Monday, June 22, 2026
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मथुरा में यूपी पुलिस के सिपाही पर पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप, प्रताड़ना और यौन शोषण का केस दर्ज

मथुरा (राष्ट्र की परम्परा)। मथुरा के नौहझील थाना क्षेत्र की रहने वाली एक विवाहिता ने यूपी पुलिस में तैनात अपने पति और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना, धोखाधड़ी और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की शिकायत पर एसएसपी मथुरा के आदेश से नौहझील पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नवंबर 2024 में हुई थी शादी

पीड़िता ने एसएसपी को दी तहरीर में बताया कि उसकी शादी नवंबर 2024 में थाना गोवर्धन क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। उसका पति वर्तमान में लखनऊ में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात है।
आरोप है कि शादी के तुरंत बाद ही पति ने कहा कि उसने केवल पैसों के लिए शादी की है और वह पहले से ही किसी दूसरी महिला के साथ रह रहा है।

अप्राकृतिक संबंध और धमकी का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि उसके पति ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाए। जब उसने विरोध किया तो पति ने वर्दी का रौब दिखाते हुए उसे चुप रहने की धमकी दी।

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5 लाख की मांग, कमरे में बंद कर प्रताड़ना

तहरीर के अनुसार, अगस्त 2025 में ससुराल वालों ने 5 लाख रुपये की मांग को लेकर पीड़िता को कमरे में बंद कर दिया। उसे भूखा-प्यासा रखा गया और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

ननदोई पर भी यौन शोषण का आरोप

पीड़िता ने अपने ननदोई पर भी यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि ससुराल पक्ष के कई लोग इस उत्पीड़न में शामिल थे।

पांच नामजदों पर FIR, जांच शुरू

एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर गोवर्धन निवासी राम नारायन सिंह, वेदराम सिंह, माया देवी, ज्वाला देवी, उमाशंकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच नौहझील पुलिस द्वारा की जा रही है और सभी आरोपों की गंभीरता से पड़ताल की जाएगी।

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संभल बवाल केस: 22 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी पुलिस, एसपी ने आरोपों को बताया निराधार

संभल (राष्ट्र की परम्परा)। संभल में हुए बवाल के मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। इसके बजाय संभल पुलिस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश को चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने साफ किया है कि इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर उसे निरस्त कराने की मांग की जाएगी।

एसपी का दावा: पुलिस ने गोली नहीं चलाई

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बवाल के दौरान पुलिस की ओर से कोई फायरिंग नहीं की गई थी। जिस युवक को गोली लगने का दावा किया जा रहा है, वह पुलिस की गोली नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित के पिता द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी का प्रमोशन हो चुका है और वे वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी के पद पर तैनात हैं, जबकि तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर इस समय चंदौसी कोतवाली में तैनात हैं।

यामीन ने लगाए गंभीर आरोप

खग्गू सराय निवासी यामीन ने अनुज चौधरी, अनुज तोमर समेत 15–20 अज्ञात पुलिसकर्मियों को नामजद करते हुए आरोप लगाया है कि बवाल के दौरान पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें उनके बेटे आलम को तीन गोलियां लगीं।
यामीन का कहना है कि आलम ठेले पर बिस्किट बेचता है और 24 नवंबर की सुबह भी रोज़ की तरह बिस्किट बेचने निकला था। इसी दौरान पुलिस फायरिंग में वह घायल हुआ। बाद में छिपकर उसका इलाज कराया गया, जिससे उसकी जान बच सकी।

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प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज

डीएम और एसपी दोनों ने यामीन के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बवाल सुबह 7:45 बजे भीड़ द्वारा किया गया था।
प्रशासन के अनुसार, जामा मस्जिद तक ठेला पहुंचना संभव नहीं था, क्योंकि वहां पुलिस-प्रशासन की तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी। ऐसे में ठेले के साथ युवक के वहां पहुंचने का दावा तथ्यहीन है।

पहले से दिव्यांग है आलम

आलम की बहन रजिया ने बताया कि उसका भाई पहले से ही दिव्यांग है और तीन पहिया ठेले से बिस्किट बेचकर परिवार का खर्च चलाता था। गोली लगने के बाद उसकी हालत काफी कमजोर हो गई है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और इलाज के लिए उन्हें उधार तक लेना पड़ा है।

