Monday, June 22, 2026
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Ballia News: डीएपी–यूरिया की किल्लत से किसान बेहाल, रबी सीजन में गहराया खाद संकट

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में इन दिनों डीएपी और यूरिया की भारी कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। रबी सीजन की बुवाई के अहम दौर में खाद की अनुपलब्धता से खेती की रफ्तार धीमी पड़ गई है। गांव और कस्बों के खाद वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन कई किसान घंटों इंतजार के बाद भी बिना खाद लिए वापस लौटने को मजबूर हैं।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते डीएपी और यूरिया नहीं मिला तो गेहूं, सरसों, चना और मटर जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे न सिर्फ उनकी लागत बढ़ेगी, बल्कि पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका है।

रबी फसलों के लिए बढ़ी मांग, आपूर्ति अनियमित

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस समय रबी फसलों की बुवाई और टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया और डीएपी की मांग चरम पर रहती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जिले में खाद की आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। कई समितियों के गोदामों में स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे वितरण व्यवस्था चरमरा गई है।

कालाबाजारी के आरोप, छोटे किसान सबसे ज्यादा परेशान

किसानों का आरोप है कि खाद की कमी का फायदा उठाकर कुछ इलाकों में दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो ऊंचे दामों पर डीएपी और यूरिया बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जो महंगे दाम देकर खाद खरीदने में असमर्थ हैं।

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टोकन सिस्टम पर भी सवाल

वितरण केंद्रों पर टोकन सिस्टम लागू होने के बावजूद अव्यवस्था बनी हुई है। किसानों का कहना है कि कई बार टोकन मिलने के बाद भी खाद खत्म हो जाती है, जिससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। इससे उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में किसानों ने खाद संकट के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया है।

प्रशासन का आश्वासन, जल्द आएगी नई खेप

जिलाधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि डीएपी और यूरिया की नई खेप जल्द ही जिले में पहुंचाई जाएगी। साथ ही कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खाद का वितरण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाएगा और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही खाद की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो रबी फसलों के उत्पादन पर नकारात्मकहै

असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब प्रशासन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर टिकी हुई हैं।

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Ayodhya Ram Mandir Alert: संदिग्ध व्यक्ति को लेकर हाई अलर्ट, सभी एजेंसियों से क्लीन चिट, फिर भी चौकस पुलिस

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा)। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में एक संदिग्ध व्यक्ति के मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां देर रात तक अलर्ट मोड में रहीं। स्थानीय पुलिस लगातार इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीआरपीएफ और कश्मीर की अन्य केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में रही। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सभी एजेंसियों ने प्रारंभिक जांच में पकड़े गए व्यक्ति के किसी भी संदिग्ध या आतंकी गतिविधि में शामिल न होने के संकेत दिए हैं। हालांकि, इसके बावजूद सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है।

पटना से अयोध्या पहुंचा था संदिग्ध युवक

पुलिस जांच में सामने आया है कि पकड़े गए व्यक्ति का नाम अबू अहमद शेख है। वह शनिवार सुबह पटना से आगरा जाने वाली ट्रेन से अयोध्या पहुंचा था। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद वह सीधे राम मंदिर परिसर की ओर गया, जहां उसकी गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोक लिया।

पुलिस ने उसके परिजनों से भी संपर्क किया है। परिजनों ने बताया कि अबू अहमद शेख लंबे समय से अखरोट बेचने का काम करता है और वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता है। परिवार का दावा है कि वह मानसिक रूप से कमजोर (मानसिक मंदित) है। पुलिस ने उसके बेटे को अयोध्या बुलाया है, जो वहां के लिए रवाना हो चुका है।

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जिलेभर में बढ़ी सतर्कता, सघन सत्यापन अभियान

इस घटना के बाद अयोध्या जिले में पुलिस ने सतर्कता और बढ़ा दी है। अयोध्या धाम के दोनों थानों में सघन छानबीन अभियान शुरू कर दिया गया है।

• बाहर से आकर जिले में कारोबार करने वालों का सत्यापन

• ठेले-खोमचे और फेरी लगाने वालों पर विशेष निगरानी

• वे कहां रहते हैं और उनकी गतिविधियां क्या हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है

• उन्हें शरण देने वालों से भी पूछताछ

इसके साथ ही होटल, धर्मशाला और गेस्ट हाउस में ठहरे सभी लोगों का सत्यापन कराया गया है। संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक आगंतुक की जानकारी तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराएं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राम मंदिर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

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इतिहास के पन्नों में 11 जनवरी: क्यों खास है यह तारीख?

11 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: वे महान व्यक्तित्व जिन्होंने भारत और विश्व को दिशा दी

रेखा कामत (निधन: 11 जनवरी 2022)
रेखा कामत भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने विशेष रूप से क्षेत्रीय और समानांतर सिनेमा में अपनी सशक्त पहचान बनाई। उनका जन्म कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में हुआ था, जहाँ की सांस्कृतिक विविधता ने उनके अभिनय को गहराई दी। रेखा कामत ने अपने करियर में नारी पात्रों को संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ प्रस्तुत किया। वे केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों का भी हिस्सा रहीं। रंगमंच से लेकर सिनेमा तक, उन्होंने अभिनय को समाज से जोड़ने का प्रयास किया। भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।

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दूधनाथ सिंह (निधन: 11 जनवरी 2018)
दूधनाथ सिंह हिंदी साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण कथाकार, आलोचक और विचारक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ। उन्होंने कथा साहित्य को केवल कहानी कहने तक सीमित न रखते हुए उसे वैचारिक प्रतिरोध और सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया। उनके उपन्यास और कहानियाँ सत्ता, व्यवस्था और व्यक्ति के द्वंद्व को गहराई से उजागर करती हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अध्यापन भी किया और अनेक छात्रों को आलोचनात्मक दृष्टि दी। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनका योगदान और वैचारिक हस्तक्षेप हिंदी साहित्य की धरोहर है। वे साहित्य को समाज परिवर्तन का औजार मानते थे।

