Thursday, June 25, 2026
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कैसा रहेगा 29, 30 और 31 दिसंबर को यूपी, दिल्ली और बिहार में मौसम? IMD की ताज़ा भविष्यवाणी

मौसम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 29 दिसंबर तक ठंड से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। बिहार में 31 दिसंबर तक जबकि पंजाब और हरियाणा में 30 दिसंबर तक घने कोहरे का असर बना रह सकता है।

मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए कोल्ड डे और बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम व उत्तराखंड के लिए सीवियर कोल्ड डे की चेतावनी जारी की है।

दिल्ली का मौसम: गलन बढ़ी, तापमान गिरा

राजधानी दिल्ली में दो दिनों की धूप के बाद साफ आसमान के चलते ठंड और गलन बढ़ गई है। पहाड़ी इलाकों से आ रही सर्द पछुआ हवाएं ठिठुरन बढ़ा रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर में न्यूनतम तापमान गिरकर 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और शुक्रवार (26 दिसंबर) को इसमें और गिरावट की संभावना है।

हालांकि, हवा की गुणवत्ता में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन AQI 230 के साथ अभी भी यह खराब श्रेणी में बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में कोहरे का ऑरेंज अलर्ट

उत्तर प्रदेश में भीषण ठंड का असर लगातार जारी है। रात के समय तापमान और गिर रहा है। गुरुवार को कुछ इलाकों में धूप निकलने से हल्की राहत जरूर मिली, लेकिन न्यूनतम तापमान फिर से लुढ़क गया है।
मौसम विभाग ने प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, जौनपुर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज और सीतापुर में घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

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27 से 31 दिसंबर तक यूपी का मौसम

• 27-28 दिसंबर: मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन कई इलाकों में घने से अत्यंत घने कोहरे का अलर्ट

• 29, 30 और 31 दिसंबर: आसमान साफ रहने की संभावना, हालांकि सुबह और रात में घना कोहरा बना रहेगा

तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। गुरुवार को मेरठ प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बिहार में शीतलहर लग का कहर

बिहार में शीतलहर और घने कोहरे को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक साल के अंत तक कोहरे से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।

पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर बिहार के मौसम पर पड़ रहा है। बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठंड में इजाफा हुआ है।
पिछले 24 घंटों में बिहार का औसत न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।

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‘पुतिन की मौत…’ क्रिसमस पर जेलेंस्की की दुआ, रूस के खिलाफ तीखे संदेश से मचा हलचल

Ukraine Russia War: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने क्रिसमस के मौके पर रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ बेहद भावनात्मक और तीखा संदेश दिया है। क्रिसमस ईव पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक वीडियो संबोधन में जेलेंस्की ने कहा कि रूस चाहे कितने भी हमले कर ले, वह यूक्रेनी जनता की आस्था, एकता और हौसले को कभी नहीं तोड़ सकता।

यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब रूस ने क्रिसमस से ठीक पहले यूक्रेन के कई इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।

बिना नाम लिए पुतिन पर सीधा हमला

अपने संदेश में जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा बिल्कुल साफ था। उन्होंने कहा,
“आज हर यूक्रेनी के दिल में एक ही भावना है और सबकी एक ही इच्छा है कि वह व्यक्ति खत्म हो जाए, जो इस युद्ध और तबाही का जिम्मेदार है।”

जेलेंस्की के इस बयान को सीधे तौर पर पुतिन के खिलाफ दुआ और प्रतीकात्मक हमला माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।

क्रिसमस से पहले रूस के हमलों से बढ़ा आक्रोश

यूक्रेनी राष्ट्रपति का यह संदेश रूस की ओर से किए गए भीषण हमलों के बाद आया। रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने बैलिस्टिक मिसाइल, किंझाल हाइपरसोनिक हथियार और सैकड़ों शाहेद ड्रोन से यूक्रेन के कई शहरों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई, जबकि कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।

जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने त्योहारों के पवित्र दिनों में भी आम नागरिकों को नहीं बख्शा।

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जेलेंस्की बोले – यूक्रेन बदले की नहीं, शांति की लड़ाई लड़ रहा

क्रिसमस संदेश में जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन बदले की भावना से नहीं लड़ रहा है। उन्होंने कहा,
“हम शांति के लिए लड़ रहे हैं, शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और न्यायपूर्ण व स्थायी शांति पाने का पूरा अधिकार रखते हैं।”

उन्होंने ईश्वर से यूक्रेन के लिए न्याय और स्थायी शांति की कामना भी की।

20-सूत्रीय शांति योजना और डोनबास पर प्रस्ताव

क्रिसमस संदेश के बाद मीडिया से बातचीत में जेलेंस्की ने यूक्रेन की 20-प्वाइंट पीस प्लान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध समाप्त करने का वास्तविक रास्ता निकलता है तो यूक्रेन पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र डोनबास से अपनी सेना हटाने पर विचार कर सकता है।

हालांकि उन्होंने शर्त रखी कि रूस को भी उसी क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलानी होगी, पूरे इलाके को डिमिलिट्राइज्ड ज़ोन घोषित किया जाए और वहां अंतरराष्ट्रीय शांति बल तैनात हों।

रूस की सख्त शर्तें, कीव का साफ इनकार

फिलहाल रूस ने कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। रूस लुहांस्क और डोनेत्स्क के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण बनाए हुए है। पुतिन यूक्रेन से डोनबास छोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कीव ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

नाइजीरिया में ISIS ठिकानों पर अमेरिका की एयर स्ट्राइक, ट्रंप बोले – “आतंकियों को भी Merry Christmas”

Airstrikes In Nigeria: अमेरिका ने नाइजीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के ठिकानों पर कई घातक हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई की जानकारी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social के जरिए दी। ट्रंप ने कहा कि ये एयर स्ट्राइक उनके सीधे आदेश पर की गई हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में मौजूद ISIS आतंकियों को निशाना बनाया गया, जो क्षेत्र में ईसाई समुदाय के लोगों पर हमले कर रहे थे और निर्दोष नागरिकों की हत्या में शामिल थे।

ईसाइयों को निशाना बनाने का आरोप

ट्रंप ने आरोप लगाया कि ISIS आतंकी लंबे समय से ईसाइयों को चुन-चुनकर निशाना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि इस स्तर की हिंसा वर्षों नहीं बल्कि सदियों में भी नहीं देखी गई। राष्ट्रपति ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही आतंकियों को चेतावनी दी थी कि अगर हत्याएं नहीं रुकीं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

‘पहले ही दी थी चेतावनी’

ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा,
“मैंने इन आतंकियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का कत्लेआम बंद नहीं किया, तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। आज रात वही हुआ।”

अमेरिकी सेना की ‘परफेक्ट स्ट्राइक’

राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस ऑपरेशन में कई सटीक हवाई हमले किए। उन्होंने कहा,
“डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने परफेक्ट स्ट्राइक को अंजाम दिया, ऐसा केवल संयुक्त राज्य अमेरिका ही कर सकता है।”

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के सख्त रुख को दर्शाती है। उन्होंने अमेरिकी सेना की सराहना करते हुए लिखा,
“मेरे नेतृत्व में अमेरिका कट्टर इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।”
इसके साथ ही ट्रंप ने क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हुए विवादित टिप्पणी की—
“भगवान हमारी सेना को आशीर्वाद दें। सभी को Merry Christmas, यहां तक कि मरे हुए आतंकियों को भी।”

नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर कार्रवाई

वहीं, अमेरिकी अफ्रीका कमांड (US AFRICOM) ने बताया कि नाइजीरिया के सोकोटो क्षेत्र में ISIS के खिलाफ यह कार्रवाई नाइजीरियाई सरकार के अनुरोध पर की गई थी।

