Tuesday, June 23, 2026
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गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, मधवलियां गोसदन बनेगा मॉडल

डीएम ने की गौवंश संरक्षण की गहन समीक्षा, दिए सख्त निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में निराश्रित गोवंशो के संरक्षण एवं संवर्द्धन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिलास्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद की सभी गौशालाओं एवं गौ आश्रय स्थलों की स्थिति, गोवंशो की संख्या, चारा,चिकित्सा सुविधा, ठंड से बचाव और गौशालाओं को स्वावलंबी बनाए जाने को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने गोसदन मधवलियां की विशेष समीक्षा करते हुए उसे जनपद का मॉडल गोसदन के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र न बनाकर आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को अधिक सक्रिय करने तथा ठोस कार्ययोजना बनाकर साइलेज उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए, ताकि जनपद की सभी गौशालाओं में हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही गौकाष्ठ उत्पादन को व्यवस्थित व बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन गौशालाओं में निर्धारित क्षमता से कम गोवंश हैं, वहां के गोवंशो को नजदीकी गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए, जिससे उनकी बेहतर देखभाल एवं प्रबंधन हो सके। सभी गौशालाओं में बीमार गोवंशो के लिए पृथक कक्ष की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पशुपालन विभाग एवं संबंधित बीडीओ/ईओ द्वारा किए गए निरीक्षणों की आख्या का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने जनपद में उपलब्ध गोचर भूमि के सत्यापन और चारा भूमि की फेंसिंग शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश देते हुए बायो फेंसिंग को अपनाने पर बल दिया। गौ आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गौमूत्र, गोबर से बने दीयें, जैविक खाद व अन्य गो-
उत्पादों के निर्माण और विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों से समन्वय स्थापित कर उपयुक्त गौशालाओं का चयन करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने आवंटित गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें और निरीक्षण प्रतिवेदन समय से प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोवंश संरक्षण शासन की प्राथमिकता है, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही मुख्यमंत्री सुपुर्दगी योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर गोवंशो की सुपुर्दगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने जानकारी दी कि जनपद की कुल 31 गौशालाओं में 2776 गोवंश संरक्षित हैं। इनमें गोसदन मधवलियां में 656, अस्थायी गौ आश्रय स्थलों में 693, वृहद गौसंरक्षण केंद्रों में 332, कान्हा हाउस में 266 तथा कांजी हाउस में 191 गोवंश सुरक्षित हैं। जनपद के विभिन्न ब्लॉकों एवं नगरीय निकायों में निराश्रित गोवंशो को पकड़ने के लिए 06 कैटल कैचर वाहन कार्यरत हैं।
इस दौरान बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. हौसला प्रसाद, डीडीओ बी.एन. कन्नौजिया, डीसी एनआरएलएम मो. जाकिर, परियोजना निदेशक राम दरश चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

वार्ड 7 आर्य चौक में मतदाता सूची की खामियां उजागर

भाटपार रानी वार्ड 7 की मतदाता सूची पर सवाल, वर्षों पहले जा चुके लोगों के नाम अब भी दर्ज


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नगर पंचायत भाटपार रानी के वार्ड नंबर 7 आर्य चौक से जुड़ी मतदाता सूची (पीडीएफ) सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूची में ऐसे कई नाम दर्ज पाए गए हैं, जो वर्षों पहले किराए के मकान खाली कर क्षेत्र छोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे लोग भी सूची में शामिल हैं जिन्होंने अपना मकान बेच दिया है और अब उस वार्ड से उनका कोई संबंध नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मतदाता सूची संबंधित बीएलओ द्वारा तैयार की गई है, लेकिन जमीनी सत्यापन में भारी लापरवाही नजर आ रही है। जिन लोगों का वर्षों से इस क्षेत्र में रहना नहीं है, उनके नाम अब तक सूची से नहीं हटाए गए हैं, जिससे आगामी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

