Monday, June 22, 2026
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भारत–नेपाल सांस्कृतिक सेतु के निर्माण में अवधी की भूमिका

नेपाल में अवधी संस्कृति के सशक्त संवाहक: आनन्द गिरि मायालु की प्रेरक यात्रा

प्रस्तुति-चरना गौर

नेपाल की बहुभाषिक पहचान में अवधी भाषा और संस्कृति को नई ऊर्जा देने वाले व्यक्तित्व के रूप में आनन्द गिरि मायालु आज एक सशक्त नाम बन चुके हैं। बीते डेढ़ दशक से वे अवधी भाषा, साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक चेतना को जन–जन तक पहुँचाने में निरंतर सक्रिय हैं। उनका कार्य केवल लेखन या मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, मीडिया, महिला सशक्तिकरण और भारत–नेपाल सांस्कृतिक सेतु तक विस्तृत है।
नेपाल के बांके जिले में 14 अक्टूबर 1983 को जन्मे आनन्द गिरि मायालु को अवधी भाषा विरासत में मिली। पारिवारिक संस्कारों और लोकजीवन से जुड़े मूल्यों ने उन्हें बचपन से ही अपनी मिट्टी से जोड़े रखा। समाजशास्त्र में स्नातक शिक्षा ने उनके चिंतन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। अवधी उनकी मातृभाषा है, वहीं नेपाली, हिंदी और अंग्रेज़ी पर भी उनका प्रभावी अधिकार है—जो उन्हें बहुभाषिक संवाद का स्वाभाविक प्रतिनिधि बनाता है।
रेडियो से लेकर शिक्षा तक अवधी का विस्तार
मायालु ने अवधी को केवल साहित्यिक मंचों तक सीमित नहीं रखा। रेडियो जन आवाज़ एफ.एम. में सात वर्षों तक अवधी कार्यक्रमों का संचालन कर उन्होंने समाचार, संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अवधी को जनसंचार की मुख्यधारा से जोड़ा। यह प्रयास अवधी भाषा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक है। नेपाल सरकार के पाठ्यक्रम विकास केंद्र द्वारा कक्षा 8 की अवधी पाठ्यपुस्तक में उनकी कविता का समावेश, अवधी भाषा को औपचारिक शैक्षणिक मान्यता दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त “हमरे पहिचान” नामक अवधी डॉक्यूमेंट्री के सह-निर्देशन के जरिए उन्होंने दृश्य माध्यम से लोकसंस्कृति का दस्तावेजीकरण किया।
साहित्य, संगठन और सामाजिक सशक्तिकरण
आनन्द गिरि मायालु की अब तक हजार से अधिक रचनाएँ—कविता, कहानी और लेख—नेपाली, हिंदी और अवधी में प्रकाशित हो चुकी हैं। अवधी की त्रैमासिक पत्रिकाओं “फुलवारी” और “नवा नेपाल” के संपादन से उन्होंने नए रचनाकारों को मंच और अवधी साहित्य को संस्थागत आधार दिया।
उन्होंने “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल” की स्थापना कर भाषा, कला और संस्कृति के लिए स्थायी संगठन खड़ा किया।
मोटिवेशन स्पीकर और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर के रूप में उन्होंने 2500 से अधिक थारू, मुस्लिम और दलित समुदाय की महिलाओं को आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण दिया—जहाँ संस्कृति सीधे सामाजिक बदलाव से जुड़ती दिखती है।
राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान
भारत–नेपाल मैत्री, सांस्कृतिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय काव्य आयोजनों के माध्यम से उन्होंने अवधी, मिथिला और ब्रज क्षेत्रों को साझा मंच पर जोड़ा। अवधी लोकभाषा रत्न, अवधश्री सम्मान और इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जैसे अनेक सम्मान उनके बहुआयामी योगदान की पुष्टि करते हैं।
आनन्द गिरि मायालु केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि अवधी संस्कृति के आधुनिक युग के कर्मयोगी हैं—जो परंपरा को भविष्य से जोड़ते हुए नेपाल में अवधी संस्कृति का प्रचार एक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

आज इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानिए आप हैं या नहीं

15 जनवरी 2026 का महा-राशिफल: आज किसकी बदलेगी किस्मत, कौन रहे सावधान? जानिए 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल
वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करती है। 15 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन कई राशियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, वहीं कुछ जातकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
यह राशिफल ज्योतिष पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा तैयार किया गया है,

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🔴 मेष राशि (Aries ♈)
अक्षर: अ, ल, च
कार्य/व्यवसाय: व्यापार में लाभ, नौकरी में मेहनत का फल।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए सकारात्मक दिन।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: मान-सम्मान में वृद्धि।
आर्थिक स्थिति: आय अच्छी, पर शाम को लेन-देन से बचें।
स्वास्थ्य: थकान, सेहत का ध्यान रखें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी

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🟢 वृषभ राशि (Taurus ♉)
अक्षर: ब, व, उ
कार्य/व्यवसाय: कार्यस्थल पर दबाव, पर परिणाम अनुकूल।
शिक्षा: एकाग्रता जरूरी।
कला/संगीत: सामान्य।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य से काम लें।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी

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🟡 मिथुन राशि (Gemini ♊)
अक्षर: क, छ, घ
कार्य/व्यवसाय: नए अवसर, व्यापार में उन्नति।
शिक्षा: शुभ समाचार संभव।
कला/संगीत: मंच से जुड़ने का योग।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: गणेश जी

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🔵 कर्क राशि (Cancer ♋)
अक्षर: ड, ह
कार्य/व्यवसाय: मध्याह्न सफलता।
शिक्षा: मन थोड़ा विचलित।
कला/संगीत: भावनात्मक गहराई।
राजनीति/प्रशासन: संयम रखें।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक।
शुभ रंग: दूधिया | शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: शिव जी

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🦁 सिंह राशि (Leo ♌)
अक्षर: म, ट
कार्य/व्यवसाय: पारिवारिक मतभेद कार्य पर असर डाल सकते हैं।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला/संगीत: प्रेरणा की कमी।
राजनीति/प्रशासन: बयान सोच-समझकर दें।
आर्थिक स्थिति: बजट बिगड़ सकता है।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव

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🌾 कन्या राशि (Virgo ♍)
अक्षर: प, ठ, ण
कार्य/व्यवसाय: गुप्त शत्रुओं से सतर्कता।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए शुभ।
कला/संगीत: लेखन में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: योजनाओं में सफलता।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: गणेश जी

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⚖️ तुला राशि (Libra ♎)
अक्षर: र, त
कार्य/व्यवसाय: प्रारंभिक बाधाएं।
शिक्षा: मन भटकेगा।
कला/संगीत: रुचि कम।
राजनीति/प्रशासन: संयम आवश्यक।
आर्थिक स्थिति: बड़े खर्च।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: मां दुर्गा

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🦂 वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
अक्षर: न, य
कार्य/व्यवसाय: दिन के अंत में लाभ।
शिक्षा: मध्यम।
कला/संगीत: भावनाओं पर नियंत्रण।
राजनीति/प्रशासन: वाणी पर संयम।
आर्थिक स्थिति: लाभ संभव।
शुभ रंग: मरून | शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भैरव जी

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🏹 धनु राशि (Sagittarius ♐)
अक्षर: भ, ध
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन या नया अवसर।
शिक्षा: सकारात्मक।
कला/संगीत: उत्साह।
राजनीति/प्रशासन: विरोधियों से सतर्क रहें।
आर्थिक स्थिति: ठीक-ठाक।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: विष्णु जी