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सर एडमंड हिलेरी (निधन: 11 जनवरी 2008)
सर एडमंड हिलेरी का जन्म ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड में हुआ था। वे विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही और समाजसेवी थे, जिन्होंने 1953 में शेरपा तेनज़िंग नोर्गे के साथ माउंट एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई कर इतिहास रचा। यह उपलब्धि केवल साहस का प्रतीक नहीं थी, बल्कि मानव संकल्प की सीमा को परिभाषित करने वाला क्षण थी। पर्वतारोहण के बाद हिलेरी ने अपना जीवन हिमालयी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए समर्पित कर दिया। नेपाल और हिमालयी समाज के लिए उनका योगदान उन्हें एक महान मानवतावादी बनाता है।

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राम चतुर मल्लिक (निधन: 11 जनवरी 1990)
राम चतुर मल्लिक ध्रुपद-धमार गायन शैली के महान गायक थे। उनका जन्म बिहार के दरभंगा जिले में हुआ, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। उन्होंने दरभंगा घराने की परंपरा को न केवल जीवित रखा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उनकी गायकी में शुद्धता, अनुशासन और आध्यात्मिक गहराई स्पष्ट झलकती थी। उन्होंने अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित कर भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत आगे बढ़ाई। संगीत के क्षेत्र में उनका योगदान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा है।

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लाल बहादुर शास्त्री (निधन: 11 जनवरी 1966)
लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के तीसरे प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (वर्तमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर), चंदौली जिले में हुआ। सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर उन्होंने देश की कृषि और रक्षा दोनों को नई दिशा दी। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनका नेतृत्व ऐतिहासिक रहा। ताशकंद समझौते के बाद उनका आकस्मिक निधन राष्ट्र के लिए गहरा आघात था। वे भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं।
अजय घोष (निधन: 11 जनवरी 1962)
अजय घोष भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई। वे पार्टी के महासचिव भी रहे और मजदूरों, किसानों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनका जीवन विचारधारा, संगठन और अनुशासन का उदाहरण था। उन्होंने भारतीय राजनीति में वैचारिक स्पष्टता और जनआंदोलन की भूमिका को मजबूत किया। अजय घोष का योगदान भारत में वामपंथी राजनीति की नींव को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण रहा।

Indian Railways Big Plan: 2026 बनेगा बदलाव का साल, AI से होगा रखरखाव, दौड़ेंगी नई ट्रेनें

भारतीय रेलवे आने वाले दो वर्षों में ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजरने जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा है कि 2026 रेलवे के लिए ट्रांसफॉर्मेशन ईयर होगा। यात्री सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीक, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को केंद्र में रखते हुए रेलवे कई बड़े फैसलों को जमीन पर उतारने की तैयारी में है।

रेल मंत्री के अनुसार, रेलवे के विशाल नेटवर्क में अब पारंपरिक रखरखाव पद्धतियां पर्याप्त नहीं रह गई हैं। समय रहते तकनीकी खामियों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती है। इसी को देखते हुए रेलवे अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित रखरखाव प्रणाली को लागू करने जा रहा है, जिससे सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार होगा।

AI से कैसे बदलेगा रेलवे का रखरखाव सिस्टम?

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे में रखरखाव के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।

• रेलवे ट्रैक, कोच और इंजन की निगरानी AI सिस्टम से होगी

• संभावित खराबी का पहले ही अनुमान लगाया जा सकेगा

• हादसों की आशंका में भारी कमी आएगी

• यात्री सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत होगी

• 2026 के 52 हफ्तों में 52 बड़े सुधार लागू किए जाएंगे

रेल मंत्री का दावा है कि इन सुधारों के बाद रेलवे का स्वरूप पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा।

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स्टार्टअप्स और नवाचार को मिलेगा बड़ा प्लेटफॉर्म

रेलवे अब तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए नया संरचनात्मक मॉडल अपनाने जा रहा है। इसके तहत देश के स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों को रेलवे से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा।

• टेक्नोलॉजी इनोवेशन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा

• रेलवे की समस्याओं के लिए आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित होंगे

• निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी

• “मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” को मिलेगा बल

2026 में रेलवे में दिखेंगे ये बड़े बदलाव

• AI आधारित रखरखाव प्रणाली लागू

• यात्री सुरक्षा के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल

• रेलवे के संगठनात्मक ढांचे में सुधार

• स्टार्टअप्स और इनोवेशन को प्रोत्साहन

• यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवाएं

वंदे भारत स्लीपर और नई ट्रेनों की बड़ी घोषणा

रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 17 जनवरी 2026 को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस (स्लीपर वर्जन) का उद्घाटन किया जाएगा। यह ट्रेन

• मालदा टाउन – कामाख्या जंक्शन – हावड़ा जंक्शन के बीच चलेगी

• दो रेक के साथ सप्ताह में छह दिन परिचालन करेगी

इसके अलावा, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में छह साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत भी की जाएगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, ये कदम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

खेल से राजनीति तक: 11 जनवरी को जन्मे लोगों की प्रेरक कहानियाँ

11 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: राजनीति, खेल, साहित्य और दर्शन में अमिट छाप छोड़ने वाले नाम

