Tuesday, June 23, 2026
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पुलिस की नाकामी पर विधायक अनिल त्रिपाठी का तीखा प्रहार, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के बखिरा थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं और पुलिस की निष्क्रिय कार्यप्रणाली को लेकर मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने तीखा रुख अपनाया है। विधायक ने इस गंभीर स्थिति से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराते हुए त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने पत्र में उल्लेख किया है कि बीते दो वर्षों से बखिरा थाना क्षेत्र में लगातार चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस न तो किसी मामले का खुलासा कर पाई है और न ही अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई है। अधिकांश मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइलें बंद कर दी गईं, जिससे अपराधियों के हौसले और बुलंद हुए हैं।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस की इस कार्यशैली के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। चोरी की घटनाओं से पीड़ित लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा, जिससे आमजन का पुलिस तंत्र पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
विधायक ने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप चोरी की घटनाओं में लिप्त अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी और संत कबीर नगर पुलिस को सक्रिय व जवाबदेह बनाया जाएगा। साथ ही क्षेत्रीय जनता में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इस पूरे प्रकरण से जिले की प्रभारी मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम को भी अवगत कराया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में बखिरा थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण होगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

दूषित हवा, दूषित समाज और मोहन राकेश की चेतावनी

जयंती पर विशेष: पुनीत मिश्र

“जिस हवा में फूल अपने पूरे सौन्दर्य के साथ नहीं खिल सकता, वह हवा अवश्य दूषित हवा है। जिस समाज में मनुष्य अपने व्यक्तित्व का पूरा विकास नहीं कर सकता, वह समाज भी अवश्य दूषित समाज है।”
नई कहानी आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर मोहन राकेश का यह कथन केवल एक सुंदर रूपक नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के अंतर्विरोधों पर की गई तीखी टिप्पणी है। यह पंक्ति हमें उस अदृश्य प्रदूषण की ओर ले जाती है, जो हवा में नहीं, बल्कि सामाजिक संरचनाओं, मानसिकताओं और मूल्यों में फैला होता है।
नयी कहानी आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर के रूप में मोहन राकेश ने साहित्य को आदर्शों के कृत्रिम आवरण से मुक्त कर जीवन की वास्तविकताओं के सामने खड़ा किया। उनकी दृष्टि में मनुष्य कोई अमूर्त नैतिक इकाई नहीं, बल्कि इच्छाओं, कुंठाओं, असुरक्षाओं और आत्मसंघर्षों से भरा जीवित व्यक्ति है। इसलिए उनका साहित्य न तो उपदेश देता है और न ही पलायन का रास्ता सुझाता है, बल्कि समाज के भीतर जमी उन परतों को उघाड़ता है, जो व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को रोकती हैं।
मोहन राकेश का समाजबोध विशेष रूप से मध्यवर्गीय जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है। वह वर्ग जो बाहर से सभ्य, संस्कारित और सुरक्षित दिखता है, लेकिन भीतर से भय, समझौते और दमन से ग्रस्त है। उनकी कहानियों और नाटकों में पात्र अक्सर ऐसे मोड़ पर खड़े दिखाई देते हैं, जहाँ वे स्वयं से प्रश्न करते हैं। क्या मैं वही हूँ, जो मुझे होना चाहिए था? यह आत्मसंघर्ष दरअसल उस दूषित सामाजिक हवा का परिणाम है, जिसमें व्यक्ति अपनी पूरी संभावनाओं के साथ साँस नहीं ले पाता।
उनका नाटक आषाढ़ का एक दिन हो या आधे-अधूरे, हर जगह व्यक्ति और समाज के बीच का तनाव केंद्रीय रूप में उभरता है। रचनात्मक स्वतंत्रता, प्रेम, महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी। इन सबके बीच फँसा मनुष्य मोहन राकेश के यहाँ नायक नहीं, बल्कि प्रश्नचिह्न बन जाता है। यही प्रश्नचिह्न पाठक को बेचैन करता है और सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं यह कहानी हमारी अपनी तो नहीं।
मोहन राकेश का महत्व इस बात में भी है कि उन्होंने सामाजिक दूषितता को शोर-शराबे या नारेबाजी से नहीं, बल्कि संवेदनशील चुप्पियों और अधूरे संवादों से रेखांकित किया। उनके पात्र जो नहीं कह पाते, वही सबसे अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है। यह मौन दरअसल उस दबे हुए व्यक्तित्व की आवाज़ है, जिसे समाज सुनना नहीं चाहता।
आज के समय में, जब व्यक्ति की पहचान उपभोग, प्रतिस्पर्धा और दिखावे से तय की जा रही है, मोहन राकेश की चेतावनी और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। यदि समाज ऐसी हवा बन जाए, जिसमें विचार, संवेदना और आत्मस्वीकृति के फूल खिल ही न सकें, तो प्रगति के तमाम दावे खोखले सिद्ध होते हैं।
मोहन राकेश हमें यह याद दिलाते हैं कि किसी भी समाज की वास्तविक शुद्धता उसकी इमारतों, नियमों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह अपने मनुष्यों को कितना खुला आकाश देता है। जहाँ व्यक्ति अपने पूरे सौन्दर्य, अपने विचार, अपने स्वप्न और अपनी असहमति के साथ- खिल सके, वही समाज वास्तव में स्वच्छ और जीवंत कहलाने योग्य है।

