Sunday, June 21, 2026
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ईरान में इस्लामिक सत्ता के खिलाफ उबाल: दमन के बीच शांत हुए विरोध, अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज

तेहरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ईरान में इस्लामिक सत्ता को खुली चुनौती देने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन बृहस्पतिवार को धीरे-धीरे शांत होते दिखाई दिए, लेकिन हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। बीते एक सप्ताह से ईरानी प्रशासन ने देश को लगभग पूरी तरह बाहरी दुनिया से काट दिया था और सुरक्षा बलों के जरिये कठोर दमन अभियान चलाया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस कार्रवाई में अब तक कम से कम 2,615 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसने वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

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तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हालिया दिनों में सड़कों पर जले वाहनों या हिंसा के ताजा निशान नजर नहीं आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय शहर अपेक्षाकृत सामान्य दिखे, हालांकि भय और तनाव का माहौल अब भी कायम है। इसी बीच सरकारी मीडिया लगातार गिरफ्तारियों की जानकारी दे रहा है। ईरानी अधिकारी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिन्हें वे “आतंकवादी तत्व” बता रहे हैं, साथ ही स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट डिश की तलाश भी तेज कर दी गई है, जो प्रतिबंधों के बावजूद सूचनाएं बाहर पहुंचाने का माध्यम बनी हुई हैं।
न्यायपालिका से जुड़े मिजान समाचार एजेंसी के मुताबिक, न्याय मंत्री अमीन हुसैन रहीमी ने कहा कि “आठ जनवरी के बाद से हालात पूर्ण युद्ध जैसे हैं” और इसमें शामिल हर व्यक्ति को अपराधी माना जाएगा। इस बयान से सरकार के सख्त रुख का संकेत मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोप में कई ईरानी अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जी-7 देशों और यूरोपीय संघ ने भी अतिरिक्त आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंधों पर विचार शुरू कर दिया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान की स्थिति पर आपात बैठक बुलाई है।

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इस बीच, ईरान ने बिना कारण बताए कई घंटों के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी बंद कर दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया। भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव कम होने के संकेत दिए हों, लेकिन ईरान विरोध प्रदर्शन और उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।

पटना गर्ल्स हॉस्टल छात्रा मौत मामला: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से बढ़ी सनसनी, यौन उत्पीड़न की आशंका ने बदली जांच की दिशा

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पटना के एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। घटना के चार दिन बाद सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसके बाद पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए पटना एम्स भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी कानूनी या तकनीकी त्रुटि की गुंजाइश न रहे।

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पुलिस का कहना है कि जांच हर पहलू से की जा रही है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए हॉस्टल के वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को इनपुट मिला था कि हॉस्टल परिसर के भीतर साक्ष्यों को प्रभावित किया जा सकता है। इसी के तहत यह कार्रवाई की गई। इसके अलावा, छात्रा का इलाज करने वाले सभी डॉक्टरों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
जांच का दायरा अब पटना तक सीमित नहीं रहा। पुलिस टीम पटना से जहानाबाद तक विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। अब तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। छात्रा जिन-जिन रास्तों से गुजरी थी, उन सभी रूट्स का डिजिटल साक्ष्य एकत्र किया गया है। पुलिस का दावा है कि किसी भी संभावित कड़ी को छोड़ा नहीं जाएगा।

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वहीं, मृत छात्रा के पिता ने हॉस्टल से जुड़े कुछ लोगों पर दुष्कर्म के बाद हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद से हॉस्टल का मुख्य गेट बंद है, ताला लटका हुआ है और सभी छात्राएं हॉस्टल खाली कर चुकी हैं। पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। छात्राओं और स्थानीय लोगों में भय इतना है कि वे पुलिस के सामने बयान देने से भी कतरा रहे हैं।
घटना के बाद शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा हुआ। कुछ नकाबपोश लोगों ने पत्थरबाजी और आगजनी की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पुलिस ने इस तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में अलग से एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले, छात्रा के परिजनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज भी हुआ था, जिसने हालात को और भड़का दिया।

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पुलिस के अनुसार, छात्रा 5 जनवरी को घर से हॉस्टल लौटी थी। 6 जनवरी की रात उसने अन्य छात्राओं के साथ भोजन किया और फिर अपने कमरे में चली गई। काफी देर तक बाहर न आने पर हॉस्टल स्टाफ को शक हुआ। दरवाजा तोड़ने पर वह बेहोशी की हालत में मिली, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने बाहरी चोटों से इनकार किया था, लेकिन अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था का, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। समाज के लिए यह एक चेतावनी है कि शिक्षा के नाम पर रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

क्यों नहीं करने चाहिए ठाकुर जी के सामने सीधे दर्शन? जानिए आस्था, विज्ञान और परंपरा का रहस्य

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा धर्म डेस्क)हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में भगवान की पूजा केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के बीच संवाद का माध्यम मानी जाती है। मंदिर हो या घर का छोटा सा पूजा स्थल, भगवान के दर्शन करने का एक विशेष विधान और सलीका बताया गया है। अक्सर बुज़ुर्गों और पुजारियों से यह सुनने को मिलता है कि ठाकुर जी के ठीक सामने खड़े होकर दर्शन नहीं करने चाहिए। यह बात केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक कारण जुड़े हुए हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से क्या कहता है शास्त्र?

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भक्ति शास्त्रों में भगवान को अनंत ऊर्जा का स्रोत माना गया है। मान्यता है कि जब भक्त सीधे ठाकुर जी की आंखों के सामने खड़ा होता है, तो वहां उपस्थित तीव्र दिव्य ऊर्जा को सामान्य शरीर तुरंत ग्रहण नहीं कर पाता। यह ठीक उसी प्रकार है जैसे सूर्य की किरणों को सीधे देखने पर आंखें चौंधिया जाती हैं।
किनारे से या तिरछे होकर दर्शन करने से यह ऊर्जा सौम्य और संतुलित रूप में भक्त तक पहुंचती है, जिससे मन और शरीर दोनों शांति अनुभव करते हैं।

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दर्शन की विधि और दास्य भाव
हिंदू परंपरा में भगवान के सामने सीधे खड़े होना कई बार अहंकार का प्रतीक भी माना जाता है, मानो हम स्वयं को ईश्वर के समान स्तर पर खड़ा कर रहे हों। इसके विपरीत, थोड़ा हटकर या तिरछे खड़े होकर, सिर झुकाकर दर्शन करना दास्य भाव, विनम्रता और समर्पण को दर्शाता है।
जब भक्त स्वयं को प्रभु के चरणों का सेवक मानता है, तभी उसकी प्रार्थना में सच्ची श्रद्धा और भाव प्रकट होता है।
किश्तों में दर्शन का भाव
भक्ति मार्ग में कहा गया है कि भगवान के दर्शन क्रमशः करने चाहिए—
पहले चरण, फिर कमर, उसके बाद वक्षस्थल और अंत में मुखारविंद।
सीधे सामने खड़े होकर एक ही बार में पूरे स्वरूप को देखने से मन भटक सकता है, जबकि किनारे से दर्शन करने पर भक्त हर अंग में ईश्वर की अनुभूति कर पाता है।

