Monday, June 22, 2026
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New Tata Punch Facelift लॉन्च: बोल्ड डिजाइन, टर्बो इंजन और 5-स्टार सेफ्टी के साथ 5.59 लाख से शुरू कीमत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। Tata Motors ने भारतीय बाजार में New Tata Punch Facelift को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह कॉम्पैक्ट SUV अब पहले से ज्यादा बोल्ड डिजाइन, एडवांस टेक्नोलॉजी और सेगमेंट-बेस्ट सेफ्टी फीचर्स के साथ आती है। कंपनी ने इसे खासतौर पर युवाओं और फैमिली कार खरीदारों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।

5.59 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत के साथ Tata Punch Facelift अपने सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। अगर आप नई SUV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जानिए इसके 5 खास फीचर्स।

  1. बोल्ड और ज्यादा स्टाइलिश डिजाइन

New Tata Punch Facelift का एक्सटीरियर पहले के मुकाबले ज्यादा मस्कुलर और दमदार हो गया है। इसमें फुल-साइज SUV से इंस्पायर्ड अपराइट फ्रंट ग्रिल, नया बुल-गार्ड बंपर और चौड़ी बॉडी क्लैडिंग दी गई है।
कार की लंबाई अब 49mm ज्यादा हो गई है, जिससे इसका रोड प्रेजेंस और बेहतर लगता है। इसमें PowerSight LED हेडलैंप्स, Infinity Glow LED टेललैंप्स, 16-इंच अलॉय व्हील्स और नया स्पॉइलर मिलता है, जो इसे प्रीमियम लुक देता है।

  1. सेगमेंट-बेस्ट प्रीमियम केबिन

Punch Facelift का केबिन अब ज्यादा लग्जरी और टेक-लोडेड है। इसमें 10.25-इंच HD टचस्क्रीन, 7-इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, एंबिएंट लाइटिंग, वायरलेस चार्जर और रियर AC वेंट्स दिए गए हैं।
90 डिग्री डोर ओपनिंग और फ्लैट रियर फ्लोर इसे फैमिली के लिए ज्यादा कंफर्टेबल बनाते हैं। AMT वेरिएंट में पैडल शिफ्टर्स और ऑटो-डिमिंग IRVM भी मिलता है।

  1. पहली बार Turbo Petrol और CNG AMT

नई Tata Punch Facelift में पहली बार 1.2-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 120 PS की पावर और 170 Nm टॉर्क जनरेट करता है।
इसके अलावा यह भारत की पहली CNG AMT कॉम्पैक्ट SUV है, जो स्मूद और किफायती ड्राइविंग एक्सपीरियंस देती है। पेट्रोल, टर्बो और CNG जैसे मल्टीपल इंजन ऑप्शन्स इसे और खास बनाते हैं।

  1. दमदार सेफ्टी फीचर्स

सेफ्टी के मामले में Tata Punch Facelift सेगमेंट में सबसे आगे है। इसमें स्टैंडर्ड 6 एयरबैग, ESP, 360-डिग्री कैमरा, TPMS और SOS कॉलिंग फीचर दिया गया है।
इस SUV को Bharat NCAP से 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग भी मिल चुकी है।

  1. बेहतर स्पेस और प्रैक्टिकलिटी

नई Punch Facelift में 366 लीटर का बूट स्पेस दिया गया है, जबकि CNG वेरिएंट में यह 210 लीटर है। यह SUV रोजमर्रा के इस्तेमाल और फैमिली ट्रिप्स के लिए एक परफेक्ट ऑप्शन बन जाती है।

विकास के दावों के बीच वार्ड छह में बदहाल ज़िंदगी

दर्जनभर भूमिहीन परिवार आज भी खुले आसमान तले

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)सलेमपुर नगर में विकास और गरीब कल्याण को लेकर किए जा रहे दावों की पोल वार्ड नंबर छह की जमीनी हकीकत खोलती नजर आ रही है। रेलवे माल गोदाम के आसपास वर्षों से दर्जनभर से अधिक भूमिहीन परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। न इनके पास अपनी जमीन है और न ही रहने के लिए कोई पक्का आशियाना। प्लास्टिक की चादरों, तिरपाल और बांस-बल्ली से बनी झोपड़ियों में ये परिवार बरसात, ठंड और भीषण गर्मी झेल रहे हैं।करीब पचास लोगों की आबादी वाली इस बस्ती में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। दिहाड़ी मजदूरी ही इन परिवारों की आजीविका का एकमात्र सहारा है। काम मिला तो चूल्हा जलता है, नहीं मिला तो भूखे पेट रात गुजारनी पड़ती है। बीमारी की स्थिति में इलाज कराना इनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कुछ परिवारों के पास ही आयुष्मान कार्ड है, जबकि अधिकांश लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।खुले आसमान के नीचे पल रहे बच्चों का भविष्य भी चिंता का विषय बना हुआ है।

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संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बच्चों को स्कूल जाने की बजाय मजदूरी करनी पड़ती है। अभिभावकों का कहना है कि जब दो वक्त की रोटी जुटाना ही मुश्किल हो, तो बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना बेहद कठिन हो जाता है।बस्ती में रहने वाले शिव सागर जयसवाल का आरोप है कि क्षेत्र के स्थायी मतदाता होने के बावजूद उन्हें आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। काला देव तिवारी का कहना है कि चुनाव के समय ये परिवार केवल वोट बैंक बनकर रह जाते हैं।वहीं विजयंती देवी और दुर्विजय तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वे कराकर सभी भूमिहीन परिवारों को आवासीय पट्टा दिया जाए और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने बताया कि लेखपाल को मौके पर भेजकर कंबल व अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं तथा पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय की जमीन पर घमासान, पैमाइश के दौरान ग्रामीणों ने जताया विरोध

