संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। छपरा–अमृतसर सुपरफास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से रविवार की देर शाम खलीलाबाद रेलवे स्टेशन के पास एक 65 वर्षीय अज्ञात महिला की मौत हो गई। घटना के बाद ट्रेन करीब 45 मिनट तक मौके पर खड़ी रही, जिससे रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार हादसा खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पार करने के बाद त्रिपाठी मार्केट रेलवे क्रॉसिंग से लगभग 200 मीटर पूरब हुआ। बताया गया कि महिला अचानक ट्रेन के सामने आ गई। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर महिला को बचाने का प्रयास किया, लेकिन इंजन की चपेट में आने से वह ट्रैक के किनारे गिर पड़ी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के चलते रेलवे क्रॉसिंग का फाटक लगभग पौने घंटे तक बंद रहा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घंटों बाद ट्रेन के रवाना होने के बाद यातायात बहाल हुआ और राहगीरों ने राहत की सांस ली।
ट्रेन की चपेट में आने से वृद्ध महिला की मौत
कला, राजनीति, साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम के अमर नाम
12 जनवरी के ऐतिहासिक निधन
भारतीय और विश्व इतिहास में 12 जनवरी ऐसी तिथि है, जब कई महान व्यक्तित्वों का निधन हुआ, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। सिनेमा, साहित्य, राजनीति, शास्त्रीय संगीत और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ये नाम आज भी अपने योगदान के कारण स्मरण किए जाते हैं। आइए जानते हैं 12 जनवरी को हुए इन ऐतिहासिक निधनों के बारे में विस्तृत जानकारी।
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अमरीश पुरी (1929–2005) | भारतीय सिनेमा के कालजयी खलनायक
अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को नवांशहर जिला, पंजाब, भारत में हुआ था। उन्होंने भारतीय सिनेमा में खलनायक की भूमिका को एक नई ऊँचाई दी। उनकी दमदार आवाज़, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सशक्त अभिनय ने उन्हें हिंदी फिल्मों के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।
‘मिस्टर इंडिया’ के मोगैम्बो, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘करण अर्जुन’ और ‘घायल’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में जीवित हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया और भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान दिया। 12 जनवरी 2005 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका अभिनय आज भी अमर है।
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रामकृष्ण हेगड़े (1926–2004) | कर्नाटक के विकास पुरुष
रामकृष्ण हेगड़े का जन्म सिद्धपुर, उत्तर कन्नड़ जिला, कर्नाटक, भारत में हुआ था। वे जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे।
उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में कर्नाटक ने सुशासन की नई दिशा पकड़ी। सादगी, ईमानदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है। 12 जनवरी 2004 को उनके निधन से भारतीय राजनीति को एक दूरदर्शी नेता की क्षति हुई।
वी. आर. नेदुनचेज़ियन (1916–2000) | तमिल राजनीति के अनुभवी रणनीतिकार
वी. आर. नेदुनचेज़ियन का जन्म तिरुचिरापल्ली जिला, तमिलनाडु, भारत में हुआ था। वे तीन बार तमिलनाडु के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे और द्रविड़ राजनीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते थे।
उन्होंने शिक्षा, भाषा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाई। तमिल अस्मिता और प्रशासनिक स्थिरता के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय है। 12 जनवरी 2000 को उनका निधन हुआ।
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कुमार गंधर्व (1924–1992) | शास्त्रीय संगीत का विद्रोही स्वर
कुमार गंधर्व का जन्म बेलगांव जिला, कर्नाटक, भारत में हुआ था। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे।
उन्होंने परंपरागत गायकी से हटकर नए प्रयोग किए और निर्गुण भक्ति संगीत को नई पहचान दी। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने संगीत साधना नहीं छोड़ी। उनकी गायकी आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा है। 12 जनवरी 1992 को उनका निधन हुआ।
अगाथा क्रिस्टी (1890–1976) | रहस्य कथा की महारानी
अगाथा क्रिस्टी का जन्म टॉर्की, डेवोन, इंग्लैंड में हुआ था। वे विश्व की सबसे प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकारों में से एक थीं।
‘हरक्यूल पॉयरो’ और ‘मिस मार्पल’ जैसे पात्रों के माध्यम से उन्होंने रहस्य साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके उपन्यास आज भी दुनिया भर में पढ़े जाते हैं। 12 जनवरी 1976 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका साहित्य अमर है।
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नरहर विष्णु गाडगिल (1894–1966) | स्वतंत्रता संग्राम और संविधान के निर्माता
नरहर विष्णु गाडगिल का जन्म नासिक जिला, महाराष्ट्र, भारत में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी, अर्थशास्त्री और संविधान सभा के सदस्य थे।
उन्होंने भारत की आर्थिक नीतियों और लोकतांत्रिक ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 12 जनवरी 1966 को उनका निधन हुआ।
प्यारे लाल शर्मा (1884–1941) | क्रांतिकारी विचारधारा के प्रतीक
प्यारे लाल शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था। वे भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े रहे और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
उनका जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का उदाहरण है। 12 जनवरी 1941 को उनका निधन हुआ।
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सूर्य सेन (1894–1934) | चिटगांव विद्रोह के नायक
सूर्य सेन का जन्म चिटगांव, बंगाल प्रेसीडेंसी (अब बांग्लादेश) में हुआ था। वे चिटगांव शस्त्रागार विद्रोह के प्रमुख नेता थे।
उनका लक्ष्य था भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना। 12 जनवरी 1934 को फांसी देकर उन्हें शहीद कर दिया गया। उनका बलिदान आज भी प्रेरणा है।
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गोपीनाथ साहा (1906–1924) | बंगाल के युवा शहीद
गोपीनाथ साहा का जन्म पश्चिम बंगाल, भारत में हुआ था। वे मात्र 18 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हो गए।
उनका साहस और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। 12 जनवरी 1924 को उनका निधन हुआ।