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ब्रज परंपरा और ‘नजर’ का भाव
वृंदावन और ब्रज क्षेत्र की परंपराओं में यह भी माना जाता है कि भगवान को नजर लग सकती है। यही कारण है कि बांके बिहारी जैसे मंदिरों में पर्दा बार-बार गिराया जाता है और भक्तों को एकटक सीधे सामने देखने से रोका जाता है।
यह भाव दर्शाता है कि भगवान केवल पूज्य नहीं, बल्कि अपने प्रिय और सजीव आराध्य हैं।
वैज्ञानिक नजरिया भी देता है संकेत
विज्ञान के अनुसार, मंदिरों का निर्माण ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां पृथ्वी की चुंबकीय तरंगें अधिक सक्रिय होती हैं। मूर्ति के ठीक सामने इन तरंगों का केंद्र बिंदु होता है। यदि भक्त लगातार उसी केंद्र में खड़ा रहे, तो शरीर पर अचानक प्रभाव पड़ सकता है।
किनारे खड़े होकर दर्शन करने से ये तरंगें धीरे-धीरे शरीर के चक्रों (Energy Centers) को संतुलित करती हैं, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।

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निष्कर्ष- ठाकुर जी के सामने सीधे दर्शन न करने की परंपरा केवल नियम नहीं, बल्कि एक संवेदनशील आध्यात्मिक विज्ञान है। यह परंपरा भक्त को अहंकार से दूर रखती है, ऊर्जा को संतुलित करती है और भगवान से जुड़ाव को और गहरा बनाती है।
जब दर्शन सही विधि से होते हैं, तभी भक्ति कर्म नहीं, बल्कि अनुभूति बन जाती है।

श्री यदुधाम पीठ: आस्था के आवरण में सत्ता-साधना का नया प्रयोग

गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में की गई यह घोषणा जितनी ऊँची आवाज़ में समाज, पहचान और आत्मसम्मान की बात करती है, उतनी ही साफ़ तौर पर वह राजनीतिक रणनीति और प्रतीकात्मक राजनीति की ओर संकेत करती है। ‘श्री यदुधाम पीठ’ की स्थापना का ऐलान वस्तुतः धार्मिक-सांस्कृतिक पहल कम और चुनावी गणित से प्रेरित सामाजिक लामबंदी अधिक प्रतीत होता है।
महाराज यदु जैसे पौराणिक-ऐतिहासिक चरित्र को “राजनीतिक प्रतीक बनाकर इस्तेमाल किए जाने” की शिकायत स्वयं में गहरे विरोधाभास से भरी है। जिस व्यक्तित्व को राजनीति से मुक्त कराने का दावा किया जा रहा है, उसी को केंद्र में रखकर एक नई राजनीतिक-सांस्कृतिक धुरी खड़ी की जा रही है। यदि अतीत में यह उपयोग गलत था, तो आज उसी भावनात्मक पूंजी का दोहन किस नैतिक आधार पर सही ठहराया जा सकता है—यह प्रश्न अनुत्तरित है।
“राजनीतिक विचारधाराएं अस्थायी हैं” जैसे वाक्य सुनने में दर्शन प्रतीत होते हैं, लेकिन व्यवहार में यह कथन राजनीति से दूरी नहीं, बल्कि उससे ऊपर खड़े होने का आत्मघोषित भ्रम लगता है। जब स्वयं वक्ता यह स्वीकार करता है कि यह पहल राजनीति से पूरी तरह अलग नहीं है, तब समाज को किसी एक पार्टी या समूह से जोड़ने की आलोचना खोखली हो जाती है। वास्तव में यह प्रयास समाज को राजनीति से अलग करने का नहीं, बल्कि एक नई वैचारिक छतरी के नीचे संगठित कर सत्ता-संतुलन साधने का संकेत देता है।
“विश्व की पहली श्री यदुधाम पीठ” जैसा दावा तथ्य से अधिक नारेबाजी और भावनात्मक उत्तेजना का उदाहरण है। न इसके वैचारिक ढांचे की स्पष्टता सामने आती है, न यह बताया गया है कि यह पीठ शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुधार या वैचारिक विमर्श में कोई ठोस भूमिका कैसे निभाएगी। प्रतिमाओं की स्थापना और भव्यता के वादे समाज की वास्तविक और जमीनी समस्याओं का विकल्प नहीं हो सकते।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसे “समाज को जोड़ने” की पहल बताया जा रहा है, जबकि इसके राजनीतिक निहितार्थ सामाजिक ध्रुवीकरण को और तीखा करने वाले हैं। पहचान की राजनीति को आध्यात्मिक जामा पहनाकर प्रस्तुत करना न केवल ईमानदार संवाद से बचने की रणनीति है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को सत्ता की सीढ़ी बनाने का पुराना और आजमाया हुआ प्रयोग भी है।
यदि ‘श्री यदुधाम पीठ’ का ऐलान सचमुच सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास होता, तो उसमें चुनावी संकेतों, राजनीतिक स्वीकारोक्तियों और भावनात्मक नारों की इतनी प्रबल मौजूदगी नहीं होती। अपने वर्तमान स्वरूप में यह पहल सामाजिक चेतना का आंदोलन नहीं, बल्कि सत्ता-समीकरण साधने की सुनियोजित कवायद अधिक प्रतीत होती है।

चुनावी रणनीति या जांच में बाधा? सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

🔴 सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को बड़ा झटका, I-PAC रेड मामले में नोटिस जारी, ED के आरोप ‘बेहद गंभीर’

नई दिल्ली/कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी आई-पैक (I-PAC) से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे के मामले में गंभीर संवैधानिक संकट में घिरती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न केवल हस्तक्षेप के आरोपों को “बेहद गंभीर” बताया, बल्कि केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डालने के प्रश्न पर भी गहरी चिंता जताई।

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यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ईडी ने राजनीतिक दलों को रणनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कोलकाता स्थित कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। ईडी का आरोप है कि इस दौरान जबरन दस्तावेज और डिजिटल सामग्री उठाकर ले जाने की कोशिश की गई और जांच एजेंसी के काम में बाधा पहुंचाई गई। इसी आधार पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर CBI जांच की मांग की।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि यदि किसी राज्य की पुलिस या संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी गंभीर आर्थिक अपराध की जांच में केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप करता है, तो यह संघीय ढांचे और कानून के शासन के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एजेंसियां सद्भावना से जांच कर रही हैं, तो दलगत राजनीति की आड़ में उन्हें रोका नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर भी तत्काल रोक लगा दी और पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि छापेमारी से जुड़ी सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाए।
ईडी की दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि ममता बनर्जी का छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप एक “खतरनाक मिसाल” है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा दस्तावेज और डिजिटल सामग्री ले जाना केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिराने वाला कदम है। ईडी का दावा है कि आई-पैक कार्यालय से ऐसे सबूत मिले हैं जो आपत्तिजनक हैं और जांच के लिए बेहद अहम हैं।

