Friday, June 12, 2026
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श्रमिकों के लिए पंजीकरण अभियान तेज

असंगठित श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी, ई-श्रम कार्डधारकों को 3000 रुपये मासिक पेंशन


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना महराजगंज जनपद में तेजी से लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत ई-श्रम कार्डधारक असंगठित श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन की सुनिश्चित सुविधा प्रदान की जाती है, जिससे बुढ़ापे में उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल सके।

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प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से मिलेगा सामाजिक संबल
श्रम प्रवर्तन अधिकारी महराजगंज गणेश सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह योजना असंगठित श्रमिकों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना में श्रमिक की आयु के अनुसार प्रतिमाह न्यूनतम अंशदान लिया जाता है, जिसमें सरकार बराबर का योगदान करती है। इससे श्रमिकों को दीर्घकालीन सुरक्षा प्राप्त होती है।

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परिवार को भी मिलेगा पेंशन का लाभ
योजना के तहत यदि पेंशन प्राप्त करने के बाद श्रमिक की मृत्यु हो जाती है, तो उनके पति या पत्नी को 1500 रुपये प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन दी जाती है। इससे परिवार की आजीविका प्रभावित नहीं होती और उन्हें आर्थिक सहारा बना रहता है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ
इस योजना का लाभ वे असंगठित श्रमिक उठा सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम है और जो आयकरदाता नहीं हैं। इसमें रेहड़ी-पटरी व्यवसायी, रिक्शा व ई-रिक्शा चालक, निर्माण श्रमिक, ईंट-भट्ठा मजदूर, घरेलू कामगार, कृषि मजदूर, दर्जी, मोची, धोबी, नाई, मछुआरे, कूड़ा बीनने वाले सहित अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं।

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पंजीकरण प्रक्रिया सरल
पात्र श्रमिक www.maandhan.in पोर्टल या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता और मोबाइल नंबर अनिवार्य है। जनपद में अधिक से अधिक श्रमिकों को जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने सभी पात्र श्रमिकों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने भविष्य को सुरक्षित करें और आवश्यकता होने पर श्रम प्रवर्तन कार्यालय, महराजगंज से संपर्क करें।

बिजली विभाग की लापरवाही से 11 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत, गांव में उबाल


शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)।शाहजहांपुर जिले के गढ़िया रंगीन कस्बे में बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। 11,000 वोल्ट की हाई टेंशन लाइन से लटक रहे लोहे के तार की चपेट में आने से 11 वर्षीय बालक आशीष की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया है और ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशीष कस्बे के बाहर धर्मशाला के पास एक पेड़ से बेर तोड़ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाई टेंशन लाइन में एक जूता फंसा हुआ था, जिसमें बंधा पतला लोहे का तार काफी दिनों से नीचे लटक रहा था। जैसे ही आशीष बेर तोड़ने के दौरान उस तार के संपर्क में आया, तेज करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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ग्रामीणों का कहना है कि यह खतरनाक तार कई दिनों से लटक रहा था। पहले भी इसकी शिकायत बिजली विभाग से की गई थी। कुछ दिन पूर्व इसी तार से करंट लगने से एक पिल्ले की मौत हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही का खामियाजा आज एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
घटना से पूरे गांव में शोक की लहर है। आशीष के पिता का दो वर्ष पहले निधन हो चुका था और उसकी मां मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। बेटे की मौत के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।

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सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, यह घटना एक बार फिर बिजली विभाग की लापरवाही और जर्जर बिजली व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

पूर्वांचल में निवेश, रोजगार और उद्यमिता की नई इबारत लिखेगा ‘बरगद मंथन’

