Thursday, June 25, 2026
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युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है भाजपा – गोविन्द मिश्र

युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र सलेमपुर का हुआ संगठनात्मक समीक्षा

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।आज देश का युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर बहुत ही परेशान है।भाजपा की सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।उक्त बातें कांग्रेस कार्यालय पर सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र के युवा कांग्रेस के संगठन की समीक्षा बैठक को सम्बोधित करते हुए युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गोविन्द मिश्र ने कहा।उन्होंने कहा कि युवा शक्ति के बल पर ही देश की राजनीतिक दिशा तय होती है।सम्पन्न होने जा रहे पंचायत चुनाव में कांग्रेस युवाओं को भरपूर मौका देने जा रही है।जिला उपाध्यक्ष सत्यम पांडेय ने कहा कि हर बूथ पर युवाओं की टीम तैयार किया जा रहा है।आज तक युवाओं के विकास के लिए जो भी योजना संचालित हुआ है वह कांग्रेस ने ही किया है। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि जनता भाजपा के जनविरोधी नीतियों से बहुत ही परेशान हो गई है।अब इस सरकार से मुक्ति चाहती है। सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र के नेता व दलित कांग्रेस के प्रदेश सचिव दीनदयाल प्रसाद ने कहा कि आज दलित समाज का नौजवान अपने को उपेक्षित महसूस कर रहा है।बैठक को युवा कांग्रेस के जिला महासचिव अमित प्रताप सिंह,ब्लॉक अध्यक्ष मनीष रजक,मनोज पांडेय,सिकन्दर यादव, जिज्ञानसु यादव, आशीष कुमार, प्रयांग गुप्ता, अभिषेक चौहान, कृष्णा तिवारी, शिवम कुमार, आशीष यादव आदि ने सम्बोधित किया।

दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर यातायात पुलिस का सघन चेकिंग अभियान

132 वाहनों का चालान, 2 वाहन सीज

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यातायात पुलिस देवरिया द्वारा बुधवार को सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में की गई।यातायात प्रभारी देवरिया गुलाब सिंह के नेतृत्व में यातायात पुलिस टीम द्वारा गोरखपुर रोड, कसया ओवरब्रिज, मालवीय रोड, बस स्टैंड सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच की गई। अभियान के दौरान सड़क पर खड़ा कर सवारी भरने वाले ऑटो एवं ई-रिक्शा, बिना हेलमेट वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने तथा वाहन पर स्टंट करने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान एवं सीज की कार्रवाई की गई।इसके अतिरिक्त सोनुघाट एवं सलेमपुर रोड पर सड़क पर खड़े ट्रकों का चालान किया गया, जबकि रामलीला मैदान रोड एवं यूनियन बैंक, मालवीय रोड क्षेत्र में नो पार्किंग में खड़े वाहनों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई।यातायात पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान में कुल 132 वाहनों का ई-चालान किया गया तथा 02 वाहनों को सीज किया गया।पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराना, सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा वाहन चालकों को यह संदेश देना है कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुशासन दिवस के रूप में मनी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती गुरुवार को सुशासन दिवस के रूप में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व मण्डल अध्यक्ष कुश भगत की अध्यक्षता में मनाया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्र निर्माण के योगदान को याद किया । वक्ताओं ने उन्हें एक महान नेता, कवि, पत्रकार और भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक बताया । भाजपा नेता जितेन्द्र भारत में कहा कि अटल जी ने भारत को ‘भारत रत्न’ और ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ जैसी योजनाएं दीं एवं ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया था। इस दौरान नगर मंत्री अमित शर्मा, पिछड़ा मोर्चा नगर अध्यक्ष पंकज शर्मा, सेक्टर प्रमुख बृजा नन्द निषाद, कमलेश निषाद, कृष्णा जायसवाल आदि मौजूद रहें।
वहीं दूसरी ओर दिशा स्वयं सहायता समूह की कार्यकत्रियों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंतो मनाई। जिसमें कार्यकत्रियों ने संकल्प लिया कि हम स्वयं सहायता रोजगार के माध्यम से महिलाओं को स्वावलंबी बनने में मदद करेंगे। इस अवसर पर अध्यक्ष निशा शर्मा, शालिनी,अनीता देवी , संतोषी, पूजा, अंजली आदि उपस्थित रहीं।

थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर भगवान विष्णु की मूर्ति गिराने पर विवाद, भारत ने जताई चिंता; थाईलैंड ने दी सफाई

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर भगवान विष्णु की एक प्रतिमा गिराए जाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है। वहीं, थाईलैंड ने सफाई देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि सुरक्षा और सीमा विवाद से जुड़ी थी।

थाईलैंड का स्पष्टीकरण: धार्मिक कारण नहीं, सुरक्षा का मुद्दा

थाईलैंड के अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित थी, वह आधिकारिक रूप से किसी धार्मिक स्थल के रूप में पंजीकृत नहीं थी। थाई-कंबोडियन बॉर्डर प्रेस सेंटर ने स्पष्ट किया कि मूर्ति को हटाने का उद्देश्य किसी धर्म या आस्था का अपमान करना नहीं था, बल्कि सीमा पर तनाव को बढ़ने से रोकना था।
द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड का कहना है कि यह प्रतिमा विवादित सीमा क्षेत्र चोंग आन मा में बाद में स्थापित की गई थी। थाई पक्ष का मानना है कि कंबोडियाई सैनिकों ने इस प्रतिमा को प्रतीक के रूप में स्थापित कर थाईलैंड द्वारा दावा की गई जमीन पर संप्रभुता जताने की कोशिश की थी।

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भारत की प्रतिक्रिया: सभ्यतागत विरासत का अपमान

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हिंदू और बौद्ध देवताओं को पूरे क्षेत्र में गहरी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है और वे साझा सभ्यतागत विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दावों से अलग, इस तरह के कृत्य दुनिया भर के श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करते हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए।

भारत ने थाईलैंड और कंबोडिया दोनों से अपील की कि वे अपने सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाएं, ताकि शांति बनी रहे और जान-माल व सांस्कृतिक विरासत को नुकसान न पहुंचे।

कंबोडिया का आरोप: अवैध तरीके से गिराई गई मूर्ति

न्यूज़ एजेंसी एएफपी के अनुसार, कंबोडिया ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। प्रीह विहार प्रांत के सरकारी प्रवक्ता किम चानपनहा ने दावा किया कि भगवान विष्णु की यह मूर्ति कंबोडिया के क्षेत्र में स्थित थी और इसे थाईलैंड ने अवैध रूप से गिराया। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा वर्ष 2014 में थाई सीमा से करीब 100 मीटर अंदर स्थापित की गई थी।

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अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई


सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती सिकंदरपुर कस्बे में स्थित अदिति पैलेस में भारतीय जनता पार्टी द्वारा धूमधाम व गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने अटल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक भगवान पाठक रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में राष्ट्रपुरुष थे। उन्होंने अपने नेतृत्व में भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना तथा सुशासन की मजबूत नींव उनके दूरदर्शी नेतृत्व के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति की अनुपम मिसाल है, जिससे आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन, उनके ओजस्वी भाषणों, कवि हृदय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि अटल जी ने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता दी और विपक्ष का सम्मान किया, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। इस अवसर पर जयराम पांडेय, प्रयाग चौहान, संजीव वर्मा, हरि भगवान चौबे, शिवाजी राय, रामनाथ यादव, बैजनाथ पांडे, बबलू राय, विनोद कुमार गुप्ता, भीम गुप्ता, संदीप गुप्ता, गुड्डू यादव, कृष्णा शर्मा सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मंजय राय ने किया। समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।

8 साल बाद फिर गैंगवार: गोलियों की तड़तड़ाहट से दहला हरिद्वार जिला, लक्सर में अंधाधुंध फायरिंग

हरिद्वार (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में आठ साल बाद एक बार फिर गैंगवार की गूंज सुनाई दी है। बुधवार को लक्सर क्षेत्र में हुई अंधाधुंध फायरिंग से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी विनय त्यागी पर उस समय हमला किया गया, जब उसे पुलिस वाहन से पेशी के लिए ले जाया जा रहा था। फ्लाईओवर पर खुलेआम शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे जिले का पुराना आपराधिक इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया।

शांत दिख रहा था संगठित अपराध, फिर उभरी गैंगवार

इस वारदात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हरिद्वार में संगठित अपराध भले ही कुछ वर्षों तक शांत नजर आया हो, लेकिन उसकी जड़ें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। मौका मिलते ही गैंगवार ने फिर सिर उठा लिया।

