Thursday, June 25, 2026
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पंचायत मतदाता सूची में जीवित मतदाताओं को किया साजिश के तहत विलोपित – राकेश सिंह

राष्ट्रीय दिव्यांग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने लगाया मतदाता सूचियों में धांधली का आरोप

उपजिलाधिकारी कार्यालय पर जाकर पत्रक सौंप किया सूची में सुधार व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। पंचायत चुनाव के लिए प्रकाशित मतदाता सूचियों में गम्भीर रूप से धांधली कर जीवित मतदाताओं को भी विलोपित कर दिया गया है, कहीं कहीं मृतक मतदाताओं के नाम पुरानी सूची से हटाए नहीं गए हैं। उक्त आरोप लगाते हुए दिव्यांग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि इस तरह के मतदाता सूची से निष्पक्ष चुनाव सम्भव नहीं है। इसको लेकर आज दिव्यांग एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने उपजिलाधिकारी कार्यालय व निर्वाचन कार्यालय पर जाकर पत्रक सौंप कर लापरवाही बरतने वाले बीएलओ को बर्खास्त करने की मांग करते हुए उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग किया। राकेश सिंह ने कहा कि विकास खण्ड के बड़हरा ग्राम पंचायत के मतदाता सूची में जीवित 94 लोगों का नाम विलोपित कर दिया गया है जबकि कई विवाहित लड़कियों व मृत्यु लोगों के नाम सूची में मौजूद हैं। अगर इसमें तत्काल सुधार नहीं किया गया तो दिव्यांग एकता मंच के कार्यकर्ता आंदोलन करने को बाध्य होंगे। पत्रक सौंपते समय जिलाध्यक्ष अजय कुमार, उपेन्द्र शर्मा, अजय यादव, सत्येन्द्र यादव, सुनील कुमार, सुरेन्द्र यादव, बृजेश चौहान, रामअशीष, छेदी प्रसाद, भागचंद प्रसाद, राजनाथ गौंड़,शिवसागर ,गुड्डू शर्मा,गिरीशचंद्र, गिरिजावती देवी,नरसिंह चौहान आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।

इटही गांव निवासी गुड़गांव में कार्यरत गार्ड की सड़क हादसे में मौतशव गांव पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

हरियाणा के गुड़गांव में एक प्राइवेट कंपनी में सुरक्षा गार्ड के पद पर कार्यरत ग्राम इटही निवासी 48 वर्षीय अधेड़ की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। सोमवार को जब उनका शव गांव स्थित आवास पर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम इटही पन्द्ह निवासी धीरेन्द्र यादव गुड़गांव की एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे। बीते 26 दिसंबर की रात लगभग 8:30 बजे ड्यूटी समाप्त होने के बाद वे साइकिल से अपने आवास लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में सामने से आ रहे एक ई-रिक्शा ने उन्हें टक्कर मार दी।टक्कर लगने से वे अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराए और गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद आसपास के लोगों की मदद से उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान अगले दिन सुबह उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव सोमवार को गांव लाया गया।
मृतक धीरेन्द्र यादव, सेवानिवृत्त सैनिक शिवजन्म यादव के पुत्र थे। वे तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई का नाम वीरेंद्र यादव तथा छोटे भाई का नाम देवेंद्र यादव है। मृतक अपने पीछे पत्नी, 21 वर्षीय पुत्री और 19 वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। शव पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों व शुभचिंतकों ने परिजनों को ढांढस बंधाया।

SPICE-1000 बम से लेकर पिनाका और MRSAM तक: भारत करेगा 79,000 करोड़ की बड़ी रक्षा खरीद, तीनों सेनाओं की ताकत होगी दोगुनी

भारत अपनी सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार, 29 दिसंबर 2025, को हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की अहम बैठक में करीब 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इस बैठक में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और थलसेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुख शामिल रहे।

इन मंजूरियों के तहत पुराने हथियारों का आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक हथियारों की नई खरीद और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का विकास किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य तीनों सेनाओं की युद्ध क्षमता, निगरानी और जवाबी कार्रवाई की ताकत को और मजबूत करना है।

