Friday, June 26, 2026
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समाज सुधार से राष्ट्र चेतना तक: स्वामी श्रद्धानंद का युगद्रष्टा जीवन

पुनीत मिश्र

भारतीय नवजागरण और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वामी श्रद्धानंद जी एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हैं, जिन्होंने संन्यास को आत्मकल्याण तक सीमित न रखकर समाज और राष्ट्र की सेवा का सशक्त माध्यम बनाया। उनका जीवन विचार, त्याग और कर्म का समन्वय था।
स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्म 22 फरवरी 1856 को हुआ। उनका मूल नाम मुंशी राम था। आरंभिक शिक्षा के दौरान ही उनमें अनुशासन, आत्मचिंतन और समाज के प्रति दायित्वबोध विकसित हुआ। स्वामी दयानंद सरस्वती के संपर्क में आने के बाद उनका जीवन नई दिशा में अग्रसर हुआ और वे आर्य समाज के माध्यम से सामाजिक सुधार के कार्यों में सक्रिय हो गए।
शिक्षा को वे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मानते थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने 1902 में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की। यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विषयों के संतुलित समावेश का प्रतीक बना। उनका विश्वास था कि शिक्षा से ही चरित्रवान, स्वावलंबी और जागरूक नागरिक तैयार किए जा सकते हैं।
स्वामी श्रद्धानंद जी ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निर्भीक संघर्ष किया। छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के विरोध में उन्होंने जनचेतना जागृत की। शुद्धि आंदोलन के माध्यम से समाज को संगठित करने और आत्मसम्मान की भावना विकसित करने का प्रयास किया।
स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने जनसभाओं और विचार लेखन से लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। वे सत्य और अहिंसा के समर्थक थे, किंतु अन्याय के विरुद्ध स्पष्ट और साहसी रुख अपनाते थे।
23 दिसंबर 1926 को स्वामी श्रद्धानंद जी का निधन हुआ। उनका जीवन भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज पर पड़े गहरे प्रभाव से मूल्यांकित होता है। उनके विचार आज भी शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा संन्यास वही है, जो समाज को जोड़ने, जागृत करने और आगे बढ़ाने का कार्य करे।

नरसिम्हा राव की नीतियों से भारत बना आर्थिक महाशक्ति

भारत के आर्थिक इतिहास में 1991 का वर्ष एक युगांतकारी मोड़ है। यह वही दौर था जब देश गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार समाप्ति की कगार पर था, विकास दर ठहराव में थी और लाइसेंस-परमिट राज ने अर्थव्यवस्था की गति को जकड़ रखा था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रधानमंत्री बने पी. वी. नरसिम्हा राव ने साहसिक निर्णय लेते हुए भारत को आर्थिक सुधारों की नई दिशा दी।
नरसिम्हा राव की आर्थिक नीतियां वैचारिक कठोरता से मुक्त और व्यावहारिक सोच पर आधारित थीं। 1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना ही बदल दी। उद्योगों को लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया से मुक्त किया गया, जिससे निजी निवेश और उद्यमिता को नई ऊर्जा मिली।
निजीकरण के माध्यम से सरकारी नियंत्रण सीमित हुआ और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला। वहीं वैश्वीकरण ने भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा। विदेशी निवेश, आधुनिक तकनीक और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन से आईटी, दूरसंचार, बैंकिंग और सेवा क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ। भारत धीरे-धीरे एक बंद अर्थव्यवस्था से उभरती वैश्विक शक्ति बनने लगा।
इन सुधारों का सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई दिया। एक नया और सशक्त मध्यम वर्ग उभरा, रोजगार के अवसर बढ़े और उपभोक्ता बाजार का विस्तार हुआ। भारत, जो कभी आर्थिक सहायता पर निर्भर माना जाता था, आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने लगा।
हालांकि नरसिम्हा राव की नीतियों को लेकर असमानता और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों जैसे सवाल भी उठे, लेकिन यह भी सत्य है कि ठहरे हुए देश को गति देने के लिए कठोर निर्णय आवश्यक थे। इन नीतियों ने भारत को दीर्घकालिक विकास की राह पर स्थापित किया।
अल्पमत सरकार और राजनीतिक दबावों के बावजूद नरसिम्हा राव ने सुधारों से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भारत आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा की आधारशिला नरसिम्हा राव की दूरदर्शी नीतियों ने ही रखी।

