Monday, July 27, 2026
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महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने सुनीं शिकायतें, 15 दिन में निस्तारण के दिए निर्देश

  • महिला उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
  • निरीक्षण भवन में पीड़ित महिलाओं की जनसुनवाई, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक
  • जिला अस्पताल में कन्या जन्मोत्सव, गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में शामिल होकर नवजात कन्याओं को किया सम्मानित
  • संयुक्त जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर मरीजों की सुविधाओं, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने जनपद भ्रमण के दौरान महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए महिला जनसुनवाई की। उन्होंने अधिकारियों को सभी प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान उन्होंने सबसे पहले तामेश्वर स्थित शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद संयुक्त जिला चिकित्सालय के महिला विंग में आयोजित कन्या जन्मोत्सव, गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान 20 नवजात कन्याओं का जन्मोत्सव केक काटकर मनाया गया। माताओं को मिठाई, फल, बेबी किट और वस्त्र वितरित किए गए, साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधे भी भेंट किए गए।
अस्पताल निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की उपस्थिति और मरीजों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने सभी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई।
इसके बाद खलीलाबाद स्थित निरीक्षण भवन में आयोजित जनसुनवाई, समीक्षा बैठक और प्रेस वार्ता में उन्होंने भाग लिया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के अंतर्गत दो बच्चों को लैपटॉप भी वितरित किए गए।
जनसुनवाई में समाज कल्याण, राजस्व, महिला कल्याण और पुलिस विभाग से संबंधित कुल 10 प्रकरण प्राप्त हुए। अध्यक्ष ने सभी मामलों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पांडेय, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, जिला समाज कल्याण अधिकारी बृजेश कुमार, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी रवीश चंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी सत्येंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बीबीएयू में छात्रावास आवेदन शुरू, 26 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए छात्रावास आवंटन की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पात्र विद्यार्थियों से 26 जुलाई को शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
विश्वविद्यालय की ओर से छात्रावास आवेदन का गूगल फॉर्म लिंक नवप्रवेशित विद्यार्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेज दिया गया है। यदि किसी विद्यार्थी को ई-मेल इनबॉक्स में आवेदन लिंक दिखाई नहीं देता है तो वह अपने स्पैम (Spam) फ़ोल्डर की भी जांच कर सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह आवेदन लिंक केवल बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के विभिन्न पाठ्यक्रमों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया गया है। सभी पात्र विद्यार्थियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है, ताकि छात्रावास आवंटन की आगे की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके।

तहसील घेराव करने जा रहे कांग्रेस नेता को किया हाउस अरेस्ट

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l बुधवार को कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओ संग बरहज तहसील का घेराव करने जा रहे थे कि पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट।
बताते चले मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी जो छात्र छात्राओं द्वारा दिल्ली के जंतर
मंनतर पर अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं को पुलिस ने लाठी से पीटा उसी के विरोध को लेकर सड़क पर उतरे राहुल गाँधी पी एम आवास के सामने धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने राहुल गाँधी एवं अखिलेश यादव सहित भारी संख्या मे कार्यकर्ताओ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके खिलाफ बुधवार को कांग्रेस नेता रविप्रताप सिंह कार्यकर्ताओ संग, अपने घर दलपत बरडीहा से निकलने वाले थे कि, लार पुलिस को इसकी सूचना मील गयी,। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस उनके घर पहुँच कर उन्हें और उनके कार्यकर्ताओ को हाउस अरेस्ट कर लिया।