मानवता का सर्वोच्च धर्म: बाबा आमटे का सेवा-संकल्प

डॉ. संदीप पाण्डेय

नर सेवा ही नारायण सेवा है, यह कथन बाबा आमटे के जीवन में केवल विचार नहीं, बल्कि उनका संपूर्ण आचरण था। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण कुष्ठ रोगियों और समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग की सेवा में समर्पित कर दिया। ऐसे समय में, जब कुष्ठ रोग को सामाजिक अभिशाप माना जाता था, बाबा आमटे ने भय और पूर्वाग्रह की दीवारों को तोड़ते हुए मानवता की सच्ची मिसाल प्रस्तुत की।
बाबा आमटे ने यह सिद्ध किया कि रोग किसी व्यक्ति की पहचान नहीं होता, पहचान उसके भीतर का आत्मसम्मान और श्रम होता है। आनंदवन की स्थापना के माध्यम से उन्होंने सेवा को केवल करुणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे स्वावलंबन, सम्मान और सामूहिक जीवन से जोड़ा। यहाँ कुष्ठ रोगियों को भी आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में जीने का अवसर मिला।
उनकी सेवा दृष्टि भावनात्मक सहानुभूति से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनी। उन्होंने समाज को यह सोचने पर मजबूर किया कि सबसे कमजोर व्यक्ति के साथ खड़ा होना ही सच्चे राष्ट्र निर्माण की नींव है। पद्म पुरस्कारों से सम्मानित बाबा आमटे ने कभी सम्मान को लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि सेवा को ही अपना धर्म और कर्म माना।
आज के समय में, जब संवेदनाएँ सीमित होती जा रही हैं और आत्मकेंद्रितता बढ़ रही है, बाबा आमटे का जीवन हमें यह सिखाता है कि मानवता की रक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि करुणा और कर्म से होती है। उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का दिन है कि हम भी अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास करें।
बाबा आमटे का जीवन संदेश स्पष्ट और प्रेरक हैl जब सेवा संकल्प बन जाए, तब एक अकेला व्यक्ति भी समाज की आत्मा को जागृत कर सकता है। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है और यही उनका अमर योगदान।

कार्टून की रेखाओं में सजी संस्कृति: केशव शंकर पिल्लई का रचनात्मक संसार

पुण्यतिथि पर विशेष – जितेन्द्र कुमार पाण्डेय

भारतीय कार्टून कला को जन-जन तक पहुँचाने वाले केशव शंकर पिल्लई, जिन्हें के. शंकर पिल्लई के नाम से अधिक जाना जाता है, केवल एक कार्टूनिस्ट नहीं थे, बल्कि वे बाल मनोविज्ञान, सामाजिक विविधता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के सूक्ष्म अध्येता भी थे। उनकी रचनाओं ने बच्चों को न केवल हँसाया, बल्कि खेल-खेल में भारत और दुनिया के विभिन्न समाजों के रहन-सहन, वेश-भूषा और जीवन शैली से परिचित कराया।
केशव शंकर पिल्लई का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह रहा कि उन्होंने कार्टून और गुड़ियों को शिक्षा का माध्यम बनाया। उनके द्वारा निर्मित चित्रों और खिलौनों में भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक परिधान, लोकजीवन और सामाजिक व्यवहार इतने सहज रूप में प्रस्तुत होते थे कि बच्चे अनजाने ही विविधता में एकता का पाठ सीख लेते थे। यह वह दौर था, जब औपचारिक पाठ्यक्रम में सांस्कृतिक शिक्षा सीमित थी, और शंकर पिल्लई ने अपनी कला से उस खाली स्थान को भर दिया।
बाल साहित्य और बाल मनोरंजन के क्षेत्र में उनका दृष्टिकोण अत्यंत मौलिक था। वे मानते थे कि बच्चे कल्पना के सहारे दुनिया को समझते हैं। इसी कारण उनके कार्टून पात्र सरल, रंगीन और भावपूर्ण होते थे। हर रेखा में कहानी होती थी और हर चेहरे में कोई न कोई सामाजिक संकेत छिपा रहता था। उनके कार्टून बच्चों को यह समझाते थे कि अलग-अलग कपड़े पहनने वाले, अलग भाषा बोलने वाले लोग भी उतने ही अपने हैं।
शंकर पिल्लई का नाम शंकर’स वीकली से भी जुड़ा है, जिसने भारतीय राजनीतिक और सामाजिक कार्टूनिंग को नई पहचान दी। हालांकि यह पत्रिका मुख्यतः व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर केंद्रित थी, लेकिन इसकी कलात्मक भाषा ने बच्चों और युवाओं दोनों के लिए दृश्य साक्षरता का विकास किया। इससे कार्टून को केवल हास्य नहीं, बल्कि विचार और संवाद का माध्यम समझा जाने लगा।
गुड़ियों के माध्यम से शिक्षा देने की उनकी सोच विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विभिन्न प्रांतों और देशों की पारंपरिक गुड़ियाँ बच्चों को यह सिखाती थीं कि दुनिया कितनी रंग-बिरंगी है। ये गुड़ियाँ केवल खिलौने नहीं थीं, बल्कि चलती-फिरती संस्कृति थीं, जिनके माध्यम से बच्चे सामाजिक विविधता को सहजता से आत्मसात करते थे।
पद्म विभूषण केशव शंकर पिल्लई का रचनात्मक जीवन इस बात का प्रमाण है कि कला यदि संवेदनशील हो, तो वह समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कार्टून को अख़बार के पन्नों से निकालकर बच्चों के मन तक पहुँचाया और गुड़ियों को केवल खेल की वस्तु नहीं, बल्कि सीख का साधन बनाया।
आज के डिजिटल युग में, जब बच्चों की दुनिया स्क्रीन तक सिमटती जा रही है, शंकर पिल्लई की कला हमें यह याद दिलाती है कि रेखा, रंग और कल्पना के माध्यम से भी गहरी शिक्षा दी जा सकती है। उनका योगदान भारतीय कार्टून कला और बाल संस्कृति के इतिहास में सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंह

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंहअदम्य साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए सर्वस्व अर्पित कर देने का नाम है- क्रांतिवीर उधम सिंह। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उनका स्थान केवल एक प्रतिशोधी योद्धा का नहीं, बल्कि उस चेतना का है, जिसने अन्याय के विरुद्ध न्याय का उद्घोष किया। जलियांवाला बाग के रक्तरंजित प्रांगण में बहे निर्दोषों के लहू ने जिस ज्वाला को जन्म दिया, वही ज्वाला वर्षों तक उधम सिंह के भीतर धधकती रही और अंततः ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अहंकार को लंदन की धरती पर चुनौती दे गई। 13 अप्रैल 1919, यह तारीख भारत के इतिहास में एक न मिटने वाला घाव है। अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी ने सैकड़ों निहत्थे भारतीयों की जान ले ली। इस नरसंहार के पीछे पंजाब का तत्कालीन उपराज्यपाल माइकल ओ’डायर की नीतिगत क्रूरता थी, जिसने दमन को वैधता दी। युवा उधम सिंह इस विभीषिका के साक्षी बने। उन्होंने वहीं यह प्रण लिया कि वे इस अन्याय का हिसाब अवश्य लेंगे। न किसी निजी द्वेष से, बल्कि राष्ट्र के सम्मान के लिए। इसके बाद के वर्षों में उधम सिंह ने स्वयं को उद्देश्य के लिए तैयार किया। वे सीमाओं, बाधाओं और जोखिमों से बेपरवाह होकर विदेश गए, पहचान बदली, धैर्य साधा और अवसर की प्रतीक्षा की। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने माइकल ओ’डायर को गोली मार दी और भागने के बजाय स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया। यह कृत्य आतंक नहीं, बल्कि औपनिवेशिक अन्याय के विरुद्ध एक ऐतिहासिक प्रतिवाद था। जिसमें साहस के साथ-साथ नैतिक स्पष्टता भी थी। अदालत में उधम सिंह का वक्तव्य उनके व्यक्तित्व की ऊँचाई को प्रकट करता है। उन्होंने किसी खेद का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि जलियांवाला बाग के पीड़ितों की आवाज़ बनकर कहा कि उनका कृत्य अत्याचार के विरुद्ध था। फाँसी का फंदा उनके लिए अंत नहीं, बल्कि बलिदान की पूर्णाहुति था। 31 जुलाई 1940 को उन्होंने हँसते हुए मृत्यु को स्वीकार किया। यह दर्शाते हुए कि सच्चा क्रांतिकारी जीवन से अधिक मूल्यों को महत्त्व देता है। उधम सिंह की विरासत हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना है। उनका जीवन बताता है कि इतिहास का पहिया कभी-कभी एक अकेले, संकल्पवान व्यक्ति के धैर्य से भी दिशा बदल सकता है। आज जब हम उनकी जयंती पर नमन करते हैं, तो यह स्मरण आवश्यक है कि साहस का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध निर्भीक प्रतिकार है और बलिदान का अर्थ भविष्य की पीढ़ियों के लिए न्यायपूर्ण मार्ग प्रशस्त करना। क्रांतिवीर उधम सिंह का नाम भारतीय चेतना में सदैव अमर रहेगा। एक ऐसे योद्धा के रूप में, जिसने गुलामी के अंधकार में स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित किया।