कृषि नवाचार पर राष्ट्रीय मंच से अनुभव साझा करेंगे किसान राममूर्ति मिश्र

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा द्वारा आयोजित IARI नवोन्मेषी किसान कॉन्क्लेव–2025 में जिले के प्रगतिशील किसान राममूर्ति मिश्र को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। कॉन्क्लेव में वे कृषि नवाचार, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बागवानी, महिला किसानों का सशक्तिकरण, समूह गतिशीलता एवं उद्यमिता, कृषि यंत्रीकरण तथा किसान नवाचारों के सत्यापन और प्रसार की रणनीतियों पर किसानों से संवाद करेंगे।
बस्ती सदर ब्लॉक के गौरा गांव निवासी राममूर्ति मिश्र प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रमुख प्रवर्तकों में गिने जाते हैं। सुगंधित धान, गन्ना और सब्जी उत्पादन में नवाचार के साथ उन्होंने किसानों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें प्राकृतिक खेती के एक्सपर्ट ट्रेनर के रूप में मान्यता प्राप्त है। अब तक वे सैकड़ों महिला किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त जिला, मंडल, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं।
आईएआरआई परिसर में यह दो दिवसीय कॉन्क्लेव 23–24 दिसंबर 2025 को आयोजित होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, ICAR करेंगे। इसमें देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किसान भाग लेंगे, जिससे यह मंच राष्ट्रीय स्तर के जीवंत संवाद का केंद्र बनेगा।
सम्मानित किसान नवप्रवर्तक के रूप में आमंत्रित राममूर्ति मिश्र अपने खेतों में विकसित नवाचार, अनुभव और सफलताएं देशभर से आए किसानों के साथ साझा करेंगे, जिससे किसान-से-किसान सीख की परंपरा को बल मिलेगा। कॉन्क्लेव के दूसरे दिन 24 दिसंबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी किसानों से संवाद करेंगे। संस्थान के संयुक्त निदेशक (प्रसार) आर.एन. पडारिया के अनुसार, कॉन्क्लेव में छह तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन किसानों की रचनात्मक शक्ति को पहचान देने के साथ समावेशी, टिकाऊ और नवाचार-आधारित भारतीय कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा

ट्रैफिक पुलिस का सख्त अभियान: 764 वाहनों का चालान, 128 वाहन सीज, शहर से देहात तक कार्रवाई

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एडीजी भानु भास्कर के निर्देश पर सोमवार को शहर से लेकर देहात तक ट्रैफिक पुलिस ने विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया। करीब तीन घंटे चले इस अभियान के दौरान 764 वाहनों का चालान किया गया, जबकि 128 वाहनों को सीज किया गया।

प्रमुख चौराहों पर हुई सघन जांच

एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सोमवार सुबह से ही ट्रैफिक पुलिस की टीमें सड़कों पर उतर गईं और व्यापक स्तर पर जांच की।
अभियान के दौरान मोदीपुरम फ्लाईओवर, गांधी बाग चौराहा, बेगमपुल, साकेत चौराहा, बागपत अड्डा, हापुड़ चौराहा, तेजगढ़ी समेत शहर और देहात क्षेत्र में वाहन चेक किए गए।

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संदिग्धों से पूछताछ, गलियों में भागे वाहन चालक

पुलिस की सख्ती देखकर कुछ वाहन चालक गलियों के रास्ते निकलने लगे। इस दौरान पुलिस ने संदिग्ध प्रतीत हो रहे लोगों से गहन पूछताछ भी की। वहीं, कुछ मामलों में मामूली लापरवाही पर वाहन चालकों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