धमकाने का आरोप, परिवार डरा

रजिया ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके परिवार को लगातार धमका रही है। एक साल से पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। उन्होंने कहा कि जब अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी तो मजबूरी में पिता को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल परिवार भय के माहौल में जी रहा है और पिता व भाई घर से बाहर चले गए हैं।

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मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल बनी कोठीभार पुलिस, मुखबधिर व मंदबुद्धि बालक को परिजनों से मिलवाया

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। थाना कोठीभार पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए एक मुखबधिर एवं मंदबुद्धि बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलवाकर सराहनीय कार्य किया है। यह घटना गुरुवार की है, जब पुलिस को सूचना मिली कि एक बालक घर से भटककर लावारिस अवस्था में इधर-उधर घूम रहा है। सूचना मिलते ही कोठीभार थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। बालक बोलने और सुनने में असमर्थ होने के साथ ही मंदबुद्धि प्रतीत हो रहा था, जिससे उसकी पहचान करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके बावजूद पुलिस टीम ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उससे संवाद स्थापित करने का हर संभव प्रयास किया।

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इशारों, हाव-भाव और स्थानीय स्तर पर पूछ-ताछ के माध्यम से पुलिस ने बालक के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बालक जनपद कुशीनगर का निवासी है। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए संबंधित क्षेत्रों में संपर्क साधा और बालक के परिजनों का पता लगाया। परिजनों से संपर्क होने के बाद उन्हें थाना कोठीभार बुलाया गया। जब परिजन थाने पहुंचे और अपने बच्चे को सकुशल पाया, तो उनकी आंखें नम हो गईं।बालक को सुरक्षित अपने सामने देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली और कोठीभार पुलिस का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय रहते मदद न करती, तो अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। पुलिस द्वारा पूरी संवेदनशीलता के साथ बालक को सकुशल परिजनों को सौंप दिया गया। यह घटना न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों की रक्षा करना भी पुलिस का अहम दायित्व है। कोठीभार पुलिस की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है।

दही-चूड़ा की थाली पर सियासत: विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में रिश्तों की नई राजनीति

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने राजनीति को नई दिशा और नया संदेश दिया है। यह आयोजन अब केवल पारंपरिक सामाजिक रस्म नहीं रह गया, बल्कि सत्ता, विपक्ष और भविष्य की रणनीतियों का संकेतक बन चुका है। अलग-अलग दलों के नेताओं की मौजूदगी, गैरहाजिरी और मेल-मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में संवाद और दूरी—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

इस सियासी परिदृश्य में सबसे अधिक चर्चा राजद नेता तेजप्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज की रही। पार्टी की ओर से औपचारिक आयोजन न होने के बावजूद तेजप्रताप के निजी आयोजन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इस भोज में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी को पार्टी के भीतर संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा गया। हालांकि राबड़ी देवी की अनुपस्थिति और तेजस्वी यादव की दूरी ने कई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया। दिलचस्प बात यह रही कि इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, जदयू मंत्री अशोक चौधरी और विधायक चेतन आनंद जैसे नेताओं की मौजूदगी ने संदेश को और बहुआयामी बना दिया।

वहीं दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज को सत्ताधारी गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन माना गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित भाजपा और जदयू के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने एनडीए की एकजुटता का संकेत दिया। इसके बाद जदयू विधायक रत्नेश सदा के आयोजन में भी पार्टी नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी दिखी, जिससे गठबंधन के भीतर सामंजस्य का संदेश गया।

भाजपा कार्यालय में आयोजित भोज और नितिन नवीन के प्रस्तावित आयोजन को पार्टी के भीतर बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। इन आयोजनों ने यह स्पष्ट किया कि भाजपा संगठनात्मक स्तर पर भी अपनी मजबूती दिखाने में जुटी है।

उधर, कांग्रेस का सदाकत आश्रम में आयोजित भोज चर्चा में तो रहा, लेकिन एक भी विधायक की गैरमौजूदगी ने पार्टी की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद कांग्रेस में टूट की अटकलें तेज हुईं, हालांकि नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर इन चर्चाओं को खारिज किया।