कौन बनेगा बरगद: गांव और छोटे शहरों के उद्यमियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।पूर्वांचल में निवेश, रोजगार और उद्यमिता को नई दिशा देने की ओर एक मजबूत कदम के रूप में जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल द्वारा आयोजित ‘बरगद मंथन’ कार्यक्रम को क्षेत्रीय आर्थिक विकास की बड़ी पहल माना जा रहा है। यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय उद्यमियों को मंच देगा, बल्कि पूर्वांचल उद्यमिता इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का माध्यम भी बनेगा।
बरपार स्थित बरगद सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि ‘कौन बनेगा बरगद’ कार्यक्रम पूर्वांचल के गांवों और छोटे शहरों में छिपी उद्यमशील प्रतिभा को पहचान दिलाने का अनोखा प्रयास है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, स्थानीय रोजगार सृजन और स्थायी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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उन्होंने बताया कि बरगद मंथन केवल एक पिचिंग इवेंट नहीं है, बल्कि यह ‘कौन बनेगा बरगद’ की चयन प्रक्रिया का अहम चरण है। इस दो दिवसीय आयोजन में पूर्वांचल के सात जिलों से आए 81 उद्यमी भाग ले रहे हैं, जिनमें से लगभग 20 उद्यमियों का चयन आगे मुख्य मंच के लिए किया जाएगा।
बरगद की प्रेरणा से उद्यमिता का विकास
आशुतोष कुमार ने बताया कि जागृति उद्यम केंद्र की अवधारणा परिसर में मौजूद एक पुराने बरगद वृक्ष से प्रेरित है। संस्थापक शशांक मणि द्वारा स्थापित यह विचार दर्शाता है कि जैसे एक छोटा बीज समय के साथ विशाल बरगद बनता है, वैसे ही स्थानीय उद्यमी सही मार्गदर्शन, निवेश और मेंटरशिप से बड़े उद्यम में बदल सकते हैं।
‘कौन बनेगा बरगद’ कार्यक्रम इसी दर्शन पर आधारित है, जहां जागृति की इन्क्यूबेशन प्रक्रिया के माध्यम से उद्यमियों को प्रशिक्षण, रणनीतिक सलाह और निवेश के अवसर प्रदान किए जाते हैं।
कृषि से आईटी तक, हर सेक्टर के उद्यमी शामिल
बरगद मंथन में शामिल उद्यमी कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, आईटी, एमएसएमई, सस्टेनेबिलिटी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। कार्यक्रम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आए निवेशक और बिजनेस एक्सपर्ट उद्यमियों को फीडबैक, मेंटरशिप और नेटवर्किंग के अवसर प्रदान कर रहे हैं।

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280 से अधिक उद्यमों को मिला लाभ
जागृति उद्यम केंद्र–पूर्वांचल के इन्क्यूबेशन निदेशक विश्वास पांडेय ने बताया कि अब तक केंद्र के इन्क्यूबेशन कार्यक्रम से 280 से अधिक उद्यम लाभान्वित हो चुके हैं। इसके माध्यम से
₹5.07 करोड़ की फंडिंग सहायता,
8,310 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ,
112 महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का सशक्तिकरण,
और 2,601 नए रोजगार अवसरों का सृजन संभव हो पाया है।
उन्होंने कहा कि बरगद मंथन कार्यक्रम पूर्वांचल में एक मजबूत, टिकाऊ और समावेशी उद्यमिता इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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पूर्वांचल की आर्थिक तस्वीर बदलेगा ‘कौन बनेगा बरगद’
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कौन बनेगा बरगद’ जैसे कार्यक्रम स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। इससे न केवल पूर्वांचल में निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार, महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

KGMU में मजार हटाने का नोटिस, 15 दिन की मोहलत

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। यौन शोषण-धर्मांतरण मामला तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में स्थित सभी मजारों पर नोटिस चस्पा कर 15 दिनों के भीतर उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर यदि मजार नहीं हटाई जाती हैं, तो केजीएमयू प्रशासन अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करेगा। प्रशासन का कहना है कि परिसर में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बताया जा रहा है कि यौन शोषण-धर्मांतरण मामले के सामने आने के बाद यह मुद्दा लगातार चर्चा में रहा, जिसके चलते विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। इससे पहले भी केजीएमयू प्रशासन ने मजार के पास हुए अवैध निर्माण को चिन्हित कर खाली कराया था और उसे ध्वस्त कर दिया गया था।

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केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर की गरिमा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। सभी निर्णय नियमों और शासन के निर्देशों के अनुसार लिए जा रहे हैं। नोटिस चस्पा किए जाने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

तीन साल के मासूम की गड्ढे में डूबकर मौत, बरवांटारी गांव में मातम

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नौतनवां थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरवांटारी गांव में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में तीन साल के मासूम की गड्ढे में डूबकर मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बरवांटारी गांव निवासी राजेश गुरुवार शाम करीब चार बजे खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनका तीन वर्षीय पुत्र अरूण भी पिता के पीछे-पीछे चला गया। काफी देर तक जब बच्चा घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान घर के पास स्थित पानी भरे गड्ढे में मासूम अरूण का शव उतराया हुआ मिला।