11 जनवरी का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में इसलिए विशेष है क्योंकि इस तिथि को जन्मे अनेक व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज, राष्ट्र और विश्व को नई दिशा दी। राजनीति, खेल, साहित्य, उद्योग, दर्शन और राष्ट्रसेवा—हर क्षेत्र में 11 जनवरी को जन्मे लोगों की उपलब्धियाँ प्रेरणास्रोत हैं। आइए, इतिहास के इन महत्वपूर्ण जन्मों पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
अंकिता रैना (जन्म: 11 जनवरी 1993)
अंकिता रैना का जन्म उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुआ। वे भारत की अग्रणी महिला टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हैं और लंबे समय तक महिला एकल में भारत की नंबर एक खिलाड़ी रहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद अंकिता ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। उन्होंने फेड कप, एशियन गेम्स और कई आईटीएफ टूर्नामेंट्स में पदक जीते। महिला खेलों में उनकी सफलता ने युवा लड़कियों को खेल को करियर के रूप में अपनाने का आत्मविश्वास दिया। वे भारत में महिला टेनिस के विकास की मजबूत आवाज़ बनकर उभरी हैं।
राहुल द्रविड़ (जन्म: 11 जनवरी 1973)
राहुल द्रविड़ का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ, जबकि उनका पालन-पोषण कर्नाटक के बेंगलुरु में हुआ। भारतीय क्रिकेट के “द वॉल” कहे जाने वाले द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में अनुशासन, तकनीक और धैर्य की मिसाल कायम की। उन्होंने 13,000 से अधिक टेस्ट रन बनाए और टीम इंडिया को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं। संन्यास के बाद उन्होंने कोच और मेंटर के रूप में भारतीय क्रिकेट को नई पीढ़ी दी। देशहित में उनका योगदान खेल से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास तक फैला है।

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मदन कौशिक (जन्म: 11 जनवरी 1965)
मदन कौशिक का जन्म हरिद्वार, उत्तराखंड में हुआ। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उत्तराखंड सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। धार्मिक पर्यटन, शहरी विकास और जनकल्याण योजनाओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। हरिद्वार जैसे धार्मिक नगर के विकास और स्वच्छता अभियानों में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
बाबूलाल मरांडी (जन्म: 11 जनवरी 1958)
बाबूलाल मरांडी का जन्म गिरिडीह जिला, झारखंड में हुआ। वे झारखंड राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे। आदिवासी समाज से आने वाले मरांडी ने जनजातीय अधिकारों, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए संघर्ष किया। झारखंड आंदोलन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने राज्य की पहचान और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में योगदान दिया। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की आवाज़ को उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचाया।

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अनलजीत सिंह (जन्म: 11 जनवरी 1954)
अनलजीत सिंह का जन्म भारत में हुआ और वे एक प्रसिद्ध उद्योगपति हैं। मैक्स ग्रुप के संस्थापक के रूप में उन्होंने हेल्थकेयर, बीमा और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए। मैक्स हेल्थकेयर के माध्यम से उन्होंने भारत में गुणवत्तापूर्ण निजी स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार दिया। रोजगार सृजन, निवेश और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के जरिए उनका योगदान देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण है।
शिबु सोरेन (जन्म: 11 जनवरी 1944)
शिबु सोरेन का जन्म रामगढ़ जिला (वर्तमान झारखंड) में हुआ। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। “गुरुजी” के नाम से प्रसिद्ध सोरेन ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए लंबा संघर्ष किया। झारखंड राज्य के गठन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है। वे जनआंदोलनों से निकलकर सत्ता तक पहुँचे नेताओं में अग्रणी हैं।

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सरस्वती राजामणि (जन्म: 11 जनवरी 1927)
सरस्वती राजामणि का जन्म तमिलनाडु, भारत में हुआ। वे भारत की सबसे कम उम्र की महिला जासूसों में से एक थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ खुफिया गतिविधियों में भाग लिया। कम उम्र में ही देशहित में जान जोखिम में डालकर काम करना उनके साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनका योगदान भले ही गुप्त रहा, लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लुइस प्रोतो बार्बोसा (जन्म: 11 जनवरी 1927)
लुइस प्रोतो बार्बोसा का जन्म गोवा, भारत में हुआ। वे प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (गोवा) से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थे। गोवा की क्षेत्रीय राजनीति में उन्होंने स्थानीय मुद्दों, स्वशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती दी। गोवा की सामाजिक-राजनीतिक पहचान को संरक्षित रखने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

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श्रीधर पाठक (जन्म: 11 जनवरी 1860)
श्रीधर पाठक का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और निबंधकार थे। खड़ी बोली हिंदी को साहित्यिक पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख हैं। हिंदी भाषा के विकास में उन्होंने जो भूमिका निभाई, वह आज भी साहित्य जगत में आदर के साथ स्मरण की जाती है।
विलियम जेम्स (जन्म: 11 जनवरी 1842)
विलियम जेम्स का जन्म न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ। वे विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक थे तथा आधुनिक मनोविज्ञान के जनकों में गिने जाते हैं। प्रैग्मेटिज़्म दर्शन के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उनकी विचारधारा ने शिक्षा, मनोविज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में वैश्विक सोच को प्रभावित किया, जिससे मानव व्यवहार को समझने की नई दिशा मिली।

IND vs NZ ODI Series: पहले वनडे से पहले भारत को झटका? नेट प्रैक्टिस में ऋषभ पंत चोटिल, BCCI अपडेट का इंतजार

खेल (राष्ट्र की परम्परा)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज रविवार से शुरू होने जा रही है, लेकिन उससे पहले टीम इंडिया की चिंता बढ़ गई है। वडोदरा में नेट प्रैक्टिस के दौरान विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत चोटिल हो गए, जिससे उनके सीरीज से बाहर होने की आशंका जताई जा रही है। अगर पंत पहला वनडे नहीं खेल पाते हैं, तो यह भारत के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

ऋषभ पंत हाल के वर्षों में लगातार चोटों से जूझते रहे हैं। कार एक्सीडेंट के बाद उन्होंने लंबे समय तक क्रिकेट से दूरी बनाई थी और अब एक बार फिर उनकी फिटनेस पर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल उनकी चोट की गंभीरता को लेकर बीसीसीआई के आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है।