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आज लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज भी खास माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मौजूदगी, साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के वरिष्ठ नेताओं को भेजे गए आमंत्रण, इस आयोजन को राजनीतिक रूप से अहम बनाते हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी के 19 विधायकों की जीत और सरकार में दो मंत्रियों की भागीदारी ने चिराग पासवान की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है।


इस सियासी भोज के दौर में दिवंगत सुशील मोदी के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव के आयोजन की कमी भी महसूस की गई। यह दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज अब परंपरा के साथ-साथ पहचान भी बन चुका है।

कुल मिलाकर, इस बार दही-चूड़ा की थाली बिहार की राजनीति में संवाद, दूरी और संतुलन—तीनों का प्रतीक बनकर उभरी है। हर आयोजन ने अपने साथ एक अलग राजनीतिक संदेश दिया, जिससे साफ है कि ये भोज अब साधारण सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति का संकेतक मंच बन चुके हैं।

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मंझा की बिक्री जोरों पर

सिकन्दरपुर/ बलिया(राष्ट्र की परम्परा)मकर संक्रांति पर प्रतिबंध के बावजूद मंझा की बिक्री जोरों परमकर संक्रांति के अवसर पर मंझा बिक्री पर प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद सिकन्दरपुर (बलिया) में खुलेआम मंझा बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बावजूद कई दुकानदार चोरी-छिपे मंझा की बिक्री कर रहे हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है। प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य लोगों, विशेषकर बाइक सवारों और राहगीरों को घायल होने से बचाना है, क्योंकि प्रतिबंधित मंझा अक्सर घातक घटनाओं का कारण बनता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल औपचारिक जांच करता है जबकि वास्तविक बिक्री अंधेरी गलियों और घरों में जारी रहती है। मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी का शौक चरम पर होता है, ऐसे में मंझा की अनियंत्रित बिक्री से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। नागरिकों ने कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि इस अवैध गतिविधि पर प्रभावी रोक लग सके।

बिहार में शिक्षकों की छुट्टी पर सख्ती, अब वॉट्सऐप मैसेज नहीं चलेगा

भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार में शिक्षा विभाग ने कार्यसंस्कृति को मजबूत करने के लिए एक अहम और सख्त निर्णय लिया है। अब वॉट्सऐप मैसेज या मौखिक सूचना के जरिए छुट्टी लेने की परंपरा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। भागलपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी राज कुमार शर्मा ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि बिना विधिवत अनुमति के अवकाश पर जाना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा।

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जारी निर्देश के अनुसार, आकस्मिक अवकाश लेने के लिए अब सभी शिक्षकों और कर्मियों को निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन करना अनिवार्य होगा। केवल डिजिटल मैसेज, फोन कॉल या अनौपचारिक सूचना के आधार पर अवकाश स्वीकृत नहीं माना जाएगा। विभाग का कहना है कि हाल के दिनों में कई कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय से अनुपस्थित पाए गए, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं।

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नए नियमों के तहत अवकाश आवेदन में कर्मचारी का नाम, पदनाम, शाखा, कुल स्वीकृत आकस्मिक अवकाश, पहले ली गई छुट्टियों की संख्या, अवकाश की अवधि, कारण तथा शेष अवकाश का विवरण देना होगा। इसके साथ ही यह भी बताना अनिवार्य होगा कि छुट्टी के दौरान कौन कर्मी कार्यभार संभालेगा। अधूरा या अपूर्ण आवेदन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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जिला शिक्षा पदाधिकारी ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, वेतन रोकने और अनुशासनात्मक दंड तक की कार्रवाई की जा सकती है। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर बिना अनुमति अवकाश मान्य नहीं होगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस फैसले से कार्यालयों में अनुशासन कायम होगा, छात्रों से जुड़े कार्य समय पर पूरे होंगे और कार्यकुशलता में सुधार आएगा। आदेश के बाद विभागीय कर्मियों में हलचल जरूर है, लेकिन इसे लंबे समय में सिस्टम सुधार की दिशा में जरूरी कदम माना जा रहा है।