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इस पूरे मामले को लेकर व्यापार मंडल के जिला संगठन मंत्री देवेश कुमार गुप्ता ने माननीय उप जिलाधिकारी भाटपार रानी को अवगत कराते हुए मांग की है कि वार्ड नंबर 7 की मतदाता सूची का गंभीरता से अवलोकन कराया जाए। उन्होंने आग्रह किया है कि निष्पक्ष जांच कराकर ऐसे सभी नामों को सूची से हटाया जाए, जो वास्तविक रूप से वार्ड के निवासी नहीं हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते मतदाता सूची में सुधार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है। फर्जी या गलत नामों की मौजूदगी से न केवल मतदान प्रतिशत प्रभावित होगा, बल्कि निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना भी कमजोर होगी।

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स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बीएलओ से स्पष्टीकरण लेगा और आवश्यक सुधार प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करेगा, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन हो सके।

इस संदर्भ में उपजिलाधिकारी से बात करने की कोशिश उनके cug पर की गई पर नेटवर्क समस्या के कारण बात नहीं हो पाई।

गणेश चतुर्दशी पर मातृत्व की अटूट आस्था: निर्जला व्रत रख माताओं ने मांगी पुत्रों की लंबी उम्र

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के परतावल क्षेत्र में गणेश चतुर्दशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और परंपरा के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने अपने पुत्रों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए निर्जला राखी व्रत रखा। दिनभर अन्न और जल त्याग कर माताओं ने संयम, धैर्य और आस्था के साथ व्रत का कठोर पालन किया।

सुबह से ही घर-घर धार्मिक वातावरण देखने को मिला। महिलाओं ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना, व्रत कथा का श्रवण और संतान मंगल के लिए विशेष प्रार्थनाएं कीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात्रि में व्रतधारी महिलाओं ने चंद्र देव के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया, जिसके बाद पुत्र की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत का पारण किया।

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व्रतधारी माताओं ने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी श्रद्धा और निष्ठा से निभाती हैं। गणेश चतुर्दशी पर रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मातृत्व के त्याग, प्रेम और सनातन संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है।

पूरे परतावल क्षेत्र में दिनभर भक्ति, विश्वास और पारिवारिक संस्कारों की सशक्त झलक देखने को मिली, जिसने गणेश चतुर्दशी के पर्व को और अधिक पावन व विशेष बना दिया।

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विशेष पुनरीक्षण अभियान: मतदाता पंजीकरण पर जागरूकता कार्यक्रम

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत मतदाता जागरूकता अभियान का शुभारंभ मंगलवार को प्रभा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके ऐसे युवक-युवतियों को मतदाता सूची में शामिल करना था, जिनका नाम अभी तक दर्ज नहीं हो सका है।

कार्यक्रम में बीएलओ, राजस्व कर्मचारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं मतदाता पंजीकरण कराएंगे और अन्य पात्र नागरिकों को भी मतदान सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करेंगे।

अभियान का उद्घाटन अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जय प्रकाश, एसडीएम खलीलाबाद अरुण कुमार वर्मा तथा महाविद्यालय समन्वयक विजय कुमार राय की उपस्थिति में फीता काटकर किया गया। इसके बाद मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और नाटक के माध्यम से मतदान के महत्व पर प्रभावशाली संदेश दिया।

अपर जिलाधिकारी जय प्रकाश ने कहा कि मतदाता जागरूकता अभियान लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। उन्होंने पात्र नागरिकों से फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और अपात्र प्रविष्टियों के संबंध में बीएलओ के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने की अपील की।