पंचशील ध्वज के रंगों में समाया बुद्ध का जीवन दर्शन

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नवनीत मिश्र

आज का मानव समाज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। भौतिक उपलब्धियाँ बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक अशांति, असहिष्णुता और वैचारिक भ्रम भी उतनी ही तेजी से गहराए हैं। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का धम्म मानवता के लिए शांति, करुणा और संतुलन का प्रकाश स्तंभ बनकर सामने आता है। बुद्ध का संदेश किसी एक काल या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त मानव समाज के कल्याण के लिए है। इसी जीवन दर्शन का प्रतीक है धम्म ध्वज, जिसे पंचशील ध्वज भी कहा जाता है।
धम्म ध्वज के पाँच रंग केवल प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य के जीवन मूल्यों का दर्पण हैं। ये रंग यह बताते हैं कि एक आदर्श जीवन कैसा होना चाहिए और समाज किस दिशा में आगे बढ़े।
नीला रंग समानता और व्यापक करुणा का संदेश देता है। जैसे नीला आकाश सभी प्राणियों को समान रूप से ढकता है, वैसे ही बुद्ध धम्म सभी को समान दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। यह रंग सार्वभौमिक करुणा का भाव जगाता है। जहाँ किसी के प्रति द्वेष नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के सुख की कामना की जाती है। “सब्बे सत्ता सुखी होन्तु” की भावना इसी रंग में निहित है।
पीला रंग मध्यम मार्ग का प्रतीक है। भगवान बुद्ध ने जीवन में संतुलन को सर्वोपरि बताया। न अत्यधिक भोग और न कठोर तपस्या। इन दोनों के बीच का मार्ग ही सत्य का मार्ग है। अष्टांगिक मार्ग इसी मध्यम पथ का विस्तार है, जो व्यक्ति को नैतिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से उन्नत करता है तथा निर्वाण की ओर अग्रसर करता है।
लाल रंग ऊर्जा, कर्मशीलता और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है। बुद्ध धम्म निष्क्रियता का नहीं, बल्कि जागरूक और सक्रिय जीवन का संदेश देता है। यह रंग प्रेरणा देता है कि व्यक्ति धर्मसम्मत आचरण करते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति और समाज के कल्याण के लिए निरंतर परिश्रम करे।
सफेद रंग शांति और शुद्धता का प्रतीक है। यह मन, वचन और कर्म की पवित्रता पर बल देता है। बुद्ध के अनुसार शील और सदाचार के बिना कोई भी साधना पूर्ण नहीं हो सकती। जब व्यक्ति भीतर से शुद्ध होता है, तभी समाज में शांति और सौहार्द की स्थापना संभव होती है।
केसरिया रंग त्याग, सेवा और प्रज्ञा का प्रतीक है। यह रंग ज्ञान, विवेक और शिक्षा के महत्व को दर्शाता है। बुद्ध धम्म का मूल संदेश है। अज्ञान से मुक्ति के लिए शिक्षा और ज्ञान आवश्यक हैं। शिक्षा मन को संस्कारित करती है, आत्मनियंत्रण सिखाती है और मानव को सही दिशा प्रदान करती है।
धम्म ध्वज के ये पाँचों रंग मिलकर एक संपूर्ण और संतुलित जीवन दर्शन प्रस्तुत करते हैं। यह ध्वज केवल ध्वज नहीं, बल्कि मानवता के लिए आचरण संहिता है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची प्रगति बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से होती है।
आज के समय में जब समाज हिंसा, असहिष्णुता और वैचारिक विभाजन से जूझ रहा है, तब बुद्ध की ओर लौटना अत्यंत आवश्यक हो गया है। पंचशील ध्वज का संदेश अपनाकर ही हम शांति, समरसता और करुणा से भरे समाज का निर्माण कर सकते हैं। यही बुद्ध का मार्ग है और यही मानवता का भविष्य।

शहीद शेख भिखारी: गुमनाम नायक, ऐतिहासिक अन्याय और आज के भारत में सांप्रदायिक सद्भाव की ज़रूरत