रोजाना चलेगा अभियान

एसपी ट्रैफिक ने स्पष्ट किया कि शहर में रोजाना वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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फसल बीमा घोटाला: जांच में खुलती जा रहीं बेइमानी की परतें, 1.05 लाख से अधिक पॉलिसी रद्द, अफसरों पर कार्रवाई तय

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हुए बड़े घोटाले की परतें एक-एक कर खुलती जा रही हैं। महोबा और झांसी के बाद अब ललितपुर और हमीरपुर में भी फसल बीमा पॉलिसियों की जांच शुरू हो गई है। जांच के बाद खरीफ 2025 में अब तक 1,05,361 फसल बीमा पॉलिसी रद्द की जा चुकी हैं, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

नदी-बंजर और सरकारी जमीन पर कराया गया बीमा

बुंदेलखंड समेत अन्य जिलों में खरीफ 2024, रबी 2024 और खरीफ 2025 के दौरान फसल बीमा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि नदी, बंजर भूमि, रेलवे, सरकारी और यहां तक कि सांसद की जमीन पर भी दूसरे लोगों के नाम से बीमा करा लिया गया और करोड़ों रुपये का क्लेम उठा लिया गया।

महोबा में अकेले 40 करोड़ का फर्जी क्लेम

सबसे बड़ा मामला महोबा जिले का सामने आया है, जहां करीब 40 करोड़ रुपये का फर्जी बीमा क्लेम लिया गया।
अब तक:
महोबा में 59
झांसी में 10
लोगों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।

हमीरपुर और ललितपुर में जांच जारी

मीडिया में घोटाले की खबरें सामने आने के बाद कृषि विभाग ने सभी जिलों में डीएम स्तर पर खरीफ और रबी 2025 की बीमा पॉलिसियों की जांच कराई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर:

• महोबा में लगभग 10 हजार
• झांसी में 9 हजार
• अन्य जिलों में 150 से 1000 तक पॉलिसियां रद्द की गई हैं।
हमीरपुर और ललितपुर में जांच अभी जारी है।

करोड़ों का प्रीमियम और क्लेम

आंकड़ों के मुताबिक:

• खरीफ 2024-25 में 15.38 लाख किसानों ने 432.43 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया, जिसमें से 3.58 लाख किसानों को 276.10 करोड़ रुपये का क्लेम मिला।
• खरीफ 2025-26 में 20.92 लाख किसानों ने 537.64 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया, जिनमें से 2.06 लाख किसानों को 142.02 करोड़ रुपये का क्लेम दिया गया है।

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पोर्टल में होगा बड़ा बदलाव

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना का संचालन भारत सरकार के एनसीआईपी पोर्टल से होता है।
अब किसान रजिस्ट्री और भूमि डिजिटलीकरण के बाद खाता संख्या डालते ही जमीन का पूरा विवरण पोर्टल से जुड़ जाएगा। इससे:

• नदी, बंजर या सरकारी भूमि की पहचान
• जमीन मालिक को पूर्व सूचना
• फर्जी बीमा पर रोक
संभव हो सकेगी। इसके लिए भारत सरकार को पोर्टल संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है।

कृषि विभाग का बयान

निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह ने बताया कि

“जांच लगातार जारी है। अब तक खरीफ 2025 में 1,05,361 पॉलिसी रद्द की जा चुकी हैं। डीएम की रिपोर्ट मिलते ही बीमा कंपनियां एनसीआईपी पोर्टल पर पॉलिसी रद्द कर रही हैं। कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बीमा कराने पर रोक लगाने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।”

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यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: पूर्वी यूपी के 7 जिलों को मिलाकर बनेगा काशी-विंध्य क्षेत्र, विकास को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी यूपी के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) की तर्ज पर सरकार ने काशी-विंध्य क्षेत्र (Kashi-Vindhya Region – KVR) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव को यूपी कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है।

ये सात जिले होंगे शामिल

काशी-विंध्य क्षेत्र में वाराणसी और विंध्याचल मंडल के सात प्रमुख जिले शामिल किए गए हैं—
वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र।
इन सभी जिलों को एक आर्थिक गतिविधियों के विशेष जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।

