संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर के निर्देशन में जनपद के समस्त थानों द्वारा शीतलहर को देखते हुए अलाव की व्यवस्था के साथ ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठकों के दौरान ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्यों को क्षेत्र में होने वाली चोरी की घटनाओं की रोकथाम के उपायों की जानकारी दी गई। संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखने, रात्रि गश्त में सहयोग, आपसी समन्वय और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने पर विशेष जोर दिया गया।
इसके साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर जागरूकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा न करने, अज्ञात लिंक से बचने तथा सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के प्रति सतर्क किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थोड़ी सी सावधानी से साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।
बैठकों में यह भी अपील की गई कि ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्य पुलिस के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें और गांव की सुरक्षा को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
अलाव के साथ ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकें, चोरी रोकथाम व साइबर जागरूकता पर जोर
बांग्लादेश में बढ़ी सांप्रदायिक हिंसा,हिंदू समुदाय में भय
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला: शरियतपुर में व्यापारी को जिंदा जलाने की कोशिश, हालत नाजुक
ढाका (rkpnews desk)बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला शरियतपुर जिले से सामने आया है, जहां नववर्ष की पूर्व संध्या पर एक हिंदू व्यापारी को बेहद क्रूर तरीके से निशाना बनाया गया। स्थानीय और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बदमाशों ने पहले धारदार हथियार से हमला किया और फिर पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया। पीड़ित की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना बुधवार रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पीड़ित की पहचान 50 वर्षीय खोकोन चंद्र दास के रूप में हुई है, जो शरियतपुर के कोनेश्वर यूनियन अंतर्गत तिलोई गांव के निवासी हैं। वे केउरभंगा बाजार में फार्मेसी और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुकान बंद करने के बाद वे रोज की तरह ऑटो से घर लौट रहे थे। इसी दौरान दामुद्दा-शरियतपुर मार्ग पर उनकी गाड़ी को रोककर हमला किया गया।
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हमलावरों ने पहले धारदार हथियार से गंभीर रूप से घायल किया और फिर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जान बचाने के लिए खोकोन चंद्र दास पास ही स्थित एक तालाब में कूद गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर फरार हो गए। ग्रामीणों ने घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
पीड़ित की पत्नी सीमा दास ने मीडिया को बताया कि उनके पति का किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि हमले के दौरान उनके पति ने दो आरोपियों को पहचान लिया था, जिसके बाद हमलावरों ने उन्हें मारने की नीयत से हमला तेज कर दिया। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
यूपी दिवस पर दिखेगा विकास, संस्कृति और निवेश का संगम
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी यूपी दिवस 2026 के आयोजन को लेकर लखनऊ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), नोएडा और लखनऊ के पुलिस आयुक्त (CP) तथा जिलाधिकारी (DM) मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यूपी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की विरासत, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास यात्रा को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच बने।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी को मनाया जाने वाला यूपी दिवस प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान, निवेश संभावनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को एक सूत्र में पिरोने का अवसर है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि यूपी दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों के विशिष्ट उत्पादों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के तहत स्थानीय कारीगरी, हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार की प्रमुख विकास योजनाओं के मॉडल, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं और निवेश से जुड़े नवाचार भी आमजन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय व्यंजनों के लिए अलग मंच तैयार किया जाएगा, जहां अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के पारंपरिक स्वाद एक साथ देखने को मिलेंगे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकनृत्य, लोकगीत और आधुनिक विकास की झलक के माध्यम से यूपी दिवस को यादगार बनाने की योजना है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 से लगातार आयोजित हो रहा यूपी दिवस, हर साल प्रदेश की बदलती तस्वीर और नई पहचान को मजबूती से सामने रख रहा है। इस बार का आयोजन भी उत्तर प्रदेश को “विरासत के साथ विकास” के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
KGMU विवाद पर शिक्षक संघ का बड़ा बयान, कुलपति के समर्थन में एकजुटता
शिक्षक संघ कुलपति के समर्थन में, राजनीति से प्रेरित बताया गया विरोध
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहे घटनाक्रम को लेकर बड़ा प्रशासनिक और शैक्षणिक बयान सामने आया है। KGMU शिक्षक संघ खुलकर कुलपति के समर्थन में आ गया है। शिक्षक संघ ने हालिया धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन को राजनीति से प्रेरित कदम बताते हुए इसे विश्वविद्यालय की गरिमा और कुलपति की छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है।
शिक्षक संघ का कहना है कि पैथोलॉजी विभाग से जुड़ी जिस घटना को लेकर विवाद खड़ा किया गया, उस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई। जांच रिपोर्ट को महिला आयोग और राज्य शासन को भेज दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है।
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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं पीड़िता से बातचीत की। इसके बाद आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उसे निलंबित कर दिया गया और विश्वविद्यालय परिसर में उसके प्रवेश पर तत्काल रोक लगा दी गई। शिक्षक संघ का कहना है कि यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि शासन और प्रशासन महिला सुरक्षा और न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व विश्वविद्यालय के शांत शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने और KGMU की राष्ट्रीय स्तर पर बनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। संघ ने छात्रों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें।
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KGMU प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन बिना तथ्यों के लगाए गए आरोप संस्थान की छवि पर आघात पहुंचाते हैं। विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध और चिकित्सा सेवाएं पूर्ववत सुचारु रूप से जारी हैं।
नए साल की पहली ग्रह चाल: 2026 में किस राशि की चमकेगी किस्मत
🔱 2 जनवरी 2026 का महा-राशिफल: नए वर्ष की शुरुआत में 5 राशियों की बदलेगी दिशा, कुछ को उथल-पुथल तो कुछ को मिलेगा बड़ा अवसर | जानें मेष से मीन तक पूरा भविष्यफल
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। 2 जनवरी 2026, शुक्रवार का दिन कुछ राशियों के लिए निर्णायक बदलाव, नई शुरुआत और उन्नति का संकेत दे रहा है, वहीं कुछ राशि वालों को सतर्कता और संयम के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।
आज चंद्रमा की स्थिति और अन्य ग्रह योग मिलकर करियर, व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, कला-संगीत और आर्थिक जीवन पर विशेष प्रभाव डाल रहे हैं।
ज्योतिष पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा
तैयार किया विस्तृत दैनिक राशिफल, जिसमें हर राशि का शुभ संकेत और उपाय शामिल हैं।
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♈ मेष राशि (Aries) | राशि चिन्ह: ♈ | नाम के अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन संबंधों और निर्णयों का संतुलन सिखाएगा।
करियर/व्यवसाय: कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं, वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों को फोकस बनाए रखना होगा।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: आय सामान्य, खर्च पर नियंत्रण जरूरी।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी
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♉ वृषभ राशि (Taurus) | राशि चिन्ह: ♉ | नाम के अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
विदेश, शिक्षा और निवेश से जुड़े मामलों में अनुकूलता।
करियर/व्यवसाय: मल्टी-कल्चर या ऑनलाइन कार्य में लाभ।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के लिए अच्छा समय।
कला/संगीत: शास्त्रीय रुचि बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: नीतिगत सोच मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: निवेश से लाभ संभव।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
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♊ मिथुन राशि (Gemini) | राशि चिन्ह: ♊ | नाम के अक्षर: का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा
नई सोच और सीखने की चाह आज आगे बढ़ाएगी।
करियर/व्यवसाय: मीडिया, लेखन, मार्केटिंग में सफलता।
शिक्षा: रिसर्च और नई स्किल्स सीखने का योग।