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यह दृश्य देखते ही पिता बदहवास हो गए और मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। ग्रामीणों की मदद से मासूम को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्ष्मीपुर ले जाया गया, जहां चिकित्सक डॉ. मनीष कश्यप ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार बच्चा काफी देर तक पानी में डूबा रहा, जिससे उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिजन बच्चे का शव घर ले आए, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। तीन साल के मासूम की असमय मौत से पूरे बरवांटारी गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है।

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बलिया: डीएम की अध्यक्षता में समितियों की समीक्षा बैठक, व्यापारियों की समस्याओं पर सख्त रुख

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में वन विभाग, जिला गंगा समिति, पर्यावरण समिति, वृक्षारोपण समिति, जिला उद्योग बंधु, व्यापार बंधु एवं श्रम बंधु से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा के साथ व्यापारियों और आमजन से जुड़ी समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई।

व्यापार बंधु की बैठक के दौरान व्यापारियों ने चौक से कासिम बाजार तक नियमित साफ-सफाई न होने की शिकायत उठाई। इस पर जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को दो दिन के भीतर सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लापरवाही या शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

व्यापारियों द्वारा शहर की अन्य समस्याओं को भी सामने रखा गया। जिलाधिकारी ने अग्रवाल धर्मशाला, इंदिरा मार्केट और दवा मंडी में एक सप्ताह के भीतर व्यापारियों के साथ बैठक कर समस्याओं को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो समस्याएं तुरंत हल हो सकती हैं, उनका तत्काल निस्तारण किया जाए और शेष के लिए वैकल्पिक समाधान सुनिश्चित किया जाए।

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जगरनाथ मूर्ति तक लगभग 200 मीटर क्षेत्र में बिजली की समस्या पर विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता को खंभा और वायर की व्यवस्था कर 20 दिनों के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। गुरुद्वारा रोड स्थित कपड़ा बाजार में महिलाओं के लिए शौचालय निर्माण के निर्देश नगर पालिका को दिए गए। स्टेशन मलगोदाम रोड की गली में गंदगी की शिकायत पर तत्काल सफाई कराने के आदेश दिए गए। मंडी क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को फरवरी माह के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए।

वृक्षारोपण समिति की समीक्षा में बताया गया कि वृक्षारोपण की जियो टैगिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिलाधिकारी ने कहा कि आगामी वृक्षारोपण अभियान की तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी।

जिला गंगा समिति और पर्यावरण समिति की बैठक में गंगा प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देश पर गंगा किनारे स्थित 41 ग्राम पंचायतों में ड्रोन कैमरे से सर्वे कराया जाएगा। सभी नालों का विवरण पांच दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने दो टूक कहा कि गंगा प्रदूषण के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज, डीडीओ आनंद प्रकाश, डीएफओ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत बनी समाज के लिए गंभीर चेतावनी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत आज समाज के सामने एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बन चुकी है। जिस नशे को कभी केवल वयस्कों तक सीमित माना जाता था, वह अब स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों तक तेजी से फैल रहा है। यह स्थिति न केवल बच्चों के वर्तमान को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि देश और समाज के भविष्य के लिए भी खतरे की घंटी है।

विशेषज्ञों के अनुसार 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों में तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, शराब और नशीली दवाओं का सेवन लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत की शुरुआत दोस्तों के दबाव, गलत संगति या जिज्ञासा से होती है, जो बाद में आदत में बदल जाती है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। फिल्मों और वेब सीरीज में नशे का खुलेआम महिमामंडन बच्चों के मन पर गलत असर डाल रहा है।

कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत के पीछे एक बड़ा कारण पारिवारिक संवाद की कमी भी है। कई माता-पिता व्यस्तता के चलते बच्चों के व्यवहार पर समय रहते ध्यान नहीं दे पाते। बच्चे जब तनाव, अकेलेपन या पढ़ाई के दबाव से गुजरते हैं, तो नशे को एक आसान रास्ता समझ बैठते हैं। धीरे-धीरे यह लत उनके जीवन का हिस्सा बन जाती है।

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नशे की लत बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डालती है। इससे याददाश्त कमजोर होती है, पढ़ाई में रुचि कम हो जाती है और व्यवहार में चिड़चिड़ापन व आक्रामकता आ जाती है। कई मामलों में कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत उन्हें अपराध की दुनिया की ओर भी धकेल देती है। चोरी, झगड़े और हिंसक घटनाओं में बच्चों की संलिप्तता समाज की शांति को भंग कर रही है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि नशे की लत के शुरुआती संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अचानक खर्च बढ़ना, पढ़ाई से दूरी बनाना, व्यवहार में बदलाव या नए दोस्तों के साथ अत्यधिक समय बिताना नशे की ओर बढ़ने के संकेत हो सकते हैं। यदि इन संकेतों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है।

कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। माता-पिता को बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए और उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। स्कूलों में नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम, काउंसलिंग और खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही प्रशासन और पुलिस को स्कूलों व रिहायशी इलाकों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगानी होगी।

कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की लत केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकट है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाली पीढ़ी गंभीर खतरे में पड़ सकती है। अब जरूरत है जागरूकता, जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास की, ताकि बच्चों को नशे की दलदल से बचाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया जा सके।

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जेपी रीजेंसी में होगा श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन

अंबरनाथ में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, 25 से 31 जनवरी 2026 तक जेपी रीजेंसी में गूंजेगा भक्ति का रस

अंबरनाथ (राष्ट्र की परम्परा)।अंबरनाथ में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन आगामी 25 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक जेपी रीजेंसी, अंबरनाथ में किया जा रहा है। यह आयोजन नगरवासियों के लिए भक्ति, ज्ञान और संस्कार का अनुपम संगम सिद्ध होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ 25 जनवरी 2026 को पारंपरिक कलश यात्रा एवं रथ यात्रा के साथ होगा। नगर की सड़कों पर निकलने वाली यह यात्रा भक्तिमय वातावरण का सृजन करेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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कथा के व्यास एवं प्रसिद्ध भागवत मर्मज्ञ पंडित निलेश महाराज वेंकटेशाचार्य सात दिनों तक निरंतर श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण वाचन करेंगे। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति मार्ग, जीवन मूल्यों और भारतीय संस्कृति के गूढ़ रहस्यों का सरल एवं प्रभावी संदेश दिया जाएगा।
आयोजक मंडल के अनुसार, पिछले वर्ष अंबरनाथ में श्रीमद्भागवत कथा को मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद इस वर्ष व्यवस्थाओं को और अधिक सुव्यवस्थित एवं व्यापक रूप दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा, अनुशासन और आध्यात्मिक शांति को प्राथमिकता में रखा गया है।

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आयोजकों ने समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से सपरिवार पधारकर श्रीमद्भागवत कथा अंबरनाथ के इस पावन अवसर का पुण्य लाभ उठाने और धर्म, भक्ति व संस्कृति के इस महायज्ञ में सहभागी बनने की अपील की है। यह आयोजन समाज में सकारात्मकता, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा।

देवरिया में सुबह-सुबह सड़कों पर दिखी पुलिस की सक्रियता, नागरिकों में बढ़ा सुरक्षा विश्वास

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया में आम नागरिकों की सुरक्षा, शांति एवं कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस द्वारा शुक्रवार को एक व्यापक और प्रभावी “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन के कुशल निर्देशन में दिनांक 23 जनवरी 2026 को प्रातः 05:00 बजे से 08:00 बजे तक संचालित किया गया, जिसमें जिले के सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्ष सक्रिय रूप से शामिल रहे।

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आमजन से सीधा संवाद, भरोसे की नींव मजबूत
मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान का मूल उद्देश्य केवल चेकिंग या कार्रवाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना और आम नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना रहा। सुबह की सैर पर निकलने वाले नागरिकों से पुलिस अधिकारियों ने संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया और मित्र पुलिसिंग की अवधारणा को जमीन पर उतारने का प्रयास किया।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि देवरिया पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह सजग, सतर्क और प्रतिबद्ध है। छोटे-मोटे विवादों को मौके पर ही समझाइश के माध्यम से सुलझाया गया, जिससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत हुआ।
संदिग्धों और वाहनों पर कड़ी नजर, नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
अभियान के दौरान जिले के प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों, पार्कों एवं संवेदनशील इलाकों में सघन चेकिंग की गई। इस दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन तलाशी एवं पूछताछ की गई। पुलिस ने कानून के उल्लंघन पर सख्त लेकिन संतुलित कार्रवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया।