अंश-अंशिका केस: मिर्जापुर मानव तस्करी गिरोह पर शिकंजा

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश और अंशिका को आखिरकार पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। बुधवार, 14 जनवरी को रांची पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और रामगढ़ जिले की स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर दोनों बच्चों को रजरप्पा के चितरपुर स्थित रौशन आरा के किराये के मकान से सकुशल मुक्त कराया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ परिवार को राहत दी, बल्कि अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह की परतें भी खोल दीं।

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पुलिस के अनुसार, घासी टोला निवासी सन्नी नायक ने आरोपी नभ खेरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी को किराये का घर दिलाने में भूमिका निभाई थी। इसी ठिकाने से बच्चों की बरामदगी हुई। आरोपी नभ बिहार के औरंगाबाद (बारुण) का निवासी बताया जा रहा है। दोनों से गहन पूछताछ जारी है।
जांच में खुलासा हुआ कि इस मामले की कड़ियाँ पहले से दर्ज लापता बच्चों के मामलों से जुड़ी हैं। रांची के चुटिया थाना में 12 मई 2024 को दर्ज एक केस और पुरुलिया थाना के एक अन्य मामले में भी इन्हीं आरोपियों की संलिप्तता सामने आई है। धुर्वा के शहीद मैदान से 2 जनवरी को अंश-अंशिका के लापता होने के दौरान आरोपी का मोबाइल नंबर ट्रेस होने के बाद SIT ने जांच तेज की।

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पुलिस को यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित मानव तस्करी गिरोह से जुड़े हैं। यह गिरोह बच्चों को टॉफी और गुब्बारों का लालच देकर बहलाता है और फिर उन्हें दूर ले जाकर नि:संतान दंपतियों या भिक्षावृत्ति कराने वाले नेटवर्क को सौंप देता है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की मैपिंग में जुटी है।

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इस अभियान में मीडिया की सक्रियता भी निर्णायक रही। प्रभात खबर की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने जमीनी पड़ताल कर अहम सुराग दिए, जिससे पुलिस की कार्रवाई को दिशा मिली।
पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर अकेला न छोड़ें और किसी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

क्रेन की टक्कर से पलटी बस, बड़ा हादसा टला

गोरखपुर-देवरिया बस हादसा: क्रेन की टक्कर से बस पलटी, दर्जनों यात्री घायल

महराजगंज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )गोरखपुर-देवरिया बस हादसा गुरुवार को उस समय एक बड़े हादसे में बदल गया, जब गौरीबाजार में एक महराजगंज से गोरखपुर रुद्रपुर होते हुए मदनपुर (देवरिया) जा रही थी बस को एक क्रेन ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। बस में करीब तीन दर्जन यात्री सवार थे और हादसे में लगभग सभी यात्री घायल हो गए।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस महराजगंज से मदनपुर देवरिया की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक सामने से आ रही क्रेन ने बस को टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बस से बाहर निकाला और पुलिस व एंबुलेंस को सूचना दी।
हादसे में हमीद नगर मोहल्ला, थाना महराजगंज, जिला महराजगंज निवासी 65 वर्षीय कमर जहां बेगम, उनके पुत्र 47 वर्षीय मुहम्मद फारूक, अख्तर, मुहब्बत, अफजल अंसारी सहित अन्य यात्री घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार, मां-बेटे समेत कई घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कुछ यात्रियों को हाथ-पैर और सिर में चोट लगी है।
सभी घायलों को तत्काल उपचार के लिए देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की टीम लगातार इलाज में जुटी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, अधिकतर घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है और किसी की भी जान को फिलहाल खतरा नहीं है।

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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन व बस को सड़क से हटवाकर यातायात सुचारू कराया। प्रारंभिक जांच में क्रेन चालक की लापरवाही सामने आ रही है। पुलिस ने क्रेन को कब्जे में लेकर चालक से पूछताछ शुरू कर दी है।
यह गोरखपुर-देवरिया बस हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते स्थानीय लोगों ने मदद न की होती, तो हादसे में जानमाल का नुकसान और बड़ा हो सकता था। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

मायावती का ब्राह्मण कार्ड: 70वें जन्मदिन पर विपक्ष पर हमला, गठबंधन पर साफ किया बीएसपी का स्टैंड

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश करते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बीएसपी द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है और जनता के दिलों में जगह बनाए रखने के लिए उनका जन्मदिन पूरे देश में जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया गया।