स्वामी विवेकानंद से आर्या राजेंद्रन तक: एक ही दिन, अनेक युगपुरुष
12 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: भारत और विश्व के इतिहास को दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत
भारत की सांस्कृतिक, राजनीतिक, साहित्यिक और आध्यात्मिक परंपरा में 12 जनवरी का दिन अत्यंत विशेष है। इस दिन जन्मे महापुरुषों और विशिष्ट व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज, राष्ट्र और विश्व को नई दिशा दी। राजनीति, खेल, साहित्य, सिनेमा, योग, स्वतंत्रता आंदोलन और प्रशासन—हर क्षेत्र में इन विभूतियों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। आइए, 12 जनवरी को जन्मे प्रमुख व्यक्तियों के जीवन, जन्म-स्थान और देशहित में योगदान पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
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आर्या राजेंद्रन (जन्म: 1999)
आर्या राजेंद्रन का जन्म तिरुवनंतपुरम, केरल, भारत में हुआ। वे भारत की सबसे कम उम्र की नवनियुक्त महापौर बनकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं। कम उम्र में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश कर उन्होंने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊर्जा दी। आर्या ने स्थानीय शासन में पारदर्शिता, सामाजिक समानता और नागरिक सहभागिता को प्राथमिकता दी। उनका नेतृत्व यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बना सकती है। उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
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हरिका द्रोणावल्ली (जन्म: 1991)
हरिका द्रोणावल्ली का जन्म गुंटूर ज़िला, आंध्र प्रदेश, भारत में हुआ। वे भारत की शीर्ष महिला शतरंज खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर उन्होंने भारतीय शतरंज को नई पहचान दिलाई। हरिका ने युवा खिलाड़ियों, विशेषकर लड़कियों, को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका योगदान यह सिद्ध करता है कि बौद्धिक खेलों में भी भारत विश्व पटल पर सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
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मनोज सरकार (जन्म: 1990)
मनोज सरकार का जन्म उत्तराखंड, भारत में हुआ। वे भारत के प्रसिद्ध पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतकर साहस और आत्मविश्वास का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। मनोज ने दिव्यांग खिलाड़ियों के प्रति समाज की सोच बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रियंका गांधी (जन्म: 1972)
प्रियंका गांधी का जन्म नई दिल्ली, भारत में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रमुख नेता हैं और गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। संगठनात्मक क्षमता, जनसंवाद और महिला सशक्तिकरण उनके कार्यक्षेत्र के प्रमुख आयाम हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
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दिनेश शर्मा (जन्म: 1964)
दिनेश शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ रहे हैं। शिक्षा, नगर विकास और प्रशासनिक सुधारों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने सरकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य के विकास को गति दी।
अजय माकन (जन्म: 1964)
अजय माकन का जन्म दिल्ली, भारत में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। संसदीय कार्य, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर उनका विशेष योगदान रहा है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया।
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अरुण गोविल (जन्म: 1958)
अरुण गोविल का जन्म मेरठ, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के प्रसिद्ध अभिनेता हैं। रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में भगवान राम की भूमिका निभाकर उन्होंने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया। उनका योगदान सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण रहा।
सुमित्रा भावे (जन्म: 1943)
सुमित्रा भावे का जन्म महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे सुप्रसिद्ध मराठी फिल्म निर्माता थीं। उनकी फिल्मों में सामाजिक संवेदनशीलता, मानवीय मूल्य और यथार्थ का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने समानांतर सिनेमा को नई पहचान दी और सामाजिक मुद्दों पर जन-जागरूकता बढ़ाई।
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एम. वीरप्पा मोइली (जन्म: 1940)
एम. वीरप्पा मोइली का जन्म कर्नाटक, भारत में हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, लेखक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। संविधान, कानून और प्रशासनिक सुधारों में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने सुशासन और न्यायिक सुधारों पर विशेष कार्य किया।
मुफ़्ती मोहम्मद सईद (जन्म: 1936)
मुफ़्ती मोहम्मद सईद का जन्म बिजबेहरा, अनंतनाग ज़िला, जम्मू-कश्मीर, भारत में हुआ। वे जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उन्होंने राज्य में शांति, संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उनका योगदान क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।
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अहमद फ़राज़ (जन्म: 1931)
अहमद फ़राज़ का जन्म कोहाट, अब पाकिस्तान में हुआ। वे प्रसिद्ध उर्दू कवि थे। उनकी शायरी में प्रेम, प्रतिरोध और मानवीय संवेदनाएँ स्पष्ट झलकती हैं। उन्होंने उर्दू साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई और सामाजिक चेतना को शब्दों के माध्यम से सशक्त किया।
सी. रामचन्द्र (जन्म: 1918)
सी. रामचन्द्र का जन्म अहमदनगर, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे हिंदी फ़िल्म संगीतकार, गायक और निर्माता-निर्देशक थे। भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में उनके संगीत ने अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने संगीत को नवाचार और लोकप्रियता का नया आयाम दिया।
महर्षि महेश योगी (जन्म: 1918)
महर्षि महेश योगी का जन्म मध्य प्रदेश, भारत में हुआ। वे विश्वप्रसिद्ध योगाचार्य और अध्यात्मवादी थे। उन्होंने ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन के माध्यम से योग को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका योगदान मानसिक शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में अद्वितीय है।
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उमाशंकर दीक्षित (जन्म: 1901)
