वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 18181/18182 टाटानगर–थावे–टाटानगर एक्सप्रेस का संचालन अब पारंपरिक आईसीएफ रेक के स्थान पर एलएचबी रेक से किया जाएगा।
एलएचबी कोच आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं, जो यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव प्रदान करते हैं। इन कोचों में स्टेनलेस स्टील बॉडी, एंटी-टेलीस्कोपिक डिजाइन, डिस्क ब्रेक, हाइड्रोलिक सस्पेंशन, बायो-टॉयलेट तथा मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, इनका रखरखाव भी अपेक्षाकृत कम लागत में किया जाता है।
एलएचबी रेक से संचालन के बाद संशोधित रेक संरचना के अनुसार टाटानगर से 27 मार्च 2026 को चलने वाली 18181 टाटानगर–थावे एक्सप्रेस तथा थावे से 29 मार्च 2026 को चलने वाली 18182 थावे–टाटानगर एक्सप्रेस में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे। इनमें 01 जनरेटर सह लगेज यान, 01 एलएसएलआरडी, 04 सामान्य द्वितीय श्रेणी, 07 शयनयान, 05 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी, 02 वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी तथा 02 वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के कोच शामिल होंगे।
रेलवे के इस निर्णय से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक रेल यात्रा का लाभ मिलेगा।
यात्रियों की सुविधा के लिए टाटानगर एक्सप्रेस एलएचबी रेक से संचालित होगी
मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति की बैठक संपन्न
आंगनवाड़ी भवन निर्माण में देरी पर कार्यदाई संस्था को लगाई फटकार
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत नागर की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति की मासिक समीक्षा बैठक विकास भवन सभागार में आयोजित की गई। बैठक में पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने जानकारी दी कि आर.ई.डी. की कार्यदाई संस्था द्वारा वर्ष 2023-24 में 129 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना था, जो अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है। वहीं वर्ष 2024-25 में प्रस्तावित 50 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों में से मात्र 06 का ही निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है।
इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यदाई संस्था को कड़े निर्देश दिए कि निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए, अन्यथा अगली बैठक में कठोर कार्रवाई करते हुए शासन को पत्र प्रेषित किया जाएगा।बैठक में कुपोषित बच्चों के लिए संचालित पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि एनआरसी में भर्ती बच्चों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा उनके स्वास्थ्य में सुधार हेतु नियमित निगरानी की जाती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि भर्ती कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण हुआ हो।एनआरसी में भर्ती बच्चों को पौष्टिक आहार एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने बताया कि अब मध्यम कुपोषित बच्चों को भी एनआरसी में भर्ती किया जा रहा है, जिससे उन्हें समय पर चिकित्सा, पोषण और समुचित देखरेख मिल सके।बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष उपाध्याय, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी सुशील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता, समस्त खंड विकास अधिकारी एवं सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे।
कौशांबी में मां ने बेटे को 95 हजार में बेचा
कौशांबी/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पैसों की तंगी और आर्थिक मजबूरी ने एक मां को इस हद तक तोड़ दिया कि उसने अपने ही 6 साल के मासूम बेटे को महज 95 हजार रुपये में बेच दिया। जैसे ही यह मामला सामने आया, क्षेत्र में सनसनी फैल गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि पुलिस की त्वरित और सतर्क कार्रवाई के चलते बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया।
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां आर्थिक संकट ने रिश्तों की मर्यादा तक को तोड़ दिया। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश और हैरानी दोनों देखने को मिली।
पति ने दर्ज कराई शिकायत, पुलिस हरकत में आई
मामले का खुलासा तब हुआ जब 21 जनवरी को बृजेश कुमार पुत्र सुकुरु, निवासी खरौना थाना पश्चिम शरीरा, ने पुलिस को एक लिखित सूचना दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी ममता देवी ने उनके 6 साल के बेटे को कहीं बेच दिया है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू की।
बृजेश कुमार की तहरीर पर पुलिस ने धारा 143 (4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया। बच्चे के अचानक गायब होने और मां पर लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए पुलिस ने मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की।
पूछताछ में मां ने कबूला जुर्म
पुलिस की जांच और पूछताछ के दौरान ममता देवी ने अपने किए को स्वीकार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही थी और पैसों की सख्त जरूरत थी। इसी मजबूरी के चलते उसने अपने ही बेटे को बेचने जैसा कठोर कदम उठा लिया।
ममता देवी ने पुलिस को बताया कि उसने अनिता शुक्ला के जरिए अपने 6 साल के बेटे को एक अज्ञात व्यक्ति को 95 हजार रुपये में बेच दिया। यह सौदा पूरी तरह पैसों के लिए किया गया था और इसमें किसी अन्य कारण की बात सामने नहीं आई।
पैसों का ब्योरा भी आया सामने
पुलिस पूछताछ में यह भी स्पष्ट हुआ कि बेटे को बेचकर मिली 95 हजार रुपये की रकम में से अधिकांश पैसे खर्च हो चुके थे। ममता देवी ने बताया कि उसके पास इस रकम में से केवल 22 हजार 700 रुपये ही बचे थे, जबकि शेष पैसे वह पहले ही खर्च कर चुकी थी।
पुलिस ने इस जानकारी को केस डायरी में दर्ज करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पैसों के लेन-देन और सौदे से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
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पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बच्चा सुरक्षित बरामद
इस पूरे मामले में राहत की सबसे बड़ी खबर यह रही कि पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 6 साल के मासूम बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया। बच्चे की सुरक्षित वापसी के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
