Tuesday, June 23, 2026
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Delhi Crime: शाहदरा में बुजुर्ग दंपति की हत्या से सनसनी, घर में अलग-अलग कमरों में मिले शव

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली के शाहदरा जिले के राम नगर एक्सटेंशन इलाके में रविवार देर रात एक सनसनीखेज डबल मर्डर की वारदात सामने आई। यहां एक मकान की तीसरी मंजिल पर रहने वाले 75 वर्षीय विरेंद्र कुमार बंसल, जो पेशे से रिटायर्ड शिक्षक थे, और उनकी 65 वर्षीय पत्नी परवेश बंसल की हत्या कर दी गई।

दोनों के शव घर के अलग-अलग कमरों में पड़े मिले। घटना की जानकारी आधी रात करीब 12:30 बजे पुलिस को मिली, जब दंपति के बेटे वैभव बंसल ने पीसीआर कॉल कर बताया कि उनके माता-पिता बेहोश पड़े हैं और शायद उनकी मौत हो चुकी है।

सूचना मिलते ही एमएस पार्क थाना पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में विरेंद्र कुमार बंसल के चेहरे पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका और गहरी हो गई है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया है।

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क्राइम टीम और FSL की जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए क्राइम टीम और एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया। टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और फोटोग्राफी भी की। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और पड़ोसियों से पूछताछ की जा रही है।

लूट की आशंका से इनकार नहीं

पुलिस की प्रारंभिक जांच में लूट के इरादे से हत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच जारी है। इस वारदात ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही हत्याकांड के खुलासे का दावा किया जा रहा है।

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जालंधर (राष्ट्र की परम्परा)। पंजाब के जालंधर जिले के गोराया कस्बे के मोहल्ला गुरु रविदास नगर निवासी मनदीप सिंह करीब तीन साल पहले बेहतर नौकरी और उज्ज्वल भविष्य की तलाश में रूस गया था। परिजनों के अनुसार एजेंटों ने उसे विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा दिया, लेकिन वहां पहुंचते ही हालात पूरी तरह बदल गए।

परिवार का आरोप है कि मनदीप को कथित तौर पर जबरन रूस की सेना में भर्ती कर लिया गया और उसे रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मनदीप शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट नहीं था और उसकी एक टांग में गंभीर समस्या थी, इसके बावजूद उसे युद्ध में झोंक दिया गया।

संपर्क टूटने से बढ़ी चिंता

मनदीप ने शुरुआत में परिवार को फोन कर बताया था कि हालात ठीक नहीं हैं और उसे जबरन सेना में शामिल किया गया है। इसके बाद 1 मार्च 2024 से उसका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिजन महीनों तक बेटे की एक कॉल या संदेश का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

एक साल बाद घर लौटा शव

लगातार प्रयासों के बाद परिवार को जानकारी मिली कि मनदीप की रूस-यूक्रेन जंग में मौत हो चुकी है। शव को ढूंढने और भारत लाने की प्रक्रिया में एक साल से अधिक का समय लग गया। रविवार देर रात मनदीप का शव दिल्ली होते हुए गोराया स्थित उसके घर पहुंचा।

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घर में मचा कोहराम

जैसे ही शव घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां के आंसू नहीं थमे, जबकि पिता ताबूत देखकर फफक-फफक कर रो पड़े। मोहल्ले और आसपास के लोग सांत्वना देने पहुंचे। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों ने एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार से न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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ड्यूटी से लौटा पति, घर मिला खाली; फेसबुक दोस्त संग लाखों के गहने और नकदी लेकर पत्नी फरार

मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाइट गार्ड की दूसरी पत्नी फेसबुक पर बने दोस्त के साथ फरार हो गई। महिला फरार होते समय लाखों रुपये के गहने और नकदी भी अपने साथ ले गई। पीड़ित पति ने मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई है।

नए साल की रात हुआ खुलासा

यह घटना 31 दिसंबर की रात की बताई जा रही है। पीड़ित नाइट गार्ड ने बताया कि जब वह न्यू ईयर ईव पर ड्यूटी पूरी कर घर लौटा, तो घर पूरी तरह खाली था। पत्नी और उसका छोटा बेटा गायब थे। अलमारी की जांच करने पर पता चला कि उसमें रखे कीमती आभूषण और नकदी भी गायब हैं।