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ममता बनर्जी की ओर से बचाव
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी डिजिटल उपकरण ले जाने का आरोप झूठा है, जिसकी पुष्टि ईडी के अपने पंचनामे से होती है। सिब्बल ने सवाल उठाया कि कोयला घोटाले से जुड़े मामले में फरवरी 2024 के बाद ईडी निष्क्रिय क्यों थी और चुनावों के बीच अचानक इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।
ममता बनर्जी ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताते हुए कहा कि ईडी तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक रणनीति, उम्मीदवारों की सूची और गोपनीय डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी, जो किसी भी तरह से एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। तब तक नोटिस का जवाब दाखिल करना होगा। यह मामला न केवल ममता बनर्जी बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी दूरगामी असर डाल सकता है।

महादेव गोविंद रानाडे: राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना के अग्रदूत

पुनीत मिश्र

महादेव गोविंद रानाडे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान चिंतकों और समाज सुधारकों में अग्रणी थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग किया। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी न्यायविद, अर्थशास्त्री और सामाजिक सुधारक भी थे।
रानाडे का मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब समाज सामाजिक कुरीतियों से मुक्त हो। उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक समानता के पक्ष में सशक्त आवाज उठाई। उस समय जब समाज रूढ़ियों में जकड़ा हुआ था, रानाडे ने सुधारवादी सोच को नई दिशा दी।
उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उदारवादी विचारधारा के माध्यम से संवैधानिक सुधारों पर बल दिया। उनके विचारों में राष्ट्र निर्माण, नैतिकता और सामाजिक न्याय का स्पष्ट समन्वय दिखाई देता है।
महादेव गोविंद रानाडे का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची राष्ट्रसेवा केवल संघर्ष के मैदान में ही नहीं, बल्कि विचार, लेखन और सामाजिक सुधार के माध्यम से भी की जा सकती है। उनकी पुण्यतिथि हमें यह स्मरण कराती है कि राष्ट्रहित के लिए व्यक्तिगत स्वार्थों का त्याग ही सच्ची देशभक्ति है।
रानाडे के आदर्श और विचार आज भी समाज को प्रगति, समानता और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते हैं।

शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय: करुणा, विद्रोह और यथार्थ के साहित्यकार

नवनीत मिश्र

बंकिमचंद्र चटर्जी और रवींद्रनाथ ठाकुर जैसे महान साहित्यकारों की परंपरा से प्रेरणा लेने के बावजूद शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय साहित्य को एक बिल्कुल अलग दिशा दी। जहां बंकिमचंद्र में राष्ट्रवाद की चेतना मुखर होती है और रवींद्रनाथ के साहित्य में आध्यात्मिक ऊँचाइयों व मानवीय सौंदर्य का विस्तार दिखता है, वहीं शरत्चन्द्र का साहित्य सीधे समाज के उस निचले तबके से संवाद करता है, जो सदियों से उपेक्षित, शोषित और मौन रखा गया था।

शरत्चन्द्र का रचना संसार महलों और सभाओं से नहीं, बल्कि झोपड़ियों, गलियों, विधवाओं के सूने आंगनों और समाज से ठुकराए गए लोगों के मन से निकलता है। उन्होंने स्त्री, दलित, गरीब, किसान और निम्न मध्यवर्ग के दुख-दर्द को केवल देखा ही नहीं, बल्कि उसे पूरी संवेदना के साथ शब्द दिए। उनकी लेखनी करुणा से भरी है, लेकिन वह करुणा निष्क्रिय नहीं, बल्कि सामाजिक विद्रोह की जमीन तैयार करती है।

‘देवदास’ केवल एक प्रेम कथा नहीं, बल्कि उस सामाजिक संरचना का आईना है, जो वर्ग और प्रतिष्ठा के नाम पर मानवीय संबंधों की बलि चढ़ा देती है। ‘परिणीता’, ‘श्रीकांत’, ‘चरित्रहीन’, ‘गृहदाह’ और ‘पथेर दाबी’ जैसी रचनाएं समाज की रूढ़ियों, नैतिक पाखंड और स्त्री के प्रति दोहरे मानदंडों पर तीखा प्रहार करती हैं। खासकर स्त्री पात्र—पारो, चंद्रमुखी, इंदिरा, किरणमयी—कमजोर नहीं हैं, बल्कि वे अपने समय से आगे की चेतना का प्रतिनिधित्व करती हैं।

शरत्चन्द्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे उपदेश नहीं देते। वे नायक-नायिका को आदर्श बना कर नहीं गढ़ते, बल्कि उन्हें मनुष्य के रूप में प्रस्तुत करते हैं—कमजोरियों, गलतियों और संघर्षों के साथ। यही कारण है कि उनका साहित्य आज भी जीवंत लगता है। समाज का निचला तबका उनके यहां केवल सहानुभूति का पात्र नहीं, बल्कि कथा का केंद्र है।

उनकी रचनाओं में विद्रोह शांत है, लेकिन गहरा है। वह तलवार नहीं उठाता, बल्कि सोच बदलने को मजबूर करता है। यही शरत्चन्द्र की क्रांतिकारिता है। उन्होंने यह साबित किया कि साहित्य का असली धर्म सत्ता या अभिजात वर्ग की सेवा नहीं, बल्कि मनुष्य की पीड़ा को आवाज़ देना है।

आज उनकी पुण्यतिथि पर शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय को स्मरण करना केवल एक साहित्यिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस संवेदनशील दृष्टि को फिर से अपनाने का अवसर है, जो समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी केंद्र में रखती है। उनका साहित्य हमें यह सिखाता है कि जब तक आखिरी व्यक्ति के जीवन की सच्चाई साहित्य में नहीं उतरती, तब तक साहित्य अधूरा है।

शिव और मोक्ष: शास्त्रों में वर्णित मुक्ति का परम रहस्य

🔱 शास्त्रों में शिव—धर्म की जड़, आस्था की धड़कन और मोक्ष का महाद्वार


ने हमें सिखाया कि शिव बाहर नहीं, भीतर हैं—
पूजा कर्म नहीं, चेतना है;
भक्ति झुकना नहीं, जागना है।
जहाँ श्वास चलती है, वहीं शिव नृत्य करते हैं।
अब कथा एपिसोड 10 में हम उस शास्त्रोक्त यात्रा पर प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ शिव केवल अनुभूति नहीं, बल्कि धर्म की आधारशिला, आस्था का शिखर और मोक्ष का सुनिश्चित मार्ग बनकर प्रकट होते हैं। यह कथा वेद, उपनिषद, शिवपुराण, लिंगपुराण और महाभारत के शास्त्रोक्त प्रमाणों से सुसज्जित है—एक ऐसी दिव्य गाथा, जो पाठक को केवल पढ़ने नहीं, जीने के लिए विवश कर दे।
शिव: आदि, अनंत और अद्वैत सत्य