नेट सेशन के दौरान पंत को लगी चोट

शनिवार को वडोदरा के बीसीए स्टेडियम (ग्राउंड बी) में भारतीय टीम का वैकल्पिक अभ्यास सत्र आयोजित किया गया था। इसी दौरान ऋषभ पंत थ्रो-डाउन स्पेशलिस्ट्स के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहे थे, तभी उन्हें कमर के ठीक ऊपर गेंद जा लगी। गेंद लगते ही पंत दर्द से कराह उठे।

टीम के सपोर्ट स्टाफ और मुख्य कोच गौतम गंभीर तुरंत उनके पास पहुंचे और प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि, कुछ देर बाद पंत मैदान छोड़कर बाहर चले गए। सीरीज की शुरुआत में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में अगर चोट गंभीर निकली तो उनका पहले वनडे से बाहर होना तय माना जा रहा है।

गिल-अगरकर की लंबी बातचीत, टीम कॉम्बिनेशन पर मंथन

प्रैक्टिस सेशन के दौरान भारतीय कप्तान शुभमन गिल और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के बीच लंबी बातचीत भी देखने को मिली। माना जा रहा है कि यह चर्चा न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम कॉम्बिनेशन और प्लेइंग-11 को लेकर हुई।
नेट्स के बाहर एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला, जहां पूर्व कप्तान रोहित शर्मा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को बल्लेबाजी के टिप्स देते नजर आए। सिराज जब एक शॉट खेलने में चूक गए, तो रोहित ने उन्हें तकनीकी सलाह दी। सिराज ने केवल बल्लेबाजी अभ्यास किया, जबकि रोहित खुद ज्यादा देर बल्लेबाजी करते नहीं दिखे।

राहुल, अय्यर और जडेजा दिखे फॉर्म में

उप-कप्तान श्रेयस अय्यर ने केएल राहुल के साथ नेट्स में लंबी बल्लेबाजी की। इसके अलावा रवींद्र जडेजा और ऋषभ पंत भी अभ्यास करते नजर आए। अय्यर, सिराज और पंत हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी खेलकर लौटे हैं, जहां उनका आखिरी मैच 8 जनवरी को हुआ था। इससे साफ है कि खिलाड़ी मैच फिटनेस में हैं।

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IND vs NZ वनडे सीरीज का पूरा शेड्यूल

तीन मैचों की यह वनडे सीरीज बड़ोदा क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम से शुरू होगी, जो पहली बार पुरुष अंतरराष्ट्रीय मुकाबले की मेजबानी करेगा।

पहला वनडे: 12 जनवरी – वडोदरा
दूसरा वनडे: 14 जनवरी – निरंजन शाह स्टेडियम, राजकोट
तीसरा वनडे: 17 जनवरी – होल्कर स्टेडियम, इंदौर
न्यूजीलैंड इस दौरे पर नई-लुक टीम के साथ उतरा है, ऐसे में मुकाबला रोमांचक रहने की उम्मीद है।

पहले वनडे के लिए भारत की संभावित XI

शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), रवींद्र जडेजा, नीतीश रेड्डी, हर्षित राणा, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह

पहले वनडे के लिए न्यूजीलैंड की संभावित XI

डेवॉन कॉनवे (विकेटकीपर), विल यंग, हेनरी निकोल्स, डेरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, माइकल ब्रेसवेल (कप्तान), जोश क्लार्कसन, क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जेमीसन, आदित्य अशोक, माइकल रे।

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मकर संक्रांति: सूर्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का महापर्व

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय पर्व-परंपरा में मकर संक्रांति का स्थान विशेष और अर्थपूर्ण है। यह केवल एक तिथि या धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, समाज और जीवन-दर्शन का समन्वित उत्सव है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण होता है, तभी से मकर संक्रांति का शुभारंभ होता है। यह खगोलीय घटना भारतीय संस्कृति में आशा, ऊर्जा और नवचेतना का प्रतीक बन गई है।
भारत की आत्मा गांवों और खेतों में बसती है। मकर संक्रांति उसी आत्मा का पर्व है। यह वह समय है जब किसानों की महीनों की मेहनत फसल के रूप में सामने आती है। खेतों में लहलहाती गेहूं, धान और गन्ने की फसल केवल अन्न उत्पादन का संकेत नहीं, बल्कि अन्नदाता के सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की नींव को भी रेखांकित करती है। ऐसे समय में यह पर्व किसान के श्रम, धैर्य और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध को सम्मान देता है।
धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति को पुण्यकाल माना गया है। गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और जप-तप की परंपरा आत्मशुद्धि और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराती है। दान की भावना—चाहे वह अन्न का हो, वस्त्र का हो या ज्ञान का—भारतीय समाज की करुणा और सामूहिकता को सशक्त बनाती है। यह पर्व सिखाता है कि व्यक्तिगत सुख के साथ-साथ सामाजिक कर्तव्य भी उतना ही आवश्यक है।
मकर संक्रांति का सामाजिक संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। तिल और गुड़ का प्रयोग केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक है। तिल जीवन की कठोरता और गुड़ मिठास का प्रतिनिधित्व करता है—अर्थात जीवन में कठिनाइयों के बावजूद व्यवहार में मिठास बनाए रखना। आज जब समाज में वैचारिक कटुता, असहिष्णुता और वैमनस्य बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति का यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
यह पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है—कहीं पोंगल, कहीं उत्तरायण, कहीं खिचड़ी पर्व तो कहीं बिहू। नाम भले अलग हों, लेकिन भावना एक है—नव आरंभ, समृद्धि और सामूहिक उल्लास। यही विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे मकर संक्रांति जीवंत रूप में सामने लाती है।
आधुनिक युग में जब जीवन मशीनों और डिजिटल दुनिया तक सिमटता जा रहा है, मकर संक्रांति हमें प्रकृति से जुड़ने की याद दिलाती है। खुले आकाश में उड़ती पतंगें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, आकांक्षा और ऊंचाइयों को छूने के संकल्प का प्रतीक हैं। यह पर्व हमें बताता है कि प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानवीय मूल्यों और पर्यावरण संतुलन के साथ हो।
विद्वानों की दृष्टि से मकर संक्रांति एक चेतावनी भी है और अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि यदि हमने प्रकृति, किसान और सामाजिक सौहार्द की उपेक्षा की, तो विकास का सूरज भी अस्त हो सकता है। और अवसर इसलिए कि यह पर्व हमें नई दिशा चुनने, सकारात्मक सोच अपनाने और सामूहिक कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
अंततः मकर संक्रांति का सार यही है—अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की ओर और विभाजन से समरसता की ओर बढ़ना। यदि हम इस पर्व की आत्मा को जीवन में उतार सकें, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि समाज और राष्ट्र भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है। यही मकर संक्रांति का सच्चा संदेश और यही इसकी वास्तविक सार्थकता है।