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रस्तावित मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण को लेकर सलेमपुर विकास क्षेत्र के ग्राम डुमवलिया स्थित मौजा किसन महूअवा में विवाद और गहरा गया है। विद्यालय निर्माण के लिए विभाग द्वारा आराजी संख्या 119/242 को चिन्हित किया गया है, जो राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज बताई जा रही है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि इसी भूमि के अंतर्गत कई आवासीय मकान वर्षों से बने हुए हैं। इन मकानों में रह रहे लोगों का दावा है कि उनके पास भूमि और मकान से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा भूमि को विद्यालय निर्माण के लिए चिन्हित किया जाना उनके अधिकारों का हनन है।
मंगलवार को नायब तहसीलदार गोपाल जी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम पैमाइश और सीमांकन के लिए गांव पहुंची। करीब एक घंटे तक कार्य सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन इसके बाद गांव की दो महिलाओं ने आपत्ति जताते हुए पैमाइश कार्य रुकवा दिया। इस दौरान राजस्व कर्मियों और ग्रामीणों के बीच नोंकझोंक हो गई, जिससे मौके पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
विवाद के बीच सेवा निवृत्त सैनिक प्रकाश यादव ने भी अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उनका मकान लगभग 45 वर्षों से उक्त भूमि पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित कागजात और न्यायालय की डिग्री भी है, इसके बावजूद भूमि को सरकारी बताकर विद्यालय के लिए उपयोग में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की पैमाइश या निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि सरकारी है और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
मौके पर मौजूद सीएनडीएस जल निगम गोरखपुर के अभियंता वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि उनकी संस्था को केवल विद्यालय निर्माण का कार्य सौंपा गया है, जबकि भूमि से जुड़ा विवाद संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।

खेजूरी में विद्यालय के R.O. प्लांट का तार काटकर अराजकतत्वों ने बढ़ाया खतरा, पुलिस जांच में जुटी

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)खेजूरी क्षेत्र के करम्मर स्थित श्री भगवती बाल भारती विद्या निकेतन विद्यालय परिसर में लगे R.O. प्लांट के साथ छेड़छाड़ की गई है। बीती रात अराजकतत्वों द्वारा प्लांट में लगे समासेबल का तार काट दिया गया तथा बोईसे तार को निकालकर नंगा रूप में वहीं छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, नंगा विद्युत तार को R.O. प्लांट की लोहे की जाली में सटा दिया गया था, जिससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई थी।घटना का खुलासा तब हुआ जब 13 जनवरी को सुबह लगभग 10 बजे विद्यालय खुला। विद्यालय के कर्मचारियों ने प्लांट के पास तार कटे हुए और नंगा तार जाली में चिपका हुआ देखा। मामले की गंभीरता समझते हुए विद्यालय प्रबंधन द्वारा तत्काल 112 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और मौके का मुआयना कर आवश्यक जानकारी ली।विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि R.O. प्लांट सरकार द्वारा लगाए जाने के बाद से विद्यालय में बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध रहता है।

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इस तरह की हरकत न केवल सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने की नीयत से की गई है, बल्कि इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी। विद्यालय के प्रतिनिधि बलिराम सिंह ने थाना अध्यक्ष खेजूरी से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे और ऐसी गतिविधियों पर रोक लग सके।क्षेत्रवासियों ने भी इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की आवश्यकता जताई है।

18 वर्षों की सेवा, फिर भी अस्थायी जीवन! ग्राम रोजगार सेवकों की व्यथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।ग्रामीण भारत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद अपने अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। बीते 18 वर्षों से निरंतर सेवा देने के बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही समय पर मानदेय। इसी गंभीर स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

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संघ के जिला अध्यक्ष/प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के हजारों ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले छह माह या उससे अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक दबाव के बावजूद उनसे लगातार सरकारी योजनाओं का काम बिना अतिरिक्त पारिश्रमिक के कराया जा रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि ग्राम रोजगार सेवकों से मनरेगा के साथ-साथ वीबी जीरामजी योजना सहित अन्य विभागीय कार्य भी लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए न तो अलग मानदेय तय है और न ही बजटीय व्यवस्था। संघ ने मांग की है कि सरकार पृथक वित्तीय प्रावधान करते हुए मानदेय को न्यूनतम 35 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करे और भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध हो।

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संघ का कहना है कि लगभग दो दशक की सेवा के बाद भी ग्राम रोजगार सेवक आज भी अस्थायी कर्मचारी बने हुए हैं। न सेवा सुरक्षा है, न भविष्य की गारंटी। ऐसे में सभी पात्र ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। साथ ही उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप दिवंगत ग्राम रोजगार सेवकों के आश्रितों को उसी पद पर समायोजित करने की मांग भी की गई है।

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पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम रोजगार सेवकों के लिए एचआर पॉलिसी लागू करने सहित कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वर्षों बाद भी वे घोषणाएं फाइलों से बाहर नहीं आ सकीं।
डिजिटल प्रणाली के बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए संघ ने कहा है कि ऑनलाइन उपस्थिति और डिजिटल मास्टर रोल के लिए ग्राम रोजगार सेवकों को निजी मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करना पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता का मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराना आवश्यक है।
अंत में संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश भर में ग्राम रोजगार सेवकों का असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है।