पुलिस ने मामले में सभी तथ्यों को संकलित करते हुए आरोपी मां और इस सौदे से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर रखा गया।
इलाके में फैली सनसनी
इस घटना के सामने आने के बाद कौशांबी जिले के पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र में सनसनी फैल गई। लोग यह सुनकर स्तब्ध रह गए कि एक मां अपने ही बच्चे को पैसों के लिए बेच सकती है। यह मामला आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और पारिवारिक हालात पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय स्तर पर लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। वहीं पुलिस पूरे मामले को कानूनी दायरे में लाकर कार्रवाई में जुटी हुई है।
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जांच जारी, कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी
पुलिस ने धारा 143 (4) बीएनएस के तहत दर्ज मुकदमे में आगे की जांच तेज कर दी है। अनिता शुक्ला की भूमिका और उस अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे बच्चा बेचा गया था। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल बच्चा सुरक्षित है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
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ज्ञान, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती
भारतीय सनातन संस्कृति में ज्ञान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, और ज्ञान की इस दिव्य चेतना की अधिष्ठात्री देवी हैं माँ सरस्वती। वे केवल विद्या की देवी नहीं, बल्कि कला, संगीत, वाणी, सृजन और विवेक की भी प्रतीक हैं। माँ सरस्वती का स्मरण हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर विवेक, सत्य और सौंदर्य के प्रकाश की ओर ले जाता है।
श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणा वादिनी माँ सरस्वती का स्वरूप अत्यंत शांत, सात्त्विक और प्रेरणादायक है। उनका श्वेत वर्ण पवित्रता और निर्मलता का प्रतीक है, जबकि वीणा सृजनात्मक अभिव्यक्ति और संगीत के माध्यम से आत्मा की भाषा को दर्शाती है। उनके हाथों में पुस्तक ज्ञान की निरंतर साधना का संकेत देती है और हंस विवेक का प्रतीक है—जो दूध और पानी को अलग करने की क्षमता रखता है, ठीक वैसे ही जैसे मनुष्य को सत्य और असत्य में भेद करना चाहिए।
माँ सरस्वती की पूजा विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों, लेखकों और साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बसंत पंचमी के दिन होने वाली सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना का आधार भी है।
आज के भौतिक और प्रतिस्पर्धात्मक युग में माँ सरस्वती का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। जब ज्ञान का उपयोग केवल स्वार्थ के लिए होने लगे, तब विवेक और नैतिकता का संतुलन बिगड़ जाता है। माँ सरस्वती हमें सिखाती हैं कि सच्चा ज्ञान वही है जो समाज को जोड़ता है, मन को विनम्र बनाता है और मानवता का कल्याण करता है।
अतः माँ सरस्वती की पूजा केवल दीप, पुष्प और मंत्रों तक सीमित न रहकर, जीवन में ज्ञान, कला और सद्बुद्धि को आत्मसात करने का संकल्प होनी चाहिए। जब मनुष्य अपने भीतर विवेक, रचनात्मकता और सत्यनिष्ठा को जाग्रत करता है, तभी माँ सरस्वती की सच्ची आराधना पूर्ण होती है।
माँ सरस्वती हम सभी को सद्बुद्धि, सृजनशीलता और ज्ञान के पथ पर निरंतर अग्रसर होने की शक्ति प्रदान करें।
धूरन शाह तकिया कब्रिस्तान को लेकर उठा विवाद
कब्रिस्तान कमेटी ने प्रेस वार्ता कर अवैध कब्जे व सरकारी रास्ता बंद करने का लगाया आरोप
गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)l शहर के बसंतपुर खास स्थित धूरन शाह तकिया कब्रिस्तान को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष वसीऊल्लाह और सचिव मुशीर अहमद खां ने गोरखपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों पुराने कब्रिस्तान और उससे जुड़े सरकारी रास्तों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रेस वार्ता में कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि धूरन शाह तकिया कब्रिस्तान राजस्व अभिलेखों में आराजी संख्या 377 के रूप में दर्ज है, जिसका उल्लेख बंदोबस्त और चकबंदी अभिलेखों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। कब्रिस्तान के चारों ओर पूर्व से ही सरकारी रास्ते दर्ज हैं, जिनमें आराजी संख्या 377/54 से 377/2 तक लगभग 54 फीट चौड़ा और आराजी संख्या 378 से 6 फीट चौड़ा रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
अध्यक्ष वसीऊल्लाह ने कहा कि लंबे समय तक कब्रिस्तान कमेटी सक्रिय न होने के कारण कुछ दबंग और भू-माफिया तत्वों द्वारा कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध तरीके से नाम दर्ज कराकर कब्जा करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्रिस्तान की जमीन को निजी संपत्ति दिखाया जा रहा है, जिससे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
सचिव मुशीर अहमद खां ने बताया कि कब्रिस्तान में वर्षों से मुस्लिम समाज के लोग दफन संस्कार करते आ रहे हैं और आज भी नियमित रूप से अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके बावजूद कब्रिस्तान तक जाने वाले रास्ते को संकरा करने और बंद करने की साजिश की जा रही है, जिससे जनाज़े के दौरान भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कमेटी ने यह भी बताया कि 17 दिसंबर 2025 और 18 दिसंबर 2025 को प्रशासन द्वारा निरीक्षण और सीमांकन की कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके बाद भी अवैध निर्माण और कब्जा हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने जेसीबी लगाकर रास्ता अवरुद्ध करने की कोशिश की, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रेस वार्ता में मौजूद कमेटी सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यदि कब्रिस्तान की जमीन और सरकारी रास्ते को अवैध कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
कब्रिस्तान कमेटी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा शासन की जिम्मेदारी है और इस मामले में त्वरित न्याय न मिलने पर समाज में भारी आक्रोश व्याप्त हो सकता है।
कैंट थाना क्षेत्र में सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे का आरोप
प्रेस क्लब में फूटा मोहल्लेवासियों का दर्द 50 से अधिक परिवारों ने प्रशासन से मांगी मदद
गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंधडिया निवासी प्रदीप चौधरी ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके मोहल्ले का वर्षों पुराना सार्वजनिक रास्ता जबरन रोका जा रहा है। इस कथित कब्जे से दर्जनों परिवारों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। प्रदीप चौधरी ने आरोप लगाया कि कुंवर गौरव सिंह उर्फ प्रिंस सिंह द्वारा यह कहते हुए रास्ता बंद किया जा रहा है कि उक्त भूमि की रजिस्ट्री उनके नाम हो चुकी है और अब जितना रास्ता वे देंगे, उतने में ही मोहल्लेवासियों को संतोष करना पड़ेगा।
प्रेस वार्ता के दौरान प्रदीप चौधरी ने बताया कि महादेव झारखंडी, टुकड़ा नंबर-1 स्थित गाटा संख्या 364 एवं 366 में उनका पुस्तैनी मकान और सहन स्थित है। इस रास्ते का उपयोग वर्षों से स्थानीय लोग करते आ रहे हैं और इसी रास्ते से होकर आगे लगभग 50 से अधिक परिवार निवास करते हैं। पूर्व में इस रास्ते की चौड़ाई करीब 15 फीट थी, जिससे चार पहिया वाहनों सहित सामान्य आवागमन सुचारू रूप से होता रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कुंवर गौरव सिंह उर्फ प्रिंस सिंह द्वारा जेसीबी मशीन मंगवाकर पहले से छोड़ी गई बाउंड्री को तोड़ दिया गया और रास्ते को संकुचित कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे रास्ता पूरी तरह बंद करने का प्रयास किया गया। जब मोहल्ले के लोगों ने इसका विरोध किया तो पहले 8 फीट और फिर केवल 5 फीट रास्ता देने की बात कही गई, जो किसी भी दृष्टि से पर्याप्त नहीं है।
प्रदीप चौधरी ने कहा कि 5 फीट या 8 फीट का रास्ता होने से न तो चार पहिया वाहन निकल सकते हैं और न ही आपात स्थिति में एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी आवश्यक सेवाएं पहुंच पाएंगी। इससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना या जनहानि की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने इसे सुनियोजित तरीके से सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने की कोशिश बताया।
प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि यह रास्ता केवल एक-दो घरों का नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले और आगे बसे दर्जनों परिवारों की जीवनरेखा है। रास्ता बंद होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ितों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की कि कथित भू-माफिया द्वारा किए गए अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वर्षों पुराने 15 फीट चौड़े रास्ते को मुक्त कर यथावत बहाल किया जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मोहल्लेवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
अवैध कब्जा प्रकरण में कानूनगो–भूमाफिया गठजोड़ के आरोप, जांच की उठी मांग
देवरिया के रुद्रपुर तहसील में अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, पीड़ित ने SDM से लगाई न्याय की गुहार, भूमाफियाओं–कानूनगोठजोड़ की भी शिकायत
रुद्रपुर / देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।देवरिया जनपद की रुद्रपुर तहसील से अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है। तप्पा नगवाटिकर, परगना सिलहट निवासी विद्यासरण पाण्डेय पुत्र रामचन्द्र पाण्डेय ने अपनी पुस्तैनी कृषि भूमि पर जबरन कब्जे और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) रुद्रपुर को प्रार्थना पत्र सौंपा है। पीड़ित के अनुसार उसकी भूमि आराजी संख्या 18/8/0138, 1819/0.081 एवं 1820/0.08 पर कुछ दबंग और भू-माफिया किस्म के लोग अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।

पीड़ित का कहना है कि वर्ष 2026 में कथित रूप से बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के भूमि पर एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी गई। विरोध करने पर गाली-गलौज, धमकी और भय का माहौल बनाया जा रहा है। विद्यासरण पाण्डेय ने आरोप लगाया कि दबाव बनाकर उनकी जमीन हड़पने की साजिश की जा रही है, जिससे उनका पूरा परिवार दहशत में है।
प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर तत्काल जांच कर अवैध कब्जे पर रोक लगाई जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़ित ने यह भी आशंका जताई है कि समय रहते कार्रवाई न होने पर कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा में है। ग्रामीणों का कहना है कि योगी सरकार द्वारा भू-माफियाओं के खिलाफ जारी सख्त निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभाव कमजोर दिख रहा है। कुछ लोगों ने तहसील के कानूनगो पर भी भूमाफियाओं से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं, हालांकि यह जांच का विषय है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर प्रकरण में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।
23 जनवरी को हुए निधन: इतिहास के अमर नाम और उनकी विरासत
23 जनवरी को हुए ऐतिहासिक निधन: देश और दुनिया को प्रभावित करने वाली महान विभूतियाँ
23 जनवरी को हुए निधन भारतीय और वैश्विक इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। इस तिथि को ऐसे महान व्यक्तित्वों का देहावसान हुआ, जिन्होंने समाज सेवा, स्वतंत्रता संग्राम और वैश्विक राजनीति में अमिट छाप छोड़ी। 23 जनवरी को हुए निधन हमें उन विचारों और योगदानों की याद दिलाते हैं, जो आज भी समाज को दिशा देते हैं। इतिहास के पन्नों में दर्ज 23 जनवरी को हुए निधन केवल मृत्यु की तिथि नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत हैं।
भारत और विश्व के इतिहास में कई ऐसी विभूतियाँ हुई हैं, जिनका जीवन संघर्ष, त्याग और सेवा का प्रतीक रहा। 23 जनवरी को हुए निधन की सूची में शामिल नामों ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। आइए विस्तार से जानते हैं उन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में, जिनका निधन 23 जनवरी को हुआ।
अमिय कुमार दास: समाज सेवा का प्रेरणास्रोत
अमिय कुमार दास भारतीय समाज सेवक के रूप में जाने जाते थे। उनका निधन 23 जनवरी 1975 को हुआ। वे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक उत्थान, शिक्षा और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। ग्रामीण विकास, निर्धनों की सहायता और सामाजिक समानता के लिए किए गए उनके प्रयास आज भी स्मरणीय हैं।
23 जनवरी को हुए निधन में अमिय कुमार दास का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य किया। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मानते हुए उन्होंने अनेक जन-जागरूकता अभियानों का संचालन किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची समाज सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है।
नरेन्द्र मोहन सेन: क्रांति की ज्वाला
