Tuesday, June 23, 2026
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📜 9 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: जिन्होंने भारत और विश्व को दिशा दी

हर तारीख़ इतिहास के पन्नों में कुछ विशेष नाम दर्ज करती है। 9 जनवरी भी ऐसी ही एक तारीख़ है, जब भारत और दुनिया को कई ऐसे व्यक्तित्व मिले जिन्होंने खेल, सिनेमा, विज्ञान, पर्यावरण, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। आइए जानते हैं 9 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तियों के जीवन, जन्म स्थान और राष्ट्रहित में उनके योगदान के बारे में विस्तार से।

🏃‍♀️ हिमा दास (जन्म: 9 जनवरी 2000)
जन्म स्थान: ढिंग, जिला नगांव, असम, भारत
हिमा दास भारत की प्रसिद्ध महिला एथलीट हैं, जिन्हें “धिंग एक्सप्रेस” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2018 में फिनलैंड में आयोजित आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचना उनकी मेहनत और लगन का प्रमाण है। हिमा दास ने भारत में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी और युवाओं, विशेषकर ग्रामीण बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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📺 शरद मल्होत्रा (जन्म: 9 जनवरी 1983)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
शरद मल्होत्रा भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय अभिनेता हैं। उन्होंने “बनूँ मैं तेरी दुल्हन”, “नागिन 5” और “भारत का वीर पुत्र – महाराणा प्रताप” जैसे धारावाहिकों में दमदार अभिनय से पहचान बनाई। उनकी अभिनय शैली और ऐतिहासिक व पौराणिक किरदारों ने दर्शकों के बीच खास स्थान बनाया। टीवी इंडस्ट्री में लंबे समय से सक्रिय रहकर उन्होंने भारतीय मनोरंजन जगत को समृद्ध किया और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बने।

🎬 फ़रहान अख़्तर (जन्म: 9 जनवरी 1974)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
फ़रहान अख़्तर बहुआयामी प्रतिभा के धनी हैं—निर्देशक, अभिनेता, निर्माता, गायक और लेखक। उन्होंने ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्म से हिंदी सिनेमा को नई सोच दी। अभिनय में “भाग मिल्खा भाग” जैसी फिल्मों से उन्होंने सामाजिक और खेल प्रेरित सिनेमा को मजबूती दी। इसके साथ ही वे सामाजिक मुद्दों, विशेषकर महिला सुरक्षा और समानता के लिए भी सक्रिय रहे हैं। भारतीय सिनेमा को आधुनिक दृष्टिकोण देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🎭 सुनील लहरी (जन्म: 9 जनवरी 1961)
जन्म स्थान: दमोह, मध्य प्रदेश, भारत
सुनील लहरी भारतीय टेलीविजन के चर्चित अभिनेता हैं, जिन्हें रामानंद सागर की ‘रामायण’ में लक्ष्मण की भूमिका से अपार लोकप्रियता मिली। उनका अभिनय आज भी भारतीय सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है। उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को घर-घर पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। ‘रामायण’ ने भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों को मजबूत किया, जिसमें सुनील लहरी का योगदान अविस्मरणीय है।

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🎶 महेन्द्र कपूर (जन्म: 9 जनवरी 1934)
जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत
महेन्द्र कपूर हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्व गायक थे। उनकी आवाज़ देशभक्ति गीतों की पहचान बन गई। “मेरे देश की धरती” और “भारत का रहने वाला हूँ” जैसे गीतों ने राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में गीत गाए और भारतीय संगीत को गौरव दिलाया। उनके गीत आज भी राष्ट्रीय पर्वों पर गूंजते हैं, जो उनके योगदान की स्थायित्व को दर्शाता है।

🌳 सुन्दरलाल बहुगुणा (जन्म: 9 जनवरी 1927)
जन्म स्थान: टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड, भारत
सुन्दरलाल बहुगुणा भारत के महान पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने जंगलों की कटाई के विरुद्ध अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। उनका नारा “पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है” आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण के लिए आजीवन संघर्ष किया और सरकारों को नीतियाँ बदलने पर मजबूर किया। भारत में पर्यावरण चेतना जगाने में उनका योगदान ऐतिहासिक है।

🧬 हरगोबिन्द खुराना (जन्म: 9 जनवरी 1922)
जन्म स्थान: रायपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान)
डॉ. हरगोबिन्द खुराना विश्व प्रसिद्ध जैवरसायनज्ञ थे। उन्हें 1968 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने आनुवंशिक कोड (Genetic Code) को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका शोध आधुनिक जैव विज्ञान और चिकित्सा के लिए आधारशिला साबित हुआ। भारतीय मूल के इस वैज्ञानिक ने वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया और विज्ञान के क्षेत्र में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।

