Friday, June 26, 2026
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मिलावट से जनस्वास्थ्य पर खतरा, संगठित अपराध की ओर इशारा

मिलावटी दूध,पनीर और दुग्ध उत्पादों पर बढ़ता संकट-भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती -एफएसएसएआई का अभियान निर्णायक हस्तक्षेप- एक समग्र विश्लेषण

पनीर में संभवतःस्टार्च मिलाना, दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और सिंथेटिक रसायन,यह मिलावट संगठित अपराध का रूप ले चुकी है इसपर नियंत्रण ज़रूरी- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सर्वविदित है क़ि भारत में दूध और दुग्ध उत्पाद केवल पोषण का स्रोत नहीं,बल्कि संस्कृति परंपरा और आर्थिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।दुनियाँ का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश होने के बावजूद भारत आज एक गंभीर विडंबना का सामना कर रहा है,मिलावटी दूध,नकली पनीर और अशुद्ध खोया का तेज़ी से बढ़ता कारोबार। यह समस्या अब केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रही,बल्कि खाद्य प्रणाली की विश्वसनीयता, उपभोक्ता अधिकारों और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़े संकट के रूप में अब उभर चुकी है।मिलावट की समस्या:स्थानीय गड़बड़ी से राष्ट्रीय आपात तक -बीते कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से मिलावटी दूध, पनीर और खोया की लगातार शिकायतें सामने आई हैं। कहीं पनीर में स्टार्च मिलाया जा रहा है, तो कहीं दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और सिंथेटिक रसायन।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह मिलावट संगठित अपराध का रूप ले चुकी है, जिसमें अवैध डेयरी यूनिट्स, नकली ब्रांडिंग और कमजोर निगरानी तंत्र का खुला दुरुपयोग हो रहा है।इसके परिणामस्वरूप आम उपभोक्ता अनजाने में ज़हर का सेवन करने को मजबूर है। स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार:एक अदृश्य लेकिन घातक खतरा- मिलावटी दूध और पनीर के सेवन से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर सबसे अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन पेट संबंधी रोगों, किडनी और लिवर डैमेज, हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डालती है और देश की मानव पूंजी को कमजोर करती है।

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साथियों बात अगर हम एफएसएसएआई का निर्णायक हस्तक्षेप,दिसंबर 2025 से विशेष अभियान को समझने की करें तो,उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंताओं और संसद में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद,भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने दिसंबर 2025 में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया। एफएसएसएआई ने देशभर में मिलावटी दूध, पनीर और खोया के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने का आदेश जारी किया,जिसे अब तक का सबसे व्यापक डेयरी निगरानी अभियान माना जा रहा है।देशव्यापी प्रवर्तन अभियान- होटल से डेयरी यूनिट तक सख्ती -इस विशेष अभियान के तहत होटल,रेस्टोरेंट,कैटरिंग यूनिट्स, मिठाई दुकानों और डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों को जांच के दायरे में लाया गया है। खाद्य व्यवसाय संचालकों के परिसरों से दूध,पनीर और खोया के सैंपल लिए जाएंगे और उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाएगा। मानकों पर खरे न उतरने वाले उत्पादों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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साथियों बात अगर हम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश देने के महत्व को समझने की करें तो,एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित किया है कि वे दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की पहचान के लिए व्यापक, समयबद्ध और लक्षित अभियान चलाएं।यह निर्देश केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जवाबदेही से जुड़ा है। राज्यों को तय समयसीमा में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। फूड सेफ्टी ऑफिसरों की भूमिका, जमीनी स्तर पर कार्रवाई,इस अभियान में फूड सेफ्टी ऑफिसर की भूमिका केंद्रीय है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे नियमित रूप से दूध,पनीर और खोया के सैंपल लें, संदिग्ध यूनिट्स पर छापे मारें और प्रयोगशाला परीक्षण सुनिश्चित करें। पहली बार यह सुनिश्चित किया गया है कि निरीक्षण केवल कागज़ी न रहे, बल्कि ठोस और परिणाम आधारित होगी। (1) सख्त दंडात्मक प्रावधान-लाइसेंस रद्द से लेकर यूनिट बंद तक,जहां मिलावट पाई जाएगी, वहां केवल जुर्माने तक सीमित न रहकर लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण, माल जब्ती,अवैध यूनिट्स को सील करना और मिलावटी उत्पादों को नष्ट करना अनिवार्य किया गया है।

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यह स्पष्ट संदेश है कि अब मिलावटखोरी को एक गंभीर आर्थिक अपराध माना जाएगा। (2) ट्रेसबिलिटी जांच, पूरी सप्लाई चेन पर नजर- एफएसएसएआई ने पहली बार दूध और पनीर की पूरी सप्लाई चेन की ट्रेसबिलिटी जांच को अनिवार्य किया है। यदि किसी क्षेत्र में संदिग्ध पैटर्न या बार-बार मिलावट की शिकायत मिलती है, तो कच्चे दूध से लेकर अंतिम उत्पाद तक की जांच की जाएगी। इससे बड़े नेटवर्क और संगठित मिलावट माफिया तक पहुंचने में मदद मिलेगी। (3) रियल टाइम रिपोर्टिंग-पारदर्शिता की नई व्यवस्था-अभियान की निगरानी के लिए हर 15 दिन में रियल टाइम रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। सभी निरीक्षणों और नमूना जांच का डेटा तुरंत एफएसएसएआई पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, विश्लेषण और नीति निर्माण को मजबूती मिलेगी।(4) फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स-मोबाइल लैब का विस्तारग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में त्वरित जांच के लिए फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स यानी मोबाइल लैब को बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात किया जा रहा है। इससे मौके पर ही प्रारंभिक जांच संभव होगी और उपभोक्ताओं में जागरूकता भी बढ़ेगी।

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साथियों बात कर हम होटल और फूड सर्विस सेक्टर की जिम्मेदारी इसको समझने और संसद में पेश पंजाब के आंकड़ों की करें तो,एफएसएसएआई ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर को कड़ा संदेश दिया है कि वे केवल प्रमाणित और शुद्ध डेयरी उत्पादों का ही उपयोग करें।यदि किसी फूड सर्विस यूनिट में मिलावटी दूध या पनीर पाया गया, तो उसे भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।संसद में पेश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं।वर्ष 2024- 25 में पंजाब में जांचे गए लगभग 47 प्रतिशत दुग्ध उत्पाद मानकों पर खरे नहीं उतरे। पनीर में स्टार्च और सुक्रोज जैसी मिलावट ने यह स्पष्ट कर दिया कि समस्या केवल छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि औद्योगिक पैमाने पर हो रही है।गलत ब्रांडिंग और उपभोक्ता के साथ धोखा मिलावट के साथ- साथ गलत ब्रांडिंग भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। नकली लेबल, फर्जी सर्टिफिकेशन और भ्रामक दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैंएफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि गलत ब्रांडिंग भी खाद्य सुरक्षा उल्लंघन के अंतर्गत आएगी और उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