फेसबुक दोस्ती बनी फरारी की वजह

पीड़ित के अनुसार, शादी के कुछ साल बाद से उसकी पत्नी मोबाइल फोन में अधिक समय बिताने लगी थी। इसी दौरान उसकी फेसबुक पर एक युवक से दोस्ती हो गई, जो धीरे-धीरे गहरी होती चली गई। पति ने कई बार समझाने और विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी। इसी को लेकर घर में अक्सर विवाद होता रहता था।

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दूसरी शादी से हुआ था एक बेटा

पीड़ित ने बताया कि उसकी पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, जिससे उसके एक बेटा और दो बेटियां हैं। अकेलेपन को दूर करने के लिए उसने वर्ष 2016 में दूसरी शादी की थी। दूसरी पत्नी से उसे एक बेटा हुआ, जिसे महिला अपने प्रेमी के साथ लेकर फरार हो गई है।

पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद पीड़ित पति ने कांटी थाना में शिकायत दर्ज कर पत्नी, बच्चे और चोरी गए सामान की बरामदगी की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और महिला की तलाश शुरू कर दी है।
इस घटना के बाद गांव में चर्चाओं का दौर जारी है। लोग सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और पारिवारिक रिश्तों पर पड़ रहे उसके असर को लेकर चिंता जता रहे हैं।

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गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल, थोड़ी देर में सुनारिया जेल से होगा रिहा

रोहतक/सिरसा (राष्ट्र की परम्परा)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मंजूर कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक, वह थोड़ी देर में जेल से बाहर आएगा। पैरोल की अवधि के दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में ही रहेगा।

15वीं बार जेल से बाहर आएगा राम रहीम

गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम को इससे पहले भी कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। पिछली बार 15 सितंबर को उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी। इस बार की पैरोल के साथ ही राम रहीम 15वीं बार जेल से बाहर आएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैरोल के दौरान उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और वह सिरसा डेरा परिसर से बाहर नहीं जा सकेगा।

किन मामलों में सजा काट रहा है गुरमीत राम रहीम

गुरमीत राम रहीम को CBI कोर्ट ने दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी, यानी कुल 20 साल की कैद। इसके अलावा,

• पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड

• डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्या मामला

इन मामलों में भी उसे दोषी ठहराया जा चुका है। फिलहाल वह सभी मामलों में सजा काट रहा है।

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पैरोल पर उठे सवाल, सरकार का जवाब

राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर विवाद भी लगातार सामने आता रहा है। पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने पैरोल का विरोध करते हुए कहा था कि राम रहीम कोई सामान्य कैदी नहीं बल्कि हार्ड क्रिमिनल है।
हालांकि, हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि राम रहीम जेल में अच्छे आचरण वाला कैदी है और जेल नियमों के तहत एक कैदी को साल में 90 दिन तक की पैरोल दी जा सकती है।

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ओडिशा के ढेंकनाल में अवैध पत्थर खदान में धमाका, कई मजदूरों की मौत की आशंका; राहत कार्य जारी

ढेंकनाल/ओडिशा (राष्ट्र की परम्परा)। ओडिशा के ढेंकनाल जिले में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। जिले के गोपालपुर क्षेत्र में स्थित एक अवैध पत्थर खदान में अचानक जोरदार धमाका हो गया। इस विस्फोट के बाद खदान में काम कर रहे कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में कई मजदूरों की मौत की आशंका है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए। खदान के भीतर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है। मलबा हटाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी मशीनरी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस पत्थर खदान में यह धमाका हुआ, वह अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। बताया जा रहा है कि खदान में ब्लास्टिंग के दौरान यह हादसा हुआ, हालांकि विस्फोट के सटीक कारणों की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और अवैध खनन को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कही है।

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पुलिस का ‘मार्निंग वॉकर चेकिंग’ अभियान, 470 लोगों व 233 वाहनों की हुई जांच

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार को “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया।यह अभियान 04 जनवरी 2026 को प्रातः 05 बजे से 08 बजे तक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित किया गया। अभियान के तहत सभी थाना प्रभारी व थानाध्यक्षों द्वारा मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, आमजन की समस्याओं को मौके पर सुनकर समाधान करना तथा मित्र पुलिसिंग की भावना को सशक्त करना रहा। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की सघन चेकिंग कर विधिविरुद्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई।चेकिंग के दौरान चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी चलने वाले दोपहिया वाहनों, मॉडिफाइड साइलेंसर, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त अवैध असलहा व मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए भी सघन जांच की गई।जनपद के कुल 24 स्थानों पर चलाए गए इस अभियान में पुलिस ने 470 व्यक्तियों एवं 233 वाहनों की जांच की, जबकि नियमों का उल्लंघन करने पर 02 वाहनों का चालान किया गया।पुलिस से संवाद के दौरान नागरिकों ने अभियान की सराहना की और मॉर्निंग वॉक के समय सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आमजन की सुरक्षा, शांति एवं विश्वास को प्राथमिकता देते हुए ऐसे अभियानों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा

जंगलों से पहाड़ों तक: मानव और पर्यावरण का बढ़ता टकराव

सुनीता कुमारी, बिहार

इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि मनुष्य ने पहले जंगल काटकर जानवरों का विनाश किया और अब पर्वत–पहाड़ काटकर पर्यावरण को नष्ट कर रहा है। जिस दिन से मानव ने स्वयं को प्रकृति का स्वामी समझना शुरू किया, उसी दिन से विनाश की पटकथा लिखी जाने लगी।प्रारम्भ में जंगल थे—हरे, घने और जीवन से भरपूर। वे केवल पेड़ों का समूह नहीं थे, बल्कि असंख्य जीव-जंतुओं का घर, नदियों का स्रोत, वर्षा का आधार और पृथ्वी की साँसें थे। किंतु तथाकथित विकास के नाम पर सबसे पहला प्रहार इन्हीं जंगलों पर हुआ। कुल्हाड़ियाँ चलीं, आरे गरजे और देखते-देखते हजारों वर्षों में विकसित वन कुछ ही दशकों में उजाड़ दिए गए।जंगलों के कटने का सबसे पहला और गहरा दुष्परिणाम वन्यजीवों पर पड़ा। उनके आवास नष्ट हुए, भोजन के स्रोत समाप्त हो गए और वे या तो मानव बस्तियों की ओर भटकने लगे या सदा के लिए विलुप्त हो गए। बाघ, हाथी, गैंडे और असंख्य पक्षी—जो कभी जंगलों की पहचान थे—आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मनुष्य ने इसे प्रगति कहा, जबकि यह प्रकृति के संतुलन का सुनियोजित विनाश था।जंगलों के बाद मानव की दृष्टि पर्वतों पर पड़ी। जो पर्वत लाखों वर्षों से पृथ्वी की रीढ़ बनकर खड़े थे, नदियों को जन्म देते थे, मौसम को संतुलित रखते थे और भूस्खलन व भूकंप के प्रभाव को कम करते थे—आज वही पर्वत विकास परियोजनाओं की भेंट चढ़ रहे हैं। पहाड़ों को काटकर सड़कें, सुरंगें, खदानें और शहर बसाए जा रहे हैं। विस्फोटों से पर्वतों की छाती छलनी की जा रही है, मानो वे निर्जीव पत्थरों का ढेर हों।पर्वतों के कटने का प्रभाव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक है। नदियाँ सूख रही हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वर्षा चक्र असंतुलित हो रहा है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। बाढ़, भूस्खलन, भूकंप और सूखा—ये सब प्रकृति की चेतावनियाँ हैं, जिन्हें मनुष्य बार-बार अनदेखा कर रहा है। पर्वतों के साथ-साथ वहाँ रहने वाले लोगों की संस्कृति, आजीविका और भविष्य भी संकट में पड़ रहा है।विडंबना यह है कि मनुष्य स्वयं को सबसे बुद्धिमान प्राणी मानता है, फिर भी सबसे अधिक आत्मघाती निर्णय वही ले रहा है। जंगल काटकर उसने जानवरों का विनाश किया और अब पर्वत काटकर वह अपने ही भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है। पर्यावरण का यह संकट किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है।अब भी समय है कि मनुष्य रुके, सोचे और अपनी दिशा बदले। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना असंभव नहीं है, बशर्ते लालच के स्थान पर संवेदनशीलता और तात्कालिक लाभ के स्थान पर दीर्घकालिक सोच अपनाई जाए। जंगलों का संरक्षण, पर्वतों का सम्मान और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व ही मानव सभ्यता को बचा सकता है।यदि आज भी हम नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें विकासकर्ता नहीं, बल्कि विनाशकर्ता के रूप में याद करेंगी। प्रकृति ने हमें जीवन दिया है—अब यह हमारा दायित्व है कि हम उसके अस्तित्व की रक्षा करें, न कि उसके विनाश की तैयारी।

