Saturday, June 13, 2026
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अनियंत्रित बाइक ट्राली से टकराई, 69 वर्षीय वृद्ध गंभीर रूप से घायल

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद के बरहज नगर में शनिवार देर रात एक सड़क हादसा हो गया। बारा दीक्षित चौराहे के पास अनियंत्रित बाइक ट्राली से टकरा गई, जिससे बाइक सवार वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गए।

घर लौटते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भलुअनी थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरा कोट निवासी श्यामनंदन सिंह (69) पुत्र स्वर्गीय रामसुरत सिंह शनिवार रात बाइक से अपने घर जा रहे थे। जैसे ही वे बारा दीक्षित चौराहे के पास पहुंचे, बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सामने खड़ी ट्राली से टकरा गई।

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स्थानीय लोगों ने पहुंचाया अस्पताल

हादसे के बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने घायल वृद्ध को तुरंत उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें महर्षि देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

हालत गंभीर, इलाज जारी

हादसे में वृद्ध को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस को सूचना दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

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मौनी अमावस्या पर आस्था का महासंगम, स्नान-दान से पुण्य अर्जन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा )। मौनी अमावस्या पर्व रविवार को जिले के धनघटा तहसील क्षेत्र स्थित बिडहरघाट पर श्रद्धा और आस्था के साथ लोगों ने डुबकी लगाई। सुबह से ही मौसम पूरी तरह साफ रहा और धूप खिली रहने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। तड़के से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पावन सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालु अन्नदान, गोदान, वस्त्रदान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। पूरे घाट पर हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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अनुकूल मौसम के चलते बिडहरघाट पर दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को अर्घ्य दिया और सरयू मैया की विधिवत पूजा-अर्चना की। घाट फूल-मालाओं से सजा रहा। श्रद्धालुओं ने महाकाल मंदिर में जलाभिषेक कर मन्नतें मांगीं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई।
मौनी अमावस्या के अवसर पर जिले की राप्ती, आमी, कुआंनो सहित अन्य नदियों और पवित्र स्थलों पर भी श्रद्धालुओं ने स्नान और दान-पुण्य किया। विभिन्न स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रीय घाटों पर पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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घाट पर जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान, सत्यनारायण कथा और यज्ञ आयोजित होते रहे, जिससे मेले की रौनक बढ़ गई। बिडहरघाट पर लगे मेले में सौंदर्य प्रसाधन, मिठाई सहित अन्य दुकानों पर खरीदारी के लिए भारी भीड़ देखी गई।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन द्वारा बिडहरघाट क्षेत्र में व्यापक इंतजाम किए गए। धनघटा और उमरिया बाजार में बैरिकेडिंग कर बिडहरघाट की ओर जाने वाले वाहनों पर नियंत्रण रखा गया, जिससे आवागमन सुचारु बना रहा और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई। इसी प्रकार अन्य घाटों पर भी व्यवस्था के समाचार मिल रहे हैं।

संघर्ष, करुणा और कर्म: जीवन को समझने का समग्र दृष्टिकोण

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जीवन केवल जन्म और मृत्यु के बीच की एक सीमित यात्रा नहीं है, बल्कि यह निरंतर उठते प्रश्नों और उन्हीं प्रश्नों से जन्म लेते उत्तरों का जीवंत दर्शन है। मनुष्य जैसे-जैसे जीवन के पथ पर आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे उसके सामने असंख्य सवाल खड़े होते हैं—मैं कौन हूं, मेरा उद्देश्य क्या है, सुख क्या है और दुःख क्यों है? इन्हीं प्रश्नों की खोज जीवन को अर्थ, दिशा और गहराई प्रदान करती है।
आज के भौतिकवादी युग में जीवन को प्रायः उपलब्धियों, पद, पैसा और प्रतिष्ठा तक सीमित कर दिया गया है। परंतु जब ये सब होने के बाद भी मन अशांत रहता है, तब मनुष्य को यह अनुभूति होती है कि जीवन के उत्तर बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मचिंतन में छिपे हैं। यही आत्मचिंतन जीवन-दर्शन की वास्तविक शुरुआत है।

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संघर्ष जीवन का अनिवार्य सत्य है। बिना संघर्ष के न अनुभव मिलता है और न ही परिपक्वता। असफलताएं जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक होती हैं, जो मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती हैं। जब व्यक्ति असफलताओं को स्वीकार कर उनसे सीख लेता है, तब वही प्रश्न उसके लिए उत्तर बन जाते हैं और उसका दृष्टिकोण परिष्कृत होता है।
जीवन हमें करुणा, सहनशीलता और संवेदना का भी पाठ पढ़ाता है। दूसरों के दुःख को समझना, जरूरतमंद की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन करना—यही जीवन का व्यवहारिक दर्शन है। जो व्यक्ति केवल अपने लिए जीता है, वह जीवन को भोगता है; लेकिन जो समाज के लिए जीता है, वही जीवन को समझता है।

