Wednesday, June 24, 2026
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योगी सरकार में गांव का सिपाही ग्राम रोजगार सेवक भूखा, नहीं मिला मानदेय-ब्रह्मानंद

5 माह से मानदेय भुगतान नहीं हुआ, जिले के 625 ग्राम रोजगार सेवक कर्ज- भुखमरी के कगार पर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। जनपद महराजगंज में कार्यरत लगभग 625 ग्राम रोजगार सेवकों को जुलाई 2025 से अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, जबकि मानदेय के तौर पर ग्राम रोजगार सेवकों को मात्र 7788/- प्रतिमाह मिलता है वह भी समय से न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई रोजगार सेवक कर्ज लेने को मजबूर हैं और उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि जब सरकार के हर महत्वपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सेवकों पर है, तो फिर उन्हें उनका मानदेय क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों से एसआईआर, पंचायत चुनाव, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री, मनरेगा से जुड़े कार्यों सहित ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित सरकार के लगभग सभी जन- हितकारी कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कराए गए, लेकिन बदले में पिछले पांच माह से मानदेय नहीं मिला,जबकि उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ जिला इकाई महराजगंज द्वारा आयुक्त ग्राम विकास उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को 08 अक्टूबर 2025 को मानदेय के लिए अनुरोध पत्र भेजा गया था। लेकिन आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
संघ का आरोप है कि सरकार द्वारा लगातार ग्राम रोजगार सेवकों पर कार्यभार बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उनके मानदेय के लिए न तो समय से बजट जारी किया जा रहा है और न ही कोई स्थायी व ठोस व्यवस्था की गई है। इसका सीधा असर रोजगार सेवकों के पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। मानदेय न मिलने से उनके बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन, बिजली और किराए जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।उन्होंने ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक सरकार की योजनाओं की रीढ़ हैं। यदि यही कर्मचारी आर्थिक रूप से टूट जाएंगे तो गांवों में योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित होगा। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल मांग करते हुए कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों के लिए मानदेय का अलग से स्थायी बजट सुनिश्चित किया जाए और पांच माह का बकाया मानदेय भुगतान अविलंब कराया जाए, ताकि कर्मियों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही मानदेय का भुगतान नहीं हुआ, तो ग्राम रोजगार सेवक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस मौके पर धर्मेंद्र पासवान, ओपी सिंह, सर्वेश मद्धेशिया, संतोष गुप्ता, इंद्रमणि विश्वकर्मा, इंद्र विजय यादव, प्रवीण मणि त्रिपाठी, शशि कला चौधरी, चिंटू प्रसाद,बंधु मद्धेशिया ब्लॉक अध्यक्ष घुघली, राहुल गुप्ता ब्लॉक मंत्री घुघली सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में बकाया मानदेय भुगतान की मांग उठाई।