ॐ : एक नाद, जिसमें समाई है सृष्टि की सम्पूर्ण चेतना

जहां ध्वनि मौन में विलीन होकर साधना का परम लक्ष्य बन जाती है

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ‘ॐ’ को केवल एक अक्षर, मंत्र या धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं देखा गया है, बल्कि इसे सम्पूर्ण सृष्टि की मूल चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का आदि नाद माना गया है। वेदों, उपनिषदों, योगसूत्रों और गीता तक में ‘ॐ’ की महत्ता को अत्यंत गूढ़ और व्यापक रूप में स्वीकार किया गया है। यह वही नाद है, जिससे सृष्टि की उत्पत्ति मानी गई और जिसमें अंततः सब कुछ विलीन हो जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से ‘ॐ’ ब्रह्म का प्रतीक है—वह परम सत्य, जो निराकार, निर्विकार और शाश्वत है। साधना की परंपरा में ‘ॐ’ केवल जप का विषय नहीं, बल्कि स्वयं साधना की प्रक्रिया और उसका अंतिम लक्ष्य भी है। यही कारण है कि इसे साधना भी कहा गया है और साध्य भी।

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योग और ध्यान की परंपरा में ‘ॐ’ का उच्चारण मन, प्राण और चेतना को एक ही लय में स्थापित करने का कार्य करता है। जब साधक एकाग्रचित्त होकर ‘ॐ’ का जप करता है, तो उसकी ध्वनि-तरंगें केवल कानों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे शरीर में कंपन उत्पन्न करती हैं। यह कंपन शरीर की प्रत्येक कोशिका को स्पर्श कर मानसिक तनाव, चंचलता और विक्षेप को शांत करता है। परिणामस्वरूप मन स्थिर होता है और चेतना भीतर की ओर प्रवाहित होने लगती है।
आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार ‘ॐ’ के तीन स्वर—अ, उ और म—सृष्टि के तीन मूल सिद्धांतों के प्रतीक हैं। ‘अ’ सृष्टि की उत्पत्ति का द्योतक है,
‘उ’ सृष्टि के पालन और संतुलन का संकेत देता है,
और ‘म’ सृष्टि के लय अर्थात् अंत का प्रतीक माना जाता है। इन तीनों के बाद आने वाला मौन ही ‘ॐ’ की वास्तविक पूर्णता है। यही मौन वह अवस्था है, जहां शब्द समाप्त हो जाते हैं और अनुभूति आरंभ होती है। इसी मौन में साधक आत्मबोध की अनुभूति करता है और अहंकार का विसर्जन होकर आत्मा का ब्रह्म से साक्षात्कार संभव होता है। यही साधना की पराकाष्ठा मानी गई है।

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आज के भौतिकतावादी, भागदौड़ भरे और तनावग्रस्त जीवन में ‘ॐ’ साधना की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा, अवसाद और मानसिक अस्थिरता से जूझते आधुनिक समाज के लिए ‘ॐ’ का जप एक सरल, सहज और प्रभावी आध्यात्मिक उपाय के रूप में सामने आया है। यही कारण है कि योग शिविरों, ध्यान केंद्रों, आश्रमों और आध्यात्मिक आयोजनों में ‘ॐ’ का सामूहिक उच्चारण विशेष महत्व रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से ‘ॐ’ का जप करने से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। क्रोध, ईर्ष्या और असंतोष जैसी प्रवृत्तियां धीरे-धीरे क्षीण होती हैं और उनके स्थान पर करुणा, संयम, धैर्य और विवेक का विकास होता है।

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संत-महात्माओं का यह भी कहना है कि जब साधक बाहरी आडंबरों, दिखावे और भौतिक आकर्षणों से ऊपर उठकर ‘ॐ’ को अपने जीवन का आधार बना लेता है, तब उसके लिए साधना किसी विशेष समय या स्थान की मोहताज नहीं रहती। उसका संपूर्ण जीवन ही साधना बन जाता है। यही जीवन-दृष्टि व्यक्ति को भीतर से समृद्ध करती है और समाज को नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की नई दिशा प्रदान करती है।
निष्कर्षतः यह कहना पूर्णतः समीचीन होगा कि ‘ॐ’ ही साधना का वह परम लक्ष्य है, जहां पहुंचकर साधक को कुछ पाने की लालसा नहीं रहती। वहां न चाह शेष रहती है, न भय—केवल आत्मिक पूर्णता और शांति का अनुभव होता है। यही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का शाश्वत, सार्वकालिक और सार्वभौमिक संदेश है।

सुबह-सुबह सड़कों पर दिखी पुलिस की सक्रियता, देवरिया में चला सघन मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद देवरिया में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार की सुबह पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के स्पष्ट निर्देशन में जिलेभर में Deoria Morning Walker Checking Abhiyan चलाया गया, जिसने सुबह की शांति के बीच पुलिस की सख्ती और सजगता दोनों का संदेश दिया।

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यह विशेष अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों, चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर संचालित किया गया। अभियान की खास बात यह रही कि सभी थाना प्रभारी और थानाध्यक्ष स्वयं सड़कों पर उतरे और मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधे संवाद किया।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से उनकी समस्याएं, सुझाव और स्थानीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कई स्थानों पर छोटे-मोटे विवादों का मौके पर ही समाधान कर पुलिस ने मित्र पुलिसिंग की मिसाल पेश की। इस पहल से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और सहयोग की भावना देखने को मिली।