विकास और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

प्रस्ताव के अनुसार, केवीआर के गठन से पूर्वांचल के इन जिलों में विकास की गति तेज होगी। क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाएं, बेहतर आधारभूत ढांचा और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। काशी-विंध्य क्षेत्र की कुल आबादी लगभग दो करोड़ बताई जा रही है।

सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ

सरकार का कहना है कि केवीआर के विकास से राज्य सरकार पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं आएगा।
काशी-विंध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण का कुल दायरा 23,815 वर्ग किलोमीटर होगा।

जिलों का क्षेत्रफल (वर्ग किमी में)

• वाराणसी – 1535
• जौनपुर – 4038
• चंदौली – 2541
• गाजीपुर – 3377
• मिर्जापुर – 4521
• भदोही – 1015
• सोनभद्र – 6788

इनमें सबसे अधिक क्षेत्रफल सोनभद्र का है, जबकि सबसे कम भदोही का।

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सीएम होंगे अध्यक्ष, प्रमुख सचिव होंगे CEO

प्रस्ताव के तहत:

मुख्यमंत्री – कार्यकारी समिति के अध्यक्ष
प्रमुख सचिव (आवास) – मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
वाराणसी मंडलायुक्त – सदस्य सचिव
विंध्याचल मंडलायुक्त – सदस्य

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी सदस्य नामित किया जाएगा।

केवीआर देगा मास्टर प्लान को मंजूरी

काशी-विंध्य क्षेत्र के सभी सात जिलों के मास्टर प्लान केवीआर स्तर पर ही तैयार और मंजूर किए जाएंगे। अब इसके लिए अलग से शासन की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। सरकार एक-दो दिन में इसके गठन की अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।
नीति आयोग ने भी काशी और विंध्य क्षेत्र के सतत विकास को लेकर सरकार को सुझाव दिए हैं।

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हापुड़ की नवीन मंडी में आग का तांडव, सब्जी मंडी के पास तीन दुकानें जलकर खाक

हापुड़/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। हापुड़ की नवीन मंडी क्षेत्र में सब्जी मंडी के पास स्थित दुकानों में मंगलवार को अचानक भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से तीन दुकानें जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।

दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग तेजी से फैल सकती थी, लेकिन समय रहते उस पर नियंत्रण पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

तीन फायर टेंडर मौके पर पहुंचे

फायर स्टेशन ऑफिसर (FSO) अरशद खान ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम तुरंत मौके पर रवाना हुई।

उन्होंने कहा – “आग लगने की जानकारी मिलते ही तीन फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। दो से तीन दुकानें आग से प्रभावित हुई हैं, लेकिन आग को आगे फैलने से रोक लिया गया।”

नुकसान का आकलन जारी

फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

सांसद खेल प्रतियोगिता का हुआ भव्य आयोजन

सैकड़ो प्रतिभागियो ने प्रतियोगिता मे शिरकत की

बरहज /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
श्रीकृष्ण इण्टर कॉलेज आश्रम के प्रांगण मे सांसद खेल प्रतियोगिता सांसद एवं केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान के सानिध्य में भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता मे बालक एवं बालिका वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें कबड्डी, खो-खो, दौड़ एवं फुटबॉल मैच प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताएँ निर्धारित नियमों के अनुसार खेल भावना के साथ संपन्न कराई गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुनील पासवान (सांसद प्रतिनिधि), एवं विशिष्ट अतिथि के रूपये मे संजय सिंह (जिला उपाध्यक्ष), आश्रम पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास महाराज, नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल , सुभाष प्रसाद(ब्लॉक प्रमुख), निखिल सिंह,विवेक कुमार गुप्त (नगर मण्डल अध्यक्ष), अंगद तिवारी,अखिलेश्वर सिंह सहित आदि गणमान्य उपस्थित रहें।
फुटबॉल मैच का शुभारम्भ
आनजानेय दास महराज के द्वारा फीता काट कर विद्यालय के खेल मैदान में किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया । प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने अनुशासन, टीम भावना एवं खेल कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। निर्णायकों द्वारा निष्पक्ष निर्णय लेते हुए प्रतियोगिताओं का संचालन किया गया।
प्रतियोगिता के समापन अवसर पर विजेता एवं उपविजेता टीमों/खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में शारीरिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, सहयोग एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को विकसित करना रहा है।

