Saturday, June 13, 2026
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तेज रफ्तार बन रही जान की दुश्मन, युवाओं में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय

नोएडा भंगेल एलिवेटेड रोड पर रफ्तार का कहर: जगुआर कार हादसे में 19 वर्षीय युवती की मौत, तीन गंभीर घायल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)दिल्ली से सटे नोएडा के भंगेल एलिवेटेड रोड पर मंगलवार को तेज रफ्तार ने एक बार फिर जान ले ली। बेकाबू स्पीड से दौड़ रही लग्जरी जगुआर कार एक भीषण सड़क हादसे का कारण बनी, जिसमें 19 वर्षीय फलक अहमद की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद एलिवेटेड रोड पर अफरा-तफरी मच गई, ट्रैफिक पूरी तरह थम गया और लोगों में दहशत फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जगुआर कार बेहद तेज गति में थी। अचानक हुई जोरदार टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास चल रहे वाहन रुक गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार सभी युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
ओवरटेक के प्रयास में बिगड़ा संतुलन
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसा ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान हुआ। कार चालक ने एलिवेटेड रोड पर आगे चल रहे एक अज्ञात कैंटर ट्रक को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इसी दौरान कार का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद ट्रक मौके से फरार हो गया।

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हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घायलों को फौरन नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने फलक अहमद को मृत घोषित कर दिया। घायलों की पहचान आयुष भाटी (18), नील पवार (18) और अंश (18) के रूप में हुई है। तीनों का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। परिजन अस्पताल पहुंच चुके हैं।
पुलिस जांच में जुटी, ट्रक की तलाश जारी
सेक्टर 49 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार कैंटर ट्रक की तलाश शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हादसे के सही कारणों और ट्रक की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि तेज रफ्तार और लापरवाही इस हादसे के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
यह हादसा एक बार फिर एलिवेटेड रोड पर स्पीड कंट्रोल और सड़क सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-स्पीड कॉरिडोर पर ओवरटेकिंग और लापरवाह ड्राइविंग जानलेवा साबित हो रही है।

जनपद बलिया में डॉक्टरों की कमी से जूझता चिकित्सा तंत्र

बलिया का चिकित्सा विभाग: संसाधनों की कमी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जद्दोजहद


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।बलिया जनपद का चिकित्सा विभाग ग्रामीण और शहरी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर विभाग को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती जनसंख्या, सीमित संसाधन और मानवबल की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक पहलों के माध्यम से हालात सुधारने की कोशिश जारी है।
जनपद की सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। विशेषकर स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों में रेफर होना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे की आपात सेवाएं व्यवहारिक रूप से सीमित दिखाई देती हैं।

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स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक जांच सुविधाओं का भी अभाव है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच की सीमित व्यवस्था के चलते मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। दवाओं की उपलब्धता में भी कभी-कभी कमी देखी जाती है, हालांकि जनऔषधि केंद्रों के जरिए सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
अस्पताल भवनों की जर्जर स्थिति, साफ-सफाई, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। एंबुलेंस सेवाओं की सीमित संख्या के कारण दूरस्थ गांवों से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
इन समस्याओं के बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नए स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, पुराने भवनों का कायाकल्प, उपकरणों की खरीद और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, बलिया का चिकित्सा विभाग चुनौतियों के बीच सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ होने की उम्मीद बनी हुई है।

हेलमेट, सीट बेल्ट और संयम से ड्राइविंग पर जोर, अधिवक्ताओं ने लिया जागरूकता का प्रण

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन रांची में सड़क सुरक्षा सेमिनार, अधिवक्ताओं ने लिया नियमों के पालन का संकल्प


राँची (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत उपायुक्त रांची मंजुनाथ भजंत्री के निर्देश पर जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार के नेतृत्व में सोमवार को रांची सिविल कोर्ट कैंपस स्थित डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में सड़क सुरक्षा जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात नियमों के पालन और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें अधिवक्ताओं के साथ सकारात्मक और सार्थक परिचर्चा की गई।

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सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में रांची डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद अग्रवाल उपस्थित रहे। उनके साथ उपाध्यक्ष बिनॉय कुमार राय, सचिव संजय कुमार विद्रोही, जिला रोड इंजीनियर एनालिस्ट गौरव कुमार, रिलेशंस के निदेशक आशुतोष द्विवेदी, तकनीकी सहायक अभय कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं को सड़क सुरक्षा के सामाजिक, कानूनी और मानवीय पहलुओं से अवगत कराया गया।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं बल्कि परिवारों की त्रासदी होती हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक, विशेषकर अधिवक्ताओं जैसे जागरूक वर्ग की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें। सुरक्षित ड्राइविंग, सीट बेल्ट और हेलमेट का अनिवार्य उपयोग, गति सीमा का पालन, ट्रिपल लोडिंग से बचाव, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन से दूरी और शराब पीकर वाहन न चलाने जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम के दौरान यह भी अपील की गई कि सड़क दुर्घटना होने की स्थिति में वीडियो या रील बनाने के बजाय घायल को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। यह एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है और इससे कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। जीवन सभी के लिए अनमोल है और थोड़ी सी सावधानी बड़े हादसों को रोक सकती है।

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इस अवसर पर अधिवक्ताओं और राहगीरों के बीच रोड सेफ्टी बुक का वितरण किया गया, जिससे वे यातायात नियमों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिवक्ताओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और नियमों का पालन करने की शपथ भी दिलाई गई। सेमिनार में बबलू कुमार सिंह, बीरेंद्र प्रताप, शंकर कुमार शर्मा, मनीष कुमार, राम कृष्ण भगत, असीम कच्छप, शोषण नाग, सस्ती रंजन, राज किशोर महतो सहित अनेक अधिवक्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अपराध नियंत्रण की दिशा में अहम कदम: 13 स्थानों पर चला विशेष चेकिंग अभियान