वरवां राजा में चक मार्ग विवाद बरकरार, पैमाइश के बाद भी नहीं निकला हल

फसल नुकसान व सिंचाई बाधित होने का किसानों का आरोप, कार्रवाई की मांग

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मिठौरा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत वरवां राजा में चक मार्ग निर्माण को लेकर उपजा विवाद प्रशासनिक पैमाइश के बाद भी सुलझ नहीं सका। चक मार्ग की पैमाइश कराए जाने के बावजूद ग्रामीणों की आपत्तियां और आरोप-प्रत्यारोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम प्रधान ऋतु शाल द्वारा आराजी संख्या 146, रकबा 0.0999 हेक्टेयर चक मार्ग की पैमाइश कराए जाने हेतु जिला प्रशासन को प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसी क्रम में राजस्व निरीक्षक सुनील चौधरी के नेतृत्व में लेखपालों की टीम मौके पर पहुंची। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बागापार चौकी पुलिस भी मौके पर तैनात रही। प्रशासनिक टीम ने मौके पर चक मार्ग की पैमाइश कराई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले ही बिना विधिवत पैमाइश कराए चक मार्ग पर मिट्टी कार्य करा दिया गया था। किसानों का कहना है कि इस दौरान गेहूं की खड़ी फसल में फावड़ा चलाकर भारी नुकसान पहुंचाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित चक मार्ग 10 कड़ी का है तथा उसके बगल में 4 कड़ी का कुलावा स्थित था, लेकिन चक मार्ग निर्माण के नाम पर कुलावा को भी मिट्टी से भर दिया गया, जिससे खेतों की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
इस मामले में ग्राम सभा के तार बाबू सिंह पुत्र बंगाली ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि उनके खेत में जबरन चकमार्ग भरवा दिया गया, जबकि वर्ष 1985 से खेत में सिंचाई हेतु बोरिंग मौजूद थी। आरोप है कि उक्त बोरिंग को भी चकमार्ग में मिला दिया गया, जिससे खेतों की सिंचाई ठप हो गई और गेहूं की फसल को भारी क्षति पहुंची।
चकमार्ग पर कराए गए मिट्टी कार्य से जहां कुछ ग्रामीण संतुष्ट नजर आए, वहीं बड़ी संख्या में किसानों ने इसका विरोध किया। किसानों का कहना है कि यदि पहले विधिवत पैमाइश कराई जाती, तो यह विवाद उत्पन्न ही नहीं होता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फसल नुकसान के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर क्षतिपूर्ति कराई जाए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव मे शांति बनी हुई है और ग्रामीण प्रशासनिक निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

डिग्री नहीं, स्किल्स बनेंगी करियर की पहचान: 3 से 12 महीने के शॉर्ट टर्म कोर्स से पाएं हाई पैकेज जॉब

लखनऊ (RKPNEWS)आज के डिजिटल युग में करियर की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब सिर्फ लंबी-चौड़ी डिग्रियां ही सफलता की गारंटी नहीं रहीं। बदलते जॉब मार्केट में कंपनियां अब डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स को महत्व दे रही हैं। यही कारण है कि 3 से 12 महीने के शॉर्ट टर्म प्रोफेशनल कोर्स युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कम समय, कम लागत और जल्दी नौकरी मिलने की वजह से ये कोर्स स्टूडेंट्स के साथ-साथ वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए भी बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं।

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डेटा साइंस और AI/ML से बदलेगा भविष्य
डेटा साइंस इस समय सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले कोर्सेज में शामिल है। इसमें डेटा एनालिसिस, पायथन, मशीन लर्निंग और बिजनेस इनसाइट्स जैसी स्किल्स सिखाई जाती हैं। इस कोर्स के बाद डेटा एनालिस्ट, डेटा साइंटिस्ट और बिजनेस एनालिस्ट जैसे प्रोफाइल पर नौकरी मिल सकती है, जहां शुरुआती पैकेज 6 से 10 लाख रुपये सालाना तक होता है।
वहीं AI/ML कोर्स में स्मार्ट सिस्टम, ऑटोमेशन टूल्स और प्रेडिक्टिव मॉडल पर काम करना सिखाया जाता है। इस फील्ड में फ्रेशर्स भी 7 से 12 लाख रुपये तक का पैकेज हासिल कर सकते हैं।

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वेब डेवलपमेंट और UX/UI डिजाइन की बढ़ती मांग
वेब डेवलपमेंट कोर्स में HTML, CSS, JavaScript, React और बैकएंड टेक्नोलॉजी सिखाई जाती हैं। फुल स्टैक डेवलपर बनकर 3 से 6 लाख की शुरुआती सैलरी के साथ करियर शुरू किया जा सकता है।
UX/UI डिजाइन कोर्स डिजिटल प्रोडक्ट्स के डिजाइन पर फोकस करता है, जहां शुरुआती पैकेज 4 से 8 लाख रुपये तक मिल सकता है।

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साइबर सिक्योरिटी: सुरक्षित करियर की गारंटी
डिजिटल अपराधों के बढ़ते खतरे के चलते साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग और डेटा प्रोटेक्शन की स्किल्स के साथ 5 से 10 लाख रुपये सालाना तक की जॉब पाई जा सकती है।
निष्कर्ष:अगर आप कम समय में मजबूत करियर और अच्छी कमाई चाहते हैं, तो ये शॉर्ट टर्म स्किल बेस्ड कोर्स आपके भविष्य की दिशा बदल सकते हैं।