कला/संगीत: लेखन और अभिनय में पहचान।
राजनीति/प्रशासन: भाषण और संवाद से लाभ।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान गणेश
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♋ कर्क राशि (Cancer) | राशि चिन्ह: ♋ | नाम के अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
टीमवर्क और सेहत पर ध्यान देने का दिन।
करियर/व्यवसाय: सहयोग से सफलता।
शिक्षा: एकाग्रता जरूरी।
कला/संगीत: भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रबल।
राजनीति/प्रशासन: जनसंपर्क मजबूत।
आर्थिक स्थिति: स्थिर लेकिन सीमित।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: भगवान शिव
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♌ सिंह राशि (Leo) | राशि चिन्ह: ♌ | नाम के अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
प्रतिभा निखारने का उत्तम समय।
करियर/व्यवसाय: नेतृत्व से लाभ।
शिक्षा: आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कला/संगीत: मंच पर चमकने का योग।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: सम्मान के साथ लाभ।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
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♍ कन्या राशि (Virgo) | राशि चिन्ह: ♍ | नाम के अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
सामाजिक संपर्क से अवसर मिलेंगे।
करियर/व्यवसाय: योजना सफल होगी।
शिक्षा: विश्लेषण क्षमता बढ़ेगी।
कला/संगीत: डिजाइन व लेखन में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: रणनीतिक लाभ।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: हल्का हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: मां सरस्वती
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♎ तुला राशि (Libra) | राशि चिन्ह: ♎ | नाम के अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
प्रमोशन और नई जिम्मेदारी के संकेत।
करियर/व्यवसाय: छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं।
शिक्षा: संतुलन जरूरी।
कला/संगीत: सौंदर्यबोध उभरेगा।
राजनीति/प्रशासन: समझौते से लाभ।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता आएगी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता दुर्गा
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♏ वृश्चिक राशि (Scorpio) | राशि चिन्ह: ♏ | नाम के अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
प्रशंसा और नए संबंध बनेंगे।
करियर/व्यवसाय: बॉस का सहयोग।
शिक्षा: आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कला/संगीत: रहस्यमय रचनाएं।
राजनीति/प्रशासन: प्रभावशाली दिन।
आर्थिक स्थिति: लाभ के योग।
शुभ रंग: मैरून
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: भगवान भैरव
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♐ धनु राशि (Sagittarius) | राशि चिन्ह: ♐ | नाम के अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा
मान-सम्मान बढ़ाने वाला दिन।
करियर/व्यवसाय: नई परियोजना सफल।
शिक्षा: उच्च अध्ययन में रुचि।
कला/संगीत: दर्शन और लेखन।
राजनीति/प्रशासन: लोकप्रियता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: आय में विस्तार।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
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♑ मकर राशि (Capricorn) | राशि चिन्ह: ♑ | नाम के अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
सुरक्षा और भविष्य की योजना का दिन।
करियर/व्यवसाय: स्थिर प्रगति।
शिक्षा: अनुशासन लाभ देगा।
कला/संगीत: सीमित रुचि।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: बचत पर ध्यान।
शुभ रंग: स्लेटी
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: शनिदेव
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♒ कुंभ राशि (Aquarius) | राशि चिन्ह: ♒ | नाम के अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
स्किल डेवलपमेंट से लाभ।
करियर/व्यवसाय: तकनीकी क्षेत्र में सफलता।
शिक्षा: कोर्स से फायदा।
कला/संगीत: आधुनिक प्रयोग।
राजनीति/प्रशासन: नवाचार से पहचान।
आर्थिक स्थिति: सोच-समझकर निवेश।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 11
पूज्य देवता: भगवान शिव
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♓ मीन राशि (Pisces) | राशि चिन्ह: ♓ | नाम के अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
करियर/व्यवसाय: इंटरव्यू में सफलता।
शिक्षा: कला और मनोविज्ञान में रुचि।
कला/संगीत: उत्कृष्ट दिन।
राजनीति/प्रशासन: सहानुभूति से लाभ।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान श्रीकृष्ण
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं।
चुनाव, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस: आईएएस फेरबदल से बदली प्रशासनिक तस्वीर
लखनऊ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: यूपी शासन में आईएएस अधिकारियों के तबादले, कई अहम विभागों की जिम्मेदारी बदली
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश शासन में एक बार फिर बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल को शासन की कार्यप्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़कर देखा जा रहा है। निर्वाचन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, राजस्व, महिला कल्याण, सहकारिता, सिंचाई, नगर विकास और समाज कल्याण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।
इस बदलाव में कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं, तो कई को नई और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। शासन स्तर पर यह संदेश स्पष्ट है कि आगामी योजनाओं, चुनावी तैयारियों और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है।
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किसे कौन सा विभाग मिला – नामों सहित पूरी सूची
अखंड प्रताप सिंह – विशेष सचिव, निर्वाचन विभाग, एवं अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश
नेहा शर्मा – प्रभारी महानिरीक्षक, निबंधन, उत्तर प्रदेश
मोनिका रानी – प्रभारी महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश
योगेश कुमार – प्रभारी आयुक्त एवं निबंधक, सहकारी समितियां, उत्तर प्रदेश
अपर्णा यू. – सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश
डा० सारिका मोहन – सचिव, वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
एस.वी.एस. रंगा राव – सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद एवं निदेशक (भूमि अध्याप्ति), उत्तर प्रदेश
नवीन कुमार जी.एस. – सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग; सीईओ, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं परियोजना प्रशासक, ग्रेटर शारदा सहायक समादेश क्षेत्र विकास प्राधिकारी
भवानी सिंह खंगारीत – विशेष सचिव, राजस्व विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
अरुण प्रकाश – विशेष सचिव, नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
रवीन्द्र कुमार – विशेष सचिव, कृषि, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार तथा कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग
दिव्य प्रकाश गिरि – विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग
कृष्ण कुमार – विशेष सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग
सुधा वर्मा – विशेष सचिव, महिला कल्याण विभाग तथा सचिव, राज्य महिला आयोग
रेणु तिवारी – सचिव, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, उत्तर प्रदेश
राजेन्द्र सिंह-2 – विशेष सचिव, समाज कल्याण विभाग
संजीव सिंह – विशेष सचिव, वित्त विभाग
डा० वंदना वर्मा – निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं प्रबंध निदेशक, पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम
उमेश प्रताप सिंह – विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
कुमार प्रशान्त – निदेशक, समाज कल्याण एवं प्रबंध निदेशक, यूपीसिडको
संदीप कौर – निदेशक, महिला कल्याण एवं प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम
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प्रशासनिक संदेश और महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार यह फेरबदल केवल नियमित स्थानांतरण नहीं, बल्कि नीतिगत प्राथमिकताओं का संकेत भी है। चुनावी प्रक्रिया, शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय अनुशासन जैसे क्षेत्रों में अब तेज निर्णय और परिणामोन्मुख प्रशासन की उम्मीद की जा रही है।
श्वास-श्वास में महादेव:सोऽहम् से शिवोऽहम् तक की दिव्य कथा
🔱 “सोऽहम् से शिवोऽहम् तक: जहाँ साधक स्वयं महादेव बन जाता है
पर कथा समाप्त नहीं हुई थी—वह वहीं से आरंभ हुई थी, जहाँ शब्द मौन बनते हैं,जहाँ श्वास मंत्र हो जाती है,और जहाँ साधक स्वयं प्रश्न नहीं, उत्तर बन जाता है।
‘सोऽहम्’—यह केवल श्वास का उच्चारण नहीं,
यह आत्मा की घोषणा है—“वह मैं हूँ”।उसी क्षण की कथा है,जब साधक जान लेता है कि
वह शिव की उपासना नहीं कर रहा,
वह शिव की अवस्था में प्रवेश कर रहा है।
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🔱 शास्त्रोक्त शिव-तत्त्व का उद्घाटन
शिव पुराण कहता है—
“न शिवो नाम देहस्थो, न देहो नाम शिवः।
यदा भेदो निवर्तेत, तदा शिवः स्वयं भवेत्॥”
अर्थात—
शिव कोई देह नहीं,
और देह ही शिव नहीं।
जब यह भेद समाप्त हो जाता है,
तभी साधक स्वयं शिव हो जाता है।
इसी अभेद-ज्ञान की कथा है।
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🌊 कथा: जब शिव मौन में प्रकट हुए
हिमालय की एक निर्जन कंदरा में साधक ध्यानस्थ था।
न मंत्र, न जप—
केवल श्वास।
श्वास भीतर जाती—
सो…
श्वास बाहर आती—
हम्…
अचानक साधक ने अनुभव किया—
यह श्वास उसकी नहीं है।
यह वही श्वास है जो—
कैलास में बहती है
गंगा में प्रवाहित होती है
शव में भी चलती है
और सृष्टि में भी
उसी क्षण भीतर से स्वर उठा—
“मैं कौन हूँ?”