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Deoria Morning Walker Checking Abhiyan के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की गई। चोरी के वाहनों की पहचान, तीन सवारी, नाबालिग वाहन चालकों, मॉडिफाइड साइलेंसर और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई। इसके साथ ही अवैध असलहा, मादक पदार्थों और आपराधिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई।
पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरे जनपद में 15 प्रमुख स्थानों पर अभियान चलाया गया, जिसमें 242 व्यक्तियों और 135 वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान कई संदिग्धों को चेतावनी दी गई और नियम उल्लंघन करने वालों पर विधिक कार्रवाई भी की गई।
अभियान के बाद स्थानीय नागरिकों और मॉर्निंग वॉकर्स ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की मौजूदगी से अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा का एहसास बढ़ता है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को नियमित रूप से जारी रखा जाएगा, ताकि देवरिया को सुरक्षित, अनुशासित और अपराध-मुक्त बनाया जा सके।

जब गणेश ने पराक्रम को हराया: बुद्धि का शास्त्रोक्त महासंग्राम

“गणेश: बुद्धि का महासंग्राम – जब विघ्नहर्ता ने ब्रह्मांड को सिखाया विवेक का शास्त्र”

🕉️ कथा यात्रा – एपिसोड 9
गणेश: बुद्धि का महासंग्राम
जब भी सृष्टि में अहंकार और शक्ति का संघर्ष चरम पर पहुंचता है, तब केवल बल नहीं — बुद्धि निर्णायक होती है।
शक्ति विनाश कर सकती है, पर बुद्धि सृजन करती है।
इसी शाश्वत सत्य को ब्रह्मांड के सामने स्थापित करने वाले देव हैं — भगवान गणेश।
यह कथा केवल एक देवता की महिमा नहीं, बल्कि मानव चेतना को दिशा देने वाला शास्त्र है।
यह कथा है उस महासंग्राम की, जिसमें न कोई शस्त्र चला, न रक्त बहा — पर पूरा ब्रह्मांड नतमस्तक हो गया।
🌺 गणेश – केवल देव नहीं, शास्त्र का सजीव स्वरूप
ऋग्वेद में कहा गया है —
“गणानां त्वा गणपतिं हवामहे…”
अर्थात् गणों के अधिपति, बुद्धि और विवेक के स्वामी।
गणेश को बालक समझना भूल है।
वह महाबुद्धि, तत्वज्ञान और धर्म-संतुलन के अधिष्ठाता हैं।
जहां शिव संहार हैं,
जहां विष्णु पालन हैं,
वहीं गणेश विवेक हैं।
🔥 महासंग्राम का आरंभ: जब देवता भी भ्रमित हुए
देवताओं के बीच एक समय यह प्रश्न उठा—
“सृष्टि में सर्वोच्च कौन है — शक्ति या बुद्धि?”
इंद्र ने कहा — शक्ति।
कार्तिकेय बोले — पराक्रम।
ब्रह्मा बोले — ज्ञान।
विष्णु बोले — संतुलन।
सभी की दृष्टि शिव पर गई।
महादेव मुस्कुराए और बोले—
“जिसे तुम सब भूल रहे हो, वही उत्तर है।”
तभी कैलाश में गणेश प्रकट हुए।
🧠 बुद्धि बनाम बल: शास्त्रोक्त प्रतियोगिता
शिव ने कहा—
“जो सृष्टि की परिक्रमा कर पहले लौटे, वही श्रेष्ठ।”
कार्तिकेय अपने मयूर पर सवार होकर
तीनों लोकों की यात्रा को निकल पड़े।
गणेश शांत बैठे रहे।
देवताओं ने उपहास किया।
इंद्र बोले— “यह बालक हार जाएगा।”
पर गणेश ने कुछ ऐसा किया
जो वेदों का सार था।
🌍 माता-पिता ही ब्रह्मांड: गणेश का शास्त्र
गणेश ने शिव-पार्वती की परिक्रमा की और कहा—
“मेरे लिए आप ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं।”
यह कोई बाल-चालाकी नहीं,
यह उपनिषदों का सार था—
“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव।”
कार्तिकेय लौटे—
पर विजेता गणेश थे।
⚡ महासंग्राम का चरम: अहंकार का पतन
इंद्र का अहंकार जागा।
उन्होंने गणेश की बुद्धि को चुनौती दी।
इंद्र ने कहा—
“यदि तुम इतने बुद्धिमान हो,
तो बताओ — बिना शस्त्र युद्ध कैसे जीता जाए?”
गणेश ने उत्तर दिया—
“धैर्य से।”
और तभी इंद्र की वज्र शक्ति
स्वयं निष्क्रिय हो गई।
🕉️ गणेश का शास्त्र: तीन सूत्र
गणेश बोले—
जहां अहंकार है, वहां पतन निश्चित है।
जहां बुद्धि है, वहां विजय स्थायी है।
जहां माता-पिता का सम्मान है, वहां देवता निवास करते हैं।
यह सुनकर स्वयं ब्रह्मा ने कहा—
“गणेश साक्षात वेद हैं।”
🌼 समानता और आज का समाज
आज का मानव भी उसी संग्राम में है—
शक्ति बनाम विवेक
तकनीक बनाम संवेदना
अहंकार बनाम धर्म
गणेश की कथा हमें सिखाती है—
तेज दिमाग ही नहीं, शुद्ध मन भी आवश्यक है।
🌟 गणेश की महिमा: विघ्नहर्ता क्यों?
क्योंकि गणेश बाहरी विघ्न नहीं,
अंदर के अहंकार को नष्ट करते हैं।
इसलिए हर शुभ कार्य से पहले
गणेश पूजन अनिवार्य है।
🔔 निष्कर्ष: बुद्धि का महासंग्राम आज भी जारी है
यह कथा समाप्त नहीं होती।
यह हर मनुष्य के भीतर चलती है।
हर बार जब आप धैर्य चुनते हैं,
हर बार जब आप अहंकार त्यागते हैं—
गणेश विजयी होते हैं।