US Air Strike Syria: ISIS पर अमेरिका का बड़ा हमला, सीरिया में दर्जनों आतंकी ठिकाने तबाह

सीरिया में आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि सीरिया के कई इलाकों में ISIS के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले (Air Strikes) किए गए हैं। यह कार्रवाई ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक (Operation Hawkeye Strike) के तहत अंजाम दी गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।

CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह हमला अमेरिकी समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू हुआ। इस दौरान सीरिया के विभिन्न हिस्सों में मौजूद ISIS के दर्जनों ठिकानों को सटीक हमलों में तबाह किया गया।

आतंक के खिलाफ अमेरिका का सख्त संदेश

CENTCOM के अनुसार, यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की निरंतर और अटूट प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी बलों पर संभावित आतंकी हमलों को रोकना, भविष्य के खतरों को खत्म करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

CENTCOM ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा,
“जो भी हमारे सैनिकों या सहयोगियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म किया जाएगा।”

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पलमायरा हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन

ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक की शुरुआत 19 दिसंबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई थी। यह फैसला 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पलमायरा में हुए ISIS हमले के बाद लिया गया, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी।

मारे गए सैनिकों की पहचान आयोवा नेशनल गार्ड के

• 25 वर्षीय सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस टोवार
• 29 वर्षीय सार्जेंट विलियम नाथानियल हॉवर्ड

के रूप में हुई थी। दोनों सैनिक इस वर्ष की शुरुआत में मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैन्य दल का हिस्सा थे।

90 से अधिक सटीक हथियार, 35 से ज्यादा ठिकाने तबाह

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में 90 से अधिक प्रिसीजन म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया और 35 से ज्यादा आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों में दो दर्जन से अधिक लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व (Operation Inherent Resolve) के तहत ISIS को पूरी तरह पराजित करने की रणनीति का हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हमले से सीरिया में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और आने वाले दिनों में ऐसे सैन्य अभियानों की संख्या और बढ़ सकती है।

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हिंदू समाज की एकता का आह्वान: सोनरा में विराट हिंदू सम्मेलन बना जन चेतना का केंद्र

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर क्षेत्र के ग्राम सभा सोनरा में शनिवार को हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन जन आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक चेतना का भव्य प्रतीक बनकर उभरा।
सम्मेलन में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे साधु-संतों, धर्माचार्यों और सकल हिंदू समाज के हजारों लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। पूरा क्षेत्र सनातन एकता और हिंदू संगठन के नारों से गूंजता रहा।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता शिवशक्ति अखाड़ा, कानपुर के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत मधुराम ने अपने ओजस्वी और विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि हिंदू समाज यदि संगठित हो जाए, तो भारत को विश्व में कोई शक्ति कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन मूल्य, संस्कृति और राष्ट्रबोध है। ऐसे आयोजनों से समाज को दिशा मिलती है और हिंदुत्व के विचार को नई धार मिलती है।
महंत मधुराम ने आपसी मतभेदों और आंतरिक संघर्षों पर चिंता जताते हुए कहा कि जब समाज आपस में बंटता है, तो इसका सीधा लाभ राष्ट्रविरोधी और विघटनकारी शक्तियां उठाती हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन और एकता ही सनातन संस्कृति की आत्मा है, और यही भारत की शक्ति का मूल आधार भी है।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे रामप्रीत गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें अत्यंत गहरी और एकरूप हैं। उन्होंने कहा कि भले ही हमारी उपासना पद्धतियां अलग हों, देवी-देवताओं के स्वरूप भिन्न हों, लेकिन हमारी परंपरा, पूर्वज और मूल चेतना एक ही है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत की राष्ट्रीयता में सनातन धर्म रचा-बसा है और हिंदुत्व की भावना देश की रग-रग में प्रवाहित होती है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि जाति, वर्ग और क्षेत्रीय भेद से ऊपर उठकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत करें।
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने सनातन धर्म की रक्षा, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्र निर्माण में हिंदू समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साधु-संतों के प्रवचनों ने युवाओं में विशेष उत्साह भरा और समाज को एक सूत्र में बांधने का संदेश दिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन, श्रद्धा और राष्ट्रभाव का स्पष्ट वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में ई. विवेक गुप्ता, सुधाकर राय, विजय चौधरी, विश्राम चौहान, अखिलेश, नितेश, साधु शरण, मयंक, प्रभात, बलराम, देवेंद्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। स्थानीय लोगों ने सम्मेलन को समाज के लिए प्रेरणादायक और दिशा देने वाला बताया।
कुल मिलाकर, सोनरा में आयोजित यह विराट हिंदू सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त संदेश बनकर सामने आया। सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है।

