Tuesday, June 23, 2026
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पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी ने पदयात्रा के दौरान गिनाईं सरकार की उपलब्धियां व नीतियां

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

फेफना विधानसभा क्षेत्र के बागपत नाम से मशहूर इलाके में पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी द्वारा “आपका नेता, आपका गांव” अभियान के तहत व्यापक पदयात्रा की गई। इस दौरान उन्होंने कारों, चौहानपुरा, धर्मापुर शांहापुर, बीबीपुर, बढ़वलिया पलिगरा कलां, नसीरपुर कलां, अख्तियारपुर सहित कई गांवों का भ्रमण कर क्षेत्रवासियों से सीधा संवाद स्थापित किया। पदयात्रा के दौरान पूर्व मंत्री ने सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और उपलब्धियों को एक-एक कर ग्रामीणों के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, आवास, राशन और रोजगार के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं, जिनका सीधा लाभ आम जनता को मिल रहा है।पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी ने हर घर संपर्क अभियान के तहत लोगों की समस्याएं और सुझाव सुने तथा संबंधित अधिकारियों को अवगत कराते हुए त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। कई स्थानों पर चौपाल और बैठक आयोजित कर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया गया। उन्होंने नारी शक्ति मिशन, महिला सशक्तिकरण, अपराध नियंत्रण तथा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति को मिल सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से योजनाओं से जुड़ने और उनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। पूर्व मंत्री ने बताया कि 15 दिसंबर से शुरू हुई यह फेफना विधानसभा की पदयात्रा फरवरी माह तक लगातार चलेगी। पदयात्रा में मुनीब राजभर, परमानंद पांडेय, अभिषेक उपाध्याय, रोहित राजभर, मनोज राम, रोहित उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

दहेज हत्या के मामले में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार


थाना चितबड़ागांव पुलिस को मिली बड़ी सफलता
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद बलिया में अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के क्रम में थाना चितबड़ागांव पुलिस को दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना चितबड़ागांव पुलिस टीम ने दहेज हत्या से संबंधित मुकदमे में वांछित एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है। यह कार्रवाई श्रीमान् पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह के कुशल निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) कृपा शंकर के निकट पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी सदर राकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2025 को थाना चितबड़ागांव पर वादी विदेशी राम पुत्र स्वर्गीय रामप्रसाद, निवासी अहिरौला थाना पकड़ी जनपद बलिया द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया था। वादी ने बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री स्नेहा (उम्र लगभग 23 वर्ष) का विवाह मई 2020 में राधेश्याम पुत्र दशरथ राम, निवासी चितेश्वरनगर कस्बा थाना चितबड़ागांव जनपद बलिया के साथ किया था। विवाह के कुछ समय बाद से ही स्नेहा को उसके पति एवं ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा। वादी का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी पुत्री की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई।
वादी की तहरीर के आधार पर थाना चितबड़ागांव पर मु0अ0सं0 224/25 अंतर्गत धारा 80(2), 85 भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम पंजीकृत किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों का गठन किया गया।
इसी क्रम में दिनांक 04 जनवरी 2026 को थानाध्यक्ष दिनेश पाठक मय पुलिस टीम (हेड कांस्टेबल मुनीब यादव, कांस्टेबल मनीष कुमार यादव एवं कांस्टेबल श्रीकांत सोनी) क्षेत्र में गश्त, लंबित विवेचनाओं की समीक्षा, वांछित अभियुक्तों की तलाश एवं अपराध रोकथाम में संलग्न थे। इसी दौरान मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना स्थानीय पर पंजीकृत उपरोक्त मुकदमे में वांछित अभियुक्त दशरथ राम पुत्र स्वर्गीय देवी राम, निवासी चितेश्वरनगर कस्बा थाना चितबड़ागांव जनपद बलिया को मानपुर हनुमान मंदिर, चितबड़ागांव के पास से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई पूर्ण करते हुए उसे माननीय न्यायालय बलिया भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार: मानवता पर कलंक

