Monday, June 22, 2026
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इमिलिया गांव में श्री विष्णु महायज्ञ एवं मानस सम्मेलन का भव्य आयोजन

23 से 31 जनवरी तक बहेगी भक्ति की अविरल धारा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा, वैदिक संस्कृति और सामाजिक समरसता को सशक्त करने के उद्देश्य से जनपद महाराजगंज के ग्राम सभा इमिलिया स्थित रामजानकी मंदिर परिसर में श्री विष्णु महायज्ञ एवं मानस सम्मेलन महोत्सव का भव्य, ऐतिहासिक और दिव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पावन धार्मिक अनुष्ठान 23 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धा भाव के साथ संपन्न होगा।

महोत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी को आचार्यों द्वारा यज्ञ मंडप में विधिवत हवन-पूजन और मंत्रोच्चार के साथ किया जाएगा। इसके पश्चात भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भाग लेंगी। वहीं पुरुष एवं युवा ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और जयघोष के साथ पूरे गांव का भ्रमण करेंगे। कलश यात्रा से इमिलिया गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठेगा और क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञाग्नि में आहुतियां दी जाएंगी। आचार्यगण यज्ञ के माध्यम से विश्व कल्याण, ग्राम समृद्धि, शांति, सद्भाव और राष्ट्र मंगल की कामना करेंगे। साथ ही श्रद्धालुओं को यज्ञ के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व से भी अवगत कराया जाएगा, जिससे समाज में संस्कार और आस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।

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महायज्ञ के साथ आयोजित मानस सम्मेलन इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसमें विद्वान संत-महात्मा एवं प्रसिद्ध कथावाचक श्रीरामचरितमानस की अमृतमयी कथाओं का भावपूर्ण वाचन एवं प्रवचन करेंगे। रामकथा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, धर्म, करुणा, त्याग, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। सम्मेलन में दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति की संभावना है।

यज्ञ अवधि में प्रतिदिन सायंकालीन समय भजन-कीर्तन, रामधुन एवं धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा रहेगा और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होगी। महायज्ञ का समापन 31 जनवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।

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विरोध प्रदर्शनों से हिली खामेनेई सरकार, दुनिया की बढ़ी चिंता

ईरान में महंगाई के खिलाफ उबाल, सरकार का सख्त संदेश: प्रदर्शनकारियों पर मौत की सजा की चेतावनी

तेहरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ईरान इस समय गंभीर आंतरिक संकट के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, मुद्रा के लगातार गिरते मूल्य और आम नागरिकों के जीवन स्तर में आई तेज गिरावट के खिलाफ देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों पर सरकार ने बेहद कठोर रुख अपनाया है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों को सीधे तौर पर “भगवान का दुश्मन” करार देते हुए कड़े दंड की चेतावनी दी है, जिसमें मौत की सजा तक का प्रावधान शामिल है।
ईरान के अटॉर्नी जनरल के इस बयान के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरानी कानून में “मोहरबेह” यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है। सरकार का कहना है कि हिंसक विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वालों पर इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
हालात की सटीक जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है क्योंकि बीते कई दिनों से देश में इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित ईरानी समूहों का दावा है कि अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
तेहरान के अलावा चहारमहल-बख्तियारी, केरमानशाह और अन्य बड़े शहरों में विरोध सबसे ज्यादा उग्र रहा है। आंदोलन को उस समय और बल मिला जब ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने निर्वासन से जनता से सड़कों पर उतरने और प्रमुख शहरों में दबाव बढ़ाने की अपील की।
ईरान में महंगाई विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक असंतोष नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच गहराते टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है।

2025 में गोवा पर्यटन ने बनाया रिकॉर्ड, 1.08 करोड़ से अधिक सैलानी पहुंचे

गोवा (राष्ट्र की परम्परा)। अपने खूबसूरत समुद्र तटों और विश्वप्रसिद्ध स्थापत्य कला के लिए मशहूर गोवा ने साल 2025 में पर्यटन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में गोवा में कुल 1.08 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिनमें 5 लाख से ज्यादा विदेशी सैलानी शामिल हैं। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है।

राज्य पर्यटन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में गोवा में 1,02,84,608 घरेलू पर्यटक और 5,17,802 विदेशी पर्यटक आए। इस तरह कुल पर्यटकों की संख्या 1,08,02,410 तक पहुंच गई। खास बात यह रही कि चार्टर उड़ानों के जरिए विदेशी पर्यटकों की आवाजाही ने पर्यटन को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभाई, खासकर पारंपरिक सोर्स देशों से।

गुणवत्ता और रीजेनरेटिव टूरिज्म पर फोकस

गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन खुंटे ने रविवार (11 जनवरी) को कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य क्वालिटी टूरिज्म, नए बाजारों में विविधता और रीजेनरेटिव टूरिज्म विजन को आगे बढ़ाना है। इससे स्थानीय समुदायों, पर्यावरण और राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकेगा।

2023 में आई थी गिरावट

गौरतलब है कि गोवा को साल 2023 में पर्यटन उद्योग में गिरावट का सामना करना पड़ा था, जब विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर लगभग 15 लाख रह गई थी। वहीं, 2019 में 85 लाख विदेशी पर्यटक गोवा पहुंचे थे।
पर्यटन आंकड़ों के अनुसार,

2017 में: 68,95,234 घरेलू और 8,90,459 विदेशी पर्यटक

2018 में: कुल 80,15,400 पर्यटक

2019 में: कुल 80,64,400 पर्यटक

COVID-19 से पहले 2018 और 2019 में पर्यटन में स्थिर और मध्यम वृद्धि देखी गई थी।

पर्यटन उद्योग को मिली नई संजीवनी

साल 2025 के ये आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि गोवा का पर्यटन उद्योग अब पूरी मजबूती के साथ पटरी पर लौट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान बना रहा, तो आने वाले वर्षों में गोवा भारत का सबसे मजबूत पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा।

बाढ़ में देर रात पुलिस-अपराधी मुठभेड़, पैर में गोली लगने से बदमाश घायल

बिहार में एनकाउंटर: बाढ़ में कुख्यात अपराधी प्रभात कुमार घायल, पुलिस की जवाबी कार्रवाई तेज

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का सख्त रुख लगातार देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत अथमलगोला थाना क्षेत्र के धर्मपुरा इलाके में शनिवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में कुख्यात अपराधी प्रभात कुमार पुलिस की गोली से घायल हो गया। उसे पैर में गोली लगी है।