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आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो जीवन आत्मा की सतत यात्रा है। सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय क्षणिक हैं। स्थायी है तो केवल कर्म और चेतना। गीता का कर्मयोग हो या बुद्ध का मध्यम मार्ग—दोनों यही सिखाते हैं कि जीवन के प्रश्नों का उत्तर संतुलन और समत्व में छिपा है।
आज जब समाज तनाव, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब जीवन को दर्शन के रूप में समझना समय की मांग बन गया है। प्रश्नों से भागना नहीं, बल्कि उनका साहसपूर्वक सामना करना ही सही दिशा देता है। क्योंकि जीवन स्वयं प्रश्न भी है और उत्तर भी—आवश्यकता है तो केवल उसे समझने की दृष्टि की।
वास्तव में, जीवन को जितना जिया जाए, उतना ही वह समझ में आता है—और यही उसका जीवंत दर्शन है।

जन कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में अखण्ड रामायण पाठ, श्रद्धा-भक्ति में डूबे श्रद्धालु


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड की सुप्रसिद्ध चौपाई “तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा। करिहहिं कृपा भानुकूल नाथा॥” से संपुटित अखण्ड रामायण पाठ का भव्य एवं विधिवत आयोजन सैनिक नगर स्थित जन कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा, आस्था और भक्तिमय वातावरण के बीच संपन्न हुआ।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस अखण्ड रामायण पाठ के समापन के पश्चात विधि-विधान से भगवान को भोग अर्पित किया गया। इसके उपरांत भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हरि-इच्छा तक प्रसाद वितरण निरंतर चलता रहा। मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष और भक्ति संगीत से गूंजता रहा।
मंदिर समिति के अध्यक्ष विद्यावाचस्पति डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ने बताया कि मंदिर के आचार्य पंडित बृजेश कुमार मिश्र के पांडित्यपूर्ण मार्गदर्शन, नीरज पांडेय के भजन-गायन समूह, मंदिर समिति तथा सैनिक नगर कॉलोनी के निवासियों के सामूहिक सहयोग से यह आयोजन अत्यंत सफल रहा। अखण्ड रामायण पाठ में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभाग किया।

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इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष कैप्टेन धर्मदेव सिंह, कैप्टेन जय राम ओझा, कैप्टेन मोती लाल वर्मा, कैप्टेन रामचंद्र सिंह, सूबे ओम प्रकाश शर्मा, सूबे धर्म नाथ तिवारी, ओम प्रकाश, इंजीनियर एस.बी. सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल बी.एस. तोमर, रज्जन त्रिपाठी, सूबे मेजर उमेश चंद्र बाजपेई सहित समिति की महिला अध्यक्ष इंदु सिंह, प्रियंका तिवारी, रश्मि त्रिपाठी, मीरा सिंह, शैल सिंह, शैल पांडेय, शीला मिश्रा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
श्रद्धालुओं ने अखण्ड रामायण पाठ को आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला प्रेरक आयोजन बताया।

संजय सेठ की पहल से रांची को मिली बड़ी स्वास्थ्य सौगात

रांची सेवा सदन में ₹500 में डायलिसिस सुविधा शुरू, गरीब मरीजों को बड़ी राहत – संजय सेठ

रांची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड की राजधानी रांची में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और जनहितकारी पहल के तहत अब जरूरतमंद मरीजों को मात्र ₹500 में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होगी। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की अनुशंसा पर नागरमल मोदी सेवा सदन में सामुदायिक डायलिसिस सेंटर का निर्माण किया गया है, जिसका विधिवत उद्घाटन स्वयं संजय सेठ ने किया।
यह डायलिसिस सेंटर कुल 96 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जिसमें 10 बेड की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस पहल से विशेषकर गरीब, मध्यम वर्ग और नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि लंबे समय से उनकी यह इच्छा थी कि रांची में एक ऐसा डायलिसिस सेंटर बने, जहां आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कम दरों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके। उन्होंने बताया कि कई वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद यह सपना साकार हुआ है। अब सेवा सदन में नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों से केवल ₹500 शुल्क लिया जाएगा, जो मौजूदा समय में एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
संजय सेठ ने इस पुनीत कार्य के लिए नागरमल मोदी सेवा सदन के डॉक्टरों, प्रबंधन और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर केवल एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि समाज के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यहां और भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, जिससे आम जनता को लाभ मिलेगा।