🏛️ राम सुंदर दास (जन्म: 9 जनवरी 1921)
जन्म स्थान: सहारसा, बिहार, भारत
राम सुंदर दास भारतीय राजनीतिज्ञ और बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया। ग्रामीण विकास, शिक्षा और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। बिहार की राजनीति में उन्होंने सरल और ईमानदार छवि के साथ अपनी पहचान बनाई।
✍️ वृंदावनलाल वर्मा (जन्म: 9 जनवरी 1889)
जन्म स्थान: झाँसी, उत्तर प्रदेश, भारत
वृंदावनलाल वर्मा हिंदी साहित्य के महान ऐतिहासिक उपन्यासकार थे। “झाँसी की रानी” जैसे उपन्यासों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और गौरवशाली इतिहास को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत किया और हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।

📚 फ़ातिमा शेख़ (जन्म: 9 जनवरी 1831)
जन्म स्थान: पुणे, महाराष्ट्र, भारत
फ़ातिमा शेख़ भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका थीं। उन्होंने सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर लड़कियों और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए कार्य किया। उस दौर में जब महिलाओं की शिक्षा को विरोध झेलना पड़ता था, फ़ातिमा शेख़ ने सामाजिक क्रांति की नींव रखी। उनका योगदान भारतीय शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई: राहुल दुबे गिरोह का भंडाफोड़, 10 अपराधी गिरफ्तार

राँची/हजारीबाग (राष्ट्र की परम्परा)। हजारीबाग जिले में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उरीमारी ओपी क्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 को हुई फायरिंग की घटना का सफल उद्भेदन करते हुए पुलिस ने कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के 10 सक्रिय अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह फायरिंग एक स्थानीय व्यक्ति के घर के पास की गई थी, जिसके बाद गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

SIT के गठन के बाद तेज हुई कार्रवाई

घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। SIT ने उरीमारी, गिद्दी, बड़कागांव समेत आसपास के थाना क्षेत्रों में लगातार छापेमारी अभियान चलाया।

फुटबॉल मैदान के पास से गिरफ्तारी

07 जनवरी 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने एक फुटबॉल मैदान के पास त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर सभी अपराधियों को धर दबोचा।

हथियार और कारतूस बरामद

गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से पुलिस ने 5 देशी पिस्टल, 17 जिंदा कारतूस और 6 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सभी आरोपी पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं।

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राहुल दुबे के इशारे पर होती थीं वारदातें

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार अपराधी गिरोह के सरगना राहुल दुबे के इशारे पर फायरिंग और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देते थे।

न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग कांड दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई जिले में फ़

संगठित अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में हजारीबाग पुलिस की बड़ी और निर्णायक सफलता मानी जा रही है।

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सरकारी पोखरी पर अतिक्रमण, राजस्व विभाग की उदासीनता से जलस्रोत पर संकट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विकासखंड सदर अंतर्गत सेमरा राजा गांव में स्थित सरकारी पोखरी पर लंबे समय से हो रहे अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक उदासीनता के कारण गंभीर रूप लेता जा रहा है। मंदिर के समीप स्थित इस पोखरी पर ग्रामीणों द्वारा मिट्टी भरकर निजी उपयोग किए जाने से इसका प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप लगातार नष्ट होता जा रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद राजस्व विभाग अब तक बेखबर बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार यह पोखरी वर्षों से गांव में जल संरक्षण, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक आयोजनों तथा पशुओं के पानी की प्रमुख व्यवस्था रही है। मंदिर से सटे होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है। पहले जहां वर्ष भर पानी उपलब्ध रहता था, वहीं अब अतिक्रमण के कारण पोखरी का क्षेत्रफल लगातार सिमटता जा रहा है और जल स्रोत समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पोखरी की भूमि पर जान-बूझकर मिट्टी डलवाकर समतल किया जा रहा है और बाद में उसे निजी उपयोग में लाया जा रहा है। इस संबंध में कई बार राजस्व विभाग व स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन मौके पर न तो सीमांकन कराया गया और न ही कब्जा हटाने की कोई कार्रवाई की गई। केवल कागजी आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले और बुलंद हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में यह पोखरी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे गांव में जल संकट और गहरा जाएगा। साथ ही सरकारी भूमि पर हो रहे खुले कब्जे से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी पोखरी का तत्काल सीमांकन कराया जाए, अतिक्रमण हटाकर उसके मूल स्वरूप को बहाल किया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पोखरी के संरक्षण के लिए स्थायी उपाय किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जलस्रोत का लाभ मिल सके।