स्वामीनाथन पर महाभियोग की कोशिश: लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरनाक संकेत

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किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया कोई सामान्य राजनीतिक कदम नहीं होती। यह तभी उचित मानी जाती है जब इसके पीछे ठोस तथ्य, गंभीर आरोप और निष्पक्ष मंशा हो। लेकिन स्वामीनाथन पर महाभियोग की मौजूदा कोशिशें इन मानकों पर खरी उतरती नहीं दिखतीं। उलटे, यह प्रयास लोकतांत्रिक संस्थाओं को डराने और असहमति की आवाज़ों को दबाने की प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है।

लोकतंत्र की आत्मा संस्थागत स्वतंत्रता में निहित होती है। यदि न्यायिक या संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति सत्ता के दबाव से मुक्त होकर निर्णय नहीं ले पाएंगे, तो नागरिकों का भरोसा कमजोर होगा। स्वामीनाथन के मामले में जिस तरह आलोचनात्मक रुख और असहज सवालों को “असुविधाजनक” बताकर महाभियोग की तलवार लटकाई जा रही है, वह एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। आज निशाने पर एक व्यक्ति है, कल कोई भी संस्था हो सकती है।

महाभियोग प्रक्रिया का दुरुपयोग सत्ता को तात्कालिक राहत भले दे दे, लेकिन दीर्घकाल में यह लोकतंत्र को खोखला करता है। इससे यह संदेश जाता है कि संवैधानिक मर्यादाएं सत्ता की सुविधा के अनुसार बदली जा सकती हैं। ऐसी स्थिति संस्थाओं को कमजोर करती है और आम नागरिक के मन में यह आशंका पैदा करती है कि न्याय और विवेक की जगह भय और दबाव ने ले ली है।

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यह प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या इस तरह की कोशिशें वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देती हैं, या फिर असहमति को अपराध की तरह पेश करने का रास्ता खोलती हैं। लोकतंत्र में आलोचना और प्रश्न पूछना अपराध नहीं, बल्कि उसकी बुनियादी शर्त है। यदि हर असुविधाजनक प्रश्न के जवाब में महाभियोग की धमकी दी जाएगी, तो बहस और विमर्श का दायरा सिमटता चला जाएगा।

समय की मांग है कि महाभियोग जैसी गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया को राजनीतिक हथियार बनने से रोका जाए। स्वामीनाथन पर महाभियोग की कोशिश को केवल एक व्यक्ति तक सीमित मानना भूल होगी। यह लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा मुद्दा है। संस्थाओं को डराकर नहीं, बल्कि उनकी स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखकर ही एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र की स्थापना संभव है।

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मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान: देवरिया पुलिस ने दिलाया सुरक्षा का भरोसा, 23 स्थानों पर सघन जांच

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस द्वारा शुक्रवार को “मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक संचालित किया गया, जिसमें जिले के सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्ष सक्रिय रूप से शामिल रहे।

अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

इस दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग की गई। पुलिस ने चोरी के वाहनों की तलाश, तीन सवारी चलने वालों के खिलाफ कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में कार्रवाई तथा अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया।

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पुलिस द्वारा आमजन को मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया गया, जिस पर लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।

अभियान के तहत जनपद के 23 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 355 व्यक्तियों और 194 वाहनों की जांच की गई। देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि आमजन में सुरक्षा, शांति और विश्वास की भावना बनी रहे।

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नशे का कारोबार, युवा पीढ़ी शिकार— समाज, प्रशासन और परिवार सभी के लिए गंभीर चेतावनी