शीतलहर में मानवता की गर्माहट: रवीन्द्र बहादुर सिंह बने जरूरतमंदों की ढाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जब शीतलहर हड्डियों को कंपा रही है और कड़ाके की ठंड गरीबों के लिए जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है, ऐसे समय में जनसेवा ही सबसे बड़ा धर्म बनकर सामने आती है। जिले में इसी मानवीय धर्म का जीवंत उदाहरण शनिवार को देखने को मिला, जब भाजपा के पूर्व विधायक चौधरी शिवेन्द्र सिंह के सुपुत्र रवीन्द्र बहादुर सिंह ठंड से जूझ रहे जरूरतमंदों के लिए राहत की किरण बनकर उभरे।
फरेंदा क्षेत्र में आयोजित सेवा कार्यक्रम के तहत उन्होंने लगभग 100 गरीब और असहाय परिवारों को गर्म कम्बल वितरित कर न केवल ठंड से राहत दी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सहानुभूति का मजबूत संदेश भी दिया। फरेंदा बाजार के समीप आयोजित इस कार्यक्रम में एक-एक जरूरतमंद को कम्बल भेंट कर मानवीय सरोकारों की मिसाल पेश की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सच्ची जनसेवा है। उन्होंने अपने पिता पूर्व विधायक चौधरी शिवेन्द्र सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि जनहित और समाजसेवा उनकी पारिवारिक परंपरा रही है और वे उसी मार्ग पर चलते हुए जरूरतमंदों के लिए कार्य करते रहेंगे।
कार्यक्रम में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। क्षेत्र के निवासी रामप्रकाश ने कहा कि पूर्व विधायक चौधरी शिवेन्द्र सिंह के कार्यकाल में फरेंदा क्षेत्र में विकास की मजबूत नींव पड़ी और अब उनके पुत्र द्वारा किया जा रहा यह सेवा कार्य उसी जनसेवा के सोच का विस्तार है। वहीं ठंड से कांपती बुजुर्ग महिला सुशीला देवी ने भावुक स्वर में कहा कि इस भीषण ठंड में कम्बल मिलना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
गौरतलब है कि इन दिनों महराजगंज जिले में न्यूनतम तापमान लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन खासकर गरीब और असहाय वर्ग बुरी तरह प्रभावित है। जिला प्रशासन द्वारा अलाव जलाने और गर्म वस्त्र वितरण के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ऐसे समय में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर की गई पहल पीड़ितों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

भारत रत्न विवाद: तेज प्रताप के बयान पर BJP का तीखा पलटवार

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव द्वारा लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग पर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने तीखा पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह अनुचित बताया है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सिग्रीवाल ने साफ शब्दों में कहा कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो केवल उन्हीं व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने देश और समाज के लिए असाधारण योगदान दिया हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि बार-बार जेल जाने वाले और घोटालों में लिप्त नेताओं को भारत रत्न दिया जाने लगे, तो फिर जेल जाना भी उपलब्धि माननी पड़ेगी।

“लालू शासन में भ्रष्टाचार चरम पर था”

जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में बिहार भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का पर्याय बन गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का इस्तेमाल जनसेवा के बजाय निजी हितों के लिए किया गया।

“मेरिट की अनदेखी कर जमीन लेकर बांटी गई नौकरियां”

जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय होने पर सिग्रीवाल ने कहा कि यह मामला पूरी तरह अदालत के अधीन है। जब कोर्ट के पास ठोस सबूत होते हैं, तभी आरोप तय किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए समाज की सेवा करना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, न कि पद का दुरुपयोग करना। सिग्रीवाल का आरोप है कि लालू यादव के शासन में मेरिट को नजरअंदाज कर जमीन लेकर नौकरियां बांटी गईं, जो गंभीर भ्रष्टाचार का उदाहरण है।

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“नीतीश कुमार ने खत्म किया जंगलराज”

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग पर सिग्रीवाल ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार में जंगलराज को समाप्त कर सुशासन की मजबूत नींव रखी। उनके नेतृत्व में राज्य विकास की राह पर आगे बढ़ा है और उनके कार्यों की देशभर में सराहना हो रही है।

ममता बनर्जी और सोमनाथ मंदिर पर भी टिप्पणी

इसके अलावा सिग्रीवाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। वहीं, सोमनाथ मंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वहां जाकर श्रद्धा व्यक्त करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

11 जनवरी: इतिहास की धड़कनों में दर्ज एक तारीख, जिसने दुनिया की दिशा बदली

इतिहास की हर तारीख अपने भीतर अनगिनत कहानियाँ, फैसले और परिवर्तन समेटे होती है। 11 जनवरी भी ऐसी ही एक तारीख है, जिसने भारत से लेकर विश्व मंच तक राजनीति, विज्ञान, युद्ध, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और मानव सभ्यता की दिशा को प्रभावित किया। इस दिन घटित घटनाएँ केवल समाचार नहीं थीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनीं। आइए, क्रमवार जानते हैं 11 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को विस्तार से।
2020: पूर्वी भारत के औद्योगिक भविष्य की नींव
साल 2020 में इस्पात मंत्रालय ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और JPC के सहयोग से पश्चिम बंगाल के ओबेरॉय ग्रैंड, कोलकाता में एकीकृत स्टील हब का शुभारंभ किया। यह पहल ‘पूर्वावोदय त्वरित विकास’ के तहत पूर्वी भारत को औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में अहम कदम थी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा उद्घाटित यह हब रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देने वाला साबित हुआ।
2020: साइबर अपराध के खिलाफ भारत की निर्णायक पहल
इसी वर्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ और ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ का उद्घाटन किया। यह डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक कदम था, जिसने आम नागरिकों को ऑनलाइन अपराधों के खिलाफ सशक्त आवाज दी और कानून व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया।