2017 की सनसनीखेज वारदात की याद

हरिद्वार में इससे पहले 20 नवंबर 2017 को रुड़की अदालत परिसर के भीतर कुख्यात गैंगस्टर सुनील राठी के शार्प शूटर देवपाल राणा की गोलियों से हत्या कर दी गई थी। राणा अदालत में अपनी पेशी का इंतजार कर रहा था। इस फायरिंग में सहारनपुर का एक अधिवक्ता और भाजपा नेता भी घायल हुआ था। हमलावरों को मौके पर ही भीड़ ने पकड़ लिया था।

2014 और 2011 की गैंगवार घटनाएं

• 5 अगस्त 2014 को रुड़की जेल से रिहा हो रहे कुख्यात चीनू पंडित पर जेल गेट पर फायरिंग की गई थी। इस हमले में उसके तीन साथी मारे गए, जबकि उसका बड़ा भाई समेत छह लोग घायल हुए थे। जांच में इस हमले के पीछे सुनील राठी गैंग का नाम सामने आया था।

12 सितंबर 2011 को रुड़की जेल के तत्कालीन डिप्टी जेलर नरेंद्र खंपा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के तार भी कुख्यात अपराधियों से जुड़े पाए गए थे।

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पुराने नेटवर्क, नए चेहरे

क्राइम एक्सपर्ट्स का कहना है कि हरिद्वार में गैंगवार का नेटवर्क कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। पुराने गैंगस्टरों के शागिर्द, रिश्तेदार और सहयोगी अब नए नामों और नए तरीकों से सक्रिय हो रहे हैं। जमीन, वसूली, वर्चस्व और बदले की आग आज भी वही है, सिर्फ चेहरे बदल गए हैं।

विनय त्यागी पर 59 मुकदमे, पांच राज्यों में नेटवर्क

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विनय त्यागी पर करीब 59 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसका गिरोह उत्तर प्रदेश में पंजीकृत है, जबकि उत्तराखंड या हरिद्वार में उसका गैंग रजिस्टर्ड नहीं है। गैंग में 17 सदस्य बताए जा रहे हैं और उसका नेटवर्क पांच राज्यों में फैला हुआ है।

सूत्रों का दावा है कि उत्तराखंड में वह कुख्यात गैंगस्टर सुनील राठी के लिए काम करता था, हालांकि पुलिस अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है और इस एंगल से जांच जारी है।

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कंधमाल/ओडिशा (राष्ट्र की परम्परा)। ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार को चकापाद थाना क्षेत्र के घने जंगलों में हुई मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता गणेश उइके समेत कुल छह नक्सली मारे गए। यह ऑपरेशन राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत अंजाम दिया गया।

₹1.1 करोड़ का इनामी था गणेश उइके

मारा गया नक्सली नेता गणेश उइके (69 वर्ष), प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य और ओडिशा में संगठन का प्रमुख था। प्रशासन ने उस पर ₹1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह मूल रूप से तेलंगाना के नलगोंडा जिले का निवासी था और पक्का हनुमंतु व राजेश तिवारी जैसे कई नामों से सक्रिय था।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मुठभेड़ में मारे गए छह नक्सलियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। अन्य नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। लंबे समय से फरार और कई नक्सली गतिविधियों में शामिल गणेश उइके सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। मुठभेड़ के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।

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गृह मंत्री अमित शाह का बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कदम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा,

“नक्सल मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि। ओडिशा के कंधमाल में चलाए गए अभियान में केंद्रीय समिति के सदस्य गणेश उइके समेत छह नक्सलियों को मार गिराया गया है। ओडिशा नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त होने के कगार पर है। हम 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।”

यह कार्रवाई देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों के लिए एक अहम मोड़ मानी जा रही है।

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रेल हादसा: मानवरहित क्रॉसिंग पर गरीब रथ की चपेट में बाइक, पति-पत्नी और दो बच्चों समेत पांच की मौत

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में बुधवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसे में पति-पत्नी, उनके दो मासूम बच्चों और एक अन्य युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा बरेली-रोजा रेलखंड पर रोजा जंक्शन के पास स्थित मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ, जहां तेज रफ्तार गरीब रथ एक्सप्रेस ने बाइक सवारों को चपेट में ले लिया।

