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अंतरराष्ट्रीय पहचान से चमकेगा बलिया का सुरहा ताल, जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार बना रामसर साइट बलिया(राष्ट्र क़ी परम्परा )

जनपद बलिया के प्रसिद्ध जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। इसे विश्व प्रसिद्ध रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है। इस मान्यता के बाद सुरहा ताल को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड इस आर्द्रभूमि को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक विकसित करने में जुटे हैं। सुरहा ताल के निकट स्थित मैरीटार गांव में लगभग 4.99 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत ओपन एयर थिएटर, आकर्षक पाथवे, हॉर्टिकल्चर विकास, साइनेज, चिल्ड्रेन एरिया, मल्टीपर्पज हॉल, घाट सौंदर्यीकरण, बर्ड वाचिंग टावर, कियोस्क, इंटरप्रिटेशन गैलरी तथा बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सुरहा ताल अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से हजारों प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा अनेक स्थानीय पक्षियों का भी यह सुरक्षित आवास स्थल है। रामसर साइट का दर्जा मिलने से इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन को और मजबूती मिलेगी।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में अब 13 रामसर साइट्स हो गई हैं और भारत की 100वीं रामसर साइट बनने का गौरव सुरहा ताल को मिला है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल विदेशी और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। नाव संचालन, गाइड सेवा, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।गौरतलब है कि रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इस वर्ष फरवरी से अब तक उत्तर प्रदेश की तीन आर्द्रभूमियों—एटा का पटना पक्षी विहार, अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार और अब बलिया का सुरहा ताल—को रामसर साइट का दर्जा मिल चुका है।सुरहा ताल को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल बलिया बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यटन एवं पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।

rkpNavneet Mishra

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