बीजेपी-कांग्रेस पर लगाया बीएसपी को कमजोर करने का आरोप

मायावती ने कहा कि बीएसपी को पीछे रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी समय-समय पर षड्यंत्र करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 के विधानसभा शीतकालीन सत्र के दौरान विभिन्न दलों के ब्राह्मण विधायकों ने भी अपनी उपेक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा कि बीएसपी ने ब्राह्मण समाज को हमेशा उचित भागीदारी दी है और ब्राह्मण समाज को बीजेपी, सपा और कांग्रेस के बहकावे में नहीं आना चाहिए।

“ब्राह्मण समाज को किसी का बाटी-चोखा नहीं चाहिए”

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी का एहसान नहीं चाहिए। बीएसपी की सरकार बनने पर उनकी सभी जायज मांगें पूरी की जाएंगी। साथ ही क्षत्रिय और अन्य समाज की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में मंदिर, मस्जिद और चर्च को कोई नुकसान नहीं होने दिया गया।

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सपा पर गंभीर आरोप

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा शासन में माफिया और गुंडों का बोलबाला रहा। दलित समाज का सबसे ज्यादा उत्पीड़न उसी दौर में हुआ।

उन्होंने कहा, “2 जून को सपा के गुंडों और बदमाशों ने मुझ पर हमला करने का प्रयास किया था, यह किसी से छुपा नहीं है।”
मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा के शासन में मुस्लिम समाज भी उपेक्षित रहा, यही उनका तथाकथित पीडीए मॉडल है।

बीजेपी सरकार से दलित और उपेक्षित वर्ग परेशान

मायावती ने कहा कि उनकी सरकार के बाद जो एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट बन रहे हैं, उनकी शुरुआत बीएसपी सरकार के समय ही हो चुकी थी। कुछ परियोजनाएं केंद्र सरकार के विरोधी रवैये के कारण आगे नहीं बढ़ सकीं।
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा बीजेपी सरकार में दलित और अन्य उपेक्षित वर्ग खुद को असुरक्षित और परेशान महसूस कर रहे हैं।

गठबंधन पर मायावती का स्पष्ट रुख

गठबंधन को लेकर मायावती ने दो टूक कहा कि बीएसपी विधानसभा और लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन का फायदा अक्सर सहयोगी दल को मिलता है, इसलिए बीएसपी के हित को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में कोई पार्टी बीएसपी को अपर कास्ट वोटों का ठोस लाभ दिलाने की स्थिति में होगी, तभी गठबंधन पर विचार किया जाएगा।

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ईवीएम और एसआईआर पर भी उठाए सवाल

मायावती ने ईवीएम में धांधली के आरोप लगाते हुए कहा कि देशभर में इसके विरोध की आवाज उठ रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से सजग रहने की अपील की और एसआईआर से जुड़ी शिकायतों को गंभीर बताया।

दिल्ली पुलिस–लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुठभेड़: दो शूटर गिरफ्तार, एक के पैर में लगी गोली

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली में अपराध पर शिकंजा कसते हुए पुलिस और कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटरों के बीच गुरुवार सुबह मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने गिरोह के दो शूटरों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पश्चिम विहार और विनोद नगर इलाके में हुई फायरिंग की घटनाओं में शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान एक शूटर के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, दूसरा शूटर नाबालिग बताया जा रहा है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

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फायरिंग की घटनाओं में थे शामिल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों शूटर हाल के दिनों में पश्चिम विहार और विनोद नगर क्षेत्रों में हुई गोलीबारी की वारदातों में सक्रिय रूप से शामिल थे। इन घटनाओं से इलाके में दहशत का माहौल था, जिसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान गैंग के नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और अन्य सदस्यों के ठिकानों को लेकर अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश के लिए छापेमारी की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ते अपराध पर नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम है और आगे भी अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा।

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चार चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत से गांव में मातम, पिता ने जताई हत्या की आशंका

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। एक ही परिवार के चार चचेरे भाइयों की रहस्यमयी मौत से पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है। बेटे प्रतीक और प्रिंस की मौत के बाद पिता प्रदीप सोनकर के घर मातम पसरा है। इस हादसे ने परिवार के दो सगे भाइयों के घर के चिराग एक साथ बुझा दिए।