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सूत्रों के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में इकट्ठा हुए हैं। सूचना मिलते ही बाढ़ थाना सहित आसपास के कई थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से घेराबंदी अभियान चलाया। जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक गोली प्रभात कुमार के पैर में लगी। घायल अवस्था में उसे पहले बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।

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घटना के बाद बाढ़ थाना पुलिस ने फिलहाल आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है। वहीं, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले को लेकर विस्तृत जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने स्पष्ट कहा था कि पुलिस का पहला दायित्व जनता की सुरक्षा है। यदि अपराधी हथियार उठाते हैं तो पुलिस भी सख्ती से जवाब देगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पटना समेत पूरे बिहार में अपराध के मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
बिहार में लगातार हो रहे ऐसे एनकाउंटर यह संकेत दे रहे हैं कि राज्य पुलिस अब अपराध के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के मूड में है।

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर हाईटेक सुरक्षा: फेस और आईडी स्कैनिंग से रोकी जाएगी घुसपैठ

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। भारत–नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए अब हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। इंडो-नेपाल बॉर्डर से लगातार सामने आ रहे संदिग्ध मामलों को देखते हुए पायलट प्रोजेक्ट के तहत फेस और आईडी स्कैनर सिस्टम लगाया गया है। इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति बिना पहचान सत्यापन के न तो भारत में प्रवेश कर सकेगा और न ही नेपाल जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रूपईडीहा चेक पोस्ट पर इस अत्याधुनिक सिस्टम को लागू किया गया है। यहां अब हर व्यक्ति का चेहरा और पहचान पत्र स्कैन किया जाएगा, जिसके बाद ही सीमा पार करने की अनुमति मिलेगी। इसके साथ ही सीमा से आने-जाने वाले सभी वाहनों का डिजिटल डेटा भी सुरक्षित किया जा रहा है।

घुसपैठ पर लगेगी लगाम

नेपाल के रास्ते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के नागरिकों द्वारा बिना वीजा भारत में घुसने की कई कोशिशें पहले ही नाकाम की जा चुकी हैं। एसएसबी के जवानों ने ऐसे कई घुसपैठियों को पकड़कर जेल भेजा है। भारत–नेपाल सीमा की लगभग 125 किलोमीटर लंबी खुली सीमा घुसपैठ के लिए संवेदनशील मानी जाती रही है, जिसे देखते हुए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

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एसएसबी कमांडेंट का बयान

एसएसबी 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने बताया कि यह सिस्टम फोर्स हेडक्वार्टर के निर्देश पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। यह तकनीक हर आने-जाने वाले व्यक्ति का डेटा रिकॉर्ड कर रही है, जिससे भविष्य में किसी भी एंटी-नेशनल या तीसरे देश के नागरिक की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी।

उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इस सिस्टम को और विस्तार दिया जाएगा, जिससे न सिर्फ देश की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी।

सीमावर्ती लोगों को भी मिलेगा लाभ

हालांकि शुरुआत में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन आने वाले समय में यह सिस्टम सीमा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के लिए भी आसान और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा।

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मगहर में खिचड़ी मेले की तैयारियों से बढ़ी रौनक, दुकानों और झूलों से सजा मेला परिसर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर में मकर संक्रांति पर लगने वाले पारंपरिक खिचड़ी मेले को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आमी नदी के तट पर स्थित निर्वाण स्थली पर मकर संक्रांति के दिन क्षेत्र के श्रद्धालु परंपरा के अनुसार संत कबीर को खिचड़ी भी चढ़ाएंगे। मेले से पहले ही परिसर में विभिन्न क्षेत्रों से दुकानदार पहुंचने लगे हैं और दुकानों के साथ झूलों की स्थापना भी लगभग पूरी हो चुकी है। इसके चलते इन दिनों निर्वाण स्थली परिसर में चहल-पहल और उत्सव जैसा माहौल बन गया है। हर वर्ष 12 से 18 जनवरी के बीच आयोजित होने वाले मगहर महोत्सव के साथ खिचड़ी मेले का आयोजन परंपरागत रूप से होता रहा है, जिससे मेले की भव्यता और महत्व और बढ़ जाता था। हालांकि इस वर्ष मगहर महोत्सव के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसके बावजूद खिचड़ी मेले को लेकर दुकानदारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मेला परिसर में खाद्य सामग्री, खिलौने, श्रृंगार, घरेलू उपयोग की वस्तुओं सहित विविध प्रकार की दुकानें सज चुकी हैं। निर्वाण स्थली के प्रवेश द्वार के सामने लगी खजले और मिठाइयों की दुकानें श्रद्धालुओं और आगंतुकों को आकर्षित कर रही हैं। वहीं फुटपाथों पर ठेलों पर सजी दुकानों से परिसर की रौनक और बढ़ गई है, जिसका स्वाद यहां आने वाले लोग बखूबी लुत्फ उठा रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि चाहे महोत्सव का आयोजन हो या न हो, खिचड़ी मेले की पारंपरिक आस्था और भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कुल मिलाकर, मगहर में खिचड़ी मेले की तैयारियों ने पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना दिया है।

धार्मिक आस्था से सराबोर दुमवालिया गांव, सुंदरकांड पाठ व भंडारे का भव्य आयोजन

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। क्षेत्र के ग्राम दुमवालिया में धार्मिक आस्था और भक्ति भाव के वातावरण के बीच सुंदरकांड पाठ एवं भंडारे (भोज) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक शशांक त्रिपाठी रहे। आयोजन में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिली।
सुंदरकांड पाठ का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पाठ के दौरान पूरा वातावरण जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सुंदरकांड का श्रवण किया तथा हनुमान जी से सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
पाठ के समापन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजक शशांक त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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कार्यक्रम के दौरान गांव के वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता उल्लेखनीय रही। ग्रामीणों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में सहायक होते हैं।
पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं सुचारू रहीं और अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

वृंदावन: प्रेमानंद जी महाराज के फ्लैट में भीषण आग, सेवादारों की अभद्रता से बढ़ा विवाद

मथुरा (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में वृंदावन के छटीकरा मार्ग स्थित श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज के फ्लैट संख्या 212 में अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने का प्राथमिक कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, लेकिन घटना के दौरान महाराज के सेवादारों के व्यवहार ने मामले को विवादास्पद बना दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फ्लैट से धुआं और आग की लपटें उठती देख आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। राहत की बात यह रही कि प्रेमानंद जी महाराज पिछले एक महीने से श्री राधाहित कैलिकुंज में निवास कर रहे हैं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग को जल्द नियंत्रित कर लिया।