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2010: भारत की रक्षा और कूटनीति को नई धार
11 जनवरी 2010 को भारत ने उड़ीसा के बालासोर में हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ मिसाइल के दो सफल परीक्षण किए। डीआरडीओ द्वारा विकसित यह मिसाइल भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई ऊँचाई देने वाली साबित हुई।
इसी दिन भारत और बांग्लादेश के बीच पाँच महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनमें एक अरब डॉलर का ऋण और आतंकवाद निरोधी सहयोग शामिल था, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को बल मिला।
2010: न्यायपालिका में पारदर्शिता का ऐतिहासिक फैसला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे में आएगा। यह निर्णय लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर माना गया।
2009: कॉरपोरेट संकट और खेल गौरव
आईटी कंपनी सत्यम घोटाले के बाद उसे बचाने के लिए सरकार ने तीन नामित सदस्यों की नियुक्ति की। यह भारत के कॉरपोरेट प्रशासन सुधार की दिशा में अहम कदम था।
इसी दिन अचंता शरत कमल ने 70वीं सीनियर राष्ट्रीय टेबल टेनिस चैंपियनशिप जीतकर भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित किया।
2008: प्रशासनिक पुनर्गठन और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष
यूपीए सरकार ने दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की रूपरेखा तैयार की, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना था। वहीं, श्रीलंका सरकार ने लिट्टे की संघर्षविराम बहाली की अपील ठुकराकर गृहयुद्ध को और जटिल मोड़ दे दिया।

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2005: यूक्रेन में लोकतंत्र की जीत
यूक्रेन में दोबारा हुए राष्ट्रपति चुनाव में पश्चिम समर्थक उम्मीदवार विक्टर युश्चेंको की जीत ने देश की राजनीति और वैश्विक समीकरणों को बदल दिया। यह चुनाव लोकतंत्र और जनआंदोलन की शक्ति का प्रतीक बना।
2001: भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग
भारत और इंडोनेशिया के बीच पहला रक्षा समझौता हुआ, जिसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूती प्रदान की।
1999: शहरी भूमि कानून का अंत
शहरी भूमि सीमा कानून के निरस्त होने से रियल एस्टेट और शहरी विकास को नई गति मिली, जिससे आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला।
1970: बियाफ्रा का आत्मसमर्पण
नाइजीरिया में अलग बियाफ्रा राज्य का आत्मसमर्पण अफ्रीकी इतिहास की सबसे दर्दनाक गृहयुद्ध कथाओं में से एक का अंत था, जिसने लाखों लोगों को प्रभावित किया।
1962: प्रकृति का विनाशकारी रूप
पेरू के एंडेस क्षेत्र में हिमस्खलन से लगभग तीन हजार लोगों की मौत ने दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता का एहसास कराया।
1613: भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की नींव
मुगल सम्राट जहाँगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में कारखाना लगाने की अनुमति दी। यही निर्णय आगे चलकर भारत के औपनिवेशिक इतिहास की शुरुआत बना।
निष्कर्ष
11 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मानव इतिहास की धुरी है। यह दिन हमें सिखाता है कि फैसले, खोजें और संघर्ष आने वाले युगों की दिशा तय करते हैं। अतीत को जानना भविष्य को समझने की पहली शर्त है।

US-Iran Tension: ईरान पर हमले की तैयारी? ट्रंप का बड़ा संकेत

ईरान में तेज़ होते विरोध प्रदर्शन और सरकार की सख्त चेतावनियों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिससे मध्य पूर्व में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले (Air Strike) के विकल्पों पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल किसी एक रणनीति पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अभी तक न तो किसी तरह की सैन्य तैनाती की गई है और न ही हथियारों की कोई असामान्य गतिविधि देखी गई है। यह पूरी प्रक्रिया केवल संभावित हालात से निपटने के लिए बनाई जा रही रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसे अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के तहत सामान्य प्रक्रिया मानता है।

ईरान में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती, मौत की सजा तक की चेतावनी
दूसरी ओर, ईरान में सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के संकेत दे दिए हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन से ईरानी प्रशासन बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को “अल्लाह का दुश्मन” माना जाएगा, जिसके तहत मौत की सजा तक का प्रावधान है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मदद करने वालों को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। अभियोजकों को निर्देश दिए गए हैं कि मामलों की सुनवाई तेजी से हो और किसी भी तरह की नरमी न बरती जाए।

ट्रंप का खुला समर्थन, अमेरिका का सख्त संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को खुला समर्थन दिया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की जनता पहले से कहीं ज्यादा आज़ादी के करीब है और अमेरिका ईरानी नागरिकों की मदद के लिए तैयार है।

इसके साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सख्त बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनियों को हल्के में न लिया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि जब ट्रंप कोई बात कहते हैं, तो उसे लागू करने की क्षमता और इरादा दोनों रखते हैं।

इन घटनाक्रमों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है? आने वाले दिन पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

आज आपका मूलांक बदलेगा किस्मत की चाल?

🔮आज का अंक राशिफल आपके भाग्य के कौन-से द्वार खोलेगा?

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत

अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार हर व्यक्ति की जन्मतिथि से उसका मूलांक निकलता है, जो उसके स्वभाव, सोच, कार्यक्षेत्र, आर्थिक स्थिति और भविष्य की दिशा को प्रभावित करता है।आज 11 जनवरी 2026 का दिन सभी 1 से 9 मूलांकों के लिए क्या संकेत दे रहा है, आइए जानते हैं आसान, स्पष्ट और उपयोगी शब्दों में।

🔢 अपना मूलांक कैसे जानें?
अपनी जन्मतिथि के अंकों को जोड़ें और एक अंक तक लाएं। उदाहरण: 17 → 1+7 = 8 (मूलांक 8)

🔴 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)
आज का दिन नेतृत्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करेगा।
कार्य क्षेत्र में नई जिम्मेदारी या प्रमोशन की संभावना है। व्यवसाय में नए आइडिया सफल हो सकते हैं।
छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के योग हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को आज पहचान और सम्मान मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन अहंकार से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
🟠 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
आज भावनाओं में बहने के बजाय संतुलन बनाना जरूरी है।
नौकरी में टीमवर्क से लाभ होगा। कला, संगीत और लेखन से जुड़े लोगों के लिए दिन अनुकूल है।
शिक्षा के क्षेत्र में ध्यान भटक सकता है, इसलिए एकाग्रता बनाए रखें।
राजनीति में छवि सुधारने का अवसर मिलेगा।
आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: माता पार्वती
🟡 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
आज ज्ञान, सलाह और अनुभव से लाभ मिलेगा।
शिक्षक, वकील, काउंसलर और प्रशासनिक अधिकारी के लिए दिन शुभ है।
छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी।
व्यवसाय में नई डील या समझौता हो सकता है।
आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: बृहस्पति देव
🟢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
आज मेहनत रंग लाएगी।
इंजीनियरिंग, तकनीकी, निर्माण और प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
राजनीतिक लोगों को धैर्य रखना होगा।
आर्थिक दृष्टि से स्थिरता रहेगी।
स्वास्थ्य के लिए आराम जरूरी है।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: गणेश जी