असलहा सटाकर सर्राफा कारोबारी से लाखो के सोने व चांदी के जेवरात की छिनैती

पिडवल मोड़ से दुकान बंद कर कोपागंज घर वापस लौट रहे थे कारोबारी

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) जनपद के कोपागंज थाना क्षेत्र के टड़ियाव खाद गोदाम के पास मंगलवार की देर शाम लगभग 8 बजे के करीब दुकान बंद करके वापस लौट रहे आभूषण कारोबारी से नकाबपोश बदमाशों ने असलहे के बल पर लाखों रुपये के आभूषण और नगदी छीनकर फरार हो गये ।
एसपी एएसपी भारी सख्या में पुलिस फोर्स के साथ मौक़े पर पहुच गये।पुलिस टीम ने बदमाशों की खोजबीन किया लेकिन बदमाशों का कोई सुराग नही लग सका ।घटना के बाबत पीड़ित आभूषण कारोबारी की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ कोपागंज थाने में मुकदमा दज कर लिया गया हैं ।
कोपागंज नगर पंचायत के मोहल्ला चन्दनपूरा निवासी सर्राफा कारोबारी जितेंद्र वर्मा का पिडवल मोड़ के पास आभूषण की दुकान हैं। नित्य की भांति मंगलवार की शाम को दुकान बंद करके अपने साथी कारोबारी के साथ वापस घर लौट रहे थे । इसी दौरान घोसी और कोपागंज थाना सीमा टड़ियाव खाद गोदाम के पास चार की सँख्या में असलहे से लैस बाइक सवार बदमाशों ने आभूषण कारोबारी को ओवरटेक करके रोक दिया ।असलहाधारी बदमाशो ने आभूषण कारोबारी की कनपटी पर असलहा सटाते हुए लाखो रुपये कीमत के सोने और चाँदी के आभूषण छीन ले गए । पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने कहा कि सर्राफा कारोबारी के साथ घटना की जाँच के लिए विशेष टीम का गठन कर दिया गया है बहुत जल्द घटना का पर्दाफाश हो जायेगा।

ॐ : एक नाद, जिसमें समाई है सृष्टि की सम्पूर्ण चेतना

जहां ध्वनि मौन में विलीन होकर साधना का परम लक्ष्य बन जाती है

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ‘ॐ’ को केवल एक अक्षर, मंत्र या धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं देखा गया है, बल्कि इसे सम्पूर्ण सृष्टि की मूल चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का आदि नाद माना गया है। वेदों, उपनिषदों, योगसूत्रों और गीता तक में ‘ॐ’ की महत्ता को अत्यंत गूढ़ और व्यापक रूप में स्वीकार किया गया है। यह वही नाद है, जिससे सृष्टि की उत्पत्ति मानी गई और जिसमें अंततः सब कुछ विलीन हो जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से ‘ॐ’ ब्रह्म का प्रतीक है—वह परम सत्य, जो निराकार, निर्विकार और शाश्वत है। साधना की परंपरा में ‘ॐ’ केवल जप का विषय नहीं, बल्कि स्वयं साधना की प्रक्रिया और उसका अंतिम लक्ष्य भी है। यही कारण है कि इसे साधना भी कहा गया है और साध्य भी।
योग और ध्यान की परंपरा में ‘ॐ’ का उच्चारण मन, प्राण और चेतना को एक ही लय में स्थापित करने का कार्य करता है। जब साधक एकाग्रचित्त होकर ‘ॐ’ का जप करता है, तो उसकी ध्वनि-तरंगें केवल कानों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे शरीर में कंपन उत्पन्न करती हैं। यह कंपन शरीर की प्रत्येक कोशिका को स्पर्श कर मानसिक तनाव, चंचलता और विक्षेप को शांत करता है। परिणामस्वरूप मन स्थिर होता है और चेतना भीतर की ओर प्रवाहित होने लगती है।
आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार ‘ॐ’ के तीन स्वर—अ, उ और म—सृष्टि के तीन मूल सिद्धांतों के प्रतीक हैं। ‘अ’ सृष्टि की उत्पत्ति का द्योतक है,
‘उ’ सृष्टि के पालन और संतुलन का संकेत देता है,
और ‘म’ सृष्टि के लय अर्थात् अंत का प्रतीक माना जाता है। इन तीनों के बाद आने वाला मौन ही ‘ॐ’ की वास्तविक पूर्णता है। यही मौन वह अवस्था है, जहां शब्द समाप्त हो जाते हैं और अनुभूति आरंभ होती है। इसी मौन में साधक आत्मबोध की अनुभूति करता है और अहंकार का विसर्जन होकर आत्मा का ब्रह्म से साक्षात्कार संभव होता है। यही साधना की पराकाष्ठा मानी गई है।
आज के भौतिकतावादी, भागदौड़ भरे और तनावग्रस्त जीवन में ‘ॐ’ साधना की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा, अवसाद और मानसिक अस्थिरता से जूझते आधुनिक समाज के लिए ‘ॐ’ का जप एक सरल, सहज और प्रभावी आध्यात्मिक उपाय के रूप में सामने आया है। यही कारण है कि योग शिविरों, ध्यान केंद्रों, आश्रमों और आध्यात्मिक आयोजनों में ‘ॐ’ का सामूहिक उच्चारण विशेष महत्व रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से ‘ॐ’ का जप करने से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। क्रोध, ईर्ष्या और असंतोष जैसी प्रवृत्तियां धीरे-धीरे क्षीण होती हैं और उनके स्थान पर करुणा, संयम, धैर्य और विवेक का विकास होता है।
संत-महात्माओं का यह भी कहना है कि जब साधक बाहरी आडंबरों, दिखावे और भौतिक आकर्षणों से ऊपर उठकर ‘ॐ’ को अपने जीवन का आधार बना लेता है, तब उसके लिए साधना किसी विशेष समय या स्थान की मोहताज नहीं रहती। उसका संपूर्ण जीवन ही साधना बन जाता है। यही जीवन-दृष्टि व्यक्ति को भीतर से समृद्ध करती है और समाज को नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की नई दिशा प्रदान करती है।
निष्कर्षतः यह कहना पूर्णतः समीचीन होगा कि ‘ॐ’ ही साधना का वह परम लक्ष्य है, जहां पहुंचकर साधक को कुछ पाने की लालसा नहीं रहती। वहां न चाह शेष रहती है, न भय—केवल आत्मिक पूर्णता और शांति का अनुभव होता है। यही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का शाश्वत, सार्वकालिक और सार्वभौमिक संदेश है।