नरेन्द्र मोहन सेन भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे, जिनका निधन 23 जनवरी 1963 को हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन के उन सपूतों में शामिल थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। 23 जनवरी को हुए निधन में नरेन्द्र मोहन सेन का स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने युवाओं में राष्ट्रभक्ति और क्रांति की चेतना जगाई।
उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। जेल यात्राएँ, त्याग और कठिनाइयाँ उनके जीवन का हिस्सा रहीं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता केवल मांगने से नहीं, बल्कि संघर्ष से प्राप्त होती है। 23 जनवरी को हुए निधन के माध्यम से उनका बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
शाह अब्दुल्ला: सऊदी अरब के प्रभावशाली शासक
शाह अब्दुल्ला, सऊदी अरब के राजा, का निधन 23 जनवरी 1924 को हुआ। वे मध्य-पूर्व की राजनीति में एक सशक्त और प्रभावशाली शासक के रूप में पहचाने जाते थे। 23 जनवरी को हुए निधन में शाह अब्दुल्ला का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने सऊदी अरब को एक संगठित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
उनके शासनकाल में सऊदी अरब ने राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त की। प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याण से जुड़े उनके निर्णयों ने देश की नींव को मजबूत किया। 23 जनवरी को हुए निधन वैश्विक राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय की समाप्ति माने जाते हैं।
इतिहास में 23 जनवरी का महत्व
इतिहास में 23 जनवरी को हुए निधन केवल संयोग नहीं, बल्कि यह तिथि कई महान व्यक्तित्वों की जीवन यात्रा का अंतिम पड़ाव बनी। यह दिन हमें यह समझने का अवसर देता है कि समाज, राष्ट्र और विश्व के निर्माण में इन लोगों का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है।
23 जनवरी को हुए निधन हमें यह भी सिखाते हैं कि व्यक्ति अपने कार्यों से अमर बनता है। चाहे वह समाज सेवा हो, स्वतंत्रता संग्राम हो या राष्ट्र निर्माण, इन सभी क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग सदैव स्मरणीय रहते हैं।
आज के समाज के लिए संदेश
आज के समय में 23 जनवरी को हुए निधन से जुड़ी स्मृतियाँ हमें प्रेरणा देती हैं कि हम भी अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ। अमिय कुमार दास की समाज सेवा, नरेन्द्र मोहन सेन का क्रांतिकारी साहस और शाह अब्दुल्ला का राष्ट्र निर्माण—तीनों उदाहरण हमें अलग-अलग स्तर पर मार्गदर्शन देते हैं।
23 जनवरी को हुए निधन का स्मरण केवल इतिहास पढ़ना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपनाना है, जिनके लिए इन महान व्यक्तित्वों ने जीवन समर्पित किया।
निष्कर्ष
23 जनवरी को हुए निधन भारतीय और वैश्विक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय हैं। इन महान व्यक्तित्वों का जीवन हमें त्याग, सेवा, साहस और नेतृत्व की प्रेरणा देता है। उनका योगदान आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा दिखाता है। इतिहास में दर्ज 23 जनवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि सच्चे कर्म कभी समाप्त नहीं होते।
23 जनवरी जन्मे प्रसिद्ध लोग: इतिहास रचने वाले महान व्यक्तित्वों की पूरी सूची
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: नेताजी सुभाषचंद्र बोस से बाल ठाकरे तक, इतिहास, राजनीति और साहित्य के अमर नाम
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्वों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस, बाल ठाकरे, डेरेक वॉलकोट सहित राजनीति, साहित्य और इतिहास के प्रेरक नाम शामिल हैं।
भूमिका
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि क्रांति, राष्ट्रवाद, साहित्य, कला, चिकित्सा और लोकतंत्र को दिशा देने वाले व्यक्तित्वों की जन्मतिथि है। 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे अमिट हस्ताक्षर छोड़ गए हैं, जिनसे आज भी समाज प्रेरणा लेता है। इसी कारण गूगल पर 23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व, 23 जनवरी जन्मे प्रसिद्ध लोग और 23 जनवरी इतिहास जैसे शब्द व्यापक रूप से खोजे जाते हैं।
इस लेख में हम 23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व के जीवन, योगदान और ऐतिहासिक महत्व को क्रमवार, तथ्यात्मक और पाठक-अनुकूल शैली में प्रस्तुत कर रहे हैं।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस (जन्म: 23 जनवरी 1897)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व की चर्चा नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बिना अधूरी है। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रखर और क्रांतिकारी नेताओं में गिने जाते हैं। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” जैसा ओजस्वी नारा देने वाले नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज की स्थापना कर अंग्रेज़ी शासन को सीधी चुनौती दी।
उनका जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। इसी कारण भारत सरकार ने उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। आज भी 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में नेताजी युवाओं के आदर्श हैं।
बाल ठाकरे (जन्म: 23 जनवरी 1926)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व की सूची में बाल ठाकरे का नाम भारतीय राजनीति में विशेष महत्व रखता है। वे शिवसेना के संस्थापक और एक प्रखर वक्ता थे। मराठी अस्मिता, क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक मुद्दों को लेकर उनकी राजनीति ने महाराष्ट्र की दिशा और दशा को गहराई से प्रभावित किया।
बाल ठाकरे का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे समाज, संस्कृति और मीडिया में भी एक सशक्त हस्ताक्षर रहे। 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका नाम आज भी राजनीतिक विमर्श में लिया जाता है।
डेरेक वॉलकोट (जन्म: 23 जनवरी 1930)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में डेरेक वॉलकोट एक अंतरराष्ट्रीय पहचान हैं। वे पश्चिम भारतीय लेखक और कवि थे, जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनकी रचनाओं में उपनिवेशवाद, पहचान और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है। साहित्य प्रेमियों के लिए 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में डेरेक वॉलकोट प्रेरणास्रोत हैं।