हादसा शाम करीब 6:10 बजे उस समय हुआ, जब बरेली से लखनऊ की ओर जा रही 12204 सहरसा-अमृतसर गरीब रथ एक्सप्रेस रोजा स्टेशन के आउटर पर पहुंच रही थी। इसी दौरान एक बाइक पर सवार पांच लोग रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रहे थे।

एक ही बाइक पर सवार थे पांच लोग

मृतकों की पहचान लखीमपुर खीरी जिले के थाना उचौलिया क्षेत्र के गांव बनका निवासी हरिओम (26), शाहजहांपुर के निगोही क्षेत्र के विक्रमपुर चकौरा उर्फ बिकन्नापुर निवासी सेठपाल (32), उनकी पत्नी पूजा (26) और उनके दो बच्चे—चार वर्षीय निधि व डेढ़ वर्षीय सूर्या के रूप में हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक रेलवे लाइन पर पहुंचते ही अचानक बंद हो गई। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन आ गई और बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सभी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक इंजन में फंसकर करीब 200 मीटर तक घिसटती चली गई।

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शॉर्टकट बना हादसे की वजह

बताया जा रहा है कि हरिओम रोजा की मठिया कॉलोनी में अपने पिता लालाराम के घर आए थे। शाम को सभी लोग लखीमपुर खीरी अपने गांव लौट रहे थे। समय बचाने के लिए उन्होंने मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग से गुजरने का रास्ता चुना, जो जानलेवा साबित हुआ।

45 मिनट तक प्रभावित रहा रेल संचालन

हादसे के बाद गरीब रथ एक्सप्रेस का प्रेशर पाइप क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे डाउनलाइन पर करीब 45 मिनट तक रेल संचालन ठप रहा। इस दौरान बरेली-बनारस एक्सप्रेस और मुगलसराय एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रोका गया। मरम्मत और शवों को हटाने के बाद ट्रेनों का संचालन बहाल किया गया।

पुलिस व प्रशासन मौके पर

सूचना मिलते ही जीआरपी, रेलवे अधिकारी और जिला प्रशासन मौके पर पहुंचा। पांचों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार और सीएमओ डॉ. विवेक कुमार मिश्रा पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैक पार करते समय यह हादसा हुआ। मामले की जांच की जा रही है।

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बहराइच में हिंसक जंगली जानवर का हमला, बचाने गया दूसरा ग्रामीण भी घायल, जिला अस्पताल रेफर

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद बहराइच के नवाबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत चनैनी में शुक्रवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आम के बाग में शौच के लिए गए एक ग्रामीण पर हिंसक जंगली जानवर ने हमला कर दिया। उसे बचाने दौड़े दूसरे ग्रामीण को भी जानवर ने घायल कर दिया। दोनों घायलों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल बहराइच रेफर किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत चनैनी के दक्षिण दिशा स्थित आम के बाग में नागें कश्यप पुत्र राम मनोहर पर एक जंगली जानवर ने अचानक हमला कर दिया। शोर सुनकर पास से गुजर रहे रामधीरज यादव पुत्र राम मनोरथ उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन जंगली जानवर ने उन पर भी हमला कर दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

ग्रामीणों के शोर-गुल पर बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद हिंसक जंगली जानवर जंगल की ओर भाग निकला। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायलों को वाहन से माल्ही चौराहा स्थित निजी आशीर्वाद हॉस्पिटल पहुंचाया। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल बहराइच रेफर कर दिया गया।

घटना की सूचना ग्राम प्रधान द्वारा अब्दुल्लागंज वन विभाग और स्थानीय थाना नवाबगंज को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। क्षेत्रीय वन अधिकारी पंकज कुमार साहू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पगमार्क की जांच की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि हमला करने वाला जानवर तेंदुआ है।

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हालांकि, घायल ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ की आवाजाही बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी वन विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, जिससे यह घटना हुई।

एसडीओ वन विभाग नानपारा राशिद जमील ने बताया कि चनैनी गांव अब्दुल्लागंज रेंज के समीप स्थित है। ग्रामीणों को सतर्क रहने, अकेले बाहर न निकलने और जंगल की ओर जाने से बचने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और निगरानी टीम तैनात कर दी गई है।

थाना प्रभारी निरीक्षक रमाशंकर यादव भी मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल-चाल लिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण वन विभाग से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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लक्ष्य प्राप्ति की राह

प्रेरक प्रसंग: मो.मोइजुद्दीन- झारखण्ड

एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कहा- वह खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को बुलाने के लिए भेजती हूं। तब तक आप इंतजार करें।

कुछ ही देर में किसान खेत से अपने घर आ पहुंचा। उसके साथ-साथ उसका पालतू कुत्ता भी आया। कुत्ता जोरों से हांफ रहा था। उसकी यह हालत देख, मिलने आए व्यक्ति ने किसान से पूछा… क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है ? किसान ने कहा- नहीं, पास ही है। लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं ?

