इटावा (राष्ट्र की परम्परा )
हिंदू समाज पार्टी के उत्तरप्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष गौरव गोस्वामी ने इटावा जिले के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं के दबाव में इटावा जिला प्रशासन एवं भरथना नगर के कई अधिकारी मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं।
गौरव गोस्वामी ने आरोप लगाया कि पानी की सप्लाई के समय जानबूझकर बिजली काट दी जाती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उन्होंने कहा कि यह कृत्य जनहित के खिलाफ है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गौरव गोस्वामी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया है। साथ ही इसकी एक प्रतिलिपि जिलाधिकारी इटावा को भी भेजी गई है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।
कार्यकर्ताओं की ताकत से ही संगठन खड़ा है, राष्ट्रीय नेतृत्व की अपेक्षाओं पर खरा उतरूंगा: पंकज चौधरी
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा की असली ताकत उसका कार्यकर्ता है और संगठन की मजबूती पूरी तरह कार्यकर्ताओं के समर्पण, अनुशासन और निष्ठा पर आधारित है। भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं के सहयोग के बल पर ही वे इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा,
“मैं एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में आया। सभासद से लेकर डिप्टी मेयर और अब प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर कार्यकर्ताओं के सहयोग, परिश्रम और आशीर्वाद से ही संभव हो सका है।”
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का सम्मान करना और उनके साथ आत्मीय संबंध बनाए रखना उनकी राजनीतिक कार्यशैली की पहचान रही है। देश के सबसे बड़े प्रदेश की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपे जाने को उन्होंने सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी बताया।
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पंकज चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय नेतृत्व और शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक जमीनी कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है, जिस पर वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से खरा उतरेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि संगठन को और मजबूत करना, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना और हर कार्यकर्ता को सम्मान देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के बदले हुए परिदृश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने कानून व्यवस्था, विकास और सुशासन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और आज उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है।
आगामी चुनावों को लेकर उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ संगठनात्मक कार्यों में जुटने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि संगठन में संवाद और समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि हर कार्यकर्ता खुद को संगठन का अभिन्न और सम्मानित हिस्सा महसूस करे।
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हिंदी मेरे तन- मन में
हिंदी हमारी प्यारी मातृभाषा है,
देवभाषा संस्कृत की बेटी यह
संस्कृत भाषा की सहभाषा है,
भारतीय बड़े भाग की भाषा है।
हिंदी मेरे तन में, हिंदी मेरे मन में है,
हिंदी मेरी आत्मा में है, प्रकृति में है,
भारतीय भाषाओं की सहोदरा है,
भारत की राष्ट्र भाषा यह हिंदी है।
हिन्दी मैंने माँ से पिता से सीखा है,
मेरे परिवार की भाषा मेरी हिन्दी है,
मेरी मातृभाषा हिंदी सबसे प्यारी है,
विश्व की सब भाषाओं से न्यारी है।
हिंदी की देवनागरी लिपि सरल है,
लिखने में सुरुचिपूर्ण व आसान है,
आदित्य हिंदी जन जन की भाषा है,
यह चिर परिचित अविनाशी भाषा है।
डॉ. कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
Railway Group D Recruitment 2026: 10वीं पास युवाओं के लिए 22 हजार पदों पर बंपर भर्ती, 21 जनवरी से आवेदन शुरू
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। रेलवे में नौकरी पाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप D लेवल-1 भर्ती 2026 की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस भर्ती अभियान के तहत देशभर में करीब 22,000 पदों को भरा जाएगा। खास बात यह है कि इस भर्ती में 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे युवाओं को सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मिलेगा।
किन पदों पर होगी भर्ती?
RRB Group D भर्ती के तहत रेलवे में कई अहम पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं—
• पॉइंट्समैन
• असिस्टेंट
•>ट्रैक मेंटेनर ग्रेड-IV
• इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और अन्य तकनीकी विभागों के ग्रुप D पद
ये सभी पद रेलवे के संचालन और रखरखाव से जुड़े होते हैं और इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आवेदन तिथि
• ऑनलाइन आवेदन शुरू: 21 जनवरी 2026
• आवेदन की अंतिम तिथि: 20 फरवरी 2026
शैक्षणिक योग्यता
• उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है।
• ITI या NAC सर्टिफिकेट रखने वाले उम्मीदवारों को तकनीकी पदों पर प्राथमिकता मिल सकती है।
आयु सीमा
• न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
• अधिकतम आयु: 33 वर्ष
• आरक्षित वर्गों को आयु सीमा में छूट—
OBC: 3 साल
SC/ST: 5 साल
सैलरी कितनी मिलेगी?
चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 में ₹18,000 बेसिक सैलरी मिलेगी। इसके साथ ही DA, HRA और अन्य रेलवे भत्ते भी दिए जाएंगे।
चयन प्रक्रिया
- CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा)
- PET (फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट)
- दस्तावेज़ सत्यापन
- मेडिकल टेस्ट
सभी चरणों में सफल उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया जाएगा।
आवेदन शुल्क
सामान्य/OBC: ₹500 (CBT में शामिल होने पर ₹400 वापस)
SC/ST/महिला/दिव्यांग: ₹250
कैसे करें आवेदन?
• आधिकारिक वेबसाइट http://rrbapply.gov.in पर जाएं
• “Apply Online / New Registration” पर क्लिक करें
• आवश्यक जानकारी भरें और दस्तावेज अपलोड करें
• आवेदन शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करें
दूषित जल: अनदेखी की भारी कीमत
दूषित जल आज केवल पर्यावरण या स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के समग्र विकास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। स्वच्छ जल को जीवन का आधार कहा गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि देश की बड़ी आबादी आज भी असुरक्षित और दूषित पेयजल के भरोसे जीवन जीने को मजबूर है।
आंकड़े स्थिति की भयावहता को स्पष्ट करते हैं। दूषित जल के कारण देश में हर वर्ष लगभग दो लाख लोगों की मौत हो रही है और करीब साठ करोड़ लोग किसी न किसी रूप में जल संकट से प्रभावित हैं। यह विडंबना ही है कि जिस देश में नदियों, तालाबों और जलस्रोतों की समृद्ध परंपरा रही हो, वहां आज लगभग सत्तर प्रतिशत पेयजल दूषित हो चुका है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है।
दूषित जल से फैलने वाली बीमारियां डायरिया, हैजा, टाइफाइड और वायरल हेपेटाइटिस। आज भी स्वास्थ्य तंत्र पर भारी बोझ बनी हुई हैं। बीते वर्षों में जलजनित रोगों के करोड़ों मामले दर्ज होना यह दर्शाता है कि समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरी इलाकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था गंभीर खतरे में है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भविष्य की तस्वीर और भी भयावह हो सकती है। विशेषज्ञों का आकलन है कि वर्ष 2030 तक पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और जीडीपी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह संकट केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव निर्मित भी है। लापरवाह व्यवस्था, कमजोर निगरानी और जिम्मेदारियों से बचने की प्रवृत्ति इसका मूल कारण है।
अब समय आ गया है कि दूषित जल को केवल आंकड़ों और रिपोर्टों का विषय मानने के बजाय इसे प्राथमिकता के साथ नीति और व्यवहार में उतारा जाए। नगर निकायों, जल आपूर्ति एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को जल शुद्धिकरण, टंकियों व पाइपलाइनों की नियमित जांच, और जल गुणवत्ता परीक्षण को अनिवार्य बनाना होगा। इसके साथ ही नागरिकों को भी स्वच्छ जल के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा।
दूषित जल से लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। स्वच्छ जल ही स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य की बुनियाद है। इस सच्चाई को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं।
विकास का शोर और प्रकृति का मौन क्रंदन
कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जब पहाड़ों की छाती चीर दी जाती है, जंगलों को उजाड़ दिया जाता है और जीवनदायिनी नदियों को नालों में तब्दील कर दिया जाता है, तब प्रकृति केवल घायल नहीं होती—वह भीतर तक रोती है। लेकिन इस करुण क्रंदन को सुनने के बजाय आधुनिक मानव गर्व से घोषणा करता है—यह विकास है। यही सोच आज न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व को एक गहरे पर्यावरणीय संकट की ओर धकेल चुकी है।