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रांची (राष्ट्र की परम्परा)8 जनवरी 1858 को चुटुपालु घाटी में फांसी पर चढ़ाए गए शहीद शेख भिखारी की पुण्यतिथि हर वर्ष आती है, लेकिन झारखंड में उनकी स्मृति वैसी नहीं दिखती, जैसी एक अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी को मिलनी चाहिए। 1857 के महान विद्रोह में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध डटकर खड़े रहने वाले शेख भिखारी ने रांची को अंग्रेजी कब्जे से बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। वे शहीद टिकैत उमराव सिंह के दीवान और कमांडर थे, फिर भी इतिहास की मुख्यधारा में उनका नाम आज भी हाशिये पर है।यह अनदेखी केवल ऐतिहासिक अन्याय नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में एक चूक भी है—जब समाज में सांप्रदायिक विभाजन को हवा दी जा रही है और सद्भाव के प्रतीकों की सबसे अधिक आवश्यकता है।1819 में रांची जिले के खुदिया गांव में जन्मे शेख भिखारी 1857 के विद्रोह के समय 38 वर्ष के थे। उन्होंने टिकैत उमराव सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया, चतरा में संघर्ष किया और हजारीबाग जेल से कैदियों को छुड़ाने के प्रयास में भी शामिल रहे। अंततः ब्रिटिश जनरल मैकडोनाल्ड ने उन्हें और टिकैत उमराव सिंह को गिरफ्तार कर फांसी पर चढ़ा दिया। लोककथाओं और जनस्मृतियों में उनकी वीरता जीवित है, लेकिन औपचारिक इतिहास में वे अब भी “अनसंग हीरो” बने हुए हैं।झारखंड में उनके नाम पर कुछ संस्थान अवश्य हैं—जैसे रांची का शहीद शेख भिखारी कॉलेज ऑफ एजुकेशन और हजारीबाग का शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज—लेकिन क्या यह पर्याप्त है? उनके नाम पर न कोई प्रमुख हवाई अड्डा, न विश्वविद्यालय, न ही कोई बड़ा स्टेडियम है।यदि तुलना करें तो बिरसा मुंडा के नाम पर रांची का मुख्य हवाई अड्डा, संग्रहालय, विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान, स्टेडियम और अनेक सरकारी योजनाएं हैं। सिदो-कान्हू मुर्मू, तिलका मांझी, जयपाल सिंह मुंडा, अल्बर्ट एक्का, नीलांबर-पीतांबर, वीर बुद्धू भगत, विनोद बिहारी महतो और अन्य महापुरुषों को भी राज्य स्तर पर योजनाओं, छात्रवृत्तियों और संस्थानों के माध्यम से सम्मान मिला है। तब प्रश्न उठता है—शेख भिखारी की उपेक्षा क्यों?क्या इसका कारण उनका मुस्लिम होना है? या फिर झारखंड के इतिहास को केवल आदिवासी संघर्षों तक सीमित कर देने की प्रवृत्ति? यह सवाल राज्य सरकार की ऐतिहासिक दृष्टि और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों पर खड़ा होता है। उनके वंशज आज भी पेंशन और रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारी उदासीनता बनी हुई है। 2024 में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा उनकी शहादत स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि भी एक प्रतीकात्मक घटना बनकर रह गई।आज जब सामाजिक ताने-बाने में दरारें गहरी हो रही हैं, शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह की साझी शहादत हमें याद दिलाती है कि भारत की आज़ादी की नींव सांप्रदायिक एकता पर रखी गई थी। एक मुस्लिम और एक हिंदू योद्धा—दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और साथ-साथ फांसी का फंदा चूमा।कुछ संगठन और उनके वंशज शहादत दिवस मनाते हैं, लेकिन राज्य स्तर पर यह जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई जाती? झारखंड सरकार को चाहिए कि शेख भिखारी के नाम पर “सद्भावना और वीरता पुरस्कार” की शुरुआत करे, ऐसी सरकारी योजनाएं चलाए जो उनके नाम को जन-जन तक पहुंचाएं और नई पीढ़ी को यह संदेश दें कि देशभक्ति किसी एक धर्म की बपौती नहीं होती।झारखंड, जो बहुलतावादी और संघर्षशील संस्कृति का प्रतीक है, को अपने इतिहास के हर नायक को समान सम्मान देना होगा। यदि शेख भिखारी की अनदेखी जारी रही, तो हम न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को भूलेंगे, बल्कि उस सांप्रदायिक सद्भाव की विरासत को भी खो देंगे, जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है।फोकस शब्द: शहीद शेख भिखारीटैग: 1857 का विद्रोह, झारखंड का इतिहास, सांप्रदायिक सद्भाव, गुमनाम नायक, स्वतंत्रता संग्राम

तुर्कमान गेट बुलडोजर एक्शन: आधी रात में कार्रवाई क्यों, दिन में क्यों नहीं? टाइमिंग पर उठे बड़े सवाल

Turkman Gate Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर आधी रात में चली MCD की बुलडोजर कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। इस कार्रवाई के दौरान पथराव, उपद्रव और पुलिस पर हमले के वीडियो सामने आए हैं। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर कई को हिरासत में लिया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दिन में क्यों नहीं की गई?और अगर निर्माण अवैध था, तो 20 साल तक सरकारी एजेंसियां क्या करती रहीं?

आधी रात में क्यों चला बुलडोजर?