उस व्यक्ति ने कहा- मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए… लेकिन तुम्हारे चेहरे पर रंच मात्र थकान नहीं जबकि कुत्ता बुरी तरह से हांफ रहा है।

किसान ने कहा- मैं और कुत्ता एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत भी कोई खास दूर नहीं है। मैं थका नहीं हूं। मेरा कुत्ता थक गया है। इसका कारण यह है कि मैं सीधे रास्ते से चलकर घर आया हूं, मगर कुत्ता अपनी आदत से मजबूर है।

वह आसपास दूसरे कुत्ते देखकर उनको भगाने के लिए उसके पीछे दौड़ता था और भौंकता हुआ वापस मेरे पास आ जाता था। फिर जैसे ही उसे और कोई कुत्ता नजर आता, वह उसके पीछे दौड़ने लगता। अपनी आदत के अनुसार उसका यह क्रम रास्ते भर जारी रहा। इसलिए वह थक गया है।

देखा जाए तो यही स्थिति आज के इंसान की भी है।

जीवन के लक्ष्य तक पहुंचना यूं तो कठिन नहीं है, लेकिन राह में मिलने वाले कुत्ते, व्यक्ति को उसके जीवन की सीधी और सरल राह से भटका रहे हैं।

इंसान अपने लक्ष्य से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है। यह लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है। आपकी ऊर्जा को रास्ते में मिलने वाले कुत्ते बर्बाद करते हैं।

भौंकने दो इन कुत्तों को और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में सीधे बढ़ते रहो.. फिर एक ना एक दिन मंजिल मिल ही जाएगी। लेकिन इनके चक्कर में पड़ोगे तो थक ही जाओगे। अब ये आपको सोचना है कि किसान की तरह सीधी राह चलना है या उसके कुत्ते की तरह।

शिक्षा
सफलता के लिए सही समय की नहीं, सही निर्णय की जरूरत होती है।

प्रेम दुर्लभ है उसे पकड़ कर रखें, क्रोध बहुत खराब है, उसे दबाकर रखें। भय बहुत भयानक है, उसका सामना करें, स्मृतियाँ बहुत सुखद है उन्हें संजोकर रखें।

पुरी जगन्नाथ मंदिर में 46 साल बाद रत्न भंडार के आभूषणों की होगी गिनती, जनवरी से शुरू होने की संभावना

पुरी/ओडिशा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे गए आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की 46 साल बाद दोबारा गिनती की जाएगी। इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की शुरुआत जनवरी 2026 से होने की संभावना है। उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिश्वनाथ रथ ने बुधवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में 27 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के मसौदे पर चर्चा की जाएगी। सभी तैयारियां पूरी होने के बाद ही गिनती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

1978 में हुई थी आखिरी बार गणना

गौरतलब है कि पिछली बार रत्न भंडार की गिनती वर्ष 1978 में की गई थी, जिसमें करीब 72 दिन का समय लगा था। इस बार आभूषणों की गणना के साथ-साथ सभी कीमती वस्तुओं का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा, ताकि उनका सुरक्षित और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार देश के सबसे रहस्यमयी और ऐतिहासिक खजानों में से एक माना जाता है। वर्षों बाद होने जा रही इस गिनती को लेकर श्रद्धालुओं और इतिहासकारों में खास उत्सुकता देखी जा रही है।

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सड़क सुरक्षा: प्रशासनिक आदेश से सामाजिक जिम्मेदारी तक