भारतीय सेना और वायुसेना की बढ़ेगी मारक क्षमता

DAC ने भारतीय सेना के लिए आर्टिलरी रेजिमेंट में इस्तेमाल होने वाले लॉइटर म्यूनिशन सिस्टम, लो-लेवल लाइट वेट रडार, MRSAM मिसाइलें, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MRLS) के लिए लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट गोला-बारूद और इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम Mk-II की खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी है।

वहीं, भारतीय वायुसेना के लिए ऑटोमैटिक टेक-ऑफ और लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, एस्ट्रा Mk-II एयर-टू-एयर मिसाइल, फुल मिशन सिमुलेटर और SPICE-1000 लॉन्ग-रेंज गाइडेंस किट की खरीद को भी मंजूरी मिली है।

T-90 टैंक और MI-17 हेलीकॉप्टर होंगे आधुनिक

बैठक में T-90 टैंकों और MI-17 हेलीकॉप्टरों के मॉडर्नाइजेशन को भी हरी झंडी दी गई। डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (DPSU) के जरिए करीब 200 T-90 टैंकों को स्वदेशी तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा, जिससे उनकी मारक क्षमता और सर्वाइवल बढ़ेगी।

इसके साथ ही MI-17 हेलीकॉप्टरों का मिड-लाइफ अपग्रेड किया जाएगा, जिससे उनकी ऑपरेशनल रेडीनेस और मिशन क्षमता में इजाफा होगा।
नौसेना और वायुसेना को मिलेगी MRSAM की ताकत
भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इससे भारत की हवाई और समुद्री सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।

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इसके अलावा, भारत इजरायल से SPICE-1000 प्रिसिजन-गाइडेड बम खरीदेगा, जो अत्यंत सटीकता के साथ लंबी दूरी से लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं।

पिनाका रॉकेट सिस्टम से बढ़ेगी तोपखाने की ताकत

भारतीय सेना के तोपखाने को और घातक बनाने के लिए 20 किलोमीटर रेंज वाली गाइडेड पिनाका रॉकेट्स के विकास को भी मंजूरी दी गई है। खास बात यह है कि इन रॉकेट्स को 45 किमी और 80 किमी रेंज वाले पिनाका लॉन्चर्स से भी दागा जा सकेगा।

पिछले अभियानों में पिनाका रॉकेट सिस्टम की प्रभावशीलता सामने आ चुकी है, और अब इसके उन्नत संस्करण से भारत की सीमा पार जवाबी क्षमता और मजबूत होगी।

भारत की यह बड़ी रक्षा खरीद न सिर्फ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी देश की स्थिति को और सुदृढ़ करेगी।

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कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद: ‘त्वरित सीमा बैठक’ का प्रस्ताव, सुलह के बीच ट्रंप ने लिया श्रेय

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच कई दिनों तक चली सीमा झड़प के बाद हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं। इसी क्रम में कंबोडिया ने थाईलैंड को एक ‘त्वरित सीमा बैठक’ (Rapid Border Meeting) का प्रस्ताव भेजा है, ताकि दोनों देशों के बीच शांति और सीमांकन प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा सके।

कंबोडिया के सीमा मामलों के राज्य सचिवालय ने सोमवार, 29 दिसंबर 2025, को एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें बताया गया कि कंबोडिया ने थाईलैंड को एक कूटनीतिक नोट भेजकर जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में सिएम रीप प्रांत में कंबोडिया-थाईलैंड संयुक्त सीमा आयोग (Joint Boundary Commission) की बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।

इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों की सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए संयुक्त सर्वे और सीमांकन कार्य को पुनः प्रारंभ करने पर चर्चा करना है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक थाईलैंड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या प्रक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप ने लिया सुलह का श्रेय

इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बार फिर मध्यस्थता का श्रेय लिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शुरू हुई लड़ाई अब रुक जाएगी और दोनों देश शांति से रहने पर सहमत हो गए हैं।