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान: देवरिया पुलिस का सुरक्षा कवच, 255 व्यक्ति व 155 वाहन जांच के दायरे में

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में मंगलवार को “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया। यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक संचालित हुआ, जिसमें जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों के प्रभारी अधिकारियों एवं थानाध्यक्षों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
अभियान का मुख्य उद्देश्य सुबह के समय मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा देना और पुलिस–जनसहयोग को मजबूत करना रहा। पुलिस अधिकारियों ने पार्कों, प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान का प्रयास किया। इससे मित्र पुलिसिंग की अवधारणा को बल मिला और आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना और प्रगाढ़ हुई।

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चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई। विशेष रूप से चोरी के वाहनों की पहचान, तीन सवारी चलने वालों पर कार्रवाई, मोडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों के चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसके साथ ही अवैध असलहा और मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
अभियान के अंतर्गत जनपद के कुल 13 प्रमुख स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 255 व्यक्तियों और 155 वाहनों की जांच की गई। पुलिस ने मौके पर ही छोटे-मोटे विवादों का निस्तारण कर कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। इस पहल को लेकर मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों ने पुलिस की कार्यशैली की सराहना की और इसे जनहित में एक सकारात्मक कदम बताया।

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जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के चेकिंग एवं संवादात्मक अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। उद्देश्य है कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, यातायात नियमों का पालन और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे देवरिया जनपद एक सुरक्षित और विश्वासपूर्ण वातावरण की ओर अग्रसर हो सके।

सरकारी गरिमा पर सवाल: DGP रैंक के अधिकारी पर गिरी गाज

कर्नाटक में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: आपत्तिजनक वीडियो विवाद में DGP रैंक के IPS अधिकारी रामचंद्र राव तत्काल निलंबित


बैगलोर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को एक कड़ा और चर्चित कदम उठाते हुए DGP रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक आपत्तिजनक वीडियो के बाद की गई, जिसमें कथित तौर पर अधिकारी को अपने सरकारी कार्यालय के भीतर महिलाओं के साथ अनुचित स्थिति में देखा गया था। वीडियो सामने आने के बाद राज्य में प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सीधे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यालय तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने स्वयं वीडियो फुटेज देखी और पुलिस विभाग के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी के कथित आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित विभाग से तत्काल रिपोर्ट तलब की और पूछा कि सरकारी गरिमा और अनुशासन के साथ ऐसा समझौता कैसे हो सकता है। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद महज 24 घंटे के भीतर निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

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वायरल वीडियो में कथित तौर पर रामचंद्र राव को ऑफिस समय में वर्दी पहनकर अलग-अलग महिलाओं के साथ गले लगते और किस करते हुए दिखाया गया है। बताया जा रहा है कि ये दृश्य सरकारी चैंबर के भीतर अलग-अलग मौकों पर रिकॉर्ड किए गए, जिनमें महिलाओं के अलग-अलग परिधान नजर आते हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि वीडियो लंबे समय में रिकॉर्ड किया गया हो। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दूसरी ओर, रामचंद्र राव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने वीडियो को “मनगढ़ंत और मॉर्फ्ड” बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। राव के अनुसार, यह वीडियो बेहद पुराना और झूठा है तथा बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अनुचित होगा। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस मामले में अपने वकीलों से सलाह लेकर कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं और गृह मंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं।

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इसके बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरे मामले की औपचारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अधिकारी को पद पर बने रहना उचित नहीं है। इस घटना ने कांग्रेस सरकार पर विपक्षी दलों का दबाव भी बढ़ा दिया था, जो इस बात पर नजर बनाए हुए थे कि सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है या नहीं। निलंबन के फैसले को प्रशासनिक सख्ती और सार्वजनिक जवाबदेही के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

जनपद का चिकित्सा विभाग: संसाधनों की कमी, चुनौतियाँ और सुधार की दिशा में प्रयास

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

बलिया जनपद का चिकित्सा विभाग ग्रामीण व शहरी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में निरंतर प्रयासरत है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग कई प्रकार की कमियों और चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती जनसंख्या, सीमित संसाधन और मानवबल की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके बावजूद विभाग द्वारा इन कमियों को दूर करने के लिए चरणबद्ध प्रयास भी किए जा रहे हैं।सबसे बड़ी समस्याचिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। खासकर स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मरीजों को या तो जिला अस्पताल रेफर किया जाता है या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे की आपात सेवाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं। इसके अलावा, कई स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच की सीमित व्यवस्था के चलते मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। दवाओं की उपलब्धता में भी कभी-कभी कमी देखने को मिलती है, हालांकि जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।अस्पताल भवनों की स्थिति भी एक गंभीर समस्या है। कई पीएचसी और उपकेंद्र जर्जर हालत में हैं, जहां साफ-सफाई, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बनती है। एंबुलेंस सेवाओं की संख्या सीमित होने से दूर-दराज के गांवों से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इन तमाम कमियों के बीच चिकित्सा विभाग सुधार की दिशा में कदम भी उठा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत नए स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण, पुराने भवनों के कायाकल्प और उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सके। इसके साथ ही आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) बलिया ने कहा, “यह सही है कि जनपद में चिकित्सकों और संसाधनों की कमी एक चुनौती है, लेकिन सरकार के निर्देशों के अनुसार इसे दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है, स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मॉनिटरिंग भी बढ़ाई गई है। हमारा लक्ष्य है कि आम जनता को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।”
कुल मिलाकर, बलिया जनपद का चिकित्सा विभाग चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, लेकिन सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रयासों के माध्यम से हालात सुधारने की दिशा में उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है।