बीमारी, पढ़ाई और कर्ज़ के बीच पिसता भारतीय परिवार — क्या यही है विकास की असली तस्वीर?

भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन क्या आम भारतीय परिवार भी उसी गति से आगे बढ़ पा रहें है?- एक समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

“GDP से आगे सोचने का समय: जब तक शिक्षा सस्ती और इलाज सुलभ नहीं, तब तक अधूरी है भारत की तरक्की”

सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज और कैंसर पर निर्णायक वार ज़रूरी – भारत की असली तरक्की का रास्ता,परिवार केंद्रित नीतियों से होकर गुजरता है?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत आज जब देश वैश्विक मंचों पर आर्थिक शक्ति, तकनीकी नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव की बात कर रहा है, उसी समय करोड़ों परिवारों के सामने एक साझा चिंता खड़ी है,बच्चों की शिक्षा कितनी महंगी होगी,बीमारी आने पर इलाज कैसे होगा और कैंसर जैसी भयावह बीमारी से कैसे निपटा जाएगा? यही तीन प्रश्न आज भारत की सामाजिक सच्चाई औरनीति-निर्माण की कसौटी बन चुके हैं।भारत इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में जिस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, वहां आर्थिक वृद्धि, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रभाव के साथ-साथ एक बड़ा प्रश्न लगातार उभर रहा है,क्या यह विकास आम नागरिक के जीवन को वास्तव में सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक बना पा रहा है?मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का आकलन उसके सकल घरेलू उत्पाद या वैश्विक रैंकिंग से नहीं,बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए?कि वहां का एक साधारण परिवार कितनी सहजता से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच पा रहा है। भारत में आज सस्ती शिक्षा और सस्ता इलाज केवल नीतिगत मुद्दे नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के अस्तित्व भविष्य और सामाजिक स्थिरता से जुड़े जीवन-मरण के प्रश्न बन चुके हैं।अभी दो दिन पूर्व आरएसएस के सरसंघ चालक नें भी एक कार्यक्रम में कहा सस्ती शिक्षा व इलाज हर व्यक्ति की जरूरत है,कैंसर मरीज के अलावा उसके परिवार पर भी भयंकर त्रासदी लाता है।सभ्य समाज की आधारशिला – संयुक्त राष्ट्र,विश्व बैंक और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह बार-बार स्वीकार किया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी देश की मानव पूंजी का मूल स्तंभ होते हैं।शिक्षा व्यक्ति को सोचने, निर्णय लेने और समाज में योगदान करने की क्षमता देती है, जबकि स्वास्थ्य उसे उस क्षमता का उपयोग करने योग्य बनाता है। यदि इनमें से कोई एक भी कमजोर हो, तो विकास की पूरी संरचना असंतुलित हो जाती है। भारत में समस्या यह नहीं है कि शिक्षा और स्वास्थ्य की नीतियां नहीं हैं, बल्कि यह है कि उनकी लागत आम नागरिक की आय से कहीं अधिक तेजी से बढ़ी है अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भारत की स्थिति यह हैं क़ि फिनलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देशों में शिक्षा को सार्वजनिक निवेश के रूप में देखा जाता है,जहां उच्च शिक्षा तक लगभग निःशुल्क पहुंच उपलब्ध है।इसके विपरीत भारत में सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता और संख्या मांग के अनुपात में कम है, जिससे निजी क्षेत्र को अत्यधिक विस्तार का अवसर मिला। यह स्थिति सामाजिक असमानता को और गहरा करती है, क्योंकि प्रतिभा के बजाय आर्थिक क्षमता शिक्षा के अवसर तय करने लगती है।यह जानकारी मीडिया के संज्ञान से दी गई है।
साथियों बात अगर हम शिक्षा और स्वास्थ्य विकास नहीं जीवन का प्रश्न हैं, इसको समझने की करें तो, किसी भी देश में शिक्षा और स्वास्थ्य केवल सेवाएं नहीं होतीं,वे नागरिक की गरिमा, अवसर और भविष्य की गारंटी होती हैं। भारत में सस्ती शिक्षा और सस्ता इलाज अब केवल मध्यम वर्ग की मांग नहीं रहे, बल्कि गरीब, निम्न-मध्यम और यहां तक कि स्थिर आय वाले परिवारों के लिए भी जीवन की प्राथमिक जरूरत बन चुके हैं।एक बच्चा यदि पढ़ नहीं पाता, तो उसका भविष्य सीमित हो जाता है। और यदि कोई बीमार पड़ जाए, तो पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में डूब जाता है।महंगी होती शिक्षा: सपनों पर भारी फीस-भारत में शिक्षा को संविधान ने मौलिक अधिकार माना, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अच्छी शिक्षा अब क्षमता से अधिक खर्च मांग रही है।निजी स्कूलों की फीस, किताबें, कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाएं,इन सबने मिलकर शिक्षा को एक दीर्घकालिक आर्थिक दबाव में बदल दिया है।आज एक औसत परिवार अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए कर्ज लेने को मजबूर है। यह स्थिति केवल परिवार की बचत नहीं, बल्कि समाज की समानता को भी कमजोर करती है।
साथियों बात अगर हम स्वास्थ्य सेवा:इलाज या आर्थिक तबाही? इसको समझने की करें तो,भारत में बीमारी केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आर्थिक आपदा बन चुकी है।विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, इलाज पर होने वाला अधिकांश खर्च सीधे परिवार की जेब से जाता है। इसका अर्थ है,एक गंभीर बीमारी पूरे परिवार को वर्षों पीछे धकेल सकती है।सरकारी योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन उनकी पहुंच, क्षमता और भरोसे को लेकर अब भी बड़े सवाल बने हुए हैं।कैंसर: एक व्यक्ति की नहीं, पूरे परिवार की लड़ाई-कैंसर आज भारत में तेजी से बढ़ती बीमारी बन चुका है। बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, तंबाकू, तनाव और देर से जांच,इन सबने मिलकर कैंसर को राष्ट्रीय चुनौती बना दिया है।कैंसर का इलाज लंबा, महंगा और मानसिक रूप से थकाने वाला होता है। कई बार परिवार का कमाने वाला सदस्य बीमार पड़ता है और दूसरा सदस्य देखभाल के लिए नौकरी छोड़ देता है।इस तरह कैंसर एक व्यक्ति की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार का संघर्ष बन जाता है।रोकथाम ही सबसे सस्ता इलाज-अंतरराष्ट्रीय अनुभव साफ बताते हैं,कैंसर की रोकथाम और समय पर जांच इलाज से कहीं अधिक प्रभावी और सस्ती है।नियमितस्क्रीनिंग,जन-जागरूकता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती और जीवनशैली में सुधार से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।भारत को अब इलाज-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर रोकथाम-केंद्रित स्वास्थ्य नीति अपनानी होगी।भारत में स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च दुनिया के कई देशों की तुलना में जेब से सीधे अधिक है। एक गंभीर बीमारी अक्सर केवल रोगी को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक रूप से बीमार कर देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल लाखों लोग केवल इलाज के खर्च के कारण गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। यह तथ्य अपने- आप में बताता है कि सस्ता इलाज केवल स्वास्थ्य नीति का प्रश्न नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा है।कैंसर, एक बीमारी नहीं, एक सामाजिक संकट हैं, पिछले कुछ वर्षों में भारत में कैंसर के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। शहरीकरण, प्रदूषण, असंतुलित आहार, तंबाकू सेवन,तनावपूर्ण जीवन शैली और देर से निदान,ये सभी मिलकर कैंसर को एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। कैंसर का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता; यह परिवार की मानसिक शांति, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक संरचना को गहराई से प्रभावित करता है।कैंसर इलाज की लागत और परिवार पर प्रभावभारत में कैंसर का इलाज अत्यंत महंगा है।कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी की लागत कई परिवारों की सालों की आय के बराबर होती है। इलाज के दौरान परिवार का कोई सदस्य अक्सर काम छोड़ने को मजबूर होता है, जिससे आय और घट जाती है। इस प्रकार कैंसर एक व्यक्ति की बीमारी न रहकर पूरे परिवार की भयंकर सामूहिक त्रासदी बन जाता है।
साथियों बात अगर हम शिक्षा और स्वास्थ्य का सीधा सम्बंध इसको समझने की करें तो,भारत में सस्ती शिक्षा: सपना या सुलभ अधिकार?स्वतंत्रता के समय भारत ने शिक्षा को सामाजिक न्याय का माध्यम माना था। संविधान के अनुच्छेद 21-ए ने शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया,किंतु व्यवहारिक स्तरपर उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा लगातार महंगी होती चली गई। निजी स्कूलों और कॉलेजों की बढ़ती फीस, कोचिंग संस्कृति, और प्रतियोगी परीक्षाओं की लागत ने शिक्षा को एक आर्थिक बोझ में बदल दिया है। आज एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाना कई बार जीवन की सारी बचत और कर्ज पर निर्भर हो जाता है। शिक्षित समाज अधिक स्वास्थ्य- जागरूक होता है।स्वस्थ नागरिक बेहतर शिक्षा और उत्पादकता में योगदान देता है।और जब बीमारी का बोझ कम होता है, तो परिवार शिक्षा, नवाचार और भविष्य पर निवेश कर पाता है।यानें सस्ती शिक्षा और सस्ता इलाज मिलकर एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखते हैं।परिवार पर पड़ता तिहरा असर-जब शिक्षा महंगी होती है, इलाज महंगा होता है और कैंसर जैसी बीमारी दस्तक देती है,तो असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। (1) परिवार की बचत खत्म होती है (2) बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है (3) मानसिक तनाव पीढ़ियों तक असर डालता है,यही कारण है कि ये मुद्दे केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास से जुड़े प्रश्न बन जाते हैं।
साथियों बात अगर हम नीति- निर्माताओं के सामने स्पष्ट संदेश इसको समझने की करें तो,अब समय आ गया है कि(1) शिक्षा को खर्च नहीं, राष्ट्रीय निवेश माना जाए (2) स्वास्थ्य को दया नहीं, अधिकार समझा जाए (3) कैंसर को बीमारी नहीं बल्कि सख़्त नीति आपातकाल की तरह देखा जाए। भारत की वास्तविक शक्ति उसके परिवार हैं, और परिवार तभी मजबूत होंगे, जब शिक्षा सुलभ और इलाज सस्ता होगा।भारत की वैश्विक छवि और आंतरिक सच्चाई भारत विश्वगुरु बनने की बात करता है। लेकिन कोई भी देश तब तक नैतिक नेतृत्व नहीं कर सकता, जब तक उसके नागरिक शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए संघर्षरत हों।सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज और कैंसर पर ठोस रणनीति यही भारत को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय महाशक्ति बनाएगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे क़ि,अब देरी की गुंजाइश नहीं, सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज और कैंसर की प्रभावी रोकथाम ये तीनों मिलकर भारत की मानव- केंद्रित विकास यात्रा को सही दिशा दे सकते हैं। यही वह रास्ता है, जो भारत को केवल आर्थिक महाशक्ति नहीं,बल्कि एक स्वस्थ, शिक्षित और संवेदनशील राष्ट्र बना सकता है। यदि अभी ठोस, वैज्ञानिक और मानवीय रणनीति नहीं अपनाई गई,तो आने वाले वर्षों में इसकी कीमत केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि टूटते परिवारों और बिखरते सपनों में चुकानी पड़ेगी। सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज और कैंसर की प्रभावी रोकथाम बजट 2026 में ही रणनीति दिखने की जरूरत है यही भारत की अगली बड़ी छलांग का आधार है।ऐसी अपेक्षा हम करते हैं