कड़ाके की ठंड में बेसहारा जिंदगियों पर कहर, तंत्र की संवेदनाएं जमीं

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कड़ाके की ठंड एक बार फिर समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सड़कों, फुटपाथों और बस स्टेशनों पर रात गुजारने को मजबूर बेसहारा लोग ठिठुरती ठंड से जूझ रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की संवेदनाएं जैसे शीतलहर से भी अधिक जम चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि हर साल सर्दी आती है, हर साल मौतों की खबरें सामने आती हैं और हर साल तंत्र पूरी तैयारी के दावों के साथ खुद को निर्दोष घोषित कर देता है।
सरकारी स्तर पर अलाव जलाने, रैन बसेरे संचालित करने और कंबल वितरण के आंकड़े जरूर पेश किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। कई स्थानों पर अलाव सिर्फ कागजों में जलते नजर आते हैं, कंबल गोदामों में बंद पड़े रहते हैं और रैन बसेरे या तो बंद मिलते हैं या वहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव होता है। नतीजतन, जरूरतमंदों तक राहत पहुंचने से पहले ही ठंड अपना घातक असर दिखा देती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि रात के समय सड़कों पर सोने वाले वृद्ध, बीमार और निराश्रित लोगों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। प्रशासनिक अमला दिन में निरीक्षण की औपचारिकता निभा लेता है, लेकिन रात में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। ठंड से किसी की मौत होने के बाद जांच बैठती है, रिपोर्ट तैयार होती है और फिर मामला फाइलों में दफन हो जाता है। सवाल यह उठता है कि क्या ठंड से मरने वाला इंसान नागरिक नहीं है? क्या उसकी जान की कीमत सिर्फ एक औपचारिक रिपोर्ट तक सीमित रह गई है?
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस समस्या का समाधान मुश्किल नहीं है। रात में सक्रिय निगरानी, मोबाइल रैन बसेरों की व्यवस्था, कंबलों का वास्तविक और समय पर वितरण, स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी और अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय कर दी जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि संवेदनाओं को कागजी आदेशों से आगे ले जाया जाए। अब भी वक्त है कि शासन-प्रशासन जागे और ठंड को गरीबों के लिए मौत का मौसम बनने से रोके। अन्यथा इतिहास यही लिखेगा कि इन जिंदगियों को ठंड ने नहीं, बल्कि संवेदनहीन तंत्र ने निगल लिया। हर सर्द सुबह के साथ यह सवाल और तीखा होता जा रहा है—आखिर शासन किसके लिए है?