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ट्रंप ने लिखा, “मैं दोनों महान नेताओं को इस तेज और सही नतीजे पर पहुंचने के लिए बधाई देता हूं। यह फैसला तेज और निर्णायक था, जैसा ऐसे मामलों में होना चाहिए।”

संयुक्त राष्ट्र (UN) की तुलना अमेरिका से करते हुए ट्रंप ने कहा कि पिछले महीनों में अमेरिका ने कई युद्ध और संघर्ष सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “शायद अमेरिका ही अब असली संयुक्त राष्ट्र बन गया है”, जबकि यूएन को वैश्विक शांति में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कुल मिलाकर, कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद में कूटनीतिक पहल और अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी के बीच आने वाले हफ्तों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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गोरखपुर में नो हेलमेट, नो फ्यूल विशेष अभियान शुरू सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति (SCCORS) की भावना के अनुरूप सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और जनहित में प्रभावी कदम उठाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा “नो हेलमेट, नो फ्यूल ” विशेष अभियान पुनः संचालित किया जा रहा है।
17 जनवरी 2026 तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह अभियान जिलाधिकारी के नेतृत्व में विधिक मानकों के भीतर प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व यह अभियान 01 सितम्बर 2025 से 30 सितम्बर 2025 तक सफलतापूर्वक संचालित किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। उस दौरान दोपहिया वाहन चालकों एवं पिलियन सवारों द्वारा हेलमेट के प्रयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से इस अभियान को पुनः लागू किया गया है।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद की डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमिटी (DRSC) के माध्यम से इस अभियान को समन्वित रूप से संचालित किया जाएगा। इसके तहत परिवहन विभाग एवं पुलिस विभाग के बीच घनिष्ठ समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। वहीं, खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से जनपद के सभी पेट्रोल पम्प संचालकों को आवश्यक निर्देशों का संप्रेषण किया जाएगा तथा उनके अनुपालन की नियमित निगरानी की जाएगी। संबंधित तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी एस) और जनसंपर्क तंत्र के सहयोग से आम जनमानस को अभियान के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संभागीय परिवहन अधिकारी, यातायात पुलिस के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने तथा सड़क सुरक्षा नियमों के सख्त पालन पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में संभागीय परिवहन अधिकारी द्वारा सुझाव दिया गया कि नौसड़ चौराहे के आसपास एलईडी डिस्प्ले लगाए जाएं, जिनके माध्यम से आने-जाने वाले वाहन चालकों एवं आम जनता को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब अधिक संख्या में दोपहिया वाहन चालक हेलमेट का प्रयोग कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। जो लोग अभी भी हेलमेट का प्रयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें पहले हिदायत दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने पर विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
इसके साथ ही चार पहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने तथा कोहरे के मौसम में रिफ्लेक्टर का उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की गई, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। प्रशासन ने सभी विभागों, तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पम्प संचालकों से पूर्ण सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा सामूहिक प्रयास है। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन कर ही हम दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं और अनमोल जीवन की रक्षा कर सकते हैं।

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर उपजिलाधिकारी से शिकायत, नई सूची जारी करने की मांग

सिकन्दरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा) ग्राम पंचायत सिसोटार/बोटर क्षेत्र की मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्राम सभा सिसोटार के क्षेत्र पंचायत सदस्य नीरज राय द्वारा उपजिलाधिकारी सिकन्दरपुर को शिकायती पत्र सौंपकर सुधार की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नई जारी की गई वोटर लिस्ट में कई अनियमितताएं हैं, जिससे मतदाताओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। शिकायत के अनुसार वार्ड संख्या 10, 11 और 13 के मतदाताओं को प्राथमिक विद्यालय सिसोटार से हटाकर गोशाईपुर प्राथमिक विद्यालय में जोड़ दिया गया है, जबकि गोशाईपुर विद्यालय इन वार्डों से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित है। इसी प्रकार वार्ड संख्या 10 से 15 के कुछ मतदाताओं को हरपुरा प्राथमिक विद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जो करीब पांच किलोमीटर दूर पड़ता है। इससे बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान के दिन भारी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मतदाता सूची में जिन नए नामों को जोड़े जाने की बात कही जा रही है, वे वास्तविक रूप से सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिना भौतिक सत्यापन के ही मतदान केंद्रों में बदलाव कर दिया गया है, जो निर्वाचन नियमों के विपरीत है। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि वोटर लिस्ट की सभी गड़बड़ियों की जांच कराकर तत्काल सुधार किया जाए तथा नई, संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए, ताकि सभी मतदाताओं को नजदीकी मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सुविधा मिल सके। इस मामले में स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