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🐐 मकर राशि (Capricorn ♑)
अक्षर: ख, ज
कार्य/व्यवसाय: खर्च बढ़ेगा।
शिक्षा: मानसिक दबाव।
कला/संगीत: रुचि कम।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य रखें।
आर्थिक स्थिति: बजट डगमगा सकता है।
शुभ रंग: स्लेटी | शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनि देव

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🌊 कुम्भ राशि (Aquarius ♒)
अक्षर: ग, स
कार्य/व्यवसाय: रुके काम पूरे।
शिक्षा: सफलता।
कला/संगीत: नई पहचान।
राजनीति/प्रशासन: प्रभावशाली मुलाकात।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: शिव जी

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🐟 मीन राशि (Pisces ♓)
अक्षर: द, च
कार्य/व्यवसाय: यात्रा योग।
शिक्षा: चुनौतियां।
कला/संगीत: आत्मचिंतन।
राजनीति/प्रशासन: संतुलन जरूरी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
शुभ रंग: पीच | शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: श्रीकृष्ण

इतिहास की तारीखें क्यों गढ़ती हैं राष्ट्र की स्मृति?

15 जनवरी: इतिहास के वे महान व्यक्तित्व जिनके निधन ने देश को गहरी छाया में ढक दिया

भारतीय इतिहास में 15 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि वह दिन है जब राजनीति, साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता और राष्ट्रसेवा से जुड़े अनेक महान व्यक्तित्वों का अवसान हुआ। इन विभूतियों ने अपने जीवनकाल में जो योगदान दिया, वह आज भी भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक चेतना को दिशा देता है। आइए जानते हैं 15 जनवरी को हुए महत्वपूर्ण निधन और उनके जीवन, जन्मस्थल व राष्ट्रहित में योगदान के बारे में विस्तार से।

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रामेश्वर ठाकुर (निधन: 15 जनवरी 2015)
रामेश्वर ठाकुर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी राजनेता थे। उनका जन्म बिहार के मुंगेर ज़िले में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे कई बार राज्यसभा सदस्य रहे और केरल तथा मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी बने। सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा उनके राजनीतिक जीवन का मूल मंत्र रहा। उन्होंने हमेशा संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों की वकालत की। सरल व्यक्तित्व और सैद्धांतिक राजनीति के लिए उन्हें सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।

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नामदेव ढसाल (निधन: 15 जनवरी 2014)
नामदेव ढसाल का जन्म महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में हुआ था। वे मराठी साहित्य के क्रांतिकारी कवि, लेखक और प्रखर मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। वे दलित पैंथर आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उनकी कविताओं में सामाजिक अन्याय, जातिगत उत्पीड़न और शहरी यथार्थ का तीखा चित्रण मिलता है। उन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि प्रतिरोध का हथियार बनाया। मराठी साहित्य को नई भाषा, नया तेवर और नई चेतना देने में उनका योगदान अमिट है।

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होमाई व्यारावाला (निधन: 15 जनवरी 2012)
होमाई व्यारावाला भारत की पहली महिला फ़ोटो पत्रकार थीं। उनका जन्म गुजरात के नवसारी ज़िले में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों तक ऐतिहासिक क्षणों को अपने कैमरे में कैद किया। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, संविधान सभा और अंतरराष्ट्रीय नेताओं की दुर्लभ तस्वीरें उनकी विरासत हैं। पुरुष-प्रधान पत्रकारिता जगत में उन्होंने महिलाओं के लिए नई राह खोली और भारतीय फोटो जर्नलिज़्म को वैश्विक पहचान दिलाई।
तपन सिन्हा (निधन: 15 जनवरी 2009)
तपन सिन्हा का जन्म बंगाल के हावड़ा ज़िले में हुआ था। वे भारतीय सिनेमा के संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़े महान फिल्म निर्देशक थे। उनकी फिल्मों में आम आदमी का संघर्ष, नैतिक मूल्य और सामाजिक विसंगतियां प्रमुख विषय रहे। ‘कबुलीवाला’, ‘एक डॉक्टर की मौत’ और ‘सफेद हाथी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने व्यावसायिकता से हटकर सिनेमा को समाज सुधार का माध्यम बनाया।
मोहम्मद सलीम (निधन: 15 जनवरी 2004)
मोहम्मद सलीम वामपंथी राजनीति के सशक्त चेहरा थे। उनका जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ। वे 16वीं लोकसभा के सांसद रहे और श्रमिकों, अल्पसंख्यकों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। संसद में उनकी स्पष्टवादिता और जनपक्षधर सोच उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उन्होंने लोकतंत्र में वैचारिक विविधता और सामाजिक समानता को मजबूती प्रदान की।
गुलज़ारीलाल नन्दा (निधन: 15 जनवरी 1998)
गुलज़ारीलाल नन्दा का जन्म पंजाब (अब पाकिस्तान के सियालकोट) में हुआ था। वे भारत के कार्यकारी प्रधानमंत्री रहे और देश को संक्रमणकाल में स्थिर नेतृत्व प्रदान किया। श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने श्रमिक कानूनों को सशक्त किया। सादगी, ईमानदारी और निष्ठा उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम माना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।
आर. आर. दिवाकर (निधन: 15 जनवरी 1990)
आर. आर. दिवाकर का जन्म कर्नाटक राज्य में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। वे आंध्र प्रदेश और बिहार के राज्यपाल भी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया। उनका जीवन राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक आदर्शों को समर्पित रहा।
सदाशिवराव भाऊ (निधन: 15 जनवरी 1761)
सदाशिवराव भाऊ का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। वे मराठा साम्राज्य के वीर सेनानायक और पेशवा बाजीराव प्रथम के भतीजे थे। पानीपत की तीसरी लड़ाई में उन्होंने मराठा सेना का नेतृत्व किया और वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस, रणनीति और राष्ट्ररक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है।

किसान से संविधान तक: भारत के राष्ट्र-निर्माण पर सांप्रदायिक हिंसा की छाया

भारत का राष्ट्र-निर्माण विमर्श बनाम सामाजिक यथार्थ:- किसान,सांप्रदायिक हिंसा और लोकतांत्रिक परीक्षा भूमिका:- एक समग्र विश्लेषण

गोंदिया – 14 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित पोंगल महोत्सव के मंच से भारतीय प्रधानमंत्री का यह कथन कि राष्ट्र निर्माण में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है,केवल एकसांस्कृतिक या औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना की ओर संकेत करने वाला राजनीतिक-वैचारिक संदेश था। पोंगल, जो कृषि, प्रकृति और श्रम के सम्मान का उत्सव है,उसी भारत का प्रतीक है जिसकी जड़ें खेतों में हैं। किंतु इसी कालखंड में प्रकाशित सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेक्युलरिज़्म (सीएसएसएस) की ताज़ा मॉनिटरिंग रिपोर्ट एक ऐसे भारत की तस्वीर पेश करती है,जहाँ सांप्रदायिक दंगों में गिरावट के बावजूद मॉब लिंचिंग, नफरत आधारित अपराध और पहचान- केंद्रित हिंसा अब भी लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है,जिसकी सामाजिक संरचना बहुधर्मी बहुभाषी और बहु सांस्कृतिक ताने-बाने से निर्मित है। ऐसे समाज में सांप्रदायिक सौहार्द केवल आंतरिक स्थिरता का प्रश्न नहीं,बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक विश्व के लिए एक नैतिक और राजनीतिक संकेतक भी है, इसलिए, यह लेख इन्हीं दो समानांतर सच्चाइयों,आशा और चिंता,के बीच भारत के समकालीन सामाजिक- राजनीतिक परिदृश्य का अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से विश्लेषण प्रस्तुत करता है।यह लेख सीएसएसएस की रिपोर्टिंग पर आधारित है इसकी सटीकता को प्रमाणित नहीं किया जा सकता। 