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शास्त्र कहते हैं—
“एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थे” (श्वेताश्वतर उपनिषद)
अर्थात रुद्र एक ही हैं, उनके समान दूसरा कोई नहीं।
शिव किसी एक लोक, एक रूप या एक समय में सीमित नहीं हैं। वे आदि हैं—जिनसे सृष्टि का उद्गम हुआ, और अनंत हैं—जिनमें सृष्टि विलीन होती है। वे सगुण भी हैं, निर्गुण भी। यही कारण है कि उन्हें महादेव कहा गया—देवों के भी देव।
धर्म का मूल स्तंभ: शिव का शास्त्रोक्त स्वरूप
धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि धारण करने योग्य जीवन-पद्धति है।
शिव इस धर्म के मूल में हैं।
जटाओं में गंगा—संयम में करुणा
कंठ में विष—त्याग का परम उदाहरण
भस्म का लेपन—अनित्य संसार की स्मृति
त्रिनेत्र—ज्ञान, इच्छा और क्रिया का संतुलन

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शिवपुराण कहता है—
“धर्मो रक्षति रक्षितः”—
जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
और धर्म की रक्षा स्वयं शिव करते हैं।
आस्था: भय से नहीं, विश्वास से जन्मी
शिव की भक्ति भयजनित नहीं, विश्वासजनित है।
वे दंड नहीं देते, दिशा देते हैं।
रावण जैसा अहंकारी भी जब शिव तांडव स्तोत्र में लीन हुआ, तो शिव ने उसे शत्रु नहीं, भक्त के रूप में स्वीकार किया। यह शास्त्रों की सबसे बड़ी शिक्षा है—
शिव भक्ति में पात्रता नहीं, प्रामाणिकता देखी जाती है।
समानता का प्रतीक: शिव का सामाजिक दर्शन

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शिव ही ऐसे देव हैं जो—
देवों में पूजे जाते हैं
असुरों में भी आदरणीय हैं
ऋषियों के आराध्य हैं
और भूत-प्रेत, गंधर्व, किन्नर—सबके स्वामी हैं
यह समानता का शाश्वत संदेश है।
कैलास पर कोई ऊँच-नीच नहीं—
नंदी से लेकर नाग तक, सब समान हैं।
यही कारण है कि शिव को लोकदेव कहा गया—जो हर वर्ग, हर चेतना, हर प्राणी के अपने हैं।
कथा: शिव और मार्कंडेय—मोक्ष का अमर प्रमाण
शिवपुराण की यह कथा मोक्ष का जीवंत उदाहरण है।
ऋषि मृकंडु के पुत्र मार्कंडेय को अल्पायु का श्राप था। मृत्यु के दिन यमराज स्वयं आए। भयभीत बालक शिवलिंग से लिपट गया और ॐ नमः शिवाय का जप करने लगा।

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यमराज ने पाश फेंका—
पर वह शिवलिंग सहित मार्कंडेय को बाँधने लगा।
तभी शिव प्रकट हुए—
काल भी काँप उठा।
शिव ने यम को रोका और कहा—
“जो मेरी शरण में है, उसे मृत्यु छू भी नहीं सकती।”
यही है मोक्ष का रहस्य—
शिव की शरण, अहंकार का विसर्जन और चेतना का जागरण।
मोक्ष: मृत्यु के बाद नहीं, जीवन में
शिव दर्शन में मोक्ष कोई मृत्यु-उपरांत पुरस्कार नहीं,
बल्कि जीवन की अवस्था है।
उपनिषद कहते हैं—
“जीवन्मुक्तः स उच्यते”
जो जीते-जी मुक्त हो जाए, वही सच्चा मुक्त है।
शिव ध्यान, शिव योग, शिव ज्ञान—
ये सब मन को बंधनों से मुक्त करते हैं।
जब वासना, भय और अहंकार समाप्त होता है,
तभी भीतर शिवत्व प्रकट होता है।
शिवलिंग: निराकार से साकार की यात्रा
शिवलिंग कोई मूर्ति नहीं—
वह ऊर्जा का प्रतीक है।
गोलाकार आधार—प्रकृति
ऊर्ध्व लिंग—पुरुष
दोनों का संगम—सृष्टि का रहस्य
लिंगपुराण स्पष्ट करता है कि शिवलिंग
अनंत ब्रह्म का प्रतीक है—
जिसका न आदि है, न अंत।
शिव और साधक: गुरु और शिष्य का संबंध
शिव आदिगुरु हैं।
योग, ध्यान, तंत्र—सबकी शुरुआत उनसे हुई।
नटराज रूप में उनका तांडव बताता है—
सृजन
संरक्षण
संहार
तिरोभाव
अनुग्रह
यही पंचकृत्य साधक को भी करना होता है—
अपने भीतर के अज्ञान का संहार कर,
ज्ञान का सृजन करना।
भावनात्मक निष्कर्ष: शिव तुम ही हो
यह कथा यहीं समाप्त नहीं होती—
क्योंकि शिव कोई दूरस्थ देव नहीं।
जब तुम—
सत्य बोलते हो
करुणा दिखाते हो
अहं त्यागते हो
और मौन में उतरते हो
तभी एपिसोड 10 पूर्ण होता है।
क्योंकि तब शिव कथा नहीं, अनुभव बन जाते हैं।

16 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: सिनेमा, साहित्य, राष्ट्रवाद और संस्कृति के अमर स्तंभ

भारत और विश्व इतिहास में 16 जनवरी वह तिथि है, जब सिनेमा, साहित्य, समाज सुधार, प्रशासन और संस्कृति से जुड़े कई महान व्यक्तित्वों ने इस संसार को अलविदा कहा। इन विभूतियों का योगदान आज भी हमारी सामाजिक चेतना, कला, विचारधारा और राष्ट्रीय पहचान को दिशा देता है। आइए, 16 जनवरी को हुए प्रमुख ऐतिहासिक निधन और उनके जीवन व योगदान को विस्तार से जानते हैं।

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प्रेम नजीर (अब्दुल खादिर) – मलयालम सिनेमा के सदाबहार नायक
निधन: 16 जनवरी 1989
प्रेम नजीर, जिनका वास्तविक नाम अब्दुल खादिर था, का जन्म केरल राज्य में हुआ था। वे मलयालम सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं। प्रेम नजीर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में लगभग 600 से अधिक फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया।
उनकी अदाकारी में रोमांस, संवेदना और सादगी का अद्भुत मेल देखने को मिलता था। उन्होंने मलयालम सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। प्रेम नजीर सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक थे, जिन्होंने केरल की सामाजिक भावनाओं और पारिवारिक मूल्यों को बड़े पर्दे पर जीवंत किया।