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

विश्व के लिए अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय विषय है कि बांग्लादेश में निरंतर हिंदू समुदाय के लोगों पर अत्याचार और हत्याओं की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह केवल किसी एक धर्म या समुदाय का प्रश्न नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के अस्तित्व और मूल्यों पर गंभीर आघात है। किसी भी सभ्य समाज में हिंसा, हत्या और अत्याचार को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। दुनिया का कोई भी धर्म या मजहब हिंसा को समर्थन नहीं देता। पैगम्बर मुहम्मद साहब ने मानवता, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया, प्रभु ईसा मसीह ने प्रेम और क्षमा को सर्वोपरि बताया, वहीं भगवान बुद्ध ने अहिंसा और करुणा को जीवन का मूल सिद्धांत माना। इन महान विभूतियों की शिक्षाएं स्पष्ट करती हैं कि हैवानियत और निर्दयता का किसी भी धर्म से कोई संबंध नहीं हो सकता। इसके बावजूद जब किसी देश में अल्पसंख्यकों को केवल उनकी आस्था के कारण निशाना बनाया जाता है, तो यह मानव सभ्यता के लिए शर्मनाक स्थिति बन जाती है।
आज आवश्यकता है कि विश्व के सभी राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय संगठन और मानवाधिकार संस्थाएं इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लें। किसी भी देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और हत्याओं को नजरअंदाज करना अपराध के समान है। दोषी देशों और जिम्मेदार तत्वों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिंसा करने वाले तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे। इसलिए विश्व समुदाय को एकजुट होकर यह संदेश देना होगा कि अत्याचार और हत्या को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
— साहित्यकार डॉ. गया शंकर ‘प्रेमी’

20 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, कोतवाली साइबर सेल ने पीड़ित को दिलाई पूरी रकम वापस

तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई से महराजगंज पुलिस की बड़ी सफलता

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद महराजगंज की कोतवाली साइबर सेल ने एक बार फिर अपनी सतर्कता, तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई से साइबर अपराधियों पर करारा प्रहार करते हुए सराहनीय उपलब्धि हासिल की है।
साइबर ठगी का शिकार हुए एक पीड़ित को पुलिस ने पूरी 20 लाख रुपये की ठगी गई राशि सुरक्षित रूप से वापस दिलाई, जिससे जनपद पुलिस की कार्य-प्रणाली पर आमजन का भरोसा और मजबूत हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत विद्यापति निवासी दुर्गेश पटेल पुत्र देवीशरण साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे। ठगों ने विभिन्न डिजिटल माध्यमों और छलपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल कर उनसे 20 लाख रुपये की बड़ी धनराशि ठग ली। पीड़ित द्वारा इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
शिकायत मिलते ही पुलिस अधीक्षक महराजगंज के निर्देशन में कोतवाली साइबर सेल टीम हरकत में आ गई। टीम ने बैंकिंग चैनलों, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच करते हुए संबंधित बैंकों के नोडल अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया। तत्परता दिखाते हुए फ्रॉड से जुड़े खातों को तत्काल फ्रीज कराया गया, जिससे ठगी गई रकम को इधर-उधर होने से रोका जा सका।
लगातार प्रयासों और सटीक तकनीकी कार्रवाई के परिणामस्वरूप साइबर सेल टीम ने पूरी 20 लाख रुपये की राशि रिकवर कर पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई। रकम वापस मिलने पर पीड़ित दुर्गेश पटेल ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर कार्रवाई न होती, तो उनकी जीवन- भर की पूंजी डूब सकती थी। इस सफलता पर पुलिस अधीक्षक महराजगंज ने साइबर सेल टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनपद पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या डिजिटल लेनदेन के झांसे में न आएं और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
कोतवाली साइबर सेल की यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भरोसे की मिसाल भी बनकर सामने आई है।