गायत्री मंत्र: भारतीय संस्कारों की आत्मा और चेतना का शाश्वत स्रोत

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय सभ्यता की आत्मा उसके संस्कारों में निहित है और इन संस्कारों की चेतना का मूल स्रोत है—गायत्री मंत्र। यह केवल एक वैदिक मंत्र नहीं, बल्कि विचार, विवेक और जीवन-दृष्टि को दिशा देने वाला महामंत्र है। वेदों में प्रतिष्ठित गायत्री मंत्र को वेदमाता की संज्ञा दी गई है, क्योंकि यह मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर करने का आह्वान करता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं… इन पवित्र पंक्तियों में भारतीय दर्शन की गहनता और व्यापकता समाहित है। यह मंत्र सूर्य रूपी सविता से प्रार्थना करता है कि वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे। इसीलिए गायत्री मंत्र को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि इसे बुद्धि, विवेक और सद्बुद्धि का मंत्र कहा गया है। यह मनुष्य को सही सोच, सही कर्म और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, जो भारतीय संस्कारों का मूल आधार है।
गायत्री मंत्र का महत्व केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। यह व्यक्ति में आत्म-संयम, अनुशासन, करुणा और परोपकार की भावना विकसित करता है। जब व्यक्ति की बुद्धि शुद्ध और प्रबुद्ध होती है, तब समाज स्वतः ही संस्कारित होने लगता है। यही कारण है कि प्राचीन गुरुकुल परंपरा में बालक की शिक्षा का आरंभ गायत्री उपासना से होता था। उस समय शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन-मूल्यों का विकास माना जाता था।
आज के भौतिकवादी युग में, जब सफलता को केवल धन, पद और प्रतिष्ठा से आंका जा रहा है, गायत्री मंत्र हमें यह स्मरण कराता है कि बिना नैतिकता और संस्कार के विकास अधूरा और दिशाहीन है। यह मंत्र अहंकार को विनम्रता में, स्वार्थ को सेवा में और अज्ञान को विवेक में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। यही भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है, जहां आध्यात्म जीवन से पलायन नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ और संतुलित बनाने का साधन माना गया है। गायत्री मंत्र की वैज्ञानिकता भी उल्लेखनीय है। इसके नियमित उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें मानसिक एकाग्रता बढ़ाती हैं, तनाव को कम करती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। यही कारण है कि युगों-युगों से इसे साधना और साधक दोनों का आधार माना गया है। मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह मंत्र मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि गायत्री मंत्र को केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठानों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसके भावार्थ को व्यवहार और जीवन में उतारा जाए। यदि हमारी बुद्धि प्रबुद्ध होगी, तो राजनीति शुद्ध होगी, समाज समरस बनेगा और राष्ट्र सशक्त दिशा में आगे बढ़ेगा। गायत्री मंत्र भारतीय संस्कारों की आत्मा है, जो हर युग में मनुष्य को सच्चे अर्थों में मानव बनने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि गायत्री मंत्र केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का शाश्वत प्रकाशस्तंभ है—जो अंधकार में भी मार्ग दिखाता है और जीवन को सत्य, करुणा व विवेक के पथ पर ले जाता है।

आस्था और राजनीति के बीच संतुलन की जरूरत

डॉ.सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आस्था मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जो व्यक्ति को नैतिकता, संस्कार और आत्मिक शांति प्रदान करती है। वहीं राजनीति समाज को दिशा देने और जनहित की नीतियां तय करने का माध्यम है। लेकिन जब आस्था और राजनीति की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि लोकतंत्र की मूल भावना कितनी सुरक्षित है।
वर्तमान समय में यह देखा जा रहा है कि चुनावी राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का प्रभाव बढ़ा है। आस्था से जुड़े विषय जनभावनाओं को जोड़ने का माध्यम बनते हैं, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दे केंद्र में बने रहें। लोकतंत्र की मजबूती इसी संतुलन पर निर्भर करती है।
धर्म और परंपराएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं, परंतु राजनीति का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए समान अवसर और सुविधाएं सुनिश्चित करना होता है। यदि आस्था आधारित विमर्श अत्यधिक हावी हो जाए, तो नीति और विकास से जुड़े प्रश्न पीछे छूटने लगते हैं। इससे समाज में मतभेद बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है, जो दीर्घकाल में सामाजिक समरसता के लिए ठीक नहीं है।
चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आचार संहिता और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना का पालन लोकतंत्र को मजबूत बनाता है और जनता के विश्वास को कायम रखता है।
अंततः लोकतंत्र की असली शक्ति मतदाता के विवेक में निहित है। मतदाता जितना जागरूक होगा, उतनी ही राजनीति उत्तरदायी बनेगी। आस्था का सम्मान करते हुए जब मत नीति, विकास और भविष्य की योजनाओं के आधार पर दिया जाएगा, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। संतुलित सोच और जिम्मेदार मतदान ही एक मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।

‘अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला’, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी सफाई, जानिए कोर्ट के फैसले पर क्या बोले