और उत्तर आया—
“जो प्रश्न करता है, वही शिव है।”
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🔱 शिव की महिमा: साकार नहीं, साक्षी
शास्त्र कहते हैं—
शिव पूज्य इसलिए नहीं कि वे देव हैं,
शिव पूज्य इसलिए हैं क्योंकि—
वे साक्षी हैं
वे अविकारी हैं
वे अनासक्त हैं
शिव न युद्ध करते हैं,
न शासन करते हैं,
न अधिकार चाहते हैं।
वे केवल “हैं”।
यही कारण है कि शिव—
गृहस्थ भी हैं
वैरागी भी
रुद्र भी
करुण भी
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🔥 समानता: शिव और साधक
शास्त्रों में एक अद्भुत समानता बताई गई है—
शिव
साधक
भस्मधारी
अहंकार-त्यागी
मौन
ध्यानस्थ
कैलासवासी
अंतर्मुखी
नटराज
चित्त का नियंत्रक
जब साधक यह समझ लेता है कि
उसका क्रोध = रुद्र
उसकी करुणा = शंकर
उसका मौन = शिव
तभी पूर्ण होता है।
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🕉️ शिवोऽहम् का शास्त्रोक्त रहस्य
उपनिषद कहते हैं—
“अहं ब्रह्मास्मि”
“तत्त्वमसि”
पर शैव दर्शन कहता है—
“शिवोऽहम्”
यह अहंकार नहीं,
यह अहं का विसर्जन है।
जहाँ ‘मैं’ मिटता है,
वहीं शिव प्रकट होते हैं।
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🌺 कथा का चरम: शिव का वरदान नहीं, बोध
साधक ने अंत में पूछा—
“प्रभो, मुझे क्या प्राप्त हुआ?”
शिव मुस्कराए—
और बोले—
“तूने कुछ प्राप्त नहीं किया,
तूने केवल यह जाना है
कि तू कभी कुछ खोया ही नहीं था।”
यही शिव का सबसे बड़ा वरदान है—
ज्ञान, बोध और मुक्ति।
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🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
एपिसोड 9 हमें सिखाता है—
शिव बाहर नहीं, भीतर हैं
पूजा कर्म नहीं, चेतना है
भक्ति झुकना नहीं, जागना है
जहाँ श्वास चलती है,
वहीं शिव नृत्य करते हैं।
आज आपका मूलांक क्या संकेत दे रहा है?
अंक राशिफल 2 जनवरी 2026: आज आपका मूलांक क्या संकेत दे रहा है?
पढ़ें पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) का सटीक अंक भविष्यफल
अंक ज्योतिष के अनुसार जन्मतिथि से निकला मूलांक (1–9) व्यक्ति के स्वभाव, सोच, कर्म और भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है। 2 जनवरी का दिन सभी मूलांकों के लिए अलग-अलग संकेत लेकर आया है। पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत यह SEO फ्रेंडली, सरल और विस्तृत अंक राशिफल आपके करियर, व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति, कला, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को स्पष्ट करेगा।
मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
आज का संकेत: नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी
कार्य/व्यवसाय: आज नई जिम्मेदारी लेने से लाभ होगा। सरकारी व प्रशासनिक क्षेत्र में सम्मान मिल सकता है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सकारात्मक संकेत।
कला/मीडिया: आत्मविश्वास बढ़ेगा, प्रस्तुति प्रभावी रहेगी।
राजनीति: प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेगा।
आर्थिक स्थिति: धन स्थिर रहेगा, खर्च पर नियंत्रण रखें।
लव लाइफ: अहंकार से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
आज का संकेत: रिश्तों में संतुलन
कार्य/व्यवसाय: पार्टनरशिप में निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: लेखन, रिसर्च व मनोविज्ञान से जुड़े छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति: सलाहकार भूमिका में सफलता।
आर्थिक स्थिति: आय-व्यय संतुलित रहेगा।
स्वास्थ्य: मानसिक शांति मिलेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: चंद्र देव
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मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
आज का संकेत: ज्ञान और संवाद का लाभ
कार्य/व्यवसाय: शिक्षा, प्रशिक्षण, मैनेजमेंट से जुड़े लोग आगे बढ़ेंगे।
शिक्षा: उच्च अध्ययन में सफलता।
कला/लेखन: शब्दों का प्रभाव बढ़ेगा।
राजनीति: भाषण व रणनीति में सफलता।
आर्थिक स्थिति: निवेश सोच-समझकर करें।
लव लाइफ: समय दें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: गुरु बृहस्पति
मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
आज का संकेत: मेहनत का फल
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी, निर्माण, आईटी क्षेत्र में प्रगति।
शिक्षा: प्रैक्टिकल विषयों में लाभ।
प्रशासन: वरिष्ठ अधिकारी प्रशंसा करेंगे।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता आएगी।
स्वास्थ्य: अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: गणेश जी
मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
आज का संकेत: बदलाव का दिन
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, सेल्स, मीडिया में अवसर।
शिक्षा: कम्युनिकेशन स्किल बेहतर होगी।
कला/डिजिटल: नए आइडिया सफल।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: निवेश लाभ देगा।
लव लाइफ: संवाद से समाधान।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: बुध देव
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मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
आज का संकेत: सुख-सुविधा और संबंध
कार्य/व्यवसाय: फैशन, होटल, डिजाइन से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: कला व क्रिएटिव फील्ड में सफलता।
राजनीति: छवि मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: धन वृद्धि।
स्वास्थ्य: उत्तम।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
आज का संकेत: आत्मविश्लेषण और ज्ञान
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, आध्यात्मिक कार्यों में प्रगति।
शिक्षा: गहन अध्ययन सफल।
कला/लेखन: मौलिक सोच उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: अचानक धन लाभ।
स्वास्थ्य: सामान्य।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव
मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
आज का संकेत: संघर्ष के बाद सफलता
कार्य/व्यवसाय: नया बिजनेस प्लान सफल हो सकता है।
प्रशासन/राजनीति: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
स्वास्थ्य: लापरवाही न करें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनिदेव
मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)
आज का संकेत: ऊर्जा और साहस
कार्य/व्यवसाय: रक्षा, खेल, पुलिस, प्रशासन में सफलता।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ।
राजनीति: सक्रिय भूमिका असरदार।
आर्थिक स्थिति: खर्च संतुलित रखें।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी
डिस्क्लेमर:इस अंक राशिफल में दी गई जानकारी सामान्य अंक ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है। पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत यह भविष्यफल मार्गदर्शन हेतु है। सटीक निर्णय के लिए विशेषज्ञ की व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएँ: 2 जनवरी विशेष
2 जनवरी का इतिहास: वह दिन जिसने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की दिशा बदल दी
🌏 2 जनवरी का इतिहास: महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत विवरण