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एसडीएम खलीलाबाद अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य पूरी गंभीरता से किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि 6 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक दावे एवं आपत्तियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मतदान न केवल अधिकार है, बल्कि नागरिकों का महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करता है।
कार्यक्रम में तहसीलदार सदर आनंद कुमार ओझा, नायब तहसीलदार प्रियंका त्रिपाठी, राजेश पांडेय, एग्जीक्यूटिव हेड दिनेश चंद पांडे, प्रधानाचार्य शैलेश त्रिपाठी, नागेंद्र सिंह, रितेश त्रिपाठी, कानूनगो चंद्रभूषण, अर्जुन पाठक, रामचरण कन्नौजिया सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं राजस्व विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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महराजगंज में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम आगमन पर शक्ति प्रदर्शन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज की ऐतिहासिक धरती पर उस समय एक नया राजनीतिक इतिहास रच दिया गया, जब भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम आगमन पर अभूतपूर्व जनसमर्थन देखने को मिला। इस ऐतिहासिक स्वागत कार्यक्रम के प्रमुख सूत्रधार सिसवा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह रहे, जिनके नेतृत्व में पूरा आयोजन शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम दौरे को लेकर जिलेभर में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सिसवा से लेकर प्रमुख मार्गों तक भव्य स्वागत द्वार, भाजपा के झंडे, बैनर-पोस्टर, ढोल-नगाड़ों और गगनभेदी नारों से वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो गया। अनुशासित कार्यकर्ताओं और भारी जनसमर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया कि महराजगंज भाजपा का मजबूत राजनीतिक गढ़ बन चुका है।

पूरे कार्यक्रम की कमान धीरेंद्र प्रताप सिंह के हाथों में रही। उनकी संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक पकड़ और कार्यकर्ताओं से मजबूत जुड़ाव के चलते यह स्वागत कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न रहकर एक विशाल जन-शक्ति प्रदर्शन बन गया।

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इस अवसर पर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। प्रदेश अध्यक्ष का यह प्रथम आगमन महराजगंज के लिए गर्व का विषय है और इससे संगठन को नई ऊर्जा व दिशा मिलेगी।

कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंडल व बूथ स्तर के कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। आयोजन में अनुशासन, उत्साह और संगठनात्मक एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय भूमिका और मजबूत सामाजिक आधार ने इस आयोजन को महराजगंज की राजनीति में एक अहम संकेत के रूप में स्थापित किया है। यह कार्यक्रम आने वाले समय में जिले की राजनीतिक दिशा और समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि: कविता के जरिए मनुष्यता की अनवरत लड़ाई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिंदी साहित्य के निर्भीक और जनपक्षधर कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि पर साहित्य जगत उन्हें गहरी संवेदना और सम्मान के साथ याद कर रहा है। पाषाण केवल कवि नहीं थे, बल्कि कविता को संघर्ष, विवेक और मनुष्यता का औजार मानने वाले विचारक थे। उनकी रचनाओं में सत्ता, दमन, पाखंड और अन्याय के विरुद्ध तीखी चेतना मिलती है, वहीं प्रेम, प्रकृति और करुणा का कोमल स्पर्श भी समान रूप से उपस्थित रहता है।
पाषाण की कविता किसी एक खांचे में बंधी नहीं थी। वे कबीर की निर्भीकता, निराला की विद्रोही चेतना, मुक्तिबोध की आत्मसंघर्षशीलता और नागार्जुन की जनसरोकारिता को अपने समय की भाषा में साधते थे। उनके लिए साहित्य का लक्ष्य स्पष्ट था—मनुष्य को मनुष्य बने रहने की प्रेरणा देना। यही कारण है कि उनकी कविताएं सेंसर, दमन और सत्ता की बंदिशों से परे जाकर पाठक के विवेक को जगाती हैं।
आपातकाल, जनांदोलन, नंदीग्राम जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों से उनका जीवन और लेखन गहरे रूप में जुड़ा रहा। उन्होंने कविता को करुण-विलाप नहीं, बल्कि संघर्ष की कथा बनाया। सोशल मीडिया जैसे आधुनिक मंचों पर भी वे अंतिम समय तक सक्रिय रहे और युवा रचनाकारों को निर्भीक लेखन की प्रेरणा देते रहे।

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देवरिया जनपद की साहित्यिक भूमि से निकले पाषाण की कृतियां—मैं गुरिल्ला हूँ, बन्दूक और नारे, वाल्मीकि की चिंता, चौराहे पर कृष्ण—आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी कविता याद दिलाती है कि असहमति, संवेदना और सत्य ही साहित्य की असली पहचान है। प्रथम पुण्यतिथि पर यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है कि उनकी कविता को पढ़ा जाए, समझा जाए और जिया जाए।