प्रदीप सोनकर ने रोते हुए कहा, “पहले छोटा भाई संदीप हम सबको छोड़कर चला गया और अब मेरे दोनों बेटों के साथ दो भतीजे भी मुझसे दूर हो गए।” उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे प्रतीक और प्रिंस थे और एक छोटी बेटी प्राची है। इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।

भाई की मौत के बाद अब भतीजे का भी बुझा चिराग

प्रदीप के छोटे भाई संदीप सोनकर की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी सीमा अपने बेटे प्रियांशु और दो बेटियों छाया व गुल्ली के साथ रह रही थी। अब प्रियांशु की मौत से उसका घर भी उजड़ गया है। सीमा बार-बार यही कहती रही कि न जाने परिवार को किसकी नजर लग गई।

होनहार करन की मौत से टूट गया परिवार

परिवार के बड़े भाई राजेश सोनकर ने बताया कि उनके चार बेटे शुभम, शिवम, सत्यम और करन हैं, जबकि एक बेटी पूनम है। करन सबसे छोटा और होनहार था। वह 11वीं की पढ़ाई के साथ-साथ घर की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था। करन की मौत के बाद उसकी मां शीला और बहन पूनम का रो-रोकर बुरा हाल है।

तालाब नहीं, भूमिधरी में बना था गहरा गड्ढा

ग्रामीणों के अनुसार, जहां चारों चचेरे भाइयों के शव मिले, वह कोई तालाब नहीं बल्कि एक जमींदार की भूमिधरी है। दो साल पहले वहां से मिट्टी निकाली गई थी, जिससे करीब 14–15 फीट गहरा गड्ढा बन गया। बारिश का पानी भरने से वह गड्ढा तालाब में तब्दील हो गया।
घटना की सूचना पर सदर एसडीएम अभिषेक सिंह, तहसीलदार अनिल कुमार पाठक और कानूनगो अमर सिंह राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। भूमिधरी से मिट्टी निकालने के मामले में हल्का लेखपाल से जवाब तलब किया गया है।

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गांव में मातम, चूल्हे नहीं जले

चार बच्चों की मौत की खबर मिलते ही हुसैनपुर गांव में मातम पसर गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं घटनास्थल पर पहुंच गईं। गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे तक नहीं जले।

पिता का आरोप: कपड़े गीले नहीं थे, हत्या की आशंका

प्रिंस और प्रतीक के पिता प्रदीप सोनकर ने आरोप लगाया कि तालाब के पास मिले उनके बेटों के कपड़े गीले नहीं थे। यदि बच्चों की मौत मंगलवार शाम तालाब में डूबने से हुई होती, तो रातभर ओस पड़ने से कपड़े भीग जाते। उन्होंने आशंका जताई कि उनके बेटों की हत्या कर शव तालाब में फेंक दिए गए हैं और पुलिस से न्याय की मांग की है।

सड़क जाम की तैयारी, पुलिस ने संभाला हालात

घटना से आक्रोशित ग्रामीण सल्लाहपुर चौकी का घेराव कर सड़क जाम करने की योजना बना रहे थे। सूचना मिलते ही एसीपी धूमनगंज अजेंद्र यादव मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया।

एक नजर में पूरा घटनाक्रम

• मंगलवार दोपहर 3:30 बजे – चारों बच्चे घर से लापता

• बुधवार सुबह 8:15 बजे – तालाब के पास कपड़े व चप्पलें मिलीं

• 8:45 बजे – परिजन मौके पर पहुंचे

• 9:10 बजे – पुलिस पहुंची

• 11:05 बजे – चारों शव बाहर निकाले गए

• 4:30 बजे शाम – पोस्टमार्टम

• 6:30 बजे शाम – शव परिजनों को सौंपे गए

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ईश्वर कृपा

संतों, विद्वानों और महापुरुषों
की कृपा दृष्टि जब मिलती है,
जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं,
ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

ये दुनिया है और इस दुनिया में
सब तरह के इंसान मिलते ही हैं,
कोई महाभारत का शिखंडी है,
कोई श्रीकृष्ण है तो कोई पार्थ है।