साथियों बात अगर हम कृषि और राष्ट्र-निर्माण: भारतीय सभ्यता की आधारशिला इसको समझनें की करें तोभारत में कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत संरचना है। सिंधु घाटी से लेकर आधुनिक भारत तक, किसान समाज की स्थिरता, खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक निरंतरता का मूल आधार रहा है।प्रधानमंत्री का पोंगल मंच से दिया गया वक्तव्य इसी ऐतिहासिक सत्य को पुनःरेखांकित करता है। वैश्विक संदर्भ में देखें तो आज जब विकसित देश भी खाद्य आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा मान रहे हैं,भारत का किसान- केंद्रित विमर्श उसे एक स्थायी विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत करता है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ जैसे एफएओ और विश्व बैंक भी मानती हैं कि भारत की कृषि व्यवस्थातमाम चुनौतियों के बावजूद,वैश्विक खाद्य संकट के दौर में एक स्थिर स्तंभ बनी हुई है।पोंगल केवल तमिल संस्कृति का पर्व नहीं,बल्कि यह श्रम, प्रकृति और समुदाय केसामूहिक उत्सव का प्रतीक है। जब प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति इस पर्व के माध्यम से किसानों को राष्ट्र-निर्माण का नायक बताते हैं, तो यह संदेश केवल घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक भी होता है। यह भारत को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत करता है जहाँ विकास का मॉडल जमीनी स्तर से जुड़ा है। किंतु यही समावेशी सांस्कृतिक संदेश तब कमजोर पड़ता है,जब समाज के भीतर पहचान- आधारित हिंसा और नफरत की राजनीति सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुँचाती है। सीएसएसएस की 2025 की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार भारत में दर्ज बड़े सांप्रदायिक दंगों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है।यह एक सकारात्मक संकेत है और इसे कानून- व्यवस्था में सुधार,त्वरित प्रशासनिक हस्तक्षेप और न्यायिक सक्रियता से जोड़ा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तरपर यह भारत के लिए एक राहतकारी आंकड़ा है, क्योंकि लंबे समय से वैश्विक मानवाधिकार संगठनों द्वारा भारत में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। किंतु रिपोर्ट का दूसरा पक्ष अधिक चिंताजनक है हिंसा समाप्त नहीं हुई है, बल्कि उसने नए, अधिक विकेंद्रीकृत और अप्रत्याशित रूप धारण कर लिए हैं।मॉब लिंचिंग:-भीड़ का उभार और राज्य की परीक्षा मॉब लिंचिंग आधुनिक लोकतंत्र की सबसे भयावह विफलताओं में से एक मानी जाती है। भारत में यह हिंसा अक्सर अफवाह,पहचान और सामाजिक पूर्वाग्रहों से प्रेरित होती है।सीएसएसएस रिपोर्ट बताती है कि 2025 में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ भले ही बड़े दंगों की तरह सुर्खियों में न रही हों, लेकिन उनकी सामाजिक क्षति कहीं अधिक गहरी रही है।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श में मॉब लिंचिंग को अनऑफिशियल जस्टिस सिस्टम के रूप में देखा जाता है, जहाँ राज्य की वैधता और कानून का शासन सीधे चुनौती के घेरे में आ जाता है।नफरत आधारित अपराध:- वैश्विक प्रवृत्ति,भारतीय संदर्भ नफरत आधारित अपराध केवल भारत की समस्या नहीं हैं।अमेरिका यूरोप और एशिया के कई हिस्सों में यह एक उभरती वैश्विक प्रवृत्ति है। किंतु भारत में इसकी जटिलता इस कारण बढ़ जाती है क्योंकि यहाँ पहचान, धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र, इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। सीएसएसएस रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नफरत अपराधों का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया से उपजी गलत सूचनाओं और राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़ा रहा। यह स्थिति भारत के डिजिटल लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।पहचान:-आधारित हिंसा और सामाजिक विखंडन पहचान- केंद्रित हिंसा का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह समाज को स्थायी रूप से विभाजित कर देती है। किसान, मजदूर और निम्न- आय वर्ग,जिनका राष्ट्र- निर्माण में सबसे बड़ा योगदान है, वही वर्ग अक्सर ऐसी हिंसा का शिकार बनता है। यह विरोधाभास भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांत,समानता और बंधुत्व को कमजोर करता है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि यदि पहचान-आधारित हिंसा पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता दोनों को प्रभावित कर सकती है।

साथियों बात अगर हम राज्य, नीति और नैतिक जिम्मेदारी इसको समझने की करें तो, प्रधानमंत्री का किसान- सम्मान संदेश तभी सार्थक होगा जब राज्य समान रूप से हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे।सीएसएसएस रिपोर्ट अप्रत्यक्ष रूप से यह सवाल उठाती है कि क्या कानून का कार्यान्वयन हर स्तर पर निष्पक्ष है।अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक मानकों के अनुसार, हिंसा की रोकथाम केवल पुलिसिंग का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा,सामाजिक संवाद और राजनीतिक जिम्मेदारी का भी प्रश्न है। भारत के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है,या तो वह अपने विकास मॉडल को सामाजिक न्याय के साथ जोड़े, या फिर आर्थिक प्रगति के बावजूद सामाजिक असंतोष से जूझता रहे। 

साथियों बात अगर हम वैश्विक छवि और भारत की सॉफ्ट पावर इसको समझने की करें तो,भारत आज स्वयं को विश्व गुरु, ग्लोबल साउथ के नेता और लोकतांत्रिक आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। किसान-केंद्रित सांस्कृतिक आयोजनों और विकासशील अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द इसकी सॉफ्ट पावर का अहम हिस्सा है। किंतु मॉब लिंचिंग और नफरत अपराधों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस छवि को नुकसान पहुँचाती हैं। सीएसएसएस जैसी रिपोर्टें वैश्विक नीति- निर्माताओं और निवेशकों के लिए संकेतक बन जाती हैं। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि  एक समग्र राष्ट्र- निर्माण की आवश्यकता,14 जनवरी 2026 को पोंगल मंच से दिया गया प्रधानमंत्री का वक्तव्य भारत की आत्मा की आवाज़ है, एक ऐसा भारत जो किसान, श्रम और प्रकृति के सम्मान पर खड़ा है।किंतु सीएसएसएस की 2025 की रिपोर्ट यह याद दिलाती है कि राष्ट्र-निर्माण केवल आर्थिक या सांस्कृतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सुरक्षा की भी कसौटी है। जब तक किसान की मेहनत और नागरिक की सुरक्षा समान रूप से संरक्षित नहीं होंगी, तब तक भारत का राष्ट्र-निर्माण अधूरा रहेगा। अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से भी भारत की सफलता इसी संतुलन में निहित है,विकास के साथ मानवीय गरिमा, और सांस्कृतिक गर्व के साथ सामाजिक सद्भाव।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया

चोरी की बाइक के साथ एक गिरफ्तार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक महराजगंज के निर्देश पर जनपद में वांछित एवं वारंटी अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत फरेंदा पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज के कुशल मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी फरेंदा के पर्यवेक्षण में थाना फरेंदा पुलिस ने एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है।
थाना फरेंदा में पंजीकृत अभियोग संख्या 005/2026, धारा 303(2), 317(2) भारतीय न्याय संहिता से संबंधित वांछित अभियुक्त आजाद अंसारी पुत्र सलीम अंसारी, निवासी ग्राम मठिया, थाना तुर्कपट्टी, जनपद कुशीनगर, उम्र लगभग 24 वर्ष को पुलिस ने बुधवार को छतरी पुल, कस्बा फरेंदा के पास लगभग 1:30 बजें गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार अभियुक्त के कब्जे से एक यामाहा मोटरसाईकिल UP 56- AU 5507 बरामद की गई है। बरामदगी के बाद अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए चालान कर महाराजगंज न्यायालय भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जनपद में अपराध नियंत्रण एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उप निरीक्षक अजय कुमार वर्मा, कांस्टेबल विनय कुमार मौर्य तथा कांस्टेबल आज्ञाराम यादव शामिल रहें।

“सत्य, करुणा और विष्णु-भक्ति: कलियुग के लिए शास्त्रोक्त अमर संदेश”

“जब भक्त का विश्वास बना ढाल: श्रीहरि विष्णु की वह शास्त्रोक्त लीला जहाँ सत्य के लिए स्वयं ईश्वर अवतरित हुए”
📿 शास्त्रोक्त कथा धर्म, करुणा और नारायण-स्मरण की अमर विजय
धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन का वह दीप है जो अंधकार में भी मनुष्य को दिशा देता है। शास्त्र कहते हैं—
“धर्मो रक्षति रक्षितः”
अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म स्वयं उसकी रक्षा करता है। हमने जाना कि ईश्वर मंदिर की मूर्ति तक सीमित नहीं, बल्कि उस करुण हृदय में वास करते हैं जो सत्य, दया और निस्वार्थ भाव से भरा हो।
अब एपिसोड–10 में वही विचार शास्त्रों की गहराई से निकलकर श्रीहरि विष्णु की दिव्य कथा के रूप में हमारे सामने आता है—एक ऐसी कथा, जो आज के युग में भी उतनी ही प्रासंगिक है।

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🌸 “सत्य, करुणा और विष्णु-भक्ति: कलियुग के लिए शास्त्रोक्त अमर संदेश”
विष्णु पुराण, भागवत पुराण और नारायणीय उपनिषद में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालक के रूप में वर्णित किया गया है।
वे न केवल संसार का संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब वे स्वयं किसी न किसी रूप में प्रकट होते हैं।
श्लोक—
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥”
यह केवल वचन नहीं, बल्कि ईश्वरीय प्रतिज्ञा है।

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📖 कथा का प्रारंभ: एक साधारण भक्त, असाधारण विश्वास
बहुत प्राचीन काल की बात है। सरस्वती नदी के तट पर एक छोटा सा आश्रम था।
वहाँ रहने वाला एक ब्राह्मण—नाम था सत्यव्रत।
न उसके पास अपार धन था, न राजाश्रय, न ही कोई चमत्कारी शक्ति।
उसके पास केवल एक चीज थी—

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👉 अडिग विश्वास और “नारायण” का अखंड स्मरण।
प्रतिदिन वह कहता—
“नारायण ही सब कुछ हैं।
वही माता, वही पिता, वही सखा, वही रक्षक।”
⚔️ अधर्म का उदय और सत्य की परीक्षा
उस क्षेत्र का राजा धीरे-धीरे अहंकार और अधर्म में डूब चुका था।
ब्राह्मणों पर कर, आश्रमों की भूमि पर कब्जा और धर्मग्रंथों का अपमान—यह सब आम हो गया था।
एक दिन राजा के सैनिक आश्रम पहुँचे।
आदेश था—आश्रम की भूमि राजकोष में दर्ज होगी।
सत्यव्रत ने विनम्र स्वर में कहा—
“यह भूमि मेरी नहीं, नारायण की है।
मैं इसे किसी अन्य को नहीं दे सकता।”
सैनिक हँसे, धमकाया, मारा-पीटा, पर सत्यव्रत का स्वर नहीं डगमगाया।

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🙏 जब मनुष्य हारता है, तब ईश्वर आगे आते हैं
अंततः सत्यव्रत को बंदी बना लिया गया।
कारागार में डाल दिया गया—भूखा, घायल, अकेला।
पर वह अकेला नहीं था।
कारागार की अंधेरी कोठरी में भी वह बस एक ही शब्द जप रहा था—
“नारायण… नारायण… नारायण…”
भागवत पुराण कहता है—
“नारायण-स्मरण मात्रेण मुक्तिर्भवति निश्चितम्।”
श्रीहरि की लीला: धर्म की प्रत्यक्ष विजय
उस रात नगर में अद्भुत घटनाएँ होने लगीं।
राजमहल काँप उठा, सैनिक भयभीत हो उठे, आकाश में दिव्य प्रकाश फैल गया।
राजा के स्वप्न में चतुर्भुज श्रीहरि विष्णु प्रकट हुए—
शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए।
गंभीर स्वर में कहा—
“जिसने मेरे भक्त को कष्ट दिया,
उसने स्वयं मुझे ललकारा है।”
प्रातः होते ही राजा को अपनी भूल का बोध हुआ।
वह स्वयं कारागार पहुँचा, सत्यव्रत के चरणों में गिर पड़ा।

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🌼 समानता और संदेश: आज के युग के लिए कथा का अर्थ
यह कथा केवल अतीत नहीं है।
यह आज के समाज के लिए आईना है।
आज भी—
जब कोई सत्य के लिए खड़ा होता है
जब कोई निस्वार्थ भाव से धर्म निभाता है
जब कोई अकेला होकर भी ईश्वर पर भरोसा करता है
👉 श्रीहरि विष्णु अदृश्य रूप से उसके साथ खड़े होते हैं।
🔔 एपिसोड–10 का केंद्रीय शास्त्रोक्त संदेश
धर्म पूजा से नहीं, आचरण से जीवित रहता है।
नारायण-स्मरण सबसे बड़ा कवच है।
ईश्वर शक्ति नहीं, विश्वास से प्रकट होते हैं।
सत्य के मार्ग पर चलने वाला कभी पराजित नहीं होता।
🌺 भावनात्मक समापन
जब संसार साथ छोड़ देता है,
जब अपने भी पराए हो जाते हैं,
तब यदि कोई साथ रहता है—
तो वह है “नारायण का नाम”।
जो आज भी कहता है—
“हे श्रीहरि, तू ही मेरा सहारा है।”
वह कभी, किसी भी काल में अकेला नहीं होता।

बौलिया पोखरा सुंदरीकरण को मिली मंजूरी, 48 लाख से संवरेगा ऐतिहासिक जलस्रोत


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।बृजमनगंज नगर पंचायत क्षेत्र के सहजनवां बाबू रोड स्थित वार्ड संख्या–2 में अवस्थित प्राचीन बौलिया पोखरा अब एक नई पहचान की ओर अग्रसर है। शासन की ओर से बौलिया पोखरा सुंदरीकरण के लिए 48 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत होने के बाद नगर क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। वर्षों से उपेक्षित इस ऐतिहासिक जलस्रोत को अब उसका पुराना गौरव लौटाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है।
बौलिया पोखरा केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि नगर की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा रहा है। पारंपरिक विवाह संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और लोक परंपराएं इस पोखरे से जुड़ी रही हैं। पीढ़ियों से यह स्थान नगरवासियों की आस्था और सामूहिक स्मृतियों का केंद्र रहा है।
अतिक्रमण और उपेक्षा से बिगड़ चुकी थी स्थिति
पिछले कई वर्षों से अवैध कब्जे, नियमित सफाई के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बौलिया पोखरा का स्वरूप लगातार बिगड़ता चला गया। जलभराव, गंदगी और संकुचन के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही थी। स्थानीय नागरिक लंबे समय से बौलिया पोखरा सुंदरीकरण की मांग उठाते आ रहे थे।
शासन की स्वीकृति के बाद शुरू होगी विकास प्रक्रिया

नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी सुरभि मिश्रा द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण के बाद पोखरे के विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है। स्वीकृत बजट से पोखरे का समग्र सौंदर्यीकरण, जलसंरक्षण, सफाई, पाथवे और पर्यावरण अनुकूल विकास कार्य कराए जाएंगे।
पर्यावरण और संस्कृति दोनों को मिलेगा लाभ
अधिशासी अधिकारी ने बताया कि बौलिया पोखरा सुंदरीकरण से न केवल पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी, बल्कि नगर की सुंदरता भी बढ़ेगी। यह स्थल भविष्य में धार्मिक, सामाजिक आयोजनों और नागरिक सहभागिता का प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे आदर्श नगर की अवधारणा को बल मिलेगा।
निरीक्षण के दौरान सभासद जितेंद्र कुमार, इसरार अहमद, कासिम खान, दीपक विश्वकर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने इस निर्णय को नगर विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। नागरिकों का मानना है कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगी।
अब नगरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बौलिया पोखरा सुंदरीकरण का कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो, ताकि वर्षों से उपेक्षित यह ऐतिहासिक जलस्रोत फिर से अपनी पहचान और गरिमा प्राप्त कर सके।

कला, राजनीति और खेल—एक ही तारीख ने दिए भारत को इतने रत्न कैसे?

15 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: इतिहास, कला, राजनीति और खेल जगत के वे नाम जिन्होंने भारत को नई पहचान दी

भारत का इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों से बनता है जिन्होंने अपने कर्म, प्रतिभा और संघर्ष से समाज को दिशा दी। 15 जनवरी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिस दिन राजनीति, सिनेमा, साहित्य, खेल और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई महान लोगों का जन्म हुआ। आइए जानते हैं 15 जनवरी को जन्मे उन व्यक्तित्वों के बारे में, जिनका योगदान आज भी देश और समाज को प्रेरणा देता है।

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नील नितिन मुकेश (जन्म: 15 जनवरी 1982)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
नील नितिन मुकेश हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता हैं। वे प्रसिद्ध पार्श्वगायक नितिन मुकेश और महान गायक मुकेश के पौत्र हैं। फिल्म जॉनी गद्दार से उन्होंने अभिनय की दुनिया में सशक्त पहचान बनाई। नील ने रोमांटिक, थ्रिलर और विलेन जैसे विविध किरदार निभाकर यह साबित किया कि वे केवल विरासत के सहारे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से आगे बढ़े हैं। भारतीय सिनेमा में प्रयोगधर्मी भूमिकाओं को अपनाकर उन्होंने युवा कलाकारों के लिए एक अलग राह बनाई।

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सरदूल सिकंदर (जन्म: 15 जनवरी 1961)
जन्म स्थान: करतारपुर, जालंधर जिला, पंजाब, भारत
सरदूल सिकंदर पंजाबी लोक और सूफी संगीत के ऐसे गायक थे, जिनकी आवाज़ में पंजाब की मिट्टी बसती थी। “दिल नूं” और “मिट्टी दा बावे” जैसे गीतों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने पंजाबी संगीत को वैश्विक मंच पर पहुंचाया और पारंपरिक लोक संगीत को नई पीढ़ी से जोड़ा। उनका योगदान केवल संगीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पंजाबी संस्कृति को सहेजने का कार्य भी किया।

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भानुप्रिया (जन्म: 15 जनवरी 1957)
जन्म स्थान: राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश, भारत
भानुप्रिया दक्षिण भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री हैं। उन्होंने तेलुगु, तमिल, मलयालम और हिंदी फिल्मों में अभिनय कर बहुभाषी पहचान बनाई। सशक्त महिला किरदारों के लिए जानी जाने वाली भानुप्रिया ने भारतीय सिनेमा में स्त्री पात्रों को गरिमा और गहराई दी। अभिनय के साथ-साथ वे प्रशिक्षित नृत्यांगना भी हैं, जिसने उनके अभिनय को और प्रभावशाली बनाया।

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मायावती (जन्म: 15 जनवरी 1956)
जन्म स्थान: दिल्ली, भारत
मायावती भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। वे उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। दलित समाज को राजनीतिक सशक्तिकरण देने में उनका योगदान ऐतिहासिक है। सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई में उन्होंने वंचित वर्गों को नई आवाज़ दी और भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूती दी।
संचमान लिम्बू (जन्म: 15 जनवरी 1947)
जन्म स्थान: पश्चिम सिक्किम, सिक्किम, भारत
संचमान लिम्बू सिक्किम के चौथे मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने पहाड़ी राज्य सिक्किम में प्रशासनिक स्थिरता, सामाजिक समरसता और विकास को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े कई अहम कदम उठाए गए। वे सिक्किम के राजनीतिक इतिहास में संतुलित और जनोन्मुखी नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं।

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हरप्रसाद दास (जन्म: 15 जनवरी 1946)
जन्म स्थान: कटक, ओडिशा, भारत
हरप्रसाद दास उड़िया भाषा के प्रसिद्ध निबंधकार, कवि और स्तंभकार हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज, राजनीति और संस्कृति पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उड़िया साहित्य को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके लेख आज भी बौद्धिक विमर्श का हिस्सा हैं।
चुनी गोस्वामी (जन्म: 15 जनवरी 1938)
जन्म स्थान: किशोरगंज, ढाका (तत्कालीन ब्रिटिश भारत)
चुनी गोस्वामी भारत के महान फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान भी रहे। खेल भावना, अनुशासन और नेतृत्व के कारण उन्होंने भारतीय फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बाद में उन्होंने क्रिकेट में भी अपना योगदान दिया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।

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वी. एस. रमादेवी (जन्म: 15 जनवरी 1934)
जन्म स्थान: कर्नूल जिला, आंध्र प्रदेश, भारत
वी. एस. रमादेवी भारत की प्रथम महिला मुख्य चुनाव आयुक्त रहीं। उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत किया। प्रशासनिक सेवा में उनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता आज भी मिसाल मानी जाती है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनका योगदान प्रेरणादायक है।
जगन्नाथ पहाड़िया (जन्म: 15 जनवरी 1932)
जन्म स्थान: भरतपुर, राजस्थान, भारत
जगन्नाथ पहाड़िया राजस्थान के नौवें मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राज्य में सामाजिक कल्याण योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान दिया। ग्रामीण विकास और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे।

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खाशाबा जाधव (जन्म: 15 जनवरी 1926)
जन्म स्थान: सतारा जिला, महाराष्ट्र, भारत
खाशाबा जाधव भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता पहलवान थे। उन्होंने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका संघर्ष भारतीय खेल इतिहास की प्रेरक कहानी है।
बाबासाहेब भोसले (जन्म: 15 जनवरी 1921)
जन्म स्थान: सांगली, महाराष्ट्र, भारत
बाबासाहेब भोसले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री थे। वे सामाजिक न्याय और श्रमिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे। उनका राजनीतिक जीवन जनसेवा को समर्पित रहा।