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🔵 मूलांक 5 (5, 14, 23)
आज संचार और संपर्क से लाभ होगा।
मीडिया, मार्केटिंग, व्यापार और सेल्स से जुड़े लोगों के लिए शानदार दिन है।
यात्रा के योग बन रहे हैं।
छात्रों के लिए नई जानकारी मिलने का समय है।
खर्च बढ़ सकता है, बजट संभालें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: विष्णु भगवान
🟣 मूलांक 6 (6, 15, 24)
आज प्रेम, परिवार और सौंदर्य पर फोकस रहेगा।
कला, फैशन, संगीत और फिल्म क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
व्यवसाय में ग्राहकों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी।
स्वास्थ्य के लिए नींद पूरी करें।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
मूलांक 7 (7, 16, 25)
आज आत्मचिंतन और धैर्य का दिन है।
रिसर्च, अध्यात्म, ज्योतिष और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ होगा।
बड़े आर्थिक फैसले आज टालें।
राजनीतिक लोगों को आज शांत रहना चाहिए।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव
🟤 मूलांक 8 (8, 17, 26)
आज कर्म और अनुशासन का दिन है।
प्रशासन, राजनीति, ठेकेदारी और उद्योग से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी।
आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
स्वास्थ्य में लापरवाही न करें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनिदेव
🔴 मूलांक 9 (9, 18, 27)
आज ऊर्जा और साहस से भरे रहेंगे।
सेना, पुलिस, खेल, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
गुस्से से बचें।
आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी।
शुभ रंग: केसरिया
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी

डिस्क्लेमर:इस आलेख में दी गई जानकारी अंक ज्योतिष पर आधारित सामान्य गणनाओं पर है। यह पूर्णतः सत्य या सटीक होने का दावा नहीं करती। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

आज का दिन शुभ या अशुभ? पंचांग से जानिए पूरा सच

पंचांग 11 जनवरी 2026 | आज का विस्तृत हिन्दू पंचांग (रविवार)दिनांक: 11/01/2026 (January 11, 2026) वार: रविवार स्थानानुसार पंचांग: द्रिक पंचांग
🕉️ आज का पंचांग – 11 जनवरी 2026
तिथि
कृष्ण पक्ष अष्टमी – प्रातः 10:20 बजे तक
कृष्ण पक्ष नवमी – 10:20 AM के बाद
नक्षत्र – चित्रा – सायं 06:12 PM तक
स्वाति – 06:12 PM के बाद
योग – सुकर्मा – 05:26 PM तक
धृति – 05:26 PM के बाद
करण – कौलव – 10:20 AM तक
तैतिल – 10:20 AM से 11:29 PM तक
गर – 11:29 PM के बाद
🪔 संवत एवं मास
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
वैदिक ऋतु: हेमंत
द्रिक ऋतु: शिशिर
अयन: दक्षिणायन
राष्ट्रीय तिथि (शक): पौष 21, 1947
☀️ सूर्य एवं 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:55 PM
चन्द्रोदय: 12:42 AM
चन्द्रास्त: 12:16 PM
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: तुला (दिन-रात)
⚠️ अशुभ काल (आज न करें ये कार्य)
राहुकाल: 04:34 PM – 05:55 PM
यमगण्ड: 12:34 PM – 01:54 PM
कुलिक: 03:14 PM – 04:34 PM
दुर्मुहूर्त: 04:29 PM – 05:12 PM
वर्ज्यम्: 12:28 AM – 02:16 AM

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🌸 शुभ काल (महत्वपूर्ण कार्यों हेतु श्रेष्ठ)
ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:26 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:13 PM – 12:56 PM
अमृत काल: 11:06 AM – 12:52 PM
🔱 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं
आनन्दादि योग: पद्म योग – 06:12 PM तक, तत्पश्चात लुम्ब योग
🧭 दिशा शूल एवं यात्रा विचार
रविवार को दिशा शूल: पश्चिम दिशा
पश्चिम दिशा में यात्रा वर्जित: अत्यावश्यक हो तो
👉 गुड़ या तांबा खाकर यात्रा करें, बाधा कम होगी
लाभकारी दिशा: पूर्व एवं उत्तर दिशा की यात्रा शुभ मानी गई है, कार्यसिद्धि की संभावना अधिक
🌙 चंद्रबल (राशि अनुसार शुभता)
आज चंद्रबल प्राप्त राशियाँ:
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
ताराबल (नक्षत्र अनुसार)
06:12 PM तक शुभ नक्षत्र:
भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
06:12 PM के बाद शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा

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🌺 क्यों खास है आज का दिन?
आज चंद्रमा तुला राशि में होने से सौंदर्य, कला, संतुलन और साझेदारी से जुड़े कार्यों में सफलता के योग बनते हैं। रविवार होने से सूर्य संबंधी कार्य, प्रशासन, नेतृत्व और आत्मबल से जुड़े निर्णयों के लिए दिन प्रभावशाली है।
🔔 आज क्या करें, क्या न करें?
प्रातः सूर्य को अर्घ्य देना विशेष फलदायी
क्रोध एवं अहं से बचें
राहुकाल में शुभ कार्य न करें
अभिजीत मुहूर्त में महत्वपूर्ण निर्णय लाभकारी

नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए “राष्ट्र की परम्परा” उत्तरदायी नहीं है। कृपया किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।