कि “हर मनुष्य बराबर है” तो किसी के साथ अन्याय की गुंजाइश ही नहीं बचेगी। गरिमा, समानता, करुणा और न्याय, ये चार मूल्य मानवाधिकारों की नींव हैं।
हमारी परंपरा यह सिखाती है कि किसी भी मनुष्य की गरिमा को आहत करना स्वयं मानवता का अपमान है। इसलिए मानवाधिकारों की रक्षा केवल संस्थाओं का नहीं, बल्कि नागरिकों का भी दायित्व है।
दुनिया तभी वास्तव में प्रगतिशील मानी जाएगी जब हर मनुष्य सुरक्षित, सम्मानित और सुखपूर्वक जीवन जी सके। मानवाधिकारों की रक्षा करना, वस्तुतः, मनुष्य होने की गरिमा की रक्षा करना है और यही वह मूल मूल्य है जो एक सभ्य समाज को परिभाषित करता है।

आज का पंचांग बताएगा—आपके दिन का हर शुभ कदम किस दिशा ले जाएगा

11 दिसंबर 2025 का पंचांग: पौष कृष्ण पक्ष सप्तमी—शुभ मुहूर्त, राहुकाल, योग, नक्षत्र व आज की सभी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय जानकारी

हिन्दू पंचांग के अनुसार 11 दिसंबर 2025, गुरुवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है।
यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण योगों, अशुभ काल और शुभ मुहूर्तों के कारण खास महत्व रखता है।

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आज का पूर्ण पंचांग — 11 December 2025 Thursday

🔹 विक्रम संवत: 2082, कालयुक्त
🔹 शक संवत: 1947, विश्वावसु
🔹 चन्द्र मास: पूर्णिमांत–पौष | अमांत–मार्गशीर्ष
🔹 ऋतु: हेमंत (द्रिक व वैदिक)
🔹 वार: गुरुवार

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तिथि
कृष्ण पक्ष सप्तमी — 10 Dec, 01:46 PM से 11 Dec, 01:57 PM तक
कृष्ण पक्ष अष्टमी — 11 Dec, 01:57 PM से 12 Dec, 02:57 PM तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी — 02:44 AM से 03:55 AM तक
उत्तर फाल्गुनी — 03:55 AM से आगे 13 Dec, 05:50 AM तक

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🧘 योग
विष्कुम्भ योग — 11:39 AM तक
प्रीति योग — 11:39 AM से आगे 12 Dec, 11:11 AM तक

🕉 करण
बव — 01:45 AM से 01:57 PM तक
बालव — 01:57 PM से 02:21 AM (12 Dec)
कौलव — 02:21 AM से 02:57 PM (12 Dec)

🌞 सूर्य तथा 🌙 चंद्रमा
सूर्योदय: 07:02 AM
सूर्यास्त: 05:38 PM
चन्द्रोदय: 12 Dec, 12:16 AM
चन्द्रास्त: 12:13 PM
सूर्य राशि: वृश्चिक
चंद्र राशि: सिंह (पूरा दिन-रात)

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🛑 अशुभ काल
राहुकाल: 01:39 PM – 02:59 PM
यमगण्ड: 07:02 AM – 08:21 AM
गुलिक काल: 09:41 AM – 11:00 AM
दुर्मुहूर्त:
10:34 AM – 11:16 AM
02:48 PM – 03:30 PM
वर्ज्य: 11:08 AM – 12:49 PM

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🌼 शुभ काल (शुभ मुहूर्त)
अभिजीत मुहूर्त: 11:58 AM – 12:41 PM
अमृत काल: 09:12 PM – 10:53 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:26 AM – 06:14 AM

🌟 आज का सर्वार्थसिद्धि योग
गद योग — 03:55 AM तक
मातंग योग — उसके बाद
दोनों योग कार्य सिद्धि, खरीद-फरोख्त, व्यवसायिक योजनाओं और शुभारंभ के लिए मंगलकारी माने गए हैं।