पत्रकार सुरक्षा बिल सहित पत्रकार हितों पर सक्रिय संगठन की समीक्षा बैठक

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों के राष्ट्रीय संगठन इंडियन नेशनल जर्नलिस्ट कोऑर्डिनेट कमेटी एवं सोशल मीडिया जर्नलिस्ट फेडरेशन की वार्षिक समीक्षा बैठक गोरखपुर के झरखंडी स्थित एक पब्लिक स्कूल में संपन्न हुई। बैठक में पत्रकार सुरक्षा बिल सहित पत्रकार हितों से जुड़े अनेक बिंदुओं पर किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की गई।
संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय प्रभारी सरदार दिलावर सिंह ने कहा कि संगठन ने पत्रकार हितों के लिए निरंतर कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप मीडिया से जुड़े लोगों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार सुरक्षा बिल समेत कई अहम मुद्दों पर संगठन लगातार सक्रिय है।
प्रांतीय अध्यक्ष डॉक्टर सतीश चन्द्र शुक्ला ने अब तक पत्रकार हित में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया।
मंडल प्रभारी केसी चौधरी ने कहा कि पत्रकार एकता को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों के चलते संगठन आज चर्चा में है और पत्रकारों के बड़े संगठनों में शुमार हो चुका है। देवरिया जिलाध्यक्ष श्यामानंद पाण्डेय ने सभी से आह्वान किया कि नवीन सत्र 2026 में संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लें।
बैठक में पवन कुमार गुप्ता, राकेश कुमार श्रीवास्तव, विश्वनाथ उपाध्याय, अनिल कुमार सिंह, पंचानन पाण्डेय, रामेश्वर मिश्रा, कमलेश मणि त्रिपाठी, संगम कुमार त्रिपाठी, सुनील कुमार गुप्ता एडवोकेट, अमिय नाथ मिश्रा, गणेश उपाध्याय, अंगद कुमार यादव, प्रमोद कुमार पाण्डेय, डॉक्टर राम प्रकाश राव, मृत्युंजय पाण्डेय, मोहम्मद साकिब, जावेद खान, बबलू सिंह प्रजापति, अरविंद कुमार सिंह, सोनू तिवारी, दबीर आलम, अहमद बशीर मोहम्मद, अहमद अजीज खान, सरदार सिमरजीत सिंह, भोजपुरी कवि एवं साहित्यकार शंभू शरण यादव, साहब राम साहनी, राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा, जोगेंद्र साहनी, राम मिलन साहनी, सुनील कुमार पाण्डेय, मुकेश शुक्ला, संजय गिरी सहित अर्थशतक से अधिक पत्रकार उपस्थित रहे।

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा मानवता के खिलाफ: अभय सिंह

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध कथित हत्याओं, हिंसा, धार्मिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएँ अत्यंत चिंताजनक, निंदनीय और मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। यह बात दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के छात्रसंघ अध्यक्ष एवं युवा भाजपा नेता अभय सिंह ने कही।
श्री सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में लंबे समय से हिंदू समुदाय को संगठित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मंदिरों पर हमले, घरों को जलाया जाना, महिलाओं और बच्चों की असुरक्षा तथा हत्याओं की खबरें यह दर्शाती हैं कि वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकार गंभीर खतरे में हैं। हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक देश का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हिंसा और भयावह रूप ले सकती है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि बांग्लादेश सरकार के समक्ष राजनयिक स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जाए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया जाए।
अभय सिंह ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित हिंदू परिवारों को हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत, जो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, धार्मिक उत्पीड़न के विरुद्ध मौन नहीं रह सकता। भारत की आवाज़ बांग्लादेश के पीड़ित हिंदुओं के साथ-साथ विश्वभर में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी समुदाय या देश के विरुद्ध नहीं, बल्कि निर्दोष हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से पारित किया गया है।

उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, कुलदीप सिंह सेंगर को राहत नहीं

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतिम रोक लगा दी है, जिसमें दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा सस्पेंड कर जमानत दी गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद सेंगर की रिहाई फिलहाल संभव नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुलदीप सिंह सेंगर को नोटिस जारी किया है और मामले में जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक दिल्ली हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही जेल में बंद है। वह उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 वर्ष की अलग सजा भी काट रहा है। इस आदेश को उन्नाव रेप केस में न्याय प्रक्रिया की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भीषण ठंड व शीतलहरी के चलते कक्षा 12 तक के विद्यालय 31 दिसंबर तक बंद

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)जनपद गोरखपुर में लगातार पड़ रही भीषण ठंड एवं शीतलहरी को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी ने जनपद के कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी विद्यालयों को 31 दिसंबर 2025 तक बंद रखने का आदेश जारी किया है।यह आदेश सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई एवं अन्य बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।प्रशासन द्वारा विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौसम की स्थिति के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को ठंड से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

नारी जागरण से ही बनेगा सभ्य समाजः सम्मान, शिक्षा और समानता के बिना अधूरी है प्रगति

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कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सभ्यता को केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक तकनीक या आर्थिक तरक्की से नहीं आंका जा सकता। किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी नैतिक चेतना, संवेदनशीलता और समानता के स्तर से होती है।
इतिहास गवाह है कि जिस समाज में नारी सम्मानित, शिक्षित और जागरूक रही है, वही समाज सशक्त और सभ्य बना है। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि नारी के जागरण के बिना सभ्य समाज की कल्पना अधूरी है।
नारी समाज की आधारशिला है। वह केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और संवेदना की संवाहक भी है। मां के रूप में वह पहली शिक्षिका होती है, बहन के रूप में सहचर, पत्नी के रूप में सहयोगी और नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण की सहभागी। यदि नारी स्वयं जागरूक, शिक्षित और आत्मनिर्भर होगी, तो आने वाली पीढ़ियां स्वतः ही नैतिक, अनुशासित और जिम्मेदार बनेंगी। यही किसी भी सभ्य समाज की पहली पहचान है।
आज भी समाज में लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसी कुरीतियां नारी की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि नारी जागरण से ही संभव है। जब नारी अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग होगी, तभी वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगी और समाज को गलत परंपराओं से मुक्त कराने में अग्रणी भूमिका निभाएगी।
शिक्षा नारी जागरण का सबसे सशक्त माध्यम है। शिक्षित नारी न केवल अपना जीवन बेहतर बनाती है, बल्कि पूरे परिवार और समाज की सोच को सकारात्मक दिशा देती है। स्वास्थ्य, स्वच्छता, बाल पालन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव जैसे क्षेत्रों में नारी की भूमिका निर्णायक होती है। जागरूक नारी केवल उपदेश नहीं देती, बल्कि अपने आचरण से समाज को रास्ता दिखाती है।
आज नारी ने राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, खेल और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता सिद्ध कर दी है। यह प्रमाण है कि अवसर मिलने पर नारी समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। लेकिन वास्तविक सभ्यता तभी आएगी, जब नारी को केवल मंचों पर सम्मान नहीं, बल्कि घर और समाज में समान अधिकार, सुरक्षा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले। अतः नारी जागरण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन के रूप में अपनाने की जरूरत है। पुरुष और महिला—दोनों को यह समझना होगा कि नारी की उन्नति किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की प्रगति है। जब नारी जागेगी, तभी समाज सभ्य बनेगा और तभी राष्ट्र वास्तव में सशक्त होगा।

