Monday, June 22, 2026
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अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित किया, ट्रंप प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश के हफ्तों बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने अपने प्रशासन को मुस्लिम ब्रदरहुड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले मिस्र, लेबनान और जॉर्डन जैसे कई देश भी मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। अमेरिका की यह कार्रवाई इजराइल विरोधी संगठनों और देशों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है।

मार्को रुबियो का बयान

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े चैप्टर की हिंसक गतिविधियों और क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने के लिए चल रहे प्रयासों की शुरुआत है।

उन्होंने कहा,
“संयुक्त राज्य अमेरिका इन मुस्लिम ब्रदरहुड चैप्टर को आतंकवाद में शामिल होने या उसका समर्थन करने से रोकने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करेगा, चाहे वे दुनिया के किसी भी हिस्से में हों।”

मदद देना गैरकानूनी, आर्थिक प्रतिबंध लागू

अमेरिका की इस घोषणा के बाद अब मुस्लिम ब्रदरहुड या उससे जुड़े किसी भी संगठन को किसी भी तरह की मदद देना गैरकानूनी हो गया है।

• संगठन से जुड़े लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध

• वित्तीय लेन-देन पर रोक

• राजस्व स्रोतों को बंद करने के लिए कड़े आर्थिक प्रतिबंध

क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन?

मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिस्र के इस्लामिक विद्वान हसन अल-बन्ना ने की थी। यह संगठन पूरे मध्य पूर्व में फैला हुआ है और इसके कई राजनीतिक व सामाजिक चैप्टर हैं।

कई देशों में संगठन ने खुद को शांतिपूर्ण राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर पेश किया है। लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड का चैप्टर संसद में प्रतिनिधित्व करता है, जिसे अल-जमाअ अल-इस्लामिया के नाम से जाना जाता है।

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मिस्र में सत्ता और फिर पतन

साल 2012 में मिस्र के पहले लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनाव में मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित उम्मीदवार मोहम्मद मुर्सी ने जीत दर्ज की थी। हालांकि एक साल बाद ही उन्हें सत्ता से हटा दिया गया।

मुर्सी की 2019 में जेल में मौत हो गई थी, जिसके बाद संगठन पर अंतरराष्ट्रीय बहस और तेज हो गई।

मिस्र ने भी किया संगठन पर बैन

मिस्र ने 2013 में मुस्लिम ब्रदरहुड को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद संगठन के नेताओं और सदस्यों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई, जिससे ग्रुप अंडरग्राउंड चला गया और कई सदस्य देश छोड़कर निर्वासन में चले गए।

ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन तेज, ट्रंप के बयान से मिडिल ईस्ट में जंग का खतरा, रूस ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने मिडिल ईस्ट में हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं। मंगलवार (13 जनवरी 2026) को ट्रंप ने खुलकर ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा,
“ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो, अपने संस्थानों पर कब्जा करो, मदद रास्ते में है।”

ट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्र में एक नई जंग की आशंका गहराने लगी है। वहीं रूस ने ईरान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर अमेरिका की तीखी आलोचना की है।

रूस की अमेरिका को सख्त चेतावनी

रूस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान पर नए सैन्य हमलों की धमकियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। रूसी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ऐसे किसी भी कदम के मिडिल ईस्ट और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

रूस ने कहा,
“जो लोग जून 2025 में ईरान पर हुए हमले को दोहराने के बहाने के रूप में अशांति फैलाना चाहते हैं, उन्हें इसके गंभीर नतीजों के बारे में सोचना चाहिए।”

ईरान में कार्रवाई के दौरान 2,000 मौतों का दावा

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक लगभग 2,000 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्याएं नहीं रुकतीं, तब तक अमेरिका ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा।

हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके बयान में कही गई “मदद रास्ते में है” का वास्तविक अर्थ क्या है।

ट्रंप और नेतन्याहू को ईरान ने बताया ‘हत्यारा’

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ने ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का “मुख्य हत्यारा” करार दिया है। यह बयान ट्रंप द्वारा ईरानी प्रदर्शनकारियों को संस्थानों पर कब्जा करने का समर्थन देने के कुछ ही मिनटों बाद आया।

संचार सेवाओं में आंशिक ढील

तेहरान प्रशासन ने हालात के बीच कुछ प्रतिबंधों में ढील देते हुए नागरिकों को मोबाइल नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल की अनुमति दी है। हालांकि इंटरनेट और टेक्स्ट मैसेजिंग सेवाएं अब भी बंद हैं।

ईरान पर एयरस्ट्राइक विकल्पों में शामिल: व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने 12 जनवरी को कहा था कि ईरान पर एयरस्ट्राइक उन विकल्पों में शामिल हैं, जिन पर राष्ट्रपति ट्रंप विचार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि कूटनीति अमेरिका की पहली प्राथमिकता है।

हमला हुआ तो करारा जवाब देंगे: ईरान

ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने हमला किया तो तेहरान जोरदार जवाब देगा।

उन्होंने कहा,
“क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकाने और वाशिंगटन का साथ देने वाले देश हमारे लिए वैध लक्ष्य होंगे। हमारी रक्षा स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।”

मकर संक्रांति: छतों से आसमान तक उत्सव की उड़ान

मकर संक्रांति 2026: लखनऊ और उत्तर प्रदेश में पतंगों के संग परंपरा, उत्सव और ज़िम्मेदारी का संदेश


(राष्ट्र की परम्परा धर्म डेस्क)मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो सिर्फ़ पंचांग की एक तिथि नहीं बल्कि मौसम, समाज और जीवनशैली में आने वाले सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ में मकर संक्रांति का उत्सव पारंपरिक श्रद्धा, सामाजिक मेलजोल और पतंगबाजी की रंगीन परंपरा के साथ मनाया जाता है। जैसे ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है, वैसे ही लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, उम्मीद और उत्साह का संचार होता है।
लखनऊ की छतों से लेकर गांवों के खुले मैदानों तक, मकर संक्रांति के दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। यह दृश्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सामाजिक एकता, लोकसंस्कृति और पीढ़ियों को जोड़ने वाला उत्सव भी है।

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लखनऊ और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति की परंपरा
उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है तो कहीं यह दान-पुण्य और स्नान का विशेष दिन माना जाता है। लखनऊ में यह पर्व गंगा-जमुनी तहज़ीब का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सुबह से ही लोग पवित्र नदियों में स्नान कर दान करते हैं, तिल, गुड़, चावल और खिचड़ी का सेवन किया जाता है। इसके बाद दोपहर से लेकर शाम तक पतंग उड़ाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पुराने लखनऊ की गलियों, चौक, अमीनाबाद, आलमबाग और गोमतीनगर जैसे इलाकों में पतंगबाजी एक सामूहिक उत्सव का रूप ले लेती है।
पतंगबाजी: खेल, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव

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पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम भी है। मकर संक्रांति के दिन छतों पर खड़े लोग एक-दूसरे से अनजान होते हुए भी “वो काटा… वो मारा” की आवाज़ पर जुड़ जाते हैं। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुज़ुर्ग—सभी इस उत्सव में अपनी भूमिका निभाते हैं।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सामूहिक पतंग उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन भी शामिल होते हैं। यह आयोजन आधुनिक जीवन में कम होते जा रहे सामाजिक मेलजोल को फिर से जीवित करते हैं।
स्वास्थ्य और मानसिक सुकून से जुड़ा पर्व

