Friday, June 26, 2026
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गुरु गोविन्द सिंह जयंती पर 27 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार गुरु गोविन्द सिंह जयंती को कार्यकारी आदेशों के अंतर्गत अवकाशों की सूची में शामिल किया गया है। शासन स्तर पर सम्यक विचारोपरांत 27 दिसंबर 2025, दिन शनिवार को गुरु गोविन्द सिंह जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में यह अवकाश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। निर्धारित तिथि को सभी शासकीय एवं सार्वजनिक संस्थान बंद रहेंगे।

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भिटौली को मिली आधुनिक बैंकिंग की सौगात, यूपी ग्रामीण बैंक की मॉडर्न शाखा का भव्य उद्घाटन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उपनगर भिटौली के लिए यह दिन ऐतिहासिक बन गया, जब उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की नव-विकसित मॉडर्न शाखा का भव्य उद्घाटन किया गया। आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं से सुसज्जित इस शाखा के शुरू होने से भिटौली सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के हजारों खाताधारकों को बेहतर, तेज और सुरक्षित बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलेगा।
मॉडर्न शाखा का उद्घाटन उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के चेयरमैन एस. ठाकुर ने विधिवत पूजा-अर्चना और फीता काटकर किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय प्रबंधक मुकेश कुमार जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता शाखा प्रबंधक आलोक कुमार गुप्ता ने की। उद्घाटन समारोह में बैंक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

ग्रामीण क्षेत्र के लिए आधुनिक बैंकिंग सुविधा

उद्घाटन के दौरान चेयरमैन एस. ठाकुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के हर व्यक्ति तक सुलभ, पारदर्शी और भरोसेमंद बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। मॉडर्न शाखा के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन लेन-देन और त्वरित सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों, छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को विशेष लाभ होगा।

आर्थिक विकास का बनेगा मजबूत केंद्र

मुख्य अतिथि मुकेश कुमार जैन ने कहा कि आज बैंक केवल धन जमा करने का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक उन्नति का मजबूत आधार हैं। भिटौली शाखा के आधुनिकीकरण से ऋण, बीमा, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाएं और स्वरोजगार से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

ये मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

शाखा प्रबंधक आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि नई मॉडर्न शाखा में
डिजिटल काउंटर

• कैशलेस ट्रांजैक्शन सुविधा
• पासबुक प्रिंटिंग
• एटीएम/डेबिट कार्ड सेवाएं
• पर्याप्त बैठने की व्यवस्था
• दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं
उपलब्ध कराई गई हैं।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

समारोह में शिकारपुर शाखा के शाखा प्रबंधक संदीप कुमार, फील्ड ऑफिसर लक्की सिंह, अंकित कुमार, सुमित कुमार, अखिलेश कुमार शुक्ला सहित कई बैंक अधिकारी, कर्मचारी और खाताधारक मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया। मॉडर्न शाखा के शुभारंभ से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सीएम डैशबोर्ड: नवंबर माह की प्रगति की मंडल स्तरीय समीक्षा, धीमी योजनाओं पर मंडलायुक्त सख्त

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (CM Dashboard) के अंतर्गत नवंबर माह की प्रगति की मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक मंडलायुक्त सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त अनिल ढिंगरा ने की। इस दौरान गोरखपुर मंडल में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की लागत, भौतिक व वित्तीय प्रगति और विभागवार स्थिति की गहन समीक्षा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) विकास यादव, परियोजना निदेशक दीपक सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

विभागवार प्रगति का किया गया प्रेजेंटेशन

बैठक के दौरान सीएम डैशबोर्ड पोर्टल के माध्यम से विभागवार प्रगति रिपोर्ट स्क्रीन पर प्रस्तुत की गई। इसमें गोरखपुर मंडल में संचालित विकास परियोजनाओं की स्वीकृति वर्ष, लागत, कार्य की वर्तमान स्थिति, प्रगति प्रतिशत और पूर्णता की समय-सीमा से जुड़ा विस्तृत विवरण शामिल रहा।
विशेष रूप से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई। लोक निर्माण विभाग, जल निगम, नगर निगम, आवास विकास परिषद, सिंचाई विभाग, वन विभाग और अन्य निर्माण एजेंसियों की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

धीमी प्रगति पर मंडलायुक्त की नाराजगी

डैशबोर्ड पर प्रदर्शित आंकड़ों के अनुसार कई योजनाएं समयसीमा में पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन कुछ परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति न होने पर मंडलायुक्त अनिल ढिंगरा ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि धीमी योजनाओं के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें।
मंडलायुक्त ने कहा कि केवल पोर्टल पर आंकड़े अपडेट करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फील्ड स्तर पर भौतिक प्रगति का सत्यापन भी अनिवार्य रूप से किया जाए।

रैंकिंग सुधार पर जोर

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि जनपद स्तर पर सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग सुधारने के लिए सभी विभागों को लक्ष्य आधारित कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व, नगर विकास, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है।