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इस अवसर पर कई विशिष्ट लोग उपस्थित रहे, जिनमें अनूप हंजूरा (निदेशक तकनीकी, सीसीएल), अजय मारू, अरुण छछारिया, आशीष मोदी, पुनीत पोद्दार, महेश पोद्दार, डॉ. सुनील रुंगटा और प्रकाश केजरीवाल प्रमुख रूप से शामिल थे। सभी ने इस पहल को सामाजिक सेवा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
नागरमल मोदी सेवा सदन में शुरू हुआ यह सामुदायिक डायलिसिस सेंटर रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के किडनी रोगियों के लिए आशा की नई किरण साबित होगा। कम लागत, बेहतर सुविधा और सेवा भाव के साथ यह केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा।

आस्था के आयोजनों में व्यवस्थाओं की परीक्षा: श्रद्धालुओं की सुविधा क्यों है जरूरी

माघ व मौनी अमावस्या पर आस्था का महासंगम: नारायणी नहर का बल्लो धाम और सरयू तट बने श्रद्धा के केंद्र, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल


महराजगंज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। माघ अमावस्या और मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर पूर्वांचल के प्रमुख तीर्थ स्थलों—महराजगंज जनपद स्थित नारायणी शाखा नहर का प्रसिद्ध बल्लो धाम तथा देवरिया जनपद के भागलपुर क्षेत्र का सरयू नदी तट—पर आस्था और विश्वास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ठंड और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का जनसैलाब अलसुबह से ही उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

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बल्लो धाम पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। हर-हर गंगे, जय नारायणी मैया जैसे जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने श्रद्धा भाव से स्नान कर दीपदान, तिल-दान, अन्नदान तथा ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दी। धार्मिक मान्यता है कि माघ अमावस्या पर पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। स्थानीय ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और साफ-सफाई में सराहनीय भूमिका निभाई, जिससे कोई बड़ी अव्यवस्था नहीं हुई।

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वहीं देवरिया जनपद के मईल थाना क्षेत्र अंतर्गत कालीचरण घाट सहित सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर मौनी अमावस्या के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु मौन व्रत धारण कर स्नान-ध्यान में लीन दिखे। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर गंगा या सरयू में स्नान करने से आत्मशुद्धि होती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था तो रही, लेकिन महिलाओं के लिए वस्त्र बदलने, शौचालय और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ नजर आया।
श्रद्धालु महिलाओं ने बताया कि किसी भी स्तर पर अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। बलिया, देवरसिया और छित्तूपुर जैसे अन्य घाटों पर भी स्थिति लगभग समान रही। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों पर महिलाओं की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।

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इन दोनों आयोजनों ने एक ओर भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर पेश की, तो दूसरी ओर व्यवस्थागत कमियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। यह आवश्यक है कि आस्था के साथ-साथ सुविधाओं का भी समुचित ध्यान रखा जाए, ताकि हर श्रद्धालु बिना असुविधा के धार्मिक अनुष्ठान कर सके।

स्थानीय कवियों की रचनाओं ने रचा सांस्कृतिक सौहार्द का इतिहास

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर महोत्सव 2026 का समापन स्थानीय कवियों के भावपूर्ण और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कवि सम्मेलन के साथ हुआ। इस साहित्यिक संध्या ने गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन करते हुए चर्चित कवि मिन्नत गोरखपुरी ने अपनी पंक्तियाँ—
“सजा के अपने घर में गीता और कुरान रखते हैं,
जहां पर राम रखते हैं वहीं रहमान रखते हैं”—

पढ़ीं, जिस पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकृपाल राय ने की। सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन की शुरुआत आशिया गोरखपुरी ने की, जिसने वातावरण को भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
इस अवसर पर डॉ. सरिता सिंह ने सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए पढ़ा—
“दिल की क्यारी से नफरत के कांटे छोड़ दो यारो,
जहां से धर्म-मजहब की खाई पाट दो यारो।”

एकता उपाध्याय ने आशा और उजाले की बात करते हुए कहा—
“सुबह के उजालों से ज़िद तुम करो,
यह जो सूरज उगा है ढले ना कभी।”
संतोष संगम की पंक्तियाँ देशभक्ति और बदलते सामाजिक यथार्थ को रेखांकित करती रहीं—
“मर मिटेंगे देश पर हुए अलग-अलग थे,
अब किसी के लिए कोई मरता नहीं।”

कवि सुभानी सहित डॉ. आरके राय, अभय कुमार, आशिया गोरखपुरी, मोहम्मद शादाब सुभानी, डॉ. अरुण कुमार पांडे, परी श्रीवास्तव ने भी काव्य पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
कार्यक्रम में डॉ. सौरभ पांडे, संजय मिश्रा, फजल खान, आदिल अमीन, मोहम्मद वाजिक शिबू, राजेश राज, आशीष रुंगटा, प्रशांत पांडेय, गोविंद, विवेक कुमार, आदित्य घोष, डॉ. अनीता पाल सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
गोरखपुर महोत्सव का यह समापन न केवल साहित्यिक उपलब्धि रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रेरक उदाहरण भी बना।