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🧭 आज का दिशाशूल और यात्रा
किस दिशा की यात्रा वर्जित?
गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है।
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या खाकर जाएँ?
दही-शक्कर या चने की दाल खाकर यात्रा आरंभ करें — अपशकुन शांति व सफलता का कारक।

किस दिशा की यात्रा लाभदायक?
उत्तर एवं पूर्व दिशा की यात्रा शुभ फल देने वाली मानी गई है।

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🌙 चंद्र बल (12 December, 07:02 AM तक)
मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ और मीन—इन राशियों के जातकों को चंद्र बल प्राप्त।

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🪔 त्यौहार / व्रत
कालाष्टमी व्रत
नोट:इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। कृपया किसी आवश्यक मुहूर्त या निर्णय के लिए अपने स्थानीय विद्वान/पंडित से परामर्श अवश्य लें।

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10 दिसंबर का इतिहास

10 दिसंबर केवल तारीख नहीं, बल्कि विश्व राजनीति, विज्ञान, खेल, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक परिवर्तनों का जीवंत दर्पण है। इस दिन कई ऐसी घटनाएँ घटीं, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों की दिशा बदल दी। आइए गहराई से समझते हैं कि इतिहास के पन्नों में 10 दिसंबर क्यों इतना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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2013 – उरुग्वे बना मारिजुआना को वैध बनाने वाला पहला देश

10 दिसंबर 2013 को उरुग्वे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मारिजुआना की खेती, बिक्री और उपयोग को वैध कर दिया। यह निर्णय दुनिया भर में ड्रग नीति को लेकर चर्चाओं के केंद्र में रहा। इस कदम ने उरुग्वे को वैश्विक स्तर पर एक प्रगतिशील देश के रूप में स्थापित किया और अन्य देशों को भी नशा नियंत्रण नीति पर पुनर्विचार को प्रेरित किया। यह वैश्विक औषधि एवं स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार माना जाता है।

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2007 – परवेज़ मुशर्रफ़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जज नियुक्त

पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सर्वोच्च न्यायालय में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की। यह घटना पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाली साबित हुई। उस समय देश में आपातकाल जैसे हालात थे और न्यायपालिका व सरकार के बीच तनाव चरम पर था।

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2006 – तानाशाह अगस्तो पिनोशे का निधन

चिली के विवादित तानाशाह अगस्तो पिनोशे का 10 दिसंबर 2006 को सैंटियागो में निधन हुआ। अपनी सैन्य तानाशाही के कारण मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोपों से घिरे पिनोशे पूरी दुनिया में विवादित रहे। उनका निधन एक युग के अंत की तरह देखा गया जिसने लातिन अमेरिकी राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया।

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2005 – नूर सुल्तान नजरबायेव दोबारा बने कज़ाकिस्तान के राष्ट्रपति

कज़ाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में 10 दिसंबर 2005 अहम रहा, जब नूर सुल्तान नजरबायेव भारी बहुमत से पुनः राष्ट्रपति बनाए गए। यह जीत देश में स्थिरता, राजनीतिक शक्ति और आर्थिक नीतियों की निरंतरता का संकेत मानी गई। नजरबायेव की नेतृत्व शैली ने मध्य एशिया की राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

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2004 – ढाका टेस्ट में अनिल कुंबले ने रचा इतिहास

भारतीय क्रिकेटर अनिल कुंबले ने 10 दिसंबर 2004 को ढाका टेस्ट में कपिल देव को पीछे छोड़ते हुए सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है और कुंबले का नाम दुनिया के शीर्ष गेंदबाजों में स्थापित करती है।

2003 – श्रीलंका में राष्ट्रपति–प्रधानमंत्री वार्ता विफल

कोलंबो में 10 दिसंबर 2003 को राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता असफल रही। यह असफलता श्रीलंका की शांति प्रक्रिया पर गहरे प्रभाव छोड़ने वाली साबित हुई, क्योंकि उस समय देश गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा था।

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2002 – यूनाइटेड एयरलाइंस ने दिवालियापन घोषित किया

अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी यूनाइटेड एयरलाइंस ने 10 दिसंबर 2002 को दिवालिया घोषित कर दिया। 9/11 हमलों के बाद विमानन उद्योग बुरी तरह प्रभावित था और यह घटना वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का प्रतीक बन गई।

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2000 – नवाज़ शरीफ़ का दस साल का निर्वासन

पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को 10 दिसंबर 2000 को सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया। यह फैसला पाकिस्तान की सत्ता राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत था और देश की राजनीति को अगले कई वर्षों तक प्रभावित करता रहा।

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1999 – आतंकवाद के वित्तपोषण को आर्थिक अपराध घोषित

संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर 1999 को एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराना गंभीर आर्थिक अपराध घोषित किया। यह वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मील का पत्थर साबित हुआ।

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1998 – अमर्त्य सेन को मिला नोबेल पुरस्कार

भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को 10 दिसंबर 1998 को स्टॉकहोम में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। गरीबी, विकास और कल्याणकारी अर्थव्यवस्था पर उनके शोध ने वैश्विक आर्थिक नीतियों को गहराई से प्रभावित किया।

1994 – यासर अराफात, राबिन और पेरेज़ को नोबेल शांति पुरस्कार

मध्य-पूर्व में शांति की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए 10 दिसंबर 1994 को यासर अराफात, वित्जाक राबिन और शिमोन पेरेज़ को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार मिला। यह सम्मान उस दौर की शांति पहल की बड़ी उपलब्धि माना गया।

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1963 – जंजीबार ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता पाई

अफ्रीकी द्वीप राष्ट्र जंजीबार ने 10 दिसंबर 1963 को ब्रिटेन से स्वतंत्रता हासिल की। यह पूर्वी अफ्रीका के राजनीतिक मानचित्र को बदल देने वाली ऐतिहासिक घटना थी जिसने वहां स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

1961 – सोवियत संघ और अल्बानिया के संबंध टूटे

शीत युद्ध के दौर में 10 दिसंबर 1961 को सोवियत संघ और अल्बानिया के बीच राजनयिक संबंध समाप्त कर दिए गए। यह घटना साम्यवादी देशों के बीच बढ़ते वैचारिक मतभेदों का स्पष्ट संकेत थी।

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1947 – सोवियत संघ–चेकोस्लोवाकिया व्यापार समझौता

10 दिसंबर 1947 को दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते ने यूरोप में युद्धोत्तर आर्थिक पुनर्निर्माण को गति दी। यह पूर्वी यूरोपीय देशों की साम्यवादी आर्थिक नीति की दिशा तय करने वाला समझौता माना जाता है।

1936 – चीन–जापान युद्ध में भारतीय मेडिकल दल की भूमिका

10 दिसंबर 1936 को चीन–जापान युद्ध के दौरान चीन की सहायता के लिए भेजे गए भारतीय चिकित्सा दल का नेतृत्व किया गया। भारतीय दल की सेवा ने एशियाई देशों के बीच मानवीय सहयोग की नई मिसाल पेश की।

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1903 – क्यूरी दंपत्ति को मिला नोबेल पुरस्कार

मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी को 10 दिसंबर 1903 को भौतिक विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला। रेडियम और पोलोनियम की खोज ने विज्ञान जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाए। उनकी खोजों ने चिकित्सा और परमाणु विज्ञान की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

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1902 – तस्मानिया में महिलाओं को मताधिकार

10 दिसंबर 1902 को तस्मानिया ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया। यह महिला अधिकारों की लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि थी जिसने विश्व भर में महिला सशक्तिकरण की राह खोली।

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1887 – यूरोपीय शक्तियों के बीच बाल्कन सैन्य समझौता

10 दिसंबर 1887 को ऑस्ट्रिया, हंगरी, इटली और ब्रिटेन ने बाल्कन क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए एक सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता यूरोपीय राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित करने वाला था।

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1582 – फ्रांस ने अपनाया ग्रेगोरियन कैलेंडर