विश्व ब्रेल दिवस: नेत्रहीनों के लिए उम्मीद और सशक्तिकरण का प्रतीक

नवनीत मिश्र

प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन नेत्रहीन लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले लुई ब्रेल की याद में समर्पित है। लुई ब्रेल ने 19वीं शताब्दी में एक विशेष लिपि विकसित की, जिसे ब्रेल लिपि कहा जाता है। यह लिपि नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने की क्षमता प्रदान करती है और आज भी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता के अवसरों को बढ़ावा देती है।
ब्रेल लिपि केवल अक्षरों और शब्दों का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए आत्मनिर्भर बनने और समाज में समान योगदान देने का एक शक्तिशाली साधन है। इसके माध्यम से नेत्रहीन छात्र विज्ञान, गणित, साहित्य और तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर रहे हैं।
विश्व ब्रेल दिवस न केवल लुई ब्रेल के योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह समाज को यह भी याद दिलाता है कि समान अवसर और समावेशिता कितनी महत्वपूर्ण है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य नेत्रहीनों के अधिकारों, उनकी उपलब्धियों और उनके सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना है।
आइए, हम सभी मिलकर नेत्रहीनों के लिए एक समावेशी और अवसर-संपन्न समाज बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएँ, ताकि हर दृष्टिहीन व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सके और समाज में बराबरी का स्थान पा सके।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को मिली बड़ी जिम्मेदारी, असम चुनाव में प्रियंका गांधी की करेंगे मदद

उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस पार्टी ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए कई राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है। इसी क्रम में असम के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता पार्टी महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी गई है। इस कमेटी में सहारनपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को अहम सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इमरान मसूद असम में संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवार चयन से जुड़े कार्यों में प्रियंका गांधी की सक्रिय रूप से मदद करेंगे। कांग्रेस का यह फैसला आगामी चुनावों को देखते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम स्क्रीनिंग कमेटी में इमरान मसूद की भूमिका

असम के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी में प्रियंका गांधी वाड्रा चेयरपर्सन होंगी, जबकि सदस्य के तौर पर सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और डॉ. सिरिवेला प्रसाद को शामिल किया गया है। इमरान मसूद को संगठनात्मक अनुभव और चुनावी रणनीति की गहरी समझ के चलते यह जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका असम जैसे अहम राज्य में कांग्रेस को मजबूती देगी।

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टी.एस. सिंह देव को भी मिली अहम जिम्मेदारी

कांग्रेस ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी की कमान वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंह देव को सौंपी है। उनके साथ यशोमती ठाकुर, जी.सी. चंद्रशेखर और अनिल कुमार यादव को सदस्य बनाया गया है। यह नियुक्ति दर्शाती है कि पार्टी अनुभवी नेताओं को चुनावी रणनीति में प्रमुख भूमिका देना चाहती है।

अन्य राज्यों के लिए भी बनीं स्क्रीनिंग कमेटियां

कांग्रेस ने केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के लिए भी अलग-अलग स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है।
केरल में मधुसूदन मिस्त्री को चेयरपर्सन बनाया गया है, जबकि सैयद नसीर हुसैन, नीरज डांगी और अभिषेक दत्त सदस्य होंगे।
वहीं पश्चिम बंगाल के लिए बी.के. हरिप्रसाद को चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है, और उनके साथ डॉ. मोहम्मद जावेद, ममता देवी और बी.पी. सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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150 विमान, 30 मिनट और महीनों की तैयारी: अमेरिका ने कैसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को किया गिरफ्तार? पूरी कहानी

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक बड़े सैन्य अभियान में गिरफ्तार कर लिया गया। यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन महज 30 मिनट के भीतर अंजाम दिया गया, जबकि इसकी तैयारी कई महीनों से चल रही थी।

शुक्रवार (2 जनवरी 2026) की सुबह जब राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया पर अपनी सेहत और अन्य मुद्दों पर पोस्ट कर रहे थे, उसी दौरान वेनेजुएला में अमेरिकी सेना ने इस गोपनीय सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस मिशन को “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” नाम दिया गया था।

महीनों की योजना, मिनटों में कार्रवाई

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन की योजना, अभ्यास और रिहर्सल लंबे समय से की जा रही थी। एक बार मिशन शुरू होने के बाद यह पूरा अभियान 30 मिनट से भी कम समय में समाप्त हो गया। कुछ ही घंटों में मादुरो का शासन समाप्त होने का दावा किया गया।