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एल. के. झा – भारतीय रिज़र्व बैंक के दूरदर्शी गवर्नर
निधन: 16 जनवरी 1988
एल. के. झा भारत के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और प्रशासक थे। वे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आठवें गवर्नर रहे। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने देश की आर्थिक नीतियों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आरबीआई गवर्नर के रूप में एल. के. झा ने मौद्रिक स्थिरता, बैंकिंग सुधार और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया। उनके निर्णयों ने भारत की आर्थिक संरचना को संतुलन और विश्वसनीयता प्रदान की। वे नीति-निर्माण में स्पष्ट सोच और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले प्रशासक के रूप में याद किए जाते हैं।

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टी. एल. वासवानी – भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रचारक
निधन: 16 जनवरी 1966
टी. एल. वासवानी का जन्म भारत में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध लेखक, शिक्षाविद और भारतीय संस्कृति के प्रखर प्रचारक थे। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा, नैतिक मूल्यों और भारतीय दर्शन के प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया।
वासवानी जी ने भारत और विदेशों में भारतीय संस्कृति, वेदांत और आध्यात्मिक चिंतन को लोकप्रिय बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी रचनाओं और भाषणों ने युवाओं को जीवन में सत्य, सेवा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वे एक ऐसे विचारक थे, जिन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार माना।

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रामनरेश त्रिपाठी – प्राक्छायावादी युग के सशक्त कवि
निधन: 16 जनवरी 1962
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित साहित्यिक परिवेश में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्राक्छायावादी युग के प्रमुख कवि माने जाते हैं।
उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति, ग्रामीण जीवन और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है। उन्होंने सरल भाषा में गहन भावों को अभिव्यक्त किया, जिससे आम पाठक भी साहित्य से जुड़ सका। त्रिपाठी जी का योगदान हिंदी कविता को नई दिशा देने और उसे जनमानस से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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शरत चंद्र चट्टोपाध्याय – बांग्ला साहित्य के अमर कथाशिल्पी
निधन: 16 जनवरी 1938
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ था। वे बांग्ला भाषा के महान उपन्यासकार और कथाकार थे।
उनकी रचनाओं में समाज की सच्चाइयाँ, नारी पीड़ा, प्रेम, त्याग और सामाजिक कुरीतियों का यथार्थ चित्रण मिलता है। ‘देवदास’, ‘परिणीता’ और ‘श्रीकांत’ जैसी कृतियाँ आज भी पाठकों के हृदय को छूती हैं। शरत बाबू ने साहित्य को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया और आम जन की भावनाओं को शब्द दिए।

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महादेव गोविन्द रानाडे – राष्ट्रवाद और समाज सुधार के अग्रदूत
निधन: 16 जनवरी 1901
महादेव गोविन्द रानाडे का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। वे भारत के महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, विद्वान और न्यायविद थे।
रानाडे जी ने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक समानता के लिए संघर्ष किया। वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रारंभिक विचारकों में शामिल थे। न्यायपालिका और समाज सुधार दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने आधुनिक भारत की बौद्धिक और सामाजिक नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

सूर्य–बुध संयोग से बदलेगा भाग्य, जानिए आज का संपूर्ण राशिफल

शुक्रवार 16 जनवरी का महासंयोग: वाशी योग से चमकेगा भाग्य, करियर–धन–सम्मान में बड़ी बढ़त

(ज्योतिष पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत)

16 जनवरी, शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष है। सूर्य के द्वादश भाव में बुध के गोचर से वाशी योग का निर्माण हो रहा है। इस समय सूर्य मकर (Capricorn ♑) राशि में और बुध धनु (Sagittarius ♐) राशि में विराजमान हैं। वाशी योग को प्रतिष्ठा, पद, सम्मान, विदेश यात्रा और करियर उन्नति का कारक माना गया है। इस योग के प्रभाव से मेष, मिथुन, सिंह, मकर सहित कई राशियों के जातकों को आर्थिक मजबूती, सामाजिक सम्मान और नए अवसर मिलेंगे।

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आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत दैनिक राशिफल, जिसमें करियर, व्यवसाय, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन, धन, शुभ रंग, शुभ अंक और आराध्य देवता की जानकारी शामिल है।

मेष राशि (Aries ♈)
नामाक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज भाग्य भाव में चंद्रमा का प्रभाव आपके पक्ष में रहेगा। करियर में कोई महत्वपूर्ण डील शाम तक फाइनल हो सकती है। प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मान मिल सकता है। व्यवसाय में विस्तार के योग हैं। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के संकेत हैं। कला व संगीत से जुड़े जातकों को मंच या सराहना मिल सकती है।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
आराध्य देव: हनुमान जी

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वृष राशि (Taurus ♉)
नामाक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
नई योजनाओं पर काम शुरू होगा। व्यापार में स्थान परिवर्तन या नई शाखा खोलने की योजना सफल हो सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता आएगी। राजनीतिक लोगों को संगठन में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
आर्थिक स्थिति: निवेश से लाभ।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
आराध्य देव: लक्ष्मी माता

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मिथुन राशि (Gemini ♊)
नामाक्षर: का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा
दिन रचनात्मक कार्यों के लिए श्रेष्ठ है। मीडिया, लेखन, डिजाइन, संगीत से जुड़े लोगों को पहचान मिलेगी। नौकरी में सीनियर का सहयोग प्राप्त होगा। छात्रों के लिए नई सीख का दिन है।
आर्थिक स्थिति: संतुलित लेकिन प्रगति की ओर।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
आराध्य देव: गणेश जी

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कर्क राशि (Cancer ♋)
नामाक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
आपका परिश्रम तुरंत फल देगा। ऑफिस में आपकी बातों को महत्व मिलेगा। कला व सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी संभव है। राजनीति में सक्रिय लोगों के लिए जनसमर्थन बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: रुके धन की प्राप्ति।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
आराध्य देव: शिव जी

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सिंह राशि (Leo ♌)
नामाक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
कार्यभार अधिक रहेगा, लेकिन शाम तक शुभ समाचार मिलेगा। प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सावधानी रखनी होगी। विद्यार्थियों के लिए अध्ययन में ध्यान जरूरी है।
आर्थिक स्थिति: खर्च के साथ लाभ।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
आराध्य देव: सूर्य देव

