
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार लगातार जारी है। मिशन निदेशक और मुख्य चिकित्साधिकारी कुशीनगर की ओर से जारी सख्त आदेशों के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की बात कही जा रही है। वहीं, अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने की पहल की है।एनएचएम कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार को देखते हुए अधिकारियों की ओर से अब तक तीन आदेश जारी किए गए हैं। पहला आदेश मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने आठ अक्टूबर को जारी किया, जिसमें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। दूसरा आदेश नौ अक्टूबर को सीएमओ कुशीनगर की ओर से जारी किया गया, जिसमें सात दिन से अधिक समय से अनुपस्थित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर उनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा टीकाकरण सत्रों के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का भी आदेश जारी हुआ है। हालांकि, इन आदेशों का कर्मचारियों के आंदोलन पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है।एनएचएम कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि सभी एनएचएम संवर्ग के कर्मचारियों ने अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनका हक चाहिए, भीख नहीं। प्रशासन की ओर से कार्रवाई, निलंबन या बर्खास्तगी की धमकियों से कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं हैं।मंडल अध्यक्ष गोरखपुर एवं जिला संरक्षक चन्द्रशेखर यादव लड्डू ने कहा कि कर्मचारियों को समय से वेतन देने के लिए बजट की समस्या बताई जाती है, लेकिन कार्रवाई की चेतावनी वाले पत्र तत्काल जारी कर दिए जाते हैं। उन्होंने इसे संविदा कर्मचारियों के साथ भेदभाव बताते हुए कहा कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा का स्थायीकरण शामिल है।उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर से प्रदेशभर के एक लाख से अधिक एनएचएम कर्मचारी लखनऊ के इको गार्डन में आंदोलन करेंगे। जब तक मांगों के संबंध में आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति का समाधान नहीं होने पर आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।आंदोलन के लिए गठित की गईं तीन टीमें12 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन को सफल बनाने के लिए कुशीनगर में ए, बी और सी टीमों का गठन किया गया है। ए टीम में जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है, जिसका नेतृत्व जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार पाण्डेय और जिला महामंत्री राजू यादव कर रहे हैं। वहीं, बी और सी टीमों में जिले के सभी ब्लॉकों के प्रमुख साथियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।संघ की ओर से बताया गया कि तीनों टीमें अलर्ट मोड में रहेंगी। आंदोलन की रणनीति के तहत पहले ए टीम, फिर बी टीम और उसके बाद सी टीम सक्रिय होकर अभियान को आगे बढ़ाएगी। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