अपराध नियंत्रण की दिशा में देवरिया पुलिस का प्रभावी कदम

सुबह-सुबह पुलिस की सख्ती से बढ़ा सुरक्षा का भरोसा, देवरिया में मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान सफल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद देवरिया में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने तथा आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में रविवार को व्यापक मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक जिले के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में प्रभावी ढंग से संचालित किया गया।

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अभियान के दौरान सभी थाना प्रभारी और थानाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से मौजूद रहे। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। मित्र पुलिसिंग की भावना को सशक्त करते हुए पुलिस कर्मियों ने स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे विवादों का त्वरित समाधान भी किया, जिससे लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
चेकिंग के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की गई। तीन सवारी बैठाने, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई। इसके साथ ही चोरी की गाड़ियों, अवैध असलहा और मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।

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पूरे जनपद में कुल 13 प्रमुख स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें 250 व्यक्तियों और 119 वाहनों की जांच की गई। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। आमजन ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए स्वयं को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस किया।
देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे। पुलिस का यह प्रयास न केवल अपराध नियंत्रण में सहायक है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी देता है।

मनोज तिवारी के मुंबई आवास से 5.40 लाख की चोरी

मुंबई/दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली की उत्तर-पूर्वी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद और मशहूर गायक मनोज तिवारी के मुंबई स्थित आवास में 5.40 लाख रुपये की चोरी का मामला सामने आया है। चोरी की यह वारदात अंधेरी पश्चिम के शास्त्रीनगर इलाके स्थित सुंदरबन अपार्टमेंट में हुई, जहां पूर्व कर्मचारी ने ही घटना को अंजाम दिया।

मैनेजर ने दर्ज कराई शिकायत

इस मामले में मनोज तिवारी के मैनेजर प्रमोद जोगेंदर पांडेय ने अंबोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान सुरेंद्रकुमार दीनानाथ शर्मा के रूप में हुई है, जिसे करीब दो साल पहले नौकरी से हटा दिया गया था।

पहले भी गायब हो चुके थे 4.40 लाख रुपये

अंबोली पुलिस के अनुसार, प्रमोद पांडेय पिछले 20 वर्षों से मनोज तिवारी के मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि घर के बेडरूम में रखी कुल 5.40 लाख रुपये की नकदी चोरी हुई थी।
इसमें से जून 2025 में ही कपाट में रखे 4.40 लाख रुपये गायब हो चुके थे, लेकिन उस समय चोर का कोई सुराग नहीं मिल सका था।

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घर और कपाट की बनावटी चाबियां थीं आरोपी के पास

लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बाद दिसंबर 2025 में घर के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
15 जनवरी 2026 की रात करीब 9 बजे सीसीटीवी अलर्ट के जरिए आरोपी सुरेंद्रकुमार शर्मा को चोरी करते हुए पकड़ा गया। फुटेज में साफ दिखा कि आरोपी के पास घर, बेडरूम और कपाट खोलने की बनावटी चाबियां थीं, जिनकी मदद से वह आसानी से घर में प्रवेश करता था।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने उसी रात करीब एक लाख रुपये की चोरी की थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उससे पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अंबोली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त कर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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🌿 अकेला रह नहीं पाता

विरह, प्रतीक्षा और स्मृतियों की सजीव कविता

अकेला रह नहीं पाता
डाकिया अब कोई पाती
तुम्हारी क्यों नहीं लाता
लाख करता हूँ कोशिश मैं
अकेला रह नहीं पाता
मिलन की आस लेकर
आज भी बैठा हूँ मैं लेकिन
मगर अब आजकल कोई
यहाँ मिलने नहीं आता..।।
चहकतीं थीं कभी चिड़ियां
तो मैं संगीत बुनता था
पिरोने को पुष्प माला
सुगंधित पुष्प चुनता था
आँखें पलकें बिछाए
देखती हैं आज भी रस्ता
कोई खुशियों के आंसू अब
यहाँ देकर नहीं जाता..।।
मुझे है फ़िक्र उनकी
आजकल किस हाल में होंगे
ना जाने कौन सी रंगत
और किस चाल में होंगे
उन्हें शायद मिला होगा
कोई अब और मनुहारी
“विजय” मुझको तुम्हारे बाद
कोई अब नहीं भाता..।।
“विजय” मुझको तुम्हारे बाद
कोई अब नहीं भाता..।।