ऑनलाइन ठगी के शिकार युवक को साइबर पुलिस ने दिलाई 1.28 लाख की राहत

शाहजहाँपुर(राष्ट्र की परम्परा)l ऑनलाइन ठगी के शिकार एक युवक को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी राहत दिलाते हुए उसके खाते में 1.28 लाख रुपये वापस कराए हैं। साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों को समय रहते होल्ड कराया गया, जिससे पीड़ित की आंशिक धनराशि वापस मिल सकी।
साइबर थाना में दर्ज मुकदमा संख्या 09/2026 के अनुसार खुदागंज थाना क्षेत्र निवासी शदिवाकर विक्रम सिंह से जूडियो ट्रेंड की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर 5.23 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई थी। शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की और गोल्डन आवर के दौरान तत्काल कार्रवाई करते हुए ठगी में प्रयुक्त दो बैंक खातों को होल्ड करा दिया। इसके बाद एक बैंक खाते से 1.28 लाख रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए गए।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सौरव दीक्षित के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक नगर देवेन्द्र कुमार तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम शुभम वर्मा के पर्यवेक्षण में साइबर थाना प्रभारी रजनीश कुमार एवं उनकी टीम द्वारा की गई। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और शेष धनराशि वापस कराने के लिए संबंधित बैंकों एवं एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
साइबर थाना प्रभारी रजनीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दें। समय पर शिकायत दर्ज होने से धनराशि फ्रीज कराकर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

डीएम के निर्देश पर कल्कि बायोटेक पर छापा दो दवाओं के नमूने जांच को भेजे

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को बडहरा चौराहा स्थित कल्कि बायोटेक पर छापेमारी कर निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान फर्म के अभिलेखों एवं दवाओं की गहन जांच की गई। जांच के दौरान दो संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर उन्हें राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेज दिया गया।
औषधि निरीक्षक राघवेंद्र सिंह एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रेमचंद के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान फर्म के स्वामी की उपस्थिति में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में मिली कमियों की रिपोर्ट सहायक आयुक्त (औषधि), गोरखपुर मंडल को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
औषधि निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित फर्म के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने कहा कि जनपद में दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में औषधि प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और निगरानी आगे भी लगातार जारी रहेगी।

सड़क दुर्घटना में 70 वर्षीय वृद्ध गंभीर रूप से घायल, मेडिकल कॉलेज रेफर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l बरहज थाना क्षेत्र के मौना चौराहे के पास बुधवार को सड़क दुर्घटना में 70 वर्षीय एक वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, समशेर (70 वर्ष) पुत्र छबरू सैनी, निवासी कपरवार, अपने रिश्तेदारी में पनिका मे पूछार करने जा रहे थे। इसी दौरान मौना चौराहे के पास एक दोपहिया वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची एम्बुलेंस ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बरहज पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज, देवरिया रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार वृद्ध की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

वंदे मातरम विधेयक 2026: राष्ट्रीय सम्मान या अनिवार्य देशभक्ति? संसद में घमासान, संविधान पर छिड़ी बड़ी बहस

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में जुलाई 2026 का मानसून सत्र केवल राजनीतिक टकराव के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों की संवैधानिक स्थिति को लेकर शुरू हुई एक नई बहस के कारण भी लंबे समय तक याद किया जा सकता है।20 जुलाई 2026 को जब यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया,उसी समय विपक्ष ने इसके विरोध में तीखी आपत्ति दर्ज कराई।विभिन्न विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए अन्य तात्कालिक मुद्दों पर चर्चा की मांग की।सदन में लगातार हंगामा होता रहा और विधेयक पर विस्तृत चर्चा प्रारंभ नहीं हो सकी।21 जुलाई 2026 तक की संसदीय स्थिति के अनुसार यह विधेयक प्रस्तुत तो हो चुका था, किंतु उस पर विचार- विमर्श और आगे की विधायी प्रक्रिया गतिरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। अर्थात विधेयक अभी कानून नहीं बना है और उसे संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना शेष है।केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 ने संसद से लेकर न्यायपालिका,संविधान विशेषज्ञों,राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक व्यापक चर्चा को जन्म दिया। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि प्रस्तावित संशोधन का मूल उद्देश्य राष्ट्रगीत वंदे मातरम को वही वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है जो अब तक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन को प्राप्त है।यदि यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में कानून बनता है तो किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करना, उसके गायन में बाधा डालना अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम में उसका अनादर करना तीन वर्ष तक के कारावास जुर्माने या दोनों से दंडनीय अपराध बन सकता है। यहीं से वह संवैधानिक प्रश्न प्रारंभ होता है जिसने पूरे देश में चर्चा को जन्म दिया है,क्या यह राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है?,या फिर यह देशभक्ति को कानून के माध्यम से अनिवार्य बनाने का प्रयास माना जाएगा? 