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चेकिंग के दौरान चोरी की गाड़ियों की पहचान, दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी, मॉडिफाइड साइलेंसर, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना हेलमेट वाहन संचालन जैसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त अवैध असलहा, संदिग्ध वस्तुओं एवं मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए भी विशेष सतर्कता बरती गई।
आंकड़ों में अभियान की सफलता
देवरिया पुलिस द्वारा चलाए गए इस व्यापक अभियान की प्रभावशीलता का अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अभियान के दौरान जनपद के कुल 18 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 438 व्यक्तियों एवं 260 वाहनों की जांच की गई। यह आंकड़े पुलिस की सक्रियता और सतर्कता को दर्शाते हैं।

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जनमानस में सुरक्षा का अहसास
मार्निंग वॉक पर निकले नागरिकों ने देवरिया पुलिस की इस पहल की खुलकर सराहना की। लोगों ने कहा कि सुबह के समय पुलिस की सक्रिय उपस्थिति से उन्हें न केवल सुरक्षा का एहसास हुआ, बल्कि यह भी विश्वास जगा कि पुलिस हर समय जनता के साथ खड़ी है। कई नागरिकों ने पुलिस अधिकारियों से संवाद कर स्थानीय समस्याओं और सुझावों को भी साझा किया।
निरंतर जारी रहेंगे ऐसे अभियान
देवरिया पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इस तरह के जनसंपर्क और चेकिंग आधारित अभियान आगे भी नियमित रूप से चलाए जाएंगे। पुलिस प्रशासन का मानना है कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जनता का विश्वास जीतना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान को भविष्य में और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

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पुलिस अधीक्षक का संदेश
पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन ने कहा कि जनपद में शांति, सुरक्षा और सौहार्द बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमजन के सहयोग से ही अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

अधूरी पानी की टंकी बनी मुसीबत, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

रानीपुर के भेड़ियाघर में जल शक्ति मिशन की अधूरी पानी की टंकी बनी ग्रामीणों की परेशानी, हर घर जल योजना ठप

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।
जनपद मऊ के रानीपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भेड़ियाघर में जल शक्ति मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। योजना के तहत एक वर्ष पूर्व टंकी का निर्माण पूर्ण दर्शाया गया, लेकिन आज तक गांव में हर घर जल योजना के अंतर्गत स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जल शक्ति मिशन भेड़ियाघर के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने के दौरान गांव की गलियों में व्यापक खुदाई कर दी गई थी, लेकिन बाद में सड़कों और नालियों की मरम्मत सही ढंग से नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे आवागमन में भी दिक्कत हो रही है। हालांकि कई घरों में नल कनेक्शन दे दिए गए हैं, लेकिन पानी की टंकी अधूरी होने के कारण जल आपूर्ति पूरी तरह ठप है।

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ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप
ग्राम भेड़ियाघर निवासी पिंटू यादव, दिनेश यादव, पंकज यादव, सुनील शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा और रामकवल शर्मा ने आरोप लगाया कि ठेकेदार करीब तीन वर्ष पूर्व अधूरा काम छोड़कर चला गया। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही के चलते केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना भेड़ियाघर में धरातल पर उतर ही नहीं पा रही है।
अन्य गांवों से तुलना
ग्रामीणों ने बताया कि जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में जल शक्ति मिशन के अंतर्गत टंकी निर्माण पूरा होने के बाद नियमित जल आपूर्ति शुरू हो चुकी है, लेकिन भेड़ियाघर में अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। इससे ग्रामीणों को हैंडपंप और निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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प्रशासन से जल्द समाधान की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल शक्ति मिशन के अधिकारियों से मांग की है कि अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कर पानी की सप्लाई शुरू कराई जाए। इस संबंध में जल शक्ति मिशन के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

कुशीनगर में पति लौटा तो पत्नी प्रेमी संग रंगे हाथ पकड़ी गई

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के एक जिले से सामने आई यह घटना हर किसी को हैरान करने वाली है। मजदूरी के सिलसिले में बाहर गया एक युवक जब अचानक घर लौटा, तो उसे ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। घर के अंदर उसकी पत्नी अपने प्रेमी के साथ मौजूद थी। इस घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

मामला विशुनपुरा थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार युवक की शादी करीब पांच वर्ष पहले मंजू देवी नाम की महिला से हुई थी। दंपती की दो छोटी बेटियां हैं, जिनकी उम्र तीन और दो वर्ष बताई जा रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए पति चंडीगढ़ में मजदूरी करता था और वहीं रहकर काम कर रहा था।