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नगर निगम और वन विभाग की प्रगति

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि स्वच्छता, सड़क निर्माण, प्रकाश व्यवस्था और जलापूर्ति से संबंधित कार्यों में निरंतर सुधार हो रहा है। जिन योजनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है, उन्हें शीघ्र पूरा कर पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।

प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव ने वृक्षारोपण, हरित पट्टी विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। वहीं परियोजना निदेशक दीपक सिंह ने ग्रामीण विकास योजनाओं की वित्तीय और भौतिक स्थिति से अवगत कराया।

लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

बैठक के अंत में मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि सीएम डैशबोर्ड पर प्रदर्शित जानकारी वास्तविक और अद्यतन होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और बेहतर प्रदर्शन ही जनहितकारी शासन का प्रमाण है।

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यूपी में एक और दिल दहला देने वाला हत्याकांड: प्रेमी संग पत्नी ने की पति की हत्या, राहुल मर्डर केस का पूरा खुलासा

संभल/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। यूपी के संभल जिले के चंदौसी से सामने आया राहुल हत्याकांड एक बार फिर रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला बन गया है। पुलिस के खुलासे के बाद यह मामला प्रदेश के चर्चित मेरठ हत्याकांड की याद दिला रहा है। यहां पत्नी रूबी ने अपने प्रेमी गौरव के साथ मिलकर पति राहुल की हत्या कर दी और फिर शव को ठिकाने लगाने की साजिश रची।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरी वारदात बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई। हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने और पहचान छुपाने की कोशिश की। घटना के बाद महिला ने खुद ही पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई, लेकिन यही रिपोर्ट आगे चलकर पुलिस जांच का बड़ा सुराग बनी।

15 दिसंबर को मिला शव, फिर खुला राज

15 दिसंबर को पतरौआ रोड स्थित ईदगाह के पास नाले में एक अज्ञात शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। जांच के दौरान शव की पहचान राहुल के रूप में हुई, जो 18 नवंबर से लापता था। पूछताछ में पत्नी रूबी पर शक गहराया और सख्ती से पूछताछ करने पर पूरा मामला सामने आ गया।

पुलिस ने गुमशुदगी के केस को हत्या में तब्दील करते हुए रूबी और उसके प्रेमी गौरव को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

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प्रेम संबंध बना हत्या की वजह

पुलिस जांच में सामने आया कि रूबी और गौरव के बीच प्रेम संबंध थे, जिसकी जानकारी राहुल को हो गई थी। इसी को लेकर घर में विवाद हुआ, जो बाद में हत्या का कारण बना। इसके बाद दोनों ने मिलकर शव को ठिकाने लगाने की साजिश रची।

मां-बाप दोनों से बिछुड़े बच्चे

इस जघन्य अपराध के बाद राहुल के दो मासूम बच्चे अनाथ हो गए हैं। 12 वर्षीय बेटा सातवीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि 10 साल की बेटी छठी कक्षा में है। फिलहाल बेटी मौसी के पास और बेटे की परवरिश मामा करेंगे।

पुलिस की बड़ी बरामदगी

पुलिस ने आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त सामान, वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सबूत बरामद किए हैं। मामले में विधिक कार्रवाई जारी है।

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पुलिस टीम को मिली सफलता

इस केस का खुलासा करने वाली टीम में कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर, उप निरीक्षक महेश पाल सिंह, कांस्टेबल मुकुल कुमार, विष्णु कुमार और महिला कांस्टेबल ज्योति शामिल रहीं।
एसपी संभल कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि मामले की गहन जांच की गई और ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

इच्छाशक्ति बनी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत

पलामू के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की नई तस्वीर, निजी विद्यालयों को दे रहे कड़ी चुनौती

पलामू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिले के कई सरकारी विद्यालय आज शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर उभर रहे हैं। कभी अव्यवस्था और उपेक्षा के शिकार रहे ये स्कूल अब स्वच्छ परिसर, अनुशासित वातावरण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के चलते निजी विद्यालयों को भी पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह परिवर्तन किसी अतिरिक्त बजट या विशेष योजना से नहीं, बल्कि शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की मजबूत इच्छाशक्ति से संभव हुआ है।

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जिले के अनेक विद्यालयों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, दिव्यांग अनुकूल रैंप, शौचालय और सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब और आईसीटी आधारित पढ़ाई से बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है। कला, खेलकूद और सह-पाठ्य गतिविधियों पर विशेष जोर देकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

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पांकी प्रखंड की पांकी पूर्वी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरैया आज गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा का आदर्श बन चुका है। यहां नामांकित 283 छात्रों में से औसतन 231 विद्यार्थी प्रतिदिन नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं। हरियाली से घिरे सुरक्षित परिसर में अनुशासन के साथ पढ़ाई होती है। डेमो क्लास, कंप्यूटर शिक्षण और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के कारण विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर लगातार बेहतर हो रहा है। हाल के वर्षों में कई छात्रों ने नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में भाग लिया है।