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मकर संक्रांति के दौरान पतंग उड़ाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। खुले आसमान में रहने से शरीर को सूर्य की रोशनी मिलती है, जिससे विटामिन-डी का स्तर बढ़ता है। हाथ, कंधे और आंखों की सक्रियता से हल्का व्यायाम भी हो जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से पतंगबाजी तनाव कम करने और मन को प्रसन्न रखने में सहायक है। रंग-बिरंगी पतंगों को उड़ते देखना एक तरह का ध्यान अनुभव कराता है, जो वर्तमान क्षण में जीने की सीख देता है। बच्चों के लिए यह गतिविधि धैर्य, संतुलन और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती है।

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सुरक्षा और पर्यावरण: ज़िम्मेदारी की ज़रूरत
हालांकि पतंगबाजी उत्सव का प्रतीक है, लेकिन इससे जुड़े सुरक्षा और पर्यावरणीय मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश में कई बार चीनी मांझे और नायलॉन डोर के कारण गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं। यह इंसानों के साथ-साथ पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हुआ है।
लखनऊ प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ज़िम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है। सूती धागे का इस्तेमाल, खुले मैदानों में पतंग उड़ाना, बच्चों की निगरानी और सड़क के पास पतंग न उड़ाना जैसे उपाय अपनाकर हादसों से बचा जा सकता है।

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पर्यावरण की दृष्टि से भी इको-फ्रेंडली पतंगों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग समय की मांग है। प्लास्टिक और नायलॉन से बनी पतंगें लंबे समय तक नष्ट नहीं होतीं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। लखनऊ के कई सामाजिक संगठन और स्कूल इस दिशा में जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
आधुनिक दौर में बदलती पतंग परंपरा
डिजिटल युग में मकर संक्रांति और पतंग उत्सव ने वैश्विक पहचान बना ली है। सोशल मीडिया पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के पतंग उत्सवों की तस्वीरें और वीडियो देश-विदेश तक पहुंचते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय भी इस दिन पतंग उड़ाकर अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।
यह बदलाव दर्शाता है कि परंपराएं समय के साथ बदलती हैं, लेकिन उनका मूल संदेश—सामूहिकता, संतुलन और खुशी—अटल रहता है।

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निष्कर्ष
मकर संक्रांति और पतंगबाजी लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि खुशी और ज़िम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जब परंपरा को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाया जाता है, तो यह न केवल अतीत से जोड़ती है, बल्कि भविष्य के लिए भी प्रेरणा देती है।
आसमान में उड़ती पतंगें हमें यह संदेश देती हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती—ज़रूरत है तो बस संतुलन और सही दिशा की।

कैसे एक युद्ध ने भारत में अंग्रेजी राज की राह आसान कर दी

इतिहास की तारीखों में छिपे निर्णायक मोड़: युद्ध, संधि और साम्राज्यों का उदय-पतन

इतिहास केवल बीते समय की घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली सीख भी है। विभिन्न सदियों में घटित युद्ध, संधियां और राजनीतिक फैसले आज की वैश्विक व्यवस्था की नींव बने। नीचे दी गई घटनाएं न सिर्फ़ अपने समय में निर्णायक थीं, बल्कि इन्होंने दुनिया के शक्ति-संतुलन को भी प्रभावित किया।

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1809: नेपोलियन के खिलाफ इंग्लैंड-स्पेन गठबंधन
1809 में इंग्लैंड और स्पेन ने फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट के विरुद्ध गठबंधन किया। यह गठबंधन पेनिनसुलर युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसने नेपोलियन की यूरोपीय विस्तार नीति को गंभीर चुनौती दी। इस युद्ध में स्थानीय विद्रोह, गुरिल्ला युद्ध और ब्रिटिश सैन्य रणनीति ने फ्रांसीसी सेना को कमजोर कर दिया। अंततः यह गठबंधन नेपोलियन की पराजय की ओर बढ़ते कदमों में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
1784: अमेरिका-ब्रिटेन शांति संधि की पुष्टि
1784 में अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ शांति संधि की पुष्टि की, जिससे अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम औपचारिक रूप से समाप्त हुआ। इस संधि के तहत ब्रिटेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। यह घटना आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर बनी और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्षों को वैश्विक प्रेरणा मिली।

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1761: पानीपत का तीसरा युद्ध
1761 में मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध लड़ा गया। यह युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे भीषण और निर्णायक युद्धों में से एक था। इस युद्ध में मराठा सेना की पराजय ने उत्तर भारत में उनकी राजनीतिक शक्ति को गहरा आघात पहुंचाया। साथ ही, इस युद्ध ने भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए शक्ति विस्तार का रास्ता भी आसान कर दिया।
1760: पांडिचेरी अंग्रेजों के हवाले
1760 में फ्रांसीसी जनरल लेली ने पांडिचेरी को अंग्रेजों के हवाले कर दिया। यह घटना भारत में फ्रांसीसी प्रभाव के लगभग अंत का संकेत थी। कर्नाटक युद्धों की श्रृंखला में यह अंग्रेजों की निर्णायक जीत मानी जाती है, जिसके बाद भारत में ब्रिटिश वर्चस्व लगभग निर्विवाद हो गया और औपनिवेशिक शासन की नींव और मजबूत हुई।

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1758: ईस्ट इंडिया कंपनी को लूट की कानूनी छूट
1758 में इंग्लैंड के सम्राट द्वारा जारी अधिकार पत्र के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में युद्ध के दौरान जीती गई संपत्ति और धन अपने पास रखने का अधिकार मिला। इस फैसले ने कंपनी को व्यापारिक संस्था से एक सैन्य और राजनीतिक शक्ति में बदल दिया। यही नीति आगे चलकर ब्रिटिश साम्राज्य के भारत में विस्तार का प्रमुख कारण बनी।
1659: एलवास का युद्ध
1659 में एलवास के युद्ध में पुर्तगाल ने स्पेन को पराजित किया। यह युद्ध पुर्तगाल की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लड़ा गया था, जो स्पेन के अधीन आ चुका था। इस जीत ने पुर्तगाल की संप्रभुता को पुनः स्थापित किया और इबेरियन प्रायद्वीप की राजनीति में शक्ति संतुलन को बदल दिया।

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1641: मलक्का पर डच विजय
1641 में यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी (डच ईस्ट इंडिया कंपनी) ने मलक्का शहर पर विजय प्राप्त की। मलक्का उस समय एशिया का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। इस जीत से डचों को मसाला व्यापार पर नियंत्रण मिला और पुर्तगाली व्यापारिक साम्राज्य को भारी झटका लगा। यह घटना वैश्विक समुद्री व्यापार के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
1514: दासता के खिलाफ पोप का आदेश
1514 में पोप लियो दसवें ने दासता के विरुद्ध आदेश पारित किया। यह आदेश नैतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, हालांकि इसका तत्काल व्यावहारिक प्रभाव सीमित रहा। फिर भी, यह मानवाधिकारों के इतिहास में एक प्रारंभिक वैचारिक कदम माना जाता है, जिसने आगे चलकर दास प्रथा के विरोध को वैचारिक आधार प्रदान किया।

जन्मदिन विशेष: संघर्ष से सफलता तक की असली कहानियाँ

14 जनवरी: इतिहास में अमर हुए महान व्यक्तित्व, जिनका जन्म बदला भारत और दुनिया का भविष्य