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साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय संदर्भ वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों से तालमेल इसको समझने की करें तो दुनियाँ के कई देशों में दूध और डेयरी उत्पादों की ट्रेसबिलिटी रियल टाइम मॉनिटरिंग और कठोर दंड व्यवस्था पहले से लागू है। एफएसएसएआई का यह अभियान भारत को वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।उपभोक्ता जागरूकता: नीति की सफलता की कुंजी,सरकारी कार्रवाई के साथ-साथ उपभोक्ता जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। जब तक उपभोक्ता शुद्ध उत्पादों की मांग नहीं करेंगे और संदिग्ध उत्पादों की शिकायत नहीं करेंगे, तब तक मिलावट पर पूरी तरह सटीक रूप से अंकुश लगाना कठिन रहेगा।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि खाद्य सुरक्षा से राष्ट्रीय विश्वास तक,मिलावटी दूध, पनीर और खोया के खिलाफ एफएसएसएआई का विशेष अभियान केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं,बल्कि जनस्वास्थ्य, उपभोक्ता अधिकार और राष्ट्रीय खाद्य विश्वास की रक्षा का प्रयास है।यदि यह अभियान ईमानदारी, पारदर्शिता और निरंतरता के साथ लागू होता है,तो यह न केवल मिलावटखोरों पर नकेल कसेगा,बल्कि भारत की खाद्य प्रणाली को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित बनाएगा।

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-संकलनकर्ता लेखक -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी)

जब राम ने पाया अपना परम सेवक

🔱 शास्त्रोक्त पौराणिक कथा “जब धर्म ने पाया अपना दूत: श्रीराम–हनुमान प्रथम साक्षात्कार और भक्ति का शाश्वत उद्घोष”

पम्पापुर में श्रीराम और सुग्रीव के पवित्र मिलन के बाद कथा एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती है, जहाँ भक्ति को स्वर, धर्म को गति और न्याय को साधन प्राप्त होता है। यही वह क्षण है जब रामकथा में हनुमान का प्राकट्य केवल एक पात्र नहीं, बल्कि युगों-युगों तक जीवित रहने वाला आदर्श बन जाता है।
वाल्मीकि रामायण के किष्किन्धा काण्ड में वर्णित यह प्रसंग केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि मानव चेतना को दिशा देने वाला आध्यात्मिक संदेश है।

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🕉️ श्रीहनुमान का प्रथम प्राकट्य: धर्म की पहचान
सुग्रीव के भय और अविश्वास को शांत करने के लिए जो वानर ब्राह्मण वेश में आगे बढ़ता है—वही हैं पवनपुत्र हनुमान।
“न तस्य वाणी अनृतं जगाद”
— वाल्मीकि रामायण
(उनकी वाणी में असत्य का लेश भी नहीं था)
हनुमान जी का पहला परिचय ही यह सिद्ध करता है कि—
सच्चा सेवक पहले सुनता है, फिर बोलता है
वाणी में मधुरता और बुद्धि में विवेक हो तो सामने स्वयं भगवान प्रकट हो जाते हैं

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🌿 श्रीराम और हनुमान: आत्मा और सेवा का मिलन
जैसे ही हनुमान श्रीराम और लक्ष्मण के समीप पहुँचते हैं, उनका हृदय पहचान लेता है—
“यही हैं नारायण, यही हैं धर्म।”
हनुमान जी की विशेषता यह है कि—
उन्होंने कभी स्वयं को महान नहीं कहा
उन्होंने राम को ही अपनी पहचान बना लिया
श्रीराम कहते हैं—
“सुग्रीव को तुम जैसा मंत्री प्राप्त हुआ, यह उसका सौभाग्य है।”
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि हनुमान केवल बलवान नहीं, अपितु नीति, विवेक और धर्म के प्रतिनिधि हैं।

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🔥 भक्ति की शास्त्रोक्त परिभाषा: हनुमान दृष्टि
हनुमान जी की भक्ति भावुकता नहीं, साधना है।
उनकी सेवा—
निष्काम है
निस्वार्थ है
निरंतर है
यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया—
“रामकाजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम”
— रामचरितमानस
अर्थात कर्तव्य ही उनका विश्राम है।

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🛕 हनुमान जी की महिमा: शास्त्रों के आलोक में
हनुमान जी—
शिव के अंशावतार माने गए
वेदों के ज्ञाता
नव व्याकरण के पारंगत
अष्ट सिद्धि और नव निधि के स्वामी
फिर भी—
अहंकार शून्य, भक्ति पूर्ण।
यहाँ हनुमान हमें सिखाते हैं कि—
“महानता का सबसे बड़ा प्रमाण विनम्रता है।”

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⚖️ समानता का शास्त्रीय संदेश
हनुमान जी का चरित्र आज के समाज को स्पष्ट संदेश देता है—
पद से नहीं, कर्तव्य से पहचान बनती है
शक्ति का उद्देश्य सेवा है, शासन नहीं
नेतृत्व वही श्रेष्ठ है, जो धर्म पर आधारित हो
हनुमान जी न राजा थे, न ऋषि—
फिर भी हर युग में सबसे पूज्य।

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🌍 आज के युग में कथा का संदेश
आज जब समाज—
स्वार्थ
अहंकार
विभाजन
से जूझ रहा है, तब हनुमान जी का यह प्रथम साक्षात्कार हमें सिखाता है—
✔ भक्ति में अहंकार नहीं होता
✔ नेतृत्व में करुणा आवश्यक है
✔ मित्रता का आधार धर्म होना चाहिए
✔ सेवा ही सबसे बड़ा बल है
🔔 एपिसोड 8 का भावात्मक निष्कर्ष
यह कथा केवल रामायण का अध्याय नहीं,
यह मानव जीवन का मार्गदर्शन सूत्र है।
जहाँ राम धर्म हैं—
वहाँ हनुमान उसकी गति हैं।
जहाँ उद्देश्य पवित्र हो—
वहाँ साधन स्वयं प्रकट होते हैं।
🪔 आगामी एपिसोड संकेत
एपिसोड 9 में—
हनुमान जी का किष्किन्धा लौटना,
सुग्रीव का राज्याभिषेक,
और वानर सेना के धर्मयुद्ध की तैयारी।

देश निर्माण में नेताओं और कलाकारों की भूमिका

इतिहास के पन्नों में अमर 23 दिसंबर: देश-दुनिया को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
23 दिसंबर इतिहास का वह दिन है, जब राजनीति, सिनेमा, स्वतंत्रता आंदोलन और समाज सुधार के कई महान स्तंभ इस संसार से विदा हुए। ये वे नाम हैं, जिनका योगदान केवल अपने समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के विचार और दृष्टि को भी आकार देता रहा। आइए 23 दिसंबर को हुए इन महत्वपूर्ण निधन पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।
🎬 श्याम बेनेगल (निधन: 23 दिसंबर 2024)
जन्म: 14 दिसंबर 1934
जन्म स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना, भारत
श्याम बेनेगल भारतीय समानांतर सिनेमा के सबसे सशक्त स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी सिनेमा को मनोरंजन से आगे बढ़ाकर सामाजिक यथार्थ से जोड़ा। अंकुर, निशांत, मंथन, भूमिका जैसी फिल्मों के माध्यम से ग्रामीण भारत, स्त्री विमर्श और सत्ता-संरचना को गहराई से प्रस्तुत किया। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। भारतीय फिल्म संस्थानों और युवा फिल्मकारों के लिए वे प्रेरणास्रोत रहे।

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🏛️ के. करुणाकरन (निधन: 23 दिसंबर 2010)
जन्म: 5 जुलाई 1918
जन्म स्थान: कन्नूर जिला, केरल, भारत
के. करुणाकरन केरल की राजनीति का एक प्रभावशाली नाम थे। वे चार बार केरल के मुख्यमंत्री रहे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को राज्य में मजबूत आधार दिया। स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी से लेकर प्रशासनिक दक्षता तक, उनका राजनीतिक जीवन बहुआयामी रहा। उन्होंने बुनियादी ढांचे, शिक्षा और सामाजिक स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया। केरल की आधुनिक राजनीति में उनका योगदान आज भी मार्गदर्शक माना जाता है।