धरती की मुस्कान है हरियालीः पेड़-पौधों से ही सुरक्षित है जीवन, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियां

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अंधाधुंध विकास के इस दौर में धरती का प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। बढ़ता प्रदूषण, तपती गर्मी, घटती हरियाली और असमय होने वाली वर्षा साफ संकेत दे रही है कि प्रकृति संकट में है। ऐसे समय में यदि धरती को कोई संजीवनी मिल सकती है, तो वह है हरियाली। पेड़-पौधे केवल पर्यावरण की शोभा नहीं, बल्कि मानव जीवन, वन्यजीव और संपूर्ण जैव विविधता के लिए जीवन-रेखा हैं। सच तो यह है कि धरती की असली मुस्कान हरियाली से ही झलकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़-पौधे वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। हरियाली से वर्षा चक्र संतुलित रहता है, भूजल स्तर बढ़ता है और बढ़ते तापमान पर नियंत्रण रहता है। जंगलों और पेड़ों की मौजूदगी ही बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में सहायक होती है। इसके विपरीत, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने जलवायु परिवर्तन की गति को और तेज कर दिया है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रह है।
बीते कुछ वर्षों में विकास की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। नतीजतन गर्मी का प्रकोप बढ़ा है, जलस्रोत सूख रहे हैं और धरती का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। असमय बारिश, कभी अतिवृष्टि तो कभी सूखा—ये सभी प्रकृति के असंतुलन का संकेत हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अब भी नहीं संभले, तो आने वाला समय और अधिक भयावह हो सकता है।
इन्हीं चिंताओं को देखते हुए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनभागीदारी के साथ वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से आम, पीपल, नीम, बरगद, अर्जुन जैसे छायादार और फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति लोगों में जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है।
अभियानों के दौरान यह संदेश विशेष रूप से दिया जा रहा है कि पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे पेड़ बनने तक बचाना और उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। समय-समय पर सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख के अभाव में हजारों पौधे नष्ट हो जाते हैं, जिससे अच्छे प्रयास भी निष्फल हो जाते है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी लेने का संकल्प कर ले, तो पर्यावरण की तस्वीर बदली जा सकती है। इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। हरियाली से गांव और शहर सुंदर बनते हैं, तापमान संतुलित रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रकृति प्रेमियों का साफ कहना है कि यदि आज हमने हरियाली नहीं बचाई, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

भारत और विश्व इतिहास में 9 जनवरी का महत्व

📜 9 जनवरी: इतिहास के आईने में बदलाव, संघर्ष और उपलब्धियों से भरा एक यादगार

9 जनवरी का दिन विश्व इतिहास और भारतीय परिप्रेक्ष्य में अनेक महत्त्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। यह तिथि तकनीकी प्रगति, राजनीतिक निर्णयों, सामाजिक संघर्षों, वैज्ञानिक उपलब्धियों और ऐतिहासिक मोड़ों को अपने भीतर समेटे हुए है। आइए जानते हैं 9 जनवरी को घटित प्रमुख घटनाओं का विस्तृत विवरण, जो आज भी हमारे वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करती हैं।

🏦 2020: RBI का ऐतिहासिक KYC संशोधन और डिजिटल बैंकिंग की दिशा

9 जनवरी 2020 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने केवाईसी नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए वीडियो-आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP) को मंज़ूरी दी। इस फैसले ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम रखा। दूर-दराज़ क्षेत्रों में बैठे ग्राहकों के लिए बैंक खाता खोलना और ऋण सेवाएं लेना सरल हुआ, जिससे वित्तीय समावेशन को मज़बूती मिली।

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📱 डिजिटल भुगतान की ओर कदम: HDFC का myApps लॉन्च

इसी वर्ष एचडीएफ़सी बैंक ने myApps एप्लिकेशन लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देना था। यह ऐप कई वित्तीय सेवाओं को एक मंच पर लाकर उपयोगकर्ताओं के लिए लेन-देन को आसान और सुरक्षित बनाता है। यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को गति देने वाली साबित हुई।

🌾 चावल निर्यात नीति में संशोधन: भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंध

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के देशों को चावल निर्यात को लेकर नीति में संशोधन किया। इससे भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा मिली और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय किसानों को बेहतर अवसर प्राप्त हुए। यह कदम भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने वाला रहा।