केरल के निकायों में भाजपा की जीत का नैरेटिव और जमीनी हकीकत- संजय पराते

केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा द्वारा बड़ी छलांग लगाने और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में कब्जा करने का गोदी मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा रहा है। गोदी मीडिया का दुष्प्रचार यह भी है कि केरल में वाम मोर्चे का जनाधार ही खत्म हो गया है और आने वाले विधान सभा चुनाव में अब मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होने जा रहा है।
वास्तविकता क्या है, इसे जानने के लिए किस पार्टी या मोर्चे को कितने वोट और सीटें मिली हैं, इस पर नजर डालना जरूरी है। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में माकपा नीत वामपंथी-जनवादी मोर्चा अभी भी पहले नंबर की ताकत है। वाम मोर्चे को 1,75,000 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा को 1,65,000 वोट और कांग्रेस नीत मोर्चे को 1,25,000 वोट ही मिले हैं। भाजपा की जीती हुई 50 वार्डों में से 41 वार्डों में कांग्रेस मोर्चा तीसरे नंबर पर है और इनमें से 25 वार्डों में उसे 1,000 से भी कम वोट मिले हैं। इन सभी सीटों पर माकपाई मोर्चा दूसरे स्थान पर है और 7 वार्डों में वह 60 से भी कम वोटों से हारी है। तिरुवनंतपुरम मूलतः कांग्रेस की सीट है और भाजपा को जो कुछ भी बढ़त मिली है, वह वोटों के कांग्रेस से भाजपा की ओर प्रवाह का नतीजा है। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के चुनाव में कांग्रेस के कथित असंतुष्ट नेता, जो अब लगभग भाजपा नेता के रूप में में अपनी काया पलट चुके हैं, शशि थरूर की भूमिका किसी से छुपी हुई नहीं है। उनके इस रुख के बावजूद कांग्रेस ने भाजपा की हार को सुनिश्चित करने का कोई प्रयास नहीं किया, क्योंकि कांग्रेस केरल की राजनीति में अपना असली दुश्मन माकपा को मानती है। उसे इस बात से कोई मतलब ही नहीं था कि इस चुनाव में भाजपा की बढ़त का पूरे देश में क्या राजनैतिक संदेश जाएगा। साफ है कि माकपा नीत वाम मोर्चे को हराने के लिए कांग्रेस और भाजपा का अप्रत्यक्ष गठबंधन काम कर रहा था।
तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में भाजपा की बढ़त से साफ हो गया है कि कांग्रेस का यह दावा खोखला है कि उसमें अकेले ही भाजपा को हराकर सत्ता से बाहर रखने की ताकत है। चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध होने की कितनी ही डींगें क्यों न मार लें, वास्तविकता यही है कि निचले स्तर का स्थानीय नेतृत्व और शशि थरूर जैसे नेता भी उसे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है और कहीं भी, किसी भी समय भाजपा के हाथों खेलने के लिए तैयार हैं।
कांग्रेस के दोगलेपन के कारण तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के चुनाव में सीटों के मामले में भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई हो, लेकिन न वह बहुमत हासिल कर पाई है और न ही सबसे ज्यादा वोट पाने वाला मोर्चा बन पाया है।
स्थानीय निकाय चुनावों में वाम मोर्चे को झटका लगने के गोदी मीडिया के प्रचार के विपरीत वास्तविकता यह है कि नगर पालिकाओं और जिला पंचायतों में भी भाजपा को करारा झटका लगा है। उसे पिछली बार 4 नगरपालिका में बहुमत हासिल हुआ था, तो इस बार वह केवल 2 नगर पालिकाएं ही जीत पाई है। इसी प्रकार, पिछली बार उसके पास 14 जिला पंचायतों में 3 सीटें थीं, तो इस बार केवल एक सीट पर ही वह कब्जा कर पाई है। 941 ग्राम पंचायतों में से केवल 6 ग्राम पंचायतों में ही वह बहुमत हासिल कर पाई है। इसके विपरीत, वाम मोर्चा ने 343 ग्राम पंचायतों, 63 ब्लॉक पंचायतों, 7 जिला पंचायतों, 28 नगर पालिकाओं में जीत हासिल की है।
2020 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपाई मोर्चे को 15 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 19.4 प्रतिशत हो गए थे। इस बार के स्थानीय निकाय चुनाव में उसे केवल 14.5 प्रतिशत वोट ही मिले हैं, जो पूरे केरल में उसके जनाधार में गिरावट को दिखाता है।
कांग्रेसी मोर्चे यूडीएफ़ का मत प्रतिशत भी स्थानीय निकाय चुनावों में पिछली बार के 37.9 प्रतिशत की तुलना में इस बार 37.1 प्रतिशत रह गया है, जबकि माकपाई मोर्चे एलडीएफ का मत प्रतिशत पिछली बार के 40.2 प्रतिशत के मुकाबले इस बार बढ़कर 41.6 प्रतिशत हो गया है। यह माकपाई मोर्चे के वोटों में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि है। माकपा को मंथन करना होगा कि वह अपने वोटों को सीटों में क्यों नहीं बदल पाई?
6 ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों में 3 सीटों, 2 नगरपालिकाओं और 1 नगर निगम में जीत के साथ भाजपा का पक्षधर गोदी मीडिया पूरे केरल में भाजपा की जीत का नैरेटिव सेट करना चाहता है। लेकिन समग्रता में देखें, तो झटका वामपंथ को नहीं, दक्षिणपंथी भाजपा को ही लगा है और केरल की आम जनता ने उसकी विभाजनकारी सांप्रदायिक नीतियों को खारिज किया है। असली टक्कर, और यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वास्तव में कड़ी टक्कर बनने जा रही है, कांग्रेस और माकपा मोर्चों के बीच ही है।
इन चुनावों के बाद माकपा ने यह महत्वपूर्ण रुख अख्तियार किया है कि जहां उसके पास बहुमत नहीं है, वहां वह विपक्ष में रहकर आम जनता को उसके मुद्दों पर संगठित करेगी और जन संघर्ष को तेज करेगी, लेकिन वह सांप्रदायिक पार्टियों के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। उसने कहा है कि वह उन सभी निर्दलीयों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, जो वामपंथ के साथ सहयोग करना चाहते है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केरल में सत्ता में आने की ललक में कांग्रेस कौन-सी चाल चलती है और उसकी चाल से भाजपा को कितना फायदा होता है? वैसे पिछली बार के अपवाद को छोड़ दिया जाएं, तो केरल का इतिहास सत्ता बदलने का इतिहास रहा है, जिसका फायदा कांग्रेस को ही मिल सकता है। लेकिन जिस प्रकार उसने स्थानीय निकाय चुनाव में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा वोट बटोरे हैं, यदि वह इसे सीटों में बदल पाई, तो एक नया चमत्कार भी देखने को मिल सकता है।