2 जनवरी इतिहास के पन्नों में एक ऐसा दिन है, जिसने राजनीति, रक्षा, विज्ञान, समाज, संस्कृति और वैश्विक कूटनीति पर गहरी छाप छोड़ी है। इस दिन घटी घटनाएँ न केवल तत्काल प्रभाव वाली रहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी तय करती चली गईं। आइए 2 जनवरी से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमवार और विस्तार से समझते हैं—
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🇮🇳 2020 – भारत के भविष्य की नींव रखने वाले निर्णय
वर्ष 2020 में भारत सरकार ने चंद्रयान-3 मिशन को मंजूरी दी, जो भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक दृढ़ता का प्रतीक बना। इसी दिन भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने कार्यभार संभालते हुए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को नमन किया, जो सैन्य एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।
आरबीआई ने दृष्टिबाधित नागरिकों के लिए “मनी मोबाइल ऐप” लॉन्च कर समावेशी भारत की सोच को मजबूती दी। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया, जिससे लोकतंत्र में पारदर्शिता बढ़ी। पीएम मोदी ने किसान सम्मान निधि की तीसरी किस्त जारी कर किसानों को आर्थिक संबल दिया। रेलवे ने 139 हेल्पलाइन को एकीकृत कर यात्रियों की सुविधा में बड़ा सुधार किया। भारत-पाक के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा होना वैश्विक सुरक्षा संतुलन का अहम संकेत रहा।
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🌍 2016 – पश्चिम एशिया में उथल-पुथल
सऊदी अरब में शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र सहित 47 लोगों को फांसी दिए जाने से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया। इस घटना ने सांप्रदायिक राजनीति और मानवाधिकारों पर वैश्विक बहस को जन्म दिया।
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🚆 2010 – कोहरे ने ली कई जानें
उत्तर प्रदेश में घने कोहरे के कारण कई भीषण रेल दुर्घटनाएँ हुईं। लिच्छवी एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, गोरखधाम एक्सप्रेस और सरयू एक्सप्रेस से जुड़े हादसों में 10 लोगों की मृत्यु और 40 से अधिक घायल हुए। यह दिन भारतीय रेल सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी बनकर उभरा।
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🏦 2009 – अर्थव्यवस्था और खेल में भारत की उपलब्धि
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने आर्थिक राहत के लिए 20 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया। वहीं भारत के सौरव घोषाल ने स्क्वैश में करियर की सर्वश्रेष्ठ विश्व रैंकिंग हासिल कर भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में रोशन किया।
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🗳️ 2008 – राजनीति और संस्कृति
बलिया लोकसभा उपचुनाव में नीरज शेखर की जीत ने उत्तर भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। इसी वर्ष समन हसनैन को मिसेज पाकिस्तान वर्ल्ड चुना गया, जबकि चिली का लाइमा ज्वालामुखी फटना प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता का स्मरण बना।
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🌐 2002 – वैश्विक राजनीतिक उथल-पुथल
अर्जेंटीना में 12 दिनों में पाँचवां राष्ट्रपति नियुक्त हुआ और देश को दिवालिया घोषित किया गया। काठमांडू में दक्षेस विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हुई, जबकि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को सौंपने पर सशर्त सहमति जताई।
⚖️ 1991–1973 – प्रशासनिक और सैन्य इतिहास
तिरुअनंतपुरम हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिला।
1973 में जनरल सैम मानेकशॉ को फील्ड मार्शल की उपाधि देकर भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा गया।
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🏅 1954 – भारत के सर्वोच्च सम्मानों की शुरुआत
2 जनवरी 1954 को भारत रत्न और पद्म विभूषण पुरस्कारों की स्थापना हुई। यह दिन राष्ट्र के गौरव को सम्मानित करने की परंपरा का आधार बना।
🌏 1942–1757 – युद्ध और सत्ता परिवर्तन
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने मनीला पर कब्जा किया, जबकि 1757 में रॉबर्ट क्लाइव ने नवाब सिराजुद्दौला से कलकत्ता वापस छीनकर भारत के औपनिवेशिक इतिहास की दिशा बदल दी।
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🔚 निष्कर्ष – 2 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि ऐसे निर्णयों, संघर्षों और उपलब्धियों का प्रतीक है, जिन्होंने भारत और विश्व को नई दिशा दी। यह दिन हमें इतिहास से सीख लेने और भविष्य के लिए प्रेरित होने का अवसर देता है।
शुक्रवार का पंचांग: यात्रा, पूजा और निर्णय – क्या करें, क्या न करें
पंचांग 02 जनवरी 2026 | आज का हिन्दू पंचांग | Friday Panchang 02/01/2026
दिनांक: 02 जनवरी 2026, शुक्रवार
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
अयन: दक्षिणायन | वैदिक ऋतु: हेमंत | द्रिक ऋतु: शिशिर
चन्द्र मास: पौष (अमांत/पूर्णिमांत – पौष)
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🔱 आज की तिथि
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी: 06:53 PM तक
उपरांत: शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
🌟 नक्षत्र
मृगशीर्षा: 08:04 PM तक
उपरांत: आद्रा
🧘♂️ योग
शुक्ल योग: 01:06 PM तक
उपरांत: ब्रह्म योग
⚙️ करण
गर: 08:38 AM तक
वणिज: 06:53 PM तक
विष्टि (भद्रा): 05:11 AM (03 जनवरी) तक
उपरांत: बव
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🌞 सूर्य व 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:12 AM
सूर्यास्त: 05:48 PM
चन्द्रोदय: 04:40 PM
चन्द्रास्त: 07:02 AM (03 जनवरी)
⚠️ अशुभ काल
राहुकाल: 11:11 AM – 12:30 PM
यमगण्ड: 03:09 PM – 04:29 PM
कुलिक: 08:32 AM – 09:51 AM
दुर्मुहूर्त: 09:19 AM – 10:02 AM, 12:51 PM – 01:34 PM
वर्ज्यम्: 03:33 AM – 04:59 AM
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✅ शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:36 AM – 06:24 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:09 PM – 12:51 PM
अमृत काल: 12:15 PM – 01:40 PM
🪐 राशि स्थिति
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि:
09:25 AM तक – वृषभ
उपरांत – मिथुन
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🧿 चंद्रबल (राशि)
09:25 AM तक: वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन
उपरांत 03/01/26 07:12 AM तक: मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर
⭐ ताराबल (नक्षत्र)
08:04 PM तक: भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
उपरांत: अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
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🛕 सर्वार्थसिद्धि योग
आज सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग नहीं है।
🧭 दिशाशूल व यात्रा फल
दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।