साथियों, मीडिया में आई जानकारी के अनुसार सरकार का पक्ष अत्यंत स्पष्ट है। केंद्र का कहना है कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गीत को प्रेरणा का स्रोत बनाया। अनेक क्रांतिकारी फांसी के फंदे पर चढ़ते समय वंदे मातरम का उद्घोष करते थे। संविधान सभा के अंतिम चरण में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि जन गण मन राष्ट्रगान होगा जबकि वंदे मातरम को समान सम्मान प्राप्त रहेगा। सरकार का तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए अब समय आ गया है कि इसे भी वैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जानबूझकर इसका अपमान न कर सके। सरकार यह भी कह रही है कि यह संशोधन किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि सटीकता से राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए लाया गया है।

साथियों, यह विधेयक वास्तव में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव है। वर्तमान अधिनियम मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय बनाता है। प्रस्तावित संशोधन के बाद पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करता है, उसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करता है, किसी सार्वजनिक समारोह में उसे रोकने का प्रयास करता है या उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधि करता है, तो उसके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन केवल जानबूझकर किए गए अपमान पर लागू होगा, यह सटीकता से  सामान्य परिस्थितियों अथवा व्यक्तिगत विवेक पर नहीं। 

साथियों, लेकिन यही वह बिंदु है जहां से संवैधानिक विवाद प्रारंभ होता है। विपक्ष का कहना है कि संविधान सभा ने जानबूझकर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच कानूनी अंतर बनाए रखा था। यदि संविधान निर्माताओं की मंशा दोनों को समान कानूनी दर्जा देने की होती तो संविधान में उसी समय इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाता। विपक्षी दलों, विशेषकर सीपीआई (एम), का आरोप है कि सरकार संविधान सभा की मूल भावना को बदलने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार देशभक्ति एक भावनात्मक और नैतिक मूल्य है, जिसे कानून के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि किसी नागरिक के व्यक्तिगत या धार्मिक विश्वास के कारण वह राष्ट्रगीत नहीं गाना चाहता, तो उसे अपराधी नहीं बनाया जा सकता। 

साथियों, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। पत्र में कहा गया कि संविधान सभा ने बहुत सोच-समझकर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की अलग- अलग संवैधानिक स्थिति निर्धारित की थी। पत्र में यह भी कहा गया कि भारत का संविधान नागरिकों को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। ऐसे में किसी गीत को कानून के माध्यम से अनिवार्य सम्मान दिलाने का प्रयास भविष्य में संवैधानिक विवादों को जन्म दे सकता है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रीय अनिवार्यता के बीच सटीकता से  संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 

साथियों, इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पक्ष धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ है। वंदे मातरम मूलतः बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा है। गीत के प्रारंभिक दो अंतरे व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं, जबकि बाद के अंशों में मां दुर्गा सहित कुछ धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख मिलता है। इतिहास में कई मुस्लिम संगठनों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने इन्हीं धार्मिक संदर्भों के आधार पर इसके पूर्ण गायन पर आपत्ति व्यक्त की थी। संविधान सभा ने भी इन ऐतिहासिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए केवल प्रारंभिक अंशों को सार्वजनिक उपयोग के लिए स्वीकार किया था। आलोचकों का कहना है कि यदि इस विधेयक के बाद किसी नागरिक की धार्मिक मान्यता और कानून के बीच टकराव उत्पन्न होता है, तो न्यायपालिका को अत्यंत जटिल संवैधानिक प्रश्नों का सटीकता से सामना करना पड़ सकता है। 