PHC में लापरवाही: बाहरी व्यक्ति मरीजों को बांटता रहा दवा

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के मदनापुर स्थित बुधवाना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। निरीक्षण के दौरान यहां फार्मासिस्ट की कुर्सी पर बैठकर एक बाहरी व्यक्ति मरीजों को दवाएं वितरित करता हुआ पाया गया, जबकि मौके पर डॉक्टर समेत अधिकांश स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित थे। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की सूचना मिलते ही भाजपा विधायक वीर विक्रम सिंह ने अचानक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने दवाएं बांट रहे व्यक्ति से पूछताछ की तो वह स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी नहीं निकला। यह खुलासा होते ही विधायक ने गहरी नाराजगी जताई और तत्काल उच्च अधिकारियों को पूरे प्रकरण की जानकारी दी।

विधायक के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

विधायक की सख्ती के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। घटना के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना किसी नियुक्ति और योग्यता के बाहरी व्यक्ति को दवाएं बांटने की अनुमति कैसे दी गई।

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स्थानीय लोगों में आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों ने इस लापरवाही को मरीजों की जान से खिलवाड़ बताया है। लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों और कर्मचारियों की गैरहाजिरी आम बात हो गई है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य विभाग की इस गंभीर चूक ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां जिम्मेदारी और निगरानी के अभाव में मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

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प्रयागराज माघ मेला 2026: पंचकोसी परिक्रमा, साधुओं की तपस्या और सोशल मीडिया की नई चमक

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रयागराज में चल रहा माघ मेला 2026 आस्था, तपस्या और आधुनिक दौर की सोशल मीडिया संस्कृति का अनोखा संगम बन गया है। शुक्रवार तक चलने वाली पंचकोसी परिक्रमा में साधु-संत श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक नियमों के साथ पंचकोसी मार्ग पर भ्रमण कर रहे हैं। परिक्रमा के पहले दिन गंगा पूजन के पश्चात साधु-संतों का दल अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर पहुंचा, जहां विधिवत दर्शन-पूजन के साथ दिन का समापन हुआ। अंतिम दिन साधु-संतों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन प्रस्तावित है।
माघ मेला प्रशासन के लिए यह आयोजन किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण यातायात, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को संतुलित बनाए रखना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी बनी हुई है।

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इस वर्ष माघ मेले में आस्था के साथ-साथ सोशल मीडिया ट्रेंड भी खासा चर्चा में है। पिछले महाकुंभ में वायरल हुई मोनालिसा के बाद अब माला बेचने आईं बासमती और अफसाना नाम की दो युवतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। बासमती की सादगी और कजरारी आंखें सोशल मीडिया यूजर्स को वीडियो बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जबकि अफसाना का कहना है कि लोग माला खरीदने से ज्यादा सेल्फी लेने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे उनकी बिक्री पर असर पड़ रहा है।

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माघ मेले की आध्यात्मिकता को और गहराई देती है बिहार के सीतामढ़ी जिले के 26 वर्षीय साधु शंकरपुरी की अनोखी तपस्या। उनका दावा है कि वे पिछले सात वर्षों से न बैठे हैं और न लेटे हैं। एक पैर पर खड़े होकर साधना करने वाले शंकरपुरी सोते समय भी लकड़ी के सहारे सिर टिकाते हैं। उनका कहना है कि भोजन से लेकर पूजा-पाठ तक वे हर कार्य खड़े होकर ही करते हैं।
44 दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक आयोजन 3 जनवरी से आरंभ होकर 15 फरवरी को संपन्न होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के संगम में पवित्र स्नान करने की संभावना है।

मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अनिवार्य, नहीं भरा तो फरवरी में नहीं मिलेगा वेतन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के लिए मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण ऑनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है। राज्य में आठ लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी इस आदेश के दायरे में आएंगे। शासनादेश के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण 31 जनवरी 2026 तक पोर्टल पर अपलोड करना होगा। तय समय सीमा तक जानकारी नहीं देने वाले कर्मचारियों को फरवरी माह में जनवरी का वेतन नहीं मिलेगा।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि संपत्ति विवरण ऑनलाइन भरना सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा।