राजधानी एक्सप्रेस से स्वर्ग यात्रा: एक तीखा राजनीतिक व्यंग्य

दिल्ली जाइए: स्वर्ग का रास्ता दिल्ली होकर जाता है


व्यंग्य – संजय पराते


आजकल हमारे देश में सब काम भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे इसलिए कि दुनिया के इस कोने में जितने भगवान हैं और अंधभक्त बनकर उसको मानने वाले लोग, दुनिया के किसी और कोने में नहीं मिलेंगे। धर्म प्रधान देश है, तो धत्कर्म भी होना ही है। वरना बताइए, किस देश का प्रधानमंत्री ऐसा बहुरूपिया होगा, जैसा हमारे देश का है। हाथ में त्रिशूल लिए, डमरू बजाते भोले शंकर का बाना धरे दुनिया के किसी और नेता का फोटो-वोटो बताइए! इतना धर्मभक्त प्रधानमंत्री, जो दिन के 18-18 घंटे इस देश के सांस्कृतिक स्वाभिमान को जगाने के काम में लगा हो, उसे एक ट्रेन के 3 घंटे रुकने के लिए कोसना कितनी बड़ी असभ्यता है! निश्चित ही, यह धर्म विरोधी विपक्ष का काम है, जो दीन-दुनिया के हर काम-धाम में प्रधानमंत्री को कोसने के मौके खोजते रहता है। अब बताइए भला, ट्रेन को सही समय पर चलाना ड्राइवर का काम है या प्रधानमंत्री का?

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खबर केवल इतनी-सी है कि समस्तीपुर से सहरसा तक जाने वाली 63348 नंबर की ट्रेन 12:45 बजे समस्तीपुर से रवाना हुई। यह ट्रेन भगवानपुर देसुआ से 12:57 में खुली, लेकिन भगवानपुर से निकलने के बाद और अंगार घर स्टेशन पहुंचने से पहले, बीच रास्ते में ब्रेक वैन का एक्सल लॉक हो गया और चलती ट्रेन के पहिए रुक गए। इस तकनीकी खराबी के कारण वहां ट्रेन लगभग 3 घंटे खड़ी रही। फिर एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (आर्ट) मौके पर पहुंची, जिस पर कैरिज एंड वैगन स्टाफ तथा यांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सवार थे। उन्होंने युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया, खराबी दूर की, ठोक-बजाकर ब्रेक वैन का ठीक होना घोषित किया। फिर ट्रेन वहां से रवाना हुई। तब तक के लिए ट्रेनों का आवागमन दोनों ओर से पूरी तरह बंद रहा। केवल समयबद्धता बनाए रखने के उद्देश्य से राजधानी एक्सप्रेस को बरौनी जंक्शन होते हुए समस्तीपुर के रास्ते डाइवर्ट किया गया। इस पूरी घटना और कार्यवाही की जानकारी देते हुए रेलवे ने प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की और यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

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इस खबर को सकारात्मक ढंग से देखना चाहिए। देखिए, भगवान की कितनी कृपा बरस रही है। पहली बात तो यह कि इस ट्रेन की किसी और ट्रेन से भिड़ंत नहीं हुई। हमारे देश का विपक्ष मोदीजी की रेल को बदनाम करने के लिए आजकल यही काम करवा रहा है। लेकिन विपक्ष का ऐसा दांव यहां फेल हो गया और किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। जान बची, सो लाखों पाएं। सरकार की तिजोरी से भी मुआवजा के रूप में माल निकलने से बच गया। इस माल को देश के विकास के लिए अडानी को सौंपा जा सकता है। इससे अर्थव्यवस्था का इंजन आगे बढ़ेगा और चौथी से तीसरी सीढ़ी पर पहुंचने की हमारी रफ्तार तेज होगी। यह तो हुआ पहला दृष्टिकोण।
अब दूसरे सकारात्मक दृष्टिकोण पर आइए। इंजन के फेल होने या न होने पर मोदी सरकार का बस नहीं है। भगवानपुर में भगवान समाया हुआ है। भगवान और खासकर हिंदुओं का भगवान सर्वशक्तिमान है। हमारे भगवान के गॉड और अल्लाह से भी ज्यादा शक्तिमान होने की चर्चा आजकल गली-कूचों में चल रही है। हमारा भगवान यहां-वहां अपनी शक्ति प्रदर्शन के जरिए इसके नमूने भी दिखा रहा है। अच्छी तरह से समझ लीजिए कि हमारे मोदीजी ऐसे ही डमरू नहीं बजा रहे हैं। अब यह भगवानपुर में विराजमान भगवान की मर्जी है कि वह किस ट्रेन को आगे जाने दे या न जाने दे या आगे ले जाकर कहां रोके! सो, अंगारघर से पहले शीतलता देने उसने ट्रेन रोक दी, ताकि थके हुए यात्री ट्रेन से उतरकर पेड़ों की छांव में कुछ सुस्ता लें, कुछ सूसू-वुसू आदि भी कर लें। शरीर हल्का होने से मन भी हल्का हो जाता है और मन हल्का होने से ताजगी आती है। ट्रेन के खड़ी होने की खबर से पास के गांव के लोग कुछ भजिए-समोसे भी तलकर ले आते हैं, उससे सस्ते में ही कुछ को पेट पूजा का, तो कुछ को अपने चटोरेपन को संतुष्ट करने का भी मौका मिल जाता है। भारतीय रेल गरीबों का जितना खयाल रखती है, अमेरिकी रेल भी अपने अमीरों का उतना खयाल नहीं रखती होगी। भगवानपुर के साथ-साथ मोदीजी को इसके लिए धन्यवाद देना तो बनता ही है।

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अब तीसरे सकारात्मक दृष्टिकोण पर आइए। ट्रेन का रुकना हमारे अंक ज्योतिष के सही होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस मामले में सब कुछ तीन पर टिका है और कहावत ऐसे ही नहीं बनी है, तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा!
ट्रेन रुकी किलोमीटर संख्या 75/3 पर। अंकों का योग होता है 15 और फिर इनका योग 6 होता है। ट्रेन नंबर है 63348 और इसके अंकों का भी अंतिम योग 6 होता है। ट्रेन चली 12:45 बजे यानी 3 का योग। अटकी 12:57 पर — फिर 6 अंतिम योग। गार्ड ब्रेक वैन का नंबर 198732, फिर 3 का योग। पूरा मामला 3 के मूलाधार पर टिका है। जहां मामला ही 3 की अशुभ संख्या का हो, वहां मोदीजी शंकर का रूप धरे या राम का, कुछ हो नहीं सकता — होंहिहैं वोही जो राम रचि राखा। यह अंक ज्योतिष है, जिसके सामने पश्चिम का पूरा गणित फेल है। इस घटना ने हमारे सनातनी ज्ञान की बिना किसी तनातनी के फिर पुष्टि कर दी है। सनातन जिंदाबाद!