मंगलवार (06 जनवरी 2026) की रात करीब 12 बजे तुर्कमान गेट इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

• 12:30 बजे: 32 बुलडोजर, 50 डंपर और 200 से ज्यादा मजदूर मौके पर पहुंचे

• 1:00 बजे: कार्रवाई की तैयारी

• 1:23 बजे: पुलिस पर पथराव शुरू

• 1:30 बजे: बुलडोजर एक्शन शुरू

• सुबह 7 बजे: कार्रवाई पूरी

करीब 5.5 घंटे तक लगातार अवैध निर्माण गिराया गया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का भी इस्तेमाल करना पड़ा।

रात में कार्रवाई पर पुलिस की सफाई

जब एबीपी न्यूज़ ने डीसीपी से पूछा कि दिन में कार्रवाई क्यों नहीं हुई, तो उन्होंने कहा—
“दिन में ITO इलाके में भारी ट्रैफिक जाम की आशंका थी। MCD ने जिस समय सुरक्षा मांगी, उसी समय फोर्स उपलब्ध कराई गई।”

वर्षों तक अवैध निर्माण कैसे चलता रहा?

स्थानीय लोगों और याचिकाकर्ता का आरोप है कि—

• बारात घर को बने 20 साल से ज्यादा हो चुके थे

• विवादित जमीन पर 7–8 साल से डायग्नोस्टिक सेंटर चल रहा था

• कई बार शिकायत के बावजूद MCD और अन्य एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की

याचिकाकर्ता का सवाल है—
“अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या आज ये हालात बनते?”

हाईकोर्ट की भूमिका और टाइमलाइन

Save India Foundation ने MCD से अवैध अतिक्रमण की शिकायत की

16 अक्टूबर 2025: DDA, MCD और L&DO का संयुक्त सर्वे

• सर्वे में 36,428 स्क्वायर फीट जमीन पर अवैध निर्माण पाया गया

12 नवंबर 2025: हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया

22 दिसंबर 2025: MCD ने माना कि अधिकतर जमीन पर वक्फ बोर्ड का कोई अधिकार नहीं

6 जनवरी 2026: हाईकोर्ट में सुनवाई

• उसी रात बुलडोजर एक्शन

सियासी घमासान तेज

इस कार्रवाई के बाद राजनीति भी गरमा गई है—

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी पर भीड़ भड़काने का आरोप

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले— “कितनी मस्जिद तोड़ोगे?”

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने कार्रवाई को मुसलमानों पर जुल्म बताया

AIMIM ने इसे “यूपी मॉडल” करार दिया

BJP का कहना है— “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश की गई”

बड़ा सवाल: अतिक्रमण हटाना अमन के लिए खतरा क्यों बन जाता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब सरकारी एजेंसियां वर्षों तक अवैध निर्माण पर आंख मूंदे रहती हैं, तो वह धीरे-धीरे धार्मिक और भावनात्मक मुद्दा बन जाता है। बाद में जब अचानक बुलडोजर चलता है, तो हालात बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

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आदिशक्ति श्री जीण माता का 16वां वार्षिकोत्सव, 10 और 11 जनवरी को दो दिवसीय कार्यक्रम

राँची (राष्ट्र की परम्परा)l आदिशक्ति श्री जीण माता का दो दिवसीय 16वां वार्षिकोत्सव 10 एवं 11 जनवरी 2026 को श्री जीण माता प्रचार समिति रांची के तत्वावधान में स्थानीय मारवाड़ी भवन, हरमू रोड में मनाया जाएगा।10 जनवरी को दोपहर 1 बजे आदि शक्ति श्री जीण माता की निशान यात्रा सेवा सदन पथ, लक्ष्मी नारायण मंदिर से प्रारंभ होगी। नगर भ्रमण करते हुए यात्रा मारवाड़ी भवन पहुंचेगी, जहां सभी निशान माता को अर्पित किए जाएंगे। इस यात्रा में कुल 501 निशान वितरित किए जाएंगे। निशान यात्रा का संचालन समिति के सदस्य विष्णु सेन एवं सहयोगियों द्वारा किया जाएगा।11 जनवरी को प्रातः 10 बजे श्री जीण माताजी का अभिषेक मुख्य संयोजक विजय पालड़ीवाल और सह संयोजक ओम प्रकाश अग्रवाल द्वारा सपरिवार किया जाएगा। अभिषेक के बाद भगवान श्री गणेश का पूजन होगा।दोपहर 1 बजे से शक्ति मंगल पाठ का आयोजन 700 महिलाओं के सहभाग से किया जाएगा। सभी महिलाएं अपने पारंपरिक वेश-भूषा में उपस्थित होंगी। मंगल पाठ के दौरान जीणधाम से श्री आनंद जी पाराशर और वर्धा से सुश्री रिंकू चौबे भजन और पाठ का संचालन करेंगी।इस मंगल पाठ में श्री जीण जन्मोत्सव, मेंहदी, 56 भोग और निशान के कार्यक्रम होंगे। विशेष आकर्षण के रूप में माता को 51 फीट का गजरा और 181 फीट की चुनड़ी अर्पित की जाएगी। कार्यक्रम का समापन रात्रि 8 बजे महाआरती के साथ होगा।कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय पालड़ीवाल, सचिव नारायण विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष बजरंग सोमानी, सह सचिव प्रदीप शर्मा सहित समिति के कई सदस्य सहयोग कर रहे हैं।