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वहीं हरिहरगंज प्रखंड के पिरोजी गांव का नवसृजित प्राथमिक विद्यालय भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वच्छता, नियमित मॉर्निंग असेंबली और संस्कार आधारित गतिविधियों से यहां पढ़ाई का माहौल सकारात्मक बना है। प्रधानाध्यापक नीरज कुमार पाठक के नेतृत्व में शिक्षक बच्चों को स्नेह और अनुशासन के साथ शिक्षा दे रहे हैं।

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हुसैनाबाद शहर का राजकीयकृत मध्य विद्यालय भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए जाना जाता है। नियमित शिक्षक-अभिभावक संवाद, साप्ताहिक प्रश्नोत्तरी और मॉर्निंग असेंबली में संविधान, करेंट अफेयर्स और सामान्य ज्ञान पर चर्चा से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप विद्यार्थी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।

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पांडू प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू कल्याण उच्च विद्यालय में लगभग 2600 विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की दिशा दी जा रही है। 90 प्रतिशत से अधिक वार्षिक परिणाम, आईसीटी लैब, व्यावसायिक शिक्षा, ओपन जिम और गार्डन जैसी सुविधाएं विद्यालय की उपलब्धियों को दर्शाती हैं।

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पलामू के सरकारी स्कूलों में आया यह बदलाव साबित करता है कि यदि नीयत और नेतृत्व मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों में भी शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है।

दक्षिण अफ्रीका से RITES को ₹318 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, शेयरों में 8% से ज्यादा की तेजी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय रेलवे की दिग्गज इंजीनियरिंग और कंसल्टेंसी कंपनी राइट्स लिमिटेड (RITES Ltd) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी सफलता हासिल की है। कंपनी को दक्षिण अफ्रीका से डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की सप्लाई के लिए करीब 318 करोड़ रुपये (35.2 मिलियन डॉलर) का बड़ा ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आते ही मंगलवार को शेयर बाजार में RITES के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
राइट्स लिमिटेड, रेल मंत्रालय के अधीन एक नवरत्न (Navratna) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो भारत समेत विदेशों में रेलवे, हाईवे, एयरपोर्ट और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कंसल्टेंसी और इंजीनियरिंग सेवाएं देती है। यह ऑर्डर न सिर्फ कंपनी के लिए बड़ी वित्तीय उपलब्धि है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और भारतीय रेलवे तकनीक की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करता है।

BSE को दी जानकारी, 18 महीनों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई सूचना में बताया कि उसे दक्षिण अफ्रीकी कंपनी Ndalama Capital (Pty) Ltd से लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू 35.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 315.7 करोड़ रुपये) है।
इस परियोजना के तहत राइट्स लिमिटेड को इन-सर्विस डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स की सप्लाई और कमिशनिंग करनी होगी, जिसे 18 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है। कंपनी ने इसे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और द्विपक्षीय रेल सहयोग के लिहाज से अहम कदम बताया है।

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शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त उत्साह

मंगलवार (23 दिसंबर) को ऑर्डर की खबर के बाद निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिला। BSE और NSE पर RITES का शेयर 8% से ज्यादा उछल गया।दोपहर के कारोबार में शेयर ₹14.02 या 6.03% की तेजी के साथ ₹246.62 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बुक कंपनी के भविष्य के राजस्व के लिए सकारात्मक संकेत है।

अफ्रीका में बढ़ता RITES का दबदबा

यह ऑर्डर अफ्रीकी महाद्वीप में राइट्स लिमिटेड की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाता है। हाल ही में कंपनी ने बोत्सवाना के साथ रेलवे और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मोजाम्बिक और अब दक्षिण अफ्रीका से मिले ऑर्डर भारतीय रेलवे तकनीक की वैश्विक स्वीकार्यता को साबित करते हैं।

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दक्षिण अफ्रीका से मिला यह बड़ा ऑर्डर न केवल RITES की ग्लोबल ऑर्डर बुक को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय PSU कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय क्षमता को भी उजागर करेगा। अब निवेशकों की नजर कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और भविष्य में मिलने वाले नए विदेशी करारों पर टिकी हुई है।

मौलाना तौकीर रजा के करीबी वाजिद बेग के बरातघर पर चला बुलडोजर, बीडीए ने शुरू की ध्वस्तीकरण कार्रवाई

बरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) का बुलडोजर एक बार फिर गरजा है। मंगलवार को बीडीए ने मौलाना तौकीर रजा के करीबी बताए जा रहे वाजिद बेग के बरातघर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। बीडीए अधिकारियों के अनुसार यह बरातघर बिना नक्शा पास कराए अवैध रूप से बनाया गया था, जिसे करीब एक माह पहले सील किया गया था।

मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे बीडीए की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। इसके बाद बुलडोजर और पोकलेन मशीन की मदद से बरातघर को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही।

ध्वस्तीकरण से इलाके में मची खलबली

बरातघर पर बुलडोजर चलने की सूचना मिलते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