उमाशंकर दीक्षित का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता और समाजसेवी थे। उन्होंने राष्ट्रवाद, मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती दी। स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
नेली सेनगुप्ता (जन्म: 1886)
नेली सेनगुप्ता का जन्म इंग्लैंड में हुआ, परंतु भारत को उन्होंने कर्मभूमि बनाया। वे प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थीं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी।
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भगवान दास (जन्म: 1869)
भगवान दास का जन्म वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे भारत रत्न से सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी और शिक्षा शास्त्री थे। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
स्वामी विवेकानंद (जन्म: 1863)
स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत में हुआ। वे महान भारतीय दार्शनिक, संत और राष्ट्रनिर्माता थे। उन्होंने वेदांत और भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। युवाओं में आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और सेवा भावना जाग्रत करना उनका सबसे बड़ा योगदान है।
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12 जनवरी का इतिहास:
12 जनवरी भारतीय और विश्व इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन जहाँ एक ओर स्वामी विवेकानंद जैसे महान विचारक के जन्म से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर विज्ञान, राजनीति, खेल, रक्षा और वैश्विक घटनाओं में भी मील का पत्थर साबित हुआ है। आइए 12 जनवरी के इतिहास से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को क्रमवार और विस्तार से जानते हैं, जो इस दिन को विशेष बनाती हैं।
2020 – जसप्रीत बुमराह को पॉली उमरीगर अवॉर्ड
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को बीसीसीआई द्वारा प्रतिष्ठित पॉली उमरीगर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भारतीय क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। बुमराह ने अपनी सटीक यॉर्कर, निरंतरता और तीनों प्रारूपों में बेहतरीन प्रदर्शन से भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई, जिससे वे नई पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली गेंदबाज बने।
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रक्षा क्षेत्र में मजबूती – ICGS एनी बेसेंट और अमृत कौर
रक्षा सचिव अजय कुमार ने कोलकाता में भारतीय तटरक्षक बल के दो जहाज—आईसीजीएस एनी बेसेंट और आईसीजीएस अमृत कौर—को राष्ट्र को समर्पित किया। ये जहाज समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी और आपदा प्रबंधन में भारत की क्षमताओं को और मजबूत करते हैं। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल मिला।
2018 – इसरो का ऐतिहासिक मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 जनवरी 2018 को अपना 100वाँ उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन में एक साथ 31 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया, जो भारत की तकनीकी दक्षता और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है।
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2015 – बोको हराम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
कैमरून में सुरक्षा बलों और आतंकी संगठन बोको हराम के बीच हुई मुठभेड़ में 143 आतंकवादी मारे गए। यह कार्रवाई अफ्रीका में आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी गई और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली।
2010 – विमान अपहरण रोधी कानून में संशोधन
नागर विमानन क्षेत्र पर आतंकी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने विमान अपहरण रोधी कानून 1982 में संशोधन कर मृत्युदंड का प्रावधान जोड़ा। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक उड्डयन की सुरक्षा के लिए एक सख्त लेकिन आवश्यक कदम माना गया।
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2010 – हैती का विनाशकारी भूकंप
कैरेबियाई देश हैती में आए भीषण भूकंप ने राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस को तबाह कर दिया। लाखों लोगों की जान गई और देश की आधारभूत संरचना पूरी तरह नष्ट हो गई। यह त्रासदी 21वीं सदी की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिनी जाती है।
2009 – ए. आर. रहमान का गोल्डन ग्लोब
प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने। फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के संगीत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा मिली।
2009 – भारत में प्राचीन उल्का पिंड क्रेटर की खोज
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. जयंत कुमार ने दुनिया के सबसे पुराने उल्का पिंड क्रेटरों में से एक की खोज की। यह खोज भूविज्ञान और पृथ्वी के इतिहास को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई।
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2007 – ‘रंग दे बसंती’ को अंतरराष्ट्रीय सम्मान
हिंदी फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को बाफ्टा अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया। यह फिल्म युवाओं में सामाजिक और राजनीतिक चेतना जगाने वाली एक प्रभावशाली कृति साबित हुई।
1984 – राष्ट्रीय युवा दिवस की घोषणा
स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को विवेकानंद के विचारों—आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और चरित्र निर्माण—से प्रेरित करना है।
1950 – उत्तर प्रदेश नामकरण
स्वतंत्रता के बाद 12 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखा गया। यह निर्णय प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम था।
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1934 – क्रांतिकारी सूर्य सेन का बलिदान
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी सूर्य सेन को चटगांव में फांसी दी गई। उन्होंने चटगांव विद्रोह का नेतृत्व किया और इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना कर अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी।
1866 – रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी की स्थापना
लंदन में रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी का गठन हुआ, जिसने विमानन और अंतरिक्ष विज्ञान के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
आज का अंक राशिफल जानकर चौंक जाएंगे, कौन-सा मूलांक बदलेगा आपकी किस्मत?