नारायण कार्तिकेयन (जन्म: 14 जनवरी 1977)
जन्म स्थान: कोयंबटूर, तमिलनाडु, भारत
नारायण कार्तिकेयन भारत के पहले और अब तक के एकमात्र फ़ॉर्मूला-1 रेसिंग ड्राइवर हैं। उनका जन्म तमिलनाडु के औद्योगिक शहर कोयंबटूर में हुआ। बचपन से ही उन्हें मोटरस्पोर्ट्स में गहरी रुचि थी। सीमित संसाधनों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
2005 में उन्होंने जॉर्डन ग्रैंड प्रिक्स टीम के लिए फ़ॉर्मूला-1 में पदार्पण किया। यह भारतीय खेल इतिहास का ऐतिहासिक क्षण था। कार्तिकेयन ने न केवल युवा खिलाड़ियों को मोटरस्पोर्ट्स की ओर प्रेरित किया, बल्कि भारत में रेसिंग संस्कृति को नई पहचान दी। वे आज भी खेल प्रशासन और युवा प्रतिभाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय हैं।

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एमिली वॉटसन (जन्म: 14 जनवरी 1967)
जन्म स्थान: इस्लिंगटन, लंदन, इंग्लैंड, अमेरिका/ब्रिटेन
एमिली वॉटसन विश्व सिनेमा की चर्चित और सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक हैं। उनका जन्म लंदन में हुआ और उन्होंने रंगमंच से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। फिल्म Breaking the Waves में उनके सशक्त अभिनय ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
उन्होंने The Theory of Everything, Gosford Park और Chernobyl जैसी फिल्मों और सीरीज़ में प्रभावशाली भूमिकाएँ निभाईं। दो बार ऑस्कर नामांकन प्राप्त कर चुकी एमिली वॉटसन अपने सशक्त महिला किरदारों और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जानी जाती हैं। उनका योगदान वैश्विक सिनेमा को संवेदनशील और विचारशील दृष्टि देता है।
ओ. पन्नीरसेल्वम (जन्म: 14 जनवरी 1951)
जन्म स्थान: पेरियाकुलम, थेनी ज़िला, तमिलनाडु, भारत
ओ. पन्नीरसेल्वम तमिलनाडु की राजनीति का एक प्रमुख नाम हैं। उनका जन्म थेनी जिले के पेरियाकुलम में हुआ। वे तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एआईएडीएमके पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले पन्नीरसेल्वम को उनकी सादगी, प्रशासनिक दक्षता और जनता से जुड़ाव के लिए जाना जाता है। उन्होंने राज्य के वित्त, जल संसाधन और सामाजिक कल्याण योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिरता में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

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जगद्गुरु रामभद्राचार्य (जन्म: 14 जनवरी 1950)
जन्म स्थान: जौनपुर ज़िला, उत्तर प्रदेश, भारत
रामभद्राचार्य एक महान संस्कृत विद्वान, दार्शनिक, कवि और हिंदू धर्मगुरु हैं। जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने असाधारण बौद्धिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। वे अनेक भाषाओं के ज्ञाता हैं और रामायण, वेदांत तथा भारतीय दर्शन पर उनका कार्य अद्वितीय है।
उन्होंने चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना कर दिव्यांगों के लिए शिक्षा का नया मार्ग खोला। उनका जीवन संघर्ष, साधना और सेवा का जीवंत उदाहरण है।
न्यायमूर्ति योगेश कुमार सभरवाल (जन्म: 14 जनवरी 1942)
जन्म स्थान: दिल्ली, भारत
योगेश कुमार सभरवाल भारत के 36वें मुख्य न्यायाधीश रहे। उनका जन्म दिल्ली में हुआ और उन्होंने न्यायपालिका में दशकों तक सेवा दी। उनके कार्यकाल में न्यायिक पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों को विशेष बल मिला।
उन्होंने कई संवेदनशील और ऐतिहासिक मामलों में फैसले सुनाए। भारतीय न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में उनका योगदान दीर्घकालिक माना जाता है।

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दशरथ मांझी (जन्म: 14 जनवरी 1934)
जन्म स्थान: गहलौर, गया ज़िला, बिहार, भारत
दशरथ मांझी को पूरी दुनिया “बिहार का माउंटेन मैन” के नाम से जानती है। अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे मांझी ने अकेले हथौड़े-छेनी से पहाड़ काटकर रास्ता बनाया।
उन्होंने 22 वर्षों की मेहनत से गहलौर पहाड़ को काटकर गांव को शहर से जोड़ा। उनका जीवन दृढ़ संकल्प, प्रेम और सामाजिक बदलाव की मिसाल है।
महाश्वेता देवी (जन्म: 14 जनवरी 1926)
जन्म स्थान: ढाका, तत्कालीन ब्रिटिश भारत (अब बांग्लादेश)
महाश्वेता देवी भारत की महान लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने आदिवासी समाज, शोषण और अन्याय को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया।
उनकी रचनाएँ हज़ार चौरासी की माँ और अरण्येर अधिकार साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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बिन्देश्वरी दुबे (जन्म: 14 जनवरी 1921)
जन्म स्थान: बिहार, भारत
बिन्देश्वरी दुबे बिहार के मुख्यमंत्री रहे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया।
दुर्गा खोटे (जन्म: 14 जनवरी 1905)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
दुर्गा खोटे हिंदी और मराठी सिनेमा की पहली शिक्षित अभिनेत्रियों में से एक थीं। उन्होंने महिला कलाकारों को सामाजिक सम्मान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

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ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह (जन्म: 14 जनवरी 1899)
जन्म स्थान: राजस्थान, भारत
ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह को “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया। वे भारतीय सेना के साहसी अधिकारी थे और देश की रक्षा में उनका योगदान अतुलनीय रहा।
सी. डी. देशमुख (जन्म: 14 जनवरी 1896)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र, भारत
सी. डी. देशमुख स्वतंत्र भारत के तीसरे वित्त मंत्री थे। उन्होंने भारतीय आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डी. बी. देवधर (जन्म: 14 जनवरी 1892)
जन्म स्थान: पुणे, महाराष्ट्र, भारत
देवधर भारतीय क्रिकेट के स्तंभ माने जाते हैं। उनके नाम पर देवधर ट्रॉफी खेली जाती है।

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अबुल फ़ज़ल (जन्म: 14 जनवरी 1551)
जन्म स्थान: आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत
अबुल फ़ज़ल मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे। आइने-ए-अकबरी और अकबरनामा जैसी कृतियाँ उनकी अमर धरोहर हैं।

आज आपका मूलांक बदलेगा किस्मत की चाल?

🔮 अंक राशिफल 14 जनवरी 2026: आज आपका मूलांक बदलेगा किस्मत की चाल?

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत विशेष न्यूमेरेलॉजी विश्लेषण

न्यूमेरेलॉजी यानी अंक ज्योतिष का आधार मूलांक होता है, जो आपकी जन्मतिथि के योग से निकलता है। जैसे ज्योतिष में राशि का महत्व है, वैसे ही अंक शास्त्र में मूलांक जीवन के हर क्षेत्र—करियर, पैसा, शिक्षा, प्रेम, राजनीति और स्वास्थ्य—पर असर डालता है।
आइए जानते हैं 14 जनवरी 2026 को आपका दिन कैसा रहेगा।

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🔢 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)
आज आत्मविश्वास आपके व्यक्तित्व से झलकेगा।
कार्य/व्यवसाय: लीडरशिप रोल मिलेगा, सरकारी या प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए दिन मजबूत।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छा समय।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा, लेकिन बयान सोच-समझकर दें।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर, नया खर्च सोचकर करें।
कला/संगीत: मंच या पहचान मिलने के योग।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
🔢 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
भावनाएं आज हावी रह सकती हैं।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में काम करने वालों को धैर्य रखना होगा।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, एकाग्रता जरूरी।
राजनीति: सार्वजनिक संवाद में सावधानी रखें।
आर्थिक स्थिति: निवेश फिलहाल टालें।
कला/संगीत: लेखन, कविता और गायन में मन लगेगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: चंद्र देव