पत्रकारों और स्थानीय लोगों से अभद्रता

आग की सूचना पर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों और वीडियो बना रहे स्थानीय लोगों के साथ महाराज के सेवादारों द्वारा कथित तौर पर अभद्रता की गई। आरोप है कि सेवादारों ने कई लोगों के मोबाइल फोन छीन लिए और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी बदसलूकी की, जिससे वहां तनाव का माहौल बन गया।

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स्थानीय लोगों में रोष

सेवादारों के इस व्यवहार से स्थानीय ब्रजवासियों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में जहां सहयोग और संयम की आवश्यकता थी, वहीं सेवादारों ने अमर्यादित आचरण किया। स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दमकल विभाग ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। साथ ही प्रशासन ने सोसाइटी में आग से बचाव के उपकरणों और विद्युत व्यवस्था की भी जांच शुरू कर दी है। यह घटना वृंदावन के धार्मिक और सामाजिक परिवेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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देवरिया में संघ स्वयंसेवकों की सराहनीय पहल,

अधिक हो दे जाए, जरूरत हो ले जाए” अभियान से मानवता को मिली नई दिशा

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, देव नगर देवरिया के स्वयंसेवकों द्वारा समाजसेवा की दिशा में एक प्रेरणादायी और अनोखी पहल की शुरुआत की गई है। “अधिक हो दे जाए, जरूरत हो ले जाए” नामक इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग की भावना को सशक्त किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत आमजन से अपील की गई है कि जिनके पास वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री आवश्यकता से अधिक हो, वे उसे दान स्वरूप छोड़ जाएं और जिन्हें आवश्यकता हो, वे निःसंकोच उसे ले जाएं। इसी उद्देश्य से सलेमपुर रेलवे स्टेशन परिसर में एक विशेष बॉक्स रखा गया है, जिससे जरूरतमंदों तक सहायता सहज रूप से पहुंच सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार देर रात भीषण ठंड के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सेवा प्रमुख डॉ. मदन मोहन, सह जिला सेवा प्रमुख नित्यानंद, नगर सेवा प्रमुख वीरेंद्र, सह नगर कार्यवाह डॉ. राजेश शर्मा, सुधाकर राय, इंद्रहास पाण्डेय सहित अन्य स्वयंसेवकों ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए सलेमपुर नगर के विभिन्न स्थलों—रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, अस्पताल एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ठंड में खुले आसमान के नीचे सो रहे जरूरतमंदों को कंबल, स्वेटर व अन्य गर्म कपड़ों का वितरण किया।
इस सेवा कार्य से न केवल जरूरतमंदों को ठंड से राहत मिली, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी गया कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है। संघ के इस प्रयास की नगरवासियों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है और लोग इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

डॉ. प्रियंका सौरभ

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुआ सार्वजनिक दुर्व्यवहार केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समय के अकादमिक और सांस्कृतिक जीवन में गहराते संकट का स्पष्ट संकेत है। किसी आमंत्रित लेखक को मंच पर अपमानित करना और कार्यक्रम से बाहर जाने के लिए कहना उस परंपरा के सर्वथा विपरीत है, जिसमें विश्वविद्यालयों को विचारों के मुक्त आदान–प्रदान, असहमति के सम्मान और रचनात्मक संवाद के केंद्र के रूप में देखा जाता रहा है। यह घटना व्यक्ति-विशेष तक सीमित नहीं है; यह साहित्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बौद्धिक गरिमा पर सीधा आघात है।

विश्वविद्यालयों की ऐतिहासिक भूमिका सत्ता के अनुचर बनने की नहीं रही है। नालंदा और तक्षशिला जैसी प्राचीन ज्ञान-परंपराओं से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक, इन संस्थानों ने सदैव प्रश्न पूछने, तर्क करने और स्थापित धारणाओं को चुनौती देने की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाली मशीनें नहीं होते, बल्कि वे समाज की चेतना को दिशा देने वाले केंद्र होते हैं। यहां विचारों की विविधता, मतभेद और बहस को कमजोरी नहीं, बल्कि बौद्धिक शक्ति माना जाता है। ऐसे में जब किसी विश्वविद्यालय के भीतर सत्ता-प्रदर्शन, अहंकार और असहिष्णुता का दृश्य सामने आता है, तो यह केवल एक कार्यक्रम की विफलता नहीं, बल्कि संस्थागत मूल्यों के क्षरण का प्रमाण बन जाता है।

मनोज रूपड़ा समकालीन हिन्दी कथा साहित्य का एक सशक्त और प्रतिष्ठित नाम हैं। उनकी कहानियाँ और उपन्यास सत्ता, समाज और व्यक्ति के जटिल संबंधों को बेबाकी से उजागर करते हैं। वे उन लेखकों में शामिल हैं जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक हस्तक्षेप का माध्यम माना है। ऐसे लेखक को आमंत्रित करना स्वयं विश्वविद्यालय की बौद्धिक प्रतिबद्धता और खुलेपन का प्रतीक होना चाहिए था। किंतु उनके साथ हुआ व्यवहार यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं आलोचनात्मक दृष्टि और स्वतंत्र विचार से असहजता ने विवेक पर विजय पा ली। यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या विश्वविद्यालय अब केवल औपचारिक आयोजनों, प्रशस्ति-पाठों और सत्ता-अनुकूल वक्तव्यों तक सीमित रह जाएंगे?

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कुलपति जैसे पद से केवल प्रशासनिक दक्षता की नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व और अकादमिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। यह पद संयम, संवाद और समावेशन का प्रतीक होना चाहिए। विश्वविद्यालय का मुखिया यदि आलोचना या असहमति को व्यक्तिगत चुनौती मानने लगे, तो उसका प्रभाव केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहता। भय का वातावरण धीरे-धीरे पूरे परिसर में फैलने लगता है। शिक्षक खुलकर बोलने से कतराने लगते हैं, विद्यार्थी प्रश्न पूछने से डरने लगते हैं और रचनात्मकता आत्म-सेंसरशिप की भेंट चढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय अपने मूल उद्देश्य से भटक जाता है और ज्ञान का केंद्र होने के बजाय अनुशासन और नियंत्रण का उपकरण बन जाता है।

इस घटना का एक और चिंताजनक पक्ष यह है कि संस्थागत स्तर पर आमंत्रित साहित्यकार के सम्मान की रक्षा के लिए अपेक्षित संवेदनशीलता और दृढ़ता दिखाई नहीं दी। साहित्यिक आयोजनों की सफलता केवल मंच-सज्जा, पोस्टरों और औपचारिक भाषणों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वहां संवाद कितना खुला, सम्मानजनक और अर्थपूर्ण रहा। जब किसी लेखक का अपमान होता है और संस्था मौन साध लेती है, तो वह मौन भी एक प्रकार की स्वीकृति बन जाता है। यह चुप्पी भविष्य में और अधिक दमनकारी व्यवहारों को प्रोत्साहित करती है और संस्थान की नैतिक विश्वसनीयता को कमजोर करती है।