10 दिसंबर 1582 को फ्रांस ने आधिकारिक रूप से ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया। यह आधुनिक समय गणना की दिशा में एक बड़ी क्रांति थी जिसने विश्व को एक समान समय प्रणाली प्रदान की।

राजीव झा बने भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय महामंत्री, बधाइयों का ताँता

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। भारत तिब्बत समन्वय संघ ने संगठनात्मक विस्तार और कार्यगत गति को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए क्रीड़ा प्रभाग के राष्ट्रीय प्रभारी राजीव झा (वाराणसी जिला, काशी प्रांत, पूर्वी उत्तर प्रदेश) को संघ की मूल कार्यकारिणी में राष्ट्रीय महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
श्री झा वर्तमान में जयपुर प्रवास पर हैं। संगठन ने उन्हें जयपुर प्रांत सहित पूरे राजस्थान (उत्तर–पश्चिम क्षेत्र) में अगले एक सप्ताह तक संगठन से जुड़े सभी निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार प्रदान किया है। उनके नेतृत्व में संगठनात्मक गतिविधियों के सुदृढ़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बीटीएसएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने नव नियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री को बधाई देते हुए कहा कि श्री झा लंबे समय से संघ के विविध, आयामों, कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और क्रीड़ा प्रभाग की राष्ट्रीय गतिविधियों को सफलतापूर्वक संचालित करते रहे हैं। उनकी सक्रियता, समर्पित कार्यशैली और राष्ट्रहित व तिब्बती मुद्दों के प्रति सजग दृष्टिकोण को देखते हुए यह दायित्व उन्हें सौंपा गया है।
महिला प्रभाग की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सोनी सिंह ने इसे संगठन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि राजीव झा की ऊर्जा और कार्यकुशलता संगठन को नई दिशा देगी। राष्ट्रीय मंत्री विवेक सोनी ने कहा कि झा साहब हमेशा से संगठन की गतिविधियों के मजबूत स्तंभ रहे हैं।उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में पश्चिम क्षेत्र में संगठन और अधिक सशक्त होगा।
संत कबीर नगर के जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाण्डेय ने बधाई देते हुए उनके कार्यकाल को संगठन के लिए उपयोगी बताया।
नव नियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री राजीव झा ने नव दायित्व को स्वीकार करते हुए संगठन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह उनके लिए गौरव के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन की प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि संगठन की मूल विचारधारा और उद्देश्यों को जन–जन तक पहुँचाने के लिए वे पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करेंगे।
संगठन के विभिन्न प्रांतों, जिलों और मोर्चों के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने भी श्री झा को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।

शोधपीठ में शीतकालीन योग कार्यशाला के दूसरे दिन ऑनलाइन व्याख्यान और योग प्रशिक्षण सम्पन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ में कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में आयोजित सप्तदिवसीय शीतकालीन योग कार्यशाला “योग एवं नाथपंथ” के दूसरे दिन योग प्रशिक्षण एवं ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। योग प्रशिक्षण सत्र का संचालन डॉ. विनय कुमार मल्ल द्वारा किया गया, जिसमें स्नातक, परास्नातक एवं अन्य प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
पूर्वाह्न 11 बजे “अद्वैत वेदांत एवं योग: आचार्य शंकर एवं महर्षि पतंजलि के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा अतिथि के स्वागत के साथ हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. श्रीनिवास मिश्र, सहायक आचार्य, दर्शनशास्त्र विभाग, मदन मोहन मालवीय पी.जी. कॉलेज, भाटपाररानी, देवरिया ने कहा कि चित्त कैमरे की भांति कार्य करता है और उसकी शुद्धता से ही योग की वास्तविक साधना प्रारंभ होती है। उन्होंने बताया कि आसनों के अनुचित अभ्यास से व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं, जिनसे मुक्ति हेतु नियमित एवं विधिवत योगाभ्यास आवश्यक है।
डॉ. मिश्र ने अष्टांग योग और अद्वैत वेदान्त के अंतरसंबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग का अंतिम लक्ष्य समाधि है, जहाँ अद्वैत अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि योग की यात्रा द्वैत से प्रारंभ होकर अद्वैत की शिखर अवस्था तक पहुँचती है, जिसे वेदान्त में शुद्ध चैतन्य की अनुभूति कहा गया है।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. हर्षवर्धन सिंह, चिन्मयानंद मल्ल सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।
गया कॉलेज के डॉ. राजेश मिश्र द्वारा पूछे गए प्रश्नों का मुख्य वक्ता ने संतोषजनक उत्तर प्रदान किया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से जुड़े डॉ. मनोज कुमार यादव एवं डॉ. संदीप चौरसिया ने भी सहभागिता की।