सड़क सुरक्षा आज महज़ यातायात नियमों का विषय नहीं रही, बल्कि यह समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा बन चुकी है। हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या हमारी सड़कें केवल वाहनों के लिए हैं या जीवन की रक्षा के लिए भी। अव्यवस्थित पार्किंग, सड़क किनारे बने अस्थायी स्टैंड, बेतरतीब खड़े ट्रक और डग्गामार वाहन इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।
सरकार द्वारा सड़कों और चौराहों को अतिक्रमण-मुक्त रखने तथा हाईवे-एक्सप्रेसवे पर सख्त प्रवर्तन के निर्देश इसी गंभीरता को दर्शाते हैं। सड़क आवागमन के लिए होती है, न कि स्थायी या अस्थायी पार्किंग के लिए यह संदेश स्पष्ट है। केवल चालान से आगे बढ़कर कठोर कार्रवाई का संकेत इस बात की स्वीकारोक्ति है कि अब लापरवाही को सहन नहीं किया जा सकता।
चिंता का विषय यह है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जिनकी खुशियां एक पल में छिन जाती हैं। हर दुर्घटना के पीछे नियमों की अनदेखी, असंवेदनशीलता और कभी-कभी व्यवस्था की कमजोरी भी जिम्मेदार होती है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को महज़ सरकारी अभियान मानना भूल होगी।
सकारात्मक पहल यह है कि सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जनजागरूकता, शिक्षा और सहभागिता के बिना कोई भी नियम स्थायी परिणाम नहीं दे सकता। युवाओं में सही सड़क व्यवहार विकसित करना, स्टंटबाजी जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों पर रोक और सामाजिक संगठनों की भागीदारी इस दिशा में प्रभावी कदम हो सकते हैं।
ई-4 मॉडल—शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर सड़क सुरक्षा की एक समग्र रूपरेखा प्रस्तुत करता है। ब्लैक स्पॉट सुधार, सुरक्षित स्पीड ब्रेकर, नियमित रोड सेफ्टी ऑडिट और त्वरित चिकित्सा सुविधा न केवल हादसों को कम कर सकती है, बल्कि दुर्घटना के बाद जान बचाने की संभावना भी बढ़ा सकती है। एम्बुलेंस सेवाओं और स्कूल वाहनों की फिटनेस पर सख्ती इसी सोच का विस्तार है।
अंततः सड़क सुरक्षा की सफलता केवल आदेशों और नियमों से नहीं मापी जा सकती। यह तब सफल होगी जब हर नागरिक यह माने कि नियमों का पालन उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी है। प्रशासन व्यवस्था बना सकता है, लेकिन सड़कों को सुरक्षित बनाने का असली दायित्व समाज के हाथों में है। सड़कें तभी सुरक्षित होंगी, जब कानून के साथ-साथ चेतना भी मजबूत होगी और यही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सच्ची पहचान है।

त्रिपुरा में तीन बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार, बिना दस्तावेज बढ़ई का काम कर रहे थे

गोमती/त्रिपुरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। त्रिपुरा पुलिस ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों पिछले कुछ महीनों से गोमती जिले के ध्वजनगर इलाके में बिना वैध दस्तावेजों के बढ़ई के रूप में काम कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान मोहम्मद अशरफुल हक, मोहम्मद कालू और मोहम्मद ईशराफुल के रूप में हुई है। ये तीनों बांग्लादेश के राजशाही जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।

खुफिया सूचना पर पुलिस की कार्रवाई

एसडीपीओ देबंजलि रॉय ने बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर मिली विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम ने बुधवार को आरके पुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत ध्वजनगर में छापेमारी की। इस दौरान चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हुआ कि हिरासत में लिए गए चार लोगों में से तीन बांग्लादेशी नागरिक हैं, जबकि चौथा व्यक्ति उदयपुर उपमंडल के किला का स्थानीय निवासी है।

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स्थानीय व्यक्ति पर शरण देने का आरोप

एसडीपीओ के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बांग्लादेशी नागरिक किला निवासी बढ़ई मतिउर रहमान के अधीन काम कर रहे थे। पुलिस ने मतिउर रहमान को अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों को शरण देने के आरोप में हिरासत में लिया है।

पूछताछ के दौरान तीनों बांग्लादेशी नागरिकों ने स्वीकार किया कि वे बिना किसी वैध दस्तावेज के रोजगार के उद्देश्य से अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर आए थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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कुड्डालोर/तमिलनाडु (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में बीती रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। इस भीषण हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा।