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं और विवादों के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की कोई छूट नहीं दी जा रही है और न ही भविष्य में दी जाएगी। मंत्री ने इसे लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और गलत जानकारियों को पूरी तरह खारिज किया।

अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला

भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं फैसले का गंभीरता से अध्ययन किया है और यह स्पष्ट है कि अरावली के संरक्षण को और मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ग्रीन अरावली परियोजना को विस्तार मिला, वहीं उदयपुर को एक्रेडिट सिटी का दर्जा भी इसी सरकार में मिला।

एनसीआर में माइनिंग पर सख्त रुख

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि कोर्ट के फैसले में अरावली के वैज्ञानिक आकलन पर जोर दिया गया है। इसमें एनसीआर क्षेत्र के तहत दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और झज्जर शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीआर में माइनिंग को शामिल नहीं किया गया है और वहां खनन की कोई अनुमति नहीं है।

कोर्ट ने बनाई तकनीकी कमेटी

भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स को लेकर एक तकनीकी कमेटी का गठन किया है। फैसले में 100 मीटर का दायरा पर्वत की चोटी से जमीन के भीतर तक माना गया है, जबकि पूरी अरावली रेंज के लिए 500 मीटर का दायरा तय किया गया है।

उन्होंने बताया कि:
• दिल्ली-एनसीआर में नई माइनिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी
• अरावली को कोर एरिया माना गया है
• यहां 20 वाइल्डलाइफ सेंचुरी, 4 टाइगर रिजर्व और करीब 20% फॉरेस्ट एरिया मौजूद है
• कोर्ट ने अरावली में चल रहे ग्रीन प्रोजेक्ट्स की सराहना भी की है।

पर्यावरण और विकास में संतुलन का दावा

कोर्ट के फैसले पर सरकार का समर्थन जताते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास को रोकना नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित यह परिभाषा अब सभी तरह के भ्रम को खत्म करती है और अवैध खनन व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त रोक लगाएगी।

भारत में लोकतंत्र पर हमला: राहुल गांधी ने जर्मनी में उठाए चुनावी निष्पक्षता और एजेंसियों के दुरुपयोग के सवाल

नई दिल्ली/बर्लिन (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। सोमवार (22 दिसंबर 2025) को हर्टी स्कूल, बर्लिन में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत में लोकतंत्र पर हमला हो रहा है और देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी ने ऐसा माहौल बना दिया है, जहां चुनाव आयोग, खुफिया एजेंसियां और जांच एजेंसियां निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहीं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने कभी संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं किया, लेकिन मौजूदा सरकार इनका इस्तेमाल राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर रही है।

चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने भारत में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में निष्पक्ष चुनावों के जरिए जीत हासिल की, लेकिन कुछ राज्यों में चुनावों को प्रभावित किया गया। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा चुनाव कांग्रेस ने जीता था, जबकि महाराष्ट्र में चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इन मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सबूत भी पेश किए, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

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ब्राजील की महिला का वोटर लिस्ट में नाम होने का आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हरियाणा की वोटर लिस्ट में ब्राजील की एक महिला का नाम 22 बार दर्ज है। उन्होंने कहा कि एक ही महिला द्वारा एक बूथ पर 200 बार वोट डालने जैसे गंभीर आरोप सामने आए, लेकिन चुनाव आयोग ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। उनके मुताबिक, यह देश की चुनावी व्यवस्था में गहरी खामियों की ओर इशारा करता है।

जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

कांग्रेस नेता ने कहा कि सीबीआई, ईडी और खुफिया एजेंसियों को हथियार बनाया जा रहा है। उनका आरोप था कि इन एजेंसियों के अधिकांश मामले बीजेपी विरोधियों के खिलाफ दर्ज हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर कोई बड़ा व्यापारी कांग्रेस का समर्थन करता है, तो उसे धमकियां दी जाती हैं और जांच एजेंसियां उसके पीछे लगा दी जाती हैं।

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संघर्ष जारी रहेगा

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष इस स्थिति से निपटने के लिए मजबूत प्रतिरोध तंत्र तैयार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ बीजेपी से नहीं, बल्कि भारतीय संस्थाओं पर बीजेपी के कथित कब्जे के खिलाफ है।