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इधर सनातनी धीरेन्द्र शास्त्री ने सरकार को तीन के प्रकोप से बचने की सलाह दी है। धीरेन्द्र शास्त्री की महिमा जान लें कि वे अघोषित सरकार हैं। सरकार से भी बड़े सरकार, जिन्हें और जिनके चेलों-चपाटों को ढोने के लिए उच्च स्तर पर, गैर-कानूनी तरीके से विमानों का इंतजाम किया जाता है। धीरेन्द्र शास्त्री की सलाह से सरकार कैसे करे इंकार! सो, रेलवे मिनिस्ट्री के निर्देश पर पूरा रेल महकमा तीन के प्रकोप को दूर करने में लगा है। एक-एक ट्रेन का नंबर देखा जा रहा है, किस स्टेशन पर कितने समय पहुंचती है और किस समय पर प्रस्थान करती है। ये सब नंबर और समय कहीं तीन के मूलाधार पर तो नहीं टिके हैं, टिके हैं, तो कैसे इसे बदला जाए, आदि-इत्यादि। काम कोई छोटा-मोटा नहीं है, बाकायदा एक आयोग के गठन की मांग करता है। इसकी रिपोर्ट 2046 तक अपेक्षित होगी, ताकि दुर्घटना-मुक्त रेल के रूप में 2047 की पंद्रह अगस्त को हम विकसित भारत में प्रवेश कर सकें।

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सकारात्मक दृष्टिकोण का चौथा एंगल भी देखिए। दुर्घटना हुई नहीं कि हमारी रिलीफ ट्रेन तकनीज्ञों को लेकर पहुंच गई दुर्घटना स्थल पर। वरना पहले के राज में तो रिलीफ ट्रेन को पहुंचने में ही 13-13 घंटे लग जाते थे। पैसेंजर्स बोगियों से उतरकर जंगल-झाड़ियों में ही निबट लेते थे, लकड़ियां बटोरकर पूरे ट्रैक पर स्वाहा-स्वाहा की ध्वनि के साथ यज्ञ शुरू कर देते थे और रिलीफ ट्रेन का आह्वान करते थे। लेकिन इस बार ऐसा कोई मौका मोदीजी की ट्रेन ने पैसेंजर्स को नहीं दिया। रिलीफ टीम ने ट्रेन की बीमारी का भी तुरंत इलाज कर दिया, थमे हुए चक्कों में फिर जान डाल दी। इससे यात्रियों की अटकी हुई सांस भी फिर से चलने लगी। वरना सोचिए, ठंड के दिन! और यात्री दोपहर से अगली सुबह तक कुछ अपनी किस्मत को कोसते, कुछ भारतीय रेल के चक्कों के पंचर होने को सराहते वही पड़े रहते न!
असल में, मोदीजी हैं, तो मुमकिन है। उन्होंने भारतीय तकनीक को इतनी ऊंचाई तक पहुंचा दिया है कि नासा की नाक नीचे है और हम इतने ऊपर कि तीन का काट करने में भी सक्षम हैं। पहले होता यह था कि किसी दुर्घटना के इंतजार में बैठी-बैठी हमारी टीम इतनी उकता जाती थी, पस्त होकर सो जाती थी कि दुर्घटना के बाद उसे ही उठाने में घंटों लग जाते थे। अब उनको दुर्घटना का इंतजार नहीं करना पड़ता, छोटी-मोटी तो होते ही रहती है, बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं भी खुद उनके पास चलकर आती हैं। वे ताक में बैठे ही रहते हैं कि दुर्घटना अब हुई कि तब हुई और होने से पहले ही अपना आर्ट दिखा देते हैं। अब भारतीय रेल जैसा कोई चुस्त रेल इस दुनिया में नहीं है कि चौबीसों घंटे किसी दुर्घटना के इंतजार में बैठे रहे और अपने हुनर का कौशल दिखाए!
और पांचवीं बात। ऐसी ही दुर्घटनाओं के सहारे हमारे देश के लोग थोड़ी-बहुत ज्यादा दुनिया भी देख लेते हैं, वरना तो उन्हें अपना परलोक सुधारने और इस जन्म में हिंदू धर्म को बचाने के झंझट से फुर्सत नहीं मिलती। लेकिन इसके लिए उन्हें किसी पैसेंजर ट्रेन में नहीं, राजधानी ट्रेन नंबर 20503 में सवार होना चाहिए, जिसके अंकों का मूलाधार 1 हो। हमारी कुशलता इसी से पता चलती है कि कितनी जल्दी दिल्ली पहुंचा जाए। रुकने की फुर्सत नहीं है। दिल्ली पहुंचना है, तो बरौनी जंक्शन के भी मुफ्त में अतिरिक्त दर्शन हो जाएं, तो इसमें बुराई क्या है? स्वर्ग जाने के रास्ते की हर बाधा को दूर करना जरूरी है।