-संकलनकर्ता लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए

यूरिया की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा, 176 बोरी जब्त, दुकान सीज, FIR के आदेश

आगरा (राष्ट्र की परम्परा) जनपद आगरा में उर्वरकों की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी के निर्देशों के क्रम में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार द्वारा बाह तहसील क्षेत्र में ताबड़तोड़ छापेमारी अभियान चलाया गया, जिसमें यूरिया की अवैध जमाखोरी का खुलासा हुआ।
आज उप जिलाधिकारी बाह संतोष कुमार शुक्ला एवं जिला कृषि अधिकारी श्री विनोद कुमार की संयुक्त टीम ने भदरौली क्षेत्र में छापेमारी की। सूचना के आधार पर टीम हनुमान गली, नगरिया वाली रोड, भदरौली स्थित श्यामलाल शमी पुत्र भगवती शर्मा की दुकान पर पहुँची, जहाँ दुकान का शटर बंद पाया गया। ताला खुलवाने पर दुकान के अंदर इफको कंपनी के 176 बैग यूरिया उर्वरक अवैध रूप से संग्रहित मिले।
जांच के दौरान सामने आया कि उक्त यूरिया बैग एग्रीजंक्शन, भदरौली के स्वामी श्री राजेश कुमार के बताए गए। मामले को गंभीर एवं संदिग्ध मानते हुए उर्वरक निरीक्षक गुफरान अहमद द्वारा एक नमूना प्रयोगशाला परीक्षण हेतु लिया गया। वहीं नियमों के उल्लंघन पर संबंधित दुकान को तत्काल सीज कर दिया गया तथा एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसानों को कालाबाजारी से बचाने एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। दोषियों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश के अंतर्गत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई किसानों के हित में जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और कालाबाजारी करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।

शताब्दी समापन पर विराट किसान मेला का डीएम ने किया शुभारंभ

आगरा (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के बाह क्षेत्र स्थित वटेश्वर धाम प्रांगण में भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती एवं जन्म शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर भव्य पारम्परिक विराट किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने फीता काटकर किया। इसके पश्चात उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह एवं ब्लॉक प्रमुख बाह लाल सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान लखनऊ में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किसानों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से देखा और सुना।
किसान मेले में कृषि विभाग सहित विभिन्न विभागों एवं निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए स्टालों का जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी ने अवलोकन किया। उप कृषि निदेशक ने किसानों को उन्नत बीज वितरण, कृषि यंत्रीकरण, सोलर पंप, वन स्टॉप शॉप जैसी योजनाओं की जानकारी दी। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी के प्रयोग तथा पाले से फसल सुरक्षा के उपाय बताए। पशुपालन विभाग द्वारा भी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक विभाग के कलाकारों ने लोकगीत व लोकनृत्य प्रस्तुत किए। वहीं विभिन्न विद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अटल जी के जीवन पर भाषण, कविता एवं निबंध प्रस्तुत किए। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, मेडल एवं जनपद स्तर पर चयनित छात्रों को 5000, 3000 व 2000 रुपये की धनराशि प्रदान की गई।
यह आयोजन न केवल अटल के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना, बल्कि किसानों के लिए कृषि नवाचार और योजनाओं की जानकारी का सशक्त मंच भी साबित हुआ।