यह याद दिलाना आवश्यक है कि विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति या पदाधिकारी की निजी जागीर नहीं होते। वे सार्वजनिक संसाधनों, करदाताओं के धन और समाज के विश्वास से संचालित होते हैं। यहां लिए गए निर्णय और प्रदर्शित व्यवहार समाज के लिए संदेश का काम करते हैं। यदि विश्वविद्यालयों में सत्ता का मद, व्यक्तिगत अहंकार और असहिष्णुता हावी हो जाए, तो समाज में संवाद की जगह टकराव और भय की संस्कृति पनपने लगती है। यह प्रवृत्ति न केवल साहित्य और शिक्षा के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी घातक है, क्योंकि लोकतंत्र का आधार ही विचारों की बहुलता और असहमति का सम्मान है।

भारतीय लोकतंत्र की आत्मा में साहित्य और बौद्धिक विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज़ादी की लड़ाई से लेकर सामाजिक सुधार आंदोलनों तक, लेखकों और विचारकों ने सत्ता से सवाल पूछे हैं और समाज को आत्मावलोकन के लिए प्रेरित किया है। यदि आज विश्वविद्यालयों में ही लेखकों और विचारकों को अपमानित किया जाएगा, तो यह उस परंपरा का घोर अपमान होगा जिसने हमें एक जीवंत लोकतांत्रिक समाज बनाया है। यह विडंबना ही है कि जिन संस्थानों से वैचारिक नेतृत्व की अपेक्षा की जाती है, वही यदि असहिष्णुता का उदाहरण प्रस्तुत करने लगें, तो समाज किस दिशा में जाएगा?

इस पूरे घटनाक्रम में यह अवश्य उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के कुछ अध्यापकों ने स्थिति को संभालने और सम्मानजनक समाधान खोजने का प्रयास किया। यह दर्शाता है कि संस्थान के भीतर अभी भी विवेक और संवेदनशीलता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। किंतु यह भी सत्य है कि जब सत्ता का मद विवेक पर हावी हो जाता है, तब व्यक्तिगत प्रयास अक्सर निष्प्रभावी सिद्ध होते हैं। संस्थागत संस्कृति तभी बदलती है, जब नेतृत्व स्वयं संवाद और आत्मालोचना के लिए तैयार हो।

यह घटना हमें साहित्यकारों और बौद्धिक वर्ग की भूमिका पर भी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करती है। जब किसी लेखक के साथ अन्याय होता है और पूरा साहित्यिक समुदाय मौन साध लेता है, तो यह मौन स्वयं में एक राजनीतिक और नैतिक वक्तव्य बन जाता है। इतिहास साक्षी है कि चुप्पी ने हमेशा सत्ता को मजबूत किया है और प्रतिरोध को कमजोर। यदि आज इस घटना पर स्पष्ट और सामूहिक प्रतिक्रिया नहीं होगी, तो कल किसी और लेखक, किसी और विचार और किसी और मंच पर यही दुहराया जाएगा।

साहित्य का मूल स्वभाव प्रश्नाकुलता और प्रतिरोध का है। वह सत्ता के समक्ष नतमस्तक होने के लिए नहीं, बल्कि उसे आईना दिखाने के लिए पैदा हुआ है। यदि साहित्यकार ही अपने सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए खड़े नहीं होंगे, तो साहित्य धीरे-धीरे केवल करियर और पुरस्कारों तक सिमट जाएगा। तब वह समाज की आत्मा नहीं, बल्कि व्यवस्था का सजावटी उपकरण बनकर रह जाएगा।

आज आवश्यकता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, विद्यार्थी और साहित्यिक समाज इस घटना से सबक लें। विश्वविद्यालयों को आत्ममंथन करना होगा कि वे किस प्रकार के अकादमिक वातावरण को बढ़ावा दे रहे हैं। क्या वे संवाद और बहस को प्रोत्साहित कर रहे हैं, या भय और आज्ञाकारिता को? साहित्यिक आयोजनों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत वैचारिक मंच के रूप में देखना होगा, जहां असहमति भी सम्मान के साथ व्यक्त की जा सके।

यह घटना शर्मनाक है और इसकी कड़ी निंदा आवश्यक है, लेकिन निंदा से आगे बढ़कर ठोस आत्मालोचना और सुधार की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी आमंत्रित लेखक या वक्ता के साथ ऐसा व्यवहार न हो। अकादमिक स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा केवल कागजी नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार और संस्कृति से होती है।

अंततः प्रश्न केवल मनोज रूपड़ा या किसी एक कार्यक्रम का नहीं है। प्रश्न यह है कि हम किस प्रकार के विश्वविद्यालय और किस प्रकार का समाज बनाना चाहते हैं। यदि हम विचार से डरेंगे, प्रश्न से घबराएंगे और असहमति को अपमान से दबाने की कोशिश करेंगे, तो हम एक जीवंत लोकतंत्र की जगह एक भयग्रस्त समाज की ओर बढ़ेंगे। विश्वविद्यालयों को यह याद रखना होगा कि उनका अस्तित्व सत्ता की कृपा से नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और स्वतंत्र चेतना से है। यदि यही चेतना कुचल दी गई, तो विश्वविद्यालय केवल इमारतें रह जाएंगे—ज्ञान के नहीं, बल्कि मौन के स्मारक।

-प्रियंका सौरभ
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)

क्या नया आयकर कानून मिडिल क्लास को देगा वास्तविक राहत?