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। समाज में तेजी से फैलता नशे का कारोबार आज समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों में शुमार हो चुका है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस अवैध कारोबार का सबसे आसान और बड़ा शिकार युवा पीढ़ी बनती जा रही है। ड्रग्स, स्मैक, गांजा, चरस, नशीली गोलियां और शराब—ये सब अब केवल सीमित दायरे तक नहीं रहे, बल्कि गांव-गांव, कस्बे-कस्बे और शहर की गलियों तक अपनी पैठ बना चुके हैं।आज 15 से 25 वर्ष की उम्र के युवा तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पढ़ाई का दबाव, बेरोजगारी, मोबाइल और सोशल मीडिया का गलत प्रभाव, संगत की चूक और आसान पैसा—ये सभी कारण युवाओं को नशे की दलदल में धकेल रहे हैं। शुरुआत शौक या तनाव से राहत के नाम पर होती है, लेकिन जल्द ही यही शौक जानलेवा लत में बदल जाता है।
सूत्रों की मानें तो नशे के सौदागर बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। छोटे-छोटे स्कूल, कॉलेज, ढाबों और बस अड्डों के आस-पास सक्रिय हैं। मोबाइल कॉल और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए डील तय होती है और पुलिस की आंखों से बचते हुए माल युवाओं तक पहुंचा दिया जाता है। कहीं-कहीं कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरे समान साबित हो रही है।
परिवारों में पसरा मातम
नशे की लत केवल एक व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को बर्बादी की ओर ले जाती है। घरों में कलह, आर्थिक तंगी, चोरी-चकारी और हिंसा बढ़ रही है। कई माता-पिता तब जागते हैं, जब बहुत देर हो चुकी होती है। इलाज के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, फिर भी सफलता की कोई गारंटी नही।युवा किसी भी देश की रीढ़ होते हैं। जब वही नशे की गिरफ्त में आ जाएं, तो राष्ट्र का भविष्य कमजोर होना तय है। नशे की वजह से अपराध बढ़ रहे हैं, सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और मानसिक बीमारियों में इजाफा हो रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक संकट भी है।
जरूरत सामूहिक लड़ाई की। नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सिर्फ पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।प्रशासन को सख्त और निरंतर अभियान चलाने होंगे।
शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाने चाहिए। परिवारों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।समाज और जनप्रतिनिधियों को खुलकर आगे आना होगा।
जब तक नशे के खिलाफ सामूहिक और ईमानदार लड़ाई नहीं लड़ी जाएगी, तब तक युवा पीढ़ी यूं ही शिकार बनती रहेगी और नशे का कारोबार फलता फूलता रहेगा। सवाल यही है—क्या हम भविष्य को बचाने के लिए अभी कदम उठाएंगे, या फिर केवल पछतावे के लिए तैयार रहेंगे?

पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर आज सुनवाई, कोर्ट में रहेंगे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर आज 2 जनवरी को सीजेएम कोर्ट में सुनवाई होगी। उनके अधिवक्ता अदालत में जमानत स्वीकृत कराने के लिए अपनी दलीलें पेश करेंगे। कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की अनुमति दे दी है।

व्यक्तिगत उपस्थिति की अर्जी कोर्ट ने की स्वीकार

अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी के माध्यम से कोर्ट में आवेदन देकर जमानत अर्जी की सुनवाई के समय स्वयं उपस्थित रहने का अनुरोध किया था। इस संबंध में गुरुवार को सीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब अमिताभ ठाकुर आज सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहेंगे।

10 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में

पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर से देवरिया जिला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर पुरवां इंडस्ट्रियल एस्टेट में पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर जमीन आवंटन में हेराफेरी का आरोप है, जिसके तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

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24 दिसंबर को हुई थी पिछली सुनवाई

इस मामले में जमानत अर्जी पर 24 दिसंबर को एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट के निर्देश पर उस दिन भी अमिताभ ठाकुर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। उनके अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी और अभिषेक शर्मा ने जमानत के पक्ष में दलीलें रखीं। लगभग एक घंटे तक दोनों पक्षों की बहस चली।

सप्लीमेंटरी पर उठे थे सवाल

सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर ने करीब 18 पन्नों का सप्लीमेंटरी प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसमें उन्होंने गिरफ्तारी के दौरान नियमों के पालन में कथित चूक का उल्लेख किया था। हालांकि, कोर्ट ने सप्लीमेंटरी की विधिक स्थिति स्पष्ट न होने की बात कहते हुए अगली सुनवाई की तारीख 2 जनवरी तय की थी।

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साल के पहले ही दिन 25 हजार का इनामिया पशु तस्कर पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