शानू लहिरी (जन्म: 23 जनवरी 1928)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में शानू लहिरी एक प्रसिद्ध कला शिक्षिका और बंगाली चित्रकार थीं। उन्होंने भारतीय कला को आधुनिक दृष्टि और संवेदनशीलता प्रदान की।
उनकी कला में भारतीय संस्कृति, स्त्री चेतना और सामाजिक भावनाओं का सशक्त चित्रण दिखाई देता है। कला जगत में 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
अचल कुमार ज्योति (जन्म: 23 जनवरी 1953)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में अचल कुमार ज्योति का नाम लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा है। वे भारत के 21वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे।
उनके कार्यकाल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। प्रशासनिक सेवा में 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
भीम सेन सिंघल (जन्म: 23 जनवरी 1933)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में चिकित्सा जगत से भी एक महत्वपूर्ण नाम जुड़ा है। भीम सेन सिंघल मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में न्यूरोलॉजी के निदेशक रहे हैं।
न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके शोध और सेवाओं ने हजारों मरीजों को नया जीवन दिया। चिकित्सा विज्ञान में 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका सम्मान किया जाता है।
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम (जन्म: 23 जनवरी 1814)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में अलेक्ज़ेंडर कनिंघम को “भारत के पुरातत्त्व अन्वेषण का पिता” कहा जाता है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की नींव रखी और प्राचीन भारतीय इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से संरक्षित किया।
उनके प्रयासों से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिली। इतिहास प्रेमियों के लिए 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका योगदान अमूल्य है।
वीर सुरेंद्र साई (जन्म: 23 जनवरी 1809)
23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में वीर सुरेंद्र साई एक महान भारतीय क्रांतिकारी थे। उन्होंने ओडिशा क्षेत्र में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया।
उनका जीवन स्वतंत्रता, साहस और बलिदान की गाथा है। स्वतंत्रता संग्राम में 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
ऐतिहासिक महत्व
स्पष्ट है कि 23 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य, कला, विज्ञान और प्रशासन जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े हैं। यही कारण है कि यह दिन भारतीय और वैश्विक इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
जब भी 23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति की चर्चा होती है, तो यह तारीख प्रेरणा, संघर्ष और उपलब्धियों की याद दिलाती है।
शिव-शक्ति का मिलन और सृष्टि का सनातन संतुलन
🔱 शिव-शक्ति का दिव्य समन्वय: अर्धनारीश्वर और सृष्टि-संतुलन की शास्त्रोक्त अमर कथा 🔱
✨ भूमिका: जहाँ द्वैत समाप्त होता है, वहीं शिव आरंभ होते हैं
सनातन धर्म की शास्त्रोक्त परंपरा में शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि चेतना का परम स्वरूप हैं। वे न आदि हैं, न अंत। वहीं शक्ति उस चेतना की सृजनात्मक ऊर्जा हैं, जिसके बिना शिव भी निष्क्रिय हैं। जब शिव और शक्ति का मिलन होता है, तब प्रकट होता है अर्धनारीश्वर — वह दिव्य स्वरूप, जहाँ पुरुष और प्रकृति, स्थिरता और गति, वैराग्य और सृजन, एक ही देह में समाहित हो जाते हैं।
एपिसोड 11 की यह शास्त्रोक्त कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए समानता, संतुलन और सहअस्तित्व का दार्शनिक घोष है।
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🔱 शिव-शक्ति: सृष्टि के दो अनिवार्य सत्य
शास्त्र कहते हैं —
“शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं।”
अर्थात शक्ति के बिना शिव भी सृजन में समर्थ नहीं।
शिव चेतना हैं, शक्ति क्रिया।
शिव आकाश हैं, शक्ति पृथ्वी।
शिव मौन हैं, शक्ति नाद।
यदि केवल शिव हों, तो सृष्टि स्थिर हो जाए।
यदि केवल शक्ति हों, तो सृष्टि दिशाहीन हो जाए।
संतुलन तभी है, जब दोनों एक हों।
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🌺 अर्धनारीश्वर की उत्पत्ति: एक शास्त्रोक्त कथा
पुराणों में वर्णन आता है कि एक बार देवताओं में यह प्रश्न उठा —
“सृष्टि का वास्तविक कर्ता कौन है? शिव या शक्ति?”
इस प्रश्न ने ब्रह्मांडीय असंतुलन को जन्म दिया। तब महादेव ने ध्यान से नेत्र खोले और माता पार्वती को अपने वाम अंग में समाहित कर लिया। उसी क्षण शिव अर्धनारीश्वर बने —
दक्षिण भाग पुरुष, वाम भाग नारी।
एक देह, दो स्वरूप।
महादेव ने कहा —
“जो मुझे अलग करता है शक्ति से, वह सृष्टि के सत्य को नहीं जानता।”
यह रूप यह दर्शाता है कि न कोई श्रेष्ठ है, न कोई हीन — दोनों एक-दूसरे के बिना अपूर्ण हैं।
🌸 दार्शनिक अर्थ: अर्धनारीश्वर और जीवन का संतुलन
अर्धनारीश्वर केवल मूर्ति नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन हैं।
यह स्वरूप हमें सिखाता है:
पुरुष और नारी में कोई संघर्ष नहीं, बल्कि पूरकता है।
शक्ति को दबाना सृष्टि को रोकना है।
नारी का सम्मान केवल सामाजिक नहीं, आध्यात्मिक आवश्यकता है।
आज जब समाज लिंग, सत्ता और अहंकार के संघर्ष से जूझ रहा है, तब अर्धनारीश्वर का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।
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🔥 शिव की महिमा: वैराग्य में करुणा, तांडव में सृजन
शिव भस्मधारी हैं, फिर भी करुणा के सागर।
वे औघड़ हैं, फिर भी लोककल्याण के रक्षक।
जब शक्ति के साथ होते हैं, तब शिव केवल संहारक नहीं रहते, बल्कि पालक और रचयिता बन जाते हैं।
अर्धनारीश्वर में शिव का तांडव भी लयबद्ध हो जाता है, क्योंकि शक्ति उसमें सौंदर्य और संतुलन भर देती है।
🌼 शक्ति का स्वरूप: सृजन, करुणा और परिवर्तन
माता पार्वती केवल शिव की अर्धांगिनी नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा हैं।
वे उमा हैं — तप की प्रतिमा।
वे गौरी हैं — करुणा की मूर्ति।
वे काली हैं — अधर्म के विनाश की शक्ति।
अर्धनारीश्वर में शक्ति यह सिखाती हैं कि नारी केवल सहनशील नहीं, सृजनशील और निर्णायक भी है।
🌍 सृष्टि संतुलन का रहस्य
शास्त्रों के अनुसार जब-जब सृष्टि में अहंकार बढ़ा, तब-तब शिव ने शक्ति के साथ संतुलन स्थापित किया।
जब दक्ष यज्ञ में नारी का अपमान हुआ — सृष्टि डगमगाई।
जब शक्ति का तिरस्कार हुआ — शिव तांडव पर उतर आए।
अर्थात नारी सम्मान ही सृष्टि की स्थिरता है।