प्रमोशन पर भी पड़ेगा असर

कुछ दिन पहले मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। उन्होंने कहा था कि 31 दिसंबर 2024 तक अर्जित चल-अचल संपत्तियों का विवरण 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। एक जनवरी से पोर्टल पर यह सुविधा सक्रिय कर दी गई है।

मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को समय से विवरण भरने के लिए सुनिश्चित करें। तय समय सीमा में संपत्ति का विवरण न देने को प्रतिकूल माना जाएगा।

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DPC से भी बाहर होंगे लापरवाह कर्मचारी

आदेश में साफ किया गया है कि 1 फरवरी 2025 के बाद आयोजित होने वाली विभागीय प्रोन्नति समितियों (DPC) की बैठकों में ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन पर विचार नहीं किया जाएगा, जिन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण नहीं दिया होगा।

प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब तय समय सीमा में संपत्ति विवरण न देना वेतन और प्रमोशन दोनों पर भारी पड़ सकता है।

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छत्तीसगढ़: सुकमा में 26 नक्सलियों का सरेंडर, 13 माओवादियों पर था 65 लाख का इनाम, 7 महिलाएं भी शामिल

सुकमा/छत्तीसगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 26 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। सरेंडर करने वाले माओवादियों में 13 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में सात महिला नक्सली भी शामिल हैं।

सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि सभी नक्सलियों ने राज्य सरकार की “पूना मार्गेम” (नई राह) पहल और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ा है।

PLGA और कई डिवीजनों में थे सक्रिय

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली माओवादियों की पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा सीमा डिवीजन में सक्रिय थे। ये नक्सली छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़, सुकमा और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं।

लाली उर्फ मुचाकी पर था 10 लाख का इनाम

सरेंडर करने वालों में लाली उर्फ मुचाकी आयते लखमू (35) सबसे बड़ा नाम है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह कंपनी पार्टी समिति की सदस्य रही है। मुचाकी 2017 में ओडिशा के कोरापुट रोड पर हुए IED विस्फोट में शामिल थी, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी।

इसके अलावा चार अन्य प्रमुख नक्सली—

• हेमला लखमा (41)
• अस्मिता उर्फ कमलू सन्नी (20)
• रामबती उर्फ पदम जोगी (21)
• सुंदरम पाले (20)

इन सभी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

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2020 मिनपा हमले में शामिल था लखमा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हेमला लखमा 2020 में सुकमा के मिनपा में हुए नक्सली हमले में शामिल था, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

अन्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में तीन पर 5-5 लाख रुपये, एक पर 3 लाख रुपये, एक पर 2 लाख रुपये और तीन नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

सरेंडर के बाद आर्थिक सहायता और पुनर्वास

सरेंडर करने वाले सभी 26 नक्सलियों को तत्काल 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है। पुलिस के अनुसार, सभी को राज्य सरकार की नीति के तहत आगे पुनर्वास, रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

हाईकोर्ट के आदेश पर एमसीडी की बड़ी कार्रवाई, 36 हजार वर्ग फुट जमीन कराई खाली

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने एक सख्त और निर्णायक संदेश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुपालन में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने छह और सात जनवरी की दरमियानी रात एक व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने संयम के साथ हालात पर काबू पाया।