बजट 2026-27:भारत की आर्थिक दिशा, टैक्स सुधार और मिडिल क्लास की उम्मीदों क़ा निर्णायक पड़ाव

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत का आम बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक सोच सामाजिक प्राथमिकताओं और वैश्विक भूमिका को परिभाषित करने वाला नीति-घोषणापत्र होता है। वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट इस दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करेगा, बल्कि भारत के आयकर ढांचे में होने वाले सबसे बड़े कानूनी परिवर्तन से पहले का अंतिम पूर्ण बजट भी होगा। यही कारण है कि संसद से लेकर शेयर बाजार तक, टैक्सपेयर्स से लेकर उद्योग जगत तक और भारत से लेकर वैश्विक निवेशकों तक,सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बता दूं क़ि वर्ष 2026- 27 के बजट का औपचारिक आगाज़ संसद के बजट सत्र के साथ होगा, जिसे 28 जनवरी से 2 अप्रैल 2026 तक आयोजित करने की मंजूरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दी जा चुकी है। यह सत्र दो चरणों में विभाजित होगा, पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।इसविस्तारित सत्र का उद्देश्य केवल बजट पारित करना नहीं, बल्कि उससे जुड़ी नीतियों, संशोधनों और विधायी पहलुओं पर व्यापक विमर्श सुनिश्चित करना है। लोकतंत्र में बजट सत्र सरकार और संसद दोनों के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी होता है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। यह क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनका एक और बजट होगा, जिसमें उनसे न केवल राजकोषीय अनुशासन बल्कि मिडिल क्लास, नौकरीपेशा वर्ग, किसानों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच संतुलन साधने की अपेक्षा की जा रही है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में बजट के हर प्रावधान का सीधा असर घरेलू मांग, निवेश वातावरण और वैश्विक भरोसे पर पड़ता है।

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साथियों बात अगर हम टैक्सपेयर्स की उम्मीदें: बजट का सबसे संवेदनशील पक्ष इसको समझने की करें तो,हर बजट में अगर किसी एक वर्ग की निगाहें सबसे अधिक वित्तमंत्री के भाषण पर टिकी होती हैं, तो वह है टैक्सपेयर्स विशेषकर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग। महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रिटायरमेंट की बढ़ती लागत के बीच यह वर्ग वर्षों से यह महसूस करता आया है कि आर्थिक विकास का सबसे बड़ा बोझ उसी के कंधों पर है। इसलिए बजट 2026-27 में इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाएं केवल वित्तीय नहीं,बल्कि सामाजिकराजनीतिक संदेश भी होंगी।
साथियों बात अगर हमस्टॉक मार्केट की तैयारी:बजट और निवेशकों का संबंध इसको समझने की करें तो बजट 2026- 27 का असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार और पूंजी बाजार पर भी पड़ेगा। स्टॉक एक्सचेंजों ने संकेत दे दिए हैं कि यदि 1 फरवरी को बजट रविवार के दिन पेश किया जाता है,तो उस दिन स्पेशल ट्रेडिंग सेशनआयोजित किया जाएगा। यह व्यवस्था दर्शाती है कि बजट घोषणाओं को बाजार कितनी गंभीरता से लेता है। टैक्स सुधार, पूंजीगत लाभ कर, टीडीएस नियम और निवेश प्रोत्साहन जैसे प्रावधान बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
साथियों बात अगर हम नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 एक युग का अंत, दूसरे की शुरुआत को समझने की करें तो, यूनियन बजट 2026-27 को ऐतिहासिक बनाने वाला सबसे बड़ा कारण यह है कि यह 60 साल पुराने आयकर कानून के अंत से पहले का अंतिम पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने जा रही है, जो मौजूदा
जटिल विवादग्रस्त और बार-बार संशोधित कानून की जगह लेगा। ऐसे में बजट 2026-27 केवल मौजूदा वित्तीय जरूरतों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले टैक्स सिस्टम की बुनियाद भी रखेगा।
साथियों बात अगर हम टैक्सपेयर्स की 5 बड़ी उम्मीदें: क्या मिडिल क्लास की खुलेगी किस्मत? इसको समझने की करें तो(1)धारा 80सी और 80डी की सीमा में वृद्धि : बचत और सुरक्षा का सवाल-धारा 80सी के तहत ₹1.5 लाख की कर छूट सीमा वर्षों से अपरिवर्तित है,जबकि इस अवधि में महंगाई, आय स्तर और जीवन-शैली खर्चों में भारी वृद्धि हुई है। इसी प्रकार 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली छूट भी आज की चिकित्सा लागत के मुकाबले अपर्याप्त प्रतीत होती है। टैक्सपेयर्स की प्रमुख मांग है कि इन सीमाओं को यथार्थवादी स्तर तक बढ़ाया जाए, ताकि लंबी अवधि की बचत, बीमा कवरेज और सामाजिक सुरक्षा को प्रोत्साहन मिल सके।(2)लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में राहत:निवेशसंस्कृति को बढ़ावा-भारत सरकार निवेश आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स की मौजूदा संरचना कई निवेशकों को हतोत्साहित करती है। टैक्सपेयर्स की अपेक्षा है कि या तो इसकी आय सीमा बढ़ाई जाए, या फिर छोटे और मध्यम निवेशकों को अतिरिक्त राहत दी जाए।इससे घरेलू निवेश, रिटेल पार्टिसिपेशन और पूंजी बाजार की गहराई बढ़ सकती है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत होगा।(3) टीडीएस सीमा में वृद्धि:नकदी प्रवाह और अनुपालन की सरलता- टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स संग्रह को आसान बनाना है, लेकिन अत्यधिक कम सीमाएं कई बार अनावश्यक अनुपालन बोझ पैदा करती हैं।वरिष्ठ नागरिकों, फ्रीलांसर्स और छोटे करदाताओं की मांग है कि विभिन्न श्रेणियों में टीडीएस की सीमा बढ़ाई जाए, जिससे नकदी प्रवाह सुधरे और रिफंड- आधारित टैक्स सिस्टम पर निर्भरता कम हो।(4)नए इनकम टैक्स कानून में सरल संरचना : जटिलता से मुक्ति-इन्कम टैक्स एक्ट 2025 से सबसेबड़ी उम्मीद यह है कि यह सरल, स्पष्ट और विवाद-मुक्त होगा। बजट 2026-27 में सरकार से अपेक्षा है कि वह इस नए कानून की संरचना को स्पष्ट संकेतों के माध्यम से पेश करे जैसे कम धाराएं,सरल भाषा, डिजिटल- फ्रेंडली अनुपालन और न्यूनतम व्याख्यात्मक विवाद। यह सुधार भारत की ईजी ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग और वैश्विक टैक्स छवि को भी मजबूत करेगा। (5) विवाद समाधान और टैक्स आतंक से मुक्ति-पिछले वर्षों में सरकार ने ‘टैक्स टेररिज़्म’ की धारणा को समाप्त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी लंबे विवाद, अपीलें और मुकदमेबाज़ी टैक्सपेयर्स के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। बजट 2026-27 से अपेक्षा है कि इसमें तेज़, पारदर्शी और तकनीक- आधारित विवाद समाधान तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
साथियों बात अगर हम इस बजट को दो एंगल मिडिल क्लास व शेयर बाजार केंद्रित से समझने की करें तो (1) मिडिल क्लास केंद्रित आय, बचत और जीवन- स्तर की कसौटी-बजट 2026- 27 मिडिल क्लास के लिए इसलिए निर्णायक है क्योंकि यह नए इनकम टैक्स कानून से पहले का अंतिम पूर्ण बजट है।नौकरी पेशा और मध्यम आय वर्ग की प्रमुख अपेक्षा यह है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षा-स्वास्थ्य खर्च और रिटायरमेंट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इनकम टैक्स ढांचे में वास्तविक राहत दी जाए। विशेष रूप से धारा 80सी और 80डी की सीमाओं में वृद्धि मिडिल क्लास के लिए केवल टैक्स लाभ नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का साधन मानी जा रही है।यदि बजट में कर-छूट या टैक्स स्लैब में संतुलित सुधार होता है, तो इसका सीधा असर घरेलू खपत पर पड़ेगा। ऑटो, आवास, उपभोक्ता वस्तुएँ और सेवाएँ,ये सभी सेक्टर मिडिल क्लास की डिस्पोज़ेबल इनकम से चलते हैं। इसलिए बजट 2026-27मिडिल क्लास के लिए इस प्रश्न का उत्तर देगा कि क्या सरकार उसे केवल टैक्स बेस के रूप में देखती है या आर्थिक विकास का इंजन मानती है।(2) शेयर बाजार केंद्रित-भरोसा,स्थिरता और दीर्घकालिकसंकेत-शेयर बाजार के लिए बजट 2026-27 अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से अधिक नीतिगत दिशा और टैक्स स्थिरता का दस्तावेज़ है।निवेशकों की प्राथमिक अपेक्षा यह है कि कैपिटल गेन टैक्स, टीडीएस और कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े संकेत स्पष्ट और पूर्वानुमेय हों। टैक्स अनिश्चितता बाजार को कमजोर करती है,जबकि स्थिरता दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करती है। यदि बजट में राजकोषीय अनुशासन के साथ कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह कैपिटल गुड्स, बैंकिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए सकारात्मक ट्रिगर होगा। साथ ही,नए इन्कम टैक्स एक्ट 2025 को लेकर स्पष्ट रोडमैप शेयर बाजार को यह संकेत देगा कि भारत का पूंजी बाजार नियम- आधारित और निवेश-अनुकूल दिशा में आगे बढ़ रहा है।
साथियों बात अगर हम वैश्विक स्तरपर देखें तो भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।ऐसे में बजट 2026-27 न केवल घरेलूनीति का दस्तावेज़ होगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों रेटिंग एजेंसियों और बहुपक्षीय संस्थाओं के लिए भी एक संकेतक बनेगा। टैक्स सुधार, कानून की स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता भारत को चीन के बाद एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत कर सकती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि एक बजट, कई उम्मीदें,एक ऐतिहासिक मोड़ है बजट 2026-27 एक साधारण वार्षिक बजट नहीं है। यह पुराने टैक्स युग से नए टैक्स युग की दहलीज पर खड़ा बजट है। यह मिडिल क्लास की वर्षों पुरानी अपेक्षाओं निवेशकों की आकांक्षाओं और सरकार की सुधारवादी छवि, तीनों की परीक्षा लेगा।यदि यह बजट संतुलित, दूरदर्शी और संवेदनशील रहा, तो यह भारत की आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