दुर्योधन था तो युधिष्ठिर भी थे,
कर्ण था तो भीष्म पितामह भी थे,
एकलव्य था तो गुरू द्रोण भी थे,
महाभारत रचयिता व्यास जी थे।

द्वापर के पहले त्रेता युग में भी तो
श्री राम जी थे, तो रावण भी था,
सीता माता थीं, सुपर्णखा भी थी,
कौशल्या जी थीं, कैकेई भी थी।

आज इस युग में नाम कमाने की
चारों ओर होड़ की दौड़ सी लगी है,
महाकुंभ हो या छोटा सा मेला हो,
आज सबको अपनी अपनी पड़ी है।

शायद आज संतों की तो कम,
नेताओं की महिमा ज़्यादा ही है,
आदित्य ईश्वर की महिमा कम
हम भक्तों की महिमा ज़्यादा है।

  • डॉ. कर्नल
    आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

मासूम के अपहरण की कोशिश, ग्रामीणों की सतर्कता से टली बड़ी वारदात

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत रामनगर ग्राम पंचायत में बुधवार देर शाम करीब 7 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब 6 वर्षीय मासूम बच्चे के अपहरण की कोशिश का मामला सामने आया। ग्रामीणों की सतर्कता से एक बड़ी वारदात टल गई और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिसवा राजा ग्राम पंचायत निवासी राज चौहान पुत्र गुड्डू चौहान (उम्र लगभग 6 वर्ष) को भिटौली थाना क्षेत्र अंतर्गत सेमरा राजा निवासी अनंत प्रजापति पुत्र सुरेश प्रजापति, हाल मुकाम सेमरा राजा, बहला-फुसलाकर ले जाता हुआ देखा गया। घटना सिसवा राजा नहर की पटरी के पास की बताई जा रही है, जहां से आरोपी बच्चे को उठाकर ले जा रहा था। बच्चे को ले जाते देख ग्रामीणों को संदेह हुआ, जिसके बाद शोर मचाते हुए लोगों ने आरोपी का पीछा किया और कुछ ही दूरी पर दौड़ाकर पकड़ लिया।

मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण जुट गए। स्थिति को देखते हुए आरोपी और बच्चे को ग्राम प्रधान रामनगर के घर सुरक्षित रखा गया और तत्काल सदर कोतवाली महराजगंज को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही सदर कोतवाल तीन पुलिस गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। पुलिस ने बच्चे से पूछताछ की तथा पीड़ित बच्चे के परिजनों से भी बातचीत की।

बताया गया कि सिसवा राजा का टोला रामनगर सदर कोतवाली क्षेत्र में आता है, जबकि सिसवा राजा गांव भिटौली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित है, जिसको लेकर क्षेत्राधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। ग्रामीणों के अनुसार आरोपी के पास से एक छोटा चाकू और रस्सी भी बरामद की गई है, जिससे उसकी नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि पुलिस की ओर से आरोपी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया है। बच्चे को सदर कोतवाली शिकारपुर पुलिस चौकी ले जाया गया। पीड़ित बच्चे के परिजनों से थाने पर लिखित तहरीर देने को कहा गया है, ताकि विधिक कार्रवाई की जा सके।

घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आरोपी नहीं पकड़ा जाता, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है। यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करती है।

आत्मनिर्भर भारत का सपना और महराजगंज की जमीनी सच्चाई

डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आत्मनिर्भर भारत का सपना देश के विकास विमर्श का केंद्र बन चुका है। नीति-निर्माता बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। किंतु जब इस राष्ट्रीय लक्ष्य को जनपदों की कसौटी पर कसा जाता है, तो तस्वीर कहीं अधिक जटिल और चिंताजनक दिखाई देती है। महराजगंज जनपद इसकी एक सजीव मिसाल बनकर उभरता है, जहां आत्म-निर्भरता का दावा और जमीनी हकीकत एक-दूसरे से मेल नहीं खाती।महराजगंज आज भी औद्योगिक दृष्टि से लगभग शून्य है। न यहां बड़े उद्योग स्थापित हो सके, न कल-कारखानों का जाल बिछ पाया और न ही स्थायी रोजगार के अवसर सृजित हो सके। परिणामस्वरूप, हर वर्ष हजारों युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पंजाब और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। यह पलायन केवल आर्थिक विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने के टूटने का भी संकेत है।