महादेव का मार्ग: शास्त्रों में वर्णित अंतःशिव की साधना

🔱 शिव-शक्ति का जागरण: जब चेतना स्वयं महादेव बन जाती है
(शास्त्रोक्त शिव कथा)

“शिव को जानना, स्वयं को जानना है।”
यह वाक्य केवल एक दार्शनिक उद्घोष नहीं, बल्कि सनातन चेतना का शिखर है। शिव कोई दूरस्थ देवता नहीं हैं, वे हमारी चेतना की वह सर्वोच्च अवस्था हैं जहाँ अहंकार विलीन हो जाता है और सत्य प्रकट होता है। शक्ति हमारी इच्छाशक्ति है—वह ऊर्जा, जो विचार को कर्म बनाती है। जब चेतना (शिव) और इच्छा (शक्ति) का संतुलन होता है, तभी मानव महादेव के मार्ग पर अग्रसर होता है।

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एपिसोड 8 में यह कथा उसी बिंदु पर प्रवेश करती है जहाँ साधक बाह्य पूजा से अंतःयात्रा की ओर बढ़ता है—जहाँ शिव मंदिर में नहीं, श्वास-प्रश्वास में प्रकट होते हैं; जहाँ शक्ति केवल वरदान नहीं, साधना बन जाती है।
🌺 अंतःशिव की अनुभूति – शक्ति का समर्पण और शिव का प्राकट्य
पुराणों में वर्णित है कि एक समय ऋषि भृंगी ने कठोर तप आरंभ किया। उनका प्रण था—वे केवल शिव की आराधना करेंगे, किसी और को नहीं। माता पार्वती, जो शक्ति स्वरूपा हैं, यह देख व्यथित हुईं। वे शिव के अर्द्धांगिनी होते हुए भी उपेक्षित थीं। तब शिव मुस्कराए और बोले—
“जहाँ शक्ति का तिरस्कार है, वहाँ शिव अपूर्ण हैं।”
शिव ने अपने शरीर से शक्ति को विलग कर दिया। क्षणभर में शिव निर्जीव हो गए। भृंगी का तप विफल हो गया। तब उन्होंने समझा कि शिव-शक्ति भिन्न नहीं—वे एक ही तत्व के दो आयाम हैं। यह कथा लिंग पुराण और शिव पुराण में शक्ति-समानता का गहन संकेत देती है।
यही संकेत मानव जीवन के लिए भी है। केवल ज्ञान (शिव) और बिना कर्म (शक्ति) निष्फल है, और केवल इच्छा (शक्ति) बिना विवेक (शिव) विनाशकारी। संतुलन ही साधना है।

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🔱 शिव की महिमा: शास्त्रों की दृष्टि में
ऋग्वेद में शिव को रुद्र कहा गया—भय से नहीं, करुणा से युक्त।
यजुर्वेद में उन्हें शिव कहा गया—कल्याणकारी।
केनोपनिषद में शिव ब्रह्म के रूप में प्रकट होते हैं—अदृश्य, पर सर्वव्यापी।
शिव का तांडव सृष्टि का अंत नहीं, बल्कि परिवर्तन है। जैसे जीवन में दुख अंत नहीं, चेतना का द्वार है। शिव का विषपान यह सिखाता है कि जो विष हम भीतर रोक लेते हैं—क्रोध, ईर्ष्या, अहं—उसे कंठ में धारण कर लिया जाए, बाहर न उगला जाए, तो वही नीलकंठ बनाता है।

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🌙 शक्ति की समानता: नारी नहीं, ऊर्जा
देवी शक्ति केवल स्त्री तत्व नहीं, वह वह ऊर्जा है जिससे ब्रह्मांड गतिमान है। देवी भागवत कहता है—
“शिवः शक्त्यायुक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं।”
अर्थात शक्ति के बिना शिव भी सृजन में असमर्थ हैं।
मानव में यह शक्ति संकल्प, साहस और करुणा के रूप में प्रकट होती है। जब संकल्प शिव के विवेक से जुड़ता है, तभी जीवन धर्ममय होता है।
🕉️ कथा का मर्म: भीतर का कैलाश का सार यह है कि कैलाश बाहर नहीं, भीतर है। ध्यान में जब श्वास स्थिर होती है, विचार शांत होते हैं, तब वही शून्य शिव है। और उस शून्य में उठती पहली स्पंदन—वही शक्ति है।
शास्त्र कहते हैं—
“यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे।”
जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है। शिवलिंग कोई पाषाण नहीं, वह सृष्टि का केंद्र है—ऊर्ध्व (आकाश) और आधार (पृथ्वी) का मिलन।

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🌼 मानव जीवन में शिव-मार्ग
समता: शिव समानता के देवता हैं—देव, दानव, मानव सब उनके लिए एक।
वैराग्य: संसार में रहते हुए आसक्ति से मुक्ति।
करुणा: विष को पीकर भी मुस्कराना।
साधना: बाह्य आडंबर नहीं, अंतःशुद्धि।
जो व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को अनुशासन देता है और चेतना को जाग्रत करता है, वही महादेव का पथिक है।

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🔔जब हम कहते हैं “शिव को जानना, स्वयं को जानना है”, तो यह आत्म-परिचय की घोषणा है। शिव कोई मूर्ति नहीं, वह मौन है। शक्ति कोई शोर नहीं, वह संकल्प है। और जब मौन में संकल्प स्थिर हो जाए—वहीं महादेव प्रकट होते हैं।
एपिसोड 8 यहीं समाप्त नहीं होता, बल्कि साधक के भीतर आरंभ होता है—जहाँ हर श्वास सोऽहम् बन जाती है।

ग्रह-नक्षत्रों के संकेत, जानिए मेष से मीन तक आज का संपूर्ण भविष्यफल

दैनिक राशिफल 26 दिसंबर 2025 : ग्रह-नक्षत्रों के संकेत, जानिए मेष से मीन तक आज का संपूर्ण भविष्यफल

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की स्थिति हर दिन हमारे जीवन को नए संकेत देती है। 26 दिसंबर 2025, शुक्रवार का दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति, सम्मान और सफलता लेकर आया है, तो कुछ राशियों के लिए संयम, सतर्कता और विवेक से निर्णय लेने का संदेश दे रहा है।
यह राशिफल सामान्य ग्रह-गोचर पर आधारित है, जिसे पाठकों के लिए सरल, स्पष्ट और आकर्षक भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

मेष राशि (Aries ♈)
अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और लंबी दूरी की यात्रा के योग बन रहे हैं।
व्यवसाय/कार्य: सरकारी व निजी क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए शुभ दिन।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का समर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बन सकते हैं।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: भगवान हनुमान

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वृष राशि (Taurus ♉)
अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज धैर्य से काम लें। पारिवारिक मामलों में संतुलन जरूरी है।
व्यवसाय: निवेश सोच-समझकर करें।
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा।
कला: गायन व लेखन में सराहना।
राजनीति: वाणी पर नियंत्रण रखें।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकते हैं।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी

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मिथुन राशि (Gemini ♊)
अक्षर: का, की, कु, घ, छ, के, को, ह
आज संचार और संपर्क से लाभ मिलेगा।
कार्य: मीडिया, लेखन, मार्केटिंग में सफलता।
शिक्षा: नई जानकारी से लाभ।
कला: अभिनय व मंचीय कला में अवसर।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन के योग।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान गणेश