उपाय: दही या मीठा खाकर यात्रा करने से दोष में कमी आती है।
लाभकारी दिशा: पूर्व व उत्तर दिशा की यात्रा शुभ व लाभदायक।
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⏰ दिन का चौघड़िया
चर 07:12–08:32 | लाभ 08:32–09:51 | अमृत 09:51–11:11 | काल 11:11–12:30 | शुभ 12:30–13:50 | रोग 13:50–15:09 | उद्बेग 15:09–16:29 | चर 16:29–17:48
🌙 रात का चौघड़िया
रोग 17:48–19:29 | काल 19:29–21:09 | लाभ 21:09–22:50 | उद्बेग 22:50–00:30 | शुभ 00:30–02:11 | अमृत 02:11–03:51 | चर 03:51–05:32 | रोग 05:32–07:12
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नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य ले।
डिजिटल युग, युवा भारत और स्वभाव की राजनीति: अधिकारों से आगे मानवता का मार्ग
व्यक्ति से विश्व-मानवता तक सफ़लता का शाश्वत दर्शन – स्वभाव ही जीवन की दिशा तय करता है
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मनुष्य का जीवन केवल उसकी शिक्षा, धन या पद से नहीं, बल्कि उसके स्वभाव से संचालित होता है।इतिहास गवाह है कि जिन व्यक्तियों, समाजों और राष्ट्रों ने अपने स्वभाव को अनुशासन, नैतिकता और उच्च मूल्यों से जोड़ा, वे दीर्घकालीन सफलता के प्रतीक बने।भारतीय दर्शन में मानव स्वभाव को समझाने के लिए मनमुख,गुरमुख और सनमुख जैसे गहन और सार्वकालिक सिद्धांत दिए गए हैं। ये अवधारणाएँ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैश्विक मानव व्यवहार विज्ञान की भी कसौटी पर खरी उतरती हैं। आज जब विश्व नेतृत्व संकट, नैतिक पतन, मानसिक तनाव और मूल्य- संक्रमण से गुजर रहा है, तब इन स्वभावों का विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी प्रासंगिक हो जाता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूँ क़ि किसी भी लोकतंत्र की सफ़लता केवल उसके संविधान की सुंदर भाषा या संस्थाओं की मजबूती से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसके नागरिकों का स्वभाव कैसा है। संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, परंतु यह अपेक्षा भी करता है कि नागरिक विवेकशील,उत्तरदायी और नैतिक होंगे। जब नागरिक मनमुख स्वभाव से संचालित होते हैं, तो लोकतंत्र अधिकारों की भीड़ बन जाता है; और जब वे गुरमुख व सनमुख होते हैं, तो लोकतंत्र लोक-कल्याण का जीवंत तंत्र बनता है।
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साथियों बात अगर हम मनमुख से गुरमुख सनमुख की यात्रा क़ो संविधान, लोकतंत्र और नागरिकता के संदर्भ में समझने की करें तो (1) मनमुख स्वभाव और लोकतंत्र का क्षरण-मनमुख नागरिक वह है जो संविधान को केवल अपने हित के औज़ार की तरह देखता है। उसे अधिकार याद रहते हैं,कर्तव्य नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो लोकतंत्रों में बढ़ता ध्रुवीकरण, हिंसक असहमति, टैक्स चोरी, सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग, ये सभी मनमुख नागरिकता के लक्षण हैं।जब,”मैं” राष्ट्र से ऊपर हो जाता है, तब संविधान की आत्मा कमजोर पड़ती है।(2) गुरमुख नागरिकता:- संवैधानिक विवेक की नींव गुरमुख नागरिक संविधान को अपना नैतिक गुरु मानता है। वह कानून के शब्दों के साथ-साथ उसके उद्देश्य को भी समझता है,न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व। ऐसा नागरिक मतदान को केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानता है। विश्व के सफल लोकतंत्रों में नागरिकों का यही गुरमुख स्वभाव संस्थाओं को मजबूत बनाता है। (3) सनमुख लोकतंत्र:अधिकार से आगे मानवता सनमुख नागरिकता लोकतंत्र को केवल राष्ट्र तक सीमित नहीं रखती,बल्कि उसे वैश्विक मानवता से जोड़ती है। पर्यावरण संरक्षण, अल्पसंख्यक अधिकार,शरणार्थी संवेदनशीलता ये सब सनमुख दृष्टि के बिना संभव नहीं। यही दृष्टि संविधान को मानव गरिमा का वैश्विक दस्तावेज़ बनाती है।इसलिए हम कर सकते हैं क़ि यदि नागरिक मनमुख रहेंगे, तो संविधान केवल किताब बनेगा; यदि नागरिक गुरमुख बनेंगे, तो संविधान व्यवस्था बनेगा;और यदि नागरिक सनमुख बनेंगे, तो संविधान मानवता का पथप्रदर्शक बनेगा।
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साथियों बात अगर हम,मनमुख से गुरमुख, सनमुख की यात्रा क़ो भारत के भविष्य युवाओं से जोड़कर समझने की करें तो, युवा ही राष्ट्र का स्वभाव हैं।आज का युवा केवल कल का नागरिक नहीं, बल्कि आज का निर्णायक है। उसका स्वभाव तय करेगा कि भविष्य में राष्ट्र कैसा होगा। यदि युवा मनमुख है, तो तकनीक भी विनाश का औज़ार बनेगी;और यदि युवा गुरमुख-सनमुख है, तो वही तकनीक मानवता की सेवा करेगी। (1) मनमुख युवा: तात्कालिक सफलता का भ्रम-आज का युवा यदि केवल त्वरित प्रसिद्धि, आसान पैसा और सोशल मीडिया की वाहवाही के पीछे भागता है, तो वह मनमुखता की ओर बढ़ रहा है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानसिक तनाव,अवसाद और उद्देश्यहीनता इसी का परिणाम हैं। मनमुख युवा प्रतियोगिता तो जीतना चाहता है, पर धैर्य नहीं रखना चाहता।(2) गुरमुख युवा: कौशल के साथ संस्कार-गुरमुख युवा वह है जो सीखने को गुरु मानता है,शिक्षक,अनुभव, असफलता और अनुशासन को।वह जानता है कि वास्तविक सफलता रातों-रात नहीं आती। विश्व के नवाचार, स्टार्ट-अप और शोध नेतृत्व इसी स्वभाव से निकले हैं। (3) सनमुख युवा: करियर से आगे योगदान- सनमुख युवा अपने करियर को समाज से जोड़ता है। वह पूछता है-मैं क्या बनूँ? के साथ-साथ मैं किसके काम आऊँ? यही युवा जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता और शांति प्रयासों में नेतृत्व करता है।
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साथियों बात अगर हम,मनमुख से गुरमुख, सनमुख की यात्रा क़ो प्रशासनिक, आध्यात्मिक समन्वित स्थिति सुशासन का बाहरी अनुशासन और आत्मशासन की आंतरिक शक्ति इस रूप में समझने की करें तो, शासन की गुणवत्ता शासक के स्वभाव से ही अधिक सफल होने की संभावना रखती है,प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि प्रशासक के स्वभाव से चलता है। इतिहास बताता है कि जब प्रशासक मनमुख होता है, तो नियम भी भ्रष्ट हो जाते हैं; और जब वह गुरमुख-सनमुख होता है, तो सीमित संसाधनों में भी सुशासन संभव हो जाता है।(1) मनमुख प्रशासन:-सत्ता का अहंकार -मनमुख प्रशासक पद को अधिकार समझता है, सेवा नहीं। इससे लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और जन-अविश्वास जन्म लेता है। वैश्विक स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं का मूल कारण यही स्वभाव है।(2) गुरमुख प्रशासन:-नियम +विवेक गुरमुख प्रशासक नियमों को गुरु मानता है, पर विवेक से काम लेता है। वह संविधान, कानून और नीति को आत्मसात करता है। ऐसे प्रशासन से नागरिकों का विश्वास बढ़ता है और संस्थाएँ सशक्त होती हैं। (3) सनमुख नेतृत्व:- सत्ता से सेवा तक- सनमुख प्रशासक सत्ता को साधना मानता है। वह निर्णय लेते समय सबसे कमजोर व्यक्ति को ध्यान में रखता है। यही आध्यात्मिक चेतना प्रशासन को मानवीय बनाती है,जहाँ फाइलों के पीछे चेहरे दिखते हैं।