🏛️ अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का नया प्रतीक चिन्ह

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा ने 9 जनवरी को अपना नया लोगो अपनाया। यह प्रतीक राज्य की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधित्व की भावना को दर्शाता है। यह निर्णय राज्य की पहचान और संस्थागत गरिमा को सुदृढ़ करने वाला माना गया।

2012: लियोनेल मेसी का फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय

महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने लगातार दूसरे वर्ष फीफा बैलोन डी ओर पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा। यह उपलब्धि उनकी असाधारण प्रतिभा, निरंतरता और खेल के प्रति समर्पण का प्रतीक बनी। मेसी ने विश्व फुटबॉल में एक नए युग की शुरुआत की।

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✈️ 2011: ईरान एयर फ्लाइट 277 हादसा

ईरान एयर की फ्लाइट संख्या 277 के दुर्घटनाग्रस्त होने से 77 लोगों की जान चली गई। यह घटना वैश्विक विमानन सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करने वाली रही और इसके बाद सुरक्षा मानकों को और सख्त किया गया।

⚖️ 2010: रुचिका मामला और CBI जांच

हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने रुचिका गिरहोत्रा मामले की जांच स्वीकार की। यह फैसला न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना गया।

🏅 2009: सोमनाथ चटर्जी को बेबी जान फाउंडेशन पुरस्कार

तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के संरक्षण के लिए उनके प्रयासों की सराहना था।

🏔️ 2008: हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार

मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अपने मंत्रिमंडल में नौ मंत्रियों को शामिल किया। यह राजनीतिक संतुलन और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

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🌍 इतिहास के अन्य महत्त्वपूर्ण पड़ाव (संक्षेप में)

1982: पहला भारतीय वैज्ञानिक दल अंटार्कटिका पहुंचा – वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत की ऐतिहासिक छलांग।

1970: सिंगापुर ने संविधान अपनाया – आधुनिक राष्ट्र निर्माण की नींव।

1915-1914: महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटना – स्वतंत्रता आंदोलन का नया अध्याय।

1431: जोन ऑफ आर्क के विरुद्ध मुकदमे की शुरुआत – यूरोपीय इतिहास का निर्णायक मोड़।

🔍 निष्कर्ष– 9 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास की वह धुरी है जहाँ से परिवर्तन, संघर्ष और प्रगति की अनेक कहानियाँ जन्म लेती हैं। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

महराजगंज : अवसर बहुत, अमल कम

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, उपजाऊ कृषि भूमि, घने वन क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा भौगोलिक महत्व और मेहनतकश किसान-मजदूरों की विशाल जनशक्ति—इन तमाम खूबियों के बावजूद महराजगंज जनपद आज भी विकास की दौड़ में अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। सरकारी योजनाओं, घोषणाओं और बजट की कोई कमी नहीं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अधिकांश योजनाएं कागजों तक सिमट कर रह जाती हैं। यही कारण है कि महराजगंज की पहचान धीरे-धीरे “अवसर बहुत, अमल कम” वाले जिले के रूप में बनती जा रही है।
कृषि प्रधान जनपद होने के नाते महराजगंज में सिंचाई, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। बावजूद इसके किसान आज भी अनियमित सिंचाई व्यवस्था, जर्जर नहरों, टेल तक पानी न पहुंचने के कारण किसानों पर संकट बना रहता है।धान, गेहूं, गन्ना, दलहन और सब्जी उत्पादन की क्षमता होते हुए भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कोल्ड स्टोरेज और कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना की योजनाएं वर्षों से चर्चा में हैं, लेकिन धरातल पर उनकी मौजूदगी न के बराबर है। परिणामस्वरूप किसान लागत निकालने के लिए संघर्ष करता है और युवाओं का खेती से मोहभंग बढ़ता जा रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी तस्वीर चिंताजनक है। सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के भवन तो बने हैं, लेकिन शिक्षकों, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और आधुनिक संसाधनों की कमी है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी गंभीर इलाज के लिए जिला मुख्यालय या गोरखपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता की कमी और संसाधनों का अभाव बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े करता है।
सड़क, पेयजल, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाएं सरकारी रिपोर्टों में भले ही पूरी दिखाई देती हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। गांवों में अधूरी सड़कें, जर्जर नालियां, बरसात में जलभराव और गर्मी में पेयजल संकट आम समस्या बन चुके हैं। मनरेगा जैसी योजनाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें विकास की धीमी रफ्तार को उजागर करती हैं। रोजगार के अभाव में आज भी बड़ी संख्या में युवा पलायन को मजबूर है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि महराजगंज की सबसे बड़ी समस्या योजनाओं की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सख्त निगरानी का अभाव है। प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध कार्यवाही और जिम्मेदारी तय किए बिना विकास केवल आंकड़ों और फाइलों तक ही सीमित रहेगा। आज भी जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि शासन और प्रशासन जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए विकास कार्यों में ईमानदारी और गति लाएगा। यदि योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की रणनीति बने और जनप्रतिनिधि व अधिकारी जवाबदेह हों, तो महराजगंज को पीछे नहीं रखा जा सकता।
अवसर आज भी मौजूद हैं, जरूरत है केवल उन्हें कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की। तभी महराजगंज वास्तव में संभावनाओं को अमल में बदलते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध जनपद के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा।