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🎤 नूरजहाँ (निधन: 23 दिसंबर 2000)
जन्म: 21 सितंबर 1926
जन्म स्थान: कसूर, पंजाब (अब पाकिस्तान)
मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहाँ भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्रभावशाली गायिका और अभिनेत्री थीं। उन्होंने भारतीय सिनेमा से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में पाकिस्तान में संगीत की दुनिया में नया अध्याय रचा। उनकी आवाज़ में दर्द, मोहब्बत और रूहानी गहराई थी। फिल्मी संगीत को उन्होंने शास्त्रीय और लोक रंगों से समृद्ध किया। उनका योगदान आज भी दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

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🇮🇳 पामुलापर्ति वेंकट नरसिंह राव (निधन: 23 दिसंबर 2004)
जन्म: 28 जून 1921
जन्म स्थान: करीमनगर जिला, तेलंगाना, भारत
पी. वी. नरसिंह राव भारत के दसवें प्रधानमंत्री थे। उनके कार्यकाल में 1991 का ऐतिहासिक आर्थिक उदारीकरण हुआ, जिसने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा। वे विद्वान, लेखक और बहुभाषी नेता थे। कठिन आर्थिक परिस्थितियों में लिए गए उनके निर्णयों ने भारत की विकास यात्रा की दिशा बदल दी। आधुनिक भारत की आर्थिक नींव रखने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
🕊️ स्वामी श्रद्धानन्द (निधन: 23 दिसंबर 1926)
जन्म: 22 फरवरी 1856
जन्म स्थान: तलवंडी, लुधियाना जिला, पंजाब, भारत
स्वामी श्रद्धानन्द महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और आर्य समाज के प्रमुख नेता थे। उन्होंने दलित उत्थान, स्त्री शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए जीवन समर्पित किया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना उनके दूरदर्शी प्रयासों का परिणाम है। वे सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निर्भीक स्वर थे और उनका बलिदान भारतीय समाज सुधार आंदोलन का अमूल्य अध्याय है।
🏹 अर्जुन लाल सेठी (निधन: 23 दिसंबर 1941)
जन्म: 9 सितंबर 1880
जन्म स्थान: जयपुर जिला, राजस्थान, भारत
अर्जुन लाल सेठी राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे युवाओं में राष्ट्रवादी चेतना जगाने के लिए गुप्त क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े रहे। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में उन्होंने संगठन और विचार दोनों स्तरों पर योगदान दिया। उनका जीवन त्याग, साहस और देशभक्ति का प्रतीक है।

23 दिसंबर: वो जन्मदिन जिन्होंने भारत के इतिहास को दिशा दी – स्मृतियों में जीवित महान व्यक्तित्व


चौधरी चरण सिंह (1902) – किसानों की आवाज़ बने भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री
चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के नूरपुर गाँव में हुआ। वे भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री रहे और आज भी उन्हें किसानों का सच्चा प्रतिनिधि माना जाता है। एक साधारण कृषक परिवार से आने वाले चरण सिंह ने ज़मींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए। उनका मानना था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है और जब तक किसान मज़बूत नहीं होगा, देश प्रगति नहीं कर सकता। उनकी नीतियाँ आज भी कृषि विमर्श का आधार हैं।
रामवृक्ष बेनीपुरी (1899) – साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम का सशक्त स्वर
23 दिसंबर 1899 को बिहार के मुज़फ़्फरपुर ज़िले में जन्मे रामवृक्ष बेनीपुरी हिंदी साहित्य के बहुआयामी स्तंभ थे। वे उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सक्रिय रहे। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदना स्पष्ट झलकती है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने लेखनी को हथियार बनाया और जनमानस को जागृत किया। उनका साहित्य आज भी युवाओं को सोचने और सवाल करने की प्रेरणा देता है।

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मेहरचंद महाजन (1889) – न्यायपालिका के दृढ़ प्रहरी
मेहरचंद महाजन का जन्म 23 दिसंबर 1889 को पंजाब क्षेत्र में हुआ था। वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के तीसरे मुख्य न्यायाधीश बने। भारतीय न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में उनका योगदान ऐतिहासिक है। कश्मीर विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। उन्होंने न्याय को केवल कानून नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा। उनका जीवन न्याय, संतुलन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण है।
सत्येन्द्र चंद्र मित्रा (1888) – स्वतंत्रता संग्राम के प्रतिबद्ध राजनीतिज्ञ
23 दिसंबर 1888 को जन्मे सत्येन्द्र चंद्र मित्रा एक कुशल राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में सक्रिय रहे और देश की राजनीतिक चेतना को दिशा दी। सामाजिक न्याय और स्वशासन उनके विचारों का केंद्र था। उन्होंने संसद और सार्वजनिक जीवन में भारतीय हितों को मजबूती से रखा।
स्वामी सारदानन्द (1865) – आध्यात्मिकता और सेवा का संगम
स्वामी सारदानन्द का जन्म 23 दिसंबर 1865 को हुआ। वे रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की नींव को मज़बूत किया और शिक्षा व सेवा को आध्यात्मिक साधना से जोड़ा। उनका जीवन त्याग, अनुशासन और मानव सेवा का प्रेरक उदाहरण है।

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रास बिहारी घोष (1845) – कानून, राजनीति और समाज सेवा का संगम
23 दिसंबर 1845 को जन्मे रास बिहारी घोष एक प्रख्यात अधिवक्ता, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच से राष्ट्रीय मुद्दों को मुखरता दी। कानून के क्षेत्र में उनकी विद्वता और सामाजिक सुधारों में सक्रिय भूमिका उन्हें विशिष्ट बनाती है।
अवतार सिंह रिखी (1923) – संसदीय परंपराओं के संरक्षक
अवतार सिंह रिखी का जन्म 23 दिसंबर 1923 को हुआ। वे लोकसभा के भूतपूर्व महासचिव रहे और भारतीय संसदीय प्रणाली को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई। संसदीय प्रक्रियाओं की मर्यादा और निष्पक्षता बनाए रखने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
अरुण बाली (1942) – अभिनय में अनुभव की गहराई
23 दिसंबर 1942 को जन्मे अरुण बाली भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के सम्मानित अभिनेता थे। उन्होंने चरित्र भूमिकाओं के माध्यम से दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनकी अभिनय शैली सादगी और गंभीरता का सुंदर संतुलन थी।
शिव कुमार सुब्रमण्यम (1959) – संवेदनशील अभिनय और सशक्त लेखनी
शिव कुमार सुब्रमण्यम का जन्म 23 दिसंबर 1959 को हुआ। वे एक दिग्गज अभिनेता होने के साथ-साथ पुरस्कार विजेता लेखक भी थे। उनकी फिल्मों और लेखन में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक यथार्थ और गहराई दिखाई देती है।

ग्रहों की भाषा समझिए, जीवन की उलझनें खुद सुलझ जाएँगी

पंचांग 23 दिसंबर 2025, मंगलवार | आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि, नक्षत्र व यात्रा योग

📜 आज का हिन्दू पंचांग : 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
हिन्दू पंचांग के अनुसार 23 दिसंबर 2025, मंगलवार को पौष माह, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। आज का दिन धार्मिक कार्यों, व्रत-पूजन और शुभ आरंभ के लिए विशेष महत्व रखता है। पंचांग के माध्यम से जानिए आज के शुभ-अशुभ समय, ग्रह-नक्षत्र की स्थिति, राहुकाल, यात्रा दिशा और विशेष योग।