🕉️ आज के युग में अर्धनारीश्वर का संदेश
आज जब समाज समानता की बात करता है, तब सनातन पहले ही यह कह चुका था —
“समानता नहीं, समरसता चाहिए।”
अर्धनारीश्वर यह सिखाते हैं कि:
परिवार में संतुलन हो।
समाज में सहयोग हो।
सत्ता में संवेदना हो।
यही शिव-शक्ति का शाश्वत संदेश है।
🌺 भावनात्मक समापन: जहाँ शिव भी शक्ति के बिना अधूरे
कल्पना कीजिए उस क्षण की, जब शिव ने पार्वती को अपने हृदय से नहीं, अपने अस्तित्व से जोड़ा।
यह प्रेम नहीं, परम स्वीकार था।
अर्धनारीश्वर हमें सिखाते हैं कि
“जो स्वीकार करता है, वही पूर्ण होता है।”
यही कारण है कि शिव आज भी पूजे जाते हैं —
केवल देवता के रूप में नहीं,
बल्कि संतुलन के प्रतीक के रूप में।
राशिफल: बुध का श्रवण नक्षत्र गोचर, जानें 12 राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव
ज्योतिष पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। 23 जनवरी 2026 को बुध ग्रह श्रवण नक्षत्र में गोचर करेंगे। बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार, लेखन और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है, जबकि श्रवण नक्षत्र सीखने, सुनने, ज्ञान और संचार से जुड़ा है। ऐसे में यह गोचर कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आएगा, वहीं कुछ राशियों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
आइए जानते हैं 12 राशियों का विस्तृत दैनिक राशिफल।
मेष राशि
आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है। नकारात्मक सोच से बाहर निकलें और अपनी पुरानी उपलब्धियों को याद करें। आर्थिक रूप से स्थिति स्थिर रहेगी। दीर्घकालिक योजनाओं पर भरोसा बनाए रखें। कार्यक्षेत्र में धैर्य लाभ देगा।
वृष राशि
पर्सनल लाइफ में अच्छी खबर मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों में पुरानी बातों को छोड़कर आगे बढ़ें। आज काम पर पूरा फोकस जरूरी है। मन भटके तो ध्यान और योग लाभकारी रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य से बेहतर रहेगा।
मिथुन राशि
आर्थिक मामलों में लंबी गणनाओं से बचें और वर्तमान जरूरतों पर ध्यान दें। आज छोटे निवेश और सेविंग्स पर फोकस करें। मानसिक स्थिरता बनाए रखना आपके लिए सबसे जरूरी है। जल्दबाजी से बचें।
कर्क राशि
आज केवल वर्तमान कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें। घर-परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है। पर्सनल लाइफ में अच्छे पल बिताने का मौका मिलेगा।
सिंह राशि
रिश्तों में छोटी-छोटी समझदारी भरी बातें दिल को सुकून देंगी। कार्यक्षेत्र में आपका धैर्य रंग लाएगा। आर्थिक रूप से बीते समय की चिंता छोड़कर आगे बढ़ें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।
कन्या राशि
आर्थिक मामलों में बिना जल्दबाजी लक्ष्य की ओर बढ़ें। आज लोन लेने या देने से बचें, धन फंस सकता है। वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार करने से समस्याओं से बेहतर ढंग से निपट पाएंगे।
तुला राशि
हर समस्या को एक साथ सुलझाने की कोशिश न करें। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में संतुलन बनाना आज जरूरी है। करियर में प्रगति के संकेत हैं। निवेश सोच-समझकर करें, समय अनुकूल है।
वृश्चिक राशि
सरलता अपनाएं और वही कार्य करें जो सार्थक लगे। भावनात्मक उलझनें आ सकती हैं, जरूरत पड़े तो ‘ना’ कहना सीखें। फिजूलखर्ची से बचें, खासकर भावनाओं में बहकर खर्च न करें।
धनु राशि
दूसरों की अपेक्षाओं से ज्यादा अपने कार्यों को प्राथमिकता दें। कामों की सूची बनाकर आगे बढ़ें। रिश्तों में विवाद से बचें और शांत रहकर बातचीत करें। आर्थिक निर्णय किसी की सलाह पर तुरंत न लें।
मकर राशि
स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होगी, मन छोटा न करें। सभी समस्याओं का समाधान भले न हुआ हो, लेकिन आप हालात को बेहतर ढंग से संभाल रहे हैं। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतें।
कुंभ राशि
भावनात्मक बदलाव धीरे-धीरे सकारात्मक रूप लेंगे। रिश्तों में छोटे-छोटे सुखद पल मिलेंगे। पार्टनर के साथ तालमेल अच्छा रहेगा, हालांकि हल्की बहस संभव है। संयम रखें।
मीन राशि
आर्थिक रूप से अतीत को छोड़कर वर्तमान पर ध्यान दें। छोटी-छोटी खुशियों का आनंद लें। व्यापार और करियर में आगे बढ़ने के लिए लंबी अवधि की योजना बनाने का समय है।
डिस्क्लेमर
इस आलेख में दी गई जानकारियां सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। हम इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करते। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ ज्योतिषी या संबंधित क्षेत्र के जानकार से सलाह अवश्य लें।
मनरेगा बचाओ यात्रा सलेमपुर पहुंची, युवाओं ने सरकार पर साधा निशाना
सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। चौरी-चौरा से बनारस के लिए निकली गांधीवादी युवाओं की मनरेगा बचाओ यात्रा शुक्रवार को सलेमपुर के गांधी चौक पहुंची। यात्रा के दौरान युवाओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमाओं पर नुक्कड़ सभा आयोजित की। इस मौके पर युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव चंद यादव भी यात्रा में शामिल हुए।
नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए यात्रा में शामिल रजत सिंह ने कहा कि देश में गरीबों और ग्रामीण मजदूरों को अधिकार व संबल देने वाली योजनाएं लगातार समाप्त की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को गांधी, नेहरू और सुभाष जैसे आज़ादी के नायकों से भी वैचारिक विरोध है, इसी कारण महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी मनरेगा योजना को कमजोर कर दिया गया है।
सलेमपुर से आगे बढ़ते हुए यह साइकिल यात्रा भागलपुर (देवरिया) पहुंची, जहां रास्ते में यात्रियों ने स्थानीय लोगों से संवाद कर मनरेगा से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी।
इस दौरान केशव चंद यादव ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने मनरेगा के जरिए ग्रामीण भारत को रोजगार और सम्मान की गारंटी दी थी, लेकिन वर्तमान सरकार मजदूर-विरोधी नीतियां लागू कर रही है और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए मनरेगा को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।
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यात्रा में शामिल जय मौर्य ने कहा कि मनरेगा के तहत मिलने वाला 100 दिन का रोजगार, न्यूनतम मजदूरी और कानूनी सुरक्षा को कमजोर कर दिया गया है। पंचायतों से काम चुनने का अधिकार छीन लिया गया है, जिससे दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों के रोजगार अधिकार पर सीधा हमला हो रहा है।