मुंबई की पहचान बनाम राजनीति: क्या 2026 BMC चुनाव से पहले बदल रहा है महानगर का जनसांख्यिकीय संतुलन?

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिसे देश की आर्थिक राजधानी और अवसरों का शहर कहा जाता है, आज एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में खड़ी है। जैसे-जैसे 2026 के बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे Mumbai Demographics 2026 BMC Election को लेकर चर्चाएं तेज़ होती जा रही हैं। सवाल केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या राजनीतिक रणनीतियों के दबाव में शहर की मूल पहचान और जनसांख्यिकीय संरचना धीरे-धीरे बदल रही है।
जनसांख्यिकी और राजनीति का टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में शहरी नियोजन (Urban Planning) की दिशा अब केवल विकास के मानकों से नहीं, बल्कि वोट-बैंक समीकरणों से तय होती दिख रही है। युवाओं और मध्यमवर्ग के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि क्या आवास, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की योजनाएं दीर्घकालिक विकास के बजाय अल्पकालिक राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं।
MVA पर आरोपों की राजनीति

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विपक्षी दलों द्वारा महाविकास आघाड़ी (MVA) पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसके शासनकाल में लिए गए कुछ फैसलों से शहर के कुछ हिस्सों में जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित हुआ। झुग्गी पुनर्विकास, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और नगर निकायों में नियुक्तियों को लेकर यह आरोप सामने आए हैं कि इनका इस्तेमाल खास क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव मजबूत करने के लिए किया गया। MVA समर्थक इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं, जबकि विरोधी इसे मुंबई के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हैं।
अवैध बस्तियों का विस्तार और शहरी दबाव
बहरामपाड़ा, मालवानी और कुर्ला जैसे इलाकों में अनधिकृत निर्माण और अवैध बस्तियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। शहरी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुनियादी ढांचे की क्षमता और सुरक्षा को नजरअंदाज कर नियमितीकरण किया गया, तो इससे जल, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ेगा। Mumbai Demographics 2026 BMC Election के संदर्भ में यह बहस इसलिए अहम है क्योंकि एक बार जनसंख्या संतुलन बदलने के बाद उसे सुधारना बेहद कठिन हो जाता है।
मराठी पहचान और प्रवासन की बहस
मुंबई की राजनीति में मराठी पहचान हमेशा से एक केंद्रीय मुद्दा रही है। बढ़ती महंगाई और रियल एस्टेट कीमतों के चलते बड़ी संख्या में मराठी परिवार ठाणे, कल्याण, डोंबिवली और विरार जैसे उपनगरों की ओर पलायन कर चुके हैं। इसी बीच, प्रवासन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अवैध प्रवास और दस्तावेजों के दुरुपयोग से नगर राजनीति और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है, हालांकि इस पर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं।
प्रतीकवाद, प्रतिनिधित्व और मेयर की राजनीति
मुंबई में मेयर पद को लेकर प्रतीकात्मक राजनीति भी तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि विविधता का प्रतिनिधित्व शहर की ताकत है, जबकि आलोचक इसे चुनावी तुष्टीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। अतीत के कुछ विवादों ने इस बहस को और धार दी है, जिससे यह मुद्दा केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।
एक शहर, कई सवाल
मुंबई आज उस मोड़ पर है जहां विकास, समावेशन और पहचान—तीनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। नागरिकों की अपेक्षा है कि आने वाला नेतृत्व Mumbai Demographics 2026 BMC Election के संदर्भ में पारदर्शी नीति अपनाए, ताकि शहर की सांस्कृतिक विरासत, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती बनी रहे।
निष्कर्ष:
मुंबई केवल इमारतों और सड़कों का शहर नहीं, बल्कि करोड़ों सपनों की पहचान है। यदि जनसांख्यिकीय बदलाव केवल राजनीतिक लाभ के लिए किए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक महसूस होगा। 2026 के बीएमसी चुनाव इसलिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य की दिशा तय करने वाली कसौटी बनते जा रहे हैं।