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🗓️ तिथि विवरण
तृतीया तिथि : 22 दिसंबर 10:52 AM से 23 दिसंबर 12:13 PM तक
चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 23 दिसंबर 12:13 PM से 24 दिसंबर 01:11 PM तक
⭐ नक्षत्र- श्रवण नक्षत्र : 23 दिसंबर 05:32 AM से 24 दिसंबर 07:07 AM तक
इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र

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🧘 योग- व्याघात योग : 22 दिसंबर 04:40 PM से 23 दिसंबर 04:30 PM तक
हर्षण योग : 23 दिसंबर 04:30 PM से 24 दिसंबर 04:01 PM तक
🔱 करण- गर करण : 23 दिसंबर 12:13 PM तक
वणिज करण : 23 दिसंबर 12:13 PM से 24 दिसंबर 12:45 AM तक
विष्टि (भद्रा) करण : 24 दिसंबर 12:45 AM से 01:11 PM तक

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📖 संवत विवरण
विक्रम संवत : 2082 (कालयुक्त)
शक संवत : 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास : पौष (अमांत व पूर्णिमांत)
अयन : दक्षिणायन
वैदिक ऋतु : हेमंत
द्रिक ऋतु : शिशिर

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☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय : 07:08 AM
सूर्यास्त : 05:43 PM
चन्द्रोदय : 09:36 AM
चन्द्रास्त : 08:43 PM
♐ सूर्य राशि
धनु राशि
♑ चंद्र राशि
मकर राशि (पूरा दिन व रात)

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अशुभ काल
राहुकाल : 03:04 PM – 04:23 PM
यम गण्ड : 09:47 AM – 11:06 AM
कुलिक काल : 12:25 PM – 01:45 PM
दुर्मुहूर्त :
09:15 AM – 09:57 AM
11:05 PM – 11:59 PM
वर्ज्यम् : 09:48 AM – 11:30 AM

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शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त : 05:32 AM – 06:20 AM
अभिजीत मुहूर्त : 12:04 PM – 12:47 PM
अमृत काल : 08:01 PM – 09:43 PM
🌟 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग :23 दिसंबर 05:32 AM – 07:08 AM (श्रवण नक्षत्र एवं मंगलवार का संयोग)

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🧭 यात्रा योग व दिशा विचार
मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।
यदि यात्रा आवश्यक हो तो गुड़ या घी का सेवन करके यात्रा प्रारंभ करें।
पूर्व एवं पश्चिम दिशा की यात्रा आज लाभकारी मानी गई है।

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🔮 चंद्रबल (24 दिसंबर 07:09 AM तक)
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन राशि वालों को आज चंद्रबल का सहयोग प्राप्त है।
🕉️ दिन का संदेश
आज का दिन संयम, श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है। ग्रहों की चाल बताती है कि सही समय पर किया गया निर्णय जीवन की दिशा बदल सकता है।

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📝 नोट- इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ उत्तरदायी नहीं है। कृपया किसी भी धार्मिक, ज्योतिषीय या महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान अथवा आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

आज का राशिफल: किसे लाभ, किसे सावधानी

लेखक: पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय


वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हमारे दैनिक जीवन, सोच, कार्यक्षेत्र और भावनाओं को प्रभावित करती है। 23 दिसंबर 2025, मंगलवार का दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति के अवसर लाएगा तो कुछ को संयम और सतर्कता की सलाह देता है। नीचे मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल प्रस्तुत है, जिसमें कार्य-व्यवसाय, शिक्षा, कला-संगीत, राजनीति, प्रशासन, आर्थिक स्थिति, शुभ रंग-अंक, आराध्य देवता और राशि अक्षर की जानकारी शामिल है।

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♈ मेष राशि (Aries)
राशि चिन्ह: मेढ़ा | अक्षर: अ, चू, चे, चो, ला
आज मन में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन निर्णय क्षमता बनी रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, नेतृत्व का अवसर मिलेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों को धैर्य रखना होगा।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: वाणी में संयम रखें, लाभ होगा।
आर्थिक: जोखिम भरे निवेश से बचें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
आराध्य: हनुमान जी

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♉ वृषभ राशि (Taurus)
राशि चिन्ह: बैल | अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा
दिन शांत और संतुलित रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: स्थिर प्रगति, सहकर्मियों का सहयोग।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
कला/संगीत: गायन-वादन में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: छवि मजबूत होगी।
आर्थिक: खर्च नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
आराध्य: माता लक्ष्मी

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मिथुन राशि (Gemini)
राशि चिन्ह: जुड़वां | अक्षर: का, की, कु, घ
संवाद में सावधानी जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: भागदौड़ रहेगी, लेकिन परिणाम अच्छे।
शिक्षा: पुराने विषय स्पष्ट होंगे।
कला/संगीत: लेखन-मीडिया में लाभ।
राजनीति/प्रशासन: बयान सोच-समझकर दें।
आर्थिक: सामान्य स्थिति।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
आराध्य: गणेश जी

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कर्क राशि (Cancer)
राशि चिन्ह: केकड़ा | अक्षर: डा, डी, दू, डे
भावनात्मक संतुलन जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का फल मिलेगा।
शिक्षा: ध्यान बढ़ेगा।
कला/संगीत: भावनात्मक रचनाएं।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक: स्थिरता।
शुभ रंग: दूधिया | शुभ अंक: 2
आराध्य: भगवान शिव

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सिंह राशि (Leo)
राशि चिन्ह: सिंह | अक्षर: मा, मी, मू, मे
दिन चुनौतीपूर्ण लेकिन फलदायी।
कार्य/व्यवसाय: धैर्य से काम लें।
शिक्षा: आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कला/संगीत: मंचीय कला में सराहना।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व उभरेगा।
आर्थिक: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
आराध्य: सूर्य देव

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कन्या राशि (Virgo)
राशि चिन्ह: कन्या | अक्षर: टो, पा, पी
अटके कार्य पूरे होंगे।
कार्य/व्यवसाय: योजनाएं सफल।
शिक्षा: पढ़ाई में स्पष्टता।
कला/संगीत: सूक्ष्म कला में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: भरोसा बढ़ेगा।
आर्थिक: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
आराध्य: विष्णु जी

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तुला राशि (Libra)
राशि चिन्ह: तराजू | अक्षर: रा, री, रू
निर्णय में समय लें।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में सावधानी।
शिक्षा: मार्गदर्शन लाभ देगा।
कला/संगीत: डिजाइन-फैशन में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: संतुलन रखें।
आर्थिक: फिजूलखर्ची से बचें।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 6
आराध्य: माता दुर्गा

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वृश्चिक राशि (Scorpio)
राशि चिन्ह: बिच्छू | अक्षर: तो, ना, नी
मेहनत अधिक, परिणाम संतोषजनक।
कार्य/व्यवसाय: विवाद सुलझेंगे।
शिक्षा: रिसर्च में सफलता।
कला/संगीत: गूढ़ विषय आकर्षित करेंगे।
राजनीति/प्रशासन: रणनीति सफल।
आर्थिक: सामान्य लाभ।
शुभ रंग: मरून | शुभ अंक: 8
आराध्य: भगवान भैरव

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धनु राशि (Sagittarius)
राशि चिन्ह: धनुर्धर | अक्षर: ये, यो, भा
नई योजनाएं बनेंगी।
कार्य/व्यवसाय: बदलाव लाभकारी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के योग।
कला/संगीत: सीखने का अवसर।
राजनीति/प्रशासन: विस्तार के संकेत।
आर्थिक: खर्च बढ़ेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
आराध्य: विष्णु जी