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कन्या राशि (Virgo ♍)
नामाक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
संयम से काम लें। साझेदारी के मामलों में स्पष्टता रखें। शिक्षा और रिसर्च से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा है।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: हल्का हरा
शुभ अंक: 5
आराध्य देव: विष्णु भगवान
तुला राशि (Libra ♎)
नामाक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
दिन लाभकारी है। कानूनी और ऑफिस से जुड़े विवाद सुलझेंगे। राजनीति में संतुलित बयान लाभ देंगे।
आर्थिक स्थिति: लाभ के अवसर।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 6
आराध्य देव: महालक्ष्मी

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वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
नामाक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
धन और सम्मान दोनों में वृद्धि होगी। व्यापार में नवीन प्रयोग लाभकारी रहेगा। कला, अभिनय, रिसर्च से जुड़े लोग आगे बढ़ेंगे।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 8
आराध्य देव: भैरव बाबा

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धनु राशि (Sagittarius ♐)
नामाक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
जोखिम सोच-समझकर लें। शिक्षा और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। राजनीतिक लोगों को नई रणनीति बनानी होगी।
आर्थिक स्थिति: मेहनत से लाभ।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
आराध्य देव: विष्णु भगवान
मकर राशि (Capricorn ♑)
नामाक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
साझेदारी के काम लाभ देंगे। प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। छात्रों के लिए अनुशासन जरूरी है।
आर्थिक स्थिति: स्थिर लेकिन भरोसेमंद।
शुभ रंग: स्लेटी
शुभ अंक: 4
आराध्य देव: शनिदेव

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कुंभ राशि (Aquarius ♒)
नामाक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
स्वास्थ्य पर ध्यान दें। व्यापार में स्थितियां अनुकूल रहेंगी। तकनीक, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में लाभ।
आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 7
आराध्य देव: शिव जी

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मीन राशि (Pisces ♓)
नामाक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
आज जोखिम लाभ देगा। सेवा, शिक्षा, कला और आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। किसी जरूरतमंद की मदद से पुण्य मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: लाभकारी।
शुभ रंग: पीच
शुभ अंक: 9
आराध्य देव: नारायण

16 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: खेल, कला, विज्ञान और आध्यात्म के सितारे जिन्होंने भारत का नाम रोशन किया

16 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास और विश्व पटल पर इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि इस दिन अनेक ऐसे महान व्यक्तित्वों का जन्म हुआ, जिन्होंने खेल, कला, संगीत, चिकित्सा, विज्ञान, प्रशासन और आध्यात्म के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। इन विभूतियों का जीवन संघर्ष, साधना और राष्ट्रहित में योगदान से भरा रहा है। आइए जानते हैं 16 जनवरी को जन्मे प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में विस्तार से।

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🔹 श्रीहरि नटराज (जन्म: 16 जनवरी 2001)
श्रीहरि नटराज भारत के उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय तैराक हैं। उनका जन्म कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु शहर में हुआ। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाले श्रीहरि ने कम उम्र में ही तैराकी को अपना लक्ष्य बना लिया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई पदक जीते। कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर उनका प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणा है। वे भारत में तैराकी जैसे खेल को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और देश के खेल भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।

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🔹 वी. एस. संपत (जन्म: 16 जनवरी 1950)
वी. एस. संपत भारत के भूतपूर्व 18वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। उनका जन्म तमिलनाडु राज्य में हुआ। एक कुशल प्रशासक के रूप में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रक्रिया—चुनाव—को पारदर्शी, निष्पक्ष और मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया। उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और साख और भी मजबूत हुई। उन्होंने तकनीकी सुधारों और सख्त निर्णयों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की, जिससे भारत की चुनावी प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई।

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🔹 कबीर बेदी (जन्म: 16 जनवरी 1946)
कबीर बेदी का जन्म पंजाब के लाहौर (तत्कालीन भारत) में हुआ। वे भारतीय सिनेमा के ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने भारत के साथ-साथ अमेरिका और इटली में भी अपनी पहचान बनाई। ‘संदोकान’ जैसी अंतरराष्ट्रीय टीवी सीरीज ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध बनाया। भारतीय फिल्मों, हॉलीवुड और यूरोपीय सिनेमा में काम कर उन्होंने भारतीय प्रतिभा को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनका जीवन भारतीय कला और संस्कृति की वैश्विक पहुंच का प्रतीक है।

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🔹 मुनीश्वर चन्द्र डावर (जन्म: 16 जनवरी 1946)
डॉ. मुनीश्वर चन्द्र डावर एक प्रतिष्ठित भारतीय चिकित्सक हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित कर दिया। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए नि:स्वार्थ भाव से की गई चिकित्सा सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2023 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा। चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

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🔹 डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय (जन्म: 16 जनवरी 1931)
डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में हुआ। वे भारत के ‘प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी’ के जनक माने जाते हैं। सीमित संसाधनों और विरोधों के बावजूद उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उनका शोध भारतीय विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। आज भारत में आईवीएफ तकनीक का व्यापक विकास उन्हीं की नींव पर खड़ा है।

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🔹 कामिनी कौशल (जन्म: 16 जनवरी 1927)
कामिनी कौशल का जन्म लाहौर में हुआ। वे हिन्दी फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री और बाद में टीवी कलाकार रहीं। उन्होंने सशक्त महिला किरदारों के माध्यम से भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। अभिनय के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर उनकी सोच ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। वे भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की महत्वपूर्ण कलाकार मानी जाती हैं।

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🔹 ओ. पी. नैय्यर (जन्म: 16 जनवरी 1926)
ओ. पी. नैय्यर का जन्म पंजाब में हुआ। वे हिन्दी सिनेमा के महान संगीतकार थे, जिन्होंने अपने अनोखे संगीत और ताल से फिल्मी गीतों को नई पहचान दी। बिना लता मंगेशकर के भी हिट संगीत देने वाले वे इकलौते संगीतकार माने जाते हैं। उनका संगीत आज भी सदाबहार है और भारतीय संगीत धरोहर का अहम हिस्सा है।

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🔹 गुरु हरराय साहिब (जन्म: 16 जनवरी 1630)
गुरु हरराय सिखों के सातवें गुरु थे। उनका जन्म पंजाब क्षेत्र में हुआ। उन्होंने करुणा, सेवा और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। वे आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण के समर्थक थे। उनके नेतृत्व में सिख परंपरा ने मानवता, शांति और सेवा के मूल्यों को मजबूती दी। उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय भी रहा।

कौन-सा मूलांक आज दिलाएगा धन और सफलता?