जहाँ दंड नहीं, चेतना है: सूर्य की करुणा कथा

🔱 दिव्य तेज का अवतरण: अहंकार-विनाश और धर्म-पुनर्स्थापना की शास्त्रोक्त सूर्य कथा 🔱

भूमिका: प्रकाश जो भीतर उतरता है
सूर्य केवल आकाश में चमकने वाला ग्रह नहीं, वह चेतना का स्रोत हैं। एपिसोड 9 में जहाँ सूर्यदेव ने अहंकार में डूबे मानव को चेतावनी दी थी—वहीं एपिसोड 10 में वे करुणा, क्षमा और आत्मबोध का दिव्य संदेश लेकर प्रकट होते हैं। यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि आज के समय में आत्ममंथन का शास्त्रोक्त मार्गदर्शन है।
जब मनुष्य स्वयं को कर्ता और सर्वशक्तिमान समझने लगता है, तब सूर्यदेव उसे याद दिलाते हैं।

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“तेज तभी कल्याणकारी है, जब वह धर्म से संयमित हो।”

🌞 शास्त्रोक्त कथा: सूर्य का मौन उपदेश
पुराणों में वर्णित है कि एक समय पृथ्वी पर मानव समाज में ज्ञान की अधिकता और विनम्रता की न्यूनता हो गई। विद्या, विज्ञान और सामर्थ्य के मद में मनुष्य ने प्रकृति को जीत लेने का दंभ पाल लिया। यज्ञ, व्रत और सूर्योपासना केवल कर्मकांड बनकर रह गए।
उस समय सूर्यदेव ने न तो प्रलय का आह्वान किया, न ही दंड का। उन्होंने मौन को अपना शस्त्र बनाया।
सप्ताहों तक सूर्यदेव ने अपने तेज को मंद कर दिया। न दिन पूरी तरह प्रकाशित रहा, न रात्रि पूर्ण अंधकारमय।
फसलें रुक गईं, ऋतुएँ असंतुलित हो गईं। तब ऋषि-मुनियों को बोध हुआ—
“यह दंड नहीं, चेतना का आह्वान है।”

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🔔 ऋषियों की प्रार्थना और सूर्य का साक्षात्कार
महर्षि कश्यप, अत्रि और वशिष्ठ ने सामूहिक रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का उच्चारण किया। प्रार्थना में एक ही भाव था—
“हे भास्कर! यदि हमने अहंकार में आपकी उपस्थिति को भुला दिया, तो हमें क्षमा करें।”
तभी सूर्यदेव प्रकट हुए—
तेज से नहीं, करुणा से।
उन्होंने कहा—
“मैं ऊर्जा हूँ, पर अहंकार नहीं।
मैं जीवन हूँ, पर स्वेच्छाचार नहीं।
जब मनुष्य मुझे पूजता है, वह वास्तव में अपने भीतर के अंधकार को नमन करता है।”

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🕉️ सूर्य की महिमा: शास्त्रों की दृष्टि में
वेदों में सूर्य को प्राण, ऋत और सत्य का अधिष्ठाता कहा गया है।
ऋग्वेद में सूर्य—साक्षी हैं।
यजुर्वेद में सूर्य—अनुशासन हैं।
सामवेद में सूर्य—संतुलन हैं।
सूर्यदेव का रथ सात अश्वों से युक्त है—जो सप्त चक्र, सप्त वर्ण और सप्त चेतन अवस्थाओं का प्रतीक हैं।
यह कथा हमें बताती है कि जब जीवन के किसी एक अश्व को भी अहंकार खींचने लगे, तो संपूर्ण रथ डगमगा जाता है।
⚖️ सूर्य और मानव: समानता का शास्त्रोक्त सूत्र
सूर्य और मानव में गहरी समानता है—
सूर्य प्रतिदिन उदय होकर भी गर्व नहीं करता।
वह सभी को समान प्रकाश देता है—राजा हो या रंक।
वह स्वयं जलता है, पर दूसरों को जीवन देता है।
यही संदेश एपिसोड 10 का केंद्र है—
“जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश दे, वही सच्चा साधक है।”

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🌅 आधुनिक जीवन के लिए सूर्य संदेश
आज का मनुष्य तेज़ है, पर शांत नहीं।
सक्षम है, पर संवेदनशील नहीं।
सूर्यदेव इस कथा के माध्यम से कहते हैं—
उपलब्धि के साथ विनय जोड़ो।
शक्ति के साथ धर्म रखो।
ज्ञान के साथ करुणा अपनाओ।
सूर्य का तेज तभी शुभ है, जब वह लोककल्याण में प्रवाहित हो।
🪔 भावात्मक निष्कर्ष: प्रकाश बाहर नहीं, भीतर चाहिए
एपिसोड 10 हमें यह सिखाता है कि
सूर्य आकाश में नहीं, आचरण में पूजे जाते हैं।
जब मनुष्य अहंकार त्यागकर कर्म करता है,
जब वह स्वयं को सूर्य का केंद्र नहीं, बल्कि उसका प्रतिबिंब मानता है—
तभी जीवन में सच्चा उजास आता है।
“सूर्य उगता नहीं—जाग्रत करता है।”

आज का महा राशिफल: किस्मत बदलेगी या सावधानी बचाएगी?

ज्योतिष पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

आज का दिन कई राशियों के लिए उन्नति और उपलब्धियों का संकेत दे रहा है, वहीं कुछ जातकों को संयम और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल आपके करियर, व्यवसाय, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन और आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव डाल रही है।

मेष राशि Aries ♈
नाम अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा।
करियर/व्यवसाय: नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति के संकेत हैं। व्यापार में नई डील फायदेमंद रहेगी।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए दिन अनुकूल।
कला-संगीत: रचनात्मक कार्यों में सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे।
स्वास्थ्य: उत्तम।
प्रेम/परिवार: जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजा उपाय: सूर्य को जल, मां काली का स्मरण।