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मकर राशि (Capricorn)
राशि चिन्ह: मगर | अक्षर: भो, जा, जी
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
कार्य/व्यवसाय: अनुशासन जरूरी।
शिक्षा: निरंतरता से लाभ।
कला/संगीत: अभ्यास से प्रगति।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का साथ।
आर्थिक: स्थिर आय।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 4
आराध्य: शनिदेव

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कुंभ राशि (Aquarius)
राशि चिन्ह: घड़ा | अक्षर: गू, गे, गो
मिलाजुला दिन।
कार्य/व्यवसाय: फोकस बनाए रखें।
शिक्षा: तकनीकी विषय लाभ देंगे।
कला/संगीत: प्रयोगधर्मिता।
राजनीति/प्रशासन: जनहित में कार्य।
आर्थिक: सोच-समझकर निर्णय।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 7
आराध्य: शिव जी

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मीन राशि (Pisces)
राशि चिन्ह: मछली | अक्षर: दी, दू, थ
मन शांत रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: धीरे-धीरे सुधार।
शिक्षा: रचनात्मक विषयों में सफलता।
कला/संगीत: प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: सहानुभूति से लाभ।
आर्थिक: संतोषजनक स्थिति।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 9
आराध्य: भगवान विष्णु

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डिस्क्लेमर
यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष की पूर्ण प्रमाणिकता का दावा नहीं करती। अपने जीवन से जुड़े निर्णयों के लिए अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

मूलांक 1 से 9 तक जानें करियर, धन, शिक्षा, राजनीति और जीवन पर प्रभाव

दिसंबर 2025 अंक ज्योतिष राशिफल: मूलांक 1 से 9 तक जानें करियर, धन, शिक्षा, राजनीति और जीवन पर प्रभाव

अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार जन्मतिथि से निकला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, कर्म और आने वाले समय के संकेत देता है। दिसंबर 2025 का महीना कई मूलांकों के लिए उन्नति, सम्मान और नए अवसर लेकर आया है, वहीं कुछ को संयम और सावधानी की आवश्यकता होगी।
यह विस्तृत अंक राशिफल पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत है।

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मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)
व्यक्तित्व व प्रभाव: नेतृत्व क्षमता मजबूत रहेगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कार्य/व्यवसाय: प्रशासनिक, सरकारी सेवा, मैनेजमेंट और राजनीति से जुड़े लोगों को लाभ। नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता के संकेत।
कला/संगीत: रचनात्मक कार्यों में नाम मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे, निवेश लाभदायक।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
आराध्य देव: सूर्य देव
उपाय: प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें।

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मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
व्यक्तित्व व प्रभाव: भावनात्मक संतुलन जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में काम सोच-समझकर करें। राजनीति में विरोधियों से सतर्क रहें।
शिक्षा: कला, मनोविज्ञान और साहित्य के विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय।
कला/संगीत: गायन, लेखन में मन लगेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है, जल्दबाजी से बचें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
आराध्य देव: मां दुर्गा
उपाय: सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान करें।

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मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
व्यक्तित्व व प्रभाव: भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: शिक्षक, सलाहकार, राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी उन्नति करेंगे।
शिक्षा: छात्रों के लिए उत्कृष्ट समय, परीक्षा में सफलता।
कला/संगीत: मंच और मीडिया से जुड़े लोगों को पहचान।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
आराध्य देव: भगवान विष्णु
उपाय: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।

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मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
व्यक्तित्व व प्रभाव: संघर्ष के बाद सफलता।
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी, इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के लिए मिश्रित परिणाम।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, अनुशासन जरूरी।
कला/संगीत: प्रयोगधर्मिता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर लेकिन सीमित।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
आराध्य देव: गणेश जी
उपाय: शनिवार को काले तिल अर्पित करें।

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मूलांक 5 (5, 14, 23)
व्यक्तित्व व प्रभाव: वाणी और बुद्धि आपकी सबसे बड़ी ताकत।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया, व्यापार और राजनीति में लाभ।
शिक्षा: कम्युनिकेशन व मैनेजमेंट के छात्रों के लिए श्रेष्ठ समय।
कला/संगीत: लेखन, एंकरिंग में सफलता।
आर्थिक स्थिति: धन आवक मजबूत।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
आराध्य देव: भगवान विष्णु
उपाय: हरे रंग का अधिक उपयोग करें।

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मूलांक 6 (6, 15, 24)
व्यक्तित्व व प्रभाव: आकर्षण और सौभाग्य बढ़ेगा।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, फिल्म, कला, सौंदर्य उद्योग में उन्नति।
शिक्षा: रचनात्मक विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
कला/संगीत: प्रेम और सौंदर्य से जुड़ी रचनाएं सफल।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ और सुख-सुविधा में वृद्धि।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
आराध्य देव: मां लक्ष्मी
उपाय: शुक्रवार को गुलाब अर्पित करें।

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मूलांक 7 (7, 16, 25)
व्यक्तित्व व प्रभाव: आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा।
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, ज्योतिष, अध्यात्म से जुड़े लोगों के लिए शुभ।
शिक्षा: उच्च अध्ययन और शोध में सफलता।
कला/संगीत: शास्त्रीय कला में रुचि।
आर्थिक स्थिति: सोच-समझकर निर्णय लें।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
आराध्य देव: भगवान शिव
उपाय: नियमित ध्यान करें।

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मूलांक 8 (8, 17, 26)
व्यक्तित्व व प्रभाव: मेहनत और अनुशासन से सफलता।
कार्य/व्यवसाय: प्रशासन, कानून, राजनीति में जिम्मेदारी बढ़ेगी।
शिक्षा: धैर्य जरूरी।
कला/संगीत: संघर्ष के बाद पहचान।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
आराध्य देव: शनि देव
उपाय: शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें।

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मूलांक 9 (9, 18, 27)
व्यक्तित्व व प्रभाव: ऊर्जा और साहस से भरपूर।
कार्य/व्यवसाय: सेना, पुलिस, राजनीति और प्रशासन में मान-सम्मान।
शिक्षा: खेल और शारीरिक शिक्षा में सफलता।
कला/संगीत: जोशीली प्रस्तुतियों से नाम।
आर्थिक स्थिति: लाभ और यात्रा के योग।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
आराध्य देव: हनुमान जी
उपाय: मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें।

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महत्वपूर्ण नोट– यह अंक ज्योतिष भारतीय राष्ट्र की प्रमाणित भविष्यवाणी पद्धति नहीं है। इसे सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लें। अपने जीवन से जुड़े बड़े निर्णय लेने से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

23 दिसंबर का वो दिन सत्ता, संघर्ष, साहित्य और विज्ञान की गूंज

23 दिसंबर का इतिहास: सत्ता, संघर्ष, साहित्य और विज्ञान की गूंज—एक तारीख जिसने दुनिया की दिशा बदली

23 दिसंबर केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में दर्ज ऐसी घटनाओं का साक्षी है, जिन्होंने राजनीति, समाज, साहित्य, विज्ञान और वैश्विक संबंधों पर गहरी छाप छोड़ी। इस दिन घटित घटनाएँ आज भी हमें निर्णय, चेतना और परिवर्तन का संदेश देती हैं। आइए जानते हैं 23 दिसंबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत और विश्लेषणात्मक विवरण।

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2008 – सत्यम घोटाला: कॉर्पोरेट जगत की साख पर बड़ा सवाल
23 दिसंबर 2008 को विश्व बैंक ने भारत की प्रमुख आईटी कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज पर प्रतिबंध लगा दिया। यह कार्रवाई कंपनी में हुए बड़े वित्तीय घोटाले के कारण की गई। इस घटना ने न केवल भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े किए, बल्कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी डगमगा दिया। बाद में यह मामला भारत के सबसे चर्चित कॉर्पोरेट घोटालों में गिना गया।