ज्योतिषशास्त्र की तरह अंक ज्योतिष भी व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य और जीवन की दिशा को समझने का सशक्त माध्यम है। जन्मतिथि, माह और वर्ष को जोड़कर जो इकाई अंक बनता है, वही आपका मूलांक होता है। जैसे 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 और 8, 17, 26 का मूलांक 8 माना जाता है।
आज 12 जनवरी 2026 के दिन का अंक राशिफल प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह राशिफल कार्य, व्यवसाय, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन, धन, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक पक्ष को ध्यान में रखकर सरल भाषा में तैयार किया गया है।
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मूलांक 1 (सूर्य)
आज आत्मविश्वास आपका सबसे बड़ा हथियार रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में नेतृत्व की भूमिका मिल सकती है। व्यापार में नए निर्णय लाभ देंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छा दिन।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी, मंच से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, उच्च अधिकारियों से संपर्क बनेगा।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर, दिखावे से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को अर्घ्य देना लाभकारी।
मूलांक 2 (चंद्र)
भावनाएं आज मजबूत रहेंगी, लेकिन संतुलन जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। साझेदारी में सावधानी रखें।
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा, लेकिन ध्यान भटक सकता है।
कला/संगीत: लेखन, गायन से जुड़े लोगों को सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: जनसंपर्क से लाभ।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: मां दुर्गा या चंद्र देव।
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मूलांक 3 (गुरु)
आज ज्ञान और विस्तार का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन या नई जिम्मेदारी के संकेत।
शिक्षा: छात्रों के लिए अत्यंत शुभ।
कला/संगीत: शिक्षण, प्रशिक्षण से जुड़े लोग सफल रहेंगे।
राजनीति/प्रशासन: सलाहकार भूमिका में प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: संतुलित और सुरक्षित।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: भगवान विष्णु या बृहस्पति।
मूलांक 4 (राहु)
आज अनुशासन जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: काम का दबाव रहेगा, लेकिन योजना से सफलता मिलेगी।
शिक्षा: तकनीकी छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: नई सोच उभरेगी।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य से काम लें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: भगवान गणेश।
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मूलांक 5 (बुध)
आज संचार और संपर्क का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया, व्यापार में लाभ।
शिक्षा: पढ़ाई में तेजी आएगी।
कला/संगीत: मंचीय कला में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: भाषण और संवाद से लाभ।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु।
मूलांक 6 (शुक्र)
आज प्रेम और सौंदर्य का प्रभाव रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, होटल, डिजाइन से जुड़े लोगों के लिए अच्छा दिन।
शिक्षा: कला के छात्र सफल रहेंगे।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: छवि मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: सोच-समझकर निर्णय लें।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: मां लक्ष्मी।
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मूलांक 7 (केतु)
आज आत्मचिंतन का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: अकेले काम करना बेहतर रहेगा।
शिक्षा: रिसर्च और अध्ययन में लाभ।
कला/संगीत: आध्यात्मिक रचनाएं बनेंगी।
राजनीति/प्रशासन: पर्दे के पीछे काम सफल।
आर्थिक स्थिति: जोखिम न लें।
शुभ रंग: स्लेटी
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान शिव।
मूलांक 8 (शनि)
आज मेहनत रंग लाएगी।
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, लेकिन सफलता मिलेगी।
शिक्षा: धैर्य जरूरी।
कला/संगीत: संघर्ष के बाद पहचान।
राजनीति/प्रशासन: अधिकार बढ़ेंगे।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा: शनिदेव।
मूलांक 9 (मंगल)
आज ऊर्जा और साहस भरपूर रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नेतृत्व के अवसर।
शिक्षा: खेल और रक्षा क्षेत्र के छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: जोशीली प्रस्तुति।
राजनीति/प्रशासन: प्रभावशाली दिन।
आर्थिक स्थिति: आय बनी रहेगी।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी।
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डिस्क्लेमर: यह अंक राशिफल सामान्य गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करते। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
पंचाग अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य देंगे स्थायी सफलता
पंचांग 12 जनवरी 2026 | आज का संपूर्ण हिन्दू पंचांग (सोमवार)
दिनांक: 12/01/2026 (Monday)
ईस्वी: January 12, 2026
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📜 आज का पंचांग – 12 जनवरी 2026
तिथि
माघ कृष्ण पक्ष नवमी – दोपहर 12:43 PM तक
उपरांत दशमी – 13 जनवरी 03:18 PM तक
नक्षत्र
स्वाति – रात 09:05 PM तक
उपरांत विशाखा
योग
धृति योग – शाम 06:11 PM तक
उपरांत शूल योग
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करण
गर – 12:43 PM तक
वणिज – 02:00 AM तक
उपरांत विष्टि (भद्रा)
वार
सोमवार
🕉️ संवत एवं कालगणना
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
अयन: दक्षिणायन (द्रिक अनुसार) / उत्तरायण (वैदिक)
वैदिक ऋतु: हेमंत
द्रिक ऋतु: शिशिर
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:55 PM
चन्द्रोदय: 01:35 AM
चन्द्रास्त: 12:50 PM
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🌌 ग्रह एवं राशिफल स्थिति
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: तुला (पूरा दिन व रात)
⏰ अशुभ काल
राहु काल: 08:34 AM – 09:54 AM
यमगण्ड: 11:14 AM – 12:35 PM