शांति, साधना और शिल्पकला का संगम: उदयगिरि खंडगिरि गुफाओं की विशेष रिपोर्ट

जब करे ओडिसा की यात्रा एक बार जरूर जाए उदयगिरि–खंडगिरि की गुफाएं: ओडिशा की धरती पर जीवंत इतिहास, साधना और शिल्पकला की अनमोल विरासत


ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के समीप स्थित उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की आध्यात्मिक चेतना, तपस्या और उत्कृष्ट शिल्पकला का जीवंत दस्तावेज हैं। इन पहाड़ियों पर कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो इतिहास स्वयं बोल उठता हो। चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, शिलालेख, नक्काशियां और प्राकृतिक एकांत — सब मिलकर इस स्थान को अद्वितीय बनाते हैं।

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इतिहास के गर्भ से निकली जैन परंपरा की धरोहर
इतिहासकारों के अनुसार, उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। इनका सीधा संबंध जैन धर्म से है। यह स्थल प्राचीन कलिंग साम्राज्य के उस दौर की याद दिलाता है जब जैन मुनि कठोर तपस्या, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए निर्जन पहाड़ियों को चुनते थे।
उदयगिरि पहाड़ी पर स्थित हाथीगुफा शिलालेख इस स्थल का सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण है। इस शिलालेख में महान कलिंग नरेश राजा खारवेल के शासन, उनकी उपलब्धियों और धार्मिक उदारता का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह शिलालेख न केवल ओडिशा, बल्कि पूरे भारत के प्राचीन इतिहास को समझने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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उदयगिरि: शिल्प, इतिहास और साधना का संगम
उदयगिरि पहाड़ी पर कुल 18 गुफाएं हैं, जिनमें रानीगुफा, गणेशगुफा, व्याघ्रगुफा और हाथीगुफा प्रमुख हैं।
रानीगुफा दो मंजिला है और इसकी दीवारों पर बनी नक्काशियां तत्कालीन समाज, राजसी जीवन और धार्मिक आस्थाओं को दर्शाती हैं।
व्याघ्रगुफा का प्रवेश द्वार बाघ के मुख के आकार में बनाया गया है, जो प्राचीन कलाकारों की कल्पनाशीलता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
गणेशगुफा में बनी मूर्तियां और उत्कीर्ण आकृतियां धार्मिक सहिष्णुता और कलात्मक समृद्धि का प्रतीक हैं।
इन गुफाओं में उकेरी गई हाथी, सिंह, नृत्य करते मानव और पौराणिक दृश्य उस कालखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करते हैं।

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खंडगिरि: एकांत, शांति और आत्मिक अनुभूति
उदयगिरि के ठीक सामने स्थित खंडगिरि पहाड़ी अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़भाड़ वाली है। यहां कुल 15 गुफाएं हैं, जो साधना और निवास के लिए उपयोग में लाई जाती थीं। खंडगिरि की चढ़ाई थोड़ी कठिन है, लेकिन ऊपर पहुंचने पर दिखाई देने वाला भुवनेश्वर शहर का विहंगम दृश्य मन को गहरे तक सुकून देता है।
सूर्यास्त के समय पहाड़ी से दिखता आकाश और शहर की रोशनी इस स्थान को फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बना देती है। यही कारण है कि उदयगिरि खंडगिरि गुफाएं आज भी ध्यान, शांति और आत्मिक ऊर्जा की तलाश में निकले यात्रियों को आकर्षित करती हैं।
पहुंचना है बेहद आसान
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन और बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र 6–7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
ऑटो रिक्शा,टैक्सी,स्थानीय बस के जरिए पर्यटक कुछ ही मिनटों में यहां पहुंच सकते हैं। शहर की चहल-पहल से निकलते ही पहाड़ियों की शांति मन को स्वतः अपनी ओर खींच लेती है।