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सब दिल्ली जाने की हड़बड़ी में है, क्योंकि जीवन का पूरा पुण्य वही समाया हुआ है। अब अगली बार से किसी पैसेंजर ट्रेन में भूलकर मत बैठना। बैठना है, तो राजधानी में बैठना। दिल्ली स्वर्ग है। मोदीजी का सेवा तीर्थ भी वही है, जहां से स्वर्ग की टिकट मिल रही है। इस पुण्य का लाभ कमाइए। जितनी जल्दी हो सके, दिल्ली जाइए। यात्री बनकर जाइए, विधायक-सांसद बनकर जाइए, मंत्री या उसके चमचे बनकर जाइए, राष्ट्रपति बनकर जाइए या उप राष्ट्रपति बनकर, या अडानी-अंबानी के वफादार नौकर बनकर जाइए, लेकिन दिल्ली जरूर जाइए। स्वर्ग का रास्ता दिल्ली से होकर जाता है।

बीज पर कारपोरेट कब्ज़ा: किसान अधिकारों के लिए बढ़ता खतरा

बीज संशोधन बिल–2025: किसान, बीज संप्रभुता और खाद्य सुरक्षा पर मंडराता संकट

लेखक: इंद्रजीत सिंह


बीज संशोधन बिल–2025 के नाम से भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा हाल ही में एक मसौदा जारी किया गया, जिस पर 11 दिसंबर तक सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इस प्रस्तावित कानून को केवल तकनीकी या प्रशासनिक सुधार के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखे जाने की आवश्यकता है। वर्तमान दौर में केंद्र सरकार नव-उदारवादी नीतियों के तहत लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिनसे सार्वजनिक क्षेत्र, किसान-मजदूर और आम जनता के अधिकारों का क्षरण होता जा रहा है। बिजली संशोधन बिल, चार लेबर कोड, मनरेगा को कमजोर करने की कोशिशें और कृषि मंडी विपणन का राष्ट्रीय प्रारूप—ये सभी उसी नीति-धारा के उदाहरण हैं।

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बीज कृषि का मूल आधार है और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़। इसलिए बीज या “प्लांट मैटर” मात्र एक व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि किसान की पीढ़ियों से संजोई गई विरासत है। बीज पर नियंत्रण का अर्थ है—कृषि, भोजन और जीवन पर नियंत्रण। यही कारण है कि बहुराष्ट्रीय और देशी कारपोरेट कंपनियां बीज से जुड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कानूनों में अपने पक्ष में बदलाव कराने के लिए निरंतर दबाव बना रही हैं। दिसंबर 2025 में जारी यह मसौदा भी उसी दिशा में एक खतरनाक कदम प्रतीत होता है।
इतिहास गवाह है कि बीज का संरक्षण और विकास मानव सभ्यता से भी पुराना है। महिलाओं की भूमिका इसमें विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है। जलवायु, मिट्टी, वर्षा, सूखा, कीट और रोगों से जूझते हुए बीजों ने लाखों वर्षों में अपने भीतर प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित की है। किसान परंपरागत रूप से खेतों में श्रेष्ठ पौधों का चयन कर अगली पीढ़ी के लिए बीज बचाता रहा है। वैज्ञानिक शब्दावली से पहले भी किसान स्वयं एक प्रयोगधर्मी वैज्ञानिक था।

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आधुनिक कृषि विज्ञान और जेनेटिक इंजीनियरिंग ने बीज प्रजनन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। संकर और हाइब्रिड किस्मों के माध्यम से उत्पादन बढ़ा, लेकिन इसके साथ ही जोखिम भी बढ़े। जीएम बीजों को लेकर उठे विवाद, बीटी कॉटन और गुलाबी सुंडी का उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि कारपोरेट हितों के लिए की गई जल्दबाजी किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
हरित क्रांति (1960–65) के दौर में भारत ने खाद्यान्न आत्मनिर्भरता हासिल की, जिसमें सरकारी कृषि अनुसंधान, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों की केंद्रीय भूमिका थी। उस समय बीज, उर्वरक और दवाओं पर निजी कंपनियों का वर्चस्व नहीं था। लेकिन बाद के वर्षों में कृषि क्षेत्र में निजी पूंजी का प्रवेश बढ़ा और सरकारी संस्थानों को धीरे-धीरे कमजोर किया गया। आज स्थिति यह है कि लगभग 70 प्रतिशत बीज बाजार निजी कंपनियों के नियंत्रण में है और मात्र चार बहुराष्ट्रीय कंपनियां—बायर, कार्टेवा, सिंजेंटा और बीएएसएफ—56 प्रतिशत बाजार पर कब्जा किए हुए हैं।

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बीज अधिनियम 1966 के तहत बीज की गुणवत्ता, पंजीकरण, बिक्री और किसान के अधिकारों की रक्षा के प्रावधान थे। किसान को बीज बचाने, बेचने, बदलने और विकसित करने का अधिकार प्राप्त था। नए मसौदा बिल में इन अधिकारों को कमजोर करने की आशंका है। मूल्य नियंत्रण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि सब्जियों और अन्य फसलों के बीज पहले से ही बेहद महंगे हो चुके हैं।
सबसे चिंताजनक प्रावधान यह है कि विदेशी कंपनियों द्वारा अपने देश में किए गए बीज परीक्षण को भारत में मान्यता देने की बात कही गई है। भिन्न जलवायु और परिस्थितियों में किए गए परीक्षण भारतीय कृषि के लिए कितने उपयुक्त होंगे, यह गंभीर प्रश्न है। साथ ही, यदि कोई पंजीकृत कंपनी अपने गुणवत्ता दावों पर खरी नहीं उतरती, तो उस पर आपराधिक कार्रवाई न होना किसानों के हितों के खिलाफ है।
संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2025 के बीच 43,001 बीज नमूने गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाए गए। ऐसे में बीज संशोधन बिल–2025 यदि बिना व्यापक विमर्श और सुधार के लागू हुआ, तो यह बीज संप्रभुता, किसान अधिकार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल सकता है।