अटलांटिक में तनाव: अमेरिका ने रूसी झंडे वाला तेल टैंकर किया जब्त, रूस ने बताया समुद्री डकैती

अटलांटिक महासागर में अमेरिका और रूस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव जैसी स्थिति बन गई है। रूस ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर “समुद्री डकैती” करार दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिस समुद्री क्षेत्र में यह ऑपरेशन किया गया, वहां रूसी पनडुब्बियां और युद्धपोत मौजूद थे। वहीं, रूसी परिवहन मंत्रालय का कहना है कि यूएस नेवी द्वारा टैंकर पर चढ़ने के बाद से जहाज से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

अमेरिकी कार्रवाई पर रूस का तीखा बयान

न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह मरीनेरा टैंकर पर अमेरिकी सैन्य लैंडिंग की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। मॉस्को ने टैंकर पर मौजूद रूसी नागरिकों की तत्काल जानकारी मांगी है और अमेरिका से चालक दल के साथ मानवीय व सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है।

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ब्रिटेन ने दिया अमेरिका का साथ

इस अभियान में ब्रिटेन ने भी अमेरिका का समर्थन किया। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रॉयल एयर फोर्स (RAF) ने निगरानी मिशन के जरिए अमेरिकी ऑपरेशन को सहयोग दिया। मंत्रालय ने दावा किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उठाया गया है।

वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित टैंकर जब्त

अमेरिका का कहना है कि उसने उत्तरी अटलांटिक और कैरेबियन सागर में अलग-अलग कार्रवाइयों के तहत वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकर जब्त किए हैं। इनमें से एक टैंकर पर रूसी झंडा लगा हुआ था। हालांकि, एक अन्य वेनेजुएला से जुड़ा टैंकर अमेरिकी कोस्ट गार्ड को चकमा देकर फरार हो गया।

यूएस होम डिपार्टमेंट का बयान

यूएस होम डिपार्टमेंट की सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा,
“यूएस कोस्ट गार्ड ने शैडो फ्लीट के दो टैंकर बेला-1 और सोफिया को जब्त किया है। पीछा किए जाने के दौरान इन जहाजों ने अपना झंडा बदला और नाम भी बदल दिया था।”

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वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की रणनीति

अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप प्रशासन ‘चुनिंदा तरीके’ से प्रतिबंध हटाकर वेनेजुएला के तेल की वैश्विक बाजारों में बिक्री और परिवहन को आसान बना सकता है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रूसी टैंकर को जब्त करने की कार्रवाई एक रात में नहीं, बल्कि कई हफ्तों की रणनीतिक तैयारी के बाद पूरी की गई।
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया पर कहा,
“समुद्री ऊर्जा परिवहन की अनुमति केवल उन्हीं को मिलेगी जो अमेरिकी कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करते हों।”

आज के पंचांग से कैसे बनाएं अपना दिन सफल और सकारात्मक

आज का पंचांग – 08 जनवरी 2026 | गुरुवार
(माघ कृष्ण पक्ष षष्ठी | विक्रम संवत 2082 | शक संवत 1947)
आज की तिथि व संवत विवरण
तिथि: माघ कृष्ण पक्ष षष्ठी
समय – 06:33 AM से 07:05 AM (09 जनवरी)
वार: गुरुवार
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
वैदिक ऋतु: हेमंत
द्रिक ऋतु: शिशिर
अयन: दक्षिणायन
राष्ट्रीय कैलेंडर तिथि: पौष 18, 1947
🌟 नक्षत्र, योग व करण
नक्षत्र:
पूर्व फाल्गुनी – 12:24 PM तक
उत्तर फाल्गुनी – इसके बाद
योग:
सौभाग्य – 05:25 PM तक
शोभन – इसके बाद
करण:
गर – 06:43 PM तक
वणिज – 07:05 AM (09 जनवरी) तक
विष्टि – इसके बाद

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☀️🌙 सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:53 PM
चन्द्रोदय: 10:58 PM
चन्द्रास्त: 11:14 AM (09 जनवरी)
♐ राशि स्थिति
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि:
सिंह – 06:39 PM तक
कन्या – इसके बाद
⚠️ अशुभ काल (आज इन समयों में शुभ कार्य न करें)
राहु काल: 01:53 PM – 03:13 PM
यम गण्ड: 07:14 AM – 08:33 AM
कुलिक काल: 09:53 AM – 11:13 AM
दुर्मुहूर्त:
10:47 AM – 11:29 AM
03:02 PM – 03:45 PM
वर्ज्यम्: 07:59 PM – 09:40 PM