छुट्टा पशु और नीलगाय बने किसानों की तबाही, खेतों में डूब रही मेहनत की पूंजी

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। परतावल क्षेत्र , दरौली, सिसवा राजा, कृतपिपरा, फुलवरिया, शिकारपुर सहित आस-पास के गांवों में छुट्टा पशुओं और नीलगायों का बढ़ता आतंक किसानों के लिए गंभीर संकट बन गया है। रबी की फसल की कटाई से पहले ही गेहूं, सरसों, चना और मटर जैसी फसलें इन पशुओं द्वारा लगातार नष्ट की जा रही हैं, जिससे किसानों की खून-पसीने की कमाई खेतों में ही डूबती नजर आ रही है।
किसानों का कहना है कि दिन हो या रात, छुट्टा पशु और नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को चर जाते हैं और रौंद देते हैं। कई किसानों की पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है, जबकि कुछ खेतों में फसल बचाने के लिए किसान रात-रात भर पहरा देने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, आवारा पशुओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन उनके लिए न तो पर्याप्त गौशालाएं हैं और न ही कोई ठोस नियंत्रण व्यवस्था। नीलगायों के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई है, क्योंकि वे बड़े झुंड में खेतों में प्रवेश कर मिनटों में फसल चौपट कर देती हैं।
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि छुट्टा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए, गौशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए और नीलगायों से फसल बचाव के लिए प्रभावी योजना लागू की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खेती करना घाटे का सौदा बन जाएगा।
यह समस्या अब केवल फसल नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान परिवारों की आजीविका और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रही है।