बुधवार तड़के करीब पांच बजे युवक अचानक काम से घर लौट आया। जैसे ही उसने घर का दरवाजा खोला और कमरे में प्रवेश किया, वह वहां का नजारा देखकर स्तब्ध रह गया। कमरे में उसकी पत्नी किसी अन्य युवक के साथ थी। यह देखकर पति का आपा खो गया और वह प्रेमी की ओर बढ़ा, लेकिन पत्नी बीच में आ गई और उसे रोक लिया। पत्नी ने प्रेमी को छूने तक नहीं दिया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

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घर से शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में भीड़ इकट्ठा हो गई और गुस्साए लोगों ने दोनों को पकड़ लिया। स्थानीय लोगों ने महिला और उसके प्रेमी को बिजली के खंभे से बांध दिया और पुलिस को सूचना दी। घटना का वीडियो और तस्वीरें भी मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बनाई गईं, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं।

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को खंभे से खुलवाया। हालांकि, पुलिस के सामने भी महिला का रवैया नहीं बदला। वह लगातार अपने प्रेमी से चिपकी रही और उसके साथ जाने की जिद करती रही। पूछताछ में प्रेमी की पहचान सौम्य वीर कश्यप के रूप में हुई, जो शाहजहांपुर जिले का रहने वाला बताया गया है।

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पुलिस जांच में सामने आया कि महिला और युवक की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम संबंध चल रहा था। महिला ने स्वीकार किया कि वह अपने पति के बजाय प्रेमी के साथ रहना चाहती है। इतना ही नहीं, बताया गया कि करीब दो महीने पहले भी प्रेमी महिला के घर आया था, जिसे उसने अपने रिश्तेदार का बेटा बताकर दो दिन तक घर में ठहराया था। उस समय पति को शक हुआ था, लेकिन महिला अपने बयान पर अड़ी रही।

फिलहाल पुलिस महिला, उसके प्रेमी और दोनों मासूम बच्चियों को थाने ले गई है। महिला के मायके पक्ष को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर ABVP ने किया माल्यार्पण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), गोरखपुर महानगर के स्टूडेंट्स फ़ॉर डेवलपमेंट इकाई द्वारा पैडलेगंज स्थित नेताजी की प्रतिमा पर साफ-सफाई कर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित परिषद कार्यकर्ताओं ने नेताजी के राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस और बलिदान को स्मरण करते हुए उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर गोरखपुर महानगर सह-संयोजक जयवर्धन सिंह ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही सशक्त व आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है।

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महानगर स्टूडेंट्स फ़ॉर डेवलपमेंट संयोजक शुभम पाण्डेय ने समाज और राष्ट्र के प्रति युवाओं की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सहभागिता को आवश्यक बताया। वहीं प्रांत स्कूली कार्य संयोजक हर्षित मालवीय और महानगर सह मंत्री प्रशांत त्रिपाठी ने नेताजी के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर उसे व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे और नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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नेताजी और मजदूर आंदोलन: कोलियरी से क्रांति तक

नेताजी सुभाष चंद्र बोस और धनबाद का गुप्त मिशन: गोमो से आज़ादी की रणनीति कैसे बनी

✍️ अभिषेक यादव

भूमिका
23 जनवरी 1897 को जन्मे नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे नायक थे, जिनका जीवन साहस, त्याग और रणनीति का प्रतीक रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि झारखंड के धनबाद जिले का गोमो जंक्शन नेताजी के जीवन की एक ऐतिहासिक कड़ी है। यही वह स्थान है, जहां उन्हें आखिरी बार सार्वजनिक रूप से देखा गया था। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यहीं से नेताजी ने अंग्रेजों के खिलाफ अपने अंडरग्राउंड मिशन को धार दी थी।
📌 17 जनवरी 1941: जब गोमो बना आज़ादी की योजना का केंद्र
जनवरी 1941 का समय भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए निर्णायक था। अंग्रेज सरकार की कड़ी निगरानी के बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस कोलकाता से गुप्त रूप से निकल चुके थे। 17 जनवरी 1941 को वे अपने भतीजे डॉ. शिशिर बोस के साथ धनबाद के गोमो जंक्शन पहुंचे।
अंग्रेजों की नजर से बचने के लिए नेताजी सीधे स्टेशन से बाहर नहीं आए, बल्कि गोमो के हटियाटाड़ जंगल क्षेत्र में शरण ली। यह इलाका घना और अपेक्षाकृत सुरक्षित था, जहां स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों की मदद से गुप्त बैठक आयोजित की गई।