बताया गया कि मनरेगा बचाओ यात्रा 30 दिनों में चौरी-चौरा से बनारस तक पहुंचेगी, इस दौरान युवा विभिन्न गांवों में जाकर लोगों से संवाद करेंगे।
मनरेगा बचाओ यात्रा की प्रमुख मांगें
• काम का संवैधानिक अधिकार बहाल किया जाए
• मजदूर-विरोधी VB-G RAM G कानून वापस लिया जाए
• न्यूनतम मजदूरी ₹400 प्रतिदिन तय की जाए
यात्रा में देवरिया, मऊ, कुशीनगर, आजमगढ़, बलिया, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई जिलों व राज्यों के युवा शामिल रहे।
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गुजरात जायंट्स ने यूपी वॉरियर्स को हराकर प्लेऑफ उम्मीदें जीवित
सोफी डिवाइन का ऑलराउंड प्रदर्शन बना जीत की कुंजी
वीमेंस प्रीमियर लीग 2026 (WPL 2026) का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है। वडोदरा में खेले गए एक बेहद अहम मुकाबले में गुजरात जायंट्स ने यूपी वॉरियर्स को 45 रनों से करारी शिकस्त देकर न सिर्फ अपनी प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा, बल्कि पॉइंट्स टेबल में बड़ी छलांग भी लगा दी है।
इस जीत के साथ गुजरात जायंट्स अंक तालिका में आखिरी पायदान से सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई है, जबकि यूपी वॉरियर्स की राह अब काफी मुश्किल हो गई है। लगातार जीत की लय में चल रही यूपी टीम को गुजरात ने जीत की हैट्रिक लगाने से रोक दिया।
गुजरात जायंट्स की दमदार बल्लेबाजी, 153 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात जायंट्स ने निर्धारित 20 ओवरों में 153 रन बनाए। शुरुआत भले ही सधी हुई रही, लेकिन मध्यक्रम में सोफी डिवाइन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
सोफी डिवाइन ने दबाव में नाबाद 50 रन की मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी में संयम, आक्रामकता और अनुभव साफ झलक रहा था। उन्होंने स्ट्राइक रोटेट करते हुए समय-समय पर बाउंड्री लगाकर स्कोर को आगे बढ़ाया।
गुजरात की बल्लेबाजी का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह रहा कि विकेट गिरने के बावजूद रन गति पर असर नहीं पड़ा। यही कारण रहा कि टीम 150 से ऊपर का स्कोर खड़ा करने में सफल रही।
सोफी डिवाइन का ऑलराउंड शो, गुजरात की जीत के हीरो
इस मुकाबले में सोफी डिवाइन गुजरात जायंट्स की जीत की सबसे बड़ी वजह रहीं। बल्ले से अर्धशतक लगाने के बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया और 2 अहम विकेट झटके।
उनका यह ऑलराउंड प्रदर्शन मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इससे पहले गुजरात लगातार तीन मुकाबले हार चुकी थी, लेकिन सोफी डिवाइन ने टीम को आत्मविश्वास और दिशा दोनों दी।
उनके अलावा राजेश्वरी गायकवाड़ ने बेहतरीन स्पिन गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट हासिल किए, जबकि रेणुका सिंह ठाकुर ने अपनी तेज गेंदबाजी से 2 विकेट लेकर यूपी की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।
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यूपी वॉरियर्स की बल्लेबाजी लड़खड़ाई, 108 रन पर सिमटी टीम
153 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी यूपी वॉरियर्स की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही टीम ने अहम विकेट गंवा दिए, जिससे दबाव लगातार बढ़ता चला गया।
गुजरात के गेंदबाजों ने सटीक लाइन-लेंथ और शानदार फील्डिंग के दम पर यूपी की बल्लेबाजी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पूरी टीम 108 रन पर सिमट गई और 45 रनों से मुकाबला हार गई।
नेट रन रेट के लिहाज से यह हार यूपी वॉरियर्स के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि प्लेऑफ की दौड़ में अब हर रन बेहद अहम हो चुका है।
WPL 2026 पॉइंट्स टेबल: प्लेऑफ की रेस और ज्यादा रोमांचक
वीमेंस प्रीमियर लीग 2026 में अब प्लेऑफ की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती जा रही है।
• RCB लगातार 5 जीत दर्ज कर पहले ही प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर चुकी है।
• गुजरात जायंट्स इस जीत के बाद सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई है।
• गुजरात को लीग स्टेज में अभी 2 मैच और खेलने हैं।
• तीसरे स्थान के लिए मुंबई इंडियंस, दिल्ली कैपिटल्स और यूपी वॉरियर्स के बीच कड़ी टक्कर है।
• तीनों टीमों के 4-4 अंक हैं, लेकिन नेट रन रेट में यूपी वॉरियर्स सबसे पीछे है।
अब आने वाले मुकाबले तय करेंगे कि कौन-सी टीम प्लेऑफ में जगह बनाएगी और किसका सफर यहीं थम जाएगा।
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यूपी वॉरियर्स की राह कठिन, बचे हैं सिर्फ 2 मुकाबले
यूपी वॉरियर्स इससे पहले लगातार दो मैचों में मुंबई इंडियंस को हराकर जबरदस्त आत्मविश्वास में थी। लेकिन गुजरात के खिलाफ मिली यह बड़ी हार उनकी प्लेऑफ की उम्मीदों को कमजोर कर गई है।
अब यूपी को लीग स्टेज में बचे दोनों मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे, साथ ही अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा।
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भारत-EU ट्रेड डील से ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा झटका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति और ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपियन यूनियन (EU) से बढ़ते टकराव के बीच भारत-EU ट्रेड डील वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ के रूप में उभर रही है। इस डील को दोनों पक्षों ने “Mother of All Trade Deals” कहा है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
ट्रंप की टैरिफ नीति से परेशान दुनिया
डोनाल्ड ट्रंप ने “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” के नारे के तहत पूरी दुनिया पर टैरिफ का दबाव बनाया। यूरोप, एशिया और विकासशील देशों पर आयात शुल्क बढ़ाकर ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर दिया। यही कारण है कि अब यूरोपियन यूनियन अमेरिकी दबदबे से बाहर निकलने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब अमेरिका ने एकतरफा आर्थिक फैसले लिए, दुनिया को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा। 1971 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर को सोने से अलग कर ब्रेटन वुड्स सिस्टम खत्म कर दिया था।
फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट भी आक्रामक आर्थिक सुधारों और संस्थाओं से टकराव के लिए जाने जाते हैं।
आज ट्रंप की नीतियां उसी राह पर चलती दिखाई दे रही हैं।
यूरोपियन यूनियन को क्यों चाहिए भारत?