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2008 – गोविन्द मिश्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार
हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कथाकार गोविन्द मिश्र को उनके उपन्यास “कोहरे के कैद रंग” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह कृति आधुनिक समाज की जटिलताओं, मानसिक संघर्षों और संवेदनशील रिश्तों को गहराई से प्रस्तुत करती है। यह सम्मान हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को और मजबूत करता है।

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2007 – पाकिस्तान में आपातकाल को वैध ठहराया गया
पाकिस्तान की अदालत ने 2007 में लगाए गए आपातकाल को सही ठहराया। इस निर्णय ने वहां की न्यायिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर बहस को जन्म दिया। यह घटना दक्षिण एशियाई राजनीति में न्यायपालिका और सत्ता के टकराव का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

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2005 – लेक काकजिंस्की बने पोलैंड के राष्ट्रपति
वामपंथ विरोधी नेता लेक काकजिंस्की ने पोलैंड के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनका कार्यकाल राष्ट्रवाद, सुरक्षा और यूरोपीय राजनीति में पोलैंड की भूमिका को मजबूत करने के लिए जाना गया। यह घटना पूर्वी यूरोप की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने वाली रही।

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2003 – गाजा पट्टी पर इस्रायल का हमला
23 दिसंबर 2003 को इस्रायल ने गाजा पट्टी पर सैन्य हमला किया। यह घटना इस्रायल-फिलिस्तीन संघर्ष के लंबे इतिहास का एक और हिंसक अध्याय बनी, जिसने क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट को और गहरा किया।

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2002 – फिलिस्तीन चुनाव स्थगित
इस्रायली सेना की मौजूदगी के चलते फिलिस्तीन ने अपने चुनाव स्थगित कर दिए। यह फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर संघर्ष के प्रभाव को दर्शाता है और मध्य-पूर्व की जटिल राजनीतिक स्थिति को उजागर करता है।

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2000 – न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत
न्यूजीलैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर महिला क्रिकेट विश्व कप का खिताब जीता। यह जीत महिला खेलों के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई और महिला क्रिकेट को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक बनी।

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2000 – कलकत्ता से कोलकाता: पहचान की वापसी
पश्चिम बंगाल की राजधानी का नाम आधिकारिक रूप से कलकत्ता से बदलकर कोलकाता किया गया। यह निर्णय स्थानीय संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक अहम कदम था।

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1995 – मंडी डाबवाली अग्निकांड: एक दर्दनाक त्रासदी
हरियाणा के मंडी डाबवाली में एक स्कूल कार्यक्रम के दौरान भीषण आग लगने से लगभग 360 लोगों की जान चली गई। यह हादसा भारत के सबसे भयावह अग्निकांडों में शामिल है और आज भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की चेतावनी देता है।

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1969 – चंद्रमा से लाए गए पत्थरों की प्रदर्शनी
चांद से लाए गए पत्थरों को राजधानी में प्रदर्शित किया गया, जिसने आम जनता को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने का काम किया। यह मानव अंतरिक्ष अभियानों की सफलता का प्रतीक था।

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1976 – मॉरिशस में मिश्रित सरकार का गठन
सर शिवसागर रामगुलाम ने मॉरिशस में मिली-जुली सरकार बनाई। यह लोकतांत्रिक सहयोग और राजनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।

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1968 – ‘मेनका’ रॉकेट का सफल प्रक्षेपण
भारत ने अपना पहला मौसम संबंधी रॉकेट ‘मेनका’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह घटना भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रारंभिक लेकिन निर्णायक चरण को दर्शाती है।

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1926 – स्वामी श्रद्धानंद की हत्या
आर्य समाज के प्रमुख नेता स्वामी श्रद्धानंद की हत्या ने देश को झकझोर दिया। वे सामाजिक सुधार, शिक्षा और धार्मिक सद्भाव के प्रबल समर्थक थे।

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1922 – बीबीसी रेडियो का दैनिक समाचार प्रसारण
बीबीसी रेडियो ने नियमित समाचार प्रसारण शुरू किया, जिसने आधुनिक पत्रकारिता और जनसंचार के इतिहास में नई क्रांति ला दी।
1921 – विश्व-भारती विश्वविद्यालय का उद्घाटन
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व-भारती विश्वविद्यालय का उद्घाटन हुआ। यह संस्थान भारतीय और वैश्विक संस्कृति के संगम का प्रतीक बना।

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1914 – प्रथम विश्व युद्ध में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड सेना का काहिरा आगमन
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सेनाएँ मिस्र पहुँचीं, जो आगे चलकर एएनजेडएसी की ऐतिहासिक भूमिका का आधार बनीं।
1912 – दिल्ली को राजधानी बनाने की ऐतिहासिक घोषणा
वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय ने हाथी पर बैठकर दिल्ली में प्रवेश किया। इसी दौरान बम विस्फोट में वे घायल हुए, फिर भी दिल्ली को राजधानी घोषित किया गया—यह घटना ब्रिटिश भारत के इतिहास में निर्णायक मोड़ थी।

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1902 – चौधरी चरण सिंह का जन्म
भारत के सातवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ। वे किसानों के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं और ग्रामीण भारत की आवाज बने।
1901 – शांतिनिकेतन में ब्रह्मचर्य आश्रम की स्थापना
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन में ब्रह्मचर्य आश्रम की औपचारिक शुरुआत की, जो आगे चलकर शिक्षा के वैकल्पिक मॉडल के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
1894 – पौष मेले की शुरुआत
शांतिनिकेतन में पौष मेले का उद्घाटन हुआ, जिसने बंगाल की लोक-संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवंत मंच प्रदान किया।
1672 – शनि के उपग्रह ‘रिया’ की खोज
खगोलविद जियोवनी कैसिनी ने शनि ग्रह के उपग्रह ‘रिया’ की खोज की, जो खगोल विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
1465 – तालीकोटा का युद्ध
विजयनगर साम्राज्य के शासक वीरूपक्ष द्वितीय को अहमदनगर, बीदर, बीजापुर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं से पराजय मिली। इस युद्ध ने दक्षिण भारत की राजनीतिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया।

23 दिसंबर इतिहास का वह दर्पण है, जिसमें सत्ता की उठापटक, संस्कृति की चमक, विज्ञान की उड़ान और मानवीय संवेदनाओं की गहराई साफ दिखाई देती है। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