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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एमसीडी का यह अभियान मध्य दिल्ली के एक संवेदनशील इलाके में प्रस्तावित था। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पहले से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। हालांकि, एमसीडी का भारी साजो-सामान और बुलडोजर मौके पर पहुंचने से पहले ही करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ वहां इकट्ठा हो गई। स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का विरोध करते हुए कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि हालात बेकाबू होते देख पुलिस को न्यूनतम बल प्रयोग करना पड़ा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के सीमित इस्तेमाल के बाद स्थिति नियंत्रित की गई। इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी तथा ड्रोन फुटेज के आधार पर अन्य की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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पुलिस उपायुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई पूर्व नियोजित थी और एमसीडी ने प्रस्तावित विध्वंस की सूचना पहले ही पुलिस को दे दी थी। उन्होंने बताया कि अदालत ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास स्थित एक बैंक्वेट हॉल और एक औषधालय को अवैध घोषित किया था। यही संरचनाएं सरकारी जमीन पर बनी थीं और इन्हें हटाने का आदेश दिया गया था।
एमसीडी उपायुक्त विवेक कुमार ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को मुक्त कराया गया। इस क्षेत्र में एक निदान केंद्र, एक विवाह भवन और दो मजबूत चारदीवारियां शामिल थीं। उन्होंने साफ कहा कि इस कार्रवाई के दौरान किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित रही। संरचनाएं अत्यंत मजबूत होने के कारण ध्वस्तीकरण में पूरी रात लग गई।

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प्रशासन के अनुसार, मौके पर अब भी भारी मात्रा में मलबा मौजूद है, जिसे हटाने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। अनुमान है कि यह मलबा 200 से 250 वाहनों में भरा जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को किसी भी आधार पर जायज ठहराया जा सकता है। स्पष्ट है कि यह कार्रवाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि कानून के पालन और न्यायालय के आदेश के सम्मान में की गई। पुलिस पर पथराव लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि कानून के शासन को चुनौती देने जैसा है।

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दिल्ली में चला यह दिल्ली अतिक्रमण हटाओ अभियान एक स्पष्ट संदेश देता है—सरकारी भूमि पर कब्जा स्वीकार्य नहीं है और अदालत के आदेश सर्वोपरि हैं। प्रशासन ने संयम, दृढ़ता और संवैधानिक दायरे में रहकर यह साबित कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।

कानपुर में युवती का स्कॉर्पियो से अपहरण कर गैंगरेप, आरोपियों में पुलिसकर्मी होने का दावा

कानपुर/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कॉर्पियो सवार दबंगों ने एक युवती को उसके घर के पास से अगवा कर गैंगरेप किया। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपियों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल था। गैंगरेप के बाद आरोपी युवती को उसके घर के बाहर फेंककर फरार हो गए।

घर के पास से अगवा कर दो घंटे तक किया दुष्कर्म

मामला कानपुर के थाना सचेंडी क्षेत्र अंतर्गत शंकर नगर गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार पीड़िता देर रात अपने घर के पास जा रही थी, तभी स्कॉर्पियो कार में सवार दो युवक वहां पहुंचे और जबरन उसे कार में खींचकर अगवा कर लिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने चलती कार में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

पीड़िता के परिजनों का कहना है कि करीब दो घंटे तक बर्बरता के बाद जब युवती बेहोश हो गई तो आरोपी उसे घर के बाहर फेंककर मौके से फरार हो गए।

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परिजनों का आरोप—थाने से भगा दिया गया

जब परिजनों ने घर के बाहर युवती को गंभीर हालत में पड़ा देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। आरोप है कि थाने पहुंचने पर जब परिजनों ने बताया कि आरोपियों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल है, तो पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी और उन्हें वहां से भगा दिया।
इसके बाद अगले दिन पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, हालांकि एफआईआर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है।

पुलिस का बयान

इस मामले में पुलिस उपायुक्त दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि थाना सचेंडी में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी छोटी बहन के साथ गलत कृत्य किया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है और उसके बयान के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों की तलाश जारी है।