आज का पंचांग बताएगा – कौन सा कार्य देगा तुरंत फल और किससे बचना है जरूरी

पंचांग 09 जनवरी 2026 | आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त, तिथि-नक्षत्र, राहुकाल, यात्रा योग
स्थान: भारत
दिन: शुक्रवार
तारीख: 09 जनवरी 2026

🕉️ आज का विस्तृत पंचांग (09/01/2026)

तिथि- माघ कृष्ण पक्ष सप्तमी
समय – 09 जनवरी सुबह 07:05 बजे से 10 जनवरी सुबह 08:24 बजे तक

नक्षत्र- उत्तर फाल्गुनी – दोपहर 01:40 बजे तक
उपरांत – हस्त नक्षत्र

योग- शोभन योग – शाम 04:55 बजे तक
उपरांत – अतिगण्ड योग

करण- विष्टि (भद्रा) – शाम 07:39 बजे तक
बव – उसके बाद

वार- शुक्रवार

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📜 संवत एवं मास

विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)

शक संवत: 1947 (विश्वावसु)

चंद्र मास:

अमांत – पौष

पूर्णिमांत – माघ

वैदिक ऋतु: हेमंत

द्रिक ऋतु: शिशिर

अयन: दक्षिणायन

राष्ट्रीय कैलेंडर: पौष 19, 1947

☀️ सूर्य एवं 🌙 चंद्रमा का समय

सूर्योदय: 07:14 AM

सूर्यास्त: 05:53 PM

चन्द्रोदय: 11:51 PM

चन्द्रास्त: 11:44 AM

♐ ग्रह स्थिति

सूर्य राशि: धनु

चंद्र राशि: कन्या (पूरा दिन-रात)

⚠️ अशुभ काल (आज न करें ये कार्य)

राहुकाल: 11:13 AM – 12:33 PM

यमगण्ड: 03:13 PM – 04:33 PM

कुलिक काल: 08:34 AM – 09:54 AM

दुर्मुहूर्त:

09:22 AM – 10:04 AM

12:55 PM – 01:37 PM

वर्ज्यम्: 10:46 PM – 12:30 AM

शुभ काल (आज के श्रेष्ठ मुहूर्त)

ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:26 AM

अमृत काल: 06:05 AM – 07:46 AM

अभिजीत मुहूर्त: 12:12 PM – 12:55 PM

🌟 विशेष योग

सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं बन रहा

आनंदादि योग:

शुभ – 01:40 PM तक

उपरांत – अमृत

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🚫 आज की यात्रा दिशा वर्जना

शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।

यदि अत्यंत आवश्यक हो तो दही या मीठा खाकर यात्रा करें।

लाभकारी यात्रा दिशा

उत्तर एवं पूर्व दिशा की यात्रा से आज लाभ मिलने की संभावना है।

🌙 चंद्रबल (राशि अनुसार)

आज चंद्रबल प्राप्त राशियाँ:
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

ताराबल (नक्षत्र अनुसार)

दोपहर 01:40 बजे तक शुभ नक्षत्र:
भरणी, रोहिणी, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती

01:40 PM के बाद शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, आद्रा, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा

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प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 50 एकड़ में लगी अवैध अफीम की खेती नष्ट

राँची/हजारीबाग (राष्ट्र की परम्परा)।झारखंड में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 एकड़ में लगी अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया। यह संयुक्त अभियान 08 जनवरी 2026 को चौपारण थाना क्षेत्र के ग्राम मुरानिया और दुरागाढ़ा में गुप्त सूचना के आधार पर चलाया गया।

पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर लगी अफीम की फसल को पूरी तरह नष्ट किया। अभियान के दौरान 10 सेक्शन पाइप और 4 डिलीवरी पाइप बरामद किए गए, जिन्हें वहीं पर नष्ट कर दिया गया।