संस्कृत भारती के आठ दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। संस्कृत भारती द्वारा आयोजित आठ दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन शनिवार को लखनऊ के निराला नगर शिशु मंदिर के समीप स्थित जेसी गेस्ट हाउस में हुआ। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के पूर्व प्रांत प्रचारक एवं वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने किया।
उद्घाटन अवसर पर सुभाष जी ने संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन तथा समाज में उसकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल धारा है, जिसके माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ किया जा सकता है।
कार्यक्रम में शिवालय संरक्षण समिति के केंद्रीय संगठक, बीटीएसएस के प्रकाशन प्रभाग के राष्ट्रीय प्रभारी एवं प्रशिक्षण वर्ग के वर्गाधिकारी धर्मेंद्र भाईसाहब मंचासीन रहे।
वर्ग स्थल पर संस्कृत भारती के पूर्व प्रचारक एवं वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं ज्योतिर्विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्यामलेश तिवारी, संस्कृत भारती के क्षेत्रीय प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) प्रमोद जी, सत्र के मुख्य अतिथि सुभाष जी तथा वर्गाधिकारी धर्मेंद्र जी उपस्थित रहे।
आठ दिवसीय इस प्रशिक्षण वर्ग में बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों एवं संस्कृत प्रेमियों की सहभागिता दर्ज की गई है।

T20 World Cup 2026: भारत नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, मुस्तफिजुर रहमान के IPL से बाहर होने के बाद BCB का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के आयोजन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए बांग्लादेश की टीम भारत नहीं आएगी। यह दावा बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने सोशल मीडिया के माध्यम से किया है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की हालिया बैठक में लिया गया है। हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आसिफ नजरुल ने सोशल मीडिया पर की पुष्टि

बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने लिखा,

“बांग्लादेश की टीम वर्ल्ड कप खेलने भारत नहीं जाएगी। आज बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने यह फैसला लिया है। हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं, जो बीसीसीआई की हिंसक सांप्रदायिक नीति के संदर्भ में लिया गया है।”
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हलचल तेज हो गई है।

मुस्तफिजुर रहमान विवाद से जुड़ा फैसला

सूत्रों के अनुसार, BCB का यह फैसला मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर किए जाने के बाद लिया गया है। हाल ही में बीसीसीआई ने IPL फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को निर्देश दिया था कि वह मुस्तफिजुर रहमान को अपने स्क्वाड से रिलीज करे। इसके बाद KKR ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया।

पहले भी टल चुकी है भारत-बांग्लादेश सीरीज

गौरतलब है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने हाल ही में अपना घरेलू क्रिकेट शेड्यूल जारी किया था, जिसमें सितंबर 2026 में भारत के खिलाफ सीरीज शामिल है। यह सीरीज पहले 2025 में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया था।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का ग्रुप फॉर्मेट

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में—

भारत को ग्रुप A में रखा गया है

बांग्लादेश को ग्रुप C में शामिल किया गया है

भारत अपना पहला मुकाबला 7 फरवरी को यूएसए के खिलाफ खेलेगा, जबकि बांग्लादेश अपने अभियान की शुरुआत 7 फरवरी को वेस्टइंडीज के खिलाफ करेगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश के मैच भी भारत के बाहर, संभवतः श्रीलंका में कराए जाते हैं या नहीं। यह फैसला आने वाले दिनों में ICC और टूर्नामेंट आयोजकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजनंदन शर्मा का निधन, शिक्षकों में शोक की लहर

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजनंदन शर्मा के असामयिक निधन से प्रदेश भर के शिक्षक समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है। उनके निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ, बिहार की राज्य एवं जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने दिवंगत शिक्षक नेता को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे शिक्षक समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नवनीत कुमार एवं प्रदेश संगठन महामंत्री शिशिर कुमार पांडेय ने संयुक्त शोक संदेश में कहा कि,

“ब्रजनंदन शर्मा आजीवन शिक्षकों के अधिकार, सम्मान और हितों के लिए संघर्षरत रहे। उनका जाना शिक्षक आंदोलन के लिए गहरी क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।”


वहीं प्रदेश अध्यक्ष (शारीरिक शिक्षक प्रकोष्ठ) अशोक कुमार एवं प्रदेशमीडिया प्रभारी मृत्युंजय ठाकुर ने अपने शोक संदेश में कहा कि,
“स्व. ब्रजनंदन शर्मा एक सरल, संघर्षशील और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता थे। उन्होंने संगठन को मजबूती देने के साथ-साथ शिक्षकों की आवाज़ को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुँचाया। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”

परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ, बिहार ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की कामना की है।