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वृषभ राशि Taurus ♉
नाम अक्षर: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
करियर/व्यवसाय: शत्रुओं पर विजय, व्यापार स्थिर।
शिक्षा: एकाग्रता में थोड़ी कमी।
कला-संगीत: मध्यम।
राजनीति/प्रशासन: विरोधियों से सावधानी।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
स्वास्थ्य: हल्की थकान।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 6
पूजा उपाय: श्री गणेश की पूजा।
मिथुन राशि Gemini ♊
नाम अक्षर: का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह
करियर/व्यवसाय: लेखन, मीडिया, आईटी से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: अध्ययन में रुचि बढ़ेगी।
कला-संगीत: लेखन व मंच कला में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: वाणी पर संयम जरूरी।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 5
पूजा उपाय: मां काली का प्रणाम।
कर्क राशि Cancer ♋
नाम अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
करियर/व्यवसाय: संपत्ति, वाहन से लाभ।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला-संगीत: भावनात्मक अभिव्यक्ति।
राजनीति/प्रशासन: घरेलू मुद्दे हावी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 2
पूजा उपाय: शिव पूजन।
सिंह राशि Leo ♌
नाम अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
करियर/व्यवसाय: पराक्रम से सफलता।
शिक्षा: उच्च अध्ययन के योग।
कला-संगीत: मंच पर चमक।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: उत्तम।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजा उपाय: मां काली की आराधना।

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कन्या राशि Virgo ♍
नाम अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
करियर/व्यवसाय: धन आगमन, निवेश से बचें।
शिक्षा: विश्लेषण क्षमता बढ़ेगी।
कला-संगीत: बारीक काम में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: वाणी पर नियंत्रण।
आर्थिक स्थिति: बेहतर।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 5
पूजा उपाय: शनिदेव की पूजा।
तुला राशि Libra ♎
नाम अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
करियर/व्यवसाय: साझेदारी में लाभ।
शिक्षा: संतुलन बना रहेगा।
कला-संगीत: सौंदर्यबोध बढ़ेगा।
राजनीति/प्रशासन: समर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: अच्छी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 6
पूजा उपाय: लक्ष्मी पूजन।

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वृश्चिक राशि Scorpio ♏
नाम अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
करियर/व्यवसाय: मानसिक तनाव के बावजूद लाभ।
शिक्षा: फोकस जरूरी।
कला-संगीत: गहराई वाले विषय।
राजनीति/प्रशासन: गोपनीय रणनीति सफल।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 9
पूजा उपाय: हनुमान जी का स्मरण।
धनु राशि Sagittarius ♐
नाम अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
करियर/व्यवसाय: आर्थिक मजबूती, यात्रा लाभदायक।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के योग।
कला-संगीत: दर्शन व लेखन में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: सम्मान बढ़ेगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा उपाय: विष्णु पूजन।

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मकर राशि Capricorn ♑
नाम अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
करियर/व्यवसाय: कोर्ट-कचहरी में राहत।
शिक्षा: अनुशासन से लाभ।
कला-संगीत: मध्यम।
राजनीति/प्रशासन: उच्चाधिकारियों का सहयोग।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित करें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा उपाय: मां काली का पूजन।
कुंभ राशि Aquarius ♒
नाम अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
करियर/व्यवसाय: भाग्य का साथ, तरक्की।
शिक्षा: नई तकनीक सीखेंगे।
कला-संगीत: नवाचार।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 4
पूजा उपाय: शिव पूजन।

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मीन राशि Pisces ♓
नाम अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
करियर/व्यवसाय: सावधानी जरूरी।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला-संगीत: भावनात्मक रचना।
राजनीति/प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 7
पूजा उपाय: सफेद वस्तु का दान।

हिंदू समाज की शक्ति एकता और संस्कारों में निहित: RSS क्षेत्र प्रचारक अनिल जी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, संगठन और संस्कारों में निहित है। जब समाज जागरूक होकर एकजुट होता है, तभी राष्ट्र सशक्त और सुरक्षित बनता है। युवाओं को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक (पूर्वी उत्तर प्रदेश) अनिल जी ने व्यक्त किए।

वे मधुबन नगर पंचायत के पांती रोड स्थित गांधी मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। अनिल जी ने कहा कि हिंदू समाज को सकारात्मक सोच के साथ संगठित होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होगा। भारत को जो गौरवपूर्ण स्थान विश्व में प्राप्त हुआ है, उसके पीछे यहां की संत परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है।

सनातन धर्म जीवन जीने की कला

क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। सनातन एक अवधारणा, एक वृत्ति और एक जीवनशैली है, जिसे केवल शब्दों या कर्मकांड तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे मूल मंत्रों के माध्यम से समस्त मानवता के कल्याण की बात करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे ब्रह्मांड में धर्म एक ही है—सनातन धर्म, शेष सभी पंथ और संप्रदाय हैं। जो सर्वग्राही और सर्वव्यापी है, वही सनातन है।

राष्ट्र सर्वोपरि, यही सनातन का मूल

अनिल जी ने कहा कि सनातन धर्म से भी बड़ा राष्ट्र धर्म है। सच्चा सनातनी वही है, जो राष्ट्रहित में त्याग और बलिदान के लिए सदैव तैयार रहता है। सनातन समाज ने इतिहास में अत्याचार सहना स्वीकार किया, लेकिन अपने धर्म और संस्कृति पर आंच नहीं आने दी।

उन्होंने कहा कि भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से देशभक्ति प्रमाणित होती है और जो सनातन को मानता है, वही संविधान का भी सम्मान करता है।

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सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

क्षेत्र प्रचारक ने सामाजिक समरसता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि प्राचीन भारत में छुआछूत होती, तो राजा दशरथ और सुमंत एक ही गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त नहीं करते। यह भारत की समरस संस्कृति का प्रमाण है।
उन्होंने माता सीता, लव-कुश के प्रसंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के संरक्षण का संदेश दिया तथा जल संरक्षण के लिए मातृशक्ति से विशेष आग्रह किया।

कर्तव्यों की चर्चा से बनेगा भारत विश्वगुरु

अनिल जी ने कहा कि आज अधिकारों की चर्चा अधिक और कर्तव्यों की चर्चा कम हो रही है। जब समाज कर्तव्यों को प्राथमिकता देगा, तभी भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने लोगों से अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी में हस्ताक्षर करने का भी आह्वान किया।u

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अन्य वक्ताओं के विचार

सम्मेलन में मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रख्यात कथावाचिका डॉ. रागिनी मिश्रा ने लव जिहाद की घटनाओं पर चिंता जताई और माताओं-बहनों से बच्चों को घर में ही संस्कार देने का आग्रह किया।
खाकी दास बाबा कुटी के महंत रामकिशोर दास जी ने कहा कि हिंदू समाज अब संगठित हो रहा है और पुरानी भूलों से सीख लेकर आगे बढ़ रहा है।

सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन अमित गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।