दोषियों की पहचान में जुटा प्रशासन

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अवैध अफीम की खेती में संलिप्त लोगों के नाम-पते का सत्यापन किया जा रहा है। दोषियों की पहचान होते ही उनके खिलाफ विधिसम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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एसडीपीओ बरही सहित कई अधिकारी रहे मौजूद

इस संयुक्त अभियान में एसडीपीओ बरही, पुलिस एवं वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मी शामिल रहे। अभियान को पूरी सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था के साथ अंजाम दिया गया।

SP हजारीबाग का सख्त संदेश

हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी के खिलाफ आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे इस तरह की गतिविधियों की सूचना प्रशासन को दें।

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कड़ाके की ठंड में ओम शंकर गुप्ता का सेवा अभियान, 500 से अधिक महिलाओं के बीच शाल वितरण

राँची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड में कड़ाके की ठंड के बीच लोकप्रिय युवा नेता ओम शंकर गुप्ता ने एक बार फिर मानवता और सेवा की मिसाल पेश की है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उन्होंने हटिया विधानसभा क्षेत्र में जरूरतमंद महिलाओं के लिए शाल वितरण अभियान चलाया।

इस सेवा अभियान के तहत तारूप, रातू कुम्बा टोली, रातू बड़का टोली, लहना, मुरगु, चित्रकोटा, रातू, दलादिली, बनापीड़ी, पुरियो, जाड़ी, झाकराटांड़, कमड़े, तिगरा, कठितांड, आमटांड़ सहित कई गांवों में 500 से अधिक महिलाओं को शाल वितरित किए गए।

“सेवा ही मेरा उद्देश्य है” – ओम शंकर गुप्ता

शाल वितरण कार्यक्रम के दौरान ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि ठंड के मौसम में गरीब, असहाय और जरूरतमंद महिलाओं को राहत पहुंचाना उनका वर्षों से चला आ रहा सेवा कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के समय में इंसानियत सबसे बड़ी जरूरत है और समाज के हर सक्षम व्यक्ति को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सेवा कार्य वे अपने निजी संसाधनों से लगातार करते आ रहे हैं और भविष्य में भी इसे बिना रुके जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि आम लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना है।

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शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा में सहयोग का भरोसा

ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि सेवा-भावना किसी पद या पार्टी से नहीं, बल्कि इंसान के भीतर से आती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी वे हटिया विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, कानूनी सहायता और आपदा के समय सहयोग करते रहेंगे।

महिलाओं ने जताया आभार

शाल वितरण कार्यक्रम के दौरान स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने ओम शंकर गुप्ता का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि कड़ाके की ठंड में जब ठंड से बचाव मुश्किल हो जाता है, तब इस तरह की पहल गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होती है।
इस अवसर पर क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।

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देवरिया में SIR के दौरान 4.14 लाख वोट कटे, 2027 विधानसभा चुनाव में किसे होगा फायदा?

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद में मतदाता सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में वोट कटने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में जनपद की सातों विधानसभा सीटों से कुल 4,14,799 वोट कम हो गए हैं। औसतन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 59,257 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

यह भारी कटौती आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में किस दल के लिए फायदेमंद साबित होगी और किसके लिए नुकसानदेह, इस पर सियासी बहस तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल इसे अपने-अपने पक्ष में मुफीद बताने में जुटे हुए हैं, लेकिन वास्तविक असर तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगा।

2022 के मुकाबले कई गुना अधिक वोट कटे

गौर करने वाली बात यह है कि लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान कटे वोटों की संख्या, 2022 विधानसभा चुनाव में जीत-हार के अंतर से दो से तीन गुना अधिक है। ऐसे में मतदाताओं की इस कमी का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

विधानसभा वार वोट कटौती और 2022 का अंतर

बरहज विधानसभा:
2022 में जीत-हार का अंतर 16,861 वोट था, जबकि SIR में 53,908 वोट कटे।

देवरिया सदर:
जीत-हार का अंतर 40,655 वोट, लेकिन 88,434 वोट कम हुए।

पथरदेवा:
अंतर 28,681 वोट, SIR में 49,623 वोट घटे।

रुद्रपुर:
अंतर 41,936 वोट, SIR में 45,389 वोट कटे।

सलेमपुर:
अंतर 16,608 वोट, SIR में रिकॉर्ड 70,966 वोट कम।

भाटपार रानी:
अंतर 18,082 वोट, SIR में 49,208 वोट घटे।

रामपुर कारखाना:
अंतर 16,608 वोट, SIR में 49,208 वोट कम।

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CM योगी के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