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ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफ़िर (जन्म: 15 जनवरी 1899)
जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत
वे स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और पंजाबी साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं में देशभक्ति और सामाजिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने पंजाब की राजनीतिक और साहित्यिक धारा को नई दिशा दी।
सैफ़ुद्दीन किचलू (जन्म: 15 जनवरी 1888)
जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत
सैफ़ुद्दीन किचलू भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। वे जलियांवाला बाग आंदोलन से जुड़े रहे और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका जीवन त्याग और साहस का प्रतीक है।

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अश्विनी कुमार दत्त (जन्म: 15 जनवरी 1856)
जन्म स्थान: बारीसाल, बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश)
अश्विनी कुमार दत्त महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक और शिक्षाविद थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार में अहम भूमिका निभाई। उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक नींव को मजबूत करता है।

साइबर ठगों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को 1.62 लाख किये वापस

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को थाना चिलुआताल पुलिस व साइबर सेल की तत्परता से बड़ी राहत मिली है। साइबर ठगों द्वारा पेंशन बंद होने और सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने के नाम पर की गई ठगी में पीड़ित से हड़पे गए ₹1,62,872.83 की पूरी धनराशि पुलिस ने वापस दिला दी है।
पीड़ित द्वारा थाना चिलुआताल में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की गई थी कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने स्वयं को अधिकारी बताते हुए उनसे धोखाधड़ी की और अलग-अलग माध्यमों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। शिकायत मिलते ही थानाध्यक्ष सूरज सिंह के नेतृत्व में थाना चिलुआताल की साइबर सेल टीम ने त्वरित कार्रवाई की।
पुलिस टीम द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर तत्काल शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद संबंधित खातों में ट्रांजैक्शन को होल्ड कराया गया। तत्पश्चात माननीय न्यायालय के आदेश पर पीड़ित के खाते में 1,62,872.83 (एक लाख बासठ हजार आठ सौ बहत्तर रुपये तिरासी पैसे) की धनराशि वापस कराई गई।
पुलिस ने बताया कि ठगी की शेष धनराशि की बरामदगी के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई करने वाली टीम
सूरज सिंह, थानाध्यक्ष, थाना चिलुआताल शैलेन्द्र कुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सच्चिदानन्द पाण्डेय,उपनिरीक्षक (साइबर नोडल)अभिराम, कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी ,सत्येन्द्र चौधरी, आरक्षी
दीपक यादव प्रथम, आरक्षी
विकास मौर्या, आरक्षी
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाना/पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

अंक ज्योतिष से जानिए करियर और धन का रहस्य

15 जनवरी 2026 का अंक राशिफल: आज आपका मूलांक खोलेगा भाग्य के बड़े राज, जानिए पूरा भविष्यफल

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत


न्यूमेरेलॉजी यानी अंक ज्योतिष की दुनिया मूलांक के इर्द-गिर्द घूमती है। जन्मतिथि के आधार पर निकलने वाला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, सोच, निर्णय और आज के दिन के प्रभाव को दर्शाता है। जिस तरह ज्योतिष में राशि का महत्व होता है, उसी तरह अंक ज्योतिष में मूलांक जीवन की दिशा तय करता है।

आज 15 जनवरी 2026 के दिन सभी मूलांकों पर ग्रहों और अंकों का विशेष प्रभाव रहेगा। आइए जानते हैं विस्तृत अंक राशिफल, जो आपके कार्य, व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति, कला, प्रशासन और आर्थिक जीवन को स्पष्ट करेगा।

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मूलांक 1 (जिनका जन्म 1, 10, 19, 28 को हुआ हो)
आज आपका आत्मविश्वास मजबूत रहेगा, लेकिन मन में अनावश्यक चिंता भी रह सकती है। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
कार्य/व्यवसाय: नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में किसी मित्र के सहयोग से लाभ होगा।
शिक्षा: विद्यार्थियों को एकाग्रता बनाए रखनी होगी।
कला/संगीत: रचनात्मक सोच बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, अधिकारी वर्ग से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेंगे, लेकिन आय के नए स्रोत बन सकते हैं।
स्वास्थ्य: संतान की सेहत पर ध्यान दें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
मूलांक 2 (जन्म 2, 11, 20, 29)
आज मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।
कार्य/व्यवसाय: सहयोग से लाभ होगा। यात्रा के योग हैं।
शिक्षा: पढ़ाई के लिए यात्रा संभव।
कला/संगीत: रुचि बढ़ेगी, मन प्रसन्न रहेगा।
राजनीति: छवि को लेकर सतर्क रहें।
आर्थिक स्थिति: खर्च संतुलित रखें।
स्वास्थ्य: खानपान पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: मां दुर्गा की आराधना करें।

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मूलांक 3 (जन्म 3, 12, 21, 30)
आत्मविश्वास के साथ संयम जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान मिलेगा।
शिक्षा: धैर्य से काम लें, परिणाम बेहतर होंगे।
कला/संगीत: लेखन और कला में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: वाहन या रख-रखाव पर खर्च संभव।
स्वास्थ्य: जीवनसाथी की सेहत पर ध्यान दें।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: गुरु बृहस्पति का स्मरण करें।
मूलांक 6 (जन्म 6, 15, 24)
आज संयम सबसे बड़ा उपाय है।
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में स्थान परिवर्तन या बदलाव के संकेत।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, अभ्यास जरूरी।
कला/संगीत: मन अशांत रहेगा, लेकिन अभ्यास लाभ देगा।
राजनीति: बयानबाजी से बचें।
आर्थिक स्थिति: धन का संतुलन रखें।
स्वास्थ्य: क्रोध से नुकसान हो सकता है।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: माता लक्ष्मी की पूजा करें।

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मूलांक 7 (जन्म 7, 16, 25)
आज आत्मविश्वास थोड़ा कमजोर रह सकता है।
कार्य/व्यवसाय: कार्यों में देरी संभव।
शिक्षा: रुकावटें आएंगी, लेकिन प्रयास जारी रखें।
कला/संगीत: आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य से काम लें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
स्वास्थ्य: पिता की सेहत पर ध्यान दें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान शिव की आराधना करें।
मूलांक 8 (जन्म 8, 17, 26)
आत्मविश्वास रहेगा, लेकिन मन में बेचैनी हो सकती है।
कार्य/व्यवसाय: बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ेगी।
शिक्षा: शोध और तकनीकी विषयों में लाभ।
कला: गंभीर विषयों में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर, खर्च नियंत्रित रखें।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा: शनि देव का स्मरण करें।

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मूलांक 9 (जन्म 9, 18, 27)
आज ऊर्जा और उत्साह से भरा दिन है।
कार्य/व्यवसाय: कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव, लाभदायक रहेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के संकेत।
कला/संगीत: मंच से जुड़ने के अवसर।
राजनीति: लोकप्रियता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक होंगे, लेकिन संतोष रहेगा।
स्वास्थ्य: संतान सुख में वृद्धि।
शुभ रंग: केसरिया
शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी की उपासना करें।