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कर्क राशि (Cancer ♋)
अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
कार्य: ऑफिस में जिम्मेदारी बढ़ेगी।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित करना होगा।
कला: भावनात्मक रचनाएँ।
राजनीति: छवि मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: क्रीम
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: भगवान शिव
सिंह राशि (Leo ♌)
अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आज मान-सम्मान बढ़ेगा।
कार्य: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में सफलता।
कला: रंगमंच व कला में प्रशंसा।
राजनीति: लोकप्रियता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभकारी दिन।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव

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कन्या राशि (Virgo ♍)
अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
आज योजनाबद्ध तरीके से काम करें।
कार्य: प्रशासनिक कार्यों में सफलता।
शिक्षा: गणित व विज्ञान में लाभ।
कला: सूक्ष्म कला में रुचि।
राजनीति: रणनीति सफल होगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता रहेगी।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: मां सरस्वती
तुला राशि (Libra ♎)
अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
संतुलन आज आपकी ताकत बनेगा।
कार्य: साझेदारी में लाभ।
शिक्षा: कला विषयों में सफलता।
कला: डिजाइन व संगीत में उन्नति।
राजनीति: समझौते लाभकारी।
आर्थिक स्थिति: आय में सुधार।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: मां दुर्गा

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वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
आज गोपनीय योजनाएं सफल होंगी।
कार्य: रिसर्च व गुप्त कार्यों में सफलता।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
कला: रहस्यमयी लेखन।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: अचानक लाभ।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान भैरव
धनु राशि (Sagittarius ♐)
अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा
यात्रा और विस्तार का दिन।
कार्य: विदेश या दूरस्थ कार्य लाभकारी।
शिक्षा: उच्च अध्ययन में सफलता।
कला: दर्शन व लेखन।
राजनीति: वैचारिक प्रभाव।
आर्थिक स्थिति: शुभ।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान विष्णु

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मकर राशि (Capricorn ♑)
अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, पर सफलता मिलेगी।
कार्य: प्रशासनिक व प्रबंधन कार्यों में उन्नति।
शिक्षा: अनुशासन से लाभ।
कला: गंभीर रचनाएँ।
राजनीति: पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़े, संयम रखें।
शुभ रंग: काला / आसमानी
शुभ अंक: 10
पूज्य देवता: भगवान शनि
कुंभ राशि (Aquarius ♒)
अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो
नई सोच से सफलता मिलेगी।
कार्य: तकनीक व नवाचार में लाभ।
शिक्षा: रिसर्च छात्रों के लिए शुभ।
कला: आधुनिक कला में रुचि।
राजनीति: सुधारवादी छवि।
आर्थिक स्थिति: संतोषजनक।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 11
पूज्य देवता: भगवान शिव

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मीन राशि (Pisces ♓)
अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा।
कार्य: सेवा व परामर्श से लाभ।
शिक्षा: साहित्य व दर्शन में सफलता।
कला: संगीत व चित्रकला में उन्नति।
राजनीति: सौम्य प्रभाव।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 12
पूज्य देवता: भगवान विष्णु

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नोट:यह ज्योतिषीय विश्लेषण सामान्य ग्रह-गोचर पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष की प्रमाणिकता का दावा नहीं करती। कृपया अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

अंक राशिफल 26 दिसंबर 2025: आज का मूलांक भविष्यफल

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत

अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार व्यक्ति के जीवन पर उसकी जन्मतिथि का गहरा प्रभाव पड़ता है। जन्म तिथि के अंकों के योग से निकलने वाला मूलांक न केवल स्वभाव, बल्कि रोज़मर्रा के निर्णय, सफलता, स्वास्थ्य, धन और संबंधों को भी प्रभावित करता है।
26 दिसंबर 2025 का दिन मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए क्या संकेत दे रहा है, आइए विस्तार से जानते हैं।
मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
आज का दिन: आत्मविश्वास और नेतृत्व से भरा
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस में आपकी नेतृत्व क्षमता उभरकर आएगी। अधिकारी वर्ग आपके निर्णयों से प्रभावित होगा। बिज़नेस में नई डील के योग हैं।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को शुभ समाचार मिल सकता है।
कला/संगीत: रचनात्मक कार्यों में पहचान मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, पदोन्नति या नई जिम्मेदारी संभव।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बन सकते हैं।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: भगवान सूर्य

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मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
आज का दिन: बदलाव और नई शुरुआत का संकेत
कार्य/व्यवसाय: पार्टनरशिप में लाभ, नई योजना पर काम शुरू हो सकता है।
शिक्षा: मन एकाग्र रहेगा, पढ़ाई में सुधार होगा।
कला/संगीत: लेखन, गायन से जुड़े लोगों को सम्मान मिल सकता है।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: माता पार्वती / चंद्र देव
मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
आज का दिन: धन और स्वास्थ्य में मजबूती
कार्य/व्यवसाय: उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: गुरु का मार्गदर्शन लाभ देगा।
कला/संगीत: मंचीय प्रदर्शन का अवसर।
राजनीति/प्रशासन: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन के योग।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान बृहस्पति

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मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
आज का दिन: रिश्तों और योजनाओं का दिन
कार्य/व्यवसाय: टीमवर्क से सफलता मिलेगी।
शिक्षा: टेक्निकल छात्रों के लिए दिन उत्तम।
कला: डिजाइन, आर्किटेक्चर से जुड़े लोगों को लाभ।
प्रशासन: निर्णय क्षमता मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: भगवान गणेश

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मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
आज का दिन: संतुलन बनाए रखना जरूरी
कार्य/व्यवसाय: मल्टीटास्किंग से बचें।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, अनुशासन जरूरी।
कला/मीडिया: नए आइडिया सफलता देंगे।
राजनीति: बयानबाजी से बचें।
आर्थिक स्थिति: अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
आज का दिन: आत्मदेखभाल का संकेत
कार्य/व्यवसाय: दबाव महसूस हो सकता है।
शिक्षा: आराम के बाद पढ़ाई करें।
कला/संगीत: सौंदर्य और फैशन से जुड़े लोग चमकेंगे।
राजनीति: छवि सुधारने का अवसर।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी

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मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
आज का दिन: सावधानी और समझदारी जरूरी
कार्य/व्यवसाय: रिस्क लेने से बचें।
शिक्षा: रिसर्च कार्यों में सफलता।
कला: आध्यात्मिक लेखन में रुचि बढ़ेगी।
प्रशासन: गोपनीयता रखें।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव
मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
आज का दिन: मेहनत का पूरा फल
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस में उत्पादकता उच्च।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता।
राजनीति/प्रशासन: प्रभावशाली निर्णय।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: भगवान शनि

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मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)

आज का दिन: साहस और सफलता का योग
कार्य/व्यवसाय: बड़े निर्णय लेने का दिन।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा में सफलता।
कला: अभिनय व खेल क्षेत्र में लाभ।
राजनीति: नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: निवेश शुभ रहेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान हनुमान

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डिस्क्लेमर- यह अंक राशिफल अंक ज्योतिष पर आधारित सामान्य भविष्यवाणी है। राष्ट्र की परम्परा इस अंक ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करती। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

26 दिसंबर: वे अमर विभूतियाँ, जिनका निधन इतिहास की चेतना बन गया

डॉ. मनमोहन सिंह (2024) – मौन अर्थशास्त्री, जिनकी नीतियाँ भारत की रीढ़ बनीं
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को गाह (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत) में हुआ। वे भारत के ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने शांति, संयम और विद्वत्ता से देश का नेतृत्व किया। ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे विश्वविख्यात संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को 1991 के आर्थिक सुधारों के माध्यम से नई दिशा दी। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण उनके दूरदर्शी निर्णय थे, जिनसे भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर स्थापित हुआ। राज्यसभा सदस्य, वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देशहित में दीर्घकालिक नीतियाँ बनाईं। 26 दिसंबर 2024 को उनका निधन भारत के बौद्धिक और नीतिगत इतिहास में अपूरणीय क्षति माना गया।