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अखिल भारतीय किसान सभा ने इस मसौदे पर विस्तार से आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मांग की गई है कि केंद्र और राज्य स्तरीय बीज समितियों में किसान प्रतिनिधियों—विशेषकर महिलाओं—को शामिल किया जाए, विदेशी बीजों की बाहरी प्रमाणिकता वाले प्रावधान को हटाया जाए, किसान हितैषी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित हो और जमाखोरी व इजारेदारी पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और बीज सहकारी समितियों को प्रोत्साहन देने की भी आवश्यकता है।
बीज केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि किसान की आज़ादी और देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। इसलिए इस मुद्दे पर देशव्यापी जन-जागरण और लोकतांत्रिक संघर्ष अपरिहार्य है, जैसा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया है।

सदर बाजार में पुलिस का फ्लैग मार्च

सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा )
जनपद में कानून-व्यवस्था एवं शांति-सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार की देर शाम थाना सदर बाजार क्षेत्र में पुलिस की पैदल गश्त कराई गई। पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक नगर, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं क्षेत्राधिकारी नगर ने थाना सदर बाजार व महिला थाना पुलिस बल के साथ क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया। पैदल गश्त के दौरान अधिकारियों ने बाजार क्षेत्र, भीड़भाड़ वाले स्थानों, संवेदनशील इलाकों तथा यातायात व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान दुकानदारों एवं आम नागरिकों से संवाद कर सुरक्षा व्यवस्था का फीडबैक भी लिया गया। अधिकारियों ने पुलिस बल को निर्देश दिए कि अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों ने कहा कि आमजन की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में जनपद में नियमित रूप से पैदल गश्त और निगरानी अभियान जारी रहेंगे, ताकि अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बनी रहे।

एस ओ ज़ी सर्विलांस एवं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बैटरियों सहित पूरा गिरोह गिरफ्तार

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में मोबाइल टावरों से लीथियम बैटरियों की लगातार हो रही चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक नगर एवं क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण में जनपदीय SOG, सर्विलांस सेल व थाना रोजा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए चार शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 18 लीथियम बैटरियां, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख 80 हजार रुपये बताई गई है, एक ईको कार तथा मोबाइल फोन व नकदी बरामद की है। गिरफ्तारी 19 जनवरी 2026 को मुकरमपुर से उदियापुर जाने वाले मार्ग पर नेकनामपुर नहर के पास से की गई।
पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जनपद शाहजहांपुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मोबाइल टावरों से बैटरियां चोरी की थीं। आरोपियों ने रोजा, जलालाबाद, पुवायां, अल्हागंज, तिलहर व अन्य क्षेत्रों में कई घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस के अनुसार बरामदगी व गिरफ्तारी के आधार पर विधिक कार्यवाही प्रचलित है तथा अन्य घटनाओं के संबंध में भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई से मोबाइल टावर चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

हिंदू सम्मेलन में संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

सनातन धर्म जीवन पद्धति है, आस्था से आगे संस्कार और राष्ट्रबोध का मार्गदर्शन करता है : तुलसी राम


मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। कोपागंज नगर पंचायत स्थित सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में सोमवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन सनातन संस्कृति के गौरव, नारी शक्ति और हिंदू एकता के सशक्त संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे-मुन्‍ने छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी अतिथियों और दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों ने वीरांगनाओं के शौर्य, त्याग और बलिदान को नृत्य, नाट्य और गीतों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत कर सनातन परंपरा की गौरवशाली विरासत को मंच पर उतार दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता तुलसी राम , प्रान्त शारीरिक शिक्षण प्रमुख, ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो समाज को संस्कार, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की दिशा देता है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक रूप से सशक्त बनने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठित, अनुशासित और संस्कारित समाज ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर और मजबूत बना सकता है।
कथा वाचिका रागिनी जी ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में सनातन परंपरा, नारी शक्ति और हिंदू एकता की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वीरांगनाओं का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है, जिससे साहस, सेवा और समर्पण की भावना विकसित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने सनातन संस्कृति को समाप्त करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास बनकर रह गए, जबकि सनातन परंपरा आज भी जीवंत और सशक्त है।
जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन अखिलेश तिवारी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजन समाज को जोड़ने, युवाओं को सही दिशा देने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण ही सशक्त भविष्य की मजबूत नींव है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक प्रमोद राय ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा और हिंदू समाज की एकता के लिए भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाते रहेंगे।
इस अवसर पर नगर कार्यवाह मनोज कुमार बरनवाल, सह नगर कार्यवाह पवन जी, अमित त्रिपाठी, सुभाष चंद गुप्ता, विजय प्रकाश जी, अखिलेश जी, आशीष जी, गोपाल जी, ओमप्रकाश जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य सत्यानंद, बंदना चौरसिया सहित बड़ी संख्या में नगरवासी, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे सम्मेलन के दौरान सनातन धर्म की गरिमा, सांस्कृतिक चेतना और हिंदू एकता का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया, जिससे नगर क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

आस्था, संस्कृति और एकता का संगम : 22 किमी की ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा

बल्लो में उमड़ा आस्था का महासागर, 22 किमी लंबी भव्य यात्रा के साथ माता लक्ष्मी मूर्ति स्थापना का ऐतिहासिक आयोजन


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।सिसवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बल्लो में सोमवार को सनातन आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना के अवसर पर निकाली गई भव्य और ऐतिहासिक यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त करने वाला भी सिद्ध हुआ।
भव्य यात्रा की शुरुआत ग्राम पंचायत बल्लो से हुई, जो महराजगंज जनपद में प्रवेश करते हुए नरायनपुर गांव से होकर लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय कर पुनः बल्लो स्थित मंदिर परिसर के निर्धारित स्थल तक पहुंची। यात्रा के दौरान ‘जय माता लक्ष्मी’ के गगनभेदी जयकारे, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्ति गीतों ने पूरे मार्ग को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था।