साथियों, इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का 1986 का ऐतिहासिक निर्णय बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य बार-बार चर्चा में आ रहा है। इस मामले में यहोवा विटनेस समुदाय के तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था, हालांकि वे सम्मानपूर्वक खड़े रहे। विद्यालय ने उन्हें निष्कासित कर दिया,लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि किसी नागरिक को उसकी अंतरात्मा के विरुद्ध राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि वह सम्मानपूर्वक खड़ा है और राष्ट्रगान का अपमान नहीं कर रहा, तो केवल गीत न गाने के आधार पर उसे दंडित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय भारतीय संवैधानिक कानून में अंतरात्मा की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यही कारण है कि कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया संशोधन कानून बनता है तो उसकी न्यायिक समीक्षा लगभग निश्चित है। मार्च 2026 में भी इस विषय पर न्यायिक चर्चा हुई थी। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी सरकारी कार्यक्रम में वंदे मातरम बजाया जाता है तो केवल उसके बजने मात्र से प्रत्येक नागरिक पर उसे गाना अनिवार्य नहीं हो जाता। सम्मान प्रदर्शित करना और अनिवार्य रूप से गाना दो अलग-अलग बातें हैं। यह दृष्टिकोण भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है क्योंकि नया संशोधन और न्यायालय की पूर्व व्याख्याएं भविष्य में एक-दूसरे के साथ किस प्रकार संतुलित होंगी, यह अभी सटीकता से  स्पष्ट नहीं है।

साथियों,संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 25 अंतरात्मा तथा धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। दूसरी ओर अनुच्छेद 51ए (क) प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य बताता है कि वह संविधान,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे। उल्लेखनीय है कि इस अनुच्छेद में वंदे मातरम’ का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यही कारण है कि कई विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संसद राष्ट्रगीत को वैधानिक संरक्षण देना चाहती है तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि यह संरक्षण मौलिक अधिकारों के साथ किस प्रकार संतुलित रहेगा।समर्थकों का तर्क है कि विश्व के अनेक देशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर कठोर दंड का प्रावधान है। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान की कानूनी सुरक्षा उचित मानी जाती है तो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरणादायक गीत को भी समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार राष्ट्रीय एकता केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्यों से भी मजबूत होती है। दूसरी ओर आलोचक कहते हैं कि भारत का लोकतांत्रिक मॉडल विविधता, सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है, इसलिए राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करते समय संवैधानिक स्वतंत्रताओं का भी समान महत्व होना चाहिए। 

साथियों, इस पूरे घटनाक्रम ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है क्या देशभक्ति कानून से उत्पन्न होती है या सामाजिक चेतना से? भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास बताता है कि वंदे मातरम  और जन गण मन दोनों ने अलग-अलग समय में राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया। किंतु संविधान निर्माताओं ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी समान महत्व दिया। इसलिए भविष्य की किसी भी कानूनी व्यवस्था को इन दोनों मूल्यों के बीच सटिकता से  संतुलन स्थापित करना होगा। 

साथियों, अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से भी यह बहस महत्वपूर्ण है। विश्व के अनेक लोकतांत्रिक देशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन लगातार न्यायालयों के सामने चुनौती बना रहता है। भारत का यह प्रस्तावित संशोधन भी संभवतः इसी व्यापक वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनेगा कि राष्ट्रीय पहचान की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच सर्वोत्तम संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाए। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 केवल एक दंडात्मक कानून का प्रस्ताव नहीं है,बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों राष्ट्रीय सम्मान,संवैधानिक स्वतंत्रता और नागरिक कर्तव्य के बीच संतुलन स्थापित करने की परीक्षा भी है। यदि विधेयक कानून बनता है तो उसके प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा लगभग निश्चित मानी जा रही है। वहीं यदि संसद में व्यापक सहमति बनती है तो यह राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा सकता है। परंतु यदि सहमति नहीं बनती, तो यह बहस आने वाले वर्षों तक संविधान,न्यायपालिका संसद और समाज के बीच चलने वाले सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक विमर्शों में से एक बनी रह सकती है। भारत जैसे बहुलतावादी लोकतंत्र में यही चुनौती है कि राष्ट्रीय गौरव की रक्षा भी हो, संविधान की आत्मा भी सुरक्षित रहे और नागरिक की अंतरात्मा की स्वतंत्रता भी अक्षुण्ण बनी रहे।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

कांग्रेस के बीना देश में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं – डॉ धर्मेन्द्र पांडेय