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Venezuela Crisis: वेनेजुएला पर अमेरिका के कब्जे से भारत को अरबों डॉलर का फायदा संभव, रूस पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस घटनाक्रम पर भारत सरकार ने चिंता जताई है, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक बदली हुई परिस्थितियों से भारत को अरबों डॉलर का आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लंबे समय से अटका हुआ भारत का करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का बकाया भुगतान अब वापस मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों द्वारा दोबारा तेल उत्पादन शुरू किए जाने का रास्ता भी खुल सकता है।

वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ा सकती है ओएनजीसी

एक समय भारत, वेनेजुएला से रोजाना चार लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का आयात करता था। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद भारत ने 2022 में वेनेजुएला से तेल खरीद बंद कर दी थी।

भारत की प्रमुख विदेशी तेल उत्पादक कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र का संयुक्त संचालन करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आवश्यक तकनीक, उपकरण और सेवाओं की आपूर्ति बाधित हो गई थी, जिससे तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वर्तमान में यहां उत्पादन घटकर 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन तक सिमट गया है।

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भारत को मिल सकता है करीब एक अरब डॉलर का बकाया

वेनेजुएला वर्ष 2014 तक इस परियोजना में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर देय लाभांश के रूप में ओएनजीसी को करीब 53 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान नहीं कर सका। इसके बाद भी लगभग इतनी ही राशि बकाया रह गई। ऑडिट की अनुमति न मिलने के कारण यह मामला लंबे समय से अटका हुआ है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के नियंत्रण के बाद यदि प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो ओएनजीसी सैन क्रिस्टोबल में जरूरी उपकरण पहुंचाकर उत्पादन बढ़ा सकती है। इससे होने वाले राजस्व से कंपनी अपने लगभग एक अरब डॉलर के पुराने बकाए की वसूली कर सकती है।

रूस के लिए भी बढ़ सकती हैं चुनौतियां

वेनेजुएला में बदले हालात का असर रूस पर भी पड़ सकता है। भारत पहले ही अपनी तेल खरीद में विविधता लाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यदि वेनेजुएला से तेल आपूर्ति फिर से सुचारु होती है, तो भारत की रूस से तेल आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।

ओएनजीसी और अन्य भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा सकती हैं। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका, वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PdVSA के पुनर्गठन में अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में नए समीकरण बनेंगे।

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अंश निर्धारण में देरी से पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त से वंचित किसान, 22वीं किश्त पर भी संकट

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। क्षेत्र पंचायत बेलहरी अंतर्गत गांवों के सैकड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किश्त से वंचित रह गए हैं। इसका मुख्य कारण किसानों का अंश निर्धारण (शेयर डिटरमिनेशन) अब तक पूरा न हो पाना बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय रहते सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनके खातों में सम्मान निधि की राशि नहीं पहुंची।

कृषि उपनिदेशक बलिया मनीष कुमार सिंह द्वारा लगातार किसानों से फार्मर रजिस्ट्री शीघ्र कराने की अपील की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी हुई है। संबंधित लेखपालों का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें एसआईआर (SIR) कार्य में ड्यूटी पर लगाए जाने के कारण अंश निर्धारण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लेखपालों के अनुसार, एसआईआर का निर्धारित समय पूरा होने के बाद ही अंश निर्धारण का कार्य शुरू हो पाएगा।

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इस स्थिति को लेकर किसानों में भारी आक्रोश और चिंता व्याप्त है। किसानों का कहना है कि जब 21वीं किश्त ही नहीं मिल पाई, तो अब 22वीं किश्त भी अधर में लटकती नजर आ रही है। इसका सीधा असर उनकी खेती-किसानी पर पड़ रहा है, क्योंकि किसान सम्मान निधि की राशि खाद, बीज और अन्य कृषि आवश्यकताओं में महत्वपूर्ण सहारा बनती है।

पीएम किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों में राजेंद्र सिंह, मनोज सिंह, संजय सिंह, चंद्रशेखर सिंह, भूलन यादव, दिग्विजय सिंह, विनोद कुमार, प्रमोद कुमार सहित सैकड़ों किसान शामिल हैं। सभी किसानों ने जिलाधिकारी बलिया से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से लेखपालों को अंश निर्धारण के कार्य में लगाया जाए, ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ मिल सके और उनकी आर्थिक परेशानी दूर हो सके।

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मटमैला पानी: विकास के दावों पर भारी पड़ती जमीनी हकीकत

देश के स्वच्छता सर्वेक्षणों में लगातार अव्वल रहने वाला इंदौर आज एक ऐसे गंभीर सवाल के घेरे में है, जो सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है—क्या शहर में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है?