पुलिस के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब तिरुचिरापल्ली से चेन्नई जा रही राज्य परिवहन निगम (TNSTC) की बस राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रही थी। अचानक बस का एक टायर फट गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा। अनियंत्रित बस सड़क के बीच बने डिवाइडर को पार करते हुए विपरीत दिशा में चली गई।

आमने-सामने की टक्कर, कारों के उड़े परखच्चे

विपरीत लेन में पहुंचने के बाद बस की चेन्नई से तिरुचिरापल्ली जा रही एक एसयूवी और एक कार से जोरदार आमने-सामने की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों निजी वाहनों के परखच्चे उड़ गए। शुरुआती तौर पर सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इलाज के दौरान दो अन्य घायलों ने दम तोड़ दिया।

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हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एंबुलेंस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। घायलों को तुरंत वाहनों से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

टायर फटना हादसे की प्राथमिक वजह

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक जांच में बस का टायर फटना हादसे की मुख्य वजह सामने आई है, हालांकि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। परिवहन विभाग को भी घटना की सूचना दे दी गई है। दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात कुछ देर के लिए प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जताया दुख

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं।

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नारी शक्ति: संस्कार से सत्ता तक सामाजिक परिवर्तन की असली ताकत

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय सभ्यता की आत्मा में नारी शक्ति का विशेष स्थान रहा है। नारी यहां केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और सृजन की वह सतत ऊर्जा है, जिसने परिवार, समाज और राष्ट्र को दिशा दी है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था तक नारी की भूमिका निरंतर विकसित होती रही है। घर की चौखट से सत्ता के शिखर तक उसकी यात्रा केवल अधिकार प्राप्ति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और बदलाव की लंबी प्रक्रिया का परिणाम है।
नारी का पहला और सबसे प्रभावशाली कार्यक्षेत्र उसका घर होता है। वही घर, जहां वह संस्कारों की पहली पाठशाला बनकर अगली पीढ़ी को मूल्य, अनुशासन और मानवीय संवेदनाएं देती है। एक सशक्त मां, बहन और बेटी के माध्यम से ही समाज की नींव मजबूत होती है। इतिहास यह प्रमाणित करता है कि जिन सभ्यताओं ने नारी को सम्मान, शिक्षा और स्वतंत्रता दी, वे सभ्यताएं समृद्ध और स्थायी बनीं। इसके विपरीत, जहां नारी को उपेक्षित किया गया, वहां सामाजिक संतुलन और नैतिकता कमजोर पड़ती चली गई।
समय के साथ नारी की भूमिका केवल घरेलू दायरे तक सीमित नहीं रही। आज वह शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, खेल, प्रशासन, सुरक्षा बलों और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रही है। पंचायत से लेकर संसद तक नारी नेतृत्व इस बात का प्रमाण है कि सत्ता केवल कठोर निर्णयों का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, करुणा और दूरदर्शिता का भी माध्यम है। नारी नेतृत्व में लिए गए निर्णय समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की सोच को मजबूत करते हैं।फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि नारी की यह यात्रा संघर्षों से भरी रही है। सामाजिक रूढ़ियां, लैंगिक भेदभाव, असमान अवसर, घरेलू और सामाजिक हिंसा आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। लेकिन नारी शक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह हर बाधा को अवसर में बदलने की क्षमता रखती है। वह संघर्ष को कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की सीढ़ी बनाती है।
आज आवश्यकता है कि नारी सशक्तिकरण को केवल सरकारी योजनाओं, आरक्षण या प्रतीकात्मक सम्मानों तक सीमित न रखा जाए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होगा जब बेटी को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र का भविष्य माना जाएगा; जब शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर उसके जन्मसिद्ध अधिकार होंगे; और जब समाज नारी को दया नहीं, बराबरी की दृष्टि से देखेगा। नारी शक्ति का अर्थ पुरुष विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और सहयोग है। जब स्त्री और पुरुष दोनों समान अवसरों के साथ आगे बढ़ते हैं, तभी राष्ट्र की प्रगति संभव होती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नारी सशक्त होगी तो परिवार सशक्त होगा, परिवार सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा और समाज सशक्त होगा तो राष्ट्र स्वतः मजबूत बनेगा। संस्कार से सत्ता तक नारी की यह यात्रा ही वास्तव में सामाजिक परिवर्तन की असली ताकत है।