संगठन को मजबूत करने की कांग्रेसियों ने बनाई रणनीति

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
कांग्रेस की सरकार के बीना देश मे लोकतंत्र की सुरक्षा सम्भव नहीं हो सकती है, और इसके लिए ग्राम सभा स्तर तक संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है।उक्त बातें नगर के सलाहाबाद वार्ड में कांग्रेस की आयोजित बैठक को सम्बोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि, भाजपा सरकार छात्रों और नौजवानों को उनकी मांग पूरा करने के बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है। उन्होंने कहा महंगाई से जनता पूरी तरह से त्रस्त हो चुकी है। खाद्य सामग्री के दाम बढ़ते जा रहे हैं। जिला महासचिव मार्कण्डेय मिश्र ने कहा कि कांग्रेस हर ग्राम पंचायत में अध्यक्ष की नियुक्ति कर रही है,इसके लिए जनपद के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिना कांग्रेस के मजबूती के जनता का हित सुरक्षित नहीं हो सकता है। ब्लॉक अध्यक्ष मनीष रजक ने कहा कि कांग्रेस को ही दलितों, पिछडों, दबे कुचले लोगों के हित की चिंता है। कांग्रेस का एक एक कार्यकर्ता इसके लिए जनसंघर्ष करने को तैयार है। जिला महासचिव रजनीश प्रसाद ने कहा कि जनता अब जान गई है कांग्रेस के शासन मे देश व जनता सुरक्षित है। जिला सचिव परमानन्द प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस सरकार में ही देश का चौमुखी विकास हो सकता है। कार्यक्रम मे सत्यम पांडेय,परमानन्द प्रसाद, सत्यवान पांडेय, डॉ रमेश कुशवाहा, इस्लाम खान,अवधेश पांडेय, डॉ याहिया अंजुम ,मोहन प्रसाद आदि मौजूद रहे ।

समाजवादी छात्र सभा के नवनियुक्त प्रदेश सचिव अश्वनी गौड़ का भव्य स्वागत

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी छात्र सभा के नवनियुक्त प्रदेश सचिव अश्वनी गौड़ के प्रथम गोरखपुर आगमन पर समाजवादी पार्टी कार्यालय सहित शहर के प्रमुख चौराहों पर कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान फूल-मालाओं से अभिनंदन कर उनके संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दी गईं।
स्वागत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने कहा कि अश्वनी गौड़ के नेतृत्व में समाजवादी छात्र सभा का संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा युवाओं के बीच पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। इस अवसर पर संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम, नगीना प्रसाद साहनी, वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज कुमार शाही, अनूप यादव ईश्वर, इन्द्र प्रताप यादव, खुशियाल चौहान, रोहित यादव, रंजीत गौड़, मनीष गौड़, प्रमोद निषाद, जुगुल निषाद, मोनू चौहान, गिरिजेश यादव, बृजेश यादव सहित बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी एवं समाजवादी छात्र सभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

तख़्त पर बैठी वृद्ध महिला की गिरने से मौत परिजनों मे शोक की लहर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l थाना क्षेत्र बरहज अंतर्गत एक गाँव की वृद्ध महिला की तख्त से गिरने पर मौत हो गयी, परिजनों मे शोक की लहर व्याप्त है।
परिजनों के अनुसार बरहज थाना क्षेत्र ग्राम बड़कागांव निवासी 72 वर्षीय जोखनी देवी पत्नी दीपनारायण प्रसाद, घर से खाना खाकर पड़ोस मे ही किसी के मरने मे गयी थी। वहाँ से ज़ब वह लौटकर घर आयी और घर मे रखे तख्त पर बैठी कि अचानक तख्त से निचे गीर गयी जिससे उनकी हालत गंभीर हो गयी। आनन फानन मे परिजनों द्वारा ईलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरहज लाया गया जहाँ डाक्टरों ने जांच कर उन्हें मृत घोषित के दिया।
परिजन शव को लेकर ग्राम बड़कागांव चले आये।
परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में बीबीएयू का शानदार प्रदर्शन