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यात्रा में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाएं सिर पर कलश धारण किए, युवाओं के हाथों में ध्वज-पताकाएं और बच्चों के चेहरों पर उत्साह की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया, जिससे माहौल और भी भावुक एवं भक्तिमय बन गया।
सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुरैना, पनियरा, महराजगंज, भिटौली चौकी, शिकारपुर और यातायात पुलिस सहित विभिन्न थानों की पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस की सतर्कता के चलते यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और सुरक्षित रूप से संपन्न होती रही।
आयोजकों और ग्रामीणों का कहना है कि माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी प्रतीक बना।

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इस अवसर पर यजमान के रूप में तारकेश्वर वर्मा, दिनेश वर्मा, रुपेश वर्मा, बोधगया, संतोष सहित अन्य श्रद्धालु अपनी-अपनी धर्मपत्नी के साथ विधि-विधानपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बने। ग्राम प्रधान सतीश द्वारा आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और स्मृति का केंद्र बना रहेगा।

लग्जरी शादी के शौक ने बनाया अपराधी

गैंग लीडर बलजीत यादव सहित 5 अंतर्जनपदीय चोर गिरफ्तार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एसओजी, सर्विलांस टीम और थाना बखिरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक शातिर अंतर्जनपदीय चोरी गिरोह का खुलासा किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्व दवन सिंह के पर्यवेक्षण में की गई।
एसओजी के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी उप निरीक्षक अभिमन्यु सिंह और प्रभारी निरीक्षक थाना बखिरा सतीश कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने गैंग लीडर बलजीत यादव सहित पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों में बलजीत यादव निवासी बोक्टा थाना गीडा गोरखपुर, प्रिंस मिश्रा निवासी सिसवा सोनबरसा थाना हरपुर बुदहट गोरखपुर, महेन्द्र कुशवाहा निवासी इमलिहा लक्ष्मीगंज थाना रामकोला कुशीनगर, रवि निषाद निवासी सेक्टर 22 गीडा डिहवा थाना गीडा गोरखपुर तथा फारुख मोहम्मद शिकलगार निवासी डवलेश्वर थाना विटा जनपद सांगली (महाराष्ट्र) शामिल हैं।

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पुलिस ने जनपद में हुई चोरी की तीन घटनाओं का खुलासा करते हुए करीब 30 लाख रुपये मूल्य के आभूषण, 75,200 रुपये नकद, हीरे जड़ित आभूषण तथा कुल 162.110 ग्राम पीली धातु बरामद की है। इसके साथ ही एक देसी तमंचा और जिंदा कारतूस भी बरामद हुआ है। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज किया गया है।

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पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि गिरोह का संचालन बलजीत यादव करता था। उसकी फरवरी माह में होने वाली शादी को भव्य बनाने और महंगे आभूषण देने की चाहत ने उसे अपराध की राह पर धकेल दिया। गिरोह के सदस्य मोटरसाइकिल से बंद और एकांत मकानों की रेकी करते थे। प्रिंस मिश्रा और महेन्द्र कुशवाहा चोरी को अंजाम देते थे, जबकि रवि निषाद बाहर निगरानी करता था। चोरी के आभूषणों को गलवाने का काम फारुख मोहम्मद शिकलगार द्वारा किया जाता था।
गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर अभियोगों में बीएनएस की धाराओं के साथ 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी की गई है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने इस सफल कार्रवाई के लिए एसओजी, सर्विलांस और थाना बखिरा की संयुक्त टीम को 25 हजार रुपये नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

किसानों को अनुदान पर तिरपाल और कस्टम हायरिंग सेंटर वितरित

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)विराट किसान मेला कुशीनगर 2026 का आयोजन ब्लॉक संसाधन केंद्र, पड़ौना में किया गया। यह मेला कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण और किसानों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चार दिवसीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। मेले का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के मा. राजेश्वर सिंह, मंत्री द्वारा किया गया, जिन्होंने कृषि प्रदर्शनियों का अवलोकन करते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने और गौ-पालन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
मंत्री जी ने किसानों को नीलगाय से फसलों की सुरक्षा के लिए गाय के गोबर का घोल फसल पर छिड़कने की सलाह दी। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, सरगटिया के वैज्ञानिक कु. रिद्धि वर्मा ने मिलेट्स (श्रीअन्न) की खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं वरिष्ठ प्राविधिक सहायक लकी तिवारी ने रबी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन, चूहा नियंत्रण तथा कृषि रक्षा रसायनों की उपलब्धता और अनुदान की विस्तृत जानकारी दी।

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मेले में प्रगतिशील किसान हरिशंकर राय ने प्राकृतिक खेती और नीलगाय से फसल सुरक्षा के अपने अनुभव साझा किए। मंत्री जी ने मैनुदीन अंसारी, जाकिर हुसैन, राम नरेश सिंह, सुग्रीव शर्मा और शम्भू कुशवाहा को 50 प्रतिशत अनुदान पर तिरपाल, जबकि सुरेन्द्र दुबे को 80 प्रतिशत अनुदान पर कस्टम हायरिंग सेंटर वितरित किया।
डा. विनय कुमार मिश्र और डा. वाई. पी. भारती ने गन्ना की उन्नत खेती, चूहा नियंत्रण और मृदा परीक्षण के महत्व पर किसानों को जानकारी दी। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों के लिए यह मेला आधुनिक कृषि तकनीकों को समझने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का सुनहरा अवसर साबित हुआ।

जब हनुमान ने अपनी शक्ति पहचानी

जब हनुमान ने स्वयं को पहचाना: लंका-गमन से पूर्व आत्मबोध की दिव्य लीला


रामकथा का प्रत्येक प्रसंग केवल इतिहास नहीं, बल्कि आत्मबोध, भक्ति और कर्तव्य का जीवंत दर्शन है। एपिसोड–11 में हम उस क्षण पर पहुँचते हैं जहाँ महावीर हनुमान पहली बार अपनी असीम शक्तियों को पहचानते हैं—और यही पहचान उन्हें लंका-गमन के लिए अग्रसर करती है। यह प्रसंग केवल समुद्र लांघने की कथा नहीं, बल्कि “स्व-परिचय” का शास्त्रोक्त उपदेश है—कि जब सेवा का संकल्प जागृत होता है, तब सामर्थ्य स्वयं प्रकट हो जाता है।