दान, तपस्या और वचन: राजा बलि की अमर गाथा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। धार्मिक कथाएं केवल अतीत की स्मृतियां नहीं होतीं, बल्कि ये मानव जीवन को दिशा देने वाले शाश्वत संदेश भी हैं। ऐसी ही प्रेरणादायी कथा है दानवीर राजा बलि की, जिनकी तपस्या, दानशीलता और वचनबद्धता को घुघली क्षेत्र के लक्ष्मीपुर शिवाला स्थित दल सिंगार भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान आचार्य रामरक्षा उपाध्याय ने भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
आचार्य रामरक्षा उपाध्याय ने बताया कि सतयुग में ऋषि कश्यप के वंशज, भक्त प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र राजा बलि अपनी कठोर तपस्या और यज्ञों के प्रभाव से इतने शक्तिशाली हो गए कि उन्होंने तीनों लोकों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। उनकी कीर्ति, दानशीलता और पराक्रम का यश दूर-दूर तक फैल गया था।
राजा बलि का शासन भले ही असुर कुल का था, लेकिन उनके आचरण में दान और धर्म सर्वोपरि था। उनके बढ़ते प्रभाव से जब देवता भी विचलित हो उठे, तब देवमाता अदिति की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। वामन रूप में भगवान राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और उनसे मात्र तीन पग भूमि का दान मांगा।
कथा में बताया गया कि दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने राजा बलि को दान न देने की सलाह दी, लेकिन राजा बलि ने अपने वचन और दान धर्म को सर्वोच्च मानते हुए संकल्प पूरा किया। इसके पश्चात भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर पहले पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब स्थान शेष नहीं बचा, तब राजा बलि ने श्रद्धा और समर्पण के साथ अपना मस्तक भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया।
आचार्य ने कहा कि राजा बलि के इस अद्वितीय त्याग और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें चिरंजीवी होने तथा पाताल लोक का राजा बनने का वरदान दिया। यही कारण है कि राजा बलि आज भी दान, सत्य और वचन पालन का प्रतीक माने जाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को अहंकार से मुक्त कर भक्ति, त्याग और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा मंडप में सहायक आचार्य पंडित मनोज पांडेय द्वारा पार्थिव पूजन और माला जप का कार्य निरंतर किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो प्रतिदिन अमृतमयी कथा का रसपान कर आत्मिक शांति का अनुभव कर रही है।
इस अवसर पर मुख्य यजमान गिरिजा देवी दास सहित मिथिलेश देवी, शिवकुमार पटेल, आकाश मणि पटेल, कृष्ण मोहन पटेल, प्रेमलता पटेल, राजीव पटेल, अंजनी पटेल, मंशा पटेल, नीरज पटेल, सत्यभामा पटेल, रविंद्र पटेल, रानी पटेल, आराधना पटेल, रूबी पटेल, राजन पटेल, निकिता पटेल, पल्लवी पटेल, आयुषी पटेल, ऋतिक पटेल, अन्वी पटेल, वैभव पटेल सहित बड़ी संख्या में स्वजन, सगे-संबंधी एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

भारतीय सेना दिवस का इतिहास: क्यों खास है 15 जनवरी?

📜 15 जनवरी का इतिहास: भारत और विश्व की वे घटनाएँ जिन्होंने समय की दिशा बदल दी

15 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत और विश्व इतिहास में दर्ज ऐसी घटनाओं का साक्षी है, जिन्होंने राजनीति, विज्ञान, सैन्य शक्ति, खेल, संस्कृति और मानवता के भविष्य को नई दिशा दी। इस दिन भारत अपना सेना दिवस मनाता है, वहीं दुनिया ने भूकंप, युद्ध, खोज और ऐतिहासिक निर्णयों को भी देखा। आइए जानते हैं 15 जनवरी की वे महत्वपूर्ण घटनाएँ, जो आज भी प्रासंगिक हैं।

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🔰 1949 – भारत को मिला पहला थल सेनाध्यक्ष, सेना दिवस की ऐतिहासिक शुरुआत
15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय थल सेना की कमान संभाली। यह क्षण भारत के सैन्य इतिहास में आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक बना। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में हर वर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और अनुशासन को समर्पित है।

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⚔️ 1986 – के. एम. करियप्पा को फील्ड मार्शल की उपाधि
भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ रहे के. एम. करियप्पा को उनकी असाधारण सेवाओं के लिए 1986 में फील्ड मार्शल की मानद उपाधि प्रदान की गई। यह सम्मान भारतीय सैन्य इतिहास में बहुत कम अधिकारियों को मिला है और यह उनके योगदान की स्थायी स्मृति है।

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🏏 1988 – नरेंद्र हिरवानी का ऐतिहासिक टेस्ट डेब्यू
15 जनवरी 1988 को भारतीय गेंदबाज़ नरेंद्र हिरवानी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले ही टेस्ट मैच में 16 विकेट लेकर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। यह उपलब्धि आज भी टेस्ट क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ डेब्यू प्रदर्शनों में गिनी जाती है।
🌞 2010 – शताब्दी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण
15 जनवरी 2010 को शताब्दी का सबसे लंबा वलयाकार सूर्य ग्रहण लगा, जिसकी अवधि तीन घंटे से अधिक थी। भारत में यह सुबह 11:06 से दोपहर 3:05 तक दिखाई दिया। इस दुर्लभ खगोलीय घटना के अध्ययन के लिए इसरो ने विशेष रॉकेट प्रक्षेपण किए, जिससे पृथ्वी के ऊपरी वातावरण पर ग्रहण के प्रभावों का अध्ययन संभव हुआ।

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🌍 1934 – बिहार का विनाशकारी भूकंप
15 जनवरी 1934 को बिहार और नेपाल क्षेत्र में आए भीषण भूकंप ने लगभग 20,000 लोगों की जान ले ली। यह भारत के सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है, जिसने भूकंप विज्ञान और आपदा प्रबंधन की दिशा बदल दी।
🏛️ 1965 – भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना
देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15 जनवरी 1965 को भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना की गई। इसका मुख्य कार्य किसानों से अनाज खरीदना, भंडारण करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से देशभर में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।

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🌐 1975 – अंगोला की स्वतंत्रता की दिशा में समझौता
पुर्तगाल ने 15 जनवरी 1975 को अंगोला की स्वतंत्रता के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह अफ्रीकी महाद्वीप में औपनिवेशिक शासन के अंत और स्वतंत्र राष्ट्रों के उदय का महत्वपूर्ण अध्याय था।
🏛️ 1784 – एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना
15 जनवरी 1784 को एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना हुई, जिसने भारतीय इतिहास, संस्कृति, भाषाओं और विज्ञान के अध्ययन को वैश्विक पहचान दिलाई। यह संस्था आज भी शोध और अकादमिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र है।

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🏺 1759 – ब्रिटिश म्यूज़ियम की नींव
लंदन स्थित मोंटेगुवे हाउस में 15 जनवरी 1759 को ब्रिटिश म्यूज़ियम की स्थापना हुई। यह दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संग्रहालयों में से एक है, जहाँ मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहरें संरक्षित हैं।
🏏 2020 – रोहित शर्मा और विराट कोहली को ICC सम्मान
आईसीसी ने 15 जनवरी 2020 को रोहित शर्मा को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटर और विराट कोहली को ‘ICC Spirit of Cricket Award’ से सम्मानित किया। यह भारतीय क्रिकेट के वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

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🌦️ 2020 – भारत मौसम विज्ञान विभाग का 145वाँ स्थापना दिवस
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 जनवरी 2020 को अपना 145वाँ स्थापना दिवस मनाया। यह संस्था मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी और जलवायु अध्ययन में देश की रीढ़ मानी जाती है।

आज का पंचांग – राहु काल में भूलकर भी न करें ये कार्य, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