वर्ष 2026 के पहले ही दिन जिले की नरही पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। देर रात नरही–कारो मार्ग पर चेकिंग के दौरान पुलिस और 25 हजार रुपये के इनामिया पशु तस्कर फजल उर्फ करिया के बीच मुठभेड़ हो गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से तस्कर घायल हो गया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरही थाना पुलिस वर्ष के पहले दिन अपराध नियंत्रण के मद्देनज़र रात्रि गश्त एवं वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान नरही–कारो रोड पर एक संदिग्ध व्यक्ति को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस को देखते ही वह व्यक्ति भागने लगा और खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पशु तस्कर फजल उर्फ करिया के दाहिने पैर में गोली लग गई।गोली लगने से घायल तस्कर को मौके पर ही काबू में कर लिया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई है। घायल अवस्था में भी पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कर दी है।पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया अभियुक्त शातिर किस्म का पशु तस्कर है और उस पर पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। अभियुक्त के पास से एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस तथा एक खोखा बरामद किया गया है। बरामद हथियार को कब्जे में लेकर पुलिस ने आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह मुठभेड़ नरही थाना क्षेत्र के नरही–कारो मार्ग पर हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पशु तस्करी जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वर्ष के पहले ही दिन इनामिया अपराधी की गिरफ्तारी को पुलिस प्रशासन ने बड़ी उपलब्धि माना है, जिससे क्षेत्र में अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं।

स्विट्ज़रलैंड के क्रांस-मोंटाना स्की रिसॉर्ट अग्निकांड में मृतकों की संख्या 47, नए साल के जश्न के दौरान लगी थी भीषण आग

जिनेवा (राष्ट्र की परम्परा)। स्विट्ज़रलैंड के प्रसिद्ध क्रांस-मोंटाना स्की रिसॉर्ट में नए साल के जश्न के दौरान लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। हादसे को देश के सबसे घातक रिसॉर्ट अग्निकांडों में से एक माना जा रहा है।

फ्लैशओवर की आशंका, तेजी से फैली आग

जांच एजेंसियों के अनुसार, आग लगने की वजह ‘फ्लैशओवर’ हो सकती है, जिसके चलते आग कुछ ही पलों में पूरे परिसर में फैल गई। वैले कैंटन की अटॉर्नी जनरल बेआत्रिस पिलू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विस्फोट और आग के पीछे फ्लैशओवर की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि
“घटना के सही क्रम को समझने के लिए कई संभावनाओं की जांच की जा रही है। चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए हैं और घटनास्थल से बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।”

फ्लैशओवर क्या होता है?

अमेरिकी नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन (NFPA) के मुताबिक, फ्लैशओवर वह स्थिति होती है जब किसी बंद स्थान में गर्म गैसें छत तक पहुंचकर अचानक तापमान को बेहद बढ़ा देती हैं, जिससे वहां मौजूद सभी ज्वलनशील वस्तुएं एक साथ आग पकड़ लेती हैं।

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आतंकवादी हमले की आशंका से इनकार

स्विस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस हादसे को आतंकवादी हमला नहीं माना जा रहा है। आग लगने के बाद आपातकालीन सेवाएं पूरी रात सक्रिय रहीं। राहत और बचाव कार्य के लिए कई एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए।

मृतकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं

अधिकारियों ने फिलहाल मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल पर जांच में जुटी हुई हैं और सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की जा रही है।

बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी को जिंदा जलाने की कोशिश, पत्नी बोली – ‘हमारा किसी से कोई विवाद नहीं था

ढाका (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के बीच एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। राजधानी ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर एक गांव में हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर धारदार हथियारों से हमला कर उनके ऊपर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। गंभीर रूप से झुलसे खोकन दास फिलहाल ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

पत्नी सीमा दास का दर्द

पीड़ित की पत्नी सीमा दास ने बताया कि उनके पति का किसी से कोई विवाद नहीं था। उन्होंने कहा,
“हमें समझ नहीं आ रहा कि मेरे पति को इतनी बेरहमी से क्यों निशाना बनाया गया। हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं था।”

सीमा दास ने आशंका जताई कि यह हमला धार्मिक पहचान के कारण किया गया। उन्होंने कहा कि हमलावर मुस्लिम थे और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

पहचान हो जाने पर जिंदा जलाने की कोशिश

सीमा दास के अनुसार, अस्पताल में भर्ती खोकन दास ने दो हमलावरों की पहचान कर ली थी। इसी वजह से आरोपियों ने उनके सिर और चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, ताकि उनकी जान ली जा सके।

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क्या करते थे खोकन दास?