इस पूरे मुद्दे को और गंभीर बनाता है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि SIR में कटे 85–90 प्रतिशत वोट उनके समर्थकों के हो सकते हैं। यदि इस दावे को आधार माना जाए, तो देवरिया जनपद में कटे 4.14 लाख वोट 2027 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

2027 में बदलेगा चुनावी गणित?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाता सूची में हुई यह कटौती संतुलित नहीं हुई, तो कई सीटों पर चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। खासकर वे सीटें जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था, वहां यह वोट कटौती परिणाम को पलट सकती है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि SIR में घटे वोट किस दल के लिए संजीवनी बनते हैं और किसके लिए सियासी संकट, इसका जवाब 2027 के विधानसभा चुनाव नतीजे ही देंगे।

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अदालत के आदेश पर बुलडोजर, जवाब में पत्थर-यह विरोध नहीं, खुली बगावत है

तुर्कमान गेट की घटना कोई अचानक उभरा गुस्सा नहीं, बल्कि कानून और संविधान को ठेंगा दिखाने की सोची-समझी मानसिकता का आईना है। अदालत के आदेश से जब अवैध निर्माण हटाया जाता है, तो पत्थर चलते हैं। पुलिसकर्मी घायल होते हैं। और जब दंगाइयों को अदालत जमानत नहीं देती, तो न्यायपालिका के फैसले पर नहीं, बल्कि मोदी-शाह की “कब्र खोदने” जैसे जहरीले नारे गूंजने लगते हैं। सवाल तीखा है, क्या अब अदालतें भीड़ से पूछकर फैसले देंगी?

संविधान साफ कहता है कि कानून सर्वोच्च है। अदालत का आदेश अंतिम है। प्रशासन उसका पालन करेगा, भावनाओं का नहीं। लेकिन यहां भावनाओं की आड़ में हिंसा को जायज़ ठहराने की कोशिश हो रही है। पत्थरबाज़ी को “प्रतिरोध”, पुलिस पर हमले को “गुस्सा” और अदालत के फैसले को “राजनीतिक बदला” बताया जा रहा है। यह तर्क नहीं, अराजकता है।

पुलिस पर हमला लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, सीधा अपराध है। अदालत के आदेश के खिलाफ हिंसा कोई आंदोलन नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। और जमानत न मिलने पर धमकी भरे नारे। यह न्यायपालिका को डराने की कोशिश नहीं तो और क्या है?

यह समझना होगा कि जमानत कोई अधिकार नहीं, अदालत का विवेक है। जो लोग अदालत का फैसला पसंद आने पर संविधान की दुहाई देते हैं और नापसंद होने पर पत्थर उठा लेते हैं, वे असल में लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र चाहते हैं।

आज मुद्दा किसी नेता का नहीं है। मुद्दा यह है कि देश संविधान से चलेगा या सड़क की हिंसा से? अदालत के आदेश मान्य होंगे या पत्थरबाज़ों की मर्जी चलेगी? अगर हर कानूनी कार्रवाई का जवाब दंगे से दिया जाएगा, तो फिर कानून, अदालत और लोकतंत्र—तीनों बेमानी हो जाएंगे।

साफ बात है, विरोध का हक है, हिंसा का नहीं। असहमति का रास्ता अदालत है, पत्थर नहीं। जो आज अदालत के आदेश पर हमला कर रहे हैं, वे दरअसल संविधान पर हमला कर रहे हैं, और संविधान पर हमला, किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

US Travel Advisory 2026: अमेरिकी नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी: इन 21 देशों की यात्रा न करने की चेतावनी

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका ने गुरुवार को अपने नागरिकों के लिए एक अहम आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया के 21 देशों को ‘लेवल-4: डू नॉट ट्रैवल’ श्रेणी में रखा है। इन देशों में रूस, यूक्रेन, लीबिया, बुर्किना फासो जैसे उच्च जोखिम वाले देश शामिल हैं। राहत की बात यह है कि इस सूची में भारत और पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है।

विदेश विभाग ने सोशल मीडिया पर जारी की एडवाइजरी

अमेरिकी विदेश विभाग के Bureau of Consular Affairs ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर ट्रैवल एडवाइजरी साझा की। पोस्ट में कहा गया कि अमेरिकी नागरिकों के लिए देशों को लेवल 1 से लेवल 4 तक वर्गीकृत किया गया है, जिसमें लेवल-4 का मतलब है – किसी भी स्थिति में यात्रा न करें।

विदेश विभाग के अनुसार, स्थानीय सुरक्षा हालात, आतंकवाद, गृह युद्ध, अपहरण और अमेरिकी नागरिकों तक सहायता पहुंचाने की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए इन देशों को लेवल-4 में रखा गया है।