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🔢 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
भाग्य आज आपके पक्ष में रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: इंटरव्यू, प्रमोशन या नई जिम्मेदारी के योग।
शिक्षा: शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए अनुकूल दिन।
राजनीति: सलाहकार की भूमिका मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ संभव।
कला/संगीत: क्रिएटिव आइडिया सफल होंगे।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: बृहस्पति
🔢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
कार्य/व्यवसाय: अचानक बदलाव या देरी से तनाव।
शिक्षा: टेक्निकल और इंजीनियरिंग छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।
राजनीति/प्रशासन: नियम-कानून का पालन जरूरी।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: गणेश जी

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🔢 मूलांक 5 (5, 14, 23)
दिन ऊर्जा और अवसरों से भरा।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया, ट्रैवल और सेल्स में लाभ।
शिक्षा: मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन स्टूडेंट्स के लिए अच्छा।
राजनीति: नेटवर्किंग मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: आय में सुधार।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: विष्णु जी
🔢 मूलांक 6 (6, 15, 24)
प्रेम और सौंदर्य से जुड़ा दिन।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, आर्ट, डिजाइन से जुड़े लोगों को फायदा।
शिक्षा: क्रिएटिव फील्ड के छात्रों के लिए अनुकूल।
राजनीति: छवि निखरेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है, संतुलन रखें।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: लक्ष्मी जी

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🔢 मूलांक 7 (7, 16, 25)
आत्मचिंतन और आध्यात्म का दिन।
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, आईटी और आध्यात्मिक कार्यों में सफलता।
शिक्षा: गहरी पढ़ाई और रिसर्च में मन लगेगा।
राजनीति: पर्दे के पीछे काम ज्यादा रहेगा।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: शिव जी
🔢 मूलांक 8 (8, 17, 26)
जिम्मेदारियों में वृद्धि।
कार्य/व्यवसाय: प्रशासन, कानून और भारी उद्योग से जुड़े लोगों के लिए धैर्य जरूरी।
शिक्षा: अनुशासन से लाभ।
राजनीति: फैसले धीरे लें।
आर्थिक स्थिति: मेहनत के अनुसार फल।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनि देव

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🔢 मूलांक 9 (9, 18, 27)
ऊर्जा और साहस से भरा दिन।
कार्य/व्यवसाय: अधूरे काम पूरे होंगे।
शिक्षा: खेल और रक्षा क्षेत्र के छात्रों के लिए अच्छा।
राजनीति: प्रभावशाली भाषण संभव।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी
डिस्क्लेमर: यह अंक राशिफल सामान्य न्यूमेरेलॉजी गणनाओं पर आधारित है। यह पूर्णतया सटीक होने का दावा नहीं करता। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

आज का पंचाग कब करे यात्रा क्या न करें सम्पूर्ण जानकारी

आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग (14/01/2026)
वार: बुधवार
तिथि: माघ कृष्ण पक्ष एकादशी (शाम 05:53 PM तक), तत्पश्चात द्वादशी
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
वैदिक ऋतु: हेमंत
द्रिक ऋतु: शिशिर
अयन: उत्तरायण (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश)

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🌟 नक्षत्र, योग व करण
नक्षत्र: अनुराधा (रात्रि 03:03 AM तक), उपरांत ज्येष्ठा
योग: गण्ड (07:55 PM तक), तत्पश्चात वृद्धि योग
करण:
बालव – 05:53 PM तक
कौलव – 07:07 AM (15 जनवरी) तक
तैतिल – इसके बाद
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:57 PM
चन्द्रोदय: 03:22 AM
चन्द्रास्त: 02:08 PM
🔆 सूर्य व चंद्र राशि
सूर्य राशि:
धनु – 03:04 PM तक
मकर राशि में प्रवेश – मकर संक्रांति (उत्तरायण प्रारंभ)
चंद्र राशि: वृश्चिक (पूरा दिन-रात)

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अशुभ काल
राहु काल: 12:35 PM – 01:56 PM
यम गण्ड: 08:34 AM – 09:55 AM
कुलिक: 11:15 AM – 12:35 PM
दुर्मुहूर्त: 12:14 PM – 12:57 PM
शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:25 AM
अमृत काल: 03:22 PM – 05:10 PM
अभिजीत मुहूर्त: नहीं

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🌺 विशेष योग
अमृतसिद्धि योग: 07:14 AM (14 Jan) – 03:03 AM (15 Jan)
सर्वार्थसिद्धि योग: 07:14 AM (14 Jan) – 03:03 AM (15 Jan)
(अनुराधा नक्षत्र + बुधवार)
➡️ आज के दिन नए कार्य, खरीदारी, निवेश, पूजा-पाठ व यात्रा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
🎉 गंगा सागर स्नान का आध्यात्मिक रहस्य
मकर संक्रांति
गंगा सागर स्नान
षटतिला एकादशी व्रत

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🧭 यात्रा विचार (दिशा शूल)
बुधवार को यात्रा वर्जित दिशा: उत्तर दिशा
यदि उत्तर दिशा यात्रा आवश्यक हो:
धनिया या सौंफ खाकर यात्रा करें।
लाभकारी दिशा:
पूर्व व पश्चिम दिशा – धन, कार्य सफलता व शुभ समाचार के लिए उत्तम।
🌙 चंद्रबल (15/01/26 सुबह 07:14 AM तक)
शुभ राशियाँ:
वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ
⭐ ताराबल (15/01/26 03:03 AM तक)
शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती

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🔥 विशेष विश्लेषण: आज का दिन क्यों है अत्यंत प्रभावशाली?
आज मकर संक्रांति, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह दिन दान, स्नान, जप, तर्पण, नए संकल्प और व्यापारिक निर्णयों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
जानिए, आज क्या करें और क्या न करें
तिल, गुड़, खिचड़ी व दान करना श्रेष्ठ
सूर्य को अर्घ्य देना विशेष फलदायी
उत्तर दिशा की अनावश्यक यात्रा टालें
राहु काल में शुभ कार्य न करें
🌞 क्या आज से बदलेगा आपका भाग्य?
उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश नई ऊर्जा, नई दिशा और नए अवसरों का संकेत देता है। आज लिया गया संकल्प पूरे वर्ष फल दे सकता है।
🌊 गंगा सागर स्नान का आध्यात्मिक रहस्य
शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर गंगा सागर स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

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🔮 षटतिला एकादशी व्रत: संकट निवारण का अचूक उपाय
यह व्रत विशेष रूप से ऋण, रोग, दरिद्रता और मानसिक कष्ट से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
📌 नोट:
इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। कृपया कोई भी धार्मिक, ज्योतिषीय या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व योग्य विद्वान या आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

पशु अधिकार बनाम मानव जीवन: 20 जनवरी की सुनवाई से तय होगी भारत की सार्वजनिक सुरक्षा नीति