कुलिक काल: 01:55 PM – 03:15 PM
दुर्मुहूर्त:
12:56 PM – 01:39 PM
03:04 PM – 03:47 PM
वर्ज्यम्: 03:23 AM – 05:11 AM
✨ शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:26 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:13 PM – 12:56 PM
अमृत काल: 11:13 AM – 01:00 PM
🔔 विशेष योग व तथ्य
आनन्दादि योग: छत्र योग (09:05 PM तक)
सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं है
त्योहार/जयंती: स्वामी विवेकानंद जयंती
🧭 यात्रा विचार (दिशा शूल)
सोमवार को यात्रा वर्जित दिशा: पूर्व दिशा
यदि यात्रा आवश्यक हो:
दही या दूध का सेवन करके यात्रा करें
लाभकारी दिशा:
उत्तर एवं पश्चिम दिशा की यात्रा शुभ फलदायक
🌙 चंद्रबल (07:14 AM, 13/01/26 तक)
शुभ राशियाँ:
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
⭐ ताराबल
09:05 PM तक शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
उपरांत (रात्रि में):
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा, रेवती
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✨ आज के पंचांग से जुड़े तीन विशेष विचार
🔹 1. विवेकानंद जयंती और आत्मबल का संदेश
आज का दिन आत्मचिंतन, राष्ट्रबोध और युवा चेतना के प्रतीक स्वामी विवेकानंद को समर्पित है। यह दिन संकल्प और सेवा के लिए अत्यंत शुभ है।
🔹 2. तुला चंद्रमा और संबंधों का संतुलन
चंद्रमा तुला राशि में रहने से आज संवाद, समझौता और सामाजिक कार्यों में संतुलन बना रहेगा।
🔹 3. शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य देंगे स्थायी सफलता
अभिजीत और अमृत काल में किए गए कार्य दीर्घकालीन लाभ प्रदान करते हैं।
नोट:इस पंचांग में दी गई जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा उत्तरदायी नहीं है। किसी भी विशेष कार्य, व्रत, पूजा या यात्रा से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
राजनीतिक शक्ति नहीं, आध्यात्मिक नेतृत्व : विवेकानंद की ‘विश्वगुरु भारत’ की अवधारणा
स्वामी विवेकानंद का ‘विश्वगुरु भारत’ : खंडित विश्व के लिए वेदांत की प्रासंगिकता
(जहाँ से विश्व को दिशा मिले : विवेकानंद और विश्वगुरु भारत की संकल्पना)
— डॉ. सत्यवान सौरभ
इक्कीसवीं सदी का विश्व गहरे अंतर्विरोधों से घिरा हुआ है। एक ओर अभूतपूर्व वैज्ञानिक-तकनीकी प्रगति, वैश्वीकरण और संचार क्रांति है, तो दूसरी ओर युद्ध, जलवायु संकट, असमानता, नैतिक पतन और पहचान आधारित संघर्ष। यह खंडित और असंतुलित वैश्विक परिदृश्य किसी ऐसे वैचारिक मार्गदर्शन की मांग करता है, जो केवल भौतिक समाधान न दे, बल्कि मानवता को नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आधार भी प्रदान करे। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद का भारत को ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखने का दृष्टिकोण असाधारण रूप से प्रासंगिक प्रतीत होता है।
स्वामी विवेकानंद के लिए ‘विश्वगुरु’ होने का अर्थ किसी राजनीतिक या सैन्य प्रभुत्व से नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व, नैतिक मार्गदर्शन और सार्वभौमिक मानव मूल्यों के प्रसार से था। उनका विश्वास था कि भारत की वेदांत परंपरा—जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, सर्वधर्म समभाव और आत्मिक एकता पर आधारित है—विश्व की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकती है। आज जब विश्व विचारधाराओं, राष्ट्रवादों और आर्थिक प्रतिस्पर्धाओं में बंटा हुआ है, विवेकानंद की यह दृष्टि पहले से अधिक प्रासंगिक हो उठती है।
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वेदांत का केंद्रीय सिद्धांत है—अद्वैत या एकत्व। यह मान्यता कि समस्त सृष्टि एक ही चेतना की अभिव्यक्ति है, आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं—युद्ध, हिंसा और पर्यावरण विनाश—की जड़ पर प्रहार करती है। यदि मानव स्वयं को प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग माने, तो पर्यावरण शोषण की प्रवृत्ति स्वतः ही नियंत्रित होगी। आज का जलवायु संकट इसी अलगाववादी दृष्टि का परिणाम है, जिसमें प्रकृति को उपभोग की वस्तु माना गया। वेदांत का ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ का विचार सतत विकास और पर्यावरणीय नैतिकता के लिए सुदृढ़ दार्शनिक आधार प्रदान करता है।
स्वामी विवेकानंद ने धर्म को कर्म और समाज से जोड़कर देखा। उनके अनुसार सच्चा धर्म वह है जो मनुष्य को दुर्बल नहीं, बल्कि सशक्त बनाए। आज वैश्विक समाज जिस नैतिक संकट से गुजर रहा है—भ्रष्टाचार, नेतृत्व की विश्वसनीयता में गिरावट, उपभोक्तावाद—उसका समाधान इसी कर्मयोगी वेदांत में निहित है। कर्मयोग का सिद्धांत, जो निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यबोध पर आधारित है, आधुनिक शासन, राजनीति और कॉर्पोरेट नेतृत्व को नैतिक दिशा दे सकता है। जब नेतृत्व केवल लाभ और सत्ता के बजाय सेवा और उत्तरदायित्व से संचालित होगा, तभी वैश्विक विश्वास बहाल हो सकेगा।
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विवेकानंद का वेदांत संकीर्ण परंपरावाद नहीं था। वे आधुनिक विज्ञान, तर्क और शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने पश्चिमी विज्ञान और पूर्वी अध्यात्म के समन्वय की बात की। आज, जब तकनीक तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसके नैतिक परिणामों पर पर्याप्त विमर्श नहीं हो रहा, यह समन्वय अत्यंत आवश्यक हो जाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में वेदांतिक नैतिकता मानव-केंद्रित विकास सुनिश्चित कर सकती है, ताकि प्रगति मनुष्य को साधन न बनाकर उसका कल्याण करे।
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वैश्विक असमानता आज की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। आर्थिक विकास के बावजूद संसाधनों का असमान वितरण, विकसित और विकासशील देशों के बीच खाई को और गहरा कर रहा है। वेदांत का ‘अपरिग्रह’ और ‘लोकसंग्रह’ का विचार ऐसी आर्थिक व्यवस्था की ओर संकेत करता है, जिसमें विकास समावेशी हो और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विवेकानंद ने गरीबों और वंचितों की सेवा को ईश्वर की सेवा माना। यह दृष्टि कल्याणकारी राज्य, सामाजिक न्याय और वैश्विक उत्तरदायित्व की अवधारणाओं को नैतिक आधार प्रदान करती है।