बरातघर में साजिश रचने का आरोप

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि बीडीए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को शहर में हुए बवाल की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि फरीदापुर चौधरी स्थित इसी बरातघर में एक बैठक हुई थी, जिसमें साजिश रची गई थी। हालांकि प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान कार्रवाई पूरी तरह अवैध निर्माण के आधार पर की जा रही है।

कोहरे के कारण ट्रैक पर पहुंचा ट्रैक्टर, पैसेंजर ट्रेन से टकराव

बिहार: भोजपुर में बड़ा रेल हादसा टला, पैसेंजर ट्रेन की रोटावेटर ट्रैक्टर से टक्कर, यात्रियों में अफरा-तफरी


भोजपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के आरा–सासाराम रेलखंड पर मंगलवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। आरा से सासाराम जा रही पैसेंजर ट्रेन उदवंतनगर के पास रेलवे ट्रैक पर आ गए एक कृषि यंत्र रोटावेटर से टकरा गई। यह घटना 5/22 किलोमीटर पोस्ट के समीप हुई, जिससे कुछ देर के लिए ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि ट्रेन पटरी से नहीं उतरी और किसी भी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

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जानकारी के अनुसार, पैसेंजर ट्रेन सुबह करीब 7:44 बजे आरा स्टेशन से रवाना हुई थी। लगभग दस मिनट बाद गड़हनी स्टेशन मास्टर को कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि ट्रेन के इंजन की टक्कर एक ट्रैक्टर से जुड़े रोटावेटर से हो गई है। सूचना मिलते ही रेलवे और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पाया गया कि घने कोहरे के कारण ट्रैक्टर चालक को रेलवे ट्रैक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया, जिस कारण वह अनजाने में ट्रैक पर पहुंच गया।

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टक्कर के बाद ट्रेन को एहतियातन कुछ समय के लिए घटनास्थल पर रोकना पड़ा। आरपीएफ इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। ट्रैक्टर चालक भी कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। आवश्यक जांच और सुरक्षा प्रक्रिया के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।

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घटना ने एक बार फिर रेलवे क्रॉसिंग और कोहरे के मौसम में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय कोहरे के कारण ऐसे हादसों की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में अतिरिक्त सतर्कता और निगरानी बेहद जरूरी है।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अमेरिका ने भी जताई नाराजगी

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था कडी


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों और दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या के विरोध में मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल समेत अन्य हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

Ani की सौजन्यसे x वीडियो

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न्यूज एजेंसी द्वारा जारी वीडियो में देखा गया कि सैकड़ों की संख्या में लोग उच्चायोग के पास एकत्र हुए। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले रोकने की मांग लिखी हुई थी। प्रदर्शन के दौरान “हिंदू हत्या बंद करो” और “युनूस सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगाए गए।

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प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई और दिल्ली पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी गई।
विहिप और बजरंग दल का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, उनके धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं और प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इसी के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

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इस बीच, अमेरिका के सांसदों ने भी बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या की कड़ी निंदा की है। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए बांग्लादेश सरकार से दोषियों पर सख्त कार्रवाई, जवाबदेही तय करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती अस्थिरता और हिंसा गंभीर चिंता का विषय है।

राजनैतिक व्यंग्य और सत्ता का डर: फिल्म, आस्था और कानून की कहानी

मूर्खता और अड़ियलपन से भरी नकटी सरकार -विष्णु नागर

तो मोदी सरकार ने अपनी नाक केरल में कटवा ली। यही इन्हें पसंद भी है। संसद हो या सड़क, सब जगह नाक कटवाना इनकी पहली प्राथमिकता है

केरल में चल रहे तीसवें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में कल 19 फिल्में दिखाने से सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने रोक दिया था। थोड़ा हल्ला मचा, तो अब 19 में से पांच फिल्मों को दिखाने की रियायत देने की उदारता बरती है।14 फिल्मों पर रोक फिर भी जारी रहेगी, मगर केरल सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी फिल्में दिखाई जाएंगी। मुख्यमंत्री तथा संस्कृति मंत्री ने इसकी घोषणा कर दी है।

दिलचस्प यह है कि अभी भी सर्गेई आइंस्टीन की सौ वर्ष पुरानी मूक फिल्म ‘बैटलशिप पोटेमकिन” को दिखाने की मंजूरी नहीं दी गई है,जो बरसों से यूट्यूब पर उपलब्ध है और कल मैंने फिर इसे देखा। यह उस देश की फिल्म है, जिसके राष्ट्रपति पुतिन से हमारे प्रधानमंत्री ने अभी-अभी गलबहियां की थीं। तमाम औपचारिकताओं को धता बताते हुए उन्हें हवाई अड्डे पर लेने गए थे!