प्राइवेट विद्यालयों की मनमानी कब तक? सरकारी आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जिले में सरकार द्वारा 29 और 30 तारीख को दो दिन का अवकाश घोषित किए जाने के बावजूद कई प्राइवेट विद्यालयों का खुले रहना सवालों के घेरे में है। शासन का स्पष्ट निर्देश था कि ठंड और मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को कोई खतरा न हो। लेकिन इसके बावजूद निजी विद्यालय संचालक आदेशों को दरकिनार कर मनमानी पर उतर आए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चुप्पी इस मनमानी को मौन समर्थन देती नजर आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि जब सरकारी विद्यालयों में अवकाश का पूरी तरह पालन हो रहा है, तो प्राइवेट स्कूलों के लिए अलग नियम क्यों? छोटे-छोटे बच्चों को ठंड में स्कूल भेजने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी विद्यालय जिला स्तर के अधिकारियों के “वजन” और प्रभाव का हवाला देकर खुले रखे गए हैं। इससे आम जनता में यह संदेश जा रहा है कि कानून और आदेश केवल कमजोरों के लिए हैं, जबकि प्रभावशाली लोग उन्हें तोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। यह स्थिति न केवल शासन की साख पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब सवाल यह है कि प्राइवेट विद्यालयों की यह मनमानी कब तक चलेगी? क्या जिला प्रशासन शासनादेश का कड़ाई से पालन कराएगा या फिर बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की चिंता यूँ ही नजरअंदाज होती रहेगी? जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें और यह स्पष्ट करें कि नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह सरकारी विद्यालय हो या निजी। तभी जनता का प्रशासन पर भरोसा कायम रह पाएगा।

यातायात नियमों की अनदेखी, आमजन की सुरक्षा पर संकट

यातायात सुधार पर मुख्यमंत्री का संदेश बेअसर, महराजगंज में सड़कों पर अवैध टैक्सी स्टैंड से बढ़ा खतरा


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में सड़क सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद महराजगंज जिले में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शहर से लेकर कस्बाई इलाकों तक मुख्य सड़कों, चौराहों और बाजारों के किनारे अवैध रूप से संचालित टैक्सी, ऑटो और ई-रिक्शा स्टैंड न सिर्फ यातायात को बाधित कर रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।

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प्रमुख चौराहों पर दिनभर वाहनों की कतारें लगी रहती हैं। कई जगह सड़क के एक हिस्से पर स्थायी रूप से वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया चालकों पर पड़ रहा है। थोड़ी सी लापरवाही किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यातायात पुलिस समय-समय पर अभियान तो चलाती है, लेकिन कार्रवाई कुछ घंटों तक ही सीमित रहती है। इसके बाद स्थिति फिर वही हो जाती है। लोगों का आरोप है कि प्रभावी निगरानी और स्थायी समाधान के अभाव में अवैध स्टैंड संचालकों के हौसले बुलंद हैं।

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सुबह स्कूल खुलने और शाम के व्यस्त समय में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। जाम की स्थिति आम हो चुकी है, जिससे एंबुलेंस और आवश्यक सेवाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शासन स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अमल न होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है।
जनपदवासियों की मांग है कि अवैध टैक्सी स्टैंड पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो, चिन्हित स्थानों पर व्यवस्थित स्टैंड विकसित किए जाएं और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।