विकास के नाम पर मानव ने प्रकृति को सबसे बड़ा बलिदान बना दिया है। चौड़ी सड़कों, ऊंची इमारतों, विशाल औद्योगिक इकाइयों और अंधाधुंध खनन परियोजनाओं ने हरियाली को निगल लिया। जंगल कटे तो वर्षा चक्र बिगड़ गया, नदियां सिकुड़ीं तो जल संकट गहराया और हवा में जहर घुला तो बीमारियां आम हो गईं। यह सब होते हुए भी विकास की इस अंधी दौड़ पर कोई ब्रेक नहीं लगाया गया।
पर्यावरणीय असंतुलन के दुष्परिणाम अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन केवल वैज्ञानिक रिपोर्टों की भाषा नहीं रहा, बल्कि आम जनजीवन की सच्चाई बन चुका है। असमय बारिश से किसानों की फसलें चौपट हो रही हैं, भीषण गर्मी ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है, तो कहीं बाढ़ और कहीं सूखे ने लाखों लोगों को विस्थापन की कगार पर ला खड़ा किया है। ये प्राकृतिक आपदाएं नहीं, बल्कि मानव निर्मित संकट हैं—जो हमारी नीतिगत लापरवाही और प्रकृति के प्रति संवेदनहीनता का परिणाम हैं।
जैव विविधता का तेजी से समाप्त होना एक और गंभीर चेतावनी है। वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास छिन रहे हैं, कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं और पारिस्थितिकी तंत्र की संतुलित श्रृंखला टूटती जा रही है। इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ रहा है, लेकिन फिर भी हम इसे केवल पर्यावरण की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
विडंबना यह है कि जिस विकास को मानव अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है, वही विकास आज उसके अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। प्रदूषित हवा सांस लेने लायक नहीं रही, नदियों और भूजल में घुला जहर पीने योग्य नहीं बचा और रासायनिक खेती से उत्पन्न भोजन धीरे-धीरे स्वास्थ्य को खोखला कर रहा है। सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन जीवन की गुणवत्ता घटती चली गई। प्रश्न यह है कि क्या यही विकास का अर्थ है?
आज आवश्यकता है आत्म-मंथन की। यह स्वीकार करना होगा कि विकास और प्रकृति एक-दूसरे के शत्रु नहीं हैं। सच्चा विकास वही है, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़े। टिकाऊ विकास ही एकमात्र रास्ता है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण हो। वृक्षारोपण केवल औपचारिकता न बने, नवीकरणीय ऊर्जा को विकल्प नहीं बल्कि प्राथमिकता बनाया जाए, जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जाए और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
इसके लिए केवल सरकारों या नीतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उपभोग की असीमित प्रवृत्ति पर संयम, प्रकृति के प्रति संवेदनशील व्यवहार और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली ही भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।
यदि मानव ने अब भी प्रकृति की पीड़ा को अनसुना किया, तो आने वाला समय और भी भयावह होगा। तब विकास के सारे दावे खोखले साबित होंगे और सभ्यता की प्रगति केवल कागजी आंकड़ों तक सिमटकर रह जाएगी। सच यही है—प्रकृति बचेगी तो मानव बचेगा। अन्यथा इतिहास गवाह बनेगा कि जब प्रकृति रो रही थी, तब मानव केवल विकास का शोर मचाने में व्यस्त था।
Train Cancelled Alert: 7 से 9 जनवरी तक कई ट्रेनें रद्द, यात्रा से पहले स्टेटस जरूर चेक करें
देश के कई हिस्सों में पड़ रही कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच रेलवे संचालन भी प्रभावित हो रहा है। इसी क्रम में टाटानगर रेल मंडल से होकर गुजरने वाले यात्रियों के लिए अहम सूचना सामने आई है। रेलवे प्रशासन ने 7 जनवरी 2026 से 9 जनवरी 2026 तक कई MEMU और पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल करने का फैसला लिया है। यह निर्णय पूरी तरह यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्यों रद्द की गईं ट्रेनें?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, चक्रधरपुर रेल मंडल के कुछ सेक्शन इन दिनों बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इन इलाकों में जंगल से सटे रेलवे ट्रैक पर जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है। हाथियों के अचानक रेलवे लाइन पर आ जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने अस्थायी रूप से ट्रेनों का संचालन रोकने का निर्णय लिया है।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन स्टेटस अवश्य जांच लें।