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पर्यटन के साथ स्थानीय स्वाद का आनंद
गुफाओं के आसपास छोटे-छोटे स्टॉल और स्थानीय भोजनालय मौजूद हैं, जहां पर्यटक ओडिशा के पारंपरिक स्नैक्स, चाय और हल्के नाश्ते का आनंद ले सकते हैं। घूमते-घूमते यहां बैठकर सुस्ताना यात्रा को और भी सुखद बना देता है।
क्यों खास हैं उदयगिरि–खंडगिरि गुफाएं?
जैन धर्म से जुड़ा प्राचीन साधना केंद्र
दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का ऐतिहासिक महत्व
राजा खारवेल से संबंधित दुर्लभ शिलालेख
अद्वितीय शिल्पकला और नक्काशी
फोटोग्राफी और इतिहास प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल

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इतिहास से जुड़ने का एक अनूठा अनुभव
उदयगिरि और खंडगिरि का भ्रमण केवल आंखों से देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा से जुड़ने का अनुभव है। यहां खड़े होकर प्राचीन साधुओं की तपस्या, कलाकारों की मेहनत और इतिहास की गूंज को महसूस किया जा सकता है।
आज के दौर में जब तेज़ रफ्तार जीवन में शांति दुर्लभ होती जा रही है, तब उदयगिरि खंडगिरि गुफाएं ओडिशा हमें ठहरकर सोचने, समझने और महसूस करने का अवसर देती हैं। यह स्थल न केवल ओडिशा के गौरवशाली अतीत का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित रहने योग्य है।

मकर संक्रांति: सूर्य की गति, संस्कृति की चेतना

नवनीत मिश्र

    भारतीय सभ्यता प्रकृति, खगोल और जीवन के आपसी संतुलन पर आधारित रही है। इसी संतुलन की सजीव अभिव्यक्ति है मकर संक्रांति। एक ऐसा महापर्व जो सूर्य की खगोलीय गति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की चेतना, कृषि जीवन की लय और सामाजिक समरसता को एक सूत्र में बाँधता है। यह पर्व केवल तिथि या परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला सांस्कृतिक संदेश है।

सूर्य की गति और उत्तरायण का वैज्ञानिक आधार

मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा आरंभ करता है। इस खगोलीय परिवर्तन का भारतीय जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। उत्तरायण को प्रकाश, ऊर्जा और सृजन का काल माना गया है। वैदिक काल से सूर्य को जीवनदाता, स्वास्थ्य और चेतना का प्रतीक स्वीकार किया गया है। यही कारण है कि इस दिन सूर्योपासना, स्नान और दान को विशेष महत्व दिया गया है।

संस्कृति की चेतना और परंपराओं की विविधता

मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व भिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं यह खिचड़ी के रूप में, कहीं पोंगल के रूप में, कहीं माघ बिहू तो कहीं उत्तरायण के रूप में उल्लास और उमंग का कारण बनती है। नाम भले अलग हों, लेकिन मूल भावना एक ही है- नव आरंभ, समृद्धि और सामाजिक मेलजोल।
इस पर्व पर तिल और गुड़ का विशेष स्थान है। तिल शरीर को ऊष्मा देता है और गुड़ मिठास। दोनों मिलकर जीवन में स्वास्थ्य और मधुर संबंधों का प्रतीक बन जाते हैं। लोक परंपराओं में यह संदेश स्पष्ट है कि कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

कृषि से गहरा संबंध

मकर संक्रांति भारतीय कृषि परंपरा से गहराई से जुड़ा पर्व है। यह समय किसानों के लिए परिश्रम के फल को देखने और नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का होता है। खेतों में लहलहाती फसलें और अन्न की उपलब्धता इस पर्व को उत्सव का स्वरूप देती हैं। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की भावना भारतीय सभ्यता की मूल आत्मा रही है, जो इस पर्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

दान, सेवा और सामाजिक समरसता

इस दिन गंगा स्नान, दान और सेवा की परंपरा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति सिखाती है कि समृद्धि का वास्तविक अर्थ बाँटना है। अन्न, वस्त्र और ज्ञान का दान समाज में संतुलन और करुणा को बनाए रखने का माध्यम बनता है।

पतंग, उल्लास और जीवन दर्शन

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भी गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखती है। खुला आकाश, ऊँचाइयों की ओर उड़ती पतंग और सामूहिक आनंद। यह सब मानव की आकांक्षाओं, स्वतंत्रता और उत्साह का प्रतीक है। यह पर्व प्रतिस्पर्धा को भी उल्लास और सौहार्द में बदलने का संदेश देता है।

आधुनिक संदर्भ में मकर संक्रांति

आज के भौतिक और तकनीक-प्रधान युग में मकर संक्रांति हमें प्रकृति की लय को समझने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। सूर्य की नियमित गति, ऋतुओं का अनुशासन और सामूहिक सहभागिता—ये सभी मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रगति तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति और समाज के साथ सामंजस्य में हो।

       मकर संक्रांति वास्तव में सूर्य की गति और संस्कृति की चेतना का महापर्व है। यह प्रकाश की ओर बढ़ते जीवन का प्रतीक है, जहाँ अंधकार से बाहर निकलकर ऊर्जा, सद्भाव और कर्मशीलता का मार्ग प्रशस्त होता है। भारतीय सभ्यता का यही संदेश इस पर्व के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता चला आ रहा है। प्रकृति के साथ, समाज के लिए और जीवन के उत्सव के रूप में।

एक तारीख, तीन विरासतें: 14 जनवरी के महान निधन की कहानी

14 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: मुनव्वर राणा, सुरजीत सिंह बरनाला और एडमंड हैली — साहित्य, राजनीति और विज्ञान की अमर विरासत