हमले से पहले अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के तट के पास अपनी सैन्य मौजूदगी चुपचाप बढ़ा दी थी। खुफिया एजेंसियां राष्ट्रपति मादुरो की रोजमर्रा की गतिविधियों, उनके ठिकानों और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए हुए थीं।

मादुरो के आवास की हूबहू नक़ल तैयार

AP की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियों ने मादुरो की आदतों से लेकर उनके पहनावे और यहां तक कि पालतू जानवरों तक की जानकारी जुटाई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि ऑपरेशन की तैयारी के लिए मादुरो के आवास की बिल्कुल वैसी ही एक नकली इमारत तैयार की गई थी, जिसमें स्टील के दरवाजे और सुरक्षा ढांचे शामिल थे। इसी मॉडल पर बार-बार अभ्यास किया गया।

रात में हमला, आसमान में अमेरिकी लड़ाकू विमान

ट्रंप ने रात करीब 10:46 बजे इस मिशन को अंतिम मंजूरी दी। मौसम साफ होने का इंतजार किया गया ताकि हेलीकॉप्टर और विमान सुरक्षित उड़ान भर सकें। अमेरिकी हेलीकॉप्टर समुद्र के बेहद निचले स्तर पर उड़ते हुए आगे बढ़े ताकि रडार से बचा जा सके।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में 150 से ज्यादा अमेरिकी विमान वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए और आसमान में सुरक्षा घेरा बनाया गया।

भागने से पहले मादुरो गिरफ्तार

अमेरिकी विशेष बल उस सैन्य अड्डे तक पहुंचे, जहां मादुरो मौजूद थे। स्टील के भारी दरवाजों को तोड़ते हुए कमांडो अंदर घुसे और मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को सुरक्षित कमरे में जाने से पहले ही पकड़ लिया। ट्रंप के अनुसार, स्टील काटने के विशेष उपकरण भी तैयार थे, लेकिन उनकी जरूरत नहीं पड़ी।

अमेरिका ले जाया गया मादुरो

गिरफ्तारी के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को हेलीकॉप्टर से अमेरिकी युद्धपोत तक ले जाया गया और वहां से अमेरिका रवाना किया गया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मादुरो पर न्यूयॉर्क में मुकदमा चलाया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में कुछ अमेरिकी सैनिक घायल हुए, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई।

वेनेजुएला का विरोध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज

वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई में नागरिकों और सैनिकों की मौत का दावा करते हुए मादुरो को देश का वैध राष्ट्रपति बताया और उनकी रिहाई की मांग की।

वहीं अमेरिका समेत कई देशों में इस कार्रवाई की आलोचना भी हो रही है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए एकतरफा युद्ध करार दिया।

मादुरो की गिरफ्तारी पर ओवैसी का तंज: 26/11 मास्टरमाइंड पर उठाया सवाल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की खबर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम पर भारत में भी सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

ओवैसी ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके ही देश से पकड़कर अमेरिका ले जा सकती है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पाकिस्तान जाकर 26/11 आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को भारत वापस ला सकते हैं। उन्होंने इस बयान के जरिए आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए।

वेनेजुएला संकट के बीच भारत की ट्रैवल एडवाइजरी

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला में उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत सरकार ने शनिवार (3 जनवरी 2026) की रात अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को वेनेजुएला की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से सख्ती से बचने की सलाह दी है।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा,

“वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय नागरिकों को वहां गैर-जरूरी यात्रा न करने की सलाह दी जाती है।”
साथ ही, मंत्रालय ने वेनेजुएला में रह रहे भारतीयों से अत्यधिक सतर्कता बरतने, अपनी आवाजाही सीमित रखने और काराकस स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने को कहा है।

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वेनेजुएला में कितने भारतीय?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वेनेजुएला में लगभग 50 अनिवासी भारतीय (NRI) और करीब 30 भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। अमेरिकी कार्रवाई के बाद वहां राजनीतिक अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

रूस और चीन सहित कई प्रमुख देशों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि यह कदम किसी भी संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है।

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पुलिस भर्ती में आयु सीमा: समानता की कसौटी