विजय कनौजिया

ग्राम व पत्रालय-काही
जनपद-अम्बेडकर नगर

बांग्लादेश: राजबाड़ी में हिंदू पेट्रोल पंप कर्मी की हत्या

ढाका/राजबाड़ी (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। राजबाड़ी जिले में शुक्रवार तड़के एक कार चालक ने पेट्रोल की कीमत चुकाए बिना भागने से रोकने पर पेट्रोल पंप पर काम करने वाले हिंदू युवक को वाहन से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान रिपन साहा (30) के रूप में हुई है, जो गोलंदा मोड़ स्थित करीम पेट्रोल पंप पर कार्यरत था। इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया है।

पेट्रोल की कीमत न देने पर रौंदा

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ और समाचार पोर्टल ‘bdnews24.com’ के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे एक काली एसयूवी पेट्रोल पंप पर पहुंची और लगभग 5,000 टका का पेट्रोल भरवाया।

जब चालक ने भुगतान किए बिना वाहन आगे बढ़ाने की कोशिश की, तो रिपन साहा उसके सामने खड़ा हो गया। आरोप है कि चालक ने युवक को कुचलते हुए वाहन भगा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने दर्ज किया हत्या का मामला

राजबाड़ी सदर पुलिस प्रमुख खोनदाकर जियाउर रहमान ने बताया कि इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया जा रहा है। पुलिस ने घटना के बाद एसयूवी जब्त कर ली है और वाहन मालिक अब्दुल हाशिम उर्फ सुजान (55) तथा चालक कमाल हुसैन (43) को गिरफ्तार कर लिया है।

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BNP से जुड़ा बताया जा रहा आरोपी

पुलिस के अनुसार, वाहन मालिक पेशे से ठेकेदार है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की राजबाड़ी जिला इकाई का कोषाध्यक्ष तथा जुबो दल का पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुका है।

चुनाव से पहले बढ़ी सांप्रदायिक हिंसा

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) ने आरोप लगाया है कि जैसे-जैसे आम चुनाव (12 फरवरी) नजदीक आ रहे हैं, देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा तेजी से बढ़ रही है। परिषद के अनुसार, दिसंबर 2025 में ही 51 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं।

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हाल के महीनों में कई हत्याएं

पिछले कुछ महीनों में नरसिंगदी, मैमनसिंह, राजबाड़ी, जेस्सोर, नौगांव और रंगपुर सहित कई इलाकों में हिंदू समुदाय के लोगों की पीट-पीटकर, गोली मारकर और चाकू से हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साल 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगभग 1.31 करोड़ है, जो कुल जनसंख्या का करीब 7.95 प्रतिशत है।

धारा 17-ए: ईमानदार अफसरों की सुरक्षा या भ्रष्टाचार की वैधानिक ढाल?

विजन 2047 और भ्रष्टाचार-मुक्त भारत का संकल्प: धारा 17-ए—ईमानदारी की ढाल या भ्रष्टाचार का हथियार? एक समग्र विश्लेषण


भारत जब अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करने की ओर अग्रसर है, तब विजन 2047 के अंतर्गत एक ऐसे राष्ट्र का संकल्प लिया गया है, जहाँ भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की मूल आत्मा हो। किंतु किसी भी लोकतंत्र में नीतिगत संकल्प तभी सफल होते हैं, जब उन्हें लागू करने वाला कानूनी ढाँचा स्वयं विरोधाभासों से मुक्त हो। आज भारत में यही विरोधाभास भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में जोड़ी गई धारा 17-ए के रूप में सामने खड़ा है, जो एक ओर ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा का दावा करती है, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के लक्ष्य को कमजोर करती प्रतीत होती है।

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मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र), यह मानता हूँ कि भ्रष्टाचार किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए केवल आर्थिक नुकसान का कारण नहीं होता, बल्कि यह जनता के विश्वास, संस्थाओं की साख और कानून के राज को भीतर से खोखला कर देता है। विश्व बैंक, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच बार-बार यह रेखांकित कर चुके हैं कि भ्रष्टाचार सीधे तौर पर गरीबी, असमानता और सामाजिक अशांति को बढ़ाता है। भारत जैसे विकासशील लोकतंत्र में, जहाँ करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं और निर्णयों पर निर्भर हैं, वहाँ भ्रष्टाचार का प्रभाव और भी विनाशकारी हो जाता है।
इसी पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 बनाया गया था। इसका मूल उद्देश्य लोकसेवकों को जवाबदेह बनाना, रिश्वत, पद के दुरुपयोग और सत्ता के दुराचार को आपराधिक कृत्य घोषित करना तथा जनता के संसाधनों और अधिकारों की संवैधानिक रक्षा करना था। इस अधिनियम की आत्मा यह मानकर चलती थी कि लोकसेवक का पद एक ट्रस्ट है, न कि विशेषाधिकार।