खोकन दास अपने गांव में दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाते थे। बुधवार को दुकान बंद कर घर लौटते समय उन पर हमला किया गया। आग लगने के बाद वह किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ गई और उनकी जान बच सकी। इसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

खोकन और सीमा दास के तीन बच्चे हैं। परिवार के अनुसार, खोकन दास का काफी खून बह चुका है और उनकी हालत स्थिर करने के लिए कम से कम छह यूनिट खून की जरूरत है। अस्पताल में सीमा दास अपने सबसे छोटे बेटे को सीने से लगाए हुए इंसाफ की गुहार लगाती दिखीं।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा, भारत ने जताई चिंता

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हिंसा बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। भारत समेत कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
हाल ही में भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वह हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। वहीं, बांग्लादेश सरकार का दावा है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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पाकिस्तान से आया भारत के समर्थन में ओपन लेटर, बलोच नेता मीर यार बलोच ने कहा – ‘आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंको’

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान से भारत के समर्थन में एक बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के वरिष्ठ नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर भारत सरकार और 140 करोड़ भारतीयों को नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं दी हैं। इस पत्र में उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, बलूचिस्तान की आज़ादी, भारत-बलूचिस्तान ऐतिहासिक रिश्तों और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र

मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि बलूचिस्तान और भारत के संबंध सदियों पुराने हैं, जिनकी जड़ें संस्कृति, व्यापार, कूटनीति और रक्षा सहयोग में रही हैं। उन्होंने बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) को भारत-बलूचिस्तान की साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया।

ऑपरेशन सिंदूर की खुलकर सराहना

बलोच नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य ढांचे और आतंकी ठिकानों पर हमला साहसिक, न्यायपूर्ण और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था।

79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे में बलूचिस्तान

पत्र में कहा गया कि बलूचिस्तान पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के अवैध कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहा है। मीर यार बलोच ने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और संप्रभुता मिल सके।

भारत को पूर्ण समर्थन का ऐलान

मीर यार बलोच ने कहा कि 6 करोड़ बलूच नागरिक भारत और उसकी सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने शांति, विकास, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदारी की इच्छा जताई।

पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर गंभीर चेतावनी

पत्र में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बताया गया। बलोच नेता ने चेतावनी दी कि CPEC अपने अंतिम चरण में है और यदि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता सेनाओं को समर्थन नहीं मिला, तो आने वाले महीनों में चीनी सेना की तैनाती बलूचिस्तान में हो सकती है, जो भारत और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनेगी।

ठोस रणनीतिक सहयोग की अपील

पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने कहा कि मौजूदा हालात में केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक रणनीतिक सहयोग की आवश्यकता है। भारत और बलूचिस्तान की साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

खड़ी ट्राली में बाइक की जोरदार टक्कर, महिला समेत तीन गंभीर घायल मौके पर पहुंची पुलिस, घायलों को जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। थाना भिटौली क्षेत्र के ग्राम कोदईला के समीप सड़क हादसा उस समय हो गया, जब सड़क किनारे खड़ी एक ट्राला में तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर जा टकराई। इस दर्दनाक दुर्घटना में बाइक पर सवार एक महिला सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह सड़क हादसा 01 जनवरी 2026 की देर रात का है। बाइक चालक अब्दुल कयूम पुत्र सैयद अली अपनी पत्नी सदरून निशा तथा इमामुद्दीन पुत्र मुर्तुजा, निवासी ग्राम तरकुलवा भटगावां, बागापार से रिश्तेदारी कर बाइक संख्या यूपी 78 डीटी 4762 से घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक कोदईला के पास पहुंची, चालक का संतुलन बिगड़ गया और बाइक सड़क किनारे खड़ी ट्राला से जा टकराई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के ग्रामीण जुट गए। ग्रामीणों की सूचना पर चौकी प्रभारी अवधेश सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस की सहायता से घायलों को जिला अस्पताल महराजगंज भेजवाया गया।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्राला और बाइक को कब्जे में लेकर थाने भेज दिया है। इस संबंध में चौकी प्रभारी अवधेश सिंह ने बताया कि फिलहाल कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है, तहरीर मिलने पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