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साथियों बात हम मनमुख,गुरमुख और सनमुख स्वभाव को समझने की करें तो, (1) मनमुख स्वभाव का तात्पर्य है ऐसा व्यक्ति जो केवल अपने मन, इच्छा, वासना, अहंकार और तात्कालिक लाभ के अनुसार निर्णय लेता है। वह न तो विवेक को महत्व देता है, न ही गुरु, समाज, शास्त्र या नैतिक मूल्यों को। आधुनिक वैश्विक संस्कृति में यह स्वभाव उपभोक्तावाद भोगवाद और अति-व्यक्तिवाद के रूप में व्यापक रूप से दिखाई देता है।राजनीति और शासन में मनमुख प्रवृत्ति के दुष्परिणाम व त्रासदी भयंकर प्रमाण में होती है।अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जब शासक मनमुख स्वभाव से निर्णय लेते हैं, तो सत्ता अहंकार, भ्रष्टाचार और युद्ध को जन्म देती है। इतिहास में कई साम्राज्य केवल इसलिए गिरे क्योंकि उनके नेतृत्व ने जनकल्याण की बजाय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को चुना। यह स्वभाव राष्ट्रों को भी अस्थिर कर देता है। (2) गुरमुख स्वभाव का अर्थ है,गुरु,विवेक,ज्ञान और नैतिक मार्गदर्शन के अनुसार जीवन जीना। यहाँ ‘गुरु’ केवल व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि सत्य, अनुभव, संविधान, नैतिकता और सामूहिक विवेक का प्रतीक है। गुरमुख व्यक्ति अपने मन को अनुशासित करता है, न कि उसका दास बनता है।जब शासन गुरमुख स्वभाव से चलता है, तो नीति-निर्माण में पारदर्शिता, जवाबदेहीऔर न्याय प्राथमिकता बनते हैं। संविधान भी एक प्रकार का ‘गुरु’ है, जो सत्ता को मर्यादा में रखता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुशासन के सफल मॉडल इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।(3) सनमुख स्वभाव का अर्थ है,सत्य, सद्गुण, सेवा और सार्वभौमिक मानव मूल्यों की ओर उन्मुख होना। यह स्वभाव गुरमुख से भी आगे जाकर व्यक्ति को स्वार्थ से परमार्थ की यात्रा पर ले जाता है। यहाँ व्यक्ति केवल अपने या अपने समाज के बारे में नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के बारे में सोचता है।आज़ जब जलवायु परिवर्तन, युद्ध, शरणार्थी संकट और असमानता जैसी वैश्विक समस्याएँ सामने हैं, तब सनमुख स्वभाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। यह स्वभाव ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारता है।अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी संगठनों चिकित्सकों शिक्षकों और स्वयंसेवकों में यह स्वभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही स्वभाव विश्व को अधिक मानवीय बनाता है।सनमुख स्वभाव किसी एक धर्म या परंपरा तक सीमित नहीं है। यह एक सार्वभौमिक नैतिक चेतना है, जो आधुनिक विज्ञान, तकनीक और विकास के साथ भी सामंजस्य बिठा सकती है। यह व्यक्ति को भीतर से मजबूत और बाहर से उपयोगी बनाता है।
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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि सुशासन यानें बाहरी अनुशासन (कानून) आंतरिक अनुशासन यानें स्वभाव,मनमुख से सत्ता बिगड़ती है,गुरमुख से व्यवस्था चलती है,और सनमुख से इतिहास बनता है।आओ,मनमुख स्वभाव छोड़ें।गुरमुख बनकर विवेक अपनाएँ।सनमुख बनकर मानवता को प्राथमिकता दें। यही व्यक्तिगत सफलता, सुशासन और विश्व-कल्याण का साझा मार्ग है।
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-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
2 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: भारत के गौरवशाली सपूत, जिनकी विरासत आज भी राष्ट्र को दिशा देती है
2 जनवरी को हुए निधन भारत के महान व्यक्तित्व
भारत के इतिहास में 2 जनवरी की तिथि अनेक ऐसे महान व्यक्तित्वों के निधन से जुड़ी है, जिन्होंने राजनीति, साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सुधार और स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य योगदान दिया। इन विभूतियों का जीवन संघर्ष, सेवा और राष्ट्रहित के लिए समर्पण की मिसाल है। आइए जानते हैं 2 जनवरी को दिवंगत हुए उन महान लोगों के बारे में, जिनकी स्मृतियाँ आज भी प्रेरणा देती हैं।
बूटा सिंह (निधन: 2 जनवरी 2021)
बूटा सिंह का जन्म पंजाब के फरीदकोट ज़िले में हुआ था। वे भारतीय राजनीति के अनुभवी और प्रभावशाली नेता रहे। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने देश की राजनीति को दिशा दी। वे भारत के गृहमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष भी रहे। बूटा सिंह ने सामाजिक न्याय, संसदीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने संसद को आम नागरिकों के लिए अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास किया। उनका जीवन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक रहा।
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रमाकांत आचरेकर (निधन: 2 जनवरी 2019)
रमाकांत आचरेकर का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ। वे भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान कोचों में गिने जाते हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर, विनोद कांबली जैसे विश्वविख्यात खिलाड़ियों को तराशा। अनुशासन, मेहनत और तकनीकी मजबूती उनकी कोचिंग की पहचान थी। आचरेकर ने भारतीय क्रिकेट को जमीनी स्तर से मजबूत किया और देश को विश्व मंच पर गौरव दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
अनवर जलालपुरी (निधन: 2 जनवरी 2018)
अनवर जलालपुरी का जन्म जलालपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शायर और विद्वान थे। उन्हें यश भारती सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने भगवद गीता का उर्दू अनुवाद कर सांस्कृतिक समन्वय की मिसाल पेश की। उनकी रचनाओं में इंसानियत, प्रेम और सामाजिक सौहार्द की भावना झलकती है। वे साहित्य के माध्यम से समाज को जोड़ने वाले सेतु थे।
वसंत गोवारिकर (निधन: 2 जनवरी 2015)
वसंत गोवारिकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ। वे भारत के अग्रणी वैज्ञानिक और इसरो से जुड़े रहे। पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित गोवारिकर ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ दीं। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने विज्ञान को समाज के विकास से जोड़ने का कार्य किया।
अन्नाराम सुदामा (निधन: 2 जनवरी 2014)
अन्नाराम सुदामा का जन्म राजस्थान में हुआ। वे राजस्थानी भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार थे। उन्होंने लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं को साहित्य के माध्यम से संरक्षित किया। उनकी रचनाएँ ग्रामीण जीवन और लोकभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। वे राजस्थानी साहित्य के स्तंभ माने जाते हैं।
बली राम भगत (निधन: 2 जनवरी 2011)
बली राम भगत का जन्म बिहार में हुआ। वे स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पूर्व लोकसभा अध्यक्ष रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के साथ उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया। उनका जीवन राष्ट्रसेवा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
राजेन्द्र शाह (निधन: 2 जनवरी 2010)