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शुभ काल व मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:26 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:12 PM – 12:54 PM
अमृत काल:
05:52 AM – 07:30 AM
06:05 AM – 07:46 AM
🚩 सर्वार्थसिद्धि योग
➡️ आज सर्वार्थसिद्धि योग नहीं बन रहा है, अतः बड़े कार्यों में मुहूर्त अवश्य देखें।
🧭 दिशा शूल व यात्रा फल
गुरुवार को वर्जित दिशा: दक्षिण दिशा
यदि यात्रा आवश्यक हो:
दही या चने का सेवन करके यात्रा करें
लाभकारी दिशा:
पूर्व और उत्तर दिशा में यात्रा से सफलता व लाभ के योग बनते हैं

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आज 08 🔮 चंद्रबल (राशि अनुसार)
06:39 PM तक:
मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन
इसके बाद:
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
🌠 ताराबल (नक्षत्र अनुसार)
12:24 PM तक शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आद्रा, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा
इसके बाद:
भरणी, रोहिणी, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
🔔 विशेष नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। किसी भी शुभ अथवा महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

मर्डर मिस्ट्री सुलझी: प्रेम प्रसंग बना खून की वजह

लखीसराय किऊल मर्डर केस: न्याय की फरियादी ही निकली मास्टरमाइंड, पत्नी ने रची पति की हत्या की साजिश

लखीसराय (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के लखीसराय जिले के किऊल थाना क्षेत्र से सामने आया हत्या का मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। शुरुआत में जहां यह घटना आपसी रंजिश और पारिवारिक विवाद से जुड़ी बताई जा रही थी, वहीं पुलिस जांच में जो सच सामने आया, उसने हर किसी को चौंका दिया।
24 दिसंबर 2025 की रात किऊल रेलवे मैदान के पास वृंदावन इलाके में विनोद साह पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया। गंभीर हालत में उन्हें पटना रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। तीन दिन बाद 27 दिसंबर को मृतक की पत्नी किन्नर गुंजा देवी ने थाने में आवेदन देकर अपने ही रिश्तेदारों पर हत्या का आरोप लगाया।

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हालांकि, पुलिस को शुरू से ही बयान और साक्ष्यों में विरोधाभास नजर आया। तकनीकी जांच, कॉल डिटेल और गहन पूछताछ के बाद कहानी ने नया मोड़ ले लिया। जांच में खुलासा हुआ कि हत्या की साजिश किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि खुद पत्नी गुंजा देवी ने रची थी।
पुलिस के अनुसार, गुंजा देवी ने 12 दिसंबर को कजरा थाना क्षेत्र निवासी संतोष कुमार से कोर्ट मैरिज की थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर विनोद साह को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। 24 दिसंबर की रात संतोष अपने तीन साथियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और ब्लेड से विनोद का गला रेत दिया।

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एसपी अजय कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि विशेष टीम का गठन कर मामले का सफल उद्भेदन किया गया है। पुलिस ने गुंजा देवी, संतोष कुमार समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ब्लेड, कोर्ट मैरिज के दस्तावेज और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
यह मामला प्रेम, धोखे और लालच की खौफनाक मिसाल बन गया है, जहां न्याय की गुहार लगाने वाली महिला ही हत्या की साजिशकर्ता निकली।

पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा, जांच जारी

बक्सर में 35 साल पुराना जमीन विवाद बना खूनी संघर्ष, किसान की गोली मारकर हत्या, चार गंभीर

पटना /बक्सर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के बक्सर जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां 35 वर्षों से चले आ रहे जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सिकरौल थाना क्षेत्र के भखवां गांव में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी में किसान संजय चौबे की मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के चार सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस सनसनीखेज घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भखवां गांव निवासी संजय चौबे (45) का अपने पट्टिदार कन्हैया चौबे के साथ करीब 12 बीघा जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कोर्ट द्वारा जमीन का फैसला संजय चौबे के पक्ष में आने के बावजूद आरोपी पक्ष ने कथित तौर पर जमीन पर कब्जा बनाए रखा और बटाई पर खेती करवाई। बुधवार को जब आरोपी पक्ष जबरन धान की फसल काटने पहुंचा और संजय चौबे ने प्रशासन की मौजूदगी में ही फसल काटने की बात कही, तो विवाद उग्र हो गया।

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आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर दबंगों ने लाठी-डंडों से हमला किया और फिर गोलीबारी कर दी। गोली लगने से संजय चौबे की मौके पर ही मौत हो गई। हमले में उनके भाई धनंजय चौबे सहित चार अन्य परिजन गंभीर रूप से जख्मी हो गए। सभी घायलों को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। थानाध्यक्ष अंकुश कुमार मंडल के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंचा। एसपी शुभम आर्य और एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने भी गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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परिजनों ने पुलिस पर समय रहते न पहुंचने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा संगठन को नई ऊर्जा देने वाला महराजगंज का भव्य स्वागत कार्यक्रम