आज का अंक राशिफल: कौन-सा मूलांक बदलेगा आपकी किस्मत? जानिए पूरा भविष्यफल

ज्योतिष शास्त्र की तरह अंक ज्योतिष भी व्यक्ति के स्वभाव, सोच, निर्णय क्षमता और भविष्य के संकेत देता है। जन्मतिथि से निकलने वाला मूलांक बताता है कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा।
पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत 16 जनवरी 2026 का अंक राशिफल जातकों को सरल शब्दों में जीवन के हर क्षेत्र की सटीक जानकारी देता है।

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🔢 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)
आज आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता प्रबल रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: अधिकारी वर्ग आपकी बात सुनेगा। प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए दिन अनुकूल।
कला/संगीत: मंच पर पहचान मिल सकती है।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, जनता का समर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि के संकेत।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव की आराधना करें।

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🔢 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
भावनाओं में बहने से बचें, लेकिन संवेदनशीलता आपकी ताकत बनेगी।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में लाभ, लेकिन निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: लेखन, मनोविज्ञान, साहित्य के छात्रों के लिए अच्छा दिन।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति: पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता रहेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: चंद्र देव को दूध अर्पित करें।
🔢 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
जोश और सकारात्मक सोच से सफलता मिलेगी।
कार्य/व्यवसाय: नई योजना शुरू हो सकती है।
शिक्षा: मैनेजमेंट, टीचिंग, कोचिंग से जुड़े छात्रों के लिए शुभ।
कला/संगीत: मंचीय प्रस्तुति सफल रहेगी।
राजनीति: भाषण और संवाद से लाभ।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के संकेत।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: गुरु बृहस्पति की पूजा करें।

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🔢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
धैर्य से काम लें, परिणाम देर से लेकिन स्थायी मिलेंगे।
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी, निर्माण, रियल एस्टेट में सावधानी रखें।
शिक्षा: इंजीनियरिंग और रिसर्च छात्रों के लिए मिश्रित फल।
कला: रचनात्मकता में ठहराव।
प्रशासन: नियमों का पालन जरूरी।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: गणेश जी की आराधना करें।
🔢 मूलांक 5 (5, 14, 23)
परिवर्तन और नई संभावनाओं का दिन।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया, सेल्स में लाभ।
शिक्षा: कम्युनिकेशन और आईटी छात्रों के लिए अच्छा समय।
कला/संगीत: नई पहचान मिल सकती है।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: आय-व्यय संतुलित रखें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु की पूजा करें।

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🔢 मूलांक 6 (6, 15, 24)
प्रेम, सौंदर्य और संतुलन का दिन।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, डिजाइन, होटल इंडस्ट्री में सफलता।
शिक्षा: आर्ट्स और डिजाइन छात्रों के लिए श्रेष्ठ दिन।
कला/संगीत: प्रशंसा मिलेगी।
राजनीति: सौम्य छवि से लाभ।
आर्थिक स्थिति: धन वृद्धि के योग।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: मां लक्ष्मी की आराधना करें।
🔢 मूलांक 7 (7, 16, 25)
आत्ममंथन और सोच-विचार का दिन।
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, अध्यात्म, लेखन से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: पीएचडी, शोध छात्रों के लिए अच्छा।
कला: एकांत में रचना बेहतर होगी।
प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान शिव की पूजा करें।

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🔢 मूलांक 8 (8, 17, 26)
मेहनत रंग लाएगी।
कार्य/व्यवसाय: उद्योग, निर्माण, सरकारी ठेके में लाभ।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता।
राजनीति: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
प्रशासन: अधिकार मिल सकते हैं।
आर्थिक स्थिति: मजबूत होगी।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा: शनि देव की पूजा करें।

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🔢 मूलांक 9 (9, 18, 27)
ऊर्जा और साहस से भरा दिन।
कार्य/व्यवसाय: नया काम शुरू करने के योग।
शिक्षा: खेल, डिफेंस, मेडिकल छात्रों के लिए शुभ।
कला: जोश के साथ प्रदर्शन।
राजनीति: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभ के योग।
शुभ रंग: केसरिया
शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी की आराधना करें।

भारत से विश्व तक: 16 जनवरी से जुड़े सबसे बड़े फैसले और घटनाएँ

📜 इतिहास के पन्नों में 16 जनवरी: युद्ध, विज्ञान, राजनीति और सत्ता परिवर्तन की यादगार तारीख


इतिहास में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं, जो एक साथ कई क्षेत्रों—राजनीति, युद्ध, विज्ञान, खेल और संस्कृति—में बड़ी घटनाओं की साक्षी बनती हैं। 16 जनवरी भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तारीख है, जिसने सदियों से विश्व और भारत के इतिहास को दिशा देने वाली घटनाओं को जन्म दिया। आइए जानते हैं 16 जनवरी से जुड़ी वे प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ, जिनका प्रभाव आज भी महसूस किया जाता है।

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🔰 2020 – के-9 वज्र-टी तोप से भारत की सैन्य ताकत को नई धार
16 जनवरी 2020 को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के सूरत स्थित हजीरा एलएंडटी आर्मर्ड सिस्टम कॉम्प्लेक्स से 51वीं के-9 वज्र-टी तोप को भारतीय सेना के लिए रवाना किया। यह स्वदेशी तोप ‘मेक इन इंडिया’ का बड़ा उदाहरण बनी। इससे भारत की तोपखाना क्षमता मजबूत हुई और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिली।
🌍 2013 – सीरिया के इदलिब में बम धमाके, मानवता पर गहरा घाव
सीरिया के इदलिब प्रांत में 16 जनवरी 2013 को हुए बम धमाकों में 24 निर्दोष लोगों की मौत हो गई। यह घटना सीरियाई गृहयुद्ध की भयावहता को दर्शाती है। वर्षों से जारी संघर्ष ने आम नागरिकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया और वैश्विक समुदाय को शांति पर पुनर्विचार करने को मजबूर किया।
🏏 2009 – रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ऐतिहासिक 38वीं जीत
क्रिकेट इतिहास में 16 जनवरी 2009 का दिन खास रहा, जब मुंबई ने उत्तर प्रदेश को हराकर रिकॉर्ड 38वीं बार रणजी चैम्पियनशिप अपने नाम की। यह जीत मुंबई की घरेलू क्रिकेट में अद्वितीय श्रेष्ठता और निरंतरता का प्रतीक बनी।

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⚖️ 2008 – सेतुसमुद्रम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम
16 जनवरी 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सेतुसमुद्रम परियोजना पर नया मसौदा पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। यह परियोजना धार्मिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक बहस का केंद्र रही। अदालत की भूमिका ने लोकतांत्रिक संतुलन को मजबूत किया।
🗳️ 2006 – मिशेल बाशेलेट बनीं चिली की पहली महिला राष्ट्रपति
इस दिन मिशेल बाशेलेट चिली की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गईं। यह लैटिन अमेरिकी राजनीति में महिला नेतृत्व की ऐतिहासिक उपलब्धि थी और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
🚀 2003 – कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला 16 जनवरी 2003 को अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हुईं। यह मिशन विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण था, हालांकि कुछ सप्ताह बाद कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना ने दुनिया को गहरा सदमा दिया।