यूरोपियन यूनियन समझ चुका है कि अमेरिका पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा है। ऐसे में भारत उसके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, विशाल उपभोक्ता बाजार है और रणनीतिक रूप से स्थिर साझेदार है। यही वजह है कि भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
इस डील की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा
भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने।
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भारत-EU ट्रेड डील से क्या बदलेगा?
भारत-EU ट्रेड डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी।
- • इस डील से दुनिया की लगभग 25% GDP एक साथ आ जाएगी।
- • करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार तैयार होगा।
- • भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण और हस्तशिल्प उत्पाद यूरोप में ड्यूटी-फ्री पहुंचेंगे।
- • अभी लगने वाला लगभग 10% टैक्स खत्म होगा, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ मिलेगा।
- • यूरोप से आने वाली वाइन, स्पिरिट्स, डेयरी उत्पाद, कार और लग्जरी बाइक्स भारत में सस्ती होंगी।
- इससे भारत में उपभोक्ताओं को भी सीधा फायदा होगा।
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इतिहास में 23 जनवरी: नेताजी से लेकर अंतरराष्ट्रीय फैसलों तक
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: इतिहास, राजनीति, विश्व और भारत से जुड़ी बड़ी घटनाओं का विस्तृत लेख
भूमिका
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ इतिहास के पन्नों में एक विशेष स्थान रखती हैं। यह दिन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए राजनीतिक, सामाजिक, सैन्य और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद अहम रहा है। इसी तिथि को महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म हुआ, जिसने इस दिन को और भी गौरवशाली बना दिया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश, युद्धविराम की घोषणाएँ, सरकारों के गठन-विघटन, आर्थिक फैसले और सामाजिक बदलावों ने 23 जनवरी को इतिहास में अमर बना दिया।
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: हाल के वर्षों की झलक
2020 की प्रमुख घटनाएँ
साल 2020 में 23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण रहीं।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने एक ऐतिहासिक आदेश में म्यांमार को निर्देश दिया कि वह रोहिंग्या आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह फैसला मानवाधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया।
इसी दिन ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने ब्रिटिश सरकार के ब्रेक्जिट कानून को मंजूरी दी, जिससे यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ी।
भारत में गृह मंत्रालय ने सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2020 के विजेताओं की घोषणा की।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में भारत 80वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि डेनमार्क और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर बने रहे।
2009 से 2006 तक की घटनाएँ
2009 में फ़िल्मी और टेलीविज़न कार्यक्रमों में धूम्रपान दृश्यों पर लगा प्रतिबंध समाप्त हुआ, जिसने मीडिया और सामाजिक विमर्श को नया मोड़ दिया।
2008 में बैंक ऑफ बड़ौदा ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बहरीन में पूर्ण परिचालन शुरू करने की योजना बनाई। इसी वर्ष एलएंडटी को पश्चिमी एशिया से 1057 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला और ईरान पर तीसरे प्रतिबंध को लेकर वैश्विक सहमति बनी।
2007 में भारत और रूस के बीच मध्यम आकार के बहुउद्देशीय परिवहन विमान के उत्पादन हेतु घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
2006 में भारत ने पाकिस्तान को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा देने की सिफारिश को मंजूरी दी।
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: भारत से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएँ
2005 से 2002
2005 में उत्तर प्रदेश के फिरोज़ाबाद में फरक्का एक्सप्रेस से छह लोगों को बाहर फेंकने की दर्दनाक घटना सामने आई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई।
2004 में मध्यप्रदेश में गोवंश वध पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया।
2003 में नेपाल की चार प्रमुख पार्टियों ने राजशाही द्वारा निर्वाचित सरकार को बर्खास्त किए जाने का संयुक्त रूप से विरोध किया।
2002 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जमानत पर रिहा हुए।
1993 से 1977
1993 में इराक ने अमेरिकी विमानों पर हमले के आरोपों को खारिज करते हुए युद्धविराम का पालन करने की घोषणा की।
1992 में एस्टोनिया के प्रधानमंत्री एडगर सैविसार ने इस्तीफा दिया।
1991 में इराक के तेल मंत्रालय ने गैसोलिन की बिक्री पर रोक लगाई।
1977 में भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया जब जनता पार्टी का गठन हुआ।
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: विश्व इतिहास में योगदान
1973 से 1965
1973 में वियतनाम युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने की।
1968 में उत्तरी कोरिया ने अमेरिकी जहाज यूएसएस पुएब्लो को जब्त कर लिया।
1966 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनीं, जो भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण था।
1965 में दुर्गापुर इस्पात संयंत्र ने काम करना शुरू किया, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिली।
1924 से 1897
1924 में सोवियत संघ ने लेनिन की मृत्यु की आधिकारिक घोषणा की।
1920 में हॉलैंड ने जर्मनी के विलियम द्वितीय को मित्र देशों के हवाले करने से इंकार किया।
1913 में तुर्की की सैनिक क्रांति के दौरान नाजिम पाशा मारे गए।
1897 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक में हुआ, जिसने 23 जनवरी को भारतीय इतिहास में अमर बना दिया।
23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास
1849 में प्रशिया ने ऑस्ट्रिया के बिना जर्मन यूनियन का प्रस्ताव रखा और इसी दिन एलिजाबेथ ब्लैकवेल पहली अमेरिकी महिला बनीं जिन्होंने मेडिकल डिग्री हासिल की।
1799 में फ्रांसीसी सैनिकों ने नेपल्स पर कब्जा किया।
1793 में ह्यूमन सोसायटी ऑफ फिलाडेल्फिया का गठन हुआ।
1668 में इंग्लैंड और हॉलैंड के बीच सहयोग समझौता हुआ।
1570 में स्कॉटलैंड के रीजेंट मोरे के अर्ल की हत्या हुई।
1556 में चीन के शेनसी प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप में हजारों लोगों की जान गई।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि 23 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ केवल तारीख भर नहीं हैं, बल्कि यह दिन इतिहास, राजनीति, मानवाधिकार, युद्ध, शांति और सामाजिक बदलावों का साक्षी रहा है। भारत के लिए यह दिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिवस के कारण गर्व और प्रेरणा का प्रतीक है, जबकि विश्व स्तर पर भी इस तिथि ने कई निर्णायक फैसलों को जन्म दिया। इतिहास को समझने और वर्तमान को दिशा देने के लिए ऐसी तिथियों का अध्ययन बेहद आवश्यक है।