महराजगंज में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम दौरे ने रचा नया राजनीतिक इतिहास, आयोजन के सूत्रधार बने धीरेंद्र प्रताप सिंह



महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।महराजगंज की राजनीतिक धरती पर एक ऐतिहासिक क्षण उस समय दर्ज हुआ, जब भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम आगमन पर जिले में अभूतपूर्व जनसमर्थन देखने को मिला। यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि शक्ति, संगठन और जनविश्वास का सशक्त प्रदर्शन बन गया। इस भव्य आयोजन के प्रमुख सूत्रधार सिसवा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि एवं समाजसेवी धीरेंद्र प्रताप सिंह रहे, जिनकी सक्रिय भूमिका ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

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प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम दौरे को लेकर जिलेभर में कई दिनों से उत्साह का माहौल था। सिसवा से लेकर प्रमुख मार्गों और कार्यक्रम स्थल तक भव्य स्वागत द्वार, भाजपा के झंडे, बैनर-पोस्टर, ढोल-नगाड़ों और नारों से पूरा क्षेत्र उत्सव में बदल गया। अनुशासित कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और भारी जनसमूह ने यह स्पष्ट कर दिया कि महराजगंज भाजपा का मजबूत गढ़ बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम की संपूर्ण जिम्मेदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में सफलतापूर्वक निभाई गई। उनकी संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक प्रभाव और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संवाद ने स्वागत कार्यक्रम को केवल राजनीतिक आयोजन न रहकर एक जन-आंदोलन का स्वरूप दे दिया। बूथ स्तर से लेकर मंडल और जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं की एकजुटता इस आयोजन में साफ दिखाई दी।

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इस अवसर पर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल सत्ता की राजनीति नहीं करती, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के विचार पर चलने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का यह प्रथम आगमन महराजगंज के लिए गर्व का विषय है और इससे जिले में संगठन को नई ऊर्जा, नई दिशा और नया आत्मविश्वास मिलेगा।
कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की सहभागिता रही। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, उत्साह और संगठनात्मक मजबूती ने जिले की राजनीति में एक स्पष्ट संदेश दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह की मजबूत सामाजिक पकड़ और सक्रिय नेतृत्व ने इस कार्यक्रम को महराजगंज की राजनीति में एक निर्णायक संकेत बना दिया है। आने वाले समय में यह आयोजन जिले के राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक विस्तार पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम, सिकन्दरपुर में रोजाना चलेगा चेकिंग अभियान

सिकन्दरपुर, बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकन्दरपुर नगर के सबसे व्यस्त क्षेत्र बस स्टेशन चौराहा पर यातायात नियमों के उल्लंघन पर नकेल कसने के उद्देश्य से मंगलवार को ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले कुल 50 वाहनों का चालान किया गया। प्रशासनिक आंकलन के अनुसार इस अभियान से प्रतिदिन लगभग दो लाख रुपये तक के राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना जताई जा रही है।

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अभियान के दौरान बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, बिना नंबर प्लेट, ओवरलोडिंग, वैध ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव, प्रदूषण प्रमाणपत्र व बीमा न होने जैसे मामलों में कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि बस स्टेशन और आसपास के बाजार क्षेत्र में प्रतिदिन अत्यधिक भीड़ रहती है, जिससे जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिसे देखते हुए अब यातायात नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया है, जिसे आगे भी नियमित रूप से जारी रखा जाएगा।

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अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, वहीं नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था भी सुचारु रहेगी।
प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखें, हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग करें और यातायात नियमों का पूरी तरह पालन करें, ताकि दुर्घटनाओं से बचाव के साथ अनावश्यक चालान से भी बचा जा सके।

स्कूल जोन में लापरवाही: साइकिल सवार बच्चों को वाहन ने मारी टक्कर

मऊ (राष्ट्र की परम्परा )सड़क हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही की वजह से सामने आया है। जनपद मऊ के थाना कोपागंज क्षेत्र अंतर्गत फैजुल्लाहपुर स्थित जय मूर्ति पब्लिक स्कूल के सामने मंगलवार सुबह एक दर्दनाक दुर्घटना में दो नाबालिग बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और स्कूल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोडसर गांव निवासी रामभवन चौहान की बहन रिंकी (कक्षा 7) और भतीजा अंश (नर्सरी) प्रतिदिन की तरह सुबह लगभग साढ़े आठ बजे साइकिल से स्कूल जा रहे थे। जैसे ही दोनों स्कूल के मुख्य गेट के सामने सड़क पार कर रहे थे, तभी तेज गति से आ रहे वाहन यूपी 54 एच 5405 (फैशन प्लस) ने साइकिल में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बच्चे सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल के शिक्षकों ने तत्परता दिखाते हुए परिजनों को सूचना दी। परिजन दोनों बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोपागंज ले गए, जहां चिकित्सकों ने हालत नाजुक देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया। इसके बाद बच्चों को प्रकाश ट्रामा सेंटर और फिर राहुल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