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वर्ष 2018 में केंद्र सरकार द्वारा इस अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया गया, जिसके तहत धारा 17-ए जोड़ी गई। इस धारा के अनुसार, किसी भी लोकसेवक के विरुद्ध उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान लिए गए निर्णयों या की गई सिफारिशों के संबंध में, बिना पूर्व अनुमति कोई जांच, पूछताछ या एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। यह अनुमति संबंधित सरकार या सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जानी होती है।
सरकार का तर्क है कि अधिकारी प्रतिदिन ऐसे निर्णय लेते हैं जिनका प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ता है। हर निर्णय सभी को पसंद नहीं आता। यदि हर असंतुष्ट व्यक्ति एफआईआर दर्ज करा सके, तो प्रशासन ठप हो जाएगा। अधिकारी भय के माहौल में काम करेंगे और विकास की गति धीमी पड़ेगी। सरकार के अनुसार, धारा 17-ए ईमानदार अधिकारियों को राजनीतिक प्रतिशोध से बचाने की एक आवश्यक ढाल है।

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लेकिन मूल प्रश्न यही है—क्या सुरक्षा के नाम पर जांच पर ताला लगाया जा सकता है? लोकतंत्र में जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्वतंत्रता होती है। यदि जांच शुरू करने के लिए भी उसी शासन से अनुमति लेनी पड़े, जिसके खिलाफ जांच संभावित है, तो क्या यह व्यवस्था निष्पक्ष कही जा सकती है? आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान जांच एजेंसियों को नाममात्र की स्वतंत्रता देता है और उन्हें कार्यपालिका के अधीन कर देता है।
आज के समय में भ्रष्टाचार केवल रिश्वत तक सीमित नहीं है। आधुनिक लोकतंत्रों में सबसे बड़ा और सबसे अदृश्य खतरा नीतिगत भ्रष्टाचार है—टेंडर और ठेके, लाइसेंस और अनुमति, खनन, भूमि, बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ, रक्षा और सार्वजनिक खरीद। यदि इन्हीं फैसलों को जांच से बाहर कर दिया जाए, तो भ्रष्टाचार कानून का अस्तित्व ही सीमित और लगभग निरर्थक हो जाता है।

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धारा 17-ए का एक और गंभीर पहलू है राजनीतिक संरक्षण और हितों का टकराव। यदि किसी मामले में सरकार स्वयं शामिल हो या उच्च स्तर पर मिलीभगत हो, तो अनुमति मिलने की संभावना न के बराबर रह जाती है। यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था में हितों के टकराव का क्लासिक उदाहरण बन जाती है।
इसी चिंता को लेकर सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) ने सुप्रीम कोर्ट में इस धारा को चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (न्यायपूर्ण प्रक्रिया) का उल्लंघन करता है तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करता है।

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भ्रष्टाचार के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। जांच में देरी से साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं, गवाह प्रभावित हो सकते हैं, फाइलें बदली जा सकती हैं, दस्तावेज गायब हो सकते हैं और डिजिटल सबूत मिटाए जा सकते हैं। यदि जांच शुरू होने में ही महीनों लग जाएँ, तो सच्चाई तक पहुँचना लगभग असंभव हो जाता है। इसका एक अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा प्रभाव यह भी है कि ईमानदार नागरिक, अधिकारी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शिकायत करने से पहले सौ बार सोचने लगते हैं। यह स्थिति व्हिसलब्लोअर संस्कृति को कमजोर कर देती है, जो किसी भी पारदर्शी लोकतंत्र की रीढ़ होती है।
13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में खंडित फैसला सुनाया। एक माननीय न्यायाधीश ने धारा 17-ए को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की राय दी, जबकि दूसरे न्यायाधीश ने इसे ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानते हुए वैध ठहराया, लेकिन लोकपाल/लोकायुक्त की भूमिका के साथ। यह मतभेद स्वयं इस बात का प्रमाण है कि मुद्दा कितना जटिल और संवेदनशील है। अब यह मामला बड़ी पीठ के समक्ष जाएगा, जहाँ यह तय होगा कि संविधान का कौन-सा पक्ष अधिक मजबूत है और लोकतंत्र की दीर्घकालिक आवश्यकता क्या है।