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🤝 गुप्त बैठक: आज़ादी की लड़ाई को मिली नई धार
इस ऐतिहासिक बैठक में स्वतंत्रता सेनानी अलीजान और प्रसिद्ध अधिवक्ता चिरंजीव बाबू शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य स्पष्ट था—
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की रणनीति बनाना।
यहीं से आगे चलकर नेताजी के जर्मनी, इटली और बाद में जापान जाने की योजना ने आकार लिया। यह बैठक केवल एक ठहराव नहीं थी, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक रणनीतिक मोड़ साबित हुई।
🛡️ स्थानीय लोगों की भूमिका: जोखिम में डाली जान
गोमो के स्थानीय निवासियों ने नेताजी की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई। उन्हें लोको बाजार स्थित कबीले वालों की बस्ती में ठहराया गया, जहां सीमित लोगों को ही इस बात की जानकारी थी कि उनके बीच देश का सबसे बड़ा क्रांतिकारी मौजूद है।
स्थानीय नागरिकों ने न केवल भोजन और आवास की व्यवस्था की, बल्कि अंग्रेज अधिकारियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी।

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🚆 18 जनवरी 1941: दिल्ली की ओर प्रस्थान
18 जनवरी 1941 को अलीजान और अधिवक्ता चिरंजीव बाबू की मदद से नेताजी को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इसके बाद उनका सफर भारत से बाहर तक गया, जिसने आगे चलकर आजाद हिंद फौज की नींव रखी।
📢 गोमो जंक्शन: जहां नेताजी को आखिरी बार देखा गया
कई प्रमाणित मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोमो जंक्शन वह अंतिम स्थान है जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत में सार्वजनिक रूप से देखा गया। इस ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्ष 2022 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था।
नेताजी के सम्मान में रेल मंत्रालय ने वर्ष 2009 में गोमो स्टेशन का नाम बदलकर

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो जंक्शन कर दिया।
⛏️ 1930 से 1941: धनबाद से नेताजी का गहरा जुड़ाव
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का धनबाद से रिश्ता केवल 1941 तक सीमित नहीं था।
1930 के दशक में उन्होंने:
देश का पहला रजिस्टर्ड टाटा कोलियरी मजदूर संगठन स्थापित किया
मजदूरों को संगठित कर उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक किया
स्वयं इस संगठन के अध्यक्ष रहे
यह पहल भारतीय श्रमिक आंदोलन के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।
🌺 आज भी जीवित हैं नेताजी की यादें
हर वर्ष 23 जनवरी को गोमो में नेताजी की जयंती विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
इस अवसर पर:
नेताजी एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर को सम्मानित किया जाता है
इंजन पर नेताजी की तस्वीर लगाकर ट्रेन को रवाना किया जाता है
यह परंपरा वर्षों से लगातार निभाई जा रही है

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🔎 निष्कर्ष
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और धनबाद का संबंध भारतीय इतिहास का वह अध्याय है, जो साहस, रणनीति और जनसहयोग का जीवंत उदाहरण है। गोमो जंक्शन केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि आज़ादी की उस गाथा का साक्षी है, जिसने भारत को स्वतंत्रता की राह पर और मजबूती से आगे बढ़ाया।

प्रदेश में जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों की बदहाली: बिहार से सीख ले उत्तर प्रदेश


✍️ वशिष्ठ सिंह (पूर्व प्रचार्य)

उत्तर प्रदेश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, तालाब सूख रहे हैं और सदियों पुराने कुएँ उपेक्षा के कारण जमींदोज़ हो रहे हैं। दूसरी ओर, पड़ोसी राज्य बिहार ने जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधन, विशेषकर कुओं के संरक्षण और सफाई, को लेकर एक सराहनीय पहल की है। यह समय है जब उत्तर प्रदेश सरकार को भी जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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📌 जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों की वर्तमान स्थिति
कभी गांवों और कस्बों की जीवनरेखा रहे कुएँ, बावड़ियाँ, तालाब और पोखरे आज बदहाली के शिकार हैं। शहरीकरण, अतिक्रमण और सरकारी उपेक्षा के चलते जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधन धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई कुएँ कचरे से पटे हैं, कहीं उनमें गंदा पानी भरा है, तो कहीं वे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। यह स्थिति न केवल जल संकट को बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी नुकसान पहुँचा रही है।
🌊 बिहार का मॉडल: एक सकारात्मक उदाहरण
बिहार सरकार ने हाल के वर्षों में जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। राज्य में—
पुराने कुओं की पहचान कर उनकी सफाई कराई गई
कुओं की मरम्मत और चारदीवारी बनाई गई
ग्रामीण समुदाय को जल संरक्षण से जोड़ा गया
मनरेगा और स्थानीय निकायों के माध्यम से कार्य कराया गया
इस प्रयास का परिणाम यह हुआ कि कई इलाकों में भूजल स्तर सुधरा और ग्रामीणों को पेयजल की स्थायी सुविधा मिली।