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🌐 1991 – पहला खाड़ी युद्ध शुरू
16 जनवरी 1991 को अमेरिका ने इराक के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिससे पहला खाड़ी युद्ध आरंभ हुआ। इस युद्ध ने मध्य-पूर्व की राजनीति, तेल अर्थव्यवस्था और वैश्विक कूटनीति को पूरी तरह बदल दिया।
🏰 1681 – संभाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक
महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में 16 जनवरी 1681 को छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ। यह मराठा साम्राज्य की निरंतरता और स्वराज्य की शक्ति का प्रतीक था।

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🏛️ 1955 – खड्गवासला NDA का उद्घाटन
पुणे के खड्गवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) का औपचारिक उद्घाटन 16 जनवरी 1955 को हुआ। यह संस्थान आज भी भारतीय सेना के श्रेष्ठ नेतृत्व को गढ़ने का केंद्र है।

मास शिवरात्रि पर मूल नक्षत्र का प्रभाव: सावधानी और साधना का संतुलन

पंचांग 16 जनवरी 2026 | आज का हिंदू पंचांग, शुभ–अशुभ मुहूर्त, यात्रा दिशा, व्रत व योग,आज का पंचांग – शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

आज माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि है। दिन मास शिवरात्रि और प्रदोष व्रत के कारण विशेष फलदायी माना गया है। चंद्रमा पूरे दिन धनु राशि में और मूल नक्षत्र (गण्डमूल) में रहेगा, इसलिए कुछ कार्यों में विशेष सावधानी आवश्यक है।

तिथि विवरण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी – 15 जनवरी 08:16 PM से 16 जनवरी 10:22 PM तक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – 16 जनवरी 10:22 PM से 18 जनवरी 12:04 AM तक
🌟 नक्षत्र, योग व करण
नक्षत्र – मूल (05:47 AM से 17 जनवरी 08:12 AM तक)
योग – ध्रुव (09:06 PM तक), उसके बाद व्याघात योग
करण –
गर: 09:22 AM तक
वणिज: 10:22 PM तक
विष्टि (भद्रा): 10:22 PM के बाद
🕉️ संवत व मास
विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)
शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास – पौष
पूर्णिमांत मास – माघ
राष्ट्रीय तिथि – पौष 26, 1947
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 07:14 AM
सूर्यास्त – 05:58 PM
चन्द्रोदय – 05:11 AM
चन्द्रास्त – 03:46 PM
अयन – उत्तरायण
ऋतु – द्रिक: शिशिर | वैदिक: हेमंत
🔴 अशुभ काल (इन समयों में शुभ कार्य न करें)
राहुकाल – 11:16 AM से 12:36 PM
यमगण्ड – 03:17 PM से 04:38 PM
कुलिक काल – 08:34 AM से 09:55 AM
दुर्मुहूर्त –
09:23 AM – 10:06 AM
12:58 PM – 01:40 PM
वर्ज्यम् –
06:25 AM – 08:11 AM
02:35 PM – 04:21 PM
🟢 शुभ काल (महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उत्तम)
ब्रह्म मुहूर्त – 05:37 AM – 06:25 AM
अभिजीत मुहूर्त – 12:15 PM – 12:58 PM
अमृत काल – 01:13 AM – 02:59 AM
आनन्दादि योग – सुस्थिर
सर्वार्थसिद्धि योग – ❌ आज नहीं है
सूर्य व चंद्र राशि
सूर्य राशि – मकर
चंद्र राशि – धनु (पूरा दिन–रात)
🚩 चंद्रबल व ताराबल
चंद्रबल (17/01/26 सुबह 07:14 तक) –
मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन
ताराबल (17/01/26 सुबह 07:14 तक) –
भरणी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व/उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्व/उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
🧭 यात्रा दिशा विचार (दिशा शूल)
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित?
शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा अशुभ मानी जाती है।
यदि यात्रा अनिवार्य हो तो क्या करें?
गुड़ या दही खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
किस दिशा में यात्रा लाभकारी?
पूर्व और उत्तर दिशा की यात्रा से लाभ, सफलता और कार्यसिद्धि के योग बनते हैं।
🛕 आज के व्रत–पर्व का महत्व
मास शिवरात्रि – भगवान शिव की उपासना, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण से मनोकामना पूर्ति।प्रदोष व्रत – प्रदोष काल में शिव पूजन से रोग, ऋण और संकटों से मुक्ति।
📌 नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ जिम्मेदार नहीं होगा। कृपया किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों की अहम भूमिका, महिलाओं की सहभागिता से सशक्त होता समाज: पूनम टंडन

पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ, 22 टीमें पहुंचीं

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में क्रीड़ा परिषद के तत्वावधान में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) टूर्नामेंट 2025–26 का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों पर विशेष जोर दिया गया है। खेलों में महिलाओं की भागीदारी से परिवार, समाज और देश सशक्त होता है। बास्केटबॉल जैसी टीम खेल गतिविधियां ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग का प्रभावी माध्यम हैं।

प्रतिकुलपति प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी ने कहा कि खेल में जीत से अधिक महत्वपूर्ण सहभागिता और खेल भावना है, जो व्यक्तित्व विकास में सहायक होती है।

एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा गोरखपुर विश्वविद्यालय को आवंटित इस प्रतिष्ठित बास्केटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत झंडारोहण और कैप्टन ओथ सेरेमनी के साथ हुई। टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन 16 जनवरी 2026 को प्रातः 9:00 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा।

इस बास्केटबॉल टूर्नामेंट के ऑब्जर्वर के रूप में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ने त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास को नियुक्त किया है। पूर्वी क्षेत्र में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आंशिक मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय शामिल हैं। प्रतियोगिता में अब तक 22 टीमें पहुंच चुकी हैं, जबकि चार टीमें मार्ग में हैं।

टूर्नामेंट के चीफ रेफरी वीरेंद्र वीर विक्रम सिंह हैं। उनके साथ रोहित शर्मा, सौरभ गुप्ता, एल.के. बिस्वाल, मनोज दुबे, अफरोज जमाल, राहुल सक्सेना, सोनेंद्र श्रौतिया, आर.सी. सिंह, अजीत कुमार और वी.पी. दुबे निर्णायक की भूमिका निभा रहे हैं। सभी बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के क्वालिफाइड नेशनल रेफरी हैं।

अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अनंत सिंह और स्कंद राय ज्यूरी ऑफ अपील के सदस्य के रूप में प्रतियोगिता से जुड़े हैं। आयोजन सचिव डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास में महिला संवर्ग में यह पहली बार पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश मिश्र ने कहा कि 14 प्रांतों से आई टीमों के लिए खेल मैदान से लेकर आवास और अन्य सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुनिश्चित की गई हैं, ताकि खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

इस अवसर पर राज्य युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. विभ्राट चंद कौशिक सहित विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहेl