Thursday, June 25, 2026
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तप की चेतना और समाज परिवर्तन की अनिवार्यता- जब व्यक्ति बदलेगा, तभी समाज बदलेगा

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तप केवल कठिन साधना या व्यक्तिगत मोक्ष का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली जीवन- दृष्टि है। मंत्र जब तप के रूप में साधना का आधार बनता है, तब उसकी शक्ति व्यक्ति की सीमाओं को तोड़कर सामाजिक चेतना के रूप में प्रकट होती है। यही चेतना समाज परिवर्तन की सबसे सशक्त आधारशिला बनती है।
तप का पहला और सबसे गहरा प्रभाव मनुष्य के अंतर्मन पर पड़ता है। साधना के क्रम में अहंकार, क्रोध, लोभ, भय और भ्रम जैसे विकार शिथिल होने लगते हैं। विचारों में शुद्धता आती है, दृष्टि व्यापक होती है और विवेक जाग्रत होता है। यह विवेक ही मनुष्य को सही और गलत का भेद सिखाता है। जब सोच बदलती है, तब आचरण बदलता है और आचरण के परिवर्तन से जीवन की दिशा स्वतः परिवर्तित हो जाती है।
व्यक्ति के भीतर हुआ यह परिवर्तन केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव परिवार, समाज और परिवेश पर स्वतः पड़ता है। संयमित, संस्कारित और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति समाज में सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। वह उपदेश नहीं देता, बल्कि अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करता है। तप से उत्पन्न सद्बुद्धि व्यक्ति को संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठाकर समाजहित की ओर प्रेरित करती है। यहीं से व्यक्तिगत साधना सामाजिक साधना का स्वरूप ग्रहण करती है।
आज का समाज जब नैतिक पतन, हिंसा, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब केवल बाहरी सुधार, कानून और योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। कोई भी व्यवस्था तभी सफल हो सकती है, जब उसे चलाने वाले और अपनाने वाले लोग चरित्रवान हों। तप ऐसी ही आंतरिक क्रांति का माध्यम है, जो मनुष्य के भीतर दायित्वबोध, करुणा, संयम और सत्यनिष्ठा का विकास करता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज में आध्यात्मिक चेतना जागी है, तब-तब सामाजिक पुनर्जागरण हुआ है। ऋषियों की तपश्चर्या केवल वनों और आश्रमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने पूरे समाज को नई दिशा दी। आज भी तप के माध्यम से ऐसे प्रबुद्ध नागरिकों का निर्माण संभव है, जो जाति, धर्म और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता को ही अपना सर्वोच्च धर्म मानें।
निष्कर्षतःतप की शक्ति किसी चमत्कारिक प्रदर्शन में नहीं, बल्कि शांत, निरंतर और अनुशासित साधना में निहित है। तप श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण करता है और श्रेष्ठ मनुष्यों से ही श्रेष्ठ समाज की रचना होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को बदलने का संकल्प ले ले, तो तप समाज परिवर्तन की सबसे मजबूत और स्थायी आधारशिला सिद्ध हो सकता है।

यूरिया के नाम पर शोषण! परतावल में तड़के से लाइन, खाद के साथ जबरन दवा थमाने का आरोप

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। परतावल विकासखंड में यूरिया खाद की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अस्पताल रोड स्थित इफको केंद्र (सीएचसी के समीप) पर यूरिया पाने के लिए किसान सुबह से ही लंबी कतार में खड़े हैं। किसान बताते हैं कि सुबह करीब चार बजे से ही कड़ाके की ठंड में लाइन लगानी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद कई किसानों को समय पर खाद नसीब नहीं हो पा रही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र पर यूरिया लेने के लिए किसानों को जबरन कृषि दवाएं खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। जो किसान दवा लेने से इनकार करता है, उसे यूरिया देने से साफ मना कर दिया जाता है। ग्रामीणों ने इसे खुलेआम आर्थिक शोषण करार दिया है। सरकार की ओर से पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने और पारदर्शी वितरण के दावे यहां जमीन पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
किसान घंटों लाइन में खड़े होने के बावजूद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं, जिससे उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। रबी फसल के इस अहम समय में खाद न मिलने से उनकी खेती पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि यूरिया और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित न होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
किसानों ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्रों पर जबरन दवा बिक्री पर सख्त रोक लगाई जाए, और खाद की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस मुद्दे ने एक बार फिर खाद वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उचित कदम न उठाए जाने पर वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की भी चेतावनी दे सकते हैं।
यूरिया संकट ने परतावल के किसानों की परेशानी को चरम पर पहुंचा दिया है, और प्रशासन की सक्रियता अब इस समस्या का हल तय करेगी।

मतदान से लोकतंत्र सशक्त, उदासीनता से कमजोर होती जनशक्ति

लेखक – कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र में मतदान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वह सबसे सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए जनता अपने भविष्य की दिशा तय करती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब समाज का बड़ा वर्ग निर्णय प्रक्रिया से दूर रहता है, तब उसके दुष्परिणाम केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक भुगतने पड़ते हैं। सियालकोट का उदाहरण इसी ऐतिहासिक सच्चाई की एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आता है।
यह तथ्य सर्वविदित है कि सियालकोट अविभाजित भारत का हिस्सा था, लेकिन 1947 के विभाजन के बाद वह पाकिस्तान में चला गया। यह परिवर्तन किसी एक दिन या किसी एक व्यक्ति के निर्णय का परिणाम नहीं था, बल्कि उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों, जनभावनाओं और सामूहिक सहभागिता की कमी का नतीजा था। इतिहास हमें यह भी सिखाता है कि जब आम जनता निष्क्रिय रहती है, तो फैसले कुछ गिने-चुने लोग और परिस्थितियां तय कर देती हैं, और आम नागरिक केवल उनके परिणाम भुगतने को विवश हो जाता है।
आज के लोकतांत्रिक भारत में मतदान से दूरी बनाना उसी ऐतिहासिक भूल को दोहराने जैसा है। यह सोच कि मेरे एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा। लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है। चुनावों में कम मतदान प्रतिशत न केवल चुने गए जनप्रतिनिधियों की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि नीतियों को भी जनहित से दूर ले जाने का कारण बनता है।

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सियालकोट की घटना हमें यह समझाती है कि चुप्पी भी एक प्रकार का निर्णय होती है—और अक्सर यह निर्णय हमारे विरुद्ध चला जाता है। आज जब संविधान ने हमें अपने प्रतिनिधि चुनने का पूर्ण अधिकार दिया है, तब उससे मुंह मोड़ना अपने भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है।

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मतदान किसी पार्टी या व्यक्ति के पक्ष में नहीं, बल्कि अपने अधिकार, अपने क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों के हित में होता है। एक मजबूत लोकतंत्र वही होता है, जहां जागरूक नागरिक अधिक से अधिक संख्या में मतदान करते हैं, सवाल पूछते हैं और जवाब मांगते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम इतिहास की गलतियों से सबक लें और हर चुनाव में अपनी जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि आज की उदासीनता कल का पछतावा बन सकती है।

पुलिस का ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग’ अभियान, 288 लोगों व 170 वाहनों की हुई जांच

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस द्वारा बुधवार को “मार्निंग वॉकर चेकिंग” अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक संचालित किया गया।अभियान के दौरान जनपद के सभी थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों द्वारा मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। साथ ही मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत करते हुए छोटे-मोटे विवादों का मौके पर समाधान भी किया गया।पुलिस द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की सघन जांच की गई। इस दौरान चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी के विरुद्ध कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दोपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा अवैध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई। इसके अतिरिक्त अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों की रोकथाम को लेकर भी चेकिंग की गई।संवाद के दौरान पुलिस अधिकारियों ने आमजन को ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग’ अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया। नागरिकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए मॉर्निंग वॉक के समय सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।पुलिस द्वारा जनपद के कुल 17 स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें 288 व्यक्तियों एवं 170 वाहनों की जांच की गई। नियमों का उल्लंघन करने पर 02 वाहनों का चालान भी किया गया।जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि आमजन में सुरक्षा, शांति एवं विश्वास की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सके।

बांग्लादेश के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे भारत सरकार: आनन्द शंकर पाठक

जनपद मुख्यालय खलीलाबाद का नाम बदलकर समय माता नगर और बाईपास चौराहे का नाम अटल चौक करने की मांग

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हो रहे कथित बर्बर अत्याचारों को लेकर अन्तर्राष्ट्रीय हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन प्रदेश उपाध्यक्ष आनन्द शंकर पाठक और जिलाध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व में किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मो. यूनुस खान का पुतला दहन किया और राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में भारत सरकार से बांग्लादेश के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर वहां के हिंदू समाज को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की गई।
इसके साथ ही ज्ञापन में जनपद मुख्यालय खलीलाबाद का नाम बदलकर समय माता नगर करने, बाईपास चौराहे का नाम अटल चौक करने, जनपद मुख्यालय पर बौद्ध संग्रहालय स्थापित करने तथा खलीलाबाद-बांसी मार्ग का नाम श्रीनेत मार्ग घोषित करने की मांग भी की गई।
एक बातचीत में आनन्द शंकर पाठक ने आरोप लगाया कि मो. यूनुस सरकार के संरक्षण में बांग्लादेश में हिंदू समाज पर अत्याचार किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में एक हिंदू युवक को सार्वजनिक रूप से पीटकर जिंदा जला दिया गया, जबकि बड़ी संख्या में हिंदू महिलाओं और बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। सैकड़ों घरों को जलाए जाने का भी आरोप लगाया गया।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में व्याप्त अराजकता को देखते हुए भारत सरकार को कड़ा कदम उठाना चाहिए, ताकि वहां के हिंदू समाज को सुरक्षा मिल सके।
इस दौरान संदीप पाठक, शशि सिंह, पवन जायसवाल, गोलू पाठक, अशोक तिवारी, राम अजोर, विशाल, चंद्रभूषण पाण्डेय, राजेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

हाफिज फिरोज खान के कृत्यों की गोपनीय जांच कराने की मांग
इसी क्रम में अन्तर्राष्ट्रीय हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने जिलाधिकारी को एक अन्य पत्र सौंपकर नगर पंचायत मगहर के शेरपुर मोहल्ला निवासी हाफिज फिरोज खान के कथित अवैध कारोबार की गोपनीय जांच कराने की मांग की।
श्री सिंह ने आरोप लगाया कि फिरोज खान कम समय में अत्यधिक संपत्ति का मालिक बन गया है और नेपाल के रास्ते भारत में अवैध कारोबार कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी अवैध आय से एक बड़े अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गोपनीय जांच कराकर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए।

मेट्रो विस्तार से बदलेगी दिल्ली की हवा, फेज़-5A को मिली हरी झंडी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली की खराब होती हवा और लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम के खिलाफ केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली मेट्रो रेल परियोजना के चरण-5A को मंजूरी देकर यह संकेत दे दिया है कि अब प्रदूषण से लड़ाई केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ठोस बुनियादी ढांचे के जरिए लड़ी जाएगी। करीब 12,015 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना 16 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 13 नए स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें 10 भूमिगत और 3 एलिवेटेड स्टेशन शामिल होंगे।

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इस विस्तार के साथ ही दिल्ली मेट्रो नेटवर्क 400 किलोमीटर से अधिक का हो जाएगा, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। आज दिल्ली मेट्रो पर रोज़ाना औसतन 65 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। ऐसे में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार सड़कों से निजी वाहनों का बोझ कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।
तीन नए गलियारे, ट्रैफिक पर सीधा असर
फेज़-5A के तहत तीन नए रणनीतिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
पहला गलियारा रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक प्रस्तावित है, जिससे कर्तव्य भवन जैसे प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्रों को सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी।
दूसरा गलियारा एरोसिटी से एयरपोर्ट टर्मिनल-1 को जोड़ेगा, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 के बीच मेट्रो से निर्बाध आवागमन संभव होगा।

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तीसरा और सबसे अहम गलियारा तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक बनेगा, जो नोएडा और गुरुग्राम के बीच एक वैकल्पिक और तेज़ रूट उपलब्ध कराएगा।
इन तीनों गलियारों का संयुक्त प्रभाव यह होगा कि दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा, ईंधन की खपत कम होगी और वायु प्रदूषण के बड़े स्रोतों में से एक—निजी वाहन—पर सीधा प्रहार होगा।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम
हर सर्दी में दिल्ली के गैस चेंबर में तब्दील होने की तस्वीरें किसी से छिपी नहीं हैं। स्कूल बंद होते हैं, स्वास्थ्य संकट गहराता है और आम लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे में मेट्रो विस्तार को केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय समाधान के रूप में देखा जा रहा है। मेट्रो का मतलब है कम कारें, कम धुआं और बेहतर जीवन गुणवत्ता।
मेट्रो पर बढ़ता भरोसा
भारत का मेट्रो नेटवर्क आज दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वर्ष 2014 में जहां केवल 5 शहरों में मेट्रो थी, आज यह संख्या 26 शहरों तक पहुंच चुकी है। दैनिक यात्रियों की संख्या भी 28 लाख से बढ़कर 1.15 करोड़ से अधिक हो गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि आम नागरिक सार्वजनिक परिवहन पर भरोसा कर रहा है।
यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है और इसके साथ बस सेवाओं, पैदल मार्गों और अंतिम छोर कनेक्टिविटी को भी मज़बूत किया गया, तो यह फैसला दिल्ली के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। यह वही मोड़ होगा, जहां राजधानी ने प्रदूषण के आगे झुकने से इंकार किया और मेट्रो को साफ सांसों का ज़रिया बनाया।

पर्यटन इकाइयों को अनुदान और छूट, उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर

उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति–2022 से कुशीनगर में पर्यटन निवेश को नई गति, उद्यमियों को मिल रहा प्रोत्साहन


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति–2022 जनपद कुशीनगर में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत जिले में पर्यटन से जुड़ी विभिन्न इकाइयों को प्रोत्साहन देकर निवेश को आकर्षित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
उपायुक्त उद्योग अभय कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि पर्यटन नीति–2022 के अंतर्गत होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, ट्रैवल एवं टूर ऑपरेटर, मनोरंजन पार्क, साहसिक पर्यटन परियोजनाएं और अन्य पर्यटन आधारित इकाइयों को कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें पूंजी निवेश अनुदान, ब्याज अनुदान, स्टाम्प शुल्क में छूट, पंजीकरण में सहूलियत और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में प्राप्त पर्यटन परियोजनाओं के प्रस्तावों की गहन जांच के बाद पात्र इकाइयों को नियमानुसार लाभ दिया जा रहा है। जिला प्रशासन यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि सभी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप निवेशकों तक पहुंचे।

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कुशीनगर जैसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन स्थल के लिए यह नीति विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है। इससे न केवल बड़े निवेशकों को आकर्षित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को भी पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यम स्थापना के अवसर मिल रहे हैं।
जिला प्रशासन ने इच्छुक निवेशकों, व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों से अपील की है कि वे उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति–2022 के प्रावधानों का अधिकतम लाभ उठाएं और पर्यटन आधारित परियोजनाओं में निवेश कर जनपद के विकास में सहभागी बनें। इससे पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ-साथ जिले में रोजगार, आय और बुनियादी ढांचे का भी समग्र विकास होगा।

डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने जारी किया समाधान दिवस का कैलेंडर

जनवरी से जून 2026 तक सम्पूर्ण समाधान दिवस का रोस्टर जारी, डीएम ने दिए सख्त निर्देश


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जनपद कुशीनगर में सम्पूर्ण समाधान दिवस का रोस्टर जनवरी 2026 से जून 2026 तक जारी कर दिया गया है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर द्वारा निर्गत इस रोस्टर के अनुसार प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय शनिवार को प्रातः 10 बजे से अपराह्न 2 बजे तक तहसील दिवस/सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया जाएगा।

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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में क्रमशः कसया, पडरौना, हाटा, तमकुहीराज, खड्डा एवं कप्तानगंज तहसीलों में निर्धारित तिथियों पर सम्पूर्ण समाधान दिवस आयोजित होगा। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) तथा अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में भी अलग-अलग तहसीलों में समाधान दिवस आयोजित किए जाएंगे, जबकि शेष तहसीलों में उपजिलाधिकारी द्वारा जनसुनवाई की जाएगी।

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प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता की शिकायतें एक ही मंच पर सुनी जाएं और उनका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित हो। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी निर्धारित तिथि को सार्वजनिक अवकाश पड़ता है, तो समाधान दिवस अगले कार्य दिवस में अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने सभी जनपदीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे रोस्टर के अनुसार समय से उपस्थित होकर जनसुनवाई करें तथा शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यह पहल न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करेगी, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी और सुदृढ़ करेगी।
सम्पूर्ण समाधान दिवस शासन की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसके माध्यम से राजस्व, विकास, पुलिस, आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी विभागों से जुड़ी शिकायतों का एक ही दिन में समाधान करने का प्रयास किया जाता है।

धन, प्रेम, करियर और राजनीति तक का सटीक अंक ज्योतिष

🔢 अंक राशिफल 25 दिसंबर 2025: आज किस मूलांक वालों की बदलेगी किस्मत? धन, प्रेम, करियर और राजनीति तक का सटीक अंक ज्योतिष
Number Horoscope Numerology 25 December 2025 | गुरुवार विशेष
जिस प्रकार नाम और राशि के आधार पर ज्योतिषीय भविष्यफल देखा जाता है, उसी तरह अंक ज्योतिष में जन्म तिथि (Date of Birth) के अनुसार जीवन के हर क्षेत्र—धन, करियर, शिक्षा, प्रेम, राजनीति, प्रशासन और कला—का विश्लेषण किया जाता है।
📅 25 दिसंबर 2025, गुरुवार का दिन मूलांक के हिसाब से कई जातकों के लिए निर्णायक सिद्ध हो सकता है।
यह अंक राशिफल पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा अंक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।

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🔴 मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
आज का दिन आत्मबल बढ़ाने वाला है।
करियर/व्यवसाय: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, नए प्रोजेक्ट की शुरुआत शुभ
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अनुकूल
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा में वृद्धि
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा
आर्थिक स्थिति: स्थिर, लेकिन फिजूलखर्ची से बचें
प्रेम जीवन: स्वयं को प्राथमिकता दें
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
🟠 मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
सकारात्मक समाचार मिलने के योग हैं।
करियर: टीमवर्क से सफलता
शिक्षा: कला व मनोविज्ञान के छात्रों को लाभ
कला/संगीत: भावनात्मक अभिव्यक्ति श्रेष्ठ
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के संकेत
प्रेम जीवन: प्रेम प्रस्ताव स्वीकार हो सकता है
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: मां पार्वती
🟡 मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है।
करियर: रणनीति बदलनी पड़ सकती है
शिक्षा: ध्यान भंग से बचें
कला: लेखन व मंच कला में सावधानी
राजनीति: बयानबाजी से बचें
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है
प्रेम जीवन: बहस से दूरी रखें
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान बृहस्पति

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🟢 मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
अचानक समाधान मिलने का दिन।
करियर: रुके काम पूरे होंगे
शिक्षा: टेक्निकल छात्रों को लाभ
कला: डिजाइन व क्रिएटिव फील्ड में सफलता
प्रशासन: निर्णय क्षमता सराही जाएगी
आर्थिक स्थिति: संतुलित
प्रेम जीवन: स्पष्ट संवाद जरूरी
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: गणेश जी
🔵 मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
ऊर्जा से भरपूर लेकिन रिश्तों में संतुलन जरूरी।
करियर: मार्केटिंग, मीडिया, सेल्स में लाभ
शिक्षा: कम्युनिकेशन स्किल बढ़ेगी
कला: डिजिटल व सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए शुभ
राजनीति: भाषण से प्रभाव
आर्थिक स्थिति: उतार-चढ़ाव
प्रेम जीवन: टॉक्सिक रिश्तों से दूरी
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
🟣 मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
गुणवत्ता से समझौता न करें।
करियर: फैशन, होटल, ब्यूटी इंडस्ट्री में उन्नति
शिक्षा: आर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए अच्छा दिन
कला/संगीत: सराहना मिलेगी
राजनीति: छवि निखरेगी
आर्थिक स्थिति: निवेश टालें
प्रेम जीवन: स्थिरता
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: मां लक्ष्मी
मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
आत्मविश्लेषण का दिन।
करियर: रिसर्च, आईटी, आध्यात्मिक क्षेत्र शुभ
शिक्षा: गहन अध्ययन लाभ देगा
कला: लेखन व फिल्म निर्देशन में सोच नई
राजनीति: धैर्य जरूरी
आर्थिक स्थिति: सामान्य
प्रेम जीवन: गलतफहमियों का समाधान
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव
⚠️ मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
धन और प्रेम—दोनों में सतर्कता जरूरी।
करियर: प्रशासन, कानून, रियल एस्टेट में चुनौती
शिक्षा: मेहनत का फल देर से
राजनीति: विरोधियों से सावधान
आर्थिक स्थिति: लेन-देन सोच-समझकर
प्रेम जीवन: अहंकार से दूरी
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनि देव
🔴 मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)
बदलाव को अपनाने का दिन।
करियर: डिफेंस, मेडिकल, समाजसेवा में सफलता
शिक्षा: मेहनत रंग लाएगी
कला: अभिनय व नृत्य में अवसर
राजनीति: प्रभावशाली निर्णय
आर्थिक स्थिति: सुधार के संकेत
प्रेम जीवन: भावनात्मक संतुलन जरूरी
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी
⚠️ डिस्क्लेमर
यह अंक राशिफल अंक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।
राष्ट्र की परंपरा या हम इसकी पूर्ण प्रमाणिकता का दावा नहीं करते।
अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

जब एक ही तारीख़ पर विज्ञान, राजनीति, साहित्य, कला और स्वतंत्रता की चेतना ने एक साथ जन्म लिया

🎂 25 दिसंबर: इतिहास के गर्भ से जन्मे वे व्यक्तित्व जिन्होंने समय की दिशा बदल दी


जब एक ही तारीख़ पर विज्ञान, राजनीति, साहित्य, कला और स्वतंत्रता की चेतना ने एक साथ जन्म लिया

25 दिसंबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के लिए प्रेरणा, विचार और परिवर्तन का संगम है। इस दिन जन्मे व्यक्तित्वों ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के बौद्धिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दी। नीचे प्रस्तुत है 25 दिसंबर को जन्मे उन महान व्यक्तियों का विस्तृत, तथ्यात्मक और भावनात्मक परिचय, जिनका योगदान युगों तक स्मरणीय रहेगा।

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🧠 आइज़ैक न्यूटन (1642)
जन्म स्थान: वूल्सथोर्प, लिंकनशायर, इंग्लैंड, यूनाइटेड किंगडम
आइज़ैक न्यूटन विश्व इतिहास के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत, गति के तीन नियम और कैल्कुलस की नींव रखी। न्यूटन की पुस्तक Principia Mathematica ने आधुनिक भौतिकी और गणित को वैज्ञानिक आधार दिया। उनके शोध ने अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग और खगोलशास्त्र को नई दिशा दी। न्यूटन न केवल वैज्ञानिक थे, बल्कि दार्शनिक भी थे, जिन्होंने प्रकृति को गणित की भाषा में समझाया। उनका योगदान मानव ज्ञान की धरोहर है।

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🇮🇳 पंडित मदनमोहन मालवीय (1861)
जन्म स्थान: प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश, भारत
महामना मदनमोहन मालवीय भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और समाज सुधारक थे। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना कर भारतीय शिक्षा को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रवक्ता थे। मालवीय जी ने पत्रकारिता, राजनीति और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, नैतिकता और भारतीय संस्कृति का प्रतीक रहा।

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📜 गंगानाथ झा (1872)
जन्म स्थान: दरभंगा जिला, बिहार, भारत
गंगानाथ झा संस्कृत के महान विद्वान, दार्शनिक और शिक्षाविद थे। उन्होंने मीमांसा और वेदांत दर्शन पर हिन्दी, अंग्रेज़ी और मैथिली में उच्च कोटि के ग्रंथ लिखे। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पहले कुलपति भी रहे। झा जी ने भारतीय दर्शन को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। उनका योगदान भारतीय बौद्धिक परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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🕌 मोहम्मद अली जिन्ना (1876)
जन्म स्थान: कराची, सिंध (तत्कालीन ब्रिटिश भारत, वर्तमान पाकिस्तान)
मुहम्मद अली जिन्ना ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख राजनीतिक नेता और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे। वे पाकिस्तान के संस्थापक और पहले गवर्नर जनरल बने। प्रारंभ में वे हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे, लेकिन बाद में मुस्लिम हितों की अलग राजनीतिक पहचान के पक्षधर बने। जिन्ना का योगदान दक्षिण एशियाई राजनीति में निर्णायक और विवादास्पद दोनों रहा।

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🩺 मुख़्तार अहमद अंसारी (1880)
जन्म स्थान: गाजीपुर जिला, उत्तर प्रदेश, भारत
डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी एक प्रख्यात चिकित्सक, राष्ट्रवादी नेता और स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सेनानी थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने चिकित्सा सेवा को सामाजिक सेवा से जोड़ा और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंसारी जी ने सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के लिए जीवन भर कार्य किया।

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🎶 नौशाद (1919)
जन्म स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत
नौशाद अली भारतीय सिनेमा के सबसे महान संगीतकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को फ़िल्मी संगीत से जोड़कर जन-जन तक पहुँचाया। मुग़ल-ए-आज़म, बैजूबावरा जैसी फिल्मों का संगीत आज भी अमर है। नौशाद ने रागों को सरल बनाकर भारतीय संगीत की आत्मा को सिनेमा में स्थापित किया।

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📚 धर्मवीर भारती (1923)
जन्म स्थान: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत
धर्मवीर भारती हिंदी साहित्य के महान रचनाकार, कवि और संपादक थे। उनका उपन्यास गुनाहों का देवता और काव्य नाटक अंधा युग हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं, नैतिक द्वंद्व और आधुनिक समाज की पीड़ा को गहराई से अभिव्यक्त किया। वे लंबे समय तक धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे।

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🇮🇳 अटल बिहारी वाजपेयी (1924)
जन्म स्थान: ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दसवें प्रधानमंत्री, महान वक्ता, कवि और राष्ट्रनेता थे। उन्होंने सुशासन, परमाणु नीति, सड़क विकास और विदेश नीति में ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम और मानवीय करुणा झलकती है। वाजपेयी जी भारतीय राजनीति में शालीनता और संवाद की संस्कृति के प्रतीक रहे।
🎨 सतीश गुजराल (1925)
जन्म स्थान: झेलम (अब पाकिस्तान)
सतीश गुजराल विश्वविख्यात चित्रकार, मूर्तिकार और वास्तुकार थे। उनकी कला में पीड़ा, विभाजन और मानवीय संवेदना की गहरी छाप दिखती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कला को प्रतिष्ठा दिलाई। वे साहित्यकार विष्णु प्रभाकर के पुत्र और इंदिरा गांधी के करीबी माने जाते थे।
🎼 राम नारायण (1927)
जन्म स्थान: उदयपुर, राजस्थान, भारत
राम नारायण विश्वविख्यात सरोद (सारंगी) वादक हैं, जिन्होंने सारंगी को शास्त्रीय संगीत के मुख्य मंच पर स्थापित किया। उनके प्रयासों से सारंगी को संगत वाद्य से स्वतंत्र वाद्य का दर्जा मिला। उन्होंने विश्व भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार किया।

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🎭 कपिला वात्स्यायन (1928)
जन्म स्थान: शिमला, हिमाचल प्रदेश, भारत
कपिला वात्स्यायन भारतीय कला, नृत्य, संस्कृति और शिक्षा की महान विदुषी थीं। उन्होंने कथकली, भरतनाट्यम और अन्य नृत्य शैलियों पर गहन शोध किया। वे राज्यसभा सदस्य भी रहीं और भारतीय सांस्कृतिक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🇮🇳 मोहन रानाडे (1930)
जन्म स्थान: सांगली जिला, महाराष्ट्र, भारत
मोहन रानाडे गोवा मुक्ति आंदोलन के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने पुर्तगाली शासन के विरुद्ध सशस्त्र और वैचारिक संघर्ष किया। गोवा को भारत में मिलाने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। वे जीवन भर राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे।

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🏛️ एन. धरम सिंह (1936)
जन्म स्थान: बीदर जिला, कर्नाटक, भारत
एन. धरम सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष कार्य किया। वे सरल, ईमानदार और जनप्रिय नेता माने जाते थे।
✍️ माणिक वर्मा (1938)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र, भारत
माणिक वर्मा भारतीय साहित्य के संवेदनशील कवि थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय पीड़ा और आत्मचिंतन की गहराई मिलती है। उन्होंने आधुनिक कविता को नई भाषा और भावबोध दिया।

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🎬 मणि कौल (1944)
जन्म स्थान: जालंधर, पंजाब, भारत
मणि कौल समानांतर सिनेमा के अग्रणी फ़िल्म निर्देशक थे। उनकी फ़िल्में पारंपरिक कथा से हटकर प्रयोगधर्मी और दार्शनिक होती थीं। उसकी रोटी, दुविधा जैसी फ़िल्मों ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दी।
🎼 अजॉय चक्रवर्ती (1952)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
पंडित अजॉय चक्रवर्ती हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक, गुरु और संगीतकार हैं। वे पटियाला घराने के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने संगीत शिक्षा के माध्यम से अनेक शिष्यों को तैयार किया और भारतीय राग परंपरा को समृद्ध किया।

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🏇 इम्तियाज़ अनीस (1970)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
इम्तियाज़ अनीस भारत के प्रसिद्ध घुड़सवार खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और भारतीय इक्वेस्ट्रियन खेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका योगदान खेल जगत में प्रेरणास्रोत है।
🛠️ मनोज कुमार चौधरी (1978)
जन्म स्थान: प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश, भारत
मनोज कुमार चौधरी एक सेप कंसल्टेंट इंजीनियर हैं। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में नवाचार, परियोजना प्रबंधन और इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका कार्य आधुनिक भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।

तुलसी पूजन दिवस: भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण चेतना का प्रतीक

नवनीत मिश्र

भारतीय संस्कृति में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि आस्था, आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत प्रतीक है। तुलसी पूजन दिवस हमें उस परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें प्रकृति को देवत्व प्रदान कर मानव जीवन को संतुलन और स्वास्थ्य से जोड़ा गया है। यह दिवस श्रद्धा के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी संदेश देता है।
हिंदू परंपरा में तुलसी को विष्णु प्रिया और लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है। घर के आंगन में तुलसी का पौधा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। प्रातःकाल तुलसी पूजन से मन की शुद्धि, आत्मिक शांति और संस्कारों का विकास होता है। तुलसी विवाह, कार्तिक मास और एकादशी जैसे पर्वों में तुलसी का विशेष स्थान भारतीय जीवन दर्शन को दर्शाता है, जहाँ प्रकृति और ईश्वर एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
आयुर्वेद में तुलसी को ‘संजीवनी बूटी’ कहा गया है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, श्वसन रोगों, जुकाम, खांसी, बुखार और मानसिक तनाव में अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। तुलसी की पत्तियों में मौजूद औषधीय गुण न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन भी प्रदान करते हैं। आज के प्रदूषित वातावरण में तुलसी का सेवन और उसका सान्निध्य स्वास्थ्य के लिए वरदान सिद्ध हो सकता
तुलसी पूजन दिवस हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है। तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करने में सहायक है और ऑक्सीजन की गुणवत्ता बढ़ाता है। जब हम तुलसी की पूजा करते हैं, तो अनजाने में ही हम पौधारोपण, संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संस्कार भी अपनाते हैं। यह दिवस केवल पूजा तक सीमित न रहकर हरित जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देता
आज जब जीवन तेजी से तकनीक-केंद्रित हो गया है, तुलसी पूजन दिवस हमें जड़ों से जुड़ने का अवसर देता है। यह दिन संदेश देता है कि विकास और परंपरा में संतुलन आवश्यक है। तुलसी का संरक्षण केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है।
तुलसी पूजन दिवस भारतीय जीवन दर्शन की उस समग्र सोच का प्रतीक है, जिसमें धर्म, स्वास्थ्य और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। तुलसी का सम्मान करना दरअसल जीवन, स्वास्थ्य और पृथ्वी का सम्मान करना है। यदि हम इस दिवस के संदेश को आत्मसात करें, तो न केवल हमारी संस्कृति सशक्त होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण भी प्राप्त होगा।