ठीक है, अब सोवियत संघ इतिहास बन चुका है, मगर उस दौर में जो फिल्में आईं, साहित्य आया, उसका क्या करेंगे? और यह दुनिया की क्लासिक फिल्मों में से है। इसे दिखाने का उद्देश्य केवल यह याद दिलाना था कि इसके रिलीज होने के सौ वर्ष हो गए। इसका रूसी क्रांति से कोई सीधा लेना-देना भी नहीं है। सोवियत संघ के जमाने में लियो तोल्स्तोय, चेखव, गोर्की, दास्तोवस्की, रसूल हमजातोव आदि अनेक महान रूसी साहित्यिकों की किताबें हिंदी में अनूदित हुईं और पढ़ी गईं और आज भी पढ़ी जा रही हैं। उस पर रोक लगा सकते हो?

फिलीस्तीन का समर्थन इस समय भारत में अपराध बना दिया गया है ,जबकि तमाम पूंजीवादी देशों की जनता फिलीस्तीन के पक्ष में खड़ी हुई, इस्राइल के हक में नहीं।दो फिलीस्तीनी फ़िल्मों को दिखाने से भी रोका गया है। ‘संतोष ‘नामक भारतीय फिल्म को भी दिखाने से रोका गया है, क्योंकि वह पुलिस की बर्बरता दिखाती है। जैसे उसे न दिखाने से भारतीय जनों को रोज के अनुभवों के जरिए वह नहीं दिखाई दे रही है। हद तो यह है कि जिन फिल्मकार सिस्को को इस फिल्म समारोह में सम्मानित किया जा रहा है, उनकी भी दो फिल्में दिखाने से रोक दी गई थीं।

हर तरफ दादागीरी, गुंडागर्दी। कला और फिल्म की दुनिया में भी। और यही मोदी सरकार लगातार हिंदूवादी नफ़रत उगलने वाली फिल्में बनाने को प्रोत्साहित करती जा रही है। इनमें कुछ बुरी तरह पिटी हैं और कुछ चली हैं। एक फिल्म का प्रचार तो स्वयं महामानव ने किया था!

अब सहलाओ अपने घाव! ये 14 फिल्में तो केरल में दिखाई जाएंगी! मूर्खता और अड़ियलपन दिखाने का यही हश्र होता है!

अच्छा ये बताओ अगर ये 14 फिल्में तुम्हारी मंजूरी से दिखा दी जातीं तो क्या केरल में कम्युनिस्ट क्रांति हो जाती और अब ये दिखाई जा रही हैं, तो क्या कल या परसों या एक महीने बाद क्रांति हो जाएगी? मूर्खता मुर्दाबाद।

गांधी से राम को भिड़ाऊं- राजेंद्र शर्मा

मोदी के विरोधी क्या अब बिल्कुल बाल की खाल निकालने पर ही नहीं उतर आए हैं? मोदी के राज के ग्यारह साल बाद ही नहीं, आजादी के अठहत्तर साल बाद ही नहीं, गुलामी के एक हजार साल के बाद, पहली बार किसी कानून में राम का नाम आया है। पर इस कानून की आरती उतारने के बजाए, भाई लोग उसके नाम में ही खोट निकालने में लगे हैं। कह रहे हैं कि ये जी राम जी क्या होता है?

माना कि मोदी के चिंतक बहुत अच्छे हैं। और बाकी किसी चीज में हो न हो, योजनाओं के नाम रखने में तो मोदी जी के चिंतकों का कोई जवाब ही नहीं है। यूं नये नाम तो कोई भी रख ले, बस जरा-सा पढ़ा-लिखा होना चाहिए और हां, थोड़ी-बहुत नया सोचने की प्रतिभा भी चाहिए। पर मोदी के चिंतकों का जो स्पेशलाइजेशन नाम रखने में है, वह अद्भुत है। ऐसे नामों की खोज, जिनके शब्दों के प्रथमाक्षरों को जोडऩे पर हमेशा हिंदी/ संस्कृत का कोई शानदार शब्द बनता है; ऐसी प्रतिभा दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगी।

बाकी किसी में दुनिया माने न माने, पर नाम के संक्षिप्तीकरण से शानदार नाम बनाने में तो हम, पहले ही विश्व गुरु बन चुके हैं। दूर-दूर तक कहीं कोई कम्पटीशन ही नहीं है। पर इस बार मोदी के साथ चोट हो गयी।

नाम-चिंतकों से तपस्या में जरूर कुछ न कुछ कमी रह गयी। ग्रामीण मजदूरों वाले नये कानून के नाम में राम का नाम तो आ गया, पर वो बात नहीं आयी, जो भगवान का नाम लेने से आती है। जी राम जी ; जरा सोच कर देखिए, क्या मन में भक्ति भाव जगाता है? नहीं ना! उल्टे यह तो सेवक-भाव ही जगाता है। मालिक गद्दी पर बैठे हैं और सेवक आगे हाथ बांधे खड़े हैं — जी मालिक जी! जमींदार तख्त पर बैठकर हुक्का गुड़गुड़ा रहा है, मजदूर सामने हाथ जोड़े खड़ा है — जी मालिक! ये भाषा मोदी के दरबार की हो तो हो, राम जी के दरबार की नहीं है। वहां तो अपने मुंह से खुद को सेवक कहने वाले हनुमान तक की अपनी अलग ही टौर है। वैसे भी ‘जै राम जी की’ तो हमारे यहां न जाने कब से चलन में है और गांव-देहात में तो खासतौर पर, जिसके लिए कानून बन रहा था। कानून बनवाने वाला नया था, कानून नया था, तो क्या भगवान राम को भी नया रूप देने के चक्कर में, दफ्तर का बड़ा बाबू बना देंगे — जी बड़े बाबू जी!