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7 से 9 जनवरी 2026 तक रद्द रहने वाली ट्रेनें
• 68010 / 68009 / 68006 / 68011
चक्रधरपुर–टाटानगर–खड़गपुर–टाटानगर–चक्रधरपुर MEMU (दोनों ओर से कैंसिल)
• 68019 / 68020
टाटानगर–गुआ–टाटानगर MEMU (दोनों ओर से कैंसिल)
• 68043 / 68044
टाटानगर–राउरकेला–टाटानगर MEMU (दोनों ओर से कैंसिल)
• 18176 / 18175
झारसुगुड़ा–हटिया–झारसुगुड़ा MEMU (दोनों ओर से कैंसिल)
• 58151 / 58152
बड़ामपहाड़–बंगिरिपोसी–बड़ामपहाड़ पैसेंजर ट्रेन (दोनों ओर से कैंसिल)
यात्रियों के लिए सलाह
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होते ही ट्रेनों का संचालन फिर से बहाल कर दिया जाएगा। तब तक यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की योजना बनाने और यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
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उन्नाव गैंगरेप केस में बड़ा आदेश: राउज एवेन्यू कोर्ट ने पीड़िता की आवाज के फॉरेंसिक सैंपल को दी मंजूरी
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। उन्नाव गैंगरेप मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीड़िता की आवाज का फॉरेंसिक सैंपल लेने और उसे सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) भेजने की अनुमति दे दी है। यह आदेश आरोपी शुभम सिंह की ओर से दायर आवेदन पर दिया गया है। शुभम सिंह, शशि सिंह का बेटा है, जिन्हें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का करीबी बताया जाता है।
यह मामला कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ दर्ज रेप केस से अलग है। आरोप है कि सेंगर द्वारा रेप किए जाने के करीब एक हफ्ते बाद पीड़िता के साथ गैंगरेप किया गया था। इसी गैंगरेप मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश पारित किया।
CFSL भेजा जाएगा वॉयस सैंपल
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज मुरारी प्रसाद सिंह ने आदेश में कहा कि पीड़िता की आवाज का सैंपल लिया जाए और उसे CFSL भेजा जाए। वहां इस सैंपल का मिलान केस रिकॉर्ड का हिस्सा बने ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग से किया जाएगा।
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बचाव पक्ष की दलील
आरोपी शुभम सिंह के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि पीड़िता अब यह मानने से इनकार कर रही है कि रिकॉर्ड की गई बातचीत में आवाज उसी की है, जबकि ट्रायल के दौरान इन रिकॉर्डिंग्स पर भरोसा किया गया था। वकीलों का कहना है कि इन रिकॉर्डिंग्स में ऐसे बयान मौजूद हैं, जो यह संकेत देते हैं कि पीड़िता ने अपनी मर्जी से घर छोड़ा था।
न्यायिक प्रक्रिया में मदद के लिए जांच
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता के बयानों की सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफिक जांच जरूरी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फॉरेंसिक जांच की अनुमति केवल न्यायिक प्रक्रिया में सहायता के उद्देश्य से दी जा रही है। जांच रिपोर्ट की कानूनी वैधता और साक्ष्य के रूप में उसकी विश्वसनीयता का फैसला ट्रायल के उचित चरण में किया जाएगा।
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Telangana News: पिता ने की अपने ही दो मासूमों की हत्या, जानें पूरा मामला
नारायणपेट/तेलंगाना (राष्ट्र की परम्परा)। इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला तेलंगाना के नारायणपेट जिले से सामने आया है। मारिकल गांव में एक पिता ने अपने ही दो मासूम बच्चों की निर्मम हत्या कर दी। आरोपी की पहचान शिवरामुलु के रूप में हुई है। घटना से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
अस्पताल का बहाना, खेत में ले जाकर हत्या