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इलाज में व्यस्तता के कारण परिजनों द्वारा तहरीर देर से दी गई। पुलिस ने वाहन चालक रामजीत निवासी भदसा मानोपुर सहित दो अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक व्यवस्था की मांग की है।
यह मऊ सड़क हादसा एक बार फिर साबित करता है कि स्कूलों के आसपास यातायात नियंत्रण और वाहन चालकों की जिम्मेदारी बेहद जरूरी है, ताकि मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

नमकीन फैक्ट्री बना रणक्षेत्र, 10 आरोपियों पर हत्या के प्रयास का केस

खौफनाक वारदात: नमकीन फैक्ट्री में आग, मालिक के पेट में तीन घंटे फंसा रहा चाकू; 10 नामजद पर केस

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)मऊ जिले से सामने आई यह सनसनीखेज घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। घोसी कोतवाली क्षेत्र के दरियाबाद गांव में बदमाशों ने एक नमकीन फैक्ट्री को निशाना बनाते हुए फैक्ट्री मालिक पर जानलेवा हमला किया। फैक्ट्री में आगजनी, बेरहमी से पिटाई और पेट में चाकू घोंपने के बाद हमलावर युवक को मरा समझकर मौके से फरार हो गए।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, मधुबन थाना क्षेत्र के सिधा अहिलासपुर निवासी उदयभान दरियाबाद स्थित नहर किनारे “शहीद मार्ग नमकीन” नाम से फैक्ट्री संचालित करते हैं।आठ बजे के करीब दस लोग फैक्ट्री पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए गोदाम में आग लगा दी। जब उदयभान ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने मिलकर उन्हें बुरी तरह पीटा और चाकू से पेट पर हमला कर दिया।
हमले की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उदयभान के पेट में चाकू लगभग तीन घंटे तक फंसा रहा। चारों ओर आग की लपटें थीं और हमलावर उन्हें अधमरा छोड़कर भाग निकले। शोरगुल सुनकर उनके भाई बृजभान मौके पर पहुंचे और तत्काल डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी।

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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल उदयभान को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोसी ले जाया गया। हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया, जहां पेट में फंसा चाकू निकालकर प्राथमिक उपचार किया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, वाराणसी रेफर कर दिया गया।
घायल की तहरीर पर पुलिस ने हत्या के प्रयास, आगजनी और अन्य गंभीर धाराओं में 10 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपियों में मऊ और बलिया जनपद के विभिन्न गांवों के निवासी शामिल बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही सभी को हिरासत में लिया जाएगा।

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घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग फैक्ट्री मालिक की हालत को लेकर चिंतित हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह वारदात एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आपसी रंजिश और अपराध किस हद तक इंसानियत को शर्मसार कर सकते हैं।

हज यात्रा के नाम पर लाखों की ठगी, भरोसे का सौदा बना बड़ा धोखा

मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पवित्र हज यात्रा पर भेजने के नाम पर की गई एक बड़ी ठगी का मामला मऊ जनपद से सामने आया है, जिसने आम लोगों के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। अदरी नगर पंचायत निवासी अतहर पुत्र स्व. अब्दुल हकीम ने थाना कोपागंज में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनसे हज यात्रा की प्रक्रिया पूरी कराने के बहाने कुल 7 लाख 84 हजार रुपये की ठगी की गई।
पीड़ित के अनुसार, कस्बा अदरी निवासी मौलवी इमामुद्दीन पुत्र एकबाल अहमद से पारिवारिक और सामाजिक संबंध थे। आरोपी होटल संचालन, मनी ट्रांसफर, टिकट बुकिंग और मदरसे में पढ़ाने जैसे कार्य करता था, जिससे उस पर भरोसा करना स्वाभाविक था। इसी विश्वास के चलते जुलाई 2024 से अगस्त 2025 के बीच चेक और यूपीआई के माध्यम से कई किश्तों में बड़ी रकम उसे सौंपी गई।
आरोप है कि हज के लिए ऑनलाइन आवेदन तो कराया गया, लेकिन पहली किस्त समय पर जमा नहीं की गई, जिससे आवेदन स्वतः निरस्त हो गया। इसके बाद सितंबर 2025 में चार लाख पांच हजार रुपये नकद लेकर किस्त जमा करने का दावा किया गया, जो बाद में झूठा साबित हुआ। जब पीड़ित ने संपर्क करने की कोशिश की तो आरोपी का मोबाइल बंद मिला।

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मामला यहीं नहीं रुका। अक्टूबर 2025 में आरोपी के घर पहुंचने पर उसके पिता एकबाल और भाई आरिफ द्वारा गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। काफी प्रयासों के बाद 12 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से थाना कोपागंज में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मौलवी इमामुद्दीन, उसके पिता एकबाल और भाई आरिफ के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला हज यात्रा से जुड़े धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।