राजेन्द्र शाह गुजरात के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्होंने गुजराती साहित्य को नई दिशा दी। उनकी कविताओं और लेखन में मानवीय संवेदनाएँ और सामाजिक यथार्थ झलकता है। वे साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने वाले रचनाकार थे।
सफ़दर हाशमी (निधन: 2 जनवरी 1989)
सफ़दर हाशमी का जन्म दिल्ली में हुआ। वे मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित नाटककार, कलाकार और निर्देशक थे। जन नाट्य मंच (JANAM) के संस्थापक के रूप में उन्होंने नुक्कड़ नाटक को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उनका बलिदान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया।
हरे कृष्ण मेहताब (निधन: 2 जनवरी 1987)
हरे कृष्ण मेहताब का जन्म ओडिशा में हुआ। वे स्वतंत्रता सेनानी और उड़ीसा के निर्माता नेताओं में से एक थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के रूप में उन्होंने राज्य के विकास और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया।
अजित प्रसाद जैन (निधन: 2 जनवरी 1977)
अजित प्रसाद जैन उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी और केंद्रीय मंत्री रहे। उन्होंने उद्योग और योजना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भारत के आर्थिक विकास की नीतियों के शिल्पकारों में शामिल थे।
डॉ. राधाबाई (निधन: 2 जनवरी 1950)
डॉ. राधाबाई एक प्रसिद्ध महिला स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थीं। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा है।
मौलाना मज़हरुल हक़ (निधन: 2 जनवरी 1950)
मौलाना मज़हरुल हक़ का जन्म पटना, बिहार में हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता और शिक्षाविद थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।
विट्ठल रामजी शिंदे (निधन: 2 जनवरी 1944)
विट्ठल रामजी शिंदे महाराष्ट्र के महान समाज सुधारक थे। उन्होंने दलित उत्थान और सामाजिक समानता के लिए जीवन समर्पित किया। उनका कार्य भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है।
2 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: इतिहास, वीरता, साहित्य और राष्ट्र निर्माण की प्रेरक गाथा
भारत और विश्व के इतिहास में 2 जनवरी एक विशेष दिन है। इस दिन राजनीति, साहित्य, खेल, सेना, समाज सुधार और विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों में योगदान देने वाले अनेक महान व्यक्तित्वों का जन्म हुआ। इन लोगों ने अपने कर्म, विचार और बलिदान से न केवल अपने समय को दिशा दी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने। आइए जानते हैं 2 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्वों के जीवन, जन्म स्थान और देशहित में उनके अमूल्य योगदान के बारे में विस्तार से।
मेजर विवेक गुप्ता (जन्म: 2 जनवरी 1970)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
मेजर विवेक गुप्ता भारतीय सेना के अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक थे। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान असाधारण वीरता का परिचय दिया। दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर आक्रमण करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
मेजर विवेक गुप्ता का योगदान केवल एक सैनिक तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन आज भी भारतीय युवाओं के लिए देशभक्ति, कर्तव्य और साहस की मिसाल है।
बुला चौधरी (जन्म: 2 जनवरी 1970)
जन्म स्थान: बिहार, भारत
बुला चौधरी भारत के सबसे प्रसिद्ध तैराकों में से एक रहे हैं। वे कई अंतरराष्ट्रीय नदियों को तैरकर पार करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने गंगा, अमेज़न, टेम्स और यांग्त्से जैसी नदियों को पार कर भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन किया।
उनकी उपलब्धियों ने साहसिक खेलों को भारत में नई पहचान दिलाई। बुला चौधरी का योगदान खेलों के माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास और सीमाओं को लांघने की प्रेरणा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
लाखा सिंह (जन्म: 2 जनवरी 1965)
जन्म स्थान: पंजाब, भारत
लाखा सिंह भारतीय मुक्केबाज़ी जगत के चर्चित नाम रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और पदक जीते। अपने खेल जीवन में उन्होंने अनुशासन, मेहनत और संघर्ष का उदाहरण प्रस्तुत किया।
भारतीय मुक्केबाज़ी को लोकप्रिय बनाने और युवाओं को इस खेल की ओर आकर्षित करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे खेल के ज़रिए राष्ट्र निर्माण में सहभागी बने।
अश्विनी कुमार चौबे (जन्म: 2 जनवरी 1953)
जन्म स्थान: बक्सर ज़िला, बिहार, भारत
अश्विनी कुमार चौबे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की सेवा की। स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य सुधार और गंगा नदी के संरक्षण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
राजनीति में रहते हुए उन्होंने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी और जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनका योगदान सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों से जुड़ा रहा है।
एस. आर. श्रीनिवास वर्द्धन (जन्म: 2 जनवरी 1940)
जन्म स्थान: आंध्र प्रदेश, भारत (बाद में अमेरिका में कार्यरत)
एस. आर. श्रीनिवास वर्द्धन एक प्रख्यात भारतीय-अमेरिकी गणितज्ञ हैं। उन्होंने संभाव्यता सिद्धांत और सांख्यिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध किया।
उनका कार्य वैश्विक गणितीय समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भारत की बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है।
चन्द्रशेखर कम्बार (जन्म: 2 जनवरी 1937)
जन्म स्थान: कर्नाटक, भारत
चन्द्रशेखर कम्बार कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध कवि, नाटककार और लोक साहित्यकार हैं। उन्होंने ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और सामाजिक यथार्थ को अपनी रचनाओं में जीवंत किया।
उन्हें साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया। उनका योगदान भारतीय भाषाओं और लोक साहित्य के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डी. एन. खुरोदे (जन्म: 2 जनवरी 1906)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र, भारत
डी. एन. खुरोदे भारत के दुग्ध उद्योग के विकास में अग्रणी उद्यमी रहे। उन्होंने संगठित डेयरी व्यवस्था को बढ़ावा दिया, जिससे किसानों को आर्थिक सशक्तिकरण मिला।
उनके प्रयासों से भारत में दुग्ध उत्पादन को नई दिशा मिली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
जैनेन्द्र कुमार (जन्म: 2 जनवरी 1905)
जन्म स्थान: अलीगढ़ ज़िला, उत्तर प्रदेश, भारत
जैनेन्द्र कुमार हिन्दी साहित्य के प्रमुख मनोवैज्ञानिक कथाकार और उपन्यासकार थे। उन्होंने मानव मन की जटिलताओं को गहराई से चित्रित किया।
उनकी रचनाएँ जैसे परख और सुनीता हिन्दी साहित्य में मील का पत्थर हैं। उन्होंने साहित्य को सामाजिक चेतना से जोड़ा।
सुकुमार सेन (जन्म: 2 जनवरी 1899)
जन्म स्थान: बंगाल, भारत