गोंदिया – भारत में आवारा कुत्तों का मुद्दा कोई नया नहीं है,लेकिन 13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद यह विषय केवल एक पशु-प्रेम या करुणा का प्रश्न न रहकर एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और संवैधानिक कर्तव्य का मुद्दा बन गया है।अदालत की तीखी टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब यह बहस भावनाओं के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी, बल्कि जीवन के अधिकार, राज्य की जिम्मेदारी और नागरिक सुरक्षा के केंद्र में होगी।जब सवाल यह उठता है कि नौ साल का बच्चा अगर आवारा कुत्तों के हमले में जान गंवा देता है, तो यह केवल एक हादसा नहीं रह जाता,बल्कि राज्य की विफलता, समाज की प्राथमिकताओं और नीति- निर्माण की कमजोरी का प्रतीक बन जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी 2026 की सुनवाई में बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आवारा कुत्तों के काटने या हमले की घटनाएं जारी रहीं,तो राज्य सरकारों को हर मामले में भारी मुआवजा देना पड़ सकता है। एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह टिप्पणी भारत की न्यायिक व्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ को दर्शाती है।कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि वे लोग और संगठन भी जवाबदेह हो सकते हैं, जो सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को भोजन कराते हैं और फिर किसी भी परिणाम की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देते हैं।यह दृष्टिकोण न्यायपालिका की उस सोच को उजागर करता है, जिसमें कर्तव्य और अधिकार को एक-दूसरे से अलग नहीं देखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी यह रही कि आवारा कुत्ते किसी भी व्यक्ति या संगठन की निजी संपत्ति नहीं हैं। यदि वे वास्तव में किसी के हैं, तो उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर छोड़ने का नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं हो सकता।कोर्ट ने पूछा,जब कुत्ता प्रेमी संगठन या व्यक्ति उन्हें खाना खिलाते हैं,जब वे उनका बचाव करते हैं,तो फिर डॉग बाइट या मौत की स्थिति में जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट जाते हैं?यह सवाल केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पशु अधिकार बनाम मानव सुरक्षा की बहस को नया आयाम देता है। 

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साथियों बात अगर हम  बच्चे और बुजुर्ग: सबसे असुरक्षित वर्ग सबसे उपेक्षित यह चिंता का विषय इसको समझने की करें तो सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि ये वर्ग न तो अपनी रक्षा कर सकते हैं और न ही हमले की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं।जब एक बच्चा स्कूल जाते समय, एक बुजुर्ग सुबह टहलते समय, या कोई मरीज अस्पताल के बाहर आवारा कुत्तों का शिकार बनता है,तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।कोर्ट का यह कहना कि क्या इस अदालत को अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए?यह दर्शाता है कि न्यायपालिका अब इस विषय पर तटस्थ दर्शक नहीं बने रहना चाहती।सुप्रीम कोर्ट की एक अत्यंत तीखी टिप्पणी यह थी कि क्या भावनाएं केवल कुत्तों के लिए ही दिखाई देती हैं?, इंसानों के लिए नहीं?यह सवालभारतीय समाज के उस दोहरे मापदंड को उजागर करता है,जहां कुत्तों के अधिकारों पर तुरंत विरोध प्रदर्शन होते हैं,लेकिन बच्चों की मौत पर वही तीव्रता नहीं दिखती।अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मानव जीवन का मूल्य किसी भी पशु से कम नहीं हो सकता, चाहे वह संवेदनशील मुद्दा ही क्यों न हो। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह कुत्तों को खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहता है, तो उसे यह अपने घर, अपने परिसर या अपने कंपाउंड में करना चाहिए। सार्वजनिक सड़कों पर उन्हें छोड़करडर पैदा करना, हमले का खतरा बढ़ाना,और फिर जिम्मेदारी से बचना,अब स्वीकार्य नहीं होगा।यह टिप्पणी वैश्विक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है  क्योंकि विकसित देशों में पेट ओनरशिप के साथ कानूनी जिम्मेदारी अनिवार्य होती है। 

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साथियों बात अगर हम प्रशासनिक निष्क्रियता बनाम कानून -व्यवस्था का मुद्दा इसको समझने की करें तो,कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का है।नगरपालिकाएं, स्थानीय निकाय और राज्य सरकारें वर्षों से इस समस्या को टालती रही हैं।नियमित सर्वेक्षण न होना,डॉग शेल्टर की कमी,स्टरलाइजेशन कार्यक्रमों का आधा-अधूरा क्रियान्वयन,इन सभी को कोर्ट ने सिस्टमिक फेल्योर करार दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का स्पष्ट आदेश दे चुका है।अदालत ने कहा था कि इन जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी प्रशासन की असफलता का प्रमाण है।अब कोर्ट ने दोहराया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, अन्यथा नगरपालिकाओं की जवाबदेही तय होगी। 

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साथियों बात अगर हम डॉग बाइट एक रोकथाम योग्य खतरा, इसको समझने की करें तो,सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट को प्रवेटेबल रिस्क यानी रोकथाम योग्य खतरा बताया, इसका अर्थ है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर काम करें, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।जब किसी इलाके में बार-बार डॉग बाइट की घटनाएं होती हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वहां प्रशासनिक उदासीनता है। 

साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में दुनियाँ क्या करती है? इसको समझने की करें तो अमेरिका,यूरोप जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में आवारा कुत्तों की समस्या लगभग नहीं के बराबर है।पेट ओनरशिप लाइसेंस,भारी जुर्माना और शेल्टर सिस्टम बेहद सख्त हैं।भारत में भावनात्मक दृष्टिकोण ने लंबे समय तक व्यावहारिक समाधान को रोक रखा।संविधान और जीवन का अधिकार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है।जब राज्य बच्चों और नागरिकों को सड़कों पर सुरक्षित नहीं रख पाता,तो यह संवैधानिक विफलता बन जाती है।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां इस दिशा में संकेत हैं कि अब अदालत इस मुद्दे को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देख रही है।20 जनवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई केवल एक तारीख नहीं,बल्कि नीति निर्धारण जवाबदेही ढांचे,और भविष्य की दिशा तय करने वाली सुनवाई हो सकती है।संभावना है कि अदालत स्पष्ट गाइडलाइंस, मुआवजा ढांचा,और डॉग फीडर्स की कानूनी जिम्मेदारी तय करे।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि करुणा बनाम जिम्मेदारी नहीं, करुणा के साथ जिम्मेदारी अत्यंत जरूरी है,सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है,करुणा जरूरी है, लेकिन अराजकता स्वीकार्य नहीं।आवारा कुत्तों की देखभाल जरूरी है,लेकिन इंसानों की जान की कीमत पर नहीं।अब भारत को यह तय करना होगा किक्या वह भावनाओं के नाम पर जोखिम उठाता रहेगा,या अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक संतुलित, मानवीय और सुरक्षित मॉडल अपनाएगा।यह बहस केवल कुत्तों की नहीं,यह बहस सभ्य समाज की प्राथमिकताओं की है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

मकर संक्रांति: पतंगबाजी, आनंद, संस्कृति और चेतना

— डॉ. सत्यवान सौरभ

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति में सिर्फ़ एक तारीख वाला त्योहार नहीं है, बल्कि यह मौसम के बदलाव, सामाजिक जीवन और लोक संस्कृति का एक रंगीन रूप है। यह वह समय है जब सूरज दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर जाता है और प्रकृति और मानव जीवन दोनों में नई ऊर्जा आती है। इस त्योहार के साथ सदियों पुरानी पतंग उड़ाने की परंपरा को भी सदियों का साथ मिला है। अपने पूरे इतिहास में, यह सिर्फ़ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रहा है और इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य से जुड़े पहलू भी जुड़े हैं। हालांकि अब पतंग उड़ाना छत पर खड़े होकर और डोर खींचने का खेल नहीं रहा, आजकल यह सामूहिक उत्सव, मानसिक खुशी और शारीरिक व्यायाम का प्रतीक है।

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भारत में पतंग उड़ाने को एक बहुत पुरानी परंपरा माना जाता है। इसका ज़िक्र इतिहास और लोककथाओं में मिलता है। यह शाही महलों में पराक्रम और चतुराई का प्रतीक हुआ करता था, लेकिन समय के साथ यह जीवन की रोज़मर्रा की ज़रूरत बन गया है। मकर संक्रांति, बसंत पंचमी और अन्य उत्सवों के दौरान आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें भारतीय समाज की सामान्य जागरूकता और उत्सव का संकेत हैं। यह त्योहार न केवल एक परंपरा है, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में एक बड़ा सामाजिक आयोजन भी है।