फिर इसकी कोई वजह भी तो होती! जैसे जी राम जी बनाया, वैसे ही क्या जै राम जी नहीं बनाया जा सकता था? अब यह तो मानने वाली बात है ही नहीं कि प्रधानमंत्री कार्यालय के चिंतकों पर ऐसा नाम सोचा ही नहीं गया, जिसका संक्षिप्त रूप जै राम जी होता, जी राम जी नहीं। जी की जगह जै ही तो लाना था। पहले जै लिखते, फिर प्रथमाक्षरों से शब्द बनाते। यही तो करते हैं। इतना तो मुश्किल भी नहीं था और खासतौर पर तब, जब पीएमओ की बड़ी-बड़ी प्रतिभाएं इसी काम में जुटी हों। पर नहीं हुआ। इस तरह एक और मामले में मोदी जी की तपस्या में कुछ कमी रह गयी।

जरूर मोदी के कार्यालय में जुटी प्रतिभाओं ने अपने असली काम में कोताही बरती। लगता है कि मोदी जी के ब्रांड की तरह, उनकी जुटायी प्रतिभाओं में भी कुछ जंग लग गया है। या कहीं ऐसा तो नहीं कि यह भी 2024 के नतीजे वाले धक्के का नतीजा हो? जब मोदी ही में वह बात नहीं रही, उनकी जुटायी प्रतिभाओं के काम में और उनकी योजनाओं के नाम में, वह बात कैसे रहेगी? मोदी ढलान पर, जी राम जी भारी, जै राम जी पर! पहले जय सियाराम का, जय श्रीराम किया। अब न जय श्रीराम और न जै राम जी, अब जी राम जी ; हिंदुओं की आस्था के साथ यह खिलवाड़ कब तक!

पर यह अगर खिलवाड़ है, तो नयी ब्रांडिंग किसे कहेंगे? पर ये मोदी के विरोधी क्या समझेंगे ब्रांडिंग की महत्ता? ये क्या समझेंगे वक्त, वक्त पर ब्रांड के नवीनीकरण की आवश्यकता! खैर जै श्रीराम हों तो और जी राम जी हों तो, सारी सप्लाई तो मोदी के संघ विचार परिवार के ही हाथों में रहनी है। भक्त झख मार के वही माल खरीदेंगे जो वे देंगे, सो विरोधियों की ऐसी आलोचनाओं की मोदी को परवाह नहीं है। उनकी चिंता दूसरी है। ग्रामीण मजदूरों वाले कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाया है। राम जी का नाम रखवाया है। क्या हुआ कि गांधी जी, अपने ही ढंग से राम के बहुत बड़े भक्त थे, जो मरे भी, तो उनके अंतिम शब्द थे — हे राम! फिर भी गांधी और राम को भिड़ाया है। यानी चाणक्य नीति का फुल-फुल अनुसरण हो रहा है? फिर भी विरोधी हैं कि गांधी का पक्ष तो ले रहे हैं, पर राम से भिड़ने से बचकर निकलते जा रहे हैं। उल्टे बहुत तो नाम के झगड़े में अटक ही नहीं रहे हैं। जी राम जी को सिर्फ नाम बनाए दे रहे हैं और कानून पर सवाल उठा रहे हैं। जी राम जी का गरीब ग्रामीण मजदूरों के साथ क्या सलूक होगा, जी राम जी गरीब राज्यों के साथ क्या करेगा, जी राम जी धन्नासेठों को और ग्रामीण अमीरों को कैसे खुश करेगा ; ऐसे मोदी के लिए आउट ऑफ कोर्स सवाल उठा रहे हैं। अब ये विरोधी क्या मोदी जी की चाणक्य नीति को ही फेल कराएंगे?