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा को लेकर उठा सवाल अब केवल एक नियम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हजारों युवाओं के भविष्य और समान अवसर से जुड़ा विषय बन गया है। वर्षों से कठिन परिश्रम कर रहे अनेक अभ्यर्थी सिर्फ आयु सीमा के कारण भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं, जबकि उनकी योग्यता, शारीरिक क्षमता और सेवा-भाव में कोई कमी नहीं है।
आयु और देह किसी जाति, वर्ग या समुदाय को नहीं पहचानती। उम्र सबकी समान गति से बढ़ती है। ऐसे में पुलिस भर्ती जैसी महत्वपूर्ण सेवा में आयु सीमा की छूट को अलग-अलग वर्गों में बांटना समानता की भावना के विपरीत प्रतीत होता है। पुलिस सेवा अनुशासन, समर्पण और जनसेवा की मांग करती है, न कि सामाजिक पहचान की।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में निकली पुलिस भर्तियों में आयु सीमा बढ़ाने की मांग तेज हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विधायक शलभ मणि त्रिपाठी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने अनुरोध किया है कि आयु सीमा में यथोचित बढ़ोतरी की जाए। उनका कहना है कि इससे वर्षों से भर्ती की तैयारी में जुटे हजारों युवाओं को एक और अवसर मिल सकेगा और वे अपनी मेहनत का वास्तविक मूल्यांकन करा पाएंगे।
आज की वास्तविकता यह है कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, संसाधनों के अभाव और रोजगार की तलाश के कारण अनेक युवा समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते। यह समस्या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। ऐसे में आयु सीमा में छूट यदि दी जानी है, तो वह सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को समान रूप से मिलनी चाहिए।
पुलिस भर्ती में समान आयु सीमा और समान छूट न केवल प्रतियोगिता को निष्पक्ष बनाएगी, बल्कि चयन प्रक्रिया में जनता और युवाओं का विश्वास भी बढ़ाएगी। योग्यता, परिश्रम और क्षमता को ही चयन का आधार बनाना ही एक मजबूत और संवेदनशील प्रशासन की पहचान है।
अंततः जब उम्र और देह कोई भेदभाव नहीं मानती, तो पुलिस भर्ती की नीति को भी समानता और न्याय के सिद्धांतों पर खरा उतरना चाहिए।

खलीलाबाद के पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष को मातृ शोक

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के खलीलाबाद नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्यामसुन्दर वर्मा की माता का लंबी अस्वस्थता के बाद निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही नगर में शोक की लहर फैल गई। परिवारजन गहरे दुःख में हैं।
दिवंगत माता समाजसेवी और सरल स्वभाव की महिला थीं। उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की है। बड़ी संख्या में शुभचिंतक शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने उनके आवास पर पहुंच रहे हैं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। परिवारिक जनों से मिली जानकारी के अनुसार दिवंगत आत्मा का अंतिम संस्कार अयोध्या धाम में सरयू तट पर होगा।

महंगाई की मार से त्रस्त महराजगंज, आम आदमी की रसोई और बजट दोनों प्रभावित

डॉ.सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश में लगातार बढ़ती महंगाई का असर अब महराजगंज जिले में गहराई से महसूस किया जाने लगा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, हर वर्ग महंगाई की चपेट में है। सीमित आय में जीवन यापन करने वाले मध्यम वर्ग, किसान और दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन होता जा रहा है।
महराजगंज, नौतनवां, फरेंदा और निचलौल की सब्जी मंडियों में टमाटर, प्याज, आलू और हरी सब्जियों के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। दाल, चावल, आटा और खाद्य तेल की कीमतें भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। बढ़ती कीमतों का सीधा असर लोगों की थाली पर पड़ रहा है, जिससे पोषण का स्तर भी प्रभावित हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर जिले की परिवहन व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण माल ढुलाई और यातायात लागत पहले से ही अधिक रहती है, जिसके कारण आवश्यक वस्तुएं बाजार तक पहुंचते-पहुंचते और महंगी हो जाती हैं। इसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों की परेशानी और बढ़ गई है। डीजल, खाद, बीज और पशु चारे की कीमतों में वृद्धि से खेती और पशुपालन घाटे का सौदा बनते जा रहे हैं। इसका असर दूध, सब्जी और अनाज की कीमतों पर भी पड़ रहा है, जिससे जिले में महंगाई का दायरा और फैलता जा रहा है।
रसोई गैस और बिजली दरों में बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को और बोझिल बना दिया है। कई ग्रामीण परिवार गैस सिलेंडर के बजाय लकड़ी और उपलों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दवाइयों और इलाज के खर्च में वृद्धि ने गरीब परिवारों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के बाजारों में इनका असर सीमित नजर आ रहा है। जमाखोरी, कालाबाजारी और बाजार की प्रभावी निगरानी के अभाव में उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। स्थानीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।
आर्थिक जानकारों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए जिला स्तर पर नियमित बाजार निरीक्षण, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जमाखोरों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ाने और आमदनी में वृद्धि किए बिना महंगाई की मार से राहत संभव नहीं है।
कुल मिलाकर, महराजगंज जिले में महंगाई अब आम जनजीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। आम जनता को राहत दिलाने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है, ताकि जिले में आर्थिक संतुलन बना रहे और जीवन यापन आसान हो सके।