14 जनवरी 2024 – मुनव्वर राणा (भारतीय उर्दू कवि)
मुनव्वर राणा आधुनिक उर्दू साहित्य के उन बड़े नामों में गिने जाते हैं, जिन्होंने आम आदमी की भावनाओं, विशेषकर मां, घर, रिश्तों और विस्थापन के दर्द को अपनी शायरी का केंद्र बनाया। उनका जन्म 26 नवंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली ज़िले में हुआ था। उन्होंने मुशायरों के मंच से उर्दू शायरी को जन-जन तक पहुंचाया और साहित्य को अभिजात वर्ग से निकालकर आम लोगों की संवेदना से जोड़ा।
उनका काव्य संग्रह ‘शहदाबा’ अत्यंत चर्चित रहा, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुनव्वर राणा की भाषा सरल, भावनात्मक और सीधी दिल को छूने वाली थी। 14 जनवरी 2024 को उनके निधन से उर्दू साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई। उनका योगदान भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक चेतना में सदैव स्मरणीय रहेगा।

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14 जनवरी 2017 – सुरजीत सिंह बरनाला (पूर्व मुख्यमंत्री, पंजाब)
सुरजीत सिंह बरनाला भारतीय राजनीति के एक सम्मानित और संतुलित नेता माने जाते थे। उनका जन्म 25 फरवरी 1925 को पंजाब के बरनाला ज़िले में हुआ था। वे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता रहे और वर्ष 1985 से 1987 तक पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया।
बरनाला का कार्यकाल पंजाब के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण समय में रहा, जब राज्य आंतरिक अशांति के दौर से गुजर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवाद को प्राथमिकता दी। वे बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल भी नियुक्त किए गए। 14 जनवरी 2017 को उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी, सुलझे हुए और सिद्धांतवादी नेता को खो दिया।

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14 जनवरी 1742 – एडमंड हैली (प्रसिद्ध खगोलशास्त्री)
एडमंड हैली विश्व विज्ञान इतिहास के महान खगोलशास्त्रियों में से एक थे। उनका जन्म 8 नवंबर 1656 को हैगरस्टन, लंदन (इंग्लैंड) में हुआ था। वे विशेष रूप से हैली धूमकेतु (Halley’s Comet) की गणना और भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि यह धूमकेतु एक निश्चित अवधि में पृथ्वी के पास से गुजरता है।
एडमंड हैली ने आइज़ैक न्यूटन के प्रसिद्ध ग्रंथ प्रिंसिपिया के प्रकाशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे रॉयल सोसाइटी के सक्रिय सदस्य रहे और खगोल विज्ञान, भूगोल व मौसम विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान दिया। 14 जनवरी 1742 को उनके निधन के बावजूद, उनका वैज्ञानिक कार्य आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान की नींव माना जाता है।

प्रो. राजवंत राव व प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी भारतीय संग्रहालय के ट्रस्टी नामित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजवंत राव तथा वर्तमान अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन भारतीय संग्रहालय के न्यासी सदस्य (बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज) के रूप में नामित किया गया है।
भारत सरकार द्वारा नामित दोनों विद्वानों का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। उल्लेखनीय है कि भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में देश का एक अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दोनों आचार्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है और इससे विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा और सुदृढ़ होगी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं एवं आचार्यों ने भी प्रो. राजवंत राव और प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

पीएम केयर्स फंड को भी RTI के तहत निजता का अधिकार: दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर्स फंड को लेकर चल रहे एक महत्वपूर्ण मामले ने देश में पारदर्शिता बनाम निजता की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड भले ही सरकारी या सार्वजनिक संस्था क्यों न हो, उसे भी सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत निजता का अधिकार प्राप्त है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संस्था का पब्लिक अथॉरिटी होना यह नहीं दर्शाता कि उसकी हर जानकारी स्वतः ही जनता के सामने उजागर कर दी जाए।

सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल की याचिका से जुड़ा मामला

यह मामला मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल द्वारा दायर अपील से जुड़ा है। मित्तल ने RTI कानून के तहत आयकर विभाग से पीएम केयर्स फंड को दी गई टैक्स छूट से संबंधित दस्तावेज मांगे थे।

उन्होंने यह जानना चाहा था कि—

• पीएम केयर्स फंड ने टैक्स छूट पाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए

• किन अधिकारियों ने इन दस्तावेजों पर क्या टिप्पणियां कीं

• 2019-20 के दौरान किन संस्थाओं को टैक्स छूट दी गई या किन्हें इनकार किया गया

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने आयकर विभाग को यह जानकारी देने का आदेश दिया था, लेकिन आयकर विभाग ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।

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सिंगल जज बेंच ने CIC का आदेश किया था रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने CIC के आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत करदाताओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि CIC को ऐसी जानकारी साझा करने का अधिकार नहीं है।

इस फैसले के खिलाफ गिरिश मित्तल ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। उनके वकील ने दलील दी कि RTI कानून की धारा 8(1) केवल किसी व्यक्ति की निजता की रक्षा के लिए है, न कि पीएम केयर्स जैसे सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए। वकील ने कहा कि यह फंड जनता के दान से बना है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए।

डबल बेंच की अहम टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने संकेत दिया कि कोई संस्था यदि सरकारी भी हो, तब भी उसकी कुछ जानकारी निजता के दायरे में आ सकती है। कोर्ट ने कहा कि केवल सार्वजनिक कार्य करने से कोई संस्था अपनी पूरी गोपनीयता नहीं खो देती।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को होगी। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए और क्या पीएम केयर्स फंड से जुड़ी टैक्स छूट की जानकारी आम जनता को दी जानी चाहिए या नहीं।

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