— डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
गाँधी कहूँ या सुभाष कहूँ,
या कहूँ वीर जवाहर तैने।
इस उम्र में भी प्रशंसा-पत्रों
की लगा दी लंबी कतार तैने।
उठो और सुनाओ, ए.पी.एस.
डायरेक्टर को अपनी यह गाथा।
इस बुढ़ापे में भी कर रहे हो,
ए.पी.एस. कोर का ऊँचा माथा।
ऐसी प्रशस्ति भेजी है अभिन्न
मित्र कर्नल धर्मपाल बरक ने,
हरियाणवी बोली कितनी प्यारी,
क्या सुंदर शब्द चुने मित्र ने।
बस सादर धन्यवाद, आभार यही,
आदित्य का हृदय स्रोत गदगद है।
मित्रों का प्रोत्साहन, संग मिला,
कर्मपथ पर बढ़ने का हौसला है।
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