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आगे तीन संभावित रास्ते दिखाई देते हैं—पहला, धारा 17-ए को पूरी तरह रद्द किया जाए; दूसरा, इसे संशोधित कर सीमित रूप में लागू किया जाए; तीसरा, एक नया संतुलित मॉडल विकसित किया जाए, जिसमें जांच की स्वतंत्रता भी बनी रहे और ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
वैश्विक दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों में लोकसेवकों के खिलाफ जांच के लिए कार्यपालिका की पूर्व अनुमति की शर्त नहीं होती। वहाँ स्वतंत्र अभियोजन और न्यायिक निगरानी को प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि नीतिगत भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी कार्रवाई संभव हो पाती है।
यदि भारत वास्तव में विजन 2047 के तहत भ्रष्टाचार-मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शासन चाहता है, तो उसे धारा 17-ए जैसी कानूनी लीकेजेस को बंद करना होगा, जांच एजेंसियों को वास्तविक स्वतंत्रता देनी होगी और राजनीतिक इच्छाशक्ति को मजबूत कानूनी ढाँचे में बदलना होगा।

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अतः समग्र विश्लेषण यही संकेत देता है कि सुरक्षा और जवाबदेही के बीच संतुलन अनिवार्य है। ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर जांच को बंधक बनाना लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। भ्रष्टाचार से लड़ाई में कानून को ढाल नहीं, बल्कि तलवार बनना होगा। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ पर हैं, जिसका फैसला न केवल धारा 17-ए का भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भारत का लोकतंत्र 2047 की ओर किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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— संकलनकर्ता: लेखक-कानूनी विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए(एटीसी), एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र

सूर्य समानता, अनुशासन और निरंतरता का प्रतीक है

🌞 “सूर्य केवल आकाश में नहीं, आत्मा में उदित होता है”

अब एपिसोड 11 हमें उस शास्त्रोक्त सत्य तक ले जाता है, जहाँ सूर्य कोई खगोलीय पिंड मात्र नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, चेतना और आत्मबोध का प्रतीक है।

वेदों से लेकर पुराणों तक, उपनिषदों से लेकर गीता तक—सूर्य को जीवन का साक्षी, कर्म का द्रष्टा और आत्मा का प्रतिबिंब माना गया है।
यह कथा केवल पढ़ने के लिए नहीं,
अनुभव करने के लिए है।

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🌞 शास्त्रों में सूर्य : केवल देव नहीं, धर्म का आधार
ऋग्वेद में सूर्य को कहा गया—
“सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।”
(ऋग्वेद 1.115.1)
अर्थात—
सूर्य स्थिर और गतिशील—संपूर्ण जगत की आत्मा है।
यहाँ सूर्य किसी मूर्ति में सीमित नहीं,
वह समय का नियंता,
कर्मों का साक्षी,
और धर्म का प्रकाशक है।

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🔱 सूर्य की शास्त्रोक्त उत्पत्ति कथा
कश्यप और अदिति से आदित्य
पुराणों के अनुसार,
महर्षि कश्यप और माता अदिति से उत्पन्न बारह आदित्यों में प्रमुख हैं—सूर्य।
इन बारह रूपों में सूर्य वर्ष के बारह महीनों में पृथ्वी का पालन करते हैं।
यही कारण है कि सूर्य—
ऋतुचक्र का नियंता है
कृषि का आधार है
जीवन की धड़कन है

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🌅 सूर्य और आत्मा की समानता (शास्त्रोक्त दृष्टि)
उपनिषद स्पष्ट कहते हैं—
“यथा बाह्यः सूर्यः, तथा आन्तरः आत्मा।”
जैसे बाहर सूर्य अंधकार मिटाता है,
वैसे ही भीतर आत्मा अज्ञान को नष्ट करती है।
सूर्य और आत्मा — अद्भुत समानता
सूर्य
आत्मा
स्वयं प्रकाशित
स्वयं चेतन
सबको समान प्रकाश
सबमें समान चेतना
किसी से कुछ नहीं लेता
अहंकार से मुक्त
निरंतर कर्मशील
निरंतर साक्षी

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🔥 सूर्य : अहंकार नहीं, अनुशासन का प्रतीक
सूर्य प्रतिदिन उगता है,
न किसी के लिए देर करता है,
न किसी से प्रशंसा चाहता है।
भगवद्गीता (3.21) कहती है—
“श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, सामान्य जन उसका अनुसरण करते हैं।”
सूर्य इसी सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है।
वह स्वयं को केंद्र नहीं मानता,
फिर भी पूरा ब्रह्मांड उसी के चारों ओर चलता है।
📜 शास्त्रोक्त कथा : राजा यज्ञध्वज और सूर्य का उपदेश
प्राचीन काल में राजा यज्ञध्वज अत्यंत शक्तिशाली और विद्वान थे।
परंतु उनका सबसे बड़ा दोष था—अहंकार।
एक दिन उन्होंने कहा—
“मेरे बिना राज्य, धर्म और यज्ञ सब शून्य हैं।”
उसी रात स्वप्न में उन्हें सूर्यदेव दिखाई दिए।
सूर्य बोले—
“राजन, मैं प्रतिदिन उगता हूँ,
पर कभी यह नहीं कहता कि मेरे बिना संसार नहीं चलेगा।
जो स्वयं को अनिवार्य समझता है,
वही सबसे पहले पतन की ओर बढ़ता है।”
अगले दिन राजा ने राजसिंहासन त्याग कर
धर्मपूर्वक सेवा का मार्ग अपनाया।
यही सूर्य की सच्ची शिक्षा है।