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पतंगबाजी खेल का सबसे खूबसूरत सामाजिक पहलू है। यह लोगों को उनके घरों से बाहर निकालता है और उन्हें दूसरों से जोड़ता है। छतों पर बातचीत, बच्चों की हंसी, युवाओं की प्रतियोगिताएं और बुज़ुर्गों की मुस्कान, ये सभी दृश्य इस त्योहार को जीवंत बनाते हैं। “वो काटा… वो मारा” की गूंज न केवल खेल की तीव्रता है, बल्कि एक साथ सुनाई देने वाली आवाज़ भी है। आधुनिक युग में जहाँ सामाजिक मेलजोल कम हो रहा है, ऐसे त्योहार एक विकल्प हैं जिनका उपयोग मानवीय संबंधों को बनाए रखने के लिए किया जा सकता है।

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मकर संक्रांति के दौरान आयोजित होने वाले पतंग उत्सवों और सामूहिक कार्यक्रमों के साथ इस परंपरा ने एक नया मोड़ लिया है। ऐसे आयोजन स्थानीय सरकारों, सामाजिक संस्थानों, स्वैच्छिक संस्थानों द्वारा अलग-अलग जगहों पर एक साथ किए जाते हैं, ताकि न केवल मनोरंजन, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक सह-अस्तित्व भी हासिल किया जा सके। इन आयोजनों में बुज़ुर्ग, महिलाएं और बच्चे समान रूप से शामिल होते हैं, जिससे यह समाज के सभी वर्गों का त्योहार बन जाता है, न कि सिर्फ़ समाज के एक हिस्से का। पतंग उड़ाना एक ऐसा खेल है जिसके कई स्वास्थ्य फायदे हैं और इसे आमतौर पर एक मौसमी खेल माना जाता है। पतंग उड़ाने से शरीर के ज़्यादातर हिस्सों की कसरत होती है, जिसमें हाथ, कंधे और आँखें शामिल होती हैं, जिससे शरीर एक्टिव रहता है। बाहर घूमने से शरीर को सूरज की रोशनी मिलती है और मानसिक थकान दूर होती है। डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी ग्रुप और मज़ेदार एक्टिविटीज़ तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

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पतंग उड़ाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। खुले आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को उड़ते देखना मन को खुशी और सुकून देता है। यह आपको वर्तमान पल में लाता है और एक तरह से सहज ध्यान का अनुभव कराता है। आज लोग जिस तेज़ रफ़्तार और तनाव भरी ज़िंदगी जी रहे हैं, उसमें मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसे अनुभव भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह न सिर्फ़ मनोरंजन है, बल्कि बच्चों के लिए शिक्षाप्रद भी है जब वे पतंग उड़ाते हैं। यह धैर्य, संतुलन, तालमेल और प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करता है। हवा की दिशा के बारे में जानना, डोर का सही तनाव, समय पर सही फ़ैसले लेने की क्षमता, ये सभी क्षमताएँ बच्चों में फ़ैसले लेने की क्षमता को मज़बूत कर सकती हैं। इसके अलावा, जब यह अभ्यास परिवार के माहौल में किया जाता है, तो यह बच्चों में सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाता है।

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फिर भी, पतंग उड़ाने को खुशी और रोमांच के उत्सव के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन यह सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी दिखाता है। समय के साथ, चीनी मांझे और नायलॉन की डोर से कई गंभीर दुर्घटनाएँ हुई हैं। यह न सिर्फ़ इंसानों के लिए जानलेवा रहा है, बल्कि पक्षी और दूसरे जानवर भी मारे गए हैं। सड़क दुर्घटनाएँ, गले कटना और पक्षियों की मौत, ये सब इस परंपरा के विकृत रूप का सबूत हैं।
यह सरकार और प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों से किया गया है जो काफ़ी नहीं हैं। यह ज़रूरी है कि लोग इसके बारे में जागरूक हों और ज़िम्मेदारी की भावना विकसित करें। पतंगों को सूती धागे, सुरक्षित और खुली जगहों, बच्चों की देखरेख और समय पर ध्यान देने जैसी चीज़ों से सुरक्षित बनाया जा सकता है, ये सभी उपाय पतंग उड़ाने की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि त्योहार की खुशी किसी के लिए दुख का कारण न बने।

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पतंग उड़ाने को पर्यावरण के नज़रिए से भी दोबारा देखने की ज़रूरत है। पतंग का कचरा पेड़ों, बिजली की तारों और सड़कों पर भी पहुँच जाता है, जिससे पर्यावरण संबंधी चुनौतियाँ पैदा होती हैं। प्लास्टिक और नायलॉन की पतंगें लंबे समय तक नष्ट नहीं होतीं और वे वन्यजीवों के लिए खतरनाक होती हैं। इसलिए, इस समय इको-फ्रेंडली पतंगों और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल ज़रूरी है। ज़्यादातर सोशल ऑर्गनाइज़ेशन और वॉलंटियर ग्रुप ये अच्छे प्रयास कर रहे हैं। वे बच्चों और युवाओं को सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील पतंग उड़ाने के लिए मोटिवेट कर रहे हैं। स्कूलों और सोशल फोरम में जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि परंपरा और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे। बदलते समय के साथ पतंग उड़ाना भी बदल रहा है। अब यह सिर्फ़ छतों तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल और सोशल मीडिया ने इसे इंटरनेशनल पहचान दी है। पतंग उत्सव के वीडियो और फ़ोटो पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। इसी तरह, विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव मनाकर अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं।

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यह बदलाव दिखाता है कि सभी परंपराएं एक जैसी नहीं रहतीं, बल्कि समय के साथ बदलती हैं। ऐसा ही एक बदलाव पतंग उड़ाना है, जहाँ आधुनिकता, परंपरा, मनोरंजन और स्वास्थ्य एक साथ उड़ते हैं। यह त्योहार हमें समझाता है कि खुशी और ज़िम्मेदारी के बीच कोई विरोध नहीं है, बल्कि वे एक-दूसरे के पूरक हैं। आखिर में, मकर संक्रांति और इसके साथ होने वाला पतंग उड़ाना सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है, बल्कि जीवन का उत्सव भी है। यह हमें सामूहिकता, संतुलन और खुशी का मतलब सिखाता है। जब परंपरा को सही तरीके से और ज़िम्मेदारी के साथ अपनाया जाता है, तो यह न सिर्फ़ अतीत की याद दिलाती है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनती है। आसमान में उड़ती पतंगें यह विचार लाती हैं कि सीमाएं सिर्फ़ ज़मीन पर होती हैं और आसमान सपनों के लिए खुला है, आपको बस इतना जानना है कि डोर कैसे पकड़नी है और संतुलन कैसे बनाए रखना है।

डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक

आज का एक निर्णय बदल सकता है आपका पूरा भविष्य

आज का महाविशेष राशिफल 2026: करियर, धन, राजनीति और भविष्य के बड़े संकेत, जानिए आपकी राशि क्या कहती है


ज्योतिष : पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय


🔴 मेष (Aries ♈)
नाम अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
स्वभाव: उत्साही | राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
आज का दिन कार्य क्षेत्र और व्यापार के लिए अत्यंत शुभ है। व्यापारियों को नए सौदे और विस्तार के अवसर मिलेंगे। नौकरीपेशा लोगों के प्रमोशन या पदोन्नति की चर्चा तेज होगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता के संकेत।
कला-संगीत: मंच या प्रस्तुति से मान-सम्मान।
राजनीति: जनसमर्थन बढ़ेगा, कार्यकर्ताओं में उत्साह।
प्रशासन: निर्णय क्षमता की सराहना।
आर्थिक स्थिति: निवेश से लाभ।
पूजा: हनुमान जी की आराधना करें।