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शास्त्रोक्त पृष्ठभूमि: शक्ति विस्मृति और उसका कारण
वाल्मीकि रामायण के सुंदरकाण्ड में वर्णित है कि बाल्यकाल में हनुमान की उग्र लीला से देवताओं को भय हुआ। इन्द्र के वज्राघात के उपरांत ब्रह्मा सहित देवों ने वरदान दिए—पर साथ ही ऋषियों के शाप से यह भी हुआ कि हनुमान अपनी शक्तियाँ तभी स्मरण करेंगे जब कोई उन्हें स्मरण कराएगा। यह कोई दंड नहीं, बल्कि लीलात्मक विधान था—ताकि शक्ति अहंकार नहीं, सेवा में प्रकट हो।
जाम्बवान्त का वाक्य: आत्मबोध का दीप
सीता-हरण के पश्चात जब वानर-सेना समुद्र तट पर असमंजस में खड़ी थी, तब जाम्बवान्त ने हनुमान से कहा—
“हे महावीर! तुम्हारे समान कोई नहीं जो समुद्र लांघ सके। तुम्हारी गति वायु समान है, बल पर्वत समान।”
यहीं से आत्मबोध का क्षण आता है। हनुमान के भीतर सोई शक्ति जागती है। वे समझते हैं—“मैं प्रभु श्रीराम का दास हूँ; उनकी सेवा हेतु असंभव भी संभव है।”

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आत्मपहचान का क्षण: भीतर से उठता ‘राम’
जैसे ही यह स्मरण हुआ, हनुमान के रोम-रोम में राम-नाम का नाद गूँज उठा। आँखों में तेज, वक्ष में विश्वास और मन में केवल एक संकल्प—सीता-शोध। यह आत्मपहचान किसी दंभ का उद्घोष नहीं, बल्कि भक्ति से उत्पन्न निःस्वार्थ साहस है।
विशाल रूप धारण: सेवा के अनुरूप सामर्थ्य
हनुमान ने विशाल रूप धारण किया—पर यह विस्तार अहंकार का नहीं, उत्तरदायित्व का था। पर्वत-सा कंधा, वज्र-सा वक्ष और दृष्टि में करुणा—यह रूप बताता है कि सच्ची शक्ति वही है जो विनय से जुड़ी हो।

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समुद्र लंघन: आस्था की परीक्षा और सिद्धि
जब हनुमान ने उड़ान भरी, तो मार्ग में मैनाक पर्वत ने विश्राम का आग्रह किया—हनुमान ने विनम्रता से स्वीकार किया, पर ठहरे नहीं। सुरसा ने परीक्षा ली—हनुमान ने बुद्धि से समाधान किया। सिंहिका ने छाया पकड़ने का प्रयास किया—हनुमान ने संयम से उसे परास्त किया।
संदेश: मार्ग में आने वाली बाधाएँ, यदि भक्ति-बुद्धि के साथ सुलझें, तो वे सिद्धि का द्वार बनती हैं।
लंका का प्रथम दर्शन: संयमित साहस
लंका पहुँचकर हनुमान ने लघु रूप धारण किया। यह दर्शाता है कि विवेक के बिना शक्ति विनाशक हो सकती है। वे राक्षस-नगरी में भी शास्त्रीय मर्यादा का पालन करते हैं—किसी निर्दोष को कष्ट नहीं देते, केवल लक्ष्य पर केंद्रित रहते हैं।

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अशोक वाटिका और सीता-संदेश
अशोक वाटिका में माता सीता को देखकर हनुमान की आँखों से करुणा बह निकली—पर उन्होंने स्वयं को संभाला। राम-नाम की अंगूठी सौंपकर विश्वास दिलाया—
“माता! प्रभु श्रीराम शीघ्र आएँगे।”
यह क्षण बताता है कि दूत का धर्म भावुकता में नहीं, धैर्य और प्रमाण में होता है।
शास्त्रोक्त महिमा: हनुमान क्यों अद्वितीय हैं?
दास्य-भाव: वे स्वयं को कभी कर्ता नहीं, सेवक मानते हैं।
बुद्धि और बल का संतुलन: जहाँ बल चाहिए, वहाँ बल; जहाँ बुद्धि चाहिए, वहाँ विवेक।
विनय: अपार शक्ति के बावजूद अहंकार शून्य।
निष्ठा: लक्ष्य से विचलन नहीं—सीता-शोध ही प्रधान।
समानता (Relevance): आज के युग में हनुमान
आत्मविश्वास: हमारी शक्तियाँ भी अक्सर सुप्त रहती हैं; सही प्रेरणा उन्हें जगा देती है।
सेवा-भाव: स्वार्थ त्यागकर लक्ष्य साधें—सफलता सुनिश्चित।
धैर्य: बाधाएँ मार्ग का सत्यापन हैं, रोक नहीं।

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भावनात्मक संदेश: पाठक के नाम
जब जीवन का समुद्र विशाल लगे, और तट दूर—तो जाम्बवान्त का वाक्य याद करें। कोई न कोई आपको आपकी शक्ति याद दिलाएगा। और यदि नहीं—तो राम-नाम स्वयं वह स्मरण बन जाएगा। उठिए, उड़िए, और अपने लंका-गमन के लिए तैयार हो जाइए।
निष्कर्ष
एपिसोड–11 हमें सिखाता है कि स्वयं को पहचानना ही सबसे बड़ी सिद्धि है। हनुमान का लंका-गमन केवल एक यात्रा नहीं—यह आत्मबोध से उपजी भक्ति की उड़ान है। जहाँ सेवा लक्ष्य हो, वहाँ शक्ति स्वतः प्रकट होती है।