सांस्कृतिक स्तर पर, आज का विश्व पहचान की राजनीति और सांस्कृतिक टकरावों से जूझ रहा है। धर्म, नस्ल और राष्ट्र के नाम पर बढ़ती असहिष्णुता ने वैश्विक शांति को खतरे में डाल दिया है। विवेकानंद का सर्वधर्म समभाव और सांस्कृतिक बहुलता का संदेश ऐसे समय में अत्यंत प्रासंगिक है। वेदांत किसी एक मत का प्रचार नहीं करता, बल्कि सत्य के विविध मार्गों को स्वीकार करता है। यह दृष्टि अंतर-सांस्कृतिक संवाद, सहिष्णुता और शांति स्थापना का मजबूत आधार बन सकती है।
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युवाओं को लेकर स्वामी विवेकानंद की दृष्टि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र और विश्व के भविष्य के रूप में देखा। आज की वैश्विक समस्याओं—जलवायु परिवर्तन, बेरोजगारी, हिंसक उग्रवाद—का समाधान तभी संभव है, जब युवा शक्ति नैतिक मूल्यों, नवाचार और वैश्विक उत्तरदायित्व के साथ आगे आए। वेदांत युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और उद्देश्य प्रदान करता है, जिससे वे केवल कुशल पेशेवर नहीं, बल्कि संवेदनशील वैश्विक नागरिक बन सकें।
भारत की भूमिका यहाँ विशेष महत्व रखती है। भारत यदि स्वयं अपनी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधने में सफल होता है, तो वह विश्व के लिए एक मॉडल प्रस्तुत कर सकता है। योग, आयुर्वेद, ध्यान और अहिंसा जैसे भारतीय विचार आज वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं। ये केवल सांस्कृतिक निर्यात नहीं, बल्कि मानवता के लिए वैकल्पिक जीवन-दृष्टि हैं। भारत का ‘सॉफ्ट पावर’ इसी वेदांतिक विरासत में निहित है, जो संवाद, सहयोग और सहअस्तित्व पर बल देती है।
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हालांकि, विवेकानंद के ‘विश्वगुरु’ दृष्टिकोण की आलोचनात्मक समीक्षा भी आवश्यक है। इसे आत्ममुग्धता या सांस्कृतिक श्रेष्ठतावाद में बदलने का खतरा सदैव रहता है। विवेकानंद का भारत-बोध विनम्रता, आत्मालोचन और सेवा पर आधारित था, न कि प्रभुत्व पर। अतः भारत को पहले अपने भीतर सामाजिक विषमताओं, लैंगिक असमानताओं और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चुनौतियों का समाधान करना होगा। बिना आंतरिक सुदृढ़ता के वैश्विक नेतृत्व का दावा खोखला सिद्ध हो सकता है।
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अंततः, स्वामी विवेकानंद का ‘विश्वगुरु भारत’ कोई अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। वेदांत के सिद्धांत—एकत्व, करुणा, निस्वार्थ कर्म और संतुलन—आज के खंडित विश्व को जोड़ने की क्षमता रखते हैं। परंपरा और आधुनिकता का यह समन्वय ही भारत को एक नैतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक मार्गदर्शक बना सकता है। यदि विश्व को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानवीय दिशा चाहिए, तो विवेकानंद का वेदांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना एक सदी पूर्व था।
- डॉo सत्यवान सौरभ,
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी
कर्म
कर्तव्य करिए, फल की इच्छा नहीं
आस्था और विश्वास की ताक़त से
टूटते हुये सम्बंध बार बार जुड़ जाते हैं,
लोगों की उजड़ी अंधियारी दुनिया में
इनके द्वारा हरियाली प्रकाश फैलाते हैं।
आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम,
ईमानदारी के साथ साथ आस्था,
विश्वास और उच्च मानवीय मूल्य ही
किसी को भी जीवन में महान बनाते हैं।
धैर्य और सत्य वह सच्चे पथ हैं जिन
पर चलकर हम नहीं कभी पछताएँगे,
ऐसे पथ पर चलते रहिये, न अपना
शीश और न नज़रें कभी झुकायेंगे।
मत्स्य पियासी जब जल में हो तो
कितनी अनहोनी अद्भुत है यह बात,
हम सब अंश ईश के हैं पर फिर भी
खोज रहे हैं जीवन से मोक्ष की चाहत।
ईश्वर ने हमें निरंतर कर्तव्य करते
रहने के लिए ही इंसान बनाया है,
फल की इच्छा बिना कर्तव्य करते
रहिये, गीता में भी स्पष्ट बताया है।
आदित्य बिना किसी मोह और
माया के अपने कर्तव्य करते रहिए,
कर्तव्य धर्म है, कर्तव्य ही पूजा है,
कर्तव्य करिये, नेतागीरी कम करिए।
- डॉ. कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
यूपीनेडा की पहल से सोलर ऊर्जा की ओर बढ़ रहा संत कबीर नगर
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत संत कबीर नगर में चला ‘हर घर सोलर अभियान’, लोगों को मिली मुफ्त बिजली की जानकारी
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।
नवीन एवं नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत संत कबीर नगर जिले में हर घर सोलर अभियान को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एकलव्य एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, मगहर के तत्वावधान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करना और उन्हें यह बताना था कि कैसे वे अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाकर बिजली बिल से राहत पा सकते हैं। जागरूकता सत्र में बताया गया कि यह योजना यूपीनेडा (UPNEDA) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत पात्र लाभार्थी जीरो इन्वेस्टमेंट में सोलर सिस्टम स्थापित करा सकते हैं और केंद्र सरकार की सब्सिडी का सीधा लाभ उठा सकते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को यह जानकारी दी गई कि सोलर ऊर्जा न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी अहम भूमिका निभाती है। मुख्य ट्रस्टी गौरव निषाद ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हर घर सोलर अभियान से जुड़कर न केवल अपने बिजली खर्च को कम करें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करें।
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इस अवसर पर संत कबीर नगर के अधिकृत वेंडर प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। वेंडर टीम की ओर से रजनीश गोस्वामी, यतेन्द्र, रितेश, अमरजीत, महेंद्र, प्रदीप, सैफ सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने सोलर ऊर्जा को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए योजना की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
पत्रकारों के अधिकारों को लेकर मजबूत होगा संघ: बृजेंद्र पाण्डेय