विश्व शांति का शाश्वत मार्ग : सनातन चिंतन की प्रासंगिकता

कैलाश सिंह

महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।आज की वैश्विक परिस्थितियां अशांति, युद्ध, आतंकवाद, वैमनस्य और मानसिक तनाव से घिरी हुई हैं। आधुनिक युग में भौतिक प्रगति ने मानव जीवन को सुविधाजनक तो बनाया, किंतु आंतरिक शांति को गहराई से प्रभावित किया है। ऐसे संकटपूर्ण समय में यदि कोई दर्शन मानवता को स्थायी शांति का मार्ग दिखाता है, तो वह है सनातन चिंतन—जो केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने वाली शाश्वत विचारधारा है।
सनातन चिंतन की मूल भावना “वसुधैव कुटुम्बकम्” है, जिसका आशय है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है। यही विचार विश्व शांति की आधार शिला है। जब मनुष्य स्वयं को समस्त सृष्टि से जुड़ा हुआ अनुभव करता है, तब युद्ध, हिंसा और शोषण की प्रवृत्तियां स्वतः समाप्त होने लगती हैं। ईशावास्यमिदं सर्वम् का सिद्धांत सभी प्राणियों में एक ही चेतना का बोध कराता है, जो सहअस्तित्व और करुणा को जन्म देता है।
वर्तमान समय में जब राष्ट्र स्वार्थ, सत्ता और संसाधनों के लिए आमने-सामने खड़े हैं, तब सनातन चिंतन अहिंसा, संयम और सहिष्णुता का मार्ग दिखाते है। भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी और श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों ने कर्म, करुणा और कर्तव्य के माध्यम से शांति का व्यावहारिक स्वरूप प्रस्तुत किया। श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग यह सिखाता है कि कर्तव्य का पालन करते हुए भी वैराग्य और मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
सनातन चिंतन बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक शांति पर विशेष बल देता है। योग, ध्यान और आत्मचिंतन व्यक्ति के मन को स्थिर कर नकारात्मक और हिंसक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करते हैं। जब व्यक्ति शांत होता है, तभी समाज और राष्ट्र में शांति की स्थापना संभव होती है। आज विश्व जिस मानसिक तनाव, अवसाद और असंतुलन से जूझ रहा है, उसका समाधान सनातन योग-दर्शन में स्पष्ट रूप से निहित है।
पर्यावरण संरक्षण भी सनातन चिंतन का अभिन्न अंग है। प्रकृति को माता मानने की परंपरा मानव को संतुलित और जिम्मेदार जीवन जीने की प्रेरणा देती है। नदियां, पर्वत, वृक्ष और जीव-जंतु—सभी के प्रति सम्मान का भाव ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। आज पर्यावरण विनाश वैश्विक संकट बन चुका है, जिसका समाधान सनातन की प्रकृति-पूजक चेतना में स्पष्ट दिखाई देता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि विश्व केवल सनातन चिंतन को जाने ही नहीं, बल्कि उसके मूल्यों को व्यवहार में उतारे। शांति केवल समझौतों और संधियों से नहीं आती, बल्कि संस्कारों से जन्म लेती है। सनातन चिंतन मनुष्य को पहले मानव बनाता है, फिर किसी राष्ट्र का नागरिक।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि विश्व शांति का मार्ग सनातन चिंतन से होकर ही गुजरता है। यह एक ऐसा शाश्वत दर्शन है, जो समय, सीमा और जाति से परे सम्पूर्ण मानवता को जोड़ता है। यदि विश्व को वास्तव में शांत, सुरक्षित और संतुलित बनाना है, तो सनातन के सिद्धांतों को ग्रंथों तक सीमित न रखकर जीवन में उतारना होगा।