महामना मदन मोहन मालवीय: राष्ट्रबोध, शिक्षा और संस्कृति का उज्ज्वल दीप

पुनीत मिश्र

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल आंदोलनों और संघर्षों का विवरण नहीं है, बल्कि ऐसे महान व्यक्तित्वों की साधना का भी साक्ष्य है, जिन्होंने राष्ट्र की आत्मा को जागृत किया। मदन मोहन मालवीय ऐसे ही महामानव थे, जिनका जीवन स्वाधीनता, शिक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित रहा।
मालवीय जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, तो साथ ही उत्कृष्ट शिक्षाविद और सांस्कृतिक चिंतक भी। उनका विश्वास था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है, जब समाज बौद्धिक और नैतिक रूप से सशक्त हो। इसी विचार ने उन्हें शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का मूल आधार मानने के लिए प्रेरित किया।
भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में उनका सबसे महान योगदान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना है। यह विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और संस्कृति का जीवंत केंद्र बना। महामना की परिकल्पना थी कि यहां आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ भारतीय परंपरा का समन्वय हो, जिससे ऐसे नागरिक तैयार हों जो राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ और वैश्विक दृष्टि से सक्षम हों।
स्वाधीनता आंदोलन में भी मालवीय जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने संवैधानिक मार्ग, संवाद और नैतिक मूल्यों पर बल दिया। उनका मानना था कि संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि समाज के चरित्र निर्माण के लिए होना चाहिए। पत्रकारिता, सार्वजनिक भाषण और संगठनात्मक क्षमता के माध्यम से उन्होंने जनमानस को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा।
भारतीय संस्कृति के प्रति उनका प्रेम उनके विचारों और कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है। वे संस्कृति को अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति मानते थे। शिक्षा, भाषा, आचार और सामाजिक समरसताl इन सभी क्षेत्रों में उन्होंने भारतीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए सतत प्रयास किए।
आज मालवीय जी की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का क्षण है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रनिर्माण शिक्षा, संस्कृति और नैतिक साहस से होता है। बदलते समय में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थे।

धर्मवीर भारती : प्रेम, प्रश्न और पहचान के लेखक

धर्मवीर भारती आधुनिक हिन्दी साहित्य के उन रचनाकारों में हैं, जिन्होंने लेखन को केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे मनुष्य की पहचान, उसके अंतर्द्वंद्व और उसके सामाजिक सच से जोड़ा। उनके साहित्य में प्रेम है, लेकिन वह पलायन नहीं करता; प्रश्न हैं, लेकिन वे निराशा नहीं फैलाते; और पहचान की तलाश है, जो व्यक्ति को भीतर से जागरूक बनाती है।
25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद में जन्मे धर्मवीर भारती ने ऐसे समय में लेखन शुरू किया, जब देश स्वतंत्रता के बाद अपने नए स्वरूप को गढ़ रहा था। सामाजिक टूटन, नैतिक असमंजस और नई पीढ़ी की बेचैनी उनके साहित्य की पृष्ठभूमि बनी। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ आज भी समकालीन लगती हैं।
प्रेम को लेकर धर्मवीर भारती की दृष्टि विशिष्ट है। उनका चर्चित उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ प्रेम की कोमलता के साथ उसकी सीमाओं और सामाजिक दबावों को उजागर करता है। यह प्रेम आदर्श और यथार्थ के बीच झूलता हुआ दिखाई देता है, जो पाठक को भावनात्मक रूप से गहराई तक छूता है।
प्रश्नाकुलता उनके लेखन का केंद्रीय तत्व है। ‘अंधा युग’ के माध्यम से उन्होंने युद्ध, हिंसा और नैतिक पतन पर तीखे प्रश्न खड़े किए। महाभारत की कथा के सहारे उन्होंने आधुनिक समाज की आत्मिक अंधता को सामने रखा। यह नाटक केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान का आईना है।
धर्मवीर भारती की रचनाओं में व्यक्ति अपनी पहचान खोजता दिखाई देता है। ‘सूरज का सातवाँ घोड़ा’ जैसे उपन्यास में कथा-प्रविधि के प्रयोग के साथ-साथ स्त्री-पुरुष संबंधों और सामाजिक ढांचे की जटिलता को उकेरा गया है। यहाँ पात्र अपने भीतर और बाहर—दोनों स्तरों पर संघर्ष करते हैं।
संपादक के रूप में भी धर्मवीर भारती ने साहित्य और समाज के बीच सेतु का कार्य किया। ‘धर्मयुग’ के संपादन के दौरान उन्होंने रचनात्मकता, विचार और समकालीन विमर्श को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाया। उनकी दृष्टि ने हिन्दी पत्रकारिता को वैचारिक गरिमा प्रदान की।
धर्मवीर भारती का साहित्य किसी निष्कर्ष को थोपता नहीं, बल्कि पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करता है। वे मनुष्य की कमजोरी को भी समझते हैं और उसकी संभावनाओं पर भी विश्वास करते हैं। यही संतुलन उन्हें विशिष्ट बनाता है।
निष्कर्षतः धर्मवीर भारती प्रेम की कोमलता, प्रश्नों की तीक्ष्णता और पहचान की खोज को एक साथ साधने वाले लेखक हैं। उनका साहित्य आज भी युवा मन को आंदोलित करता है और समाज को आत्ममंथन के लिए विवश करता है।

आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, यात्रा दिशा व विशेष योग

पंचांग 25 दिसंबर 2025 | आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, यात्रा दिशा व विशेष योग
दिनांक: 25 दिसंबर 2025
वार: गुरुवार
स्थान मानक: भारत (द्रिक पंचांग आधारित)
📜 आज का संक्षिप्त पंचांग
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
चन्द्र मास: पौष
अमांत / पूर्णिमांत: पौष
ऋतु: वैदिक – हेमंत | द्रिक – शिशिर
अयन: दक्षिणायन (वर्तमान)

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🪔 तिथि
पौष शुक्ल पंचमी: 24 दिसंबर 01:11 PM से 25 दिसंबर 01:43 PM तक
पौष शुक्ल षष्ठी: 25 दिसंबर 01:43 PM से 26 दिसंबर 01:43 PM तक
🌟 नक्षत्र
धनिष्ठा: 24 दिसंबर 07:07 AM से 25 दिसंबर 08:18 AM तक
शतभिषा: 25 दिसंबर 08:18 AM से 26 दिसंबर 09:00 AM तक

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🔱 योग
वज्र योग: 24 दिसंबर 04:01 PM से 25 दिसंबर 03:13 PM तक
सिद्धि योग: 25 दिसंबर 03:13 PM से 26 दिसंबर 02:00 PM तक
➡️ सर्वार्थसिद्धि योग:
शतभिषा नक्षत्र + गुरुवार + सिद्धि योग का संयोग 25 दिसंबर को 03:13 PM के बाद बन रहा है, जो कार्य-सिद्धि, निवेश, पूजा-पाठ व नए आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

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🧿 करण
बालव: 25 दिसंबर 01:31 AM – 01:43 PM
कौलव: 25 दिसंबर 01:43 PM – 26 दिसंबर 01:47 AM
तैतिल: 26 दिसंबर 01:47 AM – 01:44 PM
☀️ सूर्य व 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:09 AM
सूर्यास्त: 05:44 PM
चन्द्रोदय: 10:49 AM
चन्द्रास्त: 10:34 PM

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सूर्य व चंद्र राशि
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: कुंभ (पूरा दिन-रात)
⚠️ अशुभ काल
राहुकाल: 01:46 PM – 03:05 PM
यम गण्ड: 07:09 AM – 08:29 AM
कुलिक: 09:48 AM – 11:07 AM
दुर्मुहूर्त:
10:41 AM – 11:23 AM
02:54 PM – 03:37 PM
वर्ज्यम: 03:42 PM – 05:21 PM

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शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 12:05 PM – 12:48 PM
अमृत काल: 01:34 AM – 03:13 AM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:33 AM – 06:21 AM
🧭 यात्रा मुहूर्त व दिशा शास्त्र
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित है:
गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है।
यदि दक्षिण दिशा जाना अनिवार्य हो तो क्या करें:
चने या गुड़ का सेवन करके यात्रा प्रारंभ करें।

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लाभदायक यात्रा दिशा:
पूर्व व उत्तर-पूर्व दिशा की यात्रा से धन, सफलता व शुभ समाचार की प्राप्ति होती है।
🔢 चौघड़िया (दिन)
शुभ – 07:09 AM – 08:29 AM
रोग – 08:29 AM – 09:48 AM
उद्बेग – 09:48 AM – 11:07 AM
चर – 11:07 AM – 12:26 PM
लाभ – 12:26 PM – 01:46 PM
अमृत – 01:46 PM – 03:05 PM
काल – 03:05 PM – 04:24 PM
शुभ – 04:24 PM – 05:43 PM
🌌 चंद्रबल (26/12/25 सुबह 07:10 तक)
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुंभ

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ताराबल
08:18 AM तक: भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
08:18 AM के बाद: अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा

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📝 नोट:इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा उत्तरदायी नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य या विद्वान से परामर्श अवश्य

कर्नाटक में भीषण सड़क हादसा: स्लीपर बस में लगी आग, 13 यात्रियों की दर्दनाक मौत, कई घायल

चित्रदुर्ग/कर्नाटक (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बेंगलुरु से गोकर्ण जा रही एक निजी स्लीपर कोच बस की कंटेनर लॉरी से आमने-सामने की टक्कर हो गई, जिसके बाद बस में अचानक आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

पीटीआई के अनुसार, यह दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) पर चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक स्थित गोरलाथु क्रॉस के पास हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में तुरंत आग फैल गई और कई यात्री स्लीपर कोच के अंदर ही फंस गए।

आग की लपटों में घिरी बस

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर के बाद बस कुछ ही पलों में आग की चपेट में आ गई। आग तेजी से फैलने के कारण यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

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राहत और बचाव कार्य जारी

पुलिस ने बताया कि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हादसे के कारण कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी बाधित रहा।

प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और आमने-सामने की टक्कर को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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