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत की महाराजगंज जनपद इकाई के गठन को लेकर रविवार को शिकारपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में संगठन के जिला एवं तहसील स्तर की इकाइयों का सर्वसम्मति से गठन किया गया, जिससे जनपद में पत्रकार हितों को लेकर संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक में बृजेंद्र कुमार पांडेय को राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं जितेंद्र सिंह एवं राजाराम गुप्ता को उपाध्यक्ष तथा विपिन सिंह को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। संगठन को मार्गदर्शन देने के लिए मार्कण्डेय द्विवेदी को संरक्षक बनाया गया। इसके अलावा इंद्र कुमार शुक्ल को जिला संगठन मंत्री, विकास यादव को कोषाध्यक्ष और रंजीत मोदनवाल को संयुक्त मंत्री नियुक्त किया गया।
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तहसील स्तर पर भी संगठन का विस्तार किया गया। नौतनवां तहसील अध्यक्ष के रूप में शिवरतन, सदर तहसील अध्यक्ष राकेश जायसवाल, सदर तहसील महामंत्री कृष्णानंद द्विवेदी तथा निचलौल तहसील अध्यक्ष के पद पर मनोज तिवारी को सर्वसम्मति से चुना गया।
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष बृजेंद्र कुमार पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान को मजबूत करना है। उन्होंने सभी तहसील अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे जनपद महाराजगंज में व्यापक सदस्यता अभियान चलाएं, ताकि अधिक से अधिक पत्रकार राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत से जुड़ सकें और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
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बैठक में गोरखपुर मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुज कुमार तिवारी, मंडल महामंत्री कैलाश सिंह, श्याम सुंदर गोंड, रविनंदन गुप्ता, अनीश विश्वकर्मा एवं शमशाद सहित कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष पलटू मिश्रा ने की।
विकसित भारत युवा संसद 2026 में एनएसएस के 10 स्वयंसेवकों का चयन में गोरखपुर-कुशीनगर का होगा प्रतिनिधित्व
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विकसित भारत युवा संसद 2026 के अंतर्गत “आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख” विषय पर महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में आयोजित जनपद स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के 10 स्वयंसेवकों का चयन किया गया।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े आठ स्वयंसेवक मानसी सिंह, रघुवीर गुप्ता, मोहन गुप्ता, आशीष कुमार, जागृति तिवारी, महिमा मौर्य, शशिकांत तिवारी एवं ओंकार तिवारी का चयन किया गया है। चयनित प्रतिभागी आगामी माह में उत्तर प्रदेश विधानसभा में आयोजित विकसित भारत युवा संवाद प्रतियोगिता में जनपद गोरखपुर का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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इसके अतिरिक्त दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के दो स्वयंसेवक कृष्णानंद जायसवाल एवं नवनीत पाण्डेय का भी विकसित भारत युवा संसद 2026 के लिए चयन हुआ है। ये दोनों प्रतिभागी अपने गृह जनपद कुशीनगर से राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक समरदीप सक्सेना तथा युवा अधिकारी राजेश तिवारी बतौर अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पश्चात दोनों अधिकारियों ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. सत्यपाल सिंह से बैठक कर चयन की जानकारी साझा की। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभावी संचालन, युवाओं की भूमिका और प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
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उल्लेखनीय है कि विकसित भारत युवा संसद प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई। प्रथम चरण महाविद्यालय स्तर पर संपन्न हुआ, जबकि द्वितीय चरण जनपद स्तर पर महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में आयोजित किया गया। वहीं कुशीनगर जनपद के लिए यह प्रतियोगिता बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर में संपन्न हुई।
भारत की 2026 की धमाकेदार शुरुआत: कोहली के 93 रन, गिल का अर्धशतक, न्यूजीलैंड 4 विकेट से पराजित
खेल भारतीय क्रिकेट टीम ने साल 2026 की शुरुआत जीत के साथ की है। वडोदरा में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से शिकस्त दी। 301 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 49 ओवर में 6 विकेट खोकर मुकाबला अपने नाम किया।
न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 300 रन बनाए थे। जवाब में भारतीय टीम की शुरुआत लड़खड़ाती रही, लेकिन विराट कोहली और शुभमन गिल की शानदार पारियों ने मैच का रुख पलट दिया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाई शुरुआत
301 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को पहला झटका जल्दी लगा। कप्तान रोहित शर्मा 29 गेंदों में 26 रन बनाकर पवेलियन लौट गए, जब टीम का स्कोर सिर्फ 39 रन था। इसके बाद शुभमन गिल ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए पारी को संभाला।
गिल ने 71 गेंदों में 56 रनों की सधी हुई पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। एक समय भारत ने 2 विकेट के नुकसान पर 234 रन बना लिए थे और जीत आसान नजर आ रही थी।
न्यूजीलैंड का जोरदार वापसी प्रयास
234 रन पर विराट कोहली के आउट होते ही मुकाबले में रोमांच बढ़ गया। केएल राहुल शुरुआत में रन बनाने के लिए संघर्ष करते दिखे, जिससे जरूरी रन रेट बढ़ता गया। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने लगातार विकेट झटककर दबाव बना दिया।
हर्षित राणा की अहम पारी, राहुल ने दिलाई जीत
ऐसे मुश्किल समय में हर्षित राणा ने 23 गेंदों में 29 रन बनाकर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। उनकी इस तेज पारी से केएल राहुल पर से दबाव कम हुआ।
अंत में केएल राहुल ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 2 चौके और एक छक्का जड़कर टीम इंडिया को यादगार जीत दिलाई।
विराट कोहली शतक से चूके, लेकिन रचा इतिहास
विराट कोहली ने एक बार फिर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय देते हुए 91 गेंदों में 93 रनों की बेहतरीन पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 8 चौके और एक छक्का लगाया। यह उनके वनडे करियर की 77वीं अर्धशतकीय पारी रही।