महिलाओं के बिना स्वतंत्रता आंदोलन की कल्पना असंभव: प्रो. निधि चतुर्वेदी

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर में 11वें गुरु दक्षता कार्यक्रम के तहत 22 दिसंबर को आयोजित सत्रों में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका और भूजल प्रबंधन जैसे विषयों पर सारगर्भित विमर्श हुआ।
प्रथम सत्र में इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. निधि चतुर्वेदी ने “राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं का योगदान” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता में महिलाओं की भूमिका प्राचीन काल से बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से निर्णायक रही है। वैदिक काल की विदुषी महिलाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ज्ञान-परंपरा में स्त्रियाँ केवल सहभागी नहीं, बल्कि विचार-निर्माण की अग्रणी शक्ति रही हैं।
उन्होंने मध्यकालीन सामाजिक परिवर्तनों और औपनिवेशिक दौर, विशेषकर 1857 के बाद महिलाओं में उभरी राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डाला। उपयोगितावादी, सुधारवादी और पुनरुत्थानवादी दृष्टिकोणों के माध्यम से महिलाओं की स्थिति को स्पष्ट करते हुए 1857 से गांधी युग तक उनके त्याग, नेतृत्व और सक्रिय सहभागिता के उदाहरण प्रस्तुत किए। प्रो. चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि क्रांतिकारी आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका का ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन आज नए राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ हो रहा है।
तृतीय सत्र में डॉ. राम आशीष यादव ने “भूजल प्रबंधन” पर वैज्ञानिक व्याख्यान दिया। उन्होंने सतही जल स्रोतों के प्रदूषण और क्षरण के कारण बढ़ती भूजल निर्भरता, जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और अनियंत्रित दोहन से उत्पन्न संकट की व्याख्या की। जलभृतों की संरचना बताते हुए उन्होंने अत्यधिक पंपिंग से लवणता, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसी समस्याओं को मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बताया। दिल्ली, लखीमपुर और सीतापुर के उदाहरणों से भूजल ह्रास और प्रदूषण की स्थिति स्पष्ट की गई।
डॉ. यादव ने समाधान के रूप में वर्षा जल संचयन, वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रभावी नीतियों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर बल दिया तथा बचपन से जल संरक्षण शिक्षा की आवश्यकता रेखांकित की “जल है तो जीवन है।”
द्वितीय सत्र में प्रतिभागियों ने डॉ. के. एम. मिश्रा के मार्गदर्शन में विषयगत प्रस्तुतियाँ दीं, जबकि चतुर्थ सत्र में प्रो. देवेश कुमार के मार्गदर्शन में प्रस्तुतियाँ हुईं। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। संचालन प्रो. राकेश तिवारी ने किया और सह-संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. के. एम. मिश्रा ने दिया।

नीति आयोग के आकांक्षात्मक विकास खण्डों की समीक्षा बैठक सम्पन्न

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l नीति आयोग के अंतर्गत संचालित आकांक्षात्मक विकास खण्ड (Aspirational Blocks Programme) के तहत चयनित विकास खण्डों ब्रह्मपुर एवं बांसगांव में चल रहे विकास कार्यों की गहन समीक्षा बैठक विकास भवन सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्र सरकार द्वारा नामित सेंट्रल प्रभारी अधिकारी एवं सिविल डिफेंस डायरेक्ट, आईआरएस रिधिमा वशिष्ठ ने की। बैठक का उद्देश्य आकांक्षात्मक विकास खण्डों में लागू विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, जमीनी स्तर पर प्रभाव का मूल्यांकन करना तथा आगामी रणनीति को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
बैठक को संबोधित करते हुए सिविल डिफेंस डायरेक्ट रिधिमा वशिष्ठ ने कहा कि आकांक्षात्मक विकास खण्ड कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के अपेक्षाकृत पिछड़े विकास खण्डों को तीव्र गति से विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुर एवं बांसगांव दोनों विकास खण्डों में विभिन्न विभागों द्वारा विकास के उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा इन दोनों विकास खण्डों को आकांक्षात्मक विकास खण्ड के रूप में शामिल किया गया है, जबकि प्रदेश सरकार द्वारा कैंपियरगंज विकास खण्ड को इस श्रेणी में सम्मिलित किया गया है, जो जनपद के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि आकांक्षात्मक विकास खण्डों का मूल आधार डेटा-संचालित शासन प्रणाली है। सभी विभाग अपने-अपने कार्यों की प्रगति को सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि वास्तविक स्थिति का सही मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन आंकड़ों के पीछे जमीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन दिखाई देना चाहिए।
रिधिमा वशिष्ठ ने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, महिला एवं बाल विकास, स्वच्छता, पेयजल, बुनियादी ढांचा और आजीविका जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाए। पोषण के क्षेत्र में कुपोषण से मुक्ति, आंगनबाड़ी केंद्रों की प्रभावी कार्यप्रणाली और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को समय से पोषाहार उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिक्षा के संबंध में उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नामांकन, नियमित उपस्थिति, ड्रॉपआउट दर में कमी और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जाए। आजीविका के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर सृजित करने पर बल दिया जाए। डिजिटल उपकरणों एवं नवाचार का अधिकतम उपयोग कर योजनाओं की निगरानी की जाए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि जनपद प्रशासन आकांक्षात्मक विकास खण्डों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिविल डिफेंस डायरेक्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का आपसी समन्वय बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए और किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने विकास खण्डवार विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि मनरेगा के अंतर्गत रोजगार सृजन, स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता कार्य, पोषण अभियान, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में निरंतर प्रगति हो रही है। परियोजना निदेशक दीपक सिंह ने ग्रामीण विकास योजनाओं की स्थिति से अवगत कराया।
डीसी मनरेगा रघुनाथ सिंह ने मनरेगा के अंतर्गत सृजित रोजगार एवं परिसंपत्ति निर्माण की जानकारी दी। डीपीआरओ नीलेश सिंह ने पंचायत स्तर पर चल रहे विकास एवं स्वच्छता कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत की। जिला कार्यक्रम अधिकारी अभिनव मिश्रा ने महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति पर प्रकाश डाला। बीएसए धर्मेंद्र त्रिपाठी ने शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों की जानकारी दी, जबकि जिला संख्यिकी अधिकारी कमलेश मौर्य ने डेटा संकलन, विश्लेषण एवं रिपोर्टिंग की स्थिति से अवगत कराया।
बैठक के अंत में सिविल डिफेंस डायरेक्ट रिधिमा वशिष्ठ ने निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय एवं नवाचार के साथ कार्य करें और आकांक्षात्मक विकास खण्ड कार्यक्रम को एक परिणामोन्मुखी मॉडल के रूप में स्थापित करें। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा, प्रभावी निगरानी और जनभागीदारी के माध्यम से ब्रह्मपुर, बांसगांव एवं कैंपियरगंज विकास खण्डों को समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास का आदर्श उदाहरण बनाया जाएगा।

भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई के जन्म शताब्दी पर भाषण व काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की जन्म शताब्दी (18 से 25 दिसंबर 2025) के उपलक्ष्य में हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भाषण एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई।
आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय महाविद्यालय, खलीलाबाद के प्राचार्य आशाराम को जनपदीय नोडल अधिकारी तथा असिस्टेंट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) रोहित कुमार राय को जनपदीय संयोजक नियुक्त किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य ब्रजेश त्रिपाठी ने की।
इस अवसर पर महाविद्यालय संयोजक मनोज वर्मा, दीप्ति सिंह, मनोज मिश्र, फखरे आलम, राजकीय महाविद्यालय खलीलाबाद के संतोष चंद, प्रीति सिंह, सरवन कुमार कुशवाहा तथा राजकीय महाविद्यालय बराखाल के देवीदत्त मौर्य सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
भाषण प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय, खलीलाबाद की अंशिका मिश्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान राजकीय महाविद्यालय बराखाल के विजय यादव को तथा तृतीय स्थान हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के आर्यन जायसवाल को मिला।
काव्य पाठ प्रतियोगिता में हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजकिशोर दूबे प्रथम, राजकीय महाविद्यालय खलीलाबाद की रोशनी द्वितीय तथा राजकीय महाविद्यालय बराखाल के गुरु प्रसाद तृतीय स्थान पर रहे।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 10,000 रुपये, द्वितीय स्थान को 5,000 रुपये तथा तृतीय स्थान को 2,500 रुपये की नगद धनराशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। विजेताओं को 25 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