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🟢 वृषभ (Taurus ♉)
नाम अक्षर: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
स्वभाव: धैर्यवान | राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 6
मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलेगा।
व्यवसाय: रुके हुए सरकारी कार्य पूरे होंगे।
शिक्षा: ध्यान भटकने से बचें।
कला: सौंदर्य और डिजाइन से जुड़े लोगों को लाभ।
राजनीति: बयानबाजी में संयम आवश्यक।
आर्थिक: ननिहाल पक्ष से धन लाभ।
पूजा: माता लक्ष्मी की पूजा करें।
🟡 मिथुन (Gemini ♊)
नाम अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा
स्वभाव: जिज्ञासु | राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
नए काम की शुरुआत के लिए दिन श्रेष्ठ।
करियर: संचार और मीडिया से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: एकाग्रता से पढ़ाई करें।
कला-संगीत: लेखन, एंकरिंग में सफलता।
राजनीति: भाषण लोकप्रिय होंगे।
आर्थिक: खर्च संतुलित रखें।
पूजा: गणेश जी की आराधना करें।

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कर्क (Cancer ♋)
नाम अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
स्वभाव: भावुक | राशि स्वामी: चंद्र
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2
परिवार और सामाजिक जीवन संतुलित रहेगा।
व्यवसाय: लापरवाही से बचें।
शिक्षा: निरंतर अभ्यास लाभकारी।
कला: रचनात्मक सोच उभरेगी।
राजनीति/प्रशासन: कानूनी मामलों में सतर्कता जरूरी।
आर्थिक: अनावश्यक जोखिम न लें।
पूजा: शिव जी का जलाभिषेक करें।
🟠 सिंह (Leo ♌)
नाम अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
स्वभाव: आत्मविश्वासी | राशि स्वामी: सूर्य
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 1
मान-सम्मान में वृद्धि।
करियर: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
शिक्षा: उच्च अध्ययन में सफलता।
कला: मंचीय कला में प्रशंसा।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा, पर विवाद से बचें।
आर्थिक: पुराने कर्ज से राहत।
पूजा: सूर्य को अर्घ्य दें।

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🟢 कन्या (Virgo ♍)
नाम अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
स्वभाव: मेहनती | राशि स्वामी: बुध
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
वाणी से लाभ मिलेगा।
व्यवसाय: रुके काम पूरे होंगे।
शिक्षा: छात्रों के लिए उत्कृष्ट दिन।
कला: लेखन, शोध में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: योजनाबद्ध कार्य सराहे जाएंगे।
आर्थिक: स्थिरता बनी रहेगी।
पूजा: तुलसी पूजन करें।
🔵 तुला (Libra ♎)
नाम अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
स्वभाव: संतुलित | राशि स्वामी: शुक्र
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 6
आर्थिक दृष्टि से मजबूत दिन।
व्यवसाय: साझेदारी से लाभ।
शिक्षा: रचनात्मक विषयों में रुचि।
कला-संगीत: फैशन, अभिनय में अवसर।
राजनीति: कूटनीतिक लाभ।
आर्थिक: उधार देने से बचें।
पूजा: महालक्ष्मी की आराधना।

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🔴 वृश्चिक (Scorpio ♏)
नाम अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
स्वभाव: रहस्यमय | राशि स्वामी: मंगल
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
मेहनत का फल मिलेगा।
करियर: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
शिक्षा: शोध कार्य सफल।
कला: अभिनय और निर्देशन में लाभ।
राजनीति: रणनीति सफल।
आर्थिक: जोखिम से बचें।
पूजा: भैरव जी की पूजा करें।
🟣 धनु (Sagittarius ♐)
नाम अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
स्वभाव: दयालु | राशि स्वामी: गुरु
शुभ रंग: ग्रे | शुभ अंक: 3
मिश्रित परिणाम।
व्यवसाय: पुराने निवेश से लाभ।
शिक्षा: धैर्य आवश्यक।
कला: यात्रा से प्रेरणा।
राजनीति: वादे सोच-समझकर करें।
आर्थिक: संतुलन जरूरी।
पूजा: विष्णु जी की आराधना।

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🟢 मकर (Capricorn ♑)
नाम अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
स्वभाव: अनुशासित | राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 8
कामकाज सामान्य रहेगा।
करियर: पेंडिंग कार्य निपटाएं।
शिक्षा: निरंतरता जरूरी।
कला: धैर्य से सफलता।
राजनीति/प्रशासन: विवाद से बचें।
आर्थिक: स्वास्थ्य खर्च संभव।
पूजा: शनिदेव की पूजा करें।
🔵 कुंभ (Aquarius ♒)
नाम अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
स्वभाव: मानवतावादी | राशि स्वामी: शनि
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8
नई नौकरी के योग।
करियर: बॉस से प्रशंसा।
शिक्षा: तकनीकी क्षेत्र में प्रगति।
कला: नवाचार सफल।
राजनीति: जनसेवा से लोकप्रियता।
आर्थिक: खर्च बढ़ सकता है।
पूजा: शनिदेव व हनुमान जी।

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🟡 मीन (Pisces ♓)
नाम अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
स्वभाव: संवेदनशील | राशि स्वामी: बृहस्पति
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 7
संयम और धैर्य जरूरी।
करियर: बॉस से चुनौतियां।
शिक्षा: मार्गदर्शन लाभकारी।
कला-संगीत: आध्यात्मिक रुझान बढ़ेगा।
राजनीति: बयान सोच-समझकर दें।
आर्थिक: मेहनत का फल मिलेगा।
पूजा: गुरु बृहस्पति की आराधना।

डॉक्टरों ने जवाब दिया, बाबा से मांगी मन्नत और मिला बेटा

सोशल मीडिया से मिली सूचना, अधूरी मन्नत पूरी करने दौड़ी महिला

देवरिया में बुलडोजर कार्रवाई के बीच भावुक दृश्य: मजार टूटती देख रो पड़ी हिंदू महिला, बताया ‘बाबा की दुआ से मिला बेटा’


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया जिले में मंगलवार को अब्दुल गनी शाह की मजार पर बुलडोजर कार्रवाई के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के बीच एक हिंदू महिला अचानक मजार पर पहुंची और टूटती मजार को देखकर फूट-फूट कर रोने लगी। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह अपने बेटे के जन्म को बाबा की दुआ का नतीजा मानती है और वर्षों पुरानी मन्नत पूरी करने आई थी।
महिला की पहचान रानी तिवारी के रूप में हुई है, जो देवरिया की रहने वाली और एक निजी विद्यालय में शिक्षिका हैं। रानी ने बताया कि शादी के कई वर्षों बाद भी जब संतान नहीं हुई तो डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ने की बात कह दी थी। इस दौर में वह मानसिक रूप से बेहद टूट चुकी थीं। उसी समय उनके साथ काम करने वाली एक सहकर्मी के सुझाव पर उन्होंने अब्दुल गनी शाह की मजार पर दुआ मांगी थी।

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रानी के अनुसार, मन्नत के कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने बेटे के जन्म के बाद मजार पर चादर चढ़ाने का वादा किया था, लेकिन पारिवारिक व्यस्तताओं और समय के अभाव में वह वादा पूरा नहीं कर सकीं। जब सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें मजार पर बुलडोजर कार्रवाई की सूचना मिली, तो वह बेचैन हो उठीं और तुरंत मजार पहुंच गईं।