🕉️ पंचांग 15 जनवरी 2026 | गुरुवार | माघ कृष्ण द्वादशी आज का संपूर्ण हिन्दू पंचांग (15/01/2026)
दिनांक: 15 जनवरी 2026, गुरुवार
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
अयन: उत्तरायण
द्रिक ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: हेमंत
🔱 तिथि, नक्षत्र व योग
तिथि:माघ कृष्ण द्वादशी – 08:16 PM तक
उपरांत त्रयोदशी प्रारंभ
नक्षत्र:ज्येष्ठा – 05:47 AM तक
उपरांत मूल नक्षत्र
योग:वृद्धि – 08:37 PM तक
उपरांत ध्रुव योग
करण:तैतिल – 08:17 PM तक
उपरांत गर करण

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☀️ सूर्य एवं 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:57 PM
चन्द्रोदय: 04:17 AM
चन्द्रास्त: 02:55 PM
🌞 सूर्य व चंद्र राशि
सूर्य राशि: मकर
चंद्र राशि:05:47 AM तक वृश्चिक
उपरांत धनु
🌓 चंद्र मास
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
⚠️ अशुभ काल (कार्य से बचें)
राहु काल: 01:56 PM – 03:17 PM
यमगण्ड: 07:14 AM – 08:34 AM
कुलिक: 09:55 AM – 11:15 AM
दुर्मुहूर्त:10:48 AM – 11:31 AM
03:06 PM – 03:49 PM
वर्ज्यम्: 09:17 AM – 11:04 AM

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शुभ काल (शुभ कार्य हेतु उत्तम)
ब्रह्म मुहूर्त: 05:37 AM – 06:25 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:14 PM – 12:57 PM
अमृत काल: 07:58 PM – 09:45 PM
विशेष योग व फल
सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं
गण्डमूल नक्षत्र:ज्येष्ठा (05:47 AM तक) – सावधानी आवश्यक
मूल नक्षत्र आरंभ – शुभ-अशुभ मिश्रित
🧭 यात्रा विचार (दिशा शूल)
आज वर्जित दिशा: ❌ दक्षिण दिशा
यदि यात्रा आवश्यक हो तो:
गुड़ या दही खाकर यात्रा करें।
लाभदायक दिशा:
पूर्व व उत्तर दिशा – धन, सफलता व कार्यसिद्धि के लिए शुभ।

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📌 चंद्रबल (राशि अनुसार)
05:47 AM तक:
वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ
उपरांत:मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन
ताराबल (नक्षत्र अनुसार)
आज अनेक नक्षत्रों के लिए मिश्रित से शुभ फलदायक, विशेषकर कार्य, लेखन, योजना व आध्यात्मिक साधना के लिए दिन अनुकूल।
📝 विशेष नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा उत्तरदायी नहीं है।
कृपया कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करने से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

भारत तिब्बत समन्वय संघ की 5वीं वर्षगांठ पर हिंदुत्व और कैलाश मानसरोवर मुक्ति का महासंकल्प

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। भारत तिब्बत समन्वय संघ के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लखनऊ के चिनहट स्थित श्रीअयोध्या सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज में बैठक आयोजित की गई। बैठक राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (युवा) डॉ. आशीष सिंह के विद्यालय परिसर में संपन्न हुई, जिसमें केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र तोमर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
हेमेंद्र तोमर ने कहा कि हिंदुत्व को सबल बनाने का समय आ गया है। इसे चाहे मजबूरी कहा जाए या आवश्यकता, लेकिन हिंदुओं के लिए अब यही अंतिम देश बचा है। ऐसे में हर स्तर पर स्वयं को समर्थ और शक्तिशाली बनाना आवश्यक है, क्योंकि कैलाश मानसरोवर मुक्ति और तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए यह अनिवार्य है। उन्होंने मालवा प्रांत के हालिया प्रवास के दौरान वहां के कार्यकर्ताओं के समर्पण और उत्साह के अनुभव साझा किए।
उन्होंने धार जिले में सरस्वती कण्ठावर्ण पर इस्लामिक अतिक्रमण को देश की संस्कृति पर अत्याचार का जीवंत उदाहरण बताया। उनका कहना था कि ज्ञान परंपरा ने ही भारत को विश्वगुरु बनाया था और मां सरस्वती के मंदिर के पुनरोद्धार के बिना विकसित भारत या विश्वगुरु बनने का स्वप्न अधूरा है। उन्होंने प्रत्येक हिंदू से धार के भोजशाला सरस्वती मंदिर जाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (युवा) डॉ. आशीष सिंह और प्रांत अध्यक्ष (अवध) हिमांशु सिंह ने भी मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय मंत्री डॉ. विक्रम बिसेन, राष्ट्रीय सह मंत्री राज नारायण, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संज्ञा शर्मा, राष्ट्रीय मंत्री (महिला) डॉ. कल्पना सिंह, राष्ट्रीय मंत्री (युवा) अनूप बाजपेई, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (युवा) दुर्गा प्रसाद सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष अमिताभ सिन्हा, पूर्व क्षेत्रीय महामंत्री (युवा) उपेंद्र वर्मा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष (युवा) आनंद सिंह व लाल बाबू तिवारी, जिला मंत्री (महिला) नीलम त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष (युवा) नीरज सिंह सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


नवागत सदस्यों में रत्नेश मिश्रा, चंचल कुमार झा, अर्पण सिंह, मनीष परिहार और पायल की सहभागिता भी रही। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को भगवान के फ्रेम किए गए चित्र और डायरी भेंट की गई।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शैलेन्द्र कुमार सिंह (लखनऊ) के पिता के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। इसके पश्चात कैलाश मानसरोवर मुक्ति महासंकल्प कराया गया।

स्वदेशी चेतना यात्रा का मगहर में भव्य स्वागत, आत्मनिर्भर भारत का दिया संदेश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। स्वदेशी जागरण मंच एवं अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वावधान में निकाली जा रही स्वदेशी चेतना यात्रा का बुधवार को ऐतिहासिक नगरी मगहर में उत्साहपूर्ण और भव्य स्वागत किया गया। भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर क्षेत्र के सहसंयोजक (शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ) अत्रेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं और देशभक्ति के नारों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया। इसके बाद यात्रा मगहर से गोरखपुर के लिए रवाना हुई।

स्वदेशी चेतना यात्रा का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देना, स्थानीय उद्योगों को सशक्त करना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। यह यात्रा 12 जनवरी को लखनऊ के चारबाग स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा से प्रारंभ हुई थी, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से होते हुए 1 फरवरी को गोरखपुर में संपन्न होगी।

इस अवसर पर अत्रेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वदेशी केवल एक विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से देश के किसान, श्रमिक और छोटे उद्यमी मजबूत होते हैं तथा विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने व्यापारियों और आम नागरिकों से स्वदेशी को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।

वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश उर्फ गुड्डु वर्मा ने कहा कि यह यात्रा युवाओं को स्वदेशी के प्रति जागरूक करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने युवाओं से विदेशी ब्रांड्स के स्थान पर देश में बने उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया।

स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्र संयोजक अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि स्वदेशी अपनाने से आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सांस्कृतिक आत्मसम्मान भी बढ़ता है। जिला संयोजक कृष्ण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि हर घर तक स्वदेशी का संदेश पहुंचाने के लिए लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का संकल्प लिया और यात्रा को गोरखपुर के लिए विदा किया। पूरे आयोजन के दौरान मगहर का वातावरण राष्ट्रभक्ति और स्वदेशी चेतना से ओतप्रोत रहा।