देशी पिस्टल व जिंदा कारतूस के साथ अभियुक्त गिरफ्तार

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सुरौली पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक अभियुक्त को एक देशी पिस्टल व एक जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है।पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी सुनील कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी बरहज राजेश चतुर्वेदी के पर्यवेक्षण में थाना सुरौली पुलिस द्वारा विगत रात्रि मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई। इस दौरान मगरू चौराहे के पास से नरसिंह चौहान पुत्र स्वर्गीय रामनाथ चौहान, निवासी अमेठी मंदिर, उमानगर, थाना कोतवाली, जनपद देवरिया को गिरफ्तार किया गया।तलाशी के दौरान अभियुक्त के कब्जे से एक देशी पिस्टल (.32 बोर) एवं एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। इस संबंध में थाना सुरौली पर मु0अ0सं0 250/2025 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है।गिरफ्तार अभियुक्त का विवरणनरसिंह चौहान पुत्र स्व0 रामनाथ चौहाननिवासी— अमेठी मंदिर, उमानगर, थाना कोतवाली, जनपद देवरियाबरामदगी का विवरणएक देशी पिस्टल (.32 बोर)एक जिंदा कारतूसगिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीमउ0नि0 ज्ञान सिंह पटेलउ0नि0 इजहार खानका0 राजू राजभरका0 गोविन्द यादवका0 बेलाल अंसारी(थाना सुरौली, जनपद देवरिया)पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में अवैध हथियारों व अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

सलेमपुर में ग्राम पंचायत अधिकारी पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप, दो अलग-अलग शिकायतें प्रशासन तक पहुंचीं

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।

विकास खंड सलेमपुर क्षेत्र में पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्राम कस्बा सलेमपुर और ग्राम जमुआ नम्बर–02 से जुड़ी दो अलग-अलग शिकायतों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। दोनों ही मामलों में जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र समेत अन्य सरकारी कार्यों के लिए अवैध धनराशि मांगने के आरोप लगाए गए हैं।
ग्राम कस्बा सलेमपुर के समाजसेवक मो. शादिक अली ने ग्राम सचिव त्रिलोकी नाथ शाह पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए खंड विकास अधिकारी सलेमपुर को शपथ पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम सचिव द्वारा जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य कार्यों के निस्तारण के लिए 10 हजार से 18 हजार रुपये तक की मांग की गई। उन्होंने दावा किया है कि रिश्वत मांगने से संबंधित साक्ष्य उनके मोबाइल फोन में सुरक्षित हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जा सकता है। मो. शादिक अली ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा जांच अवधि में ग्राम सचिव के निलंबन की मांग की है।
वहीं दूसरी ओर विकास खंड सलेमपुर के ग्राम जमुआ नम्बर–02 के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत अधिकारी आदित्य राज कीर्ति पर अवैधानिक धनउगाही और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने दिनांक 22 दिसंबर 2025 को नायब तहसीलदार सलेमपुर गोपाल जी को शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में आरोप है कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए तीन हजार रुपये, मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दो हजार रुपये, परिवार रजिस्टर की नकल के लिए पांच सौ रुपये और परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए प्रति नाम सौ रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। इसके अलावा सरकारी आवास दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जो लोग पैसे नहीं देते, उनके प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट जानबूझकर दो से तीन महीने तक लंबित रखी जाती है। साथ ही झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है और यह कहा जाता है कि वसूली गई रकम ऊपर तक अधिकारियों को देनी पड़ती है। इन आरोपों से गांव में आक्रोश का माहौल है और पंचायत व्यवस्था की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत पत्र पर ऊषा देवी, इरसाद, शहजाद, निजामुद्दीन, आरिफ, राजेश, अला गंगान, तारिक अहमद और रामधन सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
दोनों ही मामलों के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्ती बरती जाती है।

एनएफडीपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर मत्स्य पालक किसान उठायें लाभ : विजय

सीईओ ने मत्स्यजीवी एफएफपीसी का किया निरीक्षण, प्रगति के बारे में ली जानकारी

बरहज, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय कुमार मिश्र ने सोमवार को मत्स्य जीवी फिश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का निरीक्षण किया और चेयरमैन निषाद जितेन्द्र भारत से एफएफपीओ के प्रगति बारे में जानकारी ली I इस दौरान सीईओ ने मत्स्य पालकों से मुखातिब होते हुए मत्स्य विभाग से जुड़ी योजनाओं की चर्चा की I उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन योजना मुख्य रूप से भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना है, जिसका उद्देश्य मछली पालन (फिशिंग और एक्वाकल्चर) क्षेत्र का सतत और समग्र विकास करना है, जिसमें मछुआरों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के लिए ऋण और सहायता प्रदान की जाती है, ताकि मछली उत्पादन बढ़े और किसानों की आय दोगुनी हो सके। इसमें मछुआरों और उद्यमियों को लाभ देने के लिए ऋण गारंटी और ब्याज सहायता भी शामिल है I आगे उन्होंने कहा कि मत्स्य पालक कल्याण कोष, निषाद राज बोट सब्सिडी योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, एनएफडीपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, मछुआ दुर्घटना बीमा, मत्स्य जीवी सहकारी समितियों का गठन आदि योजनायें मत्स्य पालकों के हित में हैं I मछुआ प्रतिनिधि रामधनी निषाद, जय प्रकाश निषाद, बृजा नन्द निषाद ने मत्स्यपालन से जुडी समस्याओं से अवगत कराया । इस अवसर पर राम लखन साहनी, अनिल कुमार साहनी, भीम शंकर सिंह, सतीश निषाद, विवेक कुमार आदि उपस्थित रहें I

कार्यकारी निदेशक ने बनारस रेलवे स्टेशन का किया निरीक्षण

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)
कार्यकारी निदेशक कॉरपोरेट समन्वय(EDCC),रेलवे बोर्ड शैलेन्द्र सिंह ने 22 दिसम्बर,2025 को प्रातः वाराणसी मंडल के बनारस रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन,अपर मंडल रेल प्रबंधक(इंफ्रा) अजय सिंह,वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक शेख रहमान, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर(समन्वय) विकास कुमार सिंह,वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर(Enhm) अभिषेक राय, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर(सामान्य) पंकज केशरवानी, वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर रजत प्रिय समेत स्टेशन के वरिष्ठ पर्यवेक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
कार्यकारी निदेशक कॉरपोरेट समन्वय(EDCC),रेलवे बोर्ड शैलेन्द्र सिंह ने अपने निरीक्षण का आरंभ प्लेटफॉर्म सं 8 पर स्थित पार्सल एवं बुकिंग कार्यालय से किया। उन्होंने पार्सल कार्यालय में रखे पार्सलों की गहन जांच की वजन का मिलान किया साथ ही कार्यालय से आने-जाने वाले पार्सलों ब्यौरा तथा पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम की जानकारी ली। इसके पश्चात उन्होंने सामान्य यात्री हाल,सेकेंड इंट्री,वातानुकूलित यात्री प्रतीक्षालय का निरीक्षण किया और रख-रखाव एवं फर्नीचर बदलने के विषय मे संबंधित को दिशा निर्देश दिया। इसके बाद वे पैदल उपरिगामी पुल से बनारस स्टेशन यार्ड का निरीक्षण करते हुए प्लेटफॉर्म सं 1 पर पहुंचे और प्लेटफॉर्म पर स्थित पे एण्ड यूज,फूड एवं कैटरिंग स्टॉलों,सर्कुलेटिंग एरिया,पार्किंग तथा स्टेशन पर स्थापित विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण कर बनारस स्टेशन पर वाणिज्यिक प्रबंधन, परिचालनिक प्रबंधन, स्वच्छता प्रबंधन तथा गैर लाभकारी उपक्रमों से आय प्राप्त करने तथा भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए रणनीतिक योजनाओं के अनुरूप विकास कार्य करने का निर्देश दिया।