इन 21 देशों की यात्रा न करने की अपील

अमेरिकी सरकार द्वारा जारी सूची में शामिल देश:

• अफगानिस्तान

• बेलारूस

• बुर्किना फासो

• म्यांमार (बर्मा)

• सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (CAR)

• हैती

• ईरान

• इराक

• लेबनान

• लीबिया

• माली

• नाइजर

• उत्तर कोरिया

• रूस

• सोमालिया

• दक्षिण सूडान

• सूडान

• सीरिया

• यूक्रेन

• वेनेजुएला

• यमन

रूस की परमाणु धमकी के बाद बढ़ा तनाव

बताया जा रहा है कि यह कदम रूस की ओर से परमाणु हथियारों की धमकी के बाद उठाया गया है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया था, जिसके बाद अमेरिका और रूस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया।

रूस ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार दिया है। वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी के सांसद और रक्षा मामलों की स्टेट कमेटी के उपाध्यक्ष एलेक्सी जुरावलेव ने अमेरिका को परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की खुली धमकी दी, जिससे वैश्विक सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विधान परिषद में नेता विपक्ष लाल बहादुर यादव का कपरवार में जोरदार स्वागत

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के नेता विपक्ष लाल बहादुर यादव का गुरुवार को ग्राम सभा कपरवार में आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
स्वागत कार्यक्रम लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से राधारमण तिवारी, सुधाकर चौरसिया, कमलेश सिंह, अनील यादव सहित समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने नेता विपक्ष का माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस अवसर पर नेता विपक्ष ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया तथा जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही।

घर-घर कालाजार रोगियों की खोज करेंगी आशा कार्यकर्ता: डीएमओ

एसीडी अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l कालाजार उन्मूलन अभियान के अंतर्गत गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पथरदेवा में जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) सीपी मिश्रा की अध्यक्षता में घर-घर सक्रिय कालाजार रोगी खोज अभियान (एसीडी) के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार रोगियों की पहचान और उनकी जांच कराने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने कहा, “आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर उन मरीजों की पहचान करेंगी, जो दो सप्ताह से बुखार से पीड़ित हैं।” उन्होंने कालाजार के लक्षण, शुरुआती और गंभीर स्थितियों, संदिग्ध रोगियों की पहचान, उपचार प्रक्रिया और समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ता इस अभियान की रीढ़ की हड्डी हैं, और इनकी सक्रियता और जागरूकता के माध्यम से कालाजार के रोगियों की समय पर पहचान और इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा।प्रशिक्षण में बताया गया कि प्रत्येक आशा कार्यकर्ता प्रति दिन 50 घरों का दौरा करेगी और दो सप्ताह से बुखार वाले मरीजों को चिन्हित करेगी। संदिग्ध रोगियों की पहचान होते ही इन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र रेफर करना आवश्यक है, ताकि समय रहते जांच और इलाज शुरू किया जा सके।प्रशिक्षण में सहायक मलेरिया अधिकारी नवीन भारती, सहयोगी संस्था सीफार के जिला प्रतिनिधि नीरज, बीसीपी आशुतोष त्रिपाठी, बीएसडब्लू राकेश और अन्य आशा कार्यकर्ता भी मौजूद थे।

नवागत एडीएम प्रशासन प्रेम नारायण सिंह ने संभाली कमान, जनसुनवाई और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l देवरिया जनपद में नवागत अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) प्रेम नारायण सिंह ने 02 जनवरी 2026 को विधिवत रूप से कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय से पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी।प्रेम नारायण सिंह इससे पूर्व अयोध्या तीर्थ विकास परिषद में संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर तैनात रह चुके हैं। अयोध्या के तीर्थ विकास और अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके कार्यकाल में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू हुईं, जिनका सकारात्मक और व्यापक प्रभाव देखने को मिला। प्रशासनिक अनुभव के आधार पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि देवरिया जनपद में भी विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों को नई गति मिलेगी।कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कार्यालयीन कार्यों की समीक्षा करते हुए राजस्व एवं प्रशासनिक मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसमस्याओं का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर धरातल पर भी दिखना चाहिए। तहसील और ब्लॉक स्तर पर अनावश्यक विलंब करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाया जाएगा और जनसुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। राजस्व मामलों में पारदर्शिता बनाए रखते हुए कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और जनपद के समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।नवागत एडीएम प्रशासन के इन स्पष्ट और जनहितकारी निर्देशों से स्थानीय नागरिकों में यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यों में तेजी, जवाबदेही और पारदर्शिता देखने को मिलेगी।