इस मैच में कोहली ने कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम किए:
• इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज 28,000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बने
• यह कारनामा उन्होंने 624वीं पारी में किया
• सचिन तेंदुलकर (644 पारियां) का रिकॉर्ड तोड़ा
• इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में कुमार संगाकारा को पछाड़कर दूसरे स्थान पर पहुंचे
ठंड से राहत के लिए कोड़रा ठाकुर गांव में 500 परिवारों को बांटे गए कंबल-शालफोटो समाचार
भाजपा नेता अरविंद त्रिपाठी की पहल, ग्रामवासियों ने सराहा सामाजिक सहयोग का प्रयास
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। तहसील क्षेत्र के कोड़रा ठाकुर गांव में रविवार को भीषण ठंड से राहत दिलाने के उद्देश्य से कंबल और शाल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी दुर्गेश यादव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं गांव के निवासी अरविंद त्रिपाठी मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामवासियों के बीच लगभग 500 परिवारों को कंबल व शाल वितरित किए गए।
कंबल वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार के सामाजिक कार्यों से समाज में सहयोग और सेवा की भावना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि भीषण ठंड में जरूरतमंदों की सेवा करना उन्हें अपने पितृ और पूर्वजों के संस्कारों से मिला दायित्व लगता है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से आगे आकर ऐसे कार्यों में सहभागिता करने की अपील की। कार्यक्रम के संयोजक दुर्गेश यादव ने बताया कि ठंड को देखते हुए सरकार से इतर स्वयं की व्यवस्था से गांव के लगभग हर घर तक कंबल और शाल पहुंचाने का निर्णय लिया गया, ताकि कोई भी परिवार ठंड से परेशान न रहे। उन्होंने कहा कि आगे भी इस अभियान को निरंतर जारी रखने का प्रयास रहेगा।
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इस अवसर पर पूर्व प्रधान शिवकुमार यादव, विनोद तिवारी, गोपाल पांडेय, बृजमोहन पांडेय, मनोज पांडेय, प्रहलाद तिवारी, बैजनाथ तिवारी, प्रेमसागर पांडेय, कन्हैयालाल गौड़, हरेंद्र राजभर, बालकेश राजभर, मनीष यादव, अवधेश पांडेय, संगम पांडेय, दिनेश यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
मजार ध्वस्तीकरण पर सियासी घमासान, प्रशासन पर चयनात्मक कार्रवाई और दबाव के आरोप
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर रोड ओवरब्रिज से सटी मजार पर की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुकी है। समान शिक्षा आंदोलन, उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक चतुरानन ओझा और ईस्टर्न साइंटिस्ट जर्नल के संपादक अचल पुलस्तेय ने इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन और सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “चयनात्मक, पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई” करार दिया है।
अपने संयुक्त बयान में नेताओं ने कहा कि जिस तेजी और कठोरता के साथ मजार को ध्वस्त किया गया, वह सामान्य अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं लगती। उनका आरोप है कि यह कदम एक सुनियोजित राजनीतिक एजेंडे के तहत उठाया गया, जिसमें प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर समाज में सांप्रदायिक विमर्श खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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चतुरानन ओझा ने कहा कि सूफी परंपरा से जुड़ी मजारें केवल किसी एक समुदाय की आस्था का केंद्र नहीं होतीं, बल्कि यह साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होती हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। ऐसे स्थल को बिना सामाजिक संवाद और संवेदनशीलता के ध्वस्त करना प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विरोध करने वालों ने यह भी आरोप लगाया कि मजार जिस क्षेत्र में स्थित थी, वह लंबे समय से विकास और प्रशासनिक ध्यान से वंचित रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था के कारण ही उस स्थान को पहचान मिली थी। इसके विपरीत, शहर के कई प्रमुख इलाकों और चौराहों पर सड़क पर बने धार्मिक ढांचे यातायात में बाधा बने हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसे उन्होंने स्पष्ट रूप से “चयनात्मक कार्रवाई” बताया।
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बयान में यह भी कहा गया कि जिन मुद्दों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को काम करना चाहिए—जैसे स्कूलों की बदहाली, अस्पतालों की दुर्दशा और रोजगार की कमी—उन पर ध्यान देने के बजाय धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर राजनीतिक संदेश दिया जा रहा है। इसे जनता के मूल सवालों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया गया।
समान शिक्षा आंदोलन ने मांग की है कि मजार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी व संवैधानिक समीक्षा कराई जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाई जारी रही, तो इसे केवल एक ढांचे का नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला माना जाएगा।
भीषण ठंड के चलते कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में अवकाश
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अत्यधिक ठंड और शीतलहर को देखते हुए छात्रहित में बड़ा निर्णय लिया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी वर्तमान मौसम पूर्वानुमान के आधार पर जिलाधिकारी के निर्देशानुसार बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित समस्त मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, राजकीय एवं अन्य समस्त बोर्ड से संबद्ध कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में 12 जनवरी 2026 से 13 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित विद्यालय उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों एवं विद्यालयों को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दी गई है।
प्रशासन का यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि भीषण ठंड के कारण किसी प्रकार की असुविधा या स्वास्थ्य जोखिम से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