प्रथम उपविजेता के साथ ‘बेस्ट मेमोरियल’ पुरस्कार भी जीता

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के विधि विभाग, स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रथम जस्टिस डी.पी. गुप्ता मूट कोर्ट प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम उपविजेता (फर्स्ट रनर-अप) का स्थान हासिल किया। बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के प्रमुख विधि संस्थानों की टीमों के बीच बीबीएयू की टीम ने प्रभावशाली मौखिक बहस, गहन विधिक शोध और सशक्त न्यायिक विश्लेषण के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई।
विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व स्पीकर-1 अविरल द्विवेदी, स्पीकर-2 संकल्प भट्ट और रिसर्चर अनुष्का शर्मा ने किया। टीम ने सभी चरणों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई और प्रथम उपविजेता बनने के साथ ₹31 हजार की पुरस्कार राशि प्राप्त की।
टीम ने प्रतियोगिता का प्रतिष्ठित ‘बेस्ट मेमोरियल’ पुरस्कार भी अपने नाम किया। उत्कृष्ट लिखित तर्क, विधिक शोध और मेमोरियल लेखन के लिए दिए गए इस सम्मान के साथ टीम को ₹5,100 की अतिरिक्त पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
प्रतियोगिता का फाइनल मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शमीम अहमद तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष आयोजित हुआ। समापन समारोह में पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश एवं 23वें विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी तथा पूर्व मुख्य न्यायाधीश, मद्रास उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति एम.एन. भंडारी ने विजेता टीमों को सम्मानित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा सहित विभाग के शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी, छह लीटर कच्ची शराब बरामद

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत आबकारी विभाग ने मेंहदावल क्षेत्र में छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान भारी मात्रा में महुआ लहन नष्ट किया गया और कच्ची शराब बरामद कर आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-2 मेंहदावल बसंत प्रसाद और उनकी टीम ने ग्राम भिड़ौरा पिकौरा, सोनबरसा तथा आसपास के क्षेत्रों में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान मौके पर करीब 290 किलोग्राम महुआ लहन नष्ट किया गया। साथ ही छह लीटर कच्ची शराब बरामद की गई।
आबकारी विभाग ने बरामदगी के आधार पर संबंधित आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया कि जनपद में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के विरुद्ध विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

कोर्ट सख्त: अमिताभ ठाकुर प्रकरण में विवेचक से 27 जुलाई तक मांगी प्रगति रिपोर्ट

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर एवं उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर से जुड़े चर्चित आपराधिक मामले में न्यायालय ने जांच की प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), देवरिया ने मामले के विवेचक सोबरन सिंह से 27 जुलाई तक विस्तृत प्रगति आख्या (स्टेटस रिपोर्ट) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
यह आदेश अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी द्वारा न्यायालय में दायर प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के दौरान दिया गया। प्रार्थनापत्र में कहा गया कि मुकदमा दर्ज हुए दस माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस जांच अभी तक अपने तार्किक एवं कानूनी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है और न ही जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि एफआईआर दर्ज होने के लगभग दो माह के भीतर ही अमिताभ ठाकुर को शाहजहांपुर में चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बावजूद विवेचना लंबित रहने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल न होने पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने न्यायालय से अनुरोध किया कि अब तक की समस्त विवेचना की प्रगति रिपोर्ट तलब की जाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में अनावश्यक विलंब उत्तर प्रदेश पुलिस रेगुलेशन के प्रावधानों तथा डीजीपी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग भी की।
गौरतलब है कि 12 सितंबर 2025 को देवरिया कोतवाली में अमिताभ ठाकुर एवं उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के विरुद्ध एक औद्योगिक भूखंड (इंडस्ट्रियल प्लॉट) के आवंटन में कथित जालसाजी और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि प्रभाव का अनुचित उपयोग कर कथित रूप से फर्जी नाम के माध्यम से औद्योगिक प्लॉट प्राप्त किया गया।
मामले में अमिताभ ठाकुर को 10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें लगभग दो माह तक देवरिया जिला कारागार में रखा गया था।
अब न्यायालय द्वारा 27 जुलाई तक प्रगति रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस बहुचर्चित मामले की विवेचना पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। न्यायालय में प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट से आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होने की संभावना है।

सोशल मीडिया और एआई का जिम्मेदार उपयोग ही भविष्य की सफलता की कुंजी: शुभेन्द्र सत्यदेव