संस्कृत शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) । संस्कृत शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षाएं 19 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। इन परीक्षाओं में प्रदेश भर से 56 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। कुल 1102 संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होंगे।
जारी परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार हाईस्कूल (10वीं) में 21,906 छात्र, इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष (11वीं) में 19,751 छात्र और इंटरमीडिएट द्वितीय वर्ष (12वीं) में 14,145 छात्र पंजीकृत हैं। इसके अतिरिक्त डिप्लोमा पाठ्यक्रम के 556 छात्र भी परीक्षा देंगे।
प्रदेश भर में लगभग 250 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दो पालियों में संपन्न होगी। पहली पाली सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। परीक्षा की शुरुआत 19 फरवरी को अनिवार्य संस्कृत विषय के प्रश्नपत्र से होगी।
परीक्षाओं को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही वेबकास्टिंग की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे परीक्षा की सतत निगरानी की जा सके।

साल के पहले दिन देर रात चली तबादला एक्सप्रेस, 21 आईएएस अफसरों के तबादले

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। साल के पहले दिन देर रात शासन की तबादला एक्सप्रेस चली, जिसमें उत्तर प्रदेश शासन ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए। इस सूची में सचिव, विशेष सचिव, आयुक्त, निदेशक और मंडलायुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। शासन का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और विभागीय कार्यों में गति लाना बताया जा रहा है।
तबादलों के तहत निर्वाचन, वित्त, नगर विकास, चिकित्सा शिक्षा, सिंचाई, लोक निर्माण, महिला कल्याण, समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और गृह विभाग जैसे अहम विभागों में बदलाव किए गए हैं। कुछ अधिकारियों को वर्तमान पद के साथ अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

तबादला सूची (नामवार)

  1. अनुराग नारायण मिश्रा – निर्वाचन विभाग
  2. हेरा लाल शर्मा – महानिरीक्षक, निर्वाचन
  3. मोनिका रानी – स्कूल शिक्षा विभाग
  4. संजय अग्रवाल – सहकारिता विभाग
  5. रजनीश शुक्ला – चिकित्सा शिक्षा विभाग
  6. देवानंद मीणा – चिकित्सा शिक्षा विभाग
  7. सत्यप्रकाश राव – समाज कल्याण/दिव्यांगजन विभाग
  8. कुमार प्रशांत – राज्य परिषद/नियोजन से जुड़ी जिम्मेदारी
  9. पवन सिंह चौहान – वित्त विभाग
  10. अरुण प्रकाश – नगर विकास विभाग
  11. राकेश कुमार–I – नगर विकास एवं आवास विभाग
  12. विश्व प्रकाश गिरि – लोक निर्माण विभाग
  13. शशांक शेखर – सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग
  14. रूपा वर्मा – महिला कल्याण विभाग/महिला आयोग
  15. रूप तिवारी – अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग
  16. संजय सिंह–II – समाज कल्याण विभाग
  17. राकेश सिंह – खाद्य विभाग
  18. देवदत्त वर्मा – महिला कल्याण निगम
  19. अजय प्रताप सिंह – पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
  20. कुमार प्रशांत – गृह विभाग
  21. संदीप वर्मा – वित्त विभाग
    शासन स्तर पर किए गए इस फेरबदल को प्रशासनिक कसावट बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। नए दायित्व मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों से विभागीय कार्यों में तेजी और बेहतर समन्वय की अपेक्षा की जा रही है।

हिन्दी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार: विचार, संघर्ष और रचना-दृष्टि