सच पूछिए तो यह विरोधियों का झूठा प्रचार है कि मोदी के विचार परिवार वाले सिर्फ हिंदू-मुसलमान को ही लड़ाते हैं। बेशक, हिंदू-मुसलमान को लड़ाते हैं और जमकर लड़ाते हैं, पर उन्हें ही नहीं लड़ाते हैं। चाणक्य का आइडिया, जिसे बाकी हर चीज की तरह यूरोप वालों ने चुरा लिया था और बाद में अंगरेजों ने ‘फूट डालो और राज करो’ का सूत्र बनाकर हम को ही लौटा दिया था, इतना एक आयामी नहीं हो सकता है। वैसे भी उसके टैम में हमारे यहां मुसलमान तो थे ही नहीं और इसलिए हिंदू भी नहीं थे। पर ‘फूट डालो और राज करो’ का सूत्र था। विचार परिवार ने भी हिंदू-मुसलमान ही नहीं, सब को लड़ाकर देखा है।

नेहरू और पटेल को तो खैर पचहत्तर साल से लड़ा ही रहे हैं। जन गण मन और वंदे मातरम् को भी उतने ही साल से लड़ा रहे हैं। केसरिया ध्वज को तिरंगे से लड़ाया। मनुस्मृति को आंबेडकर के संविधान से भिड़ाया। संस्कृत में रंगी हिंदी को तमिल, मलयालम आदि, आदि के आगे अड़ाया। और अब गांधी को राम जी से लड़ा रहे हैं। पर गांधी हैं कि रिंग में ही नहीं आ रहे हैं।
राम जी कम से कम ऐसा मत होने देना कि तीन कृषि कानूनों की तरह जी राम जी कानून गले की फांसी बन जाए और अवतारी बाबा को तपस्या में कमी रह जाने के लिए, एक बार फिर माफी मांगनी पड़ जाए। देख लेना, अवतार की इज्जत का सवाल है।

कड़ाके की ठंड में प्रशासन अलर्ट: डीएम ने देर रात अलाव, रैन बसेरों का किया औचक निरीक्षण

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में लगातार बढ़ रही ठंड और शीतलहर के बीच आमजन को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने बीती देर रात नगर पालिका महराजगंज क्षेत्र में अलाव और रैन बसेरों का आकस्मिक निरीक्षण कर ठंड से बचाव की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ठंड से आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सबसे पहले नगर के विभिन्न चिन्हित स्थानों पर जलाए जा रहे अलावों का निरीक्षण किया। निर्धारित प्वाइंट्स पर अलाव की स्थिति देखी और अधिशासी अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी स्थानों पर अलाव नियमित, समयबद्ध और प्रभावी रूप से जलते रहने चाहिए, ताकि राहगीरों, गरीबों और जरूरतमंदों को ठंड से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि अलाव की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर इसका प्रभाव स्पष्ट दिखना चाहिए। इसके पश्चात उन्होंने चीउरहा स्थित रैन बसेरे का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय रैन बसेरे में तीन यात्री ठहरे हुए पाए गए। जिलाधिकारी ने वहां मौजूद यात्रियों से बातचीत कर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। यात्रियों ने रैन बसेरे में उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे में अलाव, स्वच्छ पेयजल, कंबल, साफ-सुथरा आवास और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध पाई गईं। हालांकि निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे में लगा सीसीटीवी कैमरा अक्रियाशील पाया गया, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए तत्काल कैमरे को दुरुस्त कराने और उसे सतत क्रियाशील रखने के निर्देश दिए। साथ ही अधिशासी अधिकारी को निर्देशित किया कि रैन बसेरे में साफ-सफाई, सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वहां ठहरने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि शीतलहर के दृष्टिगत शासन की मंशा के अनुरूप ठंड से बचाव के सभी इंतजाम प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं। संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो तथा जरूरतमंदों को समय पर राहत उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयं प्रशासनिक अधिकारी लगातार सक्रिय रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।इसी क्रम में जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी ने चीउरहा स्थित कान्हा गोशाला का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोवंश शेड, भूसा-चोकर, हरा चारा एवं अन्य पोषक आहार की उपलब्धता की जानकारी ली गई।
गोशाला में लगभग 55 कुंतल भूसा, 12 कुंतल चोकर, गुड़ सहित अन्य पोषक आहार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध पाया गया। साथ ही गोवंश के लिए अलाव की व्यवस्था भी की गई थी। अपर जिलाधिकारी ने गोवंश को ठंड से सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए।जिला प्रशासन का यह सक्रिय कदम ठंड के इस दौर में आमजन और पशुओं दोनों के लिए राहत का संदेश दे रहा है।

दिल्ली में जहरीली हवा का कहर, सांस लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर, 27 स्टेशनों पर AQI 400 के पार, स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 415 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शहर के 40 निगरानी स्टेशनों में से 27 स्टेशनों पर AQI 400 से अधिक रिकॉर्ड किया गया, जबकि पांच इलाकों में स्थिति ‘अत्यंत गंभीर’ बनी हुई है।

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प्रदूषण और घने कोहरे के मिश्रण ने दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में दृश्यता को बेहद कम कर दिया है। अक्षरधाम मंदिर, इंडिया गेट और अन्य प्रमुख स्थानों पर धुंध की मोटी परत छाई रही। सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, आनंद विहार में AQI 470, नेहरू नगर में 463, ओखला और मुंडका में 459 तथा सिरीफोर्ट में 450 दर्ज किया गया।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का दिल्ली वायु प्रदूषण AQI बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत खतरनाक है। लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से फेफड़ों, हृदय और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