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ हेल्थ एंड लाइफ साइंसेज द्वारा आयोजित दीक्षारंभ-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत “जीवन में सोशल मीडिया और एआई की भूमिका” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर अधिवक्ता शुभेन्द्र सत्यदेव ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सकारात्मक उपयोग, संभावनाओं और चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और एआई आज के समय के सबसे प्रभावशाली तकनीकी साधन हैं। यदि इनका विवेकपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाए तो ये शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं इनका दुरुपयोग व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने दैनिक जीवन से जुड़े रोचक प्रसंगों, व्यावहारिक उदाहरणों और हास्यपूर्ण शैली के माध्यम से विषय को सरल बनाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की सोच, व्यवहार और निर्णय क्षमता को भी प्रभावित करने वाला सशक्त मंच बन चुका है। वहीं एआई कार्यों को आसान और तेज बना रहा है, लेकिन यह मानवीय संवेदनाओं, मौलिक चिंतन और रचनात्मकता का विकल्प नहीं बन सकता।
उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान अर्जन, शोध, नवाचार और सकारात्मक संवाद के लिए करने तथा एआई को सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाने का आह्वान किया। साथ ही तकनीक का उपयोग नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ करने पर बल दिया।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया की लत, फेक न्यूज़, साइबर सुरक्षा, डिजिटल नैतिकता और एआई के भविष्य से जुड़े सवाल पूछे। अधिवक्ता शुभेन्द्र सत्यदेव ने सभी प्रश्नों का व्यावहारिक उदाहरणों के साथ विस्तार से उत्तर दिया। उनका संवादात्मक और प्रभावशाली व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा।
कार्यक्रम में अतिथि परिचय शोधार्थी शिवम पाण्डेय ने कराया, जबकि आयोजन समिति के लेफ्टिनेंट डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और एआई के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी बनाना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर अधिष्ठाता प्रो. सुनील कुमार सिंह, डॉ. अमित दुबे, डॉ. प्रेरणा अदिति, डॉ. पवन कन्नौजिया, डॉ. अवैद्यनाथ, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. रश्मि शाही सहित बड़ी संख्या में नवप्रवेशी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

जनहित मुद्दों को लेकर सपा का भुख हड़ताल

जब तक मांगे पूरी नहीं होगी तब तक चलेगा भूख हड़ताल -विजय रावत

बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
मंगलवार को जनहित मुद्दों को लेकर बरहज स्थित काली माँ मंदिर पर सपा नेता विजय रावत ने कार्यकर्ताओ संग भूख हड़ताल शुरू किया। इस अवसर पर सपा नेता विजय रावत ने कहा कि पिछले दस सालों से भाजपा सरकार ने बरहज विधानसभा को विकास कि परिधि से कोसों दूर कर दिया है।
वर्षो से टूटी बरहज से सोनूघाट की सड़क जिसपर आम जनमानस चलने को मजबूर है। लेकिन जनप्रतिनिधिओ को जनता के मुद्दों से कुछ लेना देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि मोहन सेतु अपनी दशा पर रो रहा है, बरहज कि बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।
क्षेत्र की जनता विकास की राह देखते देखते थक चुकी हैऔर यूपी के मुख्यमंत्री बरहज मे आकर केवल लोगो को जुमला देकर चले जाते है।
उन्होंने जनहित के मुद्दों पर शासन प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि बरहज सोनू घाट मार्ग पर तत्काल प्रभाव से गड्ढे पाटे जाए, बरहज विधानसभा की बिजली व्यवस्था जो ध्वस्त हो चुकी हैं उसे तत्काल प्रभाव से ठीक की जाये, मोहन सेतु पर धन आवंटित किया जाये, परसिया विशुनपुर देवरिया कटान रोकने का प्रबंधन किया जाए, नही तो यह भुख हड़ताल लगातार जारी रहेगा। भूख हड़ताल मे मुख्य रूप से विकास यादव, अनरूद यादव, उपेन्द्र सिंह, फरेन्द यादव, भृंगू यादव, छेदी कुमार, रामराज, इस्लाम, गंगा यादव, मुमताज़, दुर्गेश गौड़, भोला गौड़ सहीत आदि लोग मौजूद रहे ।