पुलिस के अनुसार, 5 जनवरी को शिवरामुलु ने बच्चों—बेटी रित्विका (8) और बेटे चैतन्य (5)—को अस्पताल ले जाने का बहाना बनाकर घर से निकाला। शराब के नशे में उसने खेत के पास दोनों के गले में फंदा डालकर हत्या की और शवों को कोयल सागर डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में फेंक दिया।
अवैध संबंध बना हत्या की वजह
जांच में सामने आया है कि आरोपी की पत्नी तीन साल पहले तलाक देकर मायके चली गई थी। तब से वह बच्चों का पालन-पोषण कर रहा था, लेकिन उसका किसी महिला से अवैध संबंध था। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी ने बच्चों को अपने संबंधों में रोड़ा मानते हुए यह घिनौना कदम उठाया।
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खुदकुशी की कोशिश, दोस्त को किया फोन
हत्या के बाद आरोपी ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या की कोशिश की और नहर में कूद गया। कुछ देर बाद उसने अपने एक दोस्त को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और नहर से बच्चों के शव बरामद कर सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में भेजे गए। आरोपी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। बच्चों की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
Copper Bottle vs Glass Bottle: सेहत के लिए कौन-सी पानी की बोतल है ज्यादा बेहतर? जानिए फायदे और नुकसान
आजकल लोग सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं। इसी वजह से पानी पीने के लिए कांच (Glass) और तांबे (Copper) की बोतलों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मौसम और जरूरत के हिसाब से लोग बोतल बदलते रहते हैं। कांच की बोतल जहां पानी के स्वाद को बिल्कुल नहीं बदलती, वहीं तांबे की बोतल में रखा पानी स्वाद और गुण—दोनों में फर्क दिखाता है।
हालांकि दोनों ही बोतलें सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन इनके फायदे और सावधानियां अलग-अलग हैं।
तांबे की बोतल में पानी पीने के फायदे
तांबा प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल तत्वों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की परंपरा काफी पुरानी है।
बैक्टीरिया को करता है खत्म
अगर पानी को करीब 16 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा जाए, तो उसमें मौजूद
• ई.कोलाई
• साल्मोनेला
• शिगेला
जैसे हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं।
इम्युनिटी और पाचन के लिए लाभकारी
तांबे का पानी
• रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने
• पाचन सुधारने
• शरीर में एंजाइम्स की कार्यक्षमता बढ़ाने
में मददगार माना जाता है।
त्वचा और जोड़ों के लिए फायदेमंद
तांबा कोलेजन निर्माण में सहायक होता है, जिससे
• त्वचा में निखार
• जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत
मिल सकती है।
सावधानी जरूरी
अगर तांबे की बोतल में
• बहुत गर्म पानी रखा जाए
• या लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सेवन किया जाए
तो तांबा अधिक मात्रा में पानी में घुल सकता है, जिससे
➡ पेट दर्द
➡ मतली
➡ दस्त
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कांच की बोतल में पानी पीने के फायदे
कांच को सबसे न्यूट्रल और सुरक्षित सामग्री माना जाता है।

कोई केमिकल रिएक्शन नहीं
कांच
• पानी के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता
• न स्वाद बदलता है
• न कोई रसायन छोड़ता है
इसलिए यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित विकल्प है।
प्लास्टिक से बेहतर विकल्प
• कांच की बोतल में
• BPA
• Phthalates
जैसे हानिकारक तत्व नहीं होते, जो प्लास्टिक बोतलों में पाए जाते हैं।
ढक्कन की क्वालिटी पर ध्यान जरूरी
हालांकि कांच सुरक्षित है, लेकिन
• खराब क्वालिटी के ढक्कन
• पेंट या पॉलिमर कोटिंग
से पॉलीइथिलीन (PE) के सूक्ष्म कण पानी में मिल सकते हैं। इसलिए कांच की बोतल लेते समय ढक्कन की गुणवत्ता जरूर जांचें।
Copper vs Glass Bottle: कौन-सी बेहतर?