मासूम से दुष्कर्म करने वाला आरोपी पुलिस मुठभेड़ में दबोचा गया

दुष्कर्मी को पुलिस से मुठभेड़, पैर में गोली लगने के बाद हुआ गिरफ्तार


संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धनघटा थाना क्षेत्र में सात वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की जघन्य घटना को अंजाम देने वाले आरोपी को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को सीयर कला बगीचे के पास हुई इस कार्रवाई में आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान 22 वर्षीय सत्येंद्र उर्फ शैलेंद्र के रूप में हुई है, जो पीड़िता का पट्टीदार बताया जा रहा है। आरोपी के पास से पुलिस ने 12 बोर का अवैध तमंचा, चैंबर में फंसा मिस कारतूस, एक खोखा और 700 रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। उसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर बाइक से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक सुनसान बगीचे में ले गया, जहां उसने दुष्कर्म की अमानवीय वारदात को अंजाम दिया।

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घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपी तब तक फरार हो चुका था। बच्ची की हालत गंभीर थी, अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी और एक दांत भी टूट गया था। परिजन उसे तत्काल सीएचसी हैंसर ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की, इसी दौरान आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में वह घायल हो गया। घायल अवस्था में उसे पहले सीएचसी हैंसर और बाद में जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कर्तव्य निभाते समय बुझा पुलिसकर्मी का जीवन, धानी चौकी में मातम

ड्यूटी के दौरान हेड कांस्टेबल की आकस्मिक मौत, पुलिस महकमे में शोक की लहर


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।महराजगंज जनपद में सोमवार को पुलिस विभाग को गहरा आघात उस समय लगा, जब ड्यूटी के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ हेड कांस्टेबल की अचानक मौत हो गई। धानी बाजार क्षेत्र के बृजमनगंज थाना अंतर्गत धानी पुलिस चौकी पर तैनात 2011 बैच के हेड कांस्टेबल रामनयन मौर्य (40 वर्ष) का सेवा काल में निधन हो गया। इस दुखद घटना से पूरे पुलिस महकमे के साथ-साथ क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेड कांस्टेबल रामनयन मौर्य अपने सहयोगी हेड कांस्टेबल अनूप तिवारी के साथ सोमवार को चौकी क्षेत्र के गांवों में एचएस (हिस्ट्रीशीटर) चेकिंग कर बाइक से वापस लौट रहे थे। जब वे धानी चौकी से लगभग 200 मीटर की दूरी पर पहुंचे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उनके हाथ-पैरों में तेज कंपन शुरू हो गया और वे असहज हो गए।

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स्थिति गंभीर देख पीछे बैठे हमराही ने तुरंत बाइक रोकी और आसपास मौजूद ग्रामीणों की सहायता से उन्हें धानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। सीएचसी में तैनात अधीक्षक चिकित्सक डॉ. प्रकाश चंद चौधरी ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से पुलिसकर्मियों में शोक और स्तब्धता फैल गई।
स्वर्गीय रामनयन मौर्य मूल रूप से जनपद आजमगढ़ के थाना मुबारकपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोहरा के निवासी थे। वे बीते दो वर्षों से धानी चौकी पर तैनात थे और अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यवहार और कर्तव्यनिष्ठा के लिए सहकर्मियों के बीच विशेष पहचान रखते थे। चौकी प्रभारी आलोक राय, हेड कांस्टेबल अरविंद यादव, अनूप तिवारी और धीरेंद्र यादव सहित कई पुलिसकर्मियों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी फरेंदा बसंत सिंह पुलिस बल के साथ सीएचसी धानी पहुंचे और मामले की जानकारी ली। वहीं थानाध्यक्ष बृजमनगंज सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है। उनके पहुंचने के बाद ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
ड्यूटी के दौरान एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी के असमय निधन से पुलिस विभाग के साथ-साथ आम नागरिकों में भी शोक की भावना है।