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है, बल्कि तथाकथित “विकास मॉडल” की वास्तविकता को भी उजागर कर दिया है। यह घटना बताती है कि चमकदार आंकड़ों और पुरस्कारों के पीछे छिपी जमीनी सच्चाई कितनी भयावह हो सकती है।

शहर में विकास की रफ्तार भले ही तेज दिखाई देती हो, लेकिन नगर निगम द्वारा आपूर्ति किया जा रहा पेयजल आज भी बुनियादी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। कई इलाकों में नालियों के किनारे से गुजरती जर्जर पाइपलाइनें, वर्षों से साफ न हुई जल टंकियां, और बार-बार होने वाली लीकेज—ये सभी कारण मिलकर उस मटमैले और जहरीले पानी को जन्म देते हैं, जो धीरे-धीरे नागरिकों की सेहत और अब उनकी जान पर भारी पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हर बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन हरकत में आता है। आनन-फानन में टंकियों की सफाई, लीकेज सुधारने के अस्थायी निर्देश और जांच समितियों का गठन—ये सब स्थायी समाधान नहीं, बल्कि संकट के बाद निभाई जाने वाली औपचारिकताएं बनकर रह जाती हैं। सवाल यह है कि क्या नागरिकों की जान जाना ही सिस्टम को जगाने की शर्त है?

इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वर्षों से जनप्रतिनिधि सिस्टम पर निर्भर रहकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। निगरानी के अभाव और जवाबदेही की कमी ने लापरवाही को बढ़ावा दिया, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में यदि नाली का पानी मिल जाए, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट प्रमाण है। स्वच्छ जल कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में आवश्यकता किसी दिखावटी व्यवस्था की नहीं, बल्कि ईमानदार, पारदर्शी और नियमित निगरानी तंत्र की है।

समय की मांग है कि—

• पुरानी पाइपलाइनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाए

• जल टंकियों की नियमित और प्रमाणित सफाई सुनिश्चित हो

• जल गुणवत्ता की सार्वजनिक रिपोर्टिंग की जाए

• सबसे महत्वपूर्ण, जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय हो

अब ज़रूरत है कि जनप्रतिनिधि केवल फाइलों और मंचों तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीन पर उतरकर हालात देखें। क्योंकि जब पानी ही ज़हरीला हो जाए, तो विकास के सारे दावे फीके पड़ जाते हैं।
भागीरथपुरा की पहचान किसी त्रासदी से नहीं, बल्कि एक चेतावनी के रूप में होनी चाहिए—कि अब और लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।


संजय एम. तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इंदौर, मध्य प्रदेश

मिशन शक्ति फेज–5.0: देवरिया में बृहद स्तर पर चला ‘बहू-बेटी अभियान’, परित्यक्ता व दहेज पीड़ित महिलाएं हुईं जागरूक

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित मिशन शक्ति अभियान फेज–5.0 के अंतर्गत शनिवार को जनपद देवरिया में व्यापक स्तर पर ‘बहू-बेटी अभियान’ चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद के सभी थानों की मिशन शक्ति टीमों द्वारा संचालित किया गया।

अभियान का मुख्य उद्देश्य परित्यक्ता, तलाकशुदा, निराश्रित एवं दहेज उत्पीड़न की शिकार महिलाओं और बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना रहा।

जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में गांवों और कस्बों में चौपाल एवं जागरूकता सम्मेलन आयोजित किए गए। इस दौरान थाना तरकुलवा के ग्राम सिरवानिया, बघौचघाट के ग्राम पकहाँ, रुद्रपुर के ग्राम सरहस बह समुदा, गौरीबाजार के ग्राम गौरीबुजुर्ग, सलेमपुर के ग्राम औरंगाबाद, लार के ग्राम राउतपार रघेन, भाटपाररानी के ग्राम भिंड मिश्र, भटनी के रामलीला मैदान, खामपार के भिंगारी बाजार, बरहज के पटेल नगर तथा मईल थाना क्षेत्र के ग्राम बकुची सहित कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए।