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मजार टूटने का दृश्य देखकर वह भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि यदि मन्नत अधूरी रह जाती तो जीवन भर इसका पछतावा रहता। इसके बाद उन्होंने मजार पर दुआ की और चादर चढ़ाने के लिए मौलवी को रकम दी। रानी ने कहा कि मजार पर कार्रवाई से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है, क्योंकि यह स्थान उनकी आस्था और विश्वास से जुड़ा रहा है।
यह घटना देवरिया में धार्मिक आस्था, मानवीय भावनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई के टकराव की एक मार्मिक तस्वीर पेश करती है, जो लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।

देवरिया में नशे में धुत्त बुलडोजर चालक का कहर, दर्जनों बाइक और कारें क्षतिग्रस्त, इलाके में अफरा-तफरी


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर में मंगलवार की देर शाम एक भयावह और सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। परशुराम चौराहे से हनुमान मंदिर की ओर जा रहा एक हुंडई बुलडोजर, जिसके चालक के नशे में धुत्त होने की आशंका जताई जा रही है, ने सड़क किनारे खड़ी और चलती दर्जनों मोटरसाइकिलों सहित कई चार पहिया वाहनों को रौंद दिया। घटना के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुलडोजर तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर आगे बढ़ता रहा और रास्ते में जो भी वाहन सामने आया, उसे कुचलता चला गया। कई मोटरसाइकिलें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कुछ कारों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोगों को चोटें आई हैं।


घटना की सूचना मिलते ही शहर कोतवाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। वहीं, घटना स्थल पर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर मार्ग को आंशिक रूप से बहाल कराया।


स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि भारी मशीनों के संचालन में लापरवाही और नशे में वाहन चलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। यदि समय रहते बुलडोजर को नहीं रोका जाता, तो बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था।
फिलहाल पुलिस बुलडोजर को कब्जे में लेकर चालक से पूछताछ कर रही है। मेडिकल परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चालक नशे की हालत में था या नहीं। प्रशासन ने मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

माघ मेला में भीषण आग, 15 टेंट व 20 दुकानें जलीं

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। माघ मेला के सेक्टर पांच स्थित नारायण शुक्ला धाम शिविर में मंगलवार शाम भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आकर 15 टेंट और आसपास की करीब 20 दुकानें जलकर खाक हो गईं। प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।
शाम करीब छह बजे शिविर से अचानक धुएं का घना गुबार और आग की लपटें उठती दिखीं। तेज हवा के चलते आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। घटना के समय शिविर के अलग-अलग टेंटों में 50 से अधिक कल्पवासी मौजूद थे, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। करीब चार किलोमीटर दूर से भी आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई देता रहा।
सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में जुट गईं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद माघ मेला प्रशासन के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल धमकी वीडियो से देवरिया में तनाव, विधायक की सुरक्षा बढ़ी

देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी को जान से मारने की धमकी, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के देवरिया सदर से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद जिले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक युवक खुलेआम विधायक का सर कलम करने की धमकी देता नजर आ रहा है। वीडियो में युवक विधायक की तस्वीर पर क्रॉस का निशान लगाकर भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करता दिख रहा है।
वायरल वीडियो में युवक यह कहते हुए नजर आता है कि वह अपने “हुजूर” के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा और यदि विधायक सामने आए तो उनका सिर काट देगा। वीडियो में धार्मिक नारे भी लगाए गए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किसने बनाया और किस उद्देश्य से वायरल किया गया। पुलिस ने वीडियो को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

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मजार प्रकरण के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि यह धमकी अब्दुल गनी शाह की मजार हटाए जाने के बाद सामने आई है। देवरिया शहर में सरकारी बंजर भूमि पर अवैध रूप से बनी इस मजार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मुद्दे को लगातार उठाया और मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाया, जिसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई कर अवैध अतिक्रमण हटाया।
विधायक शलभ मणि त्रिपाठी पहले से ही धर्मांतरण के मामलों के खिलाफ मुखर रहे हैं और कई मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई भी कराई है। मजार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद से ही वे लगातार चर्चा में हैं।

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मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद
धमकी भरे वीडियो के वायरल होने के बाद विधायक ने स्वयं एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अवैध मजार के खिलाफ हुई कार्रवाई से पूरे देवरिया की जनता संतुष्ट है और यह कदम न्यायपूर्ण है। विधायक ने यह भी उल्लेख किया कि इसी मजार से जुड़े विवाद के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक राम नगीना यादव की हत्या हुई थी और अब की कार्रवाई से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।

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अवैध कब्जेदारों पर कार्रवाई की मांग
विधायक ने प्रशासन से मांग की है कि मजार से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और वर्षों से हुए अवैध कब्जे की पूरी आर्थिक वसूली की जाए। उधर, पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

मानवीय सेवा और युवा चेतना का संगम: दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय युवा दिवस व रक्तदान शिविर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की चारों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय युवा दिवस एवं एनएसएस-रेड रिबन क्लब द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का गरिमामय और सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं को प्रेरित करना और मानवीय सेवा के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करना रहा।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रेरक कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने स्वामी विवेकानंद को भारतीय युवाओं का पथप्रदर्शक बताते हुए कहा कि उनका जीवन आत्मबल, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” के मंत्र को जीवन में अपनाने का आह्वान किया और ज्ञान को समाज व देश के कल्याण में लगाने पर बल दिया।
इसके साथ ही एनएसएस और रेड रिबन क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में गुरु गोरखनाथ हॉस्पिटल, गोरखपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने सभी निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित रूप से रक्त संग्रहण किया। प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने रक्तदान को सबसे बड़ा दान बताते हुए इसे मानवता की सच्ची सेवा कहा और युवाओं से नियमित रक्तदान की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। उन्होंने एनएसएस के उद्देश्य “मैं नहीं, आप” को रेखांकित करते हुए कहा कि रक्तदान शिविर इस भावना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को एनएसएस की सेवा भावना से जोड़ते हुए युवा शक्ति को सशक्त भारत का आधार बताया।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निधि राय, डॉ. पीयूष सिंह और डॉ. प्रदीप यादव ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद को संत के साथ-साथ क्रांतिकारी विचारक, शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी चिंतक बताया तथा नियमित रक्तदान को समाज के लिए आवश्यक बताया।
रक्तदान करने वालों में डॉ. अनिल भास्कर, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. शुभ्रांशु शेखर सिंह, अभय सिंह, अंजली सिंह, अमिता सिंह रावत, अंचल गुप्ता, कृष्ण कुमार, अर्चना कन्नौजिया, साक्षी यादव, छत्रसाल सिंह सहित अन्य रक्तदाता शामिल रहे। प्राध्यापकगण डॉ. परीक्षित सिंह, डॉ. राम प्रसाद यादव, डॉ. त्रिभुवन मिश्रा, डॉ. श्याम सिंह, संतोष त्रिपाठी, अंकित सिंह, विकास पाठक, सुजीत शर्मा, नवीन सिंह सहित अनेक शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
एनएसएस स्वयंसेवकों अनुराग मिश्रा, छत्रसाल सहित अन्य ने पंजीकरण, व्यवस्था संचालन और रक्तदाताओं की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम द्वारा रक्तदाताओं को आवश्यक परामर्श, देखभाल और जलपान की व्यवस्था की गई।

समग्र रूप से यह आयोजन युवाओं के वैचारिक उत्थान और मानवीय सेवा का सशक्त उदाहरण बना। अंत में सभी ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाने और समाज सेवा में निरंतर योगदान देने का संकल्प लिया तथा आयोजकों ने सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।