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मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि राजधानी में घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई। पालम क्षेत्र में सुबह दृश्यता केवल 50 मीटर तक सिमट गई, जबकि सफदरजंग में यह 100 मीटर दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा और दिनभर घना कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है।

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प्रशासन द्वारा लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर भीषण सड़क हादसा, दो की मौत, 16 घायल

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अमेठी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में लखनऊ–वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया। अनियंत्रित वाहनों की आपसी टक्कर में चार ट्रक, एक बस और एक कार एक-दूसरे से टकराकर फंस गए। मिल रही प्रारंभिक जानकारी में दुर्घटना में मौके पर ही दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद विभिन्न अस्पतालों में रेफर किया गया है। कोतवाली प्रभारी विवेक कुमार सिंह ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए जेसीबी मशीन की मदद ली जा रही है। हादसे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात बाधित रहा।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक बाईपास मार्ग से गुजरवाया। मौके पर पुलिस बल मौजूद रहा और यातायात बहाल कराने का प्रयास जारी है

1.83 लाख श्रमिकों को मिलेगा साल में 125 दिन का काम, मनरेगा का नया नाम ‘वीबी-जी रामजी’

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)
घनश्याम तिवारी

जिले के एक लाख 83 हजार 506 सक्रिय मनरेगा श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को नए कलेवर में “विकसित भारत–गारंटी फॉर आजीविका मिशन (वीबी-जी रामजी)” के नाम से लागू करने को मंजूरी दे दी है। नई योजना के तहत जॉबकार्डधारक श्रमिकों को अब साल में 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना को मंजूरी मिलने के बाद जिले में मनरेगा सेल के कर्मचारियों ने जॉबकार्डधारकों का ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार ई-केवाईसी के जरिए सभी श्रमिकों का सत्यापन किया जाएगा, जिससे फर्जी जॉबकार्डधारकों को योजना से बाहर किया जा सकेगा।
नई योजना में राज्यों को कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए वर्ष में 60 दिन का नो-वर्क पीरियड अधिसूचित करने का अधिकार दिया गया है। इससे खेती के मौसम में मजदूरों की कमी नहीं होगी और किसान समय पर कृषि कार्य कर सकेंगे।
अब तक मनरेगा के तहत श्रमिकों को साल में 100 दिन काम की गारंटी थी, लेकिन मजदूरी भुगतान में देरी एक बड़ी समस्या रही है। कई पंचायतों में मजदूरी भुगतान में चार से पांच महीने तक लग जाते थे, जिससे मजदूर निजी कार्यों या पलायन की ओर मजबूर हो जाते थे।
वीबी-जी रामजी योजना में सरकार ने मजदूरी भुगतान के लिए अधिकतम 15 दिन की समय सीमा तय की है। यदि तय समय से अधिक विलंब होता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर मुआवजा देने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
मनरेगा की डिप्टी कमिश्नर रिचा सिंह ने बताया कि नई योजना को लेकर समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है। फिलहाल सक्रिय जॉबकार्डधारकों का ई-केवाईसी कराने का आदेश प्राप्त हुआ है, जिस पर काम शुरू कर दिया गया है। उच्चाधिकारियों की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
योजना के नए स्वरूप में रोजगार को चार प्रमुख क्षेत्रों— जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ा ढांचा और जलवायु अनुकूल कार्यों— से जोड़ा गया है। साथ ही श्रमिकों की ऑनलाइन फेस-मास्क अटेंडेंस व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी और काम के दिनों में बढ़ोतरी से श्रमिकों की आय भी बढ़ेगी।
किसान संघ के अध्यक्ष अखिलेश सिंह (देउली) ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि कार्य के लिए नो-वर्क पीरियड की व्यवस्था किसानों के हित में है। इससे खेती के समय मजदूरों की उपलब्धता बनी रहेगी और उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
नई योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ श्रमिकों का पलायन भी रुकने की उम्मीद जताई जा रही है।

पुलिस का ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान’, 18 स्थानों पर जांच 221 व्यक्तियों व 147 वाहनों की चेकिंग, आमजन से सीधा संवाद

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान’ चलाया गया।
अभियान के तहत सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्षों द्वारा मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया तथा उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। इस दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन चेकिंग की गई।अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पुलिस व जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना, छोटे विवादों का त्वरित समाधान करना तथा मित्र पुलिसिंग की भावना को बढ़ावा देना रहा। साथ ही चेकिंग के दौरान चोरी की गाड़ियों की बरामदगी, तीन सवारी, मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दोपहिया वाहन, नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन, अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई।पुलिस द्वारा आमजन को अभियान के उद्देश्य व लाभों की जानकारी दी गई, जिस पर नागरिकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और मॉर्निंग वॉक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।जनपदीय पुलिस द्वारा अभियान के दौरान कुल 18 स्थानों पर चेकिंग करते हुए 221 व्यक्तियों एवं 147 वाहनों की जांच की गई। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ऐसे जनहितकारी अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।