पुनीत मिश्र

हिन्दी साहित्य के इतिहास में जैनेन्द्र कुमार का नाम एक ऐसे रचनाकार के रूप में स्थापित है, जिन्होंने कथा-साहित्य को बाह्य घटनाओं की दुनिया से निकालकर मनुष्य के अंतर्जगत तक पहुँचाया। वे केवल कथाकार नहीं थे, बल्कि मानव मन की जटिलताओं के सूक्ष्म विश्लेषक, विचारक और संवेदनशील निबंधकार भी थे। हिन्दी उपन्यास में मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के प्रवर्तक के रूप में उनका योगदान आज भी अद्वितीय और अनुकरणीय माना जाता है।
जैनेन्द्र कुमार का जन्म ऐसे समय में हुआ, जब देश स्वतंत्रता संग्राम की उथल-पुथल से गुजर रहा था। यह दौर उनके व्यक्तित्व और लेखन दोनों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। वे स्वतंत्रता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े और महात्मा गांधी के विचारों से गहराई तक प्रभावित रहे। सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम और नैतिकता जैसे मूल्य उनके जीवन ही नहीं, उनकी रचनाओं की भी आत्मा बने।
उनका साहित्य मनुष्य के बाहरी संघर्षों से अधिक उसके भीतर चलने वाले द्वंद्वों पर केंद्रित है। प्रेम, दांपत्य, नैतिकता, अपराधबोध, आत्मसंघर्ष और सामाजिक बंधनों के बीच व्यक्ति की असहायता, ये सब उनके उपन्यासों और कहानियों के केंद्रीय विषय हैं। जैनेन्द्र कुमार ने यह स्पष्ट किया कि मनुष्य केवल सामाजिक प्राणी नहीं, बल्कि एक जटिल मानसिक संरचना भी है, जिसे समझे बिना जीवन को पूरी तरह नहीं जाना जा सकता।
‘त्यागपत्र’, ‘सुनीता’, ‘कल्याणी’, ‘सुखदा’ और ‘नीलम देश की राजकन्या’ जैसे उपन्यास हिन्दी उपन्यास को एक नई दिशा देते हैं। ‘त्यागपत्र’ में नायिका का आत्मसंघर्ष और सामाजिक नैतिकता से टकराव, स्त्री-स्वातंत्र्य और आत्मसम्मान की गहरी पड़ताल करता है। जैनेन्द्र की स्त्री पात्र कमजोर नहीं, बल्कि सोचने-समझने वाली, प्रश्न करने वाली और अपने निर्णयों की जिम्मेदारी उठाने वाली स्त्रियाँ हैं। यह दृष्टि उन्हें अपने समकालीन लेखकों से अलग और आगे खड़ा करती है।
शैली की दृष्टि से जैनेन्द्र कुमार का लेखन सादा, संयमित और आत्मसंवादी है। वे संवादों और घटनाओं से अधिक मौन, संकेत और आत्मचिंतन पर भरोसा करते हैं। उनके पात्र अक्सर स्वयं से बात करते दिखाई देते हैं, मानो लेखक पाठक को सीधे उस मानसिक प्रक्रिया में प्रवेश करा देता हो। यही कारण है कि उनका साहित्य केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।
निबंधकार के रूप में भी जैनेन्द्र कुमार ने भारतीय समाज, नैतिकता, धर्म और राजनीति पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया। उनके निबंधों में प्रश्न करने का साहस है और किसी भी स्थापित विचार को आँख मूँदकर स्वीकार करने से इंकार है। वे साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मबोध और सामाजिक चेतना का माध्यम मानते थे।
जैनेन्द्र कुमार का साहित्य आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि मनुष्य की मानसिक उलझनें, नैतिक प्रश्न और आत्मसंघर्ष आज भी उतने ही जीवंत हैं, जितने उनके समय में थे। उनकी रचनाएँ हमें भीतर झाँकने, स्वयं से प्रश्न करने और अपने निर्णयों की नैतिक जिम्मेदारी समझने की प्रेरणा देती हैं।
जैनेन्द्र कुमार की जयंती केवल एक महान साहित्यकार को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि हिन्दी साहित्य की उस परंपरा को नमन करने का भी दिन है, जिसने मनुष्य को उसके भीतर से समझने की कोशिश की। उनका साहित्य आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता रहेगा कि सच्चा लेखन वही है, जो मनुष्य को स्वयं से ईमानदार होने का साहस दे।