| जरूरत | बेहतर विकल्प |
| रोजाना सुरक्षित पानी | कांच की बोतल |
| इम्युनिटी और डिटॉक्स | तांबे की बोतल |
| स्वाद में बदलाव नहीं | कांच |
| आयुर्वेदिक लाभ | तांबा |
अगर आप सुरक्षित और न्यूट्रल विकल्प चाहते हैं, तो कांच की बोतल बेहतर है। वहीं अगर आप इम्युनिटी बढ़ाने और पारंपरिक फायदे चाहते हैं, तो तांबे की बोतल सीमित और सही तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी बोतल का सही और संतुलित उपयोग ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
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मनोरंजन (राष्ट्र की परम्परा)। रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ ने रिलीज के चार हफ्ते पूरे करने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने जहां पांचवें वीकेंड पर शानदार कमाई की, वहीं वीकडेज में इसके कलेक्शन में गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद फिल्म लगातार नए रिकॉर्ड्स की ओर बढ़ रही है।
‘धुरंधर’ ने 33वें दिन कितनी कमाई की?
फिल्म 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी और शुरुआत से ही दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म देखते-देखते 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो जाएगी। दमदार कहानी, शानदार एक्शन और रणवीर सिंह की पावरफुल परफॉर्मेंस ने इसे चार हफ्तों तक थिएटर्स में हाउसफुल बनाए रखा।
हालांकि, पांचवें हफ्ते में एंट्री के साथ फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी होती नजर आ रही है।
•पांचवें सोमवार को फिल्म ने अब तक का सबसे कम कलेक्शन किया
• पांचवें मंगलवार को कमाई स्थिर रही
सैकनिल्क के मुताबिक,
‘धुरंधर’ ने रिलीज के 33वें दिन (पांचवें मंगलवार) 4.75 करोड़ रुपये की कमाई की है।
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अब तक की कुल कमाई
इसके साथ ही फिल्म की कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 781.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
‘धुरंधर’ बनने जा रही है भारत की चौथी सबसे बड़ी फिल्म
भले ही पांचवें हफ्ते में कमाई में गिरावट आई हो, लेकिन ‘धुरंधर’ अब एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बस इंचभर दूर है।
दरअसल, फिल्म RRR के भारत में लाइफटाइम नेट कलेक्शन 782.2 करोड़ रुपये को पीछे छोड़ने वाली है।
सिर्फ 1.55 करोड़ रुपये और कमाते ही ‘धुरंधर’
• RRR को पछाड़ देगी
• और भारत की चौथी सबसे बड़ी फिल्म बन जाएगी
उम्मीद की जा रही है कि फिल्म पांचवें मंगलवार को ही यह बड़ा मील का पत्थर पार कर लेगी और अपने नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज कराएगी।
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India-US Relations: ट्रंप बोले—‘मोदी मुझसे खुश नहीं’, रूसी तेल पर टैरिफ से भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव
वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों और भारत-अमेरिका रिश्तों पर बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब भी दोस्ताना हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ से प्रधानमंत्री मोदी खुश नहीं हैं।
हाउस GOP रिट्रीट में ट्रंप का बयान
हाउस जीओपी मेंबर रिट्रीट के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षा सौदों और टैरिफ जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई है।
ट्रंप ने कहा,
“मेरे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बहुत अच्छा रिश्ता है, लेकिन वह मुझसे खुश नहीं हैं, क्योंकि भारत को ज्यादा टैरिफ देना पड़ रहा है।”
रूसी तेल पर भारत को 50% टैरिफ
ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीद में कुछ हद तक कमी की है। अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाए हैं, जिनमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीद के कारण लगाए गए हैं।
अमेरिका का तर्क है कि सस्ता रूसी तेल खरीदकर भारत, अप्रत्यक्ष रूप से रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है।
‘मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं’
अपने भाषण में ट्रंप ने कहा,
“मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं। वह मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं।”
उन्होंने टैरिफ नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे अमेरिका को आर्थिक लाभ हो रहा है और यह नीति अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
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टैरिफ और बढ़ाने की चेतावनी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी चिंताओं का समाधान नहीं करता, तो भारतीय उत्पादों पर टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है।