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🚰 उत्तर प्रदेश में उपेक्षा क्यों?
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधन आज भी नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता सूची में पीछे हैं। योजनाएँ कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर—
कुएँ पाट दिए जाते हैं
तालाबों पर कब्ज़ा हो जाता है
स्थानीय प्रशासन उदासीन रहता है
यदि समय रहते ठोस नीति नहीं बनी, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश गंभीर जल आपातकाल की ओर बढ़ सकता है।
🌱 पारंपरिक संसाधनों का वैज्ञानिक महत्व
कुएँ और तालाब केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि ये प्राकृतिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी हैं। वर्षा जल को जमीन में समाहित कर ये भूजल स्तर बनाए रखते हैं। जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधन आधुनिक तकनीकों से कहीं अधिक टिकाऊ और किफायती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन संसाधनों को पुनर्जीवित किया जाए तो—ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होगी
बिजली की बचत होगी
सूखे की समस्या घटेगी

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🏛️ सरकार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी
जल संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश में यदि जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों को बचाना है, तो—
ग्राम पंचायतों को अधिकार और बजट दिया जाए
स्कूलों और कॉलेजों में जल जागरूकता अभियान चलें
स्थानीय नागरिक निगरानी में भाग लें
बिहार की तर्ज पर जनभागीदारी से ही यह अभियान सफल हो सकता है।
🔍 समाधान और आगे की राह
उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि—
राज्य-स्तरीय जल संरक्षण नीति बनाए
सभी जिलों में पारंपरिक जल स्रोतों का सर्वे कराए
कुओं और तालाबों को अतिक्रमण-मुक्त करे
बजट और समयबद्ध कार्ययोजना लागू करे
यदि ये कदम उठाए जाते हैं, तो प्रदेश में जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधन फिर से जीवनदायी बन सकते हैं।

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🧭 निष्कर्ष
आज जब जल संकट वैश्विक चुनौती बन चुका है, तब उत्तर प्रदेश को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। बिहार ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और सही नीति से जल संरक्षण के पारंपरिक संसाधनों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। अब आवश्यकता है कि उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल के लिए संघर्ष न करना पड़े।

64वीं गीडा बोर्ड बैठक में औद्योगिक निवेश, भूमि आवंटन और विकास योजनाओं पर अहम निर्णय

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मंडलायुक्त सभागार में 64वीं गीडा बोर्ड बैठक का आयोजन मंडलायुक्त अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में गोरखपुर जनपद के औद्योगिक एवं शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों, औद्योगिक निवेश और भूमि आवंटन की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्धन, गीडा सीईओ अनुज मलिक, जीडीए सचिव पुष्प राज सिंह, गीडा ओएसडी अनुपम मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान गीडा सीईओ अनुज मलिक ने बोर्ड के समक्ष गीडा की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
सीईओ ने बताया कि बीते कार्यकाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गीडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि आवंटन किया गया है। सर्वाधिक भूमि औद्योगिक इकाइयों को आवंटित की गई, जिससे रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिली है। लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न सेक्टरों में भू-खंड उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि गीडा में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, आईटी एवं सहायक सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को भी भूमि आवंटित की गई है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है और गोरखपुर में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। साथ ही गीडा क्षेत्र में सड़क, जलापूर्ति, विद्युत, ड्रेनेज और सुरक्षा व्यवस्था जैसी आधारभूत सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
बैठक में मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने निर्देश दिए कि भूमि आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो तथा आवंटित भूमि पर निर्धारित अवधि में औद्योगिक गतिविधियां शुरू कराई जाएं। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने गीडा के समग्र विकास पर जोर देते हुए कहा कि उद्योगों के साथ-साथ श्रमिकों और आम नागरिकों की सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाए।
गीडा बोर्ड बैठक में भविष्य की कार्ययोजनाओं, नए निवेश प्रस्तावों और गोरखपुर को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक के अंत में अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए गोरखपुर के औद्योगिक विकास को नई गति देने के निर्देश दिए गए।