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पंकज सिंह (2015) – कविता में जनसंघर्ष की सशक्त आवाज़
पंकज सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे समकालीन हिंदी कविता के उन रचनाकारों में थे जिन्होंने आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक अन्याय को शब्द दिए। उनकी कविताओं में सत्ता के प्रति प्रश्न, लोकतांत्रिक चेतना और मानवीय संवेदनाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। वे साहित्य को केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि प्रतिरोध का माध्यम मानते थे। उनका लेखन युवाओं और सामाजिक आंदोलनों के लिए प्रेरणा बना। 26 दिसंबर 2015 को उनका निधन हिंदी साहित्य जगत के लिए गहरी क्षति था। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने का जो योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
एस. बंगरप्पा (2011) – कर्नाटक की राजनीति का प्रभावशाली चेहरा
एस. बंगरप्पा का जन्म कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के 12वें मुख्यमंत्री रहे। उनका राजनीतिक जीवन सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और पिछड़े वर्गों के उत्थान को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया। वे केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 26 दिसंबर 2011 को उनके निधन से कर्नाटक की राजनीति में एक अनुभवी नेतृत्व का अंत हो गया।

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शंकरदयाल शर्मा (1999) – संवैधानिक मर्यादाओं के सजग प्रहरी
शंकरदयाल शर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के भोपाल में हुआ था। वे भारत के नौवें राष्ट्रपति रहे और इससे पूर्व उपराष्ट्रपति तथा कई राज्यों के राज्यपाल भी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े शर्मा जी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने संसद और लोकतंत्र की गरिमा को सर्वोच्च रखा। 26 दिसंबर 1999 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी निष्ठा और सिद्धांत आज भी भारतीय लोकतंत्र के मार्गदर्शक हैं।

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राम स्वरूप (1998) – वैदिक चिंतन के आधुनिक व्याख्याकार
राम स्वरूप का जन्म उत्तर भारत में हुआ। वे वैदिक परंपरा के प्रखर बुद्धिजीवी, दार्शनिक और लेखक थे। उन्होंने भारतीय दर्शन, संस्कृति और धर्म पर गहन लेखन किया। पश्चिमी दृष्टिकोण के समक्ष भारतीय सभ्यता के बौद्धिक पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करना उनका प्रमुख योगदान रहा। उनकी पुस्तकें आज भी शोधार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ हैं। 26 दिसंबर 1998 को उनका निधन भारतीय बौद्धिक परंपरा के लिए एक गहरी क्षति माना गया।
के. शंकर पिल्लई (1989) – कार्टून में लोकतंत्र की आवाज़
के. शंकर पिल्लई, जिन्हें ‘शंकर’ के नाम से जाना जाता है, का जन्म केरल में हुआ। वे भारत के सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक कार्टूनिस्ट थे। उनके कार्टून सत्ता और समाज पर तीखा व्यंग्य करते थे, फिर भी लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखते थे। ‘शंकर’s वीकली’ के माध्यम से उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नया आयाम दिया। 26 दिसंबर 1989 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके बनाए पात्र आज भी भारतीय पत्रकारिता की अमूल्य धरोहर हैं।

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बीना दास (1986) – नारी शक्ति और क्रांतिकारी साहस की प्रतीक
बीना दास का जन्म कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ। वे भारत की साहसी महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उन्होंने निर्भीक होकर संघर्ष किया और राष्ट्रभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन महिलाओं के साहस और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है। 26 दिसंबर 1986 को उनका निधन हुआ, पर उनका त्याग आज भी प्रेरणा देता है।
यशपाल (1976) – साहित्य में क्रांति और यथार्थ के रचनाकार
यशपाल का जन्म पंजाब प्रांत में हुआ था। वे हिंदी के महान कथाकार, उपन्यासकार और निबंध लेखक थे। ‘दिव्या’, ‘झूठा सच’ जैसे उपन्यासों में उन्होंने समाज की जटिलताओं और राजनीतिक यथार्थ को उकेरा। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े यशपाल जी ने साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। 26 दिसंबर 1976 को उनका निधन हिंदी साहित्य के लिए युगांतकारी क्षण था।

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गोपी चंद भार्गव (1966) – गांधीवादी विचारों के सच्चे प्रतिनिधि
गोपी चंद भार्गव का जन्म पंजाब में हुआ। वे स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी नेता और पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री रहे। ‘गांधी स्मारक निधि’ के प्रथम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने गांधीजी के विचारों को आगे बढ़ाया। सादगी, सेवा और राष्ट्रनिर्माण उनका मूल मंत्र था। 26 दिसंबर 1966 को उनका निधन हुआ।
भूपेंद्रनाथ दत्त (1961) – क्रांति और विचार का संगम
भूपेंद्रनाथ दत्त का जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ। वे प्रसिद्ध क्रांतिकारी, लेखक और समाजशास्त्री थे तथा शहीद भगत सिंह के चाचा थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के साथ सामाजिक चिंतन को भी समृद्ध किया। 26 दिसंबर 1961 को उनका निधन हुआ।

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हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो (1831) – भारतीय नवजागरण के अग्रदूत
डेरोजियो का जन्म कोलकाता में हुआ। वे कवि, शिक्षक और समाज सुधारक थे। ‘यंग बंगाल मूवमेंट’ के माध्यम से उन्होंने युवाओं में वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र विचार को बढ़ावा दिया। 26 दिसंबर 1831 को उनका निधन हुआ।

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बाबर (1530) – मुगल साम्राज्य का संस्थापक
बाबर का जन्म फरगना (वर्तमान उज्बेकिस्तान) में हुआ। उन्होंने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी। युद्ध कौशल, प्रशासनिक दृष्टि और सांस्कृतिक योगदान के लिए वे जाने जाते हैं। 26 दिसंबर 1530 को उनका निधन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त करता है।

इतिहास के पन्नों में अमर 26 दिसंबर: जिन जन्मों ने राष्ट्र, समाज और संस्कृति को दिशा दी

इतिहास केवल तिथियों का संकलन नहीं होता, बल्कि वह उन व्यक्तित्वों की स्मृति है जिनके विचार, त्याग और कर्म आज भी मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। 26 दिसंबर ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक सेवा, साहित्य, अध्यात्म और वैश्विक संस्कृति को दिशा देने वाले अनेक महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया। आइए इस ऐतिहासिक दिन पर जन्मे उन महापुरुषों और विभूतियों के जीवन, जन्मस्थान और राष्ट्रहित में उनके योगदान पर विस्तार से दृष्टि डालते हैं।

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अमर शहीद ऊधम सिंह (1899) – क्रांति और बलिदान का प्रतीक
अमर शहीद ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को सुनाम, जिला संगरूर, पंजाब (भारत) में हुआ। जलियांवाला बाग हत्याकांड के साक्षी रहे ऊधम सिंह ने 1940 में लंदन जाकर जनरल डायर के समर्थक माइकल ओ’डायर को मारकर निर्दोष भारतीयों की हत्या का बदला लिया। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी चेतना का अमर प्रतीक बन गया। राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उनका त्याग आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।

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डॉ. प्रकाश आम्टे (1948) – मानवता के सच्चे सेवक
26 दिसंबर 1948 को जन्मे डॉ. प्रकाश आम्टे का जन्म महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे प्रसिद्ध समाजसेवी बाबा आम्टे के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. मंदाकिनी आम्टे के साथ मिलकर माडिया गोंड जनजाति के लिए हेमलकसा में स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया। नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में मानव सेवा को नई पहचान देने वाले डॉ. आम्टे को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।

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माबेला अरोल (1935) – सामाजिक चेतना की सशक्त आवाज
1935 में जन्मी माबेला अरोल एक समर्पित भारतीय समाजसेवी महिला थीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए निरंतर कार्य किया। उनका जीवन समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए प्रेरणास्रोत रहा। सामाजिक जागरूकता अभियानों के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।