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मिशन शक्ति टीमों ने महिलाओं को दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी अहम जानकारियां दीं। इसके साथ ही नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के पीड़ित-केन्द्रित प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया गया।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, कन्या सुमंगला योजना, नारी शक्ति वंदन योजना जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही महिला सुरक्षा से जुड़े हेल्पलाइन नंबर 112, 181, 1090, 102, 1076, 1098, 108 एवं 1930 के बारे में भी अवगत कराया गया। जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए।

पुलिस प्रशासन ने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या अपराध की स्थिति में निर्भीक होकर सहायता लें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें।

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Punjab Police Action: जालंधर में 20 और लुधियाना में 80 चाइना डोर बरामद, चार गिरफ्तार

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लुधियाना/अमृतसर (राष्ट्र की परम्परा)। जालंधर के थाना नूरमहल की पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और उनकी गाड़ी से 20 गट्टू चाइना डोर बरामद किए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वरुण और नरेश कुमार के रूप में हुई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी। तलाशी के दौरान वाहन में रखे प्लास्टिक के बोरे में चाइना डोर मिला।
एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने बताया कि चाइना डोर का इस्तेमाल मानव जीवन, पक्षियों और पशुओं के लिए घातक है। इस संबंध में जिला प्रशासन ने पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है। किसी भी उल्लंघना पर कड़ी कार्रवाई होगी।

लुधियाना में कार्रवाई

लुधियाना के अलग-अलग थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक आरोपी से 8 और दूसरे से 72 गट्टू चाइना डोर बरामद किए गए। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे जांच जारी है।

• थाना डेहलों ने करियाना दुकान की आड़ में चाइना डोर बेचने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया।

• थाना डिवीजन छह ने पतंग की दुकान में चाइना डोर बेचने वाले आरोपी को पकड़ा।

अमृतसर में प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि चाइना डोर पर कड़ी पाबंदी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से यह शहरों में धड़ल्ले से आ रही है।
डीसीपी लॉ एंड ऑर्डर विजय आलम सिंह ने कहा कि बच्चों और राहगीरों के जीवन को खतरा है। इस बार सख्ती दिखाई जाएगी और अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि बच्चों को चाइना डोर का इस्तेमाल न करने दें और किसी भी अवैध बिक्री की जानकारी पुलिस को दें। सूचना देने वालों का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

Gorakhpur News: गोरखपुर पुलिस और आयकर विभाग ने पकड़ा 50 लाख रुपये का हवाला कारोबार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज कस्बे के पर्स-बैग व्यापारी राजीव जायसवाल उर्फ राजू को शुक्रवार शाम बस से गोरखपुर आते समय रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया।
जानकारी के अनुसार, राजीव पैदल धर्मशाला बाजार की ओर जा रहा था, तभी दो स्कूटी सवार युवकों ने उसे रुपये से भरा बैग सौंपा। रेलवे चौकी प्रभारी सुधांशु सिंह ने उसे रोकने की कोशिश की। राजीव भागने लगा, लेकिन घेराबंदी के बाद उसे पकड़ लिया गया। तलाशी में बैग से नकदी बरामद हुई।

पूछताछ में राजीव ने शुरुआत में कहा कि वह स्कूटी सवारों को नहीं जानता। उसने भांजे का हवाला भी दिया, लेकिन पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। शनिवार को दूसरी पूछताछ में उसने कहानी बदल दी और बताया कि रकम राजघाट इलाके के एक व्यापारी की है। इसके बाद उस व्यापारी को हिरासत में लिया गया।

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प्रारंभिक जांच में पता चला कि रकम नेपाली करेंसी से भारतीय रुपये में बदलकर भेजी गई थी, और यह रकम हवाला लेनदेन की आशंका है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की पहचान कर हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है।

संदिग्ध कई बार बयान बदल चुका है, जिससे पुलिस को यकीन हुआ कि रकम हवाला लेनदेन से जुड़ी है। राजीव द्वारा बताए गए भांजे का नंबर भी बंद है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Gorakhpur University News: गोरखपुर विश्वविद्यालय ने रचा अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया अध्याय

कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स से 5 वर्षीय एमओयू

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUGU) ने वैश्विक स्तर पर अपनी शैक्षणिक पहचान को और सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स (Canada) के साथ पाँच वर्षीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग समझौता (MoU) किया है, जिसे भारत और कनाडा के बीच शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यह एमओयू भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए तैयार करना है।

छात्र-शिक्षक विनिमय और संयुक्त शोध

समझौते के अंतर्गत छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। विज्ञान, मानविकी और विधि जैसे विषयों में संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही विशेष अकादमिक पाठ्यक्रमों का विकास, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।

स्नातकोत्तर एवं शोध छात्रों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे शोध की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता में वृद्धि हो सके।

कनाडा में डीडीयूजीयू का अकादमिक विस्तार

कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स, कनाडा में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विस्तारित अकादमिक एवं शोध मंच के रूप में कार्य करेगा। इसके अतिरिक्त संयुक्त ऑनलाइन और हाइब्रिड डिग्री कार्यक्रमों की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, संयुक्त प्रकाशन, गोपनीयता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं।

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प्रतिनिधिमंडल और विश्वविद्यालय प्रशासन

कनाडा की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन नरेश कुमार चावड़ा ने किया।
विश्वविद्यालय की ओर से इस एमओयू पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और वित्त अधिकारी जय मंगल राव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कुलपति का बयान

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह समझौता डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सहयोग भारतीय उच्च शिक्षा और वैश्विक हिंदू प्रवासी समुदाय के बीच एक सशक्त बौद्धिक एवं उद्यमशील सेतु का निर्माण करेगा। इससे छात्रों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन, शोध, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के व्यापक अवसर मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय की NAAC A++ मान्यता और आदर्श वाक्य “आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” के अनुरूप है, जो विश्वविद्यालय की वैश्विक सोच और बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है।

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निर्विरोध चुनाव, NOTA और संविधान: क्या यह जन-सहमति का हनन है?

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भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्राप्त है। चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की सहमति और असहमति की सामूहिक अभिव्यक्ति हैं। ऐसे में यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार बचता है और उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है, तब मतदाता की भूमिका कहाँ रह जाती है?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 53(2) के अनुसार, यदि जितनी सीटें हैं उतने ही उम्मीदवार शेष रह जाएँ, तो बिना मतदान के उन्हें निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यह व्यवस्था प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाई गई थी, किंतु आज के लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में यह प्रावधान मतदाता की इच्छा को अदृश्य बना देता है।

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने PUCL बनाम भारत संघ मामले में NOTA को मान्यता दी। इसका उद्देश्य मतदाता को यह अधिकार देना था कि वह चुनाव प्रक्रिया में भाग ले, लेकिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकार न करे। NOTA नकारात्मक सहमति का प्रतीक है—यह कहने का अधिकार कि “मैं लोकतंत्र में विश्वास करता हूँ, लेकिन प्रस्तुत विकल्पों में नहीं।”

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जब चुनाव ही नहीं होता, तो NOTA का अस्तित्व अर्थहीन हो जाता है। एकल उम्मीदवार की स्थिति में मतदाता न समर्थन कर सकता है, न विरोध। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत—चयन (Choice)—को निष्प्रभावी कर देता है। यदि मतदाताओं का बड़ा वर्ग किसी उम्मीदवार को अनुपयुक्त मानता है, फिर भी कानून उसे प्रतिनिधि बना देता है, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि वैधानिक एकाधिकार है।

इस संवैधानिक प्रश्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जहाँ न्यायालय ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए सरकार से विचार की अपेक्षा की है। चुनाव आयोग भले ही निर्विरोध चुनावों को दुर्लभ बताए, परंतु लोकतंत्र में सिद्धांतों का मूल्य आँकड़ों से अधिक होता है।

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आज आवश्यकता है कि धारा 53(2) पर पुनर्विचार हो, नामांकन वापसी पर नियंत्रण लगे और NOTA को वास्तविक प्रभाव मिले। क्योंकि लोकतंत्र केवल जीत नहीं, बल्कि जन-स्वीकृति का उत्सव है।