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🌞 सूर्योपासना : कर्म, नहीं केवल मंत्र
शास्त्र कहते हैं—
“न केवल मंत्र, बल्कि मन की शुद्धि ही सच्ची उपासना है।”
सूर्य को जल अर्पण तब सार्थक है जब—
अहंकार का विसर्जन हो
कर्म शुद्ध हो
दृष्टि समत्वपूर्ण हो
🌄 सूर्य और मानव जीवन : आधुनिक संदर्भ
आज का मनुष्य—
स्वयं को केंद्र मान बैठा है
तेज़ तो है, पर प्रकाशहीन
ऊर्जा है, पर दिशा नहीं
सूर्य सिखाता है—
“तेज बनो, पर तपन मत बनो।”
एपिसोड 11 का सार तत्व
सूर्य बाहर नहीं, भीतर जगाने वाला तत्व है
अहंकार छोड़कर कर्म करने वाला ही सूर्यवत पूज्य बनता है
सूर्य समानता, अनुशासन और निरंतरता का प्रतीक है

पब्लिक बयान और सेलेब्रिटी विवाद: कहां तक है अभिव्यक्ति की सीमा

खुशी मुखर्जी–सूर्यकुमार यादव विवाद: 100 करोड़ मानहानि केस की मांग से मचा हड़कंप

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। अभिनेत्री और सोशल मीडिया पर्सनालिटी खुशी मुखर्जी अपने एक बयान को लेकर चर्चा और आलोचना के केंद्र में हैं। यह मामला भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव से जुड़ा है, जिसके बाद उनके खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि केस की मांग उठने लगी है।
दरअसल, हाल ही में खुशी मुखर्जी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पहुंची थीं, जहां पैपराजी ने उनसे क्रिकेटरों को डेट करने को लेकर सवाल किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खुशी ने कहा कि उन्हें किसी क्रिकेटर को डेट करने में दिलचस्पी नहीं है, लेकिन कई क्रिकेटर्स उनमें रुचि रखते हैं। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने सूर्यकुमार यादव का नाम लेते हुए दावा किया कि वे उन्हें पहले काफी मैसेज किया करते थे।
खुशी मुखर्जी ने यह भी कहा कि अब दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती और वह नहीं चाहतीं कि उनका नाम किसी क्रिकेटर से जोड़ा जाए। हालांकि, उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया। कई यूजर्स ने इस बयान को बिना सबूत का आरोप बताते हुए क्रिकेटर की छवि से जोड़कर देखा।

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इस बयान के बाद मुंबई के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर पुलिस स्टेशन में खुशी मुखर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। फैजान अंसारी का आरोप है कि खुशी का बयान झूठा, भ्रामक और एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिससे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
फैजान अंसारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह इस पूरे मामले को एक पब्लिसिटी स्टंट मानते हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई हो और दोष सिद्ध होने पर कम से कम सात साल की सजा दी जाए। साथ ही उन्होंने 100 करोड़ रुपये के मानहानि केस की भी मांग की है। अंसारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, वह गाजीपुर में ही रहेंगे और इस मुद्दे को हर मंच पर उठाएंगे।

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फिलहाल, इस विवाद पर न तो खुशी मुखर्जी और न ही सूर्यकुमार यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मामला अब सोशल मीडिया से निकलकर कानूनी दायरे में जाता दिख रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

सड़क सुरक्षा माह के तहत स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण


बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत संचालित विशेष अभियान के तहत कर्मा देवी शिक्षण संस्थान, बस्ती में विद्यार्थियों के आवागमन हेतु संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) राज कुमार सिंह, अयोध्या के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

निरीक्षण के दौरान संभागीय परिवहन अधिकारी फ़रीदउद्दीन, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) सुरेश मौर्य और यात्रीकर अधिकारी प्रदीप श्रीवास्तव उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्कूल बसों की फिटनेस, दस्तावेज़ों और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की।

इस अवसर पर संस्थान के प्रेक्षागृह में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को सुरक्षित वाहन संचालन, यातायात संकेतों का पालन और सड़क सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में ट्रैफिक लाइट के महत्व, हेलमेट व सीट बेल्ट के प्रयोग और नशे की अवस्था में वाहन न चलाने जैसी जानकारी दी गई।

अधिकारियों ने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है और प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनकर नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा 01 जनवरी से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देना है।