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विद्यानंद जी महाराज (1935) – आध्यात्मिक चेतना के मार्गदर्शक
26 दिसंबर 1935 को जन्मे विद्यानंद जी महाराज भारत के प्रसिद्ध संत-महात्माओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म भारत में हुआ। उन्होंने आध्यात्मिक साधना, नैतिक जीवन और आत्मज्ञान के माध्यम से समाज को सत्य और संयम का मार्ग दिखाया। उनके प्रवचन और विचार आज भी आध्यात्मिक जगत में विशेष स्थान रखते हैं।

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थॉमस ग्रे (1716) – संवेदनाओं के कवि
26 दिसंबर 1716 को जन्मे थॉमस ग्रे का जन्म लंदन, इंग्लैंड में हुआ। वे 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवि थे। उनकी प्रसिद्ध कृति “Elegy Written in a Country Churchyard” आज भी विश्व साहित्य में अमर मानी जाती है। मानवीय भावनाओं, मृत्यु और जीवन के दर्शन को सरल शब्दों में प्रस्तुत करने के कारण वे साहित्य जगत में विशेष सम्मान रखते हैं।
गुरु गोविंद सिंह जी (1666) – साहस, धर्म और राष्ट्ररक्षा के प्रतीक
26 दिसंबर 1666 को जन्मे सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब, जिला पटना, बिहार (भारत) में हुआ। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर सिख समाज को संगठित किया और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया। धर्म, साहस और बलिदान की उनकी शिक्षाएं भारत की सांस्कृतिक आत्मा को सशक्त बनाती हैं।

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तारक मेहता (1929) – गुजराती साहित्य का उज्ज्वल सितारा
26 दिसंबर 1929 को जन्मे तारक मेहता का जन्म गुजरात, भारत में हुआ। वे एक प्रतिष्ठित गुजराती साहित्यकार थे। उनके लेखन में सामाजिक व्यंग्य, नैतिक मूल्य और मानवीय संवेदनाएं प्रमुख रहीं। उनके नाम पर आधारित प्रसिद्ध धारावाहिक ने भारतीय समाज को हास्य के माध्यम से सामाजिक संदेश दिए।

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निष्कर्ष
26 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास, बलिदान, सेवा, साहित्य और अध्यात्म का संगम है। इस दिन जन्मे महान व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दी।

एक दिन, अनेक घटनाएँ: 26 दिसंबर का महत्व

26 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में दर्ज वे घटनाएँ जिन्होंने दुनिया की दिशा बदल दी

इतिहास केवल तारीखों का संकलन नहीं होता, बल्कि उन घटनाओं की जीवंत स्मृतियाँ होती हैं जिन्होंने समय, समाज और सभ्यता को नई दिशा दी। 26 दिसंबर भी ऐसी ही एक तारीख है, जिसने राजनीति, विज्ञान, खेल, प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक कूटनीति के कई निर्णायक क्षण देखे। आइए, इतिहास के इन्हीं महत्वपूर्ण अध्यायों पर विस्तार से दृष्टि डालते हैं।

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1748 – फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच दक्षिणी हॉलैंड को लेकर समझौता
26 दिसंबर 1748 को फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच दक्षिणी हॉलैंड (वर्तमान बेल्जियम का क्षेत्र) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता यूरोप में शक्ति संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना गया। उस समय यूरोप निरंतर युद्धों से जूझ रहा था और यह संधि राजनीतिक स्थिरता की एक कोशिश थी, जिसने भविष्य की कूटनीतिक रणनीतियों की नींव रखी।

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1904 – दिल्ली से मुंबई तक पहली क्रॉस कंट्री मोटरकार रैली
भारत में मोटर परिवहन के इतिहास में 26 दिसंबर 1904 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इस दिन दिल्ली से मुंबई के बीच देश की पहली क्रॉस कंट्री मोटरकार रैली का उद्घाटन हुआ। यह रैली न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक थी, बल्कि भारत में आधुनिक यातायात व्यवस्था की शुरुआत का संकेत भी बनी।
1925 – तुर्की में ग्रेगोरियन कैलेंडर और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना
26 दिसंबर 1925 को दो ऐतिहासिक घटनाएँ घटीं। तुर्की ने इस दिन आधिकारिक रूप से ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया, जिससे वह आधुनिक विश्व व्यवस्था के साथ जुड़ सका। इसी दिन भारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर देश की राजनीति और श्रमिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1977 – सोवियत संघ का परमाणु परीक्षण शीत युद्ध के दौर में 26 दिसंबर 1977 को सोवियत संघ ने पूर्वी कजाख क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया। यह परीक्षण वैश्विक राजनीति में शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक था और परमाणु हथियारों की दौड़ को और तेज करने वाला कदम साबित हुआ। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया।

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1978 – इंदिरा गांधी की जेल से रिहाई
भारत के राजनीतिक इतिहास में 26 दिसंबर 1978 एक महत्वपूर्ण दिन रहा, जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जेल से रिहा किया गया। आपातकाल के बाद का यह दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए निर्णायक था। उनकी रिहाई ने भारतीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया और जनमानस में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
1997 – बीजू जनता दल (बीजद) की स्थापना
26 दिसंबर 1997 को ओडिशा की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बीजू जनता दल (BJD) की स्थापना हुई। वरिष्ठ नेता बीजू पटनायक के पुत्र नवीन पटनायक द्वारा गठित इस पार्टी ने राज्य की राजनीति में नया अध्याय जोड़ा। आगे चलकर बीजद ओडिशा की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी।
2002 – कांगो में पुनः संघर्ष की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 26 दिसंबर 2002 को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में पुनः संघर्ष शुरू होने की सूचना दी। यह अफ्रीकी महाद्वीप में चल रहे राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट की गंभीरता को दर्शाता है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हस्तक्षेप के लिए विवश किया।

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2003 – ईरान के बाम शहर में विनाशकारी भूकंप
26 दिसंबर 2003 को ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर बाम में रिक्टर पैमाने पर 6.6 तीव्रता का भूकंप आया। इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों लोगों की जान ले ली और ऐतिहासिक इमारतों को खंडहर में बदल दिया। यह भूकंप मानव जीवन की नश्वरता का करुण स्मरण बन गया।
2004 – सुनामी: जब समंदर बना काल
26 दिसंबर 2004 को आए 9.3 तीव्रता के भीषण भूकंप ने महासागर में विनाशकारी सुनामी को जन्म दिया। भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मालदीव सहित कई देशों में लगभग 2.3 लाख लोगों की मौत हुई। यह त्रासदी मानव इतिहास की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में गिनी जाती है।

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2006 – शेन वॉर्न का ऐतिहासिक कीर्तिमान
क्रिकेट प्रेमियों के लिए 26 दिसंबर 2006 यादगार रहा, जब ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ शेन वॉर्न ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में 700 विकेट पूरे किए। यह उपलब्धि उन्हें क्रिकेट इतिहास के महानतम गेंदबाज़ों में शामिल करती है।
2007 – तुर्की के इराकी कुर्द ठिकानों पर हमले
26 दिसंबर 2007 को तुर्की के विमानों ने इराकी कुर्द ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह घटना मध्य-पूर्व की जटिल राजनीति और सीमा पार संघर्षों की गंभीरता को दर्शाती है, जिसने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाया।
2008 – शतरंज में तानिया की सफलता
इस दिन शतरंज जगत में तानिया ने कृतिका को हराकर संयुक्त शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि भारतीय महिला शतरंज के बढ़ते प्रभाव और प्रतिभा का प्रतीक बनी।
2012 – दुनिया का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेलमार्ग
26 दिसंबर 2012 को चीन ने बीजिंग से ग्वांगझू तक बने दुनिया के सबसे लंबे हाई-स्पीड रेल मार्ग का उद्घाटन किया। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है और परिवहन के क्षेत्र में चीन की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।

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निष्कर्ष
26 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास की वह दहलीज है जहाँ से राजनीति, विज्ञान, खेल और मानव त्रासदियों की कई कहानियाँ जुड़ी हैं। यह दिन हमें अतीत से सीखने और भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।