राज्यसभा चुनाव के नतीजों से बदली सियासी तस्वीर! भाजपा की बड़ी बढ़त, यूपी में बसपा का प्रतिनिधित्व खत्म

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 10 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) को दो सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी। खास बात यह रही कि सभी 12 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जिसके चलते उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ी। उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत, सपा ने भी बचाई अपनी जमीन उत्तर प्रदेश की सभी 10 राज्यसभा सीटों पर शुक्रवार को निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की गई। भाजपा के आठ उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें गईं। भाजपा की ओर से गोपी कृष्ण पांडेय, धर्मपाल सिंह, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, राम प्रताप सिंह, विद्यासागर सोनकर और श्रुति गंगवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। वहीं, समाजवादी पार्टी के धनराज नथवानी और रामगोपाल यादव ने राज्यसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। इस परिणाम का एक अहम राजनीतिक पहलू बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से भी जुड़ा है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है। इसे प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उत्तराखंड में भाजपा उम्मीदवार की निर्विरोध जीत उत्तराखंड में भाजपा उम्मीदवार दिनेश कुमार आर्य राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। इस सीट पर किसी अन्य प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। नाम वापसी की अंतिम तारीख तक कांग्रेस या किसी अन्य दल की ओर से भी कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं आया। इसके बाद विधानसभा के निर्वाचन अधिकारी हेम चंद्र पंत ने आर्य को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंपा। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को सफलता पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की एक सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार रुक्मिणी मलिक, जिन्हें कोयल मलिक के नाम से भी जाना जाता है, निर्विरोध निर्वाचित हुईं। बंगाली फिल्म जगत से जुड़ी कोयल मलिक ने उपचुनाव से पहले भाजपा का दामन थामा था। यह सीट तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा पहुंचने के बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई थी। तीन राज्यों के नतीजों ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश तीनों राज्यों के परिणामों में भाजपा ने 12 में से 10 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस का खाता नहीं खुला। उत्तर प्रदेश में भाजपा की आठ सीटों पर जीत और बसपा के प्रतिनिधित्व का समाप्त होना राज्य की राजनीति के लिहाज से खास महत्व रखता है। निर्विरोध निर्वाचन ने जहां मतदान की नौबत टाल दी, वहीं इन नतीजों ने विभिन्न दलों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को भी रेखांकित किया है। नोट: निर्विरोध निर्वाचन का अर्थ है कि उम्मीदवारों के मुकाबले कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं बचा या चुनावी प्रक्रिया में मुकाबला नहीं हुआ। इसे सीधे जनता के मतदान से मिली जीत के समान नहीं माना जाना चाहिए।