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जनपद की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और मनरेगा जैसी सरकारी योजनाओं पर निर्भर है। लेकिन खेती आज मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और सीमित संसाधनों की मार झेल रही है। वहीं मनरेगा, जो ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाती है, समय पर मजदूरी न मिलने के कारण मजदूरों का भरोसा खोती जा रही है। महीनों तक भुगतान न होने से श्रमिकों की हालत दयनीय हो जाती है। ऐसे में आत्मनिर्भरता की अवधारणा यहां नारे से आगे नहीं बढ़ पाती।
युवाओं की पीड़ा सबसे गंभीर है। शिक्षा पूरी करने के बाद उनके सामने स्थानीय स्तर पर कोई ठोस विकल्प नहीं बचता। न आईटी पार्क हैं, न फूड प्रोसेसिंग यूनिट, न ही छोटे-मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की प्रभावी व्यवस्था। सरकारी योजनाएं और घोषणाएं फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि जमीन पर उनका प्रभाव नगण्य दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि महराजगंज में कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा, बांस व कुटीर उद्योगों को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया जाए, तो रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्थानीय जरूरतों से जोड़ा जाए, ताकि वे अपने ही जिले में आजीविका कमा सकें। यह मॉडल न केवल पलायन को रोकेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगा सवाल आत्मनिर्भर भारत की नीयत पर नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन पर है। जब तक नीति का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक आत्मनिर्भरता का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा। महराजगंज जैसे पिछड़े जनपदों को विकास की मुख्यधारा में लाना ही इस अभियान की असली परीक्षा है। आज मूल प्रश्न यह नहीं है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना कितना भव्य है, बल्कि यह है कि महराजगंज उस सपने का हिस्सा कब बनेगा। जब तक जिले में ठोस औद्योगिक नीति, स्थायी रोजगार और व्यावहारिक विकास मॉडल लागू नहीं होते, तब तक आत्मनिर्भरता यहां के लोगों के लिए केवल एक आकर्षक नारा बनी रहेगी।

ग्रीनलैंड संकट बरकरार: व्हाइट हाउस बैठक बेनतीजा, ट्रंप के बयान से फिर बढ़ा विवाद

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच पैदा हुआ अंतरराष्ट्रीय संकट अभी टला नहीं है। व्हाइट हाउस में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष मंत्रियों के साथ अमेरिकी नेतृत्व की अहम बैठक के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान देकर तनाव बढ़ा दिया।

बुधवार को ग्रीनलैंड और डेनमार्क के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई। इस हाईलेवल बैठक में ग्रीनलैंड के भविष्य, क्षेत्रीय सुरक्षा और ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़े बयानों पर विस्तार से चर्चा हुई। डेनमार्क ने इस दौरान ट्रंप के बयानों पर कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई।

ग्रीनलैंड ने दो टूक रखा रुख

बैठक के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने मीडिया से कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने साफ किया कि ग्रीनलैंड ने अपनी सीमाएं तय कर ली हैं और सभी पक्षों के हित में संतुलित समाधान जरूरी है।

हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने बताया कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने मिलकर एक हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है। यह समूह भविष्य की रणनीति और साझा समाधान पर काम करेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ अब भी मूलभूत मतभेद बने हुए हैं।

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रासमुसेन के मुताबिक बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल चीन या रूस से ऐसा कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, जिसे डेनमार्क संभाल न सके।

ट्रंप का विवादित बयान

व्हाइट हाउस की बैठक से अलग एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है, न सिर्फ अमेरिका बल्कि डेनमार्क के लिए भी। उन्होंने दावा किया कि अगर रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं तो डेनमार्क कुछ खास नहीं कर पाएगा, जबकि अमेरिका ऐसा करने में सक्षम है।

‘हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है’

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और डेनमार्क के रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है। उन्होंने कहा, “अब देखते हैं आगे क्या होता है, लेकिन हमें इसकी जरूरत है।”
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ग्रीनलैंड के बिना अमेरिका का गोल्डन डोम से जुड़ा लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता और इससे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है।

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