भारत ने ट्रंप का दावा किया खारिज
हालांकि, भारत पहले ही ट्रंप के उस दावे को खारिज कर चुका है, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने का भरोसा दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई बातचीत या वादा नहीं हुआ है।
इस बीच, ट्रंप खुद को रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से बातचीत की है, लेकिन अब तक किसी ठोस नतीजे की घोषणा नहीं हुई है।
Delhi News: तुर्कमान गेट पर MCD बुलडोजर कार्रवाई के दौरान बवाल, भीड़ ने पुलिस पर की पत्थरबाजी, दागे गए आंसू गैस के गोले
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 6-7 जनवरी की देर रात उस वक्त भारी बवाल मच गया, जब फैज-ए-इलाही दरगाह के बाहर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए एमसीडी (MCD) ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान दर्जनों बुलडोजर बारात घर और डायग्नोस्टिक सेंटर को तोड़ते नजर आए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था।
पुलिस पर पथराव, जवाब में आंसू गैस
कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 4-5 दर्जन आंसू गैस के गोले दागे। फैज-ए-इलाही मस्जिद और आसपास के इलाकों में स्थिति कुछ देर के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गई।
तंग गलियों में उतरी पुलिस, उपद्रवियों पर सख्ती
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। तुर्कमान गेट की तंग गलियों में पुलिसकर्मी घुसे और उपद्रवियों को काबू में करने का प्रयास किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद हालात पर नियंत्रण पाया गया।
फिलहाल स्थिति सामान्य: डीसीपी
दिल्ली पुलिस के डीसीपी एन वॉल्सन ने बताया कि प्रशासन से पहले ही सूचना मिली थी कि 6-7 जनवरी की रात अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी। इसी को देखते हुए पुलिस पूरी तरह अलर्ट थी।
उन्होंने कहा,
“कुछ लोगों ने देर रात माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की तत्परता से स्थिति पर काबू पा लिया गया है। फिलहाल इलाके में शांति है।”
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क्या है फैज-ए-इलाही दरगाह विवाद?
दरअसल, एक एनजीओ की ओर से एमसीडी को शिकायत दी गई थी कि रामलीला मैदान की जमीन पर अवैध अतिक्रमण किया गया है। शिकायत के बाद 16 अक्टूबर 2025 को L&DO, DDA और MCD ने संयुक्त सर्वे किया।
सर्वे में 2512 वर्ग फीट PWD की जमीन और फुटपाथ पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई।
इसके बाद एक अन्य फाउंडेशन ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को एमसीडी को निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।
कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश
हाई कोर्ट के आदेश के तहत 6-7 जनवरी की रात हुई कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और कार्रवाई रोकने की कोशिश की, जिससे हालात बिगड़ गए। हालांकि, पुलिस की सतर्कता से स्थिति को काबू में कर लिया गया।
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अमिताभ ठाकुर को न्याय की उम्मीद, शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा, ज़मानत नामंजूर, रिमांड पर फैसला 7 को
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देवरिया जिले में सामाजिक और मानवीय सरोकारों से जुड़े अमिताभ ठाकुर को न्याय दिलाने की कामना को लेकर लोगों ने शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि अमिताभ ठाकुर हमेशा धार्मिक, सामाजिक और मानवीय अवसरों पर सहयोग करते रहे हैं, इसलिए आज उनके समर्थन में समाज आगे आया है।
शिव मंदिर में आयोजित पूजा के दौरान आचार्य श्रीधर पाठक ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि “जो व्यक्ति समाज के लिए सदैव खड़ा रहा, उसके साथ न्याय होना चाहिए। हम सभी यही कामना कर रहे हैं कि सत्य की जीत हो।” पूजा में शामिल लोगों ने शांति, निष्पक्ष न्याय और सकारात्मक निर्णय की आशा जताई।
उधर, न्यायिक मोर्चे पर आज अहम घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजीएम) की अदालत में सुनवाई के बाद अमिताभ ठाकुर की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके साथ ही रिमांड से जुड़ी सुनवाई पूरी हो चुकी है और इस पर अदालत का फैसला कल आने की संभावना है। इस फैसले पर न सिर्फ परिजन बल्कि पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया पर उन्हें भरोसा है और वे निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं। मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और हर अपडेट पर लोगों की नजर है। सामाजिक संगठनों ने भी शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग की है।