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बिहार में जमीन रजिस्ट्री पर इनकम टैक्स की बड़ी कार्रवाई, 57 सब-रजिस्ट्रार को नोटिस, कैश लेनदेन पर सवाल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में जमीन रजिस्ट्री से जुड़े मामलों में इनकम टैक्स विभाग की सख्ती अब साफ नजर आने लगी है। उत्तर बिहार में बड़े पैमाने पर कैश के जरिए जमीन रजिस्ट्री किए जाने के खुलासे के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 11 जिलों के 57 सब-रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है। विभाग को आशंका है कि जमीन की खरीद-बिक्री में नकद लेनदेन के माध्यम से काले धन को खपाया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, उत्तर बिहार में करीब 95 प्रतिशत जमीन रजिस्ट्री कैश में हो रही है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और आयकर नियमों के सीधे उल्लंघन की ओर इशारा करती है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि पैन कार्ड या फॉर्म-60 के बिना कई रजिस्ट्रेशन किए गए, जिससे इनकम टैक्स विभाग को खरीदार और विक्रेता की सही जानकारी नहीं मिल सकी।

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इन अनियमितताओं के चलते 2552 जमीन रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया गया है। कटरा, कांटी, मुजफ्फरपुर, मोतीपुर सहित कई प्रखंडों में नियमों की अनदेखी कर रजिस्ट्रेशन किए जाने के प्रमाण मिले हैं। फॉर्म-60 का गलत इस्तेमाल, फर्जी पैन नंबर दर्ज करना या पूरी तरह पैन विवरण छुपाना इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
इनकम टैक्स विभाग का मानना है कि इस तरह की प्रक्रियाएं न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि जमीन माफियाओं और दलालों को भी बढ़ावा देती हैं। इसी कड़ी में राज्य सरकार भी एक्शन मोड में है। मंत्री विजय सिन्हा पहले ही साफ कर चुके हैं कि जमीन से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और फर्जी दस्तावेजों पर सख्त कार्रवाई होगी।

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यह कार्रवाई बिहार में जमीन रजिस्ट्री सिस्टम को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

शीतलहर से कांपा बिहार, 4 दिनों तक राहत के आसार नहीं

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में ठंड ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 25 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले चार दिनों तक शीतलहर, कोल्ड डे और घने कोहरे की चेतावनी दी है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों को शिमला जैसी ठंड का अहसास हो रहा है, खासकर रात के समय बर्फीली हवाएं परेशान कर सकती हैं।

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मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर और मध्य बिहार के कई हिस्सों में दिनभर धूप के बावजूद ठंड का असर बना रहेगा। सुबह और रात के समय घना कोहरा दृश्यता को प्रभावित कर सकता है, जिससे सड़क और रेल यातायात पर भी असर पड़ने की आशंका है।
जिन जिलों में ठंड के डबल अटैक को लेकर चेतावनी जारी की गई है, उनमें पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, कटिहार, सिवान, बक्सर, भोजपुर, अरवल, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कोल्ड डे जैसी स्थिति बनने की प्रबल संभावना है।

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बीते 24 घंटों में राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस भागलपुर के सबौर में दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे निचला स्तर है। गया-बोधगया में तापमान 5 डिग्री के आसपास रहा, जबकि कई जिलों में पारा 6 से 7 डिग्री के बीच रिकॉर्ड हुआ।
IMD का पूर्वानुमान है कि अगले चार दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आ सकती है। पटना में भी ठंड का असर बरकरार रहेगा—सुबह कोहरा, दोपहर में हल्की धूप और दिनभर कनकनी लोगों को अलाव का सहारा लेने पर मजबूर कर सकती है।

चंगाई सभा के नाम पर धर्मांतरण का आरोप, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शाहजहांपुर जनपद के थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर में चंगाई सभा की आड़ में धर्मांतरण कराए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुनिया देवी नामक महिला द्वारा प्रत्येक रविवार को चंगाई सभा आयोजित की जाती है, जहां चमत्कार और बीमारी ठीक करने के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों को प्रभावित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही है और इससे गांव में तनाव और अशांति का माहौल बनता जा रहा है। कई बार आपत्ति जताने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

मामले की जानकारी मिलते ही भारतीय हिंदू सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि चंगाई सभा के नाम पर धर्मांतरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराते हुए रविवार तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि तय समय सीमा तक संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचकर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है और गांव का माहौल खराब हो रहा है।

पुलिस जांच में जुटी

इस मामले में गढ़िया रंगीन थाना प्रभारी हरिकेश सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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