सुकुमार सेन भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत में पहले आम चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की स्थापना में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
मन्नत्तु पद्मनाभन (जन्म: 2 जनवरी 1878)
जन्म स्थान: केरल, भारत
मन्नत्तु पद्मनाभन केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई और शिक्षा तथा समानता को बढ़ावा दिया।उनका जीवन सामाजिक न्याय और सुधार आंदोलनों के लिए प्रेरणास्रोत रहा।
अवैध रूप से संचालित क्लीनिक की जांच, दस्तावेज न देने पर सील की चेतावनी
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगरपालिका क्षेत्र के रुद्रपुर स्टैंड के पास बिना वैध कागजात के संचालित एक क्लीनिक की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने स्थलीय जांच की। यह शिकायत आईजीआरएस के माध्यम से दर्ज कराई गई थी।
महेन चिकित्सालय के प्रभारी अधीक्षक सिद्धार्थ गुप्ता ने बताया कि जयनगर निवासी मुकेश कुमार द्वारा आईजीआरएस पर शिकायत की गई थी कि एक व्यक्ति अवैध रूप से क्लीनिक चला रहा है। शिकायत के आधार पर गठित मेडिकल टीम जब मौके पर पहुंची तो क्लीनिक बंद मिला।
जांच के दौरान क्लीनिक संचालक को नोटिस जारी कर निर्देश दिया गया कि वह 10 दिनों के भीतर अपने सभी वैध दस्तावेज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करे। निर्धारित समयावधि में दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने की स्थिति में संबंधित क्लीनिक के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और आवश्यक अनुमति के किसी भी प्रकार की चिकित्सा गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में ‘स्नेह’- हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग सेंटर की स्थापना
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा छात्रों एवं विश्वविद्यालय समुदाय के समग्र विकास के उद्देश्य से एक नवीन हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह केंद्र पीएम–उषा (PM–USHA) अनुदान की सॉफ्ट स्किल एवं ट्रेनिंग इकाई के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। हाल ही में नैक से A++ मान्यता प्राप्त करने के बाद विश्वविद्यालय में छात्र-केंद्रित, गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित पहलों को नई गति मिली है। इसी क्रम में यह केंद्र ‘स्नेह (SNEH)’ नाम से स्थापित किया जा रहा है, जिसका आशय है—Space to Nurture, Energize and Heal, यानी पोषण, ऊर्जा और उपचार के लिए एक सुरक्षित एवं सकारात्मक स्थान।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि नैक A++ मान्यता के बाद विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, कौशल-विकास और सामाजिक उपयोगिता को भी संस्थागत स्वरूप देना है। उन्होंने कहा कि ‘स्नेह’ केंद्र छात्रों के साथ-साथ समाज, विद्यालयों और कार्यस्थलों के लिए वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित वेल-बीइंग तथा सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप एक संवेदनशील और उत्तरदायी विश्वविद्यालय मॉडल प्रस्तुत करती है।
मनोविज्ञान विभाग के अनुसार वर्तमान समय में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, कर्मचारी और कार्यरत पेशेवर सभी तनाव, समय-दबाव, प्रदर्शन-चिंता और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘स्नेह’ केंद्र को विश्वविद्यालय, समाज, विद्यालय और उद्योग के बीच एक सक्रिय सेतु के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि वैज्ञानिक मनोविज्ञान आधारित प्रशिक्षण व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा सके।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने बताया कि यह केंद्र एक एप्लाइड साइकोलॉजी एवं ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जहां विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र, सामाजिक संस्थाएं तथा कंपनियों और उद्योगों के कर्मचारी विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में संरचित प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे विश्वविद्यालय की आउटरीच और एक्सटेंशन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
‘स्नेह’ केंद्र की सबसे महत्वपूर्ण और उन्नत सुविधा इसका बायोफीडबैक कक्ष होगा, जहां वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से यह मापा जाएगा कि तनाव, घबराहट, क्रोध या मानसिक दबाव की स्थिति में शरीर के भीतर किस प्रकार के जैविक परिवर्तन हो रहे हैं। इन मापों में हृदयगति, श्वसन, त्वचा की विद्युत चालकता, मांसपेशियों का तनाव और ध्यान व एकाग्रता से जुड़े संकेत शामिल होंगे। यह तकनीक व्यक्ति को रीयल-टाइम में अपने शरीर की प्रतिक्रियाएं देखने में सक्षम बनाएगी, जिससे तनाव केवल महसूस की जाने वाली स्थिति न रहकर मापी जा सकने वाली प्रक्रिया बन सकेगी।
मनोविज्ञान विभाग ने बताया कि बायोफीडबैक आधारित प्रशिक्षण में पहले प्रतिभागी की बेसलाइन रिकॉर्डिंग की जाएगी, उसके बाद माइंडफुलनेस, श्वसन अभ्यास, रिलैक्सेशन तकनीक और व्यवहारिक रणनीतियों का अभ्यास कराया जाएगा। प्रशिक्षण के पश्चात दोबारा मापन कर यह देखा जाएगा कि व्यक्ति के शारीरिक संकेतों में कितना सकारात्मक परिवर्तन आया है, जिससे प्रतिभागी स्वयं यह समझ सके कि कौन-सी तकनीक उसके लिए अधिक प्रभावी है।
यह बायोफीडबैक आधारित प्रशिक्षण केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयों में परीक्षा-चिंता और ध्यान-समस्या, समाज एवं सामुदायिक समूहों में तनाव व क्रोध-प्रबंधन, तथा कंपनियों और उद्योगों में कार्यस्थल तनाव, बर्नआउट, प्रदर्शन-चिंता और नेतृत्व विकास जैसे विषयों पर टेलर-मेड प्रशिक्षण मॉड्यूल के रूप में लागू किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों में आत्म-नियमन की व्यावहारिक क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे वे वास्तविक जीवन और कार्य-परिस्थितियों में अपने तनाव और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकें।
डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि बायोफीडबैक आधारित हस्तक्षेप विश्वविद्यालय परिसर में प्रिवेंटिव मेंटल हेल्थ केयर को नई दिशा देंगे। जब व्यक्ति अपने सुधार को आंकड़ों और ग्राफ के रूप में देखता है, तो उसकी भागीदारी और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित होती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि केंद्र में संकलित बायोफीडबैक से जुड़े आंकड़ों का उपयोग गोपनीयता और नैतिक मानकों के अनुरूप अनुसंधान, प्रशिक्षण डिज़ाइन और नीति-निर्माण में किया जाएगा। इस प्रकार ‘स्नेह’ केंद्र मानसिक स्वास्थ्य, सॉफ्ट स्किल विकास, शोध-उन्मुख प्रशिक्षण और समाजोपयोगी सेवाओं का एक समन्वित और वैज्ञानिक मॉडल बनकर उभरेगा।
अंत में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि ‘स्नेह’ केंद्र न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए, बल्कि समाज, विद्यालयों और उद्योग जगत के लिए भी मानसिक स्वास्थ्य और सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण का एक विश्वसनीय और प्रभावी केंद्र बनेगा।