भाषाएं अनेक, भाव एक: थीम पर भारतीय भाषा उत्सव आज

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा शुक्रवार को भारतीय भाषा उत्सव दिवस के उपलक्ष्य में इस वर्ष की निर्धारित थीम “भाषाएं अनेक, भाव एक” के अंतर्गत एक वैचारिक गोष्ठी एवं विभिन्न भारतीय भाषाओं में काव्य पाठ का आयोजन अपराह्न 3 बजे गोरक्षनाथ शोधपीठ में किया जाएगा।
प्रख्यात तमिल कवि एवं क्रांतिकारी साहित्यकार सुब्रह्मण्यम भारती की जयंती के अवसर पर प्रति वर्ष 11 दिसंबर को भारतीय भाषा उत्सव मनाया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की बहुभाषिक परंपरा को प्रोत्साहन देना, भाषाई एकता को सुदृढ़ करना और देश की सांस्कृतिक विरासत को निरंतर समृद्ध करना है।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में हिंदी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेज़ी सहित विभिन्न भाषाओं के विद्वान एवं श्रोता सहभागी होंगे।

छात्र कल्याण की दिशा में बड़ा कदम: ऐश्प्रा फाउंडेशन ने लगाए आरओ वॉटर प्लांट

कुलपति ने किया लोकार्पित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ऐश्प्रा फाउंडेशन, गोरखपुर के सौजन्य से दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स छात्रावास तथा अंतरराष्ट्रीय मैत्री छात्रावास में निःशुल्क आरओ एवं चिल्ड वॉटर प्लांट स्थापित किए गए। इन प्लांट्स का लोकार्पण कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा किया गया। फाउंडेशन इससे पूर्व भी विश्वविद्यालय में कुल पाँच शुद्ध पेयजल प्लांट स्थापित कर चुका है, जो सभी जल संरक्षण के निर्धारित मानकों पर आधारित हैं।
आरओ वॉटर प्लांट लगने से छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क स्वच्छ, शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध होगा। इन प्लांट्स की उन्नत तकनीक आरओ प्रक्रिया में निकलने वाले अतिरिक्त जल को सीधे भूगर्भ में पहुंचाती है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इस प्रकार यह व्यवस्था स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
लोकार्पण के दौरान कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक विद्यार्थी का मूल अधिकार है और विश्वविद्यालय छात्रों के स्वास्थ्य व जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं द्वारा मिल रहे सहयोग को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्य शिक्षा संस्थानों में सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान हैं।
कार्यक्रम में शामिल ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के डायरेक्टर अतुल सर्राफ ने बताया कि उनका उद्देश्य शुद्ध जल उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि इन प्लांट्स में पानी को शुद्ध करने के बाद आरओ प्रक्रिया से उत्पन्न अतिरिक्त जल को भूगर्भ में भेजकर जल संरक्षण का संतुलन बनाए रखा जाता है।
उद्घाटन कार्यक्रम में डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे, मुख्य अभिरक्षक प्रो. शिवाकांत सिंह, प्रो. धनंजय कुमार, चीफ प्रॉक्टर डॉ. टी. एन. मिश्रा, डॉ. ओमप्रकाश सिंह, डॉ. मनीष पाण्डेय, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. कृपामणि, डॉ. हरीशचंद्र पाण्डेय, डॉ. विकास राना सहित कई